एडीजीपी से कोतवाल की शिकायत करनी पड़ी महंगी।
सुबह से शाम तक पुलिस हिरासत में रहे समाजसेवी की तबीयत अचानक बिगड़ी ,जिला अस्पताल रेफर।
ब्रह्म प्रकाश शर्मा
- समाजसेवी अश्वनी शर्मा प्रकरण पर फूटा अधिवक्ताओं का गुस्सा, कोतवाल हटाने की मांग पर अड़े ।
-बार एसोसिएशन का प्रशासन को अल्टीमेटम, कोतवाल नहीं हटे तो होगी अनिश्चितकालीन हड़ता ।
-न्याय की मांग को लेकर अधिवक्ता एकजुट, प्रशासन को दी आर-पार की चेतावनी ।
जानसठ। समाजसेवी अश्वनी शर्मा से जुड़े प्रकरण ने अब तूल पकड़ लिया है। मामले को लेकर अधिवक्ताओं में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। शुक्रवार को अधिवक्ता अन्वेष शर्मा जो समाजसेवी अश्वनी शर्मा के भाई हैं उन्होंने भाई के साथ हुए मामले को बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रमोद कॉमरेड एवं सचिव दीपेश गुप्ता के समक्ष रखा जिसको लेकर बड़ी संख्या में अधिवक्ता एकजुट होकर पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) कार्यालय पहुंचे और मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की मांग करते हुए कोतवाल को तत्काल हटाए जाने की मांग उठाई। अधिवक्ताओं ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र अमल नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रमोद शर्मा कॉमरेड का कहना है कि अश्वनी शर्मा प्रकरण में पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं, जिससे आमजन में भी असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच तभी संभव है जब संबंधित कोतवाल को तत्काल प्रभाव से हटाया जाए। अधिवक्ताओं ने कहा कि न्याय और कानून के राज की स्थापना के लिए प्रशासन को निष्पक्षता का परिचय देना होगा। सीओ ऋषिका सिंह से हुई वार्ता के दौरान अधिवक्ताओं ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि कोतवाल के विरुद्ध कार्रवाई नहीं की गई तो बार एसोसिएशन बड़े आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होगी। उन्होंने चेतावनी दी कि न्यायिक कार्यों का बहिष्कार करते हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल तक की जा सकती है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। फिलहाल अधिवक्ताओं ने विरोध स्वरूप कलमबंद हड़ताल का ऐलान किया, जिसके चलते न्यायालयों में कई कार्य प्रभावित रहे। अधिवक्ताओं का कहना है कि यह केवल प्रारंभिक चेतावनी है। यदि प्रशासन ने मामले की गंभीरता को नहीं समझा तो आने वाले दिनों में आंदोलन और अधिक उग्र रूप धारण कर सकता है। बार पदाधिकारियों और वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने कहा कि यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं है, बल्कि न्याय व्यवस्था और नागरिक अधिकारों से जुड़ा विषय है। उन्होंने प्रशासन को चेताते हुए कहा कि जनभावनाओं की अनदेखी करना भारी पड़ सकता है। अधिवक्ताओं ने मांग की कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा दोषी अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उधर, अश्वनी शर्मा प्रकरण को लेकर नगर और आसपास के क्षेत्रों में भी चर्चाओं का बाजार गर्म है। सूत्रों की माने तो अधिवक्ताओं के आंदोलन को विभिन्न सामाजिक संगठनों , त्यागी ब्राह्मण समाज, भाकियू किसान मजदूर संगठन के अलावा अन्य का समर्थन मिलने की बातें सामने आ रही हैं। इससे प्रशासन पर दबाव लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने स्थिति को संभालने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए, तो अधिवक्ताओं का यह विरोध प्रदर्शन एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकता है। फिलहाल पूरे क्षेत्र की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई हैं और सभी को अगले कदम का इंतजार है।
एडीजीपी से शिकायत करना पड़ा समाजसेवी को महंगा।।
बताया गया कि समाजसेवी अश्वनी शर्मा ने किसी मामले को लेकर एडीजीपी से जानसठ कोतवाली प्रभारी की शिकायत की थी जिसको लेकर तभी से जानसठ कोतवाल उनसे द्वेष रखें हुए थें कहावत भी है की पुलिस की यारी और पुलिस की दुश्मनी दोनों ही महंगी पड़ी है सो वही कहावत यहां देखने को मिलीं है।
43 min ago
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