थाना सिविल लाइंस एंटी रोमियो स्क्वाड व महिला बीट अधिकारियों द्वारा सार्वजनिक स्थानों में जागरूकता अभियान चलाया गया
विश्वनाथ प्रताप सिंह
प्रयागराज। आज पुलिस आयुक्त व अपर पुलिस आयुक्त महोदय के निर्देशन में व पुलिस उपायुक्त नगर व अपर पुलिस उपायुक्त नगर के कुशल पर्यवेक्षण में नारी सुरक्षा, सम्मान एवं स्वावलंबन हेतु चलाये जा रहे अभियान “मिशन शक्ति विशेष अभियान फेज-5.0 द्वितीय चरण” के तहत नगर जोन के थाना सिविल लाइंस में गठित एंटीरोमियों स्क्वाड व महिला बीट अधिकारियों द्वारा प्रमुख स्थानों पर महिला सशक्तिकरण के सम्बन्ध में बालिकाओं/छात्राओं एवं महिलाओं को महिला सुरक्षा व महिला सशक्तिकरण के संबंध में जागरूक करते हुए गुड-टच, बैड-टच तथा विभिन्न हेल्पलाइन- वूमेन पॉवर लाइन-1090, आपातकालीन सेवा यूपी-112, चाइल्ड हेल्पलाइन-1098, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन-1076, स्वास्थ्य सेवा-102, एम्बुलेंस-108, साइबर क्राइम-1930 आदि के बारे में जानकारी दी गई। साथ ही मिशन शक्ति केन्द्र, एण्टी-रोमियो स्क्वाड व आत्मरक्षा सम्बंधी टिप्स आदि के बारे में विस्तृत रुप से जानकारी देकर जागरुक किया गया ।



लालापुर से मनकामेश्वर धाम तक गूंजे जय परशुराम के नारे
रोटी छिनी तो सड़कों पर उतरेंगे प्रशासन की सख्ती से लाखों मजदूरों पर टूटा रोज़गार का पहाड़
प्रयागराज। शंकरगढ़ नगर में संचालित इंग्लिश मीडियम स्कूलों की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। बोर्ड पर नाम तो इंग्लिश मीडियम का है, लेकिन कक्षाओं में शिक्षक हिंदी में ही पढ़ाते हैं। अभिभावकों का कहना है कि जब पढ़ाई हिंदी में हो रही है तो इंग्लिश मीडियम का टैग लगाने का औचित्य क्या है?अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन हर शैक्षिक सत्र में किताबें बदल देता है। उनका सवाल है कि क्या हर साल इतिहास, गणित या विज्ञान का पाठ्यक्रम बदल जाता है? पुरानी किताबें बेकार हो जाती हैं और अभिभावकों पर हर वर्ष नई महंगी किताबों का अतिरिक्त बोझ पड़ता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, ज्यादातर स्कूलों में योग्य शिक्षक नहीं हैं। स्कूलों ने स्थानीय स्तर पर ऐसे शिक्षकों को रखा है जिनकी न तो अंग्रेजी पर पकड़ है और न ही हिंदी पर। इससे बच्चों की बुनियाद कमजोर हो रही है। बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव भी है शंकरगढ़ के इन स्कूलों में बच्चों के लिए साफ और शुद्ध पेयजल तक की व्यवस्था नहीं है। गर्मी में बच्चे परेशान होते हैं, लेकिन प्रबंधन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। शिक्षक अपनी खामी मानी जब एक पत्रकार के सवाल पर स्कूल की एक शिक्षिका ने खुद स्वीकार किया कि "आपकी बात जायज है। नाम इंग्लिश मीडियम है, लेकिन बातचीत हिंदी में हो रही है, जो गंभीर विषय है। अभिभावकों का कहना है कि जब फीस इंग्लिश मीडियम और सीबीएसई बोर्ड यूपी इंग्लिश मीडियम बोर्ड के नाम पर ली जाती है तो कक्षाओं में हिंदी का उपयोग क्यों होता है? शिक्षक आपस में भी हिंदी में बात करते हैं, जबकि स्कूल कैंपस में संवाद अंग्रेजी में होना चाहिए। इससे बच्चों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और उनमें अंग्रेजी बोलने की उमंग जगेगी। अभिभावकों ने शिक्षा विभाग से मांग की है कि इंग्लिश मीडियम के नाम पर चल रहे इन स्कूलों की जांच की जाए। मानकों का पालन न करने वाले स्कूलों पर कार्रवाई हो, ताकि बच्चों का भविष्य अंधकार में न जाए।
विश्वनाथ प्रताप सिंह
1 hour and 41 min ago
- Whatsapp
- Facebook
- Linkedin
- Google Plus
0- Whatsapp
- Facebook
- Linkedin
- Google Plus
0.1k