भोपाल में छात्रा से पहचान छिपाकर दोस्ती, धर्म बदलकर शोषण का आरोप; पीड़िता तीन माह की गर्भवती

भोपाल। भोपाल के रातीबड़ इलाके में आईईएस विश्वविद्यालय की छात्रा के साथ पहचान छिपाकर दोस्ती करने और बाद में धर्म परिवर्तन के दबाव के साथ शोषण किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। पीड़िता ने आरोप लगाया है कि आरोपी ने खुद को हिंदू बताकर प्रेम संबंध बनाए और अब वह तीन माह की गर्भवती है।

पीड़िता के अनुसार, उसी कॉलेज में पढ़ने वाले आसिफ रजा ने अपना नाम आशीष पांडे बताकर उससे जान-पहचान बढ़ाई। विश्वास में लेकर आरोपी ने उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए। जब छात्रा को उसकी असली पहचान पता चली, तो आरोपी ने कथित रूप से उसे ‘रखैल’ बनकर रहने का दबाव बनाया।

पीड़िता ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में आरोपी के दो दोस्त शाहजेब खान और सेफ शेख भी शामिल थे, जो उसे लगातार धमका रहे थे और चुप रहने का दबाव बना रहे थे।

पीड़िता ने महिला थाना पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उसका कहना है कि जब उसने अपनी गर्भावस्था और धर्म बदलकर शोषण की बात बताई, तो पुलिस अधिकारियों ने इसे हिंदू-मुस्लिम मामला न बनाने और आपसी समझौते की सलाह दी।

पीड़िता का दावा है कि बजरंग दल के हस्तक्षेप के बाद मामला दर्ज किया गया, लेकिन दो आरोपियों को पकड़ने के बाद बिना ठोस कार्रवाई के छोड़ दिया गया।

वहीं, ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी ने भी पीड़िता को न्याय दिलाने की पहल की है। समिति के संरक्षक समशुल हसन ने पुलिस प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

श्री विश्वकर्मा महापंचायत संगठन की प्रदेश स्तरीय बैठक 30 को

  • बैठक में होंगे कई महत्वपूर्ण निर्णय, बनेगी आगामी कार्ययोजना

भोपाल। मध्यप्रदेश में विश्वकर्मा समाज के अग्रणी संगठन श्री विश्वकर्मा महापंचायत की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक एवं संगठन का चतुर्थ स्थापना दिवस पर प्रदेश भर के पदाधिकारी गंज बासौदा में जुटेंगे।

प्रदेश स्तरीय बैठक में प्रदेश कार्यकारिणी, जिला अध्यक्ष एवं संगठन सलाहकार एवं संरक्षक समेत सभी संभाग अध्यक्ष महिला मोर्चा प्रदेश कार्यकारिणी (जिला अध्यक्ष) , युवा मोर्चा प्रदेश कार्यकारिणी (जिला अध्यक्ष) चिकित्सा प्रकोष्ठ प्रदेश कार्यकारिणी एवं (जिला अध्यक्ष) एवं राष्ट्रीय पदाधिकारी तथा श्री विश्वकर्मा महापंचायत के मध्य प्रदेश में निवासरत राष्ट्रीय पदाधिकारी बैठक में शामिल होंगे।

संगठन के प्रदेश अध्यक्ष एवं विश्वकर्मा कल्याण बोर्ड के पूर्व सदस्य परमानंद विश्वकर्मा ने बताया कि संगठन के चौथे स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित प्रदेश कार्यकारिणी बैठक में संगठन विस्तार, सदस्यता अभियान, समाज के उत्थान विकास पर चर्चा एवं राजनीतिक भागीदारी पर चर्चा की जाएगी। बैठक में संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं विश्वकर्मा कल्याण बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष (पूर्व कैबिनेट मंत्री दर्जा) प्रेमनारायण विश्वकर्मा का मार्गदर्शन प्राप्त होगा।

प्रदेश का समृद्ध किसान ही विकसित भारत के निर्माण में निभाएगा महत्वपूर्ण भूमिका : मुख्यमंत्री

  • “किसान कल्याण वर्ष” में मध्यप्रदेश कृषि क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा: डॉ. मोहन यादव

भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य का समृद्ध किसान विकसित भारत 2047 के निर्माण में अहम भूमिका निभाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का संकल्प “सच्चा वादा और पक्का काम” है और किसानों से किए गए वादों को पूरा किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि किसानों की समृद्धि ही मध्यप्रदेश की असली ताकत है और सरकार उनकी आय बढ़ाने तथा जीवन स्तर सुधारने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि जब खेतों से लेकर कारखानों तक समृद्धि आएगी, तभी राज्य और देश दोनों मजबूत होंगे। उन्होंने नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रदेश के तेज विकास का उल्लेख करते हुए किसानों को इस प्रगति की आधारशिला बताया और उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया।

  • गेहूं उपार्जन में बड़ा फैसला

रिकॉर्ड गेहूं उत्पादन को देखते हुए राज्य सरकार ने केंद्र से खरीदी सीमा बढ़ाने का अनुरोध किया था, जिसे स्वीकार करते हुए लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है। यह वृद्धि किसानों की आय सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

  • स्लॉट बुकिंग 9 मई तक, अब सप्ताह में 6 दिन खरीदी

मुख्यमंत्री ने बताया कि समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी के लिए स्लॉट बुकिंग पूरी तरह खोल दी गई है। अब गेहूं उपार्जन सप्ताह में 6 दिन होगा और शनिवार को भी केंद्र खुले रहेंगे। साथ ही स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि 30 अप्रैल से बढ़ाकर 9 मई कर दी गई है।

  • भूमि के बदले 4 गुना मुआवजा

सरकार ने भू-अर्जन को लेकर बड़ा निर्णय लेते हुए किसानों को उनकी जमीन के बदले 4 गुना तक मुआवजा देने की घोषणा की है, जिससे उनके अधिकारों और भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

  • फसल विविधीकरण और बोनस योजना

सरकार दलहन, उड़द और तिलहन फसलों को बढ़ावा देने के लिए कदम उठा रही है। उड़द की खरीदी समर्थन मूल्य पर की जाएगी और किसानों को 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस भी दिया जाएगा। सरसों पर भावांतर योजना लागू होने से किसानों को एमएसपी से अधिक कीमत मिलने लगी है।

  • “किसान कल्याण वर्ष” की पहल

मुख्यमंत्री ने बताया कि इस वर्ष को “किसान कल्याण वर्ष” के रूप में मनाया जा रहा है, जिसमें किसानों को मात्र 5 रुपये में कृषि पंप कनेक्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने अंत में भरोसा दिलाया कि सरकार हर परिस्थिति में किसानों के साथ खड़ी रहेगी और उनकी समृद्धि के लिए निरंतर कार्य करती रहेगी।

समस्याओं को लेकर कांग्रेस सेवादल का 24 घंटे का किसान सत्याग्रह एवं उपवास

  • 8 दिन में सुधार नहीं, तो प्रदेशभर में चक्का जाम: जीतू पटवारी

भोपाल। किसानों की समस्याओं को लेकर कांग्रेस सेवादल का 24 घंटे का किसान सत्याग्रह एवं उपवास आज सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। दोपहर 12 बजे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सेवादल के प्रदेशाध्यक्ष अवनीश भार्गव को जूस पिलाकर अनशन समाप्त कराया। इस अवसर पर संकल्प लिया गया कि जब तक किसानों की मांगें पूरी नहीं होतीं, यह संघर्ष जारी रहेगा।

सत्याग्रह को संबोधित करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष श्री जीतू पटवारी ने कहा कि सेवादल का यह अभियान तथाकथित "मोदी की गारंटी" को जमीन पर लागू करवाने के उद्देश्य से चलाया गया है। उन्होंने सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा: सरकार ने गेहूं की खरीदी ₹2700 प्रति क्विंटल करने का वादा किया था, लेकिन किसान अपनी उपज ₹1800 या उससे कम दाम पर बेचने को मजबूर हैं।

यदि किसान का गेहूं ₹2700 से कम दाम पर बिका है, तो बीच की राशि सरकार ने चोरी की है। इसके लिए सीधे तौर पर प्रधानमंत्री मोदी, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और वर्तमान मुख्यमंत्री मोहन यादव जिम्मेदार हैं। खरीदी केंद्रों पर तौल और अन्य अनियमितताएं व्याप्त हैं। यदि 8 दिनों के भीतर व्यवस्थाएं नहीं सुधरीं, तो बड़वानी से लेकर ग्वालियर-चंबल तक आगरा-मुंबई हाईवे जाम किया जाएगा

उपवास समाप्ति के बाद सेवादल प्रदेशाध्यक्ष अवनीश भार्गव ने कहा कि यह सत्याग्रह केवल एक शुरुआत है। उन्होंने प्रमुख मुद्दे उठाते हुए कहा:

1. फसल बीमा: प्रदेश में बीमा के नाम पर किसानों से सरेआम लूट हो रही है।

2. उत्पीड़न: प्रशासन 'नरवाई' के नाम पर किसानों पर फर्जी प्रकरण दर्ज कर उन्हें प्रताड़ित करना बंद करे।

3. ऋण वसूली: फसल खरीदी की अंतिम तिथि को ही ऋण वसूली की आखिरी तारीख तय की जाए, ताकि किसानों पर मानसिक दबाव न बने।

सत्याग्रह के समापन पर भोपाल और आसपास के क्षेत्रों से आए किसानों ने अपनी व्यथा सुनाई। इसके पश्चात, किसानों की मांगों को लेकर मध्यप्रदेश कांग्रेस सेवादल की ओर से महामहिम राज्यपाल महोदय के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा गया।

  • कार्यक्रम में प्रमुख उपस्थिति

सत्याग्रह के समापन अवसर पर उपाध्यक्षद्वय सुखदेव पांसे, पूर्व मंत्री पी.सी. शर्मा, महेन्द्र जोशी, CWC सदस्य मीनाक्षी नटराजन, पूर्व विधायक शैलेंद्र पटेल, अ.भा. कांग्रेस सेवादल के सचिव एवं म.प्र. प्रभारी पी.एन.मिश्रा साथ ही सेवादल प्रदेश महिला अध्यक्ष श्रीमती संगीता कांकरिया, मीनाक्षी जायसवाल, यंग ब्रिगेड अध्यक्ष गजानंद गज्जू तिवारी, जिला कांग्रेस अध्यक्ष (भोपाल)प्रवीण सक्सेना, अनोखीमानसिंह पटेल, श्रीमती जयश्री हरिकरण, शैलेन्द्र पटेल, गोविंद गोयल, चन्द्रकांत दुबे, आसिफ जकी, प्रदीप मोनू सक्सेना, जितेन्द्र डागा, अरूण श्रीवास्तव, अभिषेक शर्मा, जिला सेवादल अध्यक्ष निहाल अहमद, लोकेश दांगी सहित सेवादल के वर्दीधारी पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में किसान उपस्थित थे।

“घोषणाओं की सरकार, जवाबों से भागते मुख्यमंत्री, किसानों के साथ खुला अन्याय”

भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव के हालिया किसान संबोधन पर तीखी और आक्रामक प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि यह भाषण केवल घोषणाओं का पुलिंदा था, जिसमें किसानों के ज्वलंत सवालों से सुनियोजित तरीके से बचने की कोशिश की गई।

श्री पटवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री ने बिजली, स्लॉट बुकिंग, खरीदी लक्ष्य, दुग्ध, सोलर पंप, भावांतर, दलहन-तिलहन उत्पादन बढ़ाने जैसे कई विषयों पर लंबी-चौड़ी बातें कीं, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर पूरी तरह चुप्पी साध ली। उन्होंने सवाल उठाया कि स्लॉट बुकिंग की तारीख 30 अप्रैल से बढ़ाकर 9 मई करना क्या सरकार की नाकाम व्यवस्था का प्रमाण नहीं है? छोटे, मझोले और बड़े किसानों पर लगी पाबंदियों को हटाना भी सरकार की मजबूरी को दर्शाता है, न कि कोई संवेदनशील निर्णय।

सरकार की गेहूं खरीदी व्यवस्था पूरी तरह विफल साबित हो रही है। 14 दिनों में केवल 9.5 लाख मैट्रिक टन खरीदी से साफ है कि इस रफ्तार पर 100 लाख मैट्रिक टन का लक्ष्य पूरा करने में करीब 140 दिन लगेंगे। अब जब छोटे, मझोले और बड़े सभी किसान एक साथ तुलाई के लिए आएंगे, तो यह अव्यवस्था और बढ़ेगी तथा किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।

बिजली आपूर्ति पर हमला करते हुए श्री पटवारी ने कहा कि 23 वर्षों तक किसानों को रात में बिजली देकर परेशान करने वाली सरकार आज दिन में बिजली देने की बात कर रही है। यह नीतिगत विफलता की स्वीकारोक्ति है, न कि कोई उपलब्धि। कृषक मित्र योजना को लेकर उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार 90% सब्सिडी का दावा कर रही है, जबकि वास्तविकता यह है कि किसानों से 10% राशि जमा कराकर उनके नाम पर 90% कर्ज डाला जा रहा है। दस्तावेजों में मात्र 30% सब्सिडी का उल्लेख है—ऐसे में शेष 60% की सच्चाई क्या है? और जब कर्ज किसान के नाम पर होगा, तो उसकी किस्त कौन भरेगा—सरकार या किसान?

सोयाबीन किसानों के मुद्दे पर श्री पटवारी ने कहा कि “मोदी गारंटी” के तहत ₹6000 प्रति क्विंटल पर खरीद का वादा किया गया था, लेकिन हकीकत में किसान को ₹2750 प्रति क्विंटल के भाव पर फसल बेचने के लिए मजबूर होना पड़ा। जब मंडी मॉडल रेट ₹4000 था, तब भी किसानों को उसका लाभ नहीं मिला। उन्होंने सवाल किया कि इस भारी अंतर का जवाब कौन देगा और क्या सरकार किसानों के नुकसान की भरपाई करेगी?

इसी क्रम में उन्होंने गेहूं खरीदी में भारी अव्यवस्था का आरोप लगाते हुए कहा कि लगभग 50% किसानों ने खरीदी में देरी और कुप्रबंधन के चलते अपना गेहूं ओपन मार्केट में बेचा, जहां मंडियों में खुली लूट के कारण उन्हें ₹1800 से ₹2000 प्रति क्विंटल के भाव मिले। उन्होंने पूछा कि क्या सरकार इन किसानों के नुकसान की भरपाई करेगी या उन्हें यूं ही बाजार के हवाले छोड़ दिया गया है?

दुग्ध उत्पादकों के मुद्दे पर उन्होंने कहा प्रदेश के अपने दूध संघ को NDDB को सौंपने के बाद बड़े-बड़े दावे किए गए थे, लेकिन आज तक यह स्पष्ट नहीं किया गया कि इस निर्णय से मध्यप्रदेश के दूध उत्पादक किसानों को वास्तविक लाभ क्या मिला। हाल ही में NDDB के साथ हुई बैठक के परिणामों पर भी मुख्यमंत्री ने कोई पारदर्शिता नहीं दिखाई।

श्री पटवारी ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि जो मुख्यमंत्री दलहन और तिलहन उत्पादन बढ़ाने की बात करते हैं, उन्होंने अपने पूरे भाषण में ग्रीष्मकालीन मूंग खरीदी पर एक शब्द तक नहीं कहा। यह दर्शाता है कि सरकार के पास मूंग उत्पादक किसानों के लिए कोई ठोस योजना नहीं है और उन्हें पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि आने वाले खरीफ सीजन में किसान धान की बुवाई करेगा, लेकिन मुख्यमंत्री ने “मोदी गारंटी” के तहत ₹3100 प्रति क्विंटल धान खरीद के वादे पर एक शब्द तक नहीं कहा। यह स्पष्ट करता है कि सरकार के पास धान उत्पादक किसानों के लिए कोई ठोस नीति या भरोसेमंद रोडमैप नहीं है।

अंत में श्री पटवारी ने कहा कि मध्यप्रदेश का किसान अब झूठे वादों और खोखली घोषणाओं से संतुष्ट नहीं होगा। उसे स्पष्ट नीति, पारदर्शिता और जवाबदेही चाहिए। यदि सरकार शीघ्र ही इन सवालों का ठोस जवाब नहीं देती और व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं करती, तो कांग्रेस प्रदेशभर में किसानों के हक की लड़ाई को और तेज करेगी।

लोक जनसंपर्क सम्मान से नवाजे जाएंगे सुनील वर्मा

भोपाल। राष्ट्रीय जनसंपर्क दिवस 2026 का आयोजन 26 अप्रैल को किया जाएगा। इस अवसर पर पब्लिक रिलेशंस सोसाइटी ऑफ इंडिया, भोपाल एक बहुआयामी आयोजन करेगी। इस दौरान बेहतर सेवाओं, उत्कृष्ट प्रदर्शन और अच्छी सामाजिक प्रतिष्ठा के साथ गुणवत्तापूर्ण कार्य देने वाले अधिकारियों को सम्मानित किया जाएगा। इस कड़ी में जनसंपर्क विभाग के उप संचालक सुनील वर्मा को भी सम्मान से नवाजा जाएगा। कार्यक्रम सीएमई हॉल, जेके हॉस्पिटल, भोपाल पर सुबह 11 बजे होगा।

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने महिला आरक्षण, कानून व्यवस्था, आदिवासी हित और विकास परियोजनाओं पर सरकार को घेरा

 

भोपाल। आज भोपाल निवास पर मध्यप्रदेश के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मीडिया से चर्चा करते हुए केंद्र एवं राज्य सरकार की नीतियों और कार्यशैली पर गंभीर प्रश्न उठाए तथा कई महत्वपूर्ण जनहित के मुद्दों पर अपनी स्पष्ट राय रखी।

  • महिला आरक्षण 

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा से महिला आरक्षण के पक्ष में रही है, और इस दिशा में श्रीमती सोनिया गांधी जी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। हम महिला सशक्तिकरण के विरोधी नहीं, बल्कि उसके सच्चे समर्थक हैं। लेकिन भारतीय जनता पार्टी महिला आरक्षण के नाम पर पर्दे के पीछे जनगणना और परिसीमन को क्यों जोड़ रही है? क्या यह राजनीतिक रणनीति है या वास्तविक सशक्तिकरण का प्रयास?

श्री सिंघार ने आगे कहा कि देश की 50% से अधिक महिलाएं और लगभग 55% ओबीसी वर्ग से आती हैं क्या उनके लिए इस आरक्षण में स्पष्ट प्रावधान है? सरकार को यह साफ करना चाहिए कि किन वर्गों की महिलाओं को इसका वास्तविक लाभ मिलेगा। यदि सरकार की मंशा ईमानदार है, तो महिला आरक्षण को तत्काल लागू किया जाए, बिना किसी शर्त के। सीटों की संख्या, परिसीमन और जनगणना के नाम पर इसे टालना महिलाओं के अधिकारों के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि नारी सम्मान केवल शब्दों से नहीं, बल्कि स्पष्ट नीति और ठोस निर्णयों से सुनिश्चित होता है।

  • कानून की धज्जियां उड़ाते भाजपा नेता और उनके परिजन 

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि प्रदेश में लगातार इस प्रकार की घटनाएं सामने आ रही हैं, जहां भाजपा के जनप्रतिनिधियों के परिजन कानून को चुनौती देते नजर आते हैं। पूर्व में भी ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जो बेहद चिंताजनक हैं। जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी केवल पद तक सीमित नहीं होती, बल्कि अपने परिवार को भी संस्कार और मर्यादा का उदाहरण देना उनकी नैतिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि जब सत्ता का प्रभाव इस तरह दुरुपयोग में बदल जाए, तो यह सरकार की कार्यशैली और कानून के प्रति उसके रवैये पर सवाल खड़े करता है। मेरा मानना है कि ऐसे मामलों में जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और नैतिक आधार पर संबंधित जनप्रतिनिधियों को स्वयं आगे आकर जवाबदेही स्वीकार करनी चाहिए।

  • आदिवासी समाज पर राज्यपाल महोदय की चिंता 

श्री सिंघार ने कहा कि आदिवासी समाज की पीड़ा पर राज्यपाल महोदय की चिंता स्वागतयोग्य है, वे स्वयं आदिवासी कार्यमंत्रणा परिषद के अध्यक्ष हैं। राज्यपाल महोदय द्वारा मुख्यमंत्री को दी गई सलाह पर क्या वास्तव में अमल होगा? आवश्यकता इस बात की है कि केवल सलाह नहीं, बल्कि ठोस समीक्षा और प्रभावी कार्यवाही हो। उन्होंने कहा आदिवासी समाज के समग्र विकास के लिए स्पष्ट नीति, संवेदनशील दृष्टिकोण और मजबूत क्रियान्वयन जरूरी है, सिर्फ घोषणाएं नहीं।

  • केन-बेतवा परियोजना आंदोलन 

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि केन-बेतवा परियोजना जैसी किसी भी विकास परियोजना का उद्देश्य केवल ढांचा खड़ा करना नहीं, बल्कि लोगों का जीवन बेहतर बनाना होना चाहिए। लेकिन अक्सर इन परियोजनाओं के साथ कई परिवार उजड़ जाते हैं क्या उनके अधिकार सुरक्षित हैं? क्या उन्हें पूर्ण और न्यायसंगत मुआवजा मिल रहा है?

उन्होंने आगे कहा कि सरकार कागजों पर योजनाएं बना लेती है, लेकिन जब वे धरातल पर लागू होती हैं, तो ग्रामीण, आदिवासी और दलित समाज सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। जरूरी है कि किसी भी परियोजना से पहले प्रभावित परिवारों से संवाद किया जाए, उनकी सहमति ली जाए और उनके पुनर्वास व मुआवजे को प्राथमिकता दी जाए। विकास तभी सार्थक है, जब वह न्यायपूर्ण और समावेशी हो।

ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्षों का प्रदेश स्तरीय सम्मेलन रवीन्द्र भवन में संपन्न

भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा आज भोपाल स्थित रवीन्द्र भवन में ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्षों का प्रदेश स्तरीय सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन का उद्देश्य संगठन को जमीनी स्तर पर और अधिक सशक्त बनाना तथा आमजन से सीधा संवाद स्थापित करने की रणनीति को मजबूत करना रहा।

कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के आगमन एवं स्थान ग्रहण के साथ हुई, जिसके पश्चात राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् प्रस्तुत किया गया। अतिथिगण द्वारा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ किया गया। तत्पश्चात अतिथियों का सूत की माला से स्वागत किया गया।

सम्मेलन में ब्लॉक अध्यक्षों की भूमिका, उनके कार्य एवं दायित्वों पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया। डॉ. संजय कामले द्वारा आगामी “जनसंवाद सम्मेलनों” की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए संगठनात्मक गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाने पर बल दिया गया।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जितेंद्र (जीतू) पटवारी द्वारा प्रदेश स्तरीय ब्लॉक “जनसंवाद सम्मेलन” कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि कांग्रेस पिछले 25 वर्षों से सत्ता से बाहर है, ऐसे में कार्यकर्ताओं को और अधिक मेहनत करने की आवश्यकता है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि बूथ एवं ब्लॉक स्तर पर कम से कम 30 हजार परिवारों को जोड़कर संगठन को मजबूत करना होगा।

श्री पटवारी ने स्पष्ट किया कि उनका लक्ष्य किसी पद की प्राप्ति नहीं, बल्कि कांग्रेस की सत्ता में वापसी सुनिश्चित करना है। आज मध्य प्रदेश कर्ज, क्राइम और करप्शन के कैंसर से जूझ रहा है और इसे बचाने के लिए हमें अपनी आहुति देनी होगी।

 25 अप्रैल से लेकर 25 मई तक बनाए गए विधानसभा प्रभारी अपने विधानसभा क्षेत्र में जाएंगे और कार्यकारिणी का सत्यापन करेंगे और 25 मई के बाद पार्टी के हर ब्लॉक पर एक अधिवेशन होगा जिसे जन संवाद कार्यक्रम का नाम दिया जाएगा जिसमें पार्टी के सभी बड़े नेता प्रदेश प्रभारी एवं सह प्रभारी सहित एक-एक ब्लॉक में जाएंगे।

ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष हमारी पार्टी की रीढ़ की हड्डी हैं। जिनकी जिम्मेदारी सभी के साथ समन्वय बनाकर संगठन को आगे बढ़ाना है।

- संगठन विस्तार एवं जनसंवाद को प्रभावी बनाने पर व्यापक चर्चा 

प्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी ने बताया कि पार्टी में एक प्रस्ताव विचाराधीन है, जिसके तहत प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में प्रत्येक परिवार से 100 रुपए का सहयोग लिया जाएगा। यह राशि जिला एवं ब्लॉक स्तर पर ही संगठन निर्माण एवं प्रशिक्षण कार्यों में उपयोग की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस पहल से पार्टी किसी एक व्यक्ति पर निर्भर न रहकर कार्यकर्ताओं के सामूहिक योगदान से सशक्त बनेगी और आमजन के साथ सीधा जुड़ाव भी बढ़ेगा।

श्री चौधरी ने ब्लॉक अध्यक्षों को निर्देश दिए कि वे मंडल, ब्लॉक, ग्राम एवं वार्ड स्तर पर संगठन का सुदृढ़ गठन सुनिश्चित करें तथा गांव-गांव जाकर इकाइयों एवं बीएलए-2 का सत्यापन कर उनकी सक्रियता का आकलन करें। उन्होंने यह भी बताया कि जिला अध्यक्षों के कार्यों का मूल्यांकन जारी है और रिपोर्ट के आधार पर आगे निर्णय लिया जाएगा, जबकि ब्लॉक अध्यक्षों के कार्यों का आकलन भी आगामी छह माह में किया जाएगा।

कार्यक्रम के अंत में आभार प्रदर्शन किया गया तथा राष्ट्रगान जन गण मन के साथ सम्मेलन का समापन हुआ।

इस अवसर पर प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जितेंद्र (जीतू) पटवारी, प्रदेश सह प्रभारी संजय दत्त एवं श्रीमती उषा नायडू, रणविजय लोचन, पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह एवं गोविंद सिंह, पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया, सीईसी सदस्य ओमकार मरकाम एवं cwc सदस्य कमलेश्वर पटेल , विधायक आरिफ मसूद, एवं आतिफ अकील पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा, पी.सी. शर्मा, महिला कांग्रेस की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती शोभा ओझा, पूर्व मंत्री श्रीमती विजयलक्ष्मी साधौ, विधायक झूमा सोलंकी, फुंदेलाल मार्को, संगठन महामंत्री डॉ संजय कामले, संगठन उपाध्यक्ष सुखदेव पांसे, प्रशिक्षण प्रभारी महेंद्र जोशी सहित समस्त विधायकगण,जिला अध्यक्ष, जिला प्रभारी, मोर्चा संगठन, प्रकोष्ठ एवं विभागों के अध्यक्षगण तथा मध्यप्रदेश कांग्रेस के समस्त ब्लॉक अध्यक्षगण उपस्थित रहे।

महिला आरक्षण के मुद्दे पर केंद्र सरकार अपनी मंशा स्पष्ट करे : मुकेश नायक

- महिला आरक्षण पर राजनीतिक उद्देश्य हावी, पारदर्शिता गायब : अभय दुबे

भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्यालय, भोपाल स्थित मीडिया कक्ष में आज प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक एवं अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के पैनलिस्ट अभय दुबे द्वारा महत्वपूर्ण प्रेस ब्रीफिंग आयोजित की गई।

प्रेस ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए मुकेश नायक ने महिलाओं के 33 प्रतिशत आरक्षण के मुद्दे पर केंद्र सरकार की मंशा पर गंभीर प्रश्न उठाते हुए स्पष्ट जवाब की मांग की। उन्होंने कहा कि सांसद एवं राज्य विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से लाए गए नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर देश में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो रही है।

श्री नायक ने कहा कि वर्ष 2023 में पारित संविधान संशोधन में स्पष्ट प्रावधान किया गया था कि महिला आरक्षण लागू करने से पूर्व जनगणना और उसके बाद परिसीमन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। वर्तमान परिस्थितियां यह संकेत देती हैं कि केंद्र सरकार अपने ही प्रावधानों से पीछे हटती नजर आ रही है।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब वर्ष 2023 में पारित महिला आरक्षण विधेयक की अधिसूचना जारी की जा चुकी है, तब उसी विषय से संबंधित संशोधन विधेयक पर लोकसभा में चर्चा और मतदान का क्या औचित्य है। यह पूरी प्रक्रिया केवल राजनीतिक उद्देश्य से संचालित प्रतीत होती है, जिससे न केवल भ्रम की स्थिति बन रही है, बल्कि सरकार की नीयत पर भी प्रश्नचिन्ह लग रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि यह विधेयक वास्तव में महिला आरक्षण का नहीं, बल्कि परिसीमन से जुड़ा हुआ प्रतीत होता है, जिस पर महिला आरक्षण का आवरण डाला जा रहा है। उन्होंने प्रश्न किया कि पिछले 30 महीनों में ऐसा क्या बदल गया कि 2023 के बाद की जनगणना की बात करने वाली सरकार अब 2011 की जनगणना के आधार की ओर लौटती नजर आ रही है।

इस अवसर पर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के पैनलिस्ट अभय दुबे ने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार से यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि किसी कानून की अधिसूचना जारी किए बिना उसका संशोधन किस प्रकार संभव है। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम प्रस्तुत करते समय प्रधानमंत्री द्वारा 33 प्रतिशत आरक्षण की बात कही गई थी, जिसका सभी राजनीतिक दलों ने समर्थन किया था, साथ ही यह शर्त भी जोड़ी गई थी कि पहले जनगणना, फिर परिसीमन और उसके बाद ही आरक्षण लागू किया जाएगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान में बिना विधिक स्पष्टता के एकतरफा निर्णय लेने का प्रयास किया जा रहा है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के विरुद्ध है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार द्वारा जातिगत जनगणना से बचने का प्रयास किया जा रहा है, जो सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।

मप्र : कैबिनेट मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने कार्यकर्ताओं से किया संवाद

- लोगों की कठिनाइयों को समझा और उन्हें जल्द से जल्द समाधान दिलाने का दिया आश्वासन 

भोपाल। मध्यप्रदेश शासन के कैबिनेट मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने भाजपा प्रदेश कार्यालय में प्रदेश भर से आए पार्टी कार्यकर्ताओं से संवाद किया। 

मध्यप्रदेश शासन के कैबिनेट मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने प्रदेश भर से आए पार्टी कार्यकर्ताओं एवं आमजनों से संवाद कर उनकी जनसमस्याओं का त्वरित समाधान किया। जिन समस्याओं का तत्काल समाधान नहीं किया जा सका, उन्हें संबंधित विभागों को निराकरण के लिए भेजा गया है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से संवाद करते हुए उनकी कठिनाइयों को समझा और उन्हें जल्द से जल्द समाधान दिलाने का आश्वासन दिया।