*श्रीमद्भागवत कथा में कृष्णजन्म की कथा सुन झूम उठे श्रोता*
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खजनी गोरखपुर।कस्बे के निकट बरी बंदुआरी गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन अयोध्या से पधारे कथाव्यास अखिलेशानंद ने कृष्ण जन्म की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि देवताओं द्वारा हुई आकाशवाणी से कंस को जब पता चला कि उसकी प्रिय बहन देवकी की आठवीं संतान ही उसकी मृत्यु का कारण बनेगी, तो भयभीत कंस ने वसुदेव और देवकी को कारागार में बंदी बना लिया। कंस ने एक-एक कर अपनी बहन की सात संतानों की जन्म लेते ही हत्या कर दी। आठवीं संतान के रूप में मध्यरात्रि में प्रभु श्रीकृष्ण का प्राकट्य होते ही वसुदेव- देवकी की बेड़ियां और कारागृह के ताले खुल गए रक्षक गहरी नींद में सोते रहे। वसुदेव ने भगवान कृष्ण को उफनती यमुना नदी को पार कराते हुए गोकुल नंदभवन में पहुंचाया और वहां से उनकी नवजात कन्या को लेकर पुनः मथुरा आ गए। कंस ने शिला पर पटक कर जैसे ही कन्या का वध करने के लिए उद्धृत हुआ योगमाया का स्वरूप वह कन्या कंस के हांथ से छूटकर आकाश में विलीन हो गई और एक बार पुनः आकाशवाणी हुई कि रे पापी कंस तुझे मारने वाला वसुदेव-देवकी की आठवीं संतान के रूप में जन्म ले चुका है। कृष्ण जन्म की कथा का विस्तार सहित भावपूर्ण वर्णन करते हुए कथा व्यास ने उपस्थित श्रद्धालु श्रोताओं को बताया कि गोकुल में नंदभवन में उत्सव और बधाई गीत शुरू हो गया। उन्होंने बताया कि भक्त की सच्ची आस्था, विश्वास और प्रबल श्रद्धा हो तो प्रभु की कृपा से संसार में भक्तों के सभी प्रकार के कष्ट स्वत: दूर हो जाते हैं। इस दौरान कथा पांडाल में कृष्णजन्म की मनमोहक झांकी सजाई गई। भक्ति भजनों बधाई गीत एवं पारंपरिक सोहर गीत की धुनों पर श्रद्धालु श्रोता झूमते रहे। इससे पूर्व उन्होंने भगवान राम के अवतार की कथा सुनाई। लोगों ने श्रद्धापूर्वक भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया।
इस दौरान मुख्य यजमान विष्णुदेव त्रिपाठी, कंचन त्रिपाठी, दुर्गेश मिश्रा, बृजेश त्रिपाठी, शैलेश त्रिपाठी, गगन त्रिपाठी, संतोष त्रिपाठी, बद्री प्रसाद त्रिपाठी, हौसला त्रिपाठी, दिलीप त्रिपाठी, गोरख राम त्रिपाठी, गुलाब शुक्ला, तारकेश्वर त्रिपाठी, राजेंद्र सेठ, वशिष्ठ त्रिपाठी, जनार्दन त्रिपाठी, संजय वर्मा समेत दर्जनों लोग मौजूद रहे।
Mar 25 2025, 20:11