यूपी और नाइजीरिया के बीच कृषि सहयोग की नई राह, तकनीक और नवाचार पर जोर


- 10 सदस्यीय नाइजीरियाई प्रतिनिधिमंडल ने कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही से की मुलाकात; खाद्य सुरक्षा, कृषि विपणन और ग्रामीण विकास पर हुआ मंथन

लखनऊ। उत्तर प्रदेश और नाइजीरिया के बीच कृषि क्षेत्र में सहयोग की नई संभावनाओं को तलाशने के लिए बुधवार को महत्वपूर्ण बैठक हुई। नाइजीरिया के कृषि एवं खाद्य सुरक्षा राज्य मंत्री सीनेटर डॉ. अलीयू साबी अब्दुल्लाही के नेतृत्व में आए 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही से मुलाकात की। बैठक में कृषि तकनीक, खाद्य सुरक्षा, नवाचार, ग्रामीण विकास और कृषि उत्पादों के बेहतर विपणन समेत कई मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।
कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में दोनों पक्षों ने अपने-अपने देशों में कृषि क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों और सफल प्रयोगों को साझा किया। साथ ही तकनीकी सहयोग और आपसी अनुभवों के आदान-प्रदान की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।

- बीज से बाजार तक किसानों को सुविधाएं देने पर जोर
कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार किसानों की समृद्धि के लिए बीज से लेकर बाजार तक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर काम कर रही है। कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक और नवाचार को बढ़ावा देकर किसानों की उत्पादन लागत कम करने तथा उनकी आय और लाभ बढ़ाने पर सरकार का विशेष फोकस है।

-  यूपी के कृषि मॉडल की दी जानकारी
बैठक में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से प्रमुख सचिव उद्यान बीएल मीणा, प्रमुख सचिव कृषि रवींद्र तथा आयुक्त एवं निबंधक सहकारिता योगेश कुमार ने प्रस्तुतीकरण दिया। नाइजीरियाई प्रतिनिधिमंडल को प्रदेश में कृषि और उद्यान क्षेत्र में अपनाई जा रही आधुनिक तकनीकों, नवाचारों तथा किसानों की लागत कम करने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी गई। प्रतिनिधिमंडल को कृषि उत्पादन, उद्यानिकी, सहकारिता और ग्रामीण विकास से जुड़ी विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों से भी अवगत कराया गया।

-  कृषि उत्पादों की मार्केटिंग पर भी चर्चा
दोनों पक्षों के बीच कृषि उत्पादों के बेहतर विपणन, किसानों को उनकी उपज का अधिक लाभ दिलाने और ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आधारित विकास को गति देने के उपायों पर भी मंथन हुआ। कृषि तकनीक और खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में आपसी सहयोग बढ़ाने तथा उपयोगी तकनीकों और अनुभवों को साझा करने की संभावनाएं भी तलाशी गईं।

-  नाइजीरिया ने साझा किए कृषि नवाचार
नाइजीरियाई प्रतिनिधिमंडल ने अपने देश में कृषि क्षेत्र में किए जा रहे विभिन्न नवाचारों और प्रयासों की जानकारी साझा की। बैठक में दोनों देशों के कृषि क्षेत्र की चुनौतियों, संभावनाओं और तकनीकी जरूरतों पर चर्चा करते हुए भविष्य में सहयोग के संभावित क्षेत्रों की पहचान पर जोर दिया गया।
प्रतिनिधिमंडल में सीनेटर डॉ. अलीयू साबी अब्दुल्लाही के साथ मोहम्मद इहिएज़ुए अब्दुलमुतालिब, बोलुवाडे एबेनेज़र ओलामिडे, इंजीनियर अमीनू बोडिंगा मोहम्मद, डॉ. एडेट एकाँग, इलुरोमी डेबोला, गालान्ती मलामी मोहम्मद, अदुनमो रूफस संडे, डॉ. जिब्रिल शान्ताली मोहम्मद और इंजीनियर शैलेन्द्र कुमार झा शामिल रहे।
बैठक में प्रमुख सहकारिता मंत्री जेपीएस राठौर, प्रमुख सचिव सहकारिता अजय कुमार शुक्ला, महानिदेशक उपकार संजय सिंह, निदेशक कृषि टीएम त्रिपाठी, निदेशक उद्यान भानु प्रकाश राम त्रिपाठी सहित कृषि, उद्यान एवं सहकारिता विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
चकबंदी प्रक्रिया में तेजी के निर्देश, बिना ठोस आधार योजना रद्द करने पर लगेगी रोक

-  किसानों को अनावश्यक मुकदमेबाजी से राहत देने के लिए चकबंदी आयुक्त ने जारी किए अहम दिशा-निर्देश; 267 गांवों में कब्जा परिवर्तन पूरा, सितंबर तक चक निगरानियों के निस्तारण का लक्ष्य


लखनऊ। किसानों को अनावश्यक मुकदमेबाजी और चकबंदी प्रक्रिया में होने वाली देरी से राहत देने के लिए चकबंदी आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने अधिकारियों को दो महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत बिना पर्याप्त कारण के प्रारंभिक या परिष्कृत चकबंदी योजना को निरस्त कर गांवों को दोबारा शुरुआती स्तर पर भेजने की प्रक्रिया पर प्रभावी रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही कब्जा परिवर्तन पूरा हो चुके गांवों में लंबित चक निगरानियों का विशेष अभियान चलाकर समयबद्ध निस्तारण कराने को कहा गया है।
चकबंदी आयुक्त ने कहा कि कई मामलों में चकबंदी अधिकारी, बंदोबस्त अधिकारी या उप संचालक स्तर से पर्याप्त आधार के बिना प्रारंभिक अथवा परिष्कृत योजना निरस्त कर ग्राम को पुनः प्रारंभिक स्तर पर भेज दिया जाता है। इससे किसानों की समस्याएं बढ़ती हैं और पूरी प्रक्रिया लंबी होने के साथ अनावश्यक मुकदमेबाजी की स्थिति बनती है।
उन्होंने निर्देश दिया कि आपत्ति अथवा अपील की सुनवाई के दौरान संबंधित अधिकारी पहले अपने स्तर से योजना में आवश्यक सुधार का प्रयास करें। यदि योजना में चकबंदी अधिनियम की धारा-19 के प्रावधानों से अत्यधिक विचलन हो और सुधार संभव न हो, तभी ग्राम को प्रत्यावर्तित करने पर विचार किया जाए।
ऐसी स्थिति में सभी संबंधित खातेदारों को सुनवाई का अवसर देना अनिवार्य होगा। इसके बाद जिलाधिकारी अथवा जिला उप संचालक चकबंदी की संस्तुति के साथ प्रस्ताव भेजकर चकबंदी आयुक्त कार्यालय से लिखित पूर्व अनुमति प्राप्त करने के बाद ही प्रत्यावर्तन का आदेश जारी किया जा सकेगा।

-  267 गांवों में कब्जा परिवर्तन पूरा
चकबंदी आयुक्त ने कब्जा परिवर्तन पूरा हो चुके गांवों में चक निगरानियों के शीघ्र निस्तारण पर भी विशेष जोर दिया। वर्तमान सत्र में प्रदेश के 267 गांवों में कब्जा परिवर्तन का कार्य पूरा कराया जा चुका है। अब धारा-27 के तहत अंतिम अभिलेख तैयार करने और धारा-52 के निर्धारित लक्ष्यों को समय पर पूरा करने के लिए धारा-48 के तहत प्राप्त चक निगरानियों का समयबद्ध निस्तारण जरूरी है।

-  सितंबर तक विशेष अभियान चलाने के निर्देश
सभी उप संचालक चकबंदी को निर्देश दिया गया है कि वर्तमान सत्र के 267 गांवों के साथ पूर्व में कब्जा परिवर्तन पूरा हो चुके गांवों की लंबित चक निगरानियों का भी विशेष अभियान चलाकर सितंबर 2026 तक हर हाल में निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। इसकी प्रगति से निदेशालय को भी अवगत कराने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके लिए संबंधित गांवों की सूची और कार्यवाही पुस्तिका सभी बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी को उपलब्ध कराते हुए समन्वय के साथ कार्रवाई करने को कहा गया है।
चकबंदी आयुक्त के इन निर्देशों का उद्देश्य प्रक्रिया में तेजी लाने, अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और किसानों के हितों की रक्षा करते हुए चकबंदी अभिलेखों को निर्धारित समय में अंतिम रूप देना है।
आईटीआई बनेंगे आधुनिक कौशल और रोजगार के हब, उद्योगों की जरूरत के मुताबिक तैयार होंगे युवा

- डिजिटल लर्निंग, नए ट्रेड और इंडस्ट्री आधारित प्रशिक्षण पर जोर; स्कूल-कॉलेजों में आईटीआई के करियर विकल्पों की दी जाएगी जानकारी

लखनऊ। योगी सरकार प्रदेश के राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) को पारंपरिक प्रशिक्षण केंद्रों से आगे बढ़ाकर आधुनिक कौशल और रोजगार के हब के रूप में विकसित करने की तैयारी में है। सरकार का लक्ष्य है कि आईटीआई से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवाओं को उनकी योग्यता के अनुरूप सम्मानजनक रोजगार या स्वरोजगार से जोड़ा जाए।
बदलती तकनीक और उद्योगों की जरूरतों को देखते हुए आईटीआई की प्रशिक्षण व्यवस्था में व्यापक बदलाव किया जाएगा। प्रशिक्षण में डिजिटल लर्निंग, आधुनिक तकनीक और नए दौर के रोजगारपरक ट्रेड को बढ़ावा देने के साथ उद्योगों की मांग के अनुरूप युवाओं की तकनीकी दक्षता विकसित की जाएगी। इसके अलावा कम्युनिकेशन स्किल, सॉफ्ट स्किल, इंटरव्यू और कार्यस्थल की आवश्यक क्षमताओं पर भी विशेष जोर रहेगा।
इसी सिलसिले में बुधवार को व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने लखनऊ स्थित प्रशिक्षण एवं सेवायोजन निदेशालय का निरीक्षण किया। उन्होंने विभागीय गतिविधियों की जानकारी लेने के साथ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर प्रशिक्षण व्यवस्था, योजनाओं की प्रगति और युवाओं को रोजगार से जोड़ने की रणनीति पर चर्चा की।
बैठक में प्रदेश के राजकीय आईटीआई में प्रशिक्षकों की उपलब्धता, तकनीकी संसाधनों, प्रशिक्षण की गुणवत्ता, आधुनिक ट्रेड और प्रशिक्षार्थियों को रोजगार से जोड़ने की तैयारियों की समीक्षा की गई। मंत्री ने कहा कि युवाओं के सीखने का तरीका तेजी से बदल रहा है। ऐसे में कौशल विकास की व्यवस्था को भी डिजिटल और तकनीक आधारित बनाना जरूरी है। उन्होंने आईटीआई में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल सुनिश्चित करने तथा डिजिटल माध्यमों को प्रशिक्षण का हिस्सा बनाने के निर्देश दिए।

- स्कूल-कॉलेजों में बताए जाएंगे करियर विकल्प
मंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों के बीच आईटीआई को लेकर आकर्षण बढ़ाने के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाए। स्कूल और कॉलेज स्तर पर विद्यार्थियों को आईटीआई के आधुनिक ट्रेड, कौशल आधारित करियर और रोजगार की संभावनाओं की जानकारी दी जाएगी, ताकि युवा समय रहते अपनी रुचि और रोजगार की संभावनाओं के अनुसार कौशल प्रशिक्षण का विकल्प चुन सकें।
कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि कौशल प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल प्रमाण-पत्र देना नहीं, बल्कि युवाओं को वास्तविक रोजगार के लिए तैयार करना है। इसके लिए आईटीआई और उद्योगों के बीच समन्वय मजबूत किया जाएगा। इंडस्ट्री की मांग के अनुसार प्रशिक्षण पाठ्यक्रम और व्यावहारिक दक्षता विकसित करने पर जोर रहेगा, जिससे प्रशिक्षण पूरा करने के बाद युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ सकें।
उन्होंने कहा कि तकनीकी ज्ञान के साथ कम्युनिकेशन और सॉफ्ट स्किल भी आज के रोजगार बाजार में बेहद महत्वपूर्ण हैं। इसलिए प्रशिक्षण में इन क्षमताओं को भी पर्याप्त स्थान दिया जाए।

- हर आईटीआई को बनाया जाएगा भविष्य का कौशल केंद्र
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश के प्रत्येक आईटीआई को आधुनिक तकनीक, नए ट्रेड और उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप भविष्य के कौशल केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। उन्होंने कहा कि हुनरमंद युवा आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी ताकत हैं। सरकार की प्राथमिकता है कि आईटीआई से प्रशिक्षण लेने वाला प्रत्येक युवा अपने कौशल के बल पर सम्मानजनक रोजगार हासिल करे और प्रदेश की आर्थिक प्रगति में भागीदार बने।
बैठक में प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम, निदेशक प्रशिक्षण अभिषेक सिंह समेत विभाग एवं निदेशालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
332 नायब तहसीलदार बने तहसीलदार, 56,100 से 1.77 लाख रुपये तक होगा वेतन

-  योगी सरकार ने दी पदोन्नति की मंजूरी, दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि में रहेंगे अधिकारी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने राजस्व परिषद के 332 नायब तहसीलदारों को तहसीलदार पद पर पदोन्नति दी है। चयन वर्ष 2026-27 के नियमित चयन के तहत यह पदोन्नति की गई है। राजस्व परिषद की ओर से पदोन्नति का आदेश 13 अगस्त 2026 को जारी किया गया।
पदोन्नति का निर्णय 6 और 7 अगस्त 2026 को हुई विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक की संस्तुति के आधार पर लिया गया है। पदोन्नत अधिकारियों को तहसीलदार पद का कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि पर रखा गया है।

-  लेवल-10 वेतनमान में होगा इजाफा
तहसीलदार पद पर पदोन्नति के बाद अधिकारियों को वेतन मैट्रिक्स लेवल-10 का लाभ मिलेगा। इसके तहत 56,100 रुपये से 1,77,500 रुपये तक वेतन निर्धारित है। इससे पदोन्नत अधिकारियों के वेतन और जिम्मेदारियों दोनों में बढ़ोतरी होगी।
राजस्व परिषद ने पदोन्नति आदेश में संबंधित अधिकारियों को निर्धारित शर्तों एवं शासनादेशों का अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। पदोन्नति के बाद अधिकारियों को तहसीलदार पद की जिम्मेदारियां संभालनी होंगी।

-  राजस्व प्रशासन को मिलेगा अनुभव का लाभ
332 नायब तहसीलदारों की पदोन्नति से प्रदेश के राजस्व प्रशासन में तहसीलदार स्तर पर अधिकारियों की उपलब्धता बढ़ेगी। इससे भूमि, राजस्व और प्रशासन से जुड़े मामलों के निस्तारण में भी तेजी आने की उम्मीद है।
यूपी-रेरा ने एक जगह समेटे सभी नियम, बिल्डरों के लिए तीन बैंक खाते अनिवार्य

- 13 जुलाई 2026 तक के 12 संशोधन एक साथ जारी, खरीदारों के पैसे, प्रोजेक्ट अकाउंट, विज्ञापन और एजेंटों के नियम हुए स्पष्ट

लखनऊ/गौतमबुद्ध नगर। उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (यूपी-रेरा) ने रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े सभी सामान्य नियमों को एक जगह समेटते हुए उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (सामान्य) विनियम, 2019 को सभी संशोधनों के साथ पुनः प्रकाशित किया है। इसमें 13 जुलाई 2026 तक किए गए 12 संशोधनों को शामिल किया गया है।
नए समेकित नियमों से बिल्डरों, घर खरीदारों और रियल एस्टेट एजेंटों के लिए नियमों को समझना आसान होगा। खास तौर पर खरीदारों से प्राप्त धन के इस्तेमाल, प्रोजेक्ट के बैंक खातों, कब्जा देने, संपत्ति हस्तांतरण, विज्ञापन, एजेंटों की जिम्मेदारियों और रिपोर्टिंग से जुड़े प्रावधानों को स्पष्ट किया गया है।

-  बिल्डर को बतानी होगी प्रोजेक्ट टीम की पूरी जानकारी
अब प्रमोटर को प्रोजेक्ट से जुड़े आर्किटेक्ट, इंजीनियर और चार्टर्ड अकाउंटेंट की जानकारी देनी होगी। इसके अलावा ग्राहकों के संपर्क के लिए कस्टमर रिलेशनशिप मैनेजर तथा संपर्क नंबर या टोल-फ्री नंबर भी उपलब्ध कराना होगा।
प्रोजेक्ट की हर तीन महीने की प्रगति रिपोर्ट (QPR) संबंधित विशेषज्ञों के प्रमाणपत्रों के साथ जमा करनी होगी। इसका उद्देश्य खरीदारों को प्रोजेक्ट की प्रगति की प्रमाणित और भरोसेमंद जानकारी उपलब्ध कराना है।

-  बिल्डर की प्रोफाइल रहेगी हमेशा अपडेट
प्रत्येक प्रमोटर को यूपी-रेरा की वेबसाइट पर अपनी प्रोफाइल बनानी होगी। नए प्रोजेक्ट के पंजीकरण अथवा कंपनी की जानकारी में बदलाव होने पर प्रोफाइल को अपडेट करना अनिवार्य होगा। इसमें कंपनी के निदेशक, साझेदार या ट्रस्टी, वित्तीय विवरण और आयकर रिटर्न जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां शामिल होंगी।
शिकायत और संपर्क व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए बिल्डर को चार अलग-अलग ई-मेल आईडी उपलब्ध करानी होंगी। इनमें प्रोजेक्ट रजिस्ट्रेशन, प्रशासनिक कार्य, ग्राहक शिकायत और आवंटियों एवं रियल एस्टेट एजेंटों से संपर्क के लिए अलग ई-मेल होंगे।

- स्वीकृत नक्शे वाला ही होगा प्रोजेक्ट का नाम
नए नियमों के अनुसार प्रमोटर को प्रोजेक्ट के लिए वही नाम इस्तेमाल करना होगा, जो स्वीकृत नक्शे में दर्ज है। इससे खरीदारों को प्रोजेक्ट की पहचान और स्वीकृति की स्थिति समझने में आसानी होगी।
वहीं, फ्लैट या मकान का कब्जा देते समय बिल्डर को यूपी-रेरा के निर्धारित प्रारूप में ऑफर ऑफ पजेशन जारी करना होगा।

- गैर-पंजीकृत प्रोजेक्ट के खरीदार भी कर सकेंगे शिकायत
यूपी-रेरा ने गैर-पंजीकृत प्रोजेक्ट में घर खरीदने वाले लोगों के लिए भी शिकायत का रास्ता आसान किया है। ऐसे खरीदार अब यूपी-रेरा की वेबसाइट पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकेंगे। शिकायत के साथ प्रोजेक्ट और प्रमोटर से संबंधित अतिरिक्त जानकारी उपलब्ध करानी होगी।
जरूरी रिपोर्ट समय पर जमा नहीं करने पर प्रमोटर और एजेंटों को लेट फीस देनी होगी। QPR में देरी पर 15 हजार रुपये, वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट में देरी पर 25 हजार रुपये और रियल एस्टेट एजेंट की तिमाही रिपोर्ट में देरी पर 10 हजार रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है।

- परिवार को फ्लैट ट्रांसफर पर सिर्फ 1,000 रुपये शुल्क
किसी आवंटी की मृत्यु के बाद फ्लैट या प्लॉट परिवार के सदस्य के नाम हस्तांतरित किए जाने पर 1,000 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। वहीं परिवार से बाहर के व्यक्ति के नाम ट्रांसफर होने पर अधिकतम 25 हजार रुपये शुल्क लिया जा सकेगा।

- प्रोजेक्ट के लिए तीन बैंक खाते अनिवार्य
नए नियमों में प्रोजेक्ट की धनराशि के प्रबंधन को लेकर महत्वपूर्ण व्यवस्था की गई है। प्रमोटर को प्रोजेक्ट के लिए कलेक्शन अकाउंट, सेपरेट अकाउंट और ट्रांजेक्शन अकाउंट रखने होंगे।
खरीदारों से कलेक्शन अकाउंट में प्राप्त राशि में से 70 प्रतिशत सेपरेट अकाउंट और 30 प्रतिशत ट्रांजेक्शन अकाउंट में ट्रांसफर किया जाएगा। प्रोजेक्ट से जुड़े ऋण की राशि भी सेपरेट अकाउंट में रखी जाएगी। इस खाते से धनराशि निकालने और खर्च करने के लिए निर्धारित नियमों का पालन करना होगा।
इन खातों का प्रत्येक वित्तीय वर्ष में ऑडिट होगा और ऑडिट रिपोर्ट यूपी-रेरा की वेबसाइट पर अपलोड करनी होगी। प्रमोटर खरीदारों से प्रोजेक्ट की राशि नकद में स्वीकार नहीं कर सकेगा।
प्रोजेक्ट के विज्ञापन और ब्रोशर में अब सिर्फ आकर्षक दावे करना पर्याप्त नहीं होगा। प्रमोटर और एजेंट को विज्ञापन में यूपी-रेरा रजिस्ट्रेशन नंबर, यूपी-रेरा वेबसाइट, क्यूआर कोड, कलेक्शन अकाउंट की जानकारी, प्रोजेक्ट लॉन्च की तारीख और एजेंट का रजिस्ट्रेशन नंबर प्रमुखता से प्रदर्शित करना होगा।
इससे संभावित खरीदार विज्ञापन के आधार पर ही प्रोजेक्ट की महत्वपूर्ण जानकारी की पुष्टि कर सकेंगे।

- एजेंटों के लिए ट्रेनिंग सर्टिफिकेट जरूरी
रियल एस्टेट एजेंटों के पंजीकरण और नवीनीकरण के लिए प्रशिक्षण प्रमाणपत्र जरूरी कर दिया गया है। एजेंटों को अपने रिकॉर्ड और आवश्यक दस्तावेज व्यवस्थित रखने होंगे। साथ ही प्रत्येक तीन महीने में अपने लेन-देन की रिपोर्ट यूपी-रेरा की वेबसाइट पर जमा करनी होगी।

- IFMS की रकम का मनमाना इस्तेमाल नहीं
रखरखाव के लिए खरीदारों से ली जाने वाली IFMS राशि के इस्तेमाल को भी स्पष्ट किया गया है। प्रमोटर को यह रकम अलग बैंक खाते में रखनी होगी। कॉमन एरिया की जिम्मेदारी रेजिडेंट्स एसोसिएशन को सौंपे जाने पर पूरी IFMS राशि भी एसोसिएशन को हस्तांतरित करनी होगी।
इस धनराशि का इस्तेमाल केवल कॉमन एरिया और सुविधाओं के रखरखाव, मरम्मत तथा आवश्यक बदलाव के लिए किया जा सकेगा। एसोसिएशन को इसका पूरा रिकॉर्ड रखना और ऑडिट कराना होगा।

- अटके प्रोजेक्ट को दूसरे प्रमोटर को सौंपने की व्यवस्था
समेकित नियमों में प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन बढ़ाने, रजिस्ट्रेशन वापस लेने और जरूरत पड़ने पर प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी दूसरे प्रमोटर को सौंपने की परिस्थितियां भी स्पष्ट की गई हैं। इसका उद्देश्य संकट में फंसे प्रोजेक्ट में खरीदारों के हितों की रक्षा करना और संभव होने पर रुके हुए प्रोजेक्ट को दोबारा गति देना है।
यूपी-रेरा के अनुसार सभी संशोधनों को शामिल कर तैयार किए गए सामान्य विनियम प्राधिकरण की वेबसाइट के लीगल सेक्शन में उपलब्ध हैं। इन्हें प्रमुख प्रकाशकों को भी भेजा जा रहा है, ताकि बिल्डर, खरीदार और रियल एस्टेट एजेंट इन प्रावधानों को आसानी से देख और समझ सकें।
मैनपुरी इंजीनियरिंग कॉलेज में मजबूत होगा तकनीकी शिक्षा का ढांचा, प्लेसमेंट और प्रशिक्षण पर जोर
- प्रशासनिक परिषद की छठी बैठक में लेक्चर कॉम्प्लेक्स, सीसीटीवी, सोलर सुविधाओं और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कक्ष पर चर्चा

लखनऊ। प्रदेश में तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता और इंजीनियरिंग संस्थानों के आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के लिए योगी सरकार लगातार कदम उठा रही है। इसी क्रम में लोकमाता देवी अहिल्या बाई होल्कर राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज, मैनपुरी की प्रशासनिक परिषद की छठी बैठक मंगलवार को प्राविधिक शिक्षा मंत्री एवं परिषद के अध्यक्ष आशीष पटेल की अध्यक्षता में सचिवालय स्थित कार्यालय में हुई।
बैठक में संस्थान की शैक्षणिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था, आधारभूत सुविधाओं, वित्तीय मामलों, मानव संसाधन, भर्ती प्रक्रिया, मान्यता और आगामी विकास कार्यों सहित विभिन्न प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा की गई।

- लेक्चर कॉम्प्लेक्स का निर्माण समय से पूरा करने पर जोर
प्रशासनिक परिषद ने संस्थान में प्रस्तावित लेक्चर कॉम्प्लेक्स के निर्माण पर चर्चा करते हुए कार्य को निर्धारित समयसीमा में पूरा कराने के निर्देश दिए। विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के साथ संस्थान की आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया।
बैठक में संस्थान में स्वीकृत विभिन्न पदों पर भर्ती प्रक्रिया की भी समीक्षा की गई। नए स्वीकृत पदों पर शासन स्तर से आवश्यक समन्वय और अनुमोदन के बाद आगे की कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। साथ ही स्पष्ट किया गया कि भर्ती एवं मानव संसाधन से जुड़े सभी कार्य शासन के निर्धारित नियमों और मानकों के अनुरूप ही किए जाएं।

- कैंपस में बढ़ेंगी सुरक्षा और आधुनिक सुविधाएं
संस्थान की सुरक्षा व्यवस्था और अन्य आधारभूत सुविधाओं को लेकर भी कई प्रस्तावों पर विचार हुआ। परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाने, सोलर ऊर्जा आधारित पार्किंग एवं अन्य सुविधाएं विकसित करने तथा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कक्ष स्थापित करने के प्रस्ताव पर चर्चा की गई।
इन कार्यों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्यदायी संस्था के माध्यम से कराने तथा आवश्यकता पड़ने पर सक्षम स्तर से कार्यदायी संस्था नामित करने के निर्देश दिए गए।

- प्लेसमेंट और प्रशिक्षण सुविधाओं पर विशेष फोकस
बैठक में विद्यार्थियों के प्रशिक्षण और प्लेसमेंट को बेहतर बनाने के लिए भी प्रस्तावों पर चर्चा हुई। परिषद ने तकनीकी शिक्षा को विद्यार्थियों के लिए अधिक रोजगारपरक बनाने और उन्हें उद्योग की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण एवं रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया।
प्राविधिक शिक्षा मंत्री आशीष पटेल ने कहा कि तकनीकी शिक्षा को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और रोजगारपरक बनाना योगी सरकार की प्राथमिकता है। इंजीनियरिंग संस्थानों में बेहतर आधारभूत सुविधाएं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट के अधिक अवसर और पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए सरकार निरंतर काम कर रही है।
बैठक में महानिदेशक प्राविधिक शिक्षा सेल्वा कुमारी जे., राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज मैनपुरी के निदेशक प्रो. दीपेंद्र सिंह सहित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आईआईटी कानपुर, केएनआईटी सुल्तानपुर, आईईटी लखनऊ तथा संस्थान के अधिकारी एवं शिक्षक प्रतिनिधि शामिल हुए।
वशिष्ठ नगर में स्टार्टअप को मिलेगा बड़ा बूस्ट, एमएसएमई के लिए 50 एकड़ जमीन
- एलडीए की 1,035 एकड़ की वशिष्ठ नगर योजना को शासन की मंजूरी, औद्योगिक-लॉजिस्टिक क्लस्टर से बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

लखनऊ, 18 अगस्त। राजधानी में औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों को नई रफ्तार देने के लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) की वशिष्ठ नगर योजना को शासन ने मंजूरी दे दी है। करीब 1,035 एकड़ क्षेत्रफल में विकसित होने वाली इस योजना में स्टार्टअप और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को बढ़ावा देने के लिए 50 एकड़ जमीन एमएसएमई विभाग को उपलब्ध कराई जाएगी।
एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण योजना के तहत आगरा एक्सप्रेस-वे पर 6,580 एकड़ क्षेत्रफल में वरुण विहार आवासीय योजना विकसित की जा रही है। इसी क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करने के उद्देश्य से वशिष्ठ नगर योजना का प्रस्ताव तैयार किया गया था।
योजना में आर्थिक विकास को गति देने के लिए औद्योगिक, लॉजिस्टिक और व्यावसायिक क्लस्टर विकसित किए जाएंगे। शासन से मंजूरी मिलने के बाद अब योजना को जमीन पर उतारने की प्रक्रिया तेज की जाएगी।
वशिष्ठ नगर योजना में औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों के लिए अलग-अलग जोन विकसित किए जाएंगे। इसी क्रम में 50 एकड़ जमीन एमएसएमई विभाग को दी जाएगी।
इस भूमि पर एमएसएमई विभाग द्वारा संचालित सरदार वल्लभ भाई पटेल रोजगार एवं औद्योगिक क्षेत्र योजना के तहत सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम स्थापित किए जाएंगे। इससे राजधानी में स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ावा मिलने के साथ युवाओं के लिए रोजगार, कौशल विकास और उद्यमिता के नए अवसर पैदा होंगे।

- छह गांवों की जमीन पर विकसित होगी योजना
एलडीए उपाध्यक्ष के अनुसार वशिष्ठ नगर योजना आगरा एक्सप्रेस-वे के पास करीब 1,035 एकड़ क्षेत्रफल में विकसित की जाएगी। इसके लिए रेवरी, भलिया, गहलवारा, आदमपुर इन्दवारा, बहरू और जलियामऊ गांवों की भूमि चिन्हित की गई है।
उन्होंने कहा कि योजना भविष्य में उत्तर प्रदेश स्टेट कैपिटल रीजन के विजन को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और राजधानी को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन से जोड़ने में मदद करेगी।

- कनेक्टिविटी से उद्योग और लॉजिस्टिक्स को मिलेगी रफ्तार
वशिष्ठ नगर योजना को आगरा एक्सप्रेस-वे, मोहन रोड, लिंक एक्सप्रेस-वे और वरुण विहार योजना जैसे महत्वपूर्ण कॉरिडोर से जोड़ा जाएगा। बेहतर कनेक्टिविटी से उद्योग, वेयरहाउसिंग, लॉजिस्टिक्स और परिवहन क्षेत्र को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
एलडीए के मुताबिक शासन से मंजूरी मिलने के बाद अब किसानों की सहमति और अन्य निर्धारित माध्यमों से भूमि जुटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। योजना के लिए भूमि संकलन में करीब 1,328 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
एलडीए अधिकारियों के अनुसार वशिष्ठ नगर में आधुनिक अवसंरचना के साथ औद्योगिक एवं आर्थिक गतिविधियों का विस्तार राजधानी के विकास को नई दिशा देगा और आने वाले वर्षों में बड़े पैमाने पर रोजगार एवं निवेश के अवसर सृजित होंगे।
‘परंपरा से प्रगति की ओर भविष्य बुनती खादी’ विषय पर हुई बैठक, 63 संस्थाओं ने किया प्रतिभाग

- खादी को आधुनिक तकनीक, डिजाइनिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग से जोड़ने पर हुई चर्चा

- मंत्री राकेश सचान ने की अध्यक्षता, खादी को नई पीढ़ी में लोकप्रिय बनाने पर दिया जोर

लखनऊ, 18 अगस्त। डालीबाग, लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड के सभागार में ‘खादी शोध, डिजाइन, मानकीकरण एवं प्रचार-प्रसार योजना’ के अन्तर्गत उत्तर प्रदेश में खादी को आधुनिकतम तकनीकों से जोड़ने तथा उसे नयी पीढ़ी के बीच अधिक लोकप्रिय एवं प्रतिस्पर्धी बनाने के उद्देश्य से बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री राकेश सचान द्वारा की गयी, जिसमें खादी की 63 संस्थाओं द्वारा सक्रिय रूप से प्रतिभाग किया गया।
इस अवसर पर “परंपरा से प्रगति की ओर भविष्य बुनती खादी” विषय पर एक पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन का प्रदर्शन भी किया गया, जिसमें खादी की वर्तमान स्थिति का आकलन एवं सर्वेक्षण करते हुए उसे आधुनिक स्वरूप में विकसित करने तथा खादी के उत्थान हेतु उसकी मूल पहचान बनाये रखते हुए डिजाइनिंग, ब्रांडिंग, मार्केटिंग व पैकेजिंग एवं गुणवत्ता में सुधार की आवश्यकता पर खादी संस्थाओं के साथ विस्तृत चर्चा की गयी।
मंत्री सचान द्वारा खादी में सतत विकास की सम्भावनायें, पर्यावरण अनुकूल उत्पादन, सतत आजीविकाओं के सृजन तथा उपभोग को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया। इसके अतिरिक्त खादी तंत्र को और अधिक मजबूत बनाने के लिये खादी संस्थानों, युवाओं, कारीगरों तथा उद्योग से जुड़े लोगों के बीच व्यापक सहयोग की भावना विकसित करने पर भी बल दिया गया।
बैठक में खादी संस्थाओं द्वारा क्षेत्रीय स्तर पर सामने आ रही चुनौतियों एवं सुझावों को भी साझा किया गया। उत्तर प्रदेश की खादी को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और आकर्षक ब्रांड के रूप में स्थापित करने की दिशा में आगे की कार्ययोजना पर भी विचार किया गया।
इस बैठक में प्रमुख सचिव, खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग अनिल सागर, मुख्य कार्यपालक अधिकारी, खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड शिशिर एवं बोर्ड के संयुक्त मुख्य कार्यपालक अधिकारी सिद्धार्थ यादव सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
आईटीआई और पॉलिटेक्निक में रिक्त पदों पर होगी अनुदेशकों की नियुक्ति :असीम अरुण

- राजकीय गोविंद बल्लभ पंत पॉलिटेक्निक, लखनऊ सहित विभिन्न जिलों में रिक्त पदों को भरने के दिए गए निर्देश

- तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए सरकार कटिबद्ध

लखनऊ। प्रदेश में युवाओं को गुणवत्तापूर्ण तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा प्रदान करने और उन्हें रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से समाज कल्याण विभाग ने बड़ा फैसला लिया है। समाज कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत संचालित राजकीय आईटीआई और पॉलिटेक्निक संस्थानों में अनुदेशकों (Instructors) के रिक्त पदों पर जल्द ही पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से भर्ती की जाएगी। भर्ती प्रक्रिया पूर्ण होने तक रिटायर्ड शिक्षकों आदि को अनुदेशक के रूम में लगाया जा रहा है।

- 40 पद हैं खाली :
वर्तमान में  राजकीय गोविंद बल्लभ पंत पॉलिटेक्निक, मोहन रोड, लखनऊ में 07 पद, राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI), बख्शी का तालाब, लखनऊ  में 23 पद, राजकीय आईटीआई/पॉलिटेक्निक, गोरखपुर में 09 पद और राजकीय आईटीआई/पॉलिटेक्निक, प्रतापगढ़ में 01 पद रिक्त है।
- क्या बोले - मंत्री असीम अरुण ?
हमारी सरकार युवाओं के कौशल विकास और उन्हें स्वावलंबी बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।अनुदेशकों की नियुक्ति होने से संस्थानों में शैक्षणिक स्तर मजबूत होगा और छात्रों को आधुनिक तकनीकों का बेहतर व्यावहारिक ज्ञान मिल सकेगा। पारदर्शी और निष्पक्ष प्रक्रिया के जरिए योग्य अभ्यर्थियों के चयन की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है।
मुजफ्फरनगर में दिव्यांगजनों के लिए बनेगा समेकित विद्यालय, सरकार ने मंजूर किए 24 करोड़

-  दिव्यांगजन और सरकार के बीच संवादहीनता खत्म करने पर जोर, 15-20 दिन में मंडल, जिला, तहसील व ब्लॉक स्तर पर लगेंगे शिविर

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने मुजफ्फरनगर में दिव्यांगजनों के लिए समेकित विद्यालय के निर्माण को मंजूरी देते हुए 24 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की है। विद्यालय के लिए पांच एकड़ सरकारी भूमि चिह्नित करने के निर्देश दिए गए हैं। मंगलवार को दिव्यांगजन सशक्तिकरण एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कश्यप ने विभागीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में यह जानकारी दी।
राज्यमंत्री ने कहा कि दिव्यांगजन और सरकार के बीच संवादहीनता को पूरी तरह समाप्त किया जाना चाहिए। दिव्यांगजनों की ओर से प्राप्त आवेदनों और प्रपत्रों पर समयबद्ध कार्रवाई करने के साथ ही आवेदक को भी की गई कार्रवाई की जानकारी दी जाए। उन्होंने विभाग के प्रमुख सचिव राजेश कुमार सिंह को मंडल और जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ नियमित वर्चुअल बैठकें आयोजित करने के निर्देश दिए।

- नियमित शिविर लगाकर योजनाओं का लाभ देने के निर्देश
नरेंद्र कश्यप ने कहा कि दिव्यांगजनों को सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ उनके क्षेत्र में ही उपलब्ध कराने के लिए हर 15 से 20 दिन के अंतराल पर मंडल, जिला, तहसील और ब्लॉक स्तर पर शिविर आयोजित किए जाएं। शिविरों के माध्यम से पात्र दिव्यांगजनों की समस्याओं का समाधान और योजनाओं से संबंधित आवेदन की प्रक्रिया पूरी की जाए।मुजफ्फरनगर में समेकित विद्यालय के लिए भूमि चिन्हांकन के संबंध में राज्यमंत्री ने जिलाधिकारी और एसडीएम से दूरभाष पर वार्ता कर शीघ्र पांच एकड़ सरकारी भूमि चिह्नित करने के निर्देश दिए।

- प्रचार-प्रसार पर खर्च का लिया जाए फीडबैक
राज्यमंत्री ने विभागीय योजनाओं के प्रचार-प्रसार पर खर्च होने वाली धनराशि का प्रभावी फीडबैक लेने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि किस माध्यम और मद में कितनी धनराशि खर्च की जा रही है तथा उसका अपेक्षित परिणाम मिल रहा है या नहीं। उन्होंने सोशल मीडिया के लिए अलग नियमावली तैयार करने तथा फ्लैक्स, होर्डिंग, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, प्रिंट मीडिया और सोशल मीडिया पर होने वाले प्रचार व्यय का अनुपात निर्धारित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने मंडल एवं जिला मुख्यालयों के साथ तहसील और ब्लॉक स्तर पर स्थायी एवं अस्थायी होर्डिंग लगाने को कहा। इन पर सरकार की योजनाओं के लाभार्थियों, उपलब्धियों और सफलता की कहानियों को प्रदर्शित करने के निर्देश दिए गए, ताकि योजनाओं की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सके।

- 10.44 लाख दिव्यांगजनों को पेंशन का लाभ
बैठक में दिव्यांग पेंशन योजना की भी समीक्षा की गई। राज्यमंत्री ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में दिव्यांग पेंशन योजना के लिए 1,47,004.69 लाख रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। अब तक 10,44,022 लाभार्थियों को पेंशन भेजी जा चुकी है, जिस पर 31,210.57 लाख रुपये खर्च हुए हैं। यह कुल बजट प्रावधान का लगभग 21.23 प्रतिशत है। उन्होंने 80 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता वाले 80 वर्ष से अधिक आयु के वृद्ध दिव्यांगजनों को प्राथमिकता के आधार पर समय से पेंशन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दिव्यांगता और वृद्धावस्था के कारण पेंशन ही ऐसे लोगों का प्रमुख सहारा है, इसलिए इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए।

- 75 जिलों में 1,125 मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल का लक्ष्य
दिव्यांगजनों की गतिशीलता बढ़ाने के लिए निःशुल्क मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल योजना की भी समीक्षा की गई। योजना के तहत प्रत्येक जिले में 15 मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल, यानी प्रदेश के सभी 75 जिलों में कुल 1,125 ट्राईसाइकिल उपलब्ध कराने का भौतिक लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में इसके लिए तीन करोड़ रुपये का बजट प्रावधान है। राज्यमंत्री के अनुसार एलिम्को, कानपुर नगर की ओर से 16 अगस्त 2026 तक प्रदेश के सभी 75 जिलों में चिन्हांकन शिविर आयोजित किए जा चुके हैं। अब चिन्हित पात्र दिव्यांगजनों को मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। समीक्षा बैठक में दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के प्रमुख सचिव राजेश कुमार सिंह, संयुक्त निदेशक अमित सिंह एवं रणजीत सिंह सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।