अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस: सोनी सब के यादें

कलाकारों ने साझा किया कि एक साधारण कप चाय उनके जीवन में क्यों रखता है खास जगह
मुंबई, मई 2026: भारत में चाय सिर्फ़ एक पेय नहीं है, बल्कि यह एक एहसास है जो रोज़मर्रा की ज़िंदगी में गहराई से जुड़ा हुआ है। सुबह की दिनचर्या से लेकर दोपहर के ब्रेक तक, दिल से जुड़ी बातचीतों से लेकर सुकून के पलों तक – चाय का अपना अलग ही जादू है जो लोगों को एक-दूसरे से जोड़ देता है। अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस के मौके पर सोनी सब के शो यादें के कलाकार इक़बाल ख़ान, अर्जुन पुंज और सृष्टि सिंह ने साझा किया कि चाय से उनका निजी रिश्ता क्यों इतना ख़ास है और क्यों एक साधारण कप चाय उनकी ज़िंदगी में आज भी अहम जगह रखता है।
चाय के प्रति अपने प्यार को साझा करते हुए, यादें के कलाकारों ने सुनाई अपनी कहानियाँ:
इक़बाल ख़ान, जो शो में डॉ. देव मेहता का किरदार निभा रहे हैं, बताते हैं, “भले ही मैं रोज़ाना चाय न पीता हूं, लेकिन चाय मेरे दिल के बहुत करीब है क्योंकि इससे जुड़ी यादें बेहद ख़ास हैं। जब भी मैं अपने माता-पिता से मिलने कश्मीर जाता हूं, तो ‘नून चाय’ मेरी दिनचर्या का अहम हिस्सा बन जाती है। परिवार के साथ बैठकर, ताज़ा कश्मीरी बेकरी के पकवानों के साथ दोपहर में इसे पीना बेहद सुकून और पुरानी यादों से भरा होता है। यह उन छोटे-छोटे पलों में से है जो मुझे तुरंत घर और परिवार की याद दिला देते हैं।” अर्जुन पुंज, जो शो में डिग्गी का किरदार निभा रहे हैं, बताते हैं, “मैं हमेशा से ही चाय का दीवाना रहा हूं। मेरी चाय से मोहब्बत बचपन में शुरू हुई, जब मैं अपनी मां को दिनभर कई कप चाय का मज़ा लेते हुए देखता था। मुझे आज भी याद है कि मैं उनके पास बैठकर बिस्किट चाय में डुबोकर खाता था और उन छोटे-छोटे पलों का इंतज़ार करता था। सालों के साथ चाय मेरी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का खूबसूरत हिस्सा बन गई है। यहां तक कि मेरी पत्नी गुर्दीप, जो पहले कॉफी की शौकीन थीं, अब मेरी वजह से चाय की दीवानी हो गई हैं। यही तो चाय का जादू है – यह लोगों को जोड़ देती है।” सृष्टि सिंह, जो शो में डॉ. वाणी का किरदार निभा रही हैं, कहती हैं, “मैं भले ही हमेशा चाय न पीती हूं, लेकिन जब भी मुझे एक अच्छी चाय की तलब लगती है – खासकर तब जब मैं थकी होती हूं या घर की याद आती है – तो वह चाय बेहद सुकूनभरी और ख़ास होनी चाहिए। और मेरे लिए ‘मां के हाथ की चाय’ से बेहतर कुछ नहीं। मां के हाथ की चाय में कुछ ऐसा होता है जो तुरंत अपनापन और सुकून का एहसास दिलाता है। यह सिर्फ़ स्वाद की बात नहीं है, बल्कि उस एहसास की है – जिसमें गर्माहट, देखभाल और घर का पूरा प्यार एक कप में समा जाता है।”
देखिए यादें, हर सोमवार से शनिवार रात 8 बजे, सिर्फ़ सोनी सब पर।
*स्कोलास्टिक अवॉर्ड्स (2026):*

न्यू एंटरप्राइज क्रिएशन में स्कोलास्टिक प्रदर्शन के लिए दाह्याभाई छोटालाल चैरिटी फाउंडेशन (रेमिक) प्रायोजित स्वर्ण पदक

सौभाग्यवर्धन शुक्ला
रीवर्क पर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट, जो एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जो सेवानिवृत्त व्यक्तियों को लचीले रोजगार अवसरों, परियोजना-आधारित कार्य और मेंटरशिप भूमिकाओं से जोड़कर विभिन्न पीढ़ियों के बीच सहयोग को बढ़ावा देता है, साथ ही उनके अनुभव और ज्ञान के सार्थक उपयोग को सुनिश्चित करता है।
न्यू एंटरप्राइज क्रिएशन में स्कोलास्टिक प्रदर्शन के लिए दाह्याभाई छोटालाल चैरिटी फाउंडेशन (रेमिक) प्रायोजित रजत पदक

अंशिका गुप्ता
टीएएनबी वर्चुअल इन्फ्रा पर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट, जो एक स्थानीयकृत इंफ्रास्ट्रक्चर-एज़-ए-सर्विस (आईएएएस) प्लेटफॉर्म है, जिसे भारतीय एमएसएमई और सरकारी उद्यमों के लिए सुरक्षित, स्केलेबल और किफायती डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर समाधान उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।.
फैमिली बिजनेस मैनेजमेंट में स्कोलास्टिक प्रदर्शन के लिए दाह्याभाई छोटालाल चैरिटी फाउंडेशन (रेमिक) प्रायोजित स्वर्ण पदक

दर्शन संघाणी
चेत्सा बाथवेयर प्राइवेट लिमिटेड, जामनगर, गुजरात के लिए 5 वर्षीय परिप्रेक्ष्य विकास योजना। यह एक बाथ फिटिंग्स निर्माण कंपनी है, जो प्रीमियम गुणवत्ता वाले फॉसेट्स, शॉवरहेड्स और बाथरूम एक्सेसरीज़ उपलब्ध कराने पर केंद्रित है, जिनमें टिकाऊपन, कार्यक्षमता और आधुनिक सौंदर्यशास्त्र का समावेश है।
फैमिली बिजनेस मैनेजमेंट में स्कोलास्टिक प्रदर्शन के लिए दाह्याभाई छोटालाल चैरिटी फाउंडेशन (रेमिक) प्रायोजित रजत पदक

धनंजय डांगरिया
डीएनडी इंडस्ट्रीज, राजकोट, गुजरात के लिए 5 वर्षीय परिप्रेक्ष्य विकास योजना। यह कंपनी सबमर्सिबल पंप पार्ट्स, इंडस्ट्रियल फास्टनर्स, एसएस पाइप्स तथा प्रिसीजन-इंजीनियर्ड औद्योगिक कंपोनेंट्स के निर्माण से जुड़ी हुई है, जो निर्माण, फूड प्रोसेसिंग, फार्मास्यूटिकल्स, पेट्रोकेमिकल्स और ऑटोमोटिव उद्योग जैसे क्षेत्रों की आवश्यकताओं को पूरा करते हैं।
पीजीडीएम-आईईवी में स्कोलास्टिक प्रदर्शन के लिए ईडीआईआई प्रायोजित स्वर्ण पदक

चेल्लप्पन वल्लियप्पन – ऑनएसएलआर पर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट, जो एक एआई-संचालित एनालिटिक्स और सॉफ्टवेयर कंसल्टिंग प्लेटफॉर्म है, और स्केलेबल डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन तथा डेटा-आधारित व्यावसायिक समाधान प्रदान करता है।

पीजीडीएम-ऑनलाइन में स्कोलास्टिक प्रदर्शन के लिए ईडीआईआई प्रायोजित स्वर्ण पदक

अरुण चलोत्रा – हिमालयन ग्रीन पर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट, जो एक एग्रोटेक पहल है और हिमालयी तथा सीमावर्ती क्षेत्रों में जलवायु-अनुकूल एवं सतत कृषि हस्तक्षेपों को बढ़ावा देती है।

ईडीआईआई प्रेसिडेंट्स एलुमनस अवॉर्ड 2026

ईडीआईआई प्रेसिडेंट्स एलुमनस अवॉर्ड 2026 – बिजनेस एंटरप्रेन्योर
श्री कक्षील पटेल
निदेशक, राजेश पावर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड एवं निदेशक, इंटेलीसोलर
पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम 2017-2019

श्री कक्षील पटेल, राजेश पावर सर्विसेज लिमिटेड (आरएसपीएल) के निदेशक, अहमदाबाद, गुजरात से, तीसरी पीढ़ी के उद्यमी हैं, जिन्होंने कंपनी की विकास यात्रा को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके नेतृत्व में, कंपनी ने ‘ऊर्जा आत्मनिर्भरता – विकसित गुजरात 2047’ पहल के अंतर्गत गुजरात सरकार के साथ ₹4,754 करोड़ मूल्य के समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। अपनी विकास यात्रा को और मजबूत करते हुए, राजेश पावर सर्विसेज लिमिटेड ने ₹160.47 करोड़ का सफल आईपीओ लॉन्च किया, जिसे दिसंबर 2024 में बीएसई एसएमई प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध किया गया।
ईडीआईआई प्रेसिडेंट्स एलुमनस अवॉर्ड 2026 – सोशल एंटरप्रेन्योर

सुश्री सुजाता गोस्वामी
एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर, सर्व शांति आयोग
पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम 2004–2005

सुजाता गोस्वामी, सर्व शांति आयोग (एसएसए) की एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं। यह कोलकाता स्थित एक गैर-लाभकारी संगठन है, जो समावेशी और सतत विकास पर केंद्रित है। दो दशकों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें एंटरप्राइज डेवलपमेंट, फेयर ट्रेड प्रथाओं तथा सतत वैल्यू चेन निर्माण में विशेषज्ञता हासिल है। वह ऐसी पहलों का नेतृत्व कर रही हैं, जो वंचित समुदायों, विशेष रूप से महिलाओं और ग्रामीण उत्पादकों को सशक्त बनाती हैं, तथा पूरे भारत में 70 से अधिक फेयर ट्रेड कलेक्टिव्स को सहयोग प्रदान करती हैं।
उभरते हुए व्यावसायिक उद्यमी के लिए विशेष जूरी पुरस्कार
श्री योगेंद्र पाटीदार
निदेशक, सीआईवीओएम, सह-मालिक, यूडब्ल्यूसी फूड्स प्राइवेट लिमिटेड एवं सह-मालिक, इम्प्रेशंस इंडिया
पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम 2005–2006

श्री योगेंद्र पाटीदार, इंदौर, मध्य प्रदेश के प्रथम पीढ़ी के उद्यमी हैं और यूडब्ल्यूसी ग्रुप के अंतर्गत संचालित कई उद्यमों के निदेशक एवं शेयरधारक हैं। इनमें यूडब्ल्यूसी एंड सीटी वेंचर्स, प्रोफेटिक प्रोजेक्ट सॉल्यूशंस, प्रोफेटिक कोटिंग्स, जीएलएसएन तथा यूडब्ल्यूसी फूड्स शामिल हैं। लर्निंग स्पेसेस, फूड प्रोसेसिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे विविध क्षेत्रों में फैले पोर्टफोलियो के माध्यम से उन्होंने एक मजबूत व्यावसायिक इकोसिस्टम का निर्माण किया है। उनके प्रयासों को बिजनेसवर्ल्ड 40 अंडर 40 अवॉर्ड (2024) से सम्मानित किया गया है।

उभरते हुए व्यावसायिक उद्यमी के लिए विशेष जूरी पुरस्कार
श्री दीपक पटेल
संस्थापक – सूर्या फार्मा एंड दीपक पेट्रो तथा सह-संस्थापक – फिटफ्यूजन स्टूडियो
पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन मैनेजमेंट – बिजनेस एंटरप्रेन्योरशिप, 2010–2012

दीपक पटेल, अहमदाबाद के प्रथम पीढ़ी के उद्यमी हैं और सूर्या फार्मा एंड दीपक पेट्रो के संस्थापक तथा फिटफ्यूजन स्टूडियो के सह-संस्थापक हैं। अपने शेल रिटेल फ्यूल उद्यम का सफलतापूर्वक संचालन और विस्तार करते हुए, उन्होंने हेल्थकेयर क्षेत्र में विविधीकरण करके उल्लेखनीय उद्यमशील दूरदृष्टि का परिचय दिया। अप्रैल 2021 में, उन्होंने सूर्या फार्मा की स्थापना की और रणनीतिक रूप से दिल्ली-एनसीआर के उच्च प्रभाव वाले एवं आवश्यक फार्मास्यूटिकल उद्योग में प्रवेश किया। अपनी उद्यमशील उपस्थिति का और विस्तार करते हुए, उन्होंने अहमदाबाद के सैटेलाइट क्षेत्र में स्थित आधुनिक जिम ‘फिटफ्यूजन स्टूडियो’ की शुरुआत के साथ फिटनेस और वेलनेस क्षेत्र में भी कदम रखा।

उभरते सामाजिक उद्यमी के लिए विशेष जूरी पुरस्कार
श्री सुवेंदु राउत
वाइस प्रेसिडेंट, एक्सेस डेवलपमेंट सर्विसेज
पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन मैनेजमेंट ऑफ एनजीओज़, 2006–2007
सुवेंदु राउत, एक्सेस डेवलपमेंट सर्विसेज में वाइस प्रेसिडेंट हैं और नॉन-फार्म वर्टिकल का नेतृत्व कर रहे हैं, जहां उनका विशेष ध्यान पूरे भारत में महिला-नेतृत्व वाले सामाजिक उद्यमों को बढ़ावा देने पर है। उन्होंने जयपुर में ‘पिंक सिटी रिक्शा कंपनी’ की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जो महिलाओं द्वारा संचालित एक अभिनव ई-रिक्शा पर्यटन पहल है। इस मॉडल को वाराणसी, उदयपुर और आगरा में भी दोहराया गया है, तथा इसे 20 गंतव्यों तक विस्तारित करने की योजना है। अपने करियर के दौरान उन्हें कई सम्मान प्राप्त हुए हैं, जिनमें सोशल इम्पैक्ट अवॉर्ड 2024 (एसपीजिमआर), 6वां रिस्पॉन्सिबल बीएमओ अवॉर्ड 2022 (एमएसएमई फाउंडेशन), वाटरशेड मैनेजमेंट में आईसीटी नवाचार के लिए नेशनल ई-गवर्नेंस अवॉर्ड 2010, तथा उद्यमशील उत्कृष्टता के लिए भारती अवॉर्ड शामिल हैं।
*स्कोलास्टिक अवॉर्ड्स (2026):*

न्यू एंटरप्राइज क्रिएशन में स्कोलास्टिक प्रदर्शन के लिए दाह्याभाई छोटालाल चैरिटी फाउंडेशन (रेमिक) प्रायोजित स्वर्ण पदक

सौभाग्यवर्धन शुक्ला
रीवर्क पर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट, जो एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जो सेवानिवृत्त व्यक्तियों को लचीले रोजगार अवसरों, परियोजना-आधारित कार्य और मेंटरशिप भूमिकाओं से जोड़कर विभिन्न पीढ़ियों के बीच सहयोग को बढ़ावा देता है, साथ ही उनके अनुभव और ज्ञान के सार्थक उपयोग को सुनिश्चित करता है।
न्यू एंटरप्राइज क्रिएशन में स्कोलास्टिक प्रदर्शन के लिए दाह्याभाई छोटालाल चैरिटी फाउंडेशन (रेमिक) प्रायोजित रजत पदक

अंशिका गुप्ता
टीएएनबी वर्चुअल इन्फ्रा पर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट, जो एक स्थानीयकृत इंफ्रास्ट्रक्चर-एज़-ए-सर्विस (आईएएएस) प्लेटफॉर्म है, जिसे भारतीय एमएसएमई और सरकारी उद्यमों के लिए सुरक्षित, स्केलेबल और किफायती डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर समाधान उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।.
फैमिली बिजनेस मैनेजमेंट में स्कोलास्टिक प्रदर्शन के लिए दाह्याभाई छोटालाल चैरिटी फाउंडेशन (रेमिक) प्रायोजित स्वर्ण पदक

दर्शन संघाणी
चेत्सा बाथवेयर प्राइवेट लिमिटेड, जामनगर, गुजरात के लिए 5 वर्षीय परिप्रेक्ष्य विकास योजना। यह एक बाथ फिटिंग्स निर्माण कंपनी है, जो प्रीमियम गुणवत्ता वाले फॉसेट्स, शॉवरहेड्स और बाथरूम एक्सेसरीज़ उपलब्ध कराने पर केंद्रित है, जिनमें टिकाऊपन, कार्यक्षमता और आधुनिक सौंदर्यशास्त्र का समावेश है।
फैमिली बिजनेस मैनेजमेंट में स्कोलास्टिक प्रदर्शन के लिए दाह्याभाई छोटालाल चैरिटी फाउंडेशन (रेमिक) प्रायोजित रजत पदक

धनंजय डांगरिया
डीएनडी इंडस्ट्रीज, राजकोट, गुजरात के लिए 5 वर्षीय परिप्रेक्ष्य विकास योजना। यह कंपनी सबमर्सिबल पंप पार्ट्स, इंडस्ट्रियल फास्टनर्स, एसएस पाइप्स तथा प्रिसीजन-इंजीनियर्ड औद्योगिक कंपोनेंट्स के निर्माण से जुड़ी हुई है, जो निर्माण, फूड प्रोसेसिंग, फार्मास्यूटिकल्स, पेट्रोकेमिकल्स और ऑटोमोटिव उद्योग जैसे क्षेत्रों की आवश्यकताओं को पूरा करते हैं।
पीजीडीएम-आईईवी में स्कोलास्टिक प्रदर्शन के लिए ईडीआईआई प्रायोजित स्वर्ण पदक

चेल्लप्पन वल्लियप्पन – ऑनएसएलआर पर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट, जो एक एआई-संचालित एनालिटिक्स और सॉफ्टवेयर कंसल्टिंग प्लेटफॉर्म है, और स्केलेबल डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन तथा डेटा-आधारित व्यावसायिक समाधान प्रदान करता है।

पीजीडीएम-ऑनलाइन में स्कोलास्टिक प्रदर्शन के लिए ईडीआईआई प्रायोजित स्वर्ण पदक

अरुण चलोत्रा – हिमालयन ग्रीन पर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट, जो एक एग्रोटेक पहल है और हिमालयी तथा सीमावर्ती क्षेत्रों में जलवायु-अनुकूल एवं सतत कृषि हस्तक्षेपों को बढ़ावा देती है।

ईडीआईआई प्रेसिडेंट्स एलुमनस अवॉर्ड 2026

ईडीआईआई प्रेसिडेंट्स एलुमनस अवॉर्ड 2026 – बिजनेस एंटरप्रेन्योर
श्री कक्षील पटेल
निदेशक, राजेश पावर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड एवं निदेशक, इंटेलीसोलर
पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम 2017-2019

श्री कक्षील पटेल, राजेश पावर सर्विसेज लिमिटेड (आरएसपीएल) के निदेशक, अहमदाबाद, गुजरात से, तीसरी पीढ़ी के उद्यमी हैं, जिन्होंने कंपनी की विकास यात्रा को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके नेतृत्व में, कंपनी ने ‘ऊर्जा आत्मनिर्भरता – विकसित गुजरात 2047’ पहल के अंतर्गत गुजरात सरकार के साथ ₹4,754 करोड़ मूल्य के समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। अपनी विकास यात्रा को और मजबूत करते हुए, राजेश पावर सर्विसेज लिमिटेड ने ₹160.47 करोड़ का सफल आईपीओ लॉन्च किया, जिसे दिसंबर 2024 में बीएसई एसएमई प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध किया गया।
ईडीआईआई प्रेसिडेंट्स एलुमनस अवॉर्ड 2026 – सोशल एंटरप्रेन्योर

सुश्री सुजाता गोस्वामी
एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर, सर्व शांति आयोग
पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम 2004–2005

सुजाता गोस्वामी, सर्व शांति आयोग (एसएसए) की एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं। यह कोलकाता स्थित एक गैर-लाभकारी संगठन है, जो समावेशी और सतत विकास पर केंद्रित है। दो दशकों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें एंटरप्राइज डेवलपमेंट, फेयर ट्रेड प्रथाओं तथा सतत वैल्यू चेन निर्माण में विशेषज्ञता हासिल है। वह ऐसी पहलों का नेतृत्व कर रही हैं, जो वंचित समुदायों, विशेष रूप से महिलाओं और ग्रामीण उत्पादकों को सशक्त बनाती हैं, तथा पूरे भारत में 70 से अधिक फेयर ट्रेड कलेक्टिव्स को सहयोग प्रदान करती हैं।
उभरते हुए व्यावसायिक उद्यमी के लिए विशेष जूरी पुरस्कार
श्री योगेंद्र पाटीदार
निदेशक, सीआईवीओएम, सह-मालिक, यूडब्ल्यूसी फूड्स प्राइवेट लिमिटेड एवं सह-मालिक, इम्प्रेशंस इंडिया
पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम 2005–2006

श्री योगेंद्र पाटीदार, इंदौर, मध्य प्रदेश के प्रथम पीढ़ी के उद्यमी हैं और यूडब्ल्यूसी ग्रुप के अंतर्गत संचालित कई उद्यमों के निदेशक एवं शेयरधारक हैं। इनमें यूडब्ल्यूसी एंड सीटी वेंचर्स, प्रोफेटिक प्रोजेक्ट सॉल्यूशंस, प्रोफेटिक कोटिंग्स, जीएलएसएन तथा यूडब्ल्यूसी फूड्स शामिल हैं। लर्निंग स्पेसेस, फूड प्रोसेसिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे विविध क्षेत्रों में फैले पोर्टफोलियो के माध्यम से उन्होंने एक मजबूत व्यावसायिक इकोसिस्टम का निर्माण किया है। उनके प्रयासों को बिजनेसवर्ल्ड 40 अंडर 40 अवॉर्ड (2024) से सम्मानित किया गया है।

उभरते हुए व्यावसायिक उद्यमी के लिए विशेष जूरी पुरस्कार
श्री दीपक पटेल
संस्थापक – सूर्या फार्मा एंड दीपक पेट्रो तथा सह-संस्थापक – फिटफ्यूजन स्टूडियो
पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन मैनेजमेंट – बिजनेस एंटरप्रेन्योरशिप, 2010–2012

दीपक पटेल, अहमदाबाद के प्रथम पीढ़ी के उद्यमी हैं और सूर्या फार्मा एंड दीपक पेट्रो के संस्थापक तथा फिटफ्यूजन स्टूडियो के सह-संस्थापक हैं। अपने शेल रिटेल फ्यूल उद्यम का सफलतापूर्वक संचालन और विस्तार करते हुए, उन्होंने हेल्थकेयर क्षेत्र में विविधीकरण करके उल्लेखनीय उद्यमशील दूरदृष्टि का परिचय दिया। अप्रैल 2021 में, उन्होंने सूर्या फार्मा की स्थापना की और रणनीतिक रूप से दिल्ली-एनसीआर के उच्च प्रभाव वाले एवं आवश्यक फार्मास्यूटिकल उद्योग में प्रवेश किया। अपनी उद्यमशील उपस्थिति का और विस्तार करते हुए, उन्होंने अहमदाबाद के सैटेलाइट क्षेत्र में स्थित आधुनिक जिम ‘फिटफ्यूजन स्टूडियो’ की शुरुआत के साथ फिटनेस और वेलनेस क्षेत्र में भी कदम रखा।

उभरते सामाजिक उद्यमी के लिए विशेष जूरी पुरस्कार
श्री सुवेंदु राउत
वाइस प्रेसिडेंट, एक्सेस डेवलपमेंट सर्विसेज
पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन मैनेजमेंट ऑफ एनजीओज़, 2006–2007
सुवेंदु राउत, एक्सेस डेवलपमेंट सर्विसेज में वाइस प्रेसिडेंट हैं और नॉन-फार्म वर्टिकल का नेतृत्व कर रहे हैं, जहां उनका विशेष ध्यान पूरे भारत में महिला-नेतृत्व वाले सामाजिक उद्यमों को बढ़ावा देने पर है। उन्होंने जयपुर में ‘पिंक सिटी रिक्शा कंपनी’ की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जो महिलाओं द्वारा संचालित एक अभिनव ई-रिक्शा पर्यटन पहल है। इस मॉडल को वाराणसी, उदयपुर और आगरा में भी दोहराया गया है, तथा इसे 20 गंतव्यों तक विस्तारित करने की योजना है। अपने करियर के दौरान उन्हें कई सम्मान प्राप्त हुए हैं, जिनमें सोशल इम्पैक्ट अवॉर्ड 2024 (एसपीजिमआर), 6वां रिस्पॉन्सिबल बीएमओ अवॉर्ड 2022 (एमएसएमई फाउंडेशन), वाटरशेड मैनेजमेंट में आईसीटी नवाचार के लिए नेशनल ई-गवर्नेंस अवॉर्ड 2010, तथा उद्यमशील उत्कृष्टता के लिए भारती अवॉर्ड शामिल हैं।
फिर महकेगी बुंदेलखंड की रसोई, 'बुंदेली शेफ सीज़न- 4' जल्द लेकर आ रहा है स्वाद, सपनों और पहचान का सबसे बड़ा मंच

इंदौर,  मई, 2026: कुछ स्वाद सिर्फ ज़ुबान पर नहीं ठहरते, वे हर दिन महकती यादों में बस जाते हैं। कुछ रसोइयाँ सिर्फ भोजन ही नहीं पकातीं, वे अपने घर, अपनी मिट्टी और अपनी परंपरा की कहानियाँ परोसती हैं। बुंदेलखंड की वही सौंधी खुशबू, वही देसी तड़का और वही आत्मीयता अब एक बार फिर पूरे क्षेत्र को उत्साह से भरने लौट रही है। 'बुंदेली शेफ' अब अपने चौथे सीज़न के साथ फिर तैयार है, जहाँ रसोई से निकलने वाली हर खुशबू सिर्फ व्यंजन ही नहीं, बल्कि बुंदेलखंड की पहचान बनकर सामने आएगी।

बुंदेली पाक और महिलाओं के हुनर को देखते हुए, अब सीज़न 4 पहले से कहीं ज्यादा भव्य और रोमांचक होने जा रहा है। इस बार प्रतिभागियों के हुनर को परखने के लिए तीन बड़े ऑडिशन राउंड्स आयोजित किए जाएँगे। इन राउंड्स में चयनित पाककला की होनहार प्रतिभागियों को क्रमशः क्वार्टर फाइनल, सेमी फाइनल और फिर भव्य ग्रैंड फिनाले में अपने हुनर की करछी चलाने का मौका मिलेगें और इस प्रकार बुंदेलखंड की सर्वश्रेष्ठ रसोई की नई पहचान सामने आएगी।

बुंदेलखंड 24x7 के फाउंडर डॉ. अतुल मलिकराम ने कहा, "जब हमने 'बुंदेली शेफ' की शुरुआत की थी, तब हमारा उद्देश्य सिर्फ एक कुकिंग शो बनाना नहीं था, बल्कि बुंदेलखंड की उन प्रतिभाशाली महिलाओं को एक ऐसा मंच देना था, जिनका हुनर अक्सर घर की चारदीवारी तक ही सीमित रह जाता है। पिछले तीन सीज़न्स में हमने देखा कि कैसे इस मंच ने कई महिलाओं के भीतर आत्मविश्वास जगाया, उन्हें नई पहचान दी और उनके सपनों को नई उड़ान दी। आज 'बुंदेली शेफ' सिर्फ एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि बुंदेलखंड की संस्कृति, परंपरा और स्वाद का उत्सव बन चुका है। यही हमारी सफलता है और आगे इसे बढ़ने के लिए प्रेरणा भी है। सीज़न 4 में हम और भी नए चेहरे, पाककला की नई कहानियों और ऐसे अनोखे स्वादों से परिचित होने जा रहे हैं, जो एक बार फिर पूरे बुंदेलखंड को अपनी मिट्टी पर गर्व करने का मौका देंगे।"

पिछले तीन सीज़न्स में इस मंच ने न सिर्फ कई प्रतिभाओं को पहचान दी, बल्कि यह हजारों महिलाओं के भीतर छिपे आत्मविश्वास को भी नई उड़ान देने का माध्यम रहा है। सीज़न 1 की विजेता शमिता सिंह ने अपने सहज और पारंपरिक स्वाद से लोगों का दिल जीता। इसके बाद सीज़न 2 में ज़हीदा परवीन ने यह साबित किया कि बुंदेली रसोई में हुनर और प्रयोग दोनों साथ-साथ बखूबी चल सकते हैं। वहीं, कुछ माह पूर्व ही सम्पन्न हुए सीज़न 3 में शाजिदा अमीर ने अपने लाजवाब व्यंजनों से ऐसा जादू चलाया कि उनकी जीत पूरे बुंदेलखंड के लिए गर्व का क्षण बन गई।

'बुंदेली शेफ' अब सिर्फ एक प्रतियोगिता नहीं रह गया है, बल्कि यह उस भावना का उत्सव बन चुका है, जहाँ महिलाएँ अपनी थाली में अपने अपना हुनर, अपने सपने और अपने संस्कार लेकर आती हैं। हर बढ़ते सीज़न के साथ यह मंच इस बात को साबित कर रहा है कि बुंदेलखंड की रसोई में सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि दुनिया को जोड़ लेने वाली आत्मीयता भी बसती है।

सीज़न 4 की चर्चा अभी से लोगों के बीच उत्साह पैदा करने लगी है। क्योंकि यह मंच केवल जीतने के लिए नहीं, बल्कि उस मिट्टी की खुशबू को दुनिया तक पहुँचाने के लिए है, जो हर बुंदेली रसोई में आज भी प्रेम, अपनापन और परंपरा के साथ पकती है।
*ताप बिजली घरों का परिचालन और रख-रखाव ठेके पर देने के फैसले के विरोध में 13 मई को काली पट्टी बांधकर कार्य करेंगे एवं विरोध प्रदर्शन करेंगे बिजली


लखनऊ।विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के आह्वान पर 13 मई को प्रदेशभर के बिजली कर्मचारी समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर पूरे दिन काली पट्टी बांधकर कार्य करेंगे तथा कार्यालय समय के उपरांत परियोजनाओं एवं कार्यस्थलों पर व्यापक विरोध प्रदर्शन करेंगे।

संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि काली पट्टी बांधने का निर्णय पनकी ताप बिजली घर एवं जवाहरपुर ताप बिजली घर के परिचालन एवं अनुरक्षण का कार्य 25 वर्षों के लिए निजी कंपनी को दिए जाने के विरोध में लिया गया है। कल सभी ऊर्जा निगमों में कार्यरत बिजली कर्मी, जूनियर इंजीनियर, अभियंता एवं संविदा कर्मी पूरे दिन काली पट्टी बांधकर अपना विरोध दर्ज कराएंगे।

संघर्ष समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम के ताप बिजली घरों को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार प्राप्त हुए हैं, लेकिन इसके बावजूद बिजली घरों के संचालन एवं रख-रखाव को निजी कंपनियों को सौंपने की कोशिश की जा रही है। इससे स्पष्ट है कि प्रबंधन की रुचि सुधार में नहीं, बल्कि निजीकरण में है।

संघर्ष समिति ने बताया कि जवाहरपुर ताप बिजली घर लगभग 14,000 करोड़ रुपये तथा पनकी ताप बिजली घर लगभग 8,000 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित किए गए हैं। यह जनता की गाढ़ी कमाई का धन है। इतनी बड़ी सार्वजनिक धनराशि खर्च करने के बाद इन बिजली घरों को 25 वर्षों के लिए निजी क्षेत्र को सौंपना प्रदेश की जनता के साथ विश्वासघात है। ध्यान देने योग्य है कि ताप बिजली घरों की सामान्य आयु लगभग 25 वर्ष मानी जाती है।

संघर्ष समिति ने यह भी कहा कि मार्च 2023 से शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे बिजली कर्मचारियों पर की गई समस्त उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों को वापस लेने की मांग को लेकर व्यापक जन-जागरण अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के अंतर्गत आज शाहजहांपुर एवं बरेली में विरोध सभाएं आयोजित की गईं।

विरोध सभाओं को संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारी जितेंद्र सिंह गुर्जर, महेंद्र राय, सुहेल आबिद तथा राजेंद्र प्रसाद घिल्डियाल ने मुख्य रूप से संबोधित किया।

13 मई को राजधानी लखनऊ में शक्ति भवन पर अपराह्न 02 बजे विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।

शैलेन्द्र दुबे
संयोजक
94150 06225
*ताप बिजली घरों का परिचालन और रख-रखाव ठेके पर देने के फैसले के विरोध में 13 मई को काली पट्टी बांधकर कार्य करेंगे एवं विरोध प्रदर्शन करेंगे बिजली


लखनऊ।विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के आह्वान पर 13 मई को प्रदेशभर के बिजली कर्मचारी समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर पूरे दिन काली पट्टी बांधकर कार्य करेंगे तथा कार्यालय समय के उपरांत परियोजनाओं एवं कार्यस्थलों पर व्यापक विरोध प्रदर्शन करेंगे।

संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि काली पट्टी बांधने का निर्णय पनकी ताप बिजली घर एवं जवाहरपुर ताप बिजली घर के परिचालन एवं अनुरक्षण का कार्य 25 वर्षों के लिए निजी कंपनी को दिए जाने के विरोध में लिया गया है। कल सभी ऊर्जा निगमों में कार्यरत बिजली कर्मी, जूनियर इंजीनियर, अभियंता एवं संविदा कर्मी पूरे दिन काली पट्टी बांधकर अपना विरोध दर्ज कराएंगे।

संघर्ष समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम के ताप बिजली घरों को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार प्राप्त हुए हैं, लेकिन इसके बावजूद बिजली घरों के संचालन एवं रख-रखाव को निजी कंपनियों को सौंपने की कोशिश की जा रही है। इससे स्पष्ट है कि प्रबंधन की रुचि सुधार में नहीं, बल्कि निजीकरण में है।

संघर्ष समिति ने बताया कि जवाहरपुर ताप बिजली घर लगभग 14,000 करोड़ रुपये तथा पनकी ताप बिजली घर लगभग 8,000 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित किए गए हैं। यह जनता की गाढ़ी कमाई का धन है। इतनी बड़ी सार्वजनिक धनराशि खर्च करने के बाद इन बिजली घरों को 25 वर्षों के लिए निजी क्षेत्र को सौंपना प्रदेश की जनता के साथ विश्वासघात है। ध्यान देने योग्य है कि ताप बिजली घरों की सामान्य आयु लगभग 25 वर्ष मानी जाती है।

संघर्ष समिति ने यह भी कहा कि मार्च 2023 से शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे बिजली कर्मचारियों पर की गई समस्त उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों को वापस लेने की मांग को लेकर व्यापक जन-जागरण अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के अंतर्गत आज शाहजहांपुर एवं बरेली में विरोध सभाएं आयोजित की गईं।

विरोध सभाओं को संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारी जितेंद्र सिंह गुर्जर, महेंद्र राय, सुहेल आबिद तथा राजेंद्र प्रसाद घिल्डियाल ने मुख्य रूप से संबोधित किया।

13 मई को राजधानी लखनऊ में शक्ति भवन पर अपराह्न 02 बजे विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।

शैलेन्द्र दुबे
संयोजक
94150 06225
*भोगनीपुर लैंड स्कैम ने निजी कंपनियों का असली चरित्र उजागर किया : बिजली कर्मियों ने काली पट्टी बांधकर जताया विरोध :पूर्वांचल व दक्षिणांचल डिस्कॉ


भोगनीपुर में सामने आए लगभग 400 करोड़ रुपये के भूमि घोटाले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि निजी कंपनियों को सार्वजनिक संसाधनों और जनहित से जुड़े क्षेत्रों का नियंत्रण सौंपना कितना खतरनाक हो सकता है। सरकारी जमीन के दुरुपयोग, नियमों की खुलेआम अनदेखी, बैंक अधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों की कथित मिलीभगत तथा चीटिंग, फर्जीवाड़ा और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर आरोप निजीकरण मॉडल की वास्तविकता को उजागर करते हैं।

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि जब निजी कंपनियां सरकारी जमीन और सार्वजनिक संसाधनों के साथ इस प्रकार की अनियमितताओं में लिप्त पाई जा रही हैं, तब प्रदेश के बिजली क्षेत्र को निजी हाथों में सौंपना जनता, किसानों और कर्मचारियों — तीनों के हितों के खिलाफ होगा।

संघर्ष समिति ने मांग की है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का प्रस्ताव तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए। साथ ही पनकी तथा जवाहरपुर ताप बिजलीघरों के परिचालन एवं अनुरक्षण का कार्य 25 वर्षों के लिए निजी कंपनियों को देने का निर्णय भी सिरे से खारिज किया जाए।

संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली व्यवस्था कोई व्यावसायिक उत्पाद नहीं बल्कि जनता को दी जाने वाली मूलभूत सार्वजनिक सेवा है। निजी कंपनियों का मुख्य उद्देश्य अधिकतम लाभ कमाना होता है, जबकि सरकारी बिजली संस्थानों का उद्देश्य प्रदेश की जनता को सुरक्षित, सस्ती और निर्बाध विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराना है।

आज प्रदेश के सभी ऊर्जा निगमों, बिजलीघरों और परियोजनाओं में बिजली कर्मचारियों, संविदा कर्मियों, जूनियर इंजीनियरों तथा अभियंताओं ने पूरे दिन काली पट्टी बांधकर कार्य किया तथा कार्यालय समय के उपरांत व्यापक विरोध प्रदर्शन आयोजित किए। विरोध कार्यक्रमों में पनकी और जवाहरपुर ताप बिजली घरों के निजीकरण, आउटसोर्सिंग और संविदा कर्मियों की छंटनी के खिलाफ जोरदार आवाज उठाई गई।
संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने कहा कि भोगनीपुर लैंड स्कैम में जिस प्रकार हिमावत पावर कंपनी एवं लैंको अनपरा पावर कंपनी पर चीटिंग, फर्जीवाड़ा और क्रिमिनल कांस्पिरेसी के आरोप सामने आए हैं, उससे यह स्पष्ट हो गया है कि उत्तर प्रदेश के पावर सेक्टर में निजी क्षेत्र का असली चरित्र क्या है और उनका वास्तविक उद्देश्य केवल निजी लाभ अर्जित करना है।

उन्होंने निजी कंपनियों, बैंक अधिकारियों तथा संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई प्रारंभ किए जाने के निर्णय का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री से अपील की कि निजी कंपनियों के इस चरित्र के उजागर होने के बाद उत्तर प्रदेश के बिजली क्षेत्र में निजीकरण संबंधी किसी भी प्रस्ताव को आगे न बढ़ाया जाए।

संघर्ष समिति ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि वह निजीकरण की नीति पर पुनर्विचार करे, सरकारी बिजली संस्थानों को मजबूत बनाए, रिक्त पदों पर नियमित भर्ती करे तथा सार्वजनिक क्षेत्र की जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठाए।

निजीकरण और उत्पीड़न के विरोध में चल रहे जनजागरण अभियान के अंतर्गत आज संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने सीतापुर और हरदोई में विरोध सभा की । विरोध सभा को संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारी मुख्यतया जितेन्द्र सिंह गुर्जर और महेन्द्र राय ने संबोधित किया।
     उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां के विरोध में 14 मई को लखनऊ में मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के मुख्यालय पर अपराह्न 2:00 बजे  से शाम 5:00 बजे तक विरोध सभा होगी।

शैलेन्द्र दुबे
संयोजक
9425006225
*भोगनीपुर लैंड स्कैम ने निजी कंपनियों का असली चरित्र उजागर किया : बिजली कर्मियों ने काली पट्टी बांधकर जताया विरोध :पूर्वांचल व दक्षिणांचल डिस्कॉ


भोगनीपुर में सामने आए लगभग 400 करोड़ रुपये के भूमि घोटाले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि निजी कंपनियों को सार्वजनिक संसाधनों और जनहित से जुड़े क्षेत्रों का नियंत्रण सौंपना कितना खतरनाक हो सकता है। सरकारी जमीन के दुरुपयोग, नियमों की खुलेआम अनदेखी, बैंक अधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों की कथित मिलीभगत तथा चीटिंग, फर्जीवाड़ा और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर आरोप निजीकरण मॉडल की वास्तविकता को उजागर करते हैं।

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि जब निजी कंपनियां सरकारी जमीन और सार्वजनिक संसाधनों के साथ इस प्रकार की अनियमितताओं में लिप्त पाई जा रही हैं, तब प्रदेश के बिजली क्षेत्र को निजी हाथों में सौंपना जनता, किसानों और कर्मचारियों — तीनों के हितों के खिलाफ होगा।

संघर्ष समिति ने मांग की है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का प्रस्ताव तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए। साथ ही पनकी तथा जवाहरपुर ताप बिजलीघरों के परिचालन एवं अनुरक्षण का कार्य 25 वर्षों के लिए निजी कंपनियों को देने का निर्णय भी सिरे से खारिज किया जाए।

संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली व्यवस्था कोई व्यावसायिक उत्पाद नहीं बल्कि जनता को दी जाने वाली मूलभूत सार्वजनिक सेवा है। निजी कंपनियों का मुख्य उद्देश्य अधिकतम लाभ कमाना होता है, जबकि सरकारी बिजली संस्थानों का उद्देश्य प्रदेश की जनता को सुरक्षित, सस्ती और निर्बाध विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराना है।

आज प्रदेश के सभी ऊर्जा निगमों, बिजलीघरों और परियोजनाओं में बिजली कर्मचारियों, संविदा कर्मियों, जूनियर इंजीनियरों तथा अभियंताओं ने पूरे दिन काली पट्टी बांधकर कार्य किया तथा कार्यालय समय के उपरांत व्यापक विरोध प्रदर्शन आयोजित किए। विरोध कार्यक्रमों में पनकी और जवाहरपुर ताप बिजली घरों के निजीकरण, आउटसोर्सिंग और संविदा कर्मियों की छंटनी के खिलाफ जोरदार आवाज उठाई गई।
संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने कहा कि भोगनीपुर लैंड स्कैम में जिस प्रकार हिमावत पावर कंपनी एवं लैंको अनपरा पावर कंपनी पर चीटिंग, फर्जीवाड़ा और क्रिमिनल कांस्पिरेसी के आरोप सामने आए हैं, उससे यह स्पष्ट हो गया है कि उत्तर प्रदेश के पावर सेक्टर में निजी क्षेत्र का असली चरित्र क्या है और उनका वास्तविक उद्देश्य केवल निजी लाभ अर्जित करना है।

उन्होंने निजी कंपनियों, बैंक अधिकारियों तथा संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई प्रारंभ किए जाने के निर्णय का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री से अपील की कि निजी कंपनियों के इस चरित्र के उजागर होने के बाद उत्तर प्रदेश के बिजली क्षेत्र में निजीकरण संबंधी किसी भी प्रस्ताव को आगे न बढ़ाया जाए।

संघर्ष समिति ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि वह निजीकरण की नीति पर पुनर्विचार करे, सरकारी बिजली संस्थानों को मजबूत बनाए, रिक्त पदों पर नियमित भर्ती करे तथा सार्वजनिक क्षेत्र की जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठाए।

निजीकरण और उत्पीड़न के विरोध में चल रहे जनजागरण अभियान के अंतर्गत आज संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने सीतापुर और हरदोई में विरोध सभा की । विरोध सभा को संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारी मुख्यतया जितेन्द्र सिंह गुर्जर और महेन्द्र राय ने संबोधित किया।
     उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां के विरोध में 14 मई को लखनऊ में मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के मुख्यालय पर अपराह्न 2:00 बजे  से शाम 5:00 बजे तक विरोध सभा होगी।

शैलेन्द्र दुबे
संयोजक
9425006225
*आईआईटी मद्रास बीएस डिग्री प्रोग्राम के आगामी बैच के लिए प्रवेश प्रारंभ, 31 मई आवेदन करने की अंतिम तिथि*

* आईआईटी मद्रास की उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा अधिक से अधिक और विभिन्न पृष्ठभूमियों के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए सुलभ बनाने का यह प्रोग्राम कक्षा 12 की पढ़ाई पूरी कर चुके सभी उम्मीदवारों के लिए है और इसमें आयु की कोई सीमा नहीं है

*लखनऊ, मई, 2026:* भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (आईआईटी मद्रास) के बीएस डिग्री प्रोग्राम ने शैक्षणिक सत्र-2026 के लिए प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ कर दिया है। इसके लिए आवेदन की अंतिम तिथि 31 मई, 2026 है। आईआईटी की उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा अधिक से अधिक और विभिन्न पृष्ठभूमि के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए सुलभ बनाने का यह प्रोग्राम कक्षा 12 की पढ़ाई पूरी कर चुके सभी उम्मीदवारों के लिए है और इसमें आयु की कोई सीमा नहीं है।
बीएस इन डेटा साइंस एंड एप्लिकेशंस, बीएस इन इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम्स, बीएस इन मैनेजमेंट एंड डेटा साइंस और बीएस इन एरोनॉटिक्स एंड स्पेस टेक्नोलॉजी नाम से चार अलग-अलग प्रोग्राम उपलब्ध हैं। इनकी संरचना इस तरह की गई है कि विद्यार्थी स्वतंत्र डिग्री के रूप में या किसी नियमित कॉलेज डिग्री के साथ भी इस प्रोग्राम का लाभ उठाएँ।
इन प्रोग्राम्स में पढ़ाई मुख्य रूप से ऑनलाइन होती है, जबकि शैक्षणिक गुणवत्ता बनाए रखने और विद्यार्थियों की सुविधा के लिए पूरे भारत में मौजूद परीक्षा केंद्रों पर व्यक्तिगत उपस्थिति में परीक्षाएँ आयोजित होती हैं। विद्यार्थी अपनी गति से पढ़ाई कर सकते हैं तथा उन्हें सर्टिफिकेट, डिप्लोमा या डिग्री समेत कई एग्जिट ऑप्शन दिए जाते हैं, ताकि वे शिक्षा और करियर के अपने लक्ष्यों के अनुसार इस सुविधा का लाभ उठाएँ।
आवेदन करने के इच्छुक विद्यार्थी और उनके अभिभावक अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक पोर्टल विजिट कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 31 मई, 2026 की नजदीक आ गई है। इसलिए इच्छुक विद्यार्थी https://study.iitm.ac.in  के माध्यम से आवेदन कर दें।
इन प्रोग्राम्स के बारे में प्रो. प्रताप हरिदोस, डीन (अकादमिक कोर्स), आईआईटी मद्रास ने कहा, “ये बीएस डिग्री प्रोग्राम शिक्षा की गुणवत्ता कायम रखते हुए विद्यार्थियों को अपनी सुविधा से पढ़ाई करने का अवसर देते हैं। हम यह देख रहे हैं कि विद्यार्थियों को डेटा, प्रौद्योगिकी और अंतःविषयी सोच का मजबूत आधार देने की जरूरत बढ़ रही है चाहे वे मुख्य रूप से जिस डिग्री के लिए पढ़ाई कर रहे हों। इस प्रोग्राम के माध्यम से विद्यार्थी अन्य शैक्षणिक या प्रोफेशनल कोर्स के साथ-साथ आईआईटी मद्रास की उच्च स्तरीय शिक्षा प्राप्त कर अच्छे करियर के अवसर बढ़ा सकते हैं।” ‘भविष्य के लिए तैयार कौशल’
आईआईटी मद्रास चाहता है कि विद्यार्थी भविष्य के लिए तैयार कौशल का विकास करें। यह इसलिए जरूरी है, क्योंकि करियर के अवसर तेजी से बदल रहे हैं और उम्मीदवारों से उद्योगों की अपेक्षाएँ बढ़ रही हैं। इसके मद्देनजर इस शिक्षा मॉडल में सब की सुविधा का ध्यान रखा गया है। यह भौगोलिक सीमाओं, पारंपरिक प्रवेश प्रक्रियाओं और कठोर शिक्षण संरचनाओं जैसी बाधाओं को दूर करता है।
बीएस डिग्री प्रोग्राम में प्रवेश के लिए आम इंजीनियरिंग प्रोग्राम की तरह संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई) उत्तीर्ण करना आवश्यक नहीं है। विद्यार्थी एक क्वालिफायर प्रक्रिया के माध्यम से प्रवेश प्राप्त कर सकते हैं। इस तरह आईआईटी मद्रास की शिक्षा पूरे देश के अधिक से अधिक विद्यार्थियों के लिए सुलभ हो गई है।
बीएस डिग्री प्रोग्राम्स की सबसे बड़ी खूबी इनका अन्य अंडरग्रैजुएट कोर्सेस के साथ तालमेल होना है। बीकॉम, बीएससी, बीबीए या इंजीनियरिंग डिग्री के विद्यार्थी इसके साथ-साथ आईआईटी मद्रास के बीएस प्रोग्राम में नामांकन कर सकते हैं। ये उन्हें मुख्य शिक्षा कोर्स करने के साथ-साथ विश्लेषण, प्रौद्योगिकी और निर्णय लेने की क्षमताएं बढ़ाने में सक्षम बनाते हैं।
आज के रोजगार परिदृश्य में डुअल-डिग्री का यह लचीलापन बहुत महत्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि आम तौर पर संगठन ऐसे ग्रैजुएट चाहते हैं, जो क्षेत्रीय विशेषज्ञता को डेटा के अनुसार काम करने की विशेषज्ञता से जोड़ने में सक्षम हों। साथ ही, उम्मीदवारों से यह अपेक्षा रखते हैं कि उनके पास विभिन्न विषयों को परस्पर जोड़ कर समस्या-समाधान करने का कौशल हो।
आईआईटी मद्रास के बीएस डिग्री प्रोग्राम्स में पूरे भारत के लाखों विद्यार्थी नामांकित हैं। इस तरह जन-जन तक आईआईटी मद्रास की विश्वस्तरीय शिक्षा पहुँचाने का सपना पूरा हो रहा  है। संस्थान सब के विकास पर जोर देते हुए कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि के योग्य उम्मीदवारों को 75 प्रतिशत तक शुल्क सहायता भी प्रदान करता है। यह सुनिश्चित करता है कि अर्थाभाव किसी की पढ़ाई में बाधक नहीं हो।
इन प्रोग्राम्स के करिकुलम उद्योग और शिक्षा जगत के विशेषज्ञों के परामर्श से तैयार किए गए हैं। इनमें व्यावहारिक शिक्षा, वास्तविक जन-जीवन के उपयोगों और नवोदित प्रौद्योगिकियों पर जोर दिया गया है। विद्यार्थियों को अच्छे करियर के उभरते अवसरों के लिए तैयार करने के लिए डेटा विश्लेषण, व्यावसायिक निर्णय, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और एयरोस्पेस प्रौद्योगिकियों जैसे जरूरी शिक्षा क्षेत्रों का अनुभव मिलता है।
*आईआईटी मद्रास बीएस डिग्री प्रोग्राम के आगामी बैच के लिए प्रवेश प्रारंभ, 31 मई आवेदन करने की अंतिम तिथि*

* आईआईटी मद्रास की उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा अधिक से अधिक और विभिन्न पृष्ठभूमियों के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए सुलभ बनाने का यह प्रोग्राम कक्षा 12 की पढ़ाई पूरी कर चुके सभी उम्मीदवारों के लिए है और इसमें आयु की कोई सीमा नहीं है

*लखनऊ, मई, 2026:* भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (आईआईटी मद्रास) के बीएस डिग्री प्रोग्राम ने शैक्षणिक सत्र-2026 के लिए प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ कर दिया है। इसके लिए आवेदन की अंतिम तिथि 31 मई, 2026 है। आईआईटी की उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा अधिक से अधिक और विभिन्न पृष्ठभूमि के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए सुलभ बनाने का यह प्रोग्राम कक्षा 12 की पढ़ाई पूरी कर चुके सभी उम्मीदवारों के लिए है और इसमें आयु की कोई सीमा नहीं है।
बीएस इन डेटा साइंस एंड एप्लिकेशंस, बीएस इन इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम्स, बीएस इन मैनेजमेंट एंड डेटा साइंस और बीएस इन एरोनॉटिक्स एंड स्पेस टेक्नोलॉजी नाम से चार अलग-अलग प्रोग्राम उपलब्ध हैं। इनकी संरचना इस तरह की गई है कि विद्यार्थी स्वतंत्र डिग्री के रूप में या किसी नियमित कॉलेज डिग्री के साथ भी इस प्रोग्राम का लाभ उठाएँ।
इन प्रोग्राम्स में पढ़ाई मुख्य रूप से ऑनलाइन होती है, जबकि शैक्षणिक गुणवत्ता बनाए रखने और विद्यार्थियों की सुविधा के लिए पूरे भारत में मौजूद परीक्षा केंद्रों पर व्यक्तिगत उपस्थिति में परीक्षाएँ आयोजित होती हैं। विद्यार्थी अपनी गति से पढ़ाई कर सकते हैं तथा उन्हें सर्टिफिकेट, डिप्लोमा या डिग्री समेत कई एग्जिट ऑप्शन दिए जाते हैं, ताकि वे शिक्षा और करियर के अपने लक्ष्यों के अनुसार इस सुविधा का लाभ उठाएँ।
आवेदन करने के इच्छुक विद्यार्थी और उनके अभिभावक अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक पोर्टल विजिट कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 31 मई, 2026 की नजदीक आ गई है। इसलिए इच्छुक विद्यार्थी https://study.iitm.ac.in  के माध्यम से आवेदन कर दें।
इन प्रोग्राम्स के बारे में प्रो. प्रताप हरिदोस, डीन (अकादमिक कोर्स), आईआईटी मद्रास ने कहा, “ये बीएस डिग्री प्रोग्राम शिक्षा की गुणवत्ता कायम रखते हुए विद्यार्थियों को अपनी सुविधा से पढ़ाई करने का अवसर देते हैं। हम यह देख रहे हैं कि विद्यार्थियों को डेटा, प्रौद्योगिकी और अंतःविषयी सोच का मजबूत आधार देने की जरूरत बढ़ रही है चाहे वे मुख्य रूप से जिस डिग्री के लिए पढ़ाई कर रहे हों। इस प्रोग्राम के माध्यम से विद्यार्थी अन्य शैक्षणिक या प्रोफेशनल कोर्स के साथ-साथ आईआईटी मद्रास की उच्च स्तरीय शिक्षा प्राप्त कर अच्छे करियर के अवसर बढ़ा सकते हैं।” ‘भविष्य के लिए तैयार कौशल’
आईआईटी मद्रास चाहता है कि विद्यार्थी भविष्य के लिए तैयार कौशल का विकास करें। यह इसलिए जरूरी है, क्योंकि करियर के अवसर तेजी से बदल रहे हैं और उम्मीदवारों से उद्योगों की अपेक्षाएँ बढ़ रही हैं। इसके मद्देनजर इस शिक्षा मॉडल में सब की सुविधा का ध्यान रखा गया है। यह भौगोलिक सीमाओं, पारंपरिक प्रवेश प्रक्रियाओं और कठोर शिक्षण संरचनाओं जैसी बाधाओं को दूर करता है।
बीएस डिग्री प्रोग्राम में प्रवेश के लिए आम इंजीनियरिंग प्रोग्राम की तरह संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई) उत्तीर्ण करना आवश्यक नहीं है। विद्यार्थी एक क्वालिफायर प्रक्रिया के माध्यम से प्रवेश प्राप्त कर सकते हैं। इस तरह आईआईटी मद्रास की शिक्षा पूरे देश के अधिक से अधिक विद्यार्थियों के लिए सुलभ हो गई है।
बीएस डिग्री प्रोग्राम्स की सबसे बड़ी खूबी इनका अन्य अंडरग्रैजुएट कोर्सेस के साथ तालमेल होना है। बीकॉम, बीएससी, बीबीए या इंजीनियरिंग डिग्री के विद्यार्थी इसके साथ-साथ आईआईटी मद्रास के बीएस प्रोग्राम में नामांकन कर सकते हैं। ये उन्हें मुख्य शिक्षा कोर्स करने के साथ-साथ विश्लेषण, प्रौद्योगिकी और निर्णय लेने की क्षमताएं बढ़ाने में सक्षम बनाते हैं।
आज के रोजगार परिदृश्य में डुअल-डिग्री का यह लचीलापन बहुत महत्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि आम तौर पर संगठन ऐसे ग्रैजुएट चाहते हैं, जो क्षेत्रीय विशेषज्ञता को डेटा के अनुसार काम करने की विशेषज्ञता से जोड़ने में सक्षम हों। साथ ही, उम्मीदवारों से यह अपेक्षा रखते हैं कि उनके पास विभिन्न विषयों को परस्पर जोड़ कर समस्या-समाधान करने का कौशल हो।
आईआईटी मद्रास के बीएस डिग्री प्रोग्राम्स में पूरे भारत के लाखों विद्यार्थी नामांकित हैं। इस तरह जन-जन तक आईआईटी मद्रास की विश्वस्तरीय शिक्षा पहुँचाने का सपना पूरा हो रहा  है। संस्थान सब के विकास पर जोर देते हुए कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि के योग्य उम्मीदवारों को 75 प्रतिशत तक शुल्क सहायता भी प्रदान करता है। यह सुनिश्चित करता है कि अर्थाभाव किसी की पढ़ाई में बाधक नहीं हो।
इन प्रोग्राम्स के करिकुलम उद्योग और शिक्षा जगत के विशेषज्ञों के परामर्श से तैयार किए गए हैं। इनमें व्यावहारिक शिक्षा, वास्तविक जन-जीवन के उपयोगों और नवोदित प्रौद्योगिकियों पर जोर दिया गया है। विद्यार्थियों को अच्छे करियर के उभरते अवसरों के लिए तैयार करने के लिए डेटा विश्लेषण, व्यावसायिक निर्णय, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और एयरोस्पेस प्रौद्योगिकियों जैसे जरूरी शिक्षा क्षेत्रों का अनुभव मिलता है।