दुर्गा पूजा की शोभायात्रा के रास्ते  लाल चौराहे पर नाला निर्माण दशहरे के बाद कराने की मांग पर,आश्वासन

तुलसीपुर। केंद्रीय श्री दुर्गा पूजा महासमिति द्वारा लगभग तीन दिन पूर्व जिलाधिकारी को  सम्बोधित  उपजिलाधिकारी  को पत्र देकर लाल चौराहे पर प्रारंभ किए गए नाला निर्माण कार्य को दशहरे के बाद तक स्थगित रखने का अनुरोध किया गया था।

महासमिति ने पत्र में अवगत कराया था कि इसी मार्ग से दुर्गा पूजा की शोभायात्रा दो बार होकर गुजरती है तथा नजदीक ही दुर्गा प्रतिमा का पंडाल भी स्थापित किया जाता है। निर्माण कार्य जारी रहने की स्थिति में गंदे पानी का बहना और मार्ग अवरुद्ध होने के साथ श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच दुर्घटना की आशंका बनी रह सकती है।

इसी क्रम में आज उप जिलाधिकारी  से केंद्रीय दुर्गा पूजा महासमिति के पदाधिकारियों द्वारा वार्ता की गई, जिसमें उप जिलाधिकारी  ने मामले को गंभीरता से लेते हुए लाल चौराहे पर चल रहे नाला निर्माण कार्य को तत्काल रुकवाने तथा दशहरे के बाद पुनः कार्य प्रारंभ कराने का आश्वासन दिया।

महासमिति ने प्रशासन के इस सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि दुर्गा पूजा एवं जैसे महत्वपूर्ण पर्वों में श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुगम आवागमन और शोभायात्रा की व्यवस्था सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
सुलतानपुर : अनियंत्रित कार ट्रक में घुसी, तीन की मौत
सुलतानपुर,। उत्तर प्रदेश में जिला सुलतानपुर के बल्दीराय थाना क्षेत्र स्थित सुखबडेरी के पास पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर बुधवार की सुबह करीब पांच बजे सड़क हादसा हुआ। माइलस्टोन 97.5 के पास एक तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर खड़े ट्रक में पीछे से जा घुसी। हादसे में देवरिया जिले के तीन लोगों की मौत हो गई,जबकि तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

राहगीरों और यूपीडा सुरक्षाकर्मियों ने कार का गेट तोड़कर घायलों को बाहर निकाला। सभी घायलों को एंबुलेंस से अयोध्या मेडिकल कॉलेज भेजा गया,जहां डॉक्टरों ने तीन को मृत घोषित कर दिया। मृतकों की पहचान नित्या प्रजापति (22), इरफान अंसारी (20) और अनिकेत (24) के रूप में हुई है। घायलों में आनंद यादव (23), राजू (22) और पश्चिम बंगाल के जयंतो शर्मा (30) शामिल है।

बल्दीराय क्षेत्राधिकारी आशुतोष कुमार ने बुधवार को बताया कि सभी कार सवार लखनऊ से देवरिया जा रहे थे। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल मे भर्ती कराया गया है। मृतक के परिजनों को सूचना दे दी गयी। पोस्टमार्टम की कार्रवाई की जा रही है। ।पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर हादसे की जांच शुरू कर दी है।

मुख्यमंत्री ने जताया दुख

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनपद सुल्तानपुर में हुए सड़क हादसे का संज्ञान लिया हैं। मुख्यमंत्री ने मृतकों के शोक संतप्त परिजन के प्रति संवेदना व्यक्त की हैं। उन्होंने अधिकारियों को तत्काल मौके पहुंच कर राहत कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को घायलों का समुचित उपचार करवाने और मृतकों के परिजनों से संवाद कर हर संभव सहायता उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए हैं।
अनियंत्रित डीसीएम मड़हे में घुसी, बालक समेत महिला गंभीर
मीरजापुर। उत्तर प्रदेश के मीरजापुर में चील्ह थाना क्षेत्र के मिश्रधाप गांव में मंगलवार रात अनियंत्रित डीसीएम टिनशेड के मड़हे में घुस गई। हादसे में मड़हे में सो रहे 14 वर्षीय अंश कुमार और 35 वर्षीय रीना देवी गंभीर रूप से घायल हो गईं। दोनों को ट्रामा सेंटर मीरजापुर ले जाया गया, जहां से हालत गंभीर होने पर वाराणसी रेफर कर दिया गया।

डीसीएम गोपीगंज से मीरजापुर की ओर जा रही थी। रात करीब 12:30 बजे चील्ह-गोपीगंज मार्ग से करीब 50 मीटर दूर मड़हे में जा घुसी।

सूचना पर पहुंचे चेतगंज चौकी प्रभारी संजय सिंह ने ट्रैक्टर से डीसीएम को पीछे खिंचवाकर घायलों को बाहर निकलवाया। पुलिस ने चालक को हिरासत में लेकर कार्रवाई शुरू कर दी है।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास अध्यक्ष का दावा: पांच करोड़ देकर संत प्रेमानंद के दरबार में बुलाए गये थे क्रिकेटर विराट कोहली
लखनऊ /मथुरा। श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश फलाहारी ने मंगलवार आरोप लगाया है कि भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली को संत प्रेमानंद महाराज के दरबार में लाने के लिए कथित तौर पर 05 करोड़ रुपये दिए गए थे, जिसके बाद संत प्रेमानंद की प्रसिद्धि देशभर में तेजी से बढ़ी।

दिनेश फलाहारी महाराज ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर संत प्रेमानंद महाराज की सुरक्षा बढ़ाने (जेड प्लस सुरक्षा) और आश्रम से जुड़ी गतिविधियों की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने दावा किया कि आश्रम परिसर के आसपास साधु के वेश में कुछ भूमाफिया और संदिग्ध लोग सक्रिय हैं, जो यमुना डूब क्षेत्र की जमीनों की खरीद-फरोख्त कर रहे हैं। इसके साथ ही पत्र में गायब बच्चों और संदिग्ध गतिविधियों को लेकर सीबीआई जांच की मांग भी की गई है।

फलाहारी महाराज ने संत प्रेमानंद से विवादों से दूर रहकर गोवर्धन में निवास करने की अपील की है। इन आरोपों और बयानबाजी के बाद ब्रज के कई प्रमुख संत और कथावाचक प्रेमानंद महाराज के समर्थन में उतर आए हैं। भागवताचार्य चित्रलेखा ने कहा कि बिना पूरी जानकारी के किसी महापुरुष पर टिप्पणी करना गलत है। अधूरा ज्ञान खतरनाक होता है और ऐसे में लोगों को मौन रहना चाहिए। वहीं महंत राजेंद्र दास महाराज (मलूक पीठ) का कहना है कि समाज संतों का योगदान देखे बिना उन पर कीचड़ उछालने में देर नहीं लगाता तथा भागवताचार्य अनिरुद्धाचार्य ने मीडिया और आलोचकों पर निशाना साधते हुए कहा कि बिना सच्चाई जाने संत प्रेमानंद महाराज को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। फिलहाल, इन गंभीर दावों के बाद ब्रज क्षेत्र में धार्मिक और प्रशासनिक हलकों के बीच चर्चाएं गर्म हैं।
वृंदावन के गुरुकुलम में वाटर टैंक में हादसा, चार छात्रों की मौत, मचा कोहराम

लखनऊ /मथुरा। उत्तर प्रदेश में जनपद मथुरा के वृंदावन के चैतन्य विहार सेक्टर- दो स्थित पाणिनि संस्कृत गुरुकुलम में मंगलवार रात पानी के टैंक की सफाई के दौरान जहरीली गैस की चपेट में आने से चार छात्रों की मौत हो गई, जबकि एक अन्य छात्र का अस्पताल में इलाज चल रहा है। घटना के बाद से गुरुकुलम का संचालक फरार है।

पुलिस के अनुसार, जिस जगह गुरुकुलम संचालित हो रहा है, वहां एक साल पहले तक 'उमा कमला' नाम से गेस्ट हाउस चलता था। वर्तमान में आशीष शर्मा ने इसे किराये पर लेकर गुरुकुलम शुरू किया, जहां लगभग 100 छात्र रहकर संस्कृत की पढ़ाई कर रहे हैं। मंगलवार रात करीब 10 बजे गुरुकुल संचालक आचार्य आशीष ने छात्रों को पीछे बने लगभग 12 फीट गहरे बंद पानी के टैंक को साफ करने के लिए कहा।

पुलिस ने बताया कि निर्देश मिलने पर पांच छात्र सफाई के लिए उतरे। सबसे पहले मनु कटारे टैंक का ढक्कन खोलकर अंदर उतरे, जहां जहरीली गैस के कारण उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। उन्हें बचाने के चक्कर में एक-एक करके बाकी विशू शर्मा (19, मेरठ), आर्यन पांडेय (16, प्रयागराज) और देवांश शर्मा (17) भी टैंक में उतर गए और उसकी चपेट में आ गए। छात्रों की चीख-पुकार सुनकर पड़ोस में रहने वाले कृष्णा तिवारी पहुंचे और अन्य आचार्यों व छात्रों की मदद से सभी को बाहर निकाला।

सूचना पाकर पर पहुंची पुलिस छात्रों को रामकृष्ण मिशन सेवा आश्रम तथा सौ शैया अस्पताल ले गई, जहां डॉक्टरों ने मनु कटारे (22, जबलपुर), विशू शर्मा (19, मेरठ), आर्यन पांडेय (16, प्रयागराज) और देवांश शर्मा (17) को मृत घोषित कर दिया। रुद्राक्ष अस्पताल में भर्ती है।

घटना की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी चंद्रप्रकाश सिंह, नगर आयुक्त ओजस्वी राज, एडीएम पंकज वर्मा और एसपी सिटी राजीव कुमार सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे। प्रशासन ने इस पूरे मामले की कड़ाई से जांच के आदेश दिए हैं और फरार संचालक की तलाश शुरू कर दी है। हादसे के बाद गुरुकुल के अन्य लोगों द्वारा पहचान छिपाने के लिए संस्थान का बोर्ड हटाने का मामला भी सामने आया है, जिसकी जांच की जा रही है।
2026 में भौतिक विज्ञान के नोबेल पुरस्कार पर विशेष विज्ञान लेख



*भौतिकी का नोबेल 2026: फ्रांसिस हाल्जेन और 'भूतिया कणों' की खोज।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि नोबेल पुरस्कार समिति की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार 6 अक्टूबर 2026 को रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने भौतिकी का नोबेल पुरस्कार बेल्जियम मूल के अमेरिकी वैज्ञानिक फ्रांसिस हाल्जेन (Francis Halzen) को घोषित किया है। उन्हें यह सम्मान "आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी में निर्णायक योगदान और ब्रह्मांडीय मूल के उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो की खोज" के लिए दिया गया है।
नोबेल समिति ने इन न्यूट्रिनो कणों को "अंतरिक्ष से आने वाले भूतिया संदेश" (Ghostly messages from space) करार दिया है,जो ब्रह्मांड के सबसे रौद्र और रहस्यमयी हिस्सों से सीधी सूचना लेकर आते हैं।

*विजेता और पुरस्कार का कारण क्या है।* खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि नोबेल पुरस्कार समिति की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार फ्रांसिस हाल्जेन वर्तमान में अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन-मैडिसन में प्रोफेसर हैं। उनका जन्म 1944 में बेल्जियम के टिएनेन शहर में हुआ था एवं
आधिकारिक घोषणा के अनुसार, हाल्जेन को यह पुरस्कार उनके उस अभूतपूर्व विचार और वैज्ञानिक नेतृत्व के लिए मिला है जिसके तहत उन्होंने दक्षिणी ध्रुव (अंटार्कटिका) की बर्फ का उपयोग न्यूट्रिनो कणों को पकड़ने के लिए किया।  नोबेल समिति के अध्यक्ष मार्क पियर्स ने कहा, "फ्रांसिस हाल्जेन ने शोधकर्ताओं और इंजीनियरों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम का नेतृत्व किया है जिसने हमें एक शानदार उपकरण दिया है। उनकी दृढ़ता और वैज्ञानिक दृष्टि ने एक नए प्रकार के खगोल विज्ञान का मार्ग प्रशस्त किया है।" और इस वर्ष भौतिकी की नोबेल पुरस्कार राशि 12 मिलियन स्वीडिश क्रोनर (लगभग 1.2 मिलियन अमेरिकी डॉलर) है, जो पूरी तरह से हाल्जेन को दी जाएगी क्योंकि इस वर्ष यह पुरस्कार केवल एक ही वैज्ञानिक को दिया गया है।
*क्या होते हैं,न्यूट्रिनो: ब्रह्मांड के 'भूतिया कण'।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि न्यूट्रिनो, ब्रह्मांड के सबसे बुनियादी और रहस्यमयी उप-परमाणु कणों में से एक हैं। इन्हें 'घोस्ट पार्टिकल्स' (Ghost Particles या भूतिया कण) भी कहा जाता है क्योंकि इन पर कोई विद्युत आवेश नहीं होता और इनका द्रव्यमान लगभग न के बराबर होता है।
ये कण सुदूर अंतरिक्ष में होने वाली भीषण घटनाओं (जैसे सुपरनोवा विस्फोट, ब्लैक होल, सक्रिय आकाशगंगाओं के केंद्र) से पैदा होते हैं और प्रकाश की गति से यात्रा करते हैं। चूंकि ये सामान्य पदार्थ के साथ बहुत कम प्रतिक्रिया करते हैं, या कुछ यूं कहें कि बिल्कुल भी नहीं के बराबर प्रतिक्रिया करते हैं इसलिए ये बिना रुके पृथ्वी, इंसानों, चट्टानों,पहाड़ों और ग्रहों आदि के पार निकल जाते हैं। और यह तक भी पता नहीं चलता कि कब यह कण उनको पार कर रहे हैं। और यह भी जानना ज़रूरी है कि हर सेकंड अरबों-खरबों न्यूट्रिनो हमारे शरीर और पृथ्वी से होकर गुजरते रहते हैं, लेकिन उनमें से अधिकांश बिना किसी क्रिया के निकल जाते हैं, इसी वजह से इन्हें सामान्य टेलिस्कोप से देख पाना या पकड़ पाना नामुमकिन था।
*क्या है,आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी: बर्फ का विशाल दूरबीन* ।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि नोबेल पुरस्कार समिति के अनुसार फ्रांसिस हाल्जेन ने 1988 में एक अभूतपूर्व विचार रखा कि अंतरिक्ष से आने वाले इन रहस्यमयी कणों को पकड़ने के लिए दक्षिणी ध्रुव (South Pole, अंटार्कटिका) की विशाल बर्फ का उपयोग किया जा सकता है।उनके इसी दृष्टिकोण के कारण अंटार्कटिका की गहराई में बर्फ के नीचे 1 क्यूबिक किलोमीटर के दायरे में दुनिया का पहला विशालकाय न्यूट्रिनो डिटेक्टर बनाया गया, जिसे आइसक्यूब (IceCube) कहा जाता है। *आइसक्यूब कैसे काम करता है?।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि आइसक्यूब ऑब्जर्वेटरी की आधिकारिक सूची के अनुसार आइसक्यूब में बर्फ के अंदर हजारों बेहद संवेदनशील लाइट सेंसर्स (प्रकाश डिटेक्टर या Digital Optical Modules) लगाए गए हैं, जिन्हें लगभग 1,450 से 2,450 मीटर की गहराई पर बर्फ में लगाया गया है।
जब कोई,उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो बर्फ के परमाणुओं से टकराता है, तो एक हल्की नीली रोशनी जिसे खगोलविज्ञान में (Cherenkov radiation) चेरेनकोव विकिरण कहा जाता है। यह तब उत्पन्न होता है जब कोई आवेशित कण (जैसे इलेक्ट्रॉन) किसी माध्यम (जैसे पानी या काँच) में लगभग प्रकाश की गति से यात्रा करता है। इसके कारण आमतौर पर पानी के भीतर एक चमकदार नीली रोशनी दिखाई देती है,(Cherenkov radiation) पैदा होती है, जिसे ये सेंसर रिकॉर्ड कर लेते हैं। फिर वैज्ञानिक उस सिग्नल से पता लगाते हैं कि कण कहाँ से आया, उसकी दिशा क्या थी, उसकी ऊर्जा कितनी थी और संभवतः वह किस खगोलीय स्रोत से आया। साथ ही यह भी जानना ज़रूरी है कि दक्षिणी ध्रुव की बर्फ का उपयोग करने के कई फायदे हैं जैसे कि यह बर्फ विभिन्न प्रकार के हस्तक्षेप से मुक्त है और यह क्षेत्र भूगर्भीय रूप से स्थिर है, यहाँ कोई भूकंप नहीं आते। अगर हम इस आइसक्यूब के निर्माण की बात करें तो पाते हैं कि आइसक्यूब का निर्माण दिसंबर 2010 में पूरा हुआ था और इसकी कुल लागत लगभग 279 मिलियन डॉलर थी।
*2013 की ऐतिहासिक खोज और महत्व क्या है?।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि आइसक्यूब न्यूट्रिनो वेधशाला (IceCube Neutrino Observatory)  की आधिकारिक विश्व वैज्ञानिक समुदाय की पुष्टि के अनुसार सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक 2013 में उच्च-ऊर्जा खगोलीय न्यूट्रिनो (high-energy astrophysical neutrinos) का पहली बार स्पष्ट अवलोकन था।
इनमें कुछ न्यूट्रिनो की ऊर्जा पेटाइलेक्ट्रॉनवोल्ट Petaelectronvolt (PeV) स्तर तक थी,(पेटाइलेक्ट्रॉनवोल्ट (Petaelectronvolt) ऊर्जा को मापने की एक अत्यंत विशाल इकाई (यूनिट) है)।अर्थात अत्यंत विशाल ऊर्जा। इस खोज ने यह प्रमाणित किया कि हमारे ब्रह्मांड में ऐसे प्राकृतिक स्रोत मौजूद हैं जो अत्यधिक ऊर्जावान न्यूट्रिनो उत्पन्न करते हैं। *इस खोज का विज्ञान की दुनिया में क्या महत्व है?।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि फ्रांसिस हाल्जेन के इस काम ने खगोल विज्ञान (Astronomy) के एक बिल्कुल नए युग की शुरुआत की है। इस खोज से आगे आने वाले समय में ब्रह्मांड के कई अनसुलझे रहस्यों से पर्दा उठ सकता है क्योंकि न्यूट्रिनो अंतरिक्ष के उन सुदूर और रौद्र एवं अज्ञात कोनों की जानकारी लाते हैं, जहाँ से प्रकाश भी बाहर नहीं आ पाता (जैसे कि एक्टिव गैलेक्टिक न्यूक्लिआई या विशाल ब्लैक होल)। अब अगर हम बात करें पारंपरिक दूरबीनों एवं अन्य विधाओं की तो पाते हैं कि उनसे न्यूट्रिनों को पूरी तरीके से समझना आसान नहीं था या इसको और भी आसान भाषा में समझने की कोशिश करें तो पाते हैं कि अछूते ब्रह्मांड को देखने के साथ ही पारंपरिक टेलिस्कोप केवल प्रकाश या इलेक्ट्रोमैग्नेटिक किरणों को देख सकते हैं, लेकिन आइसक्यूब ऑब्जर्वेटरी की मदद से वैज्ञानिक अब उन अनदेखी घटनाओं का अध्ययन कर पा रहे हैं जो अरबों प्रकाश वर्ष दूर उस काले घने अंधकारमय ब्रह्मांडीय गुफाओं में घटित हो रही हैं। साथ ही इसे मल्टी-मैसेंजर एस्ट्रोनॉमी के व्यापक विकास के संदर्भ में भी देखा जा सकता है,जहाँ प्रकाश, गुरूत्वीय तरंगें ( gravitational waves), कॉस्मिक रेज (cosmic rays)और न्यूट्रिनों (neutrinos) जैसे अलग-अलग ब्रह्मांडीय संदेशबाहकों (cosmic messengers) से ब्रह्मांड की जानकारी प्राप्त की जाती है। साथ ही यह भी ज्ञात हो कि 2018 में,आइसक्यूब ऑब्जर्वेटरी ने एक अत्यंत उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो को TXS 0506+056 नामक ब्लेज़र (blazar) तक ट्रेस किया,जो ओरायन तारामंडल की दिशा में 3.7 अरब प्रकाश वर्ष दूर स्थित है। यह पहली बार था जब किसी न्यूट्रिनो को उसके विशिष्ट खगोलीय स्रोत से जोड़ा गया।
*क्यों इतना अनोखा है, न्यूट्रिनो और इन्हें खोजना भी इतना मुश्किल क्यों था* ?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि न्यूट्रिनो,ब्रह्मांड के सबसे बुनियादी और रहस्यमयी उप-परमाणु कणों (Subatomic particles) में से एक हैं। इन्हें 'घोस्ट पार्टिकल्स' (Ghost Particles या भूतिया कण) भी कहा जाता है, इन कणों पर कोई विद्युत आवेश (Charge) नहीं होता और इनका द्रव्यमान (Mass) लगभग न के बराबर ही होता है या कुछ यूं कहें कि लगभग कोई द्रव्यमान नहीं है और ये कण सुदूर अंतरिक्ष में होने वाली उग्र घटनाओं (जैसे सुपरनोवा विस्फोट, ब्लैक होल आदि) से पैदा होते हैं और प्रकाश की गति से यात्रा करते हैं चूंकि ये सामान्य पदार्थ के साथ कोई प्रतिक्रिया भी प्रदर्शित नहीं करते हैं इसलिए ये बिना रुके पृथ्वी, इंसानों, चट्टानों ,पहाड़ों और ग्रहों आदि के पार निकल जाते हैं, इसी वजह से इन्हें सामान्य टेलिस्कोप से देख पाना या पकड़ पाना नामुमकिन था, इसलिए इसमें बर्फ के अंदर हजारों बेहद संवेदनशील लाइट सेंसर्स (प्रकाश डिटेक्टर) लगाए गए हैं। जब कोई उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो बर्फ के परमाणुओं से टकराता है, तो एक हल्की नीली रोशनी पैदा होती है, जिसे ये सेंसर रिकॉर्ड कर लेते हैं। इसीलिए इन उच्च ऊर्जा यूट्रिनो को खोजना इतना अनोखा और इतना मुश्किल एवं चुनौतीपूर्ण था। और यही कार्य एवं इनकी खोज करने के लिए बर्ष 2026 का भौतिकी (फिजिक्स) का नोबेल पुरस्कार वैज्ञानिक फ्रांसिस हाल्जेन (Francis Halzen) को अंतरिक्षीय मूल के उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो (high-energy neutrinos of astrophysical origin) की खोज और आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी (IceCube Neutrino Observatory) में उनके निर्णायक योगदान के लिए देने की घोषणा की गई है। उन्होंने अंतरिक्ष से धरती तक आने वाले बेहद ताकतवर और मायावी कणों न्यूट्रिनो को पकड़ने और उनका पता लगाने का तरीका खोजा है एवं आइसक्यूब ऑब्जर्वेटरी जहां उन्होंने दक्षिण ध्रुव (Antarctic) की गहरी बर्फ में हजारों लाइट सेंसर लगाकर दुनिया की पहली विशाल न्यूट्रिनो वेधशाला की नींव रखी, जिससे ब्रह्मांड की ऊर्जावान प्रक्रियाओं का अध्ययन संभव हुआ। साथ ही नई प्रकार की खगोल विज्ञान को भी जन्म दिया है या कुछ यूं कहें कि इस खोज ने खगोल विज्ञान (Astronomy) की एक बिल्कुल नई विधा का मार्ग प्रशस्त किया है, जिससे दूरस्थ आकाशगंगाओं और ब्रह्मांड के रहस्यों को समझने में मदद मिलती है।

*क्या है न्यूट्रिनो (Neutrino) कण की कहानी ? ।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि न्यूट्रिनो (Neutrino) कण का सबसे पहले सैद्धांतिक अनुमान वर्ष 1930 में वोल्फगैंग पाउली (Wolfgang Pauli) ने लगाया था,जबकि वर्ष 1956 में क्लाइड कोवान (Clyde Cowan) और फ्रेडरिक रेइन्स (Frederick Reines) ने इसका प्रयोगात्मक रूप से पता लगाया (खोज की) अब अगर हम बात करें न्यूट्रिनो से जुड़े मुख्य तथ्य सैद्धांतिक प्रस्ताव की तो पाते हैं कि 1930 में वोल्फगैंग पाउली ने बीटा क्षय (beta decay) में ऊर्जा संरक्षण के नियम को समझाने के लिए इस काल्पनिक कण का सुझाव दिया था एवं इसके नामकरण की बात करें तो पाते हैं कि इसका नामकरण एक इतालवी भौतिक विज्ञानी एनरिको फर्मी ने इस कण का नाम 'न्यूट्रिनो' रखा, जिसका अर्थ "छोटा उदासीन कण" है। साथ ही इसके प्रयोगात्मक खोज की बात करें तो पाते हैं कि 1956 में क्लाइड कोवान और फ्रेडरिक रेइन्स ने परमाणु रिएक्टर का उपयोग करके पहली बार न्यूट्रिनो का प्रायोगिक प्रमाण प्राप्त किया। इस खोज के लिए फ्रेडरिक रेइन्स को 1995 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला  और अब वर्ष 2026 की बात करें तो पाते हैं कि 2026 का भौतिकी (फिजिक्स) का नोबेल पुरस्कार वैज्ञानिक फ्रांसिस हाल्जेन (Francis Halzen) को अंतरिक्षीय मूल के उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो (high-energy neutrinos of astrophysical origin) की खोज और आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी (IceCube Neutrino Observatory) में उनके निर्णायक योगदान के लिए दिया गया है,क्योंकि उन्होंने अंतरिक्ष से धरती तक आने वाले बेहद ताकतवर और मायावी कणों जिन्हें न्यूट्रिनो कहा जाता है को पकड़ने और उनका पता लगाने का तरीका खोजा।

*भारत के शोधकर्ताओं के लिए इस खोज का क्या महत्व हो सकता है?।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि भारतीय छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए यह खोज विशेष महत्व रखती है क्योंकि यह दर्शाती है कि कैसे एक साधारण विचार (दक्षिणी ध्रुव की बर्फ का उपयोग) और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से ब्रह्मांड के सबसे बड़े रहस्यों को सुलझाया जा सकता है।
आइसक्यूब एक अंतरराष्ट्रीय सहयोग है, जिसमें लगभग 450 भौतिक विज्ञानी, 58 संस्थान और 14 देश शामिल हैं। साथ ही अंटार्कटिका के दक्षिणी ध्रुव पर स्थित IceCube Neutrino Observatory (आइसक्यूब न्यूट्रिनो वेधशाला) के संदर्भ में भारत का महत्व भी कुछ मुख्य बिंदुओं से समझा जा सकता है। जैसा कि हम जानते हैं कि आइसक्यूब एक अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक परियोजना है, लेकिन वैसे तो भारत का इस वेधशाला से प्रत्यक्ष या सीधे तौर पर संबंध नहीं है, लेकिन भारतीय वैज्ञानिक, शोधकर्ता और संस्थान वैश्विक स्तर पर इस प्रयोग के डेटा विश्लेषण, कोडिंग और इसके माध्यम से की जाने वाली ब्रह्मांडीय खोजों (जैसे "घोस्ट पार्टिकल्स" या न्यूट्रिनो की पहचान) में अनुसंधान के ओपन-सोर्स डेटा का विश्लेषण करते हैं।और साथ में यह भी जानना आवश्यक है कि भारत भी अपना न्यूट्रिनो प्रोजेक्ट  INO (India-based Neutrino Observatory) बनाने के लिए प्रयास कर रहा है इसीलिए जब भी विज्ञान में आइस क्यूब ऑब्जर्वेटरी (IceCube Observatory) की बात होती है, तो उसके समानांतर भारत के अपने प्रोजेक्ट INO (इंडिया-बेस्ड न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी) की चर्चा जरूर होती है। लेकिन दोनों में अंतर क्या है? यह भी जानना ज़रूरी है,जहाँ आइस क्यूब अंटार्कटिका की गहरी बर्फ (Ice) के नीचे न्यूट्रिनो ढूंढता है, वहीं भारत का आई०एन० ओ०,(INO)  प्रोजेक्ट तमिलनाडु के थेनी जिले की बोदी पश्चिम पहाड़ियों में जमीन के नीचे एक विशाल प्रयोगशाला बनाने की योजना है एवं इसके लोकेशन के महत्व की बात करें तो पाते हैं कि भारत की भौगोलिक स्थिति भूमध्य रेखा (Equator) के पास है,यहाँ बनाई जाने वाली ऑब्जर्वेटरी से वैज्ञानिकों को उन न्यूट्रिनो कणों का भी अध्ययन करने में मदद मिल मिलेगी जो पृथ्वी के कोर (केंद्र) से होकर गुजरते हैं साथ ही यह डेटा,आइस क्यूब जैसी ध्रुवीय (Polar) ऑब्जर्वेटरी के पूरक के रूप में काम आ सकता है। लेकिन अभी तो इस प्रोजेक्ट की संपूर्ण स्थापना को कई चुनौतियों से निबटना बाकी है। खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि अब हम पुनः संक्षेप में फ्रांसिस हाल्जेन एवं आइस क्यूब ऑब्जर्वेटरी की बात करें तो पाते हैं कि फ्रांसिस हाल्जेन ने अंटार्कटिका की बर्फ को एक अनोखी विशाल दूरबीन में बदल दिया, जिसने विज्ञान को ब्रह्मांड के उन सबसे रहस्यमयी 'भूतिया कणों' को पकड़ने और समझने की शक्ति दी,जो अब तक इंसान की पहुंच से पूरी तरह बाहर थे। इसीलिए यह भी समझना ज़रूरी है कि यह नोबेल पुरस्कार केवल किसी एक व्यक्ति द्वारा अकेले किए गए प्रयोग के लिए नहीं है बल्कि हाल्जेन का सम्मान उनके निर्णायक वैज्ञानिक योगदान, दृष्टि और आइसक्यूब के नेतृत्व तथा उच्च-ऊर्जा खगोलीय न्यूट्रिनो की खोज से जुड़ा है। जो निश्चित तौर पर यह दर्शाता है कि अगर टीम भावना से एवं समग्र रूप से दृढ़ संकल्प और सकारात्मकता से लगातार कोई भी कार्य किया जाता है तो एक दिन उन अच्छे कार्यों का फल और किसी भी समस्या का हल भी अवश्य ही प्राप्त होता है।और इसी को सार्थक होता हुआ देख सकते है कि नोबेल पुरस्कार समिति द्वारा 2026 के भौतिकी के नोबेल पुरस्कार को देने की घोषणा, फ्रांसिस हाल्जेन (Francis Halzen) को की गई है।
धानापुर में बैंक के दो बकायेदारों की जमीन एस डी एम के आदेश पर हुईं कुर्क,

चंदौली।  धानापुर क्षेत्र के मढ़ान गांव निवासी दो बकायेदारों की उनके वैधानिक हिस्से की जमीन कुर्क कर ली। दोनों पर बैंक का कुल 5,38,037 रुपये बकाया है। प्रशासन के अनुसार कुर्क की गई जमीन की 21 दिन बाद नीलामी की जाएगी। कार्रवाई से अन्य बकायेदारों में भी हड़कंप मच गया है।
तहसील प्रशासन ने क्षेत्र के 10 बड़े बकायेदारों की सूची तैयार की है। इसी सूची में मढ़ान गांव निवासी दो बकायेदार शामिल हैं। एक पर 3,12,141 रुपये और दूसरे पर 2,25,896 रुपये का बैंक बकाया है। बकाया राशि जमा नहीं करने पर दोनों के खिलाफ आरसी जारी की गई थी।


बैंक के बकाये की वसूली के लिए कई बार संग्रह कर्मियों को उनके घर भेजा गया, लेकिन इसके बावजूद रकम जमा नहीं की गई। इसके बाद प्रशासन की ओर से दोनों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट भी जारी किया गया। प्रशासन के अनुसार वारंट जारी होने के बाद दोनों बकायेदार फरार हो गए।

इसके बाद एसडीएम सकलडीहा आकांक्षा सिंह के आदेश पर तहसील प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए बकायेदारों की जमीन में उनके कानूनी हिस्से को चिह्नित कर कुर्क कर लिया। प्रशासन अब कुर्की के बाद नियमानुसार नीलामी की प्रक्रिया पूरी करेगा।

तहसील प्रशासन के मुताबिक कुर्क की गई जमीन को निर्धारित प्रक्रिया के तहत 21 दिन बाद नीलाम किया जाएगा। नीलामी से प्राप्त धनराशि से बैंक के बकाये की वसूली की जाएगी।

एसडीएम आकांक्षा सिंह ने बताया कि बैंक के बकायेदारों के खिलाफ वसूली अभियान लगातार जारी रहेगा। बकाया राशि जमा नहीं करने वाले अन्य बड़े बकायेदारों के खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

कार्रवाई के दौरान बिहारी सिंह यादव, रामाश्रय और उमाशंकर सिंह सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
थाना को0 मनकापुर पुलिस द्वारा नाबालिग लडकी को बहला-फुसलाकर ले जाने के वांछित अभियुक्त को किया गया गिरफ्तार

*घटना का संक्षिप्त विवरण-*
दिनांक गोण्डा।27/28.06.2026 की रात्रि ग्राम तेन्दुआ कला, थाना कोतवाली मनकापुर क्षेत्र निवासी नाबालिग पुत्री घर से लापता हो गई थी। परिजनों द्वारा खोजबीन के दौरान गांव के ही निवासी राजू खाँ पुत्र तशरीफ द्वारा किशोरी को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले जाने का आरोप लगाया गया। परिजनों द्वारा थाना कोतवाली मनकापुर पर तहरीर दी गई।

*पुलिस कार्यवाही-*
प्राप्त तहरीर के आधार पर थाना कोतवाली मनकापुर पर सुसंगत धाराओ में अभियोग पंजीकृत किया गया तथा नाबालिग किशोरी की सकुशल बरामदगी एवं अभियुक्त की गिरफ्तारी हेतु पुलिस टीम द्वारा लगातार पतारसी-सुरागरसी की जा रही थी। दिनांक 06.10.2026 को पुलिस टीम गोण्डा शहर स्थित रोडवेज बस स्टेशन पर किशोरी एवं अभियुक्त की तलाश में मौजूद थी। इसी दौरान मुखबिर खास से सूचना प्राप्त हुई कि मुकदमे से संबंधित किशोरी एवं अभियुक्त राजू खाँ एलबीएस चौराहे पर कहीं जाने की फिराक में साधन का इंतजार कर रहे हैं। सूचना पर तत्काल पुलिस टीम द्वारा मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की गई। पुलिस टीम को देखकर अभियुक्त राजू खाँ द्वारा भागने का प्रयास किया गया, जिसे पुलिस कर्मियों द्वारा मौके पर पकड़ लिया गया। मौके पर मौजूद बुर्का पहने किशोरी की पहचान उसके भाई द्वारा अपनी बहन के रूप में की गई। महिला पुलिसकर्मी की निगरानी में किशोरी को सकुशल बरामद कर थाना लाया गया। गिरफ्तार अभियुक्त के विरूध्द थाना को0 मनकापुर पुलिस  द्वारा अग्रिम विधिक कार्यवाही कर माननीय न्यायालय रवाना किया गया।
नगर निकायों के विकास कार्यों की जिलाधिकारी ने की गहन समीक्षा, लापरवाही पर कार्रवाई के निर्देश


*धानेपुर, तरबगंज और परसपुर में कार्यों की गुणवत्ता पर नाराजगी, जांच के निर्देश*


*नगर पालिका गोण्डा में देरी पर ईओ का वेतन रोकने के निर्देश, लापरवाह संस्था को ब्लैकलिस्ट करने के आदेश*


*गोण्डा 06 अक्टूबर,2026*।
कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी श्रीमती प्रियंका निरंजन की अध्यक्षता में जनपद के स्थानीय नगर निकायों में विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत कराए जा रहे विकास कार्यों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में नगरपालिकाओं एवं नगर पंचायतों में संचालित विकास कार्यों की प्रगति, गुणवत्ता एवं समयबद्धता की विस्तृत समीक्षा की गई।

जिलाधिकारी ने सभी नगर पंचायतों एवं नगरपालिकाओं के वार्डों में संचालित विभिन्न योजनाओं—सीवरेज एवं जल निकासी योजना, पं. दीन दयाल उपाध्याय नगर विकास योजना, पेयजल व्यवस्था योजना, आकांक्षी नगर योजना, अन्त्येष्टि स्थल योजना, नगरीय झील/तालाब/पोखर संरक्षण योजना, वंदन योजना तथा मुख्यमंत्री वैश्विक नगरोदय योजना आदि—के अंतर्गत कराए जा रहे कार्यों की जानकारी ली।

बैठक में मोहल्ला एवं वार्डवार नाली निर्माण, नाला निर्माण, पार्क निर्माण, कवर आरसीसी रोड निर्माण, हाईमास्ट लाइट, ओपन जिम निर्माण, तालाब सौन्दर्यीकरण सहित अन्य कार्यों की कार्य प्रारम्भ होने से पूर्व तथा कार्य पूर्ण होने के बाद की जियो-टैग फोटोग्राफ के माध्यम से पीपीटी प्रस्तुति कर गहन समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि विकास कार्यों में गुणवत्ता, पारदर्शिता एवं समयबद्धता का विशेष ध्यान रखा जाए तथा किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

समीक्षा के दौरान नगर पंचायत धानेपुर में कराए गए कार्य संतोषजनक न पाए जाने पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने अधिशासी अधिकारी धानेपुर रागिनी वर्मा को शोकाज नोटिस जारी करने तथा संबंधित कार्यों की जांच कराने के निर्देश दिए।

इसी प्रकार नगर पंचायत तरबगंज में कराए गए कार्य सही स्थिति में न पाए जाने पर जिलाधिकारी ने अधिशासी अधिकारी तरबगंज अमरनाथ को शोकाज नोटिस जारी करने एवं उनका वेतन रोकने के निर्देश दिए। साथ ही नगर पंचायत में कराए गए एवं वर्तमान में चल रहे सभी कार्यों की जांच कराने के लिए अपर जिलाधिकारी को निर्देशित किया।

नगर पंचायत परसपुर में निर्माणाधीन अन्त्येष्टि स्थल के कार्य की स्थिति संतोषजनक न पाए जाने पर भी जिलाधिकारी ने नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने अधिशासी अधिकारी बेलसर अनुराग शुक्ला को शोकाज नोटिस जारी करने तथा नगर पंचायत में कराए गए एवं चल रहे कार्यों की जांच कराने के निर्देश अपर जिलाधिकारी को दिए।

नगर पालिका गोण्डा में समय से नाला निर्माण कार्य पूर्ण न होने तथा विभिन्न वार्डों में कार्य प्रारम्भ न किए जाने पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने अधिशासी अधिकारी नगर पालिका गोण्डा संतराम का वेतन रोकने के निर्देश दिए। साथ ही स्पष्ट निर्देश दिए कि जिन कार्यों को संबंधित संस्था द्वारा प्रारम्भ नहीं किया गया है, ऐसी संस्था को ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

जिलाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि विकास कार्यों की नियमित निगरानी करते हुए निर्धारित समयसीमा में कार्य पूर्ण कराए जाएं। उन्होंने कहा कि जनहित से जुड़े कार्यों में गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा तथा कार्यों की वास्तविक स्थिति की जांच के लिए जियो-टैग फोटोग्राफ एवं स्थलीय निरीक्षण को प्राथमिकता दी जाए।

बैठक में अपर जिलाधिकारी प्रमोद झा, अधिशासी अधिकारी नगरपालिका गोण्डा, करनैलगंज, नवाबगंज, नगर पंचायत परसपुर, बेलसर, खरगूपुर, तरबगंज, मनकापुर, धानेपुर एवं कटरा बाजार तथा एलबीसी अनिल सिंह सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
कृपाशंकर सिंह ने दी विद्यासागर सोनकर को बधाई
लखनऊ । महाराष्ट्र के पूर्व गृह राज्य मंत्री तथा जौनपुर लोकसभा के पूर्व प्रत्याशी कृपाशंकर सिंह ने पूर्व सांसद तथा विधान परिषद सदस्य विद्यासागर सोनकर को राज्यसभा निर्वाचन के लिए नामांकन के बाद बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। कृपाशंकर ने कहा कि विद्यासागर सोनकर भारतीय जनता पार्टी के लोकप्रिय नेता होने के साथ-साथ जनता के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। उन्होंने सोनकर का सम्मान करते हुए कहा कि श्री सोनकर एक कुशल संगठक तथा पार्टी के प्रति पूरी तरह से समर्पित जनप्रिय नेता हैं।