9/10 सितंबर 2026 को होगी, एप्सिलॉन पर्सिडस उल्का वर्षा

अज्ञात धूमकेतु से उत्पन्न, एप्सिलॉन पर्सिडस उल्का वर्षा होगी ख़ास।

जानें,उल्का वर्षा से संबंधित सभी ख़ास रोचक जानकारियां।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि खगोल प्रेमियों के लिए 9/10 सितंबर 2026 को एक विशेष दुर्लभ एवं ख़ास खगोलीय नज़ारा देखने को मिलेगा, खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि अगस्त में होने वाली प्रसिद्ध पर्सिड उल्का वर्षा भले ही समाप्त हो गई हो, लेकिन पर्सियस अभी भी टूटते तारे पैदा करना बंद नहीं कर रहा है,क्योंकि सितंबर में एक कम ज्ञात उल्का वर्षा आ रही है और 2026 में इसे देखने के लिए आसमान में असामान्य रूप से अंधेरा भी रहेगा। खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि सितंबर में होने वाली एप्सिलॉन पर्सिड उल्का वर्षा 9 सितंबर, 2026 को अपने चरम पर होगी, जिससे मानसून (वर्षा ऋतु) के अंतिम चरण के अंत में आकाश में तेज़ गति से चलने वाले उल्का वृष्टि दिखाई देगी लेकिन यह प्रसिद्ध अगस्त पर्सिड उल्का वर्षा की तुलना में काफी छोटी है, फिर भी इस वर्ष इसका एक बड़ा लाभ यह है कि इस उल्का वृष्टि के दौरान चंद्रमा की रोशनी लगभग नहीं के बराबर होगी ।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि अगर आपको लगता था कि उल्का वृष्टि का मौसम अगस्त में होने वाले शानदार पर्सिड्स उल्कापिंडों के साथ समाप्त हो गया है, तो आसमान की ओर देखने का एक और कारण है, सितंबर में होने वाली एप्सिलॉन पर्सिडस उल्का वर्षा जिसमें आकाश में तेज़ गति से चलने वाली उल्काएं दिखाई देंगी और सितम्बर 2026 में खगोलविदों के ध्यान देने का एक और भी कारण है कि खगोलीय गणनाओं से पता चलता है कि पृथ्वी 10 सितंबर की सुबह/ भोर में धूमकेतुओं के मलबे की एक पुरानी लकीर से वायुमंडलीय घर्षण कर सकती है,जिससे संभवतः उल्का गतिविधि में संक्षिप्त वृद्धि हो सकती है, लेकिन यह पूरी तरीके से निश्चित नहीं है, लेकिन अगर ऐसा हुआ तो इससे इस वर्ष सितंबर की उल्का वर्षा सामान्य से अधिक रोचक हो सकती है।

सितंबर में एप्सिलॉन पर्सिड्स उल्का देखने का सबसे अच्छा समय एवं चरम समय क्या होगा।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस एप्सिलॉन पर्सिड्स उल्का वर्षा को देखने के लिए 9 सितंबर 2026 की मध्य रात्रि से 10 सितंबर 2026 की सुबह/भोर तक सबसे ज्यादा अच्छा रह सकता है क्योंकि उस दौरान इसका चरम सक्रिय समय भी रहेगा।

इस दौरान कितनी उल्काएं देख सकते हैं

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि वैसे तो यह एप्सिलॉन पर्सिड्स उल्का वर्षा, लगभग 5 से 21 सितंबर 2026 तक सक्रिय रहेगी लेकिन 9 सितंबर 2026 की मध्य रात्रि से 10 सितम्बर की भोर को इसका चरम समय होने के कारण आदर्श परिस्थितियों में इसकी अनुमानित दर लगभग 5 से 8 उल्काएं प्रति घंटा तक हो सकती है लेकिन सामान्य दर कई वर्षों में लगभग 5 उल्कापिंड प्रति घंटा ही रही है,और अगर हम इसकी गति की बात करें तो पाते हैं कि एप्सिलॉन पर्सिड्स उल्का की गति लगभग 64 किमी प्रति सेकंड से लेकर 70 किलोमीटर प्रति सेकंड तक भी हो सकती है, इस सितंबर 2026 में होने वाली एप्सिलॉन पर्सिड्स उल्का वृष्टि भारत के लिए देखने का सबसे अच्छा समय 9 सितंबर, 2026 को आधी रात के बाद से सुबह तक रहेगा और भोर से पहले के घंटे में यह उल्का वृष्टि सबसे अधिक प्रकाशमान बिंदु प्रदान कर सकती हैं, साथ ही आदर्श अंधेरे आसमान की स्थिति में उत्तरपूर्वी क्षितिज की ओर, पर्सियस तारामंडल के पास सबसे अच्छा दिखाई देंगी और साथ ही लगभग अमावस्या के चांद के कारण आसमान में उत्कृष्ट अंधेरा भी रहेगा इसीलिए बस मौसम साफ़ और शहर के प्रकाश प्रदूषण की रोशनी से दूर एक सुंदर,साफ़, संपूर्ण सुरक्षित एवं पूर्ण सावधानी पूर्वक एक आदर्श अंधेरी जगह ढूंढ लेंगे तो परिस्थितियां और भी सर्वश्रेष्ठ हो सकती हैं।

दुनियां में और भारत में दृश्यता क्या और कैसी रहेगी ।?

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि भारत उत्तरी गोलार्ध (Northern Hemisphere) में आता है और यह उल्का बौछार मुख्य रूप से उत्तरी गोलार्ध के देशों में ही दिखाई देगी, इसीलिए इसका मुख्य पीक 9 सितंबर 2026 की रात से लेकर 10 सितंबर 2026 के तड़के सुबह (pre-dawn hours) तक रहेगा,भारत में इसे देखने का सबसे सही समय 9 सितंबर की रात 11:00 बजे के बाद से लेकर अगले दिन सुबह सूरज निकलने से पहले तक है। खगोलविद अमर पाल ने बताया कि चाँद की स्थिति की बात करें तो पाते हैं कि यह (सबसे अच्छी बात) है इस साल 9 सितंबर को चंद्रमा 'न्यू मून' (अमावस्या) के बेहद करीब होगा, जिससे आसमान में चाँद की रोशनी का व्यवधान नहीं रहेगा साथ ही में घना अंधेरा होने के कारण हल्के और बेहद तेज़ तैरते हुए उल्कापिंड भी आसानी से देखे जा सकेंगे,लेकिन लाइट पॉल्यूशन से पूरी तरीके से दूर जाएं क्योंकि शहरों की तेज़ रोशनी और प्रदूषण के कारण ये वैसे ही कम दिखने वाले उल्कापिंड बिल्कुल गायब भी हो सकते हैं साथ ही

मानसून का खलल भी हो सकता है चूंकि भारत में सितंबर की शुरुआत में कई हिस्सों में मानसूनी बादल छाए रहते हैं, इसलिए यदि आपके इलाके में आसमान पूरी तरह साफ़ (Clear Sky) रहता है, तभी आप इसे देख पाएंगे।

किस तारामण्डल क्षेत्र में दिखाई देंगी एप्सिलॉन पर्सिड्स उल्का।?

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि एप्सिलॉन पर्सिड्स उल्का वृष्टि के दीप्तिमान तारामंडल की बात करें तो पाते हैं कि यह उत्तर-पूर्वी क्षितिज की ओर,पर्सियस तारामंडल क्षेत्र से आती हुई दिखाई देंगी,या कुछ यूं कहें कि पर्सियस तारामंडल क्षेत्र में इस एप्सिलॉन पर्सिड्स उल्का वृष्टि का रेडिएंट पॉइंट या विकीर्णक बिंदु होगा।

क्या होता है रेडिएंट पॉइंट या विकीर्णक बिंदु।?

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि क्योंकि किसी भी तारामंडल क्षेत्र से आती हुई उल्काओं का दिखना केवल एक दृष्टि प्रभाव ही होता है इसीलिए यह एप्सिलॉन पर्सिड्स उल्का वृष्टि भी पर्सियस तारामंडल की तरफ़ से दिखना केवल एक दृष्टि प्रभाव ही होगा,लेकिन इसको कुछ ऐसे भी समझ सकते हैं कि जैसे की अगर आप कहीं खाली पड़ी हुईं रेलगाड़ियों की पटरियों को देखते हैं तो आपको दूर सामने देखने पर वह आगे एक दूर जगह पर एक दूसरे से मिलती हुईं नज़र आती हैं ठीक वैसे ही आकाश में नज़र करने पर जिस तारामंडल क्षेत्र की तरफ़ से कोई भी उल्का वृष्टि दिखाई देती है उसी के आधार पर उस उल्का वर्षा का नाम रखा गया है और उस बिंदु जिस तरफ़ से आती हुई दिखाई देती हैं उसको खगोल विज्ञान में रेडिएंट पॉइंट या विकीर्णक बिंदु के नाम से जाना जाता है, लेकिन वैसे तो यह रात्रि आकाश के किसी भी हिस्से में दिखाई दे सकती हैं इसीलिए प्रकाश प्रदूषण से पूर्णतः बचकर संपूर्ण आकाश में नज़र डालकर खोजने का प्रयास करना चाहिए और इसके चरम की बात करें तो पाते हैं कि भारत में 9–10 सितंबर 2026 की रात को अपने चरम (Peak) पर होगी क्योंकि यह एक छोटी (minor) उल्का वर्षा है, जिसमें आकाश में टूटते तारे दिखाई देते हैं। इसीलिए 9 सितंबर 2026 (रात से अगली सुबह तक) उत्तम समय रहेगा या कुछ यूं कहें कि 9 की आधी रात के बाद और सुबह होने से पहले के साफ और अंधेरे आसमान में लगभग 5 से 10 उल्काएं प्रति घंटा भी नज़र आ सकती हैं लेकिन इनको ठीक से देखने के लिए आपको शहर की तेज रोशनी (Light pollution) से दूर किसी शांत,साफ़ एवं स्वच्छ रात्रि बाली जगह का चुनाव करना होगा साथ ही इस दौरान आसमान को देखने के लिए किसी विशेष टेलीस्कोप या दूरबीन की भी जरूरत नहीं है, इसे खुली आंखों से देखा जा सकता है लेकिन अपनी आंखों को अंधेरे के अनुकूल ढलने के लिए कम से कम 30 मिनट का समय दें क्योंकि यह खास, एप्सिलॉन परर्सीड्स उल्का बौछारें उस दौरान अपने चरम पर होंगी इसीलिए प्रकाश प्रदूषण से पूर्णतः दूर,साफ मौसम में नग्न आंखों के साथ ही इसका दीदार हो सकेगा।

किस धूमकेतु के कारण घटित होगी यह एप्सिलोन परर्सीड्स उल्का वर्षा।?

वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला (तारामण्डल) गोरखपुर उत्तर प्रदेश भारत के खगोलविद् अमर पाल सिंह ने बताया कि खगोलीय दृष्टि से 9 सितंबर 2026 को होने वाला यह विशेष एप्सिलोन परर्सीड्स उल्का है इसके मुख्य जनक यानी कि एप्सिलोन परर्सीड्स उल्काओं का निर्माण करने वाले धूमकेतु की खोज खगोल वैज्ञानिक आज तक निश्चित रूप से नहीं कर पाए हैं, लेकिन ये अंतरिक्ष में घूम रहे धूल और मलबे के कण होते हैं, जो 64 से लेकर 70 किलोमीटर प्रति सेकंड की अत्यधिक रफ्तार से पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते ही जल जाते हैं,इनको ही वैसे तो साधारण भाषा में टूटते हुए तारे या शूटिंग स्टार्स भी कहा जाता हैं,लेकिन खगोल विज्ञान की भाषा में कहें तो उल्का (Meteor) अंतरिक्ष से पृथ्वी के वायुमंडल में अत्यधिक वेग से प्रवेश करने वाले छोटे चट्टानी या धात्विक पिंड होते होते हैं एवं उल्काओं की उत्पत्ति की बात करें तो पाते हैं कि ये क्षुद्रग्रहों (Asteroids) के टूटे हुए टुकड़े या ज़्यादातर धूमकेतुओं (Comets) द्वारा छोड़े गए धूल और गैस के कण ही होते हैं जो तेज गति से पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते हैं,तो वायुमण्डल के साथ घर्षण (Friction) के कारण अत्यधिक गर्मी पैदा होती है इससे ये छड़ भर के लिए तीव्र वेग से जल उठते हैं और आकाश में प्रकाश की एक चमकीली धारी या लकीर के रूप में दिखाई देते हैं, लेकिन खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि यह भी जानना आवश्यक है कि उल्का और उल्कापिंड में अंतर यह होता है कि अधिकांश उल्काएँ वायुमंडल में पूरी तरह जलकर नष्ट हो जाती हैं, या कुछ यूं कहें कि जब यह पृथ्वी के वायुमंडल में रगड़ या घर्षण से जलती हुईं लकीरें बनाती हुई दिखाई देती हैं उस अवस्था को उल्का या उल्का वृष्टि या उल्का वर्षा कहा जाता है, लेकिन जो इनके अंतरिक्षीय टुकड़े आकार में बड़े होने के कारण पूरी तरह जल नहीं पाते हैं और ठोस छोटी- बड़ी चट्टानों के रूप में छोटे एवं बड़े टुकड़ों के रूप में पृथ्वी के वायुमंडलीय झंझावातों को पार करते हुए सीधे पृथ्वी की सतह पर आ कर गिरते हैं, उन्हें ही उल्कापिंड (Meteorites) कहा जाता है, खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि अब अगर विशेष रूप से हम बात करें इस 9 सितंबर 2026 में होने वाली इस ख़ास एप्सिलॉन परर्सीड्स उल्का वृष्टि की तो इसके बारे में कुछ बड़ी ही रोचक जानकारियां भी सामने आती हैं जैसे कि वैज्ञानिक आज तक एप्सिलॉन परसिड्स (September Epsilon Perseids) उल्का बौछार के लिए जिम्मेदार मूल धूमकेतु (Parent Comet) की पूरी तरीके से खोज नहीं कर पाए हैं,लेकिन इस दिशा में विश्व वैज्ञानिक समुदाय की लगातार खोंजे जारी हैं,साथ ही खगोलविद अमर पाल सिंह के विचार प्रयोग परिकल्पना (Thought Experiments Hypothesis) के अनुसार भी इस उल्का बौछार से जुड़े मुख्य तथ्यों में से अज्ञात मूल धूमकेतु के लिए विचार प्रयोग वैज्ञानिक अनुमान है कि इसके लिए जिम्मेदार कोई बड़ा पिंड एक अज्ञात दीर्घ-अवधि (unknonwn long-period) वाला धूमकेतु है, जिसे सूर्य की एक परिक्रमा पूरी करने में हजारों साल लगते हैं और उसकी कक्षा भी अति दीर्घवृत्ताकार होगी, क्योंकि दीर्घ-आवर्तकाल वाले धूमकेतु, ऊर्ट बादल (Oort cloud) से उत्पन्न होने वाले खगोलीय पिंड हैं, लेकिन कुछ दीर्घ-अवधि वाले धूमकेतु/ (कॉमेट) या जिन्हें साधारण भाषा में पुच्छल तारा भी कहा जाता है वह अज्ञात ही हैं खगोलविद अमर पाल सिंह ने इस पर प्रकाश डालते हुए साथ ही इसकी अपने विचार प्रयोग परिकल्पना की खगोलीय व्याख्या करते हुए अपने ही शब्दों में बताया कि अज्ञात (Unknown) होने के कई और कारण भी हो सकते हैं ,जैसे कि चूंकि ऐसे कई धूमकेतु मानव इतिहास में केवल एक बार या हजारों साल पहले दिखे होते हैं, इसलिए खगोलविदों के पास इनका कई हजारों साल पहले का कोई भी सीधा प्रत्यक्ष पुराना रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होता है, लेकिन जब ये अचानक से कभी भी पृथ्वी या सूर्य के करीब आते हैं, तभी इनकी खोज हो पाती है, इसलिए इन्हें "अज्ञात" माना जाता है, इसीलिये वह अज्ञात धूमकेतु भी अभी तक हमारे विश्व वैज्ञानिक समुदाय की भी दूरबीनों की नजर में नहीं आया है,खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि दुनियां में आगे आने वाले समय में विशेष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एवं अंतरिक्ष आधारित विभिन्न प्रकार की दूरबीनों आदि के माध्यम से लगातार खोजों का आधार एवं दायरा बढ़ता ही जा रहा है जो की अंतरिक्ष अन्वेषण के लिए विशेष ज़रूरी एवं हमेशा आवश्यक भी है, हालांकि अभी तक तो एप्सिलोन परर्सीड्स उल्का वृष्टि के लिए ख़ास जिम्मेदार वाला मूल धूमकेतु नहीं मिला है, लेकिन पृथ्वी हर साल सितंबर की शुरुआत में अंतरिक्ष में उस अज्ञात धूमकेतु (जो कभी विशालकाय रूप में उस काले घने अंधकारमय अनजाने सुनसान एवं ख़ामोशी युक्त अकेले शांत रास्ते पर चला करता होगा) के द्वारा छोड़े गए मलबे (धूल और बर्फ के कणों) की पट्टी से गुजरती है,तब उसके द्वारा अपने पीछे छोड़े हुए ये कण आज भी जब हमारे वायुमंडल में प्रवेश करते हैं, तो घर्षण के कारण चमक उठते हैं, जिससे हमें यह ख़ास उल्का बौछार दिखाई देती है। लेकिन इसके (एप्सिलोन परर्सीड्स उल्का वृष्टि) के नियमित अवलोकन और इसकी कक्षा (orbit) के खगोल गणितीय आकलन से विश्व वैज्ञानिक समुदाय के खगोल वैज्ञानिकों ने इसे एक अलग उल्का बौछार के रूप में दर्ज किया है। इसीलिए खगोलविद अमर पाल सिंह ने विशेष ज़ोर देते हुए बताया है कि भ्रम से ज़रूर बचें क्योंकि जैसा कि खगोलविद अमर पाल सिंह हमेशा ही अपने मूल कथन में बताते हैं कि सही ज्ञान सभी समस्याओं का समाधान और यही है विज्ञान। इसीलिए यह भी जानना ज़रूरी है कि (अगस्त और सितंबर के परसिड्स में बहुत अंतर होता है) क्योंकि अक्सर तमाम लोग इसे अगस्त में दिखने वाली प्रसिद्ध परसिड्स (Perseids) उल्का बौछार समझ लेते हैं,अगस्त वाली मुख्य परसिड्स उल्का बौछार के धूमकेतु की खोज की जा चुकी है, जिसका नाम स्विफ्ट-टटल (Comet 109P/Swift-Tuttle) है। लेकिन सितंबर में दिखने वाली एप्सिलॉन परसिड्स एक बिल्कुल अलग उल्का धारा है और इसके मूल धूमकेतु का पता लगाया जाना अभी भी बाकी ही है, इसीलिए तब तक,प्राप्त ज्ञान की शक्ति का प्रयोग करते हुए ही इस एप्सिलॉन परसिड्स उल्का वृष्टि का विहंगम दृश्य ग्रामीण इलाकों से बेहतर परिणाम दे सकता है।

8 सितंबर 2026 की मध्य रात्रि के बाद,चंद्रमा और बृहस्पति की युति दिखाई देगी

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि खगोल प्रेमियों के लिए एक शानदार खगोलीय युति घटित होने वाली है क्योंकि 8 सितंबर 2026 को मध्य रात्रि के बाद लगभग 3 बजकर 35 मिनट के बाद पूर्वी क्षितिज के आकाश में चंद्रमा और बृहस्पति ग्रह एक साथ दिखाई देने शुरू हो जाएंगे या कुछ यूं कहें कि यानि कि 9 सितंबर 2026 की भोर सुबह तक के आकाश में एक पतला चंद्र-कोर (Crescent Moon) चन्द्रमा,हमारे सौर मण्डल के सबसे बड़े ग्रह बृहस्पति (Jupiter) के बेहद करीब से गुजरेगा,इस दौरान दोनों के बीच की दूरी 1 डिग्री से भी कम होगी, जिससे इस युति के दौरान एक बेहद ही खूबसूरत खगोलीय दृश्य बनेगा, इस खगोलीय संरेखण को खगोल विज्ञान की भाषा में चंद्रमा और बृहस्पति ग्रह के शानदार निकटतम आगमन को चन्द्र -ब्रहस्पति युति कहा जाता है, लेकिन वास्तव में यह दोनों खगोलीय पिण्ड आपस में करोड़ों किलोमीटर की दूरी पर मौजूद हैं लेकिन कभी कभी पृथ्वी से देखने पर दृश्य प्रभाव के कारण काफ़ी पास पास दिखाई देते हैं इसी को खगोल विज्ञान की भाषा में कंजंक्शन या युति भी कहा जाता है।

किस दिशा में और किस तारामण्डल क्षेत्र में स्थित होंगे दोनों खगोलीय पिण्ड।?

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस शानदार खगोलीय युति को देखने के लिए आपको किसी विशेष दूरबीन/ टेलीस्कोप या विनोकुलर आदि उपकरण की भी आवश्यकता नहीं है, आप अपनी साधारण आंखों से ही इस युति को देख सकते हैं , लेकिन अगर आपके पास कोई टेलीस्कोप /दूरबीन या विनोकुलर आदि उपकरण मौजूद हैं तो आप इसको और भी अधिक सर्वोत्तम तौर पर देख सकते हैं, लेकिन आपको पूर्वी आकाश में क्षितिज से थोड़ा ऊपर देखना होगा तब आकाश में एक बहुत ही पतला हंसिया जैसा चंद्रमा (वैनिंग क्रिसेंट मून) लगभग 8 से 10 प्रतिशत चमकता हुआ दिखाई देगा इस दौरान चंद्रमा का मैग्नीट्यूड लगभग माइनस 6.78 के क़रीब होगा और यह सिंह तारामंडल क्षेत्र में स्थित होगा और ठीक उसके पास ही में बेहद चमकीला ब्रहस्पति ग्रह एक बड़े तारे की तरह चमकता हुआ नज़र आयेगा इस दौरान बृहस्पति ग्रह का मैग्नीट्यूड लगभग माइनस 1.66 होगा और यह कर्क तारामंडल में स्थित होगा।

कहां कहां से दिखाई देगा लूनर ऑक्ल्टेशन।?

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि यह लूनर ऑक्ल्टेशन की खगोलीय स्थिति भारत से दिखाई नहीं देगी लेकिन यह कनाडा, ग्रीनलैंड, संयुक्त राज्य अमेरिका, पूर्वी रूस और उत्तरी प्रशांत क्षेत्र के कुछ स्थानों पर यह घटना और भी रोमांचक होगी क्योंकि वहां चंद्रमा सीधे बृहस्पति के सामने से गुजरेगा और कुछ समय के लिए इस विशाल ग्रह को अपनी ओट में छिपा देगा,इस खगोलीय घटना को चंद्र ग्रहण नहीं, बल्कि “चंद्रमा द्वारा ग्रह का आवरण” या लूनर ऑक्ल्टेशन (Lunar Occultation / चंद्र आवरण) कहा जाता है, लेकिन जो लोग चंद्र आवरण वाले क्षेत्र में नहीं हैं, वे भी चंद्रमा और बृहस्पति की इस शानदार और बेहद निकट खगोलीय युति का आनंद तो उठा ही सकते हैं।

भारत में इस खगोलीय युति का कैसे कर सकते हैं ख़ास दीदार और क्या क्या बरतें सावधानियां।?

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस ख़ास खगोलीय नज़ारे को देखने के लिए आपको किसी विशेष उपकरण की ज़रूरत नहीं है क्योंकि इसे देखने के लिए आपको किसी टेलिस्कोप (Telescope) या दूरबीन की आवश्यकता नहीं है, इसे केवल नग्न आँखों से सीधे आसमान में देखा जा सकता है, लेकिन आज कल बढ़ते प्रकाश प्रदूषण/लाइट पॉल्यूशन के कारण तारों और ग्रहों को साधारण आंखों से देखने में भी दिक्कत का सामना करना पड़ता है इसलिए उच्च कोटि के दृश्य के लिए प्रकाश प्रदूषण से पूर्णतः दूर जाएं, या कुछ यूं कहें कि किसी ग्रामीण इलाकों में जाकर देखना शहरों के मुक़ाबले ज़्यादा फायदेमंद होता है,नहीं तो शहरों की अनियमित तेज़ रोशनी और इससे उत्पन्न होने वाले प्रकाश प्रदूषण के कारण वैसे ही साधारण आँखों से दिखाई देने वाले तारों और ग्रहों तक की संख्या सीमित होती जा रही है और बढ़ते हुए प्रकाश प्रदूषण के कारण ही आज कल खगोल प्रेमियों के लिए भी कई बार निराश ही होना पड़ता है और अगर पृथ्वी पर ऐसे ही अनियमित तौर पर अंधाधुंध प्रकाश प्रदूषण बढ़ता रहा तो वह दिन दूर नहीं है जब तमाम खगोलीय पिंड जो आसानी से दिख जाते थे वह भी दिखना बंद हो जाएंगे और हम अपने ही नहीं बल्कि सभी के हिस्से का आकाश भी खो देंगे जोकि मानवता के लिए किसी दुर्भाग्य से कम नहीं होगा अगर हम पुराने जमाने की बात करें तो पाते हैं कि पुराने जमाने में साधारण आंखों से ही आसानी से दिखने वाले अनगिनत खगोलीय पिण्ड एवं घटनाएँ और हमारी आकाशगंगा एवं अन्य तमाम खगोलीय पिंड ऐसे ही रात्रि के आकाश में साधारण आंखों से ही दिखाई देते थे लेकिन आज जो बचे हुए हैं इन्हें भी जिन्हें साधारण आंखों से आसानी से देखा जा सकता है वो भी बढ़ते प्रकाश प्रदूषण के कारण ही सभी धीरे धीरे बिल्कुल गायब हो जाएंगे इसीलिए अभी भी समय है कि आप ख़ुद के साथ ही सभी में वैज्ञानिक वातावरण उत्पन्न करते हुए समायोचित समझाने का प्रयास करें कि प्रकाश प्रदूषण क्या है और यह कितना खतरनाक साबित हो रहा है सभी के लिए चाहें वह मानव हों। पशु, पक्षी एवं कीट पतंगे आदि कोई भी इसकी अधिकता की चपेट से बचा नहीं है और अगर इसको महसूस करना चाहते हैं तो आप इसे स्पष्ट देखने के लिए किसी ग्रामीण इलाके या ऐसी जगह जाएं जहाँ अंधेरा हो या डार्क स्काई जोन हों,आपको ख़ुद महसूस होगा कि जो खगोलीय घटनाएं एवं तारे, ग्रह और मंदाकिनी आदि शहरों से दिखाई नहीं देती हैं वहीं ग्रामीण इलाकों जहां प्रकाश प्रदूषण नहीं होता है वहां से आसानी से दिखाई देना शुरू हो जाएंगे, लेकिन अगर हम बात करें चंद्रमा और बृहस्पति ग्रह की युति की तो यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि मानसून का खलल भी एक बाधक हो सकता है चूंकि भारत में सितंबर की शुरुआत में कई हिस्सों में मानसूनी बादल छाए रहते हैं,इसलिए यदि आपके इलाके में आसमान पूरी तरह साफ़ (Clear Sky) रहता है,तभी आप इसे देख पाएंगे,और साथ ही खगोलविद अमर पाल सिंह ने विशेष ज़ोर देते हुए यह भी बताया कि किसी भी समय सावधानी बेहद ही जरूरी है, जैसे की दूरबीनों आदि को लगाते समय भी विशेष ध्यान रखना चाहिए, खासकर,सूर्य के आसपास या उसकी दिशा में कभी भी बिना उचित एवं बिना उच्च कोटि मानकीकृत प्रमाणित सौर फिल्टर एवं संपूर्ण सटीक प्रमाणित वैज्ञानिक जानकारी और सावधानियों के किसी भी दूरबीन,टेलीस्कोप या किसी अन्य ऑप्टिकल उपकरण का उपयोग न करें क्योंकि अन्यथा की स्थिति में बिना जाने ऐसा करने से आंखों को स्थायी नुकसान हो सकता है।

गोरखपुर में 40 लाख की चरस के साथ दो तस्कर गिरफ्तार, नेपाल से बिहार के रास्ते लाते थे नशे की खेप

ANTF और एंटी थेफ्ट सेल की संयुक्त कार्रवाई, 13.085 किलो चरस के साथ बाइक, मोबाइल और नकदी बरामद

गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) और एंटी थेफ्ट सेल की संयुक्त टीम को बड़ी सफलता मिली है। टीम ने दो कथित सक्रिय तस्करों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 13.085 किलोग्राम अवैध चरस बरामद की है। पुलिस के मुताबिक बरामद चरस की अनुमानित कीमत करीब 40 लाख रुपये है।

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने एक दोपहिया वाहन, दो एंड्राइड मोबाइल फोन और 1,385 रुपये नकद भी बरामद किए हैं। दोनों आरोपियों के खिलाफ चौरी चौरा थाने में एनडीपीएस एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

गोरखपुर-देवरिया मार्ग पर घेराबंदी कर पकड़े गए

पुलिस के मुताबिक यह कार्रवाई 6 सितंबर 2026 को चौरी बहुरिया, चौरी चौरा ओवरब्रिज के आगे गोरखपुर-देवरिया मार्ग पर की गई। संयुक्त टीम ने संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर दो लोगों को रोककर पूछताछ और तलाशी ली।

तलाशी के दौरान उनके पास से बड़ी मात्रा में चरस बरामद होने के बाद दोनों को हिरासत में ले लिया गया। पुलिस ने बरामद मादक पदार्थ को कब्जे में लेकर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

देवरिया के रहने वाले हैं दोनों आरोपी

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान रंजीत विश्वकर्मा, निवासी चोरभरिया बकुचीमिश्र मगहरा, थाना खुखुन्दु, जनपद देवरिया और किशन मद्धेशिया, निवासी धनौतीखुर्द, थाना कोतवाली, जनपद देवरिया के रूप में हुई है।

पुलिस के अनुसार पूछताछ में दोनों ने कथित तौर पर खुद को पार्टनर बताते हुए मादक पदार्थों की सप्लाई करने की बात स्वीकार की है।

नेपाल से बिहार के रास्ते लाने का पुलिस का दावा

पुलिस के मुताबिक पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि वे चरस की खेप नेपाल से बिहार के रास्ते देवरिया लेकर आते थे। इसके बाद आसपास के जिलों में इसे ऊंचे दामों पर बेचने का काम किया जाता था।

पुलिस का कहना है कि दोनों आरोपी रविवार को भी चरस की खेप की डिलीवरी के लिए निकले थे, लेकिन इससे पहले ही संयुक्त टीम ने उन्हें पकड़ लिया।

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों का नेटवर्क कितना बड़ा है और उनके साथ इस अवैध कारोबार में और कौन-कौन लोग जुड़े हैं।

मोबाइल फोन और बाइक भी बरामद

तस्करी की कार्रवाई में पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक दोपहिया वाहन, दो एंड्राइड मोबाइल फोन और 1,385 रुपये नकद बरामद किए हैं। पुलिस मोबाइल फोन की जांच के जरिए आरोपियों के संपर्कों और संभावित खरीदारों तक पहुंचने का प्रयास कर सकती है।

जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि बरामद चरस कहां पहुंचाई जानी थी और इससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका क्या है।

एनडीपीएस एक्ट में दर्ज हुआ मुकदमा

बरामदगी के संबंध में चौरी चौरा थाने में मुकदमा संख्या 351/2026 दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धाराओं 8/20/29/60 के तहत कार्रवाई शुरू की है।

अधिकारियों के मुताबिक मादक पदार्थों की तस्करी के नेटवर्क को तोड़ने के लिए आरोपियों से पूछताछ के आधार पर आगे की जांच की जा रही है।

संयुक्त टीम ने की कार्रवाई

इस कार्रवाई में ANTF ऑपरेशनल यूनिट गोरखपुर के प्रभारी उपनिरीक्षक रमेश राम के साथ हेड कांस्टेबल शशिकान्त राय, हेड कांस्टेबल दिव्यशंकर राय और कांस्टेबल रजनीश पाल शामिल रहे।

वहीं एंटी थेफ्ट सेल गोरखपुर की टीम का नेतृत्व प्रभारी निरीक्षक सुनील कुमार राय ने किया। टीम में हेड कांस्टेबल मोहसिन खान, धर्मेन्द्र नाथ तिवारी, मिथिलेश बहादुर सिंह, कमलेश कुमार और कांस्टेबल भूपेन्द्र यादव शामिल रहे। थाना चौरी चौरा की ओर से उपनिरीक्षक ओम प्रकाश सिंह ने भी कार्रवाई में सहयोग किया।

फिलहाल पुलिस दोनों आरोपियों से पूछताछ कर तस्करी के पूरे नेटवर्क और मादक पदार्थ की सप्लाई से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटाने में लगी है।

दारोगा की मौत मामले में हनीट्रैप का खुलासा, एक करोड़ की वसूली की थी साजिश

- पुलिस का दावा- महिला समेत तीन हिरासत में, अंतरंग संबंधों के जरिए ब्लैकमेल करने का आरोप; दूसरे लोगों को भी फंसाने की जांच

बस्ती/ गोरखपुर। वाल्टरगंज थाने में तैनात दारोगा सूर्यप्रकाश सिंह (57) की आत्महत्या के मामले में पुलिस ने हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग का सनसनीखेज खुलासा करने का दावा किया है। पुलिस जांच के मुताबिक, दारोगा को एक महिला कथित तौर पर अंतरंग संबंधों और वीडियो के जरिए ब्लैकमेल कर रही थी। उस पर करीब एक करोड़ रुपये वसूलने का दबाव बनाए जाने की बात सामने आई है। मामले में पुलिस ने प्रियंका चौधरी, उसके पिता और एक अधिवक्ता को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है।

डीआईजी संजीव त्यागी के मुताबिक, दारोगा और प्रियंका चौधरी के बीच करीबी संबंध थे। पुलिस ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) के आधार पर जांच आगे बढ़ाई तो महिला से संपर्क की जानकारी सामने आई। पुलिस का दावा है कि दोनों के बीच बने संबंधों से जुड़े कुछ फोटो और वीडियो महिला के पास थे, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर दारोगा को ब्लैकमेल करने के लिए किया जा रहा था।

- आत्महत्या का वीडियो भेजकर बनाया दबाव

पुलिस के अनुसार, दारोगा पर पैसे देने का दबाव बनाया जा रहा था और उसे रकम लेकर बुलाया जा रहा था। दबाव बढ़ाने के लिए महिला की कथित आत्महत्या की कोशिश का वीडियो भी दारोगा को भेजे जाने की बात सामने आई है। पुलिस का कहना है कि इसी दबाव के बीच दारोगा ने अपने कमरे में अंगोछे का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। जांच के दौरान पुलिस को महिला की कथित आत्महत्या की कोशिश से संबंधित वीडियो और कुछ ऑडियो रिकॉर्डिंग मिली हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जांच में अब तक कोई अश्लील वीडियो बरामद नहीं हुआ है।

- पिता और अधिवक्ता की भूमिका की भी जांच

डीआईजी के अनुसार, पुलिस को आशंका है कि कथित ब्लैकमेलिंग में महिला के पिता और एक अधिवक्ता भी शामिल थे। पुलिस का आरोप है कि अधिवक्ता कानूनी सलाह और संरक्षण देने के साथ कथित पीड़ितों से सौदेबाजी में भूमिका निभाता था। पुलिस अब तीनों से पूछताछ कर गिरोह की गतिविधियों और उससे जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटा रही है।

- दूसरे लोगों को भी जाल में फंसाने का आरोप

पुलिस के मुताबिक, जांच में ऐसे अन्य मामलों के संकेत भी मिले हैं, जिनमें महिला और उसके साथियों ने कथित तौर पर लोगों को इसी तरह फंसाकर वसूली का प्रयास किया। पुलिस का दावा है कि मध्य प्रदेश के जबलपुर में एक कारोबारी को कथित तौर पर जाल में फंसाकर करीब एक करोड़ रुपये वसूलने की कोशिश की गई थी। इसके अलावा किराये के मकान के मालिक और एक ड्राइवर को भी कथित तौर पर ब्लैकमेल कर रकम वसूलने की जानकारी सामने आई है। पुलिस इन मामलों की स्वतंत्र रूप से जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि कथित गिरोह ने अब तक कितने लोगों को निशाना बनाया।

- संपत्ति की भी होगी जांच

पुलिस के अनुसार, ब्लैकमेलिंग और कथित वसूली से अर्जित संपत्ति की भी जांच की जा रही है। जांच में यदि ऐसी संपत्ति की पुष्टि होती है तो नियमानुसार उसे जब्त करने की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस मामले में डिजिटल साक्ष्यों, कॉल रिकॉर्ड, ऑडियो-वीडियो और वित्तीय लेनदेन की भी पड़ताल कर रही है।

अंतरिक्ष विज्ञान में करियर की राह बताएंगे पूर्व इसरो वैज्ञानिक जयंत जोशी

- आज निःशुल्क ऑनलाइन वेबिनार, छात्रों-शिक्षकों को स्पेस साइंस और इसरो के मिशनों पर मिलेगा मार्गदर्शन

गोरखपुर। अंतरिक्ष विज्ञान और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक छात्रों और युवाओं के लिए 3 सितंबर को विशेष ऑनलाइन वेबिनार आयोजित किया जा रहा है। डे एंड नाइट स्पेस फाउंडेशन और सहयोगी संस्थानों की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में इसरो के पूर्व वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं इंजीनियर जयंत पी. जोशी मुख्य वक्ता होंगे।
यह कार्यक्रम तृतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस 2026 के तहत आयोजित 15 दिवसीय डिजिटल भारत स्पेस यात्रा अभियान के समापन अवसर पर होगा। निःशुल्क वेबिनार दोपहर 12:10 बजे शुरू होगा। इसका उद्देश्य युवाओं में अंतरिक्ष विज्ञान और आधुनिक तकनीक के प्रति रुचि बढ़ाने के साथ इस क्षेत्र में उपलब्ध करियर विकल्पों की जानकारी देना है।
पूर्व इसरो वैज्ञानिक जयंत जोशी अपने अनुभवों के आधार पर प्रतिभागियों को अंतरिक्ष विज्ञान के मूल सिद्धांतों, इसरो के प्रमुख अंतरिक्ष अभियानों और स्पेस सेक्टर में भविष्य की संभावनाओं के बारे में जानकारी देंगे। इसके अलावा इसरो समेत देश-विदेश की विभिन्न अंतरिक्ष एजेंसियों में करियर बनाने के लिए जरूरी शैक्षिक और व्यावहारिक तैयारियों पर भी मार्गदर्शन दिया जाएगा।

- शिक्षकों के लिए भी उपयोगी होगा सत्र
वेबिनार में शिक्षकों को भी विद्यार्थियों के बीच वैज्ञानिक सोच विकसित करने और STEM यानी विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग एवं गणित आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने के तरीकों की जानकारी दी जाएगी।
व्याख्यान के बाद सीधा प्रश्नोत्तर सत्र होगा, जिसमें प्रतिभागी पूर्व इसरो वैज्ञानिक से अपने सवाल पूछ सकेंगे। आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम में विद्यालयी छात्र, शिक्षक, शोधार्थी, अंतरिक्ष विज्ञान में रुचि रखने वाले युवा और आम नागरिक शामिल हो सकते हैं।

- Google Meet पर होगा आयोजन
ऑनलाइन कार्यक्रम में शामिल होने के लिए प्रतिभागियों को दोपहर 12:05 बजे तक Google Meet के माध्यम से जुड़ना होगा। आयोजकों ने बताया कि प्लेटफॉर्म पर प्रतिभागियों की संख्या सीमित होने के कारण पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर प्रवेश दिया जाएगा। इसलिए इच्छुक प्रतिभागियों से समय से पहले जुड़ने की अपील की गई है।
गोरखनाथ मंदिर में CM योगी का जनता दरबार, 200 फरियादियों की सुनी समस्याएं

- तहसील-थाना स्तर पर मामलों के त्वरित निस्तारण के निर्देश, गंभीर मरीजों की मदद के लिए अफसरों को दिए आदेश

गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार सुबह गोरखनाथ मंदिर परिसर में जनता दरबार लगाकर करीब 200 लोगों की समस्याएं सुनीं। गोरखपुर प्रवास के तीसरे दिन आयोजित इस जनता दर्शन में बड़ी संख्या में लोग अपनी शिकायतें और प्रार्थना पत्र लेकर पहुंचे। मुख्यमंत्री ने एक-एक फरियादी के पास जाकर उनकी बात सुनी और संबंधित अधिकारियों को समस्याओं के शीघ्र समाधान के निर्देश दिए।
महंत दिग्विजयनाथ स्मृति सभागार के बाहर सुबह से ही फरियादियों की भीड़ जुटने लगी थी। मुख्यमंत्री ने लोगों के प्रार्थना पत्र लिए और उनकी समस्याओं की जानकारी हासिल की। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि शिकायतों के निस्तारण में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।

- स्थानीय स्तर पर ही निपटाएं मामले
मुख्यमंत्री ने कहा कि तहसील और थाना स्तर पर आने वाली शिकायतों का समाधान वहीं समयबद्ध तरीके से किया जाए। राजस्व से जुड़े मामलों को भी लंबित न रखा जाए। दूसरे जिलों से संबंधित शिकायतों के प्रार्थना पत्र संबंधित अधिकारियों को भेजकर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

- रास्ते और जमीन से जुड़ी शिकायतें भी पहुंचीं
जनता दर्शन में गोंडा से पहुंची एक महिला ने राजस्व संबंधी मामले में लेखपाल और नायब तहसीलदार पर आरोप लगाए। मुख्यमंत्री ने मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। वहीं, कुशीनगर से आई एक महिला ने रास्ते पर अवरोध और अतिक्रमण की शिकायत की। मुख्यमंत्री ने संबंधित कमिश्नर को कार्रवाई करते हुए रास्ता उपलब्ध कराने तथा अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए।

- इलाज के लिए आर्थिक सहायता की मांग
जनता दर्शन में कई लोग गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए आर्थिक सहायता की उम्मीद लेकर पहुंचे। मुख्यमंत्री ने उन्हें मदद का भरोसा दिलाया। उन्होंने अधिकारियों से पात्र लोगों के उपचार का अनुमानित खर्च तैयार कराने और नियमानुसार आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तेज करने को कहा।

- बच्चों से मिले, चॉकलेट देकर पढ़ाई के बारे में पूछा
जनता दर्शन के दौरान महिलाओं के साथ आए बच्चों पर भी मुख्यमंत्री का ध्यान गया। उन्होंने बच्चों को अपने पास बुलाकर दुलारा, चॉकलेट दी और उनकी पढ़ाई के बारे में जानकारी ली। बच्चों के साथ मुख्यमंत्री का यह सहज संवाद वहां मौजूद लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र रहा।

- गौशाला पहुंचे CM, गायों को खिलाया गुड़-रोटी
जनता दर्शन से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर की गौशाला का भी दौरा किया। उन्होंने गायों को गुड़ और रोटी खिलाई तथा उनकी देखभाल की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने गौशाला में साफ-सफाई, चारे और पशुओं की उचित देखभाल को लेकर संबंधित लोगों को आवश्यक निर्देश भी दिए।
आज खास होगा स्टर्जन मून, चंद्र ग्रहण भी लगेगा; भारत में नहीं दिखेगा नजारा

- चंद्रमा का करीब 96 फीसदी हिस्सा पृथ्वी की छाया में आएगा, कई देशों में दिख सकता है तांबे जैसा लाल रंग

गोरखपुर। खगोलविज्ञान में दिलचस्पी रखने वालों के लिए 28 अगस्त 2026 की पूर्णिमा खास रहने वाली है। खगोलविद अमर पाल सिंह के अनुसार इस दिन अगस्त की पूर्णिमा यानी स्टर्जन मून के साथ चंद्र ग्रहण की खगोलीय घटना भी होगी। हालांकि भारत में रहने वाले लोग इस अद्भुत नजारे को नहीं देख सकेंगे।
अमर पाल सिंह ने बताया कि भारत में पूर्णिमा का चरम सुबह के समय होगा। इसी दौरान चंद्र ग्रहण भी घटित होगा, लेकिन भारत से ग्रहण का दृश्य दिखाई नहीं देगा। इसलिए देश में स्टर्जन मून का पूर्ण स्वरूप और चंद्र ग्रहण का मिलन देखने का अवसर नहीं मिलेगा।
उन्होंने बताया कि वैश्विक स्तर पर यह पूर्णिमा खगोल प्रेमियों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि पूर्ण रूप से चमकता चंद्रमा कुछ समय बाद पृथ्वी की छाया में प्रवेश करेगा। ग्रहण के दौरान चंद्रमा का लगभग 96 प्रतिशत हिस्सा पृथ्वी की छाया से ढक जाएगा।
पृथ्वी की छाया में आने के कारण कई देशों में चंद्रमा का रंग सामान्य से अलग नजर आ सकता है। वहां यह तांबे जैसा लाल या गहरे नारंगी रंग में दिखाई देने की संभावना है। हालांकि भारत से यह खगोलीय नजारा दिखाई नहीं देगा।

- भारत में कब और कितने बजे होगा पूर्णिमा का चरम समय
वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला, (तारामण्डल) गोरखपुर के खगोलविद् अमर पाल सिंह के अनुसार, यह पूर्णिमा 28 अगस्त 2026 को भारतीय समयानुसार सुबह करीब 9:48 बजे अपने चरम पर होगी। इसका अर्थ है कि जब पूर्ण चंद्रमा अपने सर्वोच्च रूप में होगा, तब भारत में दिन हो चुका होगा। इसलिए भारतीय आकाश में ग्रहण का दृश्य प्रत्यक्ष रूप से नहीं देखा जा सकेगा। फिर भी, सूर्यास्त के बाद चमकता हुआ पूर्ण चंद्रमा लोगों को विशेष दृश्य का अनुभव कराएगा।

- क्या होता है “स्टर्जन मून”
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि “स्टर्जन मून” नाम उत्तरी अमेरिका की जनजातीय परंपराओं से जुड़ा है, क्योंकि अगस्त के महीने में ग्रेट लेक्स और लेक चैम्पलेन जैसे क्षेत्रों में स्टर्जन मछलियाँ बड़ी संख्या में पाई जाती थीं, इसलिए इस पूर्णिमा को यह नाम दिया गया। अलग-अलग संस्कृतियों में इसके अन्य नाम भी प्रचलित रहे हैं, जैसे कि सेल्ट्स इसे विवाद का चंद्रमा और लिंक्स का चंद्रमा कहते थे, जबकि एंग्लो-सैक्सन परंपरा में इसे अनाज का चंद्रमा कहा गया। अगर हम बात करें इसके कुछ अन्य नामों कि तो पाते हैं कि इसके कई अन्य नाम भी मौजूद हैं उनमें से कुछ इस प्रकार हैं जैसे कि इसको कॉर्न मून, ग्रेन मून, फ्रूट मून, लाइटनिंग मून और बारले मून जैसे आदि नामों से भी जाना जाता रहा है।

- किस दिशा में दिखाई देगा स्टर्जन पूर्णिमा का चांद
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि 28 अगस्त 2026 को स्टर्जन पूर्णिमा का चांद शाम के समय पूर्वी आकाशीय क्षितिज पर लगभग 6 बजकर 35 मिनट के बाद दिखाई देना शुरू कर देगा और पूरी रात अपनी चमक बिखेरते हुए भोर में पश्चिमी क्षितिज की ओर चला जायेगा।

- कैसे पड़ा अगस्त के चंद्रमा का नाम 'स्टर्जन मून'
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि अगस्त की पूर्णिमा को स्टर्जन मून के नाम से जाना जाता है, जिसका नाम एक विशाल मीठे पानी की मछली के नाम पर रखा गया है जो अगस्त में बड़ी संख्या में पाई जाती है। चूंकि उत्तरी गोलार्ध में अगस्त कटाई का मौसम होता है, इसलिए अगस्त की पूर्णिमा को ग्रेन मून, फ्रूट मून और बारले मून भी कहा जाता है।

- क्या संबंध होता है ग्रहण और पूर्णिमा में
खगोलविद अमर पाल सिंह का यह भी कहना है कि ग्रहण और पूर्णिमा का मेल कोई असाधारण संयोग नहीं है, बल्कि चंद्रमा की कक्षा और उसके नोड्स से जुड़ी एक नियमित खगोलीय प्रक्रिया है। जब पूर्णिमा के समय चंद्रमा अपनी कक्षा के ऐसे बिंदु पर होता है, जहां वह पृथ्वी की कक्षा यानी क्रांतिवृत्त को काटता है, तभी चंद्र ग्रहण की स्थिति बनती है। यही कारण है कि कभी-कभी पूर्णिमा के साथ चंद्र ग्रहण और अमावस्या के साथ सूर्य ग्रहण देखने को मिलता है।

- हर पूर्णिमा को क्यों नहीं होता चंद्र ग्रहण
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि हर पूर्णिमा को चंद्र ग्रहण न होने का मुख्य कारण चंद्रमा की कक्षा का पृथ्वी की कक्षा के तल (orbital plane) से लगभग 5° से 5.1° झुका होना है और मुख्य कारण कक्षा का झुकाव है। चंद्रमा, पृथ्वी के चारों ओर बिल्कुल सीधी या समतल प्लेट की तरह नहीं घूमता, बल्कि इसका मार्ग 5 डिग्री झुका हुआ होता है, साथ ही इस झुकाव के कारण ज्यादातर पूर्णिमा के दिन चंद्रमा, पृथ्वी की छाया के या तो ऊपर से या नीचे से निकल जाता है और छाया सीधे चंद्रमा पर नहीं पड़ती, लेकिन यह भी जानना आवश्यक है कि चंद्र ग्रहण तभी होता है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा अंतरिक्ष में बिल्कुल एक सीध में आएं और चंद्रमा पृथ्वी की छाया से होकर गुजरे, जो कि केवल तभी संभव है जब पूर्णिमा की तिथि कक्षा के मिलन बिंदुओं (nodes) के पास हो।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि 28 अगस्त 2026 को होने वाला चंद्र ग्रहण भारतीय समयानुसार (IST) सुबह 6:54 बजे शुरू होगा और दोपहर 12:32 बजे समाप्त होगा इसीलिए यह भारत में दिखाई नहीं देगा।
महाराजगंज से शुरू हुई ‘भारत विज्ञान यात्रा’, विज्ञान को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प


- राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस पर हुआ शुभारंभ, विद्यार्थियों ने खगोलीय गतिविधियों और वैज्ञानिक प्रयोगों से समझे विज्ञान के नए आयाम

महाराजगंज/गोरखपुर। विज्ञान को सरल, रोचक और आमजन के जीवन से जोड़ने के उद्देश्य से ‘भारत विज्ञान यात्रा’ का शुभारंभ राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के अवसर पर महाराजगंज से किया गया। यात्रा के माध्यम से विद्यार्थियों और आम लोगों के बीच वैज्ञानिक सोच, नवाचार और विज्ञान के प्रति जिज्ञासा को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाएगा। आयोजकों के अनुसार, आगामी चरणों में देश के विभिन्न हिस्सों में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी आधारित कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
भारत विज्ञान यात्रा के संस्थापक एस.टी. अली और सह-संस्थापक दिशांक श्रीवास्तव के नेतृत्व में शुरू हुई इस पहल के पहले कार्यक्रम में विभिन्न विद्यालयों के बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में विज्ञान को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रखते हुए प्रयोगों और गतिविधियों के जरिए समझाने पर जोर दिया गया।

- तारामंडल से लेकर अंतरिक्ष मॉडल तक दिखा विज्ञान
कार्यक्रम में गोरखपुर नक्षत्रशाला के खगोलविद अमर पाल सिंह मुख्य वक्ता रहे। हरियाणा से आए वरिष्ठ विज्ञान संचारक एवं लैब सॉल्यूशन्स के निदेशक संजीव कुमार ने विद्यार्थियों को विभिन्न वैज्ञानिक प्रयोगों के माध्यम से विज्ञान के व्यावहारिक पहलुओं से परिचित कराया।
डे एंड नाइट स्पेस फाउंडेशन की टीम ने भी कार्यक्रम में सहयोग किया। विशेष दूरबीनों और सोलर गॉगल्स के माध्यम से प्रतिभागियों को आकाश दर्शन कराया गया। इसके अलावा वीआर तकनीक, थ्री-डी प्रिंटर, रॉकेट मॉडल और हाइड्रा रॉकेट जैसी गतिविधियों के जरिए विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान और आधुनिक तकनीक की जानकारी दी गई।

- विज्ञान को जीवन से जोड़ना जरूरी
संस्थापक एस.टी. अली ने कहा कि विज्ञान को जन-जन तक पहुंचाने के लिए उसे सरल और व्यवहारिक भाषा में प्रस्तुत करना जरूरी है। उनका कहना था कि विज्ञान केवल किताबों या प्रयोगशालाओं तक सीमित न रहे, बल्कि विद्यार्थियों और आम लोगों के दैनिक जीवन का हिस्सा बने। उन्होंने कहा कि यात्रा का एक उद्देश्य प्रतिभाशाली विद्यार्थियों की पहचान कर उन्हें विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराना भी है।
सह-संस्थापक दिशांक श्रीवास्तव ने कहा कि ‘विज्ञान सभी के लिए’ की सोच के साथ यह पहल शुरू की गई है। वैज्ञानिक विषयों को रोचक तरीके से लोगों तक पहुंचाना और समाज में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को मजबूत करना यात्रा के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है।

- अंतरिक्ष विज्ञान विद्यार्थियों के लिए संभावनाओं का क्षेत्र
खगोलविद अमर पाल सिंह ने विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान की संभावनाओं से परिचित कराया। उन्होंने कहा कि ब्रह्मांड के रहस्यों को समझने की जिज्ञासा वैज्ञानिक अनुसंधान को आगे बढ़ाती है। अंतरिक्ष विज्ञान युवाओं को नए सवाल पूछने और उनके वैज्ञानिक समाधान तलाशने के लिए प्रेरित करता है।
विज्ञान संचारक संजीव कुमार ने प्रयोगों के जरिए विद्यार्थियों को विज्ञान के पीछे काम करने वाले सिद्धांत समझाए। उन्होंने वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने और अंधविश्वास से दूर रहने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रयोग और गतिविधियों के माध्यम से कठिन वैज्ञानिक अवधारणाओं को भी आसानी से समझा जा सकता है।

- प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को किया गया सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों और युवा विज्ञान प्रेमियों को प्रशस्ति पत्र और मेडल देकर सम्मानित किया गया। अन्य प्रतिभागियों को भी प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।
आयोजकों के अनुसार, ‘भारत विज्ञान रत्न’ सम्मान मनीष पटेल, ‘भारत विज्ञान गौरव’ सम्मान मोहम्मद कयूम और ‘भारत विज्ञान प्रतिभा’ सम्मान युवराज को प्रदान किया गया। सांत्वना पुरस्कार के लिए भी विद्यार्थियों का चयन किया गया।
ब्रजेश यादव ने कहा कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण समाज को नई दिशा देने और समस्याओं के समाधान के लिए नए तरीके विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने समाज में विज्ञान आधारित सकारात्मक वातावरण तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

- गणमान्य लोगों ने की पहल की सराहना
कार्यक्रम में आरपीआईसी के चेयरमैन डॉ. पंकज तिवारी, ग्रीन माउंट एकेडमी के संस्थापक जियावुल्लाह, कलावती देवी इंटर कॉलेज के अखिलेश मिश्रा, ग्रीन माउंट एकेडमी की शीतल पटेल और ज्योति विश्वकर्मा, डे एंड नाइट फाउंडेशन के एडवाइजर मुस्तान शेरुल्लाह, अमरेश कुमार समेत भारत विज्ञान यात्रा की टीम से जुड़े सदस्य और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।
अतिथियों और प्रतिभागियों ने भारत विज्ञान यात्रा के पहले आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने के लिए ऐसे कार्यक्रमों की निरंतर आवश्यकता है।
महाराजगंज से शुरू हुई यह यात्रा अब देश के अन्य हिस्सों तक विज्ञान, नवाचार और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का संदेश पहुंचाने की दिशा में आगे बढ़ेगी। आयोजकों का लक्ष्य विज्ञान को किताबों और प्रयोगशालाओं से बाहर निकालकर समाज के प्रत्येक व्यक्ति के अनुभव और दैनिक जीवन से जोड़ना है।
रास्ता न दिला पाएं तो लेखपाल, कानूनगो, तहसीलदार सबको सस्पेंड करो : सीएम योगी
-  जनता दर्शन में महिला की पीड़ा पर सख्त हुए मुख्यमंत्री, भूमि विवादों में लापरवाही पर कार्रवाई के निर्देश

-  करीब 200 लोगों की समस्याएं सुनीं, अधिकारियों को समयबद्ध निस्तारण के निर्देश

गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भूमि संबंधी मामलों में लापरवाही बरतने वाले राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। मंगलवार को गोरखनाथ मंदिर में आयोजित जनता दर्शन में एक महिला ने दबंगों द्वारा रास्ता रोके जाने की शिकायत की। महिला की पीड़ा सुनकर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को तत्काल रास्ता दिलाने के निर्देश दिए और सख्त लहजे में कहा, “रास्ता न दिला पाएं तो लेखपाल, कानूनगो, तहसीलदार सबको सस्पेंड करो।”
मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिया कि महिला की समस्या का तत्काल समाधान कराया जाए। उन्होंने कहा कि यदि किसी भूमि संबंधी प्रकरण के निस्तारण में किसी भी स्तर पर हीलाहवाली या लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। प्रकरण की गंभीरता के अनुसार निलंबन की कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाए।

- करीब 200 फरियादियों से मिले सीएम
गोरखनाथ मंदिर परिसर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के बाहर आयोजित जनता दर्शन में मुख्यमंत्री ने करीब 200 लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। वह एक-एक फरियादी के पास पहुंचे और उनके प्रार्थना पत्र लेकर शिकायतों का संज्ञान लिया। मुख्यमंत्री ने लोगों को भरोसा दिलाया कि वे परेशान न हों, सरकार हर जरूरतमंद के साथ खड़ी है और उनकी समस्याओं का प्रतिबद्धता के साथ समाधान कराया जाएगा।
जनता दर्शन में कई लोगों ने भूमि और राजस्व से जुड़े मामलों में कर्मचारियों की ओर से लापरवाही की शिकायत की। इस पर मुख्यमंत्री ने संबंधित जिलाधिकारियों को मामलों की जांच कर दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।

-  इलाज के लिए मदद का दिया भरोसा
जनता दर्शन में आर्थिक रूप से कमजोर लोग इलाज के लिए सहायता की गुहार लेकर भी पहुंचे। मुख्यमंत्री ने उन्हें भरोसा दिलाया कि सरकार इलाज में हरसंभव मदद करेगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पात्र जरूरतमंदों के आयुष्मान कार्ड तत्काल बनवाए जाएं, ताकि उन्हें इलाज के लिए परेशान न होना पड़े।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि आयुष्मान कार्ड की सुविधा के बाद भी किसी जरूरतमंद को उपचार के लिए आर्थिक सहायता की आवश्यकता हो तो मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से मदद उपलब्ध कराई जाएगी।
उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि कोई भी पात्र व्यक्ति सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे और जरूरतमंदों की समस्याओं का संवेदनशीलता एवं प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जाए।
पीआरडी जवानों को सीएम योगी की बड़ी सौगात, अब मिलेगा 600 रुपये दैनिक ड्यूटी भत्ता
- सपरिवार पांच लाख रुपये तक मुफ्त इलाज की सुविधा, मुख्यमंत्री ने ‘पीआरडी कैशलेस चिकित्सा योजना’ का किया शुभारंभ


गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को प्रांतीय रक्षक दल (पीआरडी) के स्वयंसेवकों को बड़ी सौगात देते हुए दैनिक ड्यूटी भत्ता 500 रुपये से बढ़ाकर 600 रुपये करने की घोषणा की। साथ ही पीआरडी स्वयंसेवकों और उनके परिवारों को प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने के लिए ‘मुख्यमंत्री पीआरडी कैशलेस चिकित्सा योजना’ का शुभारंभ किया।
योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित पीआरडी स्वयंसेवकों के सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने स्वयंसेवकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा कार्ड वितरित किए। इसके साथ ही रिमोट का बटन दबाकर लखनऊ में करीब 23 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले बहुमंजिला पीआरडी बैरक का शिलान्यास भी किया।

-  आठ वर्षों में 250 से 600 रुपये हुआ ड्यूटी भत्ता
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1948 में गठित पीआरडी के स्वयंसेवकों को वर्ष 2019 तक महज 250 रुपये प्रतिदिन ड्यूटी भत्ता मिलता था। उनकी सरकार ने 2019 में इसे बढ़ाकर 375 रुपये, 2022 में 395 रुपये और 2025 में बढ़ाकर 500 रुपये प्रतिदिन किया। अब इसे 500 से बढ़ाकर 600 रुपये प्रतिदिन किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि पीआरडी के 75 वर्षों के इतिहास में दैनिक भत्ता जहां 250 रुपये तक ही पहुंच पाया था, वहीं पिछले आठ वर्षों में यह 250 से बढ़कर 600 रुपये होने जा रहा है। यह वृद्धि 100 प्रतिशत से भी अधिक है।

-  कानून-व्यवस्था से लेकर महाकुंभ तक निभाई अहम भूमिका
सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश में कानून का राज स्थापित करने में पुलिस और प्रशासन के सहयोगी के रूप में पीआरडी स्वयंसेवक समर्पण और सेवाभाव से अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। आपदा प्रबंधन, महाकुंभ, दीपोत्सव, रंगोत्सव, यातायात संचालन, चुनाव ड्यूटी और अन्य महत्वपूर्ण आयोजनों में पीआरडी जवानों ने अनुशासन के साथ अपनी भूमिका निभाई है।
उन्होंने कहा कि 2017 से पहले पीआरडी स्वयंसेवकों को पर्याप्त ड्यूटी तक नहीं मिलती थी, जबकि आज उनकी उपयोगिता को देखते हुए ड्यूटी के लिए जवान कम पड़ रहे हैं।

-  31 हजार से अधिक स्वयंसेवकों को मिलेगा लाभ
मुख्यमंत्री ने कहा कि पीआरडी स्वयंसेवकों के प्रदेश की प्रगति में योगदान और सेवाभाव को देखते हुए राज्य सरकार उन्हें और उनके परिवार के सदस्यों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करा रही है। योजना के तहत 31 हजार से अधिक पीआरडी स्वयंसेवकों को सरकारी और सरकार से इम्पैनल्ड अस्पतालों में प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक मुफ्त इलाज की सुविधा मिलेगी।
परिवार को शामिल करने पर इस योजना से 1.55 लाख से अधिक लोग लाभान्वित होंगे।

-  पीआरडी का बजट 23 करोड़ से बढ़कर 543 करोड़
राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), राजनीतिक पेंशन, सैनिक कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल डॉ. सोमेंद्र तोमर ने कहा कि पीआरडी स्वयंसेवक शांति, सुरक्षा और जनसेवा के मजबूत आधार हैं। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले पीआरडी का बजट महज 23 करोड़ रुपये था, जो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बढ़कर अब 543 करोड़ रुपये हो गया है।

-  दस स्वयंसेवकों को मिले कैशलेस चिकित्सा कार्ड
सम्मेलन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रतीकात्मक रूप से दस पीआरडी स्वयंसेवकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा कार्ड प्रदान किए। इनमें गोरखपुर के अजय, भीमसेन, धीरेंद्र और उमेश कुमार, लखनऊ की स्नेहलता रावत व अनामिका वर्मा, कुशीनगर की चंदा भारती, मऊ के जय सिंह, चंदौली के मो. शाकिर और वाराणसी के किशन गुप्ता शामिल रहे।
कार्यक्रम में जिला पंचायत की प्रशासक साधना सिंह, विधायक फतेह बहादुर सिंह, श्रीराम चौहान, विपिन सिंह, महेंद्रपाल सिंह, प्रदीप शुक्ल, सरवन निषाद, एमएलसी एवं भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह, पीआरडी विभाग के सचिव सुहास एलवाई, भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष विनोद राय, जिलाध्यक्ष जनार्दन तिवारी, महानगर अध्यक्ष रमेश प्रताप गुप्ता और पूर्व महानगर अध्यक्ष राजेश गुप्ता सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी मौजूद रहे।