8 सितंबर 2026 की मध्य रात्रि के बाद,चंद्रमा और बृहस्पति की युति दिखाई देगी
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि खगोल प्रेमियों के लिए एक शानदार खगोलीय युति घटित होने वाली है क्योंकि 8 सितंबर 2026 को मध्य रात्रि के बाद लगभग 3 बजकर 35 मिनट के बाद पूर्वी क्षितिज के आकाश में चंद्रमा और बृहस्पति ग्रह एक साथ दिखाई देने शुरू हो जाएंगे या कुछ यूं कहें कि यानि कि 9 सितंबर 2026 की भोर सुबह तक के आकाश में एक पतला चंद्र-कोर (Crescent Moon) चन्द्रमा,हमारे सौर मण्डल के सबसे बड़े ग्रह बृहस्पति (Jupiter) के बेहद करीब से गुजरेगा,इस दौरान दोनों के बीच की दूरी 1 डिग्री से भी कम होगी, जिससे इस युति के दौरान एक बेहद ही खूबसूरत खगोलीय दृश्य बनेगा, इस खगोलीय संरेखण को खगोल विज्ञान की भाषा में चंद्रमा और बृहस्पति ग्रह के शानदार निकटतम आगमन को चन्द्र -ब्रहस्पति युति कहा जाता है, लेकिन वास्तव में यह दोनों खगोलीय पिण्ड आपस में करोड़ों किलोमीटर की दूरी पर मौजूद हैं लेकिन कभी कभी पृथ्वी से देखने पर दृश्य प्रभाव के कारण काफ़ी पास पास दिखाई देते हैं इसी को खगोल विज्ञान की भाषा में कंजंक्शन या युति भी कहा जाता है।
किस दिशा में और किस तारामण्डल क्षेत्र में स्थित होंगे दोनों खगोलीय पिण्ड।?
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस शानदार खगोलीय युति को देखने के लिए आपको किसी विशेष दूरबीन/ टेलीस्कोप या विनोकुलर आदि उपकरण की भी आवश्यकता नहीं है, आप अपनी साधारण आंखों से ही इस युति को देख सकते हैं , लेकिन अगर आपके पास कोई टेलीस्कोप /दूरबीन या विनोकुलर आदि उपकरण मौजूद हैं तो आप इसको और भी अधिक सर्वोत्तम तौर पर देख सकते हैं, लेकिन आपको पूर्वी आकाश में क्षितिज से थोड़ा ऊपर देखना होगा तब आकाश में एक बहुत ही पतला हंसिया जैसा चंद्रमा (वैनिंग क्रिसेंट मून) लगभग 8 से 10 प्रतिशत चमकता हुआ दिखाई देगा इस दौरान चंद्रमा का मैग्नीट्यूड लगभग माइनस 6.78 के क़रीब होगा और यह सिंह तारामंडल क्षेत्र में स्थित होगा और ठीक उसके पास ही में बेहद चमकीला ब्रहस्पति ग्रह एक बड़े तारे की तरह चमकता हुआ नज़र आयेगा इस दौरान बृहस्पति ग्रह का मैग्नीट्यूड लगभग माइनस 1.66 होगा और यह कर्क तारामंडल में स्थित होगा।
कहां कहां से दिखाई देगा लूनर ऑक्ल्टेशन।?
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि यह लूनर ऑक्ल्टेशन की खगोलीय स्थिति भारत से दिखाई नहीं देगी लेकिन यह कनाडा, ग्रीनलैंड, संयुक्त राज्य अमेरिका, पूर्वी रूस और उत्तरी प्रशांत क्षेत्र के कुछ स्थानों पर यह घटना और भी रोमांचक होगी क्योंकि वहां चंद्रमा सीधे बृहस्पति के सामने से गुजरेगा और कुछ समय के लिए इस विशाल ग्रह को अपनी ओट में छिपा देगा,इस खगोलीय घटना को चंद्र ग्रहण नहीं, बल्कि “चंद्रमा द्वारा ग्रह का आवरण” या लूनर ऑक्ल्टेशन (Lunar Occultation / चंद्र आवरण) कहा जाता है, लेकिन जो लोग चंद्र आवरण वाले क्षेत्र में नहीं हैं, वे भी चंद्रमा और बृहस्पति की इस शानदार और बेहद निकट खगोलीय युति का आनंद तो उठा ही सकते हैं।
भारत में इस खगोलीय युति का कैसे कर सकते हैं ख़ास दीदार और क्या क्या बरतें सावधानियां।?
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस ख़ास खगोलीय नज़ारे को देखने के लिए आपको किसी विशेष उपकरण की ज़रूरत नहीं है क्योंकि इसे देखने के लिए आपको किसी टेलिस्कोप (Telescope) या दूरबीन की आवश्यकता नहीं है, इसे केवल नग्न आँखों से सीधे आसमान में देखा जा सकता है, लेकिन आज कल बढ़ते प्रकाश प्रदूषण/लाइट पॉल्यूशन के कारण तारों और ग्रहों को साधारण आंखों से देखने में भी दिक्कत का सामना करना पड़ता है इसलिए उच्च कोटि के दृश्य के लिए प्रकाश प्रदूषण से पूर्णतः दूर जाएं, या कुछ यूं कहें कि किसी ग्रामीण इलाकों में जाकर देखना शहरों के मुक़ाबले ज़्यादा फायदेमंद होता है,नहीं तो शहरों की अनियमित तेज़ रोशनी और इससे उत्पन्न होने वाले प्रकाश प्रदूषण के कारण वैसे ही साधारण आँखों से दिखाई देने वाले तारों और ग्रहों तक की संख्या सीमित होती जा रही है और बढ़ते हुए प्रकाश प्रदूषण के कारण ही आज कल खगोल प्रेमियों के लिए भी कई बार निराश ही होना पड़ता है और अगर पृथ्वी पर ऐसे ही अनियमित तौर पर अंधाधुंध प्रकाश प्रदूषण बढ़ता रहा तो वह दिन दूर नहीं है जब तमाम खगोलीय पिंड जो आसानी से दिख जाते थे वह भी दिखना बंद हो जाएंगे और हम अपने ही नहीं बल्कि सभी के हिस्से का आकाश भी खो देंगे जोकि मानवता के लिए किसी दुर्भाग्य से कम नहीं होगा अगर हम पुराने जमाने की बात करें तो पाते हैं कि पुराने जमाने में साधारण आंखों से ही आसानी से दिखने वाले अनगिनत खगोलीय पिण्ड एवं घटनाएँ और हमारी आकाशगंगा एवं अन्य तमाम खगोलीय पिंड ऐसे ही रात्रि के आकाश में साधारण आंखों से ही दिखाई देते थे लेकिन आज जो बचे हुए हैं इन्हें भी जिन्हें साधारण आंखों से आसानी से देखा जा सकता है वो भी बढ़ते प्रकाश प्रदूषण के कारण ही सभी धीरे धीरे बिल्कुल गायब हो जाएंगे इसीलिए अभी भी समय है कि आप ख़ुद के साथ ही सभी में वैज्ञानिक वातावरण उत्पन्न करते हुए समायोचित समझाने का प्रयास करें कि प्रकाश प्रदूषण क्या है और यह कितना खतरनाक साबित हो रहा है सभी के लिए चाहें वह मानव हों। पशु, पक्षी एवं कीट पतंगे आदि कोई भी इसकी अधिकता की चपेट से बचा नहीं है और अगर इसको महसूस करना चाहते हैं तो आप इसे स्पष्ट देखने के लिए किसी ग्रामीण इलाके या ऐसी जगह जाएं जहाँ अंधेरा हो या डार्क स्काई जोन हों,आपको ख़ुद महसूस होगा कि जो खगोलीय घटनाएं एवं तारे, ग्रह और मंदाकिनी आदि शहरों से दिखाई नहीं देती हैं वहीं ग्रामीण इलाकों जहां प्रकाश प्रदूषण नहीं होता है वहां से आसानी से दिखाई देना शुरू हो जाएंगे, लेकिन अगर हम बात करें चंद्रमा और बृहस्पति ग्रह की युति की तो यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि मानसून का खलल भी एक बाधक हो सकता है चूंकि भारत में सितंबर की शुरुआत में कई हिस्सों में मानसूनी बादल छाए रहते हैं,इसलिए यदि आपके इलाके में आसमान पूरी तरह साफ़ (Clear Sky) रहता है,तभी आप इसे देख पाएंगे,और साथ ही खगोलविद अमर पाल सिंह ने विशेष ज़ोर देते हुए यह भी बताया कि किसी भी समय सावधानी बेहद ही जरूरी है, जैसे की दूरबीनों आदि को लगाते समय भी विशेष ध्यान रखना चाहिए, खासकर,सूर्य के आसपास या उसकी दिशा में कभी भी बिना उचित एवं बिना उच्च कोटि मानकीकृत प्रमाणित सौर फिल्टर एवं संपूर्ण सटीक प्रमाणित वैज्ञानिक जानकारी और सावधानियों के किसी भी दूरबीन,टेलीस्कोप या किसी अन्य ऑप्टिकल उपकरण का उपयोग न करें क्योंकि अन्यथा की स्थिति में बिना जाने ऐसा करने से आंखों को स्थायी नुकसान हो सकता है।
1 hour and 3 min ago
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