लखनऊ पुलिस के 68 रिक्रूट आरक्षियों को संवेदनशील पुलिसिंग का प्रशिक्षण
लखनऊ। पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ की Specialized Training शाखा की ओर से वर्ष 2025 बैच के रिक्रूट आरक्षियों के लिए पीड़ितों और बच्चों के साथ सहानुभूतिपूर्ण एवं संवेदनशील संवाद स्थापित करने के विषय पर विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम 20 अगस्त 2026 को रिजर्व पुलिस लाइन्स, कमिश्नरेट लखनऊ स्थित संगोष्ठी सदन में हुआ।

यह प्रशिक्षण उत्तर प्रदेश शासन और पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश के निर्देशों के क्रम में पुलिस आयुक्त लखनऊ तरूण गाबा के निर्देशन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम संयुक्त पुलिस आयुक्त अपराध एवं मुख्यालय अपर्णा कुमार, संयुक्त पुलिस आयुक्त कानून एवं व्यवस्था बबलू कुमार तथा पुलिस उपायुक्त मुख्यालय अमित कुमावत के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।

कार्यशाला का संचालन पुलिस उपायुक्त महिला अपराध एवं सुरक्षा ममता रानी चौधरी के निर्देशन और सहायक पुलिस आयुक्त महिला अपराध शाहिदा नसरीन के पर्यवेक्षण में किया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य नवआरक्षियों को संवेदनशील, सजग और प्रभावी फर्स्ट रिस्पॉन्डर के रूप में तैयार करना रहा।

68 रिक्रूट आरक्षियों ने लिया प्रशिक्षण

प्रशिक्षण कार्यशाला में कमिश्नरेट लखनऊ के सभी थानों से वर्ष 2025 बैच के कुल 68 रिक्रूट आरक्षियों ने हिस्सा लिया। प्रशिक्षण सत्र में UNICEF की डिविजनल कंसल्टेंट रिजवाना परवीन ने प्रतिभागियों को विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर प्रशिक्षण दिया।

पीड़ितों से संवाद के तरीके बताए

प्रशिक्षण के दौरान पुलिसकर्मियों को बताया गया कि घटनास्थल या थाने पर पहुंचने के बाद फर्स्ट रिस्पॉन्डर की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। पीड़ित की बात धैर्यपूर्वक सुनना, उसकी भावनात्मक स्थिति को समझना और उसे आवश्यक सहयोग व सुरक्षा का भरोसा देना पुलिसिंग का अहम हिस्सा है।

प्रतिभागियों को विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों के साथ बातचीत करते समय संवेदनशील, सहानुभूतिपूर्ण और व्यवहारिक दृष्टिकोण अपनाने के बारे में जानकारी दी गई। संवाद कौशल और व्यवहारिक विकास पर भी प्रशिक्षण दिया गया।

महिलाओं और बच्चों से जुड़े कानूनों की जानकारी

कार्यशाला में महिलाओं और बच्चों से संबंधित महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधानों के बारे में भी जानकारी दी गई। इसमें घरेलू हिंसा से संबंधित कानून, किशोर न्याय अधिनियम और पॉक्सो एक्ट समेत अन्य प्रासंगिक प्रावधान शामिल रहे।

इसके अलावा प्रशिक्षणार्थियों को वन स्टॉप सेंटर, बाल कल्याण समिति और किशोर न्याय बोर्ड की भूमिका और कार्यप्रणाली के बारे में बताया गया। महिलाओं और बच्चों से जुड़े मामलों में पीड़ितों को आवश्यक सहयोग, संरक्षण उपलब्ध कराने और विधिक प्रक्रिया का पालन करने के संबंध में भी प्रशिक्षण दिया गया।

संवेदनशील पुलिसिंग पर जोर

कमिश्नरेट लखनऊ की ओर से कहा गया कि आमजन, विशेषकर महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित, संवेदनशील और सहयोगपूर्ण पुलिसिंग उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से पुलिसकर्मियों के संवाद कौशल, व्यवहारिक दक्षता और विधिक ज्ञान को मजबूत किया जा रहा है।

पुलिस का उद्देश्य है कि किसी भी घटना के बाद पीड़ित को समयबद्ध, मानवीय और प्रभावी सहायता मिल सके। प्रशिक्षण के जरिए रिक्रूट आरक्षियों को ऐसी परिस्थितियों में बेहतर तरीके से प्रतिक्रिया देने और पीड़ितों के साथ मानवीय व्यवहार सुनिश्चित करने के लिए तैयार किया जा रहा है।
इटौंजा में सड़क हादसा, कांवड़िये की मौत; साथी घायल
लखनऊ। इटौंजा थाना क्षेत्र में सीतापुर-लखनऊ हाईवे पर गुरुवार दोपहर सड़क हादसे में एक कांवड़िये की मौत हो गई, जबकि उसका साथी घायल हो गया। हादसा लाडली होटल के सामने हुआ, जहां एक अज्ञात डीसीएम वाहन ने बाइक में टक्कर मार दी।

पुलिस के मुताबिक, 20 अगस्त 2026 को करीब 3:30 बजे मोटरसाइकिल संख्या UP32DA5383 पर दो कांवड़िये सीतापुर से लखनऊ की ओर जा रहे थे। बाइक पर सीतापुर के संदना थाना क्षेत्र के कुर्सी हिरोरा निवासी सत्यम गुप्ता (17) और बाराबंकी के घूंघटेर थाना क्षेत्र के पलटूपुर निवासी शोभित गुप्ता (18) सवार थे।

इटौंजा थाना क्षेत्र में लाडली होटल के सामने एक अज्ञात डीसीएम वाहन ने उनकी मोटरसाइकिल में टक्कर मार दी। टक्कर लगने के बाद दोनों सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए।

हादसे की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों घायलों को उपचार के लिए रामसागर मिश्र 100 शैय्या अस्पताल, साढ़ामऊ, बीकेटी पहुंचाया गया। वहां डॉक्टरों ने सत्यम गुप्ता को मृत घोषित कर दिया। वहीं शोभित गुप्ता को प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए बलरामपुर अस्पताल, लखनऊ रेफर कर दिया गया।

पुलिस ने मृतक के शव का पंचायतनामा भरने की कार्रवाई पूरी कर ली है। शव को पोस्टमार्टम के लिए केजीएमयू, लखनऊ भेजा जा रहा है।

इटौंजा पुलिस हादसे में शामिल अज्ञात डीसीएम वाहन की तलाश कर रही है। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों और अन्य माध्यमों से वाहन की पहचान करने का प्रयास कर रही है। घटना के संबंध में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

पुलिस के अनुसार, हादसे के बाद मौके पर यातायात व्यवस्था सामान्य है और कानून-व्यवस्था से जुड़ी कोई समस्या नहीं है।
ढाई साल से फरार आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोपी बेंगलुरु से गिरफ्तार
लखनऊ। इंदिरानगर थाना पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में करीब ढाई साल से फरार चल रहे आरोपी को बेंगलुरु, कर्नाटक से गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान 61 वर्षीय संतोष सिंह के रूप में हुई है। पुलिस ने स्थानीय पुलिस की मदद से उसे गिरफ्तार करने के बाद ट्रांजिट रिमांड लेकर लखनऊ पहुंचाया।

पुलिस के मुताबिक, 15 अप्रैल 2024 को इंदिरानगर निवासी जेबा अंजुम ने थाने में तहरीर दी थी। उन्होंने अपने बेटे को मानसिक रूप से प्रताड़ित कर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया था। तहरीर के आधार पर इंदिरानगर थाने में मुकदमा संख्या 91/2024 धारा 306 आईपीसी के तहत दर्ज किया गया था।

मामले की विवेचना तत्कालीन उपनिरीक्षक सचिन सिंह ने शुरू की थी। उनके स्थानांतरण के बाद विवेचना उपनिरीक्षक आशीष कुमार पांडेय द्वारा की जा रही थी। पुलिस ने विवेचना के दौरान कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और सर्विलांस की मदद से नामजद आरोपी संतोष सिंह की लोकेशन का पता लगाया।

जांच में आरोपी की लोकेशन बेंगलुरु में मिली। इसके बाद विवेचक ने उच्चाधिकारियों से अनुमति प्राप्त कर आरोपी की गिरफ्तारी के लिए टीम भेजी। पुलिस ने 17 अगस्त 2026 को स्थानीय पुलिस की मदद से बेंगलुरु सिटी के विल्सन गार्डन थाना क्षेत्र से संतोष सिंह को गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपी को ट्रांजिट रिमांड पर लिया और 20 अगस्त 2026 को उसे इंदिरानगर थाने लखनऊ लाया गया। पुलिस के अनुसार, आरोपी के खिलाफ नियमानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

गिरफ्तार आरोपी की पहचान संतोष सिंह पुत्र स्वर्गीय विश्वनाथ सिंह, उम्र 61 वर्ष, निवासी फ्लैट नंबर 202, मैत्री संयोग अपार्टमेंट, 8 क्रॉस, विल्सन गार्डन, बेंगलुरु, कर्नाटक के रूप में हुई है। उसका मूल पता मकान संख्या 58, लालपुर खंड, लमही, थाना सारनाथ, वाराणसी बताया गया है। पुलिस के मुताबिक आरोपी कोई काम नहीं करता है।

पुलिस ने बताया कि इस मामले में आरोपी पर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप है। उसका अन्य आपराधिक इतिहास भी खंगाला जा रहा है।
दहेज हत्या के मामले में पति और सास गिरफ्तार
लखनऊ। ठाकुरगंज थाना पुलिस ने दहेज हत्या के मामले में कार्रवाई करते हुए मृतका के पति और सास को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने दोनों आरोपियों को 19 अगस्त की शाम थाना क्षेत्र स्थित सकरी पुलिया धोबी घाट माधोपुर के पास से गिरफ्तार किया। मामले में नामजद अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम दबिश दे रही है।

पुलिस के मुताबिक, 18 अगस्त 2026 को बक्शी का तालाब थाना क्षेत्र के हाजीपुर निवासी अनीता वर्मा ने ठाकुरगंज थाने में तहरीर दी थी। उन्होंने बताया कि उनकी करीब 30 वर्षीय बेटी कोमल ने 17 अगस्त को फोन कर बताया था कि उसका पति जितेंद्र कुमार सुबह से उसके साथ मारपीट कर रहा है और जान से मारने की धमकी दे रहा है। आरोप है कि ससुराल पक्ष के लोग दहेज की मांग को लेकर कोमल को आए दिन प्रताड़ित करते थे।

तहरीर के अनुसार, सूचना मिलने के बाद अनीता वर्मा अपने पति के साथ बेटी की ससुराल पहुंचीं। वहां उन्होंने कोमल को बेसुध हालत में पड़ा देखा। इसके बाद उसे इलाज के लिए ट्रामा सेंटर ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

मामले की सूचना मिलने के बाद ठाकुरगंज पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस ने पति जितेंद्र कुमार, सास लीला समेत छह लोगों को नामजद किया। मुकदमे में पति जितेंद्र कुमार, सास लीला, जेठानी उमा देवी, जेठ करन और ननद प्रीति व रेशमा के खिलाफ कार्रवाई की गई है।

पुलिस टीम ने आरोपियों की तलाश में सुरागरसी और दबिश की कार्रवाई शुरू की। इसी क्रम में 19 अगस्त 2026 को शाम करीब पांच बजे सकरी पुलिया धोबी घाट माधोपुर के पास से जितेंद्र कुमार (34) और उसकी मां लीला (56) को गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस के अनुसार, जितेंद्र कुमार पुत्र स्वर्गीय लाला राम कन्हैया माधोपुर बेगरिया, थाना ठाकुरगंज का निवासी है। वहीं लीला पत्नी स्वर्गीय लाला राम भी इसी पते की रहने वाली है।

मामले में थाना ठाकुरगंज में मु0अ0सं0 545/2026 के तहत धारा 80(2), 85, 115(2), 352 और 351(3) बीएनएस तथा 3/4 दहेज प्रतिषेध अधिनियम में मुकदमा दर्ज है।

पुलिस का कहना है कि मामले में शामिल अन्य नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
बीकेटी में नवविवाहिता की मौत, मायके पक्ष की शिकायत पर मुकदमा दर्ज
लखनऊ। राजधानी लखनऊ के बीकेटी थाना क्षेत्र में एक नवविवाहिता की मौत का मामला सामने आया है। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मायके पक्ष की ओर से दिए गए प्रार्थना पत्र के आधार पर पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की कार्रवाई शुरू कर दी है।

पुलिस के मुताबिक, 20 अगस्त 2026 को दोपहर करीब 1:20 बजे राम सागर मिश्रा संयुक्त चिकित्सालय, सरसैया से नवविवाहिता की मृत्यु के संबंध में फौती मेमो प्राप्त हुआ। मृतका की पहचान बाटू पत्नी सतीश उर्फ भूरे, निवासी कोटवा, थाना बीकेटी, लखनऊ के रूप में हुई।

सूचना मिलते ही उपनिरीक्षक रामप्रभाव को तत्काल अस्पताल भेजा गया। पुलिस के अनुसार, परिजनों ने बताया कि बाटू की शादी 14 अप्रैल 2025 को सतीश उर्फ भूरे के साथ हुई थी। घटना की जानकारी मिलने पर मृतका के मायके पक्ष के लोग भी अस्पताल पहुंच गए।

पुलिस ने पंचायतनामा की कार्रवाई पूरी करने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी हाउस भेज दिया है। मायके पक्ष से प्राप्त प्रार्थना पत्र के आधार पर सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत किया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि मामले में अन्य आवश्यक कानूनी कार्रवाई प्रचलित है।
यूपी में नौ आईपीएस अफसरों के तबादले, सात जिलों के कप्तान बदले
लखनऊ। डीजीपी मुख्यालय ने बृहस्पतिवार देर रात सात जिलों के पुलिस कप्तानों समेत नौ आईपीएस अधिकारियों का तबादला कर दिया। इस फेरबदल में मेरठ, झांसी, सुल्तानपुर, गोंडा, बिजनौर, संभल और बलरामपुर के पुलिस कप्तान बदले गए हैं।

गोंडा के एसपी विनीत जायसवाल को सुल्तानपुर का नया एसपी बनाया गया है। सुल्तानपुर में तैनात चारू निगम को यूपी-112 भेजा गया है।

मेरठ के एसएसपी अविनाश पांडेय को डीजीपी मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। उनकी जगह झांसी के एसपी बीबीजीटीएस मूर्ति को मेरठ का नया एसएसपी बनाया गया है।

बिजनौर के एसपी अभिषेक को गोंडा का नया पुलिस कप्तान बनाया गया है। वहीं बलरामपुर के एसपी विकास कुमार को झांसी का एसएसपी नियुक्त किया गया है। संभल के एसपी केके बिश्नोई को बिजनौर का नया एसपी बनाया गया है।

बाराबंकी में एएसपी के पद पर तैनात विकास चन्द्र त्रिपाठी को आईपीएस बनने के बाद संभल का एसपी बनाया गया है। इसी तरह हरदोई में एएसपी रहे मार्तण्ड प्रकाश सिंह को आईपीएस बनने के बाद बलरामपुर का एसपी नियुक्त किया गया है।

डीजीपी मुख्यालय की ओर से किए गए इस तबादले के बाद सात जिलों की पुलिस कमान नए अधिकारियों के हाथों में होगी। अधिकारियों को नई जिम्मेदारी मिलने से संबंधित जिलों में कानून-व्यवस्था और पुलिस प्रशासन को और प्रभावी बनाने की उम्मीद है।
दिव्यांग श्रेणी के बेसिक शिक्षकों का अंतर्जनपदीय स्थानांतरण जल्द करे विभाग

- दिव्यांगजन अधिनियम-2016 के प्रावधानों के तहत स्थानांतरण के लिए सभी विभागों को दिव्यांगजन सशक्तिकरण निदेशालय ने जारी किए निर्देश

लखनऊ। शासन के आदेश के बावजूद दिव्यांग श्रेणी के बेसिक शिक्षकों का अंतर्जनपदीय स्थानांतरण नहीं होने से शिक्षकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। लंबे समय से स्थानांतरण की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे दिव्यांग शिक्षकों ने अब सरकार से जल्द कार्रवाई की मांग की है।
दिव्यांग महागठबंधन के महासचिव वीरेंद्र कुमार ने बताया कि संगठन ने दिव्यांग कर्मचारियों के स्थानांतरण का मुद्दा अपने मांगपत्र में प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद प्रमुख सचिव, दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग ने ऐसे दिव्यांग कर्मचारियों की सूची मांगी थी, जिनका स्थानांतरण नहीं हो पा रहा है।
इसी क्रम में दिव्यांग महागठबंधन ने दिव्यांग बेसिक शिक्षकों की सूची संयुक्त निदेशक के माध्यम से निदेशक एवं प्रमुख सचिव, दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग को सौंप दी है। संगठन के अनुसार, दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग अब बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों को दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम-2016 के प्रावधानों के तहत पात्र सरकारी कर्मचारियों को गृह जनपद में स्थानांतरण किए जाने के संबंध में पत्र भेजेगा।
वीरेंद्र कुमार ने कहा कि दिव्यांग शिक्षकों को उनके गृह जनपद में स्थानांतरण मिलने से न केवल उन्हें आवागमन और पारिवारिक समस्याओं से राहत मिलेगी, बल्कि वे अपने दायित्वों का निर्वहन भी बेहतर ढंग से कर सकेंगे।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 6 सितंबर तक दिव्यांग बेसिक शिक्षकों का अंतर्जनपदीय स्थानांतरण नहीं किया गया तो 7 सितंबर से गांधी प्रतिमा पर धरना-प्रदर्शन शुरू किया जाएगा। उन्होंने शासन और बेसिक शिक्षा विभाग से मामले में शीघ्र निर्णय लेने की मांग की।
संयुक्त निदेशक से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में दिव्यांग महागठबंधन के महासचिव वीरेंद्र कुमार, अध्यक्ष मनीष प्रसाद, कोषाध्यक्ष जितेंद्र वर्मा, राजकुमार गुप्ता समेत अन्य पदाधिकारी शामिल रहे।
डेयरी सेक्टर को मिलेगी नई रफ्तार, बरेली में ‘स्वर्णिम दुग्धामृत संवाद समागम’

- दुग्ध प्रसंस्करण, वैल्यू एडिशन और कोल्ड चेन समेत पूरी वैल्यू चेन मजबूत करने पर जोर

बरेली/लखनऊ। उत्तर प्रदेश में डेयरी क्षेत्र को आधुनिक और निवेशपरक बनाने के उद्देश्य से भारतीय पशुचिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई), बरेली में ‘डेयरी कॉन्क्लेव-स्वर्णिम दुग्धामृत संवाद समागम’ कार्यशाला का आयोजन किया गया। मंडलवार आयोजित हो रही इस कार्यशाला श्रृंखला का उद्देश्य नंद बाबा दुग्ध मिशन और दुग्ध प्रोत्साहन नीति-2022 का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के साथ प्रदेश के डेयरी सेक्टर में पूंजी निवेश को आकर्षित करना है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि बरेली, मुरादाबाद और लखनऊ मंडल कृषि, पशुपालन एवं डेयरी क्षेत्र की अपार संभावनाओं वाले क्षेत्र हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल दुग्ध उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि दुग्ध प्रसंस्करण, वैल्यू एडिशन, कोल्ड चेन और डेयरी उद्योग की पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करना है। इससे किसानों की आय बढ़ने के साथ महिलाओं और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
मंत्री ने कहा कि बरेली, मुरादाबाद और लखनऊ मंडल भविष्य में प्रदेश के प्रमुख डेयरी हब बन सकते हैं और उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी बनाने के लक्ष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

- स्वदेशी नस्ल और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर जोर
अपर मुख्य सचिव, पशुधन एवं दुग्ध विकास मुकेश कुमार मेश्राम ने स्वदेशी नस्ल के गोपालन को ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि उन्नत स्वदेशी गोवंश, निवेश और ग्रामीण रोजगार के माध्यम से पशुपालकों के जीवन स्तर में व्यापक बदलाव लाया जा सकता है। उन्होंने ‘स्वदेशी उन्नत गोवंश, समृद्ध निवेश, सुरक्षित भविष्य एवं खुशहाल उत्तर प्रदेश’ के संकल्प को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया।
दुग्ध आयुक्त धनलक्ष्मी के. ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश में दुग्ध उत्पादन में अग्रणी है। सरकार किसानों को सुनिश्चित बाजार, पारदर्शी मूल्य निर्धारण और स्थायी आय उपलब्ध कराने के लिए लगातार कदम उठा रही है। नंद बाबा दुग्ध मिशन और दुग्ध नीति-2022 के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण दुग्ध उत्पादन, आधुनिक डेयरी विकास और उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण दूध एवं दुग्ध उत्पाद उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

-  2200 लाभार्थियों को 1200 लाख से अधिक की सहायता
दुग्ध आयुक्त ने बताया कि नंद बाबा दुग्ध मिशन के तहत बरेली, मुरादाबाद और लखनऊ मंडल में करीब 2,200 लाभार्थियों को डीबीटी के माध्यम से 1,200 लाख रुपये से अधिक की अनुदान राशि दी जा चुकी है। वहीं दुग्ध नीति-2022 के तहत विभिन्न परियोजनाओं के लिए इन मंडलों में 1,100 लाख रुपये की अनुदान राशि अवमुक्त की गई है।
उन्होंने बताया कि ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के तहत बरेली मंडल में 2,712 करोड़ रुपये, मुरादाबाद मंडल में 2,085 करोड़ रुपये और लखनऊ मंडल में 2,150 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इन प्रस्तावों से करीब 11 हजार नए रोजगार सृजित होने की संभावना है।

- डेयरी उद्योग में निवेश और नवाचार पर मंथन
कार्यशाला में नंद बाबा दुग्ध मिशन के लाभार्थियों ने अपनी सफलता की कहानियां साझा कीं। बरेली डेयरी, आनंदा डेयरी, वाडीलाल इंडस्ट्रीज, डेयरी क्राफ्ट और शगुन डेयरी समेत विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने डेयरी क्षेत्र में निवेश, नवाचार और आधुनिक तकनीकों पर प्रस्तुतियां दीं।
विशेषज्ञों ने गोपालन से जैविक खेती, वर्मी कंपोस्ट और हरा चारा प्रबंधन समेत विभिन्न विषयों पर उपयोगी जानकारी दी। कार्यक्रम में पराग, डेयरी इंडिया, शगुन डेयरी, वरीशा डेयरी प्रोडक्ट्स, प्रीमियर डेयरी, वाडीलाल, डेयरी क्राफ्ट, पशुपालन विभाग, आईवीआरआई सहित विभिन्न निजी एवं सहकारी संस्थाओं ने स्टॉल लगाकर उत्पादों, तकनीकों और सेवाओं का प्रदर्शन किया।

- 1500 से अधिक पशुपालक और उद्यमी हुए शामिल
कार्यक्रम में बरेली, मुरादाबाद और लखनऊ मंडल के विभिन्न जिलों से 1,500 से अधिक कृषक, गोपालक, दुग्ध उत्पादक, उद्यमी और निवेशक शामिल हुए। आईवीआरआई के वैज्ञानिकों, एनडीडीबी के प्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने भी सहभागिता की।
वेबकास्टिंग और लाइव यूट्यूब के माध्यम से प्रदेश के अन्य जिलों के गोपालकों और उद्यमियों को भी कार्यक्रम से जोड़ा गया। विशेषज्ञों ने स्वदेशी नस्ल के गोपालन, नवीनतम तकनीक, डेयरी योजनाओं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी साझा की।
आयोजकों के अनुसार, इस तरह के डेयरी कॉन्क्लेव से पशुपालकों, उद्यमियों, निवेशकों और डेयरी संस्थानों के बीच संवाद बढ़ेगा और प्रदेश में उत्पादन से प्रसंस्करण, विपणन और वैल्यू एडिशन तक डेयरी की पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
आलू, सरसों और दलहन उत्पादक जिलों में प्राथमिकता से फास्फेटिक उर्वरक उपलब्ध कराएं:  कृषि मंत्री

- प्रदेश में 26.35 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का स्टॉक, 11.97 लाख मीट्रिक टन यूरिया और 4.77 लाख मीट्रिक टन डीएपी उपलब्ध

लखनऊ। प्रदेश में खरीफ सीजन के दौरान किसानों को उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित कराने के लिए सरकार ने निगरानी और प्रवर्तन अभियान तेज कर दिया है। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि आलू, सरसों और दलहन उत्पादक जिलों में फास्फेटिक उर्वरकों की उपलब्धता प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी फसल की आवश्यकता और संस्तुति के अनुसार समय पर उर्वरक उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।
कृषि मंत्री ने बताया कि 20 अगस्त तक प्रदेश में कुल 26.35 लाख मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध है। इसमें 11.97 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 4.77 लाख मीट्रिक टन डीएपी, 4.98 लाख मीट्रिक टन एनपीके, 3.53 लाख मीट्रिक टन एसएसपी और 1.10 लाख मीट्रिक टन एमओपी शामिल है। सरकार के अनुसार प्रदेश के किसी भी जिले या मंडल में उर्वरकों की किल्लत नहीं है।
सहकारिता क्षेत्र में 4.96 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 2.32 लाख मीट्रिक टन डीएपी और 1.36 लाख मीट्रिक टन एनपीके उपलब्ध है। वहीं, निजी क्षेत्र के बिक्री केंद्रों पर 7.01 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 2.45 लाख मीट्रिक टन डीएपी और 3.61 लाख मीट्रिक टन एनपीके का स्टॉक है।

- कालाबाजारी पर कार्रवाई, 43 एफआईआर
उर्वरकों की जमाखोरी, कालाबाजारी, ओवररेटिंग और टैगिंग रोकने के लिए प्रदेशभर में सघन प्रवर्तन अभियान चलाया जा रहा है। 1 अप्रैल से 20 अगस्त के बीच 12,358 छापे मारे गए और 1,782 नमूने लिए गए। अनियमितता मिलने पर 1,306 विक्रेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए।
कार्रवाई के दौरान 254 उर्वरक लाइसेंस निलंबित, 63 निरस्त, 29 दुकानों की बिक्री प्रतिबंधित और 25 दुकानें सील की गईं। अभियान में 166.38 मीट्रिक टन उर्वरक स्टॉक जब्त किया गया। वहीं, 43 एफआईआर दर्ज कर 24 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
कृषि मंत्री ने बताया कि दलहन खरीद योजना के तहत अब तक किसानों को 23 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। उन्होंने संबंधित क्रय एजेंसियों को खरीद प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए। साथ ही अधिक से अधिक किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के माध्यम से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से आच्छादित करने को कहा।
उन्होंने किसानों से अपनी कृषि भूमि की शत-प्रतिशत फार्मर रजिस्ट्री कराने और आवश्यकता से अधिक मात्रा में उर्वरकों का अग्रिम भंडारण न करने की अपील की। सरकार का कहना है कि उर्वरकों की निर्बाध आपूर्ति के लिए केंद्र सरकार के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है।
समीक्षा बैठक में सहकारिता मंत्री जेपीएस राठौर, कृषि राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख, प्रमुख सचिव कृषि रविंद्र, प्रमुख सचिव सहकारिता अजय कुमार शुक्ला, विशेष सचिव कृषि संजीव रंजन, कृषि निदेशक टीएम त्रिपाठी समेत उर्वरक कंपनियों के प्रतिनिधि और कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
भाइयों की कलाइयों से ऑनलाइन बाजार तक छाया स्वयं सहायता समूह की महिलाओं का हुनर

-  5 हजार स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं तैयार कर रहीं आकर्षक राखियां, ई-सरस समेत ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर बढ़ी मांग

लखनऊ। इस रक्षाबंधन उत्तर प्रदेश की स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं के हुनर की चमक भाइयों की कलाइयों के साथ-साथ ऑनलाइन बाजार में भी दिखाई देगी। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के निर्देशों के क्रम में उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी करीब 5,000 स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं आकर्षक, पारंपरिक और आधुनिक डिजाइनों की हस्तनिर्मित राखियां तैयार कर रही हैं।
प्रयागराज, वाराणसी, बागपत, बुलंदशहर, लखीमपुर खीरी, गोरखपुर, उन्नाव, शामली, जौनपुर और मिर्जापुर समेत प्रदेश के लगभग सभी जिलों में महिलाएं राखी निर्माण में जुटी हैं। स्थानीय कला, पारंपरिक शिल्प और नवीन डिजाइनों से तैयार इन राखियों की बाजार में अच्छी मांग है। खास बात यह है कि अब इन उत्पादों को स्थानीय बाजारों के साथ-साथ ई-सरस और विभिन्न ई-कॉमर्स एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए भी ग्राहकों तक पहुंचाया जा रहा है।
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों की दीदियों द्वारा राखी निर्माण से उनकी आय में वृद्धि के साथ ग्रामीण संस्कृति, भारतीय परंपरा और महिलाओं की सृजनात्मकता को भी बढ़ावा मिलेगा। यह पहल सरकार के ‘लोकल फॉर लोकल’ के संकल्प को गति देने के साथ महिला उद्यमिता और आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

- फर्रुखाबाद और नोएडा की राखियों की ऑनलाइन मांग
मिशन निदेशक अरुण कुमार ने बताया कि उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दे रहा है। ई-सरस सहित विभिन्न ई-कॉमर्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से महिलाओं के उत्पादों को देशभर के ग्राहकों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि विशेष रूप से फर्रुखाबाद और नोएडा के स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार राखियों की ई-सरस पर लगातार अच्छी मांग मिल रही है। इससे ग्रामीण महिलाओं को स्थानीय बाजार की सीमाओं से बाहर निकलकर नए ग्राहकों तक पहुंचने का अवसर मिल रहा है।

- उत्पादन से ब्रांडिंग तक बढ़ रही भागीदारी
वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर, मिर्जापुर, अयोध्या, बाराबंकी, सीतापुर, कानपुर, आगरा, बरेली, झांसी, फर्रुखाबाद और नोएडा समेत कई जिलों की महिलाएं राखी निर्माण में सक्रिय हैं। इन राखियों में स्थानीय कला और पारंपरिक शिल्प के साथ महिलाओं की रचनात्मकता की झलक दिखाई दे रही है।
डिजिटल बाजार से जुड़ने के कारण महिलाओं के उत्पाद अब स्थानीय सीमाओं से बाहर व्यापक उपभोक्ता वर्ग तक पहुंच रहे हैं। ऑनलाइन बिक्री के माध्यम से उन्हें नए ग्राहक बनाने, उत्पाद की ब्रांडिंग और पैकेजिंग बेहतर करने तथा बाजार की मांग के अनुरूप उत्पादन करने का अनुभव भी मिल रहा है।
रक्षाबंधन जैसे त्योहार स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के लिए अपने हुनर को आय और उद्यमिता में बदलने का अवसर बन रहे हैं। राखियों की बढ़ती मांग इस बात का संकेत है कि ग्रामीण महिलाओं के गुणवत्तापूर्ण उत्पादों में बड़े बाजार तक पहुंचने की क्षमता है।
राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा समूहों के उत्पादों को ई-सरस, ई-कॉमर्स और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ-साथ ऑफलाइन बाजारों से जोड़ने के प्रयास जारी हैं। इससे महिलाओं को उत्पादन से लेकर पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन तक पूरी प्रक्रिया में आगे बढ़ने और अपने छोटे उद्यमों को विस्तार देने का अवसर मिल रहा है।
इस रक्षाबंधन स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के हाथों से तैयार राखियां भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक बनने के साथ ग्रामीण महिला सशक्तीकरण, आत्मनिर्भरता और उद्यमिता की कहानी भी कहेंगी।