मुआवजा विवाद में परिवार का सामाजिक बहिष्कार, गया के बरई गांव में बढ़ा तनाव, DM-SSP को आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की
गया: गया जिले के आंती थाना क्षेत्र अंतर्गत बरई गांव में उत्तर कोयल नहर परियोजना के मुआवजे को लेकर शुरू हुआ विवाद अब एक गंभीर सामाजिक और कानूनी संकट का रूप ले चुका है। आरोप है कि गांव की एक कथित समिति द्वारा न केवल एक परिवार पर जबरन दबाव बनाया गया, बल्कि उनकी आर्थिक और सामाजिक रूप से घेराबंदी करते हुए पूरे परिवार का सामाजिक बहिष्कार भी कर दिया गया। पीड़ित परिवार ने बुधवार को जिलाधिकारी और पुलिस कप्तान को आवेदन देकर इस मामले में जिला प्रशासन से हस्तक्षेप और न्याय की गुहार लगाई है।
पीड़ित राम केवट, जो बरई गांव के निवासी हैं, ने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को आवेदन देकर आरोप लगाया है कि गांव के योगेंद्र यादव, श्याम देव गौतम रजक, सुखेंद्र यादव,महेंद्र यादव, रंजन रजक और अवधेश यादव कुछ प्रभावशाली लोगों ने मुआवजे की राशि को लेकर उन पर अनुचित दबाव बनाया। राम केवट के अनुसार, उनकी माता स्वर्गीय दुखनी देवी के नाम पर दर्ज 61 डिसमिल जमीन में से 16.5 डिसमिल भूमि उत्तर कोयल नहर परियोजना के तहत अधिग्रहित की गई थी। इसके बदले सरकार द्वारा उनके खाते में लगभग 4 लाख 90 हजार रुपये का मुआवजा दिया गया।
यहीं से विवाद की शुरुआत हुई। राम केवट का आरोप है कि 15 मार्च 2026 को गांव में एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें कुछ लोगों ने उनसे मुआवजे की राशि उनके चाचा वंशी केवट को देने का दबाव बनाया। उन्होंने जब इसका विरोध किया, तो कथित रूप से उनसे जबरन हस्ताक्षर कराकर एक निर्णय लिखवा लिया गया। इतना ही नहीं, उनके खाते से 55 हजार रुपये निकलवाकर उनके चाचा के पुत्र को दे दिए गए।
पीड़ित के अनुसार, इसके बाद 22 मार्च को फिर से एक बैठक बुलाई गई, जिसमें शेष राशि देने के लिए उन पर दबाव डाला गया। जब उन्होंने इनकार किया, तो उन्हें धमकाया गया और बैठक से भगा दिया गया। मामला यहीं नहीं रुका, बल्कि 5 अप्रैल को गांव की कथित समिति ने एक और बैठक कर राम केवट और उनके पूरे परिवार के सामाजिक बहिष्कार का निर्णय ले लिया। स्थिति और गंभीर तब हो गई जब 8 अप्रैल की शाम गांव में लाउडस्पीकर के माध्यम से इस बहिष्कार की सार्वजनिक घोषणा कर दी गई। घोषणा में कहा गया कि कोई भी ग्रामीण राम केवट और उनके परिवार से बातचीत नहीं करेगा। यदि कोई ऐसा करता पाया गया, तो उस पर 2 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। साथ ही दुकानदारों को निर्देश दिया गया कि वे इस परिवार को कोई सामान न दें। गेहूं की पिसाई, खेतों में पानी और फसल कटाई जैसे जरूरी कार्यों में भी सहयोग न करने की बात कही गई।
पीड़ित परिवार का कहना है कि इस सामाजिक बहिष्कार ने उनके सामने रोजमर्रा की जिंदगी को बेहद कठिन बना दिया है। गांव में कोई उनसे बात नहीं कर रहा है, जिससे वे पूरी तरह अलग-थलग पड़ गए हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं। परिवार के सदस्यों को भोजन, कृषि कार्य और अन्य आवश्यक सेवाओं के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। राम केवट ने यह भी बताया कि उनके पास लाउडस्पीकर से की गई घोषणा की ऑडियो रिकॉर्डिंग मौजूद है, जो पूरे घटनाक्रम का प्रमाण है। इसके अलावा, उन्हें एक वकील के माध्यम से नोटिस भी भेजा गया है, जिसमें उन पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने सरकारी अधिकारियों को रिश्वत देकर मुआवजा राशि अपने खाते में डलवाई है। उन्होंने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि यह उनकी छवि खराब करने और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करने की साजिश है। इस पूरे मामले ने गांव में तनाव का माहौल पैदा कर दिया है और कानून-व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सामाजिक बहिष्कार जैसी प्रथाएं न केवल अमानवीय हैं, बल्कि संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों का भी उल्लंघन करती हैं। किसी व्यक्ति या परिवार को इस तरह समाज से अलग-थलग करना कानूनी रूप से भी अपराध की श्रेणी में आता है।
पीड़ित परिवार ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस मामले में तत्काल कार्रवाई करते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और सामाजिक बहिष्कार को समाप्त कराया जाए। उन्होंने यह भी आशंका जताई है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो स्थिति और बिगड़ सकती है।
यह घटना न केवल एक परिवार की पीड़ा को दर्शाती है, बल्कि ग्रामीण समाज में अब भी चल रही गैरकानूनी सामुदायिक व्यवस्थाओं की सच्चाई को भी उजागर करती है। सवाल यह है कि क्या प्रशासन समय पर हस्तक्षेप कर पीड़ित परिवार को न्याय दिला पाएगा और ऐसे मामलों में सख्त संदेश दे पाएगा, या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह केवल कागजों में ही सिमट कर रह जाएगा।

गया: गया जिले के आंती थाना क्षेत्र अंतर्गत बरई गांव में उत्तर कोयल नहर परियोजना के मुआवजे को लेकर शुरू हुआ विवाद अब एक गंभीर सामाजिक और कानूनी संकट का रूप ले चुका है। आरोप है कि गांव की एक कथित समिति द्वारा न केवल एक परिवार पर जबरन दबाव बनाया गया, बल्कि उनकी आर्थिक और सामाजिक रूप से घेराबंदी करते हुए पूरे परिवार का सामाजिक बहिष्कार भी कर दिया गया। पीड़ित परिवार ने बुधवार को जिलाधिकारी और पुलिस कप्तान को आवेदन देकर इस मामले में जिला प्रशासन से हस्तक्षेप और न्याय की गुहार लगाई है।

गया जिले में हाल ही में तीन पत्रकारों पर हुए जानलेवा हमले के बाद स्थानीय बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश व्याप्त है ! इस कायराना घटना की कड़ी निंदा करते हुए विशाल प्राइवेट आईटीआई, बोधगया के ट्रस्टी एवं प्रतिष्ठित युवा पत्रकार आकाश प्रियदर्शी ने दोषियों की अविलंब गिरफ्तारी की मांग की है ! प्रसिद्ध समाजसेवी स्वर्गीय बादल सिन्हा के पुत्र आकाश प्रियदर्शी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पत्रकारों पर हमला सीधे तौर पर लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को कुचलने का प्रयास है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा ! उन्होंने जिला पुलिस प्रशासन को सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इस मामले में संलिप्त अपराधियों को जल्द सलाखों के पीछे नहीं भेजा गया, तो जिले के समस्त पत्रकार एकजुट होकर उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे ! प्रियदर्शी ने प्रशासन से मांग की है कि हमलावरों को ऐसी कड़ी सजा दिलाई जाए जो भविष्य में मिसाल बने, ताकि लोकतंत्र की रक्षा करने वाले पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और ऐसी हिंसक घटनाओं की पुनरावृत्ति दोबारा न हो !
गया: बिहार कुम्हार प्रजापति समन्वय समिति, जिला शाखा गया की ओर से गुरुवार को आज प्रजापति धर्मशाला, दांडी बाग में कोर कमेटी की एक अति आवश्यक बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता अध्यक्ष कृष्ण कुमार अजय ने की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य नालंदा जिले के नूरसराय प्रखंड अंतर्गत अजयपुर गांव में प्रजापति समाज की एक महिला के साथ सरेआम सड़क पर हुई कथित सामूहिक दुष्कर्म की वीभत्स घटना पर चर्चा करना और आगे की रणनीति तय करना था।
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गया: आज रामनवमी के पावन अवसर पर गया जी में भक्ति, आस्था और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। शहर के विभिन्न मोहल्लों और क्षेत्रों से हजारों की संख्या में राम भक्तों ने भव्य रामनवमी जुलूस में भाग लिया। पूरे वातावरण में “जय श्री राम” के जयघोष से शहर गूंज उठा और श्रद्धालु भगवान श्रीराम के प्रति अपनी आस्था प्रकट करते हुए आगे बढ़ते रहे।इसी पवित्र अवसर पर भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा एबं राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन के द्वारा श्रद्धालुओं की सेवा हेतु एक विशेष व्यवस्था की गई। जीबी रोड स्थित केदारनाथ मार्केट के पास, विजय लड्डू के समीप श्रद्धालुओं के लिए शरबत, पानी, फल एवं चना का वितरण करने हेतु स्टॉल लगाया गया। इस सेवा कार्य का उद्देश्य जुलूस में शामिल राम भक्तों को राहत पहुंचाना और उन्हें प्रसाद के रूप में शीतल पेय शरबत फल चना उपलब्ध कराना था।
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गयाजी। शहर में अतिक्रमण हटाने के नाम पर नगर निगम प्रशासन का एक अजीबो-गरीब कारनामा सामने आया है। जहां अतिक्रमणकारियों पर कार्रवाई होनी थी, वहां निगम प्रशासन ने खुद के ही बनाए डिवाइडर को तोड़ दिया, जिससे लाखों रुपये की सरकारी राशि पानी में बह गई।
2 hours and 10 min ago
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