MMDR संशोधन राज्य और राष्ट्र हित में, JMM-कांग्रेस भ्रम फैला रही है: रघुवर दास

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि भारत सरकार द्वारा हाल ही में लाए गए MMDR (खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन बिल, 2026) अधिनियम राज्य हित और राष्ट्र हित में है, लेकिन झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस इसकी गलत व्याख्या कर राज्य की भोली-भाली जनता के बीच भ्रम फैला रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे डंके की चोट पर कह रहे हैं

कि यह संशोधन झारखंड के हितों के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह हमारे झारखंड को उसकी खनिज संपदा का अधिकतम लाभ दिलाने और लीगल माइनिंग को पारदर्शी बनाने के पक्ष में उठाया गया ऐतिहासिक कदम है। श्री दास पार्टी के प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता को संबोधित कर रहे थे।

श्री दास ने कहा कि झारखंड का बच्चा-बच्चा जानता है कि झामुमो-कांग्रेस के संरक्षण में धनबाद, बोकारो, चतरा, हजारीबाग, साहेबगंज, दुमका, शिकारीपाड़ा में कोयला, बालू, पत्थर सिंडिकेट लूट मचा रहा है।

जो लोग चुनाव में 'जल, जंगल, जमीन' का नारा देकर सत्ता के सिंहासन पर बैठे हैं, उन्होंने सत्ता में आते ही हमारे जल, जंगल, जमीन और प्राकृतिक संसाधनों को सिंडिकेट के हवाले कर दिया और झारखंड को लूटखंड बना दिया है। आप मीडिया के बंधुओं ने भी समय-समय पर सरकार के संज्ञान में इसे लाने का काम किया है। उन्होंने कहा कि झामुमो के महासचिव पत्थर के अवैध खनन मामले में डेढ़ साल होटवार जेल काटकर आए हैं। संथाल के एक मंत्री इसी पत्थर-बालू की दलाली और कमीशनखोरी के चक्कर में जेल जा चुके हैं। झारखंड को लुटखंड में तब्दील करने वाले JMM, कांग्रेस जैस दलों से इस अधिनियम पर कोई सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है।

श्री दास ने कहा कि आज सवाल केवल 11,000 करोड़ रुपये के उपकर (CESS) का नहीं है। असल सवाल यह है कि क्या हम 'वित्तीय अनिश्चितता' (Fiscal Uncertainty) का माहौल बनाकर राज्य में आने वाले बड़े निवेश, अधिक उत्पादन, रोजगार और औद्योगिक क्रांति का रास्ता रोक दें? माइनिंग सेक्टर के कुल टैक्स और वैधानिक भुगतान (Statutory Payment) का लगभग 90% हिस्सा सीधे राज्यों को ही मिलता है, और यह व्यवस्था आगे भी बिना किसी रुकावट के जारी रहेगी।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में पहली बार 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने ही रॉयल्टी के अलावा खनन प्रभावित जिलों के विकास के लिए 'डीएमएफटी' (DMFT) के माध्यम से 30 प्रतिशत अतिरिक्त राशि देने की व्यवस्था लागू की थी। साथ ही हम यह भी मानते रहे हैं कि जनजाति समाज, डीएमएफटी और राज्य की वैध आय (Legitimate Revenue) की पर्याप्त सुरक्षा होनी चाहिए। खनिज संपदा का वास्तविक लाभ स्थानीय लोगों तक पहुंचना चाहिए।

श्री दास ने कहा कि झारखंड सरकार राज्य के राजस्व के लिए कितनी चिंतित है यह इससे साबित होता है कि भारत सरकार द्वारा राज्य में 34 कोल ब्लॉक को चालू करने की मंजूरी मिलने के बाद भी अब तक केवल चार कोल ब्लॉक चालू हो पाये हैं। 30 कोल ब्लॉक को राज्य सरकार ने चालू नहीं कराया है। इसी तरह लौह अयस्क की 15 में से छह माइंस, बॉक्साइड की 37 में से 17 माइंस ही चालू है। ये ब्लॉक और माइंस चालू होते तो राज्य को बहुत बड़ा राजस्व मिलता।

श्री दास ने कहा कि झामुमो-कांग्रेस की सरकार 11,000 करोड़ रुपये के सेस (CESS) का रोना रोती है, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि इस सरकार की नीयत में कितना खोट है। अन्य राज्यों से तुलना एवं DMFT की स्थिति समान खनिज भंडार होने के बावजूद, ओडिशा वित्तीय वर्ष 2025-26 में ₹60,000 करोड़ राजस्व का लक्ष्य हासिल कर रहा है, जबकि झारखंड का लक्ष्य केवल ₹18,844 करोड़ है। ओडिशा की त्वरित नीलामी और खदान संचालन प्रक्रिया के कारण उसकी राजस्व दक्षता झारखंड से 3 गुना अधिक है। इसके अलावा, DMFT के कुल संग्रह (₹18,250 करोड़) में से ₹7,915 करोड़ से अधिक की राशि बिना खर्च पड़ी है और 2,487 प्रोजेक्ट्स ठप्प हो चुके हैं।

श्री दास ने कहा कि खनन से प्रभावित हमारे जिलों का हाल देखिए, धनबाद में 2,393.58 करोड़ रुपये, चाईबासा में 1,802.82 करोड़, चतरा में 1,055.40 करोड़, पाकुड़ में 527.88 करोड़ और रामगढ़ में 518.82 करोड़ रुपये का डीएमएफटी फंड खर्च ही नहीं किया गया। 2,487 योजनाएं रद्द, अस्पतालों में दवा नहीं, पीने का साफ पानी नहीं, चाईबासा में लोग लाल पानी और धनबाद में काला पानी पीने को मजबूर हैं। डीएमएफटी में राज्य सरकार द्वारा कुछ राशि खर्च भी की गई है, तो वह घोटाले की भेंट चढ़ गई है। डीएमएफटी घोटाले से संबंधित खबरें लगातार आती रही हैं।

श्री दास ने कहा कि हमारा हमेशा से मानना रहा है कि जनजातीय समाज, डीएमएफटी फंड और राज्य के वैध राजस्व की पूरी सुरक्षा होनी चाहिए। डीएमएफटी की राशि खनन क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा आदि की आधारभूत संरचना पर खर्च की जानी चाहिए, लेकिन इस सरकार ने क्या किया? अस्पतालों में उपकरण नहीं हैं, एंबुलेंस नहीं हैं और जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही है। इतना ही नहीं, इस सरकार की सरपरस्ती में चल रहे अवैध धंधों के कारण वैध खनन (Legal Mining) का भारी नुकसान हुआ है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2024-25 की पहली तिमाही (अप्रैल-जुलाई) में जहाँ कोयले का उत्पादन 44.78 मिलियन टन था, वहीं 2025-26 की इसी अवधि में यह घटकर 37.25 मिलियन टन पर आ गया। जब लीगल माइनिंग घटेगी, तो राज्य का वैध राजस्व अपने आप घटेगा।

श्री दास ने कहा कि सेस लगाये जाने के कारण झारखंड का कोयला व लोहा पहले ही महंगा हो चुका है। सेस के कारण लागत दर बढ़ गयी है। इससे झारखंड के कोयला-लोहा की मांग घट गयी है। उदाहरण के लिए, ग्रेड 8 से ग्रेड 12 कोयले की दर झारखंड में 2045-3212 रुपये प्रति टन ओड़िशा और छत्तीसगढ़ में 1514-2681 रुपये प्रति टन की दर से उपलब्ध है। इसी तरह, लोहा (एक ही क्वालिटी की तुलना करें तो) झारखंड में 8284 रुपये प्रति टन, ओड़िशा में 7493 रुपये प्रति टन, छत्तीसगढ़ में 7422 रुपये प्रति टन की दर पर उपलब्ध है।

श्री दास ने कहा कि यदि लीगल माइनिंग आर्थिक रूप से सुदृढ़ होगी और सप्लाई चेन पारदर्शी (Formal) होगी, तो अवैध माइनिंग का 'प्राइस एडवांटेज' खत्म हो जाएगा। लीगल माइनिंग से रॉयल्टी, नीलामी प्रीमियम, डीएमएफटी, रोजगार और डाउनस्ट्रीम उद्योगों में जो आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी, वह इस 11,000 करोड़ से कहीं बड़ा 'इकोनॉमिक मल्टीप्लायर' (Economic Multiplier) झारखंड को लाकर देगा। विगत 6 वर्षों में राज्य में 26 खदानों के पट्टे समाप्त हो गए। यदि सरकार समय पर पारदर्शी नीलामी करती, तो आज राज्य को अरबों रुपये की नीलामी राशि, रॉयल्टी और प्रीमियम मिलता। स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलता और अवैध खनन पर अंकुश लगता। टाटा कंपनी की एक माइंस की लीज समाप्त हो गयी है, वह भी तीन माह से मंजूरी के इंतजार में है।

श्री दास ने सवालिया लहजे में पूछा कि सरकार बताएं कि 6 साल में किस आदिवासी मूलवासी की दशा सुधरी है। कांग्रेस और झामुमो का यह विरोध राज्य के हित में नहीं, बल्कि अपने अवैध सिंडिकेट और जेब में आ रहे काले धन को बचाने की आखिरी छटपटाहट है। छात्रों और युवाओं के साथ सात साल से छल कर रही यह सरकार मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए झूठा आंदोलन खड़ा करने की धमकी दे रही है। लेकिन झारखंड की जनता अब इनके इस लूट तंत्र को पूरी तरह समझ चुकी है और इसका मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार है।

इस दौरान प्रेस वार्ता में प्रदेश मीडिया प्रभारी योगेन्द्र प्रताप सिंह और प्रदेश प्रवक्ता केके गुप्ता भी उपस्थित रहे।

अमेरिका पहुंचे आरएसएस चीफ, जोहरान ममदानी ने किया मोहन भागवत के कार्यक्रम का विरोध

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत अभी अमेरिका दौरे पर हैं। मोहन भागवत मंगलवार को अमेरिका पहुंचे। मैडिसन स्क्वायर गार्डन में उनका एक बड़ा कार्यक्रम होना है। मगर उस कार्यक्रम का अमेरिका में विरोध हो रहा है। अब अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर के मेयर जोहरान ममदानी ने मोहन भागवत के मैडिसन स्क्वायर गार्डन कार्यक्रम का विरोध किया है।

न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी ने शहर के मैडिसन स्क्वायर में होने वाले एसएसएस प्रमुख के कार्यक्रम का विरोध किया है। ममदानी ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "मैं रैली का समर्थन नहीं करता, लेकिन मुझे नहीं पता कि क्या शहर के पास किसी निजी कार्यक्रम को रद्द करने का अधिकार है।" ममदानी ने ये बात RSS के मैडिसन स्वाक्यर गार्डन में होने वाले कार्यक्रम और उसके खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों से जुड़े एक सवाल का जवाब देते हुए कही। उनसे पूछा गया कि क्या यह कार्यक्रम रद्द किया जाना चाहिए।

भारत के बारे में क्या बोले ममदानी ?

न्यूयॉर्क के पहले भारतीय-अमेरिकी मेयर ममदानी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी भारतीय मूल की पृष्ठभूमि के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा, "मैं यहाँ हमारे शहर के इतिहास के पहले भारतीय-अमेरिकी मेयर के तौर पर भी खड़ा हूं। मेरी मां का परिवार अभी भी भारत में है। मेरे परिवार ने मुझे भारत की जो छवि दिखाई और जिसे देखते हुए मैं बड़ा हुआ, वह एक विविधतापूर्ण समाज की थी- एक धर्मनिरपेक्ष गणराज्य जो भारत के हर व्यक्ति के अपनेपन में विश्वास रखता था।"

आंदोलन को लेकर जताई आपत्ति

ममदानी ने आगे कहा, "सच कहूं तो किसी भी देश के लिए ऐसे आंदोलन का उभरना बेहद चिंताजनक है, जिसकी सोच समाज के कुछ लोगों को अलग रखने या बाहर करने वाली दृष्टि पर आधारित हो। यही कारण है कि मैं इसका गहरा विरोध करता हूं। यह विरोध सिर्फ एक भारतीय-अमेरिकी होने के नाते नहीं है, बल्कि एक ऐसे शहर के मेयर के रूप में भी है, जो इस बात पर गहरा विश्वास करता है कि हर व्यक्ति का समान रूप से स्थान है, चाहे उसका रंग, विचारधारा, धर्म, आस्था या मूल स्थान कुछ भी हो।"

यूएससीआईआरएफ ने की आरएसएस को बैन करने की मांग

इस दौरे से पहले अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग यानी यूएससीआईआरएफ ने आरएस नेतृत्व के साथ उच्चस्तरीय संपर्क से बचने की सिफारिश की थी। यूएससीआईआरएफ कमिश्नर जीन मिल्स ने कहा कि आरएसएस नेताओं को, भले ही वे भारत सरकार से जुड़े हों, हाई-लेवल मीटिंग या राजनयिक सम्मान नहीं दिया जाना चाहिए। इसके बजाय, अमेरिकी सरकार (USG) को उन आरएसएस सदस्यों पर प्रतिबंध लगाने पर ध्यान देना चाहिए, जो फ्रीडम ऑफ रिलिजन ऑर बिलीफ यानी धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार पाए गए हैं।

न्यूयॉर्क में 29 अगस्त को बड़ा कार्यक्रम

बता दें कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के वैश्विक संपर्क अभियान के तहत अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन का दौरा है। भागवत आरएसएस के 100 साल पूरे होने के मौके पर वैश्विक संपर्क कार्यक्रम के तहत मंगलवार को अमेरिका पहुंचे। न्यूयॉर्क में वह 29 अगस्त को मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित "यूनिवर्सल ऑननेस सेलिब्रेशन" कार्यक्रम में भारतीय मूल के लोगों को संबोधित करेंगे। आयोजकों के अनुसार इस कार्यक्रम में करीब 5,000 लोगों के शामिल होने की उम्मीद है।

अचानक मॉस्को क्यों पहुंचे CIA चीफ? मॉस्को में सीक्रेट लैंडिंग से पूरी दुनिया में खलबली

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रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच मास्को में सोमवार को एक अप्रत्याशित घटना देखने को मिली है। जिसके बाद पूरी दुनिया खासकर यूरोप में खलबली मच गई है। मंगलवार को अचानक अमेरिकी एयरफोर्स का विमान मॉस्को की जमीन पर उतरा। विमान लैंड होते ही अंदर से निकले दुनिया की सबसे खतरनाक खुफिया एजेंसी CIA के चीफ जॉन रैटक्लिफ। यह विमान मॉस्को के वनुकोवो हवाई अड्डे पर उतरा था, जिसके बाद से इस घटना को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।

अमेरिका-रूस की खुफिया एजेंसियों में संपर्क

सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, एक अमेरिकी अधिकारी ने पुष्टि की है कि सीआईए चीफ जॉन रैटक्लिफ ने मंगलवार को मॉस्को का दौरा किया। उन्होंने बताया कि सीआईए प्रमुख मॉस्को में अपने समकक्ष के साथ बैठक के लिए C-17 ग्लोबमास्टर विमान से रूस पहुंचे हैं। मामले से परिचित लोगों ने सीबीएस रिपोर्टर ओलिविया गाज़िस को बताया कि रैटक्लिफ मंगलवार को मॉस्को में बैठकें करने वाले थे।

सीक्रेट यात्रा की खबर से मचा हड़कंप

वॉशिंगटन से लेकर मॉस्को तक इस सीक्रेट यात्रा की खबर फैलते ही हड़कंप मच गया है। हालांकि, न तो व्हाइट हाउस और न ही क्रेमलिन ने आधिकारिक तौर पर इस दौरे की पुष्टि की है। लेकिन फ्लाइट-ट्रैकिंग डेटा से लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो इस बात की गवाही दे रहे हैं कि पर्दे के पीछे कोई बहुत बड़ी रणनीतिक डील चल रही है।

सीआईए चीफ क्यों पहुंचे रूस?

सीआईए डायरेक्टर का पद संभालने के बाद जॉन रैटक्लिफ की यह पहली मॉस्को यात्रा है। इस दौरे में भविष्य में कैदियों की अदला-बदली को लेकर संवेदनशी बातचीत भी शामिल हो सकती है। अप्रैल 2025 में अमेरिका और रूस की दोहरी नागरिकता रखने वाली केसिनिया करे़लिना की रिहाई में रैटक्लिफ की व्यक्तिगत भूमिका रही थी। सीआईए ऐतिहासिक रूप से सिर्फ खुफिया जानकारी जुटाने का काम ही नहीं करती, बल्कि अमेरिका और रूस के बीच मुश्किल बैक-चैनल कूटनीति को संभालने में भी बड़ी भूमिका निभाती रही है। ऐसे में ये दौरा काफी अहम माना जा रहा है।

अपर बाजार महावीर मंदिर में भव्य रुद्राभिषेक, उज्जैन की तर्ज पर हुई अलौकिक श्रृंगार आरती

गोविंदपुर,अपर बाजार स्थित प्राचीन महामंत्र महावीर मंदिर में मंगलवार को आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। मंदिर परिसर में सुबह से ही भव्य रुद्राभिषेक और शाम को उज्जैन की तर्ज पर महादेव की अलौकिक श्रृंगार आरती का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा।

सुबह वैदिक मंत्रोच्चार के साथ शुरू हुए रुद्राभिषेक कार्यक्रम में काशी से पधारे आचार्य सोनू पांडेय जी ने विधि-विधान से पूजन संपन्न कराया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ का जल, दूध, दही, शहद और बेलपत्र आदि से अभिषेक कर सुख-समृद्धि और परिवार की मंगलकामना की। पूरे आयोजन के दौरान मंदिर परिसर 'हर-हर महादेव' और 'बम-बम भोले' के जयकारों से गूंजता रहा।

सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।

वहीं शाम होते ही आयोजन का मुख्य आकर्षण महादेव की भव्य श्रृंगार आरती रही। उज्जैन के महाकाल की तर्ज पर भगवान शिव का अद्भुत और अलौकिक श्रृंगार किया गया, जिसने हर किसी का मन मोह लिया। आकर्षक फूलों और चंदन से सजे महादेव के स्वरूप के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे थे। आरती के दौरान पूरा परिसर दीपों की रोशनी और घंट-घड़ियाल की ध्वनि से जगमगा उठा। आरती के पश्चात सभी भक्तों के बीच प्रसाद का वितरण किया गया।

इस धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में ऊपर बाजार के विवेकानंद पांडेय, सूरज पांडेय, दीपक पांडेय सहित स्थानीय युवाओं की अहम भूमिका रही। वहीं मंसाराम अग्रवाल परिवार की ओर से राजेश अग्रवाल, शरद अग्रवाल, शंकर अग्रवाल, गोपाल अग्रवाल और गोविंद अग्रवाल सहित परिवार के सभी सदस्यों ने बढ़-चढ़कर सहयोग किया।

श्रद्धालुओं ने कहा कि इस तरह के धार्मिक आयोजन समाज में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करने के साथ-साथ आपसी एकता और भाईचारे को भी मजबूत करते हैं।

NEET-PG 2026 को लेकर रांची में निषेधाज्ञा लागू, 4 परीक्षा केंद्रों के 200 मीटर दायरे में 5 या अधिक लोगों के जुटने पर रोक

NEET - PG 2026 परीक्षा दिनांक 30.08.2026 को रांची जिला के 04 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की गयी है। परीक्षा के कदाचारमुक्त संचालनार्थ एवं विधि-व्यवस्था संधारण हेतु उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, राँची एवं अपर जिला दंडाधिकारी (विधि-व्यवस्था), रांची के आदेश पर पुलिस बल एवं पुलिस पदाधिकारी के साथ दंडाधिकारी की प्रतिनियुक्ति की गई है। परीक्षा केंद्रों में असामाजिक तत्व भीड़ लगाकर विधि-व्यवस्था भंग करने की चेष्टा कर सकते हैं, इस आशंका को देखते हुए अनुमंडल दंडाधिकारी, सदर, राँची द्वारा BNSS की धारा-163 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए इन परीक्षा केन्द्रों के 200 मीटर की परिधि में निषेधाज्ञा जारी की गई है, जो निम्न है :-

1- पाँच या पाँच से अधिक व्यक्तियों का एक जगह जमा होना (सरकारी कार्य में लगे पदाधिकारियों/कर्मचारियों तथा सरकारी कार्यक्रम एवं शवयात्रा को छोड़कर)।

2- किसी प्रकार का ध्वनि विस्तारक यंत्र का व्यवहार करना।

3- किसी प्रकार का अस्त्र-शस्त्र, जैसे बंदूक, राईफल, रिवाल्वर, बम, बारूद आदि लेकर चलना (सरकारी कार्य में लगे पदाधिकारियों/कर्मचारियों को छोड़कर)।

4- किसी प्रकार का हरवे हथियार जैसे-लाठी-डंडा, तीर-धनुष, गड़ासा भाला आदि लेकर चलना (सरकारी कार्य में लगे पदाधिकारियों/कर्मचारियों को छोडकर)।

5- किसी प्रकार की बैठक या आमसभा का आयोजन करना।

यह निषेधाज्ञा दिनांक 30.08.2026 के प्रातः 06:00 बजे से अपराह्न 03:30 बजे तक प्रभावी रहेगा।

परीक्षा केंद्रों के नाम :-

1. Ram Tahal Choudhary Institute of Technology RTCIT Anandi, Ormanjhi Block Chowk, Ranchi, Jharkhand, India, 835219

2. Arununma Technical Services Pvt. Ltd. Pragati Path, Road No.-6 Samlong, Lower Chutia, Near Ganesh Nursing Home, Ranchi, 834010

3. ICube Digital Near Medanta Hospital, Cafeteria Building, Irba, Ranchi, 835217

4. Oxford Public School, Old H B Road, Pragati Path, Ranchi, Jharkhand, 834001

छात्रों पर एकतरफा कार्रवाई को लेकर रांची सदर सीओ के कार्यालय पहुंचे बाबूलाल मरांडी, झामुमो के गुंडो पर की FIR दर्ज करने की मांग

JPSC एवं JSSC-CGL परीक्षा में हुई धांधली एवं राज्य सरकार की साजिश के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्रों के साथ हो रही ज्यादती को लेकर भाजपा लगातार छात्रों के पक्ष में खड़ी दिख रही है। पुतला दहन कार्यक्रम के दौरान तैनात दंडाधिकारी के द्वारा छात्रों पर की गई एकतरफा कार्रवाई को लेकर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी भाजपा के अन्य नेताओं के साथ रांची सदर के अंचलाधिकारी सह मजिस्ट्रेट के कार्यालय पहुंच गए। श्री मरांडी ने कहा कि किसी भी पदाधिकारी को सरकार की कठपुतली बनने की बजाय कानून और विधि सम्मत काम करनी चाहिए। लेकिन पुतला दहन कार्यक्रम के दौरान नियुक्त मजिस्ट्रेट ने एकतरफा कार्रवाई किया है। हम सभी ऐसे अधिकारियों को दायित्व बोध कराने के लिए आए हैं।

श्री मरांडी ने कहा कि उस दिन jmm के गुंडों ने आतंक मचाया और मुकदमा छात्रों पर किया जा रहा है। इसलिए आज हम सभी दंडाधिकारी सह सीओ से आग्रह करने आए हैं कि वे निष्पक्ष कार्रवाई करें। अगर दंडाधिकारी द्वारा उन गुंडों पर एफआईआर दर्ज नहीं किया जाता है तो जल्द ही इनके कार्यालय के समक्ष हम सभी धरना पर बैठेंगे।

श्री मरांडी ने कहा कि बीते दिनों छात्र पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत शांतिपूर्वक पुतला दहन कर रहे थे। छात्रों के कार्यक्रम में जिन लोगों ने भी विघ्न डाला है, छात्राओं से दुर्व्यवहार किया है, दंडाधिकारी ने उन लोगों के ऊपर FIR दर्ज नहीं किया है। आज सोशल मीडिया का जमाना है। सोशल मीडिया पर कई सारे वीडियो और अन्य सुबूत मौजूद हैं जो चीख चीख कर गवाही दे रहे हैं कि उस दिन कौन लोग गुंडागर्दी कर रहे थे। दंडाधिकारी को निष्पक्ष होकर सामान्य रूप से पहले जिन लोगों ने गुंडागर्दी की है, उन लोगों पर एफआईआर दर्ज करनी चाहिए थी लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। ऐसा प्रतीत होता है कि दंडाधिकारी पूरी तरह सरकार के दबाव में हैं। झारखंड में दबाव का आलम यह है कि यहां SP के दफ्तर में सीआईडी के इंचार्ज मनोज कौशिक बैठकर काम करते हैं।

नेता प्रतिपक्ष ने 24 अगस्त को ही चेतावनी दी थी कि अगर JMM के गुंडों पर एफआईआर दर्ज नहीं हुआ तो वे 25 अगस्त को संबंधित मजिस्ट्रेट के कार्यालय पहुंच कर उनसे निष्पक्ष कार्रवाई की मांग करेंगे।

इस दौरान दीपक प्रकाश, सीपी सिंह, योगेंद्र प्रताप सिंह, वरुण साहू सहित सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

सात साल बाद भारत के दौरे पर आ सकते हैं शी जिनपिंग, 400 अधिकारियों का काफिला होगा साथ ?

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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अगले महीने नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स समिट में शामिल हो सकते हैं। यह उनका 7 साल बाद भारत का पहला दौरा होगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिनपिंग के साथ करीब 400 अधिकारियों का बड़ा प्रतिनिधिमंडल आ सकता है। भारत 12-13 सितंबर को ब्रिक्स सम्मेलन की मेजबानी करेगा।

शी के दौरे की तैयारियों में जुटे चीनी अधिकारी

रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में कहा है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के ब्रिक्स समिट में एक बड़े प्रतिनिधिमंडल के साथ शामिल होने की संभावना है। हालांकि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के आने की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार चीनी अधिकारी होटल और सुरक्षा तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। अन्य भारतीय सूत्रों ने भी कहा कि शी के साथ करीब 400 अधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल भारत आ सकता है। अगर ऐसा होता है, तो यह 2019 की तुलना में काफी बड़ा दल होगा। 2019 में शी के साथ भारत आने वाले अधिकारियों की संख्या 200 से कम थी।

क्यों अहम होगा जिनपिंग का दिल्ली दौरा?

शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि दोनों देशों के संबंध पिछले कुछ वर्षों से तनावपूर्ण रहे हैं। पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सात साल में पहली बार चीन का दौरा किया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच रिश्तों में कुछ सुधार के संकेत जरूर मिले, लेकिन संबंध पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाए हैं। हाल ही में सीमा से जुड़े एक नए विवाद को लेकर दोनों देशों के बीच तीखी राजनयिक बयानबाजी भी हुई थी। ऐसे में नई दिल्ली में शी की मौजूदगी भारत-चीन संबंधों को स्थिर करने की कोशिशों के लिए अहम अवसर बन सकती है।

2020 को बाद रिश्तों में बढ़ी तल्खी

साल 2020 में बॉर्डर पर (गलवान में) झड़प के बाद भारत और चीन के रिश्ते निचले स्तर पर पहुंच गए थे। हालिया महीनों में दोनों देशों की ओर से चीजों को पटरी पर लाने की कोशिश होती दिखी है। ब्रिक्स समिट इसमें अहम मोड़ साबित हो सकती है। जिनपिंग के भारत दौरे की तैयारियों में एलएसी पर शांति और सीमा विवाद सबसे अहम मुद्दों में है। दोनों देश सीमा पर ऐसी व्यवस्था बनाने पर बात कर रहे हैं, जिससे किसी सैन्य घटना या तनाव का असर द्विपक्षीय रिश्तों पर न पड़े।

ब्रिक्स समिट की अध्यक्षता कर रहा है भारत

इस साल ब्रिक्स की कमान भारत के पास है। ब्रिक्स दुनिया की बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाओं का समूह है। इसमें भारत, रूस, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के साथ मिस्र, ईरान, इथियोपिया, यूएई और इंडोनेशिया भी शामिल हैं। भारत की अध्यक्षता में पूरे साल अलग-अलग शहरों में बैठकें, मंत्रीस्तरीय सम्मेलन और कई स्तर की चर्चाएं हो रही हैं। भारत का फोकस ग्लोबल साउथ की आवाज मजबूत करने, आर्थिक सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल तकनीक, आतंकवाद से निपटने और सप्लाई चेन मजबूत करने पर है। यानी ब्रिक्स को सिर्फ राजनीतिक मंच नहीं, बल्कि व्यापार, निवेश और विकास के बड़े मंच के तौर पर आगे बढ़ाने की कोशिश है।

राहुल गांधी और खरगे ने पीएम मोदी को लिखी चिट्ठी, डेटा जुटाने के तरीके का किया विरोध, दिए ये सुझाव

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कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर जाति जनगणना की मौजूदा प्रक्रिया पर गंभीर चिंता जताई है। दोनों नेताओं ने संयुक्त रूप से पत्र लिखकर जनगणना में पूछे जाने वाले सवाल बदलने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इसे बनाने से पहले राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों और जनता से सलाह ली जानी चाहिए।

मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर पोस्ट में कहा, “ओपन-एंडेड सवालों के जरिए जातियों की सही गिनती संभव नहीं है। खड़गे और राहुल गांधी ने कहा कि भारत में एक ही जाति अलग-अलग क्षेत्रों में अलग नामों, उपजातियों और भाषाई रूपों से जानी जाती है। एक ही जाति अलग-अलग नामों और उपजातियों में दर्ज हुई तो आंकड़े बिखरेंगे और सबसे बड़ा नुकसान ओबीसी, अति पिछड़े और वंचित समुदायों को होगा। हमारी मांग स्पष्ट है कि मौजूदा प्रश्नावली रद्द हो, जातियों की प्रमाणित सूची के आधार पर नई प्रश्नावली बने और राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों व जनता से व्यापक परामर्श किया जाए।”

पहले से तैयार और प्रमाणित सूची इस्तेमाल करने का सुझाव

खड़गे और राहुल गांधी ने जातियों की पहचान के लिए पहले से तैयार और प्रमाणित सूची इस्तेमाल करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की गणना में इसी तरह की सूची का इस्तेमाल किया जाता है। सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों की मौजूदा सरकारी सूचियों तथा भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण की सूची के आधार पर ऐसी सूची तैयार की जा सकती है।

बिहार-तेलंगाना जैसी प्रक्रिया अपनाने की मांग

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि तेलंगाना और बिहार में हुए जाति सर्वेक्षणों में भी इसी तरह की प्रक्रिया अपनाई गई थी। उन्होंने प्रधानमंत्री को दोनों राज्यों के जाति सर्वेक्षणों में इस्तेमाल की गई सूचियों की प्रतियां भी भेजी हैं। दोनों नेताओं ने स्पष्ट कहा कि मौजूदा तरीके से हो रही जाति जनगणना उन्हें स्वीकार नहीं है और सरकार को नई प्रक्रिया तैयार करनी चाहिए।

शिबू सोरेन के गांव से देवेंद्र महतो की नई मुहिम, शुरू की भर्ती प्रणाली सुधार यात्रा*

झारखंड में सरकारी नियुक्तियों और प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी को लेकर छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने एक नई मुहिम शुरू की है। पहले से ही जेपीएससी-जेएसएससी को लेकर चल रहे विवाद के बीच देवेंद्र नाथ महतो ने सोमवार को रामगढ़ जिले के नेमरा गांव से ‘भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा' की शुरुआत की।

लुकईयाटांड़ से 'भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा' शुरू

हालांकि, देवेंद्रनाथ महतो ने सीएम हेमंत सोरेन के पैतृक गांव नेमरा के अपनी यात्रा की शुरुआत करने वाले थे। इस सूचना पर नेमरा गांव के स्थानीय ग्रामीण देवेन्द्र नाथ महतो के खिलाफ गोलबंद हो गए। ग्रामीणों ने सख्त चेतावनी दी कि वो देवेंद्रनाथ महतो को गांव में घुसने नहीं देंगे। नेमरा गांव के ग्रामीणों ने हाथ में कुल्हाड़ी, फरसा और तीर-धनुष लेकर सड़क को जाम कर दिया। नेमरा गांव के ग्रामीणों के भारी विरोध के बीच देवेंद्र नाथ महतो नेमरा से करीब चार किलोमीटर दूर लुकईयाटांड़ गांव पहुंचे। वहां दिशोम गुरु शिबू सोरेन की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के बाद उन्होंने अपनी यात्रा की शुरुआत की। लुकईयाटांड़ में ही शिबू सोरेन के पिता सोबरन मांझी की हत्या की गई थी।

सभी 24 जिले तक पहुंचेगी यात्रा

देवेंद्रनाथ महतो ने 'भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा' की शुरूआत लुकईयाटांड़ स्थित शिबू सोरेन की आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण कर की। मौके पर भारी बारिश के बीच बड़ी संख्या में छात्र प्रदर्शनकारी भी मौजूद थे।

इस क्रम में देवेंद्र नाथ महतो ने एक सखुआ का पेड़ उस परिसर में लगाया और उस पेड़ का संकल्प लेकर राज्य के सभी 24 जिले के लिए अपनी यात्रा की शुरुआत की। इस दौरान पत्रकारों से बात करते हुए देवेंद्र नाथ महतो ने बताया कि भर्ती व्यवस्था सुधर यात्रा का शुभारंभ सखुआ पौधरोपण के बाद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह झारखंड के नव निर्माण की यात्रा है।

परीक्षा व्यवस्था में सुधार और पारदर्शी बनाने की मांग

मीडिया से बातचीत में देवेंद्रनाथ महतो ने कहा कि झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी की भर्ती परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है। परीक्षा व्यवस्था में सुधार और पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की मांग को लेकर यह यात्रा शुरू की गई है। उन्होंने कहा कि परीक्षा में गड़बड़ी के खिलाफ लाखों छात्रों ने आंदोलन किया, जिसके बाद राज्य सरकार ने भी मामले को गंभीरता से लिया और छात्रों से वार्ता की।

पेपर लीक और धांधली को रोकने की मांग

देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि वो छात्रों की आवाज को हर गांव तक पहुंचाएंगे और इस अभियान से गांवों और शहरों को जोड़ने का काम करेंगे। उन्होंने कहा यहां कि व्यवस्था में भ्रष्टाचार को खत्म करना होगा, पेपर लीक को रोकना होगा और सरकार को भविष्य की सभी परीक्षाओं पर कार्रवाई करनी होगी। 45 विवादित परीक्षाओं पर लिया गया फैसला कायम रहना चाहिए। चाहे यह मामला हाईकोर्ट जाए या कहीं और, यह आदेश लागू रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि कि भविष्य में किसी भी परीक्षा में कोई गड़बड़ी न हो, सरकार गारंटी दे कि कोई पेपर लीक न हो, कोई धांधली न हो और लॉबिंग के ज़रिए कोई नौकरी न मिले।

ट्रंप के बेटे के सिर पर ईरान ने रखा 95 करोड़ का इनाम, नेतन्याहू ने भी अपने बेटे को लेकर किया बड़ा दावा

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ईरान और अमेरिकी संघर्ष के बीच यूएस राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के परिवार को धमकी मिली है। ईरान ने कथित तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और मेलानिया के बेटे बैरन को मारने पर इनाम का ऐलान किया है। ईरान के सरकारी टेलिविजन पर प्रसारित एक वीडियो में बैरन ट्रंप तक पहुंचने के तरीकों के बारे में बताया गया है। यही नहीं ट्रंप के बेटे के सिर पर 10 मिलियन डॉलर (95 करोड़ रुपए से ज्यादा) का इनाम भी रखा गया है। वहीं, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया है कि ईरान ने उनके बेटे की हत्या करने की कोशिश की।

बैरन ट्रंप तक पहुंचने के तरीके बताए

ईरानी गार्ड कोर (IRGC) से जुड़े मीडिया की ओर से जारी और ईरानी सरकारी टीवी के चैनल 3 पर दिखाए गए वीडियो में बताया गया है कि बैरन ट्रंप को कहां और कैसे मारें। इसमें 20 साल के बैरन की गतिविधियों के बारे में जानकारी दी गई है। क्लिप में दावा किया गया है कि बैरन पर नजर रखी जा रही है। इसमें दावा किया गया है कि एक लड़की सीक्रेट सर्विस की सुरक्षा को चकमा देकर बैरन के बगल में बैठ गई थी। ऐसे में उस तक पहुंचा जा सकता है।

बैरन के ऑनलाइन गेमिंग और बातचीत से जुड़े दावे भी किए गए

रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के सरकारी चैनल 3 पर टेलिकास्ट वीडियो का टाइटल Where to Kill Barron Trump है। इसमें बैरन ट्रंप की गतिविधियों और उनकी सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी जानकारी दिखाने का दावा किया गया। इसमें उनकी ऑनलाइन गेमिंग और बातचीत से जुड़े कुछ दावे भी किए गए हैं। वीडियो में दावा किया गया कि बैरोन ट्रंप अपने सुरक्षा घेरे से दूर Xbox पर वॉयस और टेक्स्ट के जरिए बातचीत करते हैं और Xbox, FIFA वीडियो गेम्स एवं डिस्कॉर्ड पर उनके अकाउंट का पता लगा लिया गया है।

ट्रंप की पत्नी मेलानिया को लेकर भी आया था वीडियो

यह पहली बार नहीं है, जब ईरानी स्टेट मीडिया से जुड़े किसी वीडियो में ट्रंप परिवार को निशाना बनाने की बात सामने आई हो। पिछले महीने ईरान के सरकारी टेलीविजन ने एक ऐसा वीडियो जारी किया था, जिसमें खुले तौर पर अमेरिकी प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप को निशाना बनाया गया था। उस वीडियो में मेलानिया के सार्वजनिक कार्यक्रमों, यात्रा और न्यूयॉर्क में उनकी गतिविधियों से जुड़ी तस्वीरें दिखाई गई थीं। रिपोर्ट के मुताबिक, वीडियो के अंत में बैरन ट्रंप का भी जिक्र किया गया था।

नेतन्याहू का भी विस्फोटक दावा

वहीं, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया है कि ईरान ने उनके एक बेटे की भी हत्या की कोशिश की थी, जिसके बाद उनके परिवार की सुरक्षा बढ़ाई गई है। नेतन्याहू ने यह बात इजरायली टीवी चैनल 14 को दिए एक इंटरव्यू में कही। पत्रकार नोआम अमीर से बातचीत के दौरान उन्होंने दावा किया कि ईरान ने उनके एक बेटे को मारने की साजिश रची थी। हालांकि उन्होंने इसे लेकर ये साफ नहीं किया कि निशाना छोटे बेटे थे या बड़े बेटे। इसके बाद बैरन ट्रंप को दी गई पब्लिक थ्रेट ये साफ कर रही है कि ईरान एक मानसिक खेल खेल रहा है, ताकि दुश्मनों का हौसला तोड़ा जा सके.