संस्कृत भाषा में हुआ विश्व कल्याण का प्रथम उद्घोष
मुंबई। महाराष्ट्र राज्य संस्कृत साहित्य अकादमी और आर्य समाज बोरीवली के संयुक्त तत्वावधान में ‘संस्कृतभाषाया: महत्त्वम्’ और ‘श्लोकवाचनस्पर्धा’ का आयोजन किया गया।अकादमी की ओर से सौरभ शिंदे ने आमंत्रित अतिथियों का स्वागत एवं अकादमी का परिचय दिया। डॉ.जितेंद्र पांडेय ने बीज वक्तव्य प्रस्तुत किया।कार्यक्रम के प्रथम सत्र में ‘श्लोकवाचनस्पर्धा’ का आयोजन किया गया जिसमें मुंबई महानगर एवं आसपास के जिलों से कई विद्यालयों ने हिस्सा लिया।इस स्पर्धा के निर्णायक आचार्य रामव्यास उपाध्याय और रामगोपाल पानेरी थे।स्पर्धा के उपरांत छात्रों को प्रथम, द्वितीय, तृतीय और सात सांत्वना पुरस्कार प्रदान किए गए।कार्यक्रम के दूसरे सत्र में ‘संस्कृतभाषाया: महत्त्वम्’ पर परिचर्चा का आयोजन किया गया।इस सत्र की अध्यक्षता मुंबई विश्वविद्यालय की संस्कृत विभाग की पूर्व अध्यक्षा एवं असोसिएट प्रोफेसर डॉ.शकुंतला गावड़े ने किया। वरिष्ठ पत्रकार श्रीनारायण तिवारी बतौर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। वक्ता के रूप में शिक्षाविद् अवनीश दीक्षित ‘दिव्य’,आचार्य प्रभारंजन पाठक और आचार्य मिथिलेश आर्य मौजूद रहे।अतिथियों का परिचय सुमन मिश्रा ने कराया।अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. शकुंतला गावड़े ने बताया कि संस्कृत एक व्यापक भाषा है। कार्यक्रम का संचालन डॉक्टर जितेंद्र पांडे ने किया। कार्यक्रम की सह संचालक श्रीमती संगीता दुबे और श्रीमती प्रतिभा मिश्रा रही। इस अवसर पर महानगर के तमाम लेखक, शिक्षक एवं मीडियाकर्मी मौजूद रहे।आचार्य योगानंद सरस्वती, डॉ. पूजा अलापुरिया ‘हेमाक्ष’, आनंद अग्रवाल, डॉ. साधना शर्मा,श्रीमती भारती श्रीवास्तव, विनय शर्मा ‘दीप’,मुन्ना यादव ‘मयंक’, श्रीमती सुषमा सिंह,डॉ. अवनीश सिंह,अजीत उपाध्याय, सुशील दुबे,अजय बनारसी, लालबहादुर यादव,श्रीमती गायत्री पांडेय,श्रीमती शैली तिवारी,श्रीमती रेखा पाठक, श्रीमती मंजू सिंह,श्रीमती प्रियंका आदि गणमान्य उपस्थित थे।अंत में आर्य समाज गोरेगांव के महासचिव पवन अब्रॉल ने आभार प्रकट किया।
2 hours and 7 min ago
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