शिवसेना को बड़ा झटका, पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुई एड. अरुणा पांडे
भायंदर। मीरा भायंदर महानगरपालिका चुनाव में आमदार नरेंद्र मेहता के नेतृत्व में ऐतिहासिक विजय प्राप्त करने वाली भारतीय जनता पार्टी जहां एक तरफ लगातार अपने खेमे को मजबूत करने में जुटी है, वहीं करारी हार के बाद शिवसेना जनता के बीच वापसी नहीं कर पा रही है। उसकी पार्टी के बड़े चेहरे पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो रहे हैं। शिवसेना उत्तर भारतीय प्रकोष्ठ की तेज तर्रार जिलाध्यक्ष एडवोकेट अरुणा पांडे ने पार्टी की कार्यशैली से नाराज होकर इस्तीफा दे दिया। इस्तीफा देने के 2 घंटे के भीतर ही आमदार नरेंद्र मेहता ने उन्हें भाजपा कार्यालय में बुलाकर पूरे सम्मान के साथ पार्टी में शामिल कर लिया। एडवोकेट अरुणा पांडे के साथ उनके पति सत्यप्रकाश पांडे तथा पुत्र सत्यम पांडे को भी ससम्मान पार्टी में शामिल किया गया। आमदार नरेंद्र मेहता के पुत्र युवा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष तक्षील मेहता ने सत्यम का स्वागत करते हुए  उन्हें अपने प्रकोष्ठ में शामिल किया। इस अवसर पर उपस्थित लोगों में जिला महामंत्री बृजेश तिवारी, राज बहादुर सिंह समेत अनेक लोग उपस्थित रहे। एडवोकेट अरुणा पांडे राजनीति के साथ-साथ समाज सेवा के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं। राष्ट्रीय महिला हिंदू संरक्षण फाउंडेशन की संस्थापक अध्यक्ष हैं। विशेष कर महिलाओं की आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान की दिशा में उन्होंने हमेशा सक्रिय भूमिका अदा की है। जरूरतमंद और गरीब लोगों की आर्थिक मदद से लेकर मुफ्त कानूनी मदद  देनेवाली एड. अरुणा पांडे के भाजपा में शामिल होने से शिवसेना को बड़ा झटका लगना तय माना जा रहा है।
मुंबई में छात्रों की गूंज, उत्तर पश्चिम मुंबई में 27 जून से होगा अभियान का शुभारंभ
मुंबई। देशभर के छात्रों की आवाज को एक सशक्त जन आंदोलन का स्वर देने के उद्देश्य से लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी की नई मुहीम छात्रों की गूंज - शिक्षा बचाओ, देश बचाओ' अब मुंबई पहुँच रही है। इस अभियान का उत्तर-पश्चिम मुंबई में औपचारिक शुभारंभ 27 जून 2026 से किया गया  उत्तर पश्चिम मुंबई कांग्रेस की जिलाध्यक्ष श्रीमती भावना शर्मा जैन ने एक पत्रकार परिषद के माध्यम से उपरोक्त जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस जनअभियान का उद्देश्य छात्रों के सामने खड़ी वास्तविक चुनौतियों—पेपर लीक, शिक्षा माफिया, लगातार बढ़ती शिक्षा लागत, बेरोज़गारी, मानसिक तनाव और अवसरों की कमी—को समाज और सरकार के सामने मजबूती से उठाना है। मुंबई उत्तर-पश्चिम जिला कांग्रेस, NSUI और इंडियन यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ता आने वाले दिनों में क्षेत्र के प्रमुख कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और छात्र समूहों तक पहुँचेंगे। यह अभियान केवल कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हर कॉलेज, हर कैंपस और हर छात्र तक पहुँचकर उनकी आवाज़ सुनने और उसे राष्ट्रीय मंच तक पहुँचाने का प्रयास करेगा। श्रीमती भावना शर्मा जैन ने कहा कि आज देश का छात्र सिर्फ़ परीक्षा नहीं दे रहा, बल्कि पेपर लीक, महंगी शिक्षा, कोचिंग माफिया, असमान अवसर और अनिश्चित भविष्य जैसी समस्याओं से भी लड़ रहा है। करोड़ों परिवार अपने बच्चों की शिक्षा पर अपनी जीवनभर की कमाई खर्च कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद छात्रों को न्यायपूर्ण और भरोसेमंद शिक्षा व्यवस्था नहीं मिल पा रही है। "छात्रों की गूंज" इसी संघर्ष को आवाज़ देने का अभियान है। यह किसी एक संगठन या राजनीतिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं, बल्कि भारत के छात्रों के भविष्य, सम्मान और अधिकारों की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि छात्रों को भ्रष्टाचार में आखंड डूबे सिस्टम से डटकर मुकाबला करना है। कांग्रेस इस लड़ाई को सड़क से संसद तक ले जाएगी और छात्रों को न्याय दिलाकर ही दम लेगी। उन्होंने कहा कि मुंबई उत्तर-पश्चिम जिला कांग्रेस का संकल्प है कि इस अभियान के माध्यम से छात्रों के सुझाव, समस्याएँ और अपेक्षाएँ सीधे नीति निर्माण की चर्चा का हिस्सा बनें। अभियान के दौरान कॉलेज परिसरों में संवाद, जनसंपर्क, छात्र बैठकें, डिजिटल अभियान और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
इस अभियान का मूल संदेश स्पष्ट है
"सिस्टम से मुझे नहीं हारना है।" हम मानते हैं कि शिक्षा अवसर का माध्यम होनी चाहिए, बोझ का नहीं; सपनों का आधार होनी चाहिए, निराशा का कारण नहीं। मुंबई उत्तर-पश्चिम जिला कांग्रेस सभी छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों और युवा साथियों से इस अभियान से जुड़ने और भारत की शिक्षा व्यवस्था को अधिक न्यायपूर्ण, पारदर्शी और छात्र-केंद्रित बनाने की इस मुहिम का हिस्सा बनने का आह्वान करती है।
भाजपा कामगार आघाड़ी की जिला कार्यकारिणी का गठन
भायंदर। विगत दिनों भाजपा कामगार आघाड़ी के मीरा-भायंदर जिलाध्यक्ष नियुक्त किए गए प्रवीण राय ने स्थानीय विधायक नरेंद्र मेहता, जिलाध्यक्ष दिलीप जैन तथा जिला महामंत्री ज्ञानेंद्र सिंह के मार्गदर्शन में अपनी टीम गठित कर ली है। नवगठित कार्यकारिणी में संतोष राउत तथा योगेश शिव पुजारी को उपाध्यक्ष, हसनत काजी व प्रमोद यादव को महासचिव, भगवान ज्ञानू सालुंखे को सचिव एवं अनिल पटेल कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही कार्यकारिणी सदस्य के रूप में रोहित तोडणकर, दीपक पाटिल तथा दिलीप चव्हाण मनोनीत किए गए हैं। भाजपा जिला कार्यालय में विधायक नरेंद्र मेहता ने कामगार आघाड़ी के जिलाध्यक्ष प्रवीण राय की उपस्थिति में सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किया। विधायक नरेंद्र मेहता से सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों को शुभकामनाएं देते हुए उनसे पार्टी की मजबूती तथा कामगारों के हितों के संरक्षण व उनकी समस्याओं के निराकरण के लिए पूरे मनोयोग से काम करने की अपील की। इस अवसर पर भाजपा के जिला महामंत्री ज्ञानेंद्र सिंह, बृजेश तिवारी, जिला प्रवक्ता शैलेश पांडेय समेत तमाम पार्टी पदाधिकारी उपस्थित रहे।
कुर्ला में 353वां श्री शिवराज्याभिषेक समारोह उत्साहपूर्वक संपन्न
मुंबई। कुर्ला पश्चिम स्थित संत गाडगेबाबा महाराज वसतिगृह परिसर में स्थित श्री छत्रपति शिवाजी महाराज मंदिर में ३५३वां श्री शिवराज्याभिषेक समारोह बड़े उत्साह और भक्तिमय वातावरण में मनाया गया। पूर्व सांसद पूनम ताई महाजन की पहल तथा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के शुभ हस्तों से यह श्री छत्रपति शिवाजी महाराज मंदिर आम जनता के लिए खोला गया था। इस विशेष अवसर पर सूचना का अधिकार कार्यकर्ता अनिल गलगली ने श्री छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा पर पुष्पहार अर्पित कर विनम्र अभिवादन किया। इस अवसर पर प्रकाश चौधरी, पवन सिंह, डॉ. हेमंत जाधव, उमेश म्हस्के, विशाल वाघ तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। इस समारोह में कुर्ला क्षेत्र के हजारों शिवभक्तों ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर छत्रपति शिवाजी महाराज को नमन किया और शिवराज्याभिषेक दिवस को उत्साह एवं श्रद्धा के साथ मनाया।
राष्ट्रीय लाल साहित्य साधना मंच द्वारा कवि सम्मेलन एवं सम्मान समारोह सम्पन्न
ग्वालियर। राष्ट्रीय लाल साहित्य साधना मंच ग्वालियर के तत्वावधान में मध्य प्रदेश इकाई द्वारा  गत दिवस नई सड़क  ग्वालियर स्थित "राष्ट्रोत्थान न्यास सभागार" में कवि सम्मेलन एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार डॉ सुरेश सम्राट ने की ।मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार  डॉ. करुणा सक्सेना, अध्यक्ष महिला मोर्चा जिला ग्वालियर रहीं, विशिष्ट अतिथि  के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार राज किशोर बाजपेयी  अभय एवं  सारस्वत अतिथि  रूप में वरिष्ठ साहित्यकार विजय कृष्ण योगी,सम्मान मूर्ति वरिष्ठ कवियत्री कादंबरी आर्य एवं  संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ प्रमोद पल्लवित एवं संस्था की महामंत्री  डॉ दीप्ति गौड़ मंचासीन रहीं।प्रारंभ में अतिथियों द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्ज्वलित किया गया। सरस्वती वंदना पुष्पा मिश्रा आनंद ने  सुमधुर स्वर में प्रस्तुत की। इसके पश्चात् मंचासीन अतिथियों का स्वागत माल्यार्पण कर श्वेता गर्ग,कविता उपाध्याय, कविता उमा उपाध्याय, डॉ रमेश चंद्र त्रिपाठी "मछंड", दशरथ सिंह राजावत, विजय शंकर श्रीवास्तव एवं रामचरण रुचिर आदि ने किया। कार्यक्रम का संचालन कर रहे रामचरण "रुचिर" का स्वागत डॉ. प्रमोद पल्लवित  ने किया।इसके पश्चामत कवि सम्मेलन का क्रम आगे बढ़ा, कब पाठ करने वालों में कविता उपाध्याय, उमा उपाध्याय, दिनेश विकल, ज्योति दिनकर, माला श्रीवास्तव, कमलेश कमल, अरुण गिजरे , अरविंद जादौन, अनिल राही , जगमोहन श्रीवास्तव, रेशमा बानो हाशमी, कैलाश स्वर्णकार, डॉ मुक्ता सिकरवार, मुख्य अतिथि के रूप में डॉ.करुणा सक्सेना, डॉ. दीप्ति गौड़, विकास बघेल, श्वेता गर्ग, सरिता चौहान, राजीव सक्सेना‌ आदि सहित 25 कवि एवं कवित्रियों ने एक से बढ़कर एक  रचनाओं की प्रस्तुति थी। जिससे सदन में रोचकता बनी रही।इसके पश्चात् उपस्थित  कवियत्री कादंबरी आर्य को शब्द शिल्पी से सम्मानित किया सम्मान मूर्ति के रूप में साहित्य गौरव सम्मान शाॅल श्रीफल सम्मान पत्र एवं पुष्पहार भेंटकर किया गया।इसके पश्चात् उपस्थित पच्चीस काव्य रचनाकारो एवं कवियत्रियों का सम्मान प्रशस्ति पत्र पुष्पहार एवं  राम पट्टिका भेंट कर किया गया। मंचासीन अतिथियों द्वारा प्रदेश प्रभारी के रूप में रामचरण "रुचिर" का पुष्पहार ,शाॅल ,श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर  किया गया किया गया।
नेशनल एक्सीलेंस अवार्ड 2026 से सम्मानित किए गए डॉ. किशोर सिंह
मुंबई। निर्भय फाउंडेशन द्वारा  मुंबई की प्रतिष्ठित सामाजिक संस्था समरस फाउंडेशन के चेयरमैन डॉ किशोर सिंह के उत्कृष्ट सामाजिक कार्यों को देखते हुए उन्हें नेशनल एक्सीलेंस अवार्ड 2026 से सम्मानित किया गया। उन्हें यह पुरस्कार पश्चिमी उपनगर में लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने तथा दहेज प्रथा को खत्म करने की दिशा में किए गए प्रयासों को देखते हुए प्रदान किया गया। उन्हें यह अवार्ड मीरा रोड स्थित भारत रत्न लता मंगेशकर सभागृह मैं आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में प्रदान किया गया। डॉ किशोर सिंह को यह पुरस्कार दिए जाने पर अनेक सामाजिक संगठनों और बुद्धिजीवियों ने खुशी जाहिर करते हुए उन्हें बधाई दी है।
पद्मश्री उदित नारायण और पलक मुच्छल की आवाज़ में सजा रोमांटिक गीत "मेरे मन को" हुआ रिलीज़

मुंबई। भारतीय संगीत जगत में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुके उभरते हुए कलाकार एवं रॉक-स्टार संगीत मासूम एक बार फिर अपने नए रोमांटिक गीत "मेरे मन को" के साथ श्रोताओं के दिलों को छूने के लिए तैयार हैं। मासूम फ़िल्म कंपनी एवं द ग्रेट बॉलीवुड के बैनर तले प्रस्तुत यह गीत रिलीज़ होते ही संगीत प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। गीत की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे अपनी मधुर और भावपूर्ण आवाज़ से सजाया है पद्मश्री एवं पद्म भूषण उदित नारायण तथा लोकप्रिय गायिका पलक मुच्छल ने। गीत का संगीत अमन श्लोक ने तैयार किया है, जबकि इसके भावपूर्ण बोल सुप्रसिद्ध गीतकार एवं लेखक मुकेश कुमार मासूम ने लिखे हैं। वीडियो का निर्देशन अनिल एस. मेहता ने किया है, कोरियोग्राफी संजय चौधरी ने की है तथा इसकी निर्माता सीमा हैं। म्यूज़िक वीडियो में संगीत मासूम और गंगा अधिकारी की जोड़ी ने अपने सशक्त अभिनय से प्रेम और भावनाओं को जीवंत कर दिया है। संगीत मासूम आज हिंदी संगीत जगत के उन युवा कलाकारों में शामिल हैं, जिन्होंने अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर अलग पहचान बनाई है। उन्होंने प्रसिद्ध नृत्य निर्देशक सरोज खान से नृत्य का प्रशिक्षण प्राप्त किया है तथा रोशन तनेजा अभिनय अकादमी से अभिनय का चार माह का डिप्लोमा किया है। हाल ही में हिंदी फ़िल्म अभिनेता विवेक ओबेरॉय के हाथों उन्हें उत्कृष्ट अभिनय के लिए सम्मानित भी किया गया, जो उनके निरंतर बढ़ते कलात्मक सफर का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। इससे पहले संगीत मासूम "दिल का ख़ुदा", "ब्रेकअप पार्टी", "साजन के शहर" और "बेदर्दी" जैसे चर्चित एवं लोकप्रिय गीतों के माध्यम से संगीत प्रेमियों के बीच अपनी मजबूत पहचान बना चुके हैं। अब "मेरे मन को" से भी उनसे बड़ी उम्मीदें की जा रही हैं। गीत के बोल मुकेश कुमार मासूम द्वारा रचे गए हैं, जो शब्दों के माध्यम से प्रेम, संवेदनाओं और मानवीय भावनाओं को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त करते हैं। मुकेश कुमार मासूम समकालीन हिंदी साहित्य, सिनेमा और वैचारिक लेखन के एक संवेदनशील, प्रखर एवं बहुआयामी रचनाकार हैं। उनकी लेखनी की पहचान सरल भाषा में गहन भाव, तथ्यात्मक स्पष्टता और साहित्यिक प्रवाह के साथ समाज को सकारात्मक दिशा देने वाले विचार हैं। मुकेश कुमार मासूम स्क्रीन राइटर्स एसोसिएशन तथा इंडियन मोशन पिक्चर्स प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के सदस्य हैं, जो उनके साहित्य और फ़िल्म उद्योग से गहरे जुड़ाव का प्रमाण है। वे बॉलीवुड के स्थापित गीतकारों में गिने जाते हैं। उनके लोकप्रिय गीतों में "दिल तोड़ने वाला, दिल का ख़ुदा निकला" (उदित नारायण), "दारू सिगरेट छोड़ दे" (ममता शर्मा), "जीवन एक अमृत है" (उदित नारायण), "मेरे मन को" (उदित नारायण एवं पलक मुच्छल), "भगवान ज़रूरी है" (अल्तमश फ़रीदी), "खाटू श्याम जाना है" (अनूप जलोटा), "जय भीम बोलो रे" (स्वर्गीय मोहम्मद अज़ीज़), "ब्रेकअप पार्टी" (हरमन नाज़िम), "मेनू हँसके विदा कर दे" (शबाब साबरी), "बौद्ध धर्म के अनुयायी" (अनूप जलोटा) तथा "उस बेदर्दी ने दिल तोड़ा" (अगम कुमार निगम) जैसे अनेक लोकप्रिय गीत शामिल हैं। उन्होंने अगम कुमार निगम, समीर खान, ममता शर्मा, अल्तमश फ़रीदी, शबाब साबरी, स्वर्गीय मोहम्मद अज़ीज़, पद्मश्री कुमार शानू, पद्मश्री अनूप जलोटा तथा पद्मश्री एवं पद्म भूषण उदित नारायण जैसे प्रतिष्ठित गायकों के लिए गीत लिखे हैं। उनके गीतों में भावनात्मक गहराई, लोकसंवेदना और आत्मीयता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

वर्तमान में मुकेश कुमार मासूम सिनेविस्टा लिमिटेड जैसी प्रतिष्ठित फ़िल्म एवं धारावाहिक निर्माण कंपनी सहित बॉलीवुड की अनेक प्रमुख हस्तियों के लिए लेखन कार्य कर रहे हैं। साहित्य के क्षेत्र में भी उनकी सक्रिय उपस्थिति है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जीवन पर आधारित पुस्तक "योगी आदित्यनाथ : अध्यात्म और राजनीति के आकाश पर चमकता सितारा" लिखी है। हाल ही में इस पुस्तक के संबंध में उन्होंने लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भेंट भी की।उच्च गुणवत्ता वाले संगीत, उत्कृष्ट गायन, प्रभावशाली अभिनय और भावपूर्ण शब्दों से सजा "मेरे मन को" अब विभिन्न डिजिटल संगीत मंचों पर उपलब्ध है। संगीत प्रेमियों और समीक्षकों का मानना है कि यह गीत वर्ष के चर्चित रोमांटिक गीतों में अपनी विशेष पहचान बनाने की क्षमता रखता है।

वरिष्ठ गज़लकार एनबी सिंह नादान का विनय शर्मा दीप ने किया सम्मान
मुंबई । महानगर के उत्कृष्ट साहित्यकार गज़लकार एन बी सिंह नादान किसी पहचान के मुहताज नहीं जिन्होंने अपनी क़लम एवं लेखनी से महाराष्ट्र ही नहीं अपितु भारत के सभी प्रदेशों में ख्यातिप्राप्त हुए हैं।ऐसे गज़लकार से कवि एवं पत्रकार विनय शर्मा दीप की शिष्टाचार मुलाकात हुई जहां दीप ने अंगवस्त्र देकर नादान जी का सम्मान किया।नादान ने शिष्टाचार मुलाकात में दीप को उपहार स्वरूप अपनी यादगार पुस्तकें भेंट की।दीप ने कहा 2024-25 में नादान की उत्कृष्ट काव्य खंड महाराणा प्रताप बहुत चर्चित रही जिसे पाठकों ने खूब सराहा।पहली पुस्तक 1993 में ग़ज़ल नज़्म संग्रह- शाखों में नमी कम खूब प्रसिद्धि पाई।तत्पश्चात हंसते हुए गम ग़ज़ल संग्रह, भले मानुस सुन-कविता गीत,फूल और पंखुड़ियां-काव्य, पत्थर के शहर -गजल मुक्तक, कागज़ कलम दवात - ग़ज़ल,दीन धर्म ईमान- गजल, आखिरी पल तक -गजल,सुख है ढलती शाम-दोहा,आपके लिए -गज़ल, जिंदगी एक धूप छांव -मुक्तक,दर्द का रिश्ता -गज़ल, खुशनुमा एहसास -गज़ल,रास्ता ए नहीं आखिरी है -गज़ल, ख्वाब जो सज न सके -गज़ल,हम वतन की आबरु -गीत गज़ल, रुबरु जिंदगी से,दुष्यंत कुमार और उनके बाद की ग़ज़ल,नई सदी के स्वर एवं अपना सा कोई चेहरा - ग़ज़ल संग्रह प्रकाशन में आई और पाठकों के बीच सराही गई।आज एन बी सिंह नादान वरिष्ठ साहित्यकार,लेखक, गज़लकार के रुप में सम्मानित हैं जिन्हें महाराष्ट्र राज्य हिन्दी साहित्य अकादमी ने प्रथम पुस्तक प्रकाशन हेतु 1991 में अनुदान दें चुकी है तत्पश्चात ठाणे महानगर पालिका गुणिजन, काव्य भूषण सम्मान, पाक्षिक उत्तर दर्शन द्वारा डॉ राममनोहर त्रिपाठी 2012, भारतीय जनभाषा प्रचार समिति द्वारा समाजसेवी सम्मान 2014, प्रोग्रोसिव युथ फेडरेशन द्वारा राज्य स्तरीय मिर्जा गालिब पुरस्कार 2015 से सम्मानित किए जा चुके हैं।
अर्चना अग्रवाल के कार्यभार ग्रहण करते ही लंबित मामलों के निस्तारण में आई तेजी : एसपी तिवारी
बदलापुर। भारतीय प्रशासनिक सेवा की वरिष्ठ अधिकारी अर्चना अग्रवाल के राजस्व परिषद अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी मिलते ही उनके नेतृत्व में राजस्व प्रशासन और न्यायिक कार्यों में नया आयाम स्थापित हुआ है। उनके द्वारा लंबित मामलों के निस्तारण और आम जन की समस्याओं के समाधान में भी बेहतर रुचि ली जा रही है। यह बातें राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष एसपी तिवारी ने कही। वह गुरुवार को उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के तत्वावधान में नवागत अध्यक्ष अर्चना अग्रवाल के सम्मान में आयोजित औपचारिक मुलाकात के दौरान कही। उन्होंने इस मौके पर उन्हें स्मृति चिन्ह ,पुष्प गुच्छ एवं अंगवस्त्रम भेंट कर अपनें अन्य साथियों के साथ सम्मानित किया। अध्यक्ष तिवारी ने कहा कि अर्चना अग्रवाल के लंबे और उत्कृष्ट प्रशासनिक अनुभव बोर्ड ऑफ रेवेन्यू की कार्यप्रणाली को और अधिक सुदृढ़ एवं पारदर्शी बनाएगा।  नवीन दायित्व को संभालने पर संयुक्त परिषद की तरफ से उनके सफल , स्वस्थ और उत्कृष्ट कार्यकाल की कामना करते हुए चेयरमैन अग्रवाल को हार्दिक शुभकामना दिया। 1990 बैच की आईएएस अधिकारी अर्चना अग्रवाल अपनी कुशल प्रशासनिक क्षमता प्रभावी निर्णय लेने की शैली और शासन प्रशासन में लंबे अनुभव के लिए जानी जाती हैं। नई जिम्मेदारी के साथ वह परिवहन विभाग की अपर मुख्य सचिव भी बनी रहेगी। इस दौरान संयुक्त राज्य कर्मचारी परिषद के अध्यक्ष एसपी तिवारी ने कर्मचारियों के हित के संबंध में भी वार्ता किया। वार्ता के क्रम में उन्होंने विभागीय कर्मचारियों के प्रोन्नति का भी मामला उठाया। इस मुद्दे पर बोर्ड ऑफ रेवेन्यू की अध्यक्ष अर्चना अग्रवाल ने आश्वस्वत किया कि प्रोन्नति के मामले में निर्णय ले लिया गया है। बहुत जल्द ही सात सौ कर्मचारियों की प्रोन्नति सूची जारी कर दी जाएगी। अध्यक्ष राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद  तिवारी ने  रोडवेज में भर्ती का भी मुद्दा उठाया ।  इस मुद्दे पर अध्यक्ष अग्रवाल ने बताया कि बहुत जल्द ही रोडवेज में चालक और परिचालक  के पदों पर संविदा के बजाय नियमित नियुक्ति की जाएगी। ताकि योग्य और अच्छे चालक परिचालक रोडवेज  में शामिल हो कर यात्रियों की सुविधा को बेहतर बनाने में अपना सहयोग कर सकें। इस मौके पर राज्य कर्मचारी संयुक्त
परिषद के महामंत्री संजय कुमार शुक्ला उपाध्यक्ष स्क श्रीवास्तव तथा राज्य ट्रेड टैक्स मिनिस्ट्रियल एसोसिएशन के मंत्री विपिन कुमार आदि लोग मौजूद थे।
खत्म होती सहनशीलता, संवाद पर भारी पड़ता अपराध
–डॉ मंजू मंगलप्रभात लोढ़ा, वरिष्ठ साहित्यकार

आज समाज जिस दौर से गुजर रहा है, वह अत्यंत चिंताजनक है। हाल के दिनों में सामने आई अनेक घटनाएँ मन को झकझोर कर रख देती हैं। कहीं प्रेम संबंधों के नाम पर हत्या हो रही है, कहीं विवाह से असहमति के कारण किसी की जान ले ली जाती है, तो कहीं छोटी-सी बात पर हिंसा का विस्फोट हो जाता है। अभी हाल ही में लोकल ट्रेन में हुई एक घटना ने भी सोचने पर मजबूर कर दिया। बारिश के कारण खिड़की खुली थी। एक यात्री ने दूसरे से केवल इतना कहा कि, "कृपया खिड़की बंद कर दीजिए।" मामूली-सी बात पर विवाद इतना बढ़ गया कि मारपीट तक की नौबत आ गई और एक व्यक्ति की जान चली गई। प्रश्न यह है कि आखिर हम इतने असहिष्णु कैसे हो गए कि एक साधारण अनुरोध भी हमें क्रोधित कर देता है? लोनावला की दुखद घटना हो या मसूरी का हत्याकांड—ये केवल अपराध नहीं हैं, बल्कि समाज के सामने खड़े गंभीर प्रश्न हैं। आखिर हमारी युवा पीढ़ी किस दिशा में जा रही है? क्या कारण है कि असहमति, असफलता, अस्वीकृति या मतभेद को स्वीकार करने की क्षमता लगातार कम होती जा रही है?
कहीं न कहीं आधुनिक जीवन की भागदौड़, सोशल मीडिया का प्रभाव, त्वरित सफलता की चाह और भावनात्मक असंतुलन भी इसके कारण हैं। लेकिन केवल बाहरी परिस्थितियों को दोष देकर हम अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते। परिवार बच्चे की पहली पाठशाला है। यदि घर में संवाद, प्रेम, धैर्य और संस्कार होंगे, तो वही गुण बच्चों के व्यक्तित्व में भी उतरेंगे। युवाओं को समझना होगा कि यदि किसी रिश्ते को स्वीकार नहीं करना है, तो साहस के साथ "ना" कहना सीखें। माता-पिता से बात करें, परिवार से चर्चा करें और संवाद का मार्ग अपनाएँ। किसी भी परिस्थिति में हिंसा समाधान नहीं हो सकती। एक निर्दोष व्यक्ति की जान लेकर कोई भी समस्या हल नहीं होती, बल्कि अनेक परिवारों का जीवन उजड़ जाता है। साथ ही माता-पिता को भी अपने बच्चों की भावनाओं और इच्छाओं को समझना होगा। केवल समाज, प्रतिष्ठा या परंपरा के दबाव में कोई निर्णय थोपना उचित नहीं है। जब संवाद समाप्त हो जाता है, तब त्रासदियाँ जन्म लेती हैं। आज आवश्यकता है – सहनशीलता, संवेदना, धैर्य और आत्मसंयम की। हमें आने वाली पीढ़ी को केवल डिग्रियाँ और धन नहीं देना है, बल्कि ऐसे संस्कार देने हैं जो उन्हें एक अच्छा इंसान बना सकें। क्योंकि वास्तविक शक्ति किसी को हराने में नहीं, बल्कि स्वयं के क्रोध और अहंकार पर विजय पाने में है। याद रखिए – एक क्षण का क्रोध, जीवन भर का पश्चाताप बन सकता है और एक क्षण का संवाद, कई जीवन बचा सकता है। सहनशीलता जब खो जाती है, रिश्ते टूटने लगते हैं, क्रोध की छोटी चिंगारी से घर भी छूटने लगते हैं। खिड़की बंद करने भर से जब झगड़े बढ़ने लगते हैं,तब समझो मानव मन के दीपक बुझने लगते हैं।

संवादों की डोर थाम लो, मत नफरत को बढ़ने दो,
मानव हो तो मानवता को अपने भीतर रहने दो।

हर जिद पूरी हो जाए, यह जीवन का नियम नहीं,"ना" सुनकर भी मुस्काना सीखो, यही सबसे बड़ी जीत सही। आने वाली पीढ़ी को बस इतना उपहार दे जाएँ, प्रेम, संस्कार और धैर्य देकर बेहतर संसार दे जाएँ। अंत में बस इतना कहना चाहूँगी कि
किसी की जान लेना किसी भी समस्या का समाधान नहीं, बल्कि यह एक आपराधिक मनोवृत्ति का परिचायक है। यदि साहस दिखाना ही है, तो किसी की हत्या करने का नहीं, बल्कि समय रहते स्पष्ट शब्दों में "ना" कहने का साहस दिखाइए। यदि शक्ति दिखानी है, तो हिंसा की नहीं, संवाद की शक्ति दिखाइए। जब परिवारों में संवाद होगा, रिश्तों में सम्मान होगा और मन में सहनशीलता होगी, तभी अपराधों की बढ़ती प्रवृत्ति पर अंकुश लगाया जा सकेगा,  क्योंकि जहाँ संवाद जीवित रहता है, वहाँ संबंध जीवित रहते हैं; और जहाँ संबंध जीवित रहते हैं, वहाँ समाज सुरक्षित रहता है। क्रोध में जो निर्णय लेते, वे जीवन भर रोते हैं,संवादों के दीप जलाकर ही रिश्ते आगे होते हैं। हिंसा से इतिहास नहीं, केवल आँसू लिखे जाते हैं,प्रेम, धैर्य और सहनशीलता से ही समाज सुरक्षित बनते हैं।