बाबू शोभनाथ सिंह मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा कविगोष्ठी संपन्न
मुंबई । बाबू सोमनाथ सिंह मेमोरियल ट्रस्ट पालघर इकाई द्वारा शनिवार 11 अप्रैल 2026 को ऑनलाइन कविगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता अमरनाथ द्विवेदी ने किया तथा मुख्य अतिथि के रूप में भारती शर्मा उपस्थित थीं।मंच का संचालन वरिष्ठ साहित्यकार रामकृष्ण वि.सहस्त्रबुद्धे ने किया। गोष्ठी का शुभारंभ अर्चना झा के सरस्वती वंदना से हुई। उपस्थित साहित्यकारों में लक्ष्मी यादव,प्रोफेसर अशोक मिश्र,किरन मिश्रा, कवि एवं पत्रकार विनय शर्मा दीप,अर्चना झा,इंदिरा पाण्डेय सांकृत्यायन उपस्थित थे।उक्त गोष्ठी का आयोजन पालघर इकाई अध्यक्ष किरन तिवारी ने किया।प्रयागराज इकाई द्वारा गोष्ठी 8 अप्रैल को संस्था की महासचिव सत्यभामा के मार्गदर्शन एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अयोध्या प्रसाद द्विवेदी की उपस्थिति में संपन्न हुआ।मुख्य अतिथि के रूप में डॉ आनंद श्रीवास्तव एवं अध्यक्ष के रुप में डॉ राजेन्द्र प्रसाद शुक्ल रहे।संचालन बांदा के गोपाल दास गुप्ता ने किया।शशी की मधुर वाणी वंदना से शुभारंभ हुआ।ज्ञानती ने संस्कृत में वीणा पाणी के लिए अपने मधुर उद्गार, सुंदरम तिवारी ने सुन्दर स्वर में गीत,रेनू की मां के लिए प्रस्तुत की गई कविता से सभी का मन भावुक हो गया।वहीं सबरेज भाई,शशि दीदी,गोपाल दास गुप्ता,डॉ आनंद श्रीवास्तव ने खूबसूरत प्रस्तुति से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।9 अप्रैल को लखनऊ इकाई द्वारा तृतीय मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन हुआ जिसका शुभारंभ सुनील कुमार खुराना के सरस्वती वंदना से हुआ।अध्यक्षता वरिष्ठ कवि रामबहाल सिंह बहाल ने की तथा मुख्य अतिथि के रूप में संस्थापिका सत्यभामा सिंह तथा उपाध्यक्ष ए.पी. द्विवेदी उपस्थित रहे। कवियों में अलका आर्य केसरी, रामराज भारती,मोनिका वर्मा, नय्यर बिस्वानी, सुनील कुमार खुराना, अयोध्या प्रसाद द्विवेदी, डॉ.खुशबू शांतिलेख, डॉ.प्रतिभा, राम बहाल  सिंह बहाल तथा मधुलिका स्वरूप आदि ने काव्य पाठ किया।संचालन लखनऊ इकाई अध्यक्षा मधुलिका स्वरूप ने किया।उपाध्यक्षा डॉ.खुशबू शांतिलेख ने आभार व्यक्त किया।सभी इकाइयों की गोष्ठी के सफल आयोजन हेतु संस्थापक अध्यक्ष शिवकुमार सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
आशा ताई के कालजई गीतों की जादुई आवाज हमेशा गूंजती रहेगी :  कृपाशंकर सिंह
मुंबई। महाराष्ट्र के पूर्व गृह राज्यमंत्री कृपाशंकर सिंह ने आज लोअर परेल के कासा ग्रांडे स्थित आवास पर रखी गई भारतीय संगीत की दिग्गज गायिका आशा भोंसले के पार्थिव शरीर का अंतिम दर्शन कर श्रद्धा सुमन अर्पित किया। उन्होंने कहा कि आशा ताई के निधन से एक युग का अंत हो गया है। उनकी बहुमुखी आवाज़ ने सात दशकों तक रोमांस, दर्द और जश्न के हर रंग को जीवंत किया, जिससे संगीत जगत में अपूरणीय क्षति हुई है। उन्होंने कहा कि पद्म विभूषण से सम्मानित आशाताई के कालजयी गीत और जादुई आवाज़ हमेशा गूंजती रहेगी। कृपाशंकर ने अत्यंत भावुक स्वर में गीत की कुछ पंक्तियां आशा ताई को समर्पित करते हुए कहा कि –
अजनबी रहगुज़र के थे ही नहीं
हम जिधर थे ,उधर के थे ही नहीं,
कैसे आते वो हम-सफ़र वापस
जो हमारे सफ़र के थे ही नहीं
जो न आए हमारे दामन में
फल हमारे शजर के थे ही नहीं...।
डॉ रेशू सिंह (सुभद्रा) के उपन्यास This is on Record का विमोचन
मुंबई। एसएनडीटी महिला विश्वविद्यालय, जुहू परिसर के मिनी हॉल में 'This is on record' नामक उपन्यास पुस्तक का विमोचन सुप्रसिद्ध अधिवक्ता एड आभा सिंह, अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार राजदूत संगठन के इंटरनेशनल वर्किंग प्रेसीडेंट संजय जीवनलाल शाह, महिला विंग की राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष अल्पाबेन संजय शाह, वरिष्ठ नगरसेविका सुधा सिंह समेत तमाम गणमान्यों की उपस्थिति में किया गया। यह पुस्तक अंग्रेजी विषय की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ रेशू सिंह (सुमद्रा) द्बारा लिखी गई है। इस उपन्यास में रूपाली जिस संस्था में काम करती है, वहीं शोषण की शिकार होती है। उस संस्था के वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलने के बदले मानसिक प्रताड़ना मिलती है। किंतु रूपाली हार नहीं मानती वह अपने न्याय के लिए संघर्ष करती है। यह कहानी न्याय पाने के सफर में सामाज से, संस्था से आंतरिक परिवेश से मिल रहे संघर्ष व दर्द को दर्शाती है। यही पुस्तक का सारांश है। इस पुस्तक के माध्यम से यह संदेश जाता है कि कार्य क्षेत्र में महिलाओ को अपने अधिकारो का सक्षम प्रयोग करते हुए हो रहे उत्पीड़न के खिलाफ आवाज सशक्त करनी चाहिए। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रुप में प्रसिद्ध तबला वादिका अनुराधा पाल, प्रसिद्ध लेखिका डॉ कल्पना दवे तथा एसएनडीटी महिला विश्वविद्यालय, जुहू परिसर भारतीय ज्ञान केंद्र के निदेशक डॉ जितेंद्र तिवारी ने नारी के शक्ति, धर्म  कर्तव्य एवं गरिमा पर अपने अपने विचार व्यक्त किए। इस पुस्तक विमोचन की अध्यक्षता प्रसिद्ध वकील आभा सिंह ने की। आभा सिंह ने अध्यक्षता करती हुई कही कि हर नारी को समानता एवं अस्मिता के साथ जीने का अधिकार है। इस अवसर पर श्री एम डी शाह महिला कॉलेज मालाड की असिस्टेंट प्रोफेसर (इतिहास विभाग़) डॉ मेरुप्रभा मिश्रा को सेवाप्रीत फाउंडेशन द्वारा नेशनल ग्लोरी ऑफ इंडिया अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। पुस्तक विमोचन अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य लोगों में नेक्सेज कैपिटल के सह संस्थापक राम सिंह, डॉ संगीता राधाकृष्णन, मुंबई प्रदेश सचिव अशोक राय, वरिष्ठ पत्रकार राघवेंद्रनाथ द्विवेदी, राजेश उपाध्याय, संतोष साहू, अरूण कुमार गुप्ता, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नासिक परिसर की पूर्व हिंदी सहायक आचार्या डॉ गीता दुबे, कथाकार जितेंद्र दवे, राष्ट्रीय कवि डॉ रजनी कांत मिश्र, प्रसिद्ध गायिका निवेदिता मिश्रा, सुलेखा वाजपेयी, डॉ अलका अग्रवाल सिगतिया तथा नाबार्ड की डॉ नीलिमा नागेश तथा अंग्रेजी विषय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ नागेश मिश्र आदि उपस्थित थे। इस अवसर पर वैदिक मंत्र के ध्वनि ज्योतिष आचार्य केशव शर्मा के द्वारा किया गया। सरस्वती वंदना संस्कृत की छात्रा भाग्यश्री ने की। भारत की लोकप्रिय प्रसिद्ध गायिका आशा भोसले के निधन परउनकी आत्मा की शांति के लिए सभा में दो मिनट का मौन रखा गया तथा समापन राष्ट्रगान से किया गया। स्वागत भाषण नाबार्ड के अभय कुमार ने, धन्यवाद भाषण डॉ रेशू सिंह (सुमद्रा)ने की, जबकि मंच संचालन प्रिंस ग्रोवर ने किया। पुस्तक विमोचन अवसर पर तमाम गणमान्य उपस्थित रहे।
यशवी लोढ़ा लिखित दूसरी पुस्तक द टीनेज क्रोनिकल्स-बुक 2 पर हुई सार्थक चर्चा
मुंबई।  मायानगरी मुंबई के कैम्प्स कॉर्नर स्थित क्रॉसवर्ड बुक सेंटर में आयोजित एक गरिमापूर्ण समारोह एन ईवनिंग ऑफ यंग वर्ड्स  में किशोरी कवयित्री सुश्री यशवी लोढ़ा के दूसरे पोएट्री कलैक्शन द टीनेज क्रोनिकल्स- बुक 2 के विभिन्न पहलुओं पर  बॉलीवुड की विभिन्न हस्तियों और प्रबुद्ध साहित्यकारों द्वारा सार्थक चर्चा की गई।
     इस गर्मजोशी भरी शाम में बॉलीवुड के कई सेलिब्रिटी और मशहूर साहित्यकार मौजूद थे, जिनमें फिल्म अभिनेत्री ईशा देओल, रकुल प्रीत सिंह और जैकी भगनानी के अलावा वरिष्ठ साहित्यकार श्रीमती मंजू लोढ़ा मुख्य रूप से शामिल रहीं। इस स्टार-स्टडेड गैदरिंग में जाने- माने सोशलाइट्स, करीबी फैमिली फ्रेंड्स और शुभचिंतक बड़ी संख्या में अपना प्यार और सपोर्ट दिखाने के लिए मौजूद रहे। द टीनएज क्रॉनिकल्स – बुक 2 कुल 45 कविताओं का एक कलेक्शन है, जो किशोरों के बड़े होने की अंदरूनी दुनिया को बखूबी दर्शाता है। किशोरों में अपनी पहचान, प्रेशर, अकेलापन, फेयरनेस, उम्मीद और खुद को खोजने जैसी थीम के ज़रिये यह किताब उन सारे सवालों और इमोशंस को दिखाती है, जो अक्सर टीन एज के मनोभावों को प्रभावित करते हैं। कई कविताएँ आज की युवा पीढ़ी से रखी जाने वाली उम्मीदों, लगातार तुलना करने के कल्चर और उन शांत संघर्षों को दिखाती हैं, जो शायद सतही तौर पर हमेशा दिखाई नहीं देते। यह कलेक्शन मेंटल हेल्थ, भविष्य को लेकर अनिश्चितता और बचपन की मासूमियत से बड़े होने की मुश्किलों में होने वाले अहम बदलाव को भी छूता है। साथ ही, इसमें सोच-विचार और उम्मीद का माहौल है, जो पढ़ने वालों को रुकने, खुद को बेहतर समझने और रोज़मर्रा के पलों में मतलब खोजने के लिए बढ़ावा देता है। इस संग्रह की कविताएँ इस बात पर ज़ोर देती हैं कि कन्फ्यूजन और खुद पर शक, बड़े होने का एक स्वाभाविक हिस्सा हैं। मुंबई की  प्रमुख युवा कवयित्री और लेखिका यशवी लोढ़ा, इस अपनी दूसरी किताब में एक ऐसी आवाज़ पेश करती हैं, जो देखने वाली और खुद को समझने वाली दोनों है। उनकी लिखाई उन भावनाओं के बारे में ईमानदार बातचीत शुरू करने की कोशिश करती है, जो कई युवा महसूस करते हैं, लेकिन अक्सर उन्हें बताने में मुश्किल होती है। इस अवसर पर यशवी लोढ़ा ने लाइव कविता पाठ किया, जिसके बाद एक इंटरैक्टिव सेशन और बुक साइनिंग हुई, जहाँ मौजूद लोगों ने उनके काम को करीब से देखा। भारी भीड़ और उत्साहपूर्ण रिस्पॉन्स ने आज के साहित्य में युवा आवाज़ों की बढ़ती पहचान को बखूबी दिखाया। उल्लेखनीय है कि हाल ही में, एक प्राइवेट फंक्शन में द टीनएज क्रॉनिकल्स – बुक 2 के लोकार्पण के बाद इसकी एडवांस कॉपी को रिव्यू करते हुए, सदी के महानायक श्री अमिताभ बच्चन द्वारा भी कवयित्री यशवी लोढ़ा की कविताओं की मुक्त कंठ से सराहना की गई।
भारतीय जनता युवा मोर्चा के मुंबई सचिव बने विराज मुकुंद कुलकर्णी

मुंबई। भाजपा मुंबई अध्यक्ष एड. अमित साटम के मार्गदर्शन में भारतीय जनता युवा मोर्चा के मुंबई अध्यक्ष दीपक सिंह द्वारा जारी पदाधिकारियों सूची के अनुसार विराज मुकुंद कुलकर्णी को भारतीय जनता युवा मोर्चा, मुंबई का सचिव बनाया गया है। अत्यंत विनम्र, शालीन और सुशिक्षित विराज कुलकर्णी ने दी गई जिम्मेदारी के लिए आभार मानते हुए कहा कि वे पूरी समर्पित भावना के साथ पार्टी के विकास की दिशा में निरंतर काम करेंगे। ज्ञातव्य हो कि विराज कुलकर्णी भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यालय मंत्री मुकुंद कुलकर्णी के सुपुत्र हैं।
मोरेश्वर वैद्य की आठवीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में व्याख्यान आयोजित
नालासोपारा आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज के संस्थापक अध्यक्ष एवं प्राचार्य, स्वर्गीय वैद्य श्री. मोरेश्वर वैद्य सर की आठवीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य पर, संस्कृत संहिता विभाग ने "समान वायु चिकित्सा विचार" इस विषय पर एक व्याख्यान का आयोजन किया। संस्था के अध्यक्ष जयप्रकाश दुबे ने स्वर्गीय वैद्य मोरेश्वर वैद्य सर की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया, जिसके बाद आज के व्याख्याता वैद्य माधव भागवत ने धन्वंतरि पूजा की, संस्था के सचिव और  महाविद्यालय के डायरेक्टर डॉ. ओमप्रकाश दुबे, संस्था की विश्वस्त डॉ. ऋजुता दुबे और महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. हेमलता शेंडे ने दीप प्रज्वलन किया। इस कार्यक्रम के  व्याख्याता  वैद्य माधव भागवत को संस्था के अध्यक्ष जयप्रकाश दुबे ने सम्मानित किया और फिर कार्यक्रम शुरू हुआ।
वैद्य माधव भागवत ने कहा, "बीस से पच्चीस साल तक शुद्ध आयुर्वेद चिकित्सा करते हुए, मुझे यह अनुभव हुआ है कि आयुर्वेद के सिद्धांत कभी नहीं बदलते हैं," उन्होंने पचन संस्थान को नियंत्रित करने वाली समान वायु से जुड़ी बीमारियों और उनकी चिकित्सा को आसान भाषा में समझाया, और औषधी सेवन काल का महत्व भी समझाया। इस प्रोग्राम में महाविद्यालय के सभी अध्यापक और विद्यार्थी उपस्थित थेl कार्यक्रम  का संचालन संस्कृत संहिता विभाग प्रमुख वैद्य शुभांगी पाटिल ने किया।
श्री राम कथा महोत्सव में शामिल हुए समाजसेवी ज्ञान प्रकाश सिंह

मुंबई। प्रख्यात समाजसेवी तथा वरिष्ठ भाजपा नेता ज्ञान प्रकाश सिंह ने घाटकोपर पश्चिम स्थित श्री जंगलेश्वर महादेव मंदिर सभागृह में चल रही नौ दिवसीय श्री राम कथा महोत्सव में शामिल होकर कथावाचक डॉ. निवासाचार्य मानस मनीषी से आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर उनके साथ श्री राम कथा के आयोजक रमेश सिंह और उनका परिवार उपस्थित रहा। श्री सिंह ने उनके परिवार के साथ आरती में भाग लिया। पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह कथा राम के आदर्श चरित्र के माध्यम से समाज को धर्म, न्याय और बुराई पर अच्छाई की विजय का मार्ग दिखाती है। इस अवसर पर विधायक दिलीप लांडे भी उपस्थित रहे।
घाटकोपर के श्रीराम कथा महोत्सव में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़
मुंबई। घाटकोपर स्थित जंगलश्वर महादेव मंदिर सभागृह में इन दिनों चल रहे “संगीतमय नौ दिवसीय श्रीराम कथा महोत्सव” ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना दिया है। 5 अप्रैल से प्रारंभ हुआ यह आयोजन 13 अप्रैल 2026 तक जारी है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रतिदिन पहुंचकर भगवान श्रीराम की पावन कथा का श्रवण कर रहे हैं। कथा स्थल पर भक्ति, संगीत और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। प्रख्यात कथा वाचक श्री.श्री. 1008 श्रीमद जगद्गुरु हरि प्रपन्नाचार्य महाराज अपने प्रवचनों में राम के आदर्शों को सरल भाषा में प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि श्रीराम कथा केवल कहानी नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है, जो मनुष्य को मर्यादा, धैर्य और धर्म के मार्ग पर चलना सिखाती है।” वहीं कथा संयोजक श्री रमेश छेदी सिंह ने बताया, “यह आयोजन समाज में भक्ति और संस्कारों को मजबूत करने का एक प्रयास है, हमें खुशी है कि बड़ी संख्या में श्रद्धालु इसमें सहभागिता कर रहे हैं। इस भव्य आयोजन ने न केवल धार्मिक आस्था को सशक्त किया है, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक मूल्यों को भी मजबूती दी है। प्रतिदिन शाम आयोजित हो रही कथा में परिवारों की भागीदारी विशेष रूप से देखने को मिल रही है, जिससे पूरा वातावरण राममय और भक्तिरस से सराबोर हो गया है।
तरुण कला संगम द्वारा 7 मई को राजकुमार सिंह को दिया जाएगा पत्रकारिता पुरस्कार

मुंबई। महानगर की प्रतिष्ठित सामाजिक और सांस्कृतिक संस्था तरुण कला संगम विगत अनेक वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट और प्रेरणादायक कार्य करने वाले पत्रकारों को पुरस्कृत करती चली आ रही है। तरुण कला संगम के अध्यक्ष चित्रसेन सिंह और महामंत्री दीपक सिंह ने बताया कि संस्था द्वारा इस वर्ष गुरुवार,07 मई, 2026 को चर्चगेट स्थित सम्राट होटल में शाम 4 बजे पत्रकारिता पुरस्कार समारोह का भव्य आयोजन किया गया है। वरिष्ठ पत्रकार विश्वनाथ सचदेव की अध्यक्षता में निर्णायक मंडल द्वारा वर्ष 2025 के पत्रकारिता पुरस्कार  के लिए नवभारत टाइम्स के वरिष्ठ पत्रकार राजकुमार सिंह का चयन किया गया है। संस्था द्वारा उन्हें पुरस्कार के रूप में स्मृति चिन्ह तथा  ₹100000 (एक लाख रुपए) की राशि प्रदान की जाएगी। संस्था द्वारा अब तक पुरस्कृत किए गए पत्रकारों में गणेश मंत्री,लालजी मिश्र, शचींद्र त्रिपाठी, गंगाधर ढोबले, विजेंद्र तिवारी , आनंद राजवर्धन, विमल मिस्र जैसे मूर्धन्य पत्रकारों का समावेश है।
‘माय मुंबई’ प्रदर्शनी में दिखी बेघर नागरिकों द्वारा खींची अद्वितीय कलाकृतियां
मुंबई : तेज़ रफ्तार और भागदौड़ भरी मुंबई में कई ऐसे दृश्य होते हैं, जो अक्सर हमारी नजरों से छूट जाते हैं। इन्हीं “अनदेखी और अलग” तस्वीरों को ‘माय मुंबई’ छायाचित्र प्रदर्शनी ने सामने लाने का कार्य किया। खास बात यह रही कि ये सभी तस्वीरें उन बेघर नागरिकों द्वारा खींची गई थीं, जिन्होंने कभी कैमरा तक नहीं पकड़ा था। इसके बावजूद उनकी नजरों से कैद हुए ये छायाचित्र अद्वितीय और भावनात्मक अभिव्यक्ति 8का सशक्त माध्यम बनकर सामने आए, जिनका सभी ने दिल से सराहना की।३५ बेघर लोगों ने Fujifilm Quicksnap डिस्पोज़ेबल कैमरों का उपयोग करके कुल ९४५ तस्वीरें खींचीं। मुंबई स्थित पहचान संस्था द्वारा आयोजित यह विशेष प्रदर्शनी मुंबई प्रेस क्लब में सफलतापूर्वक संपन्न हुई। इस अनोखे प्रोजेक्ट के तहत बेघर नागरिकों ने स्वयं मुंबई के विभिन्न पहलुओं को अपने कैमरे में कैद किया, जिससे शहर को देखने का एक नया और संवेदनशील दृष्टिकोण सामने आया। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एवं राज्य स्तरीय आश्रय निगरानी समिति के अध्यक्ष उज्ज्वल उके ने भी इस पहल की सराहना की। उन्होंने अपने छात्र जीवन के फोटोग्राफी अनुभव साझा करते हुए कहा कि बेघर नागरिकों द्वारा तस्वीरों के माध्यम से अपनी कहानी कहना अत्यंत प्रेरणादायक है।कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार एवं सूचना अधिकार कार्यकर्ता अनिल गलगली और भाजपा प्रवक्ता संजय ठाकूर प्रमुख अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने पहचान संस्था के सामाजिक कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि बेघर लोगों के लिए आश्रय और उनके विचारों को मंच देना आज की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। संस्था के संस्थापक-संचालक बृजेश आर्य ने प्रोजेक्ट के पीछे की प्रेरणा साझा करते हुए पिछले दो वर्षों में आयोजित सफल प्रदर्शनों का उल्लेख किया। कार्यक्रम में पूर्व मुंबई विश्वविद्यालय कुलगुरु प्रो. भालचंद्र मुणगेकर, पूर्व उपमहापौर अरुण देव, अमरजीत मिश्रा, एडवोकेट संतोष पांडे, उदयप्रताप सिंह, सुमिति सिंह, रवि नायर, डॉ. सुरैना मल्होत्रा, भावना जैन, निजामुद्दीन राईन, प्रमिला शर्मा, डॉ. दीपनारायण शुक्ला, सोनल खानोलकर, डॉ. धीरज सिंह, राजेंद्र आकेलकर, रौनक कुकड़े, विजय सिंह, इंद्रजीत सिंह, जमीर काज़ी, भगवती मिश्रा, अंकित मिश्रा और डिंपल छेड़ा सहित कई गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही। पहचान फाउंडेशन की टीम—सुभाष, रेचेल, समीर और सार्थक—के प्रयासों की भी सभी ने सराहना की। विशेष रूप से, प्रदर्शनी में शामिल बेघर छायाकारों ने इस पहल को केवल एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि अपनी पहचान, भावनाओं और संघर्षों को अभिव्यक्त करने का सशक्त माध्यम बना दिया।
‘माय मुंबई’ प्रदर्शनी ने यह सिद्ध कर दिया कि कला किसी साधन की मोहताज नहीं होती, बल्कि संवेदनशील दृष्टि और अनुभव ही उसे असाधारण बनाते हैं।