मिडिल ईल्ट में जंग के बीच पीएम मोदी की 'डिप्लोमेसी', 5 देशों के नेताओं से की बात

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पश्चिम एशिया में छिड़ी जंग और तेज होती जा रही है। युद्ध में अब ऊर्जा ठिकानों पर हमले हो रहे हैं, जिससे पूरी दुनिया में तेल और गैस की कीमतों में इजाफा होने का डर पैदा हो गया है। पश्चिम एशिया की बदलती स्थिति के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कतर, फ्रांस,जॉर्डन,ओमान और मलयेशिया के नेताओं से फोन पर बात की। प्रधानमंत्री ने ईरान युद्ध में ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाए जाने की निंदा की। 

पीएम मोदी ने संवाद और कूटनीति पर जोर दिया

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने कूटनीतिक स्तर पर सक्रियता तेज कर दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार 19 मार्च 2026 को कतर, फ्रांस, जॉर्डन, ओमान और मलेशिया के नेताओं से अलग-अलग फोन पर बातचीत कर क्षेत्र की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की और तनाव कम करने के लिए संवाद और कूटनीति पर जोर दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने इन सभी वार्ताओं में एनर्जी इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर पर हो रहे हमलों की कड़ी निंदा की और कहा कि ऐसे हमले न केवल क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित करते हैं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी गंभीर असर डाल सकते हैं। उन्होंने खास तौर पर होर्मुज स्‍ट्रेट में सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया, जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा परिवहन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है।

शांति और स्थिरता के लिए समन्वय को जारी रखने की अपील

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से फोन पर हुई बातचीत की जानकारी एक्स हैंडल पर दी। पीएम मोदी ने लिखा " मैंने अपने प्रिय मित्र, राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से पश्चिम एशिया की स्थिति और तनाव कम करने की तत्काल आवश्यकता के साथ-साथ संवाद और कूटनीति की ओर लौटने के बारे में बात की। हम इस क्षेत्र और उससे परे शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए अपने घनिष्ठ समन्वय को जारी रखने के लिए तत्पर हैं।"

कतर में ऊर्जा के बुनियादी ढांचों पर हमलों की कड़ी निंदा

कतर के अमीर तमीम बिन हमद अल थानी के साथ हुई बातचीत में पीएम मोदी ने कहा कि "भारत, कतर के साथ है और क्षेत्र में ऊर्जा के बुनियादी ढांचों पर हमलों की कड़ी निंदा करता है। पीएम मोदी ने कतर के अमीर को कतर में रहने वाले भारतीय समुदाय की देखभाल और समर्थन के लिए आभार जताया और क्षेत्र में शांति और स्थिरता की कामना की।" पीएम मोदी ने कतर के शासक को ईद की अग्रिम शुभकामनाएं भी दीं। 

ऊर्जा अवसंरचना पर हमले निंदनीय-पीएम मोदी

पीएम मोदी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "मैंने फोन पर अपने भाई, जॉर्डन के शाह अब्दुल्ला द्वितीय को ईद की शुभकामनाएं दीं। हमने पश्चिम एशिया में बिगड़ती स्थिति पर चिंता व्यक्त की और क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता की शीघ्र बहाली के लिए संवाद और कूटनीति की आवश्यकता पर बल दिया। पश्चिम एशिया में ऊर्जा अवसंरचना पर हमले निंदनीय हैं और इनसे अनावश्यक तनाव बढ़ सकता है। भारत और जॉर्डन माल और ऊर्जा के निर्बाध पारगमन के लिए प्रतिबद्ध हैं। क्षेत्र में फंसे भारतीयों की सुरक्षित वापसी में जॉर्डन के प्रयासों की हम तहे दिल से सराहना करते हैं।"

पीएम मोदी ने मलेशिया के प्रधानमंत्री से भी की बात

मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम से बातचीत के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स हैंडल पर लिखा "मैंने अपने मित्र, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम से बात की और आगामी ईद-उल-फितर के अवसर पर उन्हें और मलेशिया की जनता को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। हमने पश्चिम एशिया की बेहद चिंताजनक स्थिति पर भी चर्चा की और संवाद एवं कूटनीति के माध्यम से तनाव कम करने और शांति एवं स्थिरता की शीघ्र बहाली के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता को दोहराया।"

ओमान को लेकर क्या बोले पीएम मोदी?

प्रधानमंत्री ने ओमान की संप्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता के उल्लंघन की भारत द्वारा की गई निंदा को दोहराया और भारतीय नागरिकों सहित हजारों लोगों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए किए गए प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा, "भारत और ओमान होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षित और निर्बाध नौवहन के लिए प्रतिबद्ध हैं।"

ईरान-इजराइल के बीच संघर्ष भीषण होता जा रहा

बता दें, ईरान पर यूएस-इजरायल के संयुक्त हमले से शुरू हुआ संघर्ष दिन पर दिन भीषण होता जा रहा है। इसका असर वैश्विक बाजार और अर्थव्यवस्था पर गंभीर रूप में देखने को मिल सकता है। इन सबके बीच भारत अपनी सीक्रेट डिप्लोमेसी से ताजा हालात के दुष्प्रभाव को देश के लिए कम असरदार करने की सफल कोशिशों में लगा है।

अयोध्या में राष्‍ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने की 'श्री राम यंत्र’ की स्थापना, वैदिक मंत्रोच्चार से गूंजा मंदिर प्रांगण

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अयोध्या में राम मंदिर में 'श्री राम यंत्र' की स्थापना हो गई है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंदिर में 'श्री राम यंत्र' की स्थापना पूरे विधि विधान के साथ की। इस दौरान पुजारियों ने मंत्रोच्चारण किया और राष्ट्रपति पूजन ने सामग्री भगवान को अर्पण की। इस दौरान पूरा मंदिर प्रांगण शुभ मंत्रों से गूंज उठा।

वैदिक मंत्रों के बीच राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राम मंदिर के द्वितीय तल पर श्रीराम यंत्र की पूजन के बाद स्थापना की। इस विशेष अनुष्ठान में राष्ट्रपति मूर्मू ने विधिवत पूजा-अर्चना कर सहभागिता की। वैदिक आचार्यों के निर्देशन में पूरे विधि-विधान के साथ पूजा संपन्न कराई गई। श्रीराम यंत्र को राम मंदिर के द्वितीय तल पर स्थापित किया गया है, जिसे अत्यंत शुभ और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस अवसर पर पूरे अयोध्‍या में धार्मिक वातावरण में श्रद्धा और उत्साह का माहौल देखने को मिल रहा है और इसे भक्तों के लिए ऐतिहासिक क्षण के रूप में देखा जा रहा है।

2 साल पहले शंकराचार्य ने भेजा था श्रीराम यंत्र

श्रीराम यंत्र दो साल पहले जगद्गुरु शंकराचार्य विजयेंद्र सरस्वती महाराज ने अयोध्‍या भेजा था। वैदिक गणित और ज्यामितीय आकृतियों पर आधारित यह यंत्र देवताओं का निवास माना जाता है, जो सकारात्मक ऊर्जा आकर्षित करने की क्षमता रखता है। दक्षिण भारत, काशी, अयोध्या के आचार्यों की तरफ से मंदिर में श्रीराम यंत्र के लिए नौ दिवसीय वैदिक अनुष्ठान पहले से ही शुरू हो चुका था।

'श्री राम यंत्र' विजय और मर्यादा का प्रतीक

शास्त्रों के अनुसार, जिस प्रकार 'श्री यंत्र' को देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है, उसी प्रकार 'श्री राम यंत्र' को भगवान विष्णु के अवतार प्रभु श्री राम की विजय और मर्यादा का प्रतीक माना जाता है। इसे विशेष धातुओं के मिश्रण और वैदिक गणनाओं के आधार पर निर्मित किया गया है। राम यंत्र को कांचीपुरम (तमिलनाडु) स्थित मठ में तैयार किया गया। इसके बाद इसे कांचीपुरम से तिरुपति (आंध्र प्रदेश) लाया गया। फिर रथयात्रा के जरिए 10 दिन पहले इसे अयोध्या पहुंचाया गया। राम यंत्र का वजन 150 किलो है। इस पर सोने की परत चढ़ाई गई है।

मंदिर निर्माण में योगदान देने वालों का सम्मान

राम जन्‍मभूमि परिसर में श्रीराम यंत्र स्थापना के अवसर पर राम मंदिर निर्माण में योगदान देने वाले श्रमिकों को सम्मानित किया गया। इस कार्यक्रम में उन सभी लोगों को आमंत्रित किया गया, जिन्होंने गिलहरी योगदान के रूप में मंदिर निर्माण में अपनी भूमिका निभाई। राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा श्रमिकों के साथ-साथ कार्यदायी संस्थाओं के अधिकारियों को भी सम्मानित किया गया। सम्मानित हुए श्रमिकों ने ट्रस्ट के प्रति आभार जताते हुए इसे अपने जीवन का गौरवपूर्ण क्षण बताया।

शशि थरूर ने फिर किया सरकार का समर्थन, बोले- ईरान-इजरायल युद्ध पर चुप्पी कायरता नहीं रणनीति

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पश्चिम एशिया में जंग को लेकर भारत सरकार की चुप्पी पर सवाल उठ रहे हैं। ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल युद्ध पर भारत की नरेन्द्र मोदी सरकार की चुप्पी पर नैतिक कायरता का आरोप लग रहा है। इस बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका-इजरायल युद्ध की वजह से पैदा हुए संकट पर भारत सरकार के स्टैंड का खुलकर समर्थन किया है। 

कांग्रेस के भीतर ही अलग-अलग राय

अमेरिका और इजरायल ने जबसे ईरान पर अटैक किया है, भारत सरकार पर भी देश में “सियासी हमले” हो रहे हैं। सोनिया गांधी ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्‍ला अली खामेनेई की एयर स्‍ट्राइक में मौत की निंदा न करने पर सरकार पर खूब खरी-खोटी सुनाई थी। उन्‍होंने ईरान की संप्रभुता को तार-तार करने के मामले में भारत की चुप्‍पी पर भी गंभीर सवाल उठाए थे। हालांकि, अब कांग्रेस पार्टी के ही सांसद शशि थरूर ने सरकार के रुख का बचाव करते हुए इसे जिम्मेदार कूटनीति बताया है।

भारतीय नीति पर सवाल खड़े करने वालों को दिखाया आईना

केरल के तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद और संयुक्त राष्ट्र के पूर्व राजनियक शशि थरूर ने एक लेख लिखकर उन्होंने मोदी सरकार पर सवाल उठाने वालों को जमीनी हालात और राष्ट्रहित में अपनी गई रणनीति के बारे में समझाने की कोशिश की है। उनका यह लेख इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित हुआ है। थरूर का कहना है कि वेस्‍ट एशिया में छिड़ी जंग पर भारत की चुप्‍पी किसी भी तरह से मोरल सरेंडर यानी नैतिक आत्‍मसमर्पण नहीं है। कांग्रेस सांसद का कहना है कि भारत का साइलेंस एक रिस्‍पॉन्सिबल स्‍टेटक्राफ्ट (सोची-समझी और जिम्‍मेदार कूटनीति) है।

हर स्थिति में सार्वजनिक निंदा ही एकमात्र विकल्प नहीं-थरूर

थरूर ने स्पष्ट किया कि वे खुद मानते हैं कि अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ किया गया सैन्य अभियान अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप नहीं है। यह संप्रभुता, आक्रामकता-विरोध और शांतिपूर्ण समाधान जैसे उन सिद्धांतों के खिलाफ है, जिनका भारत ऐतिहासिक रूप से समर्थन करता रहा है। इसके बावजूद उन्होंने सरकार की आलोचना करने से इनकार करते हुए कहा कि हर स्थिति में सार्वजनिक निंदा ही एकमात्र विकल्प नहीं होती। उन्होंने कहा कि भारत को अपने राष्ट्रीय हित, रणनीतिक साझेदारी और क्षेत्रीय स्थिरता को ध्यान में रखते हुए संतुलित रुख अपनाना होता है। थरूर के मुताबिक, सरकार की चुप्पी कायरता नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति है, और कई बार बिना बयान दिए भी कूटनीतिक रास्ते खुले रखे जा सकते हैं।

सरकार की चुप्पी की निंदा नहीं

थरूर के मुताबिक उनके जैसे जिन लोगों ने पश्चिम एशिया युद्ध पर सरकार की चुप्पी की निंदा नहीं की, लिबरल्स उन्हीं पर निशाना साधने लगे हैं। वे इसे नैतिक कायरता कह रहे हैं। वे हमसे चाहते हैं कि हम यह मांग करें कि भारत नैतिक श्रेष्ठता दिखाते हुए युद्ध को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन घोषित करे। लेकिन, मैं इस संघर्ष पर सरकार की चुप्पी की निंदा नहीं करूंगा।

लाखों भारतीयों के हितों पर होने वाले असर की दिलाई याद

थरूर ने यह भी कहा कि भारत के पश्चिम एशिया में बड़े हित जुड़े हैं करीब 200 अरब डॉलर का व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और लगभग 90 लाख भारतीयों की मौजूदगी, ऐसे में किसी भी कड़े सार्वजनिक बयान से इन हितों पर असर पड़ सकता है। उन्होंने अमेरिका के साथ भारत के रक्षा और तकनीकी संबंधों का भी जिक्र करते हुए कहा कि नैतिक भाषण देकर इन संबंधों को खतरे में डालना समझदारी नहीं होगी।

राष्ट्रीय हितों की रक्षा का व्यावहारिक तरीका-थरूर

जवाहरलाल नेहरू की गुटनिरपेक्ष नीति का हवाला देते हुए थरूर ने कहा कि यह नैतिक रुख से दूरी नहीं, बल्कि शीत युद्ध के दौरान राष्ट्रीय हितों की रक्षा का व्यावहारिक तरीका था। आज के बहुध्रुवीय विश्व में भारत मल्टी-अलाइनमेंट की नीति पर चल रहा है, जहां वह अलग-अलग शक्तियों के साथ संबंध बनाए रखते हुए अपने हितों को प्राथमिकता देता है। 

सोवियत संघ के समय अपनाए गए रणनीति का उदाहरण

थरूर ने आलोचकों पर निशाना साधते हुए कहा कि वे यह भूल जाते हैं कि भारत ने अतीत में भी कई बार राष्ट्रीय हितों के चलते चुप्पी साधी है। इसके लिए उन्होंने सोवियत संघ के द्वारा हंगरी (1956), चेकोस्लोवाकिया (1968) और अफगानिस्तान (1979) में किए गए अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघनों का उदाहरण दिया है, जिसकी निंदा करने में हमने बचने की कोशिश की। क्योंकि, मास्को के साथ अपने रिश्तों को हम खतरे में डालने का जोखिम नहीं ले सकते थे।

सोनिया गांधी ने की थी भारत सरकार की तीखी आलोचना

बता दें कि इसी समाचारपत्र में कुछ दिनों पहले सोनया गांधी ने लेख लिखकर सुप्रीम लीडर अयातुल्‍ला अली खामेनेई और ईरान की संप्रभुता पर आक्रमण की खुले शब्‍दों में निंदा न करने के लिए भारत सरकार की तीखी आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि ईरान के शीर्ष नेता की हत्या जैसे गंभीर अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर भारत का मौन रहना तटस्थता नहीं, बल्कि जिम्मेदारी से पीछे हटना है। उनके अनुसार, ऐसी घटनाएं वैश्विक व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय कानून के लिए गंभीर चुनौती हैं और भारत जैसे देश को इस पर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए।

खतरनाक स्थिति में पहुंची मिडिल ईस्ट में चल रही जंग, अब सऊदी अरब ने दी ईरान को खुली चेतावनी

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मिडिल ईस्ट में चल रही जंग अब खतरनाक स्थिति में पहुंच गई है। ईरान कई देशों पर ताबड़तोड़ हवाई हमले कर रहा है और गैस-तेल के ठिकानों को निशाना बना रहा है। ईरान ने सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात को उनके बड़े तेल और गैस ठिकाने खाली करने की चेतावनी दी है। इससे पूरे क्षेत्र में डर और तनाव बढ़ गया है। खाड़ी देशों पर ईरान के हमलों के बीच सऊदी अरब ने तेहरान को चेतावनी दी है।

सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने कहा कि ईरान को अपने पड़ोसियों पर किए गए हमलों के परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने कहा कि अगर ईरान को लगता है कि खाड़ी देश जवाब देने में असमर्थ हैं, तो तेहरान गलत है। उन्होंने ईरान पर हद पार करने का आरोप लगाया और कहा कि जरूरत पड़ने पर खाड़ी देशों के पास सैन्य कार्रवाई करने का अधिकार सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि ईरान के आगे न तो ब्लैकमेल होंगे और न ही डरेंगे।

रियाद में अरब विदेश मंत्रियों की बैठक

प्रिंस फैसल ने रियाद में अरब और इस्लामिक देशों के विदेश मंत्रियों की आपात बैठक के बाद ये बात कही है। उन्होंने कहा कि ईरान को अपने रवैये पर फिर से विचार करने की जरूरत है। उन्होंने आगे कहा कि ईरान की कार्रवाइयों का उसे राजनीतिक और नैतिक रूप से उल्टा असर झेलना पड़ेगा। प्रिंस फैसल ने कहा कि ईरान के बार-बार के हमलों से उस पर से भरोसा टूट गया है। खास बात है कि जब बैठक चल रही थी, उसी दौरान ईरान ने रियाद और कतर के रास लफान इंडस्टिरयल सिटी पर हमला कर दिया।

क्या सीधे जंग में उतरेगा सऊदी अरब?

हाल के दिनों में सऊदी अरब पहले ही ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना कर चुका है। रियाद में अमेरिकी दूतावास, प्रिंस सुल्तान एयरबेस और ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाए जाने की खबरें सामने आई हैं। ऐसे में यह बहस तेज हो गई है कि सऊदी अमेरिका का कितना साथ देगा और क्या वह सीधे जंग में उतरेगा।

पाकिस्तान की भी होगी एंट्री!

सऊदी अरब के तेल को अगर टार्गेट किया गया तो वह इस युद्ध में खुलकर उतर सकता है। अगर ऐसा हुआ तो पाकिस्तान को भी इसमें शामिल होना पड़ेगा। इसका कारण है सऊदी और पाकिस्तान के बीच हुआ रक्षा समझौता। इस युद्ध के बाद से ही पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ और पाकिस्तानी आर्मी चीफ आसिम मुनीर कई बार सऊदी का दौरा कर चुके हैं। यह दिखाता है कि ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच पर्दे के पीछे नया खेल चल रहा है।

अयोध्या में आज ऐतिहासिक अनुष्ठान, राम मंदिर में श्रीराम यंत्र की स्थापना करेंगी राष्ट्रपति मुर्मू

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श्रीराम जन्मभूमि मंदिर आज आस्था और इतिहास का संगम बनने जा रहा है। वर्ष प्रतिपदा के शुभ क्षण में बृहस्पतिवार को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर एक नए इतिहास का साक्षी बनेगा। द्रौपदी मुर्मू यहां श्रीराम यंत्र की स्थापना कर एक नई परंपरा को आगे बढ़ाएंगी। इस पावन अवसर पर देशभर से आए हजारों श्रद्धालु और अतिथि इस दिव्य क्षण के साक्षी बनेंगे।

राष्ट्रपति करेंगी श्रीराम यंत्र की स्थापना

राष्ट्रपति मुर्मू सुबह लगभग 11 बजे महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरेंगी, जहां से वे सड़क मार्ग द्वारा मंदिर परिसर पहुंचेंगी। अयोध्या में उनके चार घंटे के प्रवास के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। वे आद्य शंकराचार्य द्वार से मंदिर में प्रवेश कर सबसे पहले रामलला का आशीर्वाद लेंगी।श्री राम जन्मभूमि मंदिर में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अभिजीत मुहूर्त में सुबह 11:55 बजे मंदिर के द्वितीय तल पर श्रीराम यंत्र की स्थापना। श्रीराम यंत्र स्थापना के बाद राष्ट्रपति प्रथम तल पर विराजमान राम परिवार का दर्शन-पूजन एवं आरती करेंगी।

देशभर से 7 हजार विशेष मेहमान शामिल होंगे

समारोह का साक्षी बनने के लिए करीब सात हजार मेहमान मौजूद रहेंगे। श्रीराम यंत्र पूजन के विशेष अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि, सदस्य जगद्गुरु विश्व प्रसन्न तीर्थ और तीन आचार्य उपस्थित रहेंगे। केरल की धर्मगुरु माता अमृतानंदमयी और दत्तात्रेय होसबोले भी समारेाह में शामिल रहेंगे।

श्रीराम यंत्र की खासियत

श्रीराम यंत्र की खासियत मंदिर के दूसरे तल पर स्थापित होने वाला यह 'श्रीराम यंत्र' वैदिक गणित और ज्यामितीय पैटर्न पर आधारित है। राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के अनुसार, यह पवित्र यंत्र दो वर्ष पूर्व एक भव्य शोभायात्रा के जरिए अयोध्या लाया गया था। मान्यता है कि यह यंत्र दिव्य ऊर्जाओं का केंद्र है और सकारात्मक आध्यात्मिक स्पंदन आकर्षित करता है। स्थापना के समय उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और राम मंदिर ट्रस्ट के प्रमुख सदस्य मौजूद रहेंगे।

13 जोन और 37 सेक्टर में बांटी गई सुरक्षा व्यवस्था

राष्ट्रपति के आगमन पर जिले की सुरक्षा व्यवस्था को 13 जोन और 37 सेक्टर में बांटी गई है। एसपी/एएसपी स्तर के अधिकारी को जोन व सीओ व निरीक्षकों को सेक्टरों का नोडल बनाया गया है। उच्चाधिकारी जोन और सेक्टरों की निगरानी कर रहे हैं। राम मंदिर में श्रीराम यंत्र की स्थापना के लिए बृहस्पतिवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का अयोध्या दौरा होना है। वह लगभग चार घंटे तक अयोध्या में मौजूद रहेंगी। इस दौरान पुलिस-प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। महर्षि वाल्मीकि एयरपोर्ट, उनकी फ्लीट के मार्ग, राम मंदिर परिसर, राम मंदिर में परकोटा, सभा स्थल, अतिथियों के आने के मार्ग, रूफटॉप, आंतरिक मार्गों के डायवर्जन की व्यवस्था, हनुमानगढ़ी मंदिर, हेलीपैड रामकथा पार्क व अयोध्या धाम की कानून व मार्ग व्यवस्था को अलग-अलग जोन में बांटा गया है।

तीन हजार सुरक्षाकर्मी तैनात

आयोजन को लेकर सभी जोन और सेक्टरों में सुरक्षाकर्मियों का जाल बिछाया गया है। सभी जगहों पर लगभग तीन हजार सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। इनमें 18 एसपी/एएसपी, 33 सीओ, 130 निरीक्षक, 400 उप निरीक्षक, 50 महिला उपनिरीक्षक, 1800 आरक्षी व महिला आरक्षी, 90 यातायात पुलिस, 550 मुख्य आरक्षी और यातायात आरक्षी शामिल हैं।

राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की अध्यक्ष बनीं साध्वी निरंजन ज्योति
* 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने ओबीसी वोटबैंक को साधने की रणनीति के तहत सौंपी बड़ी जिम्मेदारी

नई दिल्ली। पूर्व केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति को राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) की अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। उन्होंने बुधवार को अपने पद का औपचारिक रूप से कार्यभार संभाल लिया।
फतेहपुर लोकसभा क्षेत्र से दो बार सांसद रह चुकीं साध्वी निरंजन ज्योति केंद्र सरकार में मंत्री भी रह चुकी हैं और लंबे समय से संगठन व सरकार में सक्रिय भूमिका निभाती रही हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी ने आगामी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को देखते हुए पिछड़े वर्ग के बीच अपनी पकड़ और मजबूत करने की रणनीति के तहत उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी है।
पिछड़े वर्ग से आने वाली साध्वी निरंजन ज्योति की पहचान जमीनी नेता के रूप में रही है। उनके अध्यक्ष बनने से आयोग की गतिविधियों के साथ-साथ भाजपा की सामाजिक और राजनीतिक रणनीति को भी मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
मोहब्बत हमारे साथ, शादी मोदी साहब के साथ...देवगौड़ा के रिटायरमेंट पर ऐसा क्यों बोले खरगे?

#mallikarjunkhargesaysmohabbathamareshadipmmodike_sath

संसद के उच्च सदन राज्यसभा से बुधवार को कई सांसद रिटायर हो गए। उनकी विदाई के दौरान राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि विदाई का जिक्र आते ही मन भारी हो जाता है और समझ नहीं आता कि बात कहां से शुरू करें। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में काम करने वाला व्यक्ति कभी रिटायर नहीं होता, न ही टायर्ड होता है।

राज्यसभा में सांसदों की विदाई के दौरान विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने मजाकिया अंदाज से सबको लोटपोट कर दिया। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा और केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले पर ऐसी बातें कही कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अपनी हंसी नहीं रोक पाए।

पीएम मोदी के चेहरे पर भी दिखी मुस्कान

सदन को संबोधित करते हुए खरगे ने देवेगौड़ा का जिक्र किया। खड़गे ने पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवगौड़ा का जिक्र करते हुए हल्के-फुल्के अंदाज़ में कहा, 'मैं देवेगौड़ा को 54 वर्षों से जानता हूं। उनके साथ ही मैंने काम किया, लेकिन क्या हुआ मुझें मालूम नहीं। उन्होंने प्रेम हमारे साथ किया, मोहब्बत हमारे साथ किया और शादी मोदी साहब के साथ कर ली। ये जल्दी ही हुआ कैसे हुआ मुझे मालूम नहीं।' उनके इस भाषण पर सदन में हल्की मुस्कान देखने को मिली। पीएम मोदी भी इस दौरान हंसते नजर आए।

कई सहयोगियों को किया याद

खड़गे ने कहा कि रामदास अट्ठावले अपनी खास शैली के लिए जाने जाते हैं और उनकी कविताएं अक्सर प्रधानमंत्री मोदी पर ही केंद्रित होती हैं। उन्होंने अपने सहयोगी शक्ति सिंह गोहिल और नीरज डांगी की भी भावुक होकर प्रशंसा की। खड़गे ने कहा, 'ज्वलंत मुद्दों पर उन्होंने पूरी तैयारी के साथ अपनी बात रखी। उनके जाने से सदन में एक खालीपन महसूस होगा।'

सदन चलाने को लेकर क्या बोले कांग्रेस नेता

इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि सदन ज्यादा से ज्यादा चलना चाहिए। सभी सांसदों की बातों को सुना जाना चाहिए। मिलकर काम करना चाहिए, ये बड़ी ताकत है। जनता के मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए। रिटायर होने वाले कुछ साथी फिर वापस आएंगे कुछ नहीं आएंगे। पब्लिक लाइफ में रहने वाले सदस्य कभी रिटायर और टायर्ड नहीं होते।

दिल्ली के साध नगर में इमारत में लगी भीषण आग, छह लोगों की मौत

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दिल्ली के पालम इलाके की एक बिल्डिंग में भीषण आग लग गई है। इस घटना में 7 लोगों की मौत हो गई है। आग की सूचना मिलते ही मौके पर करीब 30 फायर ब्रिगेड की गाड़ियां पहुंच गईं। आग बुझाने का काम जारी है। पालम इलाके में लगी इस भीषण आग कई लोगों के फंसे होने की भी आशंका है। दिल्ली फायर सर्विस के अधिकारी और कर्मचारी आग पर काबू पाने की कवायद में जुटे हैं।

आग के कारण बाहर निकलने का एकमात्र रास्ता हुआ बंद

जानकारी के मुताबिक, आग की शुरुआत सुबह ग्राउंड फ्लोर पर स्थित एक कॉस्मेटिक दुकान से हुई। देखते ही देखते आग ने ऊपरी मंजिलों को भी अपनी चपेट में ले लिया, जिससे पूरे भवन में अफरा-तफरी मच गई। हादसे के समय इमारत में कुल 18 लोग मौजूद थे। आग तेजी से फैलने के कारण बाहर निकलने का एकमात्र रास्ता बंद हो गया, जिससे कई लोग अंदर ही फंस गए।

कई लोगों ने जान बचाने के लिए ऊपर से छलांग लगाई

आग तेजी से फैली और इमारत के अंदर धुएं का गुबार छा गया। इस कारण अंदर रह रहे लोग बाहर नहीं निकल पाए और मदद के लिए पुकारने लगे। कुछ लोगों ने जान बचाने के लिए ऊपर से छलांग लगा दी। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की 30 गाड़ियां मौके पर पहुंच गईं और राहत-बचाव कार्य शुरू कर दिया गया।

ग्राउंड फ्लोर कई दुकानें, ऊपर रहता है परिवार

बताया जा रहा है कि बिल्डिंग इलाके में पालम कॉलोनी की गली नंबर 2 में है। इसमें राजेंद्र कश्यप का पूरा परिवार रहता है। परिवार के तकरीबन 15 लोग हैं। राजेंद्र कश्यप मार्केट के प्रधान भी है और यह पूरी बिल्डिंग उनकी ही है, जिसकी बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर पर ब्यूटी पार्लर, चूड़ी की दुकान और दूसरे व्यवसाय चलते हैं। ऊपर के फ्लोर में उनके परिवार के लोग रहते हैं।

मिजोरम में 6 यूक्रेनियों की गिरफ्तारी, कीव ने दर्ज कराया विरोध, जानें क्या है पूरा मामला?

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भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र से राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए ने यहां छह यूक्रेनी नागरिकों को हिरासत में लिया है। इन पर अवैध रूप से मिजोरम में प्रवेश करने और फिर पड़ोसी देश म्यांमार जाकर उग्रवादियों को लड़ाई की ट्रेनिंग देने का आरोप है।यूक्रेन की सरकार ने विदेश मंत्रालय के समक्ष अपने इन नागरिकों की गिरफ्तारी का विरोध दर्ज कराते हुए उनकी तत्काल रिहाई और आसान कॉन्सुलर पहुंच दिए जाने की मांग की है।

क्रेनी नागरिकों को मिजोरम में अवैध रूप से प्रवेश करने और वहां से म्यांमार की सीमा में दाखिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। इस मामले में यूक्रेनियों के अलावा एक अमेरिकी नागरिक को भी पकड़ा गया है। इन सभी को 16 मार्च को कोर्ट में पेश किया गया, जहां इन्हें 27 मार्च तक पुलिस रिमांड में भेज दिया है।

मिजोरम सुरक्षा की दृष्टि से बेहद संवेदनशील राज्य

जांच एजेंसियों का दावा है कि ये सभी विदेशी नागरिक मिजोरम पहुंचे थे, जो कि सुरक्षा की दृष्टि से बेहद संवेदनशील राज्य माना जाता है। यह राज्य म्यांमार के साथ लगभग 510 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है। इस क्षेत्र में विदेशी नागरिकों के प्रवेश के लिए ‘रिस्ट्रिक्टेड एरिया परमिट’ (RAP) अनिवार्य होता है, लेकिन आरोप है कि इन लोगों ने बिना अनुमति के इस क्षेत्र में प्रवेश किया।

मिजोरम में बिना विशेष परमिट के घुसने का आरोप

यूक्रेनी विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा, "13 मार्च 2026 को, भारत गणराज्य में यूक्रेन के छह नागरिकों को हिरासत में लिया गया। शुरुआती जानकारी के अनुसार, उन पर मिजोरम राज्य में बिना अनुमति के मौजूद होने का आरोप है—जिस राज्य में प्रवेश के लिए एक विशेष परमिट की आवश्यकता होती है—साथ ही उन पर भारत और म्यांमार के बीच की राज्य सीमा को कथित तौर पर अवैध रूप से पार करने का भी आरोप है। फिलहाल, भारत के संबंधित अधिकारी इस मामले में आवश्यक जांच-पड़ताल कर रहे हैं।"

गैर-कानूनी गतिविधियों पुख्ता सबूत नहीं

यूक्रेन ने दावा किया, "अभी तक, ऐसे कोई पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं जो यह साबित करते हों कि इन यूक्रेनी नागरिकों का भारत या म्यांमार की धरती पर किसी भी तरह की गैर-कानूनी गतिविधियों में कोई हाथ है। इसके साथ ही, कुछ मीडिया रिपोर्टों में—जिनमें कुछ भारतीय और रूसी मीडिया आउटलेट भी शामिल हैं—उपलब्ध तथ्यों की गलत व्याख्या की गई है; ये रिपोर्टें भ्रामक प्रकृति की हैं और इनमें बेबुनियाद आरोप लगाए गए हैं।"

इजराइली हमले में मारे गए अली लारिजानी, कमांडर सुलेमानी की भी मौत

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ईरान और इजरायल के बीच चल रहा युद्ध अब 19वें दिन में पहुंच गया है और संकट और भी ज्यादा गहरा गया है। ईरान-अमेरिका युद्ध के 18वें दिन इजरायल ने तेहरान में जो कार्रवाई की, उसमें ईरान के दो सबसे वरिष्ठ लीडर भी मारे गए। ईरान के सुरक्षा प्रमुख और खामेनेई के करीबी अली लारिजानी और बसीज बलों के कमांडर गुलारजा सुलेमानी इजरायली हवाई हमले में मारे गए हैं।

ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने मंगलवार को अली लारीजानी की मौत की पुष्टि कर दी है। लारीजानी सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव थे और कहा जाता था कि पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के मारे जाने के बाद पर्दे के पीछे से वही ईरान को चला रहे थे। इसके पहले इजरायल ने कहा था कि उसने अली लारीजानी को एक हमले में मार दिया है।

खामेनेई की मौत के बाद थी अहम भूमिका

लारीजानी को ईरान के सबसे ताकतवर शख्स माना जाता है, खासकर सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद उनकी भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई थी। लारीजानी पूर्व में संसद अध्यक्ष और वरिष्ठ नीति सलाहकार भी रह चुके थे। परमाणु वार्ता में भी उनकी भूमिका रही थी। जनरल सुलेमानी पर अमेरिका, यूरोपीय संघ और अन्य देशों द्वारा प्रतिबंध लगाए गए थे, क्योंकि उन पर वर्षों से विरोध प्रदर्शनों को दबाने में भूमिका निभाने का आरोप था।

अली लारीजानी के साथ उनके बेटे की भी मौत

ईरान के सरकारी टीवी और सुरक्षा परिषद के अनुसार अली लारीजानी की उनके बेटे मोर्तेजा और एक सहयोगी के साथ हत्या कर दी गई। ईरान के कई नेताओं ने इस हत्या की निंदा की है। विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा कि इससे सिस्टम पर कोई असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि यह संस्थाओं पर आधारित है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि लारिजानी की जगह कौन लेगा, क्या सईद जलीली या फिर नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई कोई नई नियुक्ति करेंगे।

इजरायल ने किया मारे जाने का दावा

इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने सबसे पहले लारीजानी के मारे जाने का ऐलान किया था। इजरायली सेना ने बताया कि सोमवार देर रात हुए हवाई हमले में अली लारीजानी और ईरान की एलीट बासिज फोर्स के कमांडर को मार दिया गया। मंगलवार शाम के इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने भी लारीजानी के मारे जाने घोषणा करते हुए कहा कि इन हमलों का मकसद ईरान के नेतृत्व कमजोर करना था, ताकि ईरानी लोगों को उसे हटाने का मौका मिल सके।

गुलाम रज़ा सुलेमानी की भी मौत

रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने पुष्टि की है कि बसिज संगठन के कमांडर गुलाम रजा सुलेमानी भी इजराइली हमले में मारे गए। गोलम रजा सुलेमानी आईआरजीसी के एक उच्च पदस्थ कमांडर थे। ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों के पहले दिन कमांडर-इन-चीफ समेत कई सैन्य कमांडरों की मौत के बाद, सुलेमानी की मौत युद्ध की सबसे महत्वपूर्ण खबरों में से एक है। बसिज, जो कि रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की एक संगठनात्मक सहायक संस्था है, ईरानी सरकार की सुरक्षा शाखाओं में से एक है और आंतरिक संकटों के प्रबंधन और विरोध प्रदर्शनों को दबाने और नियंत्रित करने में निर्णायक भूमिका निभाती है।