भगवान महावीर के जन्म कल्याणक के अवसर पर भक्ति संगीत संध्या का आयोजन
मुंबई। भगवान महावीर के जन्मकल्याणक के पावन अवसर पर लोढ़ा फाउंडेशन द्वारा शारदा मंदिर हाई स्कूल, गामदेवी, मुंबई में भक्ति संगीत संध्या एवं स्वस्तिक प्रतियोगिता का भव्य एवं गरिमामय आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम श्रद्धा, संस्कृति और सामूहिक सहभागिता का अद्भुत संगम बना।
इस आयोजन का नेतृत्व डॉ. मंजू मंगलप्रभात लोढ़ा (अध्यक्ष – लोढ़ा फाउंडेशन, अंतर्राष्ट्रीय हिंदी जैन साहित्य संगम, जीवो दक्षिण मुंबई, महावीर स्वामी जैन देरासर मंडल; उपाध्यक्ष – महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी; ‘परमवीर चक्र अवार्ड डायरी’ की लेखिका एवं प्रख्यात समाजसेविका) एवं हुलाशीबेन राजुजी वाणीगोता द्वारा किया गया। उनके मार्गदर्शन में भक्ति गीत, नृत्य एवं विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ स्वस्तिक प्रतियोगिता का सफल आयोजन हुआ।
इस पावन अवसर पर मुख्य अतिथि पद्मश्री सोमा घोष ने अपनी मधुर स्वर लहरियों में नवकार मंत्र का गायन कर समस्त उपस्थित जनों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनके भावपूर्ण प्रस्तुतीकरण ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति रस से सराबोर कर दिया। भक्ति संगीत संध्या की शुरुआत “वीर झूले त्रिशला झुलावे… धीरे-धीरे मीठा-मीठा गीत सुनावे…” जैसे मधुर भजनों से हुई, जिसने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया। प्रसिद्ध संगीतकार आशीष जैन ने अपने सुरों से भक्ति रस की अविरल धारा प्रवाहित की। स्वस्तिक प्रतियोगिता में विभिन्न महिला मंडलों ने अत्यंत उत्साह और समर्पण के साथ भाग लिया। प्रतिभागियों ने 2 फीट आकार के स्वस्तिक का सुंदर एवं सृजनात्मक निर्माण कर अपनी कला और श्रद्धा का परिचय दिया। इस अवसर पर गणीवय श्री जिन रत्न विजय जी महाराज साहब के शिष्य गुरुदेव ने भगवान महावीर के जन्मकल्याणक के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए सभी को उनके सिद्धांतों पर चलने का संदेश दिया।
उल्लेखनीय है कि डॉ. मंजू मंगलप्रभात लोढ़ा एवं हुलाशीबेन वाणीगोता द्वारा पिछले 17 वर्षों से निरंतर इस भक्ति संध्या का आयोजन किया जा रहा है, जो समाज में संस्कृति, एकता और आध्यात्मिकता को सशक्त बनाने का कार्य कर रहा है। कार्यक्रम में लगभग 28 महिला मंडलों की सहभागिता रही तथा 300 से अधिक महिलाओं की गरिमामय उपस्थिति ने आयोजन को विशेष रूप से सफल और प्रेरणादायक बना दिया।
National Hackathon में जय अरविंद शुक्ला ने जीता विजेता का खिताब
मुंबई। देशभर के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों के बीच आयोजित IIT Hyderabad के National Hackathon में हमारे बेटे जय अरविंद शुक्ला ने शानदार सफलता हासिल करते हुए विजेता का स्थान प्राप्त किया है। IIIT में Computer Science द्वितीय वर्ष के छात्र जय अरविंद शुक्ला ने अपनी प्रतिभा, तकनीकी दक्षता और नवाचारपूर्ण सोच के बल पर यह उपलब्धि अपने नाम की। इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में देशभर के 52 IIT, NIT और IIITs से आए प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था, जिनके बीच उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए जय ने सफलतम स्थान हासिल कर परिवार, संस्थान और क्षेत्र का नाम गौरवान्वित किया है।जय अरविंद शुक्ला की इस उपलब्धि से मलाड में रहने वाले उनके परिवार में हर्ष का माहौल है। उनकी इस सफलता को युवा प्रतिभा, परिश्रम और समर्पण का प्रेरणादायक उदाहरण माना जा रहा है। National Hackathon जैसे बड़े मंच पर जीत दर्ज करना न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ी के विद्यार्थियों के लिए भी एक प्रेरणा है। जय की इस सफलता पर परिजनों, मित्रों और शुभचिंतकों ने उन्हें बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।
पति और बच्चों की लंबी उम्र का वरदान मांगने का पर्व गणगौर
– डॉ मंजू लोढ़ा, वरिष्ठ साहित्यकार

पति प्रेम का प्रतीक है गणगौर, चिर पुरातन और चिर नूतन है गणगौर, फागुन कृष्ण की एकम से क्षेत्र शुक्ला की तृतीय तक होती है गणगौर पूजा,  माता जानकी ने भी मनचाहा वर पाने किया था गौरी पूजन, मां पार्वती ने की घोर तपस्या शिवजी  को वर रूप पाने  की खातिर, शिवजी ने प्रसन्न होकर मां पार्वती से ब्याह रचाया, पत्नी को इतना स्नेह और सम्मान दिया उसे अपना आधा अंग ही बना लिया, राजस्थान की सूखी माटी में वसंत के आते ही उत्साह और उल्लास की धूम मच जाती हैं, कुंवारी कन्याएं 16 दिन तक बड़े मनोयोग से शिवजी को अपना जीजा मानते हुए सुंदर रंग बिरंगे वस्त्र पहनकर होली के दूसरे दिन से ही करने लगती है ईसर और गोरा की पूजा, शीतला सप्तमी या अष्टमी को बड़ी गणगौर बिठाई जाती हैं, चिकनी मिट्टी से शिव (ईसरजी) पार्वती (गणगौर) कानीराम (कृष्णा) रोआं (सुभद्रा) और मालिन की मूर्तियां बनाई जाती हैं उनका श्रृंगार  किया जाता हैं। सुबह दोपहर रात को गीत गाए जाते हैं। वंश के फैलाव के प्रतीक दूब और फूल लाये जाते हैं, पूजा  की जाती हैं, पूजा के गीत गाए जाते हैं, (गोर  ये गणगौर माता, खोल किंवाड़ी, बायर उभी  बायां पूजण वाली), इसी तरह गणगौर के हर विधा के अनेकों गीत गाए जाते हैं जो हमारी समृद्ध लोक भाषा के प्रतीक हैं, बीकानेर और जयपुर में बड़ी धूमधाम से गणगौर का बिंदोरा निकाला जाता हैं, गणगौर तथा ईसर जी की मूर्तियां की पूजा कुंकू और काजल की 9- 9 टीकी द्वारा किया जाता हैं, दूब से पानी का छींटा दिया जाता हैं, प्रसाद चढ़ाया जाता हैं, अंत में बधावा गाया जाता हैं। महिलाएं सोलह सिंगार करती हैं, बहुत धूमधाम गणगौर पर्व मनाया जाता हैं, पति और बच्चों के लंबी उम्र का वरदान मांगा जाता हैं।
निष्पक्ष और निडर पत्रकारिता के लिए राजकुमार सिंह को तरुण कला संगम पत्रकारिता पुरस्कार
मुंबई। महानगर की प्रतिष्ठित सामाजिक और सांस्कृतिक संस्था तरुण कला संगम द्वारा नवभारत टाइम्स के सहायक संपादक राजकुमार सिंह को वर्ष 2025 का तरुण कला संगम पत्रकारिता पुरस्कार देने की घोषणा की गई है। वरिष्ठ पत्रकार विश्वनाथ सचदेव की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता के माध्यम से राजकुमार सिंह ने आम जनमानस को जगाने तथा राजनीति से जुड़े लोगों को सही दिशा दिखाने का काम किया है । इस बैठक में वरिष्ठ पत्रकार राघवेंद्र द्विवेदी तथा वरिष्ठ पत्रकार ब्रजमोहन पांडे  शामिल रहे। उत्कृष्ट पत्रकारिता के चलते गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार समेत दर्जनों पुरस्कार से अलंकृत राजकुमार सिंह पहले ऐसे पत्रकार रहे, जिन्होंने महाराष्ट्र सरकार द्वारा 2017 में,बाबूराव विष्णू पराडकर उत्कृष्ट पत्रकारिता पुरस्कार में मिले 51,000 रुपए को तत्काल मुख्यमंत्री सहायता निधि में  जमा कर दिया था ताकि गरीब मरीजों का उपचार हो सके। तरुण कला संगम के संस्थापक अध्यक्ष वरिष्ठ समाजसेवी चित्रसेन सिंह ने बताया कि आगामी दिनों में आयोजित एक भव्य समारोह में राजकुमार सिंह को ₹100000 (एक लाख रुपए) नगद तथा स्मृति चिन्ह के साथ पुरस्कृत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि चयन समिति द्वारा राजकुमार सिंह के नाम का सर्वसम्मति से निर्णय किया गया है। संस्था के महासचिव दीपक सिंह ने कहा कि राजकुमार सिंह पिछले 30 वर्षों से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। कलम के सिपाही के रूप में उन्होंने हमेशा  जनता की आवाज को ताकत दी और समाज को मजबूत करने का काम किया है। ऐसे व्यक्ति को पुरस्कृत किए जाने से पत्रकारिता जगत से जुड़े  लोगों को प्रेरणा मिलेगी।
जानिए सपनों की हकीकत
–क्षमा सिंह, योग प्रशिक्षक

सपने हर कोइ देखता है कुछ सपने असली जैसे लगते हैं और कुछ भावुक होते हैं ज्यादातर सपने जागते ही गायब हो जाते हैं सबसे बड़ा सवाल यह है कि दिमाग आखिर सपने बनाता ही क्यों है, और उनमें से ज्यादातर हमारी यादाश्त क्यों मिट जाते हैं । वैज्ञानिको का कहना है कि सपने देखना इस बात से गहराई से जुड़े होते हैं कि सोते समय हमारा दिमाग यादों,इमोशंस और जानकारियों को कैसे प्रोसेस करता है
सपने कब आते हैं?
सपने ज्यादातर नींद के उस फेज में आते हैं जिसे रैपिड आई मूवमेंट स्लीप कहते हैं। इस दौरान दिमाग लगभग उतना ही एक्टिव होता है जितना जागते समय होता है। ब्रेन स्कैन से पता चलता है कि यादाश्त,इमोशन और कल्पना से जुड़े दिमाग के कई हिस्से बहुत ज्यादा एक्टिव हो जाते हैं।

दिमाग में सपने कैसे बनते हैं?
दिमाग के अन्दर कई हिस्से मिलकर सपने बनाते हैं। हिप्पोकैम्पस दिन भर की यादों को प्रोसेस करने में मदद करता है। उसी समय एमिग्डाला बहुत ज्यादा एक्टिव हो जाता है,एमिग्डाला डर और यादों को प्रोसेस करने का भावनात्मक केन्द्र है । यही वजह है कि सपनों में अक्सर डर,उत्साह या घबराहट जैसी भावनाएं होती हैं।
सपने को सेव नहीं कर पाता दिमाग
'आरइएम' स्लीप के दौरान नारएपिनेफ्रीन का स्तर कम होता है। इसलिए दिमाग सपनों के अनुभवों को लम्बी अवधि की यादाश्त में भेजने में मुश्किल महसूस करता है। आसान शब्दों में कहें तो दिमाग सपने का अनुभव तो करता है, लेकिन उसे ठीक से सेव नहीं कर पाता,एक और कारण यह है कि यादें बनाने वाले हिप्पोकैम्पस, सपने देखते समय अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर रहा होता है, अगर यादों को ठीक से एनकोड नहीं किया जाए, जो जागने के बाद सपनों की डिटेल्स जल्द ही धुंधली हो जाती है और हमारा दिमाग वापस अपनी सामान्य जागने वाली गतिविधियों में लग जाता है।
सपनों को लेकर क्या कहते हैं वैज्ञानिक?
वैज्ञानिकों का मानना है कि सपने दिमाग की यादों को व्यवस्थित करने और भावनाओं को प्रोसेस करने में मदद कर सकते हैं। जब हम सो रहे होते हैं तो दिमाग दिन भर के अनुभवों के टुकड़ों को फिर से चलाता है और उन्हें पुरानी यादों और कल्पना के साथ मिला देता है। ये टुकड़े मिलकर उन कहानियों का रूप ले लेते हैं, जिन्हें हम सपनों के तौर पर अनुभव करते हैं।
महाराष्ट्र के नए राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा से कृपाशंकर सिंह ने की शिष्टाचार भेंट
मुंबई। महाराष्ट्र के पूर्व गृह राज्यमंत्री कृपाशंकर सिंह ने आज राज भवन में राज्य के नए राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा से शिष्टाचार भेंट की तथा उनका अभिनंदन किया। त्रिपुरा के पूर्व उपमुख्यमंत्री रह चुके श्री वर्मा ने सीपी राधाकृष्णन और आचार्य देवव्रत के बाद यह पद संभाला है। राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा और कृपाशंकर सिंह ने काफी देर तक एक दूसरे  से बातचीत की तथा सकारात्मक विचारों का आदान-प्रदान किया। कृपाशंकर सिंह ने कहा कि श्री वर्मा अनुभवी एवं विद्वान व्यक्ति हैं, जिसके चलते महाराष्ट्र के विकास की दिशा में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की कुशल नीतियों और दूरदर्शिता पूर्ण योजनाओं को ताकत मिलेगी।
डॉ इन्दिरा गुप्ता यथार्थ राजस्थान इकाई की प्रभारी नियुक्त
मुंबई । राष्ट्रीय लाल साहित्य साधना मंच ग्वालियर मध्य प्रदेश के संस्थापक अध्यक्ष डॉ प्रमोद पल्लवित ने विगत दिनों मुंबई से आनलाइन मिटिंग करके राष्ट्रीय पदाधिकारियों से विमर्श पश्चात अलवर राजस्थान की लोकप्रिय स्त्री रोग विशेषज्ञ कवयित्री लेखिका मोटिवेशनल स्पीकर डॉ इन्दिरा गुप्ता यथार्थ को मार्च 2026 से फरवरी 2027 हेतु संस्था की राजस्थान इकाई का प्रभारी अध्यक्ष मनोनीत किया।उनका कार्य सराहनीय रहा तो पदभार का समय बढ़ाया जाएगा।डॉ यथार्थ एक संवेदनशील,अनुभवी,मानव वेदना के प्रति अपनी संवेदना और अपनी बुद्धि विवेक समर्थ लेखन के माध्यम से समर्पित भाव से लंबे समय से सेवाएं दे रहीं हैं।जयपुर में जन्मी डॉ इन्दिरा एक कुशल चिकित्सक, लेखक, कहानीकार , कवयित्री के रूप में ख्याति प्राप्त हैं। संस्था के राष्ट्रीय मिडिया सचिव विनय शर्मा दीप ने बताया कि डॉ इन्दिरा गुप्ता यथार्थ के मनोनयन से राजस्थान साहित्य जगत प्रफुल्लित ही नहीं  अपितु संस्था का भी विस्तार होगा। उक्त मनोनयन से राजस्थान का युवा साहित्यकार एवं मंच से जुड़े सभी विद्वान काव्य मनीषी, साहित्य अनुरागी एवं पदाधिकारी ने डॉ यथार्थ को हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई दी।
मुंबई की यात्रा पर आए गोरखपुर के प्रधान अरविंद शाही का समरस ने किया सम्मान

मुंबई। मुंबई की यात्रा पर आए उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जनपद स्थित नेवादा के ग्राम प्रधान अरविंद शाही (मंहत शाही) का आज महानगर की प्रतिष्ठित सामाजिक संस्था समरस फाउंडेशन द्वारा बोरीवली पूर्व स्थित कार्यालय में सम्मान किया गया। संस्था की तरफ से शॉल स्मृति चिन्ह और पुष्पगुच्छ द्वारा उनका सम्मान किया गया।

इस अवसर पर उनके साथ मुंबई की यात्रा पर आए अजय प्रताप शाही, संस्था के ट्रस्टी अरुण सिंह, उपाध्यक्ष मुकुंद शर्मा, उपाध्यक्ष मानिकचंद यादव, उपाध्यक्ष राजेंद्र विश्वकर्मा,पूरव गांधी भोला वर्मा, रामलिंगम, मुकेश साहनी समेत अनेक लोग उपस्थित रहे। अरविंद शाही जनपद के उन टॉप प्रधानों में शामिल हैं, जिन्होंने अपने गांव के विकास के लिए अनेक महत्वपूर्ण काम किया है। उन्होंने दिए गए सम्मान के लिए समरस फाउंडेशन के चेयरमैन डॉ किशोर सिंह तथा उनकी पूरी टीम के प्रति आभार व्यक्त किया।
डॉ .मंजू लोढ़ा को साहित्यिक योगदान के लिए मिला राष्ट्रीय सम्मान
मुंबई।आज के समय में जहाँ लोगों का ध्यान तेजी से बदलता है और सामग्री क्षण भर में आगे बढ़ जाती है, वहीं कविता आज भी अपनी शांत और गहरी प्रभावशीलता बनाए हुए है। इसी कड़ी में एक उल्लेखनीय उपलब्धि के रूप में डॉ. मंजू लोढ़ा ने 500 कविताएँ लिखकर एक राष्ट्रीय रिकॉर्ड स्थापित किया है, जो समकालीन साहित्य में एक महत्वपूर्ण योगदान है।यह उपलब्धि केवल एक संख्या नहीं, बल्कि वर्षों की साधना, अनुशासन और भाषा के प्रति गहरे जुड़ाव का परिणाम है। प्रत्येक कविता एक विचार, अनुभव या भावना का प्रतिबिंब है, जिसे शब्दों में संवेदनशीलता के साथ पिरोया गया है। इन 500 कविताओं का संग्रह उनके साहित्यिक समर्पण और रचनात्मकता का सशक्त प्रमाण है। भारत में कविता सदियों से सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का महत्वपूर्ण माध्यम रही है—प्राचीन ग्रंथों से लेकर आधुनिक रचनाओं तक। ऐसे में इस प्रकार की उपलब्धियाँ न केवल व्यक्तिगत प्रयास का सम्मान करती हैं, बल्कि साहित्यिक परंपरा को जीवित और प्रासंगिक बनाए रखने में भी योगदान देती हैं। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि को मान्यता देते हुए ACE बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने डॉ. मंजू लोढ़ा को राष्ट्रीय रिकॉर्ड से सम्मानित किया है। यह सम्मान केवल उनकी रचनाओं की संख्या का नहीं, बल्कि उनके निरंतर प्रयास, समर्पण और सृजनात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। ACE बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, जो कला, शिक्षा, खेल और सामाजिक क्षेत्रों में अनूठी उपलब्धियों को दर्ज करने के लिए जाना जाता है, ऐसे प्रेरणादायक कार्यों को सामने लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह संस्था उन व्यक्तियों को पहचान देती है, जो अपने क्षेत्र में सीमाओं को पार करते हुए नई मिसाल कायम करते हैं। इस सम्मान की खास बात यह है कि यह वास्तविक मानवीय कहानियों को महत्व देता है—संघर्ष, निरंतरता और जुनून की कहानियाँ। डॉ. लोढ़ा की यह यात्रा भी शब्दों के माध्यम से एक अद्भुत साहित्यिक मुकाम तक पहुँचने की कहानी है।
साहित्य विशेषज्ञों के अनुसार, एक लेखक की असली परीक्षा उसकी निरंतरता में होती है। प्रेरणा शुरुआत कर सकती है, लेकिन निरंतर प्रयास ही उस यात्रा को आगे बढ़ाता है। 500 कविताएँ लिखना केवल रचनात्मकता नहीं, बल्कि लंबे समय तक समर्पित रहने की क्षमता को दर्शाता है। डिजिटल युग में जहाँ लेखन के स्वरूप बदल रहे हैं, ऐसी उपलब्धियाँ यह याद दिलाती हैं कि लेखन का मूल तत्व आज भी वही है—अभिव्यक्ति, जुड़ाव और पाठकों को भावनात्मक रूप से स्पर्श करने की शक्ति। डॉ. मंजू लोढ़ा की यह उपलब्धि उभरते लेखकों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। यह संदेश देती है कि निरंतर प्रयास और समर्पण से जुनून को पहचान और सम्मान में बदला जा सकता है। साथ ही, यह एसीई बुक ऑफ रिकॉर्ड्स जैसे मंचों के महत्व को भी रेखांकित करती है, जो सार्थक योगदानों को पहचान देते हैं। यह केवल एक रिकॉर्ड की कहानी नहीं, बल्कि समर्पण, सृजनात्मकता और शब्दों की अमर शक्ति की कहानी है।
बिरला नियारा ने मनाया 55 वां राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस

मुंबई । कामगारों एवं मजदूरों हेतु प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे राष्ट्रीय सुरक्षा अभियान के तहत वरली स्थित बिरला नियारा ने 16 मार्च 2026 को 55 वां राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस मनाया।जिसका आयोजन बिरला नियारा एवं संयोजन लाइटन कंपनी ने किया।उक्त समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उत्कृष्ट लेखक कवि एवं पत्रकार विनय शर्मा दीप के साथ विशिष्ट अतिथियों में नरेंद्र जोशी (बिरला ऑपरेशनल हेड),शैलेंद्र जोशी (बिरला सहाय्यक उपाध्यक्ष ईएसजी),राहुल मेश्राम (बिरला सेफ्टी हेड),टीएस हाँग (बिरला नियारा प्रोजेक्ट हेड),किशोर शेट्ये (प्रकल्प संचालक), आयोजक हरिश ख़ान बिरला नियारा प्रकल्प,सिद्दार्थ डी कामत (प्रोजेक्ट मैनेजर लायटन एशिया) मुख्य रूप से उपस्थित थे।

राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस के शुभ अवसर पर उपस्थित अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर समारोह का शुभारंभ किया। अतिथियों ने कामगारों एवं मजदूरों की सुरक्षा को लेकर उचित मार्गदर्शन किया तथा उनके परिश्रम की सराहना करते हुए उन्हें सम्मान पत्र, मोमेंटो,लाकेट एवं उपहार स्वरूप घरेलू उपयोग में आने वाली सामग्री देकर सम्मानित किया।सर्वोत्तम सुरक्षा कामगिरों में विजय गोडबोले (महाव्यवस्थापक),रुबेन फर्नांडो(उप महाव्यवस्थापक) अभिजीत राठोड (पॅरामेडिक),किशन चौहान(इलेक्ट्रिशियन)सहित जीवन सहारा पैथालॉजी लैब के प्रबंधक तस्लीम सिद्दीकी को सम्मानित किया।उक्त समारोह में कामगारों एवं मजदूरों ने गीत गाकर,तालियां बजाकर मौज-मस्ती किया तथा समारोह में चार चांद लगाया।आयोजक हरिश ख़ान ने सभी के कार्यों की सराहना करते हुए उपस्थित अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम का समापन किया।