प्रमोशन एरियर को लेकर KNIT में विरोध के सुर तेज,काली पट्टी बांधकर प्रोफेसर ने जताया आक्रोश
सुलतानपुर।कमला नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (KNIT) में प्रमोशन के बाद देय एरियर को लेकर विवाद थमने के बजाय तूल पकड़ता नजर आ रहा है। एरियर भुगतान की मांग को लेकर प्रोफेसर अरुणी सिंह ने काली पट्टी बांधकर संस्थान में कार्य किया, जिससे संस्थान की वित्तीय और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। मामला अब संस्थान की चारदीवारी से निकलकर उच्चाधिकारियों तक पहुंच चुका है।
*12 अगस्त को भेजे ई-मेल से मचा हड़कंप*
प्रोफेसर अरुणी सिंह की ओर से 12 अगस्त 2026 को भेजे गए ई-मेल में प्रमोशन एरियर का भुगतान कराने की मांग की गई है। शिकायत में KNIT निदेशक डॉ. आरके उपाध्याय को पद से हटाने का अनुरोध भी किया गया है। पत्र की प्रतिलिपि KNIT के रजिस्ट्रार, तकनीकी शिक्षा विभाग और AKTU के कुलपति कार्यालय को भेजे जाने की बात कही गई है।
*वेतन संशोधित तो एरियर क्यों लंबित?*
पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल प्रमोशन के बाद देय एरियर को लेकर है। यदि संबंधित कर्मचारी की पदोन्नति की औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं और संशोधित वेतनमान के अनुसार भुगतान किया जा रहा है, तो पिछली अवधि का देय एरियर किस वजह से लंबित है, इसका जवाब संस्थान को देना होगा।
एरियर वेतन का ही बकाया हिस्सा होता है। ऐसे में भुगतान प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से जटिल बनाए जाने अथवा फाइल लंबित रहने की स्थिति वित्तीय पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े करती है। हालांकि, शिकायत के आधार पर किसी वित्तीय अनियमितता या हेराफेरी का निष्कर्ष निकालना जांच के बिना उचित नहीं होगा।
*काली पट्टी ने बढ़ाई बेचैनी*
एरियर भुगतान को लेकर प्रोफेसर अरुणी सिंह का काली पट्टी बांधकर कार्य करना विरोध का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है। खास बात यह है कि विरोध के साथ संस्थान में कार्य भी जारी रखा गया। इससे संकेत मिलता है कि मामला अब केवल पत्राचार तक सीमित नहीं है, बल्कि संबंधित शिक्षक की ओर से इसे लेकर सार्वजनिक रूप से असहमति दर्ज कराई जा रही है।
*फाइल खोली जाए तो सामने आएगी असली तस्वीर*
मामले में यह जांच का विषय है कि प्रमोशन किस तारीख से प्रभावी हुआ, संशोधित वेतन कब लागू हुआ, एरियर की कुल राशि कितनी है, भुगतान में देरी का कारण क्या है और फाइल किन-किन अधिकारियों के स्तर पर लंबित रही। वित्तीय अभिलेखों की जांच से ही वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
*निदेशक की भूमिका पर भी सवाल*
शिकायत में निदेशक डॉ. आरके उपाध्याय की पात्रता और भूमिका को लेकर भी सवाल उठाते हुए उन्हें पद से हटाने की मांग की गई है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में KNIT प्रशासन का पक्ष सामने आना बेहद जरूरी है।
*अब उच्चाधिकारियों की परीक्षा*
शिकायत की प्रतियां तकनीकी शिक्षा विभाग और AKTU स्तर तक पहुंचने के बाद अब निगाहें उच्चाधिकारियों पर हैं। सवाल सीधा है—यदि एरियर नियमानुसार देय है तो भुगतान में देरी क्यों और यदि देय नहीं है तो उसका स्पष्ट कारण क्या है?
KNIT जैसे तकनीकी संस्थान में शिक्षकों के वित्तीय मामलों को लेकर उठे सवालों का जवाब फाइलों, नियमों और पारदर्शी जांच के आधार पर मिलना चाहिए। काली पट्टी बांधकर किया गया विरोध इस बात का संकेत है कि विवाद अब दबा हुआ प्रशासनिक मामला नहीं रह गया है।
Aug 23 2026, 08:35
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