बलिया की सांस्कृतिक परंपरा पर जोर दिया।बलिया के सुल्तानीपुर में नव कुंडीय सहस्र चंडी महायज्ञ: आठवें दिन भरत-राम मिलाप कथा से श्रद्धालु भावविभोर,
संजीव सिंह बलिया : जिले के सुल्तानीपुर गांव में आयोजित भव्य नव दिवसीय नव कुंडीय सहस्र चंडी महायज्ञ के आठवें दिन श्रद्धालुओं का अपार जनसैलाब उमड़ पड़ा। यज्ञ स्थल पर नव कुंडों में आहुतियां चढ़ रही थीं, तो कथा स्थल पर तिल रखने की भी जगह नहीं बची। हजारों भक्तों ने यज्ञ मंडप की परिक्रमा की, जबकि आचार्यगणों के उद्घोषित वैदिक मंत्रों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कथा वाचिका पंडित गौरी गौरंगी ने भरत-राम मिलाप प्रसंग को इतने मार्मिक ढंग से सुनाया कि श्रद्धालु भावविभोर हो रो पड़े।भरत-राम मिलाप: त्याग और भक्ति का अनुपम प्रसंगकथा में पंडित गौरी गौरंगी ने विस्तार से सुनाया कि भरत अपने मामा के घर से लौटे तो उन्हें भ्राता राम और भाभी सीता के 14 वर्ष के वनवास की दर्दनाक खबर पता चली। मूर्छित होकर गिर पड़े भरत ने होश आने पर माता कैकेयी को कठोर शब्दों में कोसा, "आज तक सुना था पुत्र कुपुत्र हो सकता है, माता कुमाता नहीं। लेकिन तुमने सिद्ध कर दिया कि माता भी कुमाता हो सकती है।" भरत ने कहा कि प्रजा उन्हें छल-कपट का दोषी ठहराएगी, फिर भी वे राम को लाने अयोध्या से चित्रकूट रवाना हो गए।निषादराज से मार्ग मार्गदर्शन प्राप्त कर चित्रकूट पहुंचे भरत राम के चरणों में गिरे और क्षमा मांगी। निस्वार्थ प्रेम, त्याग और कर्तव्यनिष्ठा के प्रतीक भरत ने राम से अयोध्या लौटने की विनती की, किंतु राम ने वचनबद्धता का हवाला देकर इंकार कर दिया। लंबे अनुरोध के बाद भरत सहमत हुए कि अयोध्या का राजा राम ही रहेंगे। उन्होंने राम की चरण पादुकाओं को सिंहासन पर स्थापित कर 14 वर्ष तक निष्ठापूर्वक राज्य संभाला।कथा समापन पर गौरंगी गौरी जी ने कहा, "आज के युग में स्वार्थ के लिए भाई भाई से छल करता है। राम-भरत प्रसंग भाइयों के प्रेम को मजबूत करने के लिए अत्यंत प्रासंगिक है। यह हमें त्याग और भक्ति का संदेश देता है।"यज्ञ का भव्य स्वरूप और आयोजनयह महायज्ञ सुल्तानीपुर के प्रमुख धार्मिक आयोजन के रूप में जाना जाता है, जिसमें नव कुंडों में सहस्र चंडी पाठ हो रहा है। प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु विभिन्न जिलों से आ रहे हैं। कथा के बाद प्रसाद वितरण हुआ, जिसमें भक्तों ने उत्साह से भाग लिया। मुख्य यजमान गोविंद नारायण सिंह ने बताया, "यह यज्ञ मां दुर्गा की कृपा और राम भक्ति के लिए समर्पित है। नवें दिन महायज्ञ का समापन धूमधाम से होगा।"प्रमुख आयोजक और उपस्थित जनमुख्य आयोजक गोविंद नारायण सिंह के अलावा दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष शक्ति सिंह, ऋषिराज सिंह, कृष्णा राज सिंह, श्रीमती मीरा सिंह, आशुतोष पांडेय सहित हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे। स्थानीय ग्रामीणों ने इसे गांव की सांस्कृतिक धरोहर बताया। 9वेदिन विशेष पूजन और हवन होगा।सुल्तानीपुर महायज्ञ न केवल धार्मिक आयोजन है, बल्कि सामाजिक एकता का प्रतीक भी बन गया है।
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में डॉ. उपाध्याय ने 'बीज वक्ता' के रूप में बढ़ाया बलिया का मान
संजीव सिंह बलिया!बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झाँसी और उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी 'बुंदेलखंड के साहित्य, समाज और संस्कृति में श्रीराम' में जनपद के लब्धप्रतिष्ठित विद्वान और प्रखर विचारक डॉ. विद्यासागर उपाध्याय ने अंतरराष्ट्रीय फलक पर जिले का मान बढ़ाया। डॉ. उपाध्याय को इस वैचारिक महाकुंभ में विशिष्ट अतिथि एवं 'बीज वक्ता' के रूप में आमंत्रित किया गया, जहाँ उन्होंने सनातन संस्कृति और रामकथा के अंतर्संबंधों का अत्यंत गंभीर और तार्किक विश्लेषण प्रस्तुत किया। इस वैश्विक मंच पर डॉ. उपाध्याय ने रामायण के एक मार्मिक प्रसंग का उल्लेख करते हुए श्रीराम के 'आतंकवाद विरोधी' स्वरूप की एक नवीन व्याख्या प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि जब श्रीराम ने ऋषियों की हड्डियों का विशाल पहाड़ देखा और अपने गुरु से इसका कारण पूछा, तब उन्हें ज्ञात हुआ कि ये उन महान ऋषियों के अवशेष हैं जिन्हें राक्षसों ने क्रूरतापूर्वक मार डाला था। डॉ. उपाध्याय ने इसके गहरे दार्शनिक अर्थ स्पष्ट करते हुए कहा कि उस युग में ज्ञान 'श्रुति परंपरा' अर्थात सुनकर याद रखने पर आधारित था, क्योंकि तब कागज और कलम की खोज नहीं हुई थी। ऐसे में ज्ञान प्रदान करने वाले एक भी ऋषि की हत्या का अर्थ केवल एक व्यक्ति की मृत्यु नहीं, बल्कि हजारों वर्षों की उस संचित ज्ञान परंपरा की हत्या थी जो एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक हस्तांतरित होती थी। असंख्य ऋषियों की हत्या के माध्यम से ज्ञान के इस समूल विनाश को देखकर श्रीराम की करुणा 'महाक्रोध' में परिवर्तित हो गई और उन्होंने उसी क्षण यह दृढ़ प्रण लिया कि लंका विजय तो बाद की बात है, वह पहले अपने घर में बैठे इन आततायी राक्षसों और ज्ञान-विरोधी 'आतंकवादियों' का वध करेंगे। डॉ. उपाध्याय ने रेखांकित किया कि राम का यह संकल्प वास्तव में वैश्विक सभ्यता और ज्ञान-संस्कृति को बचाने का विश्व इतिहास का पहला बड़ा सुरक्षा अभियान था। मुख्य व्याख्यान को आगे बढ़ाते हुए डॉ. उपाध्याय ने प्रतिपादित किया कि बुंदेलखंड की माटी में राम केवल एक आराध्य देव भर नहीं हैं, बल्कि वे यहाँ की संपूर्ण जीवन पद्धति के आधार हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ओरछा के 'रामराजा' सरकार से लेकर गाँवों की चौपालों पर गाई जाने वाली 'फाग' और 'आल्हा' तक, राम बुंदेली समाज के प्रत्येक संस्कार और सांसों में रचे-बसे हैं। बुंदेलखंड के समृद्ध साहित्य ने राम के मर्यादा पुरुषोत्तम स्वरूप को लोक-भाषा के माध्यम से जन-जन के हृदय तक पहुँचाने का महती कार्य किया है। उनके अनुसार राम के आदर्शों और बुंदेली संस्कृति का पावन संगम ही वह अटूट सूत्र है, जो इस अंचल के समाज को कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी नैतिकता, मर्यादा और धैर्य की शक्ति प्रदान करता है। डॉ. उपाध्याय का यह उद्बोधन न केवल अकादमिक दृष्टि से उत्कृष्ट रहा, बल्कि इसने अंतरराष्ट्रीय विद्वानों के सम्मुख बुंदेलखंड की सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की चेतना को भी मजबूती से रखा। इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी की भव्यता का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें भारत के विभिन्न राज्यों सहित विश्व के दस प्रमुख देशों के दिग्गज विद्वानों ने श्रीराम के आदर्शों और बुंदेली संस्कृति के अंतर्संबंधों पर गहन मंथन किया। परिचर्चा में नार्वे से डॉ. शरद आलोक, बुल्गारिया से डॉ. मौना कौशिक, ऑस्ट्रेलिया से डॉ. भावना कुँअर, कुवैत से संगीता चौबे 'पंखुड़ी', दुबई से डॉ. आरती लोकेश, नीदरलैंड से डॉ. ऋतु शर्मा नन्नन पाण्डेय, न्यूज़ीलैंड से डॉ. सुनीता शर्मा, नेपाल से डॉ. श्वेता दीप्ति और सूरीनाम से लालाराम लैलावती एवं श्री धीरज कंधई जैसे अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त विद्वानों ने अपने विचार साझा किए। इस वैचारिक समागम में विभिन्न सत्रों के दौरान लगभग 100 शोध पत्रों का वाचन किया गया, जिससे रामकथा के वैश्विक और स्थानीय आयामों पर नई रोशनी पड़ी। आयोजन की गरिमा को बढ़ाते हुए कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रामायण केंद्र भोपाल के निदेशक प्रो. राजेश श्रीवास्तव एवं उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान की संपादक डॉ. अमिता दुबे विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मुकेश पाण्डेय ने की। इस ऐतिहासिक आयोजन की सफलता के मुख्य सूत्रधार कला संकाय के अधिष्ठाता एवं संयोजक प्रो. (डॉ.) पुनीत बिसारिया, कुलसचिव ज्ञानेंद्र कुमार, वित्त अधिकारी प्रमोद कुमार सिंह एवं परीक्षा नियंत्रक राज बहादुर रहे, जिनके प्रयासों से यह अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न हुई। डॉ. विद्यासागर उपाध्याय को इस वैश्विक मंच पर मुख्य वक्ता के रूप में सम्मानित होते देख जनपद के साहित्यकारों, शिक्षाविदों और शुभचिंतकों में हर्ष की लहर दौड़ गई है। डॉ. गणेश पाठक, डॉ. जनार्दन राय, डॉ. अशोक कुमार सिंह, डॉ. धनंजय पाण्डेय, डॉ. मदन राम, करुणानिधि तिवारी, राधेश्याम यादव, हरेंद्र नाथ मिश्र और लल्लन पाण्डेय आदि ने डॉ. उपाध्याय को बधाई देते हुए इस उपलब्धि को समूचे क्षेत्र के लिए एक गौरवशाली क्षण बताया है।
भोजपुरी पुनर्जागरण मंच के सम्मान समारोह में पदाधिकारियों को प्रमाण पत्र अउर पंचांग प्रदान भइल
संजीव सिंह बलिया। भोजपुरी पुनर्जागरण मंच द्वारा एक भव्य सम्मान समारोह के आयोजन भइल, जवन में जिला अध्यक्ष राघवेन्द्र प्रताप राही द्वारा पदाधिकारी लोगन के प्रमाण पत्र अउर भोजपुरी पुनर्जागरण मंच के पंचांग (कैलेंडर) प्रदान कइल गइल।जिला अध्यक्ष राघवेन्द्र प्रताप राही ने कहल कि भोजपुरी भाषा हमनी के आत्मा से निकलल बिचार ह, जवन हमनी के माई के गोदी में से बोलेलागेनינה जा। ई बहुत समृद्ध भाषा ह, एकराके फूहड़पन से बचाईजा अउर अश्लील गीत-गाना के बहिष्कार करिजा।भोजपुरी पुनर्जागरण मंच के जिला मंत्री धर्मात्मा यादव ने अपील कइल कि आप सभ लोग जनगणना के समय मातृभाषा के कालम में भोजपुरी जरूर लिखवाई। जिला उपाध्यक्ष अजय श्रीवास्तव कहनी कि भोजपुरी हमनी के आन-बॉन शान ह। इ आठवीं अनुसूची में जब तक शामिल न हो जाई, तब तक संघर्ष जारी रही।समारोह में विनोद सिंह, गोपाल जी खरवार, भानु प्रताप, पवनकुमार, बैजनाथ प्रसाद सोनी, भीष्म सिंह आदि लोगन आपन विचार रखलन। ए कार्यक्रम भोजपुरी भाषा के संरक्षण अउर उत्थान लेल महत्वपूर्ण साबित भइल।भोजपुरी पुनर्जागरण मंच के सम्मान समारोह में पदाधिकारियों को प्रमाण पत्र अउर पंचांग प्रदान भइलबलिया। भोजपुरी पुनर्जागरण मंच द्वारा एक भव्य सम्मान समारोह के आयोजन भइल, जवन में जिला अध्यक्ष राघवेन्द्र प्रताप राही द्वारा पदाधिकारी लोगन के प्रमाण पत्र अउर भोजपुरी पुनर्जागरण मंच के पंचांग (कैलेंडर) प्रदान कइल गइल।जिला अध्यक्ष राघवेन्द्र प्रताप राही ने कहल कि भोजपुरी भाषा हमनी के आत्मा से निकलल बिचार ह, जवन हमनी के माई के गोदी में से बोलेलागेनינה जा। ई बहुत समृद्ध भाषा ह, एकराके फूहड़पन से बचाईजा अउर अश्लील गीत-गाना के बहिष्कार करिजा।भोजपुरी पुनर्जागरण मंच के जिला मंत्री धर्मात्मा यादव ने अपील कइल कि आप सभ लोग जनगणना के समय मातृभाषा के कालम में भोजपुरी जरूर लिखवाई। जिला उपाध्यक्ष अजय श्रीवास्तव कहनी कि भोजपुरी हमनी के आन-बॉन शान ह। इ आठवीं अनुसूची में जब तक शामिल न हो जाई, तब तक संघर्ष जारी रही।समारोह में विनोद सिंह, गोपाल जी खरवार, भानु प्रताप, पवनकुमार, बैजनाथ प्रसाद सोनी, भीष्म सिंह आदि लोगन आपन विचार रखलन। ए कार्यक्रम भोजपुरी भाषा के संरक्षण अउर उत्थान लेल महत्वपूर्ण साबित भइल।
देवरिया शिक्षक की आत्महत्या: उत्तर प्रदेश सीनियर बेसिक शिक्षक संघ ने लगाए विभाग पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप
  संजीव सिंह बलिया। उत्तर प्रदेश सीनियर बेसिक शिक्षक संघ के प्रांतीय महामंत्री सुशील कुमार पाण्डेय ‘कान्हजी’ ने जनपद देवरिया के जूनियर हाई स्कूल, मदरसन, गौरी बाजार में सहायक अध्यापक पद पर कार्यरत कृष्णमोहन सिंह द्वारा कथित विभागीय उत्पीड़न एवं अव्यवस्थाओं से आहत होकर आत्महत्या किए जाने की घटना पर गहरा दुःख व्यक्त किया है।उन्होंने कहा कि “रामराज्य” और “जीरो टॉलरेंस” की बातें केवल मंच और माइक तक सीमित होकर रह गई हैं, जबकि शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार चरम पर पहुंच गया है। देवरिया की इस घटना ने विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। पाण्डेय ने आरोप लगाया कि विभागीय अधिकारी एवं पटल सहायक शिक्षकों का शोषण करते हैं, पत्रावलियों को अनावश्यक रूप से लंबित रखते हैं और शिक्षकों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर करते हैं।प्रांतीय महामंत्री ने कहा कि सरकारें विद्यालयों को प्रयोगशाला और अध्यापकों को मशीन समझ रही हैं। प्रतिदिन नए-नए आदेश जारी किए जा रहे हैं, जिनका प्रतिकूल प्रभाव शिक्षकों के मानसिक स्वास्थ्य और कार्यक्षमता पर पड़ रहा है।उन्होंने सरकार से मांग की है कि देवरिया की इस घटना की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तथा दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की जाए। साथ ही पीड़ित परिवार को समस्त देयकों का शीघ्र भुगतान, परिवार के दो सदस्यों को सरकारी नौकरी तथा पांच करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाए।
बेल्थरारोड के लाल ने रोशन किया बलिया का मान, डॉ. अमरेंद्र गुप्ता का एम्स दिल्ली में चयन

संजीव सिंह बेल्थरा रोड (बलिया), 23 फरवरी 2026: क्षेत्र के पिपरौली बड़ा गांव के लिए गौरव का क्षण आ गया है। प्राथमिक विद्यालय चौकियां मोड़ के प्रधानाध्यापक विजय शंकर गुप्ता के सुपुत्र डॉ. अमरेंद्र गुप्ता का चयन देश के शीर्ष चिकित्सा संस्थान अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली में चिकित्सक पद के लिए हो गया है। इस उपलब्धि से पूरे बिल्थरा रोड क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई है।डॉ. अमरेंद्र गुप्ता ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पैतृक गांव के प्राथमिक विद्यालय से प्राप्त की। इसके बाद जवाहर नवोदय विद्यालय, बलिया से इंटरमीडिएट उत्तीर्ण करने के बाद कठिन परिश्रम से मेडिकल प्रवेश परीक्षा में सफलता हासिल कर किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त की। लखनऊ के फातिमा हॉस्पिटल से एमडी करने के बाद अब एम्स दिल्ली में चयनित होकर उन्होंने ग्रामीण परिवेश का नाम राष्ट्रीय स्तर पर चमकाया है।डॉ. अमरेंद्र ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, गुरुजनों और मित्रों को देते हुए कहा कि दृढ़ संकल्प, सतत परिश्रम और सही मार्गदर्शन से कोई भी उच्च मुकाम हासिल कर सकता है।इस अवसर पर खंड शिक्षा अधिकारी सीयर सुनील चौबे, शिक्षक देवेंद्र वर्मा, कृष्णा नन्द सिंह, वीरेंद्र यादव, आशुतोष पाण्डेय, हरेकृष्णा पाण्डेय, अजित सिंह, नन्द लाल शर्मा सहित क्षेत्रीय गणमान्यजनोंने डॉ. अमरेंद्र एवं उनके परिजनों को बधाई दी। बिल्थरा रोड क्षेत्र में खुशी का माहौल व्याप्त है और सभी उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना कर रहे हैं
युवाओं के सपनों पर भारी पड़ रही सियासत.. रामगोविन्द अदालती आदेश के बाद भी समाधान नहीं। न्याय बनाम प्रशासनिक अवरोध
संजीव सिंह बलिया! उत्तर प्रदेश की शैक्षिक राजनीति और विधिक गलियारों में सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय की नियुक्तियों का प्रकरण एक मिसाल बन गया है। यह कहानी केवल एक अध्यादेश की नहीं, बल्कि हज़ारों बेरोजगारों के सपनों और न्यायपालिका बनाम कार्यपालिका के बीच खिंचती रस्साकशी की है। 1. 2013-14 का ऐतिहासिक निर्णय तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के कार्यकाल में सन् 2013-14 में एक महत्वपूर्ण अध्यादेश लाया गया था। इसका उद्देश्य संस्कृत शिक्षा के गिरते स्तर को सुधारना और महाविद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी को दूर करना था। उक्त बाते पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामगोविन्द चौधरी ने सोमवार को एक बयान जारी कर कहा और बताया कि विश्वविद्यालय और संबद्ध महाविद्यालयों की प्रबंध समितियों को रिक्त पदों पर चयन की शक्ति दी गई। इस विकेंद्रीकरण से प्रक्रिया में तेजी आई और कई उच्च शिक्षित युवाओं को रोजगार मिला, जिससे संस्कृत की पाठशालाओं में रौनक लौटी। 2016-17 में सत्ता परिवर्तन के साथ ही इन नियुक्तियों पर रोक लगा दी गई। योगी सरकार के इस कदम ने न केवल नए रोजगारों पर ताला जड़ा, बल्कि कार्यरत शिक्षकों के भविष्य पर भी प्रश्नचिन्ह लगा दिया। इसके बाद शुरू हुआ अदालती संघर्ष का वह लंबा सिलसिला, जिसमें सरकार को हर मोड़ पर विधिक हार का सामना करना पड़ा अभ्यर्थियों ने सरकार के रोक के फैसले को चुनौती दी और कोर्ट ने अभ्यर्थियों के पक्ष में फैसला सुनाया। सरकार ने हार नहीं मानी और डबल बेंच में अपील की, लेकिन वहाँ भी न्याय की जीत हुई। अंततः मामला देश की सबसे बड़ी अदालत पहुँचा। 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने भी सरकार की याचिका को खारिज करते हुए नियुक्तियों के पक्ष में मुहर लगा दी। पूर्व नेता विरोधी दल ने कहा कि 'न्याय में देरी, न्याय न मिलने के बराबर' विडंबना यह है कि देश की सर्वोच्च अदालत से आदेश आने के बावजूद योगी सरकार ने शासन स्तर पर विभिन्न तकनीकी पेच फंसाकर इन नियुक्तियों और उनके लाभों को बाधित किया जा रहा है। यह स्थिति न केवल न्यायालय की अवमानना (Contempt of Court) की श्रेणी में आती है, बल्कि उन युवाओं के साथ भी अन्याय है जो अपनी योग्यता सिद्ध कर चुके हैं। संस्कृत को भारत की आत्मा कहा जाता है, लेकिन जब इसी भाषा के विद्वान और शिक्षक अपनी आजीविका के लिए दर-दर भटकते हैं, तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि सरकारें अदालती आदेशों के बाद भी 'हथकंडे' अपनाकर नियुक्तियां रोकती हैं, तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों का हनन है। योगी सरकार और प्रशासन को अब हठधर्मिता छोड़कर सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का सम्मान करना चाहिए ताकि संस्कृत शिक्षा का संरक्षण हो सके और युवाओं को उनका उचित हक मिल सके। (रामगोविन्द चौधरी) पूर्व नेता प्रतिपक्ष उoप्र
टीम वर्क की भावना विकसित करने एवं विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के उद्देश्य से जनपद स्तरीय पी एम श्री विद्यालयी खेलकूद प्रतियोगिता संपन्न

संजीव सिंह बलिया!जनसमुदाय के समक्ष पी एम श्री योजना अंतर्गत चयनित विद्यालयों में अभिभावकों, समुदाय की सहभागिता ,बच्चों के सर्वांगीण विकास एवं विद्यालयों में नामांकन, उपस्थिति एवं ठहराव में वृद्धि ,बच्चों में शारीरिक मानसिक और भावनात्मक विकास के साथ ही आत्मविश्वास अनुशासन और टीम वर्क की भावना विकसित करने के उद्देश्य से आज वीर लोरिक स्पोर्ट्स स्टेडियम बलिया में जनपद स्तरीय पी एम श्री विद्यालय खेलकूद एवं सांस्कृतिक प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में जनपद में संचालित प्राथमिक तथा उच्च प्राथमिक स्तर के कुल 26 पीएम श्री विद्यालयों के बच्चों द्वारा प्रतिभाग किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य कोषाधिकारी आनंद दुबे तथा जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी मनीष कुमार सिंह द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण करके किया गया।इसके पश्चात पी एम श्री प्राथमिक विद्यालय अमृतपाली के बच्चों द्वारा सरस्वती वंदना एवं स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया। प्रतियोगिताओं में मुख्य रूप से बच्चों ने एथलेटिक्स, कबड्डी , खो - खो और वॉलीबॉल प्रतियोगिता में प्रतिभाग किया। सबसे पहले कबड्डी की प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी मनीष कुमार सिंह द्वारा बच्चों से हाथ मिलाकर परिचय प्राप्त किया गया तथा उनका उत्साहवर्धन किया गया।आज की प्रतियोगिता में प्राथमिक स्तर बालक वर्ग की दौड़ प्रतियोगिता 50 मीटर में हथौज मनियर के अमित राजभर विजेता घोषित किए गए, 100 मीटर की प्रतियोगिता में हथौज मनियर के ही राकेश राजभर जबकि 200 मीटर की प्रतियोगिता में आयुष15 उससा , पंदह एवं 400 मीटर की प्रतियोगिता में भोपालपुर रेवती के अमित यादव विजेता घोषित किए गए। बालिका संवर्ग में खोरीपाकड़ , हनुमानगंज की सपना, 50 मीटर दौड़ में प्रथम स्थान प्राप्त किया , 100 मीटर दौड़ प्रतियोगिता में डीहवा कला नगरा की सपना ,200 मीटर की प्रतियोगिता में हल्दी ,बेलहरी की अंशिका सिंह तथा 400 मीटर की दौड़ प्रतियोगिता में नरही नंबर- 1, सोहाव की अंकिता राजभर विजेता रही। खो खो की प्रतियोगिता में बालक संवर्ग में तथा बालिका संवर्ग प्राथमिक स्तर में शेरवा कला , गड़वार प्रथम स्थान पर रहा है ।इस प्रतियोगिता में व्यक्तिगत चैंपियनशिप नरही नंबर एक सोहाव रहा जबकि दूसरी तरफ शेरवा कला गड़वार के नीतीश यादव व्यक्तिगत रूप से चैंपियन घोषित किए गए। उच्च प्राथमिक स्तर की प्रतियोगिता में 100 मीटर दौड़ में खोरी पाकड़ हनुमानगंज के बिट्टू राज बिट्टू कश्यप ,200 मीटर की प्रतियोगिता में बिसौली, रेवती के अभिषेक तथा 400 मीटर की प्रतियोगिता में हथौज, मनियर के अखिलेश राजभर रहे जबकि बालिका संवर्ग में 100 मीटर की दौड़ प्रतियोगिता में चांदपुर बैरिया की सीमा यादव तथा 200 मीटर की प्रतियोगिता में भी चांदपुर बैरिया की सीमा यादव रही ,400 मीटर की प्रतियोगिता में सोनाडीह , सीयर की सुनैना ने अपना स्थान प्राप्त किया। दौड़ प्रतियोगिता में व्यक्तिगत चैंपियनशिप अखिलेश राजभर हथौज को बालक संवर्ग में तथा सीमा यादव चांदपुर बैरिया को बालिका संवर्ग में प्राप्त हुआ।प्रतियोगिता के आयोजन में जिला व्यायाम शिक्षक विनोद कुमार सिंह, ब्लॉक व्यायाम शिक्षक सोहाव नीरज राय , ब्लॉक व्यायाम शिक्षक मनियर भावानंद शर्मा, जिला व्यायाम शिक्षिका नीतू सिंह ,जिला गाइड कैप्टन कनक चक्रधर, सपना चौधरी ,अनामिका सिंह ,एकता तिवारी, नीतू चौबे ,शबाना परवीन ,शबनम, मोहम्मद वसीम ,अनिल कनौजिया, राजेश अंचल ,मोहम्मद खुर्शीद ,सियाराम यादव ,मोहम्मद शमशाद ,विराट कुंवर, राजेश कुमार, अम्बरीष तिवारी, विजय कुमार ,प्रभाकर राय, डॉ भवतोष कुमार पाण्डेय ,प्रतिमा उपाध्याय ,निरुपमा ,ब्रजेश कुमार,रश्मि पांडेय,अनीता कुमारी ,राज्य संदर्भ दाता समूह के सदस्य आशुतोष कुमार सिंह तोमर, संतोष चंद तिवारी,चित्रलेखा सिंह द्वारा सहयोग प्रदान किया गया।जिला समन्वयक प्रशिक्षण ओम प्रकाश सिंह तथा सत्येंद्र राय की उपस्थिति रही। कार्यक्रम का संचालन संयुक्त रूप से डा शशि भूषण मिश्र तथा व्यायाम शिक्षक विनोद कुमार सिंह द्वारा किया गया।
टीम वर्क की भावना विकसित करने एवं विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के उद्देश्य से जनपद स्तरीय पी एम श्री विद्यालयी खेलकूद प्रतियोगिता संपन्न

संजीव सिंह बलिया!जनसमुदाय के समक्ष पी एम श्री योजना अंतर्गत चयनित विद्यालयों में अभिभावकों, समुदाय की सहभागिता ,बच्चों के सर्वांगीण विकास एवं विद्यालयों में नामांकन, उपस्थिति एवं ठहराव में वृद्धि ,बच्चों में शारीरिक मानसिक और भावनात्मक विकास के साथ ही आत्मविश्वास अनुशासन और टीम वर्क की भावना विकसित करने के उद्देश्य से आज वीर लोरिक स्पोर्ट्स स्टेडियम बलिया में जनपद स्तरीय पी एम श्री विद्यालय खेलकूद एवं सांस्कृतिक प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में जनपद में संचालित प्राथमिक तथा उच्च प्राथमिक स्तर के कुल 26 पीएम श्री विद्यालयों के बच्चों द्वारा प्रतिभाग किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य कोषाधिकारी आनंद दुबे तथा जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी मनीष कुमार सिंह द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण करके किया गया।इसके पश्चात पी एम श्री प्राथमिक विद्यालय अमृतपाली के बच्चों द्वारा सरस्वती वंदना एवं स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया। प्रतियोगिताओं में मुख्य रूप से बच्चों ने एथलेटिक्स, कबड्डी , खो - खो और वॉलीबॉल प्रतियोगिता में प्रतिभाग किया। सबसे पहले कबड्डी की प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी मनीष कुमार सिंह द्वारा बच्चों से हाथ मिलाकर परिचय प्राप्त किया गया तथा उनका उत्साहवर्धन किया गया।आज की प्रतियोगिता में प्राथमिक स्तर बालक वर्ग की दौड़ प्रतियोगिता 50 मीटर में हथौज मनियर के अमित राजभर विजेता घोषित किए गए, 100 मीटर की प्रतियोगिता में हथौज मनियर के ही राकेश राजभर जबकि 200 मीटर की प्रतियोगिता में आयुष15 उससा , पंदह एवं 400 मीटर की प्रतियोगिता में भोपालपुर रेवती के अमित यादव विजेता घोषित किए गए। बालिका संवर्ग में खोरीपाकड़ , हनुमानगंज की सपना, 50 मीटर दौड़ में प्रथम स्थान प्राप्त किया , 100 मीटर दौड़ प्रतियोगिता में डीहवा कला नगरा की सपना ,200 मीटर की प्रतियोगिता में हल्दी ,बेलहरी की अंशिका सिंह तथा 400 मीटर की दौड़ प्रतियोगिता में नरही नंबर- 1, सोहाव की अंकिता राजभर विजेता रही। खो खो की प्रतियोगिता में बालक संवर्ग में तथा बालिका संवर्ग प्राथमिक स्तर में शेरवा कला , गड़वार प्रथम स्थान पर रहा है ।इस प्रतियोगिता में व्यक्तिगत चैंपियनशिप नरही नंबर एक सोहाव रहा जबकि दूसरी तरफ शेरवा कला गड़वार के नीतीश यादव व्यक्तिगत रूप से चैंपियन घोषित किए गए। उच्च प्राथमिक स्तर की प्रतियोगिता में 100 मीटर दौड़ में खोरी पाकड़ हनुमानगंज के बिट्टू राज बिट्टू कश्यप ,200 मीटर की प्रतियोगिता में बिसौली, रेवती के अभिषेक तथा 400 मीटर की प्रतियोगिता में हथौज, मनियर के अखिलेश राजभर रहे जबकि बालिका संवर्ग में 100 मीटर की दौड़ प्रतियोगिता में चांदपुर बैरिया की सीमा यादव तथा 200 मीटर की प्रतियोगिता में भी चांदपुर बैरिया की सीमा यादव रही ,400 मीटर की प्रतियोगिता में सोनाडीह , सीयर की सुनैना ने अपना स्थान प्राप्त किया। दौड़ प्रतियोगिता में व्यक्तिगत चैंपियनशिप अखिलेश राजभर हथौज को बालक संवर्ग में तथा सीमा यादव चांदपुर बैरिया को बालिका संवर्ग में प्राप्त हुआ।प्रतियोगिता के आयोजन में जिला व्यायाम शिक्षक विनोद कुमार सिंह, ब्लॉक व्यायाम शिक्षक सोहाव नीरज राय , ब्लॉक व्यायाम शिक्षक मनियर भावानंद शर्मा, जिला व्यायाम शिक्षिका नीतू सिंह ,जिला गाइड कैप्टन कनक चक्रधर, सपना चौधरी ,अनामिका सिंह ,एकता तिवारी, नीतू चौबे ,शबाना परवीन ,शबनम, मोहम्मद वसीम ,अनिल कनौजिया, राजेश अंचल ,मोहम्मद खुर्शीद ,सियाराम यादव ,मोहम्मद शमशाद ,विराट कुंवर, राजेश कुमार, अम्बरीष तिवारी, विजय कुमार ,प्रभाकर राय, डॉ भवतोष कुमार पाण्डेय ,प्रतिमा उपाध्याय ,निरुपमा ,ब्रजेश कुमार,रश्मि पांडेय,अनीता कुमारी ,राज्य संदर्भ दाता समूह के सदस्य आशुतोष कुमार सिंह तोमर, संतोष चंद तिवारी,चित्रलेखा सिंह द्वारा सहयोग प्रदान किया गया।जिला समन्वयक प्रशिक्षण ओम प्रकाश सिंह तथा सत्येंद्र राय की उपस्थिति रही। कार्यक्रम का संचालन संयुक्त रूप से डा शशि भूषण मिश्र तथा व्यायाम शिक्षक विनोद कुमार सिंह द्वारा किया गया।
रसड़ा विधायक उमा शंकर सिंह ने हत्या पीड़ित परिवार को 5 लाख की सहायता दी, न्याय का दिया भरोसा
संजीव सिंह रसड़ा, बलिया। कुछ दिनों पूर्व रसड़ा विधानसभा क्षेत्र के ग्रामसभा गुरगुजपुर निवासी स्वर्गीय श्री सत्यप्रकाश राम जी की नृशंस हत्या कर दी गई थी, जो अत्यंत दुःखद एवं हृदयविदारक घटना है। इस घटना ने पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया है।आज लोकप्रिय रसड़ा बसपा विधायक उमा शंकर सिंह ने अपने छोटे भाई रमेश सिंह जी को पीड़ित परिवार के बीच भेजकर परिवार को 5,00,000 रुपये (पांच लाख रुपये) की आर्थिक सहायता प्रदान की। विधायक जी ने परिजनों को आश्वस्त किया कि इस दुख की घड़ी में हम सभी उनके साथ खड़े हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाकर परिवार को पूर्ण न्याय दिलाया जाएगा।पीड़ित परिवार ने सहायता राशि प्राप्त कर विधायक जी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की तथा न्याय की उम्मीद जताई। क्षेत्रवासियों ने भी इस पहल की सराहना की है। पुलिस मामले की तफ्तीश में जुटी हुई है।
आत्म सम्मान, जीवन कौशल और लैंगिक समानता के लिए सर्वोत्तम प्रथाओं में से एक बनता जा रहा है मीना मंच का प्लेटफार्म**बी एस ए* मनीष कुमार सिंह
संजीव सिंह बलिया!प्रगति स्वाभिमान और सफलता की ओर 2.0 बाल उत्सव कार्यक्रम का आयोजन आज जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी बलिया के प्रांगण में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी मनीष कुमार सिंह द्वारा दीप प्रज्वलन तथा माल्यार्पण कर किया गया जिसमें राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित शिक्षिका प्रतिमा उपाध्याय ,नम्रता सिंह एवं आराधना द्वारा सहयोग प्रदान किया गया। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में स्कूलों में बच्चों की अभिव्यक्ति को मंच प्रदान करने की अनुशंसा के अनुरूप उत्तर प्रदेश में परिषदीय उच्च प्राथमिक विद्यालय एवं कंपोजिट विद्यालय तथा कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय के बच्चों में समानता के भाव को विकसित करने के साथ ही उनके सर्वांगीण विकास ,क्रॉस लर्निंग, स्पेस, खुली चर्चाओं और नए शैक्षिक तरीकों को खोजने ,प्रतिभा दिखाने और छिपी हुई क्षमता का पता लगाने के अवसर उपलब्ध कराए जाने हेतु विगत कई वर्षों से मीना मंच के अंतर्गत बाल उत्सव मेले का आयोजन किया जा रहा है, इसी क्रम में आज जनपद स्तरीय प्रगति 2026 कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी मनीष कुमार सिंह द्वारा अपने उद्बोधन में प्रगति स्वाभिमान और सफलता की ओर 2.0 बाल उत्सव कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बताया गया कि इतिहास गवाह है कि महिलाओं का विकास जितना इस शताब्दी में हुआ है इसके पहले शायद कभी नहीं था। उन्होंने राजा राममोहन राय द्वारा चलाए गए अभियान और आंदोलन की चर्चा करते हुए बताया कि बदलाव एवं सफलता का दूसरा नाम महिलाओं के लिए मीना मंच ही प्रदान करता है। बेसिक शिक्षा विभाग के वित्त एवं लेखा अधिकारी अभिषेक वर्मा द्वारा अपने उद्बोधन में उपस्थित छात्र-छात्राओं का उत्साहवर्धन करते हुए बताया गया कि बाल उत्सव में प्रतिभाग करने वाले बच्चों का उत्साह निश्चित रूप से उनके शिक्षकों द्वारा किए गए अद्भुत प्रयास का परिणाम है। यह प्रतियोगिता तीन स्तर पर आयोजित की गई जिसमें चित्रकला प्रतियोगिता, बदलाव के लिए कहानी सुनाओ प्रतियोगिता तथा कामिक प्रतियोगिता के माध्यम से बच्चों का अवलोकन किया गया। जिला समन्वयक बालिका शिक्षा सत्येंद्र कुमार राय द्वारा कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की गई जबकि मीना मंच कार्यक्रम की नोडल लक्ष्मी चौधरी द्वारा प्रतियोगिता के लिए अपनाए जाने वाले विभिन्न मानकों से नोडल शिक्षकों तथा बच्चों को अवगत कराया गया। जनपद के सभी 18 शिक्षा क्षेत्र से कुल 110 बालक तथा बालिकाओं द्वारा प्रतिभाग किया गया जिनमें से सर्वश्रेष्ठ 10 बच्चों को मंडल स्तरीय प्रतियोगिता में प्रतिभाग करना है। कार्यक्रम का संचालन पूर्व एकेडमिक पर्सन डॉक्टर शशि भूषण मिश्रा द्वारा किया गया जबकि पूर्व एकेडमिक पर्सन डॉक्टर भवतोष कुमार पांडे ,विजय कुमार ,अशोक कुमार सिंह ,राम प्रकाश सिंह, अजयकांत ,मुमताज अहमद ,प्रभाकर राय द्वारा सहयोग प्रदान किया गया। राज्य संदर्भ दाता समूह के तीनों सदस्य आशुतोष कुमार सिंह तोमर ,संतोष चंद तिवारी तथा चित्रलेखा सिंह द्वारा निर्णायक की भूमिका का निर्वहन किया गया। सभी बच्चों को तथा नोडल शिक्षकों एवं सहयोग प्रदान कर रहे शिक्षकों को बेसिक शिक्षा अधिकारी तथा वित्त एवं लेखा अधिकारी द्वारा प्रमाण पत्र प्रदान किया गया जबकि मंडल स्तर के लिए चयनित 10 छात्र-छात्राओं को मेडल से सम्मानित किया गया।विभिन्न नोडल शिक्षकों द्वारा अपने विद्यालय के बच्चों का उत्साहवर्धन किया गया जिनमें प्रमुख रूप से गिरिजेश उपाध्याय, पुष्पांजलि श्रीवास्तव ,रमिता अमित कुमार सिंह,संजीत कुमार तिवारी,चंदन सिंह, किरन भारती प्रमुख रहे।