मुख्य मंत्री सामूहिक विवाह योजना
सरकारी बजट के अभाव में सैकड़ों गरीब वर वधुओं के हाथ पीले न होने से असंतोष व्याप्त,
कोरांव। विश्वनाथ प्रताप सिंह
कोरांव तहसील में तीन सौ करीब आवेदन हो चुके है पंजीकरण, मुख्य मंत्री डीएम और विधायक कोरांव से गरीबों ने लगाई गुहार
कोरांव।प्रयागराज। प्रदेश सरकार द्वारा चलाई गई गरीब वर्ग के कल्याण हेतु मुख्य मंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत तीन चार महीने हो चुके पंजीकरण किंतु विवाह कार्यक्रम अप्रैल माह में न होने से असंतोष व्याप्त हैं।
बता दें कि तहसील कोरांव में दो तीन बार सामूहिक विवाह आयोजित हुए समय से समाज कल्याण विभाग ने उपहार और अनुमन्य राशि भी बखूबी वितरित की,किंतु अब लोगों का सब्र जवाब देने लगा है और मुख्य मंत्री द्वारा उनकी चलाई गई महत्वपूर्ण योजना में धन अभाव में विवाह न हो पाना आश्चर्य तो है ही किंतु विधायक के प्रयास के बावजूद बजट न मिलना चर्चा का विषय है।
प्राप्त जानकारी अनुसार करीब तीन सौ से अधिक आवेदन गरीब दलित पिछड़ों और सामान्य वर्ग तथा अल्प संख्यकों के ऑन लाइन हुए तीन चार माह हो रहे हैं किंतु विभाग के पास सरकार ने बजट नहीं दिया जिससे लोगों में आयोजन न होने से मायूसी दिख रही है। कई गरीब इस इंतजार में है कि सामूहिक विवाह के आयोजन हों तो लड़की को वहीं से बिदाई कर दें। क्यों कि विवाह के लिए पैसे नहीं है न शक्ति है। लोगों के उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है।
इसी तरह मांडा ब्लाक में हुए कई आवेदन,भारतगंज,कोरांव नगर पंचायत में हुए पंजीकरण वर वधुओं के विवाह नहीं कराए गए जिससे लोगों में नाराजगी है।
समाज कल्याण विभाग कोरांव के अधिकारी धनाभाव में वैवाहिक कार्यक्रम की तारीख सुनिश्चित नहीं कर पा रहे हैं। फिलहाल उक्त सरकार की महत्वपूर्ण योजना का बजट न मिलना सरकार पर सवालिया उंगली उठना तो वाजिब ही हैं।
क्षेत्रीय विधायक राजमणि कोल से तत्काल समाज कल्याण मंत्री से अथवा मुख्य मंत्री से वार्ता कर सामूहिक विवाह अप्रैल के अंत तक निश्चित कराने की मांग की है, अन्यथा गरीबों का दिल टूट जाएगा।



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प्रयागराज। शंकरगढ़ नगर में संचालित इंग्लिश मीडियम स्कूलों की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। बोर्ड पर नाम तो इंग्लिश मीडियम का है, लेकिन कक्षाओं में शिक्षक हिंदी में ही पढ़ाते हैं। अभिभावकों का कहना है कि जब पढ़ाई हिंदी में हो रही है तो इंग्लिश मीडियम का टैग लगाने का औचित्य क्या है?अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन हर शैक्षिक सत्र में किताबें बदल देता है। उनका सवाल है कि क्या हर साल इतिहास, गणित या विज्ञान का पाठ्यक्रम बदल जाता है? पुरानी किताबें बेकार हो जाती हैं और अभिभावकों पर हर वर्ष नई महंगी किताबों का अतिरिक्त बोझ पड़ता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, ज्यादातर स्कूलों में योग्य शिक्षक नहीं हैं। स्कूलों ने स्थानीय स्तर पर ऐसे शिक्षकों को रखा है जिनकी न तो अंग्रेजी पर पकड़ है और न ही हिंदी पर। इससे बच्चों की बुनियाद कमजोर हो रही है। बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव भी है शंकरगढ़ के इन स्कूलों में बच्चों के लिए साफ और शुद्ध पेयजल तक की व्यवस्था नहीं है। गर्मी में बच्चे परेशान होते हैं, लेकिन प्रबंधन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। शिक्षक अपनी खामी मानी जब एक पत्रकार के सवाल पर स्कूल की एक शिक्षिका ने खुद स्वीकार किया कि "आपकी बात जायज है। नाम इंग्लिश मीडियम है, लेकिन बातचीत हिंदी में हो रही है, जो गंभीर विषय है। अभिभावकों का कहना है कि जब फीस इंग्लिश मीडियम और सीबीएसई बोर्ड यूपी इंग्लिश मीडियम बोर्ड के नाम पर ली जाती है तो कक्षाओं में हिंदी का उपयोग क्यों होता है? शिक्षक आपस में भी हिंदी में बात करते हैं, जबकि स्कूल कैंपस में संवाद अंग्रेजी में होना चाहिए। इससे बच्चों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और उनमें अंग्रेजी बोलने की उमंग जगेगी। अभिभावकों ने शिक्षा विभाग से मांग की है कि इंग्लिश मीडियम के नाम पर चल रहे इन स्कूलों की जांच की जाए। मानकों का पालन न करने वाले स्कूलों पर कार्रवाई हो, ताकि बच्चों का भविष्य अंधकार में न जाए।
1 hour and 49 min ago
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