कश्मीर पहुंच रहे भारत में अमेरिकी राजदूत, सीएम उमर अब्दुल्ला से होगी मुलाकात, जानें क्यों अहम है यह दौरा?
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भारत में अमेरिकी राजदूत और दक्षिण एवं मध्य एशिया के लिए राष्ट्रपति ट्रंप के विशेष दूत सर्जियो गोर आज (बुधवार, 19 अगस्त) को दो दिवसीय दौरे पर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख पहुंचेंगे। वह इस दौरान जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुला से मिलेंगे। गुरुवार को वह लद्दाख का भी दौरा करेंगे। पदभार संभालने के बाद उनका यह पहला कश्मीर का पहला दौरा है।
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उपराज्यपाल और सीएम से होगी मुलाकात
जनवरी में भारत में 27वें अमेरिकी राजदूत के तौर पर औपचारिक रूप से पद संभालने के बाद कश्मीर घाटी का यह सर्जियो गोर का पहला दौरा होगा। वे दक्षिण और मध्य एशिया के लिए विशेष दूत के तौर पर भी काम करते हैं। गोर के 19 अगस्त की दोपहर को पहुंचने का कार्यक्रम है, जिसके बाद वे उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मिलेंगे और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से भी मुलाकात करेंगे। जिस होटल में वे रात भर रुकेंगे, वहां भी उनकी कुछ बैठकें तय हैं। उन्होंने कहा कि उनके 20 अगस्त को लद्दाख के लिए रवाना होने की संभावना है।
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अहम है सर्जियो गोर का दौरा
सर्जियो गोर का जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का दौरा कूटनीतिक और रणनीतिक लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अगस्त 2019 में आर्टिकल 370 के निरस्तीकरण और इस क्षेत्र को केंद्र शासित प्रदेश में बदलने के बाद यह किसी अमेरिकी राजदूत का पहला सीधा दौरा है। जनवरी 2026 में अमेरिका के 27वें राजदूत के रूप में कार्यभार संभालने के बाद सर्जियो गोर की यह पहली कश्मीर और लद्दाख यात्रा है। इसके जरिए अमेरिका यह संकेत दे रहा है कि वह दक्षिण एशिया के रणनीतिक रूप से संवेदनशील इस क्षेत्र में अपनी कूटनीतिक दिलचस्पी और निरंतरता बनाए हुए है।
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पहले भी कई अमेरिकी राजदूतों ने किया है कश्मीर का दौरा
यह पहली बार नहीं है जब कोई अमेरिकी राजदूत कश्मीर का दौरा कर रहा हो। सर्जियो गोर से पहले कई अमेरिकी राजदूतों ने कश्मीर का दौरा किया है। कश्मीर में अमेरिकी राजदूत का पिछला दौरा जनवरी 2020 में हुआ था, जब तत्कालीन राजदूत विदेशी दूतों के 15 सदस्यीय आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे। इस प्रतिनिधिमंडल को भारत सरकार अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 और 35A को हटाने के बाद जमीनी हालात का जायजा लेने के लिए श्रीनगर लाई थी। उन्होंने स्थानीय अधिकारियों, नागरिक समाज के सदस्यों और सेना के अधिकारियों से बातचीत की थी।
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कश्मीर के मसले पर रही है अमेरिका की नजर
1990 के दशक में कश्मीर पर पूरी दुनिया की नजर थी। उस वक्त अमेरिका की नीति कश्मीर के मसले को सुलझाने में मध्यस्थ की भूमिका निभाने की थी। लेकिन, भारत कभी भी इसके लिए तैयार नहीं हुआ। इसी क्रम में अमेरिकी राजदूत फ्रैंक विजनर ने 1995 में कश्मीर का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने वहां के राजनेताओं के साथ-साथ अलगाववादियों और छात्रों-पत्रकारों तक से मुलाकात की। इसका संकेत था कि अमेरिका कश्मीर मसले को सुलझाने को उत्सुक है। इसके बाद कई मौकों पर अमेरिका कश्मीर से जुड़े हर मौके पर भारत-पाकिस्तान के बीच परोक्ष तौर पर एक मध्यस्थ के रूप में खड़ा होते रहा।






















1 hour and 40 min ago
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