दंगों के मास्टरमाइंड थे शरजील इमाम और उमर खालिद', दिल्ली हाईकोर्ट में पुलिस ने किया जमानत का विरोध

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उत्तर-पूर्वी दिल्ली में साल 2020 में हुए दंगों से जुड़े मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाओं का दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट में जोरदार विरोध किया है। दिल्ली पुलिस ने दिल्ली दंगों की साजिश के मामले में आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को मास्टरमाइंड बताया है। अदालत में पुलिस ने अपना जवाब दाखिल करते हुए उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाओं का भी विरोध किया।

'दोनों दिल्ली दंगों के मास्टरमाइंड'

31 जुलाई को हुई पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने इस मामले में दिल्ली पुलिस ने जवाब दाखिल करने को कहा था। गुरुवार को सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट में कहा कि शरजील इमाम और उमर खालिद दिल्ली दंगों के मास्टरमाइंड थे। पुलिस के पास इनके खिलाफ दंगों की योजना बनाने, लोगों को जुटाने और दंगों में रणनीतिक भूमिका निभाने से जुड़े अहम सबूत है।

'याचिकाएं ‘गैरकानूनी’ और कोर्ट को गुमराह करने वाली'

दिल्ली पुलिस ने यह भी कहा कि दोनों की नई जमानत याचिकाएं अपने आप में ही ‘गैरकानूनी’ और कोर्ट को गुमराह करने वाली हैं। दिल्ली पुलिस ने कहा कि जनवरी में सुप्रीम कोर्ट ने इस केस में सहआरोपियों को जमानत दे दी थी, लेकिन उमर खालिद और शरजील इमाम को यह कहते हुए जमानत देने से इंकार कर दिया था कि दिल्ली दंगों में इनकी भूमिका अलग है। पुलिस ने यह भी जिक्र किया कि उस समय सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि इस केस में यूएपीए की धारा 43डी(5) लागू होती है, जिसमें जमानत की सख्त शर्तों का प्रावधान है।

नए सिरे से लगा सकते हैं जमानत याचिका

पुलिस ने यह भी जिक्र किया कि जनवरी के अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देने से इनकार करते समय नए सिरे से जमानत के लिए दो शर्त लगाई थीं। पुलिस ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उमर और शरजील इस मामले में अहम गवाहों के बयान होने या फिर इस फैसले के एक साल पूरी होने पर नए सिरे से फिर जमानत की याचिकाएं लगा सकते है।

सीएए के विरोध में हुए थे दंगे

बता दें कि यह मामला 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को लेकर हुए दंगों से जुड़ा है, जिनमें 50 से अधिक लोगों की मौत हुई और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। इस मामले में गिरफ्तारी के बाद से खालिद और शरजील जेल में बंद हैं।

नेपाल में आई बाढ़ में 288 भारतीय लापता, विदेश मंत्रालय ने दी जानकारी

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नेपाल ने बुधवार को एक बार फिर से विनाश का मंजर देखा। यहां बड़ी संख्या में लोग तिब्बत क्षेत्र से भोटेकोशी नदी में आई अचानक बाढ़ में बह गए। बाढ़ में कम से कम 270 लोगों की मौत की खबर है, जबकि हजारों लोग लापता हैं। इस प्राकृतिक आपदा में कई देशों के लोग लापता है। इनमें बड़ी संख्या में भारतीय शामिल हैं।

नेपाल त्रासदी में 288 भारतीय लापता

भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया है कि नेपाल त्रासदी में 288 भारतीय नागरिक लापता हैं। इनमें 73 लोग त्रिशूली पावर प्रोजेक्ट में काम कर रहे हैं। इनके अलावा 37 और 39 लोगों के दो समूह तमिलनाडु के हैं, जो कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए हुए हैं। इनके अलावा तीसरा समूह 32 लोगों का है, जो पश्चिम बंगाल के हैं, वे भी कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए हुए हैं। इनके अलावा 61 लोग विभिन्न राज्यों के हैं, जो नेपाल में लापता हैं। साथ ही केरलम के 33 लोगों का भी एक समूह नेपाल में लापता है। इस तरह कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए कुल पांच समूह लापता हैं।

भारत ने भेजी 47 टन राहत सामग्री

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि नेपाल को इस मुश्किल समय में मदद के लिए भारत ने दो विमान भेजे हैं। जिनमें से एक सी-130 जे विमान 10 टन राहत सामग्री लेकर बुधवार को नेपाल हुआ था। इनमें अस्थायी शेल्टर, दवाईयां आदि लेकर गया है। आज भी एक सी-17 विमान 37 टन राहत सामग्री लेकर नेपाल के लिए रवाना हुआ है। इनमें से आठ टन दवाईयां हैं और एक टन खाद्य पदार्थ हैं। इस तरह दो दिनों में नेपाल को 47 टन राहत सामग्री भेजी जा चुकी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि जो भी राहत सामग्री भेजी गई है, वह नेपाल की मांग के आधार पर ही भेजी गई है।

नेपाल के हालात को लेकर जयशंकर ने की समीक्षा बैठक*

इससे पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर ने नेपाल बाढ़ के हालात पर समीक्षा बैठक की। उन्होंने कहा कि भारत, नेपाल के बाढ़ प्रभावित इलाकों में फंसे भारतीयों की स्थिति का पता लगाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा है। इस बैठक में काठमांडू और बीजिंग में तैनात भारतीय राजदूत भी वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए शामिल हुए। विदेश मंत्री ने बताया कि उनका मंत्रालय विभिन्न मंत्रालयों, राज्य सरकारों, टूर ऑपरेटर्स और अन्य संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय कर रहा है। जयशंकर ने कहा कि हम इस मामले के साथ-साथ राहत कार्यों को लेकर भी नेपाल के अधिकारियों के साथ करीबी समन्वय में काम कर रहे हैं।

कौशल विकास एवं युवा सशक्तिकरण के प्रति PVUNL की प्रतिबद्धता

रामगढ़, 27 अगस्त 2026: एक जिम्मेदार कॉरपोरेट संस्था के रूप में पतरातू विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (PVUNL) स्थानीय युवाओं के कौशल विकास एवं सशक्तिकरण के लिए निरंतर सार्थक पहल कर रहा है।

इसी क्रम में Government Tool Room ITI, Gola में PVUNL द्वारा प्रायोजित 3 माह के आवासीय वेल्डिंग प्रशिक्षण कार्यक्रम का आज शुभारंभ किया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में क्षेत्र के 30 युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। कार्यक्रम का संयुक्त रूप से उद्घाटन माननीय सांसद, हजारीबाग श्री मनीष जायसवाल; माननीय विधायक, बड़कागांव श्री रोशनलाल चौधरी; उपायुक्त, रामगढ़ श्री ऋतुराज; महाप्रबंधक (मेंटेनेंस), PVUNL श्री आर. के. निरंजन तथा HOHR, PVUNL श्री जियाउर रहमान द्वारा किया गया।

इसके अतिरिक्त, PVUNL द्वारा 6 माह के आवासीय CNC Operator/Machining Technician प्रशिक्षण कार्यक्रम को भी प्रायोजित किया जा रहा है, जिसमें 30 युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम अगले माह से प्रारंभ होगा।

इस अवसर पर जनप्रतिनिधियों, रामगढ़ जिला प्रशासन एवं Government Tool Room द्वारा PVUNL की इस पहल की सराहना की गई। यह पहल क्षेत्र के युवाओं को व्यावहारिक एवं तकनीकी कौशल प्रदान करने, उनकी रोजगार क्षमता बढ़ाने तथा बेहतर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

PVUNL का यह प्रयास युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ क्षेत्र में कौशल आधारित रोजगार एवं समावेशी विकास को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।

भाजपा के लिए हर आदिवासी-मूलवासी का सवाल दिमागी नक्सल : विनोद कुमार पांडेय


झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी, रघुवर दास और भाजपा पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा की राजनीति में झारखंड के आदिवासी-मूलवासी, गरीब और अपने अधिकार की आवाज उठाने वाले हर व्यक्ति को संदेह की नजर से देखना एक खतरनाक मानसिकता बन गई है। सवाल यह है कि क्या भाजपा की नजर में हर आदिवासी-मूलवासी, हर झारखंडी और केंद्र की नीतियों पर सवाल उठाने वाला व्यक्ति ‘दिमागी नक्सल’ है?

पांडेय ने कहा कि चुनी हुई सरकार और उसके मुख्यमंत्री को बदनाम करने के लिए नक्सल जैसे गंभीर शब्दों का राजनीतिक इस्तेमाल भाजपा की हताशा को दिखाता है। झारखंड के लोग लोकतांत्रिक तरीके से अपनी जमीन, जंगल, पानी, खनिज और रोजगार पर अधिकार मांगते हैं। इसे नक्सलवाद कहना झारखंड की जनता का अपमान है।

खनिज पर आंकड़े गिनाने से पहले गांवों का दर्द समझें

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा नेताओं को झारखंड के खनिज पर आंकड़े गिनाने से पहले उन गांवों का दर्द समझना चाहिए, जिनकी जमीन खदानों के लिए गई, जंगल उजड़े और पीढ़ियां विस्थापन झेलती रहीं। सवाल केवल राजस्व या निवेश का नहीं, बल्कि यह है कि खनिज संपदा से झारखंडी जनता को कितना न्याय मिला।

पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के एमएमडीआर संशोधन अधिनियम संबंधी बयान पर पांडेय ने कहा कि भाजपा 11 हजार करोड़ रुपये और करों के प्रतिशत की चर्चा करके मूल सवाल से ध्यान भटका रही है। यदि खनिज से राज्य को लाभ मिलता है तो खनन प्रभावित गांवों में आज भी पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क और रोजगार की कमी क्यों है? डीएमएफ की व्यवस्था तभी सार्थक है, जब उसका लाभ वास्तव में प्रभावित समुदायों तक पहुंचे।

उन्होंने कहा कि झामुमो खनन या औद्योगिक विकास का विरोध नहीं करता। हमारी मांग स्पष्ट है—जमीन का सम्मान, जंगल की रक्षा, आदिवासी अधिकारों की सुरक्षा, स्थानीय युवाओं को रोजगार और खनिज संपदा में झारखंडी हित की प्राथमिकता।

श्री पांडेय ने कहा कि भाजपा को यह समझना होगा कि झारखंड अब केवल खनिज निकालने की भूमि नहीं है। यहां के लोग अपने संसाधनों पर न्यायपूर्ण अधिकार चाहते हैं। इस आवाज को नक्सलवाद कहना बंद कीजिए और झारखंड के दर्द को समझिए।

उन्होंने बाबूलाल मरांडी से कहा कि राजनीतिक असहमति को नक्सलवाद से जोड़ना आपकी भाषा की कमजोरी है, झारखंड की जनता की नहीं। जनता सब देख रही है और लोकतंत्र में अंतिम फैसला वही करेगी।

MMDR संशोधन राज्य और राष्ट्र हित में, JMM-कांग्रेस भ्रम फैला रही है: रघुवर दास

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि भारत सरकार द्वारा हाल ही में लाए गए MMDR (खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन बिल, 2026) अधिनियम राज्य हित और राष्ट्र हित में है, लेकिन झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस इसकी गलत व्याख्या कर राज्य की भोली-भाली जनता के बीच भ्रम फैला रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे डंके की चोट पर कह रहे हैं

कि यह संशोधन झारखंड के हितों के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह हमारे झारखंड को उसकी खनिज संपदा का अधिकतम लाभ दिलाने और लीगल माइनिंग को पारदर्शी बनाने के पक्ष में उठाया गया ऐतिहासिक कदम है। श्री दास पार्टी के प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता को संबोधित कर रहे थे।

श्री दास ने कहा कि झारखंड का बच्चा-बच्चा जानता है कि झामुमो-कांग्रेस के संरक्षण में धनबाद, बोकारो, चतरा, हजारीबाग, साहेबगंज, दुमका, शिकारीपाड़ा में कोयला, बालू, पत्थर सिंडिकेट लूट मचा रहा है।

जो लोग चुनाव में 'जल, जंगल, जमीन' का नारा देकर सत्ता के सिंहासन पर बैठे हैं, उन्होंने सत्ता में आते ही हमारे जल, जंगल, जमीन और प्राकृतिक संसाधनों को सिंडिकेट के हवाले कर दिया और झारखंड को लूटखंड बना दिया है। आप मीडिया के बंधुओं ने भी समय-समय पर सरकार के संज्ञान में इसे लाने का काम किया है। उन्होंने कहा कि झामुमो के महासचिव पत्थर के अवैध खनन मामले में डेढ़ साल होटवार जेल काटकर आए हैं। संथाल के एक मंत्री इसी पत्थर-बालू की दलाली और कमीशनखोरी के चक्कर में जेल जा चुके हैं। झारखंड को लुटखंड में तब्दील करने वाले JMM, कांग्रेस जैस दलों से इस अधिनियम पर कोई सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है।

श्री दास ने कहा कि आज सवाल केवल 11,000 करोड़ रुपये के उपकर (CESS) का नहीं है। असल सवाल यह है कि क्या हम 'वित्तीय अनिश्चितता' (Fiscal Uncertainty) का माहौल बनाकर राज्य में आने वाले बड़े निवेश, अधिक उत्पादन, रोजगार और औद्योगिक क्रांति का रास्ता रोक दें? माइनिंग सेक्टर के कुल टैक्स और वैधानिक भुगतान (Statutory Payment) का लगभग 90% हिस्सा सीधे राज्यों को ही मिलता है, और यह व्यवस्था आगे भी बिना किसी रुकावट के जारी रहेगी।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में पहली बार 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने ही रॉयल्टी के अलावा खनन प्रभावित जिलों के विकास के लिए 'डीएमएफटी' (DMFT) के माध्यम से 30 प्रतिशत अतिरिक्त राशि देने की व्यवस्था लागू की थी। साथ ही हम यह भी मानते रहे हैं कि जनजाति समाज, डीएमएफटी और राज्य की वैध आय (Legitimate Revenue) की पर्याप्त सुरक्षा होनी चाहिए। खनिज संपदा का वास्तविक लाभ स्थानीय लोगों तक पहुंचना चाहिए।

श्री दास ने कहा कि झारखंड सरकार राज्य के राजस्व के लिए कितनी चिंतित है यह इससे साबित होता है कि भारत सरकार द्वारा राज्य में 34 कोल ब्लॉक को चालू करने की मंजूरी मिलने के बाद भी अब तक केवल चार कोल ब्लॉक चालू हो पाये हैं। 30 कोल ब्लॉक को राज्य सरकार ने चालू नहीं कराया है। इसी तरह लौह अयस्क की 15 में से छह माइंस, बॉक्साइड की 37 में से 17 माइंस ही चालू है। ये ब्लॉक और माइंस चालू होते तो राज्य को बहुत बड़ा राजस्व मिलता।

श्री दास ने कहा कि झामुमो-कांग्रेस की सरकार 11,000 करोड़ रुपये के सेस (CESS) का रोना रोती है, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि इस सरकार की नीयत में कितना खोट है। अन्य राज्यों से तुलना एवं DMFT की स्थिति समान खनिज भंडार होने के बावजूद, ओडिशा वित्तीय वर्ष 2025-26 में ₹60,000 करोड़ राजस्व का लक्ष्य हासिल कर रहा है, जबकि झारखंड का लक्ष्य केवल ₹18,844 करोड़ है। ओडिशा की त्वरित नीलामी और खदान संचालन प्रक्रिया के कारण उसकी राजस्व दक्षता झारखंड से 3 गुना अधिक है। इसके अलावा, DMFT के कुल संग्रह (₹18,250 करोड़) में से ₹7,915 करोड़ से अधिक की राशि बिना खर्च पड़ी है और 2,487 प्रोजेक्ट्स ठप्प हो चुके हैं।

श्री दास ने कहा कि खनन से प्रभावित हमारे जिलों का हाल देखिए, धनबाद में 2,393.58 करोड़ रुपये, चाईबासा में 1,802.82 करोड़, चतरा में 1,055.40 करोड़, पाकुड़ में 527.88 करोड़ और रामगढ़ में 518.82 करोड़ रुपये का डीएमएफटी फंड खर्च ही नहीं किया गया। 2,487 योजनाएं रद्द, अस्पतालों में दवा नहीं, पीने का साफ पानी नहीं, चाईबासा में लोग लाल पानी और धनबाद में काला पानी पीने को मजबूर हैं। डीएमएफटी में राज्य सरकार द्वारा कुछ राशि खर्च भी की गई है, तो वह घोटाले की भेंट चढ़ गई है। डीएमएफटी घोटाले से संबंधित खबरें लगातार आती रही हैं।

श्री दास ने कहा कि हमारा हमेशा से मानना रहा है कि जनजातीय समाज, डीएमएफटी फंड और राज्य के वैध राजस्व की पूरी सुरक्षा होनी चाहिए। डीएमएफटी की राशि खनन क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा आदि की आधारभूत संरचना पर खर्च की जानी चाहिए, लेकिन इस सरकार ने क्या किया? अस्पतालों में उपकरण नहीं हैं, एंबुलेंस नहीं हैं और जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही है। इतना ही नहीं, इस सरकार की सरपरस्ती में चल रहे अवैध धंधों के कारण वैध खनन (Legal Mining) का भारी नुकसान हुआ है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2024-25 की पहली तिमाही (अप्रैल-जुलाई) में जहाँ कोयले का उत्पादन 44.78 मिलियन टन था, वहीं 2025-26 की इसी अवधि में यह घटकर 37.25 मिलियन टन पर आ गया। जब लीगल माइनिंग घटेगी, तो राज्य का वैध राजस्व अपने आप घटेगा।

श्री दास ने कहा कि सेस लगाये जाने के कारण झारखंड का कोयला व लोहा पहले ही महंगा हो चुका है। सेस के कारण लागत दर बढ़ गयी है। इससे झारखंड के कोयला-लोहा की मांग घट गयी है। उदाहरण के लिए, ग्रेड 8 से ग्रेड 12 कोयले की दर झारखंड में 2045-3212 रुपये प्रति टन ओड़िशा और छत्तीसगढ़ में 1514-2681 रुपये प्रति टन की दर से उपलब्ध है। इसी तरह, लोहा (एक ही क्वालिटी की तुलना करें तो) झारखंड में 8284 रुपये प्रति टन, ओड़िशा में 7493 रुपये प्रति टन, छत्तीसगढ़ में 7422 रुपये प्रति टन की दर पर उपलब्ध है।

श्री दास ने कहा कि यदि लीगल माइनिंग आर्थिक रूप से सुदृढ़ होगी और सप्लाई चेन पारदर्शी (Formal) होगी, तो अवैध माइनिंग का 'प्राइस एडवांटेज' खत्म हो जाएगा। लीगल माइनिंग से रॉयल्टी, नीलामी प्रीमियम, डीएमएफटी, रोजगार और डाउनस्ट्रीम उद्योगों में जो आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी, वह इस 11,000 करोड़ से कहीं बड़ा 'इकोनॉमिक मल्टीप्लायर' (Economic Multiplier) झारखंड को लाकर देगा। विगत 6 वर्षों में राज्य में 26 खदानों के पट्टे समाप्त हो गए। यदि सरकार समय पर पारदर्शी नीलामी करती, तो आज राज्य को अरबों रुपये की नीलामी राशि, रॉयल्टी और प्रीमियम मिलता। स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलता और अवैध खनन पर अंकुश लगता। टाटा कंपनी की एक माइंस की लीज समाप्त हो गयी है, वह भी तीन माह से मंजूरी के इंतजार में है।

श्री दास ने सवालिया लहजे में पूछा कि सरकार बताएं कि 6 साल में किस आदिवासी मूलवासी की दशा सुधरी है। कांग्रेस और झामुमो का यह विरोध राज्य के हित में नहीं, बल्कि अपने अवैध सिंडिकेट और जेब में आ रहे काले धन को बचाने की आखिरी छटपटाहट है। छात्रों और युवाओं के साथ सात साल से छल कर रही यह सरकार मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए झूठा आंदोलन खड़ा करने की धमकी दे रही है। लेकिन झारखंड की जनता अब इनके इस लूट तंत्र को पूरी तरह समझ चुकी है और इसका मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार है।

इस दौरान प्रेस वार्ता में प्रदेश मीडिया प्रभारी योगेन्द्र प्रताप सिंह और प्रदेश प्रवक्ता केके गुप्ता भी उपस्थित रहे।

अमेरिका पहुंचे आरएसएस चीफ, जोहरान ममदानी ने किया मोहन भागवत के कार्यक्रम का विरोध

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत अभी अमेरिका दौरे पर हैं। मोहन भागवत मंगलवार को अमेरिका पहुंचे। मैडिसन स्क्वायर गार्डन में उनका एक बड़ा कार्यक्रम होना है। मगर उस कार्यक्रम का अमेरिका में विरोध हो रहा है। अब अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर के मेयर जोहरान ममदानी ने मोहन भागवत के मैडिसन स्क्वायर गार्डन कार्यक्रम का विरोध किया है।

न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी ने शहर के मैडिसन स्क्वायर में होने वाले एसएसएस प्रमुख के कार्यक्रम का विरोध किया है। ममदानी ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "मैं रैली का समर्थन नहीं करता, लेकिन मुझे नहीं पता कि क्या शहर के पास किसी निजी कार्यक्रम को रद्द करने का अधिकार है।" ममदानी ने ये बात RSS के मैडिसन स्वाक्यर गार्डन में होने वाले कार्यक्रम और उसके खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों से जुड़े एक सवाल का जवाब देते हुए कही। उनसे पूछा गया कि क्या यह कार्यक्रम रद्द किया जाना चाहिए।

भारत के बारे में क्या बोले ममदानी ?

न्यूयॉर्क के पहले भारतीय-अमेरिकी मेयर ममदानी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी भारतीय मूल की पृष्ठभूमि के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा, "मैं यहाँ हमारे शहर के इतिहास के पहले भारतीय-अमेरिकी मेयर के तौर पर भी खड़ा हूं। मेरी मां का परिवार अभी भी भारत में है। मेरे परिवार ने मुझे भारत की जो छवि दिखाई और जिसे देखते हुए मैं बड़ा हुआ, वह एक विविधतापूर्ण समाज की थी- एक धर्मनिरपेक्ष गणराज्य जो भारत के हर व्यक्ति के अपनेपन में विश्वास रखता था।"

आंदोलन को लेकर जताई आपत्ति

ममदानी ने आगे कहा, "सच कहूं तो किसी भी देश के लिए ऐसे आंदोलन का उभरना बेहद चिंताजनक है, जिसकी सोच समाज के कुछ लोगों को अलग रखने या बाहर करने वाली दृष्टि पर आधारित हो। यही कारण है कि मैं इसका गहरा विरोध करता हूं। यह विरोध सिर्फ एक भारतीय-अमेरिकी होने के नाते नहीं है, बल्कि एक ऐसे शहर के मेयर के रूप में भी है, जो इस बात पर गहरा विश्वास करता है कि हर व्यक्ति का समान रूप से स्थान है, चाहे उसका रंग, विचारधारा, धर्म, आस्था या मूल स्थान कुछ भी हो।"

यूएससीआईआरएफ ने की आरएसएस को बैन करने की मांग

इस दौरे से पहले अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग यानी यूएससीआईआरएफ ने आरएस नेतृत्व के साथ उच्चस्तरीय संपर्क से बचने की सिफारिश की थी। यूएससीआईआरएफ कमिश्नर जीन मिल्स ने कहा कि आरएसएस नेताओं को, भले ही वे भारत सरकार से जुड़े हों, हाई-लेवल मीटिंग या राजनयिक सम्मान नहीं दिया जाना चाहिए। इसके बजाय, अमेरिकी सरकार (USG) को उन आरएसएस सदस्यों पर प्रतिबंध लगाने पर ध्यान देना चाहिए, जो फ्रीडम ऑफ रिलिजन ऑर बिलीफ यानी धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार पाए गए हैं।

न्यूयॉर्क में 29 अगस्त को बड़ा कार्यक्रम

बता दें कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के वैश्विक संपर्क अभियान के तहत अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन का दौरा है। भागवत आरएसएस के 100 साल पूरे होने के मौके पर वैश्विक संपर्क कार्यक्रम के तहत मंगलवार को अमेरिका पहुंचे। न्यूयॉर्क में वह 29 अगस्त को मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित "यूनिवर्सल ऑननेस सेलिब्रेशन" कार्यक्रम में भारतीय मूल के लोगों को संबोधित करेंगे। आयोजकों के अनुसार इस कार्यक्रम में करीब 5,000 लोगों के शामिल होने की उम्मीद है।

अचानक मॉस्को क्यों पहुंचे CIA चीफ? मॉस्को में सीक्रेट लैंडिंग से पूरी दुनिया में खलबली

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रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच मास्को में सोमवार को एक अप्रत्याशित घटना देखने को मिली है। जिसके बाद पूरी दुनिया खासकर यूरोप में खलबली मच गई है। मंगलवार को अचानक अमेरिकी एयरफोर्स का विमान मॉस्को की जमीन पर उतरा। विमान लैंड होते ही अंदर से निकले दुनिया की सबसे खतरनाक खुफिया एजेंसी CIA के चीफ जॉन रैटक्लिफ। यह विमान मॉस्को के वनुकोवो हवाई अड्डे पर उतरा था, जिसके बाद से इस घटना को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।

अमेरिका-रूस की खुफिया एजेंसियों में संपर्क

सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, एक अमेरिकी अधिकारी ने पुष्टि की है कि सीआईए चीफ जॉन रैटक्लिफ ने मंगलवार को मॉस्को का दौरा किया। उन्होंने बताया कि सीआईए प्रमुख मॉस्को में अपने समकक्ष के साथ बैठक के लिए C-17 ग्लोबमास्टर विमान से रूस पहुंचे हैं। मामले से परिचित लोगों ने सीबीएस रिपोर्टर ओलिविया गाज़िस को बताया कि रैटक्लिफ मंगलवार को मॉस्को में बैठकें करने वाले थे।

सीक्रेट यात्रा की खबर से मचा हड़कंप

वॉशिंगटन से लेकर मॉस्को तक इस सीक्रेट यात्रा की खबर फैलते ही हड़कंप मच गया है। हालांकि, न तो व्हाइट हाउस और न ही क्रेमलिन ने आधिकारिक तौर पर इस दौरे की पुष्टि की है। लेकिन फ्लाइट-ट्रैकिंग डेटा से लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो इस बात की गवाही दे रहे हैं कि पर्दे के पीछे कोई बहुत बड़ी रणनीतिक डील चल रही है।

सीआईए चीफ क्यों पहुंचे रूस?

सीआईए डायरेक्टर का पद संभालने के बाद जॉन रैटक्लिफ की यह पहली मॉस्को यात्रा है। इस दौरे में भविष्य में कैदियों की अदला-बदली को लेकर संवेदनशी बातचीत भी शामिल हो सकती है। अप्रैल 2025 में अमेरिका और रूस की दोहरी नागरिकता रखने वाली केसिनिया करे़लिना की रिहाई में रैटक्लिफ की व्यक्तिगत भूमिका रही थी। सीआईए ऐतिहासिक रूप से सिर्फ खुफिया जानकारी जुटाने का काम ही नहीं करती, बल्कि अमेरिका और रूस के बीच मुश्किल बैक-चैनल कूटनीति को संभालने में भी बड़ी भूमिका निभाती रही है। ऐसे में ये दौरा काफी अहम माना जा रहा है।

अपर बाजार महावीर मंदिर में भव्य रुद्राभिषेक, उज्जैन की तर्ज पर हुई अलौकिक श्रृंगार आरती

गोविंदपुर,अपर बाजार स्थित प्राचीन महामंत्र महावीर मंदिर में मंगलवार को आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। मंदिर परिसर में सुबह से ही भव्य रुद्राभिषेक और शाम को उज्जैन की तर्ज पर महादेव की अलौकिक श्रृंगार आरती का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा।

सुबह वैदिक मंत्रोच्चार के साथ शुरू हुए रुद्राभिषेक कार्यक्रम में काशी से पधारे आचार्य सोनू पांडेय जी ने विधि-विधान से पूजन संपन्न कराया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ का जल, दूध, दही, शहद और बेलपत्र आदि से अभिषेक कर सुख-समृद्धि और परिवार की मंगलकामना की। पूरे आयोजन के दौरान मंदिर परिसर 'हर-हर महादेव' और 'बम-बम भोले' के जयकारों से गूंजता रहा।

सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।

वहीं शाम होते ही आयोजन का मुख्य आकर्षण महादेव की भव्य श्रृंगार आरती रही। उज्जैन के महाकाल की तर्ज पर भगवान शिव का अद्भुत और अलौकिक श्रृंगार किया गया, जिसने हर किसी का मन मोह लिया। आकर्षक फूलों और चंदन से सजे महादेव के स्वरूप के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे थे। आरती के दौरान पूरा परिसर दीपों की रोशनी और घंट-घड़ियाल की ध्वनि से जगमगा उठा। आरती के पश्चात सभी भक्तों के बीच प्रसाद का वितरण किया गया।

इस धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में ऊपर बाजार के विवेकानंद पांडेय, सूरज पांडेय, दीपक पांडेय सहित स्थानीय युवाओं की अहम भूमिका रही। वहीं मंसाराम अग्रवाल परिवार की ओर से राजेश अग्रवाल, शरद अग्रवाल, शंकर अग्रवाल, गोपाल अग्रवाल और गोविंद अग्रवाल सहित परिवार के सभी सदस्यों ने बढ़-चढ़कर सहयोग किया।

श्रद्धालुओं ने कहा कि इस तरह के धार्मिक आयोजन समाज में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करने के साथ-साथ आपसी एकता और भाईचारे को भी मजबूत करते हैं।

NEET-PG 2026 को लेकर रांची में निषेधाज्ञा लागू, 4 परीक्षा केंद्रों के 200 मीटर दायरे में 5 या अधिक लोगों के जुटने पर रोक

NEET - PG 2026 परीक्षा दिनांक 30.08.2026 को रांची जिला के 04 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की गयी है। परीक्षा के कदाचारमुक्त संचालनार्थ एवं विधि-व्यवस्था संधारण हेतु उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, राँची एवं अपर जिला दंडाधिकारी (विधि-व्यवस्था), रांची के आदेश पर पुलिस बल एवं पुलिस पदाधिकारी के साथ दंडाधिकारी की प्रतिनियुक्ति की गई है। परीक्षा केंद्रों में असामाजिक तत्व भीड़ लगाकर विधि-व्यवस्था भंग करने की चेष्टा कर सकते हैं, इस आशंका को देखते हुए अनुमंडल दंडाधिकारी, सदर, राँची द्वारा BNSS की धारा-163 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए इन परीक्षा केन्द्रों के 200 मीटर की परिधि में निषेधाज्ञा जारी की गई है, जो निम्न है :-

1- पाँच या पाँच से अधिक व्यक्तियों का एक जगह जमा होना (सरकारी कार्य में लगे पदाधिकारियों/कर्मचारियों तथा सरकारी कार्यक्रम एवं शवयात्रा को छोड़कर)।

2- किसी प्रकार का ध्वनि विस्तारक यंत्र का व्यवहार करना।

3- किसी प्रकार का अस्त्र-शस्त्र, जैसे बंदूक, राईफल, रिवाल्वर, बम, बारूद आदि लेकर चलना (सरकारी कार्य में लगे पदाधिकारियों/कर्मचारियों को छोड़कर)।

4- किसी प्रकार का हरवे हथियार जैसे-लाठी-डंडा, तीर-धनुष, गड़ासा भाला आदि लेकर चलना (सरकारी कार्य में लगे पदाधिकारियों/कर्मचारियों को छोडकर)।

5- किसी प्रकार की बैठक या आमसभा का आयोजन करना।

यह निषेधाज्ञा दिनांक 30.08.2026 के प्रातः 06:00 बजे से अपराह्न 03:30 बजे तक प्रभावी रहेगा।

परीक्षा केंद्रों के नाम :-

1. Ram Tahal Choudhary Institute of Technology RTCIT Anandi, Ormanjhi Block Chowk, Ranchi, Jharkhand, India, 835219

2. Arununma Technical Services Pvt. Ltd. Pragati Path, Road No.-6 Samlong, Lower Chutia, Near Ganesh Nursing Home, Ranchi, 834010

3. ICube Digital Near Medanta Hospital, Cafeteria Building, Irba, Ranchi, 835217

4. Oxford Public School, Old H B Road, Pragati Path, Ranchi, Jharkhand, 834001

छात्रों पर एकतरफा कार्रवाई को लेकर रांची सदर सीओ के कार्यालय पहुंचे बाबूलाल मरांडी, झामुमो के गुंडो पर की FIR दर्ज करने की मांग

JPSC एवं JSSC-CGL परीक्षा में हुई धांधली एवं राज्य सरकार की साजिश के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्रों के साथ हो रही ज्यादती को लेकर भाजपा लगातार छात्रों के पक्ष में खड़ी दिख रही है। पुतला दहन कार्यक्रम के दौरान तैनात दंडाधिकारी के द्वारा छात्रों पर की गई एकतरफा कार्रवाई को लेकर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी भाजपा के अन्य नेताओं के साथ रांची सदर के अंचलाधिकारी सह मजिस्ट्रेट के कार्यालय पहुंच गए। श्री मरांडी ने कहा कि किसी भी पदाधिकारी को सरकार की कठपुतली बनने की बजाय कानून और विधि सम्मत काम करनी चाहिए। लेकिन पुतला दहन कार्यक्रम के दौरान नियुक्त मजिस्ट्रेट ने एकतरफा कार्रवाई किया है। हम सभी ऐसे अधिकारियों को दायित्व बोध कराने के लिए आए हैं।

श्री मरांडी ने कहा कि उस दिन jmm के गुंडों ने आतंक मचाया और मुकदमा छात्रों पर किया जा रहा है। इसलिए आज हम सभी दंडाधिकारी सह सीओ से आग्रह करने आए हैं कि वे निष्पक्ष कार्रवाई करें। अगर दंडाधिकारी द्वारा उन गुंडों पर एफआईआर दर्ज नहीं किया जाता है तो जल्द ही इनके कार्यालय के समक्ष हम सभी धरना पर बैठेंगे।

श्री मरांडी ने कहा कि बीते दिनों छात्र पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत शांतिपूर्वक पुतला दहन कर रहे थे। छात्रों के कार्यक्रम में जिन लोगों ने भी विघ्न डाला है, छात्राओं से दुर्व्यवहार किया है, दंडाधिकारी ने उन लोगों के ऊपर FIR दर्ज नहीं किया है। आज सोशल मीडिया का जमाना है। सोशल मीडिया पर कई सारे वीडियो और अन्य सुबूत मौजूद हैं जो चीख चीख कर गवाही दे रहे हैं कि उस दिन कौन लोग गुंडागर्दी कर रहे थे। दंडाधिकारी को निष्पक्ष होकर सामान्य रूप से पहले जिन लोगों ने गुंडागर्दी की है, उन लोगों पर एफआईआर दर्ज करनी चाहिए थी लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। ऐसा प्रतीत होता है कि दंडाधिकारी पूरी तरह सरकार के दबाव में हैं। झारखंड में दबाव का आलम यह है कि यहां SP के दफ्तर में सीआईडी के इंचार्ज मनोज कौशिक बैठकर काम करते हैं।

नेता प्रतिपक्ष ने 24 अगस्त को ही चेतावनी दी थी कि अगर JMM के गुंडों पर एफआईआर दर्ज नहीं हुआ तो वे 25 अगस्त को संबंधित मजिस्ट्रेट के कार्यालय पहुंच कर उनसे निष्पक्ष कार्रवाई की मांग करेंगे।

इस दौरान दीपक प्रकाश, सीपी सिंह, योगेंद्र प्रताप सिंह, वरुण साहू सहित सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित रहे।