आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने 583 करोड़ रुपए के सरकारी भुगतान के साथ कायम रखा भरोसा

हरियाणा सरकार के विभाग ने सिद्धांत आधारित दृष्टिकोण के लिए आईडीएफसी फर्स्ट बैंक का आभार जताया


मुंबई, फरवरी, 2026: आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने चंडीगढ़ स्थित अपनी एक शाखा में हरियाणा सरकार के कुछ विभागों के खातों से जुड़े हालिया मामले पर अपनी पूर्व जानकारी का संदर्भ दिया है।
प्रारंभिक जाँच में संकेत मिले हैं कि शाखा के कुछ कर्मचारियों ने कथित रूप से जाली दस्तावेज़ों और भुगतान निर्देशों को क्लियर करने में धोखाधड़ी की और संभव है कि इसमें बाहरी लोगों की मिलीभगत भी रही हो। मामले की फिलहाल संबंधित प्राधिकरणों द्वारा जाँच की जा रही है।
जाँच जारी रहने के बावजूद, बैंक ने तुरंत कदम उठाते हुए हरियाणा सरकार के संबंधित विभागों द्वारा दावा की गई मूल राशि और ब्याज का 100% भुगतान कर दिया है, जिसकी कुल राशि 583 करोड़ रुपए है। अंतिम राशि में आगे किसी अतिरिक्त दावे या मिलान प्रक्रिया के आधार पर बदलाव हो सकते हैं।
हरियाणा सरकार के संबंधित विभागों ने इस मामले में बैंक के सिद्धांत आधारित रुख, त्वरित कार्रवाई और पेशेवर आचरण की सराहना करते हुए, आभार व्यक्त किया है।
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने हरियाणा सरकार और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के पूर्ण सहयोग से यह स्पष्ट किया है कि वह धोखाधड़ी में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और उन्हें न्याय के कटघरे तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है।
बैंक वित्तीय रूप से मजबूत और बेहतर पूँजी स्थिति में है। 31 दिसंबर, 2025 तक बैंक को फिक्स्ड डिपॉजिट्स के लिए क्रिसिल द्वारा एएए रेटिंग प्राप्त है, जबकि दीर्घकालिक रेटिंग में क्रिसिल, आईसीआरए, इंडिया रेटिंग्स और केयर से एए+ रेटिंग प्राप्त है। बैंक का कुल ग्राहक व्यवसाय (ऋण और जमा) 5,62,090 करोड़ रुपए पर पहुँच गया है, जो साल-दर-साल 22.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। एसेट क्वालिटी मजबूत बनी हुई है, जिसमें ग्रॉस एनपीए 1.69 प्रतिशत और नेट एनपीए 0.53 प्रतिशत है। बैंक का कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो 16.22 प्रतिशत और सीएएसए रेशियो 51.6 प्रतिशत है।
बैंक की यूनिट इकोनॉमिक्स मजबूत है। वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में इसका नेट इंटरेस्ट मार्जिन 5.76 प्रतिशत रहा, जो स्वस्थ स्तर को दर्शाता है। बैंक फिलहाल निवेश चरण में है और भविष्य का एक बड़ा व विविधीकृत बैंक बनने के लिए प्रोडक्ट्स, टेक्नोलॉजी, डिस्ट्रीब्यूशन, ब्रांचेस, एटीएम, ग्रामीण बैंकिंग, कॉर्पोरेट बैंकिंग, कैश मैनेजमेंट, ट्रेड, एनआरआई, क्रेडिट कार्ड्स और अन्य यूनिवर्सल बैंकिंग सॉल्यूशंस में निवेश कर रहा है। आने वाले वर्षों में इन निवेशों का परिचालन लाभ वित्त वर्ष 27 से आय और अधिक मजबूत मुनाफे के रूप में दिखाई देने की उम्मीद है।
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक आधुनिक टेक्नोलॉजी आर्किटेक्चर और उन्नत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर आधारित है, जो बेहतर ग्राहक अनुभव को समर्थन देता है। इसके मोबाइल बैंकिंग प्लेटफॉर्म को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त रिसर्च फर्म फॉरेस्टर ने वैश्विक स्तर पर दूसरे स्थान पर रैंकिंग हासिल की है। साथ ही, इसे गूगल पर 4.9 और आईओएस प्लेटफॉर्म पर 4.8 की उच्च ग्राहक रेटिंग प्राप्त है।
भारत–यूरोप कनेक्टिविटी के लिए अदाणी पोर्ट्स और मार्सेईल फॉस पोर्ट की रणनीतिक साझेदारी*
*अहमदाबाद, 18 फरवरी 2026* : दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती इंटीग्रेटेड ट्रांसपोर्ट यूटिलिटी, अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड (एपीएसईजेड) और फ्रांस का प्रमुख पोर्ट एवं भूमध्यसागर का प्रमुख प्रवेश द्वार, पोर्ट ऑफ़ मार्सेईल फॉस ने व्यापार सुगमता, पोर्ट इनोवेशन और एनर्जी ट्रांजीशन के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।
यह साझेदारी आईएमईसी पोर्ट्स क्लब बनाने का प्रस्ताव रखती है, जिसका उद्देश्य इंडिया–मिडिल ईस्ट–यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (आईएमईसी) मार्ग पर मुख्य पोर्ट्स के बीच समन्वय को मजबूत करना है, और भारत तथा यूरोपीय यूनियन के बीच कनेक्टिविटी को और मजबूत बनाना है। यह भारत-ईयू ट्रेड के लिए आईएमईसी मार्ग को पूरा करता है, जिसे भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच एफटीए ने और बढ़ावा दिया है, जिसे भारत के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 'द मदर ऑफ़ ऑल डील' कहा है।
यह एमओयू फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन के दौरे के दौरान किया गया, जो भारत–फ्रांस रणनीतिक साझेदारी के विस्तार को दर्शाता है और इसे व्यापक आईएमईसी व भारत–ईयू ट्रेड दृष्टिकोण के साथ जोड़ता है। 2023 के जी20 शिखर सम्मेलन में नई दिल्ली में लॉन्च किया गया इंडिया–मिडिल ईस्ट–यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (आईएमईसी) 6,000 किलोमीटर लंबा मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट है, जो भारत और यूरोप को एकीकृत समुद्री मार्गों, रेल नेटवर्क, डिजिटल सिस्टम और क्लीन एनर्जी मार्गों के माध्यम से जोड़ता है।
आईएमईसी के पूर्वी प्रवेश द्वार पर, एपीएसईजेड के मुंद्रा और हाजीरा पोर्ट एक मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स हब का निर्माण करते हैं, जो दक्षिण एशिया को पश्चिम एशिया से जोड़ता है। इस एमओयू के माध्यम से, मार्सेईल फॉस कॉरिडोर के पश्चिमी यूरोपीय प्रवेश द्वार को मजबूत करता है, लगभग 70 मिलियन टन की अतिरिक्त क्षमता जोड़ता है और आईएमईसी की पहुँच को यूरोप के अंदर और गहराई तक बढ़ाता है। मार्सेईल फॉस यूरोप के सबसे बड़े इंटीग्रेटेड मल्टीमॉडल पोर्ट सिस्टम में से एक है। यह साझेदारी भारत–ईयू ट्रेड को सुगम बनाने के लिए एक अधिक व्यवस्थित और समन्वित मार्ग स्थापित करती है।
एपीएसईजेड के होल-टाइम डायरेक्टर और सीईओ अश्वनी गुप्ता ने कहा, "भारत ने इस कॉरिडोर को आगे बढ़ाने में पहले ही नेतृत्व की भूमिका निभाई है, और भारत–ईयू फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के पूरा होने के साथ, भाग लेने वाले देशों के बीच व्यापार कई गुना बढ़ने की उम्मीद है। एपीएसईजेड में, भारत के पश्चिमी तट पर हमारे हाजीरा और मुंद्रा पोर्ट्स ने कॉरिडोर के पहले और मध्य हिस्सों में एक निर्बाध मार्ग स्थापित कर लिया है। फ्रांस के पोर्ट ऑफ़ मार्सेईल फॉस के साथ इस एमओयू के जरिये, हमने अब यूरोप तक अंतिम चरण को सफलतापूर्वक जोड़ दिया है। यह साझेदारी सभी भाग लेने वाले देशों के बीच सूचना और सामग्री के आदान-प्रदान को तेजी से बढ़ाएगी, और आर्थिक सहयोग तथा सप्लाई-चेन की मजबूती को और सशक्त करेगी।"
पोर्ट ऑफ़ मार्सेईल फॉस के सीईओ हर्वे मार्टल ने कहा, "हमें खुशी है कि हम एपीएसईजेड के साथ अपनी साझेदारी को और मजबूत कर रहे हैं, ऐसे समय में जब आईएमईसी कॉरिडोर निर्णायक चरण में प्रवेश कर रहा है। भारत और मार्सेईल इस भविष्य के व्यापार मार्ग के दोनों छोर पर स्थित हैं, जिससे दोनों पोर्ट्स पर इस नए मार्ग को संरचित और सक्रिय करने की बड़ी जिम्मेदारी है। हम साथ मिलकर शामिल पोर्ट्स को सक्रिय करने और एकजुट करने का इरादा रखते हैं, और अपने क्षेत्रों के बीच एक अधिक कुशल,  टिकाऊ कनेक्शन के लिए मजबूत समर्थन करेंगे।"
यह साझेदारी निम्नलिखित क्षेत्रों पर केंद्रित होगी:
• आईएमईसी मार्ग को यूरेशियन ट्रेड के लिए एक टिकाऊ, सुरक्षित और प्रतिस्पर्धी विकल्प के रूप में बढ़ावा देना, जिसमें संयुक्त अभियान, इंटरनेशनल ट्रेड फेयर्स और रोडशो में भागीदारी, तथा लक्षित बी2बी जुड़ाव शामिल हैं।
• पोर्ट डिजिटलाइजेशन, स्मार्ट पोर्ट प्लेटफ़ॉर्म, डेटा इंटरऑपरेबिलिटी, साइबर सिक्योरिटी, वैकल्पिक ईंधन, शोर पावर सप्लाई और कम कार्बन बंकरिंग में तकनीकी आदान-प्रदान और क्षमता निर्माण शामिल हैं।
• मुंद्रा–मार्सेईल फॉस ग्रीन मेरिटाइम कॉरिडोर का विकास।
• आईएमईसी पोर्ट्स क्लब की सह-स्थापना, ताकि कॉरिडोर के पोर्ट्स के बीच संवाद संस्थागत हो और आईएमईसी इंफ्रास्ट्रक्चर का समर्थन करने वाली नीति चर्चाओं और इन्वेस्टमेंट फ्रेमवर्क के लिए समन्वय सुनिश्चित हो।
मीडिया संपर्क -
एआई युग में प्लेटफॉर्म गवर्नेंस की चुनौतियों पर चर्चा के लिए ग्लोबल साउथ विशेषज्ञों को एक मंच पर लाया एसएफएलसी.इन (SFLC.in)

दिल्ली एनसीआर, फरवरी 2026: एसएफएलसी.इन (SFLC.in) ने मानवाधिकार, प्रौद्योगिकी नीति और इंटरनेट शासन के क्षेत्र में कार्यरत ब्रिटेन की संस्था ग्लोबल पार्टनर्स डिजिटल के साथ मिलकर विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को एक मंच पर एकत्रित किया। विशेषज्ञों ने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जेनरेटिव एआई की तीव्र वृद्धि से उत्पन्न विनियमन, जवाबदेही और मानवाधिकारों की सुरक्षा से जुड़ी वैश्विक बहस के बदलते स्वरूप पर विचार-विमर्श किया।
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के साथ आयोजित इस बैठक में लगभग 40 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इनमें कानून निर्माता, नीति-निर्माता, नागरिक समाज के नेता, उद्योग प्रतिनिधि, शोधकर्ता तथा प्रौद्योगिकी शासन विशेषज्ञ शामिल थे। वे कृत्रिम बुद्धिमत्ता और प्लेटफॉर्म शासन से संबंधित नई चुनौतियों पर चर्चा के लिए एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका, यूरोप और अन्य क्षेत्रों से एकत्र हुए थे।
प्रारंभिक चर्चाओं में यह सामने आया कि कई प्लेटफ़ॉर्म शासन नियम ग्लोबल साउथ की परिस्थितियों से अलग बनाए गए हैं और वे स्थानीय सामाजिक-राजनीतिक स्थितियों, भाषाई विविधता तथा सीमित संस्थागत क्षमता के अनुरूप पूरी तरह उपयुक्त नहीं हैं। जैसे-जैसे जेनरेटिव और एजेंट-आधारित एआई प्रणालियाँ डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म का हिस्सा बन रही हैं, नए प्रश्न उभर रहे हैं। इनमें स्वचालित सामग्री संयमन की जिम्मेदारी किसकी होगी, दायित्व का निर्धारण कैसे किया जाएगा, चुनावों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी और उपयोगकर्ताओं की रक्षा कैसे की जाएगी, जैसे प्रश्न शामिल हैं।
ग्लोबल पार्टनर्स डिजिटल की पॉलिसी और एडवोकेसी प्रमुख मारिया पाज़ ने कहा, "नियामक अब भी उन प्लेटफॉर्म के लिए पुराने मध्यस्थ दायित्व नियमों का उपयोग करने का प्रयास कर रहे हैं, जो अब जेनरेटिव एआई का व्यापक रूप से इस्तेमाल करते हैं। ग्लोबल साउथ के अनुभव दर्शाते हैं कि अस्पष्ट मॉडरेशन (संयमन) प्रणालियाँ और स्वचालित निर्णय कमजोर समुदायों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। अलग-अलग और असंगठित राष्ट्रीय नीतियों के बजाय अधिकार-आधारित तथा सहयोगात्मक दृष्टिकोण की आवश्यकता है।”
राज्यसभा सांसद श्री साकेत गोखले ने एक जनप्रतिनिधि के रूप में अपनी राय साझा की। उन्होंने मतदाता डेटा, अनुवाद प्रणालियों और चुनावी मानचित्रण में एआई उपकरणों के बढ़ते उपयोग पर प्रकाश डाला। उन्होंने चेतावनी दी कि पारदर्शिता और प्रभावी निगरानी के बिना स्वचालित प्रणालियों का उपयोग लोकतंत्र में विश्वास को कमज़ोर कर सकता है। उन्होंने कहा, “हमें एआई विनियमन को उसी गंभीरता से देखने की आवश्यकता है, जैसे हम जलवायु परिवर्तन को देखते हैं।” उन्होंने बड़े वैश्विक चुनावों से पूर्व लोकतांत्रिक देशों के बीच सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया।
बैठक में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार के बी-टेक परियोजना की सलाहकार इसाबेल एबर्ट द्वारा व्यवसाय और मानवाधिकार पर एक प्रस्तुति दी गई। संयुक्त राष्ट्र के व्यवसाय और मानवाधिकार संबंधी मार्गदर्शक सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए उन्होंने तीन प्रमुख बिंदुओं पर बल दिया—पहला, नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना सरकारों की जिम्मेदारी है; दूसरा, मानवाधिकारों का सम्मान करना कंपनियों का दायित्व है; और तीसरा, अधिकारों के उल्लंघन की स्थिति में प्रभावी समाधान उपलब्ध कराना आवश्यक है।
क्षेत्रीय गोलमेज चर्चाओं में विभिन्न क्षेत्रों की विशिष्ट शासन चुनौतियों पर प्रकाश डाला गया। दक्षिण-पूर्व एशिया में काज़िया के एक प्रतिनिधि ने बताया कि इंडोनेशिया में कुछ संगठनों को महिलाओं से संबंधित डीपफेक सामग्री के कारण अस्थायी प्रतिबंध का सामना करना पड़ा। इससे स्पष्ट होता है कि एआई किस प्रकार लैंगिक आधार पर होने वाले नुकसान को बढ़ा सकता है। यद्यपि इंडोनेशिया में ऑनलाइन सामग्री को विनियमित करने के नियम मौजूद हैं, परंतु एआई से उत्पन्न जोखिमों से निपटने के लिए कोई विशिष्ट ढांचा नहीं है, जिससे दोषियों को दंडित करना कठिन हो जाता है।
लैटिन अमेरिका से ब्राज़ील स्थित इंटरनेटलैब में शोध प्रमुख कैमिला अकेमी ने जेनरेटिव एआई उपकरणों की तीव्र वृद्धि और चुनावी निष्पक्षता पर उनके प्रभावों पर चर्चा की। वहीं अफ्रीका से पैराडाइम इनिशिएटिव के सानी सुलेमान ने नीतिगत कमियों, सीमित आधारभूत संरचना, तकनीकी विशेषज्ञता की कमी तथा सरकारों और बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों के बीच शक्ति असंतुलन जैसी प्रमुख चुनौतियों को दर्शाया।
एसएफएलसी.इन ने कहा कि जैसे-जैसे जेनरेटिव एआई डिजिटल प्लेटफॉर्म का अभिन्न अंग बनता जा रहा है, शासन प्रणालियों को पारंपरिक इंटरनेट कानूनों से आगे बढ़ना होगा। ग्लोबल साउथ के दृष्टिकोण को शामिल करना और तीव्र गति से विकसित हो रही प्रौद्योगिकी के साथ जवाबदेही सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है।
बैठक में प्रतिभागियों ने सहमति व्यक्त की कि समावेशी और अधिकार-आधारित एआई शासन प्रणाली के निर्माण हेतु विभिन्न देशों के बीच निरंतर सहयोग और सशक्त वैश्विक साझेदारी की सख्त आवश्यकता है।
एसएफएलसी.इन ने डिजिटल अधिकारों पर ध्यान केंद्रित करते हुए, ग्लोबल साउथ के सुझावों को प्रमुखता देने और यह सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई कि एआई तथा सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी विनियमन मानवता और जवाबदेही पर आधारित रहें।
*योगी आदित्यनाथ ने ‘शतक’ की सराहना करते हुए कहा, “आरएसएस की 100 वर्षों की यात्रा पर बनी यह फिल्म एक प्रेरणादायी पहल है”*

यूपी,फरवरी, 2026: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज लखनऊ स्थित अपने सरकारी आवास पर फिल्म निर्माता वीर कपूर से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्षों की प्रेरणादायी यात्रा पर आधारित फिल्म ‘शतक-संघ के 100 वर्ष’ को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। इस मुलाकात से जुड़ी तस्वीर भी उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल पर साझा कीं।

मुख्यमंत्री ने फिल्म की सराहना करते हुए ‘शतक’ की पूरी टीम को बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा, “ऐसी फिल्में समाज को संगठन के इतिहास, उसके मूल विचारों और राष्ट्र निर्माण में उसके योगदान से परिचित कराती हैं।“

फिल्म निर्माता वीर कपूर ने मुख्यमंत्री को फिल्म के निर्माण से जुड़ी विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह फिल्म संघ की 100 वर्षों की यात्रा, उसके वैचारिक आधार और समाज सेवा के विभिन्न कार्यों को दर्शाती है। भेंट के दौरान फिल्म का पोस्टर भी प्रस्तुत किया गया। यह मुलाकात सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई।
एमएसएमई के लिए कम बिजली खर्च और स्वच्छ ऊर्जा की ओर आसान रास्ता

नागपुर,  फरवरी, 2026: बढ़ती ऊर्जा लागत के दौर में एमएसएमई ऐसे समाधान चाहते हैं, जो खर्च घटाने के साथ भविष्य को भी सुरक्षित बनाएँ। रूफटॉप सोलर इसी दिशा में एक कारगर विकल्प बनकर उभरा है, जो कारोबार को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाने में मदद करता है। इसी सोच के तहत, एक्सिस बैंक ने एमएसएमई के लिए रूफटॉप सोलर फाइनेंस की शुरुआत की है। इस खास वित्तीय समाधान के जरिए एमएसएमई 10 लाख रुपए से 2 करोड़ रुपए तक का बिना जमानत ऋण ले सकते हैं, जिसकी चुकौती अवधि 4 से 7 वर्षों तक रखी गई है। इसका उद्देश्य यह है कि उद्यम अपने बैलेंस शीट या कार्यशील पूंजी पर अतिरिक्त दबाव डाले बिना सोलर सिस्टम में निवेश कर सकें।

स्वयं के स्वामित्व वाला रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने से एमएसएमई को बिजली खर्च कम करने, ऊर्जा लागत पर बेहतर नियंत्रण पाने और लंबे समय में वित्तीय मजबूती हासिल करने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही यह पहल भारत के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन में भी योगदान देगी।

यह सुविधा एक्सिस बैंक के देशभर में फैले शाखा नेटवर्क के माध्यम से उपलब्ध होगी। बेहतर क्रियान्वयन के लिए बैंक ने प्रमुख ओईएम और एक टेक्नोलॉजी पार्टनर के साथ साझेदारी की है, जिससे एमएसएमई को लागत, अनुमानित बचत और समय-सीमा जैसी जानकारियों में पूरी पारदर्शिता मिल सके।
होंडा मोटरसाइकल एण्‍ड स्‍कूटर इंडिया ने मध्‍य प्रदेश के ग्‍वालियर में सुरक्षित भविष्‍य के लिए रोड सेफ्टी कन्‍वेंशन का आयोजन किया
100 से अधिक स्‍कूलों के प्रधानाचार्यों और शिक्षकों ने इस कन्‍वेंशन में हिस्‍सा लिया

ग्वालियर : होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया (एचएमएसआई) ने मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक रोड सेफ्टी कन्वेंशन आयोजित किया, जिसमें 100 से अधिक स्कूलों के प्रधानाचार्यों और शिक्षकों ने हिस्‍सा लिया। यह पहल एचएमएसआई के चल रहे प्रोजेक्ट - हमारी भावी पीढ़ी के लिए माइंडसेट डेवलपमेंट का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य बच्चों में कम उम्र से ही सुरक्षित सड़क आदतें विकसित करना है।
श्री पुष्पा डोदी, डीईओ इंचार्ज, ग्वालियर; डॉ. के. पी. एस. तोमर, ट्रैफिक इंस्पेक्टर, ग्वालियर; और श्री शिशिर चतुर्वेदी, जनरल मैनेजर – सेफ्टी राइडिंग, होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति से इस कन्वेंशन की शोभा बढ़ाई।
सत्रों में शिक्षकों को किड्स माइंडसेट चेंज अवेयरनेस मॉड्यूल्स से परिचित कराया गया। ये मॉड्यूल इस तरह बनाए गए हैं कि बच्चे छोटी उम्र से ही सड़क पर सुरक्षित रहने की आदतें सीख सकें। कन्वेंशन का मुख्य मकसद यह है कि स्कूल इन मॉड्यूल को अपनी पढ़ाई में शामिल करें और सड़क सुरक्षा की शिक्षा को जोर-शोर से बढ़ावा दें। एक खास पोर्टल के जरिए स्कूलों को ये मॉड्यूल हमेशा मिलते रहेंगे। इस पोर्टल पर समय-समय पर नए अपडेट भी आते रहेंगे, ताकि बच्चों को सड़क सुरक्षा की ताजा और सही जानकारी मिलती रहे। स्कूल चाहें तो इन सत्रों को लाइव देख सकते हैं या डाउनलोड करके बाद में इस्तेमाल कर सकते हैं। यह सुविधा इसलिए है कि हर स्कूल को आसानी हो। साथ ही, ये मॉड्यूल कई भाषाओं में उपलब्ध हैं, ताकि अलग-अलग इलाकों के बच्चे आसानी से समझ सकें।
अब तक, एचएमएसआई ने भारत भर में सफलतापूर्वक 21 रोड सेफ्टी कन्वेंशन्स आयोजित किए हैं, जिनमें 2600+ स्कूलों तक पहुंच बनाई गई है और 11 लाख से अधिक छात्रों को संवेदनशील बनाया गया है। एचएमएसआई ने इस व्‍यापक पहुंच को देखते हुए इस वर्ष कार्यक्रम को और विस्तार देने का लक्ष्य तय किया है ताकि देश भर में और अधिक स्कूलों तथा समुदायों तक पहुंचा जा सके। प्रधानाचार्यों और शिक्षकों को सीधे शामिल करके, कंपनी सुनिश्चित करती है कि सुरक्षा का संदेश कक्षाओं के माध्यम से बढ़ता रहे, जिससे आखिरकार परिवारों और पूरे समाज पर प्रभाव पड़े।
एचएमएसआई के ‘सेफ्टी फॉर एव्‍रीवन’ के वैश्विक संदेश के तहत, एक जिम्मेदार रोड यूजर्स की पीढ़ी विकसित करने पर केंद्रित है। इस कन्वेंशन का मुख्य लक्ष्य है कि सड़क सुरक्षा की सीख को और बढ़ाया जाए। ताकि बच्चे छोटी उम्र से ही सुरक्षित तरीके से व्यवहार करना सीखें और यह उनकी आदत बन जाए। शिक्षकों, स्कूल के प्रबंधकों और स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर काम करके, कंपनी लगातार कोशिश करती है कि भारत की आने वाली पीढ़ियों के लिए सड़क सुरक्षा को सबकी जिम्मेदारी और जिंदगी जीने का एक तरीका बनाया जाए।

सड़क पर सुरक्षा के लिये होंडा मोटरसाइकल एण्‍ड स्‍कूटर इंडिया की सीएसआर को लेकर प्रतिबद्धता:
2021 में होंडा ने साल 2050 के लिये अपना ‘ग्‍लोबल विज़न स्‍टेटमेंट’ घोषित किया था कि वह होंडा मोटरसाइकल्‍स और ऑटोमो‍बाइल्‍स से यातायात दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को शून्‍य पर लाने का प्रयास करेगी। भारत में एचएमएसआई 2030 तक ऐसी मौतों की संख्‍या को आधा करने की अपनी सोच और भारत सरकार के निर्देश के अनुसार काम कर रही है। 

इस लक्ष्‍य को हासिल करने का एक महत्‍वपूर्ण पहलू यह भी है कि कंपनी साल 2030 तक बच्‍चों में सड़क पर सुरक्षा के लिये एक सकारात्‍मक सोच विकसित करने के बाद भी उन्‍हें लगातार शिक्षित करना चाहती है। स्‍कूलों और कॉलेजों में सड़क पर सुरक्षा की शिक्षा केवल जागरूकता पैदा करने के लिये नहीं है, बल्कि बच्‍चों को सुरक्षा की संस्‍कृति से अवगत कराने और उन्‍हें ‘रोड सेफ्टी एम्‍बेसेडर्स’ बनाने के लिये भी है। इससे भविष्‍य की पीढि़याँ जिम्‍मेदार बनने और अधिक सुरक्षित समाज में बड़ा योगदान देने के लिये सशक्‍त होती हैं।

एचएमएसआई ऐसी कंपनी बनना चाहती है, जिसे समाज पसंद करे और वह समाज के सभी वर्गों के बीच सड़क पर सुरक्षा का प्रचार करने पर मजबूती से ध्‍यान दे रही है। स्‍कूली बच्‍चों से लेकर कॉर्पोरेट्स और बड़े पैमाने पर समाज तक, हर वर्ग के लिये उसके पास अनूठे आइडिया हैं।

एचएमएसआई के कुशल सुरक्षा प्रशिक्षक भारत में हमारे द्वारा गोद लिये गये 10 ट्रैफिक ट्रेनिंग पार्क्‍स (टीटीपी) और 6 सेफ्टी ड्राइविंग एज्‍युकेशन सेंटर्स (एसडीईसी) में रोजाना कार्यक्रम चलाते हैं। यह काम सड़क पर सुरक्षा की शिक्षा को समाज के हर हिस्‍से तक पहुँचाने के लिये होता है और इस पहल ने 10 मिलियन से ज्‍यादा भारतीयों तक पहुँच बनाई है। एचएमएसआई के राष्‍ट्रीय सड़क सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम ने निम्‍नलिखित माध्‍यमों से शिक्षा को मजेदार एवं वैज्ञानिक बनाया है:

सीखने का वैज्ञानिक तरीका: होंडा के कुशल प्रशिक्षकों ने सड़क के संकेतों और चिन्‍हों, सड़क पर ड्राइवरों के कर्तव्‍यों, राइडिंग के गियर तथा मुद्रा समझाने और सुरक्षित राइडिंग के आचरण पर सैद्धांतिक सत्रों की बुनियाद तैयार की है।
*आगामी आईपीओ को लेकर एनएसई बोर्ड का फैसला*

*मुंबई*, *फरवरी 2026:* एनएसई ने अपने आईपीओ से जुड़े नियम और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया है। इसके लिए एक विशेष आईपीओ समिति को दोबारा गठित किया गया है, जो लिस्टिंग की पूरी प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगी और उसकी निगरानी करेगी।

पुनर्गठित आईपीओ समिति की संरचना इस प्रकार है:

- श्री तबलेश पांडेय – चेयरपर्सन (नॉन इंडिपेंडेंट डायरेक्टर)
- श्री श्रीनिवास इंजेती – मेंबर (पब्लिक इंटरेस्ट डायरेक्टर)
- प्रो. (डॉ.) ममता बिस्वाल – मेंबर (पब्लिक इंटरेस्ट डायरेक्टर)
- न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) श्रीमती अभिलाषा कुमारी – मेंबर (पब्लिक इंटरेस्ट डायरेक्टर)
- प्रो. जी. शिवकुमार – मेंबर (पब्लिक इंटरेस्ट डायरेक्टर)
- श्री आशीष कुमार चौहान – मेंबर (मैनेजिंग डायरेक्टर एवं सीईओ)

एनएसई के बोर्ड ने नियामकीय मंजूरी के अधीन एक पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी की स्थापना को मंजूरी दी है, जिसके माध्यम से एक कोयला एक्सचेंज स्थापित किया जाएगा। प्रस्तावित सहायक कंपनी का नाम नेशनल कोल एक्सचेंज / भारत कोल एक्सचेंज / इंडिया कोल एक्सचेंज हो सकता है, जिसे मिनिस्ट्री ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स द्वारा स्वीकृति दी गई है।
इस कंपनी का गठन कोयला मंत्रालय द्वारा जारी प्रस्तावित कोल रेगुलेशंस, 2025 के अनुरूप किया जाएगा। एनएसई ने प्रस्तावित कोयला एक्सचेंज की सहायक कंपनी में ₹100 करोड़ तक की पूंजी निवेश को मंजूरी दी है।
इंदौर में स्टूडेंट्स के सपनों को हकीकत से जोड़ने वाला मंच बना 'माफिया इंक चैंपियनशिप और आंत्रप्रेन्योरशिप एंड इनोवेशन समिट-2026'

- स्टूडेंट्स को मिला स्टार्टअप इकोसिस्टम, बिज़नेस सोच और लीडरशिप को करीब से समझने का मौका
- 5 कॉलेजों के 700 से ज्यादा स्टूडेंट्स ने मैनेजमेंट गेम के जरिए खुद को आजमाया
- 1 लाख रुपए का नकद पुरस्कार, पेड इंटर्नशिप और रियल इंडस्ट्री एक्सपोज़र
- इन्वेस्टर्स, आंत्रप्रेन्योर्स और एजुकेशनिस्ट्स एक ही छत के नीचे

इंदौर, फरवरी, 2026: इंदौर में आयोजित आंत्रप्रेन्योरशिप एंड इनोवेशन समिट-2026 उन स्टूडेंट्स के लिए एक ऐसा मंच बनकर सामने आया, जो पढ़ाई के साथ-साथ कुछ नया करने का सपना देखते हैं। यह सिर्फ एक कॉन्फ्रेंस नहीं थी, बल्कि स्टूडेंट्स को यह समझाने की एक कोशिश थी कि आज के दौर में करियर के रास्ते सिर्फ नौकरी से होकर ही नहीं जाते हैं। इसी सोच के साथ माफिया इंक चैंपियनशिप और इंदौर स्टूडेंट आंत्रप्रेन्योरशिप कॉन्फ्रेंस-2026 (आईएसईसी-2026) का आयोजन किया गया। यह आयोजन इंदौर स्थित आईपीएस एकेडमी में आयोजित किया गया, जहाँ सुबह से ही स्टूडेंट्स की भारी उपस्थिति और उत्साह देखने को मिला। 'भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम का विकास और छात्र आंत्रप्रेन्योरशिप पर उसका असर; थीम पर आधारित उक्त समिट ने यह स्पष्ट कर दिया कि आज का छात्र सिर्फ नौकरी की तलाश में नहीं है, बल्कि वह खुद कुछ नया शुरू करना चाहता है। सबसे विशेष बात, यह इंदौर में इस तरह का पहला आयोजन है।

माफिया इंक के संस्थापक मधुकर केशवमूर्ति सौरभ राठौर और मुख्य कार्यकारी अधिकारी समेत कार्यक्रम के दौरान कई दिग्गज उपस्थित रहे, जिन्होंने स्टूडेंट्स का मार्गदर्शन किया तथा मध्यप्रदेश के स्टार्टअप इकोसिस्टम और स्टूडेंट आंत्रप्रेन्योरशिप पर बात रखी, जिनमें हेमंत राजोरिया, क्लाइंट सक्सेस पार्टनर, स्टार्टअप बैंकिंग, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक; संजय कुमार शर्मा, डिविज़नल मैनेजर, एलआईसी; रोहित प्रसाद, प्रोडक्ट मैनेजर, एलआईसी; नेहा गौर, सीईओ, पीआर 24x7; तथा स्टार्ट अप इकोसिस्टम से किंजल्क पंचोली के नाम शामिल हैं। इस आयोजन में डॉ. मोहित दुबे, प्रो वाइस चांसलर, एमआईटी एडीटी यूनिवर्सिटी, सुंदर रामकृष्णन समेत कई जाने-माने स्टार्टअप लीडर्स और इकोसिस्टम बिल्डर्स मौजूद रहे। उन्होंने स्टूडेंट्स को बताया कि आज छोटे शहरों से भी बड़े स्टार्टअप्स निकल रहे हैं। जरुरत है, तो सिर्फ सही समय पर सही एक्सपोज़र और सही गाइडेंस की। साथ ही, स्टूडेंट्स को स्टार्टअप स्किल्स के तहत प्रॉब्लम को समझने और उसका सर्वश्रेष्ठ हल निकालने पर प्रकाश डाला।

पूरे आयोजन का सबसे बड़ा आकर्षण रहा माफिया इंक चैंपियनशिप, जो एक स्ट्रेटेजिक मैनेजमेंट गेम है। जनवरी 2026 से लेकर 6 फरवरी, 2026 तक यह टूर्नामेंट चला। इस संस्करण में माफिया इंक चैंपियनशिप के जरिए इंदौर के 5 कॉलेजों के करीब 700 स्टूडेंट्स जुड़े। कैंपस राउंड में 100 स्टूडेंट्स का चयन किया गया, जिनमें से आगे बढ़ते हुए इन कॉलेजों ने सिटी क्वालिफायर में हिस्सा लिया और अंततः 30 छात्र फाइनल्स में पहुँचे। फिनाले के दौरान स्टेज पर लाइव गेम खेला गया, जिसमें स्टूडेंट्स को कम समय में फैसले लेने, टीम को साथ लेकर चलने और दबाव में सही डिसीजन लेने की चुनौती दी गई। लब्धि नाहर, पहल जैन, माधवी धुदानी, लक्ष्मी चौधरी, रवि ठाकुर, भावेश निकुम्बे और शीतल सोमानी विनर्स रहे, जिन्हें कुल 1 लाख रुपए के नकद पुरस्कार समेत पेड इंटर्नशिप का मौका भी मिलेगा, जिससे वे रियल वर्क कल्चर को करीब से समझ सकें।

अगला चरण मई से अगस्त के बीच आयोजित किए जाने की योजना है। इस दौरान, 27 कॉलेजों के करीब 5,000 से 6,000 स्टूडेंट्स को इस स्टूडेंट आंत्रप्रेन्योरशिप प्लेटफॉर्म से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।

कार्यक्रम की शुरुआत आयोजक तथा माफिया इंक के संस्थापक मधुकर केशवमूर्ति के सम्बोधन से हुई। उन्होंने कहा कि आज का छात्र सिर्फ डिग्री नहीं चाहता, वह रियल लाइफ स्किल्स सीखना चाहता है। इसी सोच के साथ इस पूरे प्लेटफॉर्म को तैयार किया गया है, ताकि छात्र क्लासरूम से बाहर निकलकर असली दुनिया की चुनौतियों को समझ सकें।

कार्यक्रम के दौरान हुए थिंक टैंक सेशन में इन्वेस्टर्स, आंत्रप्रेन्योर्स और एजुकेशनिस्ट्स ने स्टूडेंट्स से खुलकर बातचीत की। यहाँ कोई फॉर्मल लेक्चर नहीं था, बल्कि असली ज़िंदगी के एक्सपीरियंस, गलत फैसले, असफलताएँ और उनसे मिली सीख पर खुली चर्चा हुई। स्टूडेंट्स के लिए यही सेशंस सबसे ज्यादा कनेक्टिंग साबित हुए।

समस्त वक्ताओं ने कहा कि यदि स्टूडेंट्स को सही प्लेटफॉर्म और सही माहौल मिले, तो इंदौर जैसे शहर भी बड़े स्टार्टअप हब बन सकते हैं।

कार्यक्रम के समापन पर सौरभ राठौर, मुख्य कार्यकारी अधिकारी- माफिया इंक ने कहा कि यह पहल सिर्फ एक दिन का इवेंट नहीं है। आने वाले महीनों में इस चैंपियनशिप से जुड़े गेम्स और मोमेंट्स को डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर शेयर किया जाएगा, ताकि और भी ज्यादा स्टूडेंट्स इससे प्रेरणा ले सकें।

यह आयोजन आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) द्वारा सह-प्रस्तुत किया गया। इसके साथ इंदौर मैनेजमेंट एसोसिएशन, लक्ष्य एनजीओ, पीआर 24x7, नेक्सस इंदौर और आईपीएस एकेडमी सहयोगी संस्थाओं के रूप में जुड़े रहे।

आंत्रप्रेन्योरशिप एंड इनोवेशन समिट-2026 ने यह स्पष्ट कर दिया कि इंदौर का स्टूडेंट अब सिर्फ सुनने वाला नहीं, बल्कि आगे बढ़कर करने वाला बनना चाहता है। ऐसे में, यह मंच उन युवाओं के लिए एक मजबूत शुरुआत साबित हुआ, जो पढ़ाई के साथ-साथ अपने आइडियाज़ को उड़ान देना चाहते हैं।
संत रविदास जयन्ती पर मानवता की मिसाल

प्रज्ञा हॉस्पिटल शंकरगढ़ की पहल मरीजों में बांटे फल व कम्बल

संजय द्विवेदी।प्रयागराज।यमुनानगर क्षेत्र के शंकरगढ़ स्थित प्रज्ञा हॉस्पिटल के डायरेक्टर की मां कुसुम सिंह ने संत शिरोमणि रविदास जयंती के अवसर पर मरीजों में फल और कंबल का वितरण करते हुए उनके जल्द स्वास्थ्य लाभ की कामना की गई। इस अवसर पर कुसुम सिंह ने कहा कि संत रविदास जी ने समाज में व्याप्त जाति के आधार पर शोषण भेदभाव और जन्म आधारित श्रेष्ठता को नकारा था। उनकी शिक्षाएं हमें मानवता की सेवा और सामाजिक समरसता की ओर प्रेरित करती है।संत रविदास जी के वचनों को आत्मसात करते हुए मानव सेवा के उद्देश्य से कार्य करना चाहिए। उनके द्वारा संत रविदास जी के जीवन और शिक्षाओं पर चर्चा की गई, समाज में समरसता और भाईचारे का संदेश दिया गया।इस अवसर पर अस्पताल के डायरेक्टर डॉक्टर प्रभाकर सिंह ने कहा कि संत रविदास एक महान समाज सुधारक थे। देश में व्याप्त अंधविश्वास, जातिवाद और पाखंड के खिलाफ समाज के निर्माण में अतुलनीय योगदान है। उनका मानना था कि व्यक्ति का आधार एवं सम्मान कर्म के आधार पर करनी चाहिए जन्म के आधार पर कोई पूज्यनीय नहीं होता है। जाति एक ऐसा रोग है जिसने भारतीयों के मनुष्यता को नाश कर दिया है, जाति इंसान को इंसान नहीं रहने देती उसे ऊंच-नीच में बांट देती है। इस मौके पर मौजूद उग्रसेन द्विवेदी ने कहा कि एक आदर्श एवं समता मूलक समाज को महापुरुषों के विचारों को समाज में स्थापित करने से ही होगा। जब तक सभी वर्गों से बिना भेदभाव के भारत के विकास में भागीदारी सुनिश्चित नहीं किया जाएगा तब तक देश का विकास देश की एकता, एकजुटता और अखंडता सुनिश्चित नहीं हो सकती है। कार्यक्रम के दौरान मुख्य रूप से उग्रसेन द्विवेदी, वीरेंद्र प्रजापति, दिवाकर, प्रमोद, शमशाद, रेखा सिंह, प्रियांशु सिंह, संगीता पाल, सुलेखा सिंह एवं अस्पताल के समस्त स्टाफ मौजूद रहे।
दिव्य प्रेम: प्यार और रहस्य की कहानी की अभिनेत्री मेघा रे ने कहा, “पढ़ने से अपने आप सीन दिमाग में बनने लगते हैं”
*मध्य प्रदेश, जनवरी 2026:* आज के समय में, जब ज्यादातर लोग मोबाइल और स्क्रीन में उलझे रहते हैं, अभिनेत्री मेघा रे को सुकून और प्रेरणा किताबों में मिलते हैं। सन नियो के शो ‘दिव्य प्रेम: प्यार और रहस्य की कहानी’ में दिव्या का किरदार निभा रहीं मेघा को पढ़ने का बहुत शौक है। उनके लिए पढ़ना सिर्फ टाइम पास नहीं, बल्कि एक ऐसी आदत है, जो उन्हें एक इंसान और एक कलाकार, दोनों रूपों में बेहतर बनाती है।
मेघा बताती हैं कि किताबें उनके अभिनय में भी बहुत मदद करती हैं। वे कहती हैं, “मुझे हमेशा से पढ़ना पसंद है। कुछ किताबों की कहानियाँ इतनी अच्छी होती हैं कि उनसे जुड़ाव महसूस होता है। पढ़ना मुझे अच्छा लगता है और यह मेरे एक्टिंग करियर में भी मेरी बहुत मदद करता है। जब आप रोज़ पढ़ते हैं, तो अपने आप सीन और किरदार दिमाग में बनने लगते हैं। इसलिए जब मैं अपनी स्क्रिप्ट पढ़ती हूँ, तो तुरंत समझ जाती हूँ कि सीन कैसे होगा और मेरा किरदार उसमें कैसा होगा। मेरा शो ‘दिव्य प्रेम: प्यार और रहस्य की कहानी’ बहुत विज़ुअल है, इसलिए पढ़ने की आदत मुझे सीन को अच्छे से निभाने में मदद करती है।”
आज के बच्चों को लेकर मेघा थोड़ा चिंतित भी हैं। वे कहती हैं, “आजकल बच्चे ज्यादातर समय मोबाइल पर रहते हैं। मैं चाहूँगी कि माता-पिता उन्हें अच्छी और मज़ेदार किताबें दें। यदि बच्चे शुरुआत में दिलचस्पी न लें, तो मम्मी-पापा खुद उन्हें पढ़कर सुनाएँ। धीरे-धीरे बच्चे खुद जानना चाहेंगे कि आगे क्या हुआ और किताब पढ़ने लगेंगे। एक बार पढ़ने की आदत लग गई, तो फिर छोड़ना मुश्किल हो जाता है।”
शो की कहानी में दिव्या के पास खास शक्तियाँ हैं। जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, वह अपनी ताकत, अपने भाग्य और अपनी जिम्मेदारी को समझती है। यह कहानी सिर्फ बुराई से लड़ने की नहीं, बल्कि प्यार, भरोसे और सही रास्ते पर चलने की भी है। शानदार इमोशन्स, दमदार सीन और अच्छाई-बुराई की लड़ाई के साथ ‘दिव्य प्रेम: प्यार और रहस्य की कहानी’ दर्शाती है कि हिम्मत और विश्वास से हर मुश्किल को हराया जा सकता है।
देखते रहिए ‘दिव्य प्रेम: प्यार और रहस्य की कहानी’ हर सोमवार से रविवार, शाम 7:30 बजे, सिर्फ सन नियो पर।