29 जुलाई 2026 को दिखेगा वर्ष का आकर्षक 'बक मून',/ फुल मून

 
गुरु पूर्णिमा पर बनेगा दुर्लभ
खगोलीय-सांस्कृतिक संयोग।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि 29 जुलाई 2026 की शाम आकाश प्रेमियों और सामान्य जनमानस के लिए विशेष रहने वाली है क्योंकि इस दौरान भारतीय समयानुसार रात 8:06 बजे जुलाई की पूर्णिमा अपने चरम पर होगी। इस दौरान चंद्रमा, मकर (Capricornus) तारामंडल की दिशा में रहेगा तथा लगभग –12.7 मैग्नीट्यूड की चमक से दमकेगा एवं इसी पूर्णिमा को पारंपरिक रूप से 'बक मून' (Buck Moon) कहा जाता है। इसका विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि यही दिन आषाढ़ पूर्णिमा अथवा गुरु पूर्णिमा का भी है। इस प्रकार एक ही दिन खगोलीय और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण संयोग देखने को मिलेगा।

*क्या होती है पूर्णिमा?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि पूर्णिमा वह खगोलीय अवस्था है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा लगभग एक सीधी रेखा में होते हैं तथा पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच स्थित होती है। इस स्थिति में चंद्रमा का सूर्य से प्रकाशित पूरा निकटवर्ती भाग पृथ्वी की ओर दिखाई देता है, इसलिए वह पूर्ण गोलाकार एवं अत्यधिक चमकीला दिखाई देता है। या कुछ यूं कहें कि पूर्णिमा वह समय होता है जब सूर्य और चंद्रमा पृथ्वी के विपरीत दिशाओं में एक सीध में होते हैं, जिसे खगोलविज्ञान की भाषा में' सिज़ीगी' कहते हैं।उस समय, चंद्रमा का प्रकाशित भाग पृथ्वी की ओर होता है जबकि दूसरा भाग अंधकार में होता है। अमावस्या के समय इसका ठीक विपरीत होता है।

*कब होगा बक मून का चरम समय।?*
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि बैसे तो सूर्यास्त के बाद से ही चंद्रमा, पूरब -दक्षिण पूर्वी आकाश में नज़र आने लगेगा लेकिन रात 8:06 बजे वह सटीक क्षण होगा जब पूर्णिमा अपनी चरम अवस्था में पहुँचेगी, लेकिन सामान्य दर्शकों को चंद्रमा एक दिन पहले एवं एक दिन बाद की रातों में भी लगभग पूर्ण जैसा ही दिखाई देगा, क्योंकि प्रकाशित भाग में परिवर्तन बहुत धीमी गति से होता है।

*कहाँ और किस दिशा में दिखाई देगा बक मून?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि भारत में 29 जुलाई को सूर्यास्त के तुरंत बाद चंद्रमा पूर्व–दक्षिण-पूर्व (East-Southeast) दिशा में उदित होगा। रात बढ़ने के साथ वह आकाश में ऊँचा उठेगा, लगभग मध्यरात्रि में सर्वोच्च ऊँचाई पर पहुँचेगा और सूर्योदय के आसपास पश्चिम दिशा में अस्त होगा।

*किस तारामण्डल में दिखाई देगा बक मून।?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि पूर्णिमा के चरम के समय चंद्रमा, मकर (Capricornus) तारामंडल की दिशा में स्थित रहेगा, साथ ही पृथ्वी से उसकी औसत दूरी लगभग 3,99,600 किलोमीटर होगी तथा उसका प्रत्यक्ष कोणीय व्यास लगभग 0.5 डिग्री दिखाई देगा।

*चंद्रमा कितना चमकीला/ कितने मैग्नीट्यूड पर होगा?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस पूर्णिमा के दौरान चंद्रमा का दृश्य मैग्नीट्यूड लगभग माइनस 12.7 रहेगा, जो इसे रात्रि आकाश की सबसे चमकीली प्राकृतिक वस्तुओं में शामिल करता है। खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि ऋणात्मक (Negative) मैग्नीट्यूड का अर्थ है कि वस्तु अत्यंत अधिक चमकीली है। पूर्णिमा के समय चंद्रमा का प्रकाश इतना प्रबल होता है कि अत्यंत हल्के बादलों के बीच भी दिखाई देता है।

' *बक मून' नाम कैसे पड़ा?*
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि जुलाई की पूर्णिमा को बक मून (Buck Moon) नाम उत्तरी अमेरिका की मूल निवासी (Native American) जनजातियों द्वारा दिया गया था, क्योंकि वर्ष के इसी समय नर हिरण (Buck) के नए सींग तेज़ी से विकसित होते हैं और मखमली आवरण से ढके दिखाई देते हैं। इसी मौसमी परिवर्तन के आधार पर जुलाई की पूर्णिमा को "बक मून" कहा जाने लगा साथ ही इसके अन्य पारंपरिक नाम भी प्रचलित हैं, जिनमें थंडर मून , हे मून,शैलमन मून, रस्पवेरी मून, हॉफ वे समर मून तथा कुछ क्षेत्रों में मियड मून भी शामिल हैं। ये नाम विभिन्न संस्कृतियों की कृषि, मौसम और प्राकृतिक चक्रों से जुड़े हैं।

*बक मून/ पूर्णिमा का पृथ्वी पर क्या पर प्रभाव होगा।?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि पूर्णिमा और अमावस्या के समय सूर्य एवं चंद्रमा का संयुक्त गुरुत्वाकर्षण प्रभाव समुद्रों में स्प्रिंग टाइड (Spring Tide) अथवा उच्च ज्वार उत्पन्न करता है। इन दिनों उच्च और निम्न ज्वार के बीच का अंतर सामान्य दिनों की अपेक्षा अधिक होता है। हालांकि वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार पूर्णिमा का मानव व्यवहार या मानसिक स्वास्थ्य पर कोई निर्णायक प्रत्यक्ष प्रभाव सिद्ध नहीं हुआ है। लेकिन फिर भी पुराने जमाने से ही कई देशों ख़ासकर प्राचीन यूरोप में प्रचलित मान्यताओं के अनुसार चंद्रमा को लूना भी कहा जाता है एवं उसी के आधार पर बना था *ल्यूनेटिक* शब्द जिसका मतलब ही होता है कि *चांदमारा* या पागल होना। लेकिन आधुनिक खगोल वैज्ञानिक अनुसंधानों में चंद्रमा का आपने शरीर के ऊपर कोई प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं होता है। इसीलिए यहां घबराने की जरूरत बिल्कुल भी नहीं है, इसीलिए खगोलविद अमर पाल सिंह कहते हैं कि *पहले जानें उसके बाद ही मानें और सही ज्ञान सभी समस्याओं का समाधान और यही है विज्ञान।*

*हर पूर्णिमा पर ग्रहण क्यों नहीं होता?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि बहुत से लोग मानते हैं कि हर पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण होना चाहिए, जबकि ऐसा नहीं है। इसका कारण यह है कि चंद्रमा की कक्षा पृथ्वी की सूर्य के चारों ओर की कक्षा (क्रांतिवृत्त) से लगभग 5.1° झुकी हुई है। इसलिए अधिकांश पूर्णिमाओं पर चंद्रमा पृथ्वी की छाया के ऊपर या नीचे से निकल जाता है। चंद्र ग्रहण केवल तभी होता है जब पूर्णिमा के समय चंद्रमा अपने कक्षीय नोड के निकट हो और सूर्य, पृथ्वी तथा चंद्रमा लगभग एक सीध में हों।

*चंद्रमा हमेशा एक जैसा क्यों नहीं दिखता?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि चंद्रमा, पृथ्वी की परिक्रमा लगभग 27.32 दिनों में करता है, जबकि एक पूर्णिमा से अगली पूर्णिमा तक का औसत समय 29.53 दिन (सिनोडिक मास) होता है। यही कारण है कि चंद्रमा की कलाएँ लगातार बदलती रहती हैं। एक चंद्र चक्र में अमावस्या, बढ़ता अर्धचंद्र, प्रथम चतुर्थांश, बढ़ता गिबस मून, पूर्णिमा, घटता गिबस मून, तृतीय चतुर्थांश और घटता अर्धचंद्र जैसी आठ प्रमुख अवस्थाएँ आती हैं। इन्हीं समस्त चंद्रकलाओं के कारण चन्द्रमा, पृथ्वी से हमेशा एक ही आकर में नहीं दिखाई देता है और अपनी कलाएँ बदलता रहता है।

*क्या वास्तव में हम चंद्रमा का केवल आधा भाग ही देखते हैं?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि यद्यपि किसी भी समय चंद्रमा का लगभग 50 प्रतिशत भाग ही पृथ्वी से दिखाई देता है, लेकिन चंद्र लिब्रेशन (Libration) नामक हल्के डगमगाने वाले प्रभाव के कारण समय के साथ हम उसकी सतह का लगभग 59 प्रतिशत भाग देख पाते हैं।

*गुरु पूर्णिमा का वैज्ञानिक एवं पौराणिक महत्व क्या होता है।?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि 29 जुलाई 2026 की पूर्णिमा भारतीय परंपरा में गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाई जाएगी। पौराणिक रूप में यह दिन महर्षि वेदव्यास की जयंती से जुड़ा माना जाता है और ज्ञान, शिक्षा तथा गुरु-शिष्य परंपरा के सम्मान का पर्व है। खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि खगोलीय दृष्टि से यह केवल पूर्णिमा का एक विशेष क्षण होता है, साथ ही इसे कई अन्य नामों से भी जाना जाता है जबकि सांस्कृतिक रूप से यह भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति हमेशा अपनी सच्ची श्रद्धा व्यक्त करने का अवसर प्रदान करता है। इसीलिए सभी को अपने गुरुओं के प्रति कृतज्ञ होना ही चाहिए क्योंकि बिन गुरु ज्ञान कहां।

*कैसे देखें बक मून और तस्वीर कैसे लें?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस बक मून/पूर्णिमा को देखने के लिए किसी दूरबीन / टेलीस्कोप या विनॉकुलर आदि की आवश्यकता नहीं होती है सूर्यास्त के तुरंत बाद पूर्वी क्षितिज का खुला स्थान चुनें। यदि आपके पास कोई टेलीस्कोप/दूरबीन या विनोकुलर एवं कैमरा आदि उपकरण मौजूद हैं और आप फोटोग्राफी करना चाहें तो ट्राइपॉड का उपयोग करें तथा कैमरे या मोबाइल में एक्सपोज़र कम रखें, जिससे चंद्रमा की सतह के गड्ढे और पर्वतीय संरचनाएँ स्पष्ट दिखाई दें।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि 29 जुलाई 2026 का बक मून केवल एक सुंदर पूर्णिमा नहीं, बल्कि खगोल विज्ञान, प्रकृति, संस्कृति और भारतीय परंपरा का अद्भुत संगम है। यह अवसर हमें चंद्रमा की वैज्ञानिक समझ के साथ-साथ प्रकृति के उन मौसमी संकेतों की भी याद दिलाता है जिनके आधार पर विभिन्न सभ्यताओं ने सदियों तक समय और ऋतुओं का निर्धारण किया था। इसीलिए मौसम साफ़ होने पर आप इस बक मून/ गुरु पूर्णिमा की चाँदनी रात्रि का लुत्फ़ जरुर उठाएं साथ ही बच्चों को इसके वैज्ञानिक, सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक कारणों से भी अवगत ज़रूर करवाएं,जिस से समाज में व्यापक रूप से वैज्ञानिक दृष्टिकोण पुष्ट होता रहे।
        
भारत को कमजोर करने के लिए होंगे नए षड्यंत्र, अधिवक्ता समाज को निभानी होगी बड़ी भूमिका: मुख्यमंत्री योगी
-  गोरखपुर बार एसोसिएशन के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों के परिचय समारोह में बोले सीएम योगी- सोशल मीडिया, फेक अकाउंट और जातीय विभाजन की साजिशों से रहना होगा सतर्क


गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत आज दुनिया की शीर्ष पांच अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो चुका है और आने वाले समय में वैश्विक स्तर पर अमेरिका, चीन और भारत के बीच प्रतिस्पर्धा होगी। ऐसे में भारत की प्रगति को रोकने के लिए विभिन्न प्रकार के षड्यंत्र भी रचे जाएंगे, जिनसे देशवासियों को सतर्क रहने की आवश्यकता है।
गोरखपुर सिविल कोर्ट बार एसोसिएशन की नवनिर्वाचित कार्यकारिणी के परिचय समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय भारत को दुनिया की पिछली अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता था, लेकिन आज देश शीर्ष पांच अर्थव्यवस्थाओं में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि दुनिया के कई देशों को सहज स्वीकार नहीं है।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि भारत को कमजोर करने के लिए सोशल मीडिया के माध्यम से फेक अकाउंट बनाकर जातीय समूहों को आपस में लड़ाने, समाज में विद्वेष फैलाने तथा क्षेत्र, भाषा और जाति के आधार पर विभाजन पैदा करने की कोशिशें होंगी। उनका कहना था कि इस प्रकार के प्रयासों का उद्देश्य भारत की एकता और विकास को कमजोर करना है।
उन्होंने कहा कि भविष्य में न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका जैसी लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भी सवाल उठाकर उन्हें कमजोर करने का प्रयास किया जाएगा। ऐसी परिस्थितियों में अधिवक्ता समुदाय की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। उन्होंने अधिवक्ताओं से संविधान, कानून और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
गुरु पूर्णिमा पर दोहरी भूमिका में दिखेंगे सीएम योगी, पहले गुरु पूजन फिर शिष्यों को देंगे आशीर्वाद

29 जुलाई को गोरखनाथ मंदिर में परंपरागत गुरु पूर्णिमा महोत्सव, ब्रह्मलीन गुरु महंत अवेद्यनाथ को अर्पित करेंगे श्रद्धांजलि, श्रीरामकथा की भी होगी पूर्णाहुति।


गोरखपुर। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर 29 जुलाई को गोरखनाथ मंदिर में पारंपरिक गुरु पूर्णिमा महोत्सव का आयोजन होगा। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ एक साथ शिष्य और गुरु—दोनों भूमिकाओं में नजर आएंगे। वह पहले अपने ब्रह्मलीन गुरु महंत अवेद्यनाथ और गुरु परंपरा का विधिवत पूजन करेंगे, इसके बाद गोरक्षपीठ के साधु-संतों, शिष्यों और श्रद्धालुओं को आशीर्वाद प्रदान करेंगे।
गोरक्षपीठ में गुरु पूर्णिमा का विशेष महत्व है। नाथपंथ की परंपरा के अनुसार इस दिन गोरक्षपीठाधीश्वर महायोगी गुरु गोरखनाथ सहित पीठ की गुरु परंपरा का पूजन-अर्चन करते हैं और फिर अपने शिष्यों का अभिनंदन कर उन्हें आशीर्वाद देते हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी वर्षों से इस परंपरा का निर्वहन करते आ रहे हैं और मुख्यमंत्री पद की व्यस्तताओं के बावजूद हर वर्ष गुरु पूर्णिमा पर गोरखनाथ मंदिर पहुंचते हैं।
नाथ संप्रदाय में गुरु को ईश्वर के समान माना जाता है। इसी परंपरा के तहत योगी आदित्यनाथ बुधवार सुबह सबसे पहले महायोगी गुरु गोरखनाथ का विशेष पूजन करेंगे। इसके बाद मंदिर परिसर स्थित देवी-देवताओं के मंदिरों और नाथ योगियों की समाधि स्थलों पर पूजा-अर्चना होगी। पूजन के समापन पर सामूहिक आरती आयोजित की जाएगी।
पूजा-अर्चना के बाद गोरक्षपीठाधीश्वर अपने शिष्यों और श्रद्धालुओं के बीच पहुंचेंगे। शिष्य तिलक लगाकर उनका आशीर्वाद ग्रहण करेंगे। इसके बाद आशीर्वचन कार्यक्रम और सहभोज (भंडारा) का आयोजन होगा। इसी दिन 23 जुलाई से गोरखनाथ मंदिर में चल रही सप्तदिवसीय श्रीरामकथा की पूर्णाहुति भी संपन्न होगी।

गुरु पूर्णिमा महोत्सव का कार्यक्रम (29 जुलाई)
-  प्रातः 5:00 से 6:00 बजे: महायोगी गोरखनाथ को रोट अर्पण, विशेष पूजन एवं समाधि स्थलों पर पूजा।
-  प्रातः 6:30 से 7:00 बजे: सामूहिक आरती।
-  प्रातः 9:00 से 11:30 बजे: सप्तदिवसीय श्रीरामकथा की पूर्णाहुति।
-  पूर्वाह्न 11:30 से दोपहर 12:30 बजे: भजन एवं गोरक्षपीठाधीश्वर का आशीर्वचन।
-  दोपहर 12:30 बजे से: सहभोज (भंडारा)।
गोरक्षपीठ और गुरु परंपरा का विशेष संबंध

गोरक्षपीठ में गुरु-शिष्य परंपरा को नाथ संप्रदाय की मूल आधारशिला माना जाता है। यहां गुरु पूर्णिमा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि गुरु के प्रति श्रद्धा, समर्पण और लोककल्याण के संकल्प का पर्व है। महायोगी गोरखनाथ से प्रारंभ हुई यह परंपरा आज भी उसी श्रद्धा और गरिमा के साथ आगे बढ़ रही है।
गोरक्षपीठ की गुरु परंपरा ने शिक्षा, चिकित्सा, योग और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना कर शिक्षा के क्षेत्र में नई शुरुआत की। उनके उत्तराधिकारी महंत अवेद्यनाथ ने इन कार्यों का विस्तार किया, जबकि वर्तमान गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने शिक्षा, स्वास्थ्य, योग और जनसेवा से जुड़े इन प्रकल्पों को व्यापक स्वरूप देकर लोककल्याण की परंपरा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।
सीएम योगी ने गोरखपुर के सिक्स लेन फ्लाईओवर का किया उद्घाटन, शहर को जाम से मिलेगी बड़ी राहत
-  बहुप्रतीक्षित परियोजना जनता को समर्पित, यातायात होगा सुगम और विकास को मिलेगी नई गति

गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को गोरखपुर के बहुप्रतीक्षित सिक्स लेन फ्लाईओवर का लोकार्पण कर इसे जनता को समर्पित किया। इस महत्वपूर्ण परियोजना के शुरू होने से शहर के प्रमुख मार्गों पर यातायात का दबाव कम होगा और लोगों को लंबे समय से जाम की समस्या से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक एवं सुदृढ़ सड़क अवसंरचना प्रदेश के समग्र विकास की आधारशिला है। सिक्स लेन फ्लाईओवर के संचालन से न केवल शहर में आवागमन अधिक सुगम और सुरक्षित होगा, बल्कि व्यापार, निवेश और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।
उद्घाटन समारोह में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों की उपस्थिति रही। लोगों ने इस परियोजना के शुरू होने पर खुशी जताते हुए इसे गोरखपुर के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
इस फ्लाईओवर के शुरू होने से शहर के व्यस्त मार्गों पर वाहनों की आवाजाही तेज होगी, यात्रा का समय कम होगा और रोजाना आने-जाने वाले हजारों लोगों को सीधा लाभ मिलेगा।
प्रतिकूल मौसम में भी मुख्यमंत्री योगी ने गाेरखपुर में किया जनता दर्शन
गोरखपुर। ‘जनसेवा सर्वोपरि’ के ध्येय से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार सुबह मौसम प्रतिकूल होने के बावजूद जन समस्याओं के निस्तारण के लिए ‘जनता दर्शन’ किया। बारिश में दूरदराज से आए लोगों से उन्होंने गोरखनाथ मंदिर में मुलाकात की। उनकी समस्याएं सुनीं। समस्या लेकर आए लोगों से आत्मीयता से संवाद करते हुए कहा, ‘घबराइए मत, हर समस्या का समाधान कराया जाएगा, सरकार सबकी भरपूर मदद करेगी।

’ जनता दर्शन में मुख्यमंत्री ने पास में मौजूद अधिकारियों को निर्देशित किया कि हर पीड़ित व्यक्ति की समस्या पर संवेदनशीलता से ध्यान दें और तत्परता से उसका समयबद्ध व पारदर्शी निस्तारण कराएं।बारिश के चलते मुख्यमंत्री के निर्देश पर लोगों की सुविधा के लिए शनिवार सुबह जनता दर्शन का आयोजन गोरखनाथ मंदिर परिसर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन सभागार में किया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी ने करीब 250 लोगों की समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को उनका समाधान करने का निर्देश दिया। कुर्सियों पर बैठाए गए लोगों तक पहुंचकर मुख्यमंत्री ने उनकी पीड़ा जानीं। उन्हें आश्वस्त किया कि सभी की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।

जनता दर्शन में कुछ महिलाओं ने पट्टीदारों द्वारा तो कुछ ने दबंगों द्वारा उनकी जमीन कब्जा करने की शिकायत की। इस पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि पारिवारिक जमीनी विवादों की स्थिति में पैमाइश व अन्य जांच कराने के बाद निष्पक्ष निस्तारण किया जाए। यदि किसी दबंग ने किसी गरीब की जमीन हड़पी है तो उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। हर बार की तरह शनिवार को भी जनता दर्शन में कुछ लोग गंभीर बीमारियों के इलाज में आर्थिक मदद की गुहार लेकर पहुंचे थे। ऐसे मामलों में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि इलाज में अस्पताल के इस्टीमेट की प्रक्रिया को जल्द पूर्ण कराकर शासन के पास भेजें। मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से इलाज के लिए पर्याप्त राशि दी जाएगी।

गोरखनाथ मंदिर की गोशाला में मुख्यमंत्री ने की गोसेवा

गोरखनाथ मंदिर प्रवास के दौरान शनिवार सुबह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दिनचर्या परंपरागत रही। प्रातः काल गुरु गोरखनाथ और अपने ब्रह्मलीन गुरुदेव महंत अवेद्यनाथ जी का आशीर्वाद लेने के बाद मुख्यमंत्री योगी ने मंदिर की गोशाला में गोसेवा की। उन्होंने गोवंश को अपने हाथ से गुड़-रोटी खिलाकर उन पर स्नेह बरसाया।
गोरखपुर व कुशीनगर को 1283 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की सौगात देंगे मुख्यमंत्री
कुशीनगर में लोकार्पण और शिलान्यास के कार्यों से तीन विधानसभा क्षेत्र के लोगों को होगा लाभ

गोरखपुर में सीएम योगी के हाथों जनता को समर्पित होगी करीब 690 करोड रुपये की लागत वाली भटहट-बांसस्थान फोरलेन सड़क



गोरखपुर। शुक्रवार को गोरखपुर दौरे पर पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आदित्यनाथ शनिवार 11 जुलाई को गोरखपुर और कुशीनगर जिले को 1283 करोड रुपये की सौगात देंगे। वह कुशीनगर में 525 करोड़ रुपये की लागत वाली 464 और गोरखपुर में करीब 758 करोड़ रुपये की 24 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में जनता दर्शन करने के बाद पूर्वाह्न कुशीनगर जिले का दौरा करेंगे। वह टेकुआटार में आयोजित विकास कार्यों के लोकार्पण व शिलान्यास समारोह में तीन विधानसभा क्षेत्रों रामकोला, हाटा और कुशीनगर के लिए सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई से जुड़ी 525 करोड़ रुपये की 464 परियोजनाओं का उपहार देंगे। लोकार्पण और शिलान्यास समारोह के लिए दुल्हिन जगरनाथ कुंवरी इंटर कॉलेज परिसर में बने मंच से मुख्यमंत्री जनसभा को भी संबोधित करेंगे। इस अवसर पर वह कार्यक्रम स्थल के पास विकास प्रदर्शनी का भी निरीक्षण करेंगे।

शनिवार को ही दोपहर बाद सीएम योगी गोरखपुर के पिपराइच विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत भटहट-बांसस्थान में फोरलेन सड़क सहित 758 करोड़ रुपये के 24 विकास कार्यों की सौगात देंगे। वह भटहट-बासंस्थान फोरलेन सड़क समेत 697 करोड़ 49 हजार रुपये की लागत वाली 5 सड़कों का लोकार्पण और सड़क निर्माण एवं पर्यटन से संबंधित 60 करोड़ 63 लाख 96 हजार रुपये की लागत वाले 19 विकास कार्यों का शिलान्यास करेंगे। लोकार्पण और शिलान्यास के ये सभी कार्य पिपराइच विधानसभा क्षेत्र के दायरे में आते हैं।

मुख्यमंत्री जिन सड़कों का लोकार्पण करेंगे, उनमें सबसे महत्वपूर्ण भटहट-बांसस्थान फोरलेन मार्ग है। 11.6 किमी लंबे इस मार्ग के फोरलेन में चौड़ीकृत होने जाने से न केवल एक बड़ी आबादी के लिए आवागमन सुगमता बढ़ी है बल्कि इसका फायदा आयुष विश्वविद्यालय जाने वालों को भी मिल रहा है। फोरलेन कनेक्टिविटी हो जाने से प्रदेश के पहले आयुष विश्वविद्यालय में आयुष पद्धतियों से इलाज कराने वालों की संख्या में बढ़ोतरी होगी। शिलान्यास की परियोजनाएं सड़क और पर्यटन विकास पर केंद्रित हैं।

आयुष विवि का निरीक्षण करेंगे मुख्यमंत्री

शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राज्य के पहले, महायोगी गुरु गोरखनाथ राज्य आयुष विश्वविद्यालय का भी निरीक्षण करेंगे। उनके द्वारा आयुष विश्वविद्यालय में पुरुष व महिला छात्रवास का लोकार्पण भी संभावित है। पुरुष छात्रावास का नामकरण ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की स्मृति में किया गया है, जबकि महिला छात्रावास का नाम राप्ती रखा गया है। उल्लेखनीय है कि आयुष विश्वविद्यालय, सीएम योगी के ड्रीम प्रोजेक्ट्स में से एक है। उन्होंने इस विश्वविद्यालय का शिलान्यास 28 अगस्त 2021 को तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों और लोकार्पण 1 जुलाई 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के कर कमलों से कराया था।

गोरखपुर में पौधरोपण महायज्ञ में सम्मिलित होंगे मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार 12 जुलाई को गोरखपुर में, प्रदेशव्यापी पौधरोपण महायज्ञ में सम्मिलित होंगे। वह गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस के किनारे ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधा लगाएंगे और जनसभा कर प्रदेशवासियों को पौधरोपण महायज्ञ में जिम्मेदारीपूर्वक हिस्सेदारी करने का आह्वान करेंगे। इस महाभियान के जरिये प्रदेश सरकार ने इस बार 35 करोड़ पौधरोपण करने का लक्ष्य तय किया है। यह जानकारी सूचना विभाग द्वारा जारी की गई है।
भूगोल विभाग की अध्यक्ष बनीं डॉ. स्वर्णिमा सिंह, संभाला कार्यभार
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग की सहयुक्त आचार्य डॉ. स्वर्णिमा सिंह को विभाग का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। उन्होंने प्रो. एस.के. सिंह से शुक्रवार काे कार्यभार ग्रहण कर लिया। यह नियुक्ति विश्वविद्यालय की परिनियमावली के तहत कुलपति प्रो. पूनम टंडन के आदेश पर की गई है। उनका कार्यकाल तीन वर्षों का होगा।

कार्यभार ग्रहण करने के बाद डॉ. स्वर्णिमा सिंह ने कहा कि वह विभाग की शैक्षणिक और शोध परंपरा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए पूरी निष्ठा से कार्य करेंगी। उन्होंने कहा कि विभाग की प्रतिष्ठा के अनुरूप गुणवत्ता, नवाचार और शोध को बढ़ावा देना उनकी प्राथमिकता होगी।

डॉ. स्वर्णिमा सिंह ने दिल्ली विश्वविद्यालय से परास्नातक, एमफिल और पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने वहीं असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में भी सेवाएं दीं। भूगोल विषय में उन्हें अध्ययन, अध्यापन और शोध का लगभग 15 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (आईआईएससी), बेंगलुरु तथा वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया) के सहयोग से भी शोध कार्य किया है।

शोध के क्षेत्र में उनकी उल्लेखनीय उपलब्धियों में स्प्रिंगर-नेचर के साथ जलवायु परिवर्तन के सिमुलेशन मॉडल पर प्रकाशित पुस्तक शामिल है। उनके 20 से अधिक राष्ट्रीय और 25 अंतरराष्ट्रीय शोध पत्र प्रतिष्ठित जर्नल्स एवं पुस्तकों में प्रकाशित हो चुके हैं। वर्ष 2025 में उन्हें आईसीएसएसआर की ओर से 18 लाख रुपये का प्रमुख शोध प्रोजेक्ट भी प्राप्त हुआ था। उनके निर्देशन में दो शोधार्थी पीएचडी पूरी कर चुके हैं, जबकि आठ शोधार्थी वर्तमान में शोधरत हैं।

डॉ. स्वर्णिमा सिंह के विभागाध्यक्ष बनने पर कला संकाय के अधिष्ठाता प्रो. राजवंत राव, प्रो. सुधीर श्रीवास्तव, प्रो. विनोद सिंह, प्रो. रामवंत गुप्ता, डॉ. एस.पी. सिंह, डॉ. अंकित सिंह, डॉ. मनीष सिंह, डॉ. दीपक प्रसाद, डॉ. सर्वेश कुमार, डॉ. दुर्गावती, डॉ. ज्ञान प्रकाश सहित विश्वविद्यालय के शिक्षकों, प्रशासनिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दीं।
गोरखपुर में छोटे भाई ने की भाई-भाभी और भतीजे की हत्या , पुलिस हिरासत में आरोपित
गोरखपुर। उत्तर प्रदेश में गोरखपुर जिले के बांसगांव थाना क्षेत्र में रविवार की देर रात छोटे भाई ने सोते समय अपने बड़े भाई-भाभी और मासूम भतीजे की धारदार हथियार से हत्या कर दी। घटना की सूचना मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. कोस्तुभ, एसपी दक्षिणी दिनेश कुमार पुरी सहित भारी पुलिस बल मौके पर पहुंच गया।

एसपी दक्षिणी ने बताया कि मृतकों की पहचान अमित गुप्ता, उनकी पत्नी रंजना गुप्ता और 3 वर्षीय पुत्र रेयान गुप्ता के रूप में हुई है। घटना रविवार देर रात करीब 3 बजे की है, जब तीनों एक ही कमरे में सो रहे थे। इसी दौरान छोटे भाई ने धारदार हथियार से हमला कर भाई-भाभी और भतीजे की हत्या कर दी।

घटना की सूचना पर पहुंची पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर शवों को पोस्टमार्टम भेजकर आरोपित को हिरासत में ले लिया है।

एसपी दक्षिणी ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला पारिवारिक विवाद का प्रतीत हो रहा है। मृतक के पिता की तहरीर के आधार पर बांसगांव थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने आरोपित बाल अपचारी के पास से घटना में प्रयुक्त आला कत्ल भी बरामद कर लिया। वहीं, आरोपित से पूछताछ कर घटना के पीछे के कारणों की गहराई से जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच की जा रही है।
गोरखपुर में छोटे भाई ने की भाई-भाभी और भतीजे की हत्या , पुलिस हिरासत में आरोपित
गोरखपुर। उत्तर प्रदेश में गोरखपुर जिले के बांसगांव थाना क्षेत्र में रविवार की देर रात छोटे भाई ने सोते समय अपने बड़े भाई-भाभी और मासूम भतीजे की धारदार हथियार से हत्या कर दी। घटना की सूचना मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. कोस्तुभ, एसपी दक्षिणी दिनेश कुमार पुरी सहित भारी पुलिस बल मौके पर पहुंच गया।

एसपी दक्षिणी ने बताया कि मृतकों की पहचान अमित गुप्ता, उनकी पत्नी रंजना गुप्ता और 3 वर्षीय पुत्र रेयान गुप्ता के रूप में हुई है। घटना रविवार देर रात करीब 3 बजे की है, जब तीनों एक ही कमरे में सो रहे थे। इसी दौरान छोटे भाई ने धारदार हथियार से हमला कर भाई-भाभी और भतीजे की हत्या कर दी।

घटना की सूचना पर पहुंची पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर शवों को पोस्टमार्टम भेजकर आरोपित को हिरासत में ले लिया है।

एसपी दक्षिणी ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला पारिवारिक विवाद का प्रतीत हो रहा है। मृतक के पिता की तहरीर के आधार पर बांसगांव थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने आरोपित बाल अपचारी के पास से घटना में प्रयुक्त आला कत्ल भी बरामद कर लिया। वहीं, आरोपित से पूछताछ कर घटना के पीछे के कारणों की गहराई से जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच की जा रही है।
20 मई 2026 को दिखेगी चंद्रमा और बृहस्पति की शानदार खगोलीय युति


खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया सूर्यास्त के बाद पश्चिमी आकाश में बनेगा अद्भुत नज़ारा, रात लगभग 10 बजे तक रहेगा दृश्य।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि 20 मई 2026 की शाम, आकाश प्रेमियों और खगोल विज्ञान में रुचि रखने वाले लोगों के लिए अत्यंत विशेष रहने वाली है। इस दिन पश्चिमी आकाश में चंद्रमा और सौरमंडल के सबसे बड़े ग्रह बृहस्पति (Jupiter) की मनमोहक खगोलीय युति (Conjunction) देखने को मिलेगी। यह दृश्य सूर्यास्त के बाद से लेकर लगभग रात 10 बजे तक स्पष्ट रूप से देखा जा सकेगा, जिसके बाद दोनों खगोलीय पिंड पश्चिमी क्षितिज के नीचे चले जाएंगे। यह खगोलीय घटना बिना किसी दूरबीन के भी खुली आँखों से आसानी से देखी जा सकेगी।
खगोलविद अमर पाल सिंह के अनुसार, 20 मई की शाम पश्चिम दिशा में एक चमकीले अर्धचंद्राकार चंद्रमा के पास बृहस्पति ग्रह दिखाई देगा। दोनों खगोलीय पिंड आकाश में एक-दूसरे के अत्यंत निकट प्रतीत होंगे, जिससे यह दृश्य अत्यंत आकर्षक लगेगा। खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि खगोल वैज्ञानिक दृष्टि से यह केवल दृष्टि-रेखा (Line of Sight) का प्रभाव होता है लेकिन वास्तव में चंद्रमा और बृहस्पति के बीच करोड़ों किलोमीटर की दूरी बनी रहती है।

*क्या होती है युति?।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि खगोल विज्ञान में “युति” उस स्थिति को कहा जाता है जब पृथ्वी से देखने पर दो खगोलीय पिंड आकाश में एक-दूसरे के बहुत पास दिखाई देते हैं। इस घटना में चंद्रमा और बृहस्पति एक ही खगोलीय देशांतर (Celestial Longitude) अथवा लगभग समान राइट एसेन्शन (Right Ascension) के आसपास दिखाई देंगे। वैज्ञानिक रूप से इसे ही युति (Conjunction)  कहा जाता है।

*कितना होगा इस दौरान मैग्नीट्यूड?।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस दौरान चंद्रमा का औसत प्रत्यक्ष मैग्नीट्यूड लगभग माइनस 8.5 तथा बृहस्पति का मैग्नीट्यूड लगभग माइनस 1.78 के क़रीब रहेगा। खगोल विज्ञान में मैग्नीट्यूड किसी खगोलीय पिंड की चमक मापने की इकाई है। जितना अधिक ऋणात्मक (Negative) मैग्नीट्यूड का मान होता है, कोई भी खगोलीय पिण्ड उतना ही अधिक चमकीला दिखाई देता है। इसी कारण चंद्रमा अत्यधिक चमकीला और बृहस्पति उसके पास एक उज्ज्वल तारे जैसा दिखाई देगा।

*कितना होगा कोणीय अंतर (Angular Separation) ?।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि खगोलीय गणनाओं के अनुसार 20 मई 2026 को चंद्रमा और बृहस्पति लगभग 3 डिग्री के कोणीय अंतर (Angular Separation) पर दिखाई देंगे। यह दूरी इतनी कम होगी कि दोनों को एक साथ साधारण आंखों से आसानी से देखा जा सकेगा। हालांकि यह दूरी इतनी कम नहीं होगी कि दोनों एक ही दूरबीन फ्रेम में उच्च आवर्धन पर दिखाई दें, लेकिन सामान्य दूरबीन और बाइनोक्युलर से यह दृश्य अत्यंत सुंदर दिखाई देगा।

*किस दिशा में और किस तारामण्डल में देखें?।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि यह खगोलीय युति पश्चिमी आकाश में मिथुन (Gemini) तारामंडल के क्षेत्र में दिखाई देगी। इसी क्षेत्र में प्रसिद्ध तारे कैस्टर (Castor) और पोलक्स (Pollux) भी मौजूद हैं। जिस शानदार खगोलीय मिथुन तारामंडल क्षेत्र में इस नज़ारे जिसमें बृहस्पति ग्रह और चंद्रमा की युति होगी, और उसी मिथुन तारामंडल क्षेत्र में नीचे की तरफ ही आप शुक्र ग्रह को भी अपनी साधारण आंखों से ही देख सकते हैं ,और इसके बाद धीरे धीरे आगामी आने वाले दिनों में बृहस्पति ग्रह और शुक्र ग्रह भी एक-दूसरे के निकट आते दिखाई देंगे,और अगले माह 9 जून 2026 को बृहस्पति ग्रह और शुक्र ग्रह की भी युति मिथुन तारामंडल में ही घटित होगी उस दौरान बुद्ध ग्रह भी मिथुन तारामंडल में दिखाई देगा इसलिए यह पूरा महीना और आगामी दिनों में ग्रहों ,उपग्रहों नक्षत्रों आदि के खगोलीय अवलोकन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हो रहा है।

*कैसे देखें इस शानदार खगोलीय नज़ारे को?।*

वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला (तारामण्डल) गोरखपुर, उत्तर प्रदेश, भारत के खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस शानदार खगोलीय घटना को देखने के लिए आपको किसी विशेष खगोलीय उपकरण की आवश्यकता नहीं होगी। यदि मौसम साफ हो और पश्चिम दिशा का क्षितिज खुला हो, तो शहरों से भी यह दृश्य आसानी से देखा जा सकेगा। लेकिन ग्रामीण इलाकों में यह दृश्य और भी अधिक स्पष्ट रूप में नज़र आयेगा। वैसे तो सूर्यास्त के बाद से ही आप इस युति को देखना शुरू कर सकते हैं लेकिन और भी अधिक बेहतर परिणाम हेतु सूर्यास्त के लगभग 30 से 40 मिनट बाद आकाश पर्याप्त अंधकारमय होने लगेगा और तभी यह युति सबसे बेहतर दिखाई देगी। ख़ासकर ग्रामीण क्षेत्रों या कम प्रकाश प्रदूषण वाले स्थानों से यह दृश्य और अधिक स्पष्ट तथा आकर्षक दिखाई देगा। खगोलविद अमर पाल सिंह का कहना है कि बृहस्पति सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह है और इसका व्यास पृथ्वी से लगभग 11 गुना अधिक है। इसके चार प्रमुख उपग्रह, आयो (Io), यूरोपा (Europa), गैनीमीड (Ganymede) और कैलिस्टो (Callisto) जोकि छोटी दूरबीन से देखे जा सकते हैं। लेकिन यदि आप कोई अच्छी सी बाइनोक्युलर या छोटी दूरबीन का उपयोग करे तो वह बृहस्पति के पास इन उपग्रहों को छोटे प्रकाश बिंदुओं के रूप में देख सकते हैं और इस युति का भी विशेष आनंद भी उठा सकते हैं।

*क्या होता है अर्थ शाइन और इस दौरान कैसे देखें ?।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि अर्थशाइन (Earthshine) वह हल्की रोशनी होती है जो पृथ्वी से परावर्तित होकर चंद्रमा के अंधेरे भाग पर पड़ती है, जिससे चंद्रमा का धुंधला हिस्सा भी दिखाई देता है। इसे “चंद्रमा पर पृथ्वी की चमक” या अर्थ शाइन भी कहा जाता है। और 20 मई 2026 को दिखाई देने वाला चंद्रमा लगभग 4 दिन पुराना बढ़ता हुआ (Waxing Crescent) चंद्रमा होगा और इसकी प्रकाशित सतह लगभग 20 से 23 प्रतिशत के आसपास रहेगी। इसलिए चंद्रमा एक सुंदर पतले अर्धचंद्र के रूप में दिखाई देगा, इसी दौरान चंद्रमा पर आप अर्थ शाइन को भी देख सकते हैं जो इस दृश्य को और भी आकर्षक बनाएगा।

*क्या होगा, पृथ्वी पर इसका असर?।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि खगोल विज्ञान में ऐसी युतियाँ केवल सुंदर दृश्य ही नहीं होतीं, बल्कि खगोल वैज्ञानिक अध्ययन के लिए भी महत्वपूर्ण होती हैं। इन घटनाओं की सहायता से ग्रहों की स्थिति, कक्षीय गति और खगोलीय यांत्रिकी (Celestial Mechanics) को समझने में मदद मिलती है। प्राचीन भारतीय खगोलविद भी ग्रहों और चंद्रमा की युतियों का विस्तृत अध्ययन करते थे और कैलेंडर (पंचांग) निर्माण में उनका उपयोग किया जाता था।
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस प्रकार की घटनाएँ लोगों में विज्ञान और अंतरिक्ष के प्रति जिज्ञासा उत्पन्न करती हैं। उन्होंने बताया कि बच्चों और युवाओं को ऐसी घटनाओं का अवलोकन अवश्य करना चाहिए, क्योंकि यह उन्हें प्रत्यक्ष रूप से ब्रह्मांड की गतिशीलता को समझने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे 20 मई 2026 की शाम पश्चिम दिशा में खुला स्थान चुनकर इस अद्भुत खगोलीय दृश्य का आनंद लें। वैज्ञानिक दृष्टि से यह घटना पूर्णतः प्राकृतिक और सुरक्षित है। इसका पृथ्वी पर किसी प्रकार का नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है ,यह केवल ग्रहों और चंद्रमा की नियमित कक्षीय गति का परिणाम है। अंतरिक्ष विज्ञान के अनुसार पृथ्वी, चंद्रमा और ग्रह निरंतर सूर्य की परिक्रमा करते रहते हैं, और समय-समय पर उनकी स्थिति ऐसी बनती है कि वे पृथ्वी से देखने पर एक-दूसरे के निकट दिखाई देते हैं। इस प्रकार 20 मई 2026 की शाम खगोलीय घटनाओं के प्रेमियों के लिए एक यादगार अवसर बनने जा रही है, जब आकाश में चंद्रमा और बृहस्पति की चमकदार युति पश्चिमी क्षितिज को अद्भुत सौंदर्य से भर देगी।