राजभवन प्रांगण में 6 से 8 फरवरी तक सजेगी प्रादेशिक फल, शाकभाजी एवं पुष्प प्रदर्शनी-2026
![]()
* प्रदेशभर के उद्यानों व गृहवाटिकाओं के बीच होंगी प्रतियोगिताएं, ऑनलाइन पंजीकरण 30 जनवरी तक
लखनऊ। राजभवन प्रांगण, लखनऊ में प्रादेशिक फल, शाकभाजी एवं पुष्प प्रदर्शनी-2026 का आयोजन इस वर्ष भी 6, 7 एवं 8 फरवरी 2026 को किया जाएगा। यह आयोजन सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, उत्तर प्रदेश के अंतर्गत पत्र सूचना शाखा द्वारा आयोजित किया जा रहा है।
प्रदर्शनी में प्रदेश भर के व्यक्तिगत बंगलों, गृहवाटिकाओं, कार्यालय परिसरों, शिक्षण संस्थानों, पब्लिक पार्कों के साथ-साथ प्राचीन एवं ऐतिहासिक स्थलों के उद्यानों को विभिन्न श्रेणियों में शामिल किया जाएगा। इन सभी श्रेणियों में प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी, जिनमें श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित किया जाएगा।
प्रदर्शनी में भाग लेने के इच्छुक उद्यान एवं गृहवाटिका प्रेमियों के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया 16 जनवरी 2026 से प्रारंभ हो चुकी है, जो 30 जनवरी 2026 को अपरान्ह 3:00 बजे तक चलेगी। निर्धारित तिथि एवं समय के बाद प्राप्त होने वाले आवेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा। इच्छुक प्रतिभागी http://upflowershowlko.com पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं।
ऑनलाइन पंजीकरण के पश्चात आवेदकों को पंजीकरण आवेदन की एक प्रति कार्यालय अधीक्षक, राजकीय उद्यान, आलमबाग, लखनऊ में अनिवार्य रूप से जमा करनी होगी। पंजीकृत उद्यानों एवं गृहवाटिकाओं की विभिन्न श्रेणियों में प्रतियोगिताओं की जजिंग 31 जनवरी एवं 1 फरवरी 2026 को निर्णायक टोलियों द्वारा की जाएगी।
अधिक जानकारी के लिए कार्यालय अधीक्षक, राजकीय उद्यान, आलमबाग, लखनऊ से संपर्क किया जा सकता है। इसके लिए दूरभाष संख्या 0522-2975506 पर भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।







सुलतानपुर,अघोर पीठ बाबा सत्यनाथ मठ अल्देमऊ नूरपुर में आयोजित तीन दिवसीय अवधूत देशना पर्व के समापन अवसर पर संगोष्ठी आयोजित की गई। मठ के पीठाधीश्वर अवधूत उग्र चण्डेश्वर कपाली बाबा के सानिध्य में समाज में अघोर परम्परा का योगदान विषयक इस संगोष्ठी में देश के विद्वानों ने अपने अपने विचार रखे । मुख्य अतिथि समाजसेवी हनुमान सिंह ने कहा कि जब समाज में कुरीतियां पनपती हैं तो अघोर परम्परा समाज को जागृत करती है।
विशिष्ट अतिथि पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य घनश्याम चौहान ने कहा कि अघोर पंथ समदर्शी है। समाजसेवा में इनके द्वारा विभिन्न कार्य किये जा रहे हैं। प्रमोद मिश्र मुन्ना ने कहा कि अघोर परम्परा का काम जातियों को समाप्त करना है । बांके बिहारी पाण्डेय ने कहा अगर हम आज नहीं चेते तो भविष्य संकट में होगा। विषय प्रवर्तन करते हुए सत्यनाथ विद्वत परिषद के मंत्री श्याम चंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित व संरक्षित करने के लिए अघोर परम्परा अपनाना जरूरी है। यह परम्परा सामाजिक भेदभाव को समाप्त करती है। राणा प्रताप स्नातकोत्तर महाविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर ज्ञानेन्द्र विक्रम सिंह रवि ने कहा कि समाज में समन्वय और समरसता स्थापित करने में अघोर परम्परा ने अग्रणी भूमिका निभाई है।
अहंकार को समाप्त कर सामाजिक वर्जनाओं को तोड़कर और मृत्यु व जन्म के द्वैत से परे जाकर आत्म ज्ञान प्राप्त करना तथा समस्त सृष्टि की एकता को समझना ही अघोर परम्परा का लक्ष्य है। संत तुलसीदास पीजी कालेज के पूर्व प्राचार्य डॉ इन्दुशेखर उपाध्याय ने कहा कि अघोर परम्परा का पालन आवश्यक है।अगर हम आज नहीं चेते तो भविष्य संकट में होगा । नसीराबाद स्टेट रायबरेली के राय अभिषेक ने कहा नई पीढ़ी में सनातन संस्कृति के प्रति जागरूकता तभी आयेगी जब वे अघोर परम्परा से जुड़ेंगे। अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ सुशील कुमार पाण्डेय साहित्येन्दु व संचालन मथुरा प्रसाद सिंह जटायु ने किया।

फर्रुखाबाद ।गायत्री प्रज्ञा पीठ मेरापुर में आयोजित नौ दिवसीय राम कथा में सप्तम दिवस की कथा में अंतराष्ट्रीय कथाकार आचार्य मनोज अवस्थी जी महाराज ने बड़े ही भाव पूर्ण वाणी में भरत चरित्र का वर्णन किया। चित्रकूट में भरत और श्री राम का मिलाप का संवाद सुनकर भक्त भाव विभोर हो गए। कथा में आचार्य ने कहा कि भरत जी को जब पता चला कि मेरी माता ने राम जी को बन भेज दिया है तो उनपर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। भरत जी ने चित्रकूट जाने के लिए सबको तैयार किया और चित्रकूट में जाकर राम जी से मिले। भरत जी को देखकर राम जी के धनुष बाण गिर पड़े ।

सपा नेताओं ने भाजपा पर साधा निशाना, कहा पीडीए से बनेगी सपा सरकार*
10 hours ago
- Whatsapp
- Facebook
- Linkedin
- Google Plus
1