आदर्श शिक्षिका अंजू की विदाई समारोह में पहुंचे महाराष्ट्र शिक्षण संचालक डॉ महेश पालकर
मुंबई। शिक्षक हमारे जीवन के आधारस्तंभ और राष्ट्र निर्माता होते हैं, जो न केवल किताबी ज्ञान देते हैं, बल्कि सही-गलत का भेद सिखाकर व्यक्तित्व को आकार देते हैं। वे मार्गदर्शन, प्रेरणा और नैतिक मूल्य प्रदान कर विद्यार्थियों को एक जिम्मेदार नागरिक बनाते हैं और जीवन भर सीखने की नींव रखते हैं। मुंबई पब्लिक स्कूल, सांताक्रूज़ पूर्व के हिंदी माध्यम की आदर्श शिक्षिका अंजू मैडम तथा मनीषा कांबले के संयुक्त सेवा सम्पूर्ति सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए महाराष्ट्र राज्य के शिक्षण संचालक डॉ महेश पालकर ने उपरोक्त बातें कही। उन्होंने कहा कि अंजू मैडम ने समर्पित भावना के साथ बच्चों को सुशिक्षित करने का काम किया। उन्होंने अपने पूरे परिवार की तरफ से भी शुभकामनाएं दी। समारोह की अध्यक्षता पूर्व उप शिक्षणाशिकारी अशोक मिश्रा ने किया। इस अवसर पर सम्मानित  अतिथियों के रूप में उपस्थित पूर्व प्रशासकीय अधिकारी रेशमा जेधिया, पूर्व प्रशासकीय अधिकारी राजकुमारी गिरी, कनिष्ठ पर्यवेक्षक सुरेश भोसले, शिक्षा निरीक्षक अशोक जैसवार, शिक्षा निरीक्षक सुनीता बालशंकर, गौतम विद्यालय के ट्रस्टी आशीष गौतम, प्रसिद्ध गीतकार सुशील शुक्ला, महापौर पुरस्कृत शिक्षक सरिता सिंह, अंजू की बहन प्रधानाध्यापिका नीता दुबे, गौतम विद्यालय की ट्रस्टी शिल्पा गौतम, सविता म्हात्रे,लिटिल जीनियस हाई स्कूल के प्रिंसिपल राजेश मिश्रा, पूर्व प्रधानाध्यापक श्रीप्रकाश त्रिगुणायत, पत्रकार राजेश उपाध्याय, मनीषा कांबले की बेटी रितुका ने भी अपनी बातें रखी। मंच पर उपस्थित अंजू की मां का मुख्य अतिथि के हाथों सम्मान किया गया। मंच पर उपस्थित मनीषा कांबले के पति दीपक कांबले का भी सम्मान किया गया। विद्यालय की संगीत शिक्षिका अरुणा चौधरी ने बच्चों के माध्यम से सरस्वती वंदना और स्वागत गीत की आकर्षक प्रस्तुति की। बृजेश यादव ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार शिवपूजन पांडे ने किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में शाला परिवार के बृजेश यादव, ऋतुजा कसबे, शारदा कांदलगांवकर, दीपिका सोरेटे, रजनी सैनी, गुड़िया यादव, राजकुमार सिंह आदि का सराहनीय योगदान रहा। इस अवसर पर उपस्थित प्रमुख लोगों में उत्तर शक्ति के संपादक ओमप्रकाश प्रजापति, वरिष्ठ पत्रकार चंद्रमणि उपाध्याय, डॉ सौम्य रंजन पांडे, युवा समाजसेवी केशव झा, वरिष्ठ लिपिक दारा सिंह, विट्ठल साखरे, दिनेशचंद्र शर्मा, प्रीति दिघे, दो हितेंद्र त्रिपाठी, लता जैन, प्रबजीत कौर ऊषा तिवारी, सुनीता चौरसिया, पूजा त्रिपाठी, राजेश कुमार सिंह, आनंद मिश्रा, विवेक राय, अखिलेश पटेल, अमोल कानपुरे, इमारत प्रमुख अजमल शाह, मनोज गणवीर, विद्या पाटिल, अश्लेषा पवार, रेखा जोशी ज्ञानदेव जाधव आदि का समावेश रहा। अंत में कार्यक्रम के संयोजक तथा विद्यालय के प्रधानाध्यापक डॉ. नागेश पांडे ने समस्त लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।
जवाहरलाल पांडे अपना पूर्वांचल महासंघ के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त
मुंबई। अपना पूर्वांचल महासंघ (पंजीकृत) द्वारा एक गरिमामय समारोह में जवाहर लाल पांडेय (पूर्व जीएसटी कमिश्नर) को महाराष्ट्र प्रदेश के अध्यक्ष पद पर मनोनीत किया गया। यह नियुक्ति राष्ट्रीय अध्यक्ष अधिवक्ता अशोक दुबे के आदेशानुसार की गई।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय महासचिव फूलचंद दीक्षित, राष्ट्रीय समन्वयक डॉ.अम्बरीष दुबे, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष लक्ष्मीनारायण पांडेय तथा राष्ट्रीय सचिव अरविंद मिश्रा की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस अवसर पर श्री पांडेय को प्रमाणपत्र, शॉल, महासंघ की डायरी एवं पेन भेंट कर सम्मानित किया गया।
यह कार्यक्रम मुंबई के वर्धमान चैंबर्स, फोर्ट में आयोजित हुआ, जिसमें समाज के विभिन्न गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही।अपने संबोधन में वक्ताओं ने कहा कि अपना पूर्वांचल महासंघ का मुख्य उद्देश्य पूर्वांचल के समग्र विकास, सामाजिक एकता, शिक्षा, रोजगार एवं सांस्कृतिक उन्नति के लिए निरंतर कार्य करना है। संगठन आने वाले समय में महाराष्ट्र सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों में पूर्वांचल समाज के हितों की रक्षा और विकास हेतु सक्रिय भूमिका निभाएगा।
एक लाश चल रही, एक लाश कंधे पर लेकर

–डॉ रमाकांत क्षितिज, वरिष्ठ साहित्यकार

कभी पढ़ी थी कविता
इलाहबाद के पथ पर
तोड़ती पत्थर
इस बार देखा
जो पथ अब बन गई नई सड़क
उस पर
एक लाश चल रही
एक लाश कंधे पर लेकर
दोनों में फ़र्क करना बड़ा मुश्किल था
कौन चलती फिरती लाश
कौन सिर्फ और सिर्फ लाश
ज़्यादा फ़र्क भी ना था
ना काया में
ना कपड़ों में
एक मर गई थी
एक जीते जी मर रही थी
हमनें भी देखा सड़क पर
एक लाश चल रही थी
एक लाश कंधे पर लेकर
एक लाश को कोई जानकारी नही
उसे कौन कहाँ ले जा रहा
एक जीवित लाश को भी नही पता
सिस्टम कहाँ से कहाँ जा रहा
तरक्की क्या होती है
जीडीपी क्या होती है
प्रति व्यक्ति आय क्या होती है
डेथ का भी सर्टिफिकेट होता है
कहाँ बनता है
कैसे बनता है
उसे तो बस पता है भूख
बेबसी लाचारी
स्वयं को जीवित रखने की ज़िम्मेदारी
उसकी तरक्की तो
भूख तक का ही सफर तय कर पाई है
उसके लिए इंसानी सभ्यता का मतलब
कागज़ पत्र का मतलब
कुछ भी तो नही पता
उसे किसी ने बताया नही
सिखाया नही
उसे यह भी तो नहीं पता
पूछना है सीखना है
उसे तो बस पता है
किसी तरह जीना है
जीवित लाश बनकर।
परिवहन समिति के सभापति के रूप में एड. राजकुमार मिश्रा ने ग्रहण किया पदभार
मुंबई। उत्तर भारतीय समाज का युवा और बौद्धिक चेहरा कहे जाने वाले एडवोकेट राजकुमार मिश्रा को मीरा भाईंदर महानगरपालिका में परिवहन समिती के सभी सदस्यों द्वारा सर्वसम्मति से सभापति बनाये जाने के बाद आज उन्होंने पीठासीन प्राधिकारी कोंकण आयुक्त मुंबई उपनगर जिलाधिकारी सौरभ कटियार, महानगरपालिका सचिव दिनेश कानगुडे और स्थायी समिति सभापति हंसमुख गहलोत की उपस्थिति में पदभार ग्रहण किया। उनके पदभार ग्रहण करने पर मीरा भायंदर के साथ-साथ मुंबई , ठाणे, नालासोपारा, वसई, विरार, कल्याण में रहने वाले प्रबुद्ध उत्तर भारतीयों ने खुशी जाहिर करते हुए उन्हें बधाई दी है।
महाराष्ट्र दिवस पर उत्तर भारतीय संघ का परोपकार, 100 महिलाओं को सिलाई मशीन का उपहार
मुंबई। उत्तर भारतीय समाज के संगठन, विकास और सम्मान के प्रति समर्पित सबसे बड़ी और सबसे पुरानी संस्था उत्तर भारतीय संघ ने विगत वर्षों की तरह इस वर्ष भी महाराष्ट्र दिवस (1 मई) के गौरवपूर्ण अवसर पर बांद्रा पूर्व स्थित उत्तर भारतीय संघ भवन में नारी शक्ति सम्मान समारोह करने जा रहा है। संस्था के अध्यक्ष संतोष आरएन सिंह ने बताया कि 100 जरूरतमंद महिलाओं को सिलाई मशीन का उपहार देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र हमारी कर्मभूमि है। महाराष्ट्र की मिट्टी ने हम सबको बहुत कुछ दिया है। हमें यहां से उतना ही प्यार है, जितना प्यार हम अपनी जन्मभूमि से करते हैं। यही कारण है कि उत्तर भारतीय संघ विगत कई वर्षों से पूरे उत्साह और हर्ष के साथ महाराष्ट्र दिवस का भव्य आयोजन करता आ रहा है। दोपहर 12 बजे से आयोजित इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र दिवस से जुड़े गीतों की भी शानदार प्रस्तुति की जाएगी।
भारतीय जनभाषा प्रचार समिति की मासिक काव्यगोष्ठी संपन्न
ठाणे । साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था भारतीय जनभाषा प्रचार समिति ठाणे के तत्वावधान में रविवार 26 अप्रैल 2026 को मुन्ना विष्ट कार्यालय सिडको ठाणे में मासिक काव्यगोष्ठी का आयोजन किया गया।जिसकी अध्यक्षता गज़लकार ताज़ मोहम्मद सिद्दीकी ने किया तथा मुख्य अतिथि के रूप में आनंद पाण्डेय केवल एवं ओमप्रकाश सिंह उपस्थित थे।गोष्ठी का आयोजन एवं खूबसूरत संचालन चेयरमैन रामप्यारे सिंह रघुवंशी ने किया तथा संयोजन संस्थाध्यक्ष विनय सिंह विनम्र ने किया।सरस्वती वंदना के उपरांत गोष्ठी का शुभारंभ हुआ।संस्था मिडिया सचिव विनय शर्मा दीप ने बताया कि उपस्थित साहित्यकारों में वरिष्ठ साहित्यकार तिलकराज खुराना, नंदलाल क्षितिज,नरसिंह हैरान जौनपुरी,त्रिलोचन सिंह अरोरा, शिक्षाविद् अवनीश कुमार दीक्षित 'दिव्य' , रामस्वरूप साहू,राकेशमणि त्रिपाठी, डॉ वफा वारसी, हीरालाल यादव, कल्पेश यादव, संजय द्विवेदी, ताबिश रामपुरी,अजय कुमार सिंह,एडवोकेट अनिल शर्मा, शिवशंकर मिश्र एवं सुशिल कुमार सिंह मुख्य रूप से रहे। गोष्ठी में संस्था द्वारा दिवंगत साहित्यकार सुभाष चतुर्वेदी एवं देश की मशहूर पार्श्व गायिका आशा भोंसले की आत्मा के शांति हेतु दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित किया गया।अंत में संस्था उप चेयरमैन नंदलाल क्षितिज ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए राष्ट्रगान के साथ गोष्ठी का समापन किया।
वाग्धारा’ की राष्ट्रीय संगोष्ठी में गूंजा विश्व शांति और मानवता का पैगाम
मुंबई। वैश्विक परिदृश्य में युद्ध की आशंकाओं से घिरे समय में मुंबई के बुद्धिजीवियों ने एक स्वर में शांति, संवाद और सह-अस्तित्व का संदेश दिया। ‘वाग्धारा’ द्वारा आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी “युद्ध नहीं, बुद्ध” में वैचारिक चर्चा के साथ मानवता के पक्ष में सशक्त आवाज भी उठी।
फिल्मकार-साहित्यकार डाॅ वागीश सारस्वत के संयोजन में हुई इस सामयिक संगोष्ठी में वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि युद्ध केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि मन और विचारों में भी लड़ा जाता है और उसी स्तर पर शांति की शुरुआत भी संभव है। भारत की संतुलित और दूरदर्शी कूटनीति, विशेषकर ईरान और इज़रायल जैसे संवेदनशील मुद्दों पर, विशेष चर्चा में रही। वर्तमान भारतीय कूटनीति को वैश्विक अस्थिरता के बीच विवेकपूर्ण और जिम्मेदार रुख बताया गया।
मुख्य अतिथि फिल्मकार रूमी जाफरी ने जीवन को एक सतत संघर्ष बताते हुए कहा कि “सबसे बड़ा युद्ध इंसान का अपने भीतर होता है।” संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे आध्यात्मिक प्रवक्ता वीरेंद्र याग्निक ने कहा कि जीवन का प्रत्येक क्षण आत्मसंघर्ष और आत्मविजय की प्रक्रिया है। जीवन का हर दिन युद्ध है। नौसेना के सेवानिवृत्त कमांडर भूषण दीवान ने अपने सैन्य अनुभव साझा करते हुए कहा कि स्पष्टता और दृढ़ता किसी भी संघर्ष में विजय के मूल तत्व हैं। मुंबई विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. करुणा शंकर उपाध्याय ने रक्षा तंत्र और सैन्य संरचना पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए भारत की सुरक्षा नीति की गहराई को रेखांकित किया। प्रस्तावना रखते हुए डॉ. वागीश सारस्वत ने भारत की नीति को दो टूक शब्दों में व्यक्त किया—“हम किसी को छेड़ते नहीं, पर यदि कोई छेड़े, तो उसे छोड़ते भी नहीं।” समाजसेवी शिवजी सिंह, मनीषा जोशी, एडवोकेट भार्गव तिवारी, रंगकर्मी सगीर ख़ान, वरिष्ठ पत्रकार शैलेन्द्र श्रीवास्तव, टीवी जर्नलिस्ट सुनील सिंह और लेखक विवेक अग्रवाल ने भी अपने विचारों से संगोष्ठी को समृद्ध किया। मंच संचालन अभिनेता रवि यादव ने  प्रभावशाली ढंग से किया। संगोष्ठी में साहित्य और कला का प्रभावी समावेश देखने को मिला। पत्रकार व कवि ओमप्रकाश तिवारी के गीतों को अभिनेत्री विनीता टंडन यादव ने स्वर दिए, वहीं महान कवि गोपाल दास नीरज की प्रसिद्ध कविता “अगर तीसरा युद्ध हुआ तो…” का मार्मिक पाठ अमर त्रिपाठी ने किया। इन प्रस्तुतियों ने उपस्थित जनों को भावनात्मक रूप से झकझोरते हुए शांति के महत्व को और गहराई से स्थापित किया।
कार्यक्रम में नंदिता माजी शर्मा, शिखा गोस्वामी, मीनू मदान और विशु सहित अनेक रचनाकारों ने युद्ध और शांति पर अपनी कविताएँ प्रस्तुत कीं। इस अवसर पर प्रियंका सिंह, गोपी कृष्ण बुबना, एडवोकेट अनीस, एडवोकेट प्रभात, निर्देशक कमर हाजीपुरी और पत्रकार अनवर जैदी की सक्रिय उपस्थिति ने आयोजन को व्यापक आयाम प्रदान किया। इस संगोष्ठी का निष्कर्ष एक स्पष्ट संदेश के रूप में सामने आया “युद्ध मानवता का अंत है, जबकि बुद्ध का मार्ग ही शांति, करुणा और सह-अस्तित्व की ओर ले जाता है।”
मुंबई से उठी यह आवाज केवल एक शहर तक सीमित नहीं, बल्कि विश्व समुदाय के लिए एक विचारशील संदेश है कि शांति हथियारों से नहीं, विचारों से ही स्थायी शांति संभव है।
पुलिस महानिदेशक डॉ सदानंद दाते को भेंट की अपनी पुस्तकें
मुंबई।  हिंदी के मूर्धन्य साहित्यकार ' पंडित मुरलीधर पांडेय ने एक मुलाक़ात के दौरान  ' महाराष्ट्र राज्य पुलिस मुख्यालय डीजीपी कार्यालय में राज्य के पुलिस महानिदेशक डॉ. सदानंद दाते को ' देश के साहित्यकारों में पंडित मुरलीधर पांडेय का व्यक्तित्व एवं कृतित्व, अभिनंदन-ग्रंथ ' संयोग प्रकाशन ' द्वारा प्रकाशित कई पुस्तकें भेंट स्वरूप दीं। इस अवसर पर साथ में मीरा-भाईंदर शहर के ' स्पेशल क्राइम रिपोर्टर ' व ' वरिष्ठ-पत्रकार ' सुभाष पांडेय उपस्थित रहे।
ज्ञान, संस्कार और परिश्रम के बल पर समाज और राष्ट्र के निर्माण में योगदान दें विद्यार्थी : संजय सिंह

मुंबई। उत्तर भारतीय संघ द्वारा संचालित महेंद्र प्रताप शारदा प्रसाद सिंह कॉलेज, बांद्रा में 25 अप्रैल 2026 को डिग्री वितरण समारोह का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर अंतिम वर्ष के उत्तीर्ण विद्यार्थियों को दीक्षांत समारोह के अंतर्गत प्रमाणपत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत विश्वविद्यालय गीत से हुई, जिसके पश्चात डिग्री वितरण की प्रक्रिया संपन्न हुई। समारोह में उत्तर भारतीय संघ के उपाध्यक्ष संजय सिंह एवं कोषाध्यक्ष अजयकुमार सिंह विशेष रूप से उपस्थित रहे। दोनों अतिथियों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति से विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया एवं उन्हें आशीर्वाद प्रदान किया। इस अवसर पर कॉलेज के प्राचार्य डॉ. नितिन अग्रवाल भी उपस्थित रहे। अपने संबोधन में संजय सिंह ने शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह केवल डिग्री प्राप्त करने का अवसर नहीं, बल्कि जीवन की नई जिम्मेदारियों की शुरुआत का प्रतीक है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान, संस्कार और परिश्रम के बल पर समाज एवं राष्ट्र के निर्माण में सक्रिय योगदान दें तथा निरंतर सीखते रहने की भावना बनाए रखें, वहीं अजयकुमार सिंह ने विद्यार्थियों को भविष्य की शिक्षा, करियर के अवसरों एवं चुनौतियों के प्रति मार्गदर्शन देते हुए उन्हें आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
यह समारोह विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि का प्रतीक रहा, वहीं महाविद्यालय एवं उत्तर भारतीय संघ के लिए भी यह गर्व का क्षण रहा।
हिंदू धर्म जानने के लिए स्वाध्याय जरूरी- मुकेश कुमार सिंह
मीरा रोड।  संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में इडेन रोज़ परिसर में हिंदू महासभा द्वारा भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सिने जगत के ख्यातिलब्ध निदेशक मुकेश कुमार सिंह थे। समारोह की अध्यक्षता अशोक शुक्ल ने की। संघ की ओर से प्रमुख वक्ता के रूप में विधान शैतानसिंह राजपुरोहित उपस्थित थे। दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। उत्सव में मातृशक्तियों द्वारा लेजिम नृत्य प्रस्तुत किया गया। इसके अलावा "वसुधैव कुटुंबकम्" पर आधरित नाटिका की प्रस्तुति छात्रों द्वारा की गई। इस अवसर पर बच्चों को भारतमाता का चित्र और प्रमाणपत्र वितरित किए गए।  जहाँ सुमी ने अपने सुमधुर कंठ से भजन प्रस्तुत किए वहीं श्री अपर्णा शर्मा ने दैनिक जीवन से संबंधित पंच-परिवर्तन पर अपनी बात रखी। चर्चित कवि सुरेश मिश्र ने अपनी कविताओं के माध्यम से लोगों को खूब गुदगुदाया । उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से सभी से "एक" रहने की अपील की।अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में अशोक शुक्ल ने बताया कि बच्चों का संस्कारित करना माता-पिता की पहली जिम्मेदारी है। हमें दैनिक जीवन की नागरिक जिम्मेदारियों को कभी नहीं भूलना चाहिए। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुकेश कुमार सिंह ने स्वाध्याय पर बल देते हुए कहा कि बिना स्वाध्याय के भारतीय संस्कृति पर होने वाले हमलों को नहीं रोका जा सकता। मात्र पूजा-अर्चना और व्रत-उपवास ही नहीं धर्म है। इसे समझने के लिए आर्य ग्रंथों का अध्ययन जरूरी है। नवघर नगर के सह कार्यवाह विधान राजपुरोहित ने संघ के अनुशासन, धैर्य और संयम को रेखांकित किया।  इस अवसर पर श्री अजित उपाध्याय और माधव पाण्डेय ने भी अपनी बात रखी। शहर के उद्यमी, लेखक, शिक्षक आदि विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य इस भव्य समारोह में  उपस्थित थे। संपूर्ण राष्ट्रगीत से सांस्कृतिक संध्या का समापन हुआ।  डॉ. जितेन्द्र पाण्डेय ने कार्यक्रम का आद्यांत संचालन किया।