श्री नर्मदेश्वर महादेव मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा
विपिन राठौर मीरापुर मुज़फ्फरनगर )
मीरापुरः क्षेत्र के ग्राम जमालपुर बांगर में स्थित नव निर्मित श्री नर्मदेश्वर महादेव मंदिर में सोमवार को विधि विधान पूर्वक मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा की गई।
सिकरेडा गांव में मेरठ-पौड़ी राजमार्ग चौडीकरण की जद में आए श्री शिवमंदिर को विस्थापित किया गया है। सोमवार को मंदिर में मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा से पूर्व गांव जमालुपर बांगर में सभी ग्रामीण महिलाओं ने बैंड-बाजे के साथ कलश यात्रा निकाली। कलश यात्रा गांव में स्थित देव स्थान से प्रारंभ होकर नव निर्मित श्री नर्मदेश्वर महादेव मंदिर पहंुची। जहां पर पं. सतीश पालिवाल ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना संपन्न कराई। जिसके बाद मंदिर में मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा हुई तथा इसके बाद भंडारे का आयोजन किय गया। जिसमें जिला पंचायत अध्यक्ष डा. वीरपाल निर्वाल, भाजपा नेता अमित राठी, अभिषेक चौधरी, रालोद के वरिष्ठ नेता अमरनाथ पाल समेत हजारों लोग शामिल हुए।
रघुनाथ जी की बड़ी कृपा हुई,आगे क्या होगा कोई कल्पना नहीं

*बंगाल चुनाव परिणाम पर बोले राजन जी महराज

गोंडा।जिले के कौड़िया बाजार स्थित जय सम्मय माता मंदिर पैड़ीबरा में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा के दूसरे दिन पूज्य राजन जी महाराज ने भक्तों को संबोधित किया।इस दौरान उन्होंने बंगाल चुनाव परिणाम और सामाजिक परिस्थितियों पर अपने विचार रखे।अपने संबोधन में राजन जी महराज ने कहा कि बंगाल में चुनाव परिणाम के बाद रघुनाथ जी की बड़ी कृपा हुई है।उन्होंने कहा कि आगे क्या होगा,इसकी कोई कल्पना नहीं की जा सकती है।महराज जी ने यह भी कहा कि वे वहां की परिस्थितियों को जानते हैं और वहां भगवान की कृपा महसूस की गई है।राजन जी महराज ने श्रद्धालुओं को संबंधित करते हुए कहा कि संशय होना गलत नहीं है, परन्तु उसका समाधान उचित माध्यम से करना चाहिए। उन्होंने कहा कि बिना सही व्यक्ति के सामने संशय रखने से स्थिति और बिगड़ सकती है।राजन जी महराज ने व्यंग्यात्मक रूप में कहा कि आजकल लोग बिना विशेषज्ञता के भी सलाह देने लगते हैं।उन्होंने आगे कहा कि केवल जप तप या पूजा पाठ ही भजन नहीं है।यदि कोई व्यक्ति घर में भोजन बनाते समय यह भाव रखे कि वह भगवान के लिए भोग तैयार कर रहा है,तो वही कार्य भजन और सेवा बन जाता है।यही सच्चा परमार्थ है।अपने संदेश के अंत में उन्होंने कहा कि विवेक सत्संग के बिना जागृत नहीं होता है।इसलिए लोगों को समय निकालकर नियमित रूप से सत्संग में शामिल होना चाहिए,जिससे जीवन को सही दिशा मिल सके।
रिटायर्ड फौजी से मारपीट मामले में तीन आरोपी भगोड़ा घोषित,तलाश में जुटी देहात कोतवाली पुलिस
*5 महीने से फरार चल रहे तीनों आरोपी

गोंडा।देहात कोतवाली थाना क्षेत्र में एक रिटायर्ड फौजी और उनके परिवार पर हुए जानलेवा हमले के मामले में तीन आरोपियों को न्यायालय ने भगोड़ा घोषित कर दिया है।तीनों आरोपी पिछले पांच महीने से फरार चल रहे हैं,जिसके बाद देहात कोतवाली पुलिस ने उनकी तलाश तेज कर दिया है।बताते चलें कि यह घटना बीते 16 नवंबर को देहात कोतवाली क्षेत्र के कोयली जंगल गांव में हुई थी।पूर्व फौजी आनंद यादव और उनके परिवार के सदस्य किशन लाल यादव व दशरथ लाल यादव पर धारदार हथियारों से हमला किया गया था,जिसमें आनंद यादव गंभीर रूप से घायल हो गये थे और उनका लगभग एक महीने तक लखनऊ में इलाज चला था।मामले में जिन तीनों आरोपियों को भगोड़ा घोषित किया गया है उनके नाम क्रमशः राजेश, अतुल और आलोक है।पुलिस इनकी गिरफ्तारी के लिए पिछले पांच महीने से लगातार छापेमारी कर रही है।आरोपियों के घरों पर डुग्गी मुनादी कराने के साथ साथ नोटिस भी चस्पा किये गये थे,परन्तु उन्होंने ना तो न्यायालय में और ना ही कोतवाली में आत्मसमर्पण किया।आरोपियों को न्यायालय द्वारा भगोड़ा घोषित किए जाने के बाद देहात कोतवाली पुलिस ने राजेश, अतुल व आलोक की तलाश और तेज कर दिया है।इन तीनों आरोपियों को पकड़ने के लिए कई पुलिस टीमों का गठन किया गया है,जो उनके रिश्तेदारों और परिचितों के ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही है।16 नवंबर को जब पूर्व फौजी आनंद यादव ड्यूटी पर जा रहे थे, तब उन्हें रास्ते में रोककर पुराने विवाद के चलते हमला किया गया था।इस हमले में भगवान शंकर, अंकुश,अतुल,आलोक,सत्यम,विजय और राकेश सहित अन्य आरोपी शामिल थे।उन पर बांके और अन्य धारदार हथियारों से हमला किया गया था।देहात कोतवाल शमशेर बहादुर सिंह ने बताया कि न्यायालय ने राजेश, अतुल और आलोक को भगोड़ा घोषित किया है।उनकी गिरफ्तारी के लिए निरन्तर प्रयास किया जा रहा है और न्यायालय के आदेश पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।वहीं पीड़ित आनंद यादव की पत्नी मंजू देवी ने देहात कोतवाली पुलिस पर आरोप लगाया है कि पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं कर रही है,जबकि वे खुलेआम घूम रहे हैं।
देवघर-के कांग्रेस नेता डॉ मुनम्म संजय को प्रदेश कांग्रेस कमेटी का महासचिव बनाया गया। कांग्रेस ने एक बड़ी जिम्मेदारी दी।
देवघर: कांग्रेस के जुझारू, बेबाक और जमीनी नेता डॉ. मुनम्म संजय का है—एक ऐसा नाम, जो संघर्ष की आग में तपकर राजनीति की असली पहचान बना है। आज जब उन्हें प्रदेश कांग्रेस कमेटी का महासचिव बनाया गया है, तो यह केवल एक पद नहीं, बल्कि वर्षों की तपस्या, त्याग और अडिग निष्ठा का सम्मान है। डॉ. संजय का राजनीतिक जीवन किसी आरामदायक रास्ते से नहीं, बल्कि संघर्षों के तूफान से होकर निकला है। छात्र जीवन से ही उन्होंने सत्ता के खिलाफ आवाज उठाई। देवघर का टावर चौक उनकी लड़ाइयों का साक्षी रहा है—जहां उन्होंने धरना दिया, अनशन किया, सड़कें जाम कीं, पुतला दहन किया और हर उस मुद्दे पर डटकर खड़े हुए, जहां आम जनता की आवाज दबाई जा रही थी। सैकड़ों बार गिरफ्तारियां झेलना उनके लिए डर का कारण नहीं, बल्कि संघर्ष का तमगा बन गया। सबसे बड़ी बात—जब कई लोग सत्ता के लालच में रास्ता बदल लेते हैं, तब डॉ. संजय ने कभी कांग्रेस का दामन नहीं छोड़ा। पार्टी के सबसे कठिन दौर में भी वे चट्टान की तरह डटे रहे। लेकिन डॉ. संजय ने अद्भुत धैर्य और साहस का परिचय दिया। उन्होंने साफ तौर पर ठान लिया कि किसी भी कीमत पर झुकना नहीं है—और अडिग होकर हर दबाव का मुकाबला किया। उन्होंने न कभी कांग्रेस से समझौता किया, न ही कांग्रेस की विचारधारा के साथ किसी प्रकार की सौदेबाजी की। गांधी परिवार के प्रति उनकी निष्ठा और कांग्रेस विचारधारा के प्रति उनका समर्पण कभी डगमगाया नहीं। यही कारण है कि पार्टी ने हर मोड़ पर उन पर भरोसा जताया। एनएसयूआई के जिला अध्यक्ष से लेकर युवा कांग्रेस के नेतृत्व तक, और फिर करीब 14-15 वर्षों तक देवघर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने संगठन को जमीनी स्तर पर खड़ा किया। विरोध, साजिश और अंदरूनी खींचतान के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी—बल्कि हर चुनौती को अपनी ताकत बना लिया। बीस सूत्री कार्यक्रम के जिला उपाध्यक्ष के रूप में उन्होंने जो काम किया, वह सिर्फ पद संभालना नहीं था, बल्कि व्यवस्था को आईना दिखाना था। उन्होंने यह साबित किया कि अगर नीयत साफ हो, तो सरकारी योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि गरीबों के घर तक पहुंचती हैं। उन्होंने प्रशासन को जवाबदेह बनाया, अधिकारियों को सक्रिय किया और आम जनता के हक के लिए लड़ाई लड़ी। डॉ. संजय की पहचान सिर्फ एक नेता की नहीं, बल्कि एक लड़ाकू सिपाही की है—जो हर वक्त जनता के बीच खड़ा रहता है। उनकी पकड़ प्रशासन पर भी रही है और जनता के दिलों पर भी। कई बार प्रशासन से टकराव हुआ, लेकिन हर बार उन्होंने अपने हक की लड़ाई को मजबूती से रखा और समाधान भी निकाला। उनका स्वभाव जितना सरल है, उनकी राजनीति उतनी ही धारदार। युवाओं में उनकी जबरदस्त पकड़ है—क्योंकि वे सिर्फ भाषण नहीं देते, बल्कि साथ लेकर चलते हैं। यही वजह है कि उनके साथ हमेशा युवाओं की एक मजबूत फौज खड़ी रहती है। पार्टी ने उन्हें कई जिलों में प्रभारी और ऑब्जर्वर बनाकर उनकी क्षमता का उपयोग किया है। अब प्रदेश महासचिव के रूप में यह देखना दिलचस्प होगा कि वे अपने अनुभव, संघर्ष और जमीनी समझ से संगठन को किस ऊंचाई तक ले जाते हैं। आज उनके इस नए दायित्व से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा, नया जोश और नई उम्मीद जगी है। आम कांग्रेसियों से लेकर बुद्धिजीवियों तक, हर कोई यह मान रहा है कि पार्टी ने इस बार एक ऐसे योद्धा को जिम्मेदारी दी है, जो सिर्फ कुर्सी नहीं, बल्कि विचार और संघर्ष की राजनीति को आगे बढ़ाएगा।
अवध विश्वविद्यालय की सम सेमेस्टर 2025-2026 की मुख्य परीक्षा आज से शुरू*
आज दिनांक 5 जुलाई 2026 से डॉ राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय अयोध्या की सम सेमेस्टर की मुख्य परीक्षा तीन पालियों में सम्पन्न हो रही है जिसमें प्रथम पाली 8:30 से 10:30 तक एम.ए./ एम.एस.सी./ एम.कॉम. चतुर्थ सेमेस्टर, द्वितीय पाली 11:30 से 01:30 तक बी.ए./बी.एस.सी/बी.कॉम चतुर्थ सेमेस्टर एवं तृतीय पाली 02:30 से 04:30 तक बी.ए षष्ठम सेमेस्टर की परीक्षाएं बहुत ही सुचिता पूर्ण रूप से नक़ल विहीन परीक्षा सम्पन्न कराने के लिए प्राचार्य/केन्द्राध्यक्ष प्रो.अंग्रेज सिंह ने आन्तरिक उड़ाका दल का गठन किया है, जिसके द्वारा मुख्य गेट पर ही सघन तलाशी लेने के बाद ही छात्र/छात्राएं परीक्षा कक्ष में प्रवेश दिया गया और साथ ही परीक्षा से संबंधित आवश्यक दिशा निर्देश देते हुए उसका पालन करने की सख्त हिदायत दी गई। इसके उपरान्त प्राचार्य के नेतृत्व में परीक्षा कक्ष में भी छात्र छात्राओं की तलाशी ली गई।

इस अवसर पर मुख्य रूप से प्रो.मो.शाहिद, प्रो.राजीव कुमार श्रीवास्तव, प्रो.नीलम त्रिपाठी,डॉ.सूर्य प्रकाश मिश्र,डॉ.अजय कुमार मिश्र, डॉ.आशीष द्विवेदी,डॉ.संध्या श्रीवास्तव, डॉ.विष्णु शंकर अग्रहरि एवं सहायक के रूप में लक्ष्मी शुक्ला,डॉ.कुंवर दिनकर प्रताप सिंह,नंदलाल,अंशू श्रीवास्तव, अरुण मिश्र आदि परीक्षा के समय उपस्थित रहे। प्रथम पाली में लगभग 400 , द्वितीय पाली में लगभग 350 तथा तृतीय पाली में केवल 32 छात्र/छात्राएँ परीक्षा में सम्मिलित हुए।
सुल्तानपुर के उभरते क्रिकेटर प्रवेश पाल का टी 20 मुंबई में चयन,अजिंक्य रहाणे की कप्तानी में खेलेंगे मुंबई*
सुल्तानपुर कटका खानपुर के निवासी प्रतिभाशाली क्रिकेटर प्रवेश पाल का प्रतिष्ठित टी-20 मुंबई टूर्नामेंट के लिए चयन हुआ है। यह उनके क्रिकेट करियर की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। पिछले सीजन में प्रवेश पाल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 3 मैचों में 4 विकेट हासिल किए थे और उनकी इकॉनमी रेट 6 रही थी, जो उनकी सटीक और नियंत्रित गेंदबाजी को दर्शाती है। उनके लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन ने चयनकर्ताओं का ध्यान आकर्षित किया।

प्रवेश पाल,दयाराम पाल के पुत्र हैं और उन्होंने सुल्तानपुर में कोच आसद अहमद के मार्गदर्शन में अपने क्रिकेट करियर की शुरुआत की। अपनी मेहनत, अनुशासन और समर्पण के दम पर उन्होंने यह मुकाम हासिल किया है। इस बार प्रवेश पाल अनुभवी क्रिकेटर अजिनक्या रहाणे की कप्तानी में खेलते नजर आएंगे, जो उनके लिए एक बड़ा अवसर माना जा रहा है। अपने चयन पर उन्होंने कोच, परिवार और समर्थकों का आभार व्यक्त किया और आगामी मुकाबलों में बेहतर प्रदर्शन का भरोसा जताया। जिला ओलंपिक अध्यक्ष / पूर्व मंत्री ओ पी सिंह, ओलंपिक संघ के सचिव पंकज दुबे ,उपाध्यक्ष डॉक्टर प्रवीण सिंह , राजेश कन्नौजिया ,संघ के संरक्षक भोला सिंह ,समाजसेवी मनीषा पांडे, प्रदीप सिंह, पवन सिंह फुटबॉल संघ के सचिव एम एस बेग, टेबल टेनिस संघ के सचिव मोहम्द सईद, कबड्डी संघ के सचिव महेश यादव, एथलेटिक संघ के अध्यक्ष राम लखन यादव, बॉक्सिंग संघ के सचिव विजय बॉक्सर हैंडबॉल संग के सचिव प्रवीण मिश्रा रष्ट्रीय खिलाड़ी कुमार मिश्र ,राकेश सिंह नवनीत सिंह, आदि लोगो ने दी बधाई। ओलंपिक संघ के प्रवक्ता डॉक्टर अब्दुल हमीद में बताया कि जनपद सुलतानपुर क्रिकेट के साथ-साथ सभी खेलों अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभा देती रही है
सुरक्षित बैंकिंग एवं अपराध नियंत्रण हेतु सुलतानपुर पुलिस द्वारा व्यापक 'बैंक चेकिंग' अभियान*
जनपद-सुलतानपुर में सुरक्षित बैंकिंग एवं अपराध नियंत्रण हेतु सुलतानपुर पुलिस द्वारा व्यापक 'बैंक चेकिंग' अभियान, तथा संदिग्ध व्यक्ति एवं वाहन चेकिंग की गयी। पुलिस अधीक्षक सुलतानपुर श्रीमती चारू निगम के कुशल निर्देशन में आज जनपद के समस्त थाना क्षेत्रों में पुलिस द्वारा अपने-अपने क्षेत्रों में स्थित विभिन्न बैंक शाखाओं एवं उनके आस-पास के क्षेत्रों में सघन 'बैंक चेकिंग अभियान' चलाया गया।
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बैंक उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा टप्पेबाजी, जेबकतरी व लूट जैसी घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाना है। अभियान की मुख्य कार्यवाही

संदिग्धों की निगरानी: बैंक परिसर के अंदर व बाहर बिना कारण खड़े व्यक्तियों तथा संदिग्ध वाहनों की सघन तलाशी ली एवं उनसे पूछताछ की गई।

CCTV का निरीक्षण: सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने हेतु बैंकों में लगे सीसीटीवी कैमरों की कार्यशीलता की जाँच की एवं हालिया फुटेज चेक किए।

सुरक्षा उपकरणों की जाँच: बैंकों में स्थापित सुरक्षा अलार्म, सायरन और अन्य आपातकालीन उपकरणों के रखरखाव की समीक्षा की गई। जन-जागरूकता: चेकिंग के दौरान बैंक प्रबंधकों एवं ग्राहकों को सुरक्षा के प्रति सतर्क रहने तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तत्काल सूचना पुलिस को देने हेतु प्रेरित किया गया। पुलिस द्वारा बैंक ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाकर्मियों को भी मुस्तैदी से कार्य करने तथा बैंक के आसपास संदिग्ध रूप से मडराने वाले व्यक्तियों पर पैनी नज़र रखने हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। जनपद पुलिस आमजन की सुरक्षा हेतु पूर्णतः प्रतिबद्ध है।
”दहेज लोभी का करें बहिष्कार, बेटी को बनाए आत्मनिर्भर और होशियार“-जिला प्रशासन*
सुलतानपुर द्वारा सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि समाज में व्याप्त दहेज जैसी कुप्रथा को जड़ से समाप्त करने के लिए ’दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961’ के प्रावधानों को कड़ाई से लागू किया जा रहा है। इस कानून के अंतर्गत दहेज लेना और दहेज देना, दोनो ही दंडनीय अपराध है।

प्रमुख बिन्दु-

1. दबाब बनाना अपराध हैः- विवाह के अवसर पर वर पक्ष द्वारा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से संपत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति (सम्पत्ति के कागजात आदि) की मांग करना अपराध है।

2. कठोर दंड का प्रावधानः- यदि कोई व्यक्ति दहेज लेता है,देता है या दहेज लेने/देने में मदद करता है, तो उसे कम से कम 5 वर्ष के कारावास और 15,000 रूपये या दहेज के मूल्य के बराबर (जो भी अधिक हो) जुर्माने से दंडित किया जा सकता है।

3. दहेज का विज्ञापनः- यदि कोई व्यक्ति अपने बेटे, बेटी या रिश्तेदार के विवाह के बदले समाचार पत्र या अन्य माध्यमों से संपति या व्यापार मेें हिस्सेदारी का प्रस्ताव (विज्ञापन) देता है, तो उसे 6 महीने से 5 वर्ष तक की जेल हो सकती है।

4. उपहारों की सूचीः- विवाह के समय दिए जाने वाले स्वेच्छापूर्वक उपहारांे (जो दहेज की श्रेणी में नहीं आते ) की एक हस्ताक्षरित सूची बनाना अनिवार्य है। जिला प्रशासन की अपीलः- प्रशासन सभी नागरिकों, विशेषकर युवाआंे और अभिभावकों से अपील करता है कि वे दहेज मुक्त विवाह का संकल्प लें।

यदि आपके संज्ञान में दहेज की मांग या इससे जुड़ी प्रताड़ना का कोई मामला आता है, तो तुरन्त संबंधित थाना या जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय सुलतानपुर में रिर्पोट करंे। शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखी जाएगी। दहेज एक सामाजिक कलंक है। आइए, मिलकर एक सभ्य और सशक्त समाज के निर्माण में अपना योगदान दें।
प्रेमी युगल ने फांसी लगाकर की आत्महत्या, नीम के पेड़ से लटके मिले शव, दोनों
रितेश मिश्रा
हरदोई के शाहाबाद थाना क्षेत्र के बबुराई गांव के पास एक युवक और युवती द्वारा फांसी लगाकर आत्महत्या करने का मामला सामने आया है। प्रथम दृष्टया घटना प्रेम-प्रसंग से जुड़ी बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि परिजन शादी के विरोध में थे, जिसके चलते दोनों ने यह कदम उठाया। दोनों एक ही गांव के रहने वाले और आपस में पारिवारिक रूप से परिचित बताए जा रहे हैं
पांच विधानसभा चुनावों में किसने कहां मारी बाजी, पूरे देश से लेफ्ट सरकार का सुपड़ा साफ

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पश्चिम बंगाल से लेकर असम, केरल और तमिलनाडु सहित पांच राज्यों के चुनाव के नतीजे आ चुके हैं। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरलम में सरकारें बदल गईं। असम और पुडुचेरी में एनडीए ने वापसी की। बंगाल में टीएमसी को हराकर भाजपा पहली बार सत्ता में आई। पार्टी दस साल में 3 सीटों से 206 सीटों पर पहुंच गई है। तमिलनाडु में एक्टर थलपति विजय की पार्टी टीवीके ने सबसे ज्यादा सीटें लाकर चौंका दिया। 59 साल में पहली बार राज्य में ऐसी सरकार बनने जा रही है, जिसमें डीएमके या एआईएडीएमके नहीं होगी।

बंगाल में 15 साल बाद ममता का राज खत्म

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों में इस बार बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिला है। पश्चिम बंगाल में भाजपा ने सत्ता का शिखर छू लिया। ममता बनर्जी की टीएमसी को एकतरफा हराकर भाजपा ने सबसे मुश्किल किला यानी बंगाल फतह कर लिया। बंगाल में भाजपा ने 206 सीटें जीती हैं। जबकि तृणमूल कांग्रेस 100 का आंकड़ा भी नहीं छू सकी, पार्टी 80 सीट पर जीत दर्ज की।

तमिलनाडु के नतीजों ने किया हैरान

सबसे अधिस हैरानी तमिलनाडु में हुई। तमिलनाडु की सियासत में पहली बार किस्मत आजमा रहे थलापति विजय ने अपनी पार्टी टीवीके को जबरदस्त जीत दिलाई। चुनावी राजनीति में शानदार आगाज से विजय ने तमिलनाडु की सियासत में लंबे समय से दबदबा रखने वाले द्रमुक और अन्नाद्रमुक को बहुत पीछे छोड़ दिया है। अपने पहले ही चुनाव में उन्होंने राज्य के राजनीतिक समीकरण को हिलाकर रख दिया है। विजय की पार्टी टीवीके ने 100 सीटों का आंकड़ा पार करते हुए 108 सीटों पर कब्जा जमाया है। मगर 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए जरूरी 118 सीटें हासिल करने से चूक गई। सरकार बनाने के लिए टीवीके को कम से कम 10 सीटों की दरकार होगी।

असम में तीसरी बार भाजपा सरकार

असम में भी हिमंता सरकार की वापसी हुई है। भाजपा लगातार तीसरी बार सरकार बनाएगी। BJP ने यहां अकेले ही 82 सीटें जीतीं, जो बहुमत के आंकड़े से 18 ज्यादा है। असम में 126 सीटों पर चुनाव हुआ। भाजपा ने 89 पर चुनाव लड़ा और 82 सीटें जीतीं। मौजूदा भाजपा सरकार का कोई भी मंत्री चुनाव नहीं हारा। ऐसा देश में पहली बार हुआ। उसकी जीत का स्ट्राइक रेट सबसे ज्यादा 92.1% रहा।

10 साल बाद कांग्रेस सरकार की वापसी

केरलम में 10 साल बाद कांग्रेस सरकार की वापसी हुई है। केरलम में कांग्रेस ने 114 में से 63 सीटें अपने नाम की है। हालांकि सीएम पिनाराई विजयन अपनी सीट धरमदम से जीत गए, लेकिन राज्य में एलडीएफ की करारी हार हुई। एलडीएफ सरकार के 21 में से 13 मंत्री चुनाव हारे हैं। इनमें स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज, परिवहन मंत्री के बी गणेश कुमार, उद्योग मंत्री पी राजीव, उच्च शिक्षा मंत्री आर बिंदु, खेल मंत्री वी अब्दुरहीमान और देवस्वोम मंत्री वी एन वासवन शामिल हैं।

पुडुचेरी में रंगासामी पांचवीं बार सीएम बनेंगे

एन. रंगासामी 5वीं बार पुडुचेरी के सीएम बनेंगे। उनकी पार्टी AINRC ने 12 सीटें जीतीं। वो पहली बार 2001 में सीएम बने थे। उनकी सरकार के 2 मंत्रियों लक्ष्मीनारायणन और चंद्रा प्रियंगा को हार का सामना करना पड़ा है।

श्री नर्मदेश्वर महादेव मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा
विपिन राठौर मीरापुर मुज़फ्फरनगर )
मीरापुरः क्षेत्र के ग्राम जमालपुर बांगर में स्थित नव निर्मित श्री नर्मदेश्वर महादेव मंदिर में सोमवार को विधि विधान पूर्वक मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा की गई।
सिकरेडा गांव में मेरठ-पौड़ी राजमार्ग चौडीकरण की जद में आए श्री शिवमंदिर को विस्थापित किया गया है। सोमवार को मंदिर में मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा से पूर्व गांव जमालुपर बांगर में सभी ग्रामीण महिलाओं ने बैंड-बाजे के साथ कलश यात्रा निकाली। कलश यात्रा गांव में स्थित देव स्थान से प्रारंभ होकर नव निर्मित श्री नर्मदेश्वर महादेव मंदिर पहंुची। जहां पर पं. सतीश पालिवाल ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना संपन्न कराई। जिसके बाद मंदिर में मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा हुई तथा इसके बाद भंडारे का आयोजन किय गया। जिसमें जिला पंचायत अध्यक्ष डा. वीरपाल निर्वाल, भाजपा नेता अमित राठी, अभिषेक चौधरी, रालोद के वरिष्ठ नेता अमरनाथ पाल समेत हजारों लोग शामिल हुए।
रघुनाथ जी की बड़ी कृपा हुई,आगे क्या होगा कोई कल्पना नहीं

*बंगाल चुनाव परिणाम पर बोले राजन जी महराज

गोंडा।जिले के कौड़िया बाजार स्थित जय सम्मय माता मंदिर पैड़ीबरा में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा के दूसरे दिन पूज्य राजन जी महाराज ने भक्तों को संबोधित किया।इस दौरान उन्होंने बंगाल चुनाव परिणाम और सामाजिक परिस्थितियों पर अपने विचार रखे।अपने संबोधन में राजन जी महराज ने कहा कि बंगाल में चुनाव परिणाम के बाद रघुनाथ जी की बड़ी कृपा हुई है।उन्होंने कहा कि आगे क्या होगा,इसकी कोई कल्पना नहीं की जा सकती है।महराज जी ने यह भी कहा कि वे वहां की परिस्थितियों को जानते हैं और वहां भगवान की कृपा महसूस की गई है।राजन जी महराज ने श्रद्धालुओं को संबंधित करते हुए कहा कि संशय होना गलत नहीं है, परन्तु उसका समाधान उचित माध्यम से करना चाहिए। उन्होंने कहा कि बिना सही व्यक्ति के सामने संशय रखने से स्थिति और बिगड़ सकती है।राजन जी महराज ने व्यंग्यात्मक रूप में कहा कि आजकल लोग बिना विशेषज्ञता के भी सलाह देने लगते हैं।उन्होंने आगे कहा कि केवल जप तप या पूजा पाठ ही भजन नहीं है।यदि कोई व्यक्ति घर में भोजन बनाते समय यह भाव रखे कि वह भगवान के लिए भोग तैयार कर रहा है,तो वही कार्य भजन और सेवा बन जाता है।यही सच्चा परमार्थ है।अपने संदेश के अंत में उन्होंने कहा कि विवेक सत्संग के बिना जागृत नहीं होता है।इसलिए लोगों को समय निकालकर नियमित रूप से सत्संग में शामिल होना चाहिए,जिससे जीवन को सही दिशा मिल सके।
रिटायर्ड फौजी से मारपीट मामले में तीन आरोपी भगोड़ा घोषित,तलाश में जुटी देहात कोतवाली पुलिस
*5 महीने से फरार चल रहे तीनों आरोपी

गोंडा।देहात कोतवाली थाना क्षेत्र में एक रिटायर्ड फौजी और उनके परिवार पर हुए जानलेवा हमले के मामले में तीन आरोपियों को न्यायालय ने भगोड़ा घोषित कर दिया है।तीनों आरोपी पिछले पांच महीने से फरार चल रहे हैं,जिसके बाद देहात कोतवाली पुलिस ने उनकी तलाश तेज कर दिया है।बताते चलें कि यह घटना बीते 16 नवंबर को देहात कोतवाली क्षेत्र के कोयली जंगल गांव में हुई थी।पूर्व फौजी आनंद यादव और उनके परिवार के सदस्य किशन लाल यादव व दशरथ लाल यादव पर धारदार हथियारों से हमला किया गया था,जिसमें आनंद यादव गंभीर रूप से घायल हो गये थे और उनका लगभग एक महीने तक लखनऊ में इलाज चला था।मामले में जिन तीनों आरोपियों को भगोड़ा घोषित किया गया है उनके नाम क्रमशः राजेश, अतुल और आलोक है।पुलिस इनकी गिरफ्तारी के लिए पिछले पांच महीने से लगातार छापेमारी कर रही है।आरोपियों के घरों पर डुग्गी मुनादी कराने के साथ साथ नोटिस भी चस्पा किये गये थे,परन्तु उन्होंने ना तो न्यायालय में और ना ही कोतवाली में आत्मसमर्पण किया।आरोपियों को न्यायालय द्वारा भगोड़ा घोषित किए जाने के बाद देहात कोतवाली पुलिस ने राजेश, अतुल व आलोक की तलाश और तेज कर दिया है।इन तीनों आरोपियों को पकड़ने के लिए कई पुलिस टीमों का गठन किया गया है,जो उनके रिश्तेदारों और परिचितों के ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही है।16 नवंबर को जब पूर्व फौजी आनंद यादव ड्यूटी पर जा रहे थे, तब उन्हें रास्ते में रोककर पुराने विवाद के चलते हमला किया गया था।इस हमले में भगवान शंकर, अंकुश,अतुल,आलोक,सत्यम,विजय और राकेश सहित अन्य आरोपी शामिल थे।उन पर बांके और अन्य धारदार हथियारों से हमला किया गया था।देहात कोतवाल शमशेर बहादुर सिंह ने बताया कि न्यायालय ने राजेश, अतुल और आलोक को भगोड़ा घोषित किया है।उनकी गिरफ्तारी के लिए निरन्तर प्रयास किया जा रहा है और न्यायालय के आदेश पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।वहीं पीड़ित आनंद यादव की पत्नी मंजू देवी ने देहात कोतवाली पुलिस पर आरोप लगाया है कि पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं कर रही है,जबकि वे खुलेआम घूम रहे हैं।
देवघर-के कांग्रेस नेता डॉ मुनम्म संजय को प्रदेश कांग्रेस कमेटी का महासचिव बनाया गया। कांग्रेस ने एक बड़ी जिम्मेदारी दी।
देवघर: कांग्रेस के जुझारू, बेबाक और जमीनी नेता डॉ. मुनम्म संजय का है—एक ऐसा नाम, जो संघर्ष की आग में तपकर राजनीति की असली पहचान बना है। आज जब उन्हें प्रदेश कांग्रेस कमेटी का महासचिव बनाया गया है, तो यह केवल एक पद नहीं, बल्कि वर्षों की तपस्या, त्याग और अडिग निष्ठा का सम्मान है। डॉ. संजय का राजनीतिक जीवन किसी आरामदायक रास्ते से नहीं, बल्कि संघर्षों के तूफान से होकर निकला है। छात्र जीवन से ही उन्होंने सत्ता के खिलाफ आवाज उठाई। देवघर का टावर चौक उनकी लड़ाइयों का साक्षी रहा है—जहां उन्होंने धरना दिया, अनशन किया, सड़कें जाम कीं, पुतला दहन किया और हर उस मुद्दे पर डटकर खड़े हुए, जहां आम जनता की आवाज दबाई जा रही थी। सैकड़ों बार गिरफ्तारियां झेलना उनके लिए डर का कारण नहीं, बल्कि संघर्ष का तमगा बन गया। सबसे बड़ी बात—जब कई लोग सत्ता के लालच में रास्ता बदल लेते हैं, तब डॉ. संजय ने कभी कांग्रेस का दामन नहीं छोड़ा। पार्टी के सबसे कठिन दौर में भी वे चट्टान की तरह डटे रहे। लेकिन डॉ. संजय ने अद्भुत धैर्य और साहस का परिचय दिया। उन्होंने साफ तौर पर ठान लिया कि किसी भी कीमत पर झुकना नहीं है—और अडिग होकर हर दबाव का मुकाबला किया। उन्होंने न कभी कांग्रेस से समझौता किया, न ही कांग्रेस की विचारधारा के साथ किसी प्रकार की सौदेबाजी की। गांधी परिवार के प्रति उनकी निष्ठा और कांग्रेस विचारधारा के प्रति उनका समर्पण कभी डगमगाया नहीं। यही कारण है कि पार्टी ने हर मोड़ पर उन पर भरोसा जताया। एनएसयूआई के जिला अध्यक्ष से लेकर युवा कांग्रेस के नेतृत्व तक, और फिर करीब 14-15 वर्षों तक देवघर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने संगठन को जमीनी स्तर पर खड़ा किया। विरोध, साजिश और अंदरूनी खींचतान के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी—बल्कि हर चुनौती को अपनी ताकत बना लिया। बीस सूत्री कार्यक्रम के जिला उपाध्यक्ष के रूप में उन्होंने जो काम किया, वह सिर्फ पद संभालना नहीं था, बल्कि व्यवस्था को आईना दिखाना था। उन्होंने यह साबित किया कि अगर नीयत साफ हो, तो सरकारी योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि गरीबों के घर तक पहुंचती हैं। उन्होंने प्रशासन को जवाबदेह बनाया, अधिकारियों को सक्रिय किया और आम जनता के हक के लिए लड़ाई लड़ी। डॉ. संजय की पहचान सिर्फ एक नेता की नहीं, बल्कि एक लड़ाकू सिपाही की है—जो हर वक्त जनता के बीच खड़ा रहता है। उनकी पकड़ प्रशासन पर भी रही है और जनता के दिलों पर भी। कई बार प्रशासन से टकराव हुआ, लेकिन हर बार उन्होंने अपने हक की लड़ाई को मजबूती से रखा और समाधान भी निकाला। उनका स्वभाव जितना सरल है, उनकी राजनीति उतनी ही धारदार। युवाओं में उनकी जबरदस्त पकड़ है—क्योंकि वे सिर्फ भाषण नहीं देते, बल्कि साथ लेकर चलते हैं। यही वजह है कि उनके साथ हमेशा युवाओं की एक मजबूत फौज खड़ी रहती है। पार्टी ने उन्हें कई जिलों में प्रभारी और ऑब्जर्वर बनाकर उनकी क्षमता का उपयोग किया है। अब प्रदेश महासचिव के रूप में यह देखना दिलचस्प होगा कि वे अपने अनुभव, संघर्ष और जमीनी समझ से संगठन को किस ऊंचाई तक ले जाते हैं। आज उनके इस नए दायित्व से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा, नया जोश और नई उम्मीद जगी है। आम कांग्रेसियों से लेकर बुद्धिजीवियों तक, हर कोई यह मान रहा है कि पार्टी ने इस बार एक ऐसे योद्धा को जिम्मेदारी दी है, जो सिर्फ कुर्सी नहीं, बल्कि विचार और संघर्ष की राजनीति को आगे बढ़ाएगा।
अवध विश्वविद्यालय की सम सेमेस्टर 2025-2026 की मुख्य परीक्षा आज से शुरू*
आज दिनांक 5 जुलाई 2026 से डॉ राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय अयोध्या की सम सेमेस्टर की मुख्य परीक्षा तीन पालियों में सम्पन्न हो रही है जिसमें प्रथम पाली 8:30 से 10:30 तक एम.ए./ एम.एस.सी./ एम.कॉम. चतुर्थ सेमेस्टर, द्वितीय पाली 11:30 से 01:30 तक बी.ए./बी.एस.सी/बी.कॉम चतुर्थ सेमेस्टर एवं तृतीय पाली 02:30 से 04:30 तक बी.ए षष्ठम सेमेस्टर की परीक्षाएं बहुत ही सुचिता पूर्ण रूप से नक़ल विहीन परीक्षा सम्पन्न कराने के लिए प्राचार्य/केन्द्राध्यक्ष प्रो.अंग्रेज सिंह ने आन्तरिक उड़ाका दल का गठन किया है, जिसके द्वारा मुख्य गेट पर ही सघन तलाशी लेने के बाद ही छात्र/छात्राएं परीक्षा कक्ष में प्रवेश दिया गया और साथ ही परीक्षा से संबंधित आवश्यक दिशा निर्देश देते हुए उसका पालन करने की सख्त हिदायत दी गई। इसके उपरान्त प्राचार्य के नेतृत्व में परीक्षा कक्ष में भी छात्र छात्राओं की तलाशी ली गई।

इस अवसर पर मुख्य रूप से प्रो.मो.शाहिद, प्रो.राजीव कुमार श्रीवास्तव, प्रो.नीलम त्रिपाठी,डॉ.सूर्य प्रकाश मिश्र,डॉ.अजय कुमार मिश्र, डॉ.आशीष द्विवेदी,डॉ.संध्या श्रीवास्तव, डॉ.विष्णु शंकर अग्रहरि एवं सहायक के रूप में लक्ष्मी शुक्ला,डॉ.कुंवर दिनकर प्रताप सिंह,नंदलाल,अंशू श्रीवास्तव, अरुण मिश्र आदि परीक्षा के समय उपस्थित रहे। प्रथम पाली में लगभग 400 , द्वितीय पाली में लगभग 350 तथा तृतीय पाली में केवल 32 छात्र/छात्राएँ परीक्षा में सम्मिलित हुए।
सुल्तानपुर के उभरते क्रिकेटर प्रवेश पाल का टी 20 मुंबई में चयन,अजिंक्य रहाणे की कप्तानी में खेलेंगे मुंबई*
सुल्तानपुर कटका खानपुर के निवासी प्रतिभाशाली क्रिकेटर प्रवेश पाल का प्रतिष्ठित टी-20 मुंबई टूर्नामेंट के लिए चयन हुआ है। यह उनके क्रिकेट करियर की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। पिछले सीजन में प्रवेश पाल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 3 मैचों में 4 विकेट हासिल किए थे और उनकी इकॉनमी रेट 6 रही थी, जो उनकी सटीक और नियंत्रित गेंदबाजी को दर्शाती है। उनके लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन ने चयनकर्ताओं का ध्यान आकर्षित किया।

प्रवेश पाल,दयाराम पाल के पुत्र हैं और उन्होंने सुल्तानपुर में कोच आसद अहमद के मार्गदर्शन में अपने क्रिकेट करियर की शुरुआत की। अपनी मेहनत, अनुशासन और समर्पण के दम पर उन्होंने यह मुकाम हासिल किया है। इस बार प्रवेश पाल अनुभवी क्रिकेटर अजिनक्या रहाणे की कप्तानी में खेलते नजर आएंगे, जो उनके लिए एक बड़ा अवसर माना जा रहा है। अपने चयन पर उन्होंने कोच, परिवार और समर्थकों का आभार व्यक्त किया और आगामी मुकाबलों में बेहतर प्रदर्शन का भरोसा जताया। जिला ओलंपिक अध्यक्ष / पूर्व मंत्री ओ पी सिंह, ओलंपिक संघ के सचिव पंकज दुबे ,उपाध्यक्ष डॉक्टर प्रवीण सिंह , राजेश कन्नौजिया ,संघ के संरक्षक भोला सिंह ,समाजसेवी मनीषा पांडे, प्रदीप सिंह, पवन सिंह फुटबॉल संघ के सचिव एम एस बेग, टेबल टेनिस संघ के सचिव मोहम्द सईद, कबड्डी संघ के सचिव महेश यादव, एथलेटिक संघ के अध्यक्ष राम लखन यादव, बॉक्सिंग संघ के सचिव विजय बॉक्सर हैंडबॉल संग के सचिव प्रवीण मिश्रा रष्ट्रीय खिलाड़ी कुमार मिश्र ,राकेश सिंह नवनीत सिंह, आदि लोगो ने दी बधाई। ओलंपिक संघ के प्रवक्ता डॉक्टर अब्दुल हमीद में बताया कि जनपद सुलतानपुर क्रिकेट के साथ-साथ सभी खेलों अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभा देती रही है
सुरक्षित बैंकिंग एवं अपराध नियंत्रण हेतु सुलतानपुर पुलिस द्वारा व्यापक 'बैंक चेकिंग' अभियान*
जनपद-सुलतानपुर में सुरक्षित बैंकिंग एवं अपराध नियंत्रण हेतु सुलतानपुर पुलिस द्वारा व्यापक 'बैंक चेकिंग' अभियान, तथा संदिग्ध व्यक्ति एवं वाहन चेकिंग की गयी। पुलिस अधीक्षक सुलतानपुर श्रीमती चारू निगम के कुशल निर्देशन में आज जनपद के समस्त थाना क्षेत्रों में पुलिस द्वारा अपने-अपने क्षेत्रों में स्थित विभिन्न बैंक शाखाओं एवं उनके आस-पास के क्षेत्रों में सघन 'बैंक चेकिंग अभियान' चलाया गया।
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बैंक उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा टप्पेबाजी, जेबकतरी व लूट जैसी घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाना है। अभियान की मुख्य कार्यवाही

संदिग्धों की निगरानी: बैंक परिसर के अंदर व बाहर बिना कारण खड़े व्यक्तियों तथा संदिग्ध वाहनों की सघन तलाशी ली एवं उनसे पूछताछ की गई।

CCTV का निरीक्षण: सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने हेतु बैंकों में लगे सीसीटीवी कैमरों की कार्यशीलता की जाँच की एवं हालिया फुटेज चेक किए।

सुरक्षा उपकरणों की जाँच: बैंकों में स्थापित सुरक्षा अलार्म, सायरन और अन्य आपातकालीन उपकरणों के रखरखाव की समीक्षा की गई। जन-जागरूकता: चेकिंग के दौरान बैंक प्रबंधकों एवं ग्राहकों को सुरक्षा के प्रति सतर्क रहने तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तत्काल सूचना पुलिस को देने हेतु प्रेरित किया गया। पुलिस द्वारा बैंक ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाकर्मियों को भी मुस्तैदी से कार्य करने तथा बैंक के आसपास संदिग्ध रूप से मडराने वाले व्यक्तियों पर पैनी नज़र रखने हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। जनपद पुलिस आमजन की सुरक्षा हेतु पूर्णतः प्रतिबद्ध है।
”दहेज लोभी का करें बहिष्कार, बेटी को बनाए आत्मनिर्भर और होशियार“-जिला प्रशासन*
सुलतानपुर द्वारा सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि समाज में व्याप्त दहेज जैसी कुप्रथा को जड़ से समाप्त करने के लिए ’दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961’ के प्रावधानों को कड़ाई से लागू किया जा रहा है। इस कानून के अंतर्गत दहेज लेना और दहेज देना, दोनो ही दंडनीय अपराध है।

प्रमुख बिन्दु-

1. दबाब बनाना अपराध हैः- विवाह के अवसर पर वर पक्ष द्वारा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से संपत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति (सम्पत्ति के कागजात आदि) की मांग करना अपराध है।

2. कठोर दंड का प्रावधानः- यदि कोई व्यक्ति दहेज लेता है,देता है या दहेज लेने/देने में मदद करता है, तो उसे कम से कम 5 वर्ष के कारावास और 15,000 रूपये या दहेज के मूल्य के बराबर (जो भी अधिक हो) जुर्माने से दंडित किया जा सकता है।

3. दहेज का विज्ञापनः- यदि कोई व्यक्ति अपने बेटे, बेटी या रिश्तेदार के विवाह के बदले समाचार पत्र या अन्य माध्यमों से संपति या व्यापार मेें हिस्सेदारी का प्रस्ताव (विज्ञापन) देता है, तो उसे 6 महीने से 5 वर्ष तक की जेल हो सकती है।

4. उपहारों की सूचीः- विवाह के समय दिए जाने वाले स्वेच्छापूर्वक उपहारांे (जो दहेज की श्रेणी में नहीं आते ) की एक हस्ताक्षरित सूची बनाना अनिवार्य है। जिला प्रशासन की अपीलः- प्रशासन सभी नागरिकों, विशेषकर युवाआंे और अभिभावकों से अपील करता है कि वे दहेज मुक्त विवाह का संकल्प लें।

यदि आपके संज्ञान में दहेज की मांग या इससे जुड़ी प्रताड़ना का कोई मामला आता है, तो तुरन्त संबंधित थाना या जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय सुलतानपुर में रिर्पोट करंे। शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखी जाएगी। दहेज एक सामाजिक कलंक है। आइए, मिलकर एक सभ्य और सशक्त समाज के निर्माण में अपना योगदान दें।
प्रेमी युगल ने फांसी लगाकर की आत्महत्या, नीम के पेड़ से लटके मिले शव, दोनों
रितेश मिश्रा
हरदोई के शाहाबाद थाना क्षेत्र के बबुराई गांव के पास एक युवक और युवती द्वारा फांसी लगाकर आत्महत्या करने का मामला सामने आया है। प्रथम दृष्टया घटना प्रेम-प्रसंग से जुड़ी बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि परिजन शादी के विरोध में थे, जिसके चलते दोनों ने यह कदम उठाया। दोनों एक ही गांव के रहने वाले और आपस में पारिवारिक रूप से परिचित बताए जा रहे हैं
पांच विधानसभा चुनावों में किसने कहां मारी बाजी, पूरे देश से लेफ्ट सरकार का सुपड़ा साफ

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पश्चिम बंगाल से लेकर असम, केरल और तमिलनाडु सहित पांच राज्यों के चुनाव के नतीजे आ चुके हैं। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरलम में सरकारें बदल गईं। असम और पुडुचेरी में एनडीए ने वापसी की। बंगाल में टीएमसी को हराकर भाजपा पहली बार सत्ता में आई। पार्टी दस साल में 3 सीटों से 206 सीटों पर पहुंच गई है। तमिलनाडु में एक्टर थलपति विजय की पार्टी टीवीके ने सबसे ज्यादा सीटें लाकर चौंका दिया। 59 साल में पहली बार राज्य में ऐसी सरकार बनने जा रही है, जिसमें डीएमके या एआईएडीएमके नहीं होगी।

बंगाल में 15 साल बाद ममता का राज खत्म

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों में इस बार बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिला है। पश्चिम बंगाल में भाजपा ने सत्ता का शिखर छू लिया। ममता बनर्जी की टीएमसी को एकतरफा हराकर भाजपा ने सबसे मुश्किल किला यानी बंगाल फतह कर लिया। बंगाल में भाजपा ने 206 सीटें जीती हैं। जबकि तृणमूल कांग्रेस 100 का आंकड़ा भी नहीं छू सकी, पार्टी 80 सीट पर जीत दर्ज की।

तमिलनाडु के नतीजों ने किया हैरान

सबसे अधिस हैरानी तमिलनाडु में हुई। तमिलनाडु की सियासत में पहली बार किस्मत आजमा रहे थलापति विजय ने अपनी पार्टी टीवीके को जबरदस्त जीत दिलाई। चुनावी राजनीति में शानदार आगाज से विजय ने तमिलनाडु की सियासत में लंबे समय से दबदबा रखने वाले द्रमुक और अन्नाद्रमुक को बहुत पीछे छोड़ दिया है। अपने पहले ही चुनाव में उन्होंने राज्य के राजनीतिक समीकरण को हिलाकर रख दिया है। विजय की पार्टी टीवीके ने 100 सीटों का आंकड़ा पार करते हुए 108 सीटों पर कब्जा जमाया है। मगर 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए जरूरी 118 सीटें हासिल करने से चूक गई। सरकार बनाने के लिए टीवीके को कम से कम 10 सीटों की दरकार होगी।

असम में तीसरी बार भाजपा सरकार

असम में भी हिमंता सरकार की वापसी हुई है। भाजपा लगातार तीसरी बार सरकार बनाएगी। BJP ने यहां अकेले ही 82 सीटें जीतीं, जो बहुमत के आंकड़े से 18 ज्यादा है। असम में 126 सीटों पर चुनाव हुआ। भाजपा ने 89 पर चुनाव लड़ा और 82 सीटें जीतीं। मौजूदा भाजपा सरकार का कोई भी मंत्री चुनाव नहीं हारा। ऐसा देश में पहली बार हुआ। उसकी जीत का स्ट्राइक रेट सबसे ज्यादा 92.1% रहा।

10 साल बाद कांग्रेस सरकार की वापसी

केरलम में 10 साल बाद कांग्रेस सरकार की वापसी हुई है। केरलम में कांग्रेस ने 114 में से 63 सीटें अपने नाम की है। हालांकि सीएम पिनाराई विजयन अपनी सीट धरमदम से जीत गए, लेकिन राज्य में एलडीएफ की करारी हार हुई। एलडीएफ सरकार के 21 में से 13 मंत्री चुनाव हारे हैं। इनमें स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज, परिवहन मंत्री के बी गणेश कुमार, उद्योग मंत्री पी राजीव, उच्च शिक्षा मंत्री आर बिंदु, खेल मंत्री वी अब्दुरहीमान और देवस्वोम मंत्री वी एन वासवन शामिल हैं।

पुडुचेरी में रंगासामी पांचवीं बार सीएम बनेंगे

एन. रंगासामी 5वीं बार पुडुचेरी के सीएम बनेंगे। उनकी पार्टी AINRC ने 12 सीटें जीतीं। वो पहली बार 2001 में सीएम बने थे। उनकी सरकार के 2 मंत्रियों लक्ष्मीनारायणन और चंद्रा प्रियंगा को हार का सामना करना पड़ा है।