आलू, सरसों और दलहन उत्पादक जिलों में प्राथमिकता से फास्फेटिक उर्वरक उपलब्ध कराएं:  कृषि मंत्री

- प्रदेश में 26.35 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का स्टॉक, 11.97 लाख मीट्रिक टन यूरिया और 4.77 लाख मीट्रिक टन डीएपी उपलब्ध

लखनऊ। प्रदेश में खरीफ सीजन के दौरान किसानों को उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित कराने के लिए सरकार ने निगरानी और प्रवर्तन अभियान तेज कर दिया है। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि आलू, सरसों और दलहन उत्पादक जिलों में फास्फेटिक उर्वरकों की उपलब्धता प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी फसल की आवश्यकता और संस्तुति के अनुसार समय पर उर्वरक उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।
कृषि मंत्री ने बताया कि 20 अगस्त तक प्रदेश में कुल 26.35 लाख मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध है। इसमें 11.97 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 4.77 लाख मीट्रिक टन डीएपी, 4.98 लाख मीट्रिक टन एनपीके, 3.53 लाख मीट्रिक टन एसएसपी और 1.10 लाख मीट्रिक टन एमओपी शामिल है। सरकार के अनुसार प्रदेश के किसी भी जिले या मंडल में उर्वरकों की किल्लत नहीं है।
सहकारिता क्षेत्र में 4.96 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 2.32 लाख मीट्रिक टन डीएपी और 1.36 लाख मीट्रिक टन एनपीके उपलब्ध है। वहीं, निजी क्षेत्र के बिक्री केंद्रों पर 7.01 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 2.45 लाख मीट्रिक टन डीएपी और 3.61 लाख मीट्रिक टन एनपीके का स्टॉक है।

- कालाबाजारी पर कार्रवाई, 43 एफआईआर
उर्वरकों की जमाखोरी, कालाबाजारी, ओवररेटिंग और टैगिंग रोकने के लिए प्रदेशभर में सघन प्रवर्तन अभियान चलाया जा रहा है। 1 अप्रैल से 20 अगस्त के बीच 12,358 छापे मारे गए और 1,782 नमूने लिए गए। अनियमितता मिलने पर 1,306 विक्रेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए।
कार्रवाई के दौरान 254 उर्वरक लाइसेंस निलंबित, 63 निरस्त, 29 दुकानों की बिक्री प्रतिबंधित और 25 दुकानें सील की गईं। अभियान में 166.38 मीट्रिक टन उर्वरक स्टॉक जब्त किया गया। वहीं, 43 एफआईआर दर्ज कर 24 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
कृषि मंत्री ने बताया कि दलहन खरीद योजना के तहत अब तक किसानों को 23 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। उन्होंने संबंधित क्रय एजेंसियों को खरीद प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए। साथ ही अधिक से अधिक किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के माध्यम से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से आच्छादित करने को कहा।
उन्होंने किसानों से अपनी कृषि भूमि की शत-प्रतिशत फार्मर रजिस्ट्री कराने और आवश्यकता से अधिक मात्रा में उर्वरकों का अग्रिम भंडारण न करने की अपील की। सरकार का कहना है कि उर्वरकों की निर्बाध आपूर्ति के लिए केंद्र सरकार के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है।
समीक्षा बैठक में सहकारिता मंत्री जेपीएस राठौर, कृषि राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख, प्रमुख सचिव कृषि रविंद्र, प्रमुख सचिव सहकारिता अजय कुमार शुक्ला, विशेष सचिव कृषि संजीव रंजन, कृषि निदेशक टीएम त्रिपाठी समेत उर्वरक कंपनियों के प्रतिनिधि और कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
भाइयों की कलाइयों से ऑनलाइन बाजार तक छाया स्वयं सहायता समूह की महिलाओं का हुनर

-  5 हजार स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं तैयार कर रहीं आकर्षक राखियां, ई-सरस समेत ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर बढ़ी मांग

लखनऊ। इस रक्षाबंधन उत्तर प्रदेश की स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं के हुनर की चमक भाइयों की कलाइयों के साथ-साथ ऑनलाइन बाजार में भी दिखाई देगी। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के निर्देशों के क्रम में उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी करीब 5,000 स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं आकर्षक, पारंपरिक और आधुनिक डिजाइनों की हस्तनिर्मित राखियां तैयार कर रही हैं।
प्रयागराज, वाराणसी, बागपत, बुलंदशहर, लखीमपुर खीरी, गोरखपुर, उन्नाव, शामली, जौनपुर और मिर्जापुर समेत प्रदेश के लगभग सभी जिलों में महिलाएं राखी निर्माण में जुटी हैं। स्थानीय कला, पारंपरिक शिल्प और नवीन डिजाइनों से तैयार इन राखियों की बाजार में अच्छी मांग है। खास बात यह है कि अब इन उत्पादों को स्थानीय बाजारों के साथ-साथ ई-सरस और विभिन्न ई-कॉमर्स एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए भी ग्राहकों तक पहुंचाया जा रहा है।
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों की दीदियों द्वारा राखी निर्माण से उनकी आय में वृद्धि के साथ ग्रामीण संस्कृति, भारतीय परंपरा और महिलाओं की सृजनात्मकता को भी बढ़ावा मिलेगा। यह पहल सरकार के ‘लोकल फॉर लोकल’ के संकल्प को गति देने के साथ महिला उद्यमिता और आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

- फर्रुखाबाद और नोएडा की राखियों की ऑनलाइन मांग
मिशन निदेशक अरुण कुमार ने बताया कि उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दे रहा है। ई-सरस सहित विभिन्न ई-कॉमर्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से महिलाओं के उत्पादों को देशभर के ग्राहकों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि विशेष रूप से फर्रुखाबाद और नोएडा के स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार राखियों की ई-सरस पर लगातार अच्छी मांग मिल रही है। इससे ग्रामीण महिलाओं को स्थानीय बाजार की सीमाओं से बाहर निकलकर नए ग्राहकों तक पहुंचने का अवसर मिल रहा है।

- उत्पादन से ब्रांडिंग तक बढ़ रही भागीदारी
वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर, मिर्जापुर, अयोध्या, बाराबंकी, सीतापुर, कानपुर, आगरा, बरेली, झांसी, फर्रुखाबाद और नोएडा समेत कई जिलों की महिलाएं राखी निर्माण में सक्रिय हैं। इन राखियों में स्थानीय कला और पारंपरिक शिल्प के साथ महिलाओं की रचनात्मकता की झलक दिखाई दे रही है।
डिजिटल बाजार से जुड़ने के कारण महिलाओं के उत्पाद अब स्थानीय सीमाओं से बाहर व्यापक उपभोक्ता वर्ग तक पहुंच रहे हैं। ऑनलाइन बिक्री के माध्यम से उन्हें नए ग्राहक बनाने, उत्पाद की ब्रांडिंग और पैकेजिंग बेहतर करने तथा बाजार की मांग के अनुरूप उत्पादन करने का अनुभव भी मिल रहा है।
रक्षाबंधन जैसे त्योहार स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के लिए अपने हुनर को आय और उद्यमिता में बदलने का अवसर बन रहे हैं। राखियों की बढ़ती मांग इस बात का संकेत है कि ग्रामीण महिलाओं के गुणवत्तापूर्ण उत्पादों में बड़े बाजार तक पहुंचने की क्षमता है।
राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा समूहों के उत्पादों को ई-सरस, ई-कॉमर्स और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ-साथ ऑफलाइन बाजारों से जोड़ने के प्रयास जारी हैं। इससे महिलाओं को उत्पादन से लेकर पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन तक पूरी प्रक्रिया में आगे बढ़ने और अपने छोटे उद्यमों को विस्तार देने का अवसर मिल रहा है।
इस रक्षाबंधन स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के हाथों से तैयार राखियां भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक बनने के साथ ग्रामीण महिला सशक्तीकरण, आत्मनिर्भरता और उद्यमिता की कहानी भी कहेंगी।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ बेंच में वादकारियों के लिए बड़ी सौगात

- मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली ने किया ‘लिटिगेंट शेड’ का उद्घाटन, आम लोगों को मिलेंगी मूलभूत सुविधाएं

- गेट नंबर 8 के पास बना वादकारी कक्ष, बैठने की जगह, पंखा, पानी और शौचालय की सुविधा

लखनऊ। संस्था के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में  न्यायमूर्ति अरुण भंसाली, मुख्य न्यायमूर्ति इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने गुरुवार को विभूति खंड, गोमती नगर स्थित हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच परिसर के गेट नंबर 08 के पास ‘लिटिगेंट शेड’ (वादकारी कक्ष) का उद्घाटन किया।
यह कक्ष रोज आने वाले लोगों और वादकारियों को बैठने की जगह, पंखा, पीने का पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएँ देगा, ताकि उन्हें बाहर या भीड़-भाड़ वाले गलियारों में इंतज़ार न करना पड़े। इससे लोगों के अनुकूल बुनियादी ढाँचे को प्राथमिकता मिलेगी और न्यायालय की सुनवाई में शामिल होने वाले आम नागरिकों की मुश्किलें कम होंगी।
इस कार्यक्रम में  न्यायमूर्ति राजन रॉय वरिष्ठ न्यायमूर्ति उच्च न्यायालय लखनऊ और भवन समिति के अध्यक्ष, उच्च न्यायालय के अन्य  न्यायाधीश,  रजिस्ट्रार जनरल,  वरिष्ठ निबंधक, रजिस्ट्री के अधिकारी और अवध बार एसोसिएशन के अन्य सम्मानित सदस्य शामिल हुए।
लखनऊ: गोमतीनगर में बैंक के बाहर शख्स ने पत्नी को मारी गोली, घर लौटकर बहन की हत्या, फिर किया सुसाइड
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में उस समय सनसनी फैल गई, जब एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी और बहन की गोली मारकर हत्या करने के बाद खुदकुशी कर ली। फिलहाल, लखनऊ पुलिस इस हत्याकांड में आगे की तफ्तीश में जुटी है।

शुरुआत में जानकारी आई कि लखनऊ के गोमतीनगर थाना क्षेत्र के विवेकखंड में दिन-दहाड़े एक महिला बैंक अधिकारी की गोली मारकर हत्या कर दी गई। दोपहर करीब 12 बजे महिला को आईसीआईसीआई बैंक ब्रांच के बाहर बुलाकर गोली मारी गई थी। व्यक्ति ने वारदात को अंजाम देने से पहले महिला से थोड़ी देर बात की और फिर कथित तौर पर गोली मारकर मौके से भाग गया।

गोली चलने की आवाज सुनकर बैंक कर्मचारी और आसपास के लोग इकट्ठा हो गए। तुरंत महिला को नजदीक के एक अस्पताल में ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। महिला की पहचान दिव्या मिश्रा के रूप में हुई। वह आईसीआईसीआई बैंक में असिस्टेंट मैनेजर के तौर पर कार्यरत थी।

आरोप है कि दिव्या मिश्रा को उसके पति मानस बाजपेयी ने गोली मारी थी, जो खुद भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की जानकीपुरम ब्रांच में काम करता था।बाद में जानकारी सामने आई कि मानस बाजपेयी अपनी पत्नी की हत्या के बाद गोमतीनगर के हुसड़िया चौराहा स्थित घर पर लौटा, जहां उसने अपनी बहन को भी गोली मार दी। बाद में उसने खुद को भी गोली मारकर मौत के घाट उतार लिया। मानस बाजपेयी की बहन की पहचान 28 वर्षीय तूलिका उर्फ सीबा के रूप में हुई है।दिव्या मिश्रा पर हमले को लेकर एक प्रत्यक्षदर्शी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस को बताया, "वह रास्ते से गुजर रहा था। एक युवक ने हाथ में दो पिस्टल ले रखी थीं। उसने बात करते-करते दोनों पिस्टल निकालकर गोली चला दी। आवाज सुनकर ब्रांच के कर्मचारी भी बाहर निकले, लेकिन वह व्यक्ति बैंक कर्मचारियों पर अपनी पिस्टल तान दी। इसके कारण वे सभी वापस अंदर भाग गए। उधर, गोली मारने के बाद वह व्यक्ति भी फरार हो गया।"प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि वह व्यक्ति एक ऑटो में आया था। वारदात के बाद वह व्यक्ति ऑटो से ही वहां से भागा। उसने बताया कि ऑटो रिक्शा पर पीछे नंबर प्लेट भी नहीं थी।एडीसीपी ईस्ट अमोल मुरकुट ने आईएएनएस को बताया कि लखनऊ की रहने वाली दिव्या मिश्रा गोमती नगर की बैंक में कार्यरत थी।

वह अपने साथी कर्मचारियों के साथ एक बैंक के ग्राहक से मिलकर आई थी। एडीसीपी ने बताया कि पति पहले से ही घात लगाकर बैठा था। उसने दिव्या पर हमला किया और गोली मारकर हत्या कर दी।पूर्वी लखनऊ की डीसीपी दीक्षा शर्मा ने बताया कि दिन में गोमतीनगर थाना क्षेत्र में एक महिला को गोली लगने की सूचना मिली थी। पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची और महिला को अस्पताल भेजा गया, जहां उसे डॉक्टरों ने मृत घोषित किया। डीसीपी दीक्षा शर्मा ने कहा कि मौके पर मौजूद लोगों ने यह बताया था कि पति ने ही महिला की हत्या की है।डीसीपी दीक्षा शर्मा ने कहा, "थोड़ी देर बाद हुसड़िया चौराहे के बाद एक व्यक्ति के अपनी बहन की हत्या करने और खुद को गोली मारने की सूचना मिली थी। इस सूचना पर जब पुलिस घटनास्थल पर पहुंची तो उस व्यक्ति की पहचान दिव्या के पति के रूप में की गई।"डीसीपी दीक्षा शर्मा ने बताया कि एक व्हाट्सएप स्टेटस का पता चला है, जिसमें मानस ने सुसाइड को लेकर अपना घटनाक्रम व्यक्त किया।
जीजीआईसी विकास नगर में तुलसीदास जयंती समारोह का आयोजन
लखनऊ। मंगलवार को लोक संस्कृति एवं भारतीय सनातन परंपरा के वाहक भक्तशिरोमणि गोस्वामी तुलसीदास की जयंती लोकरंग फाउंडेशन एवं अवध भारती संस्थान के संयुक्त तत्त्वावधान  में राजकीय बालिका इण्टर काॅलेज विकास नगर में हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया । विद्यालय की प्रधानाचार्या एवं सुविख्यात लोक गायिका कुसुम वर्मा ने सभी अतिथियों का स्वागत  व अभिनंदन किया। मुख्य अतिथि प्रोफेसर सूर्य प्रसाद दीक्षित तथा विशिष्ट अतिथि डाॅ.रामबहादुर मिश्र द्वारा  सरस्वती चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्वलन के पश्चात् डाॅ. नुपुर त्रिपाठी ने सरस्वती वन्दना की । वही प्रो.सूर्य प्रसाद दीक्षित ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि, गोस्वामी तुलसीदास के साहित्य के संदेश को जन-जन तक पहुँचाना है। कार्यक्रम की संयोजक प्रधानाचार्या कुसुम वर्मा ने तुलसीदास के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला तथा उनके नेतृत्व में छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। शोध छात्र अश्वनी तिवारी ने प्रोफेसर सूर्यप्रसाद दीक्षित एवं प्रधानाचार्या कुसुम वर्मा को अंगवस्त्र भेंट किया। कार्यक्रम में विद्यालय की छात्राओं एवं बबिता वर्मा, शबनम नकवी, दीपा साहू, प्रियंका सिंह, कंचन सिंह शिक्षिकाओं एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारी की सहभागिता रही। लोकरंग फाउंडेशन के अध्यक्ष अतुल कुमार सिंह ने बताया कि जयंती पखवाड़े के अंतर्गत गोस्वामी तुलसीदास  के साहित्य और विचारों से नई पीढ़ी को जोड़ने के उद्देश्य से विद्यालय में छात्राओं के बीच यह कार्यक्रम किया जा रहा है । डाॅ. रामबहादुर मिश्र ने कहा कि तुलसी साहित्य में निहित लोकमंगल, समरसता, मानवीय मूल्यों एवं भारतीय संस्कृति के संदेश को व्यापक स्तर पर प्रसारित करना इस आयोजन की प्रमुख भावना है।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल 26 अगस्त तक अवकाश पर, गुजरात रवाना
-  राष्ट्रपति से अनुमति के बाद लिया अवकाश, स्वास्थ्य संबंधी चर्चाओं की आधिकारिक पुष्टि नहीं

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल 26 अगस्त तक अवकाश पर हैं और अपने गृह राज्य गुजरात गई हैं। राजभवन से मिली जानकारी के अनुसार, उन्होंने अवकाश के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से अनुमति ली है। अपने लंबे कार्यकाल में यह उनका पहला अवकाश बताया जा रहा है।
राजभवन के अनुसार राज्यपाल ने पारिवारिक और निजी कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए यह अवकाश लिया है। उनके गुजरात जाने को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में अलग-अलग चर्चाएं जरूर हैं, लेकिन अवकाश के पीछे किसी राजनीतिक कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

- स्वास्थ्य को लेकर भी चर्चाएं
राज्यपाल के स्वास्थ्य को लेकर भी कुछ चर्चाएं सामने आई हैं। हालांकि, सूत्रों के हवाले से कही जा रही इन बातों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में स्वास्थ्य संबंधी अटकलों को फिलहाल पुष्ट तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता।

-  राजभवन का कामकाज जारी रहेगा
राज्यपाल की अनुपस्थिति के दौरान राजभवन का नियमित कामकाज संवैधानिक प्रावधानों और निर्धारित व्यवस्था के तहत जारी रहेगा। प्रशासनिक कार्यों पर किसी तरह का व्यवधान न हो, इसके लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं।
अवकाश की अवधि पूरी होने के बाद राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के 27 अगस्त से नियमित दायित्व संभालने की उम्मीद है।
हाल के दिनों में राज्यपाल की ओर से विश्वविद्यालयों की व्यवस्थाओं और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर की गई टिप्पणियों के चलते भी वह चर्चा में रही हैं। हालांकि, उनके वर्तमान अवकाश को इन घटनाक्रमों से जोड़कर देखने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
यूपी और नाइजीरिया के बीच कृषि सहयोग की नई राह, तकनीक और नवाचार पर जोर


- 10 सदस्यीय नाइजीरियाई प्रतिनिधिमंडल ने कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही से की मुलाकात; खाद्य सुरक्षा, कृषि विपणन और ग्रामीण विकास पर हुआ मंथन

लखनऊ। उत्तर प्रदेश और नाइजीरिया के बीच कृषि क्षेत्र में सहयोग की नई संभावनाओं को तलाशने के लिए बुधवार को महत्वपूर्ण बैठक हुई। नाइजीरिया के कृषि एवं खाद्य सुरक्षा राज्य मंत्री सीनेटर डॉ. अलीयू साबी अब्दुल्लाही के नेतृत्व में आए 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही से मुलाकात की। बैठक में कृषि तकनीक, खाद्य सुरक्षा, नवाचार, ग्रामीण विकास और कृषि उत्पादों के बेहतर विपणन समेत कई मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।
कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में दोनों पक्षों ने अपने-अपने देशों में कृषि क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों और सफल प्रयोगों को साझा किया। साथ ही तकनीकी सहयोग और आपसी अनुभवों के आदान-प्रदान की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।

- बीज से बाजार तक किसानों को सुविधाएं देने पर जोर
कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार किसानों की समृद्धि के लिए बीज से लेकर बाजार तक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर काम कर रही है। कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक और नवाचार को बढ़ावा देकर किसानों की उत्पादन लागत कम करने तथा उनकी आय और लाभ बढ़ाने पर सरकार का विशेष फोकस है।

-  यूपी के कृषि मॉडल की दी जानकारी
बैठक में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से प्रमुख सचिव उद्यान बीएल मीणा, प्रमुख सचिव कृषि रवींद्र तथा आयुक्त एवं निबंधक सहकारिता योगेश कुमार ने प्रस्तुतीकरण दिया। नाइजीरियाई प्रतिनिधिमंडल को प्रदेश में कृषि और उद्यान क्षेत्र में अपनाई जा रही आधुनिक तकनीकों, नवाचारों तथा किसानों की लागत कम करने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी गई। प्रतिनिधिमंडल को कृषि उत्पादन, उद्यानिकी, सहकारिता और ग्रामीण विकास से जुड़ी विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों से भी अवगत कराया गया।

-  कृषि उत्पादों की मार्केटिंग पर भी चर्चा
दोनों पक्षों के बीच कृषि उत्पादों के बेहतर विपणन, किसानों को उनकी उपज का अधिक लाभ दिलाने और ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आधारित विकास को गति देने के उपायों पर भी मंथन हुआ। कृषि तकनीक और खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में आपसी सहयोग बढ़ाने तथा उपयोगी तकनीकों और अनुभवों को साझा करने की संभावनाएं भी तलाशी गईं।

-  नाइजीरिया ने साझा किए कृषि नवाचार
नाइजीरियाई प्रतिनिधिमंडल ने अपने देश में कृषि क्षेत्र में किए जा रहे विभिन्न नवाचारों और प्रयासों की जानकारी साझा की। बैठक में दोनों देशों के कृषि क्षेत्र की चुनौतियों, संभावनाओं और तकनीकी जरूरतों पर चर्चा करते हुए भविष्य में सहयोग के संभावित क्षेत्रों की पहचान पर जोर दिया गया।
प्रतिनिधिमंडल में सीनेटर डॉ. अलीयू साबी अब्दुल्लाही के साथ मोहम्मद इहिएज़ुए अब्दुलमुतालिब, बोलुवाडे एबेनेज़र ओलामिडे, इंजीनियर अमीनू बोडिंगा मोहम्मद, डॉ. एडेट एकाँग, इलुरोमी डेबोला, गालान्ती मलामी मोहम्मद, अदुनमो रूफस संडे, डॉ. जिब्रिल शान्ताली मोहम्मद और इंजीनियर शैलेन्द्र कुमार झा शामिल रहे।
बैठक में प्रमुख सहकारिता मंत्री जेपीएस राठौर, प्रमुख सचिव सहकारिता अजय कुमार शुक्ला, महानिदेशक उपकार संजय सिंह, निदेशक कृषि टीएम त्रिपाठी, निदेशक उद्यान भानु प्रकाश राम त्रिपाठी सहित कृषि, उद्यान एवं सहकारिता विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
चकबंदी प्रक्रिया में तेजी के निर्देश, बिना ठोस आधार योजना रद्द करने पर लगेगी रोक

-  किसानों को अनावश्यक मुकदमेबाजी से राहत देने के लिए चकबंदी आयुक्त ने जारी किए अहम दिशा-निर्देश; 267 गांवों में कब्जा परिवर्तन पूरा, सितंबर तक चक निगरानियों के निस्तारण का लक्ष्य


लखनऊ। किसानों को अनावश्यक मुकदमेबाजी और चकबंदी प्रक्रिया में होने वाली देरी से राहत देने के लिए चकबंदी आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने अधिकारियों को दो महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत बिना पर्याप्त कारण के प्रारंभिक या परिष्कृत चकबंदी योजना को निरस्त कर गांवों को दोबारा शुरुआती स्तर पर भेजने की प्रक्रिया पर प्रभावी रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही कब्जा परिवर्तन पूरा हो चुके गांवों में लंबित चक निगरानियों का विशेष अभियान चलाकर समयबद्ध निस्तारण कराने को कहा गया है।
चकबंदी आयुक्त ने कहा कि कई मामलों में चकबंदी अधिकारी, बंदोबस्त अधिकारी या उप संचालक स्तर से पर्याप्त आधार के बिना प्रारंभिक अथवा परिष्कृत योजना निरस्त कर ग्राम को पुनः प्रारंभिक स्तर पर भेज दिया जाता है। इससे किसानों की समस्याएं बढ़ती हैं और पूरी प्रक्रिया लंबी होने के साथ अनावश्यक मुकदमेबाजी की स्थिति बनती है।
उन्होंने निर्देश दिया कि आपत्ति अथवा अपील की सुनवाई के दौरान संबंधित अधिकारी पहले अपने स्तर से योजना में आवश्यक सुधार का प्रयास करें। यदि योजना में चकबंदी अधिनियम की धारा-19 के प्रावधानों से अत्यधिक विचलन हो और सुधार संभव न हो, तभी ग्राम को प्रत्यावर्तित करने पर विचार किया जाए।
ऐसी स्थिति में सभी संबंधित खातेदारों को सुनवाई का अवसर देना अनिवार्य होगा। इसके बाद जिलाधिकारी अथवा जिला उप संचालक चकबंदी की संस्तुति के साथ प्रस्ताव भेजकर चकबंदी आयुक्त कार्यालय से लिखित पूर्व अनुमति प्राप्त करने के बाद ही प्रत्यावर्तन का आदेश जारी किया जा सकेगा।

-  267 गांवों में कब्जा परिवर्तन पूरा
चकबंदी आयुक्त ने कब्जा परिवर्तन पूरा हो चुके गांवों में चक निगरानियों के शीघ्र निस्तारण पर भी विशेष जोर दिया। वर्तमान सत्र में प्रदेश के 267 गांवों में कब्जा परिवर्तन का कार्य पूरा कराया जा चुका है। अब धारा-27 के तहत अंतिम अभिलेख तैयार करने और धारा-52 के निर्धारित लक्ष्यों को समय पर पूरा करने के लिए धारा-48 के तहत प्राप्त चक निगरानियों का समयबद्ध निस्तारण जरूरी है।

-  सितंबर तक विशेष अभियान चलाने के निर्देश
सभी उप संचालक चकबंदी को निर्देश दिया गया है कि वर्तमान सत्र के 267 गांवों के साथ पूर्व में कब्जा परिवर्तन पूरा हो चुके गांवों की लंबित चक निगरानियों का भी विशेष अभियान चलाकर सितंबर 2026 तक हर हाल में निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। इसकी प्रगति से निदेशालय को भी अवगत कराने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके लिए संबंधित गांवों की सूची और कार्यवाही पुस्तिका सभी बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी को उपलब्ध कराते हुए समन्वय के साथ कार्रवाई करने को कहा गया है।
चकबंदी आयुक्त के इन निर्देशों का उद्देश्य प्रक्रिया में तेजी लाने, अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और किसानों के हितों की रक्षा करते हुए चकबंदी अभिलेखों को निर्धारित समय में अंतिम रूप देना है।
आईटीआई बनेंगे आधुनिक कौशल और रोजगार के हब, उद्योगों की जरूरत के मुताबिक तैयार होंगे युवा

- डिजिटल लर्निंग, नए ट्रेड और इंडस्ट्री आधारित प्रशिक्षण पर जोर; स्कूल-कॉलेजों में आईटीआई के करियर विकल्पों की दी जाएगी जानकारी

लखनऊ। योगी सरकार प्रदेश के राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) को पारंपरिक प्रशिक्षण केंद्रों से आगे बढ़ाकर आधुनिक कौशल और रोजगार के हब के रूप में विकसित करने की तैयारी में है। सरकार का लक्ष्य है कि आईटीआई से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवाओं को उनकी योग्यता के अनुरूप सम्मानजनक रोजगार या स्वरोजगार से जोड़ा जाए।
बदलती तकनीक और उद्योगों की जरूरतों को देखते हुए आईटीआई की प्रशिक्षण व्यवस्था में व्यापक बदलाव किया जाएगा। प्रशिक्षण में डिजिटल लर्निंग, आधुनिक तकनीक और नए दौर के रोजगारपरक ट्रेड को बढ़ावा देने के साथ उद्योगों की मांग के अनुरूप युवाओं की तकनीकी दक्षता विकसित की जाएगी। इसके अलावा कम्युनिकेशन स्किल, सॉफ्ट स्किल, इंटरव्यू और कार्यस्थल की आवश्यक क्षमताओं पर भी विशेष जोर रहेगा।
इसी सिलसिले में बुधवार को व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने लखनऊ स्थित प्रशिक्षण एवं सेवायोजन निदेशालय का निरीक्षण किया। उन्होंने विभागीय गतिविधियों की जानकारी लेने के साथ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर प्रशिक्षण व्यवस्था, योजनाओं की प्रगति और युवाओं को रोजगार से जोड़ने की रणनीति पर चर्चा की।
बैठक में प्रदेश के राजकीय आईटीआई में प्रशिक्षकों की उपलब्धता, तकनीकी संसाधनों, प्रशिक्षण की गुणवत्ता, आधुनिक ट्रेड और प्रशिक्षार्थियों को रोजगार से जोड़ने की तैयारियों की समीक्षा की गई। मंत्री ने कहा कि युवाओं के सीखने का तरीका तेजी से बदल रहा है। ऐसे में कौशल विकास की व्यवस्था को भी डिजिटल और तकनीक आधारित बनाना जरूरी है। उन्होंने आईटीआई में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल सुनिश्चित करने तथा डिजिटल माध्यमों को प्रशिक्षण का हिस्सा बनाने के निर्देश दिए।

- स्कूल-कॉलेजों में बताए जाएंगे करियर विकल्प
मंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों के बीच आईटीआई को लेकर आकर्षण बढ़ाने के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाए। स्कूल और कॉलेज स्तर पर विद्यार्थियों को आईटीआई के आधुनिक ट्रेड, कौशल आधारित करियर और रोजगार की संभावनाओं की जानकारी दी जाएगी, ताकि युवा समय रहते अपनी रुचि और रोजगार की संभावनाओं के अनुसार कौशल प्रशिक्षण का विकल्प चुन सकें।
कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि कौशल प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल प्रमाण-पत्र देना नहीं, बल्कि युवाओं को वास्तविक रोजगार के लिए तैयार करना है। इसके लिए आईटीआई और उद्योगों के बीच समन्वय मजबूत किया जाएगा। इंडस्ट्री की मांग के अनुसार प्रशिक्षण पाठ्यक्रम और व्यावहारिक दक्षता विकसित करने पर जोर रहेगा, जिससे प्रशिक्षण पूरा करने के बाद युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ सकें।
उन्होंने कहा कि तकनीकी ज्ञान के साथ कम्युनिकेशन और सॉफ्ट स्किल भी आज के रोजगार बाजार में बेहद महत्वपूर्ण हैं। इसलिए प्रशिक्षण में इन क्षमताओं को भी पर्याप्त स्थान दिया जाए।

- हर आईटीआई को बनाया जाएगा भविष्य का कौशल केंद्र
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश के प्रत्येक आईटीआई को आधुनिक तकनीक, नए ट्रेड और उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप भविष्य के कौशल केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। उन्होंने कहा कि हुनरमंद युवा आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी ताकत हैं। सरकार की प्राथमिकता है कि आईटीआई से प्रशिक्षण लेने वाला प्रत्येक युवा अपने कौशल के बल पर सम्मानजनक रोजगार हासिल करे और प्रदेश की आर्थिक प्रगति में भागीदार बने।
बैठक में प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम, निदेशक प्रशिक्षण अभिषेक सिंह समेत विभाग एवं निदेशालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
332 नायब तहसीलदार बने तहसीलदार, 56,100 से 1.77 लाख रुपये तक होगा वेतन

-  योगी सरकार ने दी पदोन्नति की मंजूरी, दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि में रहेंगे अधिकारी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने राजस्व परिषद के 332 नायब तहसीलदारों को तहसीलदार पद पर पदोन्नति दी है। चयन वर्ष 2026-27 के नियमित चयन के तहत यह पदोन्नति की गई है। राजस्व परिषद की ओर से पदोन्नति का आदेश 13 अगस्त 2026 को जारी किया गया।
पदोन्नति का निर्णय 6 और 7 अगस्त 2026 को हुई विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक की संस्तुति के आधार पर लिया गया है। पदोन्नत अधिकारियों को तहसीलदार पद का कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि पर रखा गया है।

-  लेवल-10 वेतनमान में होगा इजाफा
तहसीलदार पद पर पदोन्नति के बाद अधिकारियों को वेतन मैट्रिक्स लेवल-10 का लाभ मिलेगा। इसके तहत 56,100 रुपये से 1,77,500 रुपये तक वेतन निर्धारित है। इससे पदोन्नत अधिकारियों के वेतन और जिम्मेदारियों दोनों में बढ़ोतरी होगी।
राजस्व परिषद ने पदोन्नति आदेश में संबंधित अधिकारियों को निर्धारित शर्तों एवं शासनादेशों का अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। पदोन्नति के बाद अधिकारियों को तहसीलदार पद की जिम्मेदारियां संभालनी होंगी।

-  राजस्व प्रशासन को मिलेगा अनुभव का लाभ
332 नायब तहसीलदारों की पदोन्नति से प्रदेश के राजस्व प्रशासन में तहसीलदार स्तर पर अधिकारियों की उपलब्धता बढ़ेगी। इससे भूमि, राजस्व और प्रशासन से जुड़े मामलों के निस्तारण में भी तेजी आने की उम्मीद है।