अंतरिक्ष विज्ञान में करियर की राह बताएंगे पूर्व इसरो वैज्ञानिक जयंत जोशी

- आज निःशुल्क ऑनलाइन वेबिनार, छात्रों-शिक्षकों को स्पेस साइंस और इसरो के मिशनों पर मिलेगा मार्गदर्शन

गोरखपुर। अंतरिक्ष विज्ञान और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक छात्रों और युवाओं के लिए 3 सितंबर को विशेष ऑनलाइन वेबिनार आयोजित किया जा रहा है। डे एंड नाइट स्पेस फाउंडेशन और सहयोगी संस्थानों की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में इसरो के पूर्व वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं इंजीनियर जयंत पी. जोशी मुख्य वक्ता होंगे।
यह कार्यक्रम तृतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस 2026 के तहत आयोजित 15 दिवसीय डिजिटल भारत स्पेस यात्रा अभियान के समापन अवसर पर होगा। निःशुल्क वेबिनार दोपहर 12:10 बजे शुरू होगा। इसका उद्देश्य युवाओं में अंतरिक्ष विज्ञान और आधुनिक तकनीक के प्रति रुचि बढ़ाने के साथ इस क्षेत्र में उपलब्ध करियर विकल्पों की जानकारी देना है।
पूर्व इसरो वैज्ञानिक जयंत जोशी अपने अनुभवों के आधार पर प्रतिभागियों को अंतरिक्ष विज्ञान के मूल सिद्धांतों, इसरो के प्रमुख अंतरिक्ष अभियानों और स्पेस सेक्टर में भविष्य की संभावनाओं के बारे में जानकारी देंगे। इसके अलावा इसरो समेत देश-विदेश की विभिन्न अंतरिक्ष एजेंसियों में करियर बनाने के लिए जरूरी शैक्षिक और व्यावहारिक तैयारियों पर भी मार्गदर्शन दिया जाएगा।

- शिक्षकों के लिए भी उपयोगी होगा सत्र
वेबिनार में शिक्षकों को भी विद्यार्थियों के बीच वैज्ञानिक सोच विकसित करने और STEM यानी विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग एवं गणित आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने के तरीकों की जानकारी दी जाएगी।
व्याख्यान के बाद सीधा प्रश्नोत्तर सत्र होगा, जिसमें प्रतिभागी पूर्व इसरो वैज्ञानिक से अपने सवाल पूछ सकेंगे। आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम में विद्यालयी छात्र, शिक्षक, शोधार्थी, अंतरिक्ष विज्ञान में रुचि रखने वाले युवा और आम नागरिक शामिल हो सकते हैं।

- Google Meet पर होगा आयोजन
ऑनलाइन कार्यक्रम में शामिल होने के लिए प्रतिभागियों को दोपहर 12:05 बजे तक Google Meet के माध्यम से जुड़ना होगा। आयोजकों ने बताया कि प्लेटफॉर्म पर प्रतिभागियों की संख्या सीमित होने के कारण पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर प्रवेश दिया जाएगा। इसलिए इच्छुक प्रतिभागियों से समय से पहले जुड़ने की अपील की गई है।
गोरखनाथ मंदिर में CM योगी का जनता दरबार, 200 फरियादियों की सुनी समस्याएं

- तहसील-थाना स्तर पर मामलों के त्वरित निस्तारण के निर्देश, गंभीर मरीजों की मदद के लिए अफसरों को दिए आदेश

गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार सुबह गोरखनाथ मंदिर परिसर में जनता दरबार लगाकर करीब 200 लोगों की समस्याएं सुनीं। गोरखपुर प्रवास के तीसरे दिन आयोजित इस जनता दर्शन में बड़ी संख्या में लोग अपनी शिकायतें और प्रार्थना पत्र लेकर पहुंचे। मुख्यमंत्री ने एक-एक फरियादी के पास जाकर उनकी बात सुनी और संबंधित अधिकारियों को समस्याओं के शीघ्र समाधान के निर्देश दिए।
महंत दिग्विजयनाथ स्मृति सभागार के बाहर सुबह से ही फरियादियों की भीड़ जुटने लगी थी। मुख्यमंत्री ने लोगों के प्रार्थना पत्र लिए और उनकी समस्याओं की जानकारी हासिल की। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि शिकायतों के निस्तारण में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।

- स्थानीय स्तर पर ही निपटाएं मामले
मुख्यमंत्री ने कहा कि तहसील और थाना स्तर पर आने वाली शिकायतों का समाधान वहीं समयबद्ध तरीके से किया जाए। राजस्व से जुड़े मामलों को भी लंबित न रखा जाए। दूसरे जिलों से संबंधित शिकायतों के प्रार्थना पत्र संबंधित अधिकारियों को भेजकर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

- रास्ते और जमीन से जुड़ी शिकायतें भी पहुंचीं
जनता दर्शन में गोंडा से पहुंची एक महिला ने राजस्व संबंधी मामले में लेखपाल और नायब तहसीलदार पर आरोप लगाए। मुख्यमंत्री ने मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। वहीं, कुशीनगर से आई एक महिला ने रास्ते पर अवरोध और अतिक्रमण की शिकायत की। मुख्यमंत्री ने संबंधित कमिश्नर को कार्रवाई करते हुए रास्ता उपलब्ध कराने तथा अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए।

- इलाज के लिए आर्थिक सहायता की मांग
जनता दर्शन में कई लोग गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए आर्थिक सहायता की उम्मीद लेकर पहुंचे। मुख्यमंत्री ने उन्हें मदद का भरोसा दिलाया। उन्होंने अधिकारियों से पात्र लोगों के उपचार का अनुमानित खर्च तैयार कराने और नियमानुसार आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तेज करने को कहा।

- बच्चों से मिले, चॉकलेट देकर पढ़ाई के बारे में पूछा
जनता दर्शन के दौरान महिलाओं के साथ आए बच्चों पर भी मुख्यमंत्री का ध्यान गया। उन्होंने बच्चों को अपने पास बुलाकर दुलारा, चॉकलेट दी और उनकी पढ़ाई के बारे में जानकारी ली। बच्चों के साथ मुख्यमंत्री का यह सहज संवाद वहां मौजूद लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र रहा।

- गौशाला पहुंचे CM, गायों को खिलाया गुड़-रोटी
जनता दर्शन से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर की गौशाला का भी दौरा किया। उन्होंने गायों को गुड़ और रोटी खिलाई तथा उनकी देखभाल की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने गौशाला में साफ-सफाई, चारे और पशुओं की उचित देखभाल को लेकर संबंधित लोगों को आवश्यक निर्देश भी दिए।
आज खास होगा स्टर्जन मून, चंद्र ग्रहण भी लगेगा; भारत में नहीं दिखेगा नजारा

- चंद्रमा का करीब 96 फीसदी हिस्सा पृथ्वी की छाया में आएगा, कई देशों में दिख सकता है तांबे जैसा लाल रंग

गोरखपुर। खगोलविज्ञान में दिलचस्पी रखने वालों के लिए 28 अगस्त 2026 की पूर्णिमा खास रहने वाली है। खगोलविद अमर पाल सिंह के अनुसार इस दिन अगस्त की पूर्णिमा यानी स्टर्जन मून के साथ चंद्र ग्रहण की खगोलीय घटना भी होगी। हालांकि भारत में रहने वाले लोग इस अद्भुत नजारे को नहीं देख सकेंगे।
अमर पाल सिंह ने बताया कि भारत में पूर्णिमा का चरम सुबह के समय होगा। इसी दौरान चंद्र ग्रहण भी घटित होगा, लेकिन भारत से ग्रहण का दृश्य दिखाई नहीं देगा। इसलिए देश में स्टर्जन मून का पूर्ण स्वरूप और चंद्र ग्रहण का मिलन देखने का अवसर नहीं मिलेगा।
उन्होंने बताया कि वैश्विक स्तर पर यह पूर्णिमा खगोल प्रेमियों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि पूर्ण रूप से चमकता चंद्रमा कुछ समय बाद पृथ्वी की छाया में प्रवेश करेगा। ग्रहण के दौरान चंद्रमा का लगभग 96 प्रतिशत हिस्सा पृथ्वी की छाया से ढक जाएगा।
पृथ्वी की छाया में आने के कारण कई देशों में चंद्रमा का रंग सामान्य से अलग नजर आ सकता है। वहां यह तांबे जैसा लाल या गहरे नारंगी रंग में दिखाई देने की संभावना है। हालांकि भारत से यह खगोलीय नजारा दिखाई नहीं देगा।

- भारत में कब और कितने बजे होगा पूर्णिमा का चरम समय
वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला, (तारामण्डल) गोरखपुर के खगोलविद् अमर पाल सिंह के अनुसार, यह पूर्णिमा 28 अगस्त 2026 को भारतीय समयानुसार सुबह करीब 9:48 बजे अपने चरम पर होगी। इसका अर्थ है कि जब पूर्ण चंद्रमा अपने सर्वोच्च रूप में होगा, तब भारत में दिन हो चुका होगा। इसलिए भारतीय आकाश में ग्रहण का दृश्य प्रत्यक्ष रूप से नहीं देखा जा सकेगा। फिर भी, सूर्यास्त के बाद चमकता हुआ पूर्ण चंद्रमा लोगों को विशेष दृश्य का अनुभव कराएगा।

- क्या होता है “स्टर्जन मून”
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि “स्टर्जन मून” नाम उत्तरी अमेरिका की जनजातीय परंपराओं से जुड़ा है, क्योंकि अगस्त के महीने में ग्रेट लेक्स और लेक चैम्पलेन जैसे क्षेत्रों में स्टर्जन मछलियाँ बड़ी संख्या में पाई जाती थीं, इसलिए इस पूर्णिमा को यह नाम दिया गया। अलग-अलग संस्कृतियों में इसके अन्य नाम भी प्रचलित रहे हैं, जैसे कि सेल्ट्स इसे विवाद का चंद्रमा और लिंक्स का चंद्रमा कहते थे, जबकि एंग्लो-सैक्सन परंपरा में इसे अनाज का चंद्रमा कहा गया। अगर हम बात करें इसके कुछ अन्य नामों कि तो पाते हैं कि इसके कई अन्य नाम भी मौजूद हैं उनमें से कुछ इस प्रकार हैं जैसे कि इसको कॉर्न मून, ग्रेन मून, फ्रूट मून, लाइटनिंग मून और बारले मून जैसे आदि नामों से भी जाना जाता रहा है।

- किस दिशा में दिखाई देगा स्टर्जन पूर्णिमा का चांद
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि 28 अगस्त 2026 को स्टर्जन पूर्णिमा का चांद शाम के समय पूर्वी आकाशीय क्षितिज पर लगभग 6 बजकर 35 मिनट के बाद दिखाई देना शुरू कर देगा और पूरी रात अपनी चमक बिखेरते हुए भोर में पश्चिमी क्षितिज की ओर चला जायेगा।

- कैसे पड़ा अगस्त के चंद्रमा का नाम 'स्टर्जन मून'
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि अगस्त की पूर्णिमा को स्टर्जन मून के नाम से जाना जाता है, जिसका नाम एक विशाल मीठे पानी की मछली के नाम पर रखा गया है जो अगस्त में बड़ी संख्या में पाई जाती है। चूंकि उत्तरी गोलार्ध में अगस्त कटाई का मौसम होता है, इसलिए अगस्त की पूर्णिमा को ग्रेन मून, फ्रूट मून और बारले मून भी कहा जाता है।

- क्या संबंध होता है ग्रहण और पूर्णिमा में
खगोलविद अमर पाल सिंह का यह भी कहना है कि ग्रहण और पूर्णिमा का मेल कोई असाधारण संयोग नहीं है, बल्कि चंद्रमा की कक्षा और उसके नोड्स से जुड़ी एक नियमित खगोलीय प्रक्रिया है। जब पूर्णिमा के समय चंद्रमा अपनी कक्षा के ऐसे बिंदु पर होता है, जहां वह पृथ्वी की कक्षा यानी क्रांतिवृत्त को काटता है, तभी चंद्र ग्रहण की स्थिति बनती है। यही कारण है कि कभी-कभी पूर्णिमा के साथ चंद्र ग्रहण और अमावस्या के साथ सूर्य ग्रहण देखने को मिलता है।

- हर पूर्णिमा को क्यों नहीं होता चंद्र ग्रहण
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि हर पूर्णिमा को चंद्र ग्रहण न होने का मुख्य कारण चंद्रमा की कक्षा का पृथ्वी की कक्षा के तल (orbital plane) से लगभग 5° से 5.1° झुका होना है और मुख्य कारण कक्षा का झुकाव है। चंद्रमा, पृथ्वी के चारों ओर बिल्कुल सीधी या समतल प्लेट की तरह नहीं घूमता, बल्कि इसका मार्ग 5 डिग्री झुका हुआ होता है, साथ ही इस झुकाव के कारण ज्यादातर पूर्णिमा के दिन चंद्रमा, पृथ्वी की छाया के या तो ऊपर से या नीचे से निकल जाता है और छाया सीधे चंद्रमा पर नहीं पड़ती, लेकिन यह भी जानना आवश्यक है कि चंद्र ग्रहण तभी होता है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा अंतरिक्ष में बिल्कुल एक सीध में आएं और चंद्रमा पृथ्वी की छाया से होकर गुजरे, जो कि केवल तभी संभव है जब पूर्णिमा की तिथि कक्षा के मिलन बिंदुओं (nodes) के पास हो।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि 28 अगस्त 2026 को होने वाला चंद्र ग्रहण भारतीय समयानुसार (IST) सुबह 6:54 बजे शुरू होगा और दोपहर 12:32 बजे समाप्त होगा इसीलिए यह भारत में दिखाई नहीं देगा।
महाराजगंज से शुरू हुई ‘भारत विज्ञान यात्रा’, विज्ञान को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प


- राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस पर हुआ शुभारंभ, विद्यार्थियों ने खगोलीय गतिविधियों और वैज्ञानिक प्रयोगों से समझे विज्ञान के नए आयाम

महाराजगंज/गोरखपुर। विज्ञान को सरल, रोचक और आमजन के जीवन से जोड़ने के उद्देश्य से ‘भारत विज्ञान यात्रा’ का शुभारंभ राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के अवसर पर महाराजगंज से किया गया। यात्रा के माध्यम से विद्यार्थियों और आम लोगों के बीच वैज्ञानिक सोच, नवाचार और विज्ञान के प्रति जिज्ञासा को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाएगा। आयोजकों के अनुसार, आगामी चरणों में देश के विभिन्न हिस्सों में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी आधारित कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
भारत विज्ञान यात्रा के संस्थापक एस.टी. अली और सह-संस्थापक दिशांक श्रीवास्तव के नेतृत्व में शुरू हुई इस पहल के पहले कार्यक्रम में विभिन्न विद्यालयों के बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में विज्ञान को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रखते हुए प्रयोगों और गतिविधियों के जरिए समझाने पर जोर दिया गया।

- तारामंडल से लेकर अंतरिक्ष मॉडल तक दिखा विज्ञान
कार्यक्रम में गोरखपुर नक्षत्रशाला के खगोलविद अमर पाल सिंह मुख्य वक्ता रहे। हरियाणा से आए वरिष्ठ विज्ञान संचारक एवं लैब सॉल्यूशन्स के निदेशक संजीव कुमार ने विद्यार्थियों को विभिन्न वैज्ञानिक प्रयोगों के माध्यम से विज्ञान के व्यावहारिक पहलुओं से परिचित कराया।
डे एंड नाइट स्पेस फाउंडेशन की टीम ने भी कार्यक्रम में सहयोग किया। विशेष दूरबीनों और सोलर गॉगल्स के माध्यम से प्रतिभागियों को आकाश दर्शन कराया गया। इसके अलावा वीआर तकनीक, थ्री-डी प्रिंटर, रॉकेट मॉडल और हाइड्रा रॉकेट जैसी गतिविधियों के जरिए विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान और आधुनिक तकनीक की जानकारी दी गई।

- विज्ञान को जीवन से जोड़ना जरूरी
संस्थापक एस.टी. अली ने कहा कि विज्ञान को जन-जन तक पहुंचाने के लिए उसे सरल और व्यवहारिक भाषा में प्रस्तुत करना जरूरी है। उनका कहना था कि विज्ञान केवल किताबों या प्रयोगशालाओं तक सीमित न रहे, बल्कि विद्यार्थियों और आम लोगों के दैनिक जीवन का हिस्सा बने। उन्होंने कहा कि यात्रा का एक उद्देश्य प्रतिभाशाली विद्यार्थियों की पहचान कर उन्हें विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराना भी है।
सह-संस्थापक दिशांक श्रीवास्तव ने कहा कि ‘विज्ञान सभी के लिए’ की सोच के साथ यह पहल शुरू की गई है। वैज्ञानिक विषयों को रोचक तरीके से लोगों तक पहुंचाना और समाज में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को मजबूत करना यात्रा के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है।

- अंतरिक्ष विज्ञान विद्यार्थियों के लिए संभावनाओं का क्षेत्र
खगोलविद अमर पाल सिंह ने विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान की संभावनाओं से परिचित कराया। उन्होंने कहा कि ब्रह्मांड के रहस्यों को समझने की जिज्ञासा वैज्ञानिक अनुसंधान को आगे बढ़ाती है। अंतरिक्ष विज्ञान युवाओं को नए सवाल पूछने और उनके वैज्ञानिक समाधान तलाशने के लिए प्रेरित करता है।
विज्ञान संचारक संजीव कुमार ने प्रयोगों के जरिए विद्यार्थियों को विज्ञान के पीछे काम करने वाले सिद्धांत समझाए। उन्होंने वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने और अंधविश्वास से दूर रहने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रयोग और गतिविधियों के माध्यम से कठिन वैज्ञानिक अवधारणाओं को भी आसानी से समझा जा सकता है।

- प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को किया गया सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों और युवा विज्ञान प्रेमियों को प्रशस्ति पत्र और मेडल देकर सम्मानित किया गया। अन्य प्रतिभागियों को भी प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।
आयोजकों के अनुसार, ‘भारत विज्ञान रत्न’ सम्मान मनीष पटेल, ‘भारत विज्ञान गौरव’ सम्मान मोहम्मद कयूम और ‘भारत विज्ञान प्रतिभा’ सम्मान युवराज को प्रदान किया गया। सांत्वना पुरस्कार के लिए भी विद्यार्थियों का चयन किया गया।
ब्रजेश यादव ने कहा कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण समाज को नई दिशा देने और समस्याओं के समाधान के लिए नए तरीके विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने समाज में विज्ञान आधारित सकारात्मक वातावरण तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

- गणमान्य लोगों ने की पहल की सराहना
कार्यक्रम में आरपीआईसी के चेयरमैन डॉ. पंकज तिवारी, ग्रीन माउंट एकेडमी के संस्थापक जियावुल्लाह, कलावती देवी इंटर कॉलेज के अखिलेश मिश्रा, ग्रीन माउंट एकेडमी की शीतल पटेल और ज्योति विश्वकर्मा, डे एंड नाइट फाउंडेशन के एडवाइजर मुस्तान शेरुल्लाह, अमरेश कुमार समेत भारत विज्ञान यात्रा की टीम से जुड़े सदस्य और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।
अतिथियों और प्रतिभागियों ने भारत विज्ञान यात्रा के पहले आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने के लिए ऐसे कार्यक्रमों की निरंतर आवश्यकता है।
महाराजगंज से शुरू हुई यह यात्रा अब देश के अन्य हिस्सों तक विज्ञान, नवाचार और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का संदेश पहुंचाने की दिशा में आगे बढ़ेगी। आयोजकों का लक्ष्य विज्ञान को किताबों और प्रयोगशालाओं से बाहर निकालकर समाज के प्रत्येक व्यक्ति के अनुभव और दैनिक जीवन से जोड़ना है।
रास्ता न दिला पाएं तो लेखपाल, कानूनगो, तहसीलदार सबको सस्पेंड करो : सीएम योगी
-  जनता दर्शन में महिला की पीड़ा पर सख्त हुए मुख्यमंत्री, भूमि विवादों में लापरवाही पर कार्रवाई के निर्देश

-  करीब 200 लोगों की समस्याएं सुनीं, अधिकारियों को समयबद्ध निस्तारण के निर्देश

गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भूमि संबंधी मामलों में लापरवाही बरतने वाले राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। मंगलवार को गोरखनाथ मंदिर में आयोजित जनता दर्शन में एक महिला ने दबंगों द्वारा रास्ता रोके जाने की शिकायत की। महिला की पीड़ा सुनकर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को तत्काल रास्ता दिलाने के निर्देश दिए और सख्त लहजे में कहा, “रास्ता न दिला पाएं तो लेखपाल, कानूनगो, तहसीलदार सबको सस्पेंड करो।”
मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिया कि महिला की समस्या का तत्काल समाधान कराया जाए। उन्होंने कहा कि यदि किसी भूमि संबंधी प्रकरण के निस्तारण में किसी भी स्तर पर हीलाहवाली या लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। प्रकरण की गंभीरता के अनुसार निलंबन की कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाए।

- करीब 200 फरियादियों से मिले सीएम
गोरखनाथ मंदिर परिसर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के बाहर आयोजित जनता दर्शन में मुख्यमंत्री ने करीब 200 लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। वह एक-एक फरियादी के पास पहुंचे और उनके प्रार्थना पत्र लेकर शिकायतों का संज्ञान लिया। मुख्यमंत्री ने लोगों को भरोसा दिलाया कि वे परेशान न हों, सरकार हर जरूरतमंद के साथ खड़ी है और उनकी समस्याओं का प्रतिबद्धता के साथ समाधान कराया जाएगा।
जनता दर्शन में कई लोगों ने भूमि और राजस्व से जुड़े मामलों में कर्मचारियों की ओर से लापरवाही की शिकायत की। इस पर मुख्यमंत्री ने संबंधित जिलाधिकारियों को मामलों की जांच कर दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।

-  इलाज के लिए मदद का दिया भरोसा
जनता दर्शन में आर्थिक रूप से कमजोर लोग इलाज के लिए सहायता की गुहार लेकर भी पहुंचे। मुख्यमंत्री ने उन्हें भरोसा दिलाया कि सरकार इलाज में हरसंभव मदद करेगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पात्र जरूरतमंदों के आयुष्मान कार्ड तत्काल बनवाए जाएं, ताकि उन्हें इलाज के लिए परेशान न होना पड़े।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि आयुष्मान कार्ड की सुविधा के बाद भी किसी जरूरतमंद को उपचार के लिए आर्थिक सहायता की आवश्यकता हो तो मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से मदद उपलब्ध कराई जाएगी।
उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि कोई भी पात्र व्यक्ति सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे और जरूरतमंदों की समस्याओं का संवेदनशीलता एवं प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जाए।
पीआरडी जवानों को सीएम योगी की बड़ी सौगात, अब मिलेगा 600 रुपये दैनिक ड्यूटी भत्ता
- सपरिवार पांच लाख रुपये तक मुफ्त इलाज की सुविधा, मुख्यमंत्री ने ‘पीआरडी कैशलेस चिकित्सा योजना’ का किया शुभारंभ


गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को प्रांतीय रक्षक दल (पीआरडी) के स्वयंसेवकों को बड़ी सौगात देते हुए दैनिक ड्यूटी भत्ता 500 रुपये से बढ़ाकर 600 रुपये करने की घोषणा की। साथ ही पीआरडी स्वयंसेवकों और उनके परिवारों को प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने के लिए ‘मुख्यमंत्री पीआरडी कैशलेस चिकित्सा योजना’ का शुभारंभ किया।
योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित पीआरडी स्वयंसेवकों के सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने स्वयंसेवकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा कार्ड वितरित किए। इसके साथ ही रिमोट का बटन दबाकर लखनऊ में करीब 23 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले बहुमंजिला पीआरडी बैरक का शिलान्यास भी किया।

-  आठ वर्षों में 250 से 600 रुपये हुआ ड्यूटी भत्ता
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1948 में गठित पीआरडी के स्वयंसेवकों को वर्ष 2019 तक महज 250 रुपये प्रतिदिन ड्यूटी भत्ता मिलता था। उनकी सरकार ने 2019 में इसे बढ़ाकर 375 रुपये, 2022 में 395 रुपये और 2025 में बढ़ाकर 500 रुपये प्रतिदिन किया। अब इसे 500 से बढ़ाकर 600 रुपये प्रतिदिन किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि पीआरडी के 75 वर्षों के इतिहास में दैनिक भत्ता जहां 250 रुपये तक ही पहुंच पाया था, वहीं पिछले आठ वर्षों में यह 250 से बढ़कर 600 रुपये होने जा रहा है। यह वृद्धि 100 प्रतिशत से भी अधिक है।

-  कानून-व्यवस्था से लेकर महाकुंभ तक निभाई अहम भूमिका
सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश में कानून का राज स्थापित करने में पुलिस और प्रशासन के सहयोगी के रूप में पीआरडी स्वयंसेवक समर्पण और सेवाभाव से अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। आपदा प्रबंधन, महाकुंभ, दीपोत्सव, रंगोत्सव, यातायात संचालन, चुनाव ड्यूटी और अन्य महत्वपूर्ण आयोजनों में पीआरडी जवानों ने अनुशासन के साथ अपनी भूमिका निभाई है।
उन्होंने कहा कि 2017 से पहले पीआरडी स्वयंसेवकों को पर्याप्त ड्यूटी तक नहीं मिलती थी, जबकि आज उनकी उपयोगिता को देखते हुए ड्यूटी के लिए जवान कम पड़ रहे हैं।

-  31 हजार से अधिक स्वयंसेवकों को मिलेगा लाभ
मुख्यमंत्री ने कहा कि पीआरडी स्वयंसेवकों के प्रदेश की प्रगति में योगदान और सेवाभाव को देखते हुए राज्य सरकार उन्हें और उनके परिवार के सदस्यों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करा रही है। योजना के तहत 31 हजार से अधिक पीआरडी स्वयंसेवकों को सरकारी और सरकार से इम्पैनल्ड अस्पतालों में प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक मुफ्त इलाज की सुविधा मिलेगी।
परिवार को शामिल करने पर इस योजना से 1.55 लाख से अधिक लोग लाभान्वित होंगे।

-  पीआरडी का बजट 23 करोड़ से बढ़कर 543 करोड़
राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), राजनीतिक पेंशन, सैनिक कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल डॉ. सोमेंद्र तोमर ने कहा कि पीआरडी स्वयंसेवक शांति, सुरक्षा और जनसेवा के मजबूत आधार हैं। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले पीआरडी का बजट महज 23 करोड़ रुपये था, जो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बढ़कर अब 543 करोड़ रुपये हो गया है।

-  दस स्वयंसेवकों को मिले कैशलेस चिकित्सा कार्ड
सम्मेलन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रतीकात्मक रूप से दस पीआरडी स्वयंसेवकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा कार्ड प्रदान किए। इनमें गोरखपुर के अजय, भीमसेन, धीरेंद्र और उमेश कुमार, लखनऊ की स्नेहलता रावत व अनामिका वर्मा, कुशीनगर की चंदा भारती, मऊ के जय सिंह, चंदौली के मो. शाकिर और वाराणसी के किशन गुप्ता शामिल रहे।
कार्यक्रम में जिला पंचायत की प्रशासक साधना सिंह, विधायक फतेह बहादुर सिंह, श्रीराम चौहान, विपिन सिंह, महेंद्रपाल सिंह, प्रदीप शुक्ल, सरवन निषाद, एमएलसी एवं भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह, पीआरडी विभाग के सचिव सुहास एलवाई, भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष विनोद राय, जिलाध्यक्ष जनार्दन तिवारी, महानगर अध्यक्ष रमेश प्रताप गुप्ता और पूर्व महानगर अध्यक्ष राजेश गुप्ता सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी मौजूद रहे।
नागपंचमी पर गोरखनाथ मंदिर में सजेगा कुश्ती का अखाड़ा
-  उत्तर प्रदेश केसरी, कुमार और वीर अभिमन्यु के विजेताओं को 1.01-1.01 लाख रुपये व गदा

-  फाइनल और पुरस्कार वितरण में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे पहलवानों का उत्साहवर्धन

गोरखपुर। नागपंचमी के पावन पर्व पर गोरखनाथ मंदिर परिसर एक बार फिर पारंपरिक कुश्ती के रोमांच का गवाह बनेगा। यहां 16 और 17 अगस्त को दो दिवसीय प्रदेश स्तरीय सीनियर प्राइजमनी पुरुष कुश्ती प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। प्रतियोगिता के फाइनल मुकाबलों और पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं मौजूद रहकर पहलवानों का उत्साहवर्धन करेंगे।
प्रदेश शासन के खेल विभाग और जिला कुश्ती संघ के संयुक्त तत्वावधान में होने वाली प्रतियोगिता में उत्तर प्रदेश केसरी, उत्तर प्रदेश कुमार और वीर अभिमन्यु के खिताब के लिए पहलवान दांव-पेंच आजमाएंगे। तीनों खिताबों के विजेताओं को 1.01 लाख रुपये नकद और गदा प्रदान की जाएगी।

-  325 पहलवान दिखाएंगे दमखम
जिला कुश्ती संघ के अध्यक्ष एवं अंतरराष्ट्रीय पहलवान दिनेश सिंह के अनुसार, प्रतियोगिता में प्रदेश के विभिन्न स्पोर्ट्स कॉलेजों, स्पोर्ट्स छात्रावासों, मंडलों और जिलों से करीब 325 पहलवान प्रतिभाग करेंगे। नागपंचमी पर देशज खेलों की प्राचीन परंपरा में कुश्ती का विशेष महत्व रहा है और गोरखनाथ मंदिर का इससे गहरा जुड़ाव है।
उन्होंने बताया कि गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर पिछले कुछ वर्षों में मंदिर की पारंपरिक कुश्ती प्रतियोगिता को प्रदेश स्तरीय स्वरूप दिया गया है।
उत्तर प्रदेश केसरी, उत्तर प्रदेश कुमार और वीर अभिमन्यु के तीनों विजेताओं को 1.01 लाख रुपये नकद और गदा दी जाएगी। वहीं तीनों खिताबों के उपविजेताओं को 51-51 हजार रुपये और प्रत्येक खिताब में तीसरे स्थान पर रहने वाले दो-दो पहलवानों को 25-25 हजार रुपये का पुरस्कार मिलेगा।
इसके अतिरिक्त प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले सभी पहलवानों को खेल विभाग की ओर से प्रत्येक कुश्ती बाउट के लिए 500 रुपये की प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी।

-  16 अगस्त को उद्घाटन, 17 को पुरस्कार वितरण
प्रतियोगिता का उद्घाटन 16 अगस्त को दोपहर 12:30 बजे होगा। वहीं फाइनल मुकाबलों के बाद 17 अगस्त को दोपहर बाद 3 बजे समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया जाएगा।
समापन समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। वह विजेता पहलवानों को पुरस्कृत करने के साथ उनका उत्साहवर्धन भी करेंगे। गोरखनाथ मंदिर की यह प्रतियोगिता पारंपरिक भारतीय कुश्ती को बढ़ावा देने और प्रदेश के युवा पहलवानों को बड़े मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर प्रदान करेगी।
विशेष खगोलीय घटना। 12/13 अगस्त 2026 की दरम्यानी रात आसमान में होगी रोशनी की बौछार।* *दिखाई देगी पर्सीड उल्का वर्षा
*12-13 अगस्त की रात सक्रिय होगा पर्सीड उल्का वर्षा का चरम* ।

जानिए सही समय और सटीक तरीका और संपूर्ण खगोल वैज्ञानिक जानकारियों से ओत प्रोत, उल्काओं के बारे में विशेष आलेख।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि अगस्त 2026 का पूरा महीना ही खगोल प्रेमियों के लिए बड़ा ही मनमोहत खगोलीय दृश्यों से भरा हुआ है क्योंकि भारत में भी दिखाई देंगे तेज और चमकीली उल्का वृष्टि, क्योंकि इस दिन चंद्रमा की रोशनी नहीं डालेगी खलल, अंधेरे आसमान में बेहतर रहेगा नजारा। खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि अगस्त के महीने में रात के आकाश में होने वाली सबसे लोकप्रिय खगोलीय घटनाओं में शामिल पर्सीड उल्का वर्षा (Perseid Meteor Shower) इस समय सक्रिय है,खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि वैसे तो उल्का-वर्षा कैलेंडर के अनुसार पर्सीड उल्का वर्षा 17 जुलाई से 24 अगस्त 2026 तक सक्रिय रहेगी और इसका अधिकतम गतिविधि काल भारतीय समयानुसार लगभग 12/13 अगस्त की दरम्यानी रात विशेषकर आधी रात के बाद और भोर से पहले का समय, भारत में इसे देखने के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।

*भारत में क्यों खास होगा 2026 का पर्सीड उल्का वर्षा ?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि अगस्त 2026 में पर्सीड उल्का वर्षा के अवलोकन के लिए एक महत्वपूर्ण अनुकूलता यह है कि इसका अधिकतम काल अमावस्या के आसपास पड़ रहा है। इसका अर्थ है कि रात के आकाश में चंद्रमा की तेज रोशनी उल्काओं की चमक को दबाने में बड़ी बाधा नहीं बनेगी। इसलिए शहरों से दूर, कम प्रकाश-प्रदूषण वाले स्थानों से इस वर्ष, पर्सीड उल्का वर्षा का अवलोकन अपेक्षाकृत बेहतर रहने की संभावना है।

*कितनी उल्का प्रति घंटे दिखाई दे सकती हैं।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि अगस्त 2026 के पर्सीड के लिए लगभग 60 से 100 उल्का प्रति घंटा के आदर्श (ZHR) शीर्षबिंदु प्रति घंटा दर और अमावस्या के कारण अनुकूल परिस्थितियों में दिखाई दे सकती हैं, हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि भारत में किसी भी व्यक्ति को हर घंटे 100 उल्काएँ दिखाई देंगी। ZHR (Zenithal Hourly Rate) शीर्षबिंदु प्रति घंटा दर एक मानकीकृत सैद्धांतिक दर है, जो आदर्श अंधेरे आकाश, उपयुक्त रेडिएंट ऊंचाई और अनुकूल पर्यवेक्षण परिस्थितियों में अनुमानित उल्का दर को दर्शाती है। वास्तविक संख्या मौसम, प्रकाश प्रदूषण, क्षितिज की स्थिति, रेडिएंट की ऊंचाई और पर्यवेक्षक की दृष्टि जैसे अनेक कारकों पर निर्भर करती है। खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि यहां एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक अंतर समझना जरूरी है कि उल्का वृष्टि मॉडल कैलेंडर के अनुसार अगस्त 2026 के लिए सुरक्षित आदर्श परिस्थितियों में पर्सीड की दर लगभग 100 उल्का प्रति घंटा के आसपास हो सकती है।

*क्या है पर्सीड उल्का वर्षा?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि पर्सीड उल्का वर्षा वास्तव में अंतरिक्ष में किसी एक स्थान से निकलने वाली आग की कोई धार नहीं है बल्कि यह पृथ्वी के सूर्य की परिक्रमा करते समय धूमकेतु (109P/Swift-Tuttle) /स्विफ्ट टटल द्वारा पीछे छोड़े गए धूल और छोटे चट्टानी कणों के प्रवाह से होकर गुजरने के कारण दिखाई देने वाली वार्षिक उल्का वर्षा है,जब ये छोटे कण पृथ्वी के वायुमंडल में अत्यधिक गति से प्रवेश करते हैं, तो वायुमंडल के साथ उनकी परस्पर घर्षण क्रिया से उनके आसपास की गैस आयनित और उत्तेजित होती है तथा आकाश में चमकदार प्रकाश-पथ दिखाई देता है। इन्हीं चमकदार घटनाओं को हम उल्का या आम बोलचाल की भाषा में टूटते हुए तारे भी कहते हैं। खगोलविद अमर पाल सिंह के अनुसार पर्सीड उल्काओं की औसत प्रवेश गति लगभग 59 किलोमीटर प्रति सेकंड है।

*कौन है इस पर्सीड उल्का वृष्टि का जनक धूमकेतु।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि पर्सीड उल्का वृष्टि का स्रोत (109P/Swift-Tuttle) /स्विफ्ट टटल धूमकेतु है,इस धूमकेतु की कक्षीय अवधि लगभग 130 वर्ष है। धूमकेतु की सूर्य के आसपास यात्रा के दौरान छोड़े गए कण उसकी कक्षा के आसपास एक मलबा-धारा बनाते हैं। पृथ्वी हर वर्ष जुलाई-अगस्त में इस धारा के क्षेत्र से गुजरती है और इसी कारण पर्सीड उल्का वर्षा दिखाई देती है।

*पर्सीड उल्का वृष्टि का रेडिएंट किस तारामण्डल तारामंडल में होगा।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि पर्सीड उल्काओं का रेडिएंट (Radiant) पर्सियस तारामंडल की दिशा में स्थित दिखाई देता है। रेडिएंट का मतलब होता है उल्का विकीर्णक बिंदु लेकिन केवल कोई भी रेडिएंट वह वास्तविक स्थान नहीं होता है जहां से उल्काएँ निकल रही होती हैं। यह केवल पृथ्वी से देखने पर उनका परिप्रेक्ष्य प्रभाव है। अंतरिक्ष में उल्का-कण लगभग समानांतर पथों पर वायुमंडल की ओर आते हैं, लेकिन दृष्टि-रेखाओं के कारण वे आकाश में एक ही क्षेत्र से आती हुई प्रतीत होती हैं। इसे ही रेडिएंट पॉइंट कहा जाता है।

*भारत में कब और कैसे देखें?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि भारत में पर्सीड देखने का सबसे महत्वपूर्ण अवसर 12 अगस्त की रात से 13 अगस्त की भोर के बीच ही रहेगा लेकिन उसके बाद 13 अगस्त की रात से 14 अगस्त की भोर में भी कुछ उल्काएं देख सकते हैं इसलिए भारतीय पर्यवेक्षकों के लिए अधिकतम के आसपास की यह रातें अधिक उपयोगी रहेंगी। *कैसे और आकाश की किस दिशा में देखें।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि उल्काओं को देखने के लिए किसी भी विशेष दूरबीन या टेलीस्कोप एवं विनाकुलर आदि आवश्यक उपकरण की भी आवश्यकता नहीं है आपको केवल साधारण आंखों से ही पर्सियस तारामंडल की दिशा में देखने के साथ ही संपूर्ण आकाश का अवलोकन करना होगा और वास्तव में व्यापक आकाश को देखने के लिए नंगी आंखें अधिक उपयोगी होती हैं। इसीलिए किसी खुले और अपेक्षाकृत घने अंधेरे स्थान से आकाश का बड़ा हिस्सा दिखाई देने पर अनुभव बेहतर रहेगा। शहरों में कृत्रिम प्रकाश एवं प्रकाश प्रदूषण के कारण बहुत सी मंद उल्काएँ दिखाई नहीं दे पाएंगी, इसीलिए यह उल्का वृष्टि का विहंगम दृश्य ग्रामीण इलाकों में ज़्यादा बेहतर परिणाम देगा लेकिन ध्यान रहे कि मौसम साफ़ होना चाहिए।

*सबसे अच्छा समय एवं किस दिशा में होगा पर्सीड उल्का-वर्षा और क्यों पड़ा इसका नाम पर्सिड्स उल्का वर्षा।*
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस शानदार उल्का वृष्टि को देखने के लिए 12–13 अगस्त 2026 की दरम्यानी रात में सबसे अच्छा समय भारतीय समयानुसार रात लगभग 12 बजे से सुबह 4:30 बजे तक होगा साथ ही उत्तर-पूर्व दिशा की ओर देखें जहां पर पर्सियस तारामंडल दिखाई देगा,यह उत्तरी आकाश में स्थित है, और यह भी जानना आवश्यक है कि उल्काओं की इस बौछार को पर्सिड्स इसलिए कहा जाता है क्योंकि आसमान में ये सभी उल्काएं पर्सियस तारामंडल की दिशा से आती हुई प्रतीत होती हैं।

*क्या केवल पर्सियस तारामंडल की ओर देखना चाहिए ?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि यह एक सामान्य गलतफहमी है। यद्यपि पर्सीड का रेडिएंट पर्सियस तारामण्डल में मौजूद है, लेकिन उल्काएँ आकाश के विभिन्न हिस्सों में दिखाई दे सकती हैं। यदि पर्यवेक्षक केवल रेडिएंट के बिल्कुल पास देखेगा तो उल्काओं की लकीरें अपेक्षाकृत छोटी दिखाई दे सकती हैं। इसलिए खुले आकाश में व्यापक दृष्टि-क्षेत्र रखना अधिक उपयोगी है।

*पर्सीड उल्का चमकीली और तेज उल्काओं के लिए क्यों हैं प्रसिद्ध ।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि पर्सीड को दुनिया की सबसे लोकप्रिय वार्षिक उल्का वर्षाओं में गिना जाता है। अमर पाल सिंह के अनुसार इनके उल्का अक्सर तेज और चमकीले होते हैं तथा कुछ उल्काएँ लंबे प्रकाश-पथ भी छोड़ सकती हैं। इसी कारण पर्सीड को सामान्य पर्यवेक्षकों और खगोल प्रेमियों एवं विज्ञान के विद्यार्थियों आदि के लिए आकर्षक उल्का वर्षा माना जाता है। *क्या हर साल गतिविधि बिल्कुल समान रहती है?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि उल्का वर्षा की गतिविधि वर्ष-दर-वर्ष बदल सकती है। पृथ्वी धूमकेतु द्वारा छोड़े गए मलबे के अलग-अलग घनत्व वाले क्षेत्रों से गुजर सकती है। इसके ऐतिहासिक विश्लेषण के अनुसार 2016 में पर्सीड में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई थी, जिसका संबंध अलग-अलग घने धूल-पथों से गुजरने से था। इसके अलावा 2018, 2020 और 2021 में मुख्य अधिकतम के लगभग 0.7 से 1.5 दिन बाद अतिरिक्त उच्च गतिविधि रिपोर्ट की गई थी। हालांकि 2022 से 2024 के दौरान ऐसी समान गतिविधि नहीं देखी गई। इसलिए 2016 या 2021 जैसी गतिविधि को 2026 में विशेष खगोलीय परिस्थितियों में किसी ख़ास स्थान से दोहराए जाने की संभावना हो भी सकती है। *2026 में खगोल वैज्ञानिकों की नजर क्यों रहेगी?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि पर्सीड केवल मनोरंजन या आकाशीय दृश्य नहीं है बल्कि उल्का बरसातों का अध्ययन खगोल वैज्ञानिकों को धूमकेतुओं द्वारा छोड़े गए पदार्थ, पृथ्वी के निकट अंतरिक्ष में धूल-कणों के वितरण और पृथ्वी के वायुमंडल के साथ छोटे अंतरिक्षीय कणों की परस्पर क्रिया को समझने में सहायता करता है। उल्का वर्षाओं का व्यवस्थित अवलोकन अंतरिक्ष पर्यावरण के अध्ययन में भी उपयोगी होता है।

*भारत के लिए क्या है ख़ास।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि भारत में अगस्त 2026 का पर्सीड प्रदर्शन देखने का सबसे अच्छा अवसर अगस्त की 12/13 की दरम्यानी रात में ही रहेगा और साथ ही थोड़ा सा कम लेकिन दृश्य तौर पर 13/14 की रातों में भी रहेगा। विशेष रूप से आधी रात के बाद से भोर तक का समय व्यावहारिक रूप से बेहतर रहेगा, क्योंकि उस समय पर्सियस का रेडिएंट अधिक ऊंचाई पर पहुंचता है और आकाश का बड़ा हिस्सा उल्का गतिविधि के लिए अनुकूल होता है। वास्तविक संख्या मौसम और स्थानीय प्रकाश प्रदूषण पर निर्भर करेगी। *क्या होती है उल्का-वृष्टि और उल्का पिंड।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि सौर मंडल के ग्रहों के बीच के अंतरिक्ष में पत्थर और लोहे एवं अन्य मटेरियल्स युक्त अनगिनत छोटे-बड़े कंकड या कण मौजद होते हैं। ऐसा कोई कण जब तीव्र वेग से पृथ्वी के वायुमंडल में उतरकर क्षण भर के लिए चमक उठता है, तब वह 'उल्का' या 'टूटता तारा' कहलाता है। ये कण  लगभग 70 किलोमीटर प्रति सेकंड के वेग से वायुमंडल में उतरते हैं और धरातल से करीब 100 किलोमीटर ऊपर वायुमंडल के अणु-परमाणुओं के साथ घिसकर उद्दीप्त हो उठते हैं, लेकिन अंतरिक्ष से आने वाले धातु या पत्थर के जो बड़े पिंड पृथ्वी के वायुमंडल को पार करके पृथ्वी के धरातल पर पहुंच जाते हैं वे
'उल्कापिंड' कहलाते हैं।

*कितने प्रकार की होती हैं उल्काएं।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि उल्काओं के मुख्यतः दो प्रकार हैं, पहला है विरल उल्काएं और दूसरे को उल्का-वृष्टि कहा जाता है,जो उल्काएं एक-दूसरे से स्वतंत्र होती हैं और आकाश में भी लगभग वर्षभर नजर आती हैं, वे विरल उल्काएं कहलाती हैं। भिन्न-भिन्न दिनों और ऋतुओं में इनकी संख्या भी घटती-बढ़ती रहती है। ऐसी उल्काएं मध्यरात्रि के पहले कम और मध्यरात्रि के बाद ज्यादा संख्या में दिखाई देती हैं। शरद ऋतु की अपेक्षा ग्रीष्म में इनकी संख्या कम रहती है। अब अगर हम बात करें दोनों प्रकार की उल्का की तो पाते हैं कि इनका संबंध धूमकेतुओं से है,धूमकेतु धूलिकणों और बर्फ बनी गैसों के पिंड होते हैं। ये लंबी दीर्घवृत्ताकार कक्षाओं में सूर्य की परिक्रमा करते रहते हैं। इनसे निकले हुए कण इनकी कक्षाओं में चक्कर लगाते रहते हैं। जब पृथ्वी किसी धूमकेतु के यात्रापथ से गुजरती है, तब धूमकेतु के वे कण वायुमंडल में उतरकर उल्काओं के रूप में चमक उठते हैं और तब आकश में हमें उल्का-वृष्टि का आकर्षक नजारा दिखाई देता है।

*क्या होता है उल्का विकीर्णक-बिंदु और इसको क्यों  जानना आवश्यक होता है।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि अगर उल्का-वृष्टि को तारों के मानचित्र पर रेखांकित करके उन्हें पीछे की ओर ले जाया जाए, तो पता चलता है कि सभी 'टूटते तारे' आकाश के लगभग एक ही स्थान से निकलते नजर आते आयेंगे,आकाश के उस स्थान या बिंदु को खगोल विज्ञान की भाषा में 'उल्का विकीर्णक-बिंदु' कहते हैं। उल्का-विकीर्णक-बिंदु जिस तारा-मंडल में होता है, उसी का नाम उस उल्का-वृष्टि को दिया जाता है, जैसे अगस्त में होने वाली उल्का वृष्टि को पर्सिड्स उल्का बौछार कहा जाता है क्योंकि नामकरण भी उसी तारामंडल के अनुसार किया जाता है जिस तरफ़ से इनका रेडियंट पॉइंट होता है इसीलिए इसका नाम 'पर्सीयस' (Perseus) तारामंडल के नाम पर रखा गया है क्योंकि ये उल्काएं उसी दिशा से आती हुई प्रतीत होती हैं,लेकिन यह भी ध्यान में रखना जरूरी है कि किसी तारा-मंडल के एक बिंदु से उल्काओं के विकीर्णन का यह नजारा महज एक दृष्टिभ्रम ही होता है। पहली बात तो यही है कि तारे हमसे बहुत-बहुत दूर हैं, परंतु उल्काएं करीब 100-120 किलोमीटर ऊपर ही वायुमंडल में पहुंचकर उद्दीप्त हो उठती हैं। दूसरी बात यह है कि उल्काएं वास्तव में समांतर पथों में ही धरातल की ओर आती हैं, दोनों रेल-पटरियों की तरह। परंतु पटरियों को दूर तक देखने पर वे जैसी एक-दूसरे के साथ मिल जाती हैं, उसी प्रकार हमें आभास होता है कि उल्काओं की वृष्टि भी आकाश के लगभग एक स्थान से हो रही है,खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि लेकिन खगोल-विज्ञान में दिलचस्पी रखने वालों को प्रकाश प्रदूषण एवं मौसम साफ़ होने पर ख़ास कर के ग्रामीण इलाकों से तो इन उल्का-वृष्टियों को अवश्य ही देखना चाहिए और गिनती भी करनी चाहिए कि एक घंटे में आकाश से कितने 'तारे टूटते हैं'।

*उल्का वृष्टि में पृथ्वी की कक्षा का क्या महत्ब है।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि उल्कावृष्टि का संबंध धूमकेतुओं से है। धूमकेतु धूलिकणों और बर्फ बनी गैसों के पिंड होते हैं। ये लंबी दीर्घवृत्ताकार कक्षाओं में सूर्य की परिक्रमा करते रहते हैं। इनसे निकले हुए कण इनकी कक्षाओं में चक्कर लगाते रहते हैं। पृथ्वी जब किसी धूमकेतु की कक्षा से गुजरती है, तो 'उल्कावृष्टि' का भव्य नजारा देखने को मिलता है। उल्काएं-हमारे सौर-मंडल में ग्रह, उपग्रह और धूमकेतुओं के अतिरिक्त ऐसे असंख्य छोटे-बड़े पत्थर और लौह-टुकड़े हैं जो दीर्घवृत्ताकार मार्ग में सूर्य का चक्कर लगाते रहते हैं। इनमें अधिकांश तो मटर के दाने से बड़े नहीं हैं, परंतु कुछ इतने विशाल हैं कि टनों में भी तौले जा सकते हैं, तमाम उल्का प्रतिदिन हमारी पृथ्वी के वायुमंडल में चले आते हैं लेकिन सोचिए यदि हमारी पृथ्वी पर वायुमंडल न होता तो क्या होता। ये सब पृथ्वी के धरातल पर आ टकराते, लेकिन पृथ्वी के वायुमंडल में पहुंचकर ये उल्का-पत्थर संघर्षण के कारण 'टूटते तारे' की तरह चमक उठते हैं और इनमें अधिकांश पृथ्वी के धरातल पर पहुंचने के पहले ही नष्ट हो जाते हैं, लेकिन कभी-कभी ये इतने बडे होते हैं कि वायुमंडल में पूर्ण रूप से समाप्त नहीं होते और पृथ्वी पर आ टकराते हैं। ऐसे उल्का-पत्थरों से भारी नुकसान होता है। कितने ही उल्का-पत्थर तो हजारों टन वजन के होते हैं। ऐसा ही एक उल्का-पत्थर जून 1908 में साइबेरिया (रूस) में गिरा था। साइबेरिया के इस उल्कापात के फलस्वरूप 70 मील व्यास के घेरे में सब-कुछ जलकर राख हो गया था। जिस जगह पर यह उल्का पत्थर गिरा था, वहां से 50 मील दूर के गांवों में एक भी मकान नहीं बचा था। अनेक वर्ष पूर्व ऐसा ही एक प्रचंड उल्कापात दक्षिण अमेरिका के एरिजोना प्रदेश में हुआ था। आज भी उसका 500 फीट गहरा तथा 4,000 फीट व्यास का खड्डा मौजूद है। ऐसा ही उल्का पिंड हमारे भारत में भी गिर चुका है जिसका नाम लोनार क्रेटर है जिसके कारण काफ़ी बड़ी झील बनी है जोकि महाराष्ट्र के बुलढाना जिले में स्थित है या कुछ यूं कहें कि महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले में स्थित लोनार झील लगभग 50,000 वर्ष पहले अंतरिक्ष से गिरे एक तीव्र गति वाले उल्कापिंड के प्रभाव से बनी थी एवं इसका व्यास लगभग 1.2 किलोमीटर है जोकि आज एक राष्ट्रीय भूवैज्ञानिक स्मारक घोषित है और यह भी जानना आवश्यक है कि यह बेसाल्ट चट्टान में बनी दुनिया की एकमात्र और एक खारी व सोडायुक्त (अल्कलाइन) अनोखी क्रेटर झील भी है।

*सबसे अधिक उल्काएं किस महीने में दिखाई देते हैं।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया सबसे अधिक 'टूटते तारे' आपको अगस्त के महीने में दिखाई देंगे। इसका कारण यह है कि इस महीने में पृथ्वी उस पथ को पार करती है जिस पर किसी समय बड़े पुराने जमाने में एक विशाल महा दानव धूमकेतु चला करता था और जहां उसके तमाम टुकड़े अब भी घूमते रहते हैं, इस मार्ग को हम उल्का पथ कहते हैं। किंतु उल्काएं केवल अगस्त में ही नहीं दिखाई देतीं हैं, बल्कि आदर्श परिस्थितियों में किसी भी रात को प्रति घंटे आपको कई उल्काएं दिखाई दे सकती हैं,परंतु 12 अगस्त तथा 16 नवंबर के दिन ये अधिक तादाद में दिखाई देती हैं। जब पृथ्वी किसी उल्का-पथ से गुजरती है तो बड़ी संख्या में ये पृथ्वी के वायुमंडल में घुस आती हैं। ऐसे समय इनकी 'वर्षा' देखने लायक होती है। *क्या होता है उल्का वृष्टि का खगोलीय गणित और कैसे पता चलता है कि कितनी गति से वायुमंडल से टकरायेंगे उल्का।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने समझाया कि मान लीजिए कि कोई उल्का 20 किलो मीटर प्रति सेकंड की गति से पृथ्वी की ओर आ रही है तो पृथ्वी भी प्रति सेकंड 30 किलो मीटर की गति से उसकी ओर जा रही होगी। इसलिए उल्का-प्रस्तर का जो घर्षण पृथ्वी के वायुमंडल से होगा वह 20 + 30= 50 किलो मीटर प्रति सेकंड के हिसाब से होगा। क्योंकि इस प्रकार पृथ्वी की सूर्य-परिक्रमा गति के कारण, जो 30 किलो मीटर प्रति सेकंड की है, उल्काओं की गति और भी अधिक हो जाती है। परंतु जो उल्काएं पृथ्वी की ही दिशा में चलती हैं, वे इतनी वेगवान नहीं मालूम होतीं, क्योंकि उनकी गति में से पृथ्वी की गति घटा देनी पड़ती है।

*क्यों दिखाई देती हैं रंग बिरंगी उल्काएं।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि उल्काएं (टूटे हुए तारे) रंग-बिरंगी इसलिए दिखाई देती हैं क्योंकि अंतरिक्ष से आने वाली चट्टानें जब तेज गति से वायुमंडल में प्रवेश करती हैं, तो घर्षण से अत्यधिक गर्मी पैदा होती है। इससे उनका और हवा का तापमान बढ़ जाता है और चट्टान के अंदर मौजूद विभिन्न तत्वों और हवा की गैसों के वाष्पीकरण से विशिष्ट रंग उत्सर्जित होते हैं,जैसे सोडियम से पीला,मैग्नीशियम से नीला-हरा और आयरन से पीला-सफेद एवं कैल्शियम से बैंगनी रंग और नाइट्रोजन और ऑक्सीजन (वायुमंडल की गैसों के कारण) लाल या नीला रंग चमकता है।


*कितनी तेज़ होगी इस पर्सीड उल्का वर्षा की स्पीड।*

खगोलविद अमर पाल सिंह के अनुसार पर्सीड 17 जुलाई से 24 अगस्त तक सक्रिय रहेगी हालांकि 12 अगस्त 2026 की रात्रि को अधिकतम होगी जोकि लगभग 59 किमी/सेकंड की गति वाले उल्काओं वाली और 109P/Swift-Tuttle धूमकेतु से उत्पन्न वार्षिक उल्का वर्षा है इसीलिए आप शहर की रोशनी से दूर किसी अति महत्वपूर्ण एवं पूर्णतः सुरक्षित,साफ़ स्वच्छ एवं संपूर्ण सावधानी पूर्वक ही किसी भी अंधेरे स्थान का चयन करें और आसमान में चमकती उल्काओं का अद्भुत नजारा देखें क्योंकि इसको किसी भी प्रकार की टेलिस्कोप्स/ दूरबीनों की कोई भी जरूरत नहीं है , इसीलिए खगोलविद अमर पाल सिंह कहते हैं कि भारत के आसमान में अगस्त की इन रातों में दिखने वाली हर चमकती लकीर केवल ‘टूटता तारा’ नहीं, बल्कि अरबों किलोमीटर दूर से आए अनजाने खगोलीय मेहमानों की तरह ही ब्रह्मांडीय बस्ती के धूमकेतु एवं उनके द्वारा छोड़े हुए पदार्थ का पृथ्वी के वायुमंडल से हुआ एक क्षणिक वैज्ञानिक संवाद होगी जिसे आप देखने के साथ ही अनंत अंतरिक्ष एवं समय के कालजयी पिटारे का ज्ञानार्जन भी कर सकते हैं।
        
'रवि किशन और कालीबाड़ी बाबा की फिल्म को कितने लोगों ने देखा?' सीएम योगी ने ली चुटकी
गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को जनपद गोरखपुर में करीब 70 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 2-लेन मार्ग का लोकार्पण कर इसे जनता को समर्पित किया। ग्रीन सिटी से माधोपुर बांध तक बने इस मार्ग के शुरू होने से क्षेत्र के लोगों को आवागमन में बड़ी राहत मिलेगी। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास परियोजनाओं के जरिए अब बदलता हुआ गोरखपुर साफ दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि कभी जिन रास्तों पर लोगों को चलने में भी परेशानी होती थी, जहां संकरे मार्ग और जलभराव बड़ी समस्या थे, वहां अब चौड़ी सड़कों, फोरलेन मार्गों और फ्लाईओवर का निर्माण हो रहा है। विकास के इन कार्यों का उद्देश्य लोगों के जीवन को सुगम बनाना और उन्हें बेहतर आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराना है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर के सांसद और अभिनेता रवि किशन की अपने चिर-परिचित अंदाज में चुटकी भी ली। उन्होंने कहा कि आज सांसद ने भाषण नहीं दिया। लगता है कि उन्होंने ज्यादा लोगों को भोज करा दिया है। इसके बाद मुख्यमंत्री ने मौजूद लोगों से पूछा कि कितने लोग रवि किशन के यहां भोज में गए थे।

सीएम योगी ने इसके बाद लोगों से पूछा कि कितने लोगों ने रवि किशन की फिल्म देखी है और कितने लोगों ने 'कालीबाड़ी बाबा' की फिल्म देखी है। लोगों की प्रतिक्रिया के बाद मुख्यमंत्री ने मुस्कुराते हुए कहा कि दोनों में बराबरी है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इस सड़क के बनने से क्षेत्र के लोगों को सोनौली, महाराजगंज और अन्य इलाकों की ओर जाने के लिए गोरखपुर शहर के अंदर से गुजरने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे शहर के भीतर यातायात का दबाव भी कम होगा।

उन्होंने कहा कि राजघाट पुल के पास ट्रांसपोर्ट नगर से माधोपुर तक फोरलेन सड़क का निर्माण भी चल रहा है। डोमिनगढ़ में फ्लाईओवर प्रस्तावित है। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद लखनऊ की ओर जाने वाले लोगों को शहर के भीतरी हिस्सों से होकर गुजरने की जरूरत नहीं पड़ेगी। वे फोरलेन बाईपास के जरिए सीधे लखनऊ की ओर जा सकेंगे। इसी तरह सोनौली और नेपाल की ओर जाने वाले यात्रियों को भी सुगम कनेक्टिविटी मिलेगी।

सीएम योगी ने कहा कि गोरखपुर में सड़क नेटवर्क को लगातार मजबूत किया जा रहा है। शहर के विभिन्न हिस्सों को चार लेन की सड़कों से जोड़ा जा रहा है और कई फ्लाईओवर बनकर तैयार हो चुके हैं, जबकि कई पर काम जारी है। इन परियोजनाओं का सीधा लाभ आम नागरिकों को मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ समय में गोरखपुर में सड़क से जुड़ी कई बड़ी परियोजनाएं पूरी हुई हैं। एक महीने के भीतर सड़क क्षेत्र से जुड़ी यह तीसरी बड़ी परियोजना है, जिसे जनता को समर्पित किया गया है। उन्होंने कहा कि गोरखपुर अब केवल विकास की योजनाएं नहीं देख रहा, बल्कि उन योजनाओं का असर जमीन पर भी दिखाई दे रहा है।जनसभा से पहले मुख्यमंत्री गोरखपुर-सोनौली मार्ग स्थित ग्रीन सिटी मोड़ के पास पहुंचे। यहां उन्होंने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच फीता काटकर नवनिर्मित सड़क का लोकार्पण किया और शिलापट्ट का अनावरण किया।
घबराइए मत, कराएंगे हर समस्या का समाधान : याेगी आदित्यनाथ
गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार शाम गोरखपुर आए। उन्होंने गोरखनाथ मंदिर में रात्रि प्रवास करने के बाद सोमवार सुबह जनता दर्शन में लोगों से मुलाकात की। समस्या लेकर आए सभी लोगों की ध्यान से बात सुनी। उनके प्रार्थना पत्र लिए और आत्मीयता से बोले, ‘घबराइए मत, आपकी समस्या का समाधान जरूर कराया जाएगा।’ जनता दर्शन में मुख्यमंत्री ने पास में मौजूद अधिकारियों को निर्देशित किया कि हर पीड़ित व्यक्ति की समस्या पर संवेदनशीलता से ध्यान दें और उसका त्वरित, गुणवत्तापूर्ण व पारदर्शी निराकरण कराएं।

सोमवार सुबह गोरखनाथ मंदिर परिसर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के सामने आयोजित जनता दर्शन के दौरान मुख्यमंत्री ने करीब 200 लोगों की समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को उनका समाधान करने के निर्देश दिए। कुर्सियों पर बैठाए गए लोगों तक मुख्यमंत्री खुद पहुंचे। अपनत्व के भाव से ‘कहां से आए हैं, क्या बात है’, कहते हुए एक-एक कर सबकी समस्याएं सुनीं। भरोसा दिया कि वह सभी की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित कराएंगे। किसी को भी परेशान होने या घबराने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने प्रार्थना पत्रों को अधिकारियों को हस्तगत करते हुए निर्देश दिया कि हर समस्या का निस्तारण समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण और संतुष्टिप्रद होना चाहिए। कुछ लोगों द्वारा जमीन कब्जाने की शिकायत पर उन्होंने कठोर कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए।

गंभीर बीमारियों में इलाज के लिए देंगे पर्याप्त आर्थिक सहायता

जनता दर्शन में कई लोग गंभीर बीमारियों के इलाज में आर्थिक सहायता का अनुरोध लेकर पहुंचे थे। मुख्यमंत्री ने उन्हें भरोसा देते हुए कहा कि इलाज में धन की कमी बाधक नहीं होगी। सरकार पर्याप्त आर्थिक सहायता देगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि अस्पताल के एस्टीमेट की प्रक्रिया को जल्द पूर्ण कराकर शासन में भेजें। मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से इलाज के लिए धनराशि दी जाएगी।

मंदिर की गोशाला में सीएम योगी ने की गोसेवा

गोरखनाथ मंदिर प्रवास के दौरान सोमवार सुबह मुख्यमंत्री की दिनचर्या परंपरागत रही। शिवावतार गुरु गोरखनाथ का दर्शन पूजन करने तथा अपने गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवैद्यनाथ की प्रतिमा समक्ष शीश झुकाने के बाद वह मंदिर परिसर के भ्रमण पर निकले। उन्होंने मंदिर की गोशाला में पहुंचकर गोसेवा की। गोशाला में योगी ने गोवंश को खूब दुलारा और अपने हाथों से उन्हें गुड़ खिलाया।