असम की जनता को हेमंत सोरेन का 'जोहार': बिना गठबंधन के झामुमो ने दिखाया दम!
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन झामुमो के असम में शानदार प्रदर्शन से गदगद हैं. उन्होंने चुनाव परिणाम के बाद वहां की जनता के प्रति आभार व्यक्त करते हुए अपने संघर्ष को और तेज करने का संकल्प लिया है. पार्टी ने बेहद सीमित समय और संसाधनों के बावजूद राज्य की 16 महत्वपूर्ण सीटों पर चुनाव लड़कर अपनी राजनीतिक पकड़ का अहसास कराया. झारखड के सीएम का कहना है कि बिना किसी बड़े गठबंधन के पहली ही कोशिश में 2 सीटों पर दूसरे स्थान पर रहना और 7 सीटों पर 15 हजार से अधिक मत प्राप्त करना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि पार्टी की विचारधारा ने जनता के बीच पैठ बनानी शुरू कर दी है.
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अस्तित्व और अधिकारों की लड़ाई
हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया के जरिये पोस्ट कर झामुमो के चुनाव लड़ने की वजह को भी बता दिया है. उन्होंने कहा कि JMM का फैसला केवल राजनीतिक विस्तार तक सीमित नहीं था, बल्कि पार्टी का मुख्य उद्देश्य वहां के आदिवासी, दलित और अल्पसंख्यक समाज की दयनीय स्थिति को राष्ट्रीय स्तर पर उठाना था. JMM ने आदिवासियों को ST का दर्जा न मिलना, चाय बागान मजदूरों को उचित मजदूरी का अभाव और जमीन के अधिकारों से वंचित रहने जैसे गंभीर मुद्दों को अपने संघर्ष की नींव बनाया है. झारखंड के मुख्यमंत्री का मानना है कि आने वाले समय में संगठन और भी मजबूत होकर उभरेगा.
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जनता का मिला अभूतपूर्व सहयोग
झामुमो के केंद्रीय अध्यक्ष और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने असम की जनता को ‘जोहार’ कहते हुए उनके विश्वास और सक्रिय भागीदारी के लिए हृदय से आभार प्रकट किया है. सीएम ने कहा कि इस संघर्ष में जिस तरह से लोगों ने साथ दिया, वह अत्यंत हौसला बढ़ाने वाला और नई ऊर्जा का स्रोत है. यह परिणाम स्पष्ट करते हैं कि आदिवासी समाज के मुद्दों को अब और अधिक मजबूती के साथ उठाया जाना आवश्यक है.
निरंतर जारी रहेगा संघर्ष
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि यह केवल एक चुनावी प्रयास नहीं था, बल्कि यह अस्तित्व और अधिकारों की एक लंबी लड़ाई है, पार्टी ने प्रतिबद्धता दोहराई है कि आदिवासियों के सम्मान और पहचान के लिए उनका संघर्ष निरंतर जारी रहेगा. असम के चुनावी परिणाम बताते हैं कि भविष्य में JMM वहां एक निर्णायक राजनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित होने की दिशा में अग्रसर है.










1 hour and 30 min ago
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