नगरा-रसड़ा मार्ग पर 45 वर्षीय कोदई गांव निवासी अवधेश सिंह से मारपीट, गंभीर रूप से घायल
संजीव सिंह बलिया। नगरा-रसड़ा मार्ग पर शनिवार शाम सिसवार चट्टी के पास एक 45 वर्षीय व्यक्ति के साथ अज्ञात बदमाशों द्वारा मारपीट किए जाने का मामला सामने आया है। घटना में व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया। जानकारी के अनुसार, नगरा थाना क्षेत्र के कोदई गांव निवासी अवधेश सिंह (45) पुत्र स्वर्गीय अमर सिंह टेंपो से रसड़ा तहसील से नगरा जा रहे थे। सिसवार चट्टी के पास पुरानी रंजिश में कुछ अज्ञात बड़ी संख्या में लोगों ने उन्हें टेंपो से उतारकर बेरहमी से पीटा, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं। स्थानीय लोगों की सूचना पर घायल अवधेश सिंह को एंबुलेंस की मदद से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नगरा ले जाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने उनकी गंभीर हालत को देखते हुए सदर अस्पताल रेफर कर दिया। घटना के बाद आसपास के लोगों ने पुलिस को भी सूचना दी। सदर अस्पताल में घायल अवधेश का उपचार चल रहा है और उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है। पुलिस द्वारा मामले की जांच कर मारपीट करने वाले अज्ञात लोगों की पहचान और घटना के कारणों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।
पेंशन बचाओ मंच की पेंशन तिरंगा यात्रा— बलिया में सैकड़ों शिक्षकों-कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन बहाली व निजीकरण के विरोध में जमकर प्रदर्शन

संजीव सिंह बलिया, 21 अगस्त — अटेवा प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार के आह्वान पर आज प्रदेश के प्रत्येक जिला मुख्यालयों पर आयोजित पेंशन तिरंगा यात्रा के क्रम में अटेवा पेंशन बचाओ मंच, बलिया के नेतृत्व में जनपद के सैकड़ों शिक्षक, कर्मचारी व अधिकारी पुरानी पेंशन व्यवस्था की बहाली, सार्वजनिक सेवाओं के निजीकरण के विरोध तथा जबरन थोपी गई TET अनिवार्यता को समाप्त करने की मांग लेकर सड़कों पर उतरे। यात्रा का समेकित नेतृत्व अटेवा जिला संयोजक समीर कुमार पाण्डेय, महामंत्री राकेश कुमार मौर्य एवं जिला कार्यकारिणी द्वारा किया गया।
यात्रा PWD चौराहा से शुरू होकर टाउन चौराहा, रोडवेज, रेलवे स्टेशन, महुवा मोड़ व मिड्ढा चौराहा होते हुए कलेक्ट्रेट परिसर पहुंची। शिक्षक और कर्मचारी अपने हाथों में राष्ट्रीय ध्वज लेकर तेज़ आवाज़ में नारेबाज़ी करते हुए कलेक्ट्रेट पर पहुँचे जहां उनके नारों से परिसर गूंज उठा। अटेवा बलिया की ओर से जिलाधिकारी कार्यालय में जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री को अपनी मांगों के समर्थन में एक ज्ञापन भी सौंपा गया।
इस कार्यक्रम में प्रमुख रूप से उपस्थित रहे — अटेवा जिला संरक्षक अभिषेक राय, जिला कोषाध्यक्ष संजय पाण्डेय, वरिष्ठ उपाध्यक्ष विनय राय, उपाध्यक्ष अखिलेश सिंह व पंकज सिंह, जिला संगठन मंत्री मलय पांडेय व राजीव गुप्ता, जिला मीडिया प्रभारी संजीव कुमार सिंह, जिला मंत्री गणेश सिंह, संयुक्त मंत्री कुलभूषण त्रिपाठी, रंजन दीक्षित, पंकज कुमार, अजय सिंह (अध्यक्ष — जिला श्रमिक समन्वयक समिति), अविनाश उपाध्याय (महामंत्री — जिला श्रमिक समन्वयक समिति), डॉ. सुशील तिवारी (अध्यक्ष — विकास भवन संघ), चंद्रशेखर यादव (मुबारक हुसैन) (अध्यक्ष — उत्तर प्रदेश पंचायती राज्य सफाई कर्मचारी संघ), अजय सिंह (अध्यक्ष — प्राथमिक शिक्षक संघ), ज्ञान प्रकाश (जिला सह संयोजक — राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ), राजेश तिवारी (महामंत्री — PWD), श्याम नारायण सिंह (अध्यक्ष — एल ए संघ), धनंजय चौबे (अध्यक्ष — एक्स-रे टेक्नीशियन), अजीत सिंह (सीटू अध्यक्ष), अशोक सिंह (DPA अध्यक्ष), रघुवंश उपाध्याय (SRA), हेमंत सिंह (अध्यक्ष — रा.क.संयुक्त परिषद), लाल साहब यादव (एकजुट), धर्मनाथ सिंह (माध्यमिक), शैलेश सिंह (माध्यमिक मंत्री), अरुण सिंह (संरक्षक — बीबीटीसी) समेत अनेक संगठन एवं ब्लॉक व वार्ड के अध्यक्ष व पदाधिकारी उपस्थित रहे। जिले के अनेक ब्लॉक अध्यक्षों, संघों एवं कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों सहित शिक्षक-कर्मचारी तीनों चरणों में बड़ी संख्या में शामिल हुए।
अटेवा बलिया के जिला मीडिया प्रभारी संजीव कुमार सिंह ने बताया कि यह यात्रा शांतिपूर्ण ढंग से आयोजित की गई और मांगों के गंभीरता से निस्तारण तक आंदोलन जारी रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि पुरानी पेंशन व्यवस्था की बहाली व शिक्षाकर्मी हितों की रक्षा के लिए आगामी दिनों में और भी संगठित कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
(रिपोर्ट: संजीव कुमार सिंह, जिला मीडिया प्रभारी, अटेवा, बलिया
सेठ एम. आर. जयपुरिया स्कूल, रसड़ा ने स्व. उमाशंकर सिंह को भावभीनी श्रद्धांजलि
संजीव सिंह रसड़ा (बलिया)। सेठ एम. आर. जयपुरिया स्कूल, रसड़ा के प्रधानाचार्य संजीव सिंह चौहान ने अपने विद्यालय के स्टाफ सदस्यों के साथ स्वर्गीय जननेता उमाशंकर सिंह जी की तेरहवीं पूजा एवं श्रद्धांजलि सभा खनवर में उपस्थित होकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर प्रधानाचार्य श्री चौहान ने दिवंगत के पुत्र प्रिंस युकेश सिंह तथा उनके भाई रमेश सिंह से मुलाकात कर गहरी संवेदना व्यक्त की और शोकाकुल परिवार को ढांढस बंधाया। उन्होंने विद्यालय प्रबंधन की ओर से निदेशक अखिलेश सिंह सेंगर जी तथा समस्त सेठ एम.आर. जयपुरिया स्कूल, रसड़ा परिवार की तरफ से दिवंगत आत्मा को श्रद्धासुमन अर्पित किए तथा ईश्वर से उनकी आत्मा की शांति और परिवार को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की। सेठ एम. आर. जयपुरिया स्कूल, रसड़ा परिवार ने कार्यक्रम के अंत में दिवंगत आत्मा के लिए मौन रखकर और पुष्प अर्पित कर विनम्र श्रद्धांजलि प्रस्तुत की। कार्यक्रम में विद्यालय के शिक्षक, कर्मचारी तथा स्थानीय गणमान्य श्रद्धालु उपस्थित रहे।
नागरी प्रचारिणी सभा ने अलंकृत किया डॉ. विद्यासागर उपाध्याय, प्राप्त किया 'तुलसी सारस्वत सम्मान-2026'
संजीव सिंह बलिया!हिंदी भाषा और साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए जनपद के ख्यातिलब्ध शिक्षाविद् एवं साहित्य मर्मज्ञ डॉ. विद्यासागर उपाध्याय को ऐतिहासिक नागरी प्रचारिणी सभा (आर्यभाषा पुस्तकालय एवं वाचनालय) देवरिया की ओर से ‘नागरी तुलसी सारस्वत सम्मान-2026’ से अलंकृत किया गया। तुलसी जयंती के अवसर पर आयोजित वार्षिक समारोह में हिंदी भाषा की सेवा, साहित्य-सर्जना तथा भाषा-साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए उन्हें प्रशस्ति-पत्र, स्मृति चिह्न, अंगवस्त्र, पुष्पहार एवं उत्तरीय सहित यह प्रदान किया गया। समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. विद्यासागर उपाध्याय ने ‘तुलसी जयंती क्यों मनाई जाए’ विषय पर विचार रखते हुए कहा कि तुलसीदास ने वेद, निगम और आगम से चली आ रही गंभीर एवं दुरूह ज्ञान-परंपरा को लोकभाषा के माध्यम से सहज, सरल और जनसुलभ बनाया। तुलसी केवल कवि नहीं, बल्कि युगद्रष्टा संत थे। उन्होंने कहा कि आज समाज में दिखाई दे रही अनेक विकृतियों और विसंगतियों की कल्पना तुलसी ने लगभग पांच सौ वर्ष पूर्व ही कर ली थी। डॉ. उपाध्याय ने कहा कि तुलसी का चिंतन मूलतः लोकमंगल का चिंतन है। उनका विश्वास था कि गृहस्थ और किसान समृद्ध होंगे, तभी समाज और राष्ट्र वास्तविक अर्थों में उन्नति कर सकेंगे। उन्होंने वर्तमान परिस्थितियों की ओर संकेत करते हुए कहा कि यदि संत और शासक समृद्ध होते जाएं तथा किसान गरीब होता जाए तो यह स्थिति तुलसी के लोकमंगल दर्शन के अनुरूप नहीं कही जा सकती। तुलसी ने इसी व्यापक उद्देश्य से लोकभाषा को अपनी अभिव्यक्ति का माध्यम बनाया और धर्म, दर्शन, नीति तथा जीवन-मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाया। उन्होंने कहा, “यदि लंका में कोई तुलसी होता तो वह लंका, लंका न होकर अयोध्या हो गई होती।” तुलसी का साहित्य समाज को विवेक, मर्यादा, नीति और लोकमंगल की दिशा देता है। इसी कारण बदलते समय में भी तुलसी की प्रासंगिकता समाप्त नहीं हो सकती। समारोह में मुख्य रूप से करौली इनायती रियासत राजस्थान के राजघराने के वर्तमान उत्तराधिकारी एवं वरिष्ठ साहित्यकार राव शिवराज पाल, बरहज आश्रम के महंत स्वामी आंजनेय दास, सभा के मंत्री डॉ. अनिल कुमार त्रिपाठी, प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ.दयाशंकर कुशवाहा, डॉ. रंजीता श्रीवास्तव, डॉ. अभय द्विवेदी, डॉ. संजय शंकर मिश्र, डॉ. सरोज कुमार पाण्डेय, डॉ. इन्द्र कुमार दीक्षित, डॉ. दिनेश कुमार त्रिपाठी, अधिवक्ता बृजेश पांडेय सहित विभिन्न महाविद्यालयों से जुड़े सैकड़ों साहित्यकारों, शिक्षाविदों और गणमान्य लोगों की उपस्थिति रही। सन् 1915 ईस्वी में स्थापित नागरी प्रचारिणी सभा देवरिया हिंदी भाषा और साहित्य के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रचार-प्रसार की दृष्टि से महत्वपूर्ण संस्था रही है। संस्था की साहित्यिक गतिविधियों से आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी, महादेवी वर्मा, डॉ. रामकुमार वर्मा, महावीर प्रसाद द्विवेदी, डॉ. रामदरश मिश्र, डॉ. विद्यानिवास मिश्र, विश्वनाथ प्रसाद तिवारी, सेठ गोविंद दास और पं. कमलापति त्रिपाठी जैसी साहित्यिक एवं सार्वजनिक जीवन की विभूतियों का संबंध रहा है। इसके अतिरिक्त डॉ. मुरली मनोहर जोशी, प्रो. राजबली पांडेय, चंद्रबली पांडेय, प्रो. गिरीश्वर मिश्र, डॉ. रामदेव धुरंधर, तेजेंद्र शर्मा, डॉ. पुष्पिता अवस्थी, सरन घई, डॉ. स्वदेश भारती और सत्यदेव त्रिपाठी जैसे राष्ट्रीय, अकादमिक एवं प्रवासी हिंदी जगत के प्रमुख व्यक्तित्व भी संस्था की साहित्यिक गतिविधियों से जुड़े रहे हैं। तुलसी जयंती के अवसर पर संस्था द्वारा आयोजित व्याख्यान एवं सम्मान समारोह इसी समृद्ध साहित्यिक परंपरा की निरंतरता है। डॉ. विद्यासागर उपाध्याय को मिले सम्मान से बलिया के साहित्यिक एवं विद्वत समाज में प्रसन्नता है। डॉ. गणेश पाठक, करुणानिधि तिवारी, हरेन्द्र नाथ मिश्र, डॉ. जनार्दन राय, डॉ. अशोक पाण्डेय, डॉ. मणिकर्णिका, डॉ. विजया वर्मा, डॉ. प्रतिभा त्रिपाठी, लल्लन पाण्डेय, संतोष दीक्षित, डॉ. मनोज कुमार, डॉ. जितेंद्र यादव और डॉ. अशोक कुमार सिंह सहित अनेक साहित्यकारों एवं विद्वानों ने उन्हें बधाई दी और उनके साहित्यिक एवं शैक्षिक योगदान की सराहना की।
सम्मान और भावभीनी शुभकामनाओं के साथ शिक्षामित्र संजय कुमार वर्मा का विद्यालय पर भव्य विदाई समारोह
संजीव सिंह बलिया! शिक्षा क्षेत्र हनुमानगंज के प्राथमिक विद्यालय कोदई के गत 15 अगस्त 2026 को सेवानिवृत्त हुए प्राथमिक शिक्षामित्र संजय कुमार वर्मा का आज दिनांक 18 अगस्त 2026 को प्राथमिक विद्यालय कोदई में भावभीनी और गरिमापूर्ण विदाई समारोह संपन्न हुआ। समारोह में हनुमानगंज के खंड शिक्षा अधिकारी माधवेंद्र कुमार पाण्डेय कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे। कार्यक्रम में समस्त एआरपी, प्राथमिक शिक्षक संघ के ब्लॉक अध्यक्ष अजय सिंह व उनकी कार्यकारिणी के सदस्य, प्राथमिक शिक्षामित्र संघ Azamgarh के मंडल कोषाध्यक्ष दिलीप प्रसाद, जिला महामंत्री अमृत सिंह, हनुमानगंज ब्लॉक कार्यकारिणी के अजय भारद्वाज, शशिभान सिंह, बृजेश यादव, अवधेश कुमार, लालजी प्रसाद, सुरेन्द्र यादव व कामतानाथ शुक्ल सहित विद्यालय परिवार के समस्त स्टाफ और गाँव के असंख्य लोग उपस्थित रहे। खंड शिक्षा अधिकारी माधवेंद्र कुमार पाण्डेय ने बतौर मुख्य अतिथि संजय कुमार वर्मा के शिक्षा के प्रति समर्पण, बच्चों के सर्वांगीण विकास में उनके योगदान तथा वर्षों से निभायी गई सेवा की प्रशंसा करते हुए उन्हें भावभीन farewell और शुभकामनाएँ दीं। शिक्षक संघ के ब्लॉक अध्यक्ष अजय सिंह और अन्य गणमान्य लोगों ने भी अपने-अपने अनुभव साझा किए और सेवानिवृत्ति के बाद सुखद एवं स्वस्थ जीवन की कामना की। विद्यालय प्रधानाचार्य तथा सहकर्मियों ने समारोह के दौरान शाल, पुष्प और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। उपस्थित विद्यार्थियों ने गीत तथा सांस्कृतिक प्रस्तुति देकर शिक्षामित्र को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम में भावपूर्ण भाषणों, स्मरणों और आशीर्वाद से भरे क्षणों के साथ समापन हुआ। विद्यालय परिवार व स्थानीय समाज ने कहा कि श्री संजय कुमार वर्मा की शिक्षण शैली, अनुशासन और बच्चों के साथ अपनत्व को हमेशा याद रखा जाएगा। उन्होंने विद्यालय के शैक्षिक और सामाजिक स्तर को ऊँचा उठाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई
पूर्वांचल के जननायक स्व. उमाशंकर सिंह को खनवर में भावभीनी श्रद्धांजलि; प्राथमिक शिक्षामित्र संघ ने जताया गहरा शोक
संजीव सिंह खनवर नगरा (बलिया) — 17 अगस्त 2026 को पूर्वांचल के प्रख्यात जननायक और गरीबों के मसीहा स्व. उमाशंकर सिंह के पैतृक गांव खनवर में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में भारी संख्या में लोग मौजूद रहे और उन्होंने दिवंगत नेता को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम के दौरान उनके पुत्र प्रिंस यूकेश सिंह व विधायक अनूज रमेश सिंह परिजनों से मिलकर शोक व्यक्त किया और उन्हें सांत्वना दी। समारोह में उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ (बलिया) के पदाधिकारी तथा आजमगढ़ मंडल के प्रतिनिधि विशेषरूप से उपस्थित रहे। आजमगढ़ मंडल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष संजीव सिंह, बलिया जिला अध्यक्ष पंकज सिंह के साथ प्रमुख उपस्थित लोगों में शशिभान सिंह, अमित चेला मिश्र, राकेश कुमार पांडेय, रणवीर सिंह, जय प्रकाश तिवारी, बच्चालाल, भवानीप्रसाद गुप्त व शिवकुमार आदि शामिल थे। वक्ताओं ने स्व. उमाशंकर सिंह के जनहित के कार्यों और समाज सेवा के उज्ज्वल उदाहरणों को याद करते हुए उनकी स्मृति को सहेजने तथा उनके आदर्शों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि उमाशंकर सिंह ने हमेशा गरीबों और असहायों की आवाज उठाई और उनका जीवन समाज के लिए प्रेरणा था। श्रद्धांजलि सभा शांति और गरिमा के साथ संपन्न हुई। कार्यक्रम का समापन शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदना प्रकट करने और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना के साथ हुआ।
नगरा में पूर्वांचल के जननायक रसड़ा विधायक स्व. उमाशंकर सिंह को शिक्षक संघ व विभागीय कर्मचारियों ने दी श्रद्धांजलि
संजीव सिंह बलिया!नगरा, 17 अगस्त 2026 को शिक्षा क्षेत्र नगरा में आज पूर्वांचल के प्रख्यात जननायक और गरीबों के मसीहा स्व. उमाशंकर सिंह को उच्च प्राथमिक विद्यालय नगरा में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में बड़ा समुदायीय सम्मान मिला। कार्यक्रम का आयोजन प्राथमिक शिक्षक संघ नगरा की ओर से किया गया, जिसमें संघ के जिला अध्यक्ष जितेंद्र सिंह विशेष रूप से उपस्थित रहे। श्रद्धांजलि सभा में खंड शिक्षा अधिकारी पंकज सिंह, ब्लॉक अध्यक्ष वीरेंद्र प्रताप यादव, ब्लॉक के अनेक शिक्षक-शिक्षिकाएँ तथा अन्य विभागीय कर्मचारी बड़ी संख्या में पहुँचे और उन्होंने स्व. उमाशंकर सिंह को सदा-सुमन अर्पित कर उन्हें याद किया। मुख्य अतिथियों ने उनके समाजसेवी जीवन, ईमानदारी और गरीबों के प्रति समर्पण की सराहना की। कार्यक्रम में प्राथमिक शिक्षक संघ के वरिष्ठ नेता व सदस्य—ब्रजेश कुमार सिंह 'तेगा', उपाध्यक्ष हेमंत कुमार यादव, डॉ. विद्यासागर उपाध्याय, अशोक कुमार सिंह, मंत्री ओमप्रकाश, राजीव नयन पांडेय, राघवेंद्र प्रताप 'राही', आलोक सिंह, प्रदीप सिंह, मुकेश, रामकृष्ण मौर्य, राकेश कुमार सिंह, संजीव कुमार सिंह, मीना सिंह, कुसुम मौर्य, राम बहादुर यादव, गुड्डू सिंह,राणा प्रताप सिंह ,निर्भय सिंह, रामप्रवेश वर्मा, बालचंद प्रसाद, सोनू सिंह, विनोद कुमार भारती, यशवंत कुमार, उदय बहादुर यादव सहित कई साथी उपस्थित थे। वक्ताओं ने स्व. उमाशंकर सिंह के जनहित के कार्यों और समाज सेवा के उज्ज्वल उदाहरणों को साझा करते हुए उनकी स्मृति को सहेजने व उनके आदर्शों को आगे बढ़ाने का संकल्प व्यक्त किया। सभा शांतिपूर्ण और गरिमापूर्ण माहौल में संपन्न हुई।
नागरी प्रचारिणी सभा करेगी डॉ. विद्यासागर उपाध्याय का सम्मान तुलसी जयन्ती समारोह में मुख्य वक्ता होंगे बलिया के साहित्यकार डॉ. विद्यासागर
संजीव सिंह बलिया। देवरिया की शताब्दी से अधिक पुरानी प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था नागरी प्रचारिणी सभा इस वर्ष अपने प्रमुख वार्षिक आयोजन ‘तुलसी जयन्ती समारोह-2026’ में बलिया के साहित्यकार, दार्शनिक एवं वेदांत-विचारक डॉ. विद्यासागर उपाध्याय को ‘नागरी तुलसी सारस्वत सम्मान’ से सम्मानित करेगी। समारोह में डॉ. उपाध्याय मुख्य वक्ता के रूप में तुलसी-साहित्य पर अपना व्याख्यान भी देंगे। 19 अगस्त 2026 को देवरिया स्थित नागरी प्रचारिणी सभा के ऐतिहासिक ‘तुलसी सभागार’ में आयोजित होने वाले समारोह में यह सम्मान प्रदान किया जाएगा। हिंदी साहित्य और भारतीय ज्ञान-परंपरा के क्षेत्र में डॉ. उपाध्याय की सक्रियता को देखते हुए सभा द्वारा उनका चयन किया गया है। पराधीन भारत में वर्ष 1915 में स्थापित नागरी प्रचारिणी सभा, देवरिया हिंदी भाषा, साहित्य और नागरी-प्रचार की दीर्घ परंपरा से जुड़ी संस्था है। काशी की नागरी प्रचारिणी सभा द्वारा वर्ष 1893 से प्रारंभ हिंदी-नागरी जागरण की राष्ट्रीय धारा ने देश के विभिन्न क्षेत्रों में हिंदी और देवनागरी के प्रति चेतना को व्यापक आधार प्रदान किया। इसी व्यापक हिंदी-जागरण की पृष्ठभूमि में देवरिया की नागरी प्रचारिणी सभा ने पूर्वांचल में अपनी विशिष्ट साहित्यिक पहचान बनाई। एक शताब्दी से अधिक की यात्रा में संस्था ने साहित्यिक गोष्ठियों, वाचन-संस्कृति, तुलसी जयन्ती, हिंदी दिवस, पुस्तक-विमोचन, साहित्यिक संवाद और साहित्यकार-सम्मान की परंपरा को निरंतर आगे बढ़ाया है। देवरिया शहर के मध्य स्थित नागरी प्रचारिणी सभा का भवन संस्था की गौरवशाली साहित्यिक यात्रा का प्रतीक है। सभा के आर्यभाषा पुस्तकालय एवं वाचनालय में लगभग 30 हजार पुस्तकों का संग्रह है। प्रत्येक रविवार होने वाली साहित्यिक गोष्ठियों के साथ ही वर्षभर विभिन्न साहित्यिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। सभा के नवीन मुख्य भवन का उद्घाटन 13 जून 1965 को तत्कालीन केंद्रीय वित्त मंत्री मोरारजी देसाई द्वारा किया गया था। संस्था का ऐतिहासिक ‘तुलसी सभागार’ लंबे समय से तुलसी जयन्ती सहित अनेक महत्वपूर्ण साहित्यिक आयोजनों का केंद्र रहा है। नागरी प्रचारिणी सभा, देवरिया की साहित्यिक परंपरा से आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी, अज्ञेय, महादेवी वर्मा, भगवती चरण वर्मा, डॉ. रामकुमार वर्मा, डॉ. रामदरश मिश्र, डॉ. विद्यानिवास मिश्र, विश्वनाथ प्रसाद तिवारी, सेठ गोविंद दास और पं. कमलापति त्रिपाठी जैसे मूर्धन्य साहित्यकारों एवं सार्वजनिक जीवन की विभूतियों का संबंध रहा है। इसके अतिरिक्त डॉ. मुरली मनोहर जोशी, प्रो. राजबली पांडेय, चंद्रबली पांडेय, प्रो. गिरीश्वर मिश्र, डॉ. रामदेव धुरंधर, तेजेंद्र शर्मा, डॉ. पुष्पिता अवस्थी, सरन घई, डॉ. स्वदेश भारती और सत्यदेव त्रिपाठी जैसे राष्ट्रीय, अकादमिक और प्रवासी हिंदी-जगत से जुड़े व्यक्तित्व भी संस्था की साहित्यिक गतिविधियों से जुड़े रहे हैं। तुलसी जयन्ती समारोह में डॉ. विद्यासागर उपाध्याय का व्याख्यान तुलसीदास के साहित्य, दर्शन, लोकमंगल-दृष्टि और भारतीय सांस्कृतिक चेतना के विविध आयामों पर केंद्रित रहेगा। मुख्य वक्ता के रूप में उनका चयन और ‘नागरी तुलसी सारस्वत सम्मान’ से सम्मानित किया जाना समारोह का प्रमुख आकर्षण होगा। बलिया के साहित्यकार को देवरिया की ऐतिहासिक साहित्यिक संस्था द्वारा प्रदान किया जा रहा यह सम्मान पूर्वांचल की साहित्यिक परंपरा के लिए भी महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है।
नगरा में सर्वदलीय श्रद्धांजलि सभा; पूर्वांचल उद्योग व्यापार मंडल ने उमाशंकर सिंह को दी  भावभीनी श्रद्धांजलि
संजीव सिंह नगरा (बलिया) — रसड़ा विधायक स्वर्गीय  उमाशंकर सिंह जी के निधन पर आज पाण्डेय मैरिज हॉल, नगरा में पूर्वांचल उद्योग व्यापार मंडल, नगरा द्वारा आयोजित सर्वदलीय श्रद्धांजलि एवं शोक सभा में जनप्रतिनिधियों, व्यापारियों तथा क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों ने उनकी तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
शोक सभा में उपस्थित वक्ताओं ने स्व. उमाशंकर सिंह के जनसेवा के प्रति समर्पण, सरल व्यक्तित्व और गरीबों के प्रति संवेदनशीलता को याद करते हुए उनका जीवन समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बताया। सभा में कहा गया कि उनका आकस्मिक निधन क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है।
पूर्वांचल उद्योग व्यापार मंडल, नगरा के अध्यक्ष  निर्भय प्रकाश तथा समस्त पदाधिकारियों ने आयोजन के सफल संचालन के लिए धन्यवाद स्वीकार किया। कार्यक्रम का संचालन  जयप्रकाश जायसवाल ने पूर्ण श्रद्धा तथा संवेदना के साथ किया।
सभा में व्यापार मंडल के पदाधिकारीगण, जनप्रतिनिधिगण और विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। उपस्थित लोगों ने मिलकर स्वर्गीय उमाशंकर सिंह को शत्-शत् नमन करते हुए उनके आत्मा की शांति की कामना की। ॐ शांति शांति शांत





डॉ. विद्यासागर उपाध्याय के खंडकाव्य ‘गाण्डीव के पार’ का 29 अगस्त को हरिद्वार में लोकार्पण
संजीव सिंह बलिया! हरिद्वार:साहित्य, संस्कृति और भारतीय ज्ञान-परंपरा के प्रेमियों के लिए हरिद्वार में एक विशेष साहित्यिक आयोजन होने जा रहा है। डॉ. विद्यासागर उपाध्याय द्वारा रचित खण्डकाव्य ‘गाण्डीव के पार’ के लोकार्पण समारोह का आयोजन 29 अगस्त 2026, शनिवार को हरिद्वार में किया जाएगा। दिव्य गंगा सेवा मिशन, हरिद्वार के तत्वावधान में आयोजित यह कार्यक्रम अवधूत मंडल आश्रम, बड़ा हनुमान मंदिर, निकट शंकर आश्रम, हरिद्वार में प्रातः 11 बजे से शुरू होगा। पूर्व मुख्यमंत्री होंगे मुख्य अतिथि समारोह में डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, माननीय पूर्व मुख्यमंत्री उत्तराखंड एवं पूर्व मानव संसाधन विकास मंत्री, भारत सरकार तथा श्री मदन कौशिक, माननीय कैबिनेट मंत्री, उत्तराखंड सरकार, मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम में विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतियों एवं शिक्षाविदों की भी विशेष उपस्थिति रहेगी। विशिष्ट अतिथियों में प्रो. (डॉ.) श्रीशिर पाण्डेयजी, कुलपति, रामभद्राचार्य राज्य विश्वविद्यालय, चित्रकूट; प्रो. (डॉ.) रमाकांत पाण्डेयजी, कुलपति, उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार; प्रो. (डॉ.) शिव शंकर मिश्राजी, कुलपति, महर्षि पाणिनि विश्वविद्यालय, उज्जैन, मध्य प्रदेश तथा प्रो. (डॉ.) अरुण कुमार त्रिपाठीजी, कुलपति, उत्तराखंड आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय, देहरादून शामिल हैं। ‘गाण्डीव के पार’ को लेकर साहित्य जगत में उत्सुकता डॉ. विद्यासागर उपाध्याय द्वारा लिखित ‘गाण्डीव के पार’ खण्डकाव्य के लोकार्पण को भारतीय साहित्य और सांस्कृतिक विमर्श की दृष्टि से महत्वपूर्ण आयोजन माना जा रहा है। समारोह में काव्य-कृति की साहित्यिक विशेषताओं, भारतीय परंपरा तथा समकालीन संदर्भों पर भी विचार-विमर्श होने की संभावना है। आयोजकों के अनुसार, कार्यक्रम का उद्देश्य साहित्य, संस्कृति, अध्यात्म और भारतीय ज्ञान परंपरा को समाज से जोड़ना तथा नई पीढ़ी को भारतीय साहित्यिक विरासत से परिचित कराना है। साहित्य प्रेमियों एवं गणमान्य नागरिकों से समारोह में सहभागिता की अपील की गई है।