ज्ञान भारतम मिशन के अन्तर्गत ‘राष्ट्रीय पाण्डुलिपि सर्वेक्षण‘ सांस्कृतिक धरोहर एवं बौद्धिक विकास के महत्वपूर्ण साक्ष्य, प्राचीन पाण्डुलिपियों, त
सुलतानपुर,प्राचीन पाण्डुलिपियों, ताड़पत्र, दुर्लभ अभिलेखों एवं ग्रन्थों आदि के संरक्षण हेतु ज्ञान भारतम् मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन के संदर्भ में मुख्य विकास अधिकारी महोदय द्वारा आज विकास भवन में जिला स्तरीय समिति की बैठक की गई।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि ज्ञान भारतम मिशन भारत की समृद्ध ज्ञान परम्परा और बौद्धिक विरासत को पुनर्जीवित करने की भारत सरकार की एक महत्त्वाकांक्षी राष्ट्रीय पहल है। इस मिशन के अन्तर्गत देश भर में उपलब्ध भारतीय ज्ञान परम्परा से जुडी पाण्डुलिपियों एवं दुर्लभ ताम्रपत्रों आदि का वैज्ञानिक संरक्षण, डिजिटलीकरण और अभिलेखीकरण किया जा रहा है, ताकि यह धरोहर शोधार्थियों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों के लिए सुलभ हो सके। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश प्राचीन ज्ञान दर्शन, साहित्य और संस्कृति की भूमि रहा है। इस दृष्टिकोण से अभियान में जनपद की अहम भूमिका है।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी को अवगत कराया गया कि संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य के पास 02 वैदिक पाण्डुलिपियां संरक्षित पायी गयी हैं तथा संग्रहालय में भी 03 हस्तलिपि पाण्डुलिपियां राधाकृष्ण के संवाद से सम्बन्धित संरक्षित पायी गयी हैं। मुख्य विकास अधिकारी द्वारा निर्देशित किया गया कि सम्बन्धित से अनुमति प्राप्त कर पाण्डुलिपियों को स्कैन कराकर उसको पोर्टल पर डाला जाए तथा उसका व्यापक रूप से प्रचार-प्रसार कराकर उसे आम जनमानस के लिये उपलब्ध कराया जाये।
मुख्य विकास अधिकारी द्वारा निर्देशित किया गया कि पुराने गजेटियर भी पाण्डुलिपि की खोज में सहायक हो सकते है, इस हेतु रेवेन्यु रिकार्ड रूम में पुराने गजेटियर की खोज भी की जाये। प्राचीन पाण्डुलिपियों, ताड़पत्रों एवं दुर्लभ अभिलेखों को पुराने आयुर्वेदाचार्यों व यूनानी चिकित्सा पद्वति के रिकार्डों में खोजा जाये। मुख्य विकास अधिकारी द्वारा निर्देशित किया गया कि सभी सम्बन्धित विभाग ‘ज्ञान भारतम् मिशन‘ ‘राष्ट्रीय पाण्डुलिपि सर्वेक्षण‘ सांस्कृतिक धरोहर एवं बौद्धिक विकास के महत्वपूर्ण साक्ष्य, प्राचीन पाण्डुलिपियों, ताड़पत्रों एवं दुर्लभ अभिलेखों के संरक्षण हेतु जनपद में व्यापक प्रचार-प्रसार करें।
राष्ट्रीय पांडुलिपि संरक्षण का कार्य ज्ञान भारतम मिशन के तहत किया जाएगा। इसके तहत जिला स्तर पर 75 वर्ष से पुरानी पांडुलिपियों या अन्य ग्रंथों की सूची तैयार की जाएगी। जिला स्तर पर तैयार की गई सूची संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश के अन्तर्गत कार्यरत उत्तर प्रदेश राजकीय अभिलेखागार को प्रेषित किया जाएगा। उत्तर प्रदेश राजकीय अभिलेखागार द्वारा जिला स्तर पर तैयार की गयी सूची में अंकित संस्थाओं व व्यक्तियों से सम्पर्क करते हुए पाण्डुलिपियाँ, ग्रन्थों आदि के सूचीकरण, कैटालोगिंग, संरक्षण, डिजिटलीकरण आदि का कार्य ज्ञान भारतम् मिशन के साथ समन्वय करते हुए कराया जाएगा। सर्वेक्षण का कार्य 03 माह के भीतर पूर्ण किया जायेगा। इस कार्य को सरकारी कर्मचारी, सरकारी शिक्षक, मठ, मंदिरों के मठाधीश, पुजारी सदस्य आदि द्वारा ज्ञान भारतम् ऐप के माध्यम से किया जा सकता है।
1 hour and 16 min ago
- Whatsapp
- Facebook
- Linkedin
- Google Plus
1