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आखिर पूरी हुई मुरादः बैंकॉक में पीएम मोदी से मिले मोहम्मद यूनुस, जानें क्या हुई बात?

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बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में मुलाकात हुई है। पिछले साल अगस्त में प्रधानमंत्री शेख हसीना को हटाए जाने के बाद यह उनकी पहली मुलाकात थी। बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद मोहम्मद यूनुस को अंतरिम सरकार का प्रशासक नियुक्त किया गया था। ऐसे में दोनों नेताओं की यह बैठक काफी अहम मानी जा रही है।

पीएम मोदी और यूनुस बिम्सटेक के शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने बैंकॉक पहुंचे हैं। इसी दौरान विम्सटेक से इतर दोनों नेताओं ने मुलाकात की। हालांकि, दोनों नेताओं के बीच की मुलाकात में वो बात नजर नहीं आई, जैसे मोदी के दूसरे वैश्विक नेताओं के साथ मुलाकात के दौरान देखी जाती है। पीएम मोदी अक्सर वैश्विक नेताओं से गर्मजोशी से मिलते हैं। लेकिन मोहम्मद यूनुस के साथ बैठक के दौरान ये गर्मजोशी नहीं दिख रही थी।

पीएम मोदी और मोहम्मद यूनुस के मुलाकात के वीडियो में दिख रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी से मिलने के लिए जब मोहम्मद यूनुस आ रहे होते हैं, तो पीएम मोदी पहले भारतीय परंपरा को दर्शाते हुए हाथ जोड़कर अभिनंदन करते हैं और मोहम्मद यूनुस के पहुंचने के बाद उनसे हाथ मिलाते हैं।

वहीं, दूसरे विदेशी नेताओं से मुलाकात के वक्त प्रधानमंत्री मोदी का हावभाव काफी अलग रहता है। किसी दूसरे नेता से मिलते वक्त प्रधानमंत्री मोदी को खुद आगे बढ़कर उनका स्वागत करते हुए देखा गया है। इस दौरान वो उनसे गले भी मिलते हैं और भारी मुस्कुराहट के साथ उनका स्वागत करते हैं। लेकिन मोहम्मद यूनुस के साथ मुलाकात के दौरान ऐसा कुछ नहीं दिखा।

यूनुस और मोदी के बीच मुलाकात के दौरान क्या बातचीत हुई है, इसकी जानकारी अभी तक सामने नहीं आई है। इस मुलाकात में दोनों देशों के शीर्ष राजनयिक भी मौजूद थे। ऐसे में माना जा रहा है कि ये बातचीत समसमायिक मुद्दे और दोनों देशों के व्यापार समझौते को लेकर हो सकता है।

दरअसल, शेख हसीना सरकार के सत्ता से बाहर हो जाने के बाद भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में काफी कड़वाहट आ चुकी है। मोहम्मद यूनुस के शासन में बांग्लादेश में रह रहे अल्पसंख्यकों (हिंदुओं) पर अत्याचार के कई मामले सामने आ चुके हैं। बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमले को लेकर खुद पीएम मोदी ने चिंता जताई है।

वहीं, बांग्लादेश ने भारत को दरकिनार कर पाकिस्तान और चीन से रिश्तों को प्रगाढ़ किया है। पिछले हफ्ते ही जब मोहम्मद यूनुस बीजिंग में थे तो उन्होंने एंटी-इंडिया बात करते हुए खुद को बंगाल की खाड़ी का गार्जियन बताया था। पिछले हफ्ते चीन की अपनी यात्रा के दौरान यूनुस ने बीजिंग से बांग्लादेश में अपना आर्थिक प्रभाव बढ़ाने का आग्रह किया और विवादास्पद रूप से उल्लेख किया कि भारत के पूर्वोत्तर राज्यों का भूमि से घिरा होना एक अवसर साबित हो सकता है।

महाराष्ट्र से होगा पीएम मोदी का उत्तराधिकारी? शिवसेना यूबीटी नेता संजय राउत का दावा

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रविवार को नागपुर में आरएसएस मुख्यालय पहुंचे थे। पीएम नरेंद्र मोदी के आरएसएस हेडक्‍वार्टर जाने के एक दिन बाद उद्धव ठाकरे की शिवसेना के नेता संजय राउत ने मोदी की रिटायरमेंट को लेकर बड़ा दावा किया है। संजय राउत ने कहा कि पीएम मोदी इस साल 75 साल के होने जा रहे हैं लिहाजा अपने रिटायरमेंट प्‍लान के बारे में चर्चा करने के लिए संघ के मुख्‍यालय गए थे। राउत ने दावा करते हुए कहा कि संघ तय करेगा कि पीएम नरेंद्र मोदी का उत्‍तराधिकारी कौन होगा। उन्‍होंने ये भी कहा कि मोदी का उत्‍तराधिकारी महाराष्‍ट्र से होगा।

संजय राउत ने मुंबई में मीडिया से बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समय अब पूरा हो गया है। अब आरएसएस भी बदलाव चाहते है और बीजेपी के अगले अध्यक्ष को भी चुनना चाहता है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी पिछले 10-11 सालों में आरएसएस मुख्यालय नहीं गए थे, अब वहां मोहन भागवत को टाटा, बाय-बाय कहने गए थे। उन्होंने दावा किया कि आरएसएस भी देश के नेतृत्व में बदलाव चाहता है, इसलिए पीएम मोदी को बुलाया गया था।

संजय राउत ने कहा कि 10 साल बाद मोदी का नागपुर जाकर सरसंघचालक से मिलना कोई साधारण बात नहीं है। सितंबर में रिटायरमेंट का आवेदन लिखने के लिए शायद वे आरएसएस मुख्यालय गए थे। मेरी जो जानकारी है कि पिछले 10-11 सालों में मोदी जी कभी वहां नहीं गए। इस बार मोदी जी बताने के लिए गए थे कि वे मोहन भागवत जी से कहने जा रहे हैं कि वे टाटा-बाय-बाय कर रहे हैं।

नए नेता संभवतया महाराष्‍ट्र से होगा

संजय राउत ने कहा कि बंद दरवाजे के भीतर क्‍या चर्चाएं हुईं ये तो संभवतया बाहर नहीं आएंगी लेकिन कई संकेतों से इस बात का इशारा मिलता है। उन्‍होंने कहा कि नए नेता का चुनाव संघ करेगा और संभवतया वो महाराष्‍ट्र से होगा।

राउत के दावे पर सीएम फडणवीस का बयान

बीजेपी के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने संजय राउत के दावों को गलत बताया है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी कई सालों तक देश का नेतृत्व करते रहेंगे। फडणवीस ने कहा कि 2029 में हम मोदी को फिर से प्रधानमंत्री के रूप में देखेंगे। उनके उत्तराधिकारी को खोजने की कोई जरूरत नहीं है। वह (मोदी) हमारे नेता हैं और बने रहेंगे। हमारी संस्कृति में, जब पिता जीवित है, तो उत्तराधिकार के बारे में बात करना अनुचित है। वह मुगल संस्कृति है। इस पर चर्चा करने का समय नहीं आया है।

पीएम मोदी ने आरएसएस की जमकर की तारीफ

बता दें कि इतिहास में यह दूसरी बार है जब किसी प्रधानमंत्री ने आधिकारिक तौर पर आरएसएस मुख्यालय का दौरा किया है। इससे पहले अटल बिहारी वाजपेयी ने 2000 में अपने तीसरे कार्यकाल के दौरान नागपुर पहुंचे थे। अपनी यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि जो विचारधारा का बीज 100 साल पहले बोया गया था, वह एक विशाल पेड़ बन गया है। आरएसएस के सिद्धांतों और मूल्यों ने इसे महान ऊंचाइयों तक पहुंचाया है, जिसमें लाखों कार्यकर्ता इसकी शाखाएं हैं।

गोधरा के बाद हुए दंगों को पीएम मोदी ने बतया 'अकल्पनीय त्रासदी', जानें आरएसएस और महात्मा गांधी पर क्या कहा?

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भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी पॉडकास्टर लेक्स फ्रीडमैन के यूट्यूब चैनल पर एक पॉडकास्ट के लिए इंटरव्यू दिया है। पीएम मोदी ने पॉडकास्टर लेक्स फ्रिडमैन से विस्तार से बात की। उन्होंने अपनी बातचीत में गोधरा कांड को 'अकल्पनीय त्रासदी' बताया। तीन घंटे लंबे साक्षात्कार में, पीएम मोदी से गुजरात में 2002 के दंगों के बारे में पूछा गया और उनसे क्या सबक सीखा गया। पीएम मोदी ने बताया कि धारणा के विपरीत, जो दंगे हुए, वे गुजरात में देखे गए सबसे बुरे दंगे नहीं थे। न ही उसके बाद से राज्य में कोई सांप्रदायिक तनाव हुआ है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि शपथ लेने के बाद मैं पहले ही दिन से इसके लिए काम में जुट गया। मैं एक ऐसा व्यक्ति हूं जिसका 'सरकार' नाम के साथ रिश्ता नहीं रहा था, सरकार क्या होती है मैं जानता नहीं था। मैं 24 फरवरी 2002 को पहली बार विधायक बना। मेरी सरकार 27 फरवरी 2002 को बजट पेश करने वाली थी और उसी दिन हमें गोधरा ट्रेन हादसे की सूचना मिली। यह बहुत गंभीर घटना थी। लोगों को जिंदा जला दिया गया था। आप कल्पना कर सकते हैं कि पिछली सभी घटनाओं के बाद स्थिति कैसी रही होगी। जो कहते थे कि यह बहुत बड़ा दंगा है, यह भ्रम फैलाया गया है।

पीएम मोदी ने कहा कि साल 2002 से पहले गुजरात में 250 से ज्यादा बड़े दंगे हुए थे। साल 1969 के दंगे करीब 6 महीने तक चले थे। यह धारणा कि ये अब तक के सबसे बड़े दंगे थे, गलत जानकारी है। अगर आप 2002 से पहले के आंकड़ों को देखें, तो आप पाएंगे कि गुजरात में अक्सर दंगे होते थे। कहीं न कहीं लगातार कर्फ्यू लगा रहता था। पतंगबाजी प्रतियोगिताओं या साइकिल की छोटी-मोटी टक्कर जैसी मामूली बातों पर भी सांप्रदायिक हिंसा भड़क जाती थी। प्रधानमंत्री ने स्वीकार किया कि गोधरा ट्रेन कांड के बाद कुछ लोग हिंसा की ओर बढ़े। उन्होंने कहा कि केंद्र में सत्ता में बैठे उनके विरोधियों ने उनकी सरकार पर आरोप लगाने की कोशिश की। हालांकि, न्यायपालिका ने स्थिति का विश्लेषण करने के बाद उन्हें निर्दोष पाया

आरएसएस और महात्मा गांधी पर क्या बोले?

इंटरव्यू के दौरान पीएम मोदी ने आरएसएस के बारे में विस्तार से बात की। उन्होंने कहा, संघ एक बड़ा संगठन है। उसके 100 साल पूरे हो रहे हैं। दुनिया में इतना बड़ा स्वयंसेवी संगठन कहीं होगा? करोड़ों लोग उसके साथ जुड़े हुए हैं। संघ को समझना इतना सरल नहीं है। संघ के काम को समझना चाहिए। संघ जीवन के उद्देश्य को दिशा देता है।

पीएम मोदी ने कहा, संघ के कुछ स्वयंसेवक जंगलों में वनवासी कल्याण आश्रम चलाते हैं। आदिवासियों के बीच वह एकल विद्यालय चला रहे हैं। अमरीका में कुछ लोग हैं जो इन्हें 10 से 15 डॉलर का दान देते हैं। ऐसे 70 हजार विद्यालय चल रहे हैं। इसी तरह से शिक्षा में क्रांति लाने के लिए विद्या भारती नाम का संगठन खड़ा किया गया। देश में उनके करीब 25 हजार स्कूल चलते हैं।

संघ के सेवा भाव ने मुझे गढ़ने में मदद की-पीएम मोदी

पीएम मोदी ने भारतीय मज़दूर संघ की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि 'वामपंथी मजदूर संघ कहते हैं, दुनिया के मजदूरों, एक हो जाओ। आरएसएस की शाखा से निकले लोग जो मजदूर संघ चलाते हैं वह कहते हैं,'मजदूरों, दुनिया को एक करो'। दो शब्दों में ही बदलाव है लेकिन वैचारिक बदलाव बड़ा है। संघ के सेवा भाव ने मुझे गढ़ने में मदद की है।

महात्मा गांदी के बारे में क्या कहा?

पीएम मोदी ने इंटरव्यू में बताया कि महात्मा गांधी का प्रभाव आज भी किसी न किसी रूप भारतीय जीवन पर दिखता है। उन्होंने कहा, आजादी की बात करें तो यहां लाखों वीरों ने बलिदान किया। जवानी जेलों में खपा दी। ये आते थे और देश के लिए शहीद हो जाते थे। परंपरा बनी रही और उसने एक वातावरण भी बनाया लेकिन गांधी ने जन आंदोलन खड़ा किया। उन्होंने हर काम को आजादी के रंग से रंग दिया। अंग्रेजों को कभी अंदाजा भी नहीं था दांडी यात्रा एक बहुत बड़ी क्रांति खड़ा कर देगी।

पीएम मोदी ने कहा कि उन्होंने सामूहिकता का भाव जो जगाया और जनशक्ति के सामर्थ्य को पहचाना। मेरे लिए आज भी वह उतना ही महत्वपूर्ण है। मैं जो भी काम करता हूं। मेरी कोशिश रहती है कि जनसामान्य को जोड़ करके करूं।

पॉडकास्ट में पीएम मोदी ने पाकिस्तान को बताया धोखेबाज, जानें चीन और अमेरिका को लेकर क्या कहा?

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अमेरिकन एआई रिसर्चर लेक्स फ्रिडमैन के साथ 3 घंटे का पॉडकास्ट रिलीज किया। पीएम ने पाकिस्तान, चीन, ट्रम्प, विश्व राजनीति, खेल, राजनीति और आरएसएस समेत निजी जीवन से जुड़े सवालों के जवाब दिए। पीएम ने पाकिस्तान को लताड़ लगाते हुए कहा कि वहां से हमेशा धोखा ही मिला। साथ ही उन्होंने चीन-भारत के रिश्तों और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनकी दोस्ती को लेकर भी कई बातें कही है।

पाकिस्तान पर खूब बरसे पीएम मोदी

पड़ोसी देश पाकिस्तान के बारे में पीएम मोदी ने कहा, दुनिया में कहीं भी आंतकवाद की घटना घटती है। सूत्र कहीं न कहीं पाकिस्तान जाकर अटकते हैं। उन्होंने कहा, अमेरिका में 9/11 की इतनी बड़ी घटना घटी। उसका मेन सूत्रधार ओसामा बिन लादेन आखिर में कहां से मिला? पाकिस्तान में शरण लेकर बैठा था।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, पाकिस्तान सिर्फ भारत के लिए नहीं दुनियाभर के लिए परेशानी का केंद्र बन चुका है। हम लगातार उसको कहते रहे हैं कि इस रास्ते से किसका भला होगा। आप आतंकवाद के रास्ते को छोड़ दीजिए। स्टेट स्पॉन्सर्ड आतंकवाद बंद होना चाहिए।

फ्रीडमैन के साथ बातचीत में उन्होंने कहा, शांति के प्रयासों के लिए मैं खुद लाहौर चला गया था। प्रधानमंत्री बनने के बाद मैंने अपने शपथ ग्रहण समारोह में पाकिस्तान को खास तौर से आमंत्रित किया था ताकि एक शुभ शुरुआत हो। हर बार अच्छे प्रयासों का परिणाम नकारात्मक निकला। हम आशा करते हैं कि उनको सद्बुद्धि मिले।

चीन पर पीएम ने कही हैरान करने वाली बात

भारत चीन संबंधों पर भी पीएम मोदी ने खुलकर अपनी बात रखी। पीएम मोदी ने कहा, भारत और चीन का संबंध आज का नहीं है। मॉडर्न वर्ल्ड में भी हम लोगों की भूमिका है। इतिहास को देखें तो भारत और चीन सदियों तक एक-दूसरे से सीखते रहे हैं। साल 1975 के बाद पहली बार दोनों देशों के बीच टकराव ने संघर्ष का रूप ले लिया। इस संघर्ष में दोनों पक्षों के जवान मारे गए थे। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ अपनी बैठक का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कु राष्ट्रपति शी के साथ मेरी बैठक के बाद हमने सीमा पर सामान्य स्थिति की वापसी देखी है। हम 2020 से पहले के स्तर पर स्थितियों को बहाल करने के लिए काम कर रहे हैं। विश्वास में समय लगेगा, लेकिन हम बातचीत के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने संघर्ष के बजाय स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की आवश्यकता पर भी जोर दिया। 21वीं सदी एशिया की सदी है। भारत और चीन को स्वाभाविक रूप से प्रतिस्पर्धा करनी चाहिए, टकराव नहीं।

ट्रंप में खुद निर्णय लेने की क्षमता- पीएम मोदी

इस पॉडकास्ट में पीएम मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि कैसे ट्रंप ने उनकी दोस्ती गहरी हो गई। पीएम मोदी ने 2019 के अमेरिकी दौरे को याद करते हुए कहा, हाउडी मोदी कार्यक्रम जब मैं मंच पर बोल रहा था तो ट्रंप मुझे सुन रहे थे। भाषण खत्म करके जब मैं उनके पास गया और कहा कि हम साथ में स्टेडियम का चक्कर लगाते हैं तो वह तुरंत तैयार हो गए और मेरे साथ चल पड़े। ऐसा करना आसान नहीं था क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा को लेकर कई प्रोटोकॉल होते हैं। इस समय मैंने समझा कि ट्रंप में खुद निर्णय लेने की क्षमता है। मैं भारत फर्स्ट वाला हूं वो अमेरिका फर्स्ट वाले हैं।

*Vision 2028 resumes with U-19, U-15 girls’ camp*

Sports

Khabar kolkata sports Desk: The third phase of Vision 2028 got underway today at the JU 2nd Campus Ground, Salt Lake, with the Bengal Under-19 girls attending the first session of the camp that ends on March 24.

While Bengal’s Manoj Tiwary will be the batting coach, the bowling department will be guided by former India pacer Venkatesh Prasad along with Bengal’s Ashok Dinda and spin bowling will be taken care of by Narendra Hirwani. Former India and Bengal women's cricketer Purnima Chowdhury will also guide the girls.

The third phase of the camp is divided into two sessions every day. The first half will be attended by the U19 girls and the second by the U15 girls.

The opening day’s session began with Prasad, Hirwari and Tiwary delivering inspirational and motivation words to the young girls. The trio told the girls to use the camp as a learning experience.

After a brief introduced by the girls, the batters took their stance at the crease and the bowlers prepared for their run-up, by practicing their bowling action. The coaches looked at the proceedings and watched the girls’ practice with hawk eyes. As the session went on, the coaches talked to the talents individually.

The short-term goal of Vision 2028 will be to get the various age group squads ready for the domestic season by improving their skills while the long-term goals will be to nurture the future talents and make them fit for various Bengal age group squads.

20 U19 girls and 23 U15 girls are attending the camp.

Pic Courtesy by: CAB

जिन्हें किसी ने नहीं पूछा, उन्हें मोदी ने पूजा है', ग्रामीण भारत महोत्सव में बोले पीएम मोदी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की राजधानी में स्थित भारत मंडपम में 'ग्रामीण भारत महोत्सव 2025' का उद्घाटन किया। ये कार्यक्रम 9 जनवरी तक चलेगा। इस दौरान उन्होंने इस महोत्सव में शामिल कलाकारों और कारीगरों से बातचीत की। इस अवसर पर पीएम मोदी ने कहा कि विकसित भारत के लिए गांवों का समृद्ध होना जरूरी है। गांव आत्मनिर्भर होगा तभी देश आत्मनिर्भर होगा। साल 2014 से ही केंद्र सरकार लगातार, हर पल ग्रामीण भारत की सेवा में लगी हुई है। इसके परिणाम भी नजर आ रहे हैं, क्‍योंकि जब इरादे नेक होते हैं तो नतीजे भी संतोष देने वाले होते हैं।

गांव के लोगों को गरिमापूर्ण जीवन देना सरकार की प्राथमिकता-पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कहा, गांव के लोगों को गरिमापूर्ण जीवन देना मेरी सरकार की प्राथमिकता है। हमारा विजन है, भारत के गांव के लोग सशक्त बनें, उन्हें गांव में ही आगे बढ़ने के ज्यादा से ज्यादा अवसर मिले, उन्हें पलायन न करना पड़े, गांव के लोगों का जीवन आसान हो, इसलिए हमने गांव-गांव में मूलभूत सुविधाओं की गारंटी का अभियान चलाया। पीएम मोदी ने कहा कि जो गांव में जिया है वो गांव को जीना जानता है। मैने गांव में भी जिया है और गांव के संभावनाओं को भी देखा है। गांव में विविधताओं से भरा सामर्थ्य होता है।

ग्रामीणों की क्रय शक्ति करीब तीन गुना बढ़ी-पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कहा कि हाल ही में एक अहम सर्वे हुआ है, जिसमें पता चला कि साल 2011 की तुलना में अब ग्रामीणों की क्रय शक्ति करीब तीन गुना बढ़ गई है। अब गांव के लोग पहले की तुलना में ज्यादा खर्च कर रहे हैं। आजादी के बाद देश के ग्रामीण खाने पर 50 प्रतिशत आमदनी खर्च कर रहे थे। यह पहली बार है कि यह दर 50 फीसदी तक घट गई है।

पूर्व की सरकारों पर बोला हमला

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पूर्व की सरकारों ने दलितों, जनजातियों और पिछड़े वर्ग के लोगों की परेशानियों पर ध्यान नहीं दिया, जिसके चलते गांवों से पलायन हुआ और गरीबी बढ़ी। गांवों और शहरों में लगातार अंतर बढ़ रहा है। 'जिन्हें किसी ने नहीं पूछा, उन्हें मोदी ने पूजा है'। जिन इलाकों को विकास से वंचित रखा गया, अब वहां समान अधिकार मिल रहे हैं। कल ही स्टेट बैंक ने रिपोर्ट जारी की है, जिसके अनुसार, साल 2012 में भारत में ग्रामीण इलाकों में गरीबी 26 प्रतिशत थी, लेकिन 2024 में यह घटकर पांच प्रतिशत से भी कम रह गई है।'

ग्रामीणों के लिए बनाई गई योजनाओं की दी जानकारी

पीएम मोदी ने केंद्र की ग्रामीणों के लिए बनाई गई योजनाओं की जानकारी देते हुए कहा, 'हमारी सरकार ने गांव के हर वर्ग के लिए विशेष नीतियां बनाई हैं। दो-तीन दिन पहले ही कैबिनेट ने 'पीएम फसल बीमा योजना' को एक वर्ष अधिक तक जारी रखने की मंजूरी दे दी है। दुनिया में डीएपी का दाम बढ़ रहा है, आसमान छू रहा है, लेकिन हमने निर्णय किया कि हम किसान के सिर पर बोझ नहीं आने देंगे और सब्सिडी बढ़ाकर डीएपी का दाम स्थिर रखा है। हमारी सरकार की नीयत, नीति और निर्णय ग्रामीण भारत को नई ऊर्जा से भर रहे हैं।

नरेंद्र मोदी का ईसाई समुदाय के साथ संबंध: क्रिसमस पर समावेशिता की ओर एक संदेश

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नरेंद्र मोदी का भारतीय ईसाई समुदाय के साथ एक जटिल संबंध है, जो उनके राजनीतिक कृत्यों, सार्वजनिक बयानों और उस व्यापक सामाजिक-राजनीतिक संदर्भ से आकारित हुआ है, जिसमें वह कार्य करते हैं।

प्रारंभिक वर्ष और राजनीतिक करियर:

नरेंद्र मोदी, 2001 से 2014 तक गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में, कुछ ईसाई समूहों से आलोचना का सामना कर चुके हैं, विशेष रूप से 2002 के गुजरात दंगों के बाद। इन दंगों में व्यापक हिंसा हुई थी, जिसमें अल्पसंख्यकों, खासकर मुसलमानों और ईसाई समुदाय के खिलाफ साम्प्रदायिक हमलों का आरोप था। जबकि मोदी के नेतृत्व में दंगों के दौरान आलोचना हुई और यह आरोप लगाया गया कि उन्होंने हिंसा पर काबू पाने में लापरवाही बरती या इसमें उनकी सहमति थी, लेकिन अदालतों ने उन पर किसी तरह का दोष नहीं तय किया। हालांकि, उनके आलोचक यह मानते हैं कि उनकी भाजपा में उभरती हुई भूमिका हिंदू राष्ट्रीयता (हिंदुत्व) के विचारों से जुड़ी है, जिसे कुछ लोग धार्मिक अल्पसंख्यकों, जैसे कि ईसाईयों, के लिए पूरी तरह समावेशी नहीं मानते।

प्रधानमंत्री बनने के बाद और धार्मिक समावेशिता:

2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद से मोदी ने एक ऐसे नेतृत्व की छवि पेश करने की कोशिश की है, जो भारत के सभी धार्मिक समुदायों, जिसमें ईसाई भी शामिल हैं, के लिए काम करता हो। उनके भाषणों में अक्सर एकता, विकास और धार्मिक सहिष्णुता की बातें होती हैं। उदाहरण के तौर पर, उन्होंने धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की कड़ी निंदा की है और क्रिसमस जैसे प्रमुख धार्मिक त्योहारों पर ईसाई समुदाय को शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने ट्विटर पर एक संदेश भेजा था, जिसमें शांति, भाईचारे और प्रेम के महत्व पर जोर दिया गया था।

ईसाइयों से संबंधित नीतियाँ:

हालांकि उन्होंने समावेशिता की बात की है, मोदी के कार्यकाल में कुछ नीतियाँ ईसाई समूहों के बीच चिंताएँ पैदा कर चुकी हैं। कई राज्यों, जैसे उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में, धर्मांतरण को नियंत्रित या प्रतिबंधित करने के लिए कानून बनाए गए हैं, जिन्हें कुछ ईसाई यह तर्क देते हैं कि यह उनके समुदाय और धर्म की स्वतंत्रता को असमान रूप से प्रभावित करता है।

 विभिन्न मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि कुछ ईसाई नेता यह महसूस करते हैं कि हिंदुत्व राजनीति की बढ़ती लोकप्रियता ने ऐसे दक्षिणपंथी समूहों को प्रोत्साहित किया है, जो ईसाई मिशनरी गतिविधियों और ग्रामीण क्षेत्रों में उनके कामकाज के खिलाफ आलोचना करते हैं।

नरेंद्र मोदी का ईसाई समुदाय के साथ संबंध बहुआयामी है। हालांकि उन्होंने राष्ट्रीय एकता का एक ऐसा दृष्टिकोण प्रस्तुत करने का प्रयास किया है, जिसमें धार्मिक अल्पसंख्यक शामिल हों, ईसाई समूहों द्वारा उठाए गए धार्मिक असहिष्णुता और कुछ राज्य सरकारों की नीतियों के खिलाफ चिंताएँ उनके समावेशिता के चित्रण के लिए एक चुनौती बनी हुई हैं। मोदी के विकास के दृष्टिकोण और उनके आलोचकों के धार्मिक अल्पसंख्यकों के हाशिए पर चले जाने के डर के बीच संतुलन, उनके नेतृत्व में एक महत्वपूर्ण गतिशीलता बना हुआ है।

2024 के क्रिसमस गैदरिंग में शामिल हुए नरेंद्र मोदी , उन्होंने ईसाई भाइयों और बहनों को येसु के जन्मोत्सव की बधाई दी और साथ उनके ईसाई धर्म से उनके लगाव को भी साझा किया। 

भारत-मॉरीशस संबंध: इतिहास, सहयोग और रणनीतिक साझेदारी पर आधारित दोस्ती

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Narendra Modi with Mauritius President

भारत और मॉरीशस के बीच संबंधों की जड़ें इतिहास, संस्कृति और आपसी हितों में गहरी हैं। भारतीय महासागर क्षेत्र में स्थित ये दो देश एक मजबूत, स्थायी साझेदारी के उदाहरण प्रस्तुत करते हैं, जो दशकों से निरंतर विकसित हो रही है। इन संबंधों की नींव साझा ऐतिहासिक अनुभवों, व्यापारिक हितों और सांस्कृतिक समानताओं पर आधारित है, जबकि वर्तमान में यह द्विपक्षीय व्यापार, रक्षा सहयोग, जलवायु परिवर्तन और समुद्री सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में प्रगति कर रहा है।

ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध

भारत और मॉरीशस का ऐतिहासिक संबंध 19वीं शताबदी में शुरू हुआ, जब भारतीय श्रमिकों को ब्रिटिश साम्राज्य के तहत मॉरीशस में चीनी बागानों में काम करने के लिए लाया गया। आज मॉरीशस की अधिकांश जनसंख्या भारतीय मूल की है, और भारतीय संस्कृति ने इस द्वीप राष्ट्र के सामाजिक ताने-बाने को गहरे तौर पर प्रभावित किया है। मॉरीशस में हिंदी और भोजपुरी भाषाएं आम हैं, और भारतीय धार्मिक उत्सव जैसे दीवाली, महाशिवरात्रि और गणेश चतुर्थी बड़े धूमधाम से मनाए जाते हैं। भारत और मॉरीशस के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान निरंतर होता रहा है। भारतीय शास्त्रीय नृत्य, संगीत और साहित्य भी मॉरीशस की सांस्कृतिक धारा का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं। इस साझा सांस्कृतिक परंपरा ने दोनों देशों के बीच एक अनूठा और स्थायी संबंध स्थापित किया है।

कूटनीतिक संबंध और उच्च स्तरीय दौरे

1968 में मॉरीशस के स्वतंत्र होने के बाद, भारत ने इस नए राष्ट्र को अपनी संप्रभुता की मान्यता दी और दोनों देशों के बीच औपचारिक कूटनीतिक संबंध स्थापित किए। भारत ने मॉरीशस के साथ कूटनीतिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए कई उच्चस्तरीय दौरे किए हैं। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित भारत के शीर्ष नेताओं ने मॉरीशस का दौरा किया, और मॉरीशस के प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और अन्य नेताओं ने भी भारत की यात्रा की। इन दौरों का मुख्य उद्देश्य व्यापार, निवेश, रक्षा, और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सहयोग बढ़ाना रहा है। भारत और मॉरीशस ने संयुक्त राष्ट्र (UN), विश्व व्यापार संगठन (WTO) और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एक-दूसरे का समर्थन किया है, और दोनों देशों के बीच वैश्विक मंचों पर सहयोग निरंतर बढ़ता जा रहा है। दोनों देश साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और अंतरराष्ट्रीय नियमों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को साझा करते हैं।

आर्थिक और व्यापारिक सहयोग

भारत और मॉरीशस के बीच आर्थिक संबंध समय के साथ और मजबूत हुए हैं। मॉरीशस भारतीय कंपनियों के लिए अफ्रीकी बाजारों तक पहुँचने का एक प्रमुख हब बन गया है। भारत, बदले में, मॉरीशस को महत्वपूर्ण निवेश और व्यापार का स्रोत प्रदान करता है। दोनों देशों के बीच व्यापार का प्रमुख क्षेत्र मशीनरी, पेट्रोलियम उत्पाद, दवाइयाँ, वस्त्र, और चीनी के रूप में होता है।

भारत-मॉरीशस व्यापार के आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं। भारत ने अपने Comprehensive Economic Cooperation and Partnership Agreement (CECPA) के तहत मॉरीशस के साथ व्यापारिक संबंधों को और भी मजबूत किया है। इस समझौते के तहत दोनों देशों ने माल और सेवाओं के व्यापार में तेजी लाने, निवेश को प्रोत्साहित करने और व्यापारिक बाधाओं को कम करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। मॉरीशस को भारत के लिए एक प्रमुख व्यापारिक साझेदार और अफ्रीका में भारतीय निवेश का एक प्रवेश द्वार के रूप में देखा जाता है।

विकास सहयोग और तकनीकी सहायता

भारत ने हमेशा मॉरीशस की विकास यात्रा में मदद की है। भारत ने मॉरीशस को बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, शिक्षा, और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में सहायता प्रदान की है। भारत ने मॉरीशस को लाइन ऑफ क्रेडिट (LoC) भी दिया है, जो कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए इस्तेमाल किया गया है, जिनमें बंदरगाह विकास, नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएँ और शहरी बुनियादी ढांचा शामिल हैं। भारत ने मॉरीशस में क्षमता निर्माण पर भी विशेष ध्यान दिया है। भारतीय विशेषज्ञों ने विभिन्न क्षेत्रों में स्थानीय कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने में मदद की है। इस सहयोग के परिणामस्वरूप, मॉरीशस के विभिन्न सरकारी और निजी संस्थान भारत से प्रौद्योगिकी और प्रबंधन में मार्गदर्शन प्राप्त करते हैं।

समुद्री सुरक्षा और रक्षा सहयोग

भारत और मॉरीशस के बीच रक्षा सहयोग भी मजबूत हुआ है। दोनों देशों के पास साझा हित हैं – भारतीय महासागर क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समुद्री सुरक्षा बनाए रखना। भारत ने मॉरीशस को अपनी समुद्री निगरानी और रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने के लिए आवश्यक तकनीकी सहायता और उपकरण प्रदान किए हैं। भारतीय नौसेना मॉरीशस के बंदरगाहों पर नियमित रूप से आकर नौसैनिक अभ्यास करती है, और दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा पर सहयोग बढ़ रहा है।

भारत और मॉरीशस के बीच एक प्रमुख रक्षा सहयोग क्षेत्र संयुक्त समुद्री गश्त, आतंकवाद विरोधी कार्रवाई और आपदा राहत ऑपरेशंस है। दोनों देशों ने भारतीय महासागर में समुद्री डकैती, अवैध मछली पकड़ने और अन्य खतरों से निपटने के लिए सहयोग बढ़ाया है।

जलवायु परिवर्तन और टिकाऊ विकास

मॉरीशस, एक छोटे द्वीप राष्ट्र के रूप में, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से काफी प्रभावित हो सकता है। इसके मद्देनजर, भारत और मॉरीशस ने नवीकरणीय ऊर्जा, जल संसाधन प्रबंधन और आपदा प्रबंधन जैसी पहलों में सहयोग किया है। भारत ने मॉरीशस को सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए सहायता प्रदान की है और दोनों देशों ने जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त रूप से काम करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है।

भारत और मॉरीशस ने मिलकर संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जलवायु परिवर्तन के खिलाफ संघर्ष करने का संकल्प लिया है और इस दिशा में कई सहयोगी योजनाओं को लागू किया है। 

चुनौतियाँ और तनाव के क्षेत्र

भारत और मॉरीशस के रिश्ते आम तौर पर सकारात्मक रहे हैं, लेकिन कुछ मुद्दों पर मतभेद भी रहे हैं। एक प्रमुख मुद्दा डबल टैक्सेशन अवॉइडेंस एग्रीमेंट (DTAA) था, जिसे कुछ आलोचकों ने भारत से निवेशों के रास्ते के रूप में देखा था, जिससे करों से बचने का अवसर मिलता था। हालांकि, भारत और मॉरीशस ने हाल के वर्षों में इस समझौते की शर्तों पर पुनर्विचार किया है और अब यह अधिक पारदर्शी और निवेशक मित्रवत है।

इसके अलावा, एक अन्य विवाद का मुद्दा चागोस द्वीपसमूह पर है। मॉरीशस ने इसे अपने क्षेत्र के रूप में दावा किया है, और भारत ने इस दावे का समर्थन किया है। भारत ने ब्रिटेन से द्वीपों की पुन: स्वामित्व को लेकर मॉरीशस के पक्ष में कड़ी स्थिति अपनाई है।

भारत-मॉरीशस संबंधों का भविष्य

भारत और मॉरीशस के रिश्तों का भविष्य और भी उज्जवल दिख रहा है। दोनों देशों के बीच CECPA और अन्य व्यापारिक समझौतों के तहत व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के नए अवसर खुलेंगे। भारत अपनी रणनीतिक महत्वाकांक्षाओं को बढ़ाता जा रहा है, और मॉरीशस के लिए यह एक प्रभावी सहयोगी के रूप में उभरने का अवसर है।

समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग, जलवायु परिवर्तन और टिकाऊ विकास जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के रिश्ते और अधिक गहरे और व्यापक होंगे। भारत, एक बढ़ती वैश्विक शक्ति के रूप में, मॉरीशस के लिए एक भरोसेमंद साझेदार बना रहेगा, और मॉरीशस के लिए भारत का समर्थन भारतीय महासागर में अपनी शक्ति और सुरक्षा बढ़ाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा।

भारत और मॉरीशस के संबंध एक आदर्श साझेदारी का उदाहरण पेश करते हैं, जो पारस्परिक सहयोग, रणनीतिक दृष्टिकोण और साझा ऐतिहासिक बंधनों पर आधारित है। आने वाले वर्षों में ये दोनों देश अपने संबंधों को और मजबूत करेंगे, और भारतीय महासागर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और समृद्धि को बढ़ावा देंगे।

 

370 అధికరణపై మోదీ స్ట్రాంగ్ వార్నింగ్

మహారాష్ట్ర అసెంబ్లీ ఎన్నికల ప్రచారంలో భాగంగా ధులేలో జరిగిన ఎన్నికల ర్యాలీలో మోదీ శుక్రవారంనాడు మాట్లాడుతూ, కాంగ్రెస్ పార్టీ పాకిస్థాన్ ఎజెండాను, కశ్మీర్‌లో వేర్పాటువాద భాషను ఇక్కడ కూడా ముందుకు తీసుకెళ్లే ప్రయత్నాలను ఓటర్లు తిప్పికొట్టాలన్నారు.

జమ్మూకశ్మీర్‌ (Jammu and Kashmir)లో కేంద్రం రద్దు చేసిన 370వ అధికరణ (Article 370)ను దేశంలోని ఏ శక్తి పునరుద్ధరించ లేదని ప్రధాన మంత్రి నరేంద్ర మోదీ (Narendra Modi) తెగేసి చెప్పారు. కేంద్ర పాలిత ప్రాంతంలో (జమ్మూకశ్మీర్) కాంగ్రెస్ పార్టీ కుట్రలను మహారాష్ట్ర ఓటర్లు గుర్తించాలని హెచ్చరించారు. మహారాష్ట్ర అసెంబ్లీ ఎన్నికల ప్రచారంలో భాగంగా ధులేలో జరిగిన ఎన్నికల ర్యాలీలో మోదీ శుక్రవారంనాడు మాట్లాడుతూ, కాంగ్రెస్ పార్టీ పాకిస్థాన్ ఎజెండాను, కశ్మీర్‌లో వేర్పాటువాద భాషను ఇక్కడ కూడా ముందుకు తీసుకెళ్లే ప్రయత్నాలను ఓటర్లు తిప్పికొట్టాలన్నారు. జమ్మూకశ్మీర్‌కు స్వయం ప్రతిపత్తిని కల్పించే 370వ అధికరణను తిరిగి పునరుద్ధరించాలంటూ రెండ్రోజుల క్రితం అక్కడి అధికార 'ఇండియా' కూటమి అసెంబ్లీలో తీర్మానం ఆమోదించిన నేపథ్యంలో మోదీ వ్యాఖ్యలు ప్రాధాన్యత సంతరించుకున్నాయి.

జమ్మూకశ్మీర్‌లో కాంగ్రెస్ కుట్రలను మహారాష్ట్ర ప్రజలు అవగాహన చేసుకోవాలని, 370వ అధికరణపై అక్కడి అసెంబ్లీ చేసిన తీర్మానాన్ని దేశం అంగీకరించిందని అన్నారు. ఏ శక్తి కూడా ఆ అధికరణను వెనక్కి తేలేదని స్పష్టం చేశారు. 370వ అధికరణకు మద్దతుగా అసెంబ్లీ వెలుపల బ్యానర్లు పెట్టారు. ఆ అధికరణను పునరుద్ధరించాలంటూ కాంగ్రెస్ కూటమి ఒక తీర్మానాన్ని ఆమోదించింది.. దీనిని దేశ ప్రజలు ఆమోదిస్తారా? ఈ ప్రయత్నాన్ని అడ్డుకునేందుకు బీజేపీ ఎమ్మెల్యేలు శక్తవంచన లేకుండా నిరసన తెలిపినప్పటికీ వారిని అసెంబ్లీ నుంచి బయటకు పంపించేశారు. కాంగ్రెస్ కూటమి నిజస్వరూపం ఏమిటో యావద్దేశం అవగాహన చేసుకోవాలి'' అని మోదీ అన్నారు.

370వ అధికరణను పునరుద్ధరించేందుకు దేశ ప్రజలు అంగీకరించరని, కశ్మీర్‌లో కాంగ్రెస్ పార్టీ ఆటలు మోదీ ఉన్నంత వరకూ సాగవని ప్రధాని అన్నారు. బీమ్‌రావ్ అంబేద్కర్ రాజ్యాంగం మాత్రమే అక్కడ నడుస్తుందని, ఏ శక్తీ 370వ అధికరణను వెనక్కి తేలేదని మరోసారి ఆయన స్పష్టం చేశారు. విపక్ష సభ్యలు తీవ్ర ప్రతిఘటన, నిరసనల మధ్య జమ్మూకశ్మీర్ అసెంబ్లీలో 370వ అధికరణను పునరుద్ధరించే తీర్మానాన్ని గత శుక్రవారంనాడు మూజువాణి ఓటుతో ఆమోదించారు.

चार दिवसीय छठ पर्व की आप सभी को ढेर सारी बधाई एवं शुभकामनाएं•••
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भारत देश के वर्तमान पीएम श्री #नरेंद्र मोदी और सामने बिहार के लोकप्रिय #पत्रकार सह भाजपा नेता #मनीष कश्यप Narendra Modi Manish Kasyap Chandan Singh तस्वीर आपको कैसा लगा कमेंट कर जरूर बताइएगा फोटो श्रे - मनीष कश्यप का फेसबुक पेज।।
आखिर पूरी हुई मुरादः बैंकॉक में पीएम मोदी से मिले मोहम्मद यूनुस, जानें क्या हुई बात?

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बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में मुलाकात हुई है। पिछले साल अगस्त में प्रधानमंत्री शेख हसीना को हटाए जाने के बाद यह उनकी पहली मुलाकात थी। बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद मोहम्मद यूनुस को अंतरिम सरकार का प्रशासक नियुक्त किया गया था। ऐसे में दोनों नेताओं की यह बैठक काफी अहम मानी जा रही है।

पीएम मोदी और यूनुस बिम्सटेक के शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने बैंकॉक पहुंचे हैं। इसी दौरान विम्सटेक से इतर दोनों नेताओं ने मुलाकात की। हालांकि, दोनों नेताओं के बीच की मुलाकात में वो बात नजर नहीं आई, जैसे मोदी के दूसरे वैश्विक नेताओं के साथ मुलाकात के दौरान देखी जाती है। पीएम मोदी अक्सर वैश्विक नेताओं से गर्मजोशी से मिलते हैं। लेकिन मोहम्मद यूनुस के साथ बैठक के दौरान ये गर्मजोशी नहीं दिख रही थी।

पीएम मोदी और मोहम्मद यूनुस के मुलाकात के वीडियो में दिख रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी से मिलने के लिए जब मोहम्मद यूनुस आ रहे होते हैं, तो पीएम मोदी पहले भारतीय परंपरा को दर्शाते हुए हाथ जोड़कर अभिनंदन करते हैं और मोहम्मद यूनुस के पहुंचने के बाद उनसे हाथ मिलाते हैं।

वहीं, दूसरे विदेशी नेताओं से मुलाकात के वक्त प्रधानमंत्री मोदी का हावभाव काफी अलग रहता है। किसी दूसरे नेता से मिलते वक्त प्रधानमंत्री मोदी को खुद आगे बढ़कर उनका स्वागत करते हुए देखा गया है। इस दौरान वो उनसे गले भी मिलते हैं और भारी मुस्कुराहट के साथ उनका स्वागत करते हैं। लेकिन मोहम्मद यूनुस के साथ मुलाकात के दौरान ऐसा कुछ नहीं दिखा।

यूनुस और मोदी के बीच मुलाकात के दौरान क्या बातचीत हुई है, इसकी जानकारी अभी तक सामने नहीं आई है। इस मुलाकात में दोनों देशों के शीर्ष राजनयिक भी मौजूद थे। ऐसे में माना जा रहा है कि ये बातचीत समसमायिक मुद्दे और दोनों देशों के व्यापार समझौते को लेकर हो सकता है।

दरअसल, शेख हसीना सरकार के सत्ता से बाहर हो जाने के बाद भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में काफी कड़वाहट आ चुकी है। मोहम्मद यूनुस के शासन में बांग्लादेश में रह रहे अल्पसंख्यकों (हिंदुओं) पर अत्याचार के कई मामले सामने आ चुके हैं। बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमले को लेकर खुद पीएम मोदी ने चिंता जताई है।

वहीं, बांग्लादेश ने भारत को दरकिनार कर पाकिस्तान और चीन से रिश्तों को प्रगाढ़ किया है। पिछले हफ्ते ही जब मोहम्मद यूनुस बीजिंग में थे तो उन्होंने एंटी-इंडिया बात करते हुए खुद को बंगाल की खाड़ी का गार्जियन बताया था। पिछले हफ्ते चीन की अपनी यात्रा के दौरान यूनुस ने बीजिंग से बांग्लादेश में अपना आर्थिक प्रभाव बढ़ाने का आग्रह किया और विवादास्पद रूप से उल्लेख किया कि भारत के पूर्वोत्तर राज्यों का भूमि से घिरा होना एक अवसर साबित हो सकता है।

महाराष्ट्र से होगा पीएम मोदी का उत्तराधिकारी? शिवसेना यूबीटी नेता संजय राउत का दावा

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रविवार को नागपुर में आरएसएस मुख्यालय पहुंचे थे। पीएम नरेंद्र मोदी के आरएसएस हेडक्‍वार्टर जाने के एक दिन बाद उद्धव ठाकरे की शिवसेना के नेता संजय राउत ने मोदी की रिटायरमेंट को लेकर बड़ा दावा किया है। संजय राउत ने कहा कि पीएम मोदी इस साल 75 साल के होने जा रहे हैं लिहाजा अपने रिटायरमेंट प्‍लान के बारे में चर्चा करने के लिए संघ के मुख्‍यालय गए थे। राउत ने दावा करते हुए कहा कि संघ तय करेगा कि पीएम नरेंद्र मोदी का उत्‍तराधिकारी कौन होगा। उन्‍होंने ये भी कहा कि मोदी का उत्‍तराधिकारी महाराष्‍ट्र से होगा।

संजय राउत ने मुंबई में मीडिया से बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समय अब पूरा हो गया है। अब आरएसएस भी बदलाव चाहते है और बीजेपी के अगले अध्यक्ष को भी चुनना चाहता है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी पिछले 10-11 सालों में आरएसएस मुख्यालय नहीं गए थे, अब वहां मोहन भागवत को टाटा, बाय-बाय कहने गए थे। उन्होंने दावा किया कि आरएसएस भी देश के नेतृत्व में बदलाव चाहता है, इसलिए पीएम मोदी को बुलाया गया था।

संजय राउत ने कहा कि 10 साल बाद मोदी का नागपुर जाकर सरसंघचालक से मिलना कोई साधारण बात नहीं है। सितंबर में रिटायरमेंट का आवेदन लिखने के लिए शायद वे आरएसएस मुख्यालय गए थे। मेरी जो जानकारी है कि पिछले 10-11 सालों में मोदी जी कभी वहां नहीं गए। इस बार मोदी जी बताने के लिए गए थे कि वे मोहन भागवत जी से कहने जा रहे हैं कि वे टाटा-बाय-बाय कर रहे हैं।

नए नेता संभवतया महाराष्‍ट्र से होगा

संजय राउत ने कहा कि बंद दरवाजे के भीतर क्‍या चर्चाएं हुईं ये तो संभवतया बाहर नहीं आएंगी लेकिन कई संकेतों से इस बात का इशारा मिलता है। उन्‍होंने कहा कि नए नेता का चुनाव संघ करेगा और संभवतया वो महाराष्‍ट्र से होगा।

राउत के दावे पर सीएम फडणवीस का बयान

बीजेपी के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने संजय राउत के दावों को गलत बताया है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी कई सालों तक देश का नेतृत्व करते रहेंगे। फडणवीस ने कहा कि 2029 में हम मोदी को फिर से प्रधानमंत्री के रूप में देखेंगे। उनके उत्तराधिकारी को खोजने की कोई जरूरत नहीं है। वह (मोदी) हमारे नेता हैं और बने रहेंगे। हमारी संस्कृति में, जब पिता जीवित है, तो उत्तराधिकार के बारे में बात करना अनुचित है। वह मुगल संस्कृति है। इस पर चर्चा करने का समय नहीं आया है।

पीएम मोदी ने आरएसएस की जमकर की तारीफ

बता दें कि इतिहास में यह दूसरी बार है जब किसी प्रधानमंत्री ने आधिकारिक तौर पर आरएसएस मुख्यालय का दौरा किया है। इससे पहले अटल बिहारी वाजपेयी ने 2000 में अपने तीसरे कार्यकाल के दौरान नागपुर पहुंचे थे। अपनी यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि जो विचारधारा का बीज 100 साल पहले बोया गया था, वह एक विशाल पेड़ बन गया है। आरएसएस के सिद्धांतों और मूल्यों ने इसे महान ऊंचाइयों तक पहुंचाया है, जिसमें लाखों कार्यकर्ता इसकी शाखाएं हैं।

गोधरा के बाद हुए दंगों को पीएम मोदी ने बतया 'अकल्पनीय त्रासदी', जानें आरएसएस और महात्मा गांधी पर क्या कहा?

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भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी पॉडकास्टर लेक्स फ्रीडमैन के यूट्यूब चैनल पर एक पॉडकास्ट के लिए इंटरव्यू दिया है। पीएम मोदी ने पॉडकास्टर लेक्स फ्रिडमैन से विस्तार से बात की। उन्होंने अपनी बातचीत में गोधरा कांड को 'अकल्पनीय त्रासदी' बताया। तीन घंटे लंबे साक्षात्कार में, पीएम मोदी से गुजरात में 2002 के दंगों के बारे में पूछा गया और उनसे क्या सबक सीखा गया। पीएम मोदी ने बताया कि धारणा के विपरीत, जो दंगे हुए, वे गुजरात में देखे गए सबसे बुरे दंगे नहीं थे। न ही उसके बाद से राज्य में कोई सांप्रदायिक तनाव हुआ है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि शपथ लेने के बाद मैं पहले ही दिन से इसके लिए काम में जुट गया। मैं एक ऐसा व्यक्ति हूं जिसका 'सरकार' नाम के साथ रिश्ता नहीं रहा था, सरकार क्या होती है मैं जानता नहीं था। मैं 24 फरवरी 2002 को पहली बार विधायक बना। मेरी सरकार 27 फरवरी 2002 को बजट पेश करने वाली थी और उसी दिन हमें गोधरा ट्रेन हादसे की सूचना मिली। यह बहुत गंभीर घटना थी। लोगों को जिंदा जला दिया गया था। आप कल्पना कर सकते हैं कि पिछली सभी घटनाओं के बाद स्थिति कैसी रही होगी। जो कहते थे कि यह बहुत बड़ा दंगा है, यह भ्रम फैलाया गया है।

पीएम मोदी ने कहा कि साल 2002 से पहले गुजरात में 250 से ज्यादा बड़े दंगे हुए थे। साल 1969 के दंगे करीब 6 महीने तक चले थे। यह धारणा कि ये अब तक के सबसे बड़े दंगे थे, गलत जानकारी है। अगर आप 2002 से पहले के आंकड़ों को देखें, तो आप पाएंगे कि गुजरात में अक्सर दंगे होते थे। कहीं न कहीं लगातार कर्फ्यू लगा रहता था। पतंगबाजी प्रतियोगिताओं या साइकिल की छोटी-मोटी टक्कर जैसी मामूली बातों पर भी सांप्रदायिक हिंसा भड़क जाती थी। प्रधानमंत्री ने स्वीकार किया कि गोधरा ट्रेन कांड के बाद कुछ लोग हिंसा की ओर बढ़े। उन्होंने कहा कि केंद्र में सत्ता में बैठे उनके विरोधियों ने उनकी सरकार पर आरोप लगाने की कोशिश की। हालांकि, न्यायपालिका ने स्थिति का विश्लेषण करने के बाद उन्हें निर्दोष पाया

आरएसएस और महात्मा गांधी पर क्या बोले?

इंटरव्यू के दौरान पीएम मोदी ने आरएसएस के बारे में विस्तार से बात की। उन्होंने कहा, संघ एक बड़ा संगठन है। उसके 100 साल पूरे हो रहे हैं। दुनिया में इतना बड़ा स्वयंसेवी संगठन कहीं होगा? करोड़ों लोग उसके साथ जुड़े हुए हैं। संघ को समझना इतना सरल नहीं है। संघ के काम को समझना चाहिए। संघ जीवन के उद्देश्य को दिशा देता है।

पीएम मोदी ने कहा, संघ के कुछ स्वयंसेवक जंगलों में वनवासी कल्याण आश्रम चलाते हैं। आदिवासियों के बीच वह एकल विद्यालय चला रहे हैं। अमरीका में कुछ लोग हैं जो इन्हें 10 से 15 डॉलर का दान देते हैं। ऐसे 70 हजार विद्यालय चल रहे हैं। इसी तरह से शिक्षा में क्रांति लाने के लिए विद्या भारती नाम का संगठन खड़ा किया गया। देश में उनके करीब 25 हजार स्कूल चलते हैं।

संघ के सेवा भाव ने मुझे गढ़ने में मदद की-पीएम मोदी

पीएम मोदी ने भारतीय मज़दूर संघ की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि 'वामपंथी मजदूर संघ कहते हैं, दुनिया के मजदूरों, एक हो जाओ। आरएसएस की शाखा से निकले लोग जो मजदूर संघ चलाते हैं वह कहते हैं,'मजदूरों, दुनिया को एक करो'। दो शब्दों में ही बदलाव है लेकिन वैचारिक बदलाव बड़ा है। संघ के सेवा भाव ने मुझे गढ़ने में मदद की है।

महात्मा गांदी के बारे में क्या कहा?

पीएम मोदी ने इंटरव्यू में बताया कि महात्मा गांधी का प्रभाव आज भी किसी न किसी रूप भारतीय जीवन पर दिखता है। उन्होंने कहा, आजादी की बात करें तो यहां लाखों वीरों ने बलिदान किया। जवानी जेलों में खपा दी। ये आते थे और देश के लिए शहीद हो जाते थे। परंपरा बनी रही और उसने एक वातावरण भी बनाया लेकिन गांधी ने जन आंदोलन खड़ा किया। उन्होंने हर काम को आजादी के रंग से रंग दिया। अंग्रेजों को कभी अंदाजा भी नहीं था दांडी यात्रा एक बहुत बड़ी क्रांति खड़ा कर देगी।

पीएम मोदी ने कहा कि उन्होंने सामूहिकता का भाव जो जगाया और जनशक्ति के सामर्थ्य को पहचाना। मेरे लिए आज भी वह उतना ही महत्वपूर्ण है। मैं जो भी काम करता हूं। मेरी कोशिश रहती है कि जनसामान्य को जोड़ करके करूं।

पॉडकास्ट में पीएम मोदी ने पाकिस्तान को बताया धोखेबाज, जानें चीन और अमेरिका को लेकर क्या कहा?

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अमेरिकन एआई रिसर्चर लेक्स फ्रिडमैन के साथ 3 घंटे का पॉडकास्ट रिलीज किया। पीएम ने पाकिस्तान, चीन, ट्रम्प, विश्व राजनीति, खेल, राजनीति और आरएसएस समेत निजी जीवन से जुड़े सवालों के जवाब दिए। पीएम ने पाकिस्तान को लताड़ लगाते हुए कहा कि वहां से हमेशा धोखा ही मिला। साथ ही उन्होंने चीन-भारत के रिश्तों और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनकी दोस्ती को लेकर भी कई बातें कही है।

पाकिस्तान पर खूब बरसे पीएम मोदी

पड़ोसी देश पाकिस्तान के बारे में पीएम मोदी ने कहा, दुनिया में कहीं भी आंतकवाद की घटना घटती है। सूत्र कहीं न कहीं पाकिस्तान जाकर अटकते हैं। उन्होंने कहा, अमेरिका में 9/11 की इतनी बड़ी घटना घटी। उसका मेन सूत्रधार ओसामा बिन लादेन आखिर में कहां से मिला? पाकिस्तान में शरण लेकर बैठा था।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, पाकिस्तान सिर्फ भारत के लिए नहीं दुनियाभर के लिए परेशानी का केंद्र बन चुका है। हम लगातार उसको कहते रहे हैं कि इस रास्ते से किसका भला होगा। आप आतंकवाद के रास्ते को छोड़ दीजिए। स्टेट स्पॉन्सर्ड आतंकवाद बंद होना चाहिए।

फ्रीडमैन के साथ बातचीत में उन्होंने कहा, शांति के प्रयासों के लिए मैं खुद लाहौर चला गया था। प्रधानमंत्री बनने के बाद मैंने अपने शपथ ग्रहण समारोह में पाकिस्तान को खास तौर से आमंत्रित किया था ताकि एक शुभ शुरुआत हो। हर बार अच्छे प्रयासों का परिणाम नकारात्मक निकला। हम आशा करते हैं कि उनको सद्बुद्धि मिले।

चीन पर पीएम ने कही हैरान करने वाली बात

भारत चीन संबंधों पर भी पीएम मोदी ने खुलकर अपनी बात रखी। पीएम मोदी ने कहा, भारत और चीन का संबंध आज का नहीं है। मॉडर्न वर्ल्ड में भी हम लोगों की भूमिका है। इतिहास को देखें तो भारत और चीन सदियों तक एक-दूसरे से सीखते रहे हैं। साल 1975 के बाद पहली बार दोनों देशों के बीच टकराव ने संघर्ष का रूप ले लिया। इस संघर्ष में दोनों पक्षों के जवान मारे गए थे। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ अपनी बैठक का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कु राष्ट्रपति शी के साथ मेरी बैठक के बाद हमने सीमा पर सामान्य स्थिति की वापसी देखी है। हम 2020 से पहले के स्तर पर स्थितियों को बहाल करने के लिए काम कर रहे हैं। विश्वास में समय लगेगा, लेकिन हम बातचीत के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने संघर्ष के बजाय स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की आवश्यकता पर भी जोर दिया। 21वीं सदी एशिया की सदी है। भारत और चीन को स्वाभाविक रूप से प्रतिस्पर्धा करनी चाहिए, टकराव नहीं।

ट्रंप में खुद निर्णय लेने की क्षमता- पीएम मोदी

इस पॉडकास्ट में पीएम मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि कैसे ट्रंप ने उनकी दोस्ती गहरी हो गई। पीएम मोदी ने 2019 के अमेरिकी दौरे को याद करते हुए कहा, हाउडी मोदी कार्यक्रम जब मैं मंच पर बोल रहा था तो ट्रंप मुझे सुन रहे थे। भाषण खत्म करके जब मैं उनके पास गया और कहा कि हम साथ में स्टेडियम का चक्कर लगाते हैं तो वह तुरंत तैयार हो गए और मेरे साथ चल पड़े। ऐसा करना आसान नहीं था क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा को लेकर कई प्रोटोकॉल होते हैं। इस समय मैंने समझा कि ट्रंप में खुद निर्णय लेने की क्षमता है। मैं भारत फर्स्ट वाला हूं वो अमेरिका फर्स्ट वाले हैं।

*Vision 2028 resumes with U-19, U-15 girls’ camp*

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Khabar kolkata sports Desk: The third phase of Vision 2028 got underway today at the JU 2nd Campus Ground, Salt Lake, with the Bengal Under-19 girls attending the first session of the camp that ends on March 24.

While Bengal’s Manoj Tiwary will be the batting coach, the bowling department will be guided by former India pacer Venkatesh Prasad along with Bengal’s Ashok Dinda and spin bowling will be taken care of by Narendra Hirwani. Former India and Bengal women's cricketer Purnima Chowdhury will also guide the girls.

The third phase of the camp is divided into two sessions every day. The first half will be attended by the U19 girls and the second by the U15 girls.

The opening day’s session began with Prasad, Hirwari and Tiwary delivering inspirational and motivation words to the young girls. The trio told the girls to use the camp as a learning experience.

After a brief introduced by the girls, the batters took their stance at the crease and the bowlers prepared for their run-up, by practicing their bowling action. The coaches looked at the proceedings and watched the girls’ practice with hawk eyes. As the session went on, the coaches talked to the talents individually.

The short-term goal of Vision 2028 will be to get the various age group squads ready for the domestic season by improving their skills while the long-term goals will be to nurture the future talents and make them fit for various Bengal age group squads.

20 U19 girls and 23 U15 girls are attending the camp.

Pic Courtesy by: CAB

जिन्हें किसी ने नहीं पूछा, उन्हें मोदी ने पूजा है', ग्रामीण भारत महोत्सव में बोले पीएम मोदी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की राजधानी में स्थित भारत मंडपम में 'ग्रामीण भारत महोत्सव 2025' का उद्घाटन किया। ये कार्यक्रम 9 जनवरी तक चलेगा। इस दौरान उन्होंने इस महोत्सव में शामिल कलाकारों और कारीगरों से बातचीत की। इस अवसर पर पीएम मोदी ने कहा कि विकसित भारत के लिए गांवों का समृद्ध होना जरूरी है। गांव आत्मनिर्भर होगा तभी देश आत्मनिर्भर होगा। साल 2014 से ही केंद्र सरकार लगातार, हर पल ग्रामीण भारत की सेवा में लगी हुई है। इसके परिणाम भी नजर आ रहे हैं, क्‍योंकि जब इरादे नेक होते हैं तो नतीजे भी संतोष देने वाले होते हैं।

गांव के लोगों को गरिमापूर्ण जीवन देना सरकार की प्राथमिकता-पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कहा, गांव के लोगों को गरिमापूर्ण जीवन देना मेरी सरकार की प्राथमिकता है। हमारा विजन है, भारत के गांव के लोग सशक्त बनें, उन्हें गांव में ही आगे बढ़ने के ज्यादा से ज्यादा अवसर मिले, उन्हें पलायन न करना पड़े, गांव के लोगों का जीवन आसान हो, इसलिए हमने गांव-गांव में मूलभूत सुविधाओं की गारंटी का अभियान चलाया। पीएम मोदी ने कहा कि जो गांव में जिया है वो गांव को जीना जानता है। मैने गांव में भी जिया है और गांव के संभावनाओं को भी देखा है। गांव में विविधताओं से भरा सामर्थ्य होता है।

ग्रामीणों की क्रय शक्ति करीब तीन गुना बढ़ी-पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कहा कि हाल ही में एक अहम सर्वे हुआ है, जिसमें पता चला कि साल 2011 की तुलना में अब ग्रामीणों की क्रय शक्ति करीब तीन गुना बढ़ गई है। अब गांव के लोग पहले की तुलना में ज्यादा खर्च कर रहे हैं। आजादी के बाद देश के ग्रामीण खाने पर 50 प्रतिशत आमदनी खर्च कर रहे थे। यह पहली बार है कि यह दर 50 फीसदी तक घट गई है।

पूर्व की सरकारों पर बोला हमला

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पूर्व की सरकारों ने दलितों, जनजातियों और पिछड़े वर्ग के लोगों की परेशानियों पर ध्यान नहीं दिया, जिसके चलते गांवों से पलायन हुआ और गरीबी बढ़ी। गांवों और शहरों में लगातार अंतर बढ़ रहा है। 'जिन्हें किसी ने नहीं पूछा, उन्हें मोदी ने पूजा है'। जिन इलाकों को विकास से वंचित रखा गया, अब वहां समान अधिकार मिल रहे हैं। कल ही स्टेट बैंक ने रिपोर्ट जारी की है, जिसके अनुसार, साल 2012 में भारत में ग्रामीण इलाकों में गरीबी 26 प्रतिशत थी, लेकिन 2024 में यह घटकर पांच प्रतिशत से भी कम रह गई है।'

ग्रामीणों के लिए बनाई गई योजनाओं की दी जानकारी

पीएम मोदी ने केंद्र की ग्रामीणों के लिए बनाई गई योजनाओं की जानकारी देते हुए कहा, 'हमारी सरकार ने गांव के हर वर्ग के लिए विशेष नीतियां बनाई हैं। दो-तीन दिन पहले ही कैबिनेट ने 'पीएम फसल बीमा योजना' को एक वर्ष अधिक तक जारी रखने की मंजूरी दे दी है। दुनिया में डीएपी का दाम बढ़ रहा है, आसमान छू रहा है, लेकिन हमने निर्णय किया कि हम किसान के सिर पर बोझ नहीं आने देंगे और सब्सिडी बढ़ाकर डीएपी का दाम स्थिर रखा है। हमारी सरकार की नीयत, नीति और निर्णय ग्रामीण भारत को नई ऊर्जा से भर रहे हैं।

नरेंद्र मोदी का ईसाई समुदाय के साथ संबंध: क्रिसमस पर समावेशिता की ओर एक संदेश

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नरेंद्र मोदी का भारतीय ईसाई समुदाय के साथ एक जटिल संबंध है, जो उनके राजनीतिक कृत्यों, सार्वजनिक बयानों और उस व्यापक सामाजिक-राजनीतिक संदर्भ से आकारित हुआ है, जिसमें वह कार्य करते हैं।

प्रारंभिक वर्ष और राजनीतिक करियर:

नरेंद्र मोदी, 2001 से 2014 तक गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में, कुछ ईसाई समूहों से आलोचना का सामना कर चुके हैं, विशेष रूप से 2002 के गुजरात दंगों के बाद। इन दंगों में व्यापक हिंसा हुई थी, जिसमें अल्पसंख्यकों, खासकर मुसलमानों और ईसाई समुदाय के खिलाफ साम्प्रदायिक हमलों का आरोप था। जबकि मोदी के नेतृत्व में दंगों के दौरान आलोचना हुई और यह आरोप लगाया गया कि उन्होंने हिंसा पर काबू पाने में लापरवाही बरती या इसमें उनकी सहमति थी, लेकिन अदालतों ने उन पर किसी तरह का दोष नहीं तय किया। हालांकि, उनके आलोचक यह मानते हैं कि उनकी भाजपा में उभरती हुई भूमिका हिंदू राष्ट्रीयता (हिंदुत्व) के विचारों से जुड़ी है, जिसे कुछ लोग धार्मिक अल्पसंख्यकों, जैसे कि ईसाईयों, के लिए पूरी तरह समावेशी नहीं मानते।

प्रधानमंत्री बनने के बाद और धार्मिक समावेशिता:

2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद से मोदी ने एक ऐसे नेतृत्व की छवि पेश करने की कोशिश की है, जो भारत के सभी धार्मिक समुदायों, जिसमें ईसाई भी शामिल हैं, के लिए काम करता हो। उनके भाषणों में अक्सर एकता, विकास और धार्मिक सहिष्णुता की बातें होती हैं। उदाहरण के तौर पर, उन्होंने धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की कड़ी निंदा की है और क्रिसमस जैसे प्रमुख धार्मिक त्योहारों पर ईसाई समुदाय को शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने ट्विटर पर एक संदेश भेजा था, जिसमें शांति, भाईचारे और प्रेम के महत्व पर जोर दिया गया था।

ईसाइयों से संबंधित नीतियाँ:

हालांकि उन्होंने समावेशिता की बात की है, मोदी के कार्यकाल में कुछ नीतियाँ ईसाई समूहों के बीच चिंताएँ पैदा कर चुकी हैं। कई राज्यों, जैसे उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में, धर्मांतरण को नियंत्रित या प्रतिबंधित करने के लिए कानून बनाए गए हैं, जिन्हें कुछ ईसाई यह तर्क देते हैं कि यह उनके समुदाय और धर्म की स्वतंत्रता को असमान रूप से प्रभावित करता है।

 विभिन्न मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि कुछ ईसाई नेता यह महसूस करते हैं कि हिंदुत्व राजनीति की बढ़ती लोकप्रियता ने ऐसे दक्षिणपंथी समूहों को प्रोत्साहित किया है, जो ईसाई मिशनरी गतिविधियों और ग्रामीण क्षेत्रों में उनके कामकाज के खिलाफ आलोचना करते हैं।

नरेंद्र मोदी का ईसाई समुदाय के साथ संबंध बहुआयामी है। हालांकि उन्होंने राष्ट्रीय एकता का एक ऐसा दृष्टिकोण प्रस्तुत करने का प्रयास किया है, जिसमें धार्मिक अल्पसंख्यक शामिल हों, ईसाई समूहों द्वारा उठाए गए धार्मिक असहिष्णुता और कुछ राज्य सरकारों की नीतियों के खिलाफ चिंताएँ उनके समावेशिता के चित्रण के लिए एक चुनौती बनी हुई हैं। मोदी के विकास के दृष्टिकोण और उनके आलोचकों के धार्मिक अल्पसंख्यकों के हाशिए पर चले जाने के डर के बीच संतुलन, उनके नेतृत्व में एक महत्वपूर्ण गतिशीलता बना हुआ है।

2024 के क्रिसमस गैदरिंग में शामिल हुए नरेंद्र मोदी , उन्होंने ईसाई भाइयों और बहनों को येसु के जन्मोत्सव की बधाई दी और साथ उनके ईसाई धर्म से उनके लगाव को भी साझा किया। 

भारत-मॉरीशस संबंध: इतिहास, सहयोग और रणनीतिक साझेदारी पर आधारित दोस्ती

#indiamauritiusrelations

Narendra Modi with Mauritius President

भारत और मॉरीशस के बीच संबंधों की जड़ें इतिहास, संस्कृति और आपसी हितों में गहरी हैं। भारतीय महासागर क्षेत्र में स्थित ये दो देश एक मजबूत, स्थायी साझेदारी के उदाहरण प्रस्तुत करते हैं, जो दशकों से निरंतर विकसित हो रही है। इन संबंधों की नींव साझा ऐतिहासिक अनुभवों, व्यापारिक हितों और सांस्कृतिक समानताओं पर आधारित है, जबकि वर्तमान में यह द्विपक्षीय व्यापार, रक्षा सहयोग, जलवायु परिवर्तन और समुद्री सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में प्रगति कर रहा है।

ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध

भारत और मॉरीशस का ऐतिहासिक संबंध 19वीं शताबदी में शुरू हुआ, जब भारतीय श्रमिकों को ब्रिटिश साम्राज्य के तहत मॉरीशस में चीनी बागानों में काम करने के लिए लाया गया। आज मॉरीशस की अधिकांश जनसंख्या भारतीय मूल की है, और भारतीय संस्कृति ने इस द्वीप राष्ट्र के सामाजिक ताने-बाने को गहरे तौर पर प्रभावित किया है। मॉरीशस में हिंदी और भोजपुरी भाषाएं आम हैं, और भारतीय धार्मिक उत्सव जैसे दीवाली, महाशिवरात्रि और गणेश चतुर्थी बड़े धूमधाम से मनाए जाते हैं। भारत और मॉरीशस के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान निरंतर होता रहा है। भारतीय शास्त्रीय नृत्य, संगीत और साहित्य भी मॉरीशस की सांस्कृतिक धारा का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं। इस साझा सांस्कृतिक परंपरा ने दोनों देशों के बीच एक अनूठा और स्थायी संबंध स्थापित किया है।

कूटनीतिक संबंध और उच्च स्तरीय दौरे

1968 में मॉरीशस के स्वतंत्र होने के बाद, भारत ने इस नए राष्ट्र को अपनी संप्रभुता की मान्यता दी और दोनों देशों के बीच औपचारिक कूटनीतिक संबंध स्थापित किए। भारत ने मॉरीशस के साथ कूटनीतिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए कई उच्चस्तरीय दौरे किए हैं। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित भारत के शीर्ष नेताओं ने मॉरीशस का दौरा किया, और मॉरीशस के प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और अन्य नेताओं ने भी भारत की यात्रा की। इन दौरों का मुख्य उद्देश्य व्यापार, निवेश, रक्षा, और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सहयोग बढ़ाना रहा है। भारत और मॉरीशस ने संयुक्त राष्ट्र (UN), विश्व व्यापार संगठन (WTO) और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एक-दूसरे का समर्थन किया है, और दोनों देशों के बीच वैश्विक मंचों पर सहयोग निरंतर बढ़ता जा रहा है। दोनों देश साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और अंतरराष्ट्रीय नियमों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को साझा करते हैं।

आर्थिक और व्यापारिक सहयोग

भारत और मॉरीशस के बीच आर्थिक संबंध समय के साथ और मजबूत हुए हैं। मॉरीशस भारतीय कंपनियों के लिए अफ्रीकी बाजारों तक पहुँचने का एक प्रमुख हब बन गया है। भारत, बदले में, मॉरीशस को महत्वपूर्ण निवेश और व्यापार का स्रोत प्रदान करता है। दोनों देशों के बीच व्यापार का प्रमुख क्षेत्र मशीनरी, पेट्रोलियम उत्पाद, दवाइयाँ, वस्त्र, और चीनी के रूप में होता है।

भारत-मॉरीशस व्यापार के आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं। भारत ने अपने Comprehensive Economic Cooperation and Partnership Agreement (CECPA) के तहत मॉरीशस के साथ व्यापारिक संबंधों को और भी मजबूत किया है। इस समझौते के तहत दोनों देशों ने माल और सेवाओं के व्यापार में तेजी लाने, निवेश को प्रोत्साहित करने और व्यापारिक बाधाओं को कम करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। मॉरीशस को भारत के लिए एक प्रमुख व्यापारिक साझेदार और अफ्रीका में भारतीय निवेश का एक प्रवेश द्वार के रूप में देखा जाता है।

विकास सहयोग और तकनीकी सहायता

भारत ने हमेशा मॉरीशस की विकास यात्रा में मदद की है। भारत ने मॉरीशस को बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, शिक्षा, और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में सहायता प्रदान की है। भारत ने मॉरीशस को लाइन ऑफ क्रेडिट (LoC) भी दिया है, जो कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए इस्तेमाल किया गया है, जिनमें बंदरगाह विकास, नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएँ और शहरी बुनियादी ढांचा शामिल हैं। भारत ने मॉरीशस में क्षमता निर्माण पर भी विशेष ध्यान दिया है। भारतीय विशेषज्ञों ने विभिन्न क्षेत्रों में स्थानीय कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने में मदद की है। इस सहयोग के परिणामस्वरूप, मॉरीशस के विभिन्न सरकारी और निजी संस्थान भारत से प्रौद्योगिकी और प्रबंधन में मार्गदर्शन प्राप्त करते हैं।

समुद्री सुरक्षा और रक्षा सहयोग

भारत और मॉरीशस के बीच रक्षा सहयोग भी मजबूत हुआ है। दोनों देशों के पास साझा हित हैं – भारतीय महासागर क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समुद्री सुरक्षा बनाए रखना। भारत ने मॉरीशस को अपनी समुद्री निगरानी और रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने के लिए आवश्यक तकनीकी सहायता और उपकरण प्रदान किए हैं। भारतीय नौसेना मॉरीशस के बंदरगाहों पर नियमित रूप से आकर नौसैनिक अभ्यास करती है, और दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा पर सहयोग बढ़ रहा है।

भारत और मॉरीशस के बीच एक प्रमुख रक्षा सहयोग क्षेत्र संयुक्त समुद्री गश्त, आतंकवाद विरोधी कार्रवाई और आपदा राहत ऑपरेशंस है। दोनों देशों ने भारतीय महासागर में समुद्री डकैती, अवैध मछली पकड़ने और अन्य खतरों से निपटने के लिए सहयोग बढ़ाया है।

जलवायु परिवर्तन और टिकाऊ विकास

मॉरीशस, एक छोटे द्वीप राष्ट्र के रूप में, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से काफी प्रभावित हो सकता है। इसके मद्देनजर, भारत और मॉरीशस ने नवीकरणीय ऊर्जा, जल संसाधन प्रबंधन और आपदा प्रबंधन जैसी पहलों में सहयोग किया है। भारत ने मॉरीशस को सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए सहायता प्रदान की है और दोनों देशों ने जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त रूप से काम करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है।

भारत और मॉरीशस ने मिलकर संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जलवायु परिवर्तन के खिलाफ संघर्ष करने का संकल्प लिया है और इस दिशा में कई सहयोगी योजनाओं को लागू किया है। 

चुनौतियाँ और तनाव के क्षेत्र

भारत और मॉरीशस के रिश्ते आम तौर पर सकारात्मक रहे हैं, लेकिन कुछ मुद्दों पर मतभेद भी रहे हैं। एक प्रमुख मुद्दा डबल टैक्सेशन अवॉइडेंस एग्रीमेंट (DTAA) था, जिसे कुछ आलोचकों ने भारत से निवेशों के रास्ते के रूप में देखा था, जिससे करों से बचने का अवसर मिलता था। हालांकि, भारत और मॉरीशस ने हाल के वर्षों में इस समझौते की शर्तों पर पुनर्विचार किया है और अब यह अधिक पारदर्शी और निवेशक मित्रवत है।

इसके अलावा, एक अन्य विवाद का मुद्दा चागोस द्वीपसमूह पर है। मॉरीशस ने इसे अपने क्षेत्र के रूप में दावा किया है, और भारत ने इस दावे का समर्थन किया है। भारत ने ब्रिटेन से द्वीपों की पुन: स्वामित्व को लेकर मॉरीशस के पक्ष में कड़ी स्थिति अपनाई है।

भारत-मॉरीशस संबंधों का भविष्य

भारत और मॉरीशस के रिश्तों का भविष्य और भी उज्जवल दिख रहा है। दोनों देशों के बीच CECPA और अन्य व्यापारिक समझौतों के तहत व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के नए अवसर खुलेंगे। भारत अपनी रणनीतिक महत्वाकांक्षाओं को बढ़ाता जा रहा है, और मॉरीशस के लिए यह एक प्रभावी सहयोगी के रूप में उभरने का अवसर है।

समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग, जलवायु परिवर्तन और टिकाऊ विकास जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के रिश्ते और अधिक गहरे और व्यापक होंगे। भारत, एक बढ़ती वैश्विक शक्ति के रूप में, मॉरीशस के लिए एक भरोसेमंद साझेदार बना रहेगा, और मॉरीशस के लिए भारत का समर्थन भारतीय महासागर में अपनी शक्ति और सुरक्षा बढ़ाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा।

भारत और मॉरीशस के संबंध एक आदर्श साझेदारी का उदाहरण पेश करते हैं, जो पारस्परिक सहयोग, रणनीतिक दृष्टिकोण और साझा ऐतिहासिक बंधनों पर आधारित है। आने वाले वर्षों में ये दोनों देश अपने संबंधों को और मजबूत करेंगे, और भारतीय महासागर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और समृद्धि को बढ़ावा देंगे।

 

370 అధికరణపై మోదీ స్ట్రాంగ్ వార్నింగ్

మహారాష్ట్ర అసెంబ్లీ ఎన్నికల ప్రచారంలో భాగంగా ధులేలో జరిగిన ఎన్నికల ర్యాలీలో మోదీ శుక్రవారంనాడు మాట్లాడుతూ, కాంగ్రెస్ పార్టీ పాకిస్థాన్ ఎజెండాను, కశ్మీర్‌లో వేర్పాటువాద భాషను ఇక్కడ కూడా ముందుకు తీసుకెళ్లే ప్రయత్నాలను ఓటర్లు తిప్పికొట్టాలన్నారు.

జమ్మూకశ్మీర్‌ (Jammu and Kashmir)లో కేంద్రం రద్దు చేసిన 370వ అధికరణ (Article 370)ను దేశంలోని ఏ శక్తి పునరుద్ధరించ లేదని ప్రధాన మంత్రి నరేంద్ర మోదీ (Narendra Modi) తెగేసి చెప్పారు. కేంద్ర పాలిత ప్రాంతంలో (జమ్మూకశ్మీర్) కాంగ్రెస్ పార్టీ కుట్రలను మహారాష్ట్ర ఓటర్లు గుర్తించాలని హెచ్చరించారు. మహారాష్ట్ర అసెంబ్లీ ఎన్నికల ప్రచారంలో భాగంగా ధులేలో జరిగిన ఎన్నికల ర్యాలీలో మోదీ శుక్రవారంనాడు మాట్లాడుతూ, కాంగ్రెస్ పార్టీ పాకిస్థాన్ ఎజెండాను, కశ్మీర్‌లో వేర్పాటువాద భాషను ఇక్కడ కూడా ముందుకు తీసుకెళ్లే ప్రయత్నాలను ఓటర్లు తిప్పికొట్టాలన్నారు. జమ్మూకశ్మీర్‌కు స్వయం ప్రతిపత్తిని కల్పించే 370వ అధికరణను తిరిగి పునరుద్ధరించాలంటూ రెండ్రోజుల క్రితం అక్కడి అధికార 'ఇండియా' కూటమి అసెంబ్లీలో తీర్మానం ఆమోదించిన నేపథ్యంలో మోదీ వ్యాఖ్యలు ప్రాధాన్యత సంతరించుకున్నాయి.

జమ్మూకశ్మీర్‌లో కాంగ్రెస్ కుట్రలను మహారాష్ట్ర ప్రజలు అవగాహన చేసుకోవాలని, 370వ అధికరణపై అక్కడి అసెంబ్లీ చేసిన తీర్మానాన్ని దేశం అంగీకరించిందని అన్నారు. ఏ శక్తి కూడా ఆ అధికరణను వెనక్కి తేలేదని స్పష్టం చేశారు. 370వ అధికరణకు మద్దతుగా అసెంబ్లీ వెలుపల బ్యానర్లు పెట్టారు. ఆ అధికరణను పునరుద్ధరించాలంటూ కాంగ్రెస్ కూటమి ఒక తీర్మానాన్ని ఆమోదించింది.. దీనిని దేశ ప్రజలు ఆమోదిస్తారా? ఈ ప్రయత్నాన్ని అడ్డుకునేందుకు బీజేపీ ఎమ్మెల్యేలు శక్తవంచన లేకుండా నిరసన తెలిపినప్పటికీ వారిని అసెంబ్లీ నుంచి బయటకు పంపించేశారు. కాంగ్రెస్ కూటమి నిజస్వరూపం ఏమిటో యావద్దేశం అవగాహన చేసుకోవాలి'' అని మోదీ అన్నారు.

370వ అధికరణను పునరుద్ధరించేందుకు దేశ ప్రజలు అంగీకరించరని, కశ్మీర్‌లో కాంగ్రెస్ పార్టీ ఆటలు మోదీ ఉన్నంత వరకూ సాగవని ప్రధాని అన్నారు. బీమ్‌రావ్ అంబేద్కర్ రాజ్యాంగం మాత్రమే అక్కడ నడుస్తుందని, ఏ శక్తీ 370వ అధికరణను వెనక్కి తేలేదని మరోసారి ఆయన స్పష్టం చేశారు. విపక్ష సభ్యలు తీవ్ర ప్రతిఘటన, నిరసనల మధ్య జమ్మూకశ్మీర్ అసెంబ్లీలో 370వ అధికరణను పునరుద్ధరించే తీర్మానాన్ని గత శుక్రవారంనాడు మూజువాణి ఓటుతో ఆమోదించారు.

चार दिवसीय छठ पर्व की आप सभी को ढेर सारी बधाई एवं शुभकामनाएं•••
चार दिवसीय छठ पर्व की आप सभी को ढेर सारी बधाई एवं शुभकामनाएं•••



भारत देश के वर्तमान पीएम श्री #नरेंद्र मोदी और सामने बिहार के लोकप्रिय #पत्रकार सह भाजपा नेता #मनीष कश्यप Narendra Modi Manish Kasyap Chandan Singh तस्वीर आपको कैसा लगा कमेंट कर जरूर बताइएगा फोटो श्रे - मनीष कश्यप का फेसबुक पेज।।