इजरायल या ईरान कौन है ज्यादा ताकतवर, जानें दोनों की मिलिट्री पावर

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इजरायल ने आज दोपहर ईरान पर बड़ा हमला कर दिया। ईरान की राजधानी तेहरान में कई जगहों पर धमाके सुने गए हैं। जानकारी के मुताबकि इस बार इजरायल ने अकेले हमला नहीं किया बल्कि उसका साथ अमेरिका ने भी दिया है। यही नहीं, हमले के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान आया है। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि हम उनकी मिसाइल इंडस्ट्री को तबाह कर देंगे। हम उनकी नेवी को तबाह कर देंगे। ईरान कभी भी परमाणु शक्ति संपंन्न देश नहीं बन सकता है।

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अमेरिका की धमकी के बाद इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष बढ़ने की आशंका है। दोनों देशों में बढ़ते तनाव के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर यह युद्ध लंबा खिंचता है और दोनों में सीधा सैन्य संघर्ष होता है तो किसकी ताकत भारी पड़ेगी?

ट्रेनिंग-तकनीक और ऑपरेशन में इजरायल आगे

अगर ईरान और इजरायल की बात करें तो सक्रिय सैनिकों की संख्या में ईरान आगे बताया जाता है। ईरान के पास करीब 6 लाख तक एक्टिव सैन्य बल और करीब 3.5 लाख रिजर्व सैनिक हैं। जबकि इजरायल के पास करीब 1.7 लाख सक्रिय सैनिक है। हालांकि इजरायल के पास 4.5 लाख प्रशिक्षित रिजर्व फोर्स है, जिसे जरूरत पड़ने पर तुरंत तैनात किया जा सकता है। वहीं संख्या के मामले में भले ही ईरान आगे दिखाई देता है, लेकिन ट्रेनिंग, तकनीक और ऑपरेशन के एक्सपीरियंस में इजरायल को बड़ा माना जाता है।

इजरायल के पास 600 से ज्यादा आधुनिक लड़ाकू विमान

वायु सेना की बात करें तो इजरायल के पास 600 से ज्यादा आधुनिक लड़ाकू विमान है, जिनमें एफ-35 जैसे स्टेल्थ जेट शामिल है। यह जेट रडार से बच निकलने की क्षमता रखते हैं और एडवांस हथियारों से लैस है। दूसरी और ईरान के पास करीब 500 से कुछ ज्यादा विमान हैं, लेकिन ईरान के जेट कई पुराने मॉडल के है। ईरान पर बैन के कारण उसे अपग्रेड और मेंटेनेंस में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में हवा में मुकाबले की स्थिति में इजरायल ईरान के मुकाबले बहुत ज्यादा मजबूत है।

ईरान के मुकाबले इजराइल का रक्षा बजट सात गुना बड़ा

आईआईएसएस के मुताबिक ईरान की तुलना में इजराइल का रक्षा बजट सात गुना बड़ा है।इससे किसी भी संभावित संघर्ष में उसका पलड़ा मजबूत दिखाई पड़ता है। आईआईएससएस के मुताबिक़ 2022 और 2023 में ईरान का रक्षा बजट 7.4 अरब डॉलर का था। जबकि इजराइल का रक्षा बजट 19 अरब डॉलर के आसपास है। जीडीपी की तुलना में इजराइल का रक्षा बजट ईरान से दोगुना है।

मिडिल ईस्ट में बड़े युद्ध की शुरुआत: इजराइल-अमेरिका का ईरान पर हमला,तेहरान समेत कई शहरों में धमाके

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इजरायल और ईरान के बीच जंग शुरू हो गई है। थोड़ी देर पहले इजरायल और अमेरिका ने ईरान पर भीषण बमबारी की है। तेहरान में इस समय तबाही का मंजर नजर आ रहा है। अमेरिका के साथ मिलकर यहूदी देश ने ईरान के राष्ट्रपति भवन, खुफिया एजेंसी और एयरपोर्ट सहित 30 ठिकानों पर ताबड़तोड़ हमला किया है।

राजधानी तेहरान में धमाके

ईरान की राजधानी तेहरान के बीच वाले इलाके में तीन जोरदार धमाकों की आवाज सुनी गई है। ईरानी मीडिया के अनुसार, धमाकों के बाद सुरक्षा बल मौके पर पहुंच गए। फार्स न्यूज एजेंसी के मुताबिक, तेहरान के रिपब्लिक इलाके में कई मिसाइलें गिरी हैं। अभी तक नुकसान या हताहतों की आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है।

इन शहरों में भी विस्फोट

वहीं कई ईरानी समाचार एजेंसियों ने पुष्टि की है कि ईरान के विभिन्न शहरों में विस्फोटों की आवाज़ें सुनी गई हैं। तेहरान के अलावा, करमानशाह, क़ोम, लोरेस्तान, कराज और तबरीज़ उन शहरों में शामिल हैं जहां इन मीडिया आउटलेट्स ने विस्फोटों की पुष्टि की है।

इरायल-अमेरिका जॉइंट ऑपरेशन

बताया जा रहा है कि इज़रायल ने अमेरिका के इशारे पर ही ईरान पर मिसाइलें दागीं हैं और यह हमला दोनों देशों का जॉइंट ऑपरेशन है। पिछले काफी समय से अटकलें लगाई जा रही थीं कि अमेरिका और ईरान में जल्द ही युद्ध शुरू हो सकता है और आज, शनिवार, 28 फरवरी को युद्ध का बिगुल बज गया है।

खामेनेई को सुरक्षित जगह ले जाया गया

हमलो के बीच ईरानी राष्ट्रपति अयातुल्ला अली खामनेई को सुरक्षित ठिकाने पर भेज दिया गया है। एक ईरानी अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि उन्हें एक 'सुरक्षित स्थान' पर ले जाया गया है।

इजरायल ने ईरान पर क्यों किया हमला?

इजरायली सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक ऑपरेशन कई महीनों से प्लान किया जा रहा था और इसका लक्ष्य ईरान की सुरक्षा व्यवस्था को कमजोर करना है। अमेरिकी अधिकारियों ने भी संकेत दिया है कि हमले बड़े दायरे में होंगे और इजरायल के साथ मिलकर कार्रवाई की जा रही है। एक रिपोर्ट में कहा गया कि कम से कम चार दिन तक भारी हमले जारी रह सकते हैं। इराक के आसमान में भी क्रूज मिसाइलें देखी गईं, जिससे साफ है कि हमले कई दिशाओं से किए जा रहे हैं।

AI समिट शर्टलेस प्रोटेस्ट केस में कांग्रेस यूथ प्रेसिडेंट उदय भानु चिब को बड़ी राहत, कोर्ट ने दी जमानत

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एआई इम्पैक्ट समिट में के दौरान भारत मंडपम में हुए 'शर्टलेस' विरोध प्रदर्शन मामले में इंडिया यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब को बड़ी राहत मिली है। दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट के ड्यूटी मजिस्ट्रेट ने उदय को आज सुबह जमानत दे दी है।

रिमांड बढ़ाने की अर्जी खारिज

देर रात सुनवाई के बाद कोर्ट ने पुलिस की 7 दिन की रिमांड बढ़ाने की अर्जी खारिज कर दी, क्योंकि उदय के खिलाफ ठोस सबूत नहीं मिले। उदय को पटियाला हाउस कोर्ट के ड्यूटी मजिस्ट्रेट से जमानत तो मिल गई है, लेकिन इसके लिए उदय को कुछ शर्तें माननी पड़ेंगी। जमानत शर्तों में 50 हजार रुपये के पर्सनल बॉन्ड का भुगतान ज़रूरी है। इसके साथ ही उदय को कोर्ट में अपने पासपोर्ट और इलेक्ट्रॉनिक डिवासेज़ भी सरेंडर करने होंगे।

रिमांड बढ़ाने की मांग

इससे पहले चिब के वकील एडवोकेट सुलेमान मोहम्मद खान ने बताया कि 'दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने उदय भानु की पुलिस कस्टडी बढ़ाने के लिए एक एप्लीकेशन दी है। उन्होंने रिमांड को 7 दिन बढ़ाने की मांग की है, और एक आरोपी की पांच दिन और दूसरे की दो दिन की रिमांड के लिए दो एप्लीकेशन भी दी हैं।

क्या है मामला?

दिल्ली पुलिस ने एआई इम्पैक्ट समिट में भारतीय युवा कांग्रेस के सदस्यों के एक गुट की ओर से कमीज उतारकर किए गए विरोध प्रदर्शन के संबंध में संगठन के अध्यक्ष उदय भानु चिब को ‘मुख्य साजिशकर्ता’ करार देते हुए गिरफ्तार किया था। एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान 20 फरवरी को यूथ कांग्रेस ने 'शर्टलेस' विरोध प्रदर्शन किया था। पुलिस ने उदय के साथ कृष्ण हरि, कुन्दन यादव, नरसिम्हा यादव, अजय कुमार यादव और कुछ अन्य यूथ कांग्रेस सदस्यों को गिरफ्तार किया था और उदय को मुख्य साजिशकर्ता बताया था।

नेपाल में 5 मार्च को चुनाव, भारत के लिए क्यों है अहम?

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भारत से सटे देश नेपाल में 5 मार्च को राष्ट्रीय चुनाव होने जा रहा है। यह चुनाव युवाओं के नेतृत्व में हुए प्रदर्शनों के छह महीने बाद हो रहा है, जिन्होंने मार्क्सवादी नेता केपी शर्मा ओली के प्रशासन को गिरा दिया था। इस प्रदर्शन के दौरान दर्जनों लोग मारे गए थे और सैकड़ों घायल हुए थे क्योंकि प्रदर्शनकारियों ने सरकारी इमारतों पर हमला किया था और पुलिस ने गोलीबारी की थी।

तय होगी भारत-नेपाल संबंध की दिशा

इस बार के चुनाव में मुख्य मुकाबला केपी शर्मा ओली और काठमांडू के पूर्व मेयर और राष्ट्रीय स्वतंत्रता पार्टी के युवा चेहरे बालेंद्र शाह के बीच है। पड़ोसी देश होने के नाते इस चुनाव के परिणाम का सीधा असर भारत पर भी पड़ेगा। काठमांडू की सत्ता में कौन बैठेगा, यह तय करेगा कि आने वाले समय में भारत-नेपाल संबंध किस दिशा में आगे बढ़ेंगे।

लिखित इतिहास से भी पुराना भारत-नेपाल संबंध

भारत के लिए नेपाल केवल एक पड़ोसी नहीं है, बल्कि दोनों देशों के बीच 'रोटी-बेटी' का पुराना नाता है। दोनों देशों के बीच का संबंध लिखित इतिहास से भी पुराना बताया जाता है, जिसकी छवि आज भी खुली सीमाओं में नजर आती है। इसलिए नेपाल से जुड़ा हर अहम विषय भारत को बहुत ही गहराई से प्रभावित करता है।

1,850 किमी लंबी खुली सीमा की चिंता

भारत और नेपाल के बीच 1,850 किलोमीटर से अधिक लंबी खुली सीमा है। नेपाल में राजनीतिक स्थिरता भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद अहम है। अगर नेपाल में एक मजबूत और भारत-समर्थक सरकार बनती है, तो सीमा पार से होने वाली तस्करी, जाली नोटों के कारोबार और घुसपैठ जैसी समस्याओं पर लगाम लगाना आसान हो जाता है।

भारत के लिए स्थिर नेपाल जरूरी

भारत की अपने संबंधों के भविष्य के लिहाज से नेपाल के चुनाव पर नजर लगी हुई है। भारत को एक शांतिपूर्ण पड़ोस की आवश्यकता है। अशांति से ग्रस्त पड़ोस भारत की ऊर्जा को सोख लेगा। इसलिए पड़ोस भारत के अपने विकास, क्षेत्रीय और वैश्विक भूमिका, और राजनीतिक और भू-रणनीतिक भूमिका के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

नेपाल में बढ़ी चीन की दखल

वहीं, पिछले कुछ वर्षों में नेपाल की राजनीति में चीन की दखलंदाजी तेजी से बढ़ी है। बीजिंग लगातार बुनियादी ढांचे और निवेश के जरिए काठमांडू को लुभाने की कोशिश कर रहा है। नेपाल के चुनावों में अक्सर वामपंथी गठबंधन (जिनका झुकाव कभी-कभी चीन की तरफ होता है) और लोकतांत्रिक ताकतों (जो भारत के करीब माने जाते हैं) के बीच कड़ी टक्कर होती है। नई दिल्ली की नजर इस बात पर है कि चुनाव जीतकर आने वाली नई सरकार का कूटनीतिक झुकाव किस तरफ होगा।

चीन की दखल भारत के लिए चिंता का विषय

बता दें कि नेपाल की खुली सीमा तीन दिशाओं में भारत के पाँच अलग-अलग राज्यों से जुड़ी है। उत्तर में तिब्बत के पठार से सीमा जुड़ने के कारण नेपाल की रणनीतिक भू-राजनीतिक स्थिति और यहाँ बढ़ते दिख रहे चीनी प्रभाव को लेकर पश्चिमी देश भी रुचि दिखाते रहे हैं। साल 2017 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहाल की सरकार के दौरान नेपाल चीन की परियोजना बेल्ट एंड रोड इनिशियेटिव (बीआरआई) में शामिल हुआ था। बाद में 2024 के अंत में के पी शर्मा ओली के नेतृत्व में नेपाल ने बीआरआई कार्यान्वयन ढांचे पर हस्ताक्षर किए। चीन के सहयोग से नेपाल में रेलमार्ग निर्माण पर भारत को कोई आपत्ति नहीं होगी। लेकिन यदि नेपाल द्वारा दी गई कोई भी रियायत भारत की सुरक्षा को प्रभावित करती है, तो वहीं हमारी चिंता शुरू होगी।

तालिबान का इस्लामाबाद पर बड़ा हमला, सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना

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पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच जंग जैसे हालात पैदा हो गए हैं। सीमा पर जारी संघर्ष को लेकर दोनों तरफ से बड़े दावे किए जा रहे हैं। पाकिस्‍तानी फाइटर जेट के काबुल पर हमले के बाद अब तालिबानी सेना ने इस्‍लामाबाद में जोरदार हवाई हमला करने का दावा किया है।

कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले

अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि उसने पाकिस्तान के भीतर कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। मंत्रालय के बयान के मुताबिक, ये हमले स्थानीय समयानुसार करीब 11 बजे किए गए और इनमें इस्लामाबाद के पास फैजाबाद, नौशहरा, जमरूद और एबटाबाद के आसपास स्थित सैन्य अड्डों को निशाना बनाया गया।

पाकिस्तान को हमले का जवाब

अफगान रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यह कार्रवाई पाकिस्तान की ओर से काबुल, कंधार और पक्तिया में किए गए हवाई हमलों के जवाब में की गई है। बयान में दावा किया गया कि ‘महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों और सुविधाओं को निशाना बनाया गया और ऑपरेशन सफल रहा।’ हालांकि पाकिस्तान की ओर से इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।

तालिबान का ड्रोन हमले का दावा

पाकिस्तान में अफगान तालिबान ने ड्रोन से हवाई हमले करने का दावा किया है। तालिबान के रक्षा मंत्रालय और एक सरकारी प्रवक्ता ने जानकारी दी कि उन्होंने पाकिस्तान में सैन्य ठिकानों पर ड्रोन से सफल हवाई हमले किए हैं।

पाक का तालिबानी सेना के ठिकानों को तबाह करने का दावा

इससे पहले पाकिस्‍तानी वायुसेना ने काबुल, कंधार और पाकटिआ में कई हमले करके तालिबानी सेना के कई ठिकानों को तबाह करने का दावा किया था। वहीं सीमा रेखा डूरंड लाइन पर भी जोरदार लड़ाई है। तालिबान ने पाकिस्‍तान के 55 से ज्‍यादा सैनिकों को मार गिराने का दावा किया है। तालिबानने अबोटाबाद में पाकिस्‍तानी सेना के अकादमी पर ड्रोन हमला किया। तालिबान ने इन ड्रोन हमलों का वीडियो भी जारी किया है। इस बीच टोलो न्‍यूज के मुताबिक पाकिस्‍तानी सेना ने तोरखम में एक अस्‍पताल को निशाना बनाया है।

अचानक दिल्ली क्यों पहुंचे अमेरिकी सेक्रेट्री? ट्रंप को टैरिफ पर झटके के बाद पीयूष गोयल से हुई मुलाकात

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टैरिफ को लेकर भारत-अमेरिका के बीच लंबे समय तक खींचतान जारी है। इस बीच अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा डोनाल्ड ट्रंप के ग्लोबल टैरिफ को अमान्य घोषित कर दिया है। इन सबसे बीच अमेरिका के वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक भारत पहुंचे हैं। उन्होंने गुरुवार को अचानक दिल्ली का दौरा किया। लटनिक ने वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात की।

अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक और भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियों गोर ने आज केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात की। इस बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक तस्वीर भी साझा की। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी को लेकर हुई चर्चा सकारात्मक रही।

कितनी अहम है ये मुलाकात?

ये बैठक भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर हुई है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 20 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम के तहत आपातकालीन शक्तियों का उपयोग करके ग्लोबल टैरिफ लगाने के ट्रंप के फैसले को रद्द कर दिया, जिससे ट्रंप प्रशासन को बड़ा झटका लगा है। ट्रंप ने 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 122 का हवाला देते हुए 10 फीसदी नया वैश्विक टैरिफ लगाया और 24 घंटे से भी कम समय में घोषणा की कि वे इसे बढ़ाकर 15 फीसदी करेंगे। हालांकि गुरुवार तक सभी व्यापारिक साझेदारों पर मौजूदा एमएफएन दरों के अलावा 10 फीसदी टैरिफ लागू है। यह टैरिफ 150 दिनों के लिए वैध है।

भारत-अमेरिका के बीच व्यापार समझौता

अमेरिकी टैरिफ पर पिछले एक साल से मचे घमासान और व्यापारिक परिस्थियों में उतार-चढ़ाव के बावजूद दोनों देश एक अंतरिम ट्रेड डील को पूरा करने की कोशिश में लगे हैं। ट्रंप के टैरिफ टेंशन के कारण भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर बात बनती और बिगड़ती रही है। पिछले साल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर कुल 25 प्रतिशत का टैरिफ लगाने का फैसला किया, इसके बाद रूस से तेल खरीदने के कारण भारत पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया। इससे भारत पर लगने वाला टैरिफ 50 फीसदी पहुंच गया। इस साल फरवरी में भारत और अमेरिका के बीच बात बनी और ट्रंप ने डील पर सहमति व्यक्त करते हुए टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया। भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील का फ्रेमवर्क भी जारी हो चुका है और इसको अंतिम रूप देना बाकी है।

दिल्ली शराब घोटाला केस में केजरीवाल-सिसोदिया समेत 23 बरी, फैसला आते ही भावुक हुए आप संयोजक

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दिल्‍ली शराब घोटाला मामले में बड़ी खबर है। शराब घोटाला मामले में आरोपी आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को कोर्ट ने बरी कर दिया है। राउज एवेन्‍यू कोर्ट का आदेश आते ही अरविंद केजरीवाल बाहर नि‍कले और पब्‍लि‍क के सामने ही फफक-फफक कर रो पड़े।

अदालत ने कहा- आरोप पत्र में कई कमियां

दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत ने कथित आबकारी नीति घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में सीबीआई की ओर से दाखिल आरोपपत्र का संज्ञान लेने से इनकार कर दिया। विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह ने कहा कि आरोप पत्र में कई ऐसी कमियां हैं जिनका सबूतों से समर्थन नहीं मिलता। उसमें लगाए गए आरोप किसी गवाह या बयान से समर्थित नहीं हैं।

कोर्ट की सीबीआई जांच पर कड़ी टिप्पणी

अदालत ने सीबीआई की जांच पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि केजरीवाल और सिसोदिया को बिना ठोस सामग्री के मामले में आरोपित किया गया। इसके साथ ही उन्होंने मामले में आम आदमी पार्टी के दोनों नेताओं के अलावा 21 अन्य आरोपियों को भी बरी कर दिया। साथ ही और किसी के खिलाफ आरोप तय करने से इनकार कर दिया।

केजरीवाल ने कहा-मैं भ्रष्ट नहीं हूं

राउज एवेन्‍यू कोर्ट का आदेश आते ही अरविंद केजरीवाल बाहर नि‍कले और पब्‍लि‍क के सामने ही फफक-फफक कर रो पड़े। इस दौरान साथ उनके खड़े मनीष सिसोदिया उन्हें गले लगाकर ढांढस बंधाते रहे। काफी देर बाद अरविंद केजरीवाल ने रुंधे गले से कहा, ‘मैं भ्रष्ट नहीं हूं। कोर्ट ने भी कहा कि केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ईमानदार हैं। कोर्ट ने इस मामले में सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। हमने हमेशा कहा कि सत्य ही जीतता है। हमें भारतीय कानून पर पूरा भरोसा है’।

सिसोदिया ने कहा- सत्य की जीत

वहीं, बरी होने पर मनीष सिसोदिया ने भी इसे सत्य की जीत बताया। सिसोदिया ने कहा, ‘सत्यमेव जयते, एक बार फिर मुझे बाबा साहब अंबेडकर की दूरदर्शी सोच और उनके बनाए संविधान पर गर्व हो रहा है। मोदी जी, उनकी पूरी पार्टी और उनकी एजेंसियों के द्वारा हमें बेईमान साबित करने के लिए पूरा जोर लगाने के बावजूद आज यह साबित हो गया कि अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया कट्टर ईमानदार हैं।’

क्या था पूरा मामला

पूरा मामला नवंबर 2021 का है, जब दिल्‍ली की नई आबकारी नीति लागू हुई, तब दावा हुआ कि राजस्व बढ़ेगा। हालांकि, उस मामले को लेकर दिल्‍ली सरकार की मुसीबतें जरूर बढ़ गईं। सालभर भी नहीं हुआ और आबकारी नीति भ्रष्टाचार के आरोपों से घिर गई। बीजेपी ने आरोप लगाए थे कि शराब लाइसेंस बांटने में धांधली हुई। चुनिंदा डीलर्स को फायदा पहुंचाया गया। जुलाई 2022 आते-आते आंच इतनी तेज हो गई कि उपराज्‍यपाल ने मुख्य सचिव से रिपोर्ट मांग ली। रिपोर्ट के आधार पर केंद्रीय एजेंसियों ने जांच तेज की, जिसमें कई गिरफ्तारी भी हुई। केजरीवाल और सिसोदिया की गिरफ्तारी के साथ यह बवाल चरम पर पहुंच गया था।

रिंकू सिंह के पिता का निधन, स्टेज-4 लिवर कैंसर से जूझ रहे थे

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भारतीय टीम के विस्फोटक बल्लेबाज रिंकू सिंह के पिता खानचंद सिंह का निधन हो गया है। उन्होंने ग्रेटर नोएडा के यथार्थ हॉस्पिटल में अंतिम सांस ली। खानचंद को लीवर कैंसर था और वह चौथे स्टेज में पहुंच चुका था। टी20 वर्ल्ड कप के बीच रिंकू सिंह के सिर से पिता का साया उठ गया।

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रिंकू सिंह के पिता ने आज सुबह अस्पताल में आखिरी सांस ली। रिंकू सिंह के पिता का नाम खानचंद्र सिंह था। उन्हें कैंसर की बीमारी थी। वह स्टेज 4 लिवर कैंसर से जूझ रहे थे। हाल ही में उनकी तबीयत काफी खराब हो गई जिसके बाद उन्हें हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। ग्रेटर नोएडा के यथार्थ हॉस्पिटल में उनका इलाजा चल रहा था।

पिता से मिलने गए थे रिंकू सिंह

जिम्बाब्वे के खिलाफ मुकाबले से पहले रिंकू सिंह ने ब्रेक लिया था। पिता की गंभीर स्थिति की सूचना मिलते ही रिंकू सिंह टी20 वर्ल्ड कप 2026 के बीच ही अपने पिता से मिलने आए थे। लेकिन जिम्बाब्वे के खिलाफ मैच से पहले दोबारा टीम के साथ जुड़ गए थे। पिता के निधन की खबर के बाद वो तुरंत वापस लौटे हैं।

सिलिंडर वितरण कर बेटे का सपना पूरा किया

रिंकू सिंह के पिता खानचंद्र गैस एजेंसी पर सिलिंडर वितरण का काम करते थे। वह उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में एक गैस एजेंसी में काम करते थे। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने अपने बेटे रिंकू के क्रिकेटर बनने के सपने को पूरा करने में सहयोग किया। रिंकू की कामयाबी के बाद भी उन्होंने यह काम नहीं छोड़ा। रिंकू ने खुद शुरुआत में सिलिंडर वितरण के काम में पिता का हाथ बंटाया और गरीबी से लड़ते हुए क्रिकेट के मैदान पर अपनी जगह बनाई।

NCERT विवाद पर धर्मेंद्र प्रधान की सफाई, बोले-न्यायपालिका का अपमान करने की मंशा नहीं थी

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एनसीईआरटी की कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से जुड़े आपत्तिजनक बातों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए सुनवाई की। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने इसे न्यायपालिका को बदनाम करने की सोची-समझी साजिश करार दिया और बाजार से किताब को वापस लेने का निर्देश दिया।

एनसीईआरटी की किताब में न्यायपालिका से जुड़े कथित विवादित अध्याय पर अब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा कि जो कुछ हुआ उससे उन्हें गहरा दुख है और सरकार या शिक्षा मंत्रालय की ओर से न्यायपालिका का अपमान करने की कोई मंशा नहीं थी।

धर्मेद्र प्रधान ने कहा, 'हम ज्यूडिशियरी का पूरा सम्मान करते हैं। ज्यूडिशियरी ने जो भी कहा है, हम उसका पूरा पालन करेंगे। जो हुआ है, उससे मैं बहुत दुखी हूं, और मैं अफसोस जाहिर करता हूं। जैसे ही यह मामला मेरे ध्यान में आया, मैंने तुरंत NCERT को संबंधित किताबें वापस लेने का निर्देश दिया ताकि वे आगे सर्कुलेट न हों। उन्हें वापस बुलाने के लिए जरूरी कदम उठाए गए हैं।'

सामग्री तैयार करने की प्रक्रिया की जांच की जा रही-प्रधान

केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार न्यायपालिका का सर्वोच्च सम्मान करती है और किसी भी शैक्षणिक सामग्री के जरिए संस्थाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि एनसीईआरटी की किताब में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से जुड़ी सामग्री तैयार करने की प्रक्रिया की जांच की जा रही है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि अध्याय तैयार करने में शामिल लोगों की जवाबदेही तय की जाएगी और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य जागरूकता फैलाना है, संस्थाओं को बदनाम करना नहीं।

सीजेआई की अहम टिप्पणी

इससे पहले गुरूवार सुबह मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचौली की बेंच ने मामले पर सुनवाई की। सीजेआई सूर्यकांत ने इस मामले में सुनवाई करते हुए कुछ अहम टिप्पणियां की। सीजेआई ने आदेश में कहा कि व्यवस्था के 3 अंग - विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका लोकतंत्र के सुचारू रूप से काम करने के लिए जरूरी हैं। उन्होंने कहा, 'हमें एक अखबार से NCERT की किताब में लिखे गए अंश का पता चला। इसे जानकर हमें आघात पहुंचा।'

न्यायपालिका की गरिमा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश

सीजेआई ने कहा कि ऐसा लगता है कि यह सोच समझकर न्यायपालिका की गरिमा को नुकसान पहुंचाने के लिए किया गया। सीजेआई ने कहा कि न्यायपालिका के बारे में इस तरह की बातें करना और उसके प्रति असम्मान फैलाना निश्चित रूप से आपराधिक अवमानना का मामला हो सकता है। अगर ऐसा जान-बूझकर किया गया है तो।

हम सिर्फ माफी पर जाने नहीं दे सकते-सीजेआई

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि यह सोचा-समझा योजनाबद्ध कदम है। बच्चों के अलावा शिक्षक और अभिभावक भी इसे पढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि हम अधिकारियों को सिर्फ माफी पर जाने नहीं दे सकते। यह कहना कि इसे हटाया जा रहा है, काफी नहीं। किताब मार्केट में गई। मैंने भी इसकी एक कॉपी देखी है। उन्होंने शिक्षा विभाग को आदेश दिया कि मार्केट और स्कूलों में भेजी गई किताबें वापस ली जाएं और किताब का ऑनलाइन मटीरियल भी हटाया जाए।

कनाडा में क्राइम से भारत का कोई लेना-देना नहीं”, भारत दौरे से पहले मार्क कार्नी के नरम पड़े सुर

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निमंत्रण पर कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी भारत आ रहे हैं। वो कल यानि शुक्रवार 27 फरवरी से 2 मार्च तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगेय़ यह प्रधानमंत्री कार्नी की भारत की पहली आधिकारिक यात्रा होगी। कर्नी ने भारत यात्रा से ठीक पहले बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि कनाडा में होने वाले हिंसक अपराधों से भारत का कोई संबंध नहीं है। यह बयान ऐसे समय आया है जब आतंकी हरदीप सिंह निज्जर मामले को लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय तक कूटनीतिक तनाव बना रहा।

कनाडाई अधिकारियों ने स्पष्ट कहा है कि उनके देश में होने वाले हिंसक अपराधों से भारत का कोई लेना-देना नहीं है। कनाडाई अधिकारियों ने दो टूक कहा कि यदि उन्हें लगता कि भारत कनाडा की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय हस्तक्षेप कर रहा है, तो प्रधानमंत्री की यह यात्रा संभव नहीं होती। उन्होंने यह भी दोहराया कि कनाडा अपने आंतरिक मामलों में किसी भी विदेशी हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं करता। यह बयान ऐसे समय आया है जब कार्नी हिंद-प्रशांत क्षेत्र के दौरे की शुरुआत भारत से कर रहे हैं।

खालिस्तानी आतंकी की हत्या को लेकर बिगड़े भारत-कनाडा के रिश्ते

कनाडा सरकार के इस कदम को दोनों देशों के रिश्तों को बेहतर करने के तौर पर देखा जा रहा है। जो जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल के अंतिम दिनों में बेहद खराब दौर में पहुंच गए थे। कनाडा में खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या हुई थी। कनाडा की तत्कालीन ट्रूडो सरकार ने भारत पर निज्जर की हत्या कराने का आरोप लगाया और इसे संप्रभुता का उल्लंघन करार दिया था। हालांकि भारत सरकार ने कनाडा के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया और निज्जर की हत्या में संलिप्तता से इनकार किया। इस मामले को लेकर दोनों देशों के रिश्ते इतने बिगड़े की दोनों ने अपने कुछ राजनयिकों को वापस बुला लिया।

भारत-कनाडा के रिश्ते फिर पटरी पर

हालांकि, ट्रूडो सरकार के सत्ता से बाहर होने और मार्क कार्नी के सत्ता संभालने के बाद से भारत- कनाडा के रिश्तों में फिर से बेहतरी हो रही है। मार्क कार्नी भारत दौरे पर आ रहे हैं और इस दौरे का मकसद दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को फिर से मजबूत करना है। इसे कनाडा द्वारा व्यवहारिक विदेश नीति अपनाने के तौर पर भी देखा जा रहा है।