दिल्ली विधानसभा और लाल किला को बम से उड़ाने की धमकी, खालिस्तानी ग्रुप ने ई-मेल से भेजा संदेश

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देश की राजधानी दिल्ली में लगातार दहशत फैसला की कोशिश की जा रही है। सोमवार सुबह सैन्य स्कूलों को धमकी देने के बाद अब लाल किला और दिल्ली विधानसभा उड़ाने की भी धमकी दी गई है। बताया जा रहा है कि धमकी भरा ई-मेल एक खालिस्तानी संगठन के नाम से भेजी गई है। धमकी की सूचना पर लाल किले और विधानसभा पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और जांच अभियान चलाया जा रहा है।

दिल्ली पुलिस को मिला धमकी भरा ई-मेल मिला

दिल्ली पुलिस को एक धमकी भरा ई-मेल मिला, जिसमें दिल्ली विधानसभा और लाल किला को बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी। यह धमकी कथित तौर पर एक खालिस्तानी ग्रुप द्वारा भेजी गई थी, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गईं। धमकी मिलने के तुरंत बाद, दिल्ली विधानसभा परिसर में तलाशी अभियान चलाया गया। बॉम्ब स्क्वाड और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने इलाके की गहन जांच की।

जांच में जुटी पुलिस

दिल्ली पुलिस ने बयान जारी कर कहा कि तलाशी अभियान के दौरान कोई खतरनाक या हानिकारक चीज़ नहीं पाई गई, फिर भी एहतियात के तौर पर सभी जरूरी सुरक्षा कदम उठाए जा रहे हैं। पुलिस ने यह भी बताया कि धमकी भरे ई-मेल की जांच जारी है, और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि यह मेल कहां से भेजा गया और किसने भेजा। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर सेल भी जांच में शामिल हो गई है। सुरक्षा एजेंसियां स्थिति पर पूरी निगरानी बनाए रखे हुए हैं।

लाल किले के पास हो चुका है धमाका

बता दें कि पिछले साल नवंबर में लाल किले के पास एक कार में आत्मघाती बस विस्फोट हुआ था, जिसमें कम से कम 13 लोग मारे गए थे और 25 से अधिक लोग घायल हुए थे। हमले में पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश एकत मोहम्मद का हाथ मिला था।

बांग्लादेश के राष्ट्रपति ने मोहम्मद यूनुस पर लगाया गंभीर आरोप, तारिक राज में बड़ा खुलासा

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बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि यूनुस ने अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों को ठीक से नहीं निभाया। राष्ट्रपति को न सिर्फ अहम चर्चाओं से दूर रखा बल्कि उन्हें हटाने तक की साजिश रच देश को अस्थिर करने का प्रयास किया।

यूनुस पर संविधान पालन नहीं करने का आरोप

बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने देश में सरकार बदलते ही एक ऐसा खुलासा किया है। कालेर कंठो के साथ इंटरव्यू में बांग्लादेश के राष्ट्रपति शहाबुद्दीन ने कहा है कि मोहम्मद यूनुस ने 18 महीने की अपनी अंतरिम सरकार में संविधान का पालन नहीं किया। यूनुस ने अपना पद संभालते हुए न तो संस्थागत समन्वय बनाए रखा और न ही उन्हें महत्वपूर्ण सरकारी फैसलों की जानकारी दी।

यूनुस ने विदेश यात्राओं की नहीं दी जानकारी

राष्ट्रपति शहाबुद्दीन ने आरोप लगाया कि संविधान कहता है कि विदेश यात्रा की जानकारी राष्ट्रपति को देनी चाहिए और दौरे के बाद भी राष्ट्रपति को बताया जाना चाहिए। यूनुस के 14-15 विदेशी दौरों के बारे में मुझे कभी नहीं बताया गया। इसमें अमेरिका से हुआ व्यापार समझौता भी शामिल है। बांग्लादेशी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि उनकी विदेश यात्राओं को बिना पूछे रद्द कर दिया गया। कोसोवो और कतर से मिले निमंत्रणों को उनके नाम से यह कहकर ठुकरा दिया गया कि राष्ट्रपति राज्य कार्यों में बहुत व्यस्त हैं।

सार्वजनिक पहचान कम करने की कोशिश का आरोप

शहाबुद्दीन ने तंज करते हुए कहा कि क्या हमारे संविधान में राष्ट्रपति इतने व्यस्त रहते हैं कि उनसे पूछा भी न जाए? राष्ट्रपति का आरोप है कि देश और विदेश में उनकी सार्वजनिक पहचान कम करने की कोशिश की गई। उन्हें विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोह और अन्य राष्ट्रीय कार्यक्रमों में शामिल होने से रोका गया, जबकि परंपरा के अनुसार इन कार्यक्रमों की अध्यक्षता राष्ट्रपति करते हैं।

पद से हटाने की साजिश रचने का आरोप

बांग्लादेश के राष्ट्रपति ने कहा कि यूनुस का पूरा ध्यान उनको पद से हटाने पर रहा, वो अपने कार्यकाल में सिर्फ मेरे खिलाफ साजिशें रचते रहें। यूनुस ने ना सिर्फ मेरे खिलाफ राजनीतिक स्तर पर साजिशें रचीं बल्कि मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि अंतरिम सरकार ने एक पूर्व मुख्य न्यायाधीश को लाकर मुझे असंवैधानिक तरीके से हटाने की साजिश भी रची।

मणिशंकर अय्यर ने राहुल के नेतृत्व पर उठाया सवाल, ममता बनर्जी को इंडिया गठबंधन का नेता बनाने की सलाह

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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने पिछले कुछ समय से कांग्रेस विरोधी अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में हैं। मणिसंकर अय्यर ने एक बार फिर कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए इंडिया गठबंधन को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि इंडी गठबंधन की अगुवाई क्षेत्रीय दलों के नेताओं को करनी चाहिए। उन्होंने सलाह दी कि राहुल गांधी को गठबंधन की ड्राइविंग सीट छोड़ देनी चाहिए।

ममता बनर्जी के बिना इंडी गठबंधन कुछ नहीं रहेगा- अय्यर

पश्चिम बंगाल में विधान सभा चुनाव में अब ज्यादा समय बाकी नहीं है, इससे पहले ही मणिशंकर अय्यर ने नए राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है। रविवार को कोलकाता में पत्रकारों से बातचीत में अय्यर ने कहा, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इंडिया गठबंधन की नेता हैं। उनके बिना इंडी गठबंधन कुछ नहीं रहेगा।

स्टालिन और अखिलेश यादव का भी लिया नाम

इसके अलावा अय्यर ने कई अन्य बड़े क्षेत्रियों नेताओं का भी नाम लिया। उन्होंने कहा कि इंडिया गठबंधन में ऐसे कई क्षेत्रीय नेता हैं जो नेतृत्व की भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव और राजद नेता तेजस्वी यादव जैसे नेताओं का भी उल्लेख किया।

राहुल को इंडिया ब्लॉक की बागडोर छोड़ने की सलाह

मणिशंकर अय्यर ने राहुल गांधी को नसीहत देते हुए कहा कि उनको इंडिया ब्लॉक की बागडोर को छोड़ देना चाहिए और इसे किसी क्षेत्रीय दल को सौंप देना चाहिए। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी इस जिम्मेदारी को साझा करें।

पूर्व रेलवे मंत्री और सीएम ममता के करीबी मुकुल रॉय का निधन, कहे जाते थे बंगाल के चाणक्य

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पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी पार्टी टीएमसी के नेता और पूर्व रेल मंत्री मुकुल रॉय का निधन हो गया है। मुकुल रॉय बीमार थे और उनका कोलकाता के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था। मुकुल रॉय के बेटे शुभ्रांशु रॉय ने अपने पिता के निधन की पुष्टि की है।

बेटे शुभ्रांशु रॉय ने बताया कि मुकुल रॉय ने रविवार रात करीब 1:30 बजे कोलकाता के अपोलो अस्पताल में अंतिम सांस ली। अस्पताल में भर्ती होने के बाद उनकी हालत लगातार नाजुक बनी हुई थी। बताया जा रहा है कि मुकुल रॉय लंबे समय से कई तरह की बीमारियों की वजह से जूझ रहे थे।

कई स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से थे ग्रसित

मुकुल रॉय पिछले कुछ सालों से बीमार चल रहे थे। बेटे शुभ्रांशु ने कहा, वह कई स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहे थे। वे पार्किंसंस रोग और डिमेंशिया से पीड़ित थे। ब्रेन में हाइड्रोसेफलस की समस्या के कारण ब्रेन सर्जरी भी हुई थी। 2024 में भी कई बार अस्पताल में भर्ती हुए, जिसमें सिर में चोट और अन्य न्यूरोलॉजिकल समस्याएं शामिल थीं। हाल ही में अस्पताल में भर्ती होने के बाद उनकी हालत क्रिटिकल बताई गई थी।

तृणमूल कांग्रेस का प्रमुख चेहरा

1998 में गठित टीएमसी के शुरुआती दौर से जुड़े रॉय को कभी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का करीबी सहयोगी माना जाता था। ममता बनर्जी की तरह ही उन्होंने भी अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत बंगाल में यूथ कांग्रेस से की थी। तृणमूल कांग्रेस के गठन के बाद रॉय ने पार्टी संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उन्हें पार्टी का महासचिव बनाया गया। समय के साथ वे दिल्ली की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस का प्रमुख चेहरा बनकर उभरे।

मुकुल रॉय का राजनीतिक सफर

वर्ष 2006 में वह राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए और 2009 से 2012 तक सदन में पार्टी के नेता रहे। यूपीए-2 सरकार के दौरान उन्होंने पहले शिपिंग मंत्रालय में राज्य मंत्री के रूप में काम किया और बाद में मार्च 2012 में पार्टी सहयोगी दिनेश त्रिवेदी की जगह रेल मंत्री का पद संभाला। हालांकि, मुकुल रॉय के टीएमसी के साथ रिश्ते बिगड़ गए। खासकर शारदा चिटफंड घोटाले जैसे मुद्दों के बाद वह टीएमसी से दूर हो गए। फरवरी 2015 में पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय महासचिव पद से हटा दिया। सितंबर 2017 में मुकुल रॉय ने टीएमसी से इस्तीफा दे दिया।

2017 में बीजेपी का दामन थामा

नवंबर 2017 में रॉय बीजेपी में शामिल हो गए थे। रॉय ने जमीनी स्तर पर काम करके बीजेपी को राज्य में बेस बनाने में मदद की। उन्हें 2019 के लोकसभा चुनावों में पार्टी की 18 सीटें जीतने का क्रेडिट दिया जाता है। उन्होंने बीजेपी को टीएमसी के कई बड़े नेताओं को अपने पाले में लाने में मदद की और 2021 के विधानसभा चुनावों में कृष्णानगर उत्तर से बीजेपी विधायक चुने गए। लेकिन जल्द ही, उन्होंने बीजेपी से दूरी बना ली। जून 2021 में वो तृणमूल कांग्रेस में लौट आए। हालांकि, टीएमसी में वापस आने पर वह कद और समझ दोनों में पहले जैसे कभी नहीं रहे।

एआई समिट को गंदी और नंगी राजनीति का अखाड़ा बनाया', कांग्रेस के शर्टलेस प्रदर्शन पर पीएम मोदी का तीखा वार

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के मेरठ से कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। पीएम मोदी ने एआई इम्पैक्ट समिट में यूथ कांग्रेस द्वारा किए गए शर्टलेस प्रदर्शन को कांग्रेस की गंदी राजनीति का स्वरूप बताया। उन्होंने कहा, कांग्रेस ने वैश्विक आयोजन को अपनी गंदी और नंगी राजनीति का अखाड़ा बना दिया।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को भारत के पहले नमो भारत RRTS का उद्घाटन किया, पूरा दिल्ली-मेरठ नमो भारत पूरा कॉरिडोर और मेरठ मेट्रो (मेरठ साउथ-मोदीपुरम) देश को समर्पित किया। इस दौरान अपने संबोधन के दौरान उन्होंने ने कहा, 'एक तरफ आज देशवासी भारत को विकसित बनाने के लिए काम कर रहे हैं लेकिन देश में ही कुछ राजनैतिक दल हैं जो भारत की सफलता को पचा नहीं पा रहे। भारत में दुनिया का सबसे बड़ा AI सम्मेलन हुआ, दुनिया भर के 80 से अधिक देशों के प्रतिनिधि दिल्ली आए। पूरा देश गर्व से भर गया लेकिन कांग्रेस और इसके इकोसिस्टम ने क्या किया?'

वैश्विक आयोजन को राजनीति का अखाड़ा बनाया-पीएम मोदी

पीएम मोदी ने आगे कहा, 'कांग्रेस ने भारत के एक वैश्विक आयोजन को अपनी गंदी और नंगी राजनीति का अखाड़ा बना दिया। समारोह स्थल पर विदेशी अतिथियों के सामने कांग्रेस के नेता कपड़े उतारकर पहुंच गए।'

कांग्रेस अपने ही देश को बदनाम करने में जुटी -पीएम मोदी

प्रधानमंत्री ने आगे कहा, 'कांग्रेस ने नेताओं ने AI समिट में जो कुछ किया वह दिखाता है कि देश की सबसे पुरानी पार्टी कितनी दिवालिया, कितनी दरिद्र हो गई है। कांग्रेस तो अपने ही देश को बदनाम करने में जुटी है।'

पूरे देश में कांग्रेस की रीति-नीति पर थू-थू-पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'कांग्रेस के नेताओं को मोदी से नफरत है, ये मेरी कब्र खोदना चाहते हैं, मेरी मां को गाली देने से इन्हें कोई परहेज नहीं है, उन्हें बीजेपी, NDA से विरोध है लेकिन कांग्रेस को याद रखना चाहिए था कि AI ग्लोबल समिट यह बीजेपी का समारोह नहीं था और न ही बीजेपी का कोई नेता वहां मौजूद था। यह देश का, देश के सम्मान का कार्यक्रम था लेकिन कांग्रेस ने परसो सारी मर्यादाएं तोड़ दी। पूरे देश में कांग्रेस की इस रीति-नीति पर थू-थू हो रही है लेकिन दुर्भाग्य देखिए इतनी पुरानी पार्टी के नेता लजाने की बजाय गाजते हैं। देश की बेइज्जती करने वालों का जयकारा कर रहे हैं।'

समाजवादी पार्टी पर भी सादा निशाना

नमो भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाने के बाद पीएम मोदी ने समाजवादी पार्टी को भी निशाने पर लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'कांग्रेस, समाजवादी पार्टी की जब दिल्ली में सरकार थी तब यह सब संभव ही नहीं था क्योंकि तब इंफ्रास्ट्रक्चर की परियोजनाएं घोटालों में ही गुम हो जाती थी। मेट्रो जैसी और उससे जुड़ी अधिकतर तकनीक भी हमें विदेशों से आयात करनी पड़ती थी। हमने घोटाले भी बंद किए और देश को आत्मनिर्भरता के रास्ते पर भी आगे बढ़ाया।'

अफगानिस्तान में पाकिस्तान ने किया एयरस्ट्राइक, फाइटर जेट से कई जगहों पर बमबारी, 28 की मौत

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पाकिस्तान ने रविवार तड़के अफगानिस्तान सीमा से सटे इलाकों में कथित आतंकी ठिकानों पर हवाई हमले करने का दावा किया है। सरकार के मुताबिक यह इंटेलिजेंस आधारित, चयनित ऑपरेशन था, जिसमें प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और उसके सहयोगी गुटों के सात ठिकानों को निशाना बनाया गया।

सात कैंप और ठिकाने को बनाया गया निशाना

जियो न्यूज ने पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय के हवाले से बताया कि इन हमलों में फिटना अल खवारिज (FAK), उसके सहयोगी संगठनों और दाएश खुरासान प्रांत (DKP) के सात कैंप और ठिकानों को निशाना बनाया गया। मंत्रालय ने दावा किया कि हाल के आत्मघाती हमलों के जवाब में यह कार्रवाई “पूरी सटीकता और सावधानी” के साथ की गई। रिपोर्ट के अनुसार इस्लामाबाद, बाजौर और बन्नू में रमजान के दौरान हुए आत्मघाती हमलों के पीछे अफगानिस्तान में बैठे नेतृत्व और उनके सहयोगियों का हाथ बताया गया है।

28 टीटीपी लड़ाकों के मारे जाने की खबर

सूत्रों का कहना है कि इन हमलों में कम से कम 28 टीटीपी लड़ाके मारे गए हैं। हालांकि, अभी काबुल के तालिबान प्रशासन ने इस बारे में आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। अफगानिस्तान के मीडिया आउटलेट टोलो न्यूज ने बताया कि पाकिस्तानी फाइटर जेट ने सुबह तड़के सीमावर्ती प्रांत पक्तिका के बरमल और उरगुन जिले में हवाई हमले किए हैं। इसके अलावा नंगरहार प्रांत के खोगयानी जिले में भी हवाई हमले किए गए हैं।

आम लोगों के घरों को निशाना बनाने का आरोप

टोलो न्यूज ने बताया कि पाकिस्तान ने हवाई हमलों में आम लोगों के घरों के साथ ही एक मदरसे को भी निशाना बनाया है। रिपोर्टों में बताया गया है कि पक्तिका के बरमल जिले में बानुसी मदरसे पर एयरक्राफ्ट से मिसाइलें दागी गई हैं। स्थानीय रिपोर्ट बताती हैं कि कुल आठ टारगेट पर हमला किया गया है।

हालिया आत्मघाती हमलों के बाद कार्रवाई

यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब हाल के दिनों में पाकिस्तान में आतंकी हमलों में तेजी आई है। बाजौर जिले में एक आत्मघाती हमलावर ने सुरक्षा चौकी को निशाना बनाकर 11 सैनिकों और एक बच्चे की जान ले ली थी। इसके अलावा बन्नू जिले में भी एक और आत्मघाती हमले में दो सैनिक मारे गए। पाकिस्तानी सेना ने पहले ही चेतावनी दी थी कि वह जिम्मेदार लोगों के खिलाफ स्थान की परवाह किए बिना कार्रवाई करेगी। इस बयान से इस्लामाबाद और काबुल के बीच बढ़ते तनाव के संकेत मिले थे।

दिल्ली पुलिस ने 8 संदिग्धों को किया गिरफ्तार, ISI से जुड़े तार

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दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को बड़ी कामयाबी मिली है। दिल्ली पुलिस ने तमिलनाडु के तिरुपुर जिले में बड़ी कार्रवाई करते हुए छह लोगों को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल से दो संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार संदिग्धों में एक बांग्लादेशी नागरिक भी शामिल है। पुलिस सभी आरोपियों को दिल्ली ला रही है।

दरअसल, देश की राजधानी दिल्ली में संभावित आतंकी हमले को लेकर सुरक्षा एजेंसियों ने अलर्ट जारी किया है। खुफिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, लाल किले के आसपास के इलाकों और चांदनी चौक क्षेत्र में आतंकी हमले का खतरा मंडरा रहा है। पाकिस्तान के आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा द्वारा इस क्षेत्र को निशाना बनाए जाने की आशंका जताई जा रही है।

आतंकी हमले के अलर्ट के बाद कार्रवाई

खुफिया एजेंसियों से आतंकी हमले का अलर्ट मिलने के बाद दिल्ली पुलिस ने रविवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए तमिलनाडु से छह तो पश्चिम बंगाल से दो संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, ये सभी आरोपी पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और बांग्लादेश के आतंकी संगठनों के समर्थन से देश में बड़ी आतंकी वारदात की योजना बना रहे थे। तमिलनाडु से गिरफ्तार किए गए आरोपियों में एक बांग्लादेश का नागरिक भी शामिल है।

इन आरोपियों को पुलिस ने किया गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस ने तमिलनाडु से मिजानुर रहमान, मोहम्मद शबात, उमर, मोहम्मद लिटन, मोहम्मद शाहिद और मोहम्मद उज्ज्वल समेत छह आतंकियों को गिरफ्तार किया है, जो असामाजिक गतिविधियों में शामिल हैं। इसमें दो आरोपियों की गिरफ्तारी तमिलनाडु के उथुकुली से, तीन को पल्लाडम से और एक को थिरुमुरुगनपुंडी इलाके से गिरफ्तार किया गया है।

संदिग्धों के पास से मोबाइल फोन और सिम कार्ड बरामद

गिरफ्तार संदिग्धों के पास से कई मोबाइल फोन और सिम कार्ड बरामद किए गए हैं। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि इन उपकरणों का उपयोग आतंकी संगठनों के समर्थन में संदेश फैलाने और संदिग्ध हैंडलर्स के संपर्क में रहने के लिए किया जा रहा था। दिल्ली पुलिस इन मोबाइल फोन और सिम कार्ड की गहन जांच कर रही है ताकि इनके नेटवर्क, संपर्कों और साजिश के पूरे ताने-बाने का पता लगाया जा सके।

दिल्ली को दहलाने की साजिश, लश्कर ए तैयबा के निशाने पर लाल किला और चांदनी चौक का मंदिर

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देश की राजधानी दिल्ली में एक बार आतंकियों के साए में है। राजधानी में संभावित आतंकी हमले को लेकर सुरक्षा एजेंसियों ने अलर्ट जारी किया है। खुफिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, लाल किले के आसपास के इलाकों और चांदनी चौक क्षेत्र में आतंकी हमले का खतरा मंडरा रहा है। पाकिस्तान के आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा द्वारा इस क्षेत्र को निशाना बनाए जाने की आशंका जताई जा रही है।

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चांदनी चौक का इलाका निशाने पर

खुफिया विभाग के सूत्रों ने एक हाई अलर्ट जारी किया है, जिसमें बताया गया है कि लश्कर-ए-तैयबा के आंतकी दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले के सामने आईईडी हमले की साजिश रच रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान स्थित इस आतंकी संगठन ने चांदनी चौक इलाके में स्थित प्रमुख मंदिरों को भी टारगेट करने की योजना बनाई है।

बिलाल मस्जिद हमले का बदला लेने की साजिश

खुफिया एजेंसियों से जुड़े सूत्रों सूत्रों का कहना है कि लश्कर पाकिस्तान के इस्लामाबाद में 6 फरवरी को हुए एक मस्जिद विस्फोट के बाद भारत में बड़ा आतंकी हमला करने की फिराक में है। खुफिया सूत्रों ने कहा, आतंकवादी चांदनी चौक में एक मंदिर को निशाना बना सकते हैं। लश्कर-ए-तैयबा आईईडी हमले की साजिश रच रहा है। 6 फरवरी को पाकिस्तान के इस्लामाबाद स्थित एक मस्जिद में हुए विस्फोट के बाद यह संगठन भारत में बड़ी आतंकी वारदात को अंजाम देने की फिराक में है।

10 नवंबर 2025 को हुआ था धमाका

यह अलर्ट ऐसे समय आया है जब नवंबर 2025 में लाल किले के पास हुए कार ब्लास्ट की जांच अभी चल रही है, जिसमें 13 लोगों की मौत हुई थी। 10 नवंबर 2025 को शाम के समय दिल्ली के लाल किले के पास एक बड़ा धमाका हुआ था। इस धमाके में कई गाड़ियां जलकर खाक हो गई थीं। इस घटना में कई लोगों की मौत भी हुई थी और कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। जांच में सामने आया था कि धमाका एक कार में हुआ था। यह कार धमाके से पहले करीब तीन घंटे तक लाल किला इलाके की पार्किंग में खड़ी रही थी।

पीएम मोदी जा रहे इजराइल, कितना अहम होगा ये दौरा?*

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इजरायल के दौरे पर जाने वाले हैं। पीएम मोदी 25-26 फरवरी को दो दिन के इजरायल दौरे पर जा रहे हैं। यह दौरा सुरक्षा, काउंटर-टेररिज़्म और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी नई टेक्नोलॉजी में आपसी रिश्तों को मजबूत करने की कोशिशों के बीच हो रहा है। यह इसीलिए भी खास है क्योंकि पीएम मोदी 2017 के बाद, यानी 9 सालों में पहली बार इजरायल जा रहे हैं।

संसद को संबोधित करेंगे मोदी

प्रधानमंत्री मोदी 25 फरवरी को दो दिवसीय दौरे पर इजराइल पहुंचेंगे। इस दौरान वह नेसेट (संसद) को संबोधित कर सकते हैं। पीएम मोदी नेतन्याहू और राष्ट्रपति इसाक हर्जोग से मुलाकात करेंगे।

पीएम मोदी के दौरे को लेकर क्या बोले नेतन्याहू

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित दौरे से उत्साहित उनके इजराइली समकक्ष बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा अगले सप्ताह एक बेहद शक्तिशाली देश के प्रधानमंत्री इजराइल का दौरा करेंगे। नेतन्याहू ने कहा, वर्षों से इजराइल और भारत के बीच एक मजबूत गठबंधन है। हम हर तरह के सहयोग पर चर्चा करने जा रहे हैं। आप जानते हैं, भारत कोई छोटा देश नहीं है। इसकी आबादी 1.4 अरब है। भारत बेहद शक्तिशाली और बेहद लोकप्रिय है।

नई रक्षा तकनीक साझा करने को सहमत

हिन्दुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक, इजराइल भारत को नई रक्षा तकनीक देने के लिए तैयार है। इसमें लेजर आधारित डिफेंस सिस्टम, लंबी दूरी की मिसाइलें और ड्रोन शामिल हैं। बताया जा रहा है कि इजरायल इस बार ऐसी तकनीक भी साझा कर सकता है, जो उसने पहले नहीं दी थी। भारत और इजरायल मिलकर एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम पर काम कर सकते हैं। यह भारत के मिशन सुदर्शन का अहम हिस्सा है, जिसका उद्देश्य देश को दुश्मन की लंबी दूरी की मिसाइलों से बचाना है। इजराइल के पास एरो, डेविड स्लिंग और आयरन डोम जैसे मजबूत रक्षा सिस्टम हैं।

लंबी दूरी की मिसाइलें खरीदने पर विचार

भारत लंबी दूरी की मिसाइलें और ऐसे ड्रोन खरीदने पर भी विचार कर रहा है, जो दुश्मन की सीमा के अंदर तक मार कर सकें। भारत पहले भी रैंपेज मिसाइल और अन्य हथियारों का उपयोग कर चुका है। नौसेना भी अपने जहाजों की सुरक्षा के लिए बराक मिसाइल सिस्टम के नए वर्जन को खरीदने पर विचार कर रही है।

2017 के बाद पहली इजरायल यात्रा

भारतीय प्रधानमंत्री की यह वर्ष 2017 के बाद पहली इजरायल यात्रा होगी। पीएम बेंजामिन नेतान्याहू जनवरी, 2018 में नई दिल्ली आये थे। उसके बाद कम से कम दो बार उनकी भारत यात्रा की तैयारियां की गई हैं लेकिन अंतिम समय में किसी न किसी वजह से उन्हें रद करना पड़ा। हालांकि इसका द्विपक्षीय संबंधों पर कोई असर नहीं पड़ा है।

सत्ताधारी पार्टी के नेता ही राज्य में सुरक्षित नहीं है, कानून व्यवस्था पर बड़ा सवाल

JMM नेता की हत्या का मामला पहुंचा सदन, बिगड़ती कानून व्यवस्था पक्ष विपक्ष आमने सामने

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झारखंड में सत्ता पक्ष के नेता ही अब सुरक्षित नहीं है। गिरिडीह के पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष सह झामुमो के कददवार नेता राकेश महतो की हत्या कर दी गई। जंगल में मिली अधजली लाश के बाद इलाके मे सनसनी फैली हुई है।

अब यह मामला सदन में भी उठा विपक्ष की ओर से आजसू के विधायक निर्मल महतो ने सवाल उठा रहे है कि जब सत्ता पक्ष के नेता ही सुरक्षित नहीं है तो आम जनता कैसे सुरक्षित रहेगी। वही मंत्री सह गिरिडीह के विधायक सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि अपराधी जल्द पकड़े जाएंगे।

गिरिडीह जिला परिषद के पूर्व अध्यक्ष राकेश महतो की हत्या कर दी गई

राकेश का अधजला शव खांखी जंगल में मिला

त्या के बाद शव को पेड़ के पत्तों से जलाने का प्रयास भी किया गया

ह*त्याकांड का मामला पहुंचा विधानसभा सदन तक

सरकार पर फिर उठ रहा है बिगड़ती कानून व्यवस्था पर सवाल