यूपी रोडवेज बस ने महिला को कुचला, मौत, बेटी के गृह प्रवेश से लौट रही थी घर
लखनऊ । राजधानी के चारबाग रेलवे स्टेशन के सामने फुटओवर ब्रिज के पास आज सुबह करीब 10:15 बजे एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ। जानकारी के अनुसार, संगीता रावत (उम्र लगभग 40 वर्ष), पत्नी स्व. सुनील कुमार रावत, निवासी आदर्श नगर, शुक्लागंज, थाना गंगाघाट, जनपद उन्नाव, सड़क पार कर रही थीं, तभी यूपी रोडवेज बस संख्या यूपी 32 एमएन 9180 की चपेट में आने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

घटना के समय मृतका अपने दो बच्चों और भाई के साथ अपने घर लौट रही थीं। वह लखनऊ में अपनी मौसी की बेटी के गृह प्रवेश कार्यक्रम में शामिल होने आई थीं।स्थानीय लोग और प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि महिला सड़क पार करते समय बस का चालक तेज गति में था और नियंत्रण खोने के कारण हादसा हुआ। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी।पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचकर बस और चालक को हिरासत में लिया। मृतका का पंचायतनामा भरकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। परिजनों की तहरीर पर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

पुलिस द्वारा बस चालक को हिरासत में लिया गया, मृतका के परिवार से तहरीर प्राप्त की गई। पंचायतनामा भरकर शव पोस्टमार्टम भेजा गया। मामला दर्ज कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही हैघटना से मृतका के परिजनों में कोहराम मचा हुआ है। बच्चे और भाई हादसे के दृश्य को देखकर सदमे में हैं। स्थानीय लोगों ने दुर्घटना स्थल पर सड़क सुरक्षा उपायों की कमी पर चिंता व्यक्त की। वहीं महिला की मौत के बाद परिवार में कोहराम मचा गया है।
पारा में नाले में मिला अज्ञात व्यक्ति का शव,मचा हड़कंप
लखनऊ । राजधानी में आज सुबह सात बजे थाना पारा को मिली सूचना ने इलाके में सनसनी फैला दी। तिकोनिया से नहर तिराहा जाने वाली रोड के किनारे, कुल्हण कट्टा मोड़ के पास नाले में एक व्यक्ति का शव पड़ा मिला।
मौके पर पहुंची पुलिस ने बताया कि शव की उम्र लगभग 40-45 वर्ष है और शरीर पर किसी भी तरह के चोट या घाव के निशान नहीं हैं। आसपास के लोग और स्थानीय निवासी भी मृतक की पहचान नहीं कर पाए।

तलाशी में मिले मोबाइल फोन से परिजनों से संपर्क किया

पुलिस ने मृतक की तलाशी में मिले मोबाइल फोन से परिजनों से संपर्क किया। जांच में शव की पहचान रामसागर, पुत्र लठ्ठा, निवासी टड़ियावां, हरदोई के रूप में हुई। वह पारा में विजय श्रीवास्तव के यहां काम करते थे।परिजनों ने बताया कि रामसागर शराब के आदी थे। फिलहाल, पुलिस ने पंचनामा भरकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। घटनास्थल पर परिजन भी पहुंचे हैं और पुलिस इस रहस्यमय मौत की गहन जांच कर रही है।

बिजनौर में सड़क हादसा, युवक गंभीर रूप से घायल

बिजनौर थाना क्षेत्र के चंद्रावल में रात के समय विनीत सिंह (30) पर अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी। विनीत स्कोडा वर्कशॉप से घर लौट रहे थे, तभी यह हादसा हुआ। सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय लोग तुरंत मौके पर पहुंचे। घायल को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। हादसे के बाद वाहन चालक फरार हो गया। पुलिस अज्ञात वाहन की पहचान और चालक की गिरफ्तारी के लिए जांच कर रही है। हादसे के कारणों का पता लगाने के प्रयास जारी हैं।

युवक ट्रेन से कटकर मौत, पोस्टमार्टम के लिए शव भेजा गया

लखनऊ के बंथरा थाना क्षेत्र में शनिवार को एक युवक ट्रेन से कटकर गंभीर रूप से घायल हो गया, जिससे उसकी मौत हो गई। सूचना पॉइंट मैन अवधेश कुमार ने हरौनी रेलवे स्टेशन से दी। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और मृतक की पहचान राम प्रकाश, पुत्र लक्ष्मण, उम्र लगभग 57 वर्ष, निवासी बंथरा बाजार के रूप में की। परिजनों को घटना की जानकारी दे दी गई। पंचायतनामा की कार्रवाई पूरी होने के बाद शव को बॉडी कीट बैग में पैक कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। पुलिस ने बताया कि मौके पर शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए फोर्स तैनात है और मामले की जांच जारी है।
अन्तर जनपदीय एवं अन्तर राज्यीय सीमाओं पर डायवर्जन प्लान लगाने हेतु एडीजी जोन को जिम्मेदारी

यातायात प्रबन्धन को और प्रभावी बनाने के दृष्टिगत पहले से ही मॉक ड्रिल्स एवं पुलिसकर्मियो का प्रशिक्षण कराएं

सीमावर्ती जनपदो के स्टेकहोल्डर्स से समन्वय स्थापित करते हुए डाइवर्जन प्लान शेयर करने का भी सुझाव जिससे कि पीक डेस पर प्रयागराज आने वाले हेवी ट्रैफिक को कंट्रोल किया जा सके

संजय द्विवेदी प्रयागराज।माघ मेला 2026 में आने वाले श्रद्धालुओं के आवागमन को सुगम एवं सुरक्षित बनाने के दृष्टिगत आज अपर पुलिस महानिदेशक यातायात उत्तर प्रदेश सरकार ए सतीश गणेश की अध्यक्षता तथा अपर पुलिस महानिदेशक प्रयागराज जोन डॉ॰संजीव गुप्ता मण्डलायुक्त सौम्या अग्रवाल तथा अन्य सम्बंधित वरिष्ठ अधिकारियो की उपस्थिति में मेला प्राधिकरण कार्यालय स्थित आईसीसीसी सभागार में माघ मेले की यातायात प्रबन्धन योजना पार्किंग व्यवस्था, साइनेज व्यवस्था तथा अन्य कॉन्टिजेसी योजनाओं से सम्बंधित बैठक संपन्न हुई।बैठक में सर्वप्रथम इस वर्ष की यातायात प्रबंधन एवं कंटेंजेन्सी योजनाओं के बारे में जानकारी दी गई जिसके अन्तर्गत पुलिस अधिकारियों ने मेला अवधि में सीमावर्ती जनपदो से मेला क्षेत्र की ओर आने वाली भीड़ को आवश्यकतानुसार रोकने एवं डाइवर्ट करने हेतु बनाए गए डायवर्जन प्लान के बारे में अवगत कराया।सातो मुख्य मार्गों पर चिन्हित पार्किंग स्थलो की अपेक्षित क्षमता एवं उनमे की जा रही व्यवस्थाओ के बारे में भी अवगत कराया गया जिसपर एडीजी यातायात महोदय ने स्पष्ट रूप से निर्देशित किया कि कौन सी कटिजेसी प्लान कब लगाना है एवं उसकी चेन ऑफ कमांड क्या होगी उसके बारे में बैरिकेटिंग पर लगे पुलिसकर्मियो को भी जानकारी हो यह सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा।उन्होने अन्तर जनपदीय एवं अन्तर राज्यीय सीमाओं पर कौन सा डायवर्जन प्लान कब लगाने की आवश्यकता है उसका निर्णय सभी जनपदीय अधिकारियों से समन्वय स्थापित करते हुए एडीजी जोन को लेने की जिम्मेदारी दी है।यातायात प्रबंधन को और प्रभावी बनाने के दृष्टिगत उन्होंने पहले से ही मॉक ड्रिल्स एवं पुलिसकर्मियो का प्रशिक्षण करा लेने के भी निर्देश दिए।उन्होंने सीमावर्ती जनपदों के स्टेकहोल्डर्स जिसके अन्तर्गत टैक्सी ऑपरेटर तथा टैक्सीयूनियन आते है से समन्वय स्थापित करते हुए डाइवर्जन प्लान शेयर करने का भी सुझाव दिया जिससे कि पीक डेस पर प्रयागराज आने वाले हेवी ट्रैफिक को कन्ट्रोल किया जा सके।साइनेज की क्वालिटी एवं संख्या बढ़ाने के दृष्टिगत उन्होने उनकी संख्या लोकेशन तथा उनमें क्या मैसेज प्रदर्शित होना है इस पर निर्णय लेने हेतु यातायात परिवहन आरटीओ एवं प्रशासनिक अधिकारियों को साथ मिल गए कार्य करने को कहा।एडीजी जोन प्रयागराज ने ई रिक्शा के मूवमेंट प्लान 2 व्हीलर्स के रूट प्लान तथा पार्किंग स्थलो की कैपेसिटी का सही आकंलन करते वहां अपेक्षित व्यवस्थाएं स समय करने के निर्देश देते हुए पार्किंग स्थलों को सब सेक्टरो में भी विभाजित करने को कहा जिससे कि उसके क्षेत्रफल का अधिक से अधिक उपयोग किया जा सके एवं श्रद्धालुओ को गाड़ी पार्क करने एवं निकालने में भी आसानी हो। आइसीसीसी से निगरानी करने वाले अधिकारियो की सूची बनाकर उनकी भी चेन ऑफ कमांड तय करने के निर्देश दिए गए।मण्डलायुक्त ने मेले अवधि में वीआईपी मूवमेन्ट हेतु बेटर प्लानिंग करने शटल बसेस को निर्धारित रूट पर चलाने जिससे कि सभी सड़को पर अनावश्यक जाम न लगे तथा शटल सर्विस हेतु बसो के अलावा छोटे वाहनो जैसे मिनी बस का भी प्रयोग करने के निर्देश दिए।इस वर्ष मकर संक्रांति(15 जनवरी)एवं मौनी अमावस्या(18 जनवरी)के बीच सिर्फ 3 दिनों का गैप है इस कारण मकर संक्रांति को आने वाली भीड़ मौनी अमावस्या तक रुक सकती है।श्रद्धालु 7 मार्गो से प्रयागराज आते है जिसमें जौनपुर वाराणसी रीवा मिर्जापुर कानपुर लखनऊ एवं अयोध्या मुख्य है।इस बार स्नानार्थियों की सुरक्षा के दृष्टिगत सभी घाटों पर नम्बरिंग करते हुए उनके मैप को गूगल से इंटीग्रेट कराने पर भी सहमति बनी है जिसके लिए मेला प्रशासन अब गूगल के अधिकारियों के साथ बातचीत कर रहा है। साथ ही स्नानघाटो एवं अन्य मुख्य स्थलो के चिन्हांकन हेतु गुब्बारो का भी प्रयोग किया जाएगा।बैठक में आइजी अजय कुमार मिश्रा पुलिस आयुक्त जोगेन्द्र कुमार एडिशनल कमिश्नर पुलिस डॉ अजय पाल मेला अधिकारी ऋषिराज नगरायुक्त सीलम साई तेजा अपर मेला अधिकारी दयानन्द प्रसाद समेत सभी अधिकारीगण उपस्थित रहे।

लखनऊ में हथियारों की बड़ी सौदेबाजी का खुलासा, शहीद स्मारक के पास अवैध असलहा बेचने पहुंचे दो तस्कर रंगे हाथ गिरफ्तार
लखनऊ । राजधानी  में शनिवार की शाम शहीद स्मारक के पास उस वक्त हड़कंप मच गया जब वजीरगंज पुलिस ने दो ऐसे युवकों को धर दबोचा जो अवैध असलहा बेचने की फिराक में घूम रहे थे। पकड़े गए तस्करों के पास से एक 315 बोर का तमंचा, 20 जिंदा कारतूस, चाकू और उनकी मोटरसाइकिल बरामद की गई है। पुलिस की इस कार्रवाई से शहर में सक्रिय हथियार तस्करी के नेटवर्क पर बड़ा झटका माना जा रहा है।

चेकिंग के दौरान भिड़े तस्कर, पलभर में घेराबंदी

डीसीपी कमलेश दीक्षित ने बताया कि वजीरगंज कोतवाली के उपनिरीक्षक सुरजीत सिंह कुशवाहा अपनी टीम के साथ शहीद स्मारक क्षेत्र में अपराध नियंत्रण के लिए चेकिंग कर रहे थे। तभी मुखबिर से सूचना मिली कि दो युवक अवैध हथियार बेचने आ रहे हैं। सूचना मिलते ही पुलिस ने तुरंत क्षेत्र की घेराबंदी की। कुछ ही मिनटों में संदिग्ध मोटरसाइकिल आती दिखी और पुलिस ने उसे रोककर दोनों युवकों को हिरासत में ले लिया।

थैले में छिपा था असलहे का जखीरा

तलाशी लेने पर एक थैले से 315 बोर का अवैध तमंचा, 20 कारतूस और चाकू बरामद हुआ।पूछताछ में खुलासा हुआ कि दोनों युवक किसी खरीदार से मिलने और हथियार बेचने की तैयारी में थे।

गिरफ्तार तस्करों के नाम हारिश खान, निवासी हाजीपुर, थाना इमलिया सुल्तानपुर, जिला सीतापुर, वर्तमान पता: मुंगफली मंडी, वजीरगंज, मोहम्मद जीशान, निवासी हरिहरपुर, थाना महमूदाबाद, जिला सीतापुर, वर्तमान पता: रहीमनगर, मड़ियांव है। दोनों शहर में सक्रिय होकर अवैध असलहे की सप्लाई कर रहे थे।

अवैध हथियार नेटवर्क पर बड़ा झटका

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि हथियार वे कहां से लाते थे और किसे बेचने जा रहे थे। शुरुआती जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि आरोपी किसी बड़े सप्लायर गिरोह के संपर्क में थे।वजीरगंज पुलिस की सतर्कता से राजधानी में होने वाली बड़ी आपराधिक वारदात टल गई। शहीद स्मारक जैसे संवेदनशील क्षेत्र में दो तस्करों का रंगे हाथ पकड़ा जाना पुलिस की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
लखनऊ की सड़कों पर आफत: बाइक सवार युवक की मौत, कार सवारों का तांडव
लखनऊ । राजधानी में शनिवार को सड़क पर दो अलग-अलग घटनाओं ने सनसनी फैला दी। हुसैनगंज में नशे में कार चला रहे युवक की तेज रफ्तार कार बाइक सवार भाइयों से टकरा गई, जिसमें एक की मौत हो गई और दूसरा गंभीर रूप से घायल हुआ। वहीं, सरोजनीनगर के बंथरा में कार सवार ने ऑटो चालक से विवाद के बाद सड़क पर उत्पात मचाया और तीन लोग घायल हो गए। पुलिस ने दोनों मामलों में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

हुसैनगंज में बाइक सवार भाई पर कार की टक्कर

हुसैनगंज इलाके में शनिवार रात बाइक चला रहे मनीष कुमार (39) और उनके भाई दीपक के ऊपर पीछे से आई तेज रफ्तार कार ने टक्कर मार दी। मनीष की मौके पर मौत हो गई, जबकि दीपक गंभीर रूप से घायल है।मनीष के भाई नितिन ने बताया कि दोनों भाई शादी से लौट रहे थे। टक्कर इतनी भीषण थी कि मनीष का हेलमेट सिर से छिटक गया और दोनों बाइक सहित करीब 50 मीटर तक घिसटते चले गए।पुलिस ने दोनों को सिविल अस्पताल पहुंचाया। मनीष को मृत घोषित कर दिया गया, जबकि दीपक को ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया। आरोपी कार चालक अभी फरार है। पुलिस ने लापरवाही से वाहन चलाने की धारा में एफआईआर दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है।

बंथरा में कार सवार का उत्पात, तीन लोग घायल

सरोजनीनगर के बंथरा कस्बे में शनिवार शाम एक कार चालक ने ऑटो चालक से ओवरटेक विवाद के बाद सड़क पर उत्पात मचाया। उसने पहले ऑटो चालक को पीटा और फिर गुस्से में कार दौड़ा कर भीड़ में घुस गया।इस घटना में स्कूटी सवार शिक्षिका दिव्या वर्मा, सुशील गुप्ता (50) और गुड्डू (55) घायल हो गए। गुस्साए लोगों ने कार पर ईंट-पत्थर बरसाए। आरोपी कार छोड़कर फरार हो गया। पुलिस ने घायल शिक्षिका की तहरीर पर मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है।दोनों ही घटनाओं ने सड़क सुरक्षा की अहमियत को दोबारा उजागर कर दिया है। पुलिस जनता से सतर्क रहने और तेज रफ्तार वाहन से बचने की अपील कर रही है।
*राष्ट्र गौरव अवार्ड*समाज कल्याण फेडरेशन ऑफ इंडिया दिल्ली में 8वां राष्ट्र गौरव सम्मान समारोह रविवार,15 फरवरी 2026 को आयोजित होगा*
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विकासनगर पुलिस की बड़ी सफलता, “Good Gang” व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर डकैती की साजिश रचने वाला 10,000 रुपये का इनामिया गिरफ्तार

लखनऊ । राजधानी की विकासनगर पुलिस ने एक बार फिर अपराधियों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए कारोबारी से हुई डकैती के मुख्य आरोपी और 10,000 रुपये के इनामिया शिवम दीक्षित को गिरफ्तार कर लिया। यह वही आरोपी है, जिसने अपने साथियों के साथ मिलकर Good Gang (Gg) नाम का व्हाट्सएप ग्रुप बनाया था और उसी के ज़रिए डकैती की पूरी योजना तैयार की गई थी। कई महीनों से फरार चल रहा शिवम लगातार पुलिस और कोर्ट से बचने के लिए ठिकाने बदल रहा था, लेकिन अंततः पुलिस ने उसे गाजियाबाद के लोनी क्षेत्र से दबोच लिया।

इस तरह से हुई गिरफ्तारी

28 मार्च को एक कारोबारी के साथ हुई डकैती की घटना में शिवम दीक्षित का नाम सामने आया था। घटना के बाद से ही वह पुलिस को चकमा देकर फरार था।कोर्ट द्वारा उसके खिलाफ गिरफ्तारी अधिपत्र (NBW) जारी किया गया था।धारा 84(1) भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के अंतर्गत उद्घोषणा भी की गई थी। पुलिस उपायुक्त (पूर्वी) ने उस पर 10,000 रुपये का इनाम घोषित किया था।लगातार निगरानी और तकनीकी सर्विलांस के बाद विकासनगर पुलिस टीम को सूचना मिली कि शिवम गाजियाबाद के टीला शाहबाजपुर, तृप्ता सिटी क्षेत्र में छिपा है। टीम ने घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार कर लिया।

डकैती की पूरी साजिश ऐसे रची गई थी

शिवम दीक्षित कोई सामान्य अपराधी नहीं, बल्कि डकैती की योजना बनाने वाला गैंग लीडर था।उसने अपने साथियों के साथ मिलकर अत्यंत सुनियोजित ढंग से वारदात को अंजाम दिया।

गिरोह का अपराध करने का तरीका

“Good Gang (Gg)” नाम से व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया, जिसमें सभी सदस्य जुड़े थे।
कारोबारी के नकद लेन-देन की जानकारी जुटाकर उसे “आसान टारगेट” मानकर डकैती की योजना बनाई गई।
घटना से पहले तय किया गया कि पीड़ित प्राथमिकी दर्ज नहीं कराएगा, इसलिए पकड़ की संभावना कम रहेगी।
डकैती के बाद लूटे गए धन को आपस में बांटने की तैयारी की गई।
शिवम ने अपना बोलेरो वाहन (UP76V8792) इस वारदात के लिए उपलब्ध कराया।
यह पूरी वारदात सोची-समझी रणनीति और तकनीकी माध्यमों के उपयोग का उदाहरण थी।

गिरफ्तारी के बाद क्या हुआ?

गिरफ्तार आरोपी को विधिसम्मत कार्रवाई करते हुए न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा (रिमांड) पर जिला कारागार लखनऊ भेज दिया गया। इस मामले में अब तक कुल 11 अभियुक्त गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
राहगीरों को निशाना बनाने वाली महिला चोर गैंग का पर्दाफाश, दो गिरफ्तार, भारी मात्रा में जेवरात बरामद

लखनऊ । राजधानी में सक्रिय महिला चोर गैंग पर मड़ियांव पुलिस ने बड़ी कार्रवाई कर दो शातिर महिला चोरों को गिरफ्तार कर लिया है। ये महिलाएँ ई-रिक्शा में सफर करने वाले यात्रियों को ही अपना निशाना बनाती थीं और पलक झपकते ही उनका सोना-चाँदी समेत कीमती सामान गायब कर देती थीं। मुखबिर की सटीक सूचना पर दोनों महिलाओं को सीतापुर रोड स्थित कोयला ढाल के पास से दबोचा गया। गिरफ्तार आरोपियों के पास से चोरी के कई कीमती जेवर और नकदी बरामद हुई है। पुलिस की इस कार्रवाई से शहर में सक्रिय चोर गिरोहों पर भी बड़ा प्रहार माना जा रहा है।

कैसे बेनकाब हुआ महिला चोर गिरोह

डीसीपी अपराध कमलेश दीक्षित ने बताया कि 28 नवंबर को मड़ियांव पुलिस भिठौली चौराहे पर संदिग्धों की चेकिंग में थी। इसी दौरान पुलिस टीम को मुखबिर से सूचना मिली कि दो महिलाएँ, जिनका हुलिया पहले भी बताया गया था, सीतापुर रोड पर खड़ी हैं और राहगीरों का सामान चोरी करने की फिराक में हैं। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके की ओर दौड़ी और घेराबंदी करते हुए दोनों महिलाओं को पकड़ लिया।

पुलिस को लंबे समय से थी इनकी तलाश

गिरफ्तार महिलाओं का नाम रजनी पत्नी मनोज (25), निवासी पलवल, हरियाणा, रामबती पत्नी महावीर (26), निवासी धौलपुर, राजस्थान है। पूछताछ में दोनों ने कई वारदातों का खुलासा किया और चोरी में अपनी संलिप्तता स्वीकार की। पुलिस को लंबे समय से इनकी तलाश थी, क्योंकि हाल के दिनों में ई-रिक्शा यात्रियों से आभूषण चोरी की शिकायतें लगातार बढ़ रही थीं।

खुल गए कई चोरी के मामले

गिरफ्तार महिलाओं की निशानदेही पर और बरामदगी के आधार पर मड़ियांव थाने में दर्ज कई मुकदमों का अनावरण हुआ है। बरामद माल के आधार पर मुकदमों की धारा में बढ़ोतरी भी की गई है। पुलिस ने महिलाओं को मौके पर ही कानूनन कार्रवाई की जानकारी देते हुए औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया। इनके पास से तीन अंगूठी, एक जोड़ी कुंडल, एक जोड़ी झुमकी, एक जोड़ी बुंदे, दो जोड़ी पायल, दो जोड़ी बिछया, 670 रुपये नकद बरामद किया गया है। बरामदगी यह साबित करती है कि दोनों महिलाएं लंबे समय से चोरी कर जेवर इकट्ठा करती थीं और इन्हें बेचकर ही अपना गुजर-बसर करती थीं।

कैसे देती थीं वारदात को अंजाम

दोनों अभियुक्ताएँ मजदूरी करने का बहाना बनाकर शहर में रहती थीं, लेकिन असल में ई-रिक्शा में यात्रियों के साथ सफर करके माहिराना तरीके से चोरी करती थीं।यात्रियों के साथ बैठते ही मौके की तलाश, ध्यान भटकते ही कान, हाथ या बैग में रखी कीमती चीजें झपट लेना, भीड़भाड़ वाले इलाके में उतरकर भीड़ में गुम हो जाना, इन्हें देखकर कोई अंदाजा भी नहीं लगा सकता था कि ये पेशेवर चोर हैं।

अन्य जिलों तक फैली पड़ताल

पुलिस अब हरियाणा और राजस्थान पुलिस से समन्वय कर दोनों महिलाओं के आपराधिक इतिहास की जानकारी जुटा रही है। आशंका है कि इन्होंने अन्य राज्यों में भी कई वारदातें की होंगी।यह गिरफ्तारी न सिर्फ पुलिस की सतर्कता का उदाहरण है बल्कि यात्रियों को भी सचेत करती है कि सार्वजनिक वाहनों में सफर करते समय सावधान रहें।
गृहस्थ आश्रम : जीवन-दर्शन का स्वर्णिम मध्यस्थ
संजीव सिंह बलिया! गृहस्थ आश्रम : भारतीय जीवन-दर्शन का केंद्रबिंदु भारतीय ज्ञान परम्परा का प्रवाह हजारों वर्षों से ऐसे चलता आया है, मानो हिमालय की शाश्वत शृंखलाओं से निकली कोई दिव्य नदी हो—कभी शांत, कभी प्रचण्ड, परन्तु सदैव जीवनदायिनी। इस परम्परा में गृहस्थ आश्रम कभी न तो उपेक्षा का विषय रहा है, न ही निन्दा का। भारतीय मानस समझता रहा है कि जीवन केवल संन्यास की पथरीली कंदराओं में ही नहीं, बल्कि गृहस्थी के दीप-स्तंभों में भी वैसे ही प्रकाशित होता है जैसे किसी मन्दिर की ज्योति में ईश्वर का तेज। भारत के ऋषि-कुल को देखें तो प्रतीत होगा कि हमारा समाज वास्तव में “ऋषियों की संतान” है। लगभग प्रत्येक ऋषि—अत्रि, वशिष्ठ, कश्यप, याज्ञवल्क्य—सभी गृहस्थ थे; उनकी ऋचाएँ, ब्रह्मज्ञान और अध्यात्म की ऊँचाइयाँ गृहस्थ जीवन की गोद में ही पलकर विराटता प्राप्त कर सकीं। सोलह संस्कारों में विवाह को प्रमुख इसलिए कहा गया कि यह न केवल एक वैयक्तिक संस्कार था, बल्कि सम्पूर्ण समाज के संतुलन का आधार-स्तंभ था—मानो मनुष्य-जीवन का वह द्वार जहाँ से कर्तव्य, प्रेम, त्याग और सृजन सब मिलकर प्रवेश करते हों। सनातन वैदिक धर्म ने मनुष्य-जीवन को सौ वर्ष का पूर्ण वृत्त मानकर उसे चार आश्रमों में विभाजित किया—ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास। यह विभाजन मात्र आयु-क्रम नहीं था; यह जीवन का एक चतुर्ऋतु-चक्र था—ब्रह्मचर्य वसंत की तरह ज्ञान और उत्साह का; गृहस्थ ग्रीष्म की भाँति कर्म, तप और दायित्व का; वानप्रस्थ शरद की तरह मन्द, उज्ज्वल और अनुभवों का; और संन्यास हेमंत की तरह निर्मल, शांत और मोक्षमार्ग का। सबको इन चारों से होकर गुजरना था ताकि व्यक्ति जीवन को सम्पूर्ण रूप में जी सके और अन्ततः समाज को अपनी परिपक्व प्रतिभा अर्पित कर सके। जो पंथ जीवन के प्रारम्भिक वर्षों में ही संन्यास अनिवार्य कर बैठे—वे एक ओर सूखे हुए वृक्षों की तरह खड़े रहे, जिनकी जड़ें समाज की मिट्टी से कट गईं; और जब जड़ों का रस ही समाप्त हो जाए, तो वृक्ष कितने दिन टिक सकता है? फलतः ऐसे पंथ काल के थपेड़ों में विलीन हो गए। भारतीय इतिहास पर दृष्टि डालें तो ऐसा प्रतीत होता है मानो प्रवृत्ति और निवृत्ति किसी विशाल समुद्र में उठती-गिरती लहरों की तरह हैं—कभी प्रवृत्ति की ज्वार, तो कभी निवृत्ति का भाटा। वैदिक काल कर्म, यज्ञ और सामाजिक सक्रियता का युग था; उपनिषदकाल में निवृत्ति के बीज अंकुरित हुए—मौन, ध्यान, आत्मबोध शिखर की ओर बढ़े; बौद्ध काल में निवृत्ति ने वटवृक्ष का रूप ले लिया—विस्तार, गहराई और व्यापकता के साथ; और पुनः मुगल व आधुनिक युग में प्रवृत्ति ने अपनी जमीन वापस पा ली—कर्म, समाज, कुटुम्ब और राष्ट्र की चेतना उन्नत हुई। इस प्रकार भारत में प्रवृत्ति से निवृत्ति और निवृत्ति से प्रवृत्ति का आवागमन निरंतर चलता रहा—मानो सूर्य दिन में चमके और रात में चन्द्रमा; दोनों आवश्यक, दोनों पूरक। समाज ने मनुष्य को सामाजिक बनाया है; इसलिए समाज का ऋण चुकाए बिना संन्यास लेकर पलायन कर जाना भारतीय मनस्विता का मार्ग नहीं रहा। वन ही सत्य का एकमात्र द्वार नहीं—गृहस्थ का अन्न, गृहस्थ की अग्नि और गृहस्थ की करुणा से ही ऋषियों का वन-जीवन पोषित हुआ। गृहस्थ आश्रम बिना पानी के वह नदी होता, जिसमें न तो प्रवाह होता न जीवन। अतः संन्यास को भी वही व्यक्ति ग्रहण करता था जिसने गृहस्थ-धर्म को पूर्ण निष्ठा से निभाया हो—तभी उसका संन्यास समाज के लिए प्रकाश-दीप होता था, पलायन नहीं। भारतीय जीवन-दर्शन कभी एकांगी नहीं रहा। उसने प्रवृत्ति और निवृत्ति, गृहस्थ और संन्यास, कर्म और ध्यान—सबको एक ही सूत्र में पिरोया। इससे सम्बंधित दृष्टांत महाभारत के वन पर्व में वर्णित है, जिसमें ऋषि माकंदव्य ने युधिष्ठिर को यह कहानी सुनाई थी। इसे कपोतोपाख्यान (कबूतर की कहानी) के नाम से जाना जाता है। यह कहानी धर्म, वैराग्य, और गृहस्थ धर्म के श्रेष्ठ आदर्शों को दर्शाती है -एक समय की बात है, एक अति सुंदर और गुणवान ऋषिकुमार थे, जो बचपन से ही विरक्त (दुनिया से मोह रहित) और तपस्वी स्वभाव के थे। वह ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए वन में वास करते थे। उसी राज्य में एक राजकुमारी थी, जो अत्यंत रूपवती और धर्मात्मा थी। जब वह विवाह योग्य हुई, तो राजा ने उसका स्वयंवर आयोजित किया। देश-विदेश के अनेक राजकुमार और प्रतिष्ठित व्यक्ति उस स्वयंवर में उपस्थित हुए। राजकुमारी ने जब सभा में उपस्थित सभी लोगों को देखा, तो उसे कोई भी अपने योग्य नहीं लगा। तभी उसकी दृष्टि उस ऋषिकुमार पर पड़ी जो किसी कारणवश सभा में मौजूद थे। ऋषिकुमार का तेजस्वी रूप, शांत स्वभाव और वैराग्य से भरा व्यक्तित्व राजकुमारी को इतना भाया कि उसने लेशमात्र भी विचार किए बिना, उन ऋषिकुमार के गले में वरमाला डाल दी। यह देखकर पूरी सभा चकित रह गई, क्योंकि ऋषिकुमार तो वैरागी थे और विवाह के बंधन से दूर रहना चाहते थे। जैसे ही राजकुमारी ने ऋषिकुमार को वरमाला पहनाई, तो ऋषिकुमार को लगा कि उनका ब्रह्मचर्य भंग हो रहा है और वह सांसारिक मोह-माया के बंधन में फंस रहे हैं। राजकुमारी के चयन को स्वीकार न करते हुए, वह तत्काल उस स्वयंवर सभा से उठकर गहन वन की ओर भाग गए। राजकुमारी भी उनके पीछे भागी, लेकिन ऋषिकुमार वैराग्य की धुन में तेजी से आगे निकल गए और घने जंगल में अदृश्य हो गए। राजकुमारी ने जब ऋषिकुमार को भागते हुए देखा, तो वह अत्यंत दुखी हुई और राजा से कहा कि वह उसी ऋषिकुमार को पति के रूप में स्वीकार करेंगी। राजा अपनी बेटी के हठ के कारण चिंतित हुए और अपने मंत्री के साथ उस ऋषिकुमार को ढूंढने के लिए जंगल की ओर निकल पड़े। काफी देर तक भटकने के बाद भी वे ऋषिकुमार को नहीं ढूंढ पाए। राजा और मंत्री दोनों ही जंगल में रास्ता भटक गए और दिन ढलने लगा। वे भूख-प्यास से व्याकुल हो गए और थककर एक विशाल वृक्ष के नीचे बैठ गए। जिस पेड़ के नीचे राजा और मंत्री बैठे थे, उसी पर एक कबूतर (कपोत) अपनी पत्नी कबूतरी (कपोती) के साथ एक घोंसले में रहता था। जब कबूतरी ने नीचे राजा और मंत्री को ठंड से ठिठुरते और भूख से पीड़ित देखा, तो वह अपने पति कबूतर से बोली - "हे नाथ! ये दोनों अतिथि हैं और भूख-प्यास से व्याकुल हैं। अतिथि का सत्कार करना गृहस्थ का परम धर्म है। हमारे पास इन्हें देने के लिए कुछ नहीं है, लेकिन हमें किसी भी प्रकार से इनकी सेवा करनी चाहिए।" कबूतर, जो धर्मात्मा और परम ज्ञानी था, अपनी पत्नी के धर्मनिष्ठ विचार से अत्यंत प्रसन्न हुआ और बोला -"तुम धन्य हो प्रिये! आज तुमने मुझे गृहस्थ धर्म का सच्चा महत्व समझा दिया।" सबसे पहले, कबूतर पास से सूखी टहनियाँ और घास लाकर लाया और एक जगह पर आग जलाई, ताकि राजा और मंत्री ठंड से बच सकें। फिर कबूतर ने राजा से कहा - "हे अतिथि! मैं आपका सत्कार कैसे करूँ? मेरे पास आपको खिलाने के लिए कोई अन्न नहीं है। इसलिए, मैं स्वयं ही आपकी क्षुधा शांत करने के लिए अपने शरीर की आहुति देता हूँ। आप मुझे पकाकर अपनी भूख मिटाइए।" यह कहकर, वह धर्मात्मा कबूतर बिना किसी संकोच के धधकती आग में कूद गया और अपने प्राणों का त्याग कर दिया। राजा और मंत्री यह देखकर बहुत दुखी और शर्मिंदा हुए। अभी उनकी भूख पूरी तरह शांत नहीं हुई थी। तब कबूतरी ने अपने पति के पदचिह्नों पर चलते हुए राजा से कहा - "महाराज! मेरे पति ने अतिथि धर्म का पालन किया है। मैं भी उनके मार्ग पर चलते हुए आपकी सेवा करना चाहती हूँ। मेरी देह भी आपकी क्षुधा शांत करने में सहायक हो।" और कबूतरी भी तुरंत उस आग में कूद गई और अपने प्राणों का बलिदान कर दिया। कबूतर दम्पत्ति के इस अभूतपूर्व आत्म-त्याग और अतिथि सत्कार को देखकर राजा और मंत्री की आँखें खुल गईं। उनकी भूख तो शांत हुई या नहीं, लेकिन उनका अहंकार और मोह पूरी तरह शांत हो गया। उन्होंने कबूतर दम्पत्ति के चरणों में सिर नवाया और उस स्थान को छोड़कर वापस लौट गए। ऋषि माकंदव्य ने युधिष्ठिर से कहा - सन्यासी हो तो उस ऋषिकुमार की तरह जिसने राज्य-वैभव और राजकुमारी के प्रेम को ठुकराकर वैराग्य को सर्वोपरि माना और मोह से बचने के लिए जंगल में भाग गया। गृहस्थ हो तो कबूतर दम्पत्ति की तरह जिन्होंने अपने जीवन का मोह त्यागकर, केवल 'अतिथि सत्कार' और 'गृहस्थ धर्म' के पालन को ही अपना परम कर्तव्य समझा। यह कथा सिखाती है कि सच्चा त्याग वैराग्य में भी है और निःस्वार्थ सेवा भाव से युक्त गृहस्थ जीवन में भी है। ऋषिकुमार का त्याग विरक्ति का प्रतीक है, जबकि कबूतर दम्पत्ति का त्याग परमार्थ (दूसरों के हित) का प्रतीक है। यह वह भूमि है जहाँ कृषक हल चलाते समय भी ऋग्वेद की ऋचाएँ गाता है, और संन्यासी गहन समाधि में भी “सर्वभूतहिते रतः” का संकल्प लेता है। अतः भारत की आत्मा का सन्देश स्पष्ट है—जीवन को सम्पूर्णता में जियो, प्रत्येक आश्रम का सम्मान करो, और समाज को कुछ दिए बिना किसी एक मार्ग को श्रेष्ठ कहकर दूसरे को तुच्छ मत समझो। गृहस्थ हो या संन्यासी—दोनों भारतीय संस्कृति के दो पंख हैं; एक भी टूट जाए तो उड़ान अधूरी रह जाती है। ©® डॉ. विद्यासागर उपाध्याय
*प्रॉपर्टी डीलर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जहर से मौत,मृतक का शव बाग में मिला*
सुल्तानपुर में एक प्रॉपर्टी डीलर का शव संदिग्ध परिस्थितियों में कोतवाली देहात के उचहरा गांव स्थित एक बाग में मिला है। इस मृतक की पहचान भपटा निवासी 45 वर्षीय शिवकुमार गुप्ता के रूप में हुई है।......... शिवकुमार गुप्ता हनुमानगंज के असई चौराहे पर अपने परिवार के साथ रहते था। और वह प्रॉपर्टी के काम के साथ-साथ असई चौराहे पर किराना,बर्तन और फल की दुकान भी चलाता था, जिसकी देखरेख उनकी पत्नी करती थीं। मृतक के छोटे बेटे सनी गुप्ता ने बताया कि घटना वाली रात उनके पिता दादाजी के लिए किराना दुकान से दूध और बिस्किट लाए थे। उन्होंने अपनी बहन से रोटी बनाकर रखने को कहा था और बताया था कि वे एक घंटे में लौट आएंगे। सनी के अनुसार,उनके पिता जबरदस्ती गाड़ी की चाबी लेकर गए,जबकि वे उन्हें रात में बाहर जाने से मना कर रहे थे। सुबह पड़ोसियों के फोन से उन्हें पिता की हत्या की जानकारी मिली। तो परिजनों का रो रो कर बुरा हाल है। सनी ने बताया कि उनके पिता प्रॉपर्टी के काम के बारे में कुछ नहीं बताते थे, इसलिए उन्हें किसी पर शक नहीं है। शिवकुमार का शव घर से लगभग तीन किलोमीटर दूर भपटा और पाठक पुरवा गांवों के बीच एक बाग में मिला। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच पड़ताल शुरू कर दी है। इंस्पेक्टर अखंडदेव मिश्रा ने बताया कि तहरीर मिलने और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। शिवकुमार अपने चार भाइयों में तीसरे नंबर पर थे। उनके दो बेटे और एक बेटी है। बड़े बेटे सुमित कुमार गुप्ता की शादी 28 नवंबर 2024 को हुई थी और वह दिल्ली में नौकरी करते हैं। घटना के बाद से पत्नी सुमन गुप्ता, बेटी शिवानी गुप्ता और पिता राम सिंगार गुप्ता का रो-रोकर बुरा हाल है। बड़े भाई अशोक कुमार गुप्ता ने बताया कि मेरे भाई के साथ जो घटना हुई इस सम्बन्ध में हम बहुत ज़्यादा नहीं बता सकते। इसलिए की भाई हनुमानगंज में रहता था और हम तीन किमी दूर भपटा में रहते हैं। सुबह हम गांव में खेत में काम कर रहे थे तब हमें पता चला की भाई के साथ ये घटना घटी। घटनास्थल पर जब हम पहुंचे तो दो सौ लोगों की भीड़ लगी थी। कब निकले घर से, घटना कैसे घटी ये उनका लड़का ही बता सकता है। कोई चोट है नहीं, गाड़ी उनकी मौजूद है मौके पर। क्या किया गया कुछ पता नहीं। शिवकुमार के बड़े भाई अशोक गुप्ता एक शिक्षा मित्र हैं। शिवकुमार हनुमानगंज के एक स्वयं सहायता समूह का भी सदस्य था,जहां से उसने ऋण लिया था।
यूपी रोडवेज बस ने महिला को कुचला, मौत, बेटी के गृह प्रवेश से लौट रही थी घर
लखनऊ । राजधानी के चारबाग रेलवे स्टेशन के सामने फुटओवर ब्रिज के पास आज सुबह करीब 10:15 बजे एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ। जानकारी के अनुसार, संगीता रावत (उम्र लगभग 40 वर्ष), पत्नी स्व. सुनील कुमार रावत, निवासी आदर्श नगर, शुक्लागंज, थाना गंगाघाट, जनपद उन्नाव, सड़क पार कर रही थीं, तभी यूपी रोडवेज बस संख्या यूपी 32 एमएन 9180 की चपेट में आने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

घटना के समय मृतका अपने दो बच्चों और भाई के साथ अपने घर लौट रही थीं। वह लखनऊ में अपनी मौसी की बेटी के गृह प्रवेश कार्यक्रम में शामिल होने आई थीं।स्थानीय लोग और प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि महिला सड़क पार करते समय बस का चालक तेज गति में था और नियंत्रण खोने के कारण हादसा हुआ। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी।पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचकर बस और चालक को हिरासत में लिया। मृतका का पंचायतनामा भरकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। परिजनों की तहरीर पर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

पुलिस द्वारा बस चालक को हिरासत में लिया गया, मृतका के परिवार से तहरीर प्राप्त की गई। पंचायतनामा भरकर शव पोस्टमार्टम भेजा गया। मामला दर्ज कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही हैघटना से मृतका के परिजनों में कोहराम मचा हुआ है। बच्चे और भाई हादसे के दृश्य को देखकर सदमे में हैं। स्थानीय लोगों ने दुर्घटना स्थल पर सड़क सुरक्षा उपायों की कमी पर चिंता व्यक्त की। वहीं महिला की मौत के बाद परिवार में कोहराम मचा गया है।
पारा में नाले में मिला अज्ञात व्यक्ति का शव,मचा हड़कंप
लखनऊ । राजधानी में आज सुबह सात बजे थाना पारा को मिली सूचना ने इलाके में सनसनी फैला दी। तिकोनिया से नहर तिराहा जाने वाली रोड के किनारे, कुल्हण कट्टा मोड़ के पास नाले में एक व्यक्ति का शव पड़ा मिला।
मौके पर पहुंची पुलिस ने बताया कि शव की उम्र लगभग 40-45 वर्ष है और शरीर पर किसी भी तरह के चोट या घाव के निशान नहीं हैं। आसपास के लोग और स्थानीय निवासी भी मृतक की पहचान नहीं कर पाए।

तलाशी में मिले मोबाइल फोन से परिजनों से संपर्क किया

पुलिस ने मृतक की तलाशी में मिले मोबाइल फोन से परिजनों से संपर्क किया। जांच में शव की पहचान रामसागर, पुत्र लठ्ठा, निवासी टड़ियावां, हरदोई के रूप में हुई। वह पारा में विजय श्रीवास्तव के यहां काम करते थे।परिजनों ने बताया कि रामसागर शराब के आदी थे। फिलहाल, पुलिस ने पंचनामा भरकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। घटनास्थल पर परिजन भी पहुंचे हैं और पुलिस इस रहस्यमय मौत की गहन जांच कर रही है।

बिजनौर में सड़क हादसा, युवक गंभीर रूप से घायल

बिजनौर थाना क्षेत्र के चंद्रावल में रात के समय विनीत सिंह (30) पर अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी। विनीत स्कोडा वर्कशॉप से घर लौट रहे थे, तभी यह हादसा हुआ। सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय लोग तुरंत मौके पर पहुंचे। घायल को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। हादसे के बाद वाहन चालक फरार हो गया। पुलिस अज्ञात वाहन की पहचान और चालक की गिरफ्तारी के लिए जांच कर रही है। हादसे के कारणों का पता लगाने के प्रयास जारी हैं।

युवक ट्रेन से कटकर मौत, पोस्टमार्टम के लिए शव भेजा गया

लखनऊ के बंथरा थाना क्षेत्र में शनिवार को एक युवक ट्रेन से कटकर गंभीर रूप से घायल हो गया, जिससे उसकी मौत हो गई। सूचना पॉइंट मैन अवधेश कुमार ने हरौनी रेलवे स्टेशन से दी। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और मृतक की पहचान राम प्रकाश, पुत्र लक्ष्मण, उम्र लगभग 57 वर्ष, निवासी बंथरा बाजार के रूप में की। परिजनों को घटना की जानकारी दे दी गई। पंचायतनामा की कार्रवाई पूरी होने के बाद शव को बॉडी कीट बैग में पैक कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। पुलिस ने बताया कि मौके पर शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए फोर्स तैनात है और मामले की जांच जारी है।
अन्तर जनपदीय एवं अन्तर राज्यीय सीमाओं पर डायवर्जन प्लान लगाने हेतु एडीजी जोन को जिम्मेदारी

यातायात प्रबन्धन को और प्रभावी बनाने के दृष्टिगत पहले से ही मॉक ड्रिल्स एवं पुलिसकर्मियो का प्रशिक्षण कराएं

सीमावर्ती जनपदो के स्टेकहोल्डर्स से समन्वय स्थापित करते हुए डाइवर्जन प्लान शेयर करने का भी सुझाव जिससे कि पीक डेस पर प्रयागराज आने वाले हेवी ट्रैफिक को कंट्रोल किया जा सके

संजय द्विवेदी प्रयागराज।माघ मेला 2026 में आने वाले श्रद्धालुओं के आवागमन को सुगम एवं सुरक्षित बनाने के दृष्टिगत आज अपर पुलिस महानिदेशक यातायात उत्तर प्रदेश सरकार ए सतीश गणेश की अध्यक्षता तथा अपर पुलिस महानिदेशक प्रयागराज जोन डॉ॰संजीव गुप्ता मण्डलायुक्त सौम्या अग्रवाल तथा अन्य सम्बंधित वरिष्ठ अधिकारियो की उपस्थिति में मेला प्राधिकरण कार्यालय स्थित आईसीसीसी सभागार में माघ मेले की यातायात प्रबन्धन योजना पार्किंग व्यवस्था, साइनेज व्यवस्था तथा अन्य कॉन्टिजेसी योजनाओं से सम्बंधित बैठक संपन्न हुई।बैठक में सर्वप्रथम इस वर्ष की यातायात प्रबंधन एवं कंटेंजेन्सी योजनाओं के बारे में जानकारी दी गई जिसके अन्तर्गत पुलिस अधिकारियों ने मेला अवधि में सीमावर्ती जनपदो से मेला क्षेत्र की ओर आने वाली भीड़ को आवश्यकतानुसार रोकने एवं डाइवर्ट करने हेतु बनाए गए डायवर्जन प्लान के बारे में अवगत कराया।सातो मुख्य मार्गों पर चिन्हित पार्किंग स्थलो की अपेक्षित क्षमता एवं उनमे की जा रही व्यवस्थाओ के बारे में भी अवगत कराया गया जिसपर एडीजी यातायात महोदय ने स्पष्ट रूप से निर्देशित किया कि कौन सी कटिजेसी प्लान कब लगाना है एवं उसकी चेन ऑफ कमांड क्या होगी उसके बारे में बैरिकेटिंग पर लगे पुलिसकर्मियो को भी जानकारी हो यह सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा।उन्होने अन्तर जनपदीय एवं अन्तर राज्यीय सीमाओं पर कौन सा डायवर्जन प्लान कब लगाने की आवश्यकता है उसका निर्णय सभी जनपदीय अधिकारियों से समन्वय स्थापित करते हुए एडीजी जोन को लेने की जिम्मेदारी दी है।यातायात प्रबंधन को और प्रभावी बनाने के दृष्टिगत उन्होंने पहले से ही मॉक ड्रिल्स एवं पुलिसकर्मियो का प्रशिक्षण करा लेने के भी निर्देश दिए।उन्होंने सीमावर्ती जनपदों के स्टेकहोल्डर्स जिसके अन्तर्गत टैक्सी ऑपरेटर तथा टैक्सीयूनियन आते है से समन्वय स्थापित करते हुए डाइवर्जन प्लान शेयर करने का भी सुझाव दिया जिससे कि पीक डेस पर प्रयागराज आने वाले हेवी ट्रैफिक को कन्ट्रोल किया जा सके।साइनेज की क्वालिटी एवं संख्या बढ़ाने के दृष्टिगत उन्होने उनकी संख्या लोकेशन तथा उनमें क्या मैसेज प्रदर्शित होना है इस पर निर्णय लेने हेतु यातायात परिवहन आरटीओ एवं प्रशासनिक अधिकारियों को साथ मिल गए कार्य करने को कहा।एडीजी जोन प्रयागराज ने ई रिक्शा के मूवमेंट प्लान 2 व्हीलर्स के रूट प्लान तथा पार्किंग स्थलो की कैपेसिटी का सही आकंलन करते वहां अपेक्षित व्यवस्थाएं स समय करने के निर्देश देते हुए पार्किंग स्थलों को सब सेक्टरो में भी विभाजित करने को कहा जिससे कि उसके क्षेत्रफल का अधिक से अधिक उपयोग किया जा सके एवं श्रद्धालुओ को गाड़ी पार्क करने एवं निकालने में भी आसानी हो। आइसीसीसी से निगरानी करने वाले अधिकारियो की सूची बनाकर उनकी भी चेन ऑफ कमांड तय करने के निर्देश दिए गए।मण्डलायुक्त ने मेले अवधि में वीआईपी मूवमेन्ट हेतु बेटर प्लानिंग करने शटल बसेस को निर्धारित रूट पर चलाने जिससे कि सभी सड़को पर अनावश्यक जाम न लगे तथा शटल सर्विस हेतु बसो के अलावा छोटे वाहनो जैसे मिनी बस का भी प्रयोग करने के निर्देश दिए।इस वर्ष मकर संक्रांति(15 जनवरी)एवं मौनी अमावस्या(18 जनवरी)के बीच सिर्फ 3 दिनों का गैप है इस कारण मकर संक्रांति को आने वाली भीड़ मौनी अमावस्या तक रुक सकती है।श्रद्धालु 7 मार्गो से प्रयागराज आते है जिसमें जौनपुर वाराणसी रीवा मिर्जापुर कानपुर लखनऊ एवं अयोध्या मुख्य है।इस बार स्नानार्थियों की सुरक्षा के दृष्टिगत सभी घाटों पर नम्बरिंग करते हुए उनके मैप को गूगल से इंटीग्रेट कराने पर भी सहमति बनी है जिसके लिए मेला प्रशासन अब गूगल के अधिकारियों के साथ बातचीत कर रहा है। साथ ही स्नानघाटो एवं अन्य मुख्य स्थलो के चिन्हांकन हेतु गुब्बारो का भी प्रयोग किया जाएगा।बैठक में आइजी अजय कुमार मिश्रा पुलिस आयुक्त जोगेन्द्र कुमार एडिशनल कमिश्नर पुलिस डॉ अजय पाल मेला अधिकारी ऋषिराज नगरायुक्त सीलम साई तेजा अपर मेला अधिकारी दयानन्द प्रसाद समेत सभी अधिकारीगण उपस्थित रहे।

लखनऊ में हथियारों की बड़ी सौदेबाजी का खुलासा, शहीद स्मारक के पास अवैध असलहा बेचने पहुंचे दो तस्कर रंगे हाथ गिरफ्तार
लखनऊ । राजधानी  में शनिवार की शाम शहीद स्मारक के पास उस वक्त हड़कंप मच गया जब वजीरगंज पुलिस ने दो ऐसे युवकों को धर दबोचा जो अवैध असलहा बेचने की फिराक में घूम रहे थे। पकड़े गए तस्करों के पास से एक 315 बोर का तमंचा, 20 जिंदा कारतूस, चाकू और उनकी मोटरसाइकिल बरामद की गई है। पुलिस की इस कार्रवाई से शहर में सक्रिय हथियार तस्करी के नेटवर्क पर बड़ा झटका माना जा रहा है।

चेकिंग के दौरान भिड़े तस्कर, पलभर में घेराबंदी

डीसीपी कमलेश दीक्षित ने बताया कि वजीरगंज कोतवाली के उपनिरीक्षक सुरजीत सिंह कुशवाहा अपनी टीम के साथ शहीद स्मारक क्षेत्र में अपराध नियंत्रण के लिए चेकिंग कर रहे थे। तभी मुखबिर से सूचना मिली कि दो युवक अवैध हथियार बेचने आ रहे हैं। सूचना मिलते ही पुलिस ने तुरंत क्षेत्र की घेराबंदी की। कुछ ही मिनटों में संदिग्ध मोटरसाइकिल आती दिखी और पुलिस ने उसे रोककर दोनों युवकों को हिरासत में ले लिया।

थैले में छिपा था असलहे का जखीरा

तलाशी लेने पर एक थैले से 315 बोर का अवैध तमंचा, 20 कारतूस और चाकू बरामद हुआ।पूछताछ में खुलासा हुआ कि दोनों युवक किसी खरीदार से मिलने और हथियार बेचने की तैयारी में थे।

गिरफ्तार तस्करों के नाम हारिश खान, निवासी हाजीपुर, थाना इमलिया सुल्तानपुर, जिला सीतापुर, वर्तमान पता: मुंगफली मंडी, वजीरगंज, मोहम्मद जीशान, निवासी हरिहरपुर, थाना महमूदाबाद, जिला सीतापुर, वर्तमान पता: रहीमनगर, मड़ियांव है। दोनों शहर में सक्रिय होकर अवैध असलहे की सप्लाई कर रहे थे।

अवैध हथियार नेटवर्क पर बड़ा झटका

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि हथियार वे कहां से लाते थे और किसे बेचने जा रहे थे। शुरुआती जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि आरोपी किसी बड़े सप्लायर गिरोह के संपर्क में थे।वजीरगंज पुलिस की सतर्कता से राजधानी में होने वाली बड़ी आपराधिक वारदात टल गई। शहीद स्मारक जैसे संवेदनशील क्षेत्र में दो तस्करों का रंगे हाथ पकड़ा जाना पुलिस की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
लखनऊ की सड़कों पर आफत: बाइक सवार युवक की मौत, कार सवारों का तांडव
लखनऊ । राजधानी में शनिवार को सड़क पर दो अलग-अलग घटनाओं ने सनसनी फैला दी। हुसैनगंज में नशे में कार चला रहे युवक की तेज रफ्तार कार बाइक सवार भाइयों से टकरा गई, जिसमें एक की मौत हो गई और दूसरा गंभीर रूप से घायल हुआ। वहीं, सरोजनीनगर के बंथरा में कार सवार ने ऑटो चालक से विवाद के बाद सड़क पर उत्पात मचाया और तीन लोग घायल हो गए। पुलिस ने दोनों मामलों में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

हुसैनगंज में बाइक सवार भाई पर कार की टक्कर

हुसैनगंज इलाके में शनिवार रात बाइक चला रहे मनीष कुमार (39) और उनके भाई दीपक के ऊपर पीछे से आई तेज रफ्तार कार ने टक्कर मार दी। मनीष की मौके पर मौत हो गई, जबकि दीपक गंभीर रूप से घायल है।मनीष के भाई नितिन ने बताया कि दोनों भाई शादी से लौट रहे थे। टक्कर इतनी भीषण थी कि मनीष का हेलमेट सिर से छिटक गया और दोनों बाइक सहित करीब 50 मीटर तक घिसटते चले गए।पुलिस ने दोनों को सिविल अस्पताल पहुंचाया। मनीष को मृत घोषित कर दिया गया, जबकि दीपक को ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया। आरोपी कार चालक अभी फरार है। पुलिस ने लापरवाही से वाहन चलाने की धारा में एफआईआर दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है।

बंथरा में कार सवार का उत्पात, तीन लोग घायल

सरोजनीनगर के बंथरा कस्बे में शनिवार शाम एक कार चालक ने ऑटो चालक से ओवरटेक विवाद के बाद सड़क पर उत्पात मचाया। उसने पहले ऑटो चालक को पीटा और फिर गुस्से में कार दौड़ा कर भीड़ में घुस गया।इस घटना में स्कूटी सवार शिक्षिका दिव्या वर्मा, सुशील गुप्ता (50) और गुड्डू (55) घायल हो गए। गुस्साए लोगों ने कार पर ईंट-पत्थर बरसाए। आरोपी कार छोड़कर फरार हो गया। पुलिस ने घायल शिक्षिका की तहरीर पर मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है।दोनों ही घटनाओं ने सड़क सुरक्षा की अहमियत को दोबारा उजागर कर दिया है। पुलिस जनता से सतर्क रहने और तेज रफ्तार वाहन से बचने की अपील कर रही है।
*राष्ट्र गौरव अवार्ड*समाज कल्याण फेडरेशन ऑफ इंडिया दिल्ली में 8वां राष्ट्र गौरव सम्मान समारोह रविवार,15 फरवरी 2026 को आयोजित होगा*
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विकासनगर पुलिस की बड़ी सफलता, “Good Gang” व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर डकैती की साजिश रचने वाला 10,000 रुपये का इनामिया गिरफ्तार

लखनऊ । राजधानी की विकासनगर पुलिस ने एक बार फिर अपराधियों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए कारोबारी से हुई डकैती के मुख्य आरोपी और 10,000 रुपये के इनामिया शिवम दीक्षित को गिरफ्तार कर लिया। यह वही आरोपी है, जिसने अपने साथियों के साथ मिलकर Good Gang (Gg) नाम का व्हाट्सएप ग्रुप बनाया था और उसी के ज़रिए डकैती की पूरी योजना तैयार की गई थी। कई महीनों से फरार चल रहा शिवम लगातार पुलिस और कोर्ट से बचने के लिए ठिकाने बदल रहा था, लेकिन अंततः पुलिस ने उसे गाजियाबाद के लोनी क्षेत्र से दबोच लिया।

इस तरह से हुई गिरफ्तारी

28 मार्च को एक कारोबारी के साथ हुई डकैती की घटना में शिवम दीक्षित का नाम सामने आया था। घटना के बाद से ही वह पुलिस को चकमा देकर फरार था।कोर्ट द्वारा उसके खिलाफ गिरफ्तारी अधिपत्र (NBW) जारी किया गया था।धारा 84(1) भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के अंतर्गत उद्घोषणा भी की गई थी। पुलिस उपायुक्त (पूर्वी) ने उस पर 10,000 रुपये का इनाम घोषित किया था।लगातार निगरानी और तकनीकी सर्विलांस के बाद विकासनगर पुलिस टीम को सूचना मिली कि शिवम गाजियाबाद के टीला शाहबाजपुर, तृप्ता सिटी क्षेत्र में छिपा है। टीम ने घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार कर लिया।

डकैती की पूरी साजिश ऐसे रची गई थी

शिवम दीक्षित कोई सामान्य अपराधी नहीं, बल्कि डकैती की योजना बनाने वाला गैंग लीडर था।उसने अपने साथियों के साथ मिलकर अत्यंत सुनियोजित ढंग से वारदात को अंजाम दिया।

गिरोह का अपराध करने का तरीका

“Good Gang (Gg)” नाम से व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया, जिसमें सभी सदस्य जुड़े थे।
कारोबारी के नकद लेन-देन की जानकारी जुटाकर उसे “आसान टारगेट” मानकर डकैती की योजना बनाई गई।
घटना से पहले तय किया गया कि पीड़ित प्राथमिकी दर्ज नहीं कराएगा, इसलिए पकड़ की संभावना कम रहेगी।
डकैती के बाद लूटे गए धन को आपस में बांटने की तैयारी की गई।
शिवम ने अपना बोलेरो वाहन (UP76V8792) इस वारदात के लिए उपलब्ध कराया।
यह पूरी वारदात सोची-समझी रणनीति और तकनीकी माध्यमों के उपयोग का उदाहरण थी।

गिरफ्तारी के बाद क्या हुआ?

गिरफ्तार आरोपी को विधिसम्मत कार्रवाई करते हुए न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा (रिमांड) पर जिला कारागार लखनऊ भेज दिया गया। इस मामले में अब तक कुल 11 अभियुक्त गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
राहगीरों को निशाना बनाने वाली महिला चोर गैंग का पर्दाफाश, दो गिरफ्तार, भारी मात्रा में जेवरात बरामद

लखनऊ । राजधानी में सक्रिय महिला चोर गैंग पर मड़ियांव पुलिस ने बड़ी कार्रवाई कर दो शातिर महिला चोरों को गिरफ्तार कर लिया है। ये महिलाएँ ई-रिक्शा में सफर करने वाले यात्रियों को ही अपना निशाना बनाती थीं और पलक झपकते ही उनका सोना-चाँदी समेत कीमती सामान गायब कर देती थीं। मुखबिर की सटीक सूचना पर दोनों महिलाओं को सीतापुर रोड स्थित कोयला ढाल के पास से दबोचा गया। गिरफ्तार आरोपियों के पास से चोरी के कई कीमती जेवर और नकदी बरामद हुई है। पुलिस की इस कार्रवाई से शहर में सक्रिय चोर गिरोहों पर भी बड़ा प्रहार माना जा रहा है।

कैसे बेनकाब हुआ महिला चोर गिरोह

डीसीपी अपराध कमलेश दीक्षित ने बताया कि 28 नवंबर को मड़ियांव पुलिस भिठौली चौराहे पर संदिग्धों की चेकिंग में थी। इसी दौरान पुलिस टीम को मुखबिर से सूचना मिली कि दो महिलाएँ, जिनका हुलिया पहले भी बताया गया था, सीतापुर रोड पर खड़ी हैं और राहगीरों का सामान चोरी करने की फिराक में हैं। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके की ओर दौड़ी और घेराबंदी करते हुए दोनों महिलाओं को पकड़ लिया।

पुलिस को लंबे समय से थी इनकी तलाश

गिरफ्तार महिलाओं का नाम रजनी पत्नी मनोज (25), निवासी पलवल, हरियाणा, रामबती पत्नी महावीर (26), निवासी धौलपुर, राजस्थान है। पूछताछ में दोनों ने कई वारदातों का खुलासा किया और चोरी में अपनी संलिप्तता स्वीकार की। पुलिस को लंबे समय से इनकी तलाश थी, क्योंकि हाल के दिनों में ई-रिक्शा यात्रियों से आभूषण चोरी की शिकायतें लगातार बढ़ रही थीं।

खुल गए कई चोरी के मामले

गिरफ्तार महिलाओं की निशानदेही पर और बरामदगी के आधार पर मड़ियांव थाने में दर्ज कई मुकदमों का अनावरण हुआ है। बरामद माल के आधार पर मुकदमों की धारा में बढ़ोतरी भी की गई है। पुलिस ने महिलाओं को मौके पर ही कानूनन कार्रवाई की जानकारी देते हुए औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया। इनके पास से तीन अंगूठी, एक जोड़ी कुंडल, एक जोड़ी झुमकी, एक जोड़ी बुंदे, दो जोड़ी पायल, दो जोड़ी बिछया, 670 रुपये नकद बरामद किया गया है। बरामदगी यह साबित करती है कि दोनों महिलाएं लंबे समय से चोरी कर जेवर इकट्ठा करती थीं और इन्हें बेचकर ही अपना गुजर-बसर करती थीं।

कैसे देती थीं वारदात को अंजाम

दोनों अभियुक्ताएँ मजदूरी करने का बहाना बनाकर शहर में रहती थीं, लेकिन असल में ई-रिक्शा में यात्रियों के साथ सफर करके माहिराना तरीके से चोरी करती थीं।यात्रियों के साथ बैठते ही मौके की तलाश, ध्यान भटकते ही कान, हाथ या बैग में रखी कीमती चीजें झपट लेना, भीड़भाड़ वाले इलाके में उतरकर भीड़ में गुम हो जाना, इन्हें देखकर कोई अंदाजा भी नहीं लगा सकता था कि ये पेशेवर चोर हैं।

अन्य जिलों तक फैली पड़ताल

पुलिस अब हरियाणा और राजस्थान पुलिस से समन्वय कर दोनों महिलाओं के आपराधिक इतिहास की जानकारी जुटा रही है। आशंका है कि इन्होंने अन्य राज्यों में भी कई वारदातें की होंगी।यह गिरफ्तारी न सिर्फ पुलिस की सतर्कता का उदाहरण है बल्कि यात्रियों को भी सचेत करती है कि सार्वजनिक वाहनों में सफर करते समय सावधान रहें।
गृहस्थ आश्रम : जीवन-दर्शन का स्वर्णिम मध्यस्थ
संजीव सिंह बलिया! गृहस्थ आश्रम : भारतीय जीवन-दर्शन का केंद्रबिंदु भारतीय ज्ञान परम्परा का प्रवाह हजारों वर्षों से ऐसे चलता आया है, मानो हिमालय की शाश्वत शृंखलाओं से निकली कोई दिव्य नदी हो—कभी शांत, कभी प्रचण्ड, परन्तु सदैव जीवनदायिनी। इस परम्परा में गृहस्थ आश्रम कभी न तो उपेक्षा का विषय रहा है, न ही निन्दा का। भारतीय मानस समझता रहा है कि जीवन केवल संन्यास की पथरीली कंदराओं में ही नहीं, बल्कि गृहस्थी के दीप-स्तंभों में भी वैसे ही प्रकाशित होता है जैसे किसी मन्दिर की ज्योति में ईश्वर का तेज। भारत के ऋषि-कुल को देखें तो प्रतीत होगा कि हमारा समाज वास्तव में “ऋषियों की संतान” है। लगभग प्रत्येक ऋषि—अत्रि, वशिष्ठ, कश्यप, याज्ञवल्क्य—सभी गृहस्थ थे; उनकी ऋचाएँ, ब्रह्मज्ञान और अध्यात्म की ऊँचाइयाँ गृहस्थ जीवन की गोद में ही पलकर विराटता प्राप्त कर सकीं। सोलह संस्कारों में विवाह को प्रमुख इसलिए कहा गया कि यह न केवल एक वैयक्तिक संस्कार था, बल्कि सम्पूर्ण समाज के संतुलन का आधार-स्तंभ था—मानो मनुष्य-जीवन का वह द्वार जहाँ से कर्तव्य, प्रेम, त्याग और सृजन सब मिलकर प्रवेश करते हों। सनातन वैदिक धर्म ने मनुष्य-जीवन को सौ वर्ष का पूर्ण वृत्त मानकर उसे चार आश्रमों में विभाजित किया—ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास। यह विभाजन मात्र आयु-क्रम नहीं था; यह जीवन का एक चतुर्ऋतु-चक्र था—ब्रह्मचर्य वसंत की तरह ज्ञान और उत्साह का; गृहस्थ ग्रीष्म की भाँति कर्म, तप और दायित्व का; वानप्रस्थ शरद की तरह मन्द, उज्ज्वल और अनुभवों का; और संन्यास हेमंत की तरह निर्मल, शांत और मोक्षमार्ग का। सबको इन चारों से होकर गुजरना था ताकि व्यक्ति जीवन को सम्पूर्ण रूप में जी सके और अन्ततः समाज को अपनी परिपक्व प्रतिभा अर्पित कर सके। जो पंथ जीवन के प्रारम्भिक वर्षों में ही संन्यास अनिवार्य कर बैठे—वे एक ओर सूखे हुए वृक्षों की तरह खड़े रहे, जिनकी जड़ें समाज की मिट्टी से कट गईं; और जब जड़ों का रस ही समाप्त हो जाए, तो वृक्ष कितने दिन टिक सकता है? फलतः ऐसे पंथ काल के थपेड़ों में विलीन हो गए। भारतीय इतिहास पर दृष्टि डालें तो ऐसा प्रतीत होता है मानो प्रवृत्ति और निवृत्ति किसी विशाल समुद्र में उठती-गिरती लहरों की तरह हैं—कभी प्रवृत्ति की ज्वार, तो कभी निवृत्ति का भाटा। वैदिक काल कर्म, यज्ञ और सामाजिक सक्रियता का युग था; उपनिषदकाल में निवृत्ति के बीज अंकुरित हुए—मौन, ध्यान, आत्मबोध शिखर की ओर बढ़े; बौद्ध काल में निवृत्ति ने वटवृक्ष का रूप ले लिया—विस्तार, गहराई और व्यापकता के साथ; और पुनः मुगल व आधुनिक युग में प्रवृत्ति ने अपनी जमीन वापस पा ली—कर्म, समाज, कुटुम्ब और राष्ट्र की चेतना उन्नत हुई। इस प्रकार भारत में प्रवृत्ति से निवृत्ति और निवृत्ति से प्रवृत्ति का आवागमन निरंतर चलता रहा—मानो सूर्य दिन में चमके और रात में चन्द्रमा; दोनों आवश्यक, दोनों पूरक। समाज ने मनुष्य को सामाजिक बनाया है; इसलिए समाज का ऋण चुकाए बिना संन्यास लेकर पलायन कर जाना भारतीय मनस्विता का मार्ग नहीं रहा। वन ही सत्य का एकमात्र द्वार नहीं—गृहस्थ का अन्न, गृहस्थ की अग्नि और गृहस्थ की करुणा से ही ऋषियों का वन-जीवन पोषित हुआ। गृहस्थ आश्रम बिना पानी के वह नदी होता, जिसमें न तो प्रवाह होता न जीवन। अतः संन्यास को भी वही व्यक्ति ग्रहण करता था जिसने गृहस्थ-धर्म को पूर्ण निष्ठा से निभाया हो—तभी उसका संन्यास समाज के लिए प्रकाश-दीप होता था, पलायन नहीं। भारतीय जीवन-दर्शन कभी एकांगी नहीं रहा। उसने प्रवृत्ति और निवृत्ति, गृहस्थ और संन्यास, कर्म और ध्यान—सबको एक ही सूत्र में पिरोया। इससे सम्बंधित दृष्टांत महाभारत के वन पर्व में वर्णित है, जिसमें ऋषि माकंदव्य ने युधिष्ठिर को यह कहानी सुनाई थी। इसे कपोतोपाख्यान (कबूतर की कहानी) के नाम से जाना जाता है। यह कहानी धर्म, वैराग्य, और गृहस्थ धर्म के श्रेष्ठ आदर्शों को दर्शाती है -एक समय की बात है, एक अति सुंदर और गुणवान ऋषिकुमार थे, जो बचपन से ही विरक्त (दुनिया से मोह रहित) और तपस्वी स्वभाव के थे। वह ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए वन में वास करते थे। उसी राज्य में एक राजकुमारी थी, जो अत्यंत रूपवती और धर्मात्मा थी। जब वह विवाह योग्य हुई, तो राजा ने उसका स्वयंवर आयोजित किया। देश-विदेश के अनेक राजकुमार और प्रतिष्ठित व्यक्ति उस स्वयंवर में उपस्थित हुए। राजकुमारी ने जब सभा में उपस्थित सभी लोगों को देखा, तो उसे कोई भी अपने योग्य नहीं लगा। तभी उसकी दृष्टि उस ऋषिकुमार पर पड़ी जो किसी कारणवश सभा में मौजूद थे। ऋषिकुमार का तेजस्वी रूप, शांत स्वभाव और वैराग्य से भरा व्यक्तित्व राजकुमारी को इतना भाया कि उसने लेशमात्र भी विचार किए बिना, उन ऋषिकुमार के गले में वरमाला डाल दी। यह देखकर पूरी सभा चकित रह गई, क्योंकि ऋषिकुमार तो वैरागी थे और विवाह के बंधन से दूर रहना चाहते थे। जैसे ही राजकुमारी ने ऋषिकुमार को वरमाला पहनाई, तो ऋषिकुमार को लगा कि उनका ब्रह्मचर्य भंग हो रहा है और वह सांसारिक मोह-माया के बंधन में फंस रहे हैं। राजकुमारी के चयन को स्वीकार न करते हुए, वह तत्काल उस स्वयंवर सभा से उठकर गहन वन की ओर भाग गए। राजकुमारी भी उनके पीछे भागी, लेकिन ऋषिकुमार वैराग्य की धुन में तेजी से आगे निकल गए और घने जंगल में अदृश्य हो गए। राजकुमारी ने जब ऋषिकुमार को भागते हुए देखा, तो वह अत्यंत दुखी हुई और राजा से कहा कि वह उसी ऋषिकुमार को पति के रूप में स्वीकार करेंगी। राजा अपनी बेटी के हठ के कारण चिंतित हुए और अपने मंत्री के साथ उस ऋषिकुमार को ढूंढने के लिए जंगल की ओर निकल पड़े। काफी देर तक भटकने के बाद भी वे ऋषिकुमार को नहीं ढूंढ पाए। राजा और मंत्री दोनों ही जंगल में रास्ता भटक गए और दिन ढलने लगा। वे भूख-प्यास से व्याकुल हो गए और थककर एक विशाल वृक्ष के नीचे बैठ गए। जिस पेड़ के नीचे राजा और मंत्री बैठे थे, उसी पर एक कबूतर (कपोत) अपनी पत्नी कबूतरी (कपोती) के साथ एक घोंसले में रहता था। जब कबूतरी ने नीचे राजा और मंत्री को ठंड से ठिठुरते और भूख से पीड़ित देखा, तो वह अपने पति कबूतर से बोली - "हे नाथ! ये दोनों अतिथि हैं और भूख-प्यास से व्याकुल हैं। अतिथि का सत्कार करना गृहस्थ का परम धर्म है। हमारे पास इन्हें देने के लिए कुछ नहीं है, लेकिन हमें किसी भी प्रकार से इनकी सेवा करनी चाहिए।" कबूतर, जो धर्मात्मा और परम ज्ञानी था, अपनी पत्नी के धर्मनिष्ठ विचार से अत्यंत प्रसन्न हुआ और बोला -"तुम धन्य हो प्रिये! आज तुमने मुझे गृहस्थ धर्म का सच्चा महत्व समझा दिया।" सबसे पहले, कबूतर पास से सूखी टहनियाँ और घास लाकर लाया और एक जगह पर आग जलाई, ताकि राजा और मंत्री ठंड से बच सकें। फिर कबूतर ने राजा से कहा - "हे अतिथि! मैं आपका सत्कार कैसे करूँ? मेरे पास आपको खिलाने के लिए कोई अन्न नहीं है। इसलिए, मैं स्वयं ही आपकी क्षुधा शांत करने के लिए अपने शरीर की आहुति देता हूँ। आप मुझे पकाकर अपनी भूख मिटाइए।" यह कहकर, वह धर्मात्मा कबूतर बिना किसी संकोच के धधकती आग में कूद गया और अपने प्राणों का त्याग कर दिया। राजा और मंत्री यह देखकर बहुत दुखी और शर्मिंदा हुए। अभी उनकी भूख पूरी तरह शांत नहीं हुई थी। तब कबूतरी ने अपने पति के पदचिह्नों पर चलते हुए राजा से कहा - "महाराज! मेरे पति ने अतिथि धर्म का पालन किया है। मैं भी उनके मार्ग पर चलते हुए आपकी सेवा करना चाहती हूँ। मेरी देह भी आपकी क्षुधा शांत करने में सहायक हो।" और कबूतरी भी तुरंत उस आग में कूद गई और अपने प्राणों का बलिदान कर दिया। कबूतर दम्पत्ति के इस अभूतपूर्व आत्म-त्याग और अतिथि सत्कार को देखकर राजा और मंत्री की आँखें खुल गईं। उनकी भूख तो शांत हुई या नहीं, लेकिन उनका अहंकार और मोह पूरी तरह शांत हो गया। उन्होंने कबूतर दम्पत्ति के चरणों में सिर नवाया और उस स्थान को छोड़कर वापस लौट गए। ऋषि माकंदव्य ने युधिष्ठिर से कहा - सन्यासी हो तो उस ऋषिकुमार की तरह जिसने राज्य-वैभव और राजकुमारी के प्रेम को ठुकराकर वैराग्य को सर्वोपरि माना और मोह से बचने के लिए जंगल में भाग गया। गृहस्थ हो तो कबूतर दम्पत्ति की तरह जिन्होंने अपने जीवन का मोह त्यागकर, केवल 'अतिथि सत्कार' और 'गृहस्थ धर्म' के पालन को ही अपना परम कर्तव्य समझा। यह कथा सिखाती है कि सच्चा त्याग वैराग्य में भी है और निःस्वार्थ सेवा भाव से युक्त गृहस्थ जीवन में भी है। ऋषिकुमार का त्याग विरक्ति का प्रतीक है, जबकि कबूतर दम्पत्ति का त्याग परमार्थ (दूसरों के हित) का प्रतीक है। यह वह भूमि है जहाँ कृषक हल चलाते समय भी ऋग्वेद की ऋचाएँ गाता है, और संन्यासी गहन समाधि में भी “सर्वभूतहिते रतः” का संकल्प लेता है। अतः भारत की आत्मा का सन्देश स्पष्ट है—जीवन को सम्पूर्णता में जियो, प्रत्येक आश्रम का सम्मान करो, और समाज को कुछ दिए बिना किसी एक मार्ग को श्रेष्ठ कहकर दूसरे को तुच्छ मत समझो। गृहस्थ हो या संन्यासी—दोनों भारतीय संस्कृति के दो पंख हैं; एक भी टूट जाए तो उड़ान अधूरी रह जाती है। ©® डॉ. विद्यासागर उपाध्याय
*प्रॉपर्टी डीलर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जहर से मौत,मृतक का शव बाग में मिला*
सुल्तानपुर में एक प्रॉपर्टी डीलर का शव संदिग्ध परिस्थितियों में कोतवाली देहात के उचहरा गांव स्थित एक बाग में मिला है। इस मृतक की पहचान भपटा निवासी 45 वर्षीय शिवकुमार गुप्ता के रूप में हुई है।......... शिवकुमार गुप्ता हनुमानगंज के असई चौराहे पर अपने परिवार के साथ रहते था। और वह प्रॉपर्टी के काम के साथ-साथ असई चौराहे पर किराना,बर्तन और फल की दुकान भी चलाता था, जिसकी देखरेख उनकी पत्नी करती थीं। मृतक के छोटे बेटे सनी गुप्ता ने बताया कि घटना वाली रात उनके पिता दादाजी के लिए किराना दुकान से दूध और बिस्किट लाए थे। उन्होंने अपनी बहन से रोटी बनाकर रखने को कहा था और बताया था कि वे एक घंटे में लौट आएंगे। सनी के अनुसार,उनके पिता जबरदस्ती गाड़ी की चाबी लेकर गए,जबकि वे उन्हें रात में बाहर जाने से मना कर रहे थे। सुबह पड़ोसियों के फोन से उन्हें पिता की हत्या की जानकारी मिली। तो परिजनों का रो रो कर बुरा हाल है। सनी ने बताया कि उनके पिता प्रॉपर्टी के काम के बारे में कुछ नहीं बताते थे, इसलिए उन्हें किसी पर शक नहीं है। शिवकुमार का शव घर से लगभग तीन किलोमीटर दूर भपटा और पाठक पुरवा गांवों के बीच एक बाग में मिला। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच पड़ताल शुरू कर दी है। इंस्पेक्टर अखंडदेव मिश्रा ने बताया कि तहरीर मिलने और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। शिवकुमार अपने चार भाइयों में तीसरे नंबर पर थे। उनके दो बेटे और एक बेटी है। बड़े बेटे सुमित कुमार गुप्ता की शादी 28 नवंबर 2024 को हुई थी और वह दिल्ली में नौकरी करते हैं। घटना के बाद से पत्नी सुमन गुप्ता, बेटी शिवानी गुप्ता और पिता राम सिंगार गुप्ता का रो-रोकर बुरा हाल है। बड़े भाई अशोक कुमार गुप्ता ने बताया कि मेरे भाई के साथ जो घटना हुई इस सम्बन्ध में हम बहुत ज़्यादा नहीं बता सकते। इसलिए की भाई हनुमानगंज में रहता था और हम तीन किमी दूर भपटा में रहते हैं। सुबह हम गांव में खेत में काम कर रहे थे तब हमें पता चला की भाई के साथ ये घटना घटी। घटनास्थल पर जब हम पहुंचे तो दो सौ लोगों की भीड़ लगी थी। कब निकले घर से, घटना कैसे घटी ये उनका लड़का ही बता सकता है। कोई चोट है नहीं, गाड़ी उनकी मौजूद है मौके पर। क्या किया गया कुछ पता नहीं। शिवकुमार के बड़े भाई अशोक गुप्ता एक शिक्षा मित्र हैं। शिवकुमार हनुमानगंज के एक स्वयं सहायता समूह का भी सदस्य था,जहां से उसने ऋण लिया था।