KGMU में करोड़ों के दवा घोटाले की आशंका, कैंसर मरीजों की दवाओं में भारी अनियमितता

* 6 माह में लगने वाला इंजेक्शन एक महीने में 4-5 बार दर्शाया गया, शुरुआती जांच में करीब 2 करोड़ रुपये की गड़बड़ी के संकेत


लखनऊ। राजधानी के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में करोड़ों रुपये के संभावित दवा घोटाले का मामला सामने आया है। कैंसर मरीजों को दी जाने वाली महंगी दवाओं और इंजेक्शनों की खरीद व खपत में गंभीर अनियमितताओं की आशंका जताई गई है। प्रारंभिक जांच में करीब 2 करोड़ रुपये की वित्तीय गड़बड़ी के संकेत मिले हैं।
जांच में सामने आया है कि कुछ ऐसे इंजेक्शन, जिन्हें मरीजों को सामान्यतः छह माह में एक बार लगाया जाना चाहिए, उन्हें रिकॉर्ड में एक ही महीने के भीतर 4 से 5 बार दिखाया गया। फरवरी और मार्च 2026 के दौरान दवाओं की खपत अचानक बढ़कर 40 से 45 लाख रुपये तक पहुंचने पर मामला संदेह के घेरे में आया।
बिल, प्रिस्क्रिप्शन और दवा वितरण के ऑडिट के दौरान कई गंभीर विसंगतियां उजागर हुईं। जांच में दवाओं की खपत, मरीजों के उपचार रिकॉर्ड और भुगतान संबंधी दस्तावेजों में अंतर पाया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित दवाओं और इंजेक्शनों के भुगतान पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। वहीं, KGMU प्रशासन ने पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच के लिए कुलपति के निर्देश पर पांच सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी है। अब जांच रिपोर्ट का इंतजार है, जिसके बाद संभावित जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जा सकती है।
कोडीन कप सीरप की बड़ी खेप पहुंची गोंडा,औषधि प्रसाधन विभाग ने किया जब्त
*खरीद बिक्री के अभिलेख मांगे

गोंडा।जिले में औषधि प्रसाधन विभाग व पुलिस की संयुक्त टीम ने नोएडा से पहुंची कोडीन कप सीरप की बड़ी खेप को जब्त किया है,जो 132 पेटियों में थी।जिसमें 17,790 शीशियां शामिल हैं।जब्त की गई सीरप की कीमत 12 लाख 46 हजार रूपए बताई जा रही है।यह कार्रवाई शनिवार देर रात महादेवा रेलवे क्रासिंग के पास एक कोरियर सेंटर पर किया गया है।जब्त किए गए सीरप को फिलहाल कोरियर सेंटर के मालिक की सुपुर्दगी में रखा गया है।यह भारी मात्रा में कोडीन कप सीरप जिले के भगतराज काम्प्लेक्स, आर्यनगर स्थित गायत्री फार्मा द्वारा मंगवाई गई थी।औषधि प्रसाधन विभाग ने गायत्री फार्मा के खिलाफ फार्म 15 के अंतर्गत कार्रवाई करते हुए सीरप की खरीद व बिक्री का ब्योरा तलब किया है।पुलिस के अनुसार जब तक ब्योरा नहीं उपलब्ध कराया जाता,तब तक गायत्री फार्मा की खरीद बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।इस कार्रवाई के बाद से आर्यनगर स्थित गायत्री फार्मा बंद है,जिसके मालिक सुधाकर दूबे हैं।जब्त की गई कोडीन कप सीरप नोएडा के सेक्टर 58 स्थित लीलाबको रेमेडीज प्राइवेट लिमिटेड से 12 लाख 46 हजार 770 रूपए में मंगाई गई थी।प्राप्त जानकारी के अनुसार शनिवार देर रात जब यह खेप गोंडा पहुंची तो गायत्री फार्मा के मालिक सुधाकर दूबे इसे लेने के लिए मौके पर मौजूद थे कि तभी औषधि निरीक्षक व पुलिस टीम ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया।यह कोरियर सेंटर कानपुर के एक व्यक्ति द्वारा संचालित किया जा रहा है और इस पर कोई बोर्ड भी नहीं लगा है।गौरतलब है कि कोडीन कप सीरप की खुले बाजार में बिक्री प्रतिबंधित है और इसे केवल डाक्टर की प्रिस्किप्शन पर ही बेचा जा सकता है।जब्त की गई सीरप का नाम ALTOREX CD SYRUP है।अक्सर लोग कोडीन सीरप का उपयोग इलाज के बजाय नशे के लिए करते हैं।औषधि निरीक्षक सुमित वर्मा ने बताया कि यह सीरप लीगल तरीके से मंगाई गई थी और जानकारी मिलने पर छापेमारी कर इसे जब्त कर लिया गया।फार्म 15 के तहत कार्रवाई करके संबंधित गायत्री फार्मा को नोटिस जारी करके खरीद व बिक्री को लेकर के विस्तृत ब्योरा मांगा गया है।उनकी बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है।उन्होंने बताया कि मामले से संबंधित पूरी जानकारी मिलने के बाद ही उक्त के संबंध में आगे की कार्रवाई की जाएगी।यदि खरीद बिक्री से संबंधित कोई संतोषजनक और ठोस जवाब फर्म द्वारा नहीं दिया जाता है तो विभागीय नियमों के तहत उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।इस संबंध में अधिकारियों ने बताया कि यह दवा केवल डाक्टर की प्रिस्किप्शन पर ही दी जाती है और खुले बाजार में इसकी बिक्री प्रतिबंधित है।जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि फर्म द्वारा बड़ी मात्रा में कोडीन कप सीरप मंगाने के बाद उसकी बिक्री कहाँ कहाँ की जा रही थी और किन किन लोगों को इसकी आपूर्ति की गई।
संयुक्त निदेशक पैरामेडिकल डॉ.आर. के.मिश्रा बने सोनभद्र के मुख्य चिकित्सा अधिकारी
*मृदुभाषी एवं जनसेवा के प्रति समर्पित चिकित्सक को मिली नई जिम्मेदारी, शुभकामनाओं का तांता*

सुलतानपुर/लखनऊ।
चिकित्सा जगत के सुप्रसिद्ध, मृदुभाषी एवं जनसरोकारों से जुड़े वरिष्ठ चिकित्साधिकारी डॉ. आर. के. मिश्रा को सोनभद्र जनपद का मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) नियुक्त किए जाने पर चिकित्सा क्षेत्र सहित आम जनमानस में खुशी की लहर है।
संयुक्त निदेशक पैरामेडिकल के रूप में अपनी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए विख्यात डॉ. मिश्रा सदैव आम जनता के दुख-दर्द को समझने वाले, सरल स्वभाव एवं हर समय लोगों की सहायता के लिए तत्पर रहने वाले अधिकारी के रूप में जाने जाते हैं। उनके कुशल प्रशासनिक अनुभव, संवेदनशील कार्यशैली और जनहित के प्रति समर्पण को देखते हुए उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।
उनकी नियुक्ति पर चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों, सामाजिक संगठनों एवं शुभचिंतकों ने हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। सभी ने विश्वास जताया है कि उनके नेतृत्व में सोनभद्र जनपद की स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा और मजबूती मिलेगी।
शुभचिंतकों ने ईश्वर से प्रार्थना की है कि प्रभु श्रीराम डॉ. आर. के. मिश्रा को उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु एवं जनसेवा के इस महत्वपूर्ण दायित्व के सफल निर्वहन हेतु शक्ति एवं मार्गदर्शन प्रदान करें।
डॉ. आर. के. मिश्रा को नई जिम्मेदारी के लिए हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल कार्यकाल की शुभकामनाएं।
यूपी स्वास्थ्य विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 21 से अधिक जिलों में नए CMO तैनात
* वाराणसी, अंबेडकरनगर, गाजियाबाद समेत कई जिलों को मिले नए मुख्य चिकित्सा अधिकारी


लखनऊ। उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग में बड़े स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 21 से अधिक जिलों में मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (CMO) की नई तैनाती की गई है। स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी एवं व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से किए गए इन तबादलों को विभागीय स्तर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जारी तबादला सूची के अनुसार डॉ. प्रमोद कुमार को अंबेडकरनगर का नया CMO नियुक्त किया गया है। वहीं डॉ. मुकेश कुमार को वाराणसी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। डॉ. सचिन चंद्र वैश्य को गाजियाबाद का मुख्य चिकित्सा अधिकारी बनाया गया है, जबकि डॉ. हरिनंदन प्रसाद को जालौन में CMO पद पर तैनात किया गया है।
स्वास्थ्य विभाग में हुए इस व्यापक फेरबदल को प्रशासनिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि नई तैनातियों से जिलों में स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी, योजनाओं के क्रियान्वयन और चिकित्सा व्यवस्था को नई गति मिलेगी।
अगर आपके पास पूरी तबादला सूची है, तो मैं इसे “किस जिले में कौन बना नया CMO” फॉर्मेट में और ज्यादा मजबूत खबर बना सकता हूँ।
विश्व तम्बाकू निषेध दिवस पर मद्यनिषेध विभाग की जागरूकता रैली
* ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ के तहत तम्बाकू और गुटखा के दुष्प्रभावों के प्रति लोगों को किया जागरूक

लखनऊ। विश्व तम्बाकू निषेध दिवस के अवसर पर रविवार को मद्यनिषेध विभाग द्वारा “नशा मुक्त भारत अभियान” के अंतर्गत तम्बाकू एवं गुटखा जनित नशीले पदार्थों के सेवन से होने वाली बीमारियों और दुष्प्रभावों के प्रति जनजागरूकता फैलाने के उद्देश्य से रैली एवं पदयात्रा का आयोजन किया गया।
इस अभियान का उद्देश्य लोगों को स्वस्थ एवं सभ्य जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना, उनके जीवन स्तर में सुधार लाना तथा तम्बाकू और गुटखा सेवन से होने वाले गंभीर स्वास्थ्य खतरों के प्रति जागरूक करना रहा।
जागरूकता रैली रविवार को क्षेत्रीय मद्यनिषेध एवं समाजोत्थान अधिकारी कार्यालय, 27 अशोक मार्ग, लखनऊ से शुरू होकर महात्मा गांधी प्रतिमा, जीपीओ पार्क, हजरतगंज चौराहा तक निकाली गई।
रैली/पदयात्रा को राज्य मद्यनिषेध अधिकारी ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। कार्यक्रम में विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ सामाजिक स्वैच्छिक संस्थाओं के कार्यकर्ताओं सहित करीब 300 लोगों ने भाग लिया।
रैली के माध्यम से लोगों को संदेश दिया गया कि तम्बाकू और गुटखा जैसी लत न केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचाती है, बल्कि समाज और परिवार पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। जनभागीदारी से ही नशा मुक्त और स्वस्थ समाज का निर्माण संभव है।
बलरामपुर ने भव्यता के साथ मनाया हिंदी पत्रकारिता दिवस
बलरामपुर ।_ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन शाखा जनपद बलरामपुर के तत्वावधान में हिंदीपत्रकारिता दिवस भव्यता के साथ मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष  शीतला प्रसाद मिश्र ने की। तहसील अध्यक्ष तुलसीपुर जय सिंह ने हिंदी पत्रकारिता दिवस पर सभी पत्रकारों को शुभकामनाएं देते हुए ऐतिहासिक रुपरेखा प्रस्तुत कर हिन्दी पत्रकारिता के उन्नयन पर विस्तृत चर्चा करते हुए अपने व्याख्यान प्रस्तुत किए। जिला अध्यक्ष शीतला प्रसाद मिश्र ने हिंदी समाचार पत्र जो सर्वप्रथम प्रकाशित हुआ था अंग्रेजी हुकूमत में उसके बारे में विस्तार से चर्चा की और कहा कि आज हिंदी पत्रकारिता को काफी हद तक बढ़ावा दिए जाने की जरूरत है। सीबी मणि त्रिपाठी प्रधान संपादक ने इस अवसर पर कहा कि हिंदी हिंदू हिंदुस्तान हिंदी का बढ़ चढ़कर प्रयोग होना चाहिए हिंदी पत्रकारिता आज की मांग है जन-जन तक हिंदी पत्रकारिता के माध्यम से शासन प्रशासन की नीतियों एवं जनमानस की आवाज को पहुंचने में काफी कामयाबी मिल सकती है इसलिए हिंदी का बढ़ चढ़कर प्रयोग करना ही हिंदी का सर्वश्रेष्ठ सम्मान है। कार्यक्रम में संगठन के अन्य तमाम जनपदीय पदाधिकारी एवं सदस्य पत्रकार बंधु उपस्थित रहे।
देवरिया में 31 केंद्रों पर बीएड संयुक्त प्रवेश परिक्षा जारी , STF और SOG की पैनी नजर ।

देवरिया M N पाण्डेय 31 मई ।
उत्तर प्रदेश बीएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा रविवार को देवरिया जिले में कड़ी सुरक्षा और चाक-चौबंद व्यवस्था के बीच शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो रही है। परीक्षा को पूरी तरह शुचितापूर्ण और नकलविहीन बनाने के लिए प्रशासन की तरफ से सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए है।
जिले में इस प्रतिष्ठित परीक्षा के लिए कुल 31 परीक्षा केंद्र बनाए गए है, जहां कुल 13,892 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए। परीक्षा को पारदर्शी बनाने के लिए हर केंद्र पर एक स्टैटिक मजिस्ट्रेट तैनात किया गया है। इसके साथ ही जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) के नेतृत्व में सचल दलों (फ्लाइंग स्क्वायड) ने लगातार विभिन्न केंद्रों का औचक निरीक्षण किया।
परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार की गड़बड़ी, पेपर लीक या सॉल्वर गैंग की सक्रियता को रोकने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और स्थानीय SOG (स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप) की टीमें पूरी तरह मुस्तैद रहीं। खुफिया तंत्र और लोकल पुलिस की सोशल मीडिया से लेकर परीक्षा केंद्रों के बाहर तक पैनी निगरानी है, जिससे पूरी परीक्षा बिना किसी अप्रिय घटना के संपन्न हो सके।
केंद्रों पर प्रवेश से पहले अभ्यर्थियों की सघन चेकिंग की गई। बायोमेट्रिक उपस्थिति और कड़ी सुरक्षा घेरे के बाद ही परीक्षार्थियों को कक्षा में जाने की अनुमति मिली।
सचिवालय कर्मियों की जीत: CUG नंबर बदलने का फैसला वापस

अब पुराने नंबर ही BSNL में होंगे पोर्ट, अवकाश के दिन कार्यालय खोलने का आदेश भी रद्द


लखनऊ। सचिवालय कर्मचारियों के विरोध के बाद सचिवालय प्रशासन विभाग ने सीयूजी (CUG) मोबाइल नंबर बदलने का फैसला वापस ले लिया है। अब कर्मचारियों के पिछले करीब 15 वर्षों से उपयोग में रहे मोबाइल नंबरों को बदलने के बजाय नई सेवा प्रदाता कंपनी बीएसएनएल में ही पोर्ट कराया जाएगा।

जानकारी के अनुसार, इस प्रक्रिया को लेकर सोमवार को मौजूदा सेवा प्रदाता कंपनी वोडाफोन/आइडिया के अधिकारियों से सचिवालय प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी वार्ता करेंगे।
गौरतलब है कि सचिवालय प्रशासन विभाग ने सभी शाखा अधिष्ठानों को शनिवार, अवकाश के दिन भी कार्यालय खोलकर कर्मचारियों को नए सीयूजी नंबर उपलब्ध कराने के निर्देश जारी किए थे। हालांकि कर्मचारियों की आपत्तियों और विरोध के बीच विभाग ने शुक्रवार देर रात यह आदेश भी निरस्त कर दिया।
फैसला वापस होने के बाद सचिवालय कर्मियों में राहत की भावना देखी जा रही है। कर्मचारियों का कहना था कि वर्षों से उपयोग किए जा रहे नंबर बदलने से सरकारी कार्य, संपर्क व्यवस्था और व्यक्तिगत संचार प्रभावित हो सकता था।
लखनऊ कमिश्नरेट में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 3 एसीपी, 3 इंस्पेक्टर और एक एसआई के तबादले

लखनऊ। राजधानी में कानून-व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से पुलिस कमिश्नरेट में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। पुलिस आयुक्त कार्यालय की ओर से जारी आदेश में तीन एसीपी, तीन इंस्पेक्टर और एक उपनिरीक्षक के तबादले किए गए हैं। हालिया घटनाओं और कानून-व्यवस्था की समीक्षा के बाद हुए इस बदलाव को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। तबादला सूची के अनुसार सौम्या पांडेय को एसीपी विभूतिखंड नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही उन्हें पुलिस कमिश्नरेट की सोशल मीडिया सेल की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।

विनय द्विवेदी को एसीपी ट्रैफिक बनाया गया

वहीं विनय द्विवेदी को एसीपी ट्रैफिक बनाया गया है। इसी क्रम में सुशील यादव को एसीपी क्राइम के साथ-साथ साइबर क्राइम की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है। बढ़ते साइबर अपराधों के मद्देनजर यह नियुक्ति महत्वपूर्ण मानी जा रही है। थाना स्तर पर भी हुए बदलाव कमिश्नरेट प्रशासन ने थाना स्तर पर भी बदलाव किए हैं। विभूतिखंड के प्रभारी निरीक्षक अमर सिंह को हटाकर पुलिस लाइन भेज दिया गया है। उनकी जगह उपेंद्र सिंह को नया प्रभारी निरीक्षक बनाया गया है। इसके अलावा सुधीर कुमार अवस्थी को भी पुलिस लाइन संबद्ध किया गया है, जबकि गौरव बाजपेयी को गोमतीनगर विस्तार थाने का नया प्रभारी बनाया गया है।

पुलिस प्रशासन लगातार कानून-व्यवस्था की समीक्षा कर रहा

कानून-व्यवस्था को लेकर सक्रिय हुआ प्रशासन हाल के दिनों में राजधानी में हुई कुछ आपराधिक घटनाओं के बाद पुलिस प्रशासन लगातार कानून-व्यवस्था की समीक्षा कर रहा है। माना जा रहा है कि बेहतर पुलिसिंग, जवाबदेही तय करने और अपराध नियंत्रण को मजबूत बनाने के उद्देश्य से यह फेरबदल किया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि नई तैनातियों से पुलिस व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा तथा जनता की शिकायतों के निस्तारण में तेजी आएगी।
31 मई 2026 की रात्रि में होगा माइक्रो ब्लू मून/ पूर्ण चंद्रमा (Full Moon) का दीदार

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि रविवार, 31 मई 2026 की रात्रि को माइक्रो ब्लू मून का दीदार होगा,

क्या होता है माइक्रो ब्लू मून?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि चांद, तारों के शौकीन खगोल प्रेमियों के लिए अलविदा होती हुई मई 2026 एक और शानदार खगोलीय नज़ारे को देकर जा रही है तो आपको भरपूर लुत्फ़ उठाने के लिए तैयार हो जाना चाहिए क्योंकि इस बार दिखाई देगा शानदार खगोलीय ब्लू मून।
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि ब्लू मून (Blue Moon) किसी कैलेंडर माह में दिखाई देने वाली दूसरी पूर्णिमा (Full Moon) को कहा जाता है। क्योंकि इस वर्ष, मई महीने में पहली पूर्णिमा 1 मई 2026 को वैशाख पूर्णिमा के रूप में दिखाई दी थी और दूसरी पूर्णिमा जोकि ब्लू मून भी होगी वह 31 मई 2026 को ज्येष्ठ अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) की पूर्णिमा है यह 31 मई 2026 की दूसरी पूर्णिमा भी इसी मई माह में दिखाई दे रही है इसीली इसको ब्लू मून कहा जायेगा लेकिन इसका चंद्रमा के वास्तविक नीले रंग से कोई लेना-देना नहीं होता है, यह एक सामान्य पूर्णिमा की तरह ही दिखाई देती है, और शाम को सूर्यास्त के ठीक बाद पूर्वी क्षितिज पर इसका दीदार सबसे खूबसूरत होगा, लेकिन 31 मई की शाम को जब चंद्रमा उदय होगा, तब तक तकनीकी रूप से पूर्णिमा की तिथि समाप्त हो चुकी होगी, (यह पंचांगीय तिथि के समाप्त होने की बात है, परंतु खगोलीय और दृश्यात्मक रूप से यह रात भर पूर्ण चंद्रमा (Full Moon) के रूप में ही चमकेगा।) या कुछ यूं कहें कि मानवीय आँखों को यह तब भी पूरी तरह गोल और भव्य ही दिखाई देगा,इस बार के ब्लू मून की खास विशेषताएँ बताते हुए खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि खगोलविज्ञान के नजरिए से यह केवल एक साधारण "कैलेंडर ब्लू मून" (एक ही महीने में दो पूर्णिमा) नहीं है, बल्कि इसमें कुछ और भी दिलचस्प बिंदु शामिल हैं जैसे कि यह माइक्रो ब्लू मून (Micro Blue Moon) का चंद्रमा अपने अपोजी (Apogee पृथ्वी से सबसे दूर का बिंदु) के बेहद करीब होगा (लगभग 2,52,360 मील दूर)। इस वजह से यह आकार में आम पूर्णिमा के मुक़ाबले करीब 6 से 7% प्रतिशत छोटा और थोड़ा कम चमकदार भी दिखेगा, या कुछ यूं कहें कि यह किसी भी औसत पूर्णिमा से लगभग 5–7% छोटा और सुपरमून की तुलना में लगभग 12–14% छोटा होगा जिसे हम माइक्रो मून भी कहते हैं। खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि साथ ही 31 मई 2026 की रात अंटारेस (Antares)  जोकि एक चमकीला तारा है उसके साथ चंद्रमा की युति 31 मई की रात को ही घटित होगी जब आप इसे देखेंगे, तो यह वृश्चिक राशि (Scorpius) के सबसे चमकीले लाल तारे अंटारेस (ज्येष्ठा नक्षत्र) के बेहद करीब से गुजरता हुआ दिखाई देगा, एंटारेस (Antares), जिसे भारतीय खगोल विज्ञान में ज्येष्ठा तारा भी कहा जाता है, वृश्चिक तारामंडल (Scorpius constellation) का सबसे चमकीला तारा है ,यह रात्रि आकाश का 15वां सबसे चमकीला तारा है, नंगी आँखों से देखने पर यह लाल रंग का दिखाई देता है,जो दृश्यात्मक रूप से काफी सुंदर संयोजन बनाएगा।

कैसे बनता है ब्लू मून ?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि एक कैलेंडर माह में आमतौर पर केवल एक ही पूर्णिमा होती है। लेकिन, एक चंद्र चक्र का समय लगभग
29.5 दिन होता है। इस अंतर के कारण लगभग हर 2.5 से 3 साल में किसी एक महीने में दो पूर्णिमाएँ आ जाती हैं। ऐसी स्थिति में महीने की दूसरी पूर्णिमा को ब्लू मून कहते हैं। एवं पारंपरिक खगोलीय मौसम (ऋतु) में जब सामान्य से अधिक यानी 4 पूर्णिमाएँ होती हैं, तो उस मौसम की तीसरी पूर्णिमा को भी ब्लू मून माना जाता है।

क्या चांद सच में नीला होता है?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि चांद अपने सामान्य सुनहरे, पीले या सफेद रंग में ही दिखता है। हालाँकि, बहुत ही दुर्लभ परिस्थितियों में (जैसे भीषण जंगलों की आग या ज्वालामुखी के विस्फोट के समय) आसमान में मौजूद धूल और धुएँ के कणों के कारण चाँद का रंग हल्का नीला जरूर दिखाई दे सकता है। साथ ही ब्लू मून की घटना कोई बहुत ही दुर्लभ खगोलीय घटना नहीं है। लेकिन इसका अंग्रेजी मुहावरा "once in a blue moon" अक्सर बहुत कम या कभी-कभार होने वाली घटनाओं को दर्शाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

क्या होगा इसका चरम समय समय?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि 31 मई 2026 में ब्लू मून की सबसे सटीक चरम अवस्था भारतीय समयानुसार 31 मई 2026 को दोपहर 2:15 (IST) बजे होगी। उस दौरान भारत में दिन का समय होगा जोकि एक समय विशेष पर ही घटित होती है,लेकिन साधारण आंखों से पूर्णिमा को देखने पर आप लगभग एक दिन पहले और एक दिन बाद में भी अपने गोल स्वरूप में ही देख सकते हैं, इसीलिए ब्लू मून को देखने के लिए आपको भारत के हिसाब से 31 मई 2026 की रात्रि का समय ही सबसे उपयुक्त होगा।

कैसे और किस दिशा में देखें?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इसे देखने के लिए आपको किसी विशेष खगोलीय उपकरण की आवश्यकता नहीं है इसे आप अपनी नग्न आंखों( साधारण आँखों) से देख सकते हैं शाम होते ही यह दिखाई देना शुरू हो जायेगा और पूरी रात खूबसूरत दिखाई देगा और खूबसूरत देखने और पूर्ण चंद्रोदय (Moonrise) का अद्भुत नज़ारा लेने का सबसे उत्तम समय 31 मई की शाम को सूर्यास्त के बाद का होगा। और भी अधिक सर्वोत्तम समय, शाम 06:30 बजे से रात 08:45 बजे के बीच होगा अगर दृश्यता की बात करें तो पाते हैं कि यह पूरे भारत में दिखाई देगा। आसमान साफ होने पर इसे बिना किसी दूरबीन के आसानी से देखा जा सकता है और माइक्रो मून (Micromoon)/ ब्लू मून होने के साथ-साथ इस साल का  छोटा और सबसे दूर स्थित पूर्ण चंद्रमा भी है, जो सामान्य से थोड़ा छोटा और कम चमकीला दिखाई देगा और इस घटना का नाम तो 'ब्लू मून' है, लेकिन इसका रंग सामान्य सफेद या हल्का नारंगी (चंद्रोदय के समय) ही रहेगा।

किस तारामण्डल में दिखाई देगा माइक्रो ब्लू मून ?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि उस सटीक समय पर चंद्रमा पृथ्वी से लगभग 406,135.2 किलोमीटर (252,361.3 मील) दूर होगा तथा भारत से देखने पर यह वृश्चिक (Scorpius) तारामंडल में दिखाई देगा इस दौरान चंद्रमा की चमक का मैग्नीट्यूड लगभग माइनस 12.52 के क़रीब होगा। जोकि पूरब और दक्षिणी आकाश में नज़र आयेगा।

क्या होता है माइक्रोमून?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि 31 मई 2026 की रात्रि की यह पूर्णिमा “माइक्रोमून” होगी। और यह घटना तब होती है जब पूर्ण चंद्रमा अपनी कक्षा में पृथ्वी से सबसे अधिक दूरी वाले बिंदु, अर्थात “अपोजी” (Apogee), के निकट होता है। इसके परिणामस्वरूप चंद्रमा आकाश में सामान्य पूर्णिमा की तुलना में थोड़ा छोटा दिखाई देता है। उस समय इसका प्रत्यक्ष आकार लगभग 0.49° होगा।

क्या होता है पूर्णिमा का खगोलविज्ञान ?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि पूर्ण चंद्रमा तब होता है जब पृथ्वी की ओर वाला चंद्रमा का भाग सूर्य के प्रकाश से लगभग 100% प्रकाशित दिखाई देता है। और यह स्थिति तब बनती है जब पृथ्वी लगभग सूर्य और चंद्रमा के बीच स्थित होती है। अर्थात, चंद्रमा पृथ्वी के उस पार होता है जो सूर्य के विपरीत दिशा में होता है। एवं आकाश में चंद्रमा की गति सूर्य के सापेक्ष इस ज्यामितीय स्थिति (जिसे “Opposition” भी कहा जाता है) के कारण पूर्ण चंद्रमा सामान्यतः सूर्यास्त के समय उदित होता है, और आधी रात के आसपास आकाश में अपनी सबसे अधिक ऊँचाई पर पहुँचता है और सूर्योदय के समय अस्त होता है।
साथ ही यह भी जानना आवश्यक है कि पूर्णिमा की एक और रोचक विशेषता यह है कि 24 घंटों के दौरान आकाश में उसकी गति लगभग सूर्य के विपरीत ऋतु वाले मार्ग का अनुसरण करती है। अर्थात:
सर्दियों में पूर्णिमा आकाश में अधिक ऊँचाई तक पहुँचती है, जैसे गर्मियों में सूर्य पहुँचता है।
वहीं गर्मियों में पूर्णिमा अपेक्षाकृत नीचे दिखाई देती है।
इसी कारण सर्दियों की पूर्णिमाएँ आकाश में अधिक ऊँची और चमकीली प्रतीत होती हैं।

दो पूर्णिमाओं के बीच का अंतराल कितना होता है?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि दो पूर्ण चंद्रमाओं के बीच का औसत अंतराल लगभग 29.53 दिन होता है, अर्थात 29 दिन, 12 घंटे और 43 मिनट। इस समय अवधि को खगोलविज्ञान की भाषा में “सिनोडिक महीना” (Synodic Month) या “ल्यूनेशन” (Lunation) कहा जाता है। हालाँकि यह एक औसत मान है; वास्तविक अंतराल कुछ घंटों तक कम या अधिक हो सकता है। इसका मुख्य कारण यह है कि चंद्रमा की पृथ्वी के चारों ओर की कक्षा पूर्णतः वृत्ताकार नहीं होती, बल्कि यह अंडाकार या ओवल या दीर्घवृत्ताकार होती है,तथा पृथ्वी की सूर्य के चारों ओर की कक्षा भी दीर्घवृत्ताकार (Elliptical) होती है।

प्रत्येक पूर्णिमा को चंद्र ग्रहण क्यों नहीं होता है?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि प्रत्येक पूर्णिमा को चंद्र ग्रहण नहीं होता है क्योंकि चन्द्रमा की कक्षा,पृथ्वी के सापेक्ष 5 डिग्री झुकी हुई होती है या कुछ यूं कहें कि चंद्रमा की कक्षा, पृथ्वी की कक्षा के तल से लगभग 5° झुकी हुई है, इसलिए अधिकांश पूर्णिमाओं पर ग्रहण नहीं बनता।यह कभी-कभी पूर्णिमा के समय ही चंद्रमा ,पृथ्वी की अंतरिक्ष में पड़ने वाली छाया से होकर गुजरता है। ऐसी स्थिति में “चंद्र ग्रहण” (Lunar Eclipse) घटित होता है,लेकिन हर पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण नहीं होता, क्योंकि चंद्रमा की कक्षा पृथ्वी की सूर्य के चारों ओर की कक्षा की तुलना में थोड़ी झुकी हुई होती है। इसी कारण अधिकांश समय पूर्ण चंद्रमा, पृथ्वी की छाया के ऊपर या नीचे से निकल जाता है और ग्रहण नहीं बनता।
             
KGMU में करोड़ों के दवा घोटाले की आशंका, कैंसर मरीजों की दवाओं में भारी अनियमितता

* 6 माह में लगने वाला इंजेक्शन एक महीने में 4-5 बार दर्शाया गया, शुरुआती जांच में करीब 2 करोड़ रुपये की गड़बड़ी के संकेत


लखनऊ। राजधानी के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में करोड़ों रुपये के संभावित दवा घोटाले का मामला सामने आया है। कैंसर मरीजों को दी जाने वाली महंगी दवाओं और इंजेक्शनों की खरीद व खपत में गंभीर अनियमितताओं की आशंका जताई गई है। प्रारंभिक जांच में करीब 2 करोड़ रुपये की वित्तीय गड़बड़ी के संकेत मिले हैं।
जांच में सामने आया है कि कुछ ऐसे इंजेक्शन, जिन्हें मरीजों को सामान्यतः छह माह में एक बार लगाया जाना चाहिए, उन्हें रिकॉर्ड में एक ही महीने के भीतर 4 से 5 बार दिखाया गया। फरवरी और मार्च 2026 के दौरान दवाओं की खपत अचानक बढ़कर 40 से 45 लाख रुपये तक पहुंचने पर मामला संदेह के घेरे में आया।
बिल, प्रिस्क्रिप्शन और दवा वितरण के ऑडिट के दौरान कई गंभीर विसंगतियां उजागर हुईं। जांच में दवाओं की खपत, मरीजों के उपचार रिकॉर्ड और भुगतान संबंधी दस्तावेजों में अंतर पाया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित दवाओं और इंजेक्शनों के भुगतान पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। वहीं, KGMU प्रशासन ने पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच के लिए कुलपति के निर्देश पर पांच सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी है। अब जांच रिपोर्ट का इंतजार है, जिसके बाद संभावित जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जा सकती है।
कोडीन कप सीरप की बड़ी खेप पहुंची गोंडा,औषधि प्रसाधन विभाग ने किया जब्त
*खरीद बिक्री के अभिलेख मांगे

गोंडा।जिले में औषधि प्रसाधन विभाग व पुलिस की संयुक्त टीम ने नोएडा से पहुंची कोडीन कप सीरप की बड़ी खेप को जब्त किया है,जो 132 पेटियों में थी।जिसमें 17,790 शीशियां शामिल हैं।जब्त की गई सीरप की कीमत 12 लाख 46 हजार रूपए बताई जा रही है।यह कार्रवाई शनिवार देर रात महादेवा रेलवे क्रासिंग के पास एक कोरियर सेंटर पर किया गया है।जब्त किए गए सीरप को फिलहाल कोरियर सेंटर के मालिक की सुपुर्दगी में रखा गया है।यह भारी मात्रा में कोडीन कप सीरप जिले के भगतराज काम्प्लेक्स, आर्यनगर स्थित गायत्री फार्मा द्वारा मंगवाई गई थी।औषधि प्रसाधन विभाग ने गायत्री फार्मा के खिलाफ फार्म 15 के अंतर्गत कार्रवाई करते हुए सीरप की खरीद व बिक्री का ब्योरा तलब किया है।पुलिस के अनुसार जब तक ब्योरा नहीं उपलब्ध कराया जाता,तब तक गायत्री फार्मा की खरीद बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।इस कार्रवाई के बाद से आर्यनगर स्थित गायत्री फार्मा बंद है,जिसके मालिक सुधाकर दूबे हैं।जब्त की गई कोडीन कप सीरप नोएडा के सेक्टर 58 स्थित लीलाबको रेमेडीज प्राइवेट लिमिटेड से 12 लाख 46 हजार 770 रूपए में मंगाई गई थी।प्राप्त जानकारी के अनुसार शनिवार देर रात जब यह खेप गोंडा पहुंची तो गायत्री फार्मा के मालिक सुधाकर दूबे इसे लेने के लिए मौके पर मौजूद थे कि तभी औषधि निरीक्षक व पुलिस टीम ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया।यह कोरियर सेंटर कानपुर के एक व्यक्ति द्वारा संचालित किया जा रहा है और इस पर कोई बोर्ड भी नहीं लगा है।गौरतलब है कि कोडीन कप सीरप की खुले बाजार में बिक्री प्रतिबंधित है और इसे केवल डाक्टर की प्रिस्किप्शन पर ही बेचा जा सकता है।जब्त की गई सीरप का नाम ALTOREX CD SYRUP है।अक्सर लोग कोडीन सीरप का उपयोग इलाज के बजाय नशे के लिए करते हैं।औषधि निरीक्षक सुमित वर्मा ने बताया कि यह सीरप लीगल तरीके से मंगाई गई थी और जानकारी मिलने पर छापेमारी कर इसे जब्त कर लिया गया।फार्म 15 के तहत कार्रवाई करके संबंधित गायत्री फार्मा को नोटिस जारी करके खरीद व बिक्री को लेकर के विस्तृत ब्योरा मांगा गया है।उनकी बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है।उन्होंने बताया कि मामले से संबंधित पूरी जानकारी मिलने के बाद ही उक्त के संबंध में आगे की कार्रवाई की जाएगी।यदि खरीद बिक्री से संबंधित कोई संतोषजनक और ठोस जवाब फर्म द्वारा नहीं दिया जाता है तो विभागीय नियमों के तहत उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।इस संबंध में अधिकारियों ने बताया कि यह दवा केवल डाक्टर की प्रिस्किप्शन पर ही दी जाती है और खुले बाजार में इसकी बिक्री प्रतिबंधित है।जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि फर्म द्वारा बड़ी मात्रा में कोडीन कप सीरप मंगाने के बाद उसकी बिक्री कहाँ कहाँ की जा रही थी और किन किन लोगों को इसकी आपूर्ति की गई।
संयुक्त निदेशक पैरामेडिकल डॉ.आर. के.मिश्रा बने सोनभद्र के मुख्य चिकित्सा अधिकारी
*मृदुभाषी एवं जनसेवा के प्रति समर्पित चिकित्सक को मिली नई जिम्मेदारी, शुभकामनाओं का तांता*

सुलतानपुर/लखनऊ।
चिकित्सा जगत के सुप्रसिद्ध, मृदुभाषी एवं जनसरोकारों से जुड़े वरिष्ठ चिकित्साधिकारी डॉ. आर. के. मिश्रा को सोनभद्र जनपद का मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) नियुक्त किए जाने पर चिकित्सा क्षेत्र सहित आम जनमानस में खुशी की लहर है।
संयुक्त निदेशक पैरामेडिकल के रूप में अपनी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए विख्यात डॉ. मिश्रा सदैव आम जनता के दुख-दर्द को समझने वाले, सरल स्वभाव एवं हर समय लोगों की सहायता के लिए तत्पर रहने वाले अधिकारी के रूप में जाने जाते हैं। उनके कुशल प्रशासनिक अनुभव, संवेदनशील कार्यशैली और जनहित के प्रति समर्पण को देखते हुए उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।
उनकी नियुक्ति पर चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों, सामाजिक संगठनों एवं शुभचिंतकों ने हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। सभी ने विश्वास जताया है कि उनके नेतृत्व में सोनभद्र जनपद की स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा और मजबूती मिलेगी।
शुभचिंतकों ने ईश्वर से प्रार्थना की है कि प्रभु श्रीराम डॉ. आर. के. मिश्रा को उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु एवं जनसेवा के इस महत्वपूर्ण दायित्व के सफल निर्वहन हेतु शक्ति एवं मार्गदर्शन प्रदान करें।
डॉ. आर. के. मिश्रा को नई जिम्मेदारी के लिए हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल कार्यकाल की शुभकामनाएं।
यूपी स्वास्थ्य विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 21 से अधिक जिलों में नए CMO तैनात
* वाराणसी, अंबेडकरनगर, गाजियाबाद समेत कई जिलों को मिले नए मुख्य चिकित्सा अधिकारी


लखनऊ। उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग में बड़े स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 21 से अधिक जिलों में मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (CMO) की नई तैनाती की गई है। स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी एवं व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से किए गए इन तबादलों को विभागीय स्तर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जारी तबादला सूची के अनुसार डॉ. प्रमोद कुमार को अंबेडकरनगर का नया CMO नियुक्त किया गया है। वहीं डॉ. मुकेश कुमार को वाराणसी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। डॉ. सचिन चंद्र वैश्य को गाजियाबाद का मुख्य चिकित्सा अधिकारी बनाया गया है, जबकि डॉ. हरिनंदन प्रसाद को जालौन में CMO पद पर तैनात किया गया है।
स्वास्थ्य विभाग में हुए इस व्यापक फेरबदल को प्रशासनिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि नई तैनातियों से जिलों में स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी, योजनाओं के क्रियान्वयन और चिकित्सा व्यवस्था को नई गति मिलेगी।
अगर आपके पास पूरी तबादला सूची है, तो मैं इसे “किस जिले में कौन बना नया CMO” फॉर्मेट में और ज्यादा मजबूत खबर बना सकता हूँ।
विश्व तम्बाकू निषेध दिवस पर मद्यनिषेध विभाग की जागरूकता रैली
* ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ के तहत तम्बाकू और गुटखा के दुष्प्रभावों के प्रति लोगों को किया जागरूक

लखनऊ। विश्व तम्बाकू निषेध दिवस के अवसर पर रविवार को मद्यनिषेध विभाग द्वारा “नशा मुक्त भारत अभियान” के अंतर्गत तम्बाकू एवं गुटखा जनित नशीले पदार्थों के सेवन से होने वाली बीमारियों और दुष्प्रभावों के प्रति जनजागरूकता फैलाने के उद्देश्य से रैली एवं पदयात्रा का आयोजन किया गया।
इस अभियान का उद्देश्य लोगों को स्वस्थ एवं सभ्य जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना, उनके जीवन स्तर में सुधार लाना तथा तम्बाकू और गुटखा सेवन से होने वाले गंभीर स्वास्थ्य खतरों के प्रति जागरूक करना रहा।
जागरूकता रैली रविवार को क्षेत्रीय मद्यनिषेध एवं समाजोत्थान अधिकारी कार्यालय, 27 अशोक मार्ग, लखनऊ से शुरू होकर महात्मा गांधी प्रतिमा, जीपीओ पार्क, हजरतगंज चौराहा तक निकाली गई।
रैली/पदयात्रा को राज्य मद्यनिषेध अधिकारी ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। कार्यक्रम में विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ सामाजिक स्वैच्छिक संस्थाओं के कार्यकर्ताओं सहित करीब 300 लोगों ने भाग लिया।
रैली के माध्यम से लोगों को संदेश दिया गया कि तम्बाकू और गुटखा जैसी लत न केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचाती है, बल्कि समाज और परिवार पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। जनभागीदारी से ही नशा मुक्त और स्वस्थ समाज का निर्माण संभव है।
बलरामपुर ने भव्यता के साथ मनाया हिंदी पत्रकारिता दिवस
बलरामपुर ।_ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन शाखा जनपद बलरामपुर के तत्वावधान में हिंदीपत्रकारिता दिवस भव्यता के साथ मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष  शीतला प्रसाद मिश्र ने की। तहसील अध्यक्ष तुलसीपुर जय सिंह ने हिंदी पत्रकारिता दिवस पर सभी पत्रकारों को शुभकामनाएं देते हुए ऐतिहासिक रुपरेखा प्रस्तुत कर हिन्दी पत्रकारिता के उन्नयन पर विस्तृत चर्चा करते हुए अपने व्याख्यान प्रस्तुत किए। जिला अध्यक्ष शीतला प्रसाद मिश्र ने हिंदी समाचार पत्र जो सर्वप्रथम प्रकाशित हुआ था अंग्रेजी हुकूमत में उसके बारे में विस्तार से चर्चा की और कहा कि आज हिंदी पत्रकारिता को काफी हद तक बढ़ावा दिए जाने की जरूरत है। सीबी मणि त्रिपाठी प्रधान संपादक ने इस अवसर पर कहा कि हिंदी हिंदू हिंदुस्तान हिंदी का बढ़ चढ़कर प्रयोग होना चाहिए हिंदी पत्रकारिता आज की मांग है जन-जन तक हिंदी पत्रकारिता के माध्यम से शासन प्रशासन की नीतियों एवं जनमानस की आवाज को पहुंचने में काफी कामयाबी मिल सकती है इसलिए हिंदी का बढ़ चढ़कर प्रयोग करना ही हिंदी का सर्वश्रेष्ठ सम्मान है। कार्यक्रम में संगठन के अन्य तमाम जनपदीय पदाधिकारी एवं सदस्य पत्रकार बंधु उपस्थित रहे।
देवरिया में 31 केंद्रों पर बीएड संयुक्त प्रवेश परिक्षा जारी , STF और SOG की पैनी नजर ।

देवरिया M N पाण्डेय 31 मई ।
उत्तर प्रदेश बीएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा रविवार को देवरिया जिले में कड़ी सुरक्षा और चाक-चौबंद व्यवस्था के बीच शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो रही है। परीक्षा को पूरी तरह शुचितापूर्ण और नकलविहीन बनाने के लिए प्रशासन की तरफ से सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए है।
जिले में इस प्रतिष्ठित परीक्षा के लिए कुल 31 परीक्षा केंद्र बनाए गए है, जहां कुल 13,892 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए। परीक्षा को पारदर्शी बनाने के लिए हर केंद्र पर एक स्टैटिक मजिस्ट्रेट तैनात किया गया है। इसके साथ ही जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) के नेतृत्व में सचल दलों (फ्लाइंग स्क्वायड) ने लगातार विभिन्न केंद्रों का औचक निरीक्षण किया।
परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार की गड़बड़ी, पेपर लीक या सॉल्वर गैंग की सक्रियता को रोकने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और स्थानीय SOG (स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप) की टीमें पूरी तरह मुस्तैद रहीं। खुफिया तंत्र और लोकल पुलिस की सोशल मीडिया से लेकर परीक्षा केंद्रों के बाहर तक पैनी निगरानी है, जिससे पूरी परीक्षा बिना किसी अप्रिय घटना के संपन्न हो सके।
केंद्रों पर प्रवेश से पहले अभ्यर्थियों की सघन चेकिंग की गई। बायोमेट्रिक उपस्थिति और कड़ी सुरक्षा घेरे के बाद ही परीक्षार्थियों को कक्षा में जाने की अनुमति मिली।
सचिवालय कर्मियों की जीत: CUG नंबर बदलने का फैसला वापस

अब पुराने नंबर ही BSNL में होंगे पोर्ट, अवकाश के दिन कार्यालय खोलने का आदेश भी रद्द


लखनऊ। सचिवालय कर्मचारियों के विरोध के बाद सचिवालय प्रशासन विभाग ने सीयूजी (CUG) मोबाइल नंबर बदलने का फैसला वापस ले लिया है। अब कर्मचारियों के पिछले करीब 15 वर्षों से उपयोग में रहे मोबाइल नंबरों को बदलने के बजाय नई सेवा प्रदाता कंपनी बीएसएनएल में ही पोर्ट कराया जाएगा।

जानकारी के अनुसार, इस प्रक्रिया को लेकर सोमवार को मौजूदा सेवा प्रदाता कंपनी वोडाफोन/आइडिया के अधिकारियों से सचिवालय प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी वार्ता करेंगे।
गौरतलब है कि सचिवालय प्रशासन विभाग ने सभी शाखा अधिष्ठानों को शनिवार, अवकाश के दिन भी कार्यालय खोलकर कर्मचारियों को नए सीयूजी नंबर उपलब्ध कराने के निर्देश जारी किए थे। हालांकि कर्मचारियों की आपत्तियों और विरोध के बीच विभाग ने शुक्रवार देर रात यह आदेश भी निरस्त कर दिया।
फैसला वापस होने के बाद सचिवालय कर्मियों में राहत की भावना देखी जा रही है। कर्मचारियों का कहना था कि वर्षों से उपयोग किए जा रहे नंबर बदलने से सरकारी कार्य, संपर्क व्यवस्था और व्यक्तिगत संचार प्रभावित हो सकता था।
लखनऊ कमिश्नरेट में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 3 एसीपी, 3 इंस्पेक्टर और एक एसआई के तबादले

लखनऊ। राजधानी में कानून-व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से पुलिस कमिश्नरेट में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। पुलिस आयुक्त कार्यालय की ओर से जारी आदेश में तीन एसीपी, तीन इंस्पेक्टर और एक उपनिरीक्षक के तबादले किए गए हैं। हालिया घटनाओं और कानून-व्यवस्था की समीक्षा के बाद हुए इस बदलाव को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। तबादला सूची के अनुसार सौम्या पांडेय को एसीपी विभूतिखंड नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही उन्हें पुलिस कमिश्नरेट की सोशल मीडिया सेल की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।

विनय द्विवेदी को एसीपी ट्रैफिक बनाया गया

वहीं विनय द्विवेदी को एसीपी ट्रैफिक बनाया गया है। इसी क्रम में सुशील यादव को एसीपी क्राइम के साथ-साथ साइबर क्राइम की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है। बढ़ते साइबर अपराधों के मद्देनजर यह नियुक्ति महत्वपूर्ण मानी जा रही है। थाना स्तर पर भी हुए बदलाव कमिश्नरेट प्रशासन ने थाना स्तर पर भी बदलाव किए हैं। विभूतिखंड के प्रभारी निरीक्षक अमर सिंह को हटाकर पुलिस लाइन भेज दिया गया है। उनकी जगह उपेंद्र सिंह को नया प्रभारी निरीक्षक बनाया गया है। इसके अलावा सुधीर कुमार अवस्थी को भी पुलिस लाइन संबद्ध किया गया है, जबकि गौरव बाजपेयी को गोमतीनगर विस्तार थाने का नया प्रभारी बनाया गया है।

पुलिस प्रशासन लगातार कानून-व्यवस्था की समीक्षा कर रहा

कानून-व्यवस्था को लेकर सक्रिय हुआ प्रशासन हाल के दिनों में राजधानी में हुई कुछ आपराधिक घटनाओं के बाद पुलिस प्रशासन लगातार कानून-व्यवस्था की समीक्षा कर रहा है। माना जा रहा है कि बेहतर पुलिसिंग, जवाबदेही तय करने और अपराध नियंत्रण को मजबूत बनाने के उद्देश्य से यह फेरबदल किया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि नई तैनातियों से पुलिस व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा तथा जनता की शिकायतों के निस्तारण में तेजी आएगी।
31 मई 2026 की रात्रि में होगा माइक्रो ब्लू मून/ पूर्ण चंद्रमा (Full Moon) का दीदार

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि रविवार, 31 मई 2026 की रात्रि को माइक्रो ब्लू मून का दीदार होगा,

क्या होता है माइक्रो ब्लू मून?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि चांद, तारों के शौकीन खगोल प्रेमियों के लिए अलविदा होती हुई मई 2026 एक और शानदार खगोलीय नज़ारे को देकर जा रही है तो आपको भरपूर लुत्फ़ उठाने के लिए तैयार हो जाना चाहिए क्योंकि इस बार दिखाई देगा शानदार खगोलीय ब्लू मून।
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि ब्लू मून (Blue Moon) किसी कैलेंडर माह में दिखाई देने वाली दूसरी पूर्णिमा (Full Moon) को कहा जाता है। क्योंकि इस वर्ष, मई महीने में पहली पूर्णिमा 1 मई 2026 को वैशाख पूर्णिमा के रूप में दिखाई दी थी और दूसरी पूर्णिमा जोकि ब्लू मून भी होगी वह 31 मई 2026 को ज्येष्ठ अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) की पूर्णिमा है यह 31 मई 2026 की दूसरी पूर्णिमा भी इसी मई माह में दिखाई दे रही है इसीली इसको ब्लू मून कहा जायेगा लेकिन इसका चंद्रमा के वास्तविक नीले रंग से कोई लेना-देना नहीं होता है, यह एक सामान्य पूर्णिमा की तरह ही दिखाई देती है, और शाम को सूर्यास्त के ठीक बाद पूर्वी क्षितिज पर इसका दीदार सबसे खूबसूरत होगा, लेकिन 31 मई की शाम को जब चंद्रमा उदय होगा, तब तक तकनीकी रूप से पूर्णिमा की तिथि समाप्त हो चुकी होगी, (यह पंचांगीय तिथि के समाप्त होने की बात है, परंतु खगोलीय और दृश्यात्मक रूप से यह रात भर पूर्ण चंद्रमा (Full Moon) के रूप में ही चमकेगा।) या कुछ यूं कहें कि मानवीय आँखों को यह तब भी पूरी तरह गोल और भव्य ही दिखाई देगा,इस बार के ब्लू मून की खास विशेषताएँ बताते हुए खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि खगोलविज्ञान के नजरिए से यह केवल एक साधारण "कैलेंडर ब्लू मून" (एक ही महीने में दो पूर्णिमा) नहीं है, बल्कि इसमें कुछ और भी दिलचस्प बिंदु शामिल हैं जैसे कि यह माइक्रो ब्लू मून (Micro Blue Moon) का चंद्रमा अपने अपोजी (Apogee पृथ्वी से सबसे दूर का बिंदु) के बेहद करीब होगा (लगभग 2,52,360 मील दूर)। इस वजह से यह आकार में आम पूर्णिमा के मुक़ाबले करीब 6 से 7% प्रतिशत छोटा और थोड़ा कम चमकदार भी दिखेगा, या कुछ यूं कहें कि यह किसी भी औसत पूर्णिमा से लगभग 5–7% छोटा और सुपरमून की तुलना में लगभग 12–14% छोटा होगा जिसे हम माइक्रो मून भी कहते हैं। खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि साथ ही 31 मई 2026 की रात अंटारेस (Antares)  जोकि एक चमकीला तारा है उसके साथ चंद्रमा की युति 31 मई की रात को ही घटित होगी जब आप इसे देखेंगे, तो यह वृश्चिक राशि (Scorpius) के सबसे चमकीले लाल तारे अंटारेस (ज्येष्ठा नक्षत्र) के बेहद करीब से गुजरता हुआ दिखाई देगा, एंटारेस (Antares), जिसे भारतीय खगोल विज्ञान में ज्येष्ठा तारा भी कहा जाता है, वृश्चिक तारामंडल (Scorpius constellation) का सबसे चमकीला तारा है ,यह रात्रि आकाश का 15वां सबसे चमकीला तारा है, नंगी आँखों से देखने पर यह लाल रंग का दिखाई देता है,जो दृश्यात्मक रूप से काफी सुंदर संयोजन बनाएगा।

कैसे बनता है ब्लू मून ?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि एक कैलेंडर माह में आमतौर पर केवल एक ही पूर्णिमा होती है। लेकिन, एक चंद्र चक्र का समय लगभग
29.5 दिन होता है। इस अंतर के कारण लगभग हर 2.5 से 3 साल में किसी एक महीने में दो पूर्णिमाएँ आ जाती हैं। ऐसी स्थिति में महीने की दूसरी पूर्णिमा को ब्लू मून कहते हैं। एवं पारंपरिक खगोलीय मौसम (ऋतु) में जब सामान्य से अधिक यानी 4 पूर्णिमाएँ होती हैं, तो उस मौसम की तीसरी पूर्णिमा को भी ब्लू मून माना जाता है।

क्या चांद सच में नीला होता है?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि चांद अपने सामान्य सुनहरे, पीले या सफेद रंग में ही दिखता है। हालाँकि, बहुत ही दुर्लभ परिस्थितियों में (जैसे भीषण जंगलों की आग या ज्वालामुखी के विस्फोट के समय) आसमान में मौजूद धूल और धुएँ के कणों के कारण चाँद का रंग हल्का नीला जरूर दिखाई दे सकता है। साथ ही ब्लू मून की घटना कोई बहुत ही दुर्लभ खगोलीय घटना नहीं है। लेकिन इसका अंग्रेजी मुहावरा "once in a blue moon" अक्सर बहुत कम या कभी-कभार होने वाली घटनाओं को दर्शाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

क्या होगा इसका चरम समय समय?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि 31 मई 2026 में ब्लू मून की सबसे सटीक चरम अवस्था भारतीय समयानुसार 31 मई 2026 को दोपहर 2:15 (IST) बजे होगी। उस दौरान भारत में दिन का समय होगा जोकि एक समय विशेष पर ही घटित होती है,लेकिन साधारण आंखों से पूर्णिमा को देखने पर आप लगभग एक दिन पहले और एक दिन बाद में भी अपने गोल स्वरूप में ही देख सकते हैं, इसीलिए ब्लू मून को देखने के लिए आपको भारत के हिसाब से 31 मई 2026 की रात्रि का समय ही सबसे उपयुक्त होगा।

कैसे और किस दिशा में देखें?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इसे देखने के लिए आपको किसी विशेष खगोलीय उपकरण की आवश्यकता नहीं है इसे आप अपनी नग्न आंखों( साधारण आँखों) से देख सकते हैं शाम होते ही यह दिखाई देना शुरू हो जायेगा और पूरी रात खूबसूरत दिखाई देगा और खूबसूरत देखने और पूर्ण चंद्रोदय (Moonrise) का अद्भुत नज़ारा लेने का सबसे उत्तम समय 31 मई की शाम को सूर्यास्त के बाद का होगा। और भी अधिक सर्वोत्तम समय, शाम 06:30 बजे से रात 08:45 बजे के बीच होगा अगर दृश्यता की बात करें तो पाते हैं कि यह पूरे भारत में दिखाई देगा। आसमान साफ होने पर इसे बिना किसी दूरबीन के आसानी से देखा जा सकता है और माइक्रो मून (Micromoon)/ ब्लू मून होने के साथ-साथ इस साल का  छोटा और सबसे दूर स्थित पूर्ण चंद्रमा भी है, जो सामान्य से थोड़ा छोटा और कम चमकीला दिखाई देगा और इस घटना का नाम तो 'ब्लू मून' है, लेकिन इसका रंग सामान्य सफेद या हल्का नारंगी (चंद्रोदय के समय) ही रहेगा।

किस तारामण्डल में दिखाई देगा माइक्रो ब्लू मून ?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि उस सटीक समय पर चंद्रमा पृथ्वी से लगभग 406,135.2 किलोमीटर (252,361.3 मील) दूर होगा तथा भारत से देखने पर यह वृश्चिक (Scorpius) तारामंडल में दिखाई देगा इस दौरान चंद्रमा की चमक का मैग्नीट्यूड लगभग माइनस 12.52 के क़रीब होगा। जोकि पूरब और दक्षिणी आकाश में नज़र आयेगा।

क्या होता है माइक्रोमून?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि 31 मई 2026 की रात्रि की यह पूर्णिमा “माइक्रोमून” होगी। और यह घटना तब होती है जब पूर्ण चंद्रमा अपनी कक्षा में पृथ्वी से सबसे अधिक दूरी वाले बिंदु, अर्थात “अपोजी” (Apogee), के निकट होता है। इसके परिणामस्वरूप चंद्रमा आकाश में सामान्य पूर्णिमा की तुलना में थोड़ा छोटा दिखाई देता है। उस समय इसका प्रत्यक्ष आकार लगभग 0.49° होगा।

क्या होता है पूर्णिमा का खगोलविज्ञान ?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि पूर्ण चंद्रमा तब होता है जब पृथ्वी की ओर वाला चंद्रमा का भाग सूर्य के प्रकाश से लगभग 100% प्रकाशित दिखाई देता है। और यह स्थिति तब बनती है जब पृथ्वी लगभग सूर्य और चंद्रमा के बीच स्थित होती है। अर्थात, चंद्रमा पृथ्वी के उस पार होता है जो सूर्य के विपरीत दिशा में होता है। एवं आकाश में चंद्रमा की गति सूर्य के सापेक्ष इस ज्यामितीय स्थिति (जिसे “Opposition” भी कहा जाता है) के कारण पूर्ण चंद्रमा सामान्यतः सूर्यास्त के समय उदित होता है, और आधी रात के आसपास आकाश में अपनी सबसे अधिक ऊँचाई पर पहुँचता है और सूर्योदय के समय अस्त होता है।
साथ ही यह भी जानना आवश्यक है कि पूर्णिमा की एक और रोचक विशेषता यह है कि 24 घंटों के दौरान आकाश में उसकी गति लगभग सूर्य के विपरीत ऋतु वाले मार्ग का अनुसरण करती है। अर्थात:
सर्दियों में पूर्णिमा आकाश में अधिक ऊँचाई तक पहुँचती है, जैसे गर्मियों में सूर्य पहुँचता है।
वहीं गर्मियों में पूर्णिमा अपेक्षाकृत नीचे दिखाई देती है।
इसी कारण सर्दियों की पूर्णिमाएँ आकाश में अधिक ऊँची और चमकीली प्रतीत होती हैं।

दो पूर्णिमाओं के बीच का अंतराल कितना होता है?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि दो पूर्ण चंद्रमाओं के बीच का औसत अंतराल लगभग 29.53 दिन होता है, अर्थात 29 दिन, 12 घंटे और 43 मिनट। इस समय अवधि को खगोलविज्ञान की भाषा में “सिनोडिक महीना” (Synodic Month) या “ल्यूनेशन” (Lunation) कहा जाता है। हालाँकि यह एक औसत मान है; वास्तविक अंतराल कुछ घंटों तक कम या अधिक हो सकता है। इसका मुख्य कारण यह है कि चंद्रमा की पृथ्वी के चारों ओर की कक्षा पूर्णतः वृत्ताकार नहीं होती, बल्कि यह अंडाकार या ओवल या दीर्घवृत्ताकार होती है,तथा पृथ्वी की सूर्य के चारों ओर की कक्षा भी दीर्घवृत्ताकार (Elliptical) होती है।

प्रत्येक पूर्णिमा को चंद्र ग्रहण क्यों नहीं होता है?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि प्रत्येक पूर्णिमा को चंद्र ग्रहण नहीं होता है क्योंकि चन्द्रमा की कक्षा,पृथ्वी के सापेक्ष 5 डिग्री झुकी हुई होती है या कुछ यूं कहें कि चंद्रमा की कक्षा, पृथ्वी की कक्षा के तल से लगभग 5° झुकी हुई है, इसलिए अधिकांश पूर्णिमाओं पर ग्रहण नहीं बनता।यह कभी-कभी पूर्णिमा के समय ही चंद्रमा ,पृथ्वी की अंतरिक्ष में पड़ने वाली छाया से होकर गुजरता है। ऐसी स्थिति में “चंद्र ग्रहण” (Lunar Eclipse) घटित होता है,लेकिन हर पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण नहीं होता, क्योंकि चंद्रमा की कक्षा पृथ्वी की सूर्य के चारों ओर की कक्षा की तुलना में थोड़ी झुकी हुई होती है। इसी कारण अधिकांश समय पूर्ण चंद्रमा, पृथ्वी की छाया के ऊपर या नीचे से निकल जाता है और ग्रहण नहीं बनता।