पहले मीडिल ईस्ट पर सरकार का समर्थन किया, अब किस बात है शशि थरूर हैं असंतुष्ट?

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पाकिस्तान ने औपचारिक तौर पर ईरान और अमेरिका को युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत की मेज़बानी की पेशकश कर दी है। कहा जा रहा है कि दोनों देशों के बीच यह बातचीत इस्लामाबाद में हो सकती है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए 'सार्थक और निर्णायक वार्ता' की मेजबानी को लेकर उनका देश तैयार है। यह घोषणा मीडिया की उन खबरों के बाद आई है जिनमें कहा गया है कि पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने के लिए पाकिस्तान, मिस्र और तुर्किये परोक्ष रूप से प्रयास कर रहे हैं। अब ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत कराने में पाकिस्तान की भूमिका पर कांग्रेस नेता शशि थरूर ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।

शांति प्रयासों में पाकिस्तान की भूमिका पर निराश

पश्चिम एशिया संकट पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की रणनीति का अबतक खुलकर समर्थन करने वाले कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने अमेरिका और ईरान के बीच संभावित वार्ता में पाकिस्तान की भूमिका पर निराशा जताई है। उन्होंने इसे शर्मनाक बताते हुए कहा कि भारत को इस मौके पर शांति प्रयासों में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि उन्होंने अब तक केंद्र सरकार की संयमित प्रतिक्रिया का समर्थन किया था, इस उम्मीद में कि भारत इस अवसर का उपयोग शांति स्थापना के लिए करेगा।

थरूर बोले-हमें हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठना चाहिए

शांति के वैश्विक प्रयासों पर थरूर ने भारत सरकार के रुख पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि हम शांति के पक्ष में तो हैं, लेकिन वर्तमान में शांति बहाली के लिए हमारी सक्रिय भागीदारी नहीं दिख रही है। एक राष्ट्र के तौर पर हम इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले देशों में से एक हैं, इसलिए हमें हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठना चाहिए।

थरूर बोले-हमें पहल करनी चाहिए थी

थरूर के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर भारत को शांति की आवाज के रूप में पेश करते रहे हैं, ऐसे में यह मौका भारत के लिए महत्वपूर्ण था। कांग्रेस सांसद ने कहा कि वह पिछले तीन हफ्तों से भारत से अपील कर रहे थे कि वह अपने मजबूत कूटनीतिक संबंधों का इस्तेमाल कर दोनों पक्षों को बातचीत के लिए प्रेरित करे। उन्‍होंने कहा कि अगर पाकिस्तान में शांति वार्ता होती है तो भारत का उससे कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन हमें पहल करनी चाहिए थी। उन्होंने यह भी जोड़ा कि भले ही पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की इस दिशा में आगे बढ़े हैं, लेकिन भारत को इसका कोई श्रेय नहीं मिल रहा।

वित्त वर्ष 27 तक मजबूती की राह पर चलेगा देश का EV सेक्टर: आयुष लोहिया
नई दिल्ली। भारत का इलेक्ट्रिक वाहन (EV) सेक्टर अब शुरुआती तेज़ वृद्धि के दौर से निकलकर स्थिर और टिकाऊ विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में वही कंपनियां टिकेंगी, जिनके पास मजबूत वित्तीय आधार, उन्नत तकनीक और भरोसेमंद सप्लाई चेन होगी। यह बात ज़ुपेरिया ऑटो के सीईओ आयुष लोहिया ने कही।
उद्योग के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025 में देश में लगभग 11–12 लाख इलेक्ट्रिक दोपहिया और 6 लाख से अधिक इलेक्ट्रिक तीनपहिया वाहन बिके। उत्तर प्रदेश इस क्षेत्र में अग्रणी राज्यों में उभर रहा है, जहां ई-रिक्शा और ई-ऑटो की संख्या लगातार बढ़ रही है।

* बाजार में बढ़ेगा एकीकरण
इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बाजार पर लोहिया ने कहा कि मौजूदा असमानता भविष्य में बाजार के एकीकरण को तेज़ करेगी।
उन्होंने कहा, “जिन कंपनियों के पास मजबूत पूंजी और सप्लाई चेन है, वे ही टिक पाएंगी, जबकि कई छोटे स्टार्टअप्स आर्थिक दबाव के कारण अगले 18–24 महीनों में विलय या बाजार से बाहर हो सकते हैं।”

* सप्लाई और लागत बनी चुनौती
लोहिया के अनुसार, बैटरी, मोटर और अन्य जरूरी पुर्जों की सप्लाई में बाधाएं अभी भी उद्योग के सामने बड़ी चुनौती हैं।
उन्होंने कहा, “बढ़ती इनपुट लागत और सप्लाई की दिक्कतों के कारण नई कंपनियों को मुनाफा कमाने में समय लगेगा, लेकिन यही दौर उद्योग को मजबूत बनाएगा।”

* FY27 तक बदलेगी तस्वीर
वित्त वर्ष 2027 तक EV सेक्टर के और मजबूत होने की उम्मीद जताते हुए उन्होंने कहा कि शहरीकरण, ई-कॉमर्स और छोटे व्यवसायों के विस्तार से इलेक्ट्रिक कार्गो और तीनपहिया वाहनों की मांग तेजी से बढ़ेगी।
“कम लागत और बेहतर आय की वजह से थ्री-व्हीलर इस बदलाव की रीढ़ बने रहेंगे,” उन्होंने जोड़ा।

* टू-व्हीलर सेगमेंट में कड़ी प्रतिस्पर्धा
उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रिक दोपहिया बाजार में भी वृद्धि जारी रहेगी, लेकिन प्रतिस्पर्धा काफी कड़ी होगी।
“इस क्षेत्र में वही कंपनियां सफल होंगी, जो गुणवत्ता, सर्विस नेटवर्क और ग्राहकों के भरोसे पर ध्यान देंगी।”

* यूपी बन रहा EV हब
उत्तर प्रदेश को लेकर लोहिया ने कहा कि राज्य तेजी से ई-रिक्शा और लॉजिस्टिक्स EV का बड़ा केंद्र बन रहा है। सरकारी नीतियां, बढ़ती ईंधन कीमतें और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर इस बदलाव को गति दे रहे हैं।

* अनुभव से मिली सीख
अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा, “2008 से इस उद्योग को देखने के बाद मेरा मानना है कि भविष्य उन्हीं कंपनियों का है, जो लंबी सोच और स्थिर रणनीति के साथ आगे बढ़ती हैं।”
उन्होंने बताया कि ज़ुपेरिया ऑटो का उद्देश्य किफायती, भरोसेमंद और पर्यावरण के अनुकूल वाहन उपलब्ध कराना है। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती जागरूकता, सरकारी सहयोग और तकनीकी प्रगति के चलते आने वाले वर्षों में EV सेक्टर देश की परिवहन व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाएगा।
स्क्रैपेज-लिंक्ड EV प्रोत्साहन से लास्ट-माइल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को मिल सकती है रफ्तार
नई दिल्ली। दिल्ली सरकार की प्रस्तावित नई स्क्रैपेज-लिंक्ड प्रोत्साहन योजना राजधानी में स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। इस योजना के तहत पुराने वाहनों को स्क्रैप कर नए इलेक्ट्रिक वाहन (EV) खरीदने पर ₹1 लाख तक का प्रोत्साहन दिया जाएगा।
नीति के अनुसार, दिल्ली में पंजीकृत पुराने वाहन मालिक यदि अपने वाहन को अधिकृत स्क्रैपिंग केंद्र में जमा कर छह महीने के भीतर नया EV खरीदते हैं, तो वे इस लाभ के पात्र होंगे। योजना में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों पर ₹10,000, तीनपहिया वाहनों पर ₹25,000 और इलेक्ट्रिक कारों पर ₹1 लाख तक की सब्सिडी देने का प्रस्ताव है। इसके अलावा कुछ EV श्रेणियों के लिए रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस में भी छूट दी जाएगी।
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इस नीति का सबसे अधिक फायदा इलेक्ट्रिक तीनपहिया वाहनों (E3Ws) को होगा, क्योंकि इनका उपयोग शहरी परिवहन और छोटे माल ढुलाई में बड़े पैमाने पर होता है। भारत का E3W बाजार तेजी से बढ़ रहा है और कुल EV अपनाने में इसकी अहम हिस्सेदारी है।
आयुष लोहिया योधा के CEO ने कहा कि स्क्रैपेज-लिंक्ड प्रोत्साहन नीतियां पुराने और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को हटाकर इलेक्ट्रिक विकल्प अपनाने की प्रक्रिया को तेज कर सकती हैं, खासकर कमर्शियल मोबिलिटी सेक्टर में।
उन्होंने कहा, “इलेक्ट्रिक तीनपहिया वाहन शहरी परिवहन में EV अपनाने का सबसे व्यावहारिक माध्यम हैं। यह प्रोत्साहन ड्राइवरों और छोटे फ्लीट ऑपरेटर्स के लिए शुरुआती लागत को कम करता है, जो अपनी आजीविका के लिए इन वाहनों पर निर्भर हैं।”
उन्होंने आगे बताया कि इलेक्ट्रिक वाहनों की परिचालन लागत पारंपरिक ईंधन आधारित वाहनों की तुलना में काफी कम होती है, जिससे यह बदलाव आर्थिक रूप से भी लाभकारी साबित होता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की नीतियां न केवल शहरी प्रदूषण को कम करने में मदद करेंगी, बल्कि पुराने ऑटो-रिक्शा और छोटे मालवाहक वाहनों के बड़े बेड़े को आधुनिक बनाने में भी अहम भूमिका निभाएंगी।
जैसे-जैसे शहर उत्सर्जन कम करने और वायु गुणवत्ता सुधारने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं, स्क्रैपेज-लिंक्ड EV प्रोत्साहन भारत के लास्ट-माइल ट्रांसपोर्ट सिस्टम के तेजी से विद्युतीकरण में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत! ईरान ने खोल दिया होर्मुज स्ट्रेट, अब बिना रोक-टोक गुजरेंगे जहाज*

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ईरान में जंग तेज होता जा रहा है। ईरान-अमेरिका के बीचा सीजफायर के आसार बनते नहीं दिख रहे हैं। होर्मुज संकट अब भी बरकरार है। दुनियाभर के जहाजों के लिए ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता बंद कर रखा है। इससे पश्चिम एशिया में ईंधन का संकट गहराता जा रहा है। हालांकि, इस बीच ईरान ने भारत के लिए होर्मुज स्ट्रेट खोल दिया है।

ईरान ने बुधवार को ही यह साफ कर दिया था कि वह मित्र देशों के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य खोल रहा है। भारत में ईरान के कॉन्सुलेट जनरल ने गुरुवार को ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के हवाले से यह जानकारी दी है। मुंबई स्थित ईरान के कॉन्सुलेट जनरल ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में ईरान के फैसले की जानकारी दी।

भारत समेत पांच देशों को राहत

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा, 'हमने होर्मुज स्ट्रेट से चीन, रूस, भारत, इराक और पाकिस्तान को गुजरने की अनुमति दी है।' क्षेत्र में जारी संघर्ष के बावजूद भारत के साथ-साथ रूस, चीन, पाकिस्तान और इराक के जहाजों को इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से सुरक्षित मार्ग प्रदान किया गया है. इस तरह से पांच देशों के लिए ईरान ने होर्मुज का दरवाजा खोल दिया है।

होर्मुज जलडमरूमध्य दुश्मन देशों के लिए बंद

यह बयान उस समय आया है, जब ईरान ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुश्मन देशों के लिए बंद है, लेकिन मित्र देशों के जहाज़ों को गुजरने दिया जा रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि जिन देशों को शत्रु माना जाता है या जो मौजूदा संघर्ष में शामिल हैं, उनसे जुड़े जहाजों को जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका, इजरायल और कुछ खाड़ी देशों के जहाज, जो वर्तमान संकट में भूमिका निभा रहे हैं, उन्हें जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने होर्मुज खोलने की अपील की

संयुक्त राष्ट्र (यूएन)के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी होर्मुज स्ट्रेट खोलने के आह्वान किया था। गुटेरेस ने कहा था, 'होर्मुज जलडमरूमध्य का लंबे समय तक बंद रहना, वैश्विक बुवाई के मौसम के एक बहुत ही खास मोड़ पर तेल, गैस और उर्वरक की आवाजाही को बाधित कर रहा है। सभी क्षेत्र और उससे भी आगे सामान्य लोग गंभीर मुश्किलें झेल रहे हैं और बहुत ज्यादा असुरक्षा के माहौल में जी रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र युद्ध के प्रभावों को कम करने की कोशिश कर रहा है। और इसके प्रभावों को कम करने का सबसे आसान तरीका है, युद्ध बंद हो- तुरंत।'

भारत के लिए राहत भरी खबर

ईरान के इस फैसले से भारत को बड़ी राहत मिली है, क्योंकि भारत का काफी तेल इसी रास्ते से आता है। अगर यह रास्ता बंद रहता, तो पेट्रोल-डीजल महंगे हो सकते थे। ईरान ने पहले भी साफ किया था कि गैर-शत्रुतापूर्ण जहाज (यानी जो ईरान के खिलाफ नहीं हैं) इस रास्ते से गुजर सकते हैं, लेकिन अब यह नियम और सख्त कर दिया गया है, हर जहाज को पहले अनुमति और सुरक्षा नियमों का पालन करना होगा।

आंध्र प्रदेश में लॉरी और बस में भीषण टक्कर, आग का गोला बनी यात्रियों से भरी बस, 10 लोग जिंदा जले

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आंध्र प्रदेश के मार्कापुरम के पास गुरुवार तड़के एक दर्दनाक सड़क हादसे में 14 लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई। रायवरम के पास एक निजी ट्रैवल्स बस और एक टिपर लॉरी के बीच हुई टक्कर के बाद बस में आग लग गई। जिसमें 14 यात्रियों की मौत हो गई, जबकि 20 यात्री घायल हो गए।

आग लगने के बाद यात्री अंदर ही फंस गए

जानकारी के मुताबिक, एक निजी ट्रेवल्स बस तेलंगाना के जगित्याल से आंध्र प्रदेश के कालिगिरी की ओर जा रही थी। इसी दौरान रायवरम के पास तेज रफ्तार टिपर लॉरी से आमने-सामने की टक्कर हो गई। टक्कर के बाद बस में अचानक आग लग गई, जिससे कई यात्री अंदर ही फंस गए और जलकर उनकी मौत हो गई।

भीषण टक्कर की वजह से बस में लगी आग

टक्कर इतनी भीषण थी कि बस तुरंत आग की चपेट में आ गई और पूरी तरह जलकर राख हो गई। शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक 14 यात्री बस में फंस गए और जलकर मर गए। डीएसपी राजू के अनुसार, इस घटना में कई यात्री जिंदा जल गए हैं। उन्होंने बताया कि यह हादसा गुरुवार की सुबह हुआ। उन्होंने कहा कि शुरुआती जांच में सामने आया है कि भीषण टक्कर की वजह से ही बस में आग लग गई थी

2 0 यात्रियों ने बस से निकलकर बचाई जान

हादसे के बाद लगभग 20 यात्रियों ने किसी तरह बाहर निकलकर जान बचाई। सभी घायलों को पास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। मौके पर वरिष्ठ पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारी पहुंच गए हैं और मामले की जांच शुरू कर दी गई है।

सीएम चंद्रबाबू नायडू ने शोक व्यक्त किया

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने इस दुर्घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने घटना की जानकारी लेते हुए अधिकारियों से बात की और स्थिति की समीक्षा की। सीएम ने घायलों के इलाज के बारे में विस्तार से पूछताछ की और निर्देश दिया कि सभी घायलों को बेहतर से बेहतर मेडिकल सुविधा मुहैया कराई जाए। उन्होंने दुर्घटना के कारणों की गहन जांच कराने और विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश भी दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह की दुर्घटनाएं बेहद दुखद हैं और सरकार घायलों के परिवारों तथा मृतकों के परिजनों को हर संभव मदद पहुंचाएगी।

पाकिस्तान-नेपाल-बांग्लादेश से जुड़े इंटरनेशनल हथियार तस्करी मॉड्यूल का खुलासा, 10 गिरफ्तार

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दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने राजधानी में सक्रिय एक इंटरनेशनल आर्म्स ट्रैफिकिंग मॉड्यूल का बड़ा खुलासा करते हुए 10 तस्करों को गिरफ्तार कर लिया है। यह पूरा नेटवर्क पुरानी दिल्ली से ऑपरेट हो रहा था और इसके तार पाकिस्तान, नेपाल और बांग्लादेश तक जुड़े हुए थे।

छापेमारी कर गिरोह के 10 गुर्गों को दबोचा

पुलिस ने पुरानी दिल्ली इलाके से संचालित होने वाले इस गिरोह के 10 प्रमुख गुर्गों को गिरफ्तार किया है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि क्राइम ब्रांच की एंटी रॉबरी स्नैचिंग सेल के इंस्पेक्टर मान सिंह के सुपरविजन में इंस्पेक्टर सुंदर गौतम और अन्यों की टीम ने तकनीकी निगरानी से संदिग्धों के कॉल रिकॉर्ड्स खंगाले। मुखबिरों की मदद से उनकी मूवमेंट का महीनों तक विश्लेषण किया गया। इसके बाद 13-14 मार्च को पुख्ता सूचना के आधार पर छापेमारी कर गिरोह के सदस्यों राहिल, हाशिम, सैम, सोनू गुप्ता, घनश्याम, वसीम, निशांत, नवाब, नौमान और नौशाद को दबोच लिया गया।

अलग-अलग देशों से लाए गए ऑटोमैटिक हथियार

पूरे अभियान में कुल 21 हथियार जब्त किए गए हैं। ये सभी अत्याधुनिक ऑटोमैटिक हथियार और पिस्तौलें हैं जो कई अलग-अलग देशों से लाए गए थे। बरामद हथियारों की लिस्ट में शामिल हैं:

1. चेक गणराज्य की सब-मशीन गन

2. चेक गणराज्य की शैडो सीजेड पिस्तौल

3. तुर्की की स्टोएगर पिस्तौल

4. चीन की पीएक्स-3 पिस्तौल

5. इटली की बेरेटा पिस्तौल

6. ब्राजील की टॉरस पिस्तौल

7. जर्मनी की वाल्थर पिस्तौल

8. विशेष बलों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली पीएक्स-5.7 पिस्तौल

पाकिस्तान से नेपाल के रास्ते भारत तक पहुंचते थे हथियार

जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि ये हथियार पाकिस्तान से नेपाल बॉर्डर के जरिए भारत में प्रवेश करते थे। इसके बाद इन्हें दिल्ली-एनसीआर तक लाया जाता था, जहां से पूरे देश में इनकी सप्लाई की जाती थी। तस्कर सुरक्षा एजेंसियों की नजर से बचने के लिए इस रूट का इस्तेमाल करते थे। दिल्ली को इस नेटवर्क का मुख्य वितरण केंद्र बनाया गया था, जहां से अलग-अलग राज्यों के आपराधिक गिरोहों तक हथियार पहुंचाए जाते थे।

कांग्रेस को खाली करना होगा अकबर रोड वाला सालों पुराना पार्टी ऑफिस, 28 मार्च तक की डेडलाइन

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दिल्ली में कांग्रेस को अपने पुराने दफ्तर यानी 24 अकबर रोड बंगले को खाली करने का नोटिस मिला है। इसके अलावा यूथ कांग्रेस कार्यालय 5 रायसीना रोड को खाली करने का नोटिस भेजा गया है। जानकारी के अनुसार, पार्टी को 28 मार्च तक इन दोनों दफ्तरों को खाली करना अनिवार्य कर दिया गया है।

एस्टेट विभाग ने जारी किया नोटिस

पार्टी को एस्टेट विभाग की ओर से बेदखली का नोटिस जारी किया गया है। एस्टेट विभाग ने बुधवार को जारी नोटिस में साफ कहा है कि 24 अकबर रोड के साथ-साथ 5 रायसीना रोड स्थित युवा कांग्रेस के दफ्तर को भी 28 मार्च तक खाली किया जाए। बताया जा रहा है कि यह बंगला भी कांग्रेस के नाम पर ही आवंटित था, जिसका उपयोग उसकी सहयोगी इकाई द्वारा किया जा रहा था।

48 साल पुराना मुख्यालय

यह बंगला यह बंगला पिछले 48 वर्षों से कांग्रेस पार्टी का मुख्यालय रहा है। हालांकि, पिछले साल कांग्रेस ने कोटला मार्ग पर अपना नया मुख्यालय इंदिरा भवन का उद्घाटन पहले ही कर लिया है, लेकिन पुराने बंगले 24 अकबर रोड से अब तक पलायन नहीं किया था। इस कारण पार्टी की गतिविधियां इसी स्थान पर लगातार जारी थीं।

कानूनी विकल्प पर विचार कर रही है

नोटिस मिलने के बाद से पार्टी राहत के लिए कनूनी विकल्प पर विचार कर रही है। पार्टी इस मसले पर मजबूरी और औपचारिकताओं को लेकर प्रतिक्रिया तैयार कर रही है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पार्टी इस कार्रवाई को अदालत में चुनौती देने की तैयारी कर रही है, ताकि जबरन बेदखली से बचा जा सके। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, वरिष्ठ कांग्रेस नेता और सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने इस कदम को ‘गैरकानूनी और राजनीतिक रूप से प्रेरित’ करार दिया है। उन्होंने कहा कि इस नोटिस के खिलाफ सभी कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल किया जाएगा।

गैस बुकिंग के लिए फिर नया अपडेट, डबल कनेक्शन वालों को अब 35 दिन बाद मिलेगा दूसरा सिलिंडर

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मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग के चलते देशभर में घरेलू गैस (एलपीजी) सिलेंडर की भारी कमी देखी जा रही है। इस बीच गैस बुकिंग को लेकर फिर नए नियम आ गए हैं। तेल कंपनियों ने इन्‍हें लागू कर दिया है। अब उपभोक्ताओं को अगला सिलेंडर बुक करने के लिए पहले से ज्यादा इंतजार करना पड़ेगा। नए नियमों के अनुसार कोई भी ग्राहक तय समय से पहले गैस सिलेंडर की बुकिंग नहीं कर पाएगा। सरकार का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य कालाबाजारी पर रोक लगाना और वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाना है।

दो सिलेंडर कनेक्शन वालों के लिए नया नियम

नए नियमों के अनुसार, 14.2 किलो वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की डिलीवरी और अगली रिफिल बुकिंग के बीच का अंतराल अब 25 दिन से बढ़ाकर 35 दिन कर दिया गया है। यानी अब उपभोक्ताओं को अगली बुकिंग के लिए पहले से ज्यादा इंतजार करना होगा। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के तहत यह नियम खासतौर पर उन लोगों पर लागू होगा, जिनके पास दो सिलेंडर वाला कनेक्शन है। यानी डबल बॉटम कनेक्शन वालों के लिए ये नियम है।

उज्जवला लाभार्थियों को करना होगा और ज्यादा इंतजार

उज्जवला योजना के लाभार्थियों को अब और ज्यादा इंतजार करना पड़ेगा। इस योजना के तहत जुड़े लोगों को अगली बुकिंग के लिए 45 दिन का इंतजार करना अनिवार्य होगा। वहीं जिन उपभोक्ताओं के पास सिर्फ एक सिलेंडर वाला कनेक्शन है, वे पिछली डिलीवरी के 25 दिन बाद ही नया सिलेंडर बुक कर सकेंगे।

समय सीमा पिछली डिलीवरी की तारीख से गिनी जाएगी

यह समय सीमा पिछली डिलीवरी की तारीख से गिनी जाएगी, न कि बुकिंग की तारीख से। अगर कोई उपभोक्ता तय समय से पहले बुकिंग करने की कोशिश करता है, तो सिस्टम उसकी बुकिंग को खुद ब्लॉक कर देगा। इसके अलावा डिलीवरी के समय ओटीपी बताना भी अनिवार्य कर दिया गया है। अगर कोई उपभोक्ता ई-केवाईसी पूरी नहीं करता है, तो उसकी बुकिंग रद्द भी की जा सकती है।

छोटे सिलेंडरों के लिए भी बदले नियम

सिर्फ 14.2 किलो सिलेंडर ही नहीं, बल्कि छोटे सिलेंडरों के लिए भी नई समय सीमा लागू की गई है। 5 किलो के सिलेंडर के लिए 9 से 16 दिन और 10 किलो सिलेंडर के लिए 18 से 32 दिन निर्धारित किए गए हैं।

जंग जारी रही, तो गंभीर दुष्परिणाम तय', मिडिल ईस्ट जंग पर राज्यसभा में बोले पीएम मोदी

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प्रधानमंत्री मोदी ने आज पश्चिम एशिया संकट को लेकर राज्यसभा में जानकारी दी। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर राज्यसभा में बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हालात भारत के लिए भी चिंताजनक हैं और व्यापार के रास्ते प्रभावित हुए। उन्होंने कहा कि हमें सावधान, सतर्क और तैयार रहना है।

भारत के लिए भी चिंताजनक स्थिति-पीएम मोदी

पीएम मोदी पश्चिम एशिया संकट पर राज्यसभा में बोलते हुए कहा कि इस युद्ध ने पूरी दुनिया में गंभीर ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है। भारत के लिए भी यह एक चिंताजनक स्थिति है। व्यापारिक रास्ते प्रभावित हुए हैं इसलिए सप्लाई प्रभावित हुई है। लगभग एक करोड़ भारतीय खाड़ी देशों में रहते और काम करते हैं, और उनके जीवन और आजीविका की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी भारत के लिए एक प्रमुख चिंता का विषय है।

3,75,000 से ज्यादा भारतीय सुरक्षित भारत लौटे- पीएम मोदी

राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'संकट की इस स्थिति में दुनिया भर में भारतीयों की सुरक्षा हमारे लिए सबसे जरूरी है। अब तक 3,75,000 से ज़्यादा भारतीय सुरक्षित भारत लौट आए हैं। अकेले ईरान से 1000 से ज्यादा भारतीय लौटे हैं, इनमें से 700 से ज़्यादा मेडिकल स्टूडेंट हैं। संकट की इस घड़ी में, हमारी सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है। सभी देशों ने वहां भारतीयों की सुरक्षा का भरोसा दिया है। हालांकि, यह दुख की बात है कि हमलों में कुछ भारतीयों की मौत हो गई और कुछ दूसरे घायल हो गए। प्रभावित परिवारों को हर जरूरी मदद दी जा रही है।'

जंग जारी रही तो होंगे गंभीर दुष्परिणाम- पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने संवाद का रास्ता सुझाया है। युद्ध से जिस तरह की परिस्थितियां बनी हैं, अगर यह जंग जारी रही तो गंभीर दुष्परिणाम होंगे। हम रणनीति के साथ काम कर रहे हैं कि भारत पर इसके कम से कम दुष्परिणाम हों। पश्चिम एशिया में जंग की वजह से जितना नुकसान हो चुका है, उससे रिकवर करने में भी दुनिया को काफी समय लगेगा।

राज्यों की भूमिका भी इस संकट में अहम-पीएम मोदी

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, यह राज्यों का सदन है और यह संकट आने वाले समय में हमारी बड़ी परीक्षा लेने वाला है। राज्यों की भूमिका भी इस संकट में अहम होने वाली है। पीएम गरीब कल्याण योजना का लाभ गरीबों को समय पर मिलता रहे, यह प्रयास करना होगा। राज्यों को प्रवासी मजदूरों की समस्याओं पर भी ध्यान देना होगा। कालाबाजारी, जमाखोरी की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई होनी चाहिए। जरूरी चीजों की सप्लाई सुनिश्चित करना राज्यों की प्राथमिकता होनी चाहिए।

हमें तेजी से रिफॉर्म करने होंगे-पीएम मोदी

संकट चाहे कितना भी बड़ा हो, भारत की तेज ग्रोथ बनाए रखना हम सभी का दायित्व है। हमें तेजी से रिफॉर्म करने होंगे। ये टीम इंडिया की भी बड़ी परीक्षा है। कोविड काल में हमने नया मॉडल सामने रखा था। हमें उसी भावना के साथ आगे भी काम करना होगा। सभी राज्य सरकारों और केंद्र के प्रयासों से देश इस गंभीर संकट का प्रभावी तरीके से सामना कर पाएगा।

धर्म परिवर्तन पर खत्म हो जाएगा अनुसूचित जाति का दर्जा, सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला

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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट कहा कि अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा केवल हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के लोगों को ही प्राप्त है। यदि कोई व्यक्ति इन तीन धर्मों में से किसी से दूसरे धर्म जैसे ईसाई या इस्लाम में परिवर्तित हो जाता है, तो वह अपना अनुसूचित जाति का दर्जा स्वतः खो देता है।

आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा

सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें एक ईसाई पादरी की तरफ से दर्ज एससी/एसटी एक्ट की FIR को रद्द किया गया था। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि अगर कोई व्यक्ति उदाहरण के लिए ईसाई धर्म अपना लेता है और ईसाई धर्म के अनुसार जीवन जी रहा है तो उसे अनुसूचित जाति का व्यक्ति नहीं माना जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस प्रशांत मिश्रा और जस्टिस एन वी अंजारिया की बेंच ने संविधान के अनुसूचित जाति आदेश, 1950 का हवाला दिया है। बेंच ने कहा है कि इस आदेश के खंड 3 के मुताबिक हिंदू, सिख, बौद्ध के अलावा किसी अन्य धर्म में धर्मांतरण करने वाला व्यक्ति जन्म के आधार पर मिलने वाला एससी का दर्जा तुरंत खो देता है। कोई भी संवैधानिक लाभ, आरक्षण या कानूनी सुरक्षा उस व्यक्ति को नहीं दी जा सकती जो अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने शिकायतकर्ता की इस दलील को भी खारिज कर दिया कि उसके पास तहसीलदार की तरफ से जारी प्रमाण पत्र है। इसके मुताबिक वह अनुसूचित जाति 'माडिगा' का सदस्य है। कोर्ट ने कहा कि यह जाति प्रमाण पत्र पहले ही रद्द हो जाना चाहिए था। इस सर्टिफिकेट के आधार पर वह SC/ST एक्ट के तहत सुरक्षा नहीं मांग सकता।

क्या है मामला?

आंध्र प्रदेश के पित्तलवानीपालेम के रहने वाले चिंथदा आनंद ने खुद को अनुसूचित जाति वर्ग का बताते हुए एक एफआईआर दर्ज करवाई। उनका आरोप था कि कुछ लोगों ने उनके साथ मारपीट की और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल कर अपमानित किया। SC/ST एक्ट के तहत दर्ज एफआईआर के खिलाफ आरोपी पक्ष हाई कोर्ट पहुंचा। वहां उसने दलील दी कि शिकायतकर्ता ईसाई धर्म अपना चुका है। 10 साल से ज्यादा समय से वह एक पादरी के तौर पर काम कर रहा है। इसलिए, वह अनुसूचित जाति का हिस्सा नहीं रह गया है। 30 अप्रैल 2025 को हाई कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार किया और पादरी की तरफ से दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया।