ईरान-इस्राइल युद्ध : 12 साल बाद गैस गोदामों पर 500 मीटर तक लगी लंबी कतार

*व्यावसायिक सिलिंडरों की आपूर्ति बंद, घरेलू की बुकिंग तीन गुना बढ़ी, आनलाइन बुकिंग का सर्वर फेल*

नितेश श्रीवास्तव

भदोही। ईरान-इस्राइल युद्ध के बीच कालीन नगरी में एलपीजी घरेलू गैस सिलिंडर की मांग तीन गुना बढ़ गई है। व्यावसायिक सिलिंडरों की आपूर्ति बंद होने के बाद होटल, ढाबा और मिठाई दुकानदार अब घरेलू सिलेंडर का इस्तेमाल कर रहे हैं। 12 साल बाद एक बार फिर एजेंसियों के गोदामों पर 500 मीटर लंबी कतार देखने को मिली। ऑनलाइन बुकिंग का सर्वर फेल होने के कारण उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ गई है। एजेंसी संचालकों के मोबाइल नॉट रिचएबल बता रहा है। जिले में भारत गैस, इंडियन ऑयल और एचपी की 40 एजेंसियां हैं। इससे 2.07 लाख उज्ज्वला और तीन लाख सामान्य उपभोक्ता जुड़े हैं। युद्ध के कारण विश्व में गैस, तेल की आपूर्ति प्रभावित होने का अंदेशा है। सोशल मीडिया पर अफवाह उड़ते ही आपूर्ति कम होने के पहले ज्ञानपुर नगर में स्थित एक एजेंसी पर ग्राहकों की लंबी कतार लग गई। कुछ लोगों को ही सिलिंडर मिला। कुछ लोग बिना लिए ही वापस लौट गए। कुछ इसी तरह गोपीगंज, अभोली, भदोही स्थित एजेंसियों पर दिखा। एजेंसी संचालकों ने बताया कि पहले एक दिन में 400 से 500 सिलिंडरों की मांग होती थी। बीते चार-पांच दिनों से मांग एक हजार तक पहुंच गई है। मांग में बढ़ोतरी के सापेक्ष आपूर्ति 50 फीसदी तक ही हो रही है। गोपीगंज नगर में बेबी बानो, करीम, शिवशंकर चौबे, रवि गुप्ता ने बताया कि करीब एक सप्ताह के इंतजार के बाद भी गैस सिलिंडर नहीं मिल रहा है।


सहालग, रमजान के कारण रिफिलिंग की बढ़ी मांग
इन दिनों सहालग के साथ रमजान भी चल रहा है। इस कारण भी घरेलू गैस सिलिंडर की मांग बढ़ी है। शादी के आयोजनों में व्यावसायिक सिलिंडर की आपूर्ति बंद होने से घरेलू सिलिंडर का ज्यादा प्रयोग हो रहा है। इस कारण एजेंसियों और गोदामों पर भीड़ बढ़ गई है। एलपीजी गैस डिस्ट्रीब्यूशन एसोसिएशन के अध्यक्ष अरुण मिश्रा ने बताया कि लोग पैनिक होकर बुकिंग करा रहे हैं। इससे एजेंसियो पर भीड़ बढ़ी है। पहले हर गाड़ी में 10 से 12 व्यावसायिक सिलिंडर आते थे, अब नहीं आ रहे हैं।
होटल कारोबारियों की बात
सरकार को जल्द से जल्द व्यावसायिक सिलिंडरो की आपूर्ति शुरू करानी चाहिए। ऐसा नहीं होने पर रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा। रेस्टोरेंट और होटल बंद हो सकते हैं। वैकल्पिक व्यवस्था से काम चलाया जा रहा है। दो से तीन दिन बाद संकट और बढ़ जाएगा। - संजय उमर वैश्य, रेस्टोरेंट संचालक

व्यावसायिक सिलिंडर नहीं मिल रहा है। एजेंसी संचालकों ने मोबाइल बंद कर दिए हैं। अधिक कीमत देने के बाद भी नहीं मिल रहा है। जो सिलिंडर लगा है उसके खत्म होने के बाद होटल बंद करने की नौबत आ जाएगी।
- विजय कुमार चौरसिया, होटल संचालक
जिनके यहां शादी पड़ी है उनके माथे पर बल पड़ गया है। सिलिंडर जिसके पास है वह काला बाजारी कर रहा है। एक-दो दिन में स्थिति बिगड़ने की संभावना है। - आरिफ अंसारी, मैरिज लान संचालक
स्कूलों में लकड़ी से एमडीएम बनाने पर रोक है। बुधवार को विद्यालय का सिलेंडर खत्म हो गया। एजेंसी पर नहीं मिलने के कारण घर से सिलिंडर लाकर एमडीएम बनवाया गया। आपूर्ति नहीं सुधरी तो विद्यालयों में एमडीएम बनाने में दिक्कत होगी। - सुधीर सिंह, प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय पड़ाव।

जिले में फिलहाल सिलिंडर आपूर्ति में कोई संकट नहीं है। लोग पैनिक होकर बुकिंग कर रहे हैं। पांच मार्च तक की बुकिंग वाले ग्राहकों को सिलिंडर मिल चुका है। व्यावसायिक सिलिंडर की आपूर्ति शासन से बंद कर दी गई है। कई एजेंसियों पर नजर रखी जा रही है ताकि कालाबाजारी न हो सके। - सुनील कुमार, डीएसओ।

40 एजेंसी जनपद में करती है सिलिंडर वितरण
5.10 लाख घरेलू उपभोक्ता हैं जिले में
15 हजार व्यावसायिक सिलिंडर के उपभोक्ता हैं
भारतीय जहाजों के लिए खुला होर्मुज स्ट्रेट, दो टैंकर सुरक्षित निकले, रंग लाई विदेश मंत्री जयशंकर की कूटनीति

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ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध के बीच भारत के लिए अच्छी खबर आई है। ईरान ने भारत के साथ कूटनीतिक बातचीत के बाद भारतीय झंडे वाले तेल टैंकरों को हॉर्मुज से गुजरने की अनुमति दे दी है। इसके बाद पुष्पक और परिमलनाम के भारतीय टैंकर सुरक्षित रूप से इस हॉर्मुज से गुजर गए।

भारत की बड़ी कूटनीतिक सफलता

पश्चिम एशिया में भड़के युद्ध के बीच पूरी दुनिया की ऊर्जा सप्लाई लाइन खतरे में है। मिसाइल और ड्रोन हमलों के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पश्चिमी देशों के विदेशी जहाजों के लिए लगभग 'नो-गो जोन' बन चुका है। ईरान-इजराइल-अमेरिका जंग के बीच भारत को एक बड़ी कूटनीतिक सफलता हाथ लगी है। ईरान ने भारतीय झंडे वाले तेल टैंकरों को रणनीतिक रूप से अहम 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दे दी है।

एस जयशंकर और अराघची की बातचीत से निकला हल

यह घटनाक्रम भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास आराघची के बीच हुई उच्च-स्तरीय वार्ता के बाद सामने आया है। इस मसले पर विदेश मंत्री एस जयशंकर की उनके ईरानी समकक्ष के बीच युद्ध छिड़ने के बाद कम से कम तीन बार बात हो चुकी है। जयशंकर ने मंगलवार को भी पश्चिम एशिया में जारी संकट को लेकर अब्बास अराघची से बात की।

भारत के लिए ये क्यों खास है?

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑयल इंपोर्टर है और ज्यादातर क्रूड मिडिल ईस्ट से आता है, जो होर्मुज से गुजरता है। युद्ध शुरू होने (28 फरवरी) से पहले ही कई भारतीय जहाज फंस गए थे। डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग के मुताबिक, 28 से 37 भारतीय फ्लैग वाले जहाज वहां थे, जिनमें 1000 से ज्यादा भारतीय सीफेयरर्स थे। ईरान ने अमेरिका, इजरायल और यूरोप के जहाजों पर सख्ती बरती है, लेकिन भारत जैसे गैर-पश्चिमी देशों को छूट दी है। ऐसे में इसे काफी अहम माना जा रहा है।

क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य?

होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच लगभग 55 किलोमीटर चौड़ा समुद्री मार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। यह दुनिया के सबसे व्यस्त और रणनीतिक समुद्री मार्गों में से एक है।

-सामान्य परिस्थितियों में यहां से प्रतिदिन करीब 1.3 करोड़ बैरल तेल गुजरता है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 31 प्रतिशत है।

-इस मार्ग में बाधा आने से इराक, कुवैत, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और ईरान जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों के निर्यात पर सीधा असर पड़ता है।

-दुनिया के तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) का भी बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है।

-इसलिए यहां तनाव बढ़ने पर वैश्विक बाजार, सप्लाई चेन और ऊर्जा कीमतों पर तुरंत असर देखने को मिलता है।

রাজ্যের নতুন রাজ্যপাল আর এন রবি
বৃহস্পতিবার পশ্চিমবঙ্গের নতুন রাজ্যপাল হিসেবে শপথ নিলেন আর এন রবি।লোকভবনে এদিনের শপথগ্রহণ অনুষ্ঠানে প্রথা মেনেই উপস্থিত ছিলেন মুখ্যমন্ত্রী মমতা বন্দ্যোপাধ্যায়। সূত্রের খবর, শপথগ্রহণ অনুষ্ঠান শেষে নবনিযুক্ত রাজ্যপালের সঙ্গে প্রথম সাক্ষাতেই তিনি বলেন, 'বাংলাকে যারা ভালবাসে, বাংলাও তাঁদের ভালবাসে'।
विज्ञान शिक्षक के रूप में चयनित होने पर धर्मेंद्र यादव का ग्रामवासियों ने किया सम्मान
जौनपुर। बदलापुर तहसील अंतर्गत स्थित शाहपुर सानी गांव निवासी धर्मेंद्र यादव पुत्र बीपत यादव का भदोही जिले के जूनियर हाई स्कूल में विज्ञान शिक्षक के रूप में चयनित होने पर आज ग्रामवासियों द्वारा उनका भव्य सम्मान किया गया। अत्यंत विनम्र, शालीन और सहयोगी प्रवृत्ति के धर्मेंद्र यादव का विज्ञान शिक्षक के रूप में चयन होने पर लोगों ने खुशी जाहिर की है। आज सम्मान समारोह में ग्राम प्रधान चंद्रशेखर यादव, वरिष्ठ पत्रकार शिवपूजन पांडे, पूर्व प्रधानाचार्य रामबाबू यादव, लालता यादव, हृदय नारायण सिंह, ब्रिजलाल यादव, जगपत यादव, शिवनारायण यादव, अनिल कुमार यादव, शैलेंद्र यादव, मुकेश यादव, नंदलाल यादव, आलोक यादव, पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य कमल कुमार यादव, विकास यादव, विवेक यादव समेत अनेक लोग उपस्थित रहे। चंद्रशेखर यादव ने कहा कि यह पूरे गांव ही नहीं अपितु पूरे क्षेत्र के लिए गौरव की बात है। उन्होंने धर्मेंद्र यादव के साथ-साथ उनके पिता बीपत यादव को भी माला पहनाकर बधाई दी।
लोकसभा स्पीकर के बाद अब सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी, एकजुट हुआ विपक्ष

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लोक सभा अध्‍यक्ष के बाद विपक्षी दल देश के मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एकजुट होते दिख रहे हैं। संभावना है कि तृणमूल कांग्रेस की अगुवाई में एकजुट विपक्ष गुरुवार को सीईसी के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस देगा। मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सांसदों ने हस्‍ताक्षर भी कर दिया है। उनकी तैयारी संसद के दोनों हाउस के सचिवालयों में नो‍टिस जमा करने की है।

हस्ताक्षर की प्रक्रिया पूरी

भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्ताव लाने वाले नोटिस को गुरुवार यानी आज संसद से दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में सौंपा जा सकता है। प्रस्ताव लाने के लिए नोटिस पर जरूरी हस्ताक्षर की प्रक्रिया बुधवार को पूरी कर ली गई। बुधवार रात तक लोकसभा के लिए करीब 120 और राज्यसभा के लिए लगभग 60 सांसदों के साइन हो चुके थे। नियम के अनुसार लोकसभा में मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के नोटिस के लिए कम से कम 100 सांसदों के साइन जरूरी हैं।

सीईसी के खिलाफ टीएमसी को मिला कांग्रेस-सपा का साथ

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की इस मुहिम पर बुधवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के चैंबर में हुई बैठक में सहमति बनी। बैठक में राहुल गांधी और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने तृणमूल के प्रस्ताव का समर्थन किया। इसके बाद नोटिस देने के लिए जरूरी सांसदों के हस्ताक्षर कराए गए। इंडिया गठबंधन की सभी पार्टियों के साथ-साथ गठबंधन से बाहर आम आदमी पार्टी के सांसदों ने भी हस्ताक्षर किये हैं।

क्या है मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया?

कानून के मुताबिक, सीईसी को हटाने के लिए वही प्रक्रिया अपनाई जाती है, जो सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने के लिए है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त की अनुशंसा के बिना अन्य निर्वाचन आयुक्तों को पद से नहीं हटाया जा सकता। न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के अनुसार, किसी भी सदन में, जज को पद से हटाने का प्रस्ताव स्वीकृत हो जाने के बाद, (लोकसभा) अध्यक्ष या (राज्यसभा) सभापति, जैसा भी मामला हो, तीन सदस्यीय समिति का गठन करेंगे। जो उन आधारों की जांच करेगी, जिन पर पद से उन्हें हटाने की मांग की गई है। समिति में मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) या शीर्ष न्यायालय के जज, 25 उच्च न्यायालयों में से किसी एक के मुख्य न्यायाधीश और एक प्रतिष्ठित न्यायविद होते हैं। नियम के अनुसार, समिति द्वारा रिपोर्ट प्रस्तुत करने के बाद, इसे सदन में पेश किया जाएगा और पद से हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा शुरू हो जाएगी। हालांकि, सीईसी को अपना बचाव करने का अधिकार होता है।

রাশিফল

জ্যোতিষ শাস্ত্রের একটি গুরুত্বপূর্ণ অঙ্গ হলো রাশিফল গণনা। রাশিফল বৈদিক জ্যোতিষ শাস্ত্রের এমন একটি ধারণা যার মাধ্যমে বিভিন্ন সময়কাল নিয়ে ভবিষ্যৎবাণী করা হয়। বৈদিক জ্যোতিষে ১২টি রাশি-মেষ, বৃষভ, মিথুন, কর্কট, সিংহ, কন্যা, তুলা, বৃশ্চিক, ধনু, মকর, কুম্ভ ও মীন- এর ভবিষ্যদ্বাণী করা হয়। একইরকম ভাবে ২৩টি নক্ষত্রেরও ভবিষ্যদ্বাণী করা হয়ে থাকে। দেখে নেওয়া যাক আপনার গ্রহ-নক্ষত্ররা কি বলছে

মেষ রাশিফল (Thursday, March 12, 2026)

আশাবাদী হোন এবং উজ্জ্বল দিকটি দেখুন। আপনার প্রত্যয়ী প্রত্যাশাই আপনার আশা এবং আকাঙ্খা বাস্তবায়নের দ্বার উন্মুক্ত করবে। অর্থ সম্পর্কিত যে কোনও সমস্যা আজই সমাধান হতে পারে এবং আপনি আর্থিক সুবিধা অর্জন করতে পারেন। কোন ধর্মীয় স্থানে বা আত্মীয়ের কাছে যাওয়া আপনার জন্য সম্ভাব্য বলে মনে হচ্ছে। আপনি আপনার রোমান্টিক চিন্তা এবং অতীতের স্বপ্নে নিমগ্ন থাকবেন। বিদেশী বাণিজ্যের সাথে যুক্ত যারা আজ প্রত্যাশিত ফলাফল পাবে বলে আশা করা হচ্ছে। এটির সাহায্যে এই রাশিচক্রের কর্মরত নেটিভরা আজ কর্মক্ষেত্রে তাদের মেধার পুরো ব্যবহার করতে পারে। কোনো নতুন কাজ শুরু করার আগে আপনার সেই ব্যাপারে কোনো অভিজ্ঞ লোকের সাথে কথা বলা দরকার।যদি আজকে আপনার কাছে সময় থাকে তাহলে ওই কাজের অভিজ্ঞ ব্যাক্তির সাথে দেখা করে নিন যেই কাজ আপনি শুরু করতে যাচ্ছেন। আজ, আপনি এবং আপনার স্ত্রী সত্যিই গভীর ভাবপূর্ণ রোমান্টিক কথা বলবেন।

প্রতিকার :- বিছানার চার কোনায় তামার পেরেক লাগানো স্বাস্থ্যের জন্য খুবই মঙ্গলজনক।

বৃষভ রাশিফল (Thursday, March 12, 2026)

কোন আধ্যাত্মিক ব্যক্তি আশীর্বাদ করবেন এবং মানসিক শান্তি আনবেন। এই চিহ্নের কিছু নেটিভ তাদের বাচ্চাদের মাধ্যমে আজ আর্থিক সুবিধা অর্জন করবে বলে আশা করা হচ্ছে। আজ, আপনি আপনার সন্তানের জন্য গর্বিত হবেন। আপনার আত্মীয় এবং বন্ধুদের আপনার আর্থিক দিক সামলাতে দেবেন না তাহলে আপনার খরচ বাজেট ছাড়িয়ে যাবে। আপনার প্রেমিকার সঙ্গে অশ্লীল আচরণ করবেন না। যদি আপনি ভাবেন যে অন্যদের সহায়তা ছাড়াই আপনি জরুরী কাজ সামলাতে পারবেন তাহলে আপনি অত্যন্ত ভুল করছেন। আপনি আপনার সব জরুরি কাজ শেষ করে নিজের জন্য সময় তো বার করে নিবেন কিন্তু এই সময়ের ব্যবহার আপনি আপনার হিসেবে করতে পারবেন না। আপনি আপনার স্ত্রীর জন্য আজ অসুবিধা বোধ করতে পারেন।

প্রতিকার :- পরিবারের সদস্যদের মধ্যে আন্তরিকতা বৃদ্ধির জন্য গরুকে সবুজ জাবর খেতে দিন।

মিথুন রাশিফল (Thursday, March 12, 2026)

অসুস্থতা থেকে সেরে ওঠার সুযোগ বেশী যা আপনাকে প্রতিযোগিতামূলক খেলাধুলাতে অংশ নিতে সাহায্য করবে। যদিও আপনার আর্থিক অবস্থান উন্নত হয়েছে, তবুও টাকা বেরিয়ে যাওয়ায় আপনার প্রকল্পগুলির কার্যনির্বাহে বাধার সৃষ্টি করবে। যদি আপনি সামাজিক অনুষ্ঠান এবং ইভেন্টে অংশগ্রহণ করেন তাহলে আপনি আপনার বন্ধু এবং পরিচিতদের সংখ্যা বৃদ্ধি করতে পারবেন। প্রেমের জীবন আশা আনবে। আজ কর্মক্ষেত্রে আপনার ফুর্তি বাড়ির কোনো সমস্যার জন্য কম থাকবে। এই পরিমান ব্যাবসায়ীদের এইদিনে প্রবৃত্তি গুলিতে নজর রাখা প্রয়োজন ,সে আপনার ক্ষতি করতে পারে। দিনের শুরুটা যতই ক্লান্তিকর হোকনা কেন বেলা বাড়ার সাথে সাথে আপনি ভালো ফল পেতে থাকবেন।দিনের শেষে আপনি আপনার জন্য সময় পেয়ে যাবেন এবং আপনি কোনো কাছের মানুষের সাথে দেখা করে এই সময়ের সঠিক ব্যবহার করবেন। আপনি আপনার উচ্ছাসপূর্ণ বিবাহিত জীবনে একটি সুন্দর পরিবর্তন অনুভব করবেন।

প্রতিকার :- কর্ম জীবনে সাফল্য লাভের জন্য গৃহদেবতার রূপোয় তৈরি মূর্তি কে আরাধনা করুন।

কর্কট রাশিফল (Thursday, March 12, 2026)

নিজের খাদ্য(তালিকা) নিয়ন্ত্রণের আওতায় রাখুন এবং শারীরিকভাবে সুস্থ থাকার জন্য ব্যায়াম করুন। খুব একটা লাভদায়ক দিন নয়- কাজেই আপনার টাকাকড়ির অবস্থা দেখে নিয়ে আপনার খরচ সীমিত করুন। আপনি আপনার ঘরের পরিবেশে কোন পরিবর্তন করার আগে সবার সম্মতি পেয়েছেন কিনা সে বিষয়ে নিশ্চিত হোন। আজ, আপনার প্রেমিক আপনার কোনও একটি অভ্যাস সম্পর্কে খারাপ লাগতে পারে এবং আপনাকে বিরক্ত করতে পারে। আপনার কার্য দক্ষতা বাড়াতে নতুন প্রযুক্তি অবলম্বন করুন- আপনার শৈলী এবং কাজকর্ম করার অনন্য উপায়গুলি এমন মানুষজনকে আগ্রহী করবে, যারা আপনাকে কাছ থেকে দেখছেন। কারো কারোর জন্য ভ্রমণ ক্লান্তিকর এবং চাপপূর্ণ প্রমাণিত হবে। আজ, আপনার অর্ধাঙ্গীনী আপনার জীবনের সবচেয়ে গুরুত্বপূর্ণ বিষয়ে আপনাকে সহায়তা করবেন।

প্রতিকার :- হনুমানজির নিয়মিত পুজা করলে আর্থিক অবস্থা ভালো থাকবে।

সিংহ রাশিফল (Thursday, March 12, 2026)

আপনি আপনার জীবনে দীর্ঘ সময় ধরে সম্মুখীন হওয়া উত্তেজনা এবং চাপ থেকে পরিত্রাণ পেতে পারেন। একে স্থায়ীভাবে একটি নির্দিষ্ট দিশায় রাখতে আপনার জীবন শৈলী পরিবর্তন করার সঠিক সময়। দিনের শুরুটা ভাল হতে পারে তবে সন্ধ্যায় কোনও কারণে আপনি আপনার অর্থ ব্যয় করতে পারেন যা আপনাকে বিরক্ত করবে। আপনার ঘরে ঐক্য আনতে ঘনিষ্ঠ সহযোগিতার মাধ্যমে কাজ করুন। আপনাদের সম্পর্কের সমস্ত অভিযোগ এবং বিদ্বেষ এই অপরূপ দিনে বিলুপ্ত হয়ে যাবে। স্বল্পমেয়াদী কর্মসূচীতে নিজের নাম নথিভুক্ত করুন যা আপনাকে সাম্প্রতিকতম প্রযুক্তি এবং দক্ষতা শিখতে সাহায্য করবে। বাণিজ্যিক উদ্দেশ্যে গৃহীত ভ্রমণ লম্বা দৌড়ে লাভদায়ক প্রমাণিত হবে। আপনার আজ আপনার স্ত্রীর অবিশাস্য উষ্ণতার সঙ্গে নিজেকে রাজার মত মনে হবে।

প্রতিকার :- পরিষ্কার পরিছন্ন থাকলে এবং রোজ স্নান করলে আপনার আর্থিক উন্নতির পথ সুগম হবে।

কন্যা রাশিফল (Thursday, March 12, 2026)

এমন একটি দিন যেখানে আপনি আরাম করতে সমর্থ হবেন। আপনার পেশীগুলিকে আরাম দিতে তেল দিয়ে আপনার শরীর মালিশ করুন। যে কোনও জায়গায় বিনিয়োগ করা লোকেরা আজ আর্থিক ক্ষতির সম্মুখীন হতে পারেন। পরিবারের সদস্যদের সাথে কিছু হালকা মূহুর্ত কাটান। প্রেমিক প্রেমিকারা পরিবারের অনুভূতির প্রতি অত্যধিক সহানুভূতিশীল হবেন। কর্মক্ষেত্রে আপনি একটি ভাল পরিবর্তনের সম্মুখীন হতে পারেন। যদি আপনি বিবাহিত হন আর আপনার বাচ্চাও আছে তাহলে আজ তারা আপনাকে অভিযোগ করতে পারে কারণ আপনি তাদের যথেষ্ট সময় দিতে পারেন না। আপনার পিতামাতা আপনার স্ত্রীকে আশীর্বাদ করতে পারে যা আজ সত্যিই বিস্ময়কর কিছু হবে, এবং যা শেষ পর্যন্ত আপনার বিবাহিত জীবনকে উন্নত করবে।

প্রতিকার :- ওম শ্রাম শ্রীম শ্রম সাঃ কেতাবে নমঃ – এই মন্ত্রটি রোজ ১১ বার জপ করলে আর্থিক উন্নতি হবার বিপুল সম্ভাবনা রয়েছে।

তুলা রাশিফল (Thursday, March 12, 2026)

আপনার মনকে ভালোবাসা, আশা, বিশ্বাস, সহানুভূতি, আশাবাদ এবং বিশ্বস্ততার মত ইতিবাচক অনুভূতিগুলি গ্রহণে উৎসাহিত করুন। একবার এই অনুভূতিগুলি সম্পূর্ণরূপে নিয়ন্ত্রণ এলে-মনও স্বয়ংক্রিয়ভাবে প্রতি পরিস্থিতিতে ইতিবাচক সাড়া দেবে। আপনার আর্থিক অবস্থা আজকে অনুকূল বলে মনে হচ্ছে না, এজন্যই আপনার অর্থ সঞ্চয় করা কঠিন হবে। যখন নতুন লগ্নির ব্যাপার আসে তখন স্বাধীন হোন এবং আপনার নিজস্ব সিদ্ধান্ত নিন। আপনার ভালবাসার সঙ্গী সত্যিই কিছু সুন্দর করে আজ আপনাকে অবাক করে দেবে। আপনার সঙ্গীরা সহায়ক এবং সাহায্যকারী হবে। প্রেমিক কে সময় দেওয়ার চেষ্টা করবেন কিন্তু কোনো দরকারি কাজ পড়ায় সময় দিতে অক্ষম হবেন। শারীরিক অন্তরঙ্গতা আজ আপনার স্ত্রীর সঙ্গে তার শ্রেষ্ঠ সময়ে পৌঁছবে।

প্রতিকার :- দুধে হলুদ গুলি খেলে আপনার আর্থিক উন্নতির সম্ভাবনা দেখা দেবে।

বৃশ্চিক রাশিফল (Thursday, March 12, 2026)

যা আপনাকে নিজের সম্বন্ধে ভালো বোধ করায় এমন কিছু করার পক্ষে এটি চমৎকার দিন। বিপরীত লিঙ্গের কোনও নেটিভের সহায়তায় আজ আপনি ব্যবসা বা চাকরিতে আর্থিক সুবিধা পেতে পারেন। ঘরের তরফে ঝামেলা পাকিয়ে উঠবে বলে মনে হচ্ছে কাজেই আপনি কি বলছেন সে ব্যাপারে যত্নশীল হন। নিজের রোম্যান্টিকতা সবার সামনে দেখাবেন না। পেশায় আপনার হিসাবী পদক্ষেপ পুরস্কৃত হবে। এরফলে সময়ের মধ্যে প্রকল্প সম্পূর্ণ করতে সক্ষম হবেন। এটি নতুন প্রকল্প গ্রহণ করারও সঠিক সময়। ঘরের বাইরে বেরিয়ে আজকে আপনি খোলা বাতাসে হাটাহাটি করতে পচ্ছন্দ করবেন।আজকে আপনার মন শান্ত থাকবে যেটার সুবিধা আপনি পুরো দিন পাবেন। দিনে একটি উত্তপ্ত তর্কের পরে, আপনি আপনার স্ত্রীর সঙ্গে একটি চমৎকার সন্ধ্যা কাটাবেন।

প্রতিকার :- জাফরানের তিলক লাগান পারিবারিক জীবন ভালো থাকবে।

ধনু রাশিফল (Thursday, March 12, 2026)

যার অস্তিত্ব আছে সেইদিকে আপনার চিন্তা এবং উদ্যম চালনা করুন। শুধু চিন্তা করে গেলে কিছু লাভ নেই। আপনার সমস্যা হল আপনার চেষ্টা করেন না কেবল সে সম্পর্কে ধারণা পোষণ করেন। আপনি আজ অজানা উত্স থেকে অর্থ অর্জন করতে পারেন যা আপনার অনেক আর্থিক সমস্যার সমাধান করবে। পরিবারের সদস্যরা অথবা স্ত্রী কিছু উত্তেজনার সৃষ্টি করবে। আপনার চোখের তারা খুব উজ্জ্বল যা আপনার প্রেমিকার একটি অন্ধকার রাত প্রজ্বালিত করতে পারে। আপনার আজ কর্মক্ষেত্রে একজন অসাধারণ ব্যক্তির সঙ্গে দেখা হতে পারে। আজকে ফাঁকা সময়টা কোনো অযথা কাজের জন্য নষ্ট হতে পারে দিনটি আপনার নিয়মিত বৈবাহিক জীবনে স্বতন্ত্র হতে পারে, আজ সত্যিই আপনি অসাধারণ কিছু অভিজ্ঞতা লাভ করবেন।

প্রতিকার :- কুকুর কে রুটি এবং পাউরুটি খাওয়ালে তা আপনার স্বাস্থ্যের জন্য শুভ হবে।

মকর রাশিফল (Thursday, March 12, 2026)

সামঞ্জস্যপূর্ণ ব্যাক্তিত্ব তৈরী করুন যাতে ঘৃণা ভাবকে দমন করা যায় কারণ ঘৃণা হলো ভালোবাসার চেয়েও শক্তিশালী আর তাতে শরীরের অসীম ক্ষতি হয়। মনে রাখবেন ভালোর চেয়ে মন্দের প্রভাব বেশী। দীর্ঘ স্থায়ী সম্ভাবনাসহ বিনিয়োগ করা প্রয়োজন। আপনার বাচ্চার কোন পুরস্কার গ্রহণের অনুষ্ঠানে আমন্ত্রণ পেয়ে আপনি খুশি হবেন। সে আপনার প্রত্যাশামাফিক ফল করে আপনার স্বপ্নকে বাস্তবায়িত করেছে। আপনার প্রেমিকার আবেগের চাহিদার সামনেও মাথা নোয়াবেন না। স্থগিত প্রকল্প এবং পরিকল্পনা চূড়ান্ত রূপ নিতে চলেছে। জীবনের জটিলতা বোঝার জন্য আজকে আপনি আপনার বাড়ির কোনো বড়ো সদস্যের সাথে সময় কাটাতে পারেন। আজ আপনি আপনার স্ত্রীর একটি মিথ্যা কথায় হতাশ হতে পারেন, যদিও এটি একটি সামান্য ঘটনা হবে।

প্রতিকার :- সাদা হাঁস জোড়া উপহার স্বরূপ দিলে প্রেম জীবন সুন্দর হবে।

কুম্ভ রাশিফল (Thursday, March 12, 2026)

অফিস থেকে তাড়াতাড়ি বেরোতে চেষ্টা করুন এবং এমন কিছু করুন যা আপনি উপভোগ করেন। আপনার সন্তানদের কারণে আজ আপনি অর্থনৈতিক সুবিধা অর্জন করতে পারেন। এটি আপনাকে খুব আনন্দিত করবে। পরিবারের সাথে সামাজিক ক্রিয়াকলাপ অত্যন্ত আনন্দদায়ক হবে। আপনার কাজ হবে আরাম করা- কারণ আপনি আপনার প্রিয়জনের মাধ্যমে সুখ- সাচ্ছন্দ্য এবং পরমানন্দ খুঁজে পাবেন। বিশিষ্ট ব্যক্তিদের সাথে আলাপচারিতা আপনাকে ভালো ধারণা এবং পরিকল্পনা এনে দেবে। আপনার বাড়ির লোক আজকে আপনার সাথে কোনো অসুবিধার কথা ভাগ করতে পারেন কিন্তু আপনি আপনার মত্ত তেই ব্যাস্ত থাকবেন এবং ফাঁকা সময়ে এমন কিছু করতে পারেন যেটা আপনি করতে পছন্দ করেন। আজ আপনি আপনার স্ত্রীর সঙ্গে অনেক টাকা ব্যয় করবেন বলে মনে হচ্ছে কিন্তু একটি ফাটাফাটি সময় কাটাবেন। থাকবে মনে হচ্ছে

প্রতিকার :- নিয়মিত ১০৮দিন ধরে পা ছুঁয়ে শ্রদ্ধার সাথে বয়স্ক মহিলাকে প্রণাম করুন, আপনার পারিবারিক জীবন সুখময় হবে।

মীন রাশিফল (Thursday, March 12, 2026)

আজকের বিনোদনের মধ্যে খেলাধুলো সংক্রান্ত ক্রিয়াকলাপ এবং বাইরের অনুষ্ঠান অন্তর্ভুক্ত থাকা উচিত। দীর্ঘসময়ের স্থগিত বকেয়া এবং পাওনাগুলি শেষমেশ পুনরুদ্ধার করা যাবে। বাচ্চারা আপনাকে বাড়ির কাজ সম্পূর্ণ করতে সাহায্য করে। প্রেম জীবন ভাল দিকে মোড় নিতে যাচ্ছে কারণ আপনি একটি ভাল সম্পর্কের বিকাশ ঘটাচ্ছেন আজকের দিনে আপনার অর্জিত অতিরিক্ত জ্ঞান সমকক্ষদের সাথে বোঝাপড়া করার সময় আপনাকে এক তীব্রতা প্রদান করবে। আজকে আপনি কোনো নতুন বই কিনে কোনো ঘরে নিজেকে পুরো দিন বন্ধ করে রাখতে পারেন। আপনার স্ত্রী অসাধারণ নন। আপনি আপনার জীবনের ভালবাসার মানুষটির থেকে একটি চমৎকার বিস্ময় পেতে পারেন।

প্রতিকার :- হনুমান মন্দিরে জেসমিন তেল, সিলভার এ মোরা চোলা ও সিঁদুর দান করলে তা আপনার স্বাস্থ্যের ওপর ভালো প্রভাব দেখাবে।

(Courtesy-AstroSage)
फतेहपुर में बंद कमरे में मां-बेटे और देवर की रहस्यमयी मौत, सुसाइड नोट मिलने से कर्ज का एंगल आया सामने
फतेहपुर। फतेहपुर जिले के Lucknow Bypass Road स्थित एक मकान में मां-बेटे और देवर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत से इलाके में सनसनी फैल गई। घटना Sadar Kotwali क्षेत्र की है, जहां सुशील श्रीवास्तव के मकान में रहने वाले परिवार के तीन सदस्यों के शव बंद कमरे में मिले। पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है।जानकारी के मुताबिक कमरे में मां और बेटे के शव खून से लथपथ हालत में मिले, जबकि कुछ दूरी पर महिला का देवर गंभीर रूप से घायल अवस्था में पड़ा था। उसे जिला अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रास्ते में ही उसकी भी मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही इलाके में बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जुट गई।

व्यापार में घाटे के कारण उस पर करीब 50 लाख का कर्ज हो गया था

बताया जा रहा है कि परिवार मूल रूप से मुराइनटोला का रहने वाला था और कुछ साल पहले ही लखनऊ बाईपास क्षेत्र में मकान बनाकर रहने लगा था। परिवार का इकलौता बेटा अमर श्रीवास्तव सरल स्वभाव का था और कई अखबारों की एजेंसी का काम कर चुका था। हालांकि व्यापार में घाटे के कारण उस पर करीब 50 लाख रुपये का कर्ज हो गया था। कर्ज के दबाव में उसका घर भी बिक गया था और लंबे समय तक परिवार कर्जदारों से बचने के लिए छिपकर रह रहा था।

पुलिस को घटनास्थल से एक सुसाइड नोट भी मिला

परिजनों के अनुसार अमर हाल के दिनों में लोगों से रुपये उधार मांग रहा था। उसने घटना से एक दिन पहले अपने एक दोस्त से 10 हजार रुपये उधार लिए थे और होली के आसपास अपने बहनोई से भी 10 हजार रुपये लिए थे। अमर के बहनोई ने तीनों की मौत को आत्महत्या मानने से इनकार करते हुए हत्या की आशंका जताई है।पुलिस को घटनास्थल से एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें तीन लोगों के नाम का जिक्र करते हुए आर्थिक तंगी और कर्ज से परेशान होने की बात लिखी गई है। सुसाइड नोट के आधार पर पुलिस उन लोगों की तलाश में जुट गई है। एसओजी और इंटेलिजेंस विंग की टीम भी मामले की जांच कर रही है।मौके से चाय के झूठे गिलास और ब्लेड का पैकेट भी बरामद हुआ है।

तीनों ने पहले चाय में सल्फास मिलाकर पीया

आशंका जताई जा रही है कि तीनों ने पहले चाय में सल्फास मिलाकर पीया और बाद में तड़पने पर ब्लेड से खुद पर वार किया। हालांकि यह भी संभावना जताई जा रही है कि तीनों के बीच आपसी विवाद के बाद हमला हुआ हो, जिसमें देवर ने मां-बेटे की हत्या कर खुद की जान ले ली हो।फिलहाल पुलिस दो पहलुओं—हत्या और सामूहिक आत्महत्या—दोनों को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि मौत जहर से हुई या ब्लेड से हुए हमले से। सुसाइड नोट और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई करेगी।
रिश्वत आरोप में निलंबित IAS अभिषेक प्रकाश की होगी बहाली, 14 मार्च के बाद से प्रभावी मानी जाएगी
लखनऊ। प्रदेश सरकार ने निलंबित आईएएस अधिकारी Abhishek Prakash को बहाल करने का निर्णय लिया है। शासन के सूत्रों के मुताबिक उनकी बहाली 14 मार्च के बाद से प्रभावी मानी जाएगी। हालांकि नियुक्ति विभाग की ओर से इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

2006 बैच के आईएएस अधिकारी अभिषेक प्रकाश इससे पहले निवेश प्रोत्साहन एजेंसी Invest UP के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के पद पर तैनात थे। उन पर एक सोलर कंपनी से प्रोजेक्ट मंजूरी के बदले रिश्वत मांगने के गंभीर आरोप लगे थे। इन आरोपों के बाद प्रदेश सरकार ने 20 मार्च 2025 को उन्हें निलंबित कर दिया था।

इस मामले में फरवरी 2026 में Lucknow Bench of Allahabad High Court ने सुनवाई करते हुए साक्ष्य के अभाव में उनके खिलाफ दाखिल चार्जशीट को निरस्त कर दिया था। अदालत के इस फैसले के बाद उनकी बहाली का रास्ता साफ हो गया।

शासन के सूत्रों के अनुसार निलंबन की अवधि एक वर्ष पूरी होने से पहले इस मामले में रिपोर्ट केंद्र सरकार के कार्मिक मंत्रालय को भेजी जानी है। इसी प्रक्रिया के तहत उनकी बहाली को 14 मार्च के बाद प्रभावी माना जाएगा।

हालांकि, बहाली के बाद उन्हें किस विभाग या जिम्मेदारी पर तैनात किया जाएगा, इस पर अंतिम निर्णय अभी लिया जाना बाकी है। शासन स्तर पर इस संबंध में विचार-विमर्श जारी है।
गो रक्षा और सनातन के लिए नई रणनीति, शंकराचार्य ने किया चतुरंगिणी सेना
लखनऊ। गो रक्षा और सनातन धर्म की रक्षा के मुद्दे पर बुधवार को राजधानी लखनऊ के कांशीराम स्मृति सांस्कृतिक स्थल पर आयोजित कार्यक्रम में बड़ा ऐलान किया गया। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती  ने ‘गो प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध’ का शंखनाद करते हुए कहा कि धर्म की रक्षा के लिए शंकराचार्य चतुरंगिणी सेना का गठन किया जाएगा, जो संत समाज में फैल रही अशास्त्रीयता और अधर्म को दूर करने का कार्य करेगी।देशभर से आए संतों, धर्माचार्यों और गो रक्षकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि धार्मिक समाज में धर्मनिरपेक्ष शपथ नहीं, बल्कि धर्म की शपथ ही चलेगी। उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि यदि परिस्थितियां बनीं तो धर्म की रक्षा के लिए शस्त्र उठाने से भी पीछे नहीं हटेंगे।

संत समाज में बढ़ रही विकृतियों पर भी चिंता जताई

कार्यक्रम में उन्होंने संत समाज में बढ़ रही विकृतियों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अखाड़ा परिषद के कुछ महंतों और साधुओं ने यह कहा कि वे मुख्यमंत्री के साथ हैं, शंकराचार्य के साथ नहीं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि यदि अखाड़े साथ नहीं आते हैं तो अब अलग संगठन और सेना बनाकर धर्म की रक्षा की जाएगी।शंकराचार्य ने प्रयागराज में माघ मेले के दौरान हुई एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि वेद पढ़ने वाले बटुकों के साथ अन्याय हुआ, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि गोहत्या केवल कसाई ही नहीं करता, बल्कि जो इसे अनुमति देता है या मौन रहता है, वह भी उसी पाप का भागी है।

यह यात्रा 3 मई से 23 जुलाई तक चलेगी

इस दौरान उन्होंने “समग्र गविष्ठि गोयुद्ध यात्रा” निकालने की भी घोषणा की। यह यात्रा 3 मई से 23 जुलाई तक चलेगी। यात्रा की शुरुआत गोरखपुर से होगी और वहीं इसका समापन भी होगा। इसके बाद 24 जुलाई को लखनऊ के कांशीराम स्मृति स्थल पर एक बड़ी सभा आयोजित की जाएगी।शंकराचार्य ने कहा कि सनातन धर्म में शंकराचार्य सर्वोच्च धार्मिक प्राधिकरण हैं और गो माता की रक्षा के साथ-साथ सनातन धर्म की रक्षा का संकल्प भी लेना होगा।
मानवता का युगांतकारी निर्णय: भारत में पहली बार इच्छामृत्यु और देह की विधिक मुक्ति
संजीव सिंह बलिया! मानवीय अस्तित्व का संपूर्ण विस्तार प्रथम श्वास के ग्रहण और अंतिम श्वास के त्याग की लघु देहरी के मध्य ही सिमटा हुआ है, जहाँ जीवन अपनी समस्त कोलाहलपूर्ण जीवंतता के साथ स्पंदित होता है। मेरे दार्शनिक ग्रंथों 'मृत्यु मीमांसा: जन्म के पूर्व एवं मृत्यु के बाद' तथा 'अथातो मृत्यु जिज्ञासा' का केंद्रीय विमर्श भी इसी सत्य को प्रतिपादित करता है कि मृत्यु केवल एक अंत नहीं, बल्कि चेतना का एक अनिवार्य पड़ाव है। प्रायः संसार मृत्यु को शोक, संताप और विछोह के विषादपूर्ण चश्मे से ही देखता आया है, किंतु दार्शनिक परिपक्वता उस बिंदु पर जागृत होती है जहाँ मृत्यु एक अपरिहार्य और श्रेयस्कर अनुष्ठान बन जाती है। जब देह चेतना का साथ छोड़ दे और मात्र यंत्रवत यंत्रणा का पर्याय बन जाए, तब स्वयं व्यक्ति, उसका परिवेश और संपूर्ण समाज भी उस मौन मुक्ति की करुणापूर्ण याचना करने लगता है, जिसे नियति कभी-कभी मशीनों के शोर में उलझाकर विस्मृत कर देती है। ऐसे में यह बोध अत्यंत आवश्यक हो जाता है कि जीवन की सार्थकता मात्र उसकी अवधि में नहीं, बल्कि उसकी गरिमा में निहित है, और कभी-कभी शांतिपूर्ण महाप्रयाण ही उस जीवन का सबसे पावन और आवश्यक उपहार सिद्ध होता है। मानवीय अस्तित्व की गरिमा और विधिक सीमाओं के मध्य संतुलन साधने की दिशा में सर्वोच्च न्यायालय का हालिया निर्णय एक युगांतकारी हस्तक्षेप है। न्याय के मंदिर में निसृत हुआ यह निर्णय केवल एक विधिक औपचारिकता मात्र नहीं है, बल्कि यह मानवता के क्रंदन और करुणा के गहन अंतर्संबंधों को रेखांकित करने वाला एक मार्मिक दस्तावेज है। गाजियाबाद के 32 वर्षीय युवक हरीश राणा के संदर्भ में सर्वोच्च न्यायालय का यह आदेश, जो उन्हें निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति प्रदान करता है, इक्कीसवीं सदी के भारत में जीवन, मृत्यु और मानवीय अस्मिता के द्वंद्व को नए और अत्यंत संवेदनशील आयाम दे रहा है। लगभग 13 वर्षों की दीर्घ और जड़वत प्रतीक्षा के पश्चात, जब एक पुत्र की देह केवल चिकित्सा विज्ञान की हठधर्मिता और मशीनों के शोर के बीच अटकी हो, तब न्यायालय का यह हस्तक्षेप उस 'अश्रुपूरित सन्नाटे' को स्वर देने जैसा है, जिसे केवल एक विवश माता-पिता ही अनुभव कर सकते थे। यहां इच्छा मृत्यु की अनुमति प्रदान करना केवल एक परिवार की अंतहीन वेदना का समाधान मात्र नहीं है, बल्कि यह न्यायपालिका द्वारा मानव गरिमा, करुणा और चिकित्सा-नैतिकता के त्रिकोण पर स्थापित एक नया अध्याय है। यह फैसला स्पष्ट करता है कि कानून की शुष्कता जब संवेदना के धरातल पर उतरती है, तब मृत्यु केवल अंत नहीं, बल्कि यंत्रणा से मुक्ति का एक पावन मार्ग बन जाती है। यह प्रकरण हमें इस मौलिक प्रश्न पर पुनर्विचार के लिए विवश भी करता है कि क्या मात्र मशीनों के सहारे अनिश्चित काल तक साँसों की गिनती को बढ़ाते जाना ही वास्तविक जीवन है, या जीवन की सार्थकता उसकी गुणवत्ता, चेतना और मानवीय गरिमा में निहित है। जब देह केवल एक यंत्र बनकर रह जाए और चेतना का उससे संपर्क विच्छेद हो जाए, तो वह अस्तित्व नहीं बल्कि नियति का एक क्रूर परिहास बन जाता है। चिकित्सा विज्ञान का आदिम और पावन संकल्प सदैव से जीवन की रक्षा करना रहा है, जिसे 'हिप्पोक्रेटिक ओथ' के माध्यम से वैश्विक मान्यता प्राप्त है। चिकित्सा का दर्शन मूलतः पीड़ा के निवारण और जीवन की पुनर्स्थापना पर आधारित है। किंतु आधुनिक तकनीक के इस युग में जब विज्ञान अपनी ही प्रगति के पाश में इस प्रकार बंध जाए कि वह केवल दैहिक उपस्थिति तो बनाए रख सके पर चेतना, अनुभूति और बोध को लौटाने में सर्वथा असमर्थ हो, तब एक गहरा नैतिक और दार्शनिक शून्य उत्पन्न होता है। हरीश राणा का मामला इसी शून्य का एक विदारक दृश्य प्रस्तुत करता है, जहाँ 2013 की एक दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना ने एक ऊर्जावान युवक को कोमा के उस अंधकूप में धकेल दिया जहाँ से वापसी के समस्त द्वार बंद हो चुके थे। यहाँ भारतीय मनीषा और उपनिषदों का वह शाश्वत चिंतन पुनः प्रासंगिक हो जाता है जो शरीर को केवल एक नश्वर वस्त्र और चेतना का वाहन मानता है। यदि वह वाहन इतना जर्जर और अक्षम हो जाए कि वह आत्मा की अभिव्यक्ति या सांसारिक व्यवहार का माध्यम न बन सके, तो उसे कृत्रिम ऊर्जा के माध्यम से खींचते रहना न केवल उस देह का अपमान है, बल्कि प्रकृति के नैसर्गिक विधान के विरुद्ध एक हठ भी है। न्यायालय ने अत्यंत सूक्ष्मता और संवेदनशीलता से यह अनुभव किया है कि चिकित्सा का पावन उद्देश्य जीवन को यातना के कारागार में बंदी बनाना कदापि नहीं होना चाहिए। संवैधानिक और विधिक धरातल पर देखा जाए तो भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 केवल जैविक अस्तित्व को बचाए रखने का आश्वासन नहीं देता, बल्कि यह 'मानवीय गरिमा के साथ जीने' के अधिकार का प्रबल उद्घोष करता है। भारतीय न्यायपालिका ने विगत दशकों में अरुणा रामचंद्र शानबाग से लेकर कॉमन कॉज (2018) तक के ऐतिहासिक निर्णयों के माध्यम से निरंतर यह प्रतिपादित किया है कि 'गरिमामय मृत्यु' वास्तव में 'जीने के अधिकार' का ही एक अनिवार्य और अंतिम सोपान है। यह विधिक विकास इस सत्य को स्वीकार करता है कि जब उपचार की समस्त वैज्ञानिक संभावनाएं समाप्त हो जाएं और चिकित्सा विज्ञान स्वयं को असहाय पाकर केवल पीड़ा के विस्तार का माध्यम बन जाए, तब रोगी को शांतिपूर्ण प्रस्थान की अनुमति देना राज्य की निर्दयता नहीं, बल्कि उसका उच्चतम मानवीय और संवैधानिक दायित्व है। कानून और करुणा के बीच का यह सूक्ष्म संतुलन ही एक परिपक्व और संवेदनशील न्याय प्रणाली की पहचान है, जहाँ नियमों की कठोरता मानवता के आंसुओं के सामने झुकने का साहस रखती है। इस निर्णय के सामाजिक और आर्थिक पक्ष भी अत्यंत व्यापक और विचारणीय हैं, जो भारतीय समाज की वास्तविक विषमताओं को उजागर करते हैं। भारत जैसे विकासशील देश में, जहाँ स्वास्थ्य सेवाओं का अधिकांश व्यय सीधे तौर पर आम आदमी की जेब से होता है, एक असाध्य रोगी की वर्षों तक सघन चिकित्सा देखभाल करना किसी भी मध्यमवर्गीय या निर्धन परिवार के लिए आर्थिक और मानसिक आत्मदाह के समान है। यह स्थिति न केवल परिवार की संचित पूंजी को समाप्त कर उन्हें ऋण के दलदल में धकेलती है, बल्कि घर के अन्य सदस्यों, विशेषकर 'केयरगिवर्स' के मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक जीवन और भविष्य की संभावनाओं को भी पूरी तरह सोख लेती है। एक ऐसे समाज में जहाँ संसाधनों का अभाव है, वहाँ 'डिस्ट्रिब्यूटिव जस्टिस' का सिद्धांत यह तर्क भी प्रस्तुत करता है कि वेंटिलेटर और गहन चिकित्सा इकाइयों जैसे सीमित संसाधनों का उपयोग उन जीवनों को बचाने के लिए प्राथमिकता पर होना चाहिए जिनमें पुनः स्वस्थ होने की किंचित संभावना शेष हो। इस दृष्टिकोण से, सर्वोच्च न्यायालय का यह रुख न केवल एक व्यक्ति की गरिमा की रक्षा करता है, बल्कि एक संपूर्ण परिवार को आर्थिक और मानसिक विनाश से बचाते हुए सामाजिक न्याय के व्यापक उद्देश्यों की भी पूर्ति करता है। इच्छामृत्यु की कानूनी बहस से इतर, मानव इतिहास और साहित्य में ऐसे अनेक 'करुण दृष्टांत' मिलते हैं, जहाँ कानून की धाराओं के बजाय मानवीय संवेदना, विवशता और अपार पीड़ा ने मृत्यु को एक 'वरदान' बना दिया। ये उदाहरण दर्शाते हैं कि कभी-कभी मृत्यु का वरण करना जीवन के प्रति घृणा नहीं, बल्कि असहनीय यातना से मुक्ति की एक करुण पुकार होती है। मुंशी प्रेमचंद के अमर उपन्यास 'गोदान' के अंतिम दृश्य में होरी की मृत्यु का प्रसंग भले ही इच्छामृत्यु का विधिक मामला न हो, पर वह एक 'आर्थिक और शारीरिक यातना' से मुक्ति का करुणतम उदाहरण है। जब होरी लू और अत्यधिक श्रम से टूटकर मरणासन्न होता है, तो उसकी पत्नी धनिया, जो उसे बचाने के लिए जीवन भर लड़ी, अंततः उसकी पीड़ा को देखकर उस मृत्यु को स्वीकार कर लेती है। वह जानती है कि इस व्यवस्था में होरी का जीवित रहना केवल और अधिक अपमान और पीड़ा को सहना है। यहाँ मृत्यु एक 'करुण विश्राम' बन जाती है। भारतीय लोक-कथाओं और कुछ ऐतिहासिक वृत्तांतों में अकाल के समय के ऐसे अनेक वृत्तांत मिलते हैं, जहाँ घर के वृद्ध सदस्य स्वेच्छा से भोजन का त्याग कर देते थे (अनशन)। उनका उद्देश्य यह होता था कि उनके हिस्से का अन्न उनके पोते-पोतियों या युवा सदस्यों को मिल सके ताकि वंश जीवित रहे। यह कोई कानूनी मांग नहीं थी, बल्कि एक 'करुणामय आत्मत्याग' था, जहाँ मृत्यु को इसलिए चुना गया ताकि दूसरे जी सकें। इसमें पीड़ा का अंत और भविष्य का सृजन दोनों निहित थे। इतिहास के युद्धों में ऐसे अनगिनत अनामित दृष्टांत हैं, जहाँ भीषण रूप से घायल सैनिक, जिसके बचने की कोई संभावना नहीं होती थी और जिसकी देह क्षत-विक्षत हो चुकी होती थी, अपने ही साथी से उसे 'अंतिम प्रहार' (Coupe de grâce) करने की याचना करता था। वह साथी, जो उसे प्राणों से प्रिय मानता था, कांपते हाथों से उसे मृत्यु देता था ताकि उसे शत्रुओं की बर्बरता या तड़प-तड़प कर मरने की यातना से बचाया जा सके। यह कृत्य किसी कानून के तहत नहीं, बल्कि 'युद्ध की विभीषिका' और 'मित्रता की करुणा' के बीच का एक अत्यंत दुखद समझौता होता था। अनेक व्यक्तिगत संस्मरणों में ऐसे प्रसंग मिलते हैं जहाँ कैंसर या न्यूरोलॉजिकल विकारों के अंतिम चरणों में रोगी, जो कभी परिवार का आधार था, केवल अपनी आँखों के इशारे से या हाथ दबाकर अपने प्रियजनों से मशीनों को बंद करने की मूक प्रार्थना करता है। कानून भले ही उसे अनुमति न दे, पर वह 'मूक संवाद' जिसमें रोगी की आँखें 'अब बस' कह रही होती हैं, मानवता के इतिहास का सबसे भारी क्षण होता है। यहाँ परिवार का सदस्य कानून की जटिलताओं के बीच उस 'मौन याचना' को पढ़कर ईश्वर से उसकी मृत्यु की प्रार्थना करने लगता है—यही वह बिंदु है जहाँ प्रेम, मृत्यु की मांग करने लगता है। प्राचीन कथाओं में ऐसे दृष्टांत मिलते हैं (जैसे दशरथ का वियोग या अनसूया की कथाएं), जहाँ व्यक्ति किसी प्रियजन के शोक में या उसके बिना जीवन की निरर्थकता को देखते हुए अपने प्राण स्वतः त्याग देता है। यह किसी बाहरी हस्तक्षेप या दवा से नहीं, बल्कि 'संकल्प और विरह' की उस स्थिति से होता था जहाँ शरीर मन की आज्ञा मानकर धड़कना बंद कर देता था। इसे 'इच्छामृत्यु' का आध्यात्मिक और अत्यंत करुण स्वरूप माना जा सकता है, जहाँ जीने की इच्छा का समाप्त होना ही मृत्यु का कारण बनता था। ये दृष्टांत सिद्ध करते हैं कि कानून भले ही तर्क और नियमों पर चलता हो, किंतु मनुष्य का हृदय 'मृत्यु' को तब एक पवित्र शरणस्थली मानने लगता है जब 'जीवन' अपनी गरिमा खोकर केवल एक अंतहीन चीख बन जाता है। सांस्कृतिक और दार्शनिक परिप्रेक्ष्य में देखें तो भारतीय चिंतन परंपरा में जीवन और मृत्यु को कभी भी दो विपरीत ध्रुवों के रूप में नहीं देखा गया, बल्कि इन्हें एक ही चेतना के विस्तार और निरंतर चक्र के रूप में स्वीकार किया गया है। हमारे प्राचीन ग्रंथों में महाप्रयाण, संथारा और भीष्म पितामह को प्राप्त इच्छामृत्यु के वरदान के दृष्टांत इस सत्य के गवाह हैं कि हमारे पूर्वजों ने मृत्यु को भय या निषेध की वस्तु नहीं माना, बल्कि उसे समय की पूर्णता पर शालीनता से वर्ण करने योग्य एक पड़ाव माना। हरीश राणा के माता-पिता का अपनी ही संतान के लिए मशीनों से मुक्ति की याचना करना, उनके पुत्र-मोह के उच्चतर परित्याग और उस अगाध करुणा का प्रमाण है जो संकीर्ण भावनाओं से कहीं ऊपर उठ चुकी है। वे उन आधुनिक ऋषियों के समान हैं जो यह स्वीकार कर चुके हैं कि जीवन का सौंदर्य केवल लंबी आयु में नहीं, बल्कि पीड़ा से मुक्त प्रस्थान में भी निहित हो सकता है। उनके लिए यह निर्णय अपने पुत्र के अंत का नहीं, बल्कि उसकी उस अनंत यात्रा के प्रारंभ का मार्ग प्रशस्त करना है जहाँ न कोई व्याधि है, न सुइयां और न ही अस्पतालों की वह गंध जो जीवन को प्रतिपल डसती है। भविष्य की दिशा निर्धारित करते हुए यह अनिवार्य हो जाता है कि न्यायपालिका के इन ऐतिहासिक निर्णयों को अब एक स्पष्ट, सुदृढ़ और व्यापक विधायी कानून (Statutory Law) का रूप दिया जाए। यद्यपि 'लिविंग विल' और 'एडवांस मेडिकल डायरेक्टिव' जैसे प्रावधान विधिक रूप से मान्य हैं, किंतु व्यावहारिक स्तर पर इनकी जटिलताओं को दूर करना आवश्यक है ताकि एक सामान्य नागरिक भी अपनी पूर्ण चेतना की अवस्था में अपनी अंतिम इच्छा को विधिक स्वरूप दे सके। इसके लिए जिला स्तर पर स्वतंत्र मेडिकल बोर्डों का सशक्तिकरण, प्रक्रिया का सरलीकरण और चिकित्सा पाठ्यक्रमों में 'एंड ऑफ लाइफ केयर' जैसे मानवीय विषयों को प्रमुखता देना समय की मांग है। अंततः सभ्यता का उत्कर्ष इस बात से नहीं नापा जाता कि हमने कितनी गगनचुंबी इमारतें बनाईं या कितने शक्तिशाली अस्त्र जुटाए, बल्कि इस बात से नापा जाता है कि हम अपने सर्वाधिक असहाय और पीड़ाग्रस्त सदस्यों के प्रति कितने संवेदनशील हैं। हरीश राणा का मामला एक विधिक नजीर से कहीं अधिक एक नैतिक दर्पण है। यह हमें सिखाता है कि कभी-कभी 'पकड़कर रखना' स्वार्थ हो सकता है और 'मुक्त कर देना' ही वास्तविक प्रेम। सर्वोच्च न्यायालय का यह निर्णय उस 'करुणामय न्याय' की स्थापना है, जहाँ कानून की शुष्कता मानवीय संवेदनाओं की ओस से भीगकर शीतल हो गई है। जीवन यदि एक उत्सव है, तो उसकी पूर्णाहुति भी गरिमामयी और शांत होनी चाहिए। यही प्राकृतिक न्याय है और यही मानवता का धर्म। डॉ. विद्यासागर उपाध्याय राष्ट्रीय पार्षद - शंकराचार्य परिषद
ईरान-इस्राइल युद्ध : 12 साल बाद गैस गोदामों पर 500 मीटर तक लगी लंबी कतार

*व्यावसायिक सिलिंडरों की आपूर्ति बंद, घरेलू की बुकिंग तीन गुना बढ़ी, आनलाइन बुकिंग का सर्वर फेल*

नितेश श्रीवास्तव

भदोही। ईरान-इस्राइल युद्ध के बीच कालीन नगरी में एलपीजी घरेलू गैस सिलिंडर की मांग तीन गुना बढ़ गई है। व्यावसायिक सिलिंडरों की आपूर्ति बंद होने के बाद होटल, ढाबा और मिठाई दुकानदार अब घरेलू सिलेंडर का इस्तेमाल कर रहे हैं। 12 साल बाद एक बार फिर एजेंसियों के गोदामों पर 500 मीटर लंबी कतार देखने को मिली। ऑनलाइन बुकिंग का सर्वर फेल होने के कारण उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ गई है। एजेंसी संचालकों के मोबाइल नॉट रिचएबल बता रहा है। जिले में भारत गैस, इंडियन ऑयल और एचपी की 40 एजेंसियां हैं। इससे 2.07 लाख उज्ज्वला और तीन लाख सामान्य उपभोक्ता जुड़े हैं। युद्ध के कारण विश्व में गैस, तेल की आपूर्ति प्रभावित होने का अंदेशा है। सोशल मीडिया पर अफवाह उड़ते ही आपूर्ति कम होने के पहले ज्ञानपुर नगर में स्थित एक एजेंसी पर ग्राहकों की लंबी कतार लग गई। कुछ लोगों को ही सिलिंडर मिला। कुछ लोग बिना लिए ही वापस लौट गए। कुछ इसी तरह गोपीगंज, अभोली, भदोही स्थित एजेंसियों पर दिखा। एजेंसी संचालकों ने बताया कि पहले एक दिन में 400 से 500 सिलिंडरों की मांग होती थी। बीते चार-पांच दिनों से मांग एक हजार तक पहुंच गई है। मांग में बढ़ोतरी के सापेक्ष आपूर्ति 50 फीसदी तक ही हो रही है। गोपीगंज नगर में बेबी बानो, करीम, शिवशंकर चौबे, रवि गुप्ता ने बताया कि करीब एक सप्ताह के इंतजार के बाद भी गैस सिलिंडर नहीं मिल रहा है।


सहालग, रमजान के कारण रिफिलिंग की बढ़ी मांग
इन दिनों सहालग के साथ रमजान भी चल रहा है। इस कारण भी घरेलू गैस सिलिंडर की मांग बढ़ी है। शादी के आयोजनों में व्यावसायिक सिलिंडर की आपूर्ति बंद होने से घरेलू सिलिंडर का ज्यादा प्रयोग हो रहा है। इस कारण एजेंसियों और गोदामों पर भीड़ बढ़ गई है। एलपीजी गैस डिस्ट्रीब्यूशन एसोसिएशन के अध्यक्ष अरुण मिश्रा ने बताया कि लोग पैनिक होकर बुकिंग करा रहे हैं। इससे एजेंसियो पर भीड़ बढ़ी है। पहले हर गाड़ी में 10 से 12 व्यावसायिक सिलिंडर आते थे, अब नहीं आ रहे हैं।
होटल कारोबारियों की बात
सरकार को जल्द से जल्द व्यावसायिक सिलिंडरो की आपूर्ति शुरू करानी चाहिए। ऐसा नहीं होने पर रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा। रेस्टोरेंट और होटल बंद हो सकते हैं। वैकल्पिक व्यवस्था से काम चलाया जा रहा है। दो से तीन दिन बाद संकट और बढ़ जाएगा। - संजय उमर वैश्य, रेस्टोरेंट संचालक

व्यावसायिक सिलिंडर नहीं मिल रहा है। एजेंसी संचालकों ने मोबाइल बंद कर दिए हैं। अधिक कीमत देने के बाद भी नहीं मिल रहा है। जो सिलिंडर लगा है उसके खत्म होने के बाद होटल बंद करने की नौबत आ जाएगी।
- विजय कुमार चौरसिया, होटल संचालक
जिनके यहां शादी पड़ी है उनके माथे पर बल पड़ गया है। सिलिंडर जिसके पास है वह काला बाजारी कर रहा है। एक-दो दिन में स्थिति बिगड़ने की संभावना है। - आरिफ अंसारी, मैरिज लान संचालक
स्कूलों में लकड़ी से एमडीएम बनाने पर रोक है। बुधवार को विद्यालय का सिलेंडर खत्म हो गया। एजेंसी पर नहीं मिलने के कारण घर से सिलिंडर लाकर एमडीएम बनवाया गया। आपूर्ति नहीं सुधरी तो विद्यालयों में एमडीएम बनाने में दिक्कत होगी। - सुधीर सिंह, प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय पड़ाव।

जिले में फिलहाल सिलिंडर आपूर्ति में कोई संकट नहीं है। लोग पैनिक होकर बुकिंग कर रहे हैं। पांच मार्च तक की बुकिंग वाले ग्राहकों को सिलिंडर मिल चुका है। व्यावसायिक सिलिंडर की आपूर्ति शासन से बंद कर दी गई है। कई एजेंसियों पर नजर रखी जा रही है ताकि कालाबाजारी न हो सके। - सुनील कुमार, डीएसओ।

40 एजेंसी जनपद में करती है सिलिंडर वितरण
5.10 लाख घरेलू उपभोक्ता हैं जिले में
15 हजार व्यावसायिक सिलिंडर के उपभोक्ता हैं
भारतीय जहाजों के लिए खुला होर्मुज स्ट्रेट, दो टैंकर सुरक्षित निकले, रंग लाई विदेश मंत्री जयशंकर की कूटनीति

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ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध के बीच भारत के लिए अच्छी खबर आई है। ईरान ने भारत के साथ कूटनीतिक बातचीत के बाद भारतीय झंडे वाले तेल टैंकरों को हॉर्मुज से गुजरने की अनुमति दे दी है। इसके बाद पुष्पक और परिमलनाम के भारतीय टैंकर सुरक्षित रूप से इस हॉर्मुज से गुजर गए।

भारत की बड़ी कूटनीतिक सफलता

पश्चिम एशिया में भड़के युद्ध के बीच पूरी दुनिया की ऊर्जा सप्लाई लाइन खतरे में है। मिसाइल और ड्रोन हमलों के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पश्चिमी देशों के विदेशी जहाजों के लिए लगभग 'नो-गो जोन' बन चुका है। ईरान-इजराइल-अमेरिका जंग के बीच भारत को एक बड़ी कूटनीतिक सफलता हाथ लगी है। ईरान ने भारतीय झंडे वाले तेल टैंकरों को रणनीतिक रूप से अहम 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दे दी है।

एस जयशंकर और अराघची की बातचीत से निकला हल

यह घटनाक्रम भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास आराघची के बीच हुई उच्च-स्तरीय वार्ता के बाद सामने आया है। इस मसले पर विदेश मंत्री एस जयशंकर की उनके ईरानी समकक्ष के बीच युद्ध छिड़ने के बाद कम से कम तीन बार बात हो चुकी है। जयशंकर ने मंगलवार को भी पश्चिम एशिया में जारी संकट को लेकर अब्बास अराघची से बात की।

भारत के लिए ये क्यों खास है?

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑयल इंपोर्टर है और ज्यादातर क्रूड मिडिल ईस्ट से आता है, जो होर्मुज से गुजरता है। युद्ध शुरू होने (28 फरवरी) से पहले ही कई भारतीय जहाज फंस गए थे। डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग के मुताबिक, 28 से 37 भारतीय फ्लैग वाले जहाज वहां थे, जिनमें 1000 से ज्यादा भारतीय सीफेयरर्स थे। ईरान ने अमेरिका, इजरायल और यूरोप के जहाजों पर सख्ती बरती है, लेकिन भारत जैसे गैर-पश्चिमी देशों को छूट दी है। ऐसे में इसे काफी अहम माना जा रहा है।

क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य?

होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच लगभग 55 किलोमीटर चौड़ा समुद्री मार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। यह दुनिया के सबसे व्यस्त और रणनीतिक समुद्री मार्गों में से एक है।

-सामान्य परिस्थितियों में यहां से प्रतिदिन करीब 1.3 करोड़ बैरल तेल गुजरता है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 31 प्रतिशत है।

-इस मार्ग में बाधा आने से इराक, कुवैत, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और ईरान जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों के निर्यात पर सीधा असर पड़ता है।

-दुनिया के तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) का भी बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है।

-इसलिए यहां तनाव बढ़ने पर वैश्विक बाजार, सप्लाई चेन और ऊर्जा कीमतों पर तुरंत असर देखने को मिलता है।

রাজ্যের নতুন রাজ্যপাল আর এন রবি
বৃহস্পতিবার পশ্চিমবঙ্গের নতুন রাজ্যপাল হিসেবে শপথ নিলেন আর এন রবি।লোকভবনে এদিনের শপথগ্রহণ অনুষ্ঠানে প্রথা মেনেই উপস্থিত ছিলেন মুখ্যমন্ত্রী মমতা বন্দ্যোপাধ্যায়। সূত্রের খবর, শপথগ্রহণ অনুষ্ঠান শেষে নবনিযুক্ত রাজ্যপালের সঙ্গে প্রথম সাক্ষাতেই তিনি বলেন, 'বাংলাকে যারা ভালবাসে, বাংলাও তাঁদের ভালবাসে'।
विज्ञान शिक्षक के रूप में चयनित होने पर धर्मेंद्र यादव का ग्रामवासियों ने किया सम्मान
जौनपुर। बदलापुर तहसील अंतर्गत स्थित शाहपुर सानी गांव निवासी धर्मेंद्र यादव पुत्र बीपत यादव का भदोही जिले के जूनियर हाई स्कूल में विज्ञान शिक्षक के रूप में चयनित होने पर आज ग्रामवासियों द्वारा उनका भव्य सम्मान किया गया। अत्यंत विनम्र, शालीन और सहयोगी प्रवृत्ति के धर्मेंद्र यादव का विज्ञान शिक्षक के रूप में चयन होने पर लोगों ने खुशी जाहिर की है। आज सम्मान समारोह में ग्राम प्रधान चंद्रशेखर यादव, वरिष्ठ पत्रकार शिवपूजन पांडे, पूर्व प्रधानाचार्य रामबाबू यादव, लालता यादव, हृदय नारायण सिंह, ब्रिजलाल यादव, जगपत यादव, शिवनारायण यादव, अनिल कुमार यादव, शैलेंद्र यादव, मुकेश यादव, नंदलाल यादव, आलोक यादव, पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य कमल कुमार यादव, विकास यादव, विवेक यादव समेत अनेक लोग उपस्थित रहे। चंद्रशेखर यादव ने कहा कि यह पूरे गांव ही नहीं अपितु पूरे क्षेत्र के लिए गौरव की बात है। उन्होंने धर्मेंद्र यादव के साथ-साथ उनके पिता बीपत यादव को भी माला पहनाकर बधाई दी।
लोकसभा स्पीकर के बाद अब सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी, एकजुट हुआ विपक्ष

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लोक सभा अध्‍यक्ष के बाद विपक्षी दल देश के मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एकजुट होते दिख रहे हैं। संभावना है कि तृणमूल कांग्रेस की अगुवाई में एकजुट विपक्ष गुरुवार को सीईसी के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस देगा। मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सांसदों ने हस्‍ताक्षर भी कर दिया है। उनकी तैयारी संसद के दोनों हाउस के सचिवालयों में नो‍टिस जमा करने की है।

हस्ताक्षर की प्रक्रिया पूरी

भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्ताव लाने वाले नोटिस को गुरुवार यानी आज संसद से दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में सौंपा जा सकता है। प्रस्ताव लाने के लिए नोटिस पर जरूरी हस्ताक्षर की प्रक्रिया बुधवार को पूरी कर ली गई। बुधवार रात तक लोकसभा के लिए करीब 120 और राज्यसभा के लिए लगभग 60 सांसदों के साइन हो चुके थे। नियम के अनुसार लोकसभा में मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के नोटिस के लिए कम से कम 100 सांसदों के साइन जरूरी हैं।

सीईसी के खिलाफ टीएमसी को मिला कांग्रेस-सपा का साथ

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की इस मुहिम पर बुधवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के चैंबर में हुई बैठक में सहमति बनी। बैठक में राहुल गांधी और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने तृणमूल के प्रस्ताव का समर्थन किया। इसके बाद नोटिस देने के लिए जरूरी सांसदों के हस्ताक्षर कराए गए। इंडिया गठबंधन की सभी पार्टियों के साथ-साथ गठबंधन से बाहर आम आदमी पार्टी के सांसदों ने भी हस्ताक्षर किये हैं।

क्या है मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया?

कानून के मुताबिक, सीईसी को हटाने के लिए वही प्रक्रिया अपनाई जाती है, जो सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने के लिए है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त की अनुशंसा के बिना अन्य निर्वाचन आयुक्तों को पद से नहीं हटाया जा सकता। न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के अनुसार, किसी भी सदन में, जज को पद से हटाने का प्रस्ताव स्वीकृत हो जाने के बाद, (लोकसभा) अध्यक्ष या (राज्यसभा) सभापति, जैसा भी मामला हो, तीन सदस्यीय समिति का गठन करेंगे। जो उन आधारों की जांच करेगी, जिन पर पद से उन्हें हटाने की मांग की गई है। समिति में मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) या शीर्ष न्यायालय के जज, 25 उच्च न्यायालयों में से किसी एक के मुख्य न्यायाधीश और एक प्रतिष्ठित न्यायविद होते हैं। नियम के अनुसार, समिति द्वारा रिपोर्ट प्रस्तुत करने के बाद, इसे सदन में पेश किया जाएगा और पद से हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा शुरू हो जाएगी। हालांकि, सीईसी को अपना बचाव करने का अधिकार होता है।

রাশিফল

জ্যোতিষ শাস্ত্রের একটি গুরুত্বপূর্ণ অঙ্গ হলো রাশিফল গণনা। রাশিফল বৈদিক জ্যোতিষ শাস্ত্রের এমন একটি ধারণা যার মাধ্যমে বিভিন্ন সময়কাল নিয়ে ভবিষ্যৎবাণী করা হয়। বৈদিক জ্যোতিষে ১২টি রাশি-মেষ, বৃষভ, মিথুন, কর্কট, সিংহ, কন্যা, তুলা, বৃশ্চিক, ধনু, মকর, কুম্ভ ও মীন- এর ভবিষ্যদ্বাণী করা হয়। একইরকম ভাবে ২৩টি নক্ষত্রেরও ভবিষ্যদ্বাণী করা হয়ে থাকে। দেখে নেওয়া যাক আপনার গ্রহ-নক্ষত্ররা কি বলছে

মেষ রাশিফল (Thursday, March 12, 2026)

আশাবাদী হোন এবং উজ্জ্বল দিকটি দেখুন। আপনার প্রত্যয়ী প্রত্যাশাই আপনার আশা এবং আকাঙ্খা বাস্তবায়নের দ্বার উন্মুক্ত করবে। অর্থ সম্পর্কিত যে কোনও সমস্যা আজই সমাধান হতে পারে এবং আপনি আর্থিক সুবিধা অর্জন করতে পারেন। কোন ধর্মীয় স্থানে বা আত্মীয়ের কাছে যাওয়া আপনার জন্য সম্ভাব্য বলে মনে হচ্ছে। আপনি আপনার রোমান্টিক চিন্তা এবং অতীতের স্বপ্নে নিমগ্ন থাকবেন। বিদেশী বাণিজ্যের সাথে যুক্ত যারা আজ প্রত্যাশিত ফলাফল পাবে বলে আশা করা হচ্ছে। এটির সাহায্যে এই রাশিচক্রের কর্মরত নেটিভরা আজ কর্মক্ষেত্রে তাদের মেধার পুরো ব্যবহার করতে পারে। কোনো নতুন কাজ শুরু করার আগে আপনার সেই ব্যাপারে কোনো অভিজ্ঞ লোকের সাথে কথা বলা দরকার।যদি আজকে আপনার কাছে সময় থাকে তাহলে ওই কাজের অভিজ্ঞ ব্যাক্তির সাথে দেখা করে নিন যেই কাজ আপনি শুরু করতে যাচ্ছেন। আজ, আপনি এবং আপনার স্ত্রী সত্যিই গভীর ভাবপূর্ণ রোমান্টিক কথা বলবেন।

প্রতিকার :- বিছানার চার কোনায় তামার পেরেক লাগানো স্বাস্থ্যের জন্য খুবই মঙ্গলজনক।

বৃষভ রাশিফল (Thursday, March 12, 2026)

কোন আধ্যাত্মিক ব্যক্তি আশীর্বাদ করবেন এবং মানসিক শান্তি আনবেন। এই চিহ্নের কিছু নেটিভ তাদের বাচ্চাদের মাধ্যমে আজ আর্থিক সুবিধা অর্জন করবে বলে আশা করা হচ্ছে। আজ, আপনি আপনার সন্তানের জন্য গর্বিত হবেন। আপনার আত্মীয় এবং বন্ধুদের আপনার আর্থিক দিক সামলাতে দেবেন না তাহলে আপনার খরচ বাজেট ছাড়িয়ে যাবে। আপনার প্রেমিকার সঙ্গে অশ্লীল আচরণ করবেন না। যদি আপনি ভাবেন যে অন্যদের সহায়তা ছাড়াই আপনি জরুরী কাজ সামলাতে পারবেন তাহলে আপনি অত্যন্ত ভুল করছেন। আপনি আপনার সব জরুরি কাজ শেষ করে নিজের জন্য সময় তো বার করে নিবেন কিন্তু এই সময়ের ব্যবহার আপনি আপনার হিসেবে করতে পারবেন না। আপনি আপনার স্ত্রীর জন্য আজ অসুবিধা বোধ করতে পারেন।

প্রতিকার :- পরিবারের সদস্যদের মধ্যে আন্তরিকতা বৃদ্ধির জন্য গরুকে সবুজ জাবর খেতে দিন।

মিথুন রাশিফল (Thursday, March 12, 2026)

অসুস্থতা থেকে সেরে ওঠার সুযোগ বেশী যা আপনাকে প্রতিযোগিতামূলক খেলাধুলাতে অংশ নিতে সাহায্য করবে। যদিও আপনার আর্থিক অবস্থান উন্নত হয়েছে, তবুও টাকা বেরিয়ে যাওয়ায় আপনার প্রকল্পগুলির কার্যনির্বাহে বাধার সৃষ্টি করবে। যদি আপনি সামাজিক অনুষ্ঠান এবং ইভেন্টে অংশগ্রহণ করেন তাহলে আপনি আপনার বন্ধু এবং পরিচিতদের সংখ্যা বৃদ্ধি করতে পারবেন। প্রেমের জীবন আশা আনবে। আজ কর্মক্ষেত্রে আপনার ফুর্তি বাড়ির কোনো সমস্যার জন্য কম থাকবে। এই পরিমান ব্যাবসায়ীদের এইদিনে প্রবৃত্তি গুলিতে নজর রাখা প্রয়োজন ,সে আপনার ক্ষতি করতে পারে। দিনের শুরুটা যতই ক্লান্তিকর হোকনা কেন বেলা বাড়ার সাথে সাথে আপনি ভালো ফল পেতে থাকবেন।দিনের শেষে আপনি আপনার জন্য সময় পেয়ে যাবেন এবং আপনি কোনো কাছের মানুষের সাথে দেখা করে এই সময়ের সঠিক ব্যবহার করবেন। আপনি আপনার উচ্ছাসপূর্ণ বিবাহিত জীবনে একটি সুন্দর পরিবর্তন অনুভব করবেন।

প্রতিকার :- কর্ম জীবনে সাফল্য লাভের জন্য গৃহদেবতার রূপোয় তৈরি মূর্তি কে আরাধনা করুন।

কর্কট রাশিফল (Thursday, March 12, 2026)

নিজের খাদ্য(তালিকা) নিয়ন্ত্রণের আওতায় রাখুন এবং শারীরিকভাবে সুস্থ থাকার জন্য ব্যায়াম করুন। খুব একটা লাভদায়ক দিন নয়- কাজেই আপনার টাকাকড়ির অবস্থা দেখে নিয়ে আপনার খরচ সীমিত করুন। আপনি আপনার ঘরের পরিবেশে কোন পরিবর্তন করার আগে সবার সম্মতি পেয়েছেন কিনা সে বিষয়ে নিশ্চিত হোন। আজ, আপনার প্রেমিক আপনার কোনও একটি অভ্যাস সম্পর্কে খারাপ লাগতে পারে এবং আপনাকে বিরক্ত করতে পারে। আপনার কার্য দক্ষতা বাড়াতে নতুন প্রযুক্তি অবলম্বন করুন- আপনার শৈলী এবং কাজকর্ম করার অনন্য উপায়গুলি এমন মানুষজনকে আগ্রহী করবে, যারা আপনাকে কাছ থেকে দেখছেন। কারো কারোর জন্য ভ্রমণ ক্লান্তিকর এবং চাপপূর্ণ প্রমাণিত হবে। আজ, আপনার অর্ধাঙ্গীনী আপনার জীবনের সবচেয়ে গুরুত্বপূর্ণ বিষয়ে আপনাকে সহায়তা করবেন।

প্রতিকার :- হনুমানজির নিয়মিত পুজা করলে আর্থিক অবস্থা ভালো থাকবে।

সিংহ রাশিফল (Thursday, March 12, 2026)

আপনি আপনার জীবনে দীর্ঘ সময় ধরে সম্মুখীন হওয়া উত্তেজনা এবং চাপ থেকে পরিত্রাণ পেতে পারেন। একে স্থায়ীভাবে একটি নির্দিষ্ট দিশায় রাখতে আপনার জীবন শৈলী পরিবর্তন করার সঠিক সময়। দিনের শুরুটা ভাল হতে পারে তবে সন্ধ্যায় কোনও কারণে আপনি আপনার অর্থ ব্যয় করতে পারেন যা আপনাকে বিরক্ত করবে। আপনার ঘরে ঐক্য আনতে ঘনিষ্ঠ সহযোগিতার মাধ্যমে কাজ করুন। আপনাদের সম্পর্কের সমস্ত অভিযোগ এবং বিদ্বেষ এই অপরূপ দিনে বিলুপ্ত হয়ে যাবে। স্বল্পমেয়াদী কর্মসূচীতে নিজের নাম নথিভুক্ত করুন যা আপনাকে সাম্প্রতিকতম প্রযুক্তি এবং দক্ষতা শিখতে সাহায্য করবে। বাণিজ্যিক উদ্দেশ্যে গৃহীত ভ্রমণ লম্বা দৌড়ে লাভদায়ক প্রমাণিত হবে। আপনার আজ আপনার স্ত্রীর অবিশাস্য উষ্ণতার সঙ্গে নিজেকে রাজার মত মনে হবে।

প্রতিকার :- পরিষ্কার পরিছন্ন থাকলে এবং রোজ স্নান করলে আপনার আর্থিক উন্নতির পথ সুগম হবে।

কন্যা রাশিফল (Thursday, March 12, 2026)

এমন একটি দিন যেখানে আপনি আরাম করতে সমর্থ হবেন। আপনার পেশীগুলিকে আরাম দিতে তেল দিয়ে আপনার শরীর মালিশ করুন। যে কোনও জায়গায় বিনিয়োগ করা লোকেরা আজ আর্থিক ক্ষতির সম্মুখীন হতে পারেন। পরিবারের সদস্যদের সাথে কিছু হালকা মূহুর্ত কাটান। প্রেমিক প্রেমিকারা পরিবারের অনুভূতির প্রতি অত্যধিক সহানুভূতিশীল হবেন। কর্মক্ষেত্রে আপনি একটি ভাল পরিবর্তনের সম্মুখীন হতে পারেন। যদি আপনি বিবাহিত হন আর আপনার বাচ্চাও আছে তাহলে আজ তারা আপনাকে অভিযোগ করতে পারে কারণ আপনি তাদের যথেষ্ট সময় দিতে পারেন না। আপনার পিতামাতা আপনার স্ত্রীকে আশীর্বাদ করতে পারে যা আজ সত্যিই বিস্ময়কর কিছু হবে, এবং যা শেষ পর্যন্ত আপনার বিবাহিত জীবনকে উন্নত করবে।

প্রতিকার :- ওম শ্রাম শ্রীম শ্রম সাঃ কেতাবে নমঃ – এই মন্ত্রটি রোজ ১১ বার জপ করলে আর্থিক উন্নতি হবার বিপুল সম্ভাবনা রয়েছে।

তুলা রাশিফল (Thursday, March 12, 2026)

আপনার মনকে ভালোবাসা, আশা, বিশ্বাস, সহানুভূতি, আশাবাদ এবং বিশ্বস্ততার মত ইতিবাচক অনুভূতিগুলি গ্রহণে উৎসাহিত করুন। একবার এই অনুভূতিগুলি সম্পূর্ণরূপে নিয়ন্ত্রণ এলে-মনও স্বয়ংক্রিয়ভাবে প্রতি পরিস্থিতিতে ইতিবাচক সাড়া দেবে। আপনার আর্থিক অবস্থা আজকে অনুকূল বলে মনে হচ্ছে না, এজন্যই আপনার অর্থ সঞ্চয় করা কঠিন হবে। যখন নতুন লগ্নির ব্যাপার আসে তখন স্বাধীন হোন এবং আপনার নিজস্ব সিদ্ধান্ত নিন। আপনার ভালবাসার সঙ্গী সত্যিই কিছু সুন্দর করে আজ আপনাকে অবাক করে দেবে। আপনার সঙ্গীরা সহায়ক এবং সাহায্যকারী হবে। প্রেমিক কে সময় দেওয়ার চেষ্টা করবেন কিন্তু কোনো দরকারি কাজ পড়ায় সময় দিতে অক্ষম হবেন। শারীরিক অন্তরঙ্গতা আজ আপনার স্ত্রীর সঙ্গে তার শ্রেষ্ঠ সময়ে পৌঁছবে।

প্রতিকার :- দুধে হলুদ গুলি খেলে আপনার আর্থিক উন্নতির সম্ভাবনা দেখা দেবে।

বৃশ্চিক রাশিফল (Thursday, March 12, 2026)

যা আপনাকে নিজের সম্বন্ধে ভালো বোধ করায় এমন কিছু করার পক্ষে এটি চমৎকার দিন। বিপরীত লিঙ্গের কোনও নেটিভের সহায়তায় আজ আপনি ব্যবসা বা চাকরিতে আর্থিক সুবিধা পেতে পারেন। ঘরের তরফে ঝামেলা পাকিয়ে উঠবে বলে মনে হচ্ছে কাজেই আপনি কি বলছেন সে ব্যাপারে যত্নশীল হন। নিজের রোম্যান্টিকতা সবার সামনে দেখাবেন না। পেশায় আপনার হিসাবী পদক্ষেপ পুরস্কৃত হবে। এরফলে সময়ের মধ্যে প্রকল্প সম্পূর্ণ করতে সক্ষম হবেন। এটি নতুন প্রকল্প গ্রহণ করারও সঠিক সময়। ঘরের বাইরে বেরিয়ে আজকে আপনি খোলা বাতাসে হাটাহাটি করতে পচ্ছন্দ করবেন।আজকে আপনার মন শান্ত থাকবে যেটার সুবিধা আপনি পুরো দিন পাবেন। দিনে একটি উত্তপ্ত তর্কের পরে, আপনি আপনার স্ত্রীর সঙ্গে একটি চমৎকার সন্ধ্যা কাটাবেন।

প্রতিকার :- জাফরানের তিলক লাগান পারিবারিক জীবন ভালো থাকবে।

ধনু রাশিফল (Thursday, March 12, 2026)

যার অস্তিত্ব আছে সেইদিকে আপনার চিন্তা এবং উদ্যম চালনা করুন। শুধু চিন্তা করে গেলে কিছু লাভ নেই। আপনার সমস্যা হল আপনার চেষ্টা করেন না কেবল সে সম্পর্কে ধারণা পোষণ করেন। আপনি আজ অজানা উত্স থেকে অর্থ অর্জন করতে পারেন যা আপনার অনেক আর্থিক সমস্যার সমাধান করবে। পরিবারের সদস্যরা অথবা স্ত্রী কিছু উত্তেজনার সৃষ্টি করবে। আপনার চোখের তারা খুব উজ্জ্বল যা আপনার প্রেমিকার একটি অন্ধকার রাত প্রজ্বালিত করতে পারে। আপনার আজ কর্মক্ষেত্রে একজন অসাধারণ ব্যক্তির সঙ্গে দেখা হতে পারে। আজকে ফাঁকা সময়টা কোনো অযথা কাজের জন্য নষ্ট হতে পারে দিনটি আপনার নিয়মিত বৈবাহিক জীবনে স্বতন্ত্র হতে পারে, আজ সত্যিই আপনি অসাধারণ কিছু অভিজ্ঞতা লাভ করবেন।

প্রতিকার :- কুকুর কে রুটি এবং পাউরুটি খাওয়ালে তা আপনার স্বাস্থ্যের জন্য শুভ হবে।

মকর রাশিফল (Thursday, March 12, 2026)

সামঞ্জস্যপূর্ণ ব্যাক্তিত্ব তৈরী করুন যাতে ঘৃণা ভাবকে দমন করা যায় কারণ ঘৃণা হলো ভালোবাসার চেয়েও শক্তিশালী আর তাতে শরীরের অসীম ক্ষতি হয়। মনে রাখবেন ভালোর চেয়ে মন্দের প্রভাব বেশী। দীর্ঘ স্থায়ী সম্ভাবনাসহ বিনিয়োগ করা প্রয়োজন। আপনার বাচ্চার কোন পুরস্কার গ্রহণের অনুষ্ঠানে আমন্ত্রণ পেয়ে আপনি খুশি হবেন। সে আপনার প্রত্যাশামাফিক ফল করে আপনার স্বপ্নকে বাস্তবায়িত করেছে। আপনার প্রেমিকার আবেগের চাহিদার সামনেও মাথা নোয়াবেন না। স্থগিত প্রকল্প এবং পরিকল্পনা চূড়ান্ত রূপ নিতে চলেছে। জীবনের জটিলতা বোঝার জন্য আজকে আপনি আপনার বাড়ির কোনো বড়ো সদস্যের সাথে সময় কাটাতে পারেন। আজ আপনি আপনার স্ত্রীর একটি মিথ্যা কথায় হতাশ হতে পারেন, যদিও এটি একটি সামান্য ঘটনা হবে।

প্রতিকার :- সাদা হাঁস জোড়া উপহার স্বরূপ দিলে প্রেম জীবন সুন্দর হবে।

কুম্ভ রাশিফল (Thursday, March 12, 2026)

অফিস থেকে তাড়াতাড়ি বেরোতে চেষ্টা করুন এবং এমন কিছু করুন যা আপনি উপভোগ করেন। আপনার সন্তানদের কারণে আজ আপনি অর্থনৈতিক সুবিধা অর্জন করতে পারেন। এটি আপনাকে খুব আনন্দিত করবে। পরিবারের সাথে সামাজিক ক্রিয়াকলাপ অত্যন্ত আনন্দদায়ক হবে। আপনার কাজ হবে আরাম করা- কারণ আপনি আপনার প্রিয়জনের মাধ্যমে সুখ- সাচ্ছন্দ্য এবং পরমানন্দ খুঁজে পাবেন। বিশিষ্ট ব্যক্তিদের সাথে আলাপচারিতা আপনাকে ভালো ধারণা এবং পরিকল্পনা এনে দেবে। আপনার বাড়ির লোক আজকে আপনার সাথে কোনো অসুবিধার কথা ভাগ করতে পারেন কিন্তু আপনি আপনার মত্ত তেই ব্যাস্ত থাকবেন এবং ফাঁকা সময়ে এমন কিছু করতে পারেন যেটা আপনি করতে পছন্দ করেন। আজ আপনি আপনার স্ত্রীর সঙ্গে অনেক টাকা ব্যয় করবেন বলে মনে হচ্ছে কিন্তু একটি ফাটাফাটি সময় কাটাবেন। থাকবে মনে হচ্ছে

প্রতিকার :- নিয়মিত ১০৮দিন ধরে পা ছুঁয়ে শ্রদ্ধার সাথে বয়স্ক মহিলাকে প্রণাম করুন, আপনার পারিবারিক জীবন সুখময় হবে।

মীন রাশিফল (Thursday, March 12, 2026)

আজকের বিনোদনের মধ্যে খেলাধুলো সংক্রান্ত ক্রিয়াকলাপ এবং বাইরের অনুষ্ঠান অন্তর্ভুক্ত থাকা উচিত। দীর্ঘসময়ের স্থগিত বকেয়া এবং পাওনাগুলি শেষমেশ পুনরুদ্ধার করা যাবে। বাচ্চারা আপনাকে বাড়ির কাজ সম্পূর্ণ করতে সাহায্য করে। প্রেম জীবন ভাল দিকে মোড় নিতে যাচ্ছে কারণ আপনি একটি ভাল সম্পর্কের বিকাশ ঘটাচ্ছেন আজকের দিনে আপনার অর্জিত অতিরিক্ত জ্ঞান সমকক্ষদের সাথে বোঝাপড়া করার সময় আপনাকে এক তীব্রতা প্রদান করবে। আজকে আপনি কোনো নতুন বই কিনে কোনো ঘরে নিজেকে পুরো দিন বন্ধ করে রাখতে পারেন। আপনার স্ত্রী অসাধারণ নন। আপনি আপনার জীবনের ভালবাসার মানুষটির থেকে একটি চমৎকার বিস্ময় পেতে পারেন।

প্রতিকার :- হনুমান মন্দিরে জেসমিন তেল, সিলভার এ মোরা চোলা ও সিঁদুর দান করলে তা আপনার স্বাস্থ্যের ওপর ভালো প্রভাব দেখাবে।

(Courtesy-AstroSage)
फतेहपुर में बंद कमरे में मां-बेटे और देवर की रहस्यमयी मौत, सुसाइड नोट मिलने से कर्ज का एंगल आया सामने
फतेहपुर। फतेहपुर जिले के Lucknow Bypass Road स्थित एक मकान में मां-बेटे और देवर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत से इलाके में सनसनी फैल गई। घटना Sadar Kotwali क्षेत्र की है, जहां सुशील श्रीवास्तव के मकान में रहने वाले परिवार के तीन सदस्यों के शव बंद कमरे में मिले। पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है।जानकारी के मुताबिक कमरे में मां और बेटे के शव खून से लथपथ हालत में मिले, जबकि कुछ दूरी पर महिला का देवर गंभीर रूप से घायल अवस्था में पड़ा था। उसे जिला अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रास्ते में ही उसकी भी मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही इलाके में बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जुट गई।

व्यापार में घाटे के कारण उस पर करीब 50 लाख का कर्ज हो गया था

बताया जा रहा है कि परिवार मूल रूप से मुराइनटोला का रहने वाला था और कुछ साल पहले ही लखनऊ बाईपास क्षेत्र में मकान बनाकर रहने लगा था। परिवार का इकलौता बेटा अमर श्रीवास्तव सरल स्वभाव का था और कई अखबारों की एजेंसी का काम कर चुका था। हालांकि व्यापार में घाटे के कारण उस पर करीब 50 लाख रुपये का कर्ज हो गया था। कर्ज के दबाव में उसका घर भी बिक गया था और लंबे समय तक परिवार कर्जदारों से बचने के लिए छिपकर रह रहा था।

पुलिस को घटनास्थल से एक सुसाइड नोट भी मिला

परिजनों के अनुसार अमर हाल के दिनों में लोगों से रुपये उधार मांग रहा था। उसने घटना से एक दिन पहले अपने एक दोस्त से 10 हजार रुपये उधार लिए थे और होली के आसपास अपने बहनोई से भी 10 हजार रुपये लिए थे। अमर के बहनोई ने तीनों की मौत को आत्महत्या मानने से इनकार करते हुए हत्या की आशंका जताई है।पुलिस को घटनास्थल से एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें तीन लोगों के नाम का जिक्र करते हुए आर्थिक तंगी और कर्ज से परेशान होने की बात लिखी गई है। सुसाइड नोट के आधार पर पुलिस उन लोगों की तलाश में जुट गई है। एसओजी और इंटेलिजेंस विंग की टीम भी मामले की जांच कर रही है।मौके से चाय के झूठे गिलास और ब्लेड का पैकेट भी बरामद हुआ है।

तीनों ने पहले चाय में सल्फास मिलाकर पीया

आशंका जताई जा रही है कि तीनों ने पहले चाय में सल्फास मिलाकर पीया और बाद में तड़पने पर ब्लेड से खुद पर वार किया। हालांकि यह भी संभावना जताई जा रही है कि तीनों के बीच आपसी विवाद के बाद हमला हुआ हो, जिसमें देवर ने मां-बेटे की हत्या कर खुद की जान ले ली हो।फिलहाल पुलिस दो पहलुओं—हत्या और सामूहिक आत्महत्या—दोनों को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि मौत जहर से हुई या ब्लेड से हुए हमले से। सुसाइड नोट और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई करेगी।
रिश्वत आरोप में निलंबित IAS अभिषेक प्रकाश की होगी बहाली, 14 मार्च के बाद से प्रभावी मानी जाएगी
लखनऊ। प्रदेश सरकार ने निलंबित आईएएस अधिकारी Abhishek Prakash को बहाल करने का निर्णय लिया है। शासन के सूत्रों के मुताबिक उनकी बहाली 14 मार्च के बाद से प्रभावी मानी जाएगी। हालांकि नियुक्ति विभाग की ओर से इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

2006 बैच के आईएएस अधिकारी अभिषेक प्रकाश इससे पहले निवेश प्रोत्साहन एजेंसी Invest UP के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के पद पर तैनात थे। उन पर एक सोलर कंपनी से प्रोजेक्ट मंजूरी के बदले रिश्वत मांगने के गंभीर आरोप लगे थे। इन आरोपों के बाद प्रदेश सरकार ने 20 मार्च 2025 को उन्हें निलंबित कर दिया था।

इस मामले में फरवरी 2026 में Lucknow Bench of Allahabad High Court ने सुनवाई करते हुए साक्ष्य के अभाव में उनके खिलाफ दाखिल चार्जशीट को निरस्त कर दिया था। अदालत के इस फैसले के बाद उनकी बहाली का रास्ता साफ हो गया।

शासन के सूत्रों के अनुसार निलंबन की अवधि एक वर्ष पूरी होने से पहले इस मामले में रिपोर्ट केंद्र सरकार के कार्मिक मंत्रालय को भेजी जानी है। इसी प्रक्रिया के तहत उनकी बहाली को 14 मार्च के बाद प्रभावी माना जाएगा।

हालांकि, बहाली के बाद उन्हें किस विभाग या जिम्मेदारी पर तैनात किया जाएगा, इस पर अंतिम निर्णय अभी लिया जाना बाकी है। शासन स्तर पर इस संबंध में विचार-विमर्श जारी है।
गो रक्षा और सनातन के लिए नई रणनीति, शंकराचार्य ने किया चतुरंगिणी सेना
लखनऊ। गो रक्षा और सनातन धर्म की रक्षा के मुद्दे पर बुधवार को राजधानी लखनऊ के कांशीराम स्मृति सांस्कृतिक स्थल पर आयोजित कार्यक्रम में बड़ा ऐलान किया गया। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती  ने ‘गो प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध’ का शंखनाद करते हुए कहा कि धर्म की रक्षा के लिए शंकराचार्य चतुरंगिणी सेना का गठन किया जाएगा, जो संत समाज में फैल रही अशास्त्रीयता और अधर्म को दूर करने का कार्य करेगी।देशभर से आए संतों, धर्माचार्यों और गो रक्षकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि धार्मिक समाज में धर्मनिरपेक्ष शपथ नहीं, बल्कि धर्म की शपथ ही चलेगी। उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि यदि परिस्थितियां बनीं तो धर्म की रक्षा के लिए शस्त्र उठाने से भी पीछे नहीं हटेंगे।

संत समाज में बढ़ रही विकृतियों पर भी चिंता जताई

कार्यक्रम में उन्होंने संत समाज में बढ़ रही विकृतियों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अखाड़ा परिषद के कुछ महंतों और साधुओं ने यह कहा कि वे मुख्यमंत्री के साथ हैं, शंकराचार्य के साथ नहीं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि यदि अखाड़े साथ नहीं आते हैं तो अब अलग संगठन और सेना बनाकर धर्म की रक्षा की जाएगी।शंकराचार्य ने प्रयागराज में माघ मेले के दौरान हुई एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि वेद पढ़ने वाले बटुकों के साथ अन्याय हुआ, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि गोहत्या केवल कसाई ही नहीं करता, बल्कि जो इसे अनुमति देता है या मौन रहता है, वह भी उसी पाप का भागी है।

यह यात्रा 3 मई से 23 जुलाई तक चलेगी

इस दौरान उन्होंने “समग्र गविष्ठि गोयुद्ध यात्रा” निकालने की भी घोषणा की। यह यात्रा 3 मई से 23 जुलाई तक चलेगी। यात्रा की शुरुआत गोरखपुर से होगी और वहीं इसका समापन भी होगा। इसके बाद 24 जुलाई को लखनऊ के कांशीराम स्मृति स्थल पर एक बड़ी सभा आयोजित की जाएगी।शंकराचार्य ने कहा कि सनातन धर्म में शंकराचार्य सर्वोच्च धार्मिक प्राधिकरण हैं और गो माता की रक्षा के साथ-साथ सनातन धर्म की रक्षा का संकल्प भी लेना होगा।
मानवता का युगांतकारी निर्णय: भारत में पहली बार इच्छामृत्यु और देह की विधिक मुक्ति
संजीव सिंह बलिया! मानवीय अस्तित्व का संपूर्ण विस्तार प्रथम श्वास के ग्रहण और अंतिम श्वास के त्याग की लघु देहरी के मध्य ही सिमटा हुआ है, जहाँ जीवन अपनी समस्त कोलाहलपूर्ण जीवंतता के साथ स्पंदित होता है। मेरे दार्शनिक ग्रंथों 'मृत्यु मीमांसा: जन्म के पूर्व एवं मृत्यु के बाद' तथा 'अथातो मृत्यु जिज्ञासा' का केंद्रीय विमर्श भी इसी सत्य को प्रतिपादित करता है कि मृत्यु केवल एक अंत नहीं, बल्कि चेतना का एक अनिवार्य पड़ाव है। प्रायः संसार मृत्यु को शोक, संताप और विछोह के विषादपूर्ण चश्मे से ही देखता आया है, किंतु दार्शनिक परिपक्वता उस बिंदु पर जागृत होती है जहाँ मृत्यु एक अपरिहार्य और श्रेयस्कर अनुष्ठान बन जाती है। जब देह चेतना का साथ छोड़ दे और मात्र यंत्रवत यंत्रणा का पर्याय बन जाए, तब स्वयं व्यक्ति, उसका परिवेश और संपूर्ण समाज भी उस मौन मुक्ति की करुणापूर्ण याचना करने लगता है, जिसे नियति कभी-कभी मशीनों के शोर में उलझाकर विस्मृत कर देती है। ऐसे में यह बोध अत्यंत आवश्यक हो जाता है कि जीवन की सार्थकता मात्र उसकी अवधि में नहीं, बल्कि उसकी गरिमा में निहित है, और कभी-कभी शांतिपूर्ण महाप्रयाण ही उस जीवन का सबसे पावन और आवश्यक उपहार सिद्ध होता है। मानवीय अस्तित्व की गरिमा और विधिक सीमाओं के मध्य संतुलन साधने की दिशा में सर्वोच्च न्यायालय का हालिया निर्णय एक युगांतकारी हस्तक्षेप है। न्याय के मंदिर में निसृत हुआ यह निर्णय केवल एक विधिक औपचारिकता मात्र नहीं है, बल्कि यह मानवता के क्रंदन और करुणा के गहन अंतर्संबंधों को रेखांकित करने वाला एक मार्मिक दस्तावेज है। गाजियाबाद के 32 वर्षीय युवक हरीश राणा के संदर्भ में सर्वोच्च न्यायालय का यह आदेश, जो उन्हें निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति प्रदान करता है, इक्कीसवीं सदी के भारत में जीवन, मृत्यु और मानवीय अस्मिता के द्वंद्व को नए और अत्यंत संवेदनशील आयाम दे रहा है। लगभग 13 वर्षों की दीर्घ और जड़वत प्रतीक्षा के पश्चात, जब एक पुत्र की देह केवल चिकित्सा विज्ञान की हठधर्मिता और मशीनों के शोर के बीच अटकी हो, तब न्यायालय का यह हस्तक्षेप उस 'अश्रुपूरित सन्नाटे' को स्वर देने जैसा है, जिसे केवल एक विवश माता-पिता ही अनुभव कर सकते थे। यहां इच्छा मृत्यु की अनुमति प्रदान करना केवल एक परिवार की अंतहीन वेदना का समाधान मात्र नहीं है, बल्कि यह न्यायपालिका द्वारा मानव गरिमा, करुणा और चिकित्सा-नैतिकता के त्रिकोण पर स्थापित एक नया अध्याय है। यह फैसला स्पष्ट करता है कि कानून की शुष्कता जब संवेदना के धरातल पर उतरती है, तब मृत्यु केवल अंत नहीं, बल्कि यंत्रणा से मुक्ति का एक पावन मार्ग बन जाती है। यह प्रकरण हमें इस मौलिक प्रश्न पर पुनर्विचार के लिए विवश भी करता है कि क्या मात्र मशीनों के सहारे अनिश्चित काल तक साँसों की गिनती को बढ़ाते जाना ही वास्तविक जीवन है, या जीवन की सार्थकता उसकी गुणवत्ता, चेतना और मानवीय गरिमा में निहित है। जब देह केवल एक यंत्र बनकर रह जाए और चेतना का उससे संपर्क विच्छेद हो जाए, तो वह अस्तित्व नहीं बल्कि नियति का एक क्रूर परिहास बन जाता है। चिकित्सा विज्ञान का आदिम और पावन संकल्प सदैव से जीवन की रक्षा करना रहा है, जिसे 'हिप्पोक्रेटिक ओथ' के माध्यम से वैश्विक मान्यता प्राप्त है। चिकित्सा का दर्शन मूलतः पीड़ा के निवारण और जीवन की पुनर्स्थापना पर आधारित है। किंतु आधुनिक तकनीक के इस युग में जब विज्ञान अपनी ही प्रगति के पाश में इस प्रकार बंध जाए कि वह केवल दैहिक उपस्थिति तो बनाए रख सके पर चेतना, अनुभूति और बोध को लौटाने में सर्वथा असमर्थ हो, तब एक गहरा नैतिक और दार्शनिक शून्य उत्पन्न होता है। हरीश राणा का मामला इसी शून्य का एक विदारक दृश्य प्रस्तुत करता है, जहाँ 2013 की एक दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना ने एक ऊर्जावान युवक को कोमा के उस अंधकूप में धकेल दिया जहाँ से वापसी के समस्त द्वार बंद हो चुके थे। यहाँ भारतीय मनीषा और उपनिषदों का वह शाश्वत चिंतन पुनः प्रासंगिक हो जाता है जो शरीर को केवल एक नश्वर वस्त्र और चेतना का वाहन मानता है। यदि वह वाहन इतना जर्जर और अक्षम हो जाए कि वह आत्मा की अभिव्यक्ति या सांसारिक व्यवहार का माध्यम न बन सके, तो उसे कृत्रिम ऊर्जा के माध्यम से खींचते रहना न केवल उस देह का अपमान है, बल्कि प्रकृति के नैसर्गिक विधान के विरुद्ध एक हठ भी है। न्यायालय ने अत्यंत सूक्ष्मता और संवेदनशीलता से यह अनुभव किया है कि चिकित्सा का पावन उद्देश्य जीवन को यातना के कारागार में बंदी बनाना कदापि नहीं होना चाहिए। संवैधानिक और विधिक धरातल पर देखा जाए तो भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 केवल जैविक अस्तित्व को बचाए रखने का आश्वासन नहीं देता, बल्कि यह 'मानवीय गरिमा के साथ जीने' के अधिकार का प्रबल उद्घोष करता है। भारतीय न्यायपालिका ने विगत दशकों में अरुणा रामचंद्र शानबाग से लेकर कॉमन कॉज (2018) तक के ऐतिहासिक निर्णयों के माध्यम से निरंतर यह प्रतिपादित किया है कि 'गरिमामय मृत्यु' वास्तव में 'जीने के अधिकार' का ही एक अनिवार्य और अंतिम सोपान है। यह विधिक विकास इस सत्य को स्वीकार करता है कि जब उपचार की समस्त वैज्ञानिक संभावनाएं समाप्त हो जाएं और चिकित्सा विज्ञान स्वयं को असहाय पाकर केवल पीड़ा के विस्तार का माध्यम बन जाए, तब रोगी को शांतिपूर्ण प्रस्थान की अनुमति देना राज्य की निर्दयता नहीं, बल्कि उसका उच्चतम मानवीय और संवैधानिक दायित्व है। कानून और करुणा के बीच का यह सूक्ष्म संतुलन ही एक परिपक्व और संवेदनशील न्याय प्रणाली की पहचान है, जहाँ नियमों की कठोरता मानवता के आंसुओं के सामने झुकने का साहस रखती है। इस निर्णय के सामाजिक और आर्थिक पक्ष भी अत्यंत व्यापक और विचारणीय हैं, जो भारतीय समाज की वास्तविक विषमताओं को उजागर करते हैं। भारत जैसे विकासशील देश में, जहाँ स्वास्थ्य सेवाओं का अधिकांश व्यय सीधे तौर पर आम आदमी की जेब से होता है, एक असाध्य रोगी की वर्षों तक सघन चिकित्सा देखभाल करना किसी भी मध्यमवर्गीय या निर्धन परिवार के लिए आर्थिक और मानसिक आत्मदाह के समान है। यह स्थिति न केवल परिवार की संचित पूंजी को समाप्त कर उन्हें ऋण के दलदल में धकेलती है, बल्कि घर के अन्य सदस्यों, विशेषकर 'केयरगिवर्स' के मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक जीवन और भविष्य की संभावनाओं को भी पूरी तरह सोख लेती है। एक ऐसे समाज में जहाँ संसाधनों का अभाव है, वहाँ 'डिस्ट्रिब्यूटिव जस्टिस' का सिद्धांत यह तर्क भी प्रस्तुत करता है कि वेंटिलेटर और गहन चिकित्सा इकाइयों जैसे सीमित संसाधनों का उपयोग उन जीवनों को बचाने के लिए प्राथमिकता पर होना चाहिए जिनमें पुनः स्वस्थ होने की किंचित संभावना शेष हो। इस दृष्टिकोण से, सर्वोच्च न्यायालय का यह रुख न केवल एक व्यक्ति की गरिमा की रक्षा करता है, बल्कि एक संपूर्ण परिवार को आर्थिक और मानसिक विनाश से बचाते हुए सामाजिक न्याय के व्यापक उद्देश्यों की भी पूर्ति करता है। इच्छामृत्यु की कानूनी बहस से इतर, मानव इतिहास और साहित्य में ऐसे अनेक 'करुण दृष्टांत' मिलते हैं, जहाँ कानून की धाराओं के बजाय मानवीय संवेदना, विवशता और अपार पीड़ा ने मृत्यु को एक 'वरदान' बना दिया। ये उदाहरण दर्शाते हैं कि कभी-कभी मृत्यु का वरण करना जीवन के प्रति घृणा नहीं, बल्कि असहनीय यातना से मुक्ति की एक करुण पुकार होती है। मुंशी प्रेमचंद के अमर उपन्यास 'गोदान' के अंतिम दृश्य में होरी की मृत्यु का प्रसंग भले ही इच्छामृत्यु का विधिक मामला न हो, पर वह एक 'आर्थिक और शारीरिक यातना' से मुक्ति का करुणतम उदाहरण है। जब होरी लू और अत्यधिक श्रम से टूटकर मरणासन्न होता है, तो उसकी पत्नी धनिया, जो उसे बचाने के लिए जीवन भर लड़ी, अंततः उसकी पीड़ा को देखकर उस मृत्यु को स्वीकार कर लेती है। वह जानती है कि इस व्यवस्था में होरी का जीवित रहना केवल और अधिक अपमान और पीड़ा को सहना है। यहाँ मृत्यु एक 'करुण विश्राम' बन जाती है। भारतीय लोक-कथाओं और कुछ ऐतिहासिक वृत्तांतों में अकाल के समय के ऐसे अनेक वृत्तांत मिलते हैं, जहाँ घर के वृद्ध सदस्य स्वेच्छा से भोजन का त्याग कर देते थे (अनशन)। उनका उद्देश्य यह होता था कि उनके हिस्से का अन्न उनके पोते-पोतियों या युवा सदस्यों को मिल सके ताकि वंश जीवित रहे। यह कोई कानूनी मांग नहीं थी, बल्कि एक 'करुणामय आत्मत्याग' था, जहाँ मृत्यु को इसलिए चुना गया ताकि दूसरे जी सकें। इसमें पीड़ा का अंत और भविष्य का सृजन दोनों निहित थे। इतिहास के युद्धों में ऐसे अनगिनत अनामित दृष्टांत हैं, जहाँ भीषण रूप से घायल सैनिक, जिसके बचने की कोई संभावना नहीं होती थी और जिसकी देह क्षत-विक्षत हो चुकी होती थी, अपने ही साथी से उसे 'अंतिम प्रहार' (Coupe de grâce) करने की याचना करता था। वह साथी, जो उसे प्राणों से प्रिय मानता था, कांपते हाथों से उसे मृत्यु देता था ताकि उसे शत्रुओं की बर्बरता या तड़प-तड़प कर मरने की यातना से बचाया जा सके। यह कृत्य किसी कानून के तहत नहीं, बल्कि 'युद्ध की विभीषिका' और 'मित्रता की करुणा' के बीच का एक अत्यंत दुखद समझौता होता था। अनेक व्यक्तिगत संस्मरणों में ऐसे प्रसंग मिलते हैं जहाँ कैंसर या न्यूरोलॉजिकल विकारों के अंतिम चरणों में रोगी, जो कभी परिवार का आधार था, केवल अपनी आँखों के इशारे से या हाथ दबाकर अपने प्रियजनों से मशीनों को बंद करने की मूक प्रार्थना करता है। कानून भले ही उसे अनुमति न दे, पर वह 'मूक संवाद' जिसमें रोगी की आँखें 'अब बस' कह रही होती हैं, मानवता के इतिहास का सबसे भारी क्षण होता है। यहाँ परिवार का सदस्य कानून की जटिलताओं के बीच उस 'मौन याचना' को पढ़कर ईश्वर से उसकी मृत्यु की प्रार्थना करने लगता है—यही वह बिंदु है जहाँ प्रेम, मृत्यु की मांग करने लगता है। प्राचीन कथाओं में ऐसे दृष्टांत मिलते हैं (जैसे दशरथ का वियोग या अनसूया की कथाएं), जहाँ व्यक्ति किसी प्रियजन के शोक में या उसके बिना जीवन की निरर्थकता को देखते हुए अपने प्राण स्वतः त्याग देता है। यह किसी बाहरी हस्तक्षेप या दवा से नहीं, बल्कि 'संकल्प और विरह' की उस स्थिति से होता था जहाँ शरीर मन की आज्ञा मानकर धड़कना बंद कर देता था। इसे 'इच्छामृत्यु' का आध्यात्मिक और अत्यंत करुण स्वरूप माना जा सकता है, जहाँ जीने की इच्छा का समाप्त होना ही मृत्यु का कारण बनता था। ये दृष्टांत सिद्ध करते हैं कि कानून भले ही तर्क और नियमों पर चलता हो, किंतु मनुष्य का हृदय 'मृत्यु' को तब एक पवित्र शरणस्थली मानने लगता है जब 'जीवन' अपनी गरिमा खोकर केवल एक अंतहीन चीख बन जाता है। सांस्कृतिक और दार्शनिक परिप्रेक्ष्य में देखें तो भारतीय चिंतन परंपरा में जीवन और मृत्यु को कभी भी दो विपरीत ध्रुवों के रूप में नहीं देखा गया, बल्कि इन्हें एक ही चेतना के विस्तार और निरंतर चक्र के रूप में स्वीकार किया गया है। हमारे प्राचीन ग्रंथों में महाप्रयाण, संथारा और भीष्म पितामह को प्राप्त इच्छामृत्यु के वरदान के दृष्टांत इस सत्य के गवाह हैं कि हमारे पूर्वजों ने मृत्यु को भय या निषेध की वस्तु नहीं माना, बल्कि उसे समय की पूर्णता पर शालीनता से वर्ण करने योग्य एक पड़ाव माना। हरीश राणा के माता-पिता का अपनी ही संतान के लिए मशीनों से मुक्ति की याचना करना, उनके पुत्र-मोह के उच्चतर परित्याग और उस अगाध करुणा का प्रमाण है जो संकीर्ण भावनाओं से कहीं ऊपर उठ चुकी है। वे उन आधुनिक ऋषियों के समान हैं जो यह स्वीकार कर चुके हैं कि जीवन का सौंदर्य केवल लंबी आयु में नहीं, बल्कि पीड़ा से मुक्त प्रस्थान में भी निहित हो सकता है। उनके लिए यह निर्णय अपने पुत्र के अंत का नहीं, बल्कि उसकी उस अनंत यात्रा के प्रारंभ का मार्ग प्रशस्त करना है जहाँ न कोई व्याधि है, न सुइयां और न ही अस्पतालों की वह गंध जो जीवन को प्रतिपल डसती है। भविष्य की दिशा निर्धारित करते हुए यह अनिवार्य हो जाता है कि न्यायपालिका के इन ऐतिहासिक निर्णयों को अब एक स्पष्ट, सुदृढ़ और व्यापक विधायी कानून (Statutory Law) का रूप दिया जाए। यद्यपि 'लिविंग विल' और 'एडवांस मेडिकल डायरेक्टिव' जैसे प्रावधान विधिक रूप से मान्य हैं, किंतु व्यावहारिक स्तर पर इनकी जटिलताओं को दूर करना आवश्यक है ताकि एक सामान्य नागरिक भी अपनी पूर्ण चेतना की अवस्था में अपनी अंतिम इच्छा को विधिक स्वरूप दे सके। इसके लिए जिला स्तर पर स्वतंत्र मेडिकल बोर्डों का सशक्तिकरण, प्रक्रिया का सरलीकरण और चिकित्सा पाठ्यक्रमों में 'एंड ऑफ लाइफ केयर' जैसे मानवीय विषयों को प्रमुखता देना समय की मांग है। अंततः सभ्यता का उत्कर्ष इस बात से नहीं नापा जाता कि हमने कितनी गगनचुंबी इमारतें बनाईं या कितने शक्तिशाली अस्त्र जुटाए, बल्कि इस बात से नापा जाता है कि हम अपने सर्वाधिक असहाय और पीड़ाग्रस्त सदस्यों के प्रति कितने संवेदनशील हैं। हरीश राणा का मामला एक विधिक नजीर से कहीं अधिक एक नैतिक दर्पण है। यह हमें सिखाता है कि कभी-कभी 'पकड़कर रखना' स्वार्थ हो सकता है और 'मुक्त कर देना' ही वास्तविक प्रेम। सर्वोच्च न्यायालय का यह निर्णय उस 'करुणामय न्याय' की स्थापना है, जहाँ कानून की शुष्कता मानवीय संवेदनाओं की ओस से भीगकर शीतल हो गई है। जीवन यदि एक उत्सव है, तो उसकी पूर्णाहुति भी गरिमामयी और शांत होनी चाहिए। यही प्राकृतिक न्याय है और यही मानवता का धर्म। डॉ. विद्यासागर उपाध्याय राष्ट्रीय पार्षद - शंकराचार्य परिषद