ग्रामीण परिवारों को मिलेगी 125 दिन रोजगार की गारंटी, ‘जी-रामजी अधिनियम’ बनेगा विकसित भारत का मजबूत आधार: केशव मौर्य

**ग्रामीण अर्थव्यवस्था, स्वरोजगार और आय सुरक्षा को मिलेगी नई मजबूती, गांव-गांव तक पहुंचेगा ‘विकसित भारत’ का संकल्प**

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा है कि विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 (जी-रामजी) ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर, सशक्त और समृद्ध बनाने की दिशा में एक दूरदर्शी पहल है। यह अधिनियम ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और आर्थिक सुरक्षा को नई मजबूती प्रदान करेगा।

उन्होंने कहा कि अधिनियम के तहत रोजगार गारंटी को बढ़ाकर 125 कार्य दिवस किए जाने से ग्रामीण परिवारों की आय, आर्थिक स्थिरता और आजीविका सुरक्षा को बल मिलेगा। इससे श्रमिकों को अधिक काम, बेहतर आय और आत्मनिर्भर जीवन जीने का अवसर प्राप्त होगा।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि यह योजना केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों, कौशल विकास और स्वरोजगार को भी बढ़ावा देगी। इसके प्रभावी क्रियान्वयन से गांवों में विकास की नई ऊर्जा पैदा होगी और हर ग्रामीण परिवार की विकास प्रक्रिया में भागीदारी सुनिश्चित होगी।

श्री मौर्य ने कहा कि ‘जी-रामजी अधिनियम, 2025’ विकसित भारत के संकल्प को गांव-गांव तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बनेगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार मिलेगा, आय सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ होगी और सतत एवं समावेशी विकास के लक्ष्य को गति मिलेगी।
उन्होंने प्रदेशवासियों से आत्मनिर्भर गांव, सशक्त परिवार और समृद्ध भारत के निर्माण के अभियान में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया।
KGMU में करोड़ों के दवा घोटाले की आशंका, कैंसर मरीजों की दवाओं में भारी अनियमितता

* 6 माह में लगने वाला इंजेक्शन एक महीने में 4-5 बार दर्शाया गया, शुरुआती जांच में करीब 2 करोड़ रुपये की गड़बड़ी के संकेत


लखनऊ। राजधानी के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में करोड़ों रुपये के संभावित दवा घोटाले का मामला सामने आया है। कैंसर मरीजों को दी जाने वाली महंगी दवाओं और इंजेक्शनों की खरीद व खपत में गंभीर अनियमितताओं की आशंका जताई गई है। प्रारंभिक जांच में करीब 2 करोड़ रुपये की वित्तीय गड़बड़ी के संकेत मिले हैं।
जांच में सामने आया है कि कुछ ऐसे इंजेक्शन, जिन्हें मरीजों को सामान्यतः छह माह में एक बार लगाया जाना चाहिए, उन्हें रिकॉर्ड में एक ही महीने के भीतर 4 से 5 बार दिखाया गया। फरवरी और मार्च 2026 के दौरान दवाओं की खपत अचानक बढ़कर 40 से 45 लाख रुपये तक पहुंचने पर मामला संदेह के घेरे में आया।
बिल, प्रिस्क्रिप्शन और दवा वितरण के ऑडिट के दौरान कई गंभीर विसंगतियां उजागर हुईं। जांच में दवाओं की खपत, मरीजों के उपचार रिकॉर्ड और भुगतान संबंधी दस्तावेजों में अंतर पाया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित दवाओं और इंजेक्शनों के भुगतान पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। वहीं, KGMU प्रशासन ने पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच के लिए कुलपति के निर्देश पर पांच सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी है। अब जांच रिपोर्ट का इंतजार है, जिसके बाद संभावित जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जा सकती है।
यूपी स्वास्थ्य विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 21 से अधिक जिलों में नए CMO तैनात
* वाराणसी, अंबेडकरनगर, गाजियाबाद समेत कई जिलों को मिले नए मुख्य चिकित्सा अधिकारी


लखनऊ। उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग में बड़े स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 21 से अधिक जिलों में मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (CMO) की नई तैनाती की गई है। स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी एवं व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से किए गए इन तबादलों को विभागीय स्तर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जारी तबादला सूची के अनुसार डॉ. प्रमोद कुमार को अंबेडकरनगर का नया CMO नियुक्त किया गया है। वहीं डॉ. मुकेश कुमार को वाराणसी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। डॉ. सचिन चंद्र वैश्य को गाजियाबाद का मुख्य चिकित्सा अधिकारी बनाया गया है, जबकि डॉ. हरिनंदन प्रसाद को जालौन में CMO पद पर तैनात किया गया है।
स्वास्थ्य विभाग में हुए इस व्यापक फेरबदल को प्रशासनिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि नई तैनातियों से जिलों में स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी, योजनाओं के क्रियान्वयन और चिकित्सा व्यवस्था को नई गति मिलेगी।
अगर आपके पास पूरी तबादला सूची है, तो मैं इसे “किस जिले में कौन बना नया CMO” फॉर्मेट में और ज्यादा मजबूत खबर बना सकता हूँ।
विश्व तम्बाकू निषेध दिवस पर मद्यनिषेध विभाग की जागरूकता रैली
* ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ के तहत तम्बाकू और गुटखा के दुष्प्रभावों के प्रति लोगों को किया जागरूक

लखनऊ। विश्व तम्बाकू निषेध दिवस के अवसर पर रविवार को मद्यनिषेध विभाग द्वारा “नशा मुक्त भारत अभियान” के अंतर्गत तम्बाकू एवं गुटखा जनित नशीले पदार्थों के सेवन से होने वाली बीमारियों और दुष्प्रभावों के प्रति जनजागरूकता फैलाने के उद्देश्य से रैली एवं पदयात्रा का आयोजन किया गया।
इस अभियान का उद्देश्य लोगों को स्वस्थ एवं सभ्य जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना, उनके जीवन स्तर में सुधार लाना तथा तम्बाकू और गुटखा सेवन से होने वाले गंभीर स्वास्थ्य खतरों के प्रति जागरूक करना रहा।
जागरूकता रैली रविवार को क्षेत्रीय मद्यनिषेध एवं समाजोत्थान अधिकारी कार्यालय, 27 अशोक मार्ग, लखनऊ से शुरू होकर महात्मा गांधी प्रतिमा, जीपीओ पार्क, हजरतगंज चौराहा तक निकाली गई।
रैली/पदयात्रा को राज्य मद्यनिषेध अधिकारी ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। कार्यक्रम में विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ सामाजिक स्वैच्छिक संस्थाओं के कार्यकर्ताओं सहित करीब 300 लोगों ने भाग लिया।
रैली के माध्यम से लोगों को संदेश दिया गया कि तम्बाकू और गुटखा जैसी लत न केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचाती है, बल्कि समाज और परिवार पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। जनभागीदारी से ही नशा मुक्त और स्वस्थ समाज का निर्माण संभव है।
सचिवालय कर्मियों की जीत: CUG नंबर बदलने का फैसला वापस

अब पुराने नंबर ही BSNL में होंगे पोर्ट, अवकाश के दिन कार्यालय खोलने का आदेश भी रद्द


लखनऊ। सचिवालय कर्मचारियों के विरोध के बाद सचिवालय प्रशासन विभाग ने सीयूजी (CUG) मोबाइल नंबर बदलने का फैसला वापस ले लिया है। अब कर्मचारियों के पिछले करीब 15 वर्षों से उपयोग में रहे मोबाइल नंबरों को बदलने के बजाय नई सेवा प्रदाता कंपनी बीएसएनएल में ही पोर्ट कराया जाएगा।

जानकारी के अनुसार, इस प्रक्रिया को लेकर सोमवार को मौजूदा सेवा प्रदाता कंपनी वोडाफोन/आइडिया के अधिकारियों से सचिवालय प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी वार्ता करेंगे।
गौरतलब है कि सचिवालय प्रशासन विभाग ने सभी शाखा अधिष्ठानों को शनिवार, अवकाश के दिन भी कार्यालय खोलकर कर्मचारियों को नए सीयूजी नंबर उपलब्ध कराने के निर्देश जारी किए थे। हालांकि कर्मचारियों की आपत्तियों और विरोध के बीच विभाग ने शुक्रवार देर रात यह आदेश भी निरस्त कर दिया।
फैसला वापस होने के बाद सचिवालय कर्मियों में राहत की भावना देखी जा रही है। कर्मचारियों का कहना था कि वर्षों से उपयोग किए जा रहे नंबर बदलने से सरकारी कार्य, संपर्क व्यवस्था और व्यक्तिगत संचार प्रभावित हो सकता था।
लखनऊ कमिश्नरेट में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 3 एसीपी, 3 इंस्पेक्टर और एक एसआई के तबादले

लखनऊ। राजधानी में कानून-व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से पुलिस कमिश्नरेट में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। पुलिस आयुक्त कार्यालय की ओर से जारी आदेश में तीन एसीपी, तीन इंस्पेक्टर और एक उपनिरीक्षक के तबादले किए गए हैं। हालिया घटनाओं और कानून-व्यवस्था की समीक्षा के बाद हुए इस बदलाव को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। तबादला सूची के अनुसार सौम्या पांडेय को एसीपी विभूतिखंड नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही उन्हें पुलिस कमिश्नरेट की सोशल मीडिया सेल की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।

विनय द्विवेदी को एसीपी ट्रैफिक बनाया गया

वहीं विनय द्विवेदी को एसीपी ट्रैफिक बनाया गया है। इसी क्रम में सुशील यादव को एसीपी क्राइम के साथ-साथ साइबर क्राइम की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है। बढ़ते साइबर अपराधों के मद्देनजर यह नियुक्ति महत्वपूर्ण मानी जा रही है। थाना स्तर पर भी हुए बदलाव कमिश्नरेट प्रशासन ने थाना स्तर पर भी बदलाव किए हैं। विभूतिखंड के प्रभारी निरीक्षक अमर सिंह को हटाकर पुलिस लाइन भेज दिया गया है। उनकी जगह उपेंद्र सिंह को नया प्रभारी निरीक्षक बनाया गया है। इसके अलावा सुधीर कुमार अवस्थी को भी पुलिस लाइन संबद्ध किया गया है, जबकि गौरव बाजपेयी को गोमतीनगर विस्तार थाने का नया प्रभारी बनाया गया है।

पुलिस प्रशासन लगातार कानून-व्यवस्था की समीक्षा कर रहा

कानून-व्यवस्था को लेकर सक्रिय हुआ प्रशासन हाल के दिनों में राजधानी में हुई कुछ आपराधिक घटनाओं के बाद पुलिस प्रशासन लगातार कानून-व्यवस्था की समीक्षा कर रहा है। माना जा रहा है कि बेहतर पुलिसिंग, जवाबदेही तय करने और अपराध नियंत्रण को मजबूत बनाने के उद्देश्य से यह फेरबदल किया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि नई तैनातियों से पुलिस व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा तथा जनता की शिकायतों के निस्तारण में तेजी आएगी।
रिटायर्ड IAS ने अस्पताल पर लगाया बंधक बनाने का आरोप, पुलिस जांच शुरू

पूर्व IAS किशोर कुमार सिन्हा का दावा— डिस्चार्ज में देरी, बाहर निकलने की कोशिश पर फिर भर्ती किया गया; 112 पर कॉल के बाद मामला खुला

लखनऊ। उत्तर प्रदेश IAS एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष और 1978 बैच के सेवानिवृत्त IAS अधिकारी किशोर कुमार सिन्हा ने राजधानी के एक निजी अस्पताल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पूर्व अधिकारी का आरोप है कि इलाज के दौरान उन्हें तय समय पर डिस्चार्ज नहीं किया गया और अस्पताल प्रशासन ने उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध रोके रखा।

जानकारी के अनुसार, पूर्व IAS किशोर कुमार सिन्हा हाल ही में इलाज के लिए नोवा हॉस्पिटल में भर्ती हुए थे। उनका आरोप है कि अस्पताल से बाहर निकलने की कोशिश करने पर डॉक्टरों और सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें दोबारा पकड़कर अस्पताल में भर्ती कर दिया।बताया जा रहा है कि स्थिति से परेशान होकर उन्होंने पुलिस सहायता के लिए 112 नंबर पर कॉल किया, जिसके बाद उन्हें राहत मिली।

किशोर कुमार सिन्हा प्रशासनिक सेवा में कई अहम पदों पर रह चुके हैं। वह स्टेट विजिलेंस कमीशन एवं ट्रिब्यूनल के अध्यक्षरेवेन्यू बोर्ड के सदस्य और प्रमुख सचिव राजस्व जैसे महत्वपूर्ण दायित्व निभा चुके हैं। मामले में पुलिस ने शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं, अस्पताल प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।

 मामले में लगाए गए आरोप शिकायतकर्ता के दावों पर आधारित हैं। पुलिस जांच के बाद ही तथ्य स्पष्ट होंगे।

कानून व्यवस्था पर CM योगी सख्त, सुस्त अफसरों की देर रात क्लास


* घटनाओं पर नाराज़ मुख्यमंत्री ने गाजियाबाद, जौनपुर, वाराणसी समेत कई जिलों के अफसरों को लगाई फटकार, VC के बाद लखनऊ में ACP-SHO समेत थानेदार हटाए गए

लखनऊ। प्रदेश में बढ़ती आपराधिक घटनाओं और कानून व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देर रात उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में फील्ड अधिकारियों के पेंच कस दिए। घटनाओं पर लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को मुख्यमंत्री ने कड़ी फटकार लगाई। बैठक में गाजियाबाद, जौनपुर, वाराणसी समेत कई जिलों के अफसर मुख्यमंत्री के निशाने पर रहे।

सूत्रों के मुताबिक, कानून व्यवस्था को लेकर लगातार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और समीक्षा बैठकों के बावजूद अपेक्षित सुधार नहीं दिखने पर मुख्यमंत्री ने नाराज़गी जताई। बड़े अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई न होने से निचले स्तर के अफसर निर्देशों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं, इस मुद्दे पर भी सवाल उठे।

बैठक के तुरंत बाद राजधानी लखनऊ में कार्रवाई देखने को मिली। बढ़ती घटनाओं को देखते हुए विभूति खंड क्षेत्र के ACP, SHO और गोमती नगर विस्तार थाने के प्रभारी को हटा दिया गया। माना जा रहा है कि कानून व्यवस्था को लेकर सरकार अब जवाबदेही तय करने के मूड में है। संदेश साफ है कि कानून व्यवस्था में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।
पुलिस महानिदेशक पीएसी ने 41वीं वाहिनी पीएसी गाजियाबाद का किया निरीक्षण, जवानों को दिए आवश्यक दिशा-निर्देश
लखनऊ । पुलिस महानिदेशक पीएसी उत्तर प्रदेश आलोक सिंह द्वारा 41वीं वाहिनी पीएसी, गाजियाबाद का भ्रमण एवं निरीक्षण किया गया। इस दौरान सभी मोर्चों का निरीक्षण करते हुए जवानों से ‘आर्क ऑफ फायर’ के संबंध में जानकारी प्राप्त की। साथ ही क्वार्टर गार्ड की व्यवस्थाओं का भी अवलोकन किया।

निरीक्षण के दौरान पुलिस महानिदेशक ने प्रशासनिक भवन के विभिन्न कार्यालयों, वाहिनी अस्पताल एवं परिसर में स्थापित सेनेटरी नैपकिन मेकिंग मशीन का निरीक्षण किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने पी.एम.एस. तथा निर्माणाधीन ऑडिटोरियम का जायजा लेकर संबंधित अभियंताओं को गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। स्पोर्ट्स हॉस्टल का भी निरीक्षण किया गया।

तत्पश्चात मनोरंजन कक्ष में आयोजित सैनिक सम्मेलन में उन्होंने जवानों की समस्याओं को सुना तथा उनके त्वरित निराकरण हेतु आवश्यक निर्देश दिए। अपने संबोधन में उन्होंने सभी कार्मिकों को सोशल मीडिया पॉलिसी का कड़ाई से पालन करने, शारीरिक दक्षता एवं एबीसी कोर्स पर विशेष ध्यान देने तथा वर्तमान समय में अर्बन नक्सलवाद की चुनौतियों के प्रति सतर्क एवं सजग रहने के निर्देश दिए।

इस अवसर पर डीआईजी पीएसी मेरठ अनुभाग मेरठ श्रीमती कल्पना सक्सेना, सेनानायक 41वीं वाहिनी पीएसी गाजियाबाद डॉ. दिनेश यादव, सेनानायक 5वीं वाहिनी यूपीएसएसएफ सहारनपुर डॉ. एम.पी. सिंह सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
सर्वाधिक वृक्षारोपण कराने वाले बीडीओ होंगे सम्मानित, यूपी में 11.25 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य
* डिप्टी सीएम केशव मौर्य बोले— वृक्षारोपण अभियान को बनाएं जनआंदोलन, पौधों की सुरक्षा और जीवितता पर दें विशेष ध्यान


लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के वृहद वृक्षारोपण अभियान को जनभागीदारी से जोड़ते हुए इसे जनआंदोलन का स्वरूप देने की तैयारी तेज कर दी है। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने ग्राम्य विकास विभाग को इस वर्ष 11.25 करोड़ पौधरोपण के लक्ष्य को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा करने के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने कहा कि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी सुरक्षा, देखभाल और जीवितता सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है। अभियान में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले तीन सर्वश्रेष्ठ जनपदों को सम्मानित किया जाएगा, जबकि सर्वाधिक क्षेत्रफल में वृक्षारोपण कराने वाले खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) को विशेष सम्मान दिया जाएगा। डिप्टी सीएम ने निर्देश दिए कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में वृक्षारोपण के लिए माइक्रोप्लान तैयार किया जाए और ग्रामीणों के बीच पर्यावरण संरक्षण एवं हरित विकास के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए व्यापक स्तर पर जनसंवाद, गोष्ठियां और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।
उन्होंने “वृक्षमाला नदीतट संरक्षण अभियान” के तहत नदी किनारों पर बांस रोपण को प्राथमिकता देने को कहा। साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना एवं अन्य आवासीय योजनाओं के लाभार्थियों से दो-दो सहजन (मोरिंगा) के पौधे अनिवार्य रूप से लगवाने के निर्देश दिए। श्री मौर्य ने स्पष्ट किया कि वृक्षारोपण स्थलों का चयन, गड्ढों की खुदाई और पौधों की उपलब्धता की तैयारियां समय से पूरी की जाएं ताकि पौधों की उत्तरजीविता दर बेहतर बनी रहे। उन्होंने पौधों की खरीद निजी नर्सरियों से न करने तथा वन विभाग के माध्यम से ही पौधों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि कुल पौधरोपण में कम से कम 20 प्रतिशत फलदार पौधों को शामिल किया जाए तथा पर्याप्त संख्या में सहजन के पौधे लगाए जाएं, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ पोषण सुरक्षा, ग्रामीण आय और आजीविका को भी मजबूती मिल सके। उप मुख्यमंत्री ने मनरेगा के तहत कराए जाने वाले वृक्षारोपण कार्यों में निर्धारित मानकों के अनुरूप रखरखाव सुनिश्चित करने तथा विगत वर्षों में लगाए गए पौधों की समीक्षा कर सूखे एवं नष्ट पौधों का तत्काल प्रतिस्थापन कराने के निर्देश भी दिए।
आयुक्त ग्राम्य विकास जी.एस. प्रियदर्शी ने सभी मुख्य विकास अधिकारियों एवं संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि वृक्षारोपण अभियान-2026-27 को मिशन मोड में संचालित करते हुए इसे प्रदेशव्यापी जनभागीदारी का सफल अभियान बनाया जाए।