यूपी-रेरा ने एक जगह समेटे सभी नियम, बिल्डरों के लिए तीन बैंक खाते अनिवार्य

- 13 जुलाई 2026 तक के 12 संशोधन एक साथ जारी, खरीदारों के पैसे, प्रोजेक्ट अकाउंट, विज्ञापन और एजेंटों के नियम हुए स्पष्ट

लखनऊ/गौतमबुद्ध नगर। उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (यूपी-रेरा) ने रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े सभी सामान्य नियमों को एक जगह समेटते हुए उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (सामान्य) विनियम, 2019 को सभी संशोधनों के साथ पुनः प्रकाशित किया है। इसमें 13 जुलाई 2026 तक किए गए 12 संशोधनों को शामिल किया गया है।
नए समेकित नियमों से बिल्डरों, घर खरीदारों और रियल एस्टेट एजेंटों के लिए नियमों को समझना आसान होगा। खास तौर पर खरीदारों से प्राप्त धन के इस्तेमाल, प्रोजेक्ट के बैंक खातों, कब्जा देने, संपत्ति हस्तांतरण, विज्ञापन, एजेंटों की जिम्मेदारियों और रिपोर्टिंग से जुड़े प्रावधानों को स्पष्ट किया गया है।

-  बिल्डर को बतानी होगी प्रोजेक्ट टीम की पूरी जानकारी
अब प्रमोटर को प्रोजेक्ट से जुड़े आर्किटेक्ट, इंजीनियर और चार्टर्ड अकाउंटेंट की जानकारी देनी होगी। इसके अलावा ग्राहकों के संपर्क के लिए कस्टमर रिलेशनशिप मैनेजर तथा संपर्क नंबर या टोल-फ्री नंबर भी उपलब्ध कराना होगा।
प्रोजेक्ट की हर तीन महीने की प्रगति रिपोर्ट (QPR) संबंधित विशेषज्ञों के प्रमाणपत्रों के साथ जमा करनी होगी। इसका उद्देश्य खरीदारों को प्रोजेक्ट की प्रगति की प्रमाणित और भरोसेमंद जानकारी उपलब्ध कराना है।

-  बिल्डर की प्रोफाइल रहेगी हमेशा अपडेट
प्रत्येक प्रमोटर को यूपी-रेरा की वेबसाइट पर अपनी प्रोफाइल बनानी होगी। नए प्रोजेक्ट के पंजीकरण अथवा कंपनी की जानकारी में बदलाव होने पर प्रोफाइल को अपडेट करना अनिवार्य होगा। इसमें कंपनी के निदेशक, साझेदार या ट्रस्टी, वित्तीय विवरण और आयकर रिटर्न जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां शामिल होंगी।
शिकायत और संपर्क व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए बिल्डर को चार अलग-अलग ई-मेल आईडी उपलब्ध करानी होंगी। इनमें प्रोजेक्ट रजिस्ट्रेशन, प्रशासनिक कार्य, ग्राहक शिकायत और आवंटियों एवं रियल एस्टेट एजेंटों से संपर्क के लिए अलग ई-मेल होंगे।

- स्वीकृत नक्शे वाला ही होगा प्रोजेक्ट का नाम
नए नियमों के अनुसार प्रमोटर को प्रोजेक्ट के लिए वही नाम इस्तेमाल करना होगा, जो स्वीकृत नक्शे में दर्ज है। इससे खरीदारों को प्रोजेक्ट की पहचान और स्वीकृति की स्थिति समझने में आसानी होगी।
वहीं, फ्लैट या मकान का कब्जा देते समय बिल्डर को यूपी-रेरा के निर्धारित प्रारूप में ऑफर ऑफ पजेशन जारी करना होगा।

- गैर-पंजीकृत प्रोजेक्ट के खरीदार भी कर सकेंगे शिकायत
यूपी-रेरा ने गैर-पंजीकृत प्रोजेक्ट में घर खरीदने वाले लोगों के लिए भी शिकायत का रास्ता आसान किया है। ऐसे खरीदार अब यूपी-रेरा की वेबसाइट पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकेंगे। शिकायत के साथ प्रोजेक्ट और प्रमोटर से संबंधित अतिरिक्त जानकारी उपलब्ध करानी होगी।
जरूरी रिपोर्ट समय पर जमा नहीं करने पर प्रमोटर और एजेंटों को लेट फीस देनी होगी। QPR में देरी पर 15 हजार रुपये, वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट में देरी पर 25 हजार रुपये और रियल एस्टेट एजेंट की तिमाही रिपोर्ट में देरी पर 10 हजार रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है।

- परिवार को फ्लैट ट्रांसफर पर सिर्फ 1,000 रुपये शुल्क
किसी आवंटी की मृत्यु के बाद फ्लैट या प्लॉट परिवार के सदस्य के नाम हस्तांतरित किए जाने पर 1,000 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। वहीं परिवार से बाहर के व्यक्ति के नाम ट्रांसफर होने पर अधिकतम 25 हजार रुपये शुल्क लिया जा सकेगा।

- प्रोजेक्ट के लिए तीन बैंक खाते अनिवार्य
नए नियमों में प्रोजेक्ट की धनराशि के प्रबंधन को लेकर महत्वपूर्ण व्यवस्था की गई है। प्रमोटर को प्रोजेक्ट के लिए कलेक्शन अकाउंट, सेपरेट अकाउंट और ट्रांजेक्शन अकाउंट रखने होंगे।
खरीदारों से कलेक्शन अकाउंट में प्राप्त राशि में से 70 प्रतिशत सेपरेट अकाउंट और 30 प्रतिशत ट्रांजेक्शन अकाउंट में ट्रांसफर किया जाएगा। प्रोजेक्ट से जुड़े ऋण की राशि भी सेपरेट अकाउंट में रखी जाएगी। इस खाते से धनराशि निकालने और खर्च करने के लिए निर्धारित नियमों का पालन करना होगा।
इन खातों का प्रत्येक वित्तीय वर्ष में ऑडिट होगा और ऑडिट रिपोर्ट यूपी-रेरा की वेबसाइट पर अपलोड करनी होगी। प्रमोटर खरीदारों से प्रोजेक्ट की राशि नकद में स्वीकार नहीं कर सकेगा।
प्रोजेक्ट के विज्ञापन और ब्रोशर में अब सिर्फ आकर्षक दावे करना पर्याप्त नहीं होगा। प्रमोटर और एजेंट को विज्ञापन में यूपी-रेरा रजिस्ट्रेशन नंबर, यूपी-रेरा वेबसाइट, क्यूआर कोड, कलेक्शन अकाउंट की जानकारी, प्रोजेक्ट लॉन्च की तारीख और एजेंट का रजिस्ट्रेशन नंबर प्रमुखता से प्रदर्शित करना होगा।
इससे संभावित खरीदार विज्ञापन के आधार पर ही प्रोजेक्ट की महत्वपूर्ण जानकारी की पुष्टि कर सकेंगे।

- एजेंटों के लिए ट्रेनिंग सर्टिफिकेट जरूरी
रियल एस्टेट एजेंटों के पंजीकरण और नवीनीकरण के लिए प्रशिक्षण प्रमाणपत्र जरूरी कर दिया गया है। एजेंटों को अपने रिकॉर्ड और आवश्यक दस्तावेज व्यवस्थित रखने होंगे। साथ ही प्रत्येक तीन महीने में अपने लेन-देन की रिपोर्ट यूपी-रेरा की वेबसाइट पर जमा करनी होगी।

- IFMS की रकम का मनमाना इस्तेमाल नहीं
रखरखाव के लिए खरीदारों से ली जाने वाली IFMS राशि के इस्तेमाल को भी स्पष्ट किया गया है। प्रमोटर को यह रकम अलग बैंक खाते में रखनी होगी। कॉमन एरिया की जिम्मेदारी रेजिडेंट्स एसोसिएशन को सौंपे जाने पर पूरी IFMS राशि भी एसोसिएशन को हस्तांतरित करनी होगी।
इस धनराशि का इस्तेमाल केवल कॉमन एरिया और सुविधाओं के रखरखाव, मरम्मत तथा आवश्यक बदलाव के लिए किया जा सकेगा। एसोसिएशन को इसका पूरा रिकॉर्ड रखना और ऑडिट कराना होगा।

- अटके प्रोजेक्ट को दूसरे प्रमोटर को सौंपने की व्यवस्था
समेकित नियमों में प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन बढ़ाने, रजिस्ट्रेशन वापस लेने और जरूरत पड़ने पर प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी दूसरे प्रमोटर को सौंपने की परिस्थितियां भी स्पष्ट की गई हैं। इसका उद्देश्य संकट में फंसे प्रोजेक्ट में खरीदारों के हितों की रक्षा करना और संभव होने पर रुके हुए प्रोजेक्ट को दोबारा गति देना है।
यूपी-रेरा के अनुसार सभी संशोधनों को शामिल कर तैयार किए गए सामान्य विनियम प्राधिकरण की वेबसाइट के लीगल सेक्शन में उपलब्ध हैं। इन्हें प्रमुख प्रकाशकों को भी भेजा जा रहा है, ताकि बिल्डर, खरीदार और रियल एस्टेट एजेंट इन प्रावधानों को आसानी से देख और समझ सकें।
मैनपुरी इंजीनियरिंग कॉलेज में मजबूत होगा तकनीकी शिक्षा का ढांचा, प्लेसमेंट और प्रशिक्षण पर जोर
- प्रशासनिक परिषद की छठी बैठक में लेक्चर कॉम्प्लेक्स, सीसीटीवी, सोलर सुविधाओं और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कक्ष पर चर्चा

लखनऊ। प्रदेश में तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता और इंजीनियरिंग संस्थानों के आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के लिए योगी सरकार लगातार कदम उठा रही है। इसी क्रम में लोकमाता देवी अहिल्या बाई होल्कर राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज, मैनपुरी की प्रशासनिक परिषद की छठी बैठक मंगलवार को प्राविधिक शिक्षा मंत्री एवं परिषद के अध्यक्ष आशीष पटेल की अध्यक्षता में सचिवालय स्थित कार्यालय में हुई।
बैठक में संस्थान की शैक्षणिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था, आधारभूत सुविधाओं, वित्तीय मामलों, मानव संसाधन, भर्ती प्रक्रिया, मान्यता और आगामी विकास कार्यों सहित विभिन्न प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा की गई।

- लेक्चर कॉम्प्लेक्स का निर्माण समय से पूरा करने पर जोर
प्रशासनिक परिषद ने संस्थान में प्रस्तावित लेक्चर कॉम्प्लेक्स के निर्माण पर चर्चा करते हुए कार्य को निर्धारित समयसीमा में पूरा कराने के निर्देश दिए। विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के साथ संस्थान की आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया।
बैठक में संस्थान में स्वीकृत विभिन्न पदों पर भर्ती प्रक्रिया की भी समीक्षा की गई। नए स्वीकृत पदों पर शासन स्तर से आवश्यक समन्वय और अनुमोदन के बाद आगे की कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। साथ ही स्पष्ट किया गया कि भर्ती एवं मानव संसाधन से जुड़े सभी कार्य शासन के निर्धारित नियमों और मानकों के अनुरूप ही किए जाएं।

- कैंपस में बढ़ेंगी सुरक्षा और आधुनिक सुविधाएं
संस्थान की सुरक्षा व्यवस्था और अन्य आधारभूत सुविधाओं को लेकर भी कई प्रस्तावों पर विचार हुआ। परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाने, सोलर ऊर्जा आधारित पार्किंग एवं अन्य सुविधाएं विकसित करने तथा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कक्ष स्थापित करने के प्रस्ताव पर चर्चा की गई।
इन कार्यों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्यदायी संस्था के माध्यम से कराने तथा आवश्यकता पड़ने पर सक्षम स्तर से कार्यदायी संस्था नामित करने के निर्देश दिए गए।

- प्लेसमेंट और प्रशिक्षण सुविधाओं पर विशेष फोकस
बैठक में विद्यार्थियों के प्रशिक्षण और प्लेसमेंट को बेहतर बनाने के लिए भी प्रस्तावों पर चर्चा हुई। परिषद ने तकनीकी शिक्षा को विद्यार्थियों के लिए अधिक रोजगारपरक बनाने और उन्हें उद्योग की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण एवं रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया।
प्राविधिक शिक्षा मंत्री आशीष पटेल ने कहा कि तकनीकी शिक्षा को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और रोजगारपरक बनाना योगी सरकार की प्राथमिकता है। इंजीनियरिंग संस्थानों में बेहतर आधारभूत सुविधाएं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट के अधिक अवसर और पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए सरकार निरंतर काम कर रही है।
बैठक में महानिदेशक प्राविधिक शिक्षा सेल्वा कुमारी जे., राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज मैनपुरी के निदेशक प्रो. दीपेंद्र सिंह सहित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आईआईटी कानपुर, केएनआईटी सुल्तानपुर, आईईटी लखनऊ तथा संस्थान के अधिकारी एवं शिक्षक प्रतिनिधि शामिल हुए।
वशिष्ठ नगर में स्टार्टअप को मिलेगा बड़ा बूस्ट, एमएसएमई के लिए 50 एकड़ जमीन
- एलडीए की 1,035 एकड़ की वशिष्ठ नगर योजना को शासन की मंजूरी, औद्योगिक-लॉजिस्टिक क्लस्टर से बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

लखनऊ, 18 अगस्त। राजधानी में औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों को नई रफ्तार देने के लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) की वशिष्ठ नगर योजना को शासन ने मंजूरी दे दी है। करीब 1,035 एकड़ क्षेत्रफल में विकसित होने वाली इस योजना में स्टार्टअप और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को बढ़ावा देने के लिए 50 एकड़ जमीन एमएसएमई विभाग को उपलब्ध कराई जाएगी।
एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण योजना के तहत आगरा एक्सप्रेस-वे पर 6,580 एकड़ क्षेत्रफल में वरुण विहार आवासीय योजना विकसित की जा रही है। इसी क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करने के उद्देश्य से वशिष्ठ नगर योजना का प्रस्ताव तैयार किया गया था।
योजना में आर्थिक विकास को गति देने के लिए औद्योगिक, लॉजिस्टिक और व्यावसायिक क्लस्टर विकसित किए जाएंगे। शासन से मंजूरी मिलने के बाद अब योजना को जमीन पर उतारने की प्रक्रिया तेज की जाएगी।
वशिष्ठ नगर योजना में औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों के लिए अलग-अलग जोन विकसित किए जाएंगे। इसी क्रम में 50 एकड़ जमीन एमएसएमई विभाग को दी जाएगी।
इस भूमि पर एमएसएमई विभाग द्वारा संचालित सरदार वल्लभ भाई पटेल रोजगार एवं औद्योगिक क्षेत्र योजना के तहत सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम स्थापित किए जाएंगे। इससे राजधानी में स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ावा मिलने के साथ युवाओं के लिए रोजगार, कौशल विकास और उद्यमिता के नए अवसर पैदा होंगे।

- छह गांवों की जमीन पर विकसित होगी योजना
एलडीए उपाध्यक्ष के अनुसार वशिष्ठ नगर योजना आगरा एक्सप्रेस-वे के पास करीब 1,035 एकड़ क्षेत्रफल में विकसित की जाएगी। इसके लिए रेवरी, भलिया, गहलवारा, आदमपुर इन्दवारा, बहरू और जलियामऊ गांवों की भूमि चिन्हित की गई है।
उन्होंने कहा कि योजना भविष्य में उत्तर प्रदेश स्टेट कैपिटल रीजन के विजन को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और राजधानी को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन से जोड़ने में मदद करेगी।

- कनेक्टिविटी से उद्योग और लॉजिस्टिक्स को मिलेगी रफ्तार
वशिष्ठ नगर योजना को आगरा एक्सप्रेस-वे, मोहन रोड, लिंक एक्सप्रेस-वे और वरुण विहार योजना जैसे महत्वपूर्ण कॉरिडोर से जोड़ा जाएगा। बेहतर कनेक्टिविटी से उद्योग, वेयरहाउसिंग, लॉजिस्टिक्स और परिवहन क्षेत्र को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
एलडीए के मुताबिक शासन से मंजूरी मिलने के बाद अब किसानों की सहमति और अन्य निर्धारित माध्यमों से भूमि जुटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। योजना के लिए भूमि संकलन में करीब 1,328 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
एलडीए अधिकारियों के अनुसार वशिष्ठ नगर में आधुनिक अवसंरचना के साथ औद्योगिक एवं आर्थिक गतिविधियों का विस्तार राजधानी के विकास को नई दिशा देगा और आने वाले वर्षों में बड़े पैमाने पर रोजगार एवं निवेश के अवसर सृजित होंगे।
‘परंपरा से प्रगति की ओर भविष्य बुनती खादी’ विषय पर हुई बैठक, 63 संस्थाओं ने किया प्रतिभाग

- खादी को आधुनिक तकनीक, डिजाइनिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग से जोड़ने पर हुई चर्चा

- मंत्री राकेश सचान ने की अध्यक्षता, खादी को नई पीढ़ी में लोकप्रिय बनाने पर दिया जोर

लखनऊ, 18 अगस्त। डालीबाग, लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड के सभागार में ‘खादी शोध, डिजाइन, मानकीकरण एवं प्रचार-प्रसार योजना’ के अन्तर्गत उत्तर प्रदेश में खादी को आधुनिकतम तकनीकों से जोड़ने तथा उसे नयी पीढ़ी के बीच अधिक लोकप्रिय एवं प्रतिस्पर्धी बनाने के उद्देश्य से बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री राकेश सचान द्वारा की गयी, जिसमें खादी की 63 संस्थाओं द्वारा सक्रिय रूप से प्रतिभाग किया गया।
इस अवसर पर “परंपरा से प्रगति की ओर भविष्य बुनती खादी” विषय पर एक पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन का प्रदर्शन भी किया गया, जिसमें खादी की वर्तमान स्थिति का आकलन एवं सर्वेक्षण करते हुए उसे आधुनिक स्वरूप में विकसित करने तथा खादी के उत्थान हेतु उसकी मूल पहचान बनाये रखते हुए डिजाइनिंग, ब्रांडिंग, मार्केटिंग व पैकेजिंग एवं गुणवत्ता में सुधार की आवश्यकता पर खादी संस्थाओं के साथ विस्तृत चर्चा की गयी।
मंत्री सचान द्वारा खादी में सतत विकास की सम्भावनायें, पर्यावरण अनुकूल उत्पादन, सतत आजीविकाओं के सृजन तथा उपभोग को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया। इसके अतिरिक्त खादी तंत्र को और अधिक मजबूत बनाने के लिये खादी संस्थानों, युवाओं, कारीगरों तथा उद्योग से जुड़े लोगों के बीच व्यापक सहयोग की भावना विकसित करने पर भी बल दिया गया।
बैठक में खादी संस्थाओं द्वारा क्षेत्रीय स्तर पर सामने आ रही चुनौतियों एवं सुझावों को भी साझा किया गया। उत्तर प्रदेश की खादी को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और आकर्षक ब्रांड के रूप में स्थापित करने की दिशा में आगे की कार्ययोजना पर भी विचार किया गया।
इस बैठक में प्रमुख सचिव, खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग अनिल सागर, मुख्य कार्यपालक अधिकारी, खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड शिशिर एवं बोर्ड के संयुक्त मुख्य कार्यपालक अधिकारी सिद्धार्थ यादव सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
आईटीआई और पॉलिटेक्निक में रिक्त पदों पर होगी अनुदेशकों की नियुक्ति :असीम अरुण

- राजकीय गोविंद बल्लभ पंत पॉलिटेक्निक, लखनऊ सहित विभिन्न जिलों में रिक्त पदों को भरने के दिए गए निर्देश

- तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए सरकार कटिबद्ध

लखनऊ। प्रदेश में युवाओं को गुणवत्तापूर्ण तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा प्रदान करने और उन्हें रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से समाज कल्याण विभाग ने बड़ा फैसला लिया है। समाज कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत संचालित राजकीय आईटीआई और पॉलिटेक्निक संस्थानों में अनुदेशकों (Instructors) के रिक्त पदों पर जल्द ही पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से भर्ती की जाएगी। भर्ती प्रक्रिया पूर्ण होने तक रिटायर्ड शिक्षकों आदि को अनुदेशक के रूम में लगाया जा रहा है।

- 40 पद हैं खाली :
वर्तमान में  राजकीय गोविंद बल्लभ पंत पॉलिटेक्निक, मोहन रोड, लखनऊ में 07 पद, राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI), बख्शी का तालाब, लखनऊ  में 23 पद, राजकीय आईटीआई/पॉलिटेक्निक, गोरखपुर में 09 पद और राजकीय आईटीआई/पॉलिटेक्निक, प्रतापगढ़ में 01 पद रिक्त है।
- क्या बोले - मंत्री असीम अरुण ?
हमारी सरकार युवाओं के कौशल विकास और उन्हें स्वावलंबी बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।अनुदेशकों की नियुक्ति होने से संस्थानों में शैक्षणिक स्तर मजबूत होगा और छात्रों को आधुनिक तकनीकों का बेहतर व्यावहारिक ज्ञान मिल सकेगा। पारदर्शी और निष्पक्ष प्रक्रिया के जरिए योग्य अभ्यर्थियों के चयन की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है।
मुजफ्फरनगर में दिव्यांगजनों के लिए बनेगा समेकित विद्यालय, सरकार ने मंजूर किए 24 करोड़

-  दिव्यांगजन और सरकार के बीच संवादहीनता खत्म करने पर जोर, 15-20 दिन में मंडल, जिला, तहसील व ब्लॉक स्तर पर लगेंगे शिविर

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने मुजफ्फरनगर में दिव्यांगजनों के लिए समेकित विद्यालय के निर्माण को मंजूरी देते हुए 24 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की है। विद्यालय के लिए पांच एकड़ सरकारी भूमि चिह्नित करने के निर्देश दिए गए हैं। मंगलवार को दिव्यांगजन सशक्तिकरण एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कश्यप ने विभागीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में यह जानकारी दी।
राज्यमंत्री ने कहा कि दिव्यांगजन और सरकार के बीच संवादहीनता को पूरी तरह समाप्त किया जाना चाहिए। दिव्यांगजनों की ओर से प्राप्त आवेदनों और प्रपत्रों पर समयबद्ध कार्रवाई करने के साथ ही आवेदक को भी की गई कार्रवाई की जानकारी दी जाए। उन्होंने विभाग के प्रमुख सचिव राजेश कुमार सिंह को मंडल और जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ नियमित वर्चुअल बैठकें आयोजित करने के निर्देश दिए।

- नियमित शिविर लगाकर योजनाओं का लाभ देने के निर्देश
नरेंद्र कश्यप ने कहा कि दिव्यांगजनों को सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ उनके क्षेत्र में ही उपलब्ध कराने के लिए हर 15 से 20 दिन के अंतराल पर मंडल, जिला, तहसील और ब्लॉक स्तर पर शिविर आयोजित किए जाएं। शिविरों के माध्यम से पात्र दिव्यांगजनों की समस्याओं का समाधान और योजनाओं से संबंधित आवेदन की प्रक्रिया पूरी की जाए।मुजफ्फरनगर में समेकित विद्यालय के लिए भूमि चिन्हांकन के संबंध में राज्यमंत्री ने जिलाधिकारी और एसडीएम से दूरभाष पर वार्ता कर शीघ्र पांच एकड़ सरकारी भूमि चिह्नित करने के निर्देश दिए।

- प्रचार-प्रसार पर खर्च का लिया जाए फीडबैक
राज्यमंत्री ने विभागीय योजनाओं के प्रचार-प्रसार पर खर्च होने वाली धनराशि का प्रभावी फीडबैक लेने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि किस माध्यम और मद में कितनी धनराशि खर्च की जा रही है तथा उसका अपेक्षित परिणाम मिल रहा है या नहीं। उन्होंने सोशल मीडिया के लिए अलग नियमावली तैयार करने तथा फ्लैक्स, होर्डिंग, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, प्रिंट मीडिया और सोशल मीडिया पर होने वाले प्रचार व्यय का अनुपात निर्धारित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने मंडल एवं जिला मुख्यालयों के साथ तहसील और ब्लॉक स्तर पर स्थायी एवं अस्थायी होर्डिंग लगाने को कहा। इन पर सरकार की योजनाओं के लाभार्थियों, उपलब्धियों और सफलता की कहानियों को प्रदर्शित करने के निर्देश दिए गए, ताकि योजनाओं की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सके।

- 10.44 लाख दिव्यांगजनों को पेंशन का लाभ
बैठक में दिव्यांग पेंशन योजना की भी समीक्षा की गई। राज्यमंत्री ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में दिव्यांग पेंशन योजना के लिए 1,47,004.69 लाख रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। अब तक 10,44,022 लाभार्थियों को पेंशन भेजी जा चुकी है, जिस पर 31,210.57 लाख रुपये खर्च हुए हैं। यह कुल बजट प्रावधान का लगभग 21.23 प्रतिशत है। उन्होंने 80 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता वाले 80 वर्ष से अधिक आयु के वृद्ध दिव्यांगजनों को प्राथमिकता के आधार पर समय से पेंशन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दिव्यांगता और वृद्धावस्था के कारण पेंशन ही ऐसे लोगों का प्रमुख सहारा है, इसलिए इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए।

- 75 जिलों में 1,125 मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल का लक्ष्य
दिव्यांगजनों की गतिशीलता बढ़ाने के लिए निःशुल्क मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल योजना की भी समीक्षा की गई। योजना के तहत प्रत्येक जिले में 15 मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल, यानी प्रदेश के सभी 75 जिलों में कुल 1,125 ट्राईसाइकिल उपलब्ध कराने का भौतिक लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में इसके लिए तीन करोड़ रुपये का बजट प्रावधान है। राज्यमंत्री के अनुसार एलिम्को, कानपुर नगर की ओर से 16 अगस्त 2026 तक प्रदेश के सभी 75 जिलों में चिन्हांकन शिविर आयोजित किए जा चुके हैं। अब चिन्हित पात्र दिव्यांगजनों को मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। समीक्षा बैठक में दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के प्रमुख सचिव राजेश कुमार सिंह, संयुक्त निदेशक अमित सिंह एवं रणजीत सिंह सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
11 दिन में 1,559 दिव्यांगजनों को मिला रोजगार और स्वरोजगार

-  दिव्यांगजन रोजगार अभियान 3.0 में 1,021 को नौकरी, 538 को स्वरोजगार से जोड़ा गया, कानपुर नगर 149 चयन के साथ अव्वल

लखनऊ। योगी सरकार की दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन देने की मुहिम को बड़ी सफलता मिली है। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन की ओर से 3 से 13 अगस्त तक चलाए गए ‘दिव्यांगजन रोजगार अभियान 3.0’ के तहत महज 11 दिनों में प्रदेश के सभी 75 जिलों के 1,559 दिव्यांगजन रोजगार और स्वरोजगार से जुड़े। इनमें 1,021 दिव्यांगजनों को नौकरी के अवसर मिले, जबकि 538 दिव्यांगजनों को स्वरोजगार के लिए सरकारी योजनाओं और ऋण सुविधाओं से जोड़ा गया।
प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि सरकार का संकल्प है कि कोई भी दिव्यांगजन रोजगार से वंचित न रहे। अभियान का उद्देश्य केवल नौकरी उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि दिव्यांग युवाओं को आत्मविश्वास, सम्मान और आत्मनिर्भरता के साथ आगे बढ़ने का अवसर देना है।

-  10 से 18 हजार रुपये तक का वेतन
अभियान के दौरान विभिन्न जिलों में रोजगार मेले, प्लेसमेंट ड्राइव और रोजगार कैंप लगाए गए। निजी क्षेत्र की कंपनियों ने इनमें भाग लेकर मौके पर ही अभ्यर्थियों का चयन किया और कई चयनित युवाओं को जॉइनिंग लेटर भी दिए। हेल्थकेयर, फाइनेंस, इंश्योरेंस और टेलीकॉम समेत विभिन्न क्षेत्रों में डाटा एंट्री ऑपरेटर, कस्टमर सपोर्ट एक्जीक्यूटिव, हेल्थकेयर असिस्टेंट, ड्रेसर, टेलीकॉलर, मशीन ऑपरेटर, तकनीकी सहायक और हेल्पर जैसे पदों पर अवसर दिए गए। चयनित अभ्यर्थियों को 10,000 से 18,000 रुपये तक का मासिक वेतन ऑफर किया गया।

-  538 दिव्यांगजन बने स्वरोजगार की राह के लाभार्थी
अभियान में नौकरी के साथ स्वरोजगार पर भी विशेष जोर रहा। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के तहत 538 से अधिक दिव्यांगजनों को जोड़ा गया। उन्हें मोबाइल रिपेयरिंग, इलेक्ट्रिशियन, सिलाई-कढ़ाई, जनसेवा केंद्र, डेयरी और पशुपालन जैसे क्षेत्रों में अपना काम शुरू करने के लिए ऋण एवं सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। पात्र लाभार्थियों को ऋण स्वीकृति दिलाने की दिशा में भी कार्रवाई की गई।

-  कानपुर नगर सबसे आगे
अभियान में कानपुर नगर 149 चयन के साथ प्रदेश में पहले स्थान पर रहा। इसके अलावा आजमगढ़ में 77, अमरोहा में 69, बरेली में 63 और सुलतानपुर में 56 दिव्यांगजन रोजगार एवं स्वरोजगार से जुड़े।
अभियान को प्रभावी बनाने के लिए जिला स्तरीय अधिकारियों और कर्मचारियों ने जरूरत पड़ने पर लाभार्थियों के घर तक पहुंचकर व्यक्तिगत काउंसिलिंग की। मोबाइल बंद होने या संपर्क न हो पाने वाले दिव्यांगजनों से होम विजिट के जरिए संपर्क किया गया। उनकी रुचि, योग्यता और जरूरत के अनुसार रोजगार और स्वरोजगार के विकल्प बताए गए।

-  पुराने लाभार्थियों की भी हो रही ट्रैकिंग
कौशल विकास मिशन की ओर से दिव्यांगजन रोजगार अभियान के पहले और दूसरे चरण में रोजगार से जुड़े 2,000 से अधिक दिव्यांगजनों की वर्तमान स्थिति की भी ट्रैकिंग की जा रही है। मिशन निदेशक पुलकित खरे ने कहा कि अभियान 3.0 में 75 जिलों में 1,559 दिव्यांगजनों का रोजगार और स्वरोजगार से जुड़ना बड़ी उपलब्धि है। मिशन का प्रयास है कि दिव्यांगजनों को उनकी क्षमता और रुचि के अनुरूप बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जाएं।
अभियान में MSME Promotional Council, V-Mart, Flipkart, Multi Skills Welfare Society, HDFC Finance, Global Manpower & Placement Service, Aarogya Hospital और RK Industries सहित विभिन्न संस्थाओं और कंपनियों ने सहयोग किया।
जनता की समस्याओं का समाधान सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता : केशव प्रसाद मौर्य

-  जनता दर्शन में उप मुख्यमंत्री ने सैकड़ों नागरिकों की सुनी समस्याएं, अधिकारियों को दिए समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के निर्देश

लखनऊ। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सोमवार को 7-कालिदास मार्ग स्थित अपने कैंप कार्यालय में आयोजित जनता दर्शन कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए सैकड़ों नागरिकों की समस्याएं सुनीं। उन्होंने प्रत्येक फरियादी से आत्मीयता के साथ संवाद कर उनकी समस्याओं की जानकारी ली और संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध, निष्पक्ष एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
जनता दर्शन में भूमि एवं राजस्व विवाद, अवैध कब्जे, चिकित्सा सहायता, पेंशन, आवास, सड़क, बिजली, पेयजल, पुलिस-प्रशासन, शिक्षा और रोजगार समेत विभिन्न विषयों से जुड़े मामले सामने आए। उप मुख्यमंत्री ने प्रत्येक प्रकरण का संज्ञान लेते हुए संबंधित विभागों के अधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए।

-  शिकायतों का निस्तारण केवल औपचारिकता न हो
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता दर्शन सरकार और जनता के बीच विश्वास एवं संवाद का मजबूत माध्यम है। जनता की समस्याओं को सुनना, उनका समाधान करना और पात्र लोगों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि शिकायतों का निस्तारण महज औपचारिकता के रूप में नहीं, बल्कि शिकायतकर्ता की संतुष्टि के अनुरूप किया जाए। जनसमस्याओं के समाधान में लापरवाही, उदासीनता अथवा अनावश्यक विलंब किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।

-  कमजोर वर्गों की समस्याओं को प्राथमिकता
केशव प्रसाद मौर्य ने अधिकारियों को महिलाओं, दिव्यांगजनों, वरिष्ठ नागरिकों और जरूरतमंद वर्गों की समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि संवेदनशील, पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन ही सुशासन की पहचान है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार का संकल्प है कि कोई भी पात्र व्यक्ति जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे और किसी पीड़ित नागरिक को न्याय के लिए अनावश्यक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।

-  भूमि विवादों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश
भूमि विवाद और अवैध कब्जे से जुड़े मामलों पर उप मुख्यमंत्री ने गंभीर रुख अपनाते हुए संबंधित जिलाधिकारियों और पुलिस अधिकारियों को राजस्व एवं पुलिस विभाग की संयुक्त टीम बनाकर मौके पर जांच कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गरीबों और कमजोर वर्गों का उत्पीड़न करने, अवैध कब्जा करने तथा दबंगई दिखाने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।
उप मुख्यमंत्री ने कहा, “जनता का विश्वास ही हमारी सबसे बड़ी पूंजी है। प्रत्येक व्यक्ति की समस्या का समाधान कर उसे न्याय दिलाना सरकार की प्रतिबद्धता है।” उन्होंने अधिकारियों को शासन की मंशा के अनुरूप जनसेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पूरी संवेदनशीलता, पारदर्शिता और तत्परता के साथ कार्य करने के निर्देश दिए।
आलू किसानों के लिए योगी सरकार का बड़ा तोहफा, तीन योजनाओं का पोर्टल लॉन्च

- 1000 करोड़ रुपये के भामाशाह भाव स्थिरता कोष से मिलेगा उचित मूल्य, शीतगृह भंडारण पर 100 रुपये प्रति क्विंटल की छूट

लखनऊ। आलू उत्पादक किसानों को बाजार भाव में गिरावट, भंडारण लागत और महंगे बीज से राहत देने के लिए योगी सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में तीन महत्वपूर्ण योजनाएं लागू की हैं। उद्यान, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार एवं कृषि निर्यात राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह ने सोमवार को उद्यान भवन, सप्रू मार्ग में इन योजनाओं के पारदर्शी एवं सुगम क्रियान्वयन के लिए नव विकसित ऑनलाइन पोर्टल का शुभारंभ किया। तीनों योजनाओं से प्रदेश के 15 लाख से अधिक आलू किसानों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।

- भाव गिरने पर किसानों को मिलेगा मूल्य संरक्षण
आलू की बंपर पैदावार के कारण बाजार भाव में आने वाली गिरावट से किसानों को राहत देने के लिए 1000 करोड़ रुपये के भामाशाह भाव स्थिरता कोष की स्थापना की गई है। इसके लिए चालू वित्तीय वर्ष में 100 करोड़ रुपये की टोकन धनराशि का प्रावधान किया गया है।
योजना के तहत कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में गठित समिति आलू की उत्पादन लागत निर्धारित करेगी। किसानों को निर्धारित उत्पादन लागत के 25 प्रतिशत अथवा उत्पादन लागत और बिक्री दर के अंतर में से जो राशि कम होगी, वह अनुदान के रूप में दी जाएगी। एक किसान को अधिकतम 2 हेक्टेयर तथा प्रति हेक्टेयर अधिकतम 240 क्विंटल तक के आलू पर अनुदान अनुमन्य होगा। इससे करीब 12 से 14 लाख किसान लाभान्वित होंगे।
योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को केवल ऑनलाइन आवेदन करना होगा। ऑफलाइन आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। पात्र किसानों को अनुदान की राशि आधार-सीडेड डीबीटी के माध्यम से सीधे बैंक खाते में भेजी जाएगी। योजना की क्रियान्वयन अवधि 1 जनवरी से 15 अप्रैल तथा 1 जुलाई से 31 अक्टूबर निर्धारित की गई है। लाभ लेने के लिए क्रेता-विक्रेता सौदा प्रपत्र अनिवार्य होगा। किसान मंडी, उपमंडी, शीतगृह परिसर अथवा अपने खेत पर आलू बेचकर योजना का लाभ ले सकेंगे।

- शीतगृह में आलू रखने पर 100 रुपये प्रति क्विंटल की राहत
निजी शीतगृहों में आलू भंडारित करने वाले किसानों को भी सरकार ने बड़ी राहत दी है। प्रदेश के 2,363 निजी शीतगृहों में 173.03 लाख मीट्रिक टन आलू भंडारित है। भंडारण प्रभार में छूट के लिए 1000 करोड़ रुपये की योजना लागू की गई है, जिसमें 100 करोड़ रुपये की टोकन धनराशि रखी गई है।
इस योजना के तहत किसानों को 100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से अनुदान मिलेगा। एक किसान को अधिकतम 20,000 रुपये तक की छूट दी जाएगी। इससे 15 लाख से अधिक किसान लाभान्वित होंगे।

-  गुणवत्तापूर्ण बीज पर 1000 रुपये प्रति क्विंटल तक छूट
किसानों को नवीन एवं उच्च गुणवत्ता वाली आलू प्रजातियों के बीज उपलब्ध कराने के लिए 5 करोड़ रुपये की बीज विक्रय दर छूट योजना भी लागू की गई है। इसके तहत विभागीय आधारीय आलू बीज खरीदने पर किसानों को अधिकतम 1000 रुपये प्रति क्विंटल की छूट मिलेगी। इससे किसानों की प्रति हेक्टेयर उत्पादन लागत कम होगी और करीब 15 हजार से अधिक किसान लाभान्वित होंगे।

-  पोर्टल से होगा पारदर्शी क्रियान्वयन
मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि योगी सरकार किसानों की आय, हित और सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। तीनों योजनाओं का संचालन ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से किया जाएगा, जिससे प्रक्रिया पारदर्शी और सुगम होगी। सरकार के इस कदम से आलू किसानों को बाजार भाव में गिरावट, भंडारण लागत और गुणवत्तापूर्ण बीज की लागत—तीनों स्तरों पर आर्थिक राहत मिलेगी।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव बीएल मीणा, निदेशक उद्यान बीपी राम सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी और आलू उत्पादक किसान मौजूद रहे।
पिछड़ा वर्ग की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर सरकार का विशेष जोर

-  छात्रवृत्ति, शुल्क प्रतिपूर्ति, कंप्यूटर प्रशिक्षण, शादी अनुदान और छात्रावास निर्माण के लिए व्यापक बजट प्रावधान : नरेन्द्र कश्यप

लखनऊ। प्रदेश सरकार ने पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों, युवाओं और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ पहुंचाने के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में व्यापक बजट प्रावधान किए हैं। पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेन्द्र कश्यप ने सोमवार को विभागीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने और पात्र लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के निर्देश दिए।

-  शादी अनुदान के लिए 210 करोड़ का लक्ष्य

मंत्री ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में शादी अनुदान योजना के लिए 210 करोड़ रुपये का वार्षिक लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके सापेक्ष 106.65 करोड़ रुपये की धनराशि आवंटित की गई है। अब तक 96,956 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें 12,855 आवेदन निरस्त किए गए हैं। 30,466 लाभार्थियों को 60.93 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है।

-  31,704 युवाओं को कंप्यूटर प्रशिक्षण
युवाओं को तकनीकी ज्ञान से जोड़ने और उनकी रोजगारपरक क्षमता बढ़ाने के लिए कंप्यूटर प्रशिक्षण योजना में 40 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। ‘ओ’ लेवल और सीसीसी प्रशिक्षण के लिए 338 संस्थाओं का चयन किया गया है। ‘ओ’ लेवल में 24,242 और सीसीसी में 7,462 समेत कुल 31,704 प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य है। 11 अगस्त से प्रशिक्षण शुरू हो चुका है और लगभग पूरा निर्धारित लक्ष्य प्रशिक्षण में प्रतिभाग कर रहा है।

-  11 लाख विद्यार्थियों को पूर्वदशम छात्रवृत्ति का प्रस्ताव
पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की पूर्वदशम छात्रवृत्ति योजना के लिए 340 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है, जिसमें से 300 करोड़ रुपये की स्वीकृति जारी हो चुकी है। योजना के तहत करीब 11 लाख विद्यार्थियों को लाभान्वित करने का प्रस्ताव है। छात्रावासी विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति की अधिकतम मासिक दर 1,200 रुपये और दिवा विद्यार्थियों के लिए अधिकतम 550 रुपये निर्धारित है।
वहीं, दशमोत्तर छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में 2,720.50 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान है। इसके सापेक्ष 2,255 करोड़ रुपये की स्वीकृति जारी की जा चुकी है। इस योजना से करीब 27 लाख विद्यार्थियों को लाभान्वित करने का प्रस्ताव है। पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 में लगभग 27.78 लाख विद्यार्थियों को योजना का लाभ मिला था और आवंटित धनराशि का करीब 98 प्रतिशत खर्च किया गया था।

-  छात्रावास निर्माण पर भी फोकस
मंत्री ने बताया कि पिछड़े वर्ग के निर्धन परिवारों के विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षिक वातावरण और आवासीय सुविधा उपलब्ध कराने के लिए छात्रावास निर्माण योजना पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रदेश में वर्तमान में 102 निर्मित छात्रावास हैं, जिनमें करीब 5,400 विद्यार्थियों के रहने की क्षमता है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में इनमें 2,013 छात्र-छात्राएं आवासित रहे। वर्ष 2026-27 में छात्रावास निर्माण के लिए 20 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान प्रस्तावित है।
आवश्यकता और प्राथमिकता के आधार पर जनपदवार स्थलों एवं परियोजनाओं का चयन किया जाएगा। स्वीकृत परियोजनाओं को निर्धारित मानकों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध तरीके से पूरा कराने के साथ निर्माण कार्य की नियमित निगरानी भी की जाएगी।

-  अंतिम पायदान तक पहुंचाएं योजनाओं का लाभ
नरेन्द्र कश्यप ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि समाज कल्याण विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर योजनाओं का सफल क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने मंडल, जिला और तहसील स्तर पर विशेष कैंप आयोजित कर योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए, ताकि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े पात्र व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंच सके।
उन्होंने तकनीक के बढ़ते उपयोग को देखते हुए सोशल मीडिया का प्रभावी इस्तेमाल करने और प्रचार-प्रसार के लिए विभिन्न मदों में व्यय का अनुपात निर्धारित करने के निर्देश भी दिए।
बैठक में पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव राजेश कुमार सिंह, निदेशक उमेश प्रताप सिंह, संयुक्त निदेशक विकास शर्मा समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।