न्यायिक आदेश से गड़वाए गए पत्थर को उखाड़ने की धमकी का आरोप, पीड़ित ने प्रशासन से लगाई न्याय की गुहार नायब तहसीलदार पर बिना सूचना आदेश निरस्त करा
बुढ़नपुर (आजमगढ़)। तहसील क्षेत्र के पांडेयपुर गांव निवासी राजेश कुमार पांडेय पुत्र स्वर्गीय महेंद्र प्रताप पांडेय ने राजस्व विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने नायब तहसीलदार विवेकानंद पर बिना सूचना दिए आदेश निरस्त कराने, न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष कथित रूप से भ्रामक रिपोर्ट प्रस्तुत करने और पत्थर उखाड़कर फेंकने की धमकी देने का आरोप लगाया है। पीड़ित ने मामले की निष्पक्ष जांच कराकर न्याय दिलाने की मांग की है। राजेश कुमार पांडेय के अनुसार, कुछ दिन पूर्व न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर संबंधित भूमि की पैमाइश कराई गई थी तथा राजस्व टीम की मौजूदगी में पत्थर गड़वाया गया था। उनका आरोप है कि पैमाइश के बाद फील्ड बुक जमा नहीं की गई। इसके बाद नायब तहसीलदार विवेकानंद ने कथित तौर पर दोनों पक्षों की सहमति का हवाला देते हुए आदेश निरस्त करा दिया, जबकि इसकी जानकारी उन्हें नहीं दी गई। पीड़ित का आरोप है कि उन्हें विश्वास में लिए बिना आदेश निरस्त कराने की कार्रवाई की गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नायब तहसीलदार की ओर से न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष ऐसी रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, जिससे पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस बल से पत्थर उखड़वाने की धमकी देने का आरोप राजेश कुमार पांडेय का कहना है कि अब दोबारा पत्थर गड़वाने की कार्रवाई की बात कही जा रही है, जबकि पहले राजस्व टीम की मौजूदगी में पत्थर लगाया जा चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें बार-बार पत्थर उखड़वाकर फेंक देने और पुलिस बल का इस्तेमाल करने की धमकी दी जा रही है। इससे वह और उनका परिवार परेशान है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब भूमि की पैमाइश न्यायिक आदेश के तहत कराई गई थी, तो पूरी प्रक्रिया और संबंधित अभिलेखों की स्थिति स्पष्ट किए बिना ऐसी कार्रवाई क्यों की जा रही है? उनका कहना है कि यदि किसी आदेश को निरस्त किया गया है, तो उसकी जानकारी संबंधित पक्ष को देना और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना आवश्यक है। प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग पीड़ित ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए, पैमाइश से संबंधित अभिलेखों और फील्ड बुक की स्थिति स्पष्ट की जाए तथा आदेश निरस्त किए जाने की प्रक्रिया की जांच हो। साथ ही, उन्होंने आरोपों की जांच होने तक किसी भी प्रकार की मनमानी कार्रवाई से राहत दिलाने और नियमानुसार न्याय सुनिश्चित करने की मांग की है। अब सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित राजस्व अधिकारियों की भूमिका की जांच कराएगा, या पीड़ित को न्याय के लिए अधिकारियों के चक्कर काटने पड़ेंगे? फिलहाल, मामले में संबंधित अधिकारी का पक्ष सामने आना बाकी है।
Oct 18 2026, 18:46
- Whatsapp
- Facebook
- Linkedin
- Google Plus
3- Whatsapp
- Facebook
- Linkedin
- Google Plus
16.1k