SIR-2026 के तहत 22 फरवरी को प्रदेशभर में विशेष अभियान, बूथों पर मिलेंगे बीएलओ
* मतदाता सूची में नाम जुड़वाने और त्रुटि सुधार का अवसर, सुबह 10:30 से दोपहर 1:30 बजे तक चलेगा अभियान

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने जानकारी दी कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा संचालित विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण कार्यक्रम (SIR)-2026 के अंतर्गत दावा एवं आपत्ति अवधि में अधिक से अधिक पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करने तथा सूची को शुद्ध करने के उद्देश्य से चार विशेष अभियान दिवस निर्धारित किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि पूर्व में 11 जनवरी, 18 जनवरी और 31 जनवरी 2026 को विशेष अभियान दिवस आयोजित किए जा चुके हैं। इसी क्रम में रविवार, 22 फरवरी 2026 को प्रदेश के सभी मतदेय स्थलों पर चौथा विशेष अभियान दिवस आयोजित किया जा रहा है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, इस अभियान को सफल बनाने के लिए सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। विशेष अभियान दिवस पर प्रत्येक मतदेय स्थल पर प्रातः 10:30 बजे से अपराह्न 1:30 बजे तक बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) उपस्थित रहेंगे। उनके पास 6 जनवरी 2026 को प्रकाशित आलेख्य मतदाता सूची तथा फार्म-6, 6A, 7 और 8 उपलब्ध रहेंगे।
प्रत्येक मतदान केंद्र पर हेल्प डेस्क की व्यवस्था की जाएगी, जहां मतदाताओं को फार्म भरने में सहायता प्रदान की जाएगी। साथ ही मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) को भी अभियान की जानकारी देकर सहयोग लिया जाएगा। सभासदों, ग्राम प्रधानों एवं स्वयंसेवकों का नियमानुसार सहयोग भी सुनिश्चित किया जाएगा।
अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिला निर्वाचन अधिकारी एवं निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी भ्रमणशील रहकर पर्यवेक्षण करेंगे।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने प्रदेश के नागरिकों से अपील की है कि 22 फरवरी 2026 को अपने-अपने बूथ पर जाकर 6 जनवरी 2026 को प्रकाशित मतदाता सूची में अपना एवं परिवार के सदस्यों का नाम अवश्य जांच लें। यदि किसी पात्र व्यक्ति का नाम सूची में दर्ज नहीं है या 1 जनवरी 2026 को 18 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके युवाओं का नाम शामिल नहीं है, तो वे फार्म-6 भरकर बीएलओ को जमा करें। आवेदन ECINET मोबाइल एप्लीकेशन अथवा Voters' Service Portal (voters.eci.gov.in) के माध्यम से ऑनलाइन भी किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त मतदाता सूची में दर्ज विवरण में किसी भी प्रकार की त्रुटि के सुधार के लिए फार्म-8 भरा जा सकता है।
यूपी बजट सत्र खत्म, ‘लखनऊ दर्शन’ बस में फिर शामिल हुई विधानसभा की सैर

* इलेक्ट्रिक डबल डेकर से राजधानी के ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण, रिंग थियेटर से लोकतंत्र के दरबार तक खास अनुभव

लखनऊ। उत्तर प्रदेश का बजट सत्र समाप्त होते ही राजधानी के पर्यटकों के लिए अच्छी खबर है। अब ‘लखनऊ दर्शन’ बस सेवा के जरिए पर्यटक एक बार फिर भव्य उत्तर प्रदेश विधानसभा भवन का भ्रमण कर सकेंगे। बजट सत्र के दौरान सुरक्षा कारणों से विधानसभा भ्रमण अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया गया था, जिसे अब पुनः शुरू कर दिया गया है।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि विशाल गुंबद, भव्य स्थापत्य और ऐतिहासिक महत्व से युक्त विधानसभा भवन राजधानी की पहचान है। इसके दोबारा टूर में शामिल होने से ‘लखनऊ दर्शन’ और भी आकर्षक हो गया है।

* रिंग थियेटर (जीपीओ): काकोरी कांड की गूंज आज भी जीवंत
‘लखनऊ दर्शन’ के प्रमुख स्थलों में जनरल पोस्ट ऑफिस लखनऊ (पूर्व का रिंग थियेटर) भी शामिल है। 9 अगस्त 1925 को हुए काकोरी कांड के बाद अंग्रेज सरकार ने करीब 40 क्रांतिकारियों को गिरफ्तार किया था। सुरक्षा कारणों से तत्कालीन रिंग थियेटर में विशेष अदालत गठित की गई, जहां लगभग 10 महीने तक मुकदमा चला।
अदालत ने राम प्रसाद बिस्मिल, राजेंद्र नाथ लाहिड़ी, ठाकुर रोशन सिंह और अशफाक उल्ला खान को फांसी की सजा सुनाई। वहीं शचीन्द्रनाथ सान्याल को आजीवन कारावास (कालापानी) तथा मन्मथनाथ गुप्त सहित अन्य क्रांतिकारियों को कठोर कारावास दिया गया। आज भी यहां मौजूद ऐतिहासिक निशानियां और संग्रहालय पर्यटकों को उस दौर की याद दिलाते हैं।

* पर्यटन विस्तार के लिए सरकार प्रतिबद्ध
मंत्री जयवीर सिंह ने कहा, “बजट सत्र की समाप्ति के साथ ही विधानसभा भ्रमण दोबारा शुरू किया जा रहा है। ‘लखनऊ दर्शन’ इलेक्ट्रिक डबल डेकर बस सेवा के माध्यम से पर्यटक राजधानी की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और लोकतांत्रिक विरासत को नजदीक से देख सकेंगे। सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने और प्रदेश की समृद्ध परंपराओं से लोगों को जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है।”

* इलेक्ट्रिक डबल डेकर से करें लखनऊ की सैर
उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (यूपीएसटीडीसी) द्वारा संचालित ‘लखनऊ दर्शन’ इलेक्ट्रिक डबल डेकर बस सेवा प्रतिदिन सुबह और शाम दो पालियों में 1090 चौराहे से संचालित होती है। यह बस राजधानी के प्रमुख ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक स्थलों का भ्रमण कराती है।
विधानसभा भवन के पुनः शामिल होने से इस टूर का आकर्षण और बढ़ गया है। टिकट आधिकारिक वेबसाइट या प्रस्थान स्थल से प्राप्त की जा सकती है। किराया वयस्कों के लिए ₹500 और बच्चों के लिए ₹400 निर्धारित है। बस में प्रशिक्षित टूर गाइड यात्रा के दौरान विस्तृत जानकारी देते हैं और इलेक्ट्रिक बस होने के कारण सफर पर्यावरण के अनुकूल एवं आरामदायक रहता है।
युवाओं को विरासत से जोड़ने की अनूठी पहल, लखनऊ में ‘यूथ हेरिटेज लीडरशिप प्रोग्राम’ आयोजित
* छतर मंजिल से कैसरबाग तक ऐतिहासिक धरोहरों का शैक्षणिक भ्रमण, 70 विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में भारतीय विरासत के संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक दिवसीय “यूथ हेरिटेज लीडरशिप प्रोग्राम” का आयोजन किया गया। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह की प्रेरणा से उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व निदेशालय (संस्कृति विभाग) द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का सफल संचालन इतिहास संस्थान, नई दिल्ली के सहयोग से किया गया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं को भारतीय सांस्कृतिक धरोहरों के महत्व से परिचित कराना और उन्हें विरासत संरक्षण के लिए नेतृत्वकर्ता के रूप में तैयार करना था। इसी क्रम में प्रतिभागी छात्रों को लखनऊ के प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों का शैक्षणिक भ्रमण कराया गया।
विद्यार्थियों ने छतर मंजिल तथा कैसरबाग स्थित जनरल कोठी का भ्रमण किया। इस दौरान उन्हें इन इमारतों के इतिहास, स्थापत्य शैली और संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी सरल भाषा में दी गई, जिससे वे अपनी सांस्कृतिक धरोहरों को बेहतर ढंग से समझ सकें।
निदेशक सुश्री रेनू द्विवेदी ने विद्यार्थियों को विरासत की परिभाषा, स्वरूप और उसकी पहचान के बारे में विस्तार से बताया। संवादात्मक सत्र के माध्यम से उन्होंने स्पष्ट किया कि सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने छात्रों को अपनी विरासत के प्रति जागरूक, संवेदनशील और जिम्मेदार बनने के लिए प्रेरित किया।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने अपने संदेश में कहा, “इस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल ऐतिहासिक इमारतों का भ्रमण कराना नहीं है, बल्कि युवाओं को अपनी विरासत से भावनात्मक रूप से जोड़ना है। विरासत केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि हमारी पहचान और भविष्य की दिशा भी है। इसलिए युवा पीढ़ी को सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।”
इस अवसर पर जय प्रकाश नारायण सर्वोदय बालक विद्यालय एवं जय प्रकाश नारायण सर्वोदय बालिका विद्यालय के कक्षा 9वीं और 11वीं के लगभग 70 छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम में इतिहास संस्थान से सुश्री सुयशा सहित पुरातत्व निदेशालय के अधिकारी, शिक्षकगण और विद्यालय कर्मचारी उपस्थित रहे। युवा सहभागिता के माध्यम से विरासत संरक्षण की दिशा में यह कार्यक्रम एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया है।
लखनऊ में हैंडलूम, सिल्क एवं खादी एक्सपो का शुभारंभ

* योगी सरकार पारंपरिक उद्योगों को दे रही नई ताकत, 39 उत्कृष्ट बुनकर सम्मानित

लखनऊ। प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम उद्योग, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग मंत्री राकेश सचान ने कहा कि योगी सरकार पारंपरिक उद्योगों को सशक्त बनाकर बुनकरों और दस्तकारों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। इसी क्रम में प्रदेश के स्टाम्प पंजीयन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविंद्र जायसवाल के साथ 17 फरवरी से 02 मार्च 2026 तक रवीन्द्रालय, मोतीलाल नेहरू मार्ग, लखनऊ में आयोजित ‘उत्तर प्रदेश हैंडलूम, सिल्क एवं खादी एक्सपो’ का शुभारंभ किया गया।
एक्सपो में विभिन्न राज्यों के खादी, सिल्क एवं हैंडलूम उत्पादों का प्रदर्शन एवं बिक्री की व्यवस्था की गई है। मंत्री राकेश सचान ने कहा कि वस्त्र उद्योग कृषि के बाद देश में सर्वाधिक रोजगार देने वाला क्षेत्र है और उत्तर प्रदेश सदियों से बुनकरी एवं दस्तकारी का प्रमुख केंद्र रहा है। प्रदेश में लगभग 1.91 लाख बुनकर एवं दस्तकार इस परंपरा से जुड़े हैं, जिनकी कलाकृतियाँ देश-विदेश में पहचान बना रही हैं।
उन्होंने कहा कि एक्सपो का उद्देश्य बुनकरों को सशक्त विपणन मंच उपलब्ध कराना और उनके उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाना है। इस आयोजन में विभिन्न जनपदों के 60 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं। 19 फरवरी को प्रदेश के उत्कृष्ट उत्पादों का फैशन शो के माध्यम से प्रदर्शन भी किया जाएगा।
39 उत्कृष्ट बुनकर सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान संत कबीर राज्य हथकरघा पुरस्कार योजना के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2025-26 हेतु चयनित 13 परिक्षेत्रों के प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त 39 उत्कृष्ट बुनकरों को डिमांड ड्राफ्ट, शील्ड, अंगवस्त्र एवं प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
मंत्री सचान ने बताया कि सरकार द्वारा बुनकरों के कल्याण के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। हैंडलूम बुनकरों को विद्युत बिल में प्रतिमाह प्रतिपूर्ति, बुनकर बहबूदी फंड से पुत्रियों के विवाह हेतु सहायता, भारतीय हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान वाराणसी (IIHT) के छात्रों को छात्रवृत्ति, झलकारी बाई हैंडलूम एवं पावरलूम विकास योजना तथा मुख्यमंत्री हैंडलूम एवं पावरलूम उद्योग विकास योजना लागू की गई हैं। इसके अतिरिक्त अटल बिहारी वाजपेयी पावरलूम बुनकर विद्युत फ्लैट रेट योजना के माध्यम से हजारों बुनकरों को राहत प्रदान की जा रही है।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश टेक्सटाइल एवं गारमेंटिंग पॉलिसी-2022 के तहत निवेशकों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है तथा पीएम मित्र योजना के अंतर्गत मेगा टेक्सटाइल पार्क की स्थापना की दिशा में तेजी से कार्य हो रहा है। हरदोई एवं लखनऊ में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है, जिससे प्रदेश वस्त्र उद्योग का प्रमुख केंद्र बनने की ओर अग्रसर है।
मंत्री राकेश सचान ने प्रदेशवासियों से अपील की कि अधिक से अधिक संख्या में एक्सपो में पहुंचकर बुनकरों के उत्पाद खरीदें और उनकी आर्थिक समृद्धि में भागीदार बनें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह आयोजन पारंपरिक उद्योगों को नई ऊर्जा देने के साथ ‘आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश’ के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
राज्य संग्रहालय में ‘कला अभिरुचि पाठ्यक्रम’ का भव्य शुभारम्भ

* नई पीढ़ी को कला और विरासत से जोड़ने की अनूठी पहल, 28 फरवरी तक चलेगा ज्ञान संवाद

लखनऊ। उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग की ओर से राज्य संग्रहालय लखनऊ में 18 से 28 फरवरी 2026 तक आयोजित ‘कला अभिरुचि पाठ्यक्रम’ का शुभारम्भ आज भव्य समारोह के साथ हुआ। कार्यक्रम में देशभर के विद्वान भारतीय कला के विविध आयामों पर दस दिनों तक व्याख्यान देंगे।
कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि प्रो. माण्डवी सिंह, कुलपति भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय ने किया। मुख्य वक्ता प्रो. के.के. थप्पल्याल (पूर्व विभागाध्यक्ष, प्राचीन भारतीय इतिहास एवं पुरातत्व विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय), विशिष्ट अतिथि संजय कुमार बिसवाल एवं डॉ. सृष्टि धवन उपस्थित रहे।
प्रो. माण्डवी सिंह ने कहा कि कला अभिरुचि जैसे आयोजनों से समाज में कला और संस्कृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित होती है। यह कार्यशाला जनसामान्य को कला से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनेगी।
मुख्य वक्ता प्रो. के.के. थप्पल्याल ने अपने व्याख्यान में कला के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कला मनुष्य के जीवन का अनिवार्य अंग है। उन्होंने प्रागैतिहासिक काल से मानव द्वारा कला सृजन की परंपरा का उल्लेख करते हुए भीमबेटका शैलाश्रय का उदाहरण दिया, जो प्रागैतिहासिक चित्रों का विश्वप्रसिद्ध स्थल है। उन्होंने कहा कि कला का रसास्वादन करने के लिए दर्शक में भी संवेदनशीलता और समझ आवश्यक है।
प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि यह पाठ्यक्रम विद्यार्थियों, शोधार्थियों और कला-प्रेमियों के लिए अत्यंत उपयोगी होगा। सरल भाषा में भारतीय कला, इतिहास और संग्रहालय विज्ञान की जानकारी प्रदान कर नई पीढ़ी को अपनी विरासत से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

* दस दिनों तक होंगे विशिष्ट व्याख्यान

19 फरवरी को “प्राचीन कला का उद्भव एवं विकास” विषय पर डॉ. राकेश तिवारी (पूर्व महानिदेशक, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, नई दिल्ली) व्याख्यान देंगे। 20 फरवरी को “गुप्त कालीन कला में सांस्कृतिक चेतना” विषय पर प्रो. एस.एन. कपूर (लखनऊ विश्वविद्यालय) बोलेंगे।
21 फरवरी को “मिनिएचर मार्बल्स: शाही संरक्षण, परंपरा, तकनीक और कलात्मक उत्कृष्टता” विषय पर डॉ. विजय माथुर (सलाहकार, संघ लोक सेवा आयोग) व्याख्यान देंगे। 22 फरवरी को “क्यों किसी को संग्रहालय जाना चाहिए” विषय पर प्रो. ऊषा रानी तिवारी, काशी हिंदू विश्वविद्यालय व्याख्यान देंगी।
24 फरवरी को “भारत की प्राचीन मौद्रिक यात्रा” विषय पर डॉ. अमित कुमार उपाध्याय (काशी हिंदू विश्वविद्यालय) अपने विचार रखेंगे। 25 फरवरी को “प्रागैतिहासिक भारत की संस्कृतियां” विषय पर प्रो. अनिल कुमार (विभागाध्यक्ष, पुरातत्व विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय) व्याख्यान देंगे।
26 फरवरी को “गुप्त कालीन भारतीय वास्तुकला” विषय पर डॉ. राजीव द्विवेदी, निदेशक वृन्दावन शोध संस्थान अपने विचार साझा करेंगे। 27 फरवरी को “संग्रहालय की वस्तुओं का निवारक संरक्षण” विषय पर धर्मेन्द्र मिश्रा, निदेशक इंटैक लखनऊ व्याख्यान देंगे।
28 फरवरी को प्रमाण-पत्र वितरण के साथ इस दस दिवसीय ‘कला अभिरुचि पाठ्यक्रम’ का समापन होगा। आयोजकों के अनुसार यह पहल कला और विरासत के प्रति नई पीढ़ी में रुचि और जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
उत्तर प्रदेश में ईको टूरिज्म को नई रफ्तार, 10 स्थलों के संचालन हेतु प्रस्ताव आमंत्रित

*27 फरवरी 2026 तक कर सकते हैं आवेदन, 15 वर्षों के लिए सौंपा जाएगा संचालन*

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के हरित पर्यटन को नई दिशा देने की पहल करते हुए उत्तर प्रदेश ईको टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड (UPETDB) ने राज्य के 10 प्रमुख ईको टूरिज्म स्थलों के संचालन और देखरेख के लिए इच्छुक संस्थाओं, कंपनियों एवं अनुभवी एजेंसियों से प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं। यह पहल प्राकृतिक पर्यटन स्थलों के पेशेवर प्रबंधन, दीर्घकालिक निवेश और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि चयनित एजेंसियों को परियोजनाओं का संचालन प्रारंभिक रूप से 15 वर्षों के लिए सौंपा जाएगा। संतोषजनक प्रदर्शन की स्थिति में यह अवधि आगे भी बढ़ाई जा सकेगी। उन्होंने कहा कि यह निर्णय जिम्मेदार और पर्यावरण-संवेदनशील पर्यटन विकास के लिए संस्थागत ढांचा तैयार करेगा, जिससे स्थानीय समुदायों को रोजगार मिलेगा और प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित संरक्षण सुनिश्चित होगा।

* 10 प्रमुख स्थलों पर विकसित होंगी परियोजनाएं

बोर्ड द्वारा जिन स्थलों के लिए प्रस्ताव आमंत्रित किए गए हैं, उनमें प्रमुख रूप से अयोध्या की उधेला झील, ललितपुर के बदरौन स्थित करकरावल जलप्रपात, बाराबंकी की बघर झील, बलिया का मैरीटार गांव, सीतापुर की अज्जेपुर झील, महराजगंज का देवदह स्थल, कुशीनगर की रामपुर सोहरौना झील, चित्रकूट का रामनगर, जालौन का पचनदा तथा बांदा जनपद की तहसील नरैनी में कालिंजर किले के समीप पर्यटन सुविधा केंद्र शामिल हैं।
सभी परियोजनाएं पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP मोड) पर विकसित की जाएंगी, जिससे निजी सहभागिता के माध्यम से गुणवत्ता, पारदर्शिता और बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सके।

* 27 फरवरी तक करें आवेदन

इच्छुक आवेदकों को निर्धारित पात्रता मानदंडों एवं दिशा-निर्देशों के अनुरूप अपने प्रस्ताव 27 फरवरी 2026 तक प्रस्तुत करने होंगे। विस्तृत जानकारी एवं आवेदन प्रक्रिया बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है।
मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश प्राकृतिक संपदा, जैव-विविधता और सांस्कृतिक धरोहर के क्षेत्र में समृद्ध है। ईको टूरिज्म के क्षेत्र में अपार संभावनाओं को पेशेवर प्रबंधन के माध्यम से वैश्विक स्तर तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह पहल प्रदेश को ईको टूरिज्म हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
केशव प्रसाद मौर्य ने स्वामी रामकृष्ण परमहंस की जयंती पर अर्पित किए श्रद्धासुमन
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने बुधवार को लखनऊ स्थित अपने कैम्प कार्यालय, सात-कालिदास मार्ग पर महान समाज सुधारक एवं आध्यात्मिक गुरु स्वामी रामकृष्ण परमहंस की जयंती के अवसर पर उनके चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किए।
इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वामी रामकृष्ण परमहंस का जीवन ईश्वरभक्ति, करुणा और मानवता की सेवा का अद्वितीय उदाहरण है। उन्होंने अपने विचारों एवं आध्यात्मिक साधना के माध्यम से समाज को प्रेम, सहिष्णुता और आत्मबोध का संदेश दिया।
श्री मौर्य ने कहा कि स्वामी जी की शिक्षाएं और जीवन दर्शन आज भी प्रासंगिक हैं तथा समाज को एकता, सद्भाव और नैतिक मूल्यों की ओर प्रेरित करते हैं। उन्होंने कहा कि स्वामी रामकृष्ण परमहंस के आदर्शों से प्रेरणा लेकर हमें समाज के उत्थान और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देना चाहिए।
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की बोर्ड परीक्षाएं शुरू, मंत्री गुलाब देवी ने किया स्वागत
लखनऊ। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षाएं बुधवार से पूरे प्रदेश में शुरू हो गईं। पहले दिन माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गुलाब देवी ने राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, जियामऊ स्थित परीक्षा केंद्र पहुंचकर छात्र-छात्राओं का पुष्प भेंट कर स्वागत किया और उनका उत्साहवर्धन किया।

वर्तमान सरकार में नकल की कल्पना भी नहीं की जा सकती

मंत्री ने कहा कि पहले नकल माफिया सक्रिय रहते थे, लेकिन वर्तमान सरकार में नकल की कल्पना भी नहीं की जा सकती। यदि कहीं अनियमितता पाई गई तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने परीक्षार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे देश का भविष्य हैं और बिना किसी तनाव के परीक्षा दें।इस दौरान परीक्षा केंद्र का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया। छात्राओं को टीका लगाकर और पेड़ा खिलाकर उनका हौसला बढ़ाया गया।

परीक्षाएं 18 फरवरी से 12 मार्च तक आयोजित होंगी

माध्यमिक शिक्षा निदेशक महेंद्र देव के अनुसार, वर्ष 2026 की परीक्षाएं 18 फरवरी से 12 मार्च तक आयोजित होंगी। प्रथम पाली में हाईस्कूल की हिंदी एवं प्रारंभिक हिंदी की परीक्षा सुबह 8:30 से 11:45 बजे तक आयोजित की जा रही है, जबकि द्वितीय पाली में इंटरमीडिएट की हिंदी एवं सामान्य हिंदी की परीक्षा दोपहर 2:00 से 5:15 बजे तक होगी।

प्रदेश भर में 8,033 परीक्षा केंद्र बनाए गए

प्रदेश भर में 8,033 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जिनमें 596 राजकीय, 3,453 सहायता प्राप्त और 3,984 निजी विद्यालय शामिल हैं। कुल 53,37,778 परीक्षार्थी इस वर्ष बोर्ड परीक्षा में शामिल हो रहे हैं।राज्य कंट्रोल रूम प्रभारी संयुक्त शिक्षा निदेशक विवेक नौटियाल के अनुसार, लखनऊ स्थित हाईटेक कंट्रोल रूम से 75 जिलों के सभी परीक्षा केंद्रों की लाइव ऑनलाइन मॉनिटरिंग और वेबकास्टिंग की व्यवस्था की गई है, ताकि परीक्षा निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से संपन्न हो सके।
अयोध्या : राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या की अर्थव्यवस्था में ऐतिहासिक उछाल
* भारतीय प्रबंधन संस्थान लखनऊ की केस स्टडी में पर्यटन, निवेश और रोजगार वृद्धि की पुष्टि

लखनऊ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘टेंपल इकॉनमी मॉडल’ पर भारतीय प्रबंधन संस्थान लखनऊ (आईआईएम लखनऊ) की ताजा अध्ययन रिपोर्ट “इकॉनमिक रेनेसांस ऑफ अयोध्या” ने मुहर लगाई है। रिपोर्ट के अनुसार जनवरी 2024 में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या में व्यापक आर्थिक सक्रियता, निवेश प्रवाह और रोजगार सृजन देखने को मिला है।
अध्ययन में मंदिर निर्माण से पहले और बाद की आर्थिक परिस्थितियों का तुलनात्मक विश्लेषण करते हुए बताया गया है कि धार्मिक अवसंरचना, यदि सुविचारित नीति और प्रशासनिक प्रतिबद्धता से जुड़ जाए, तो वह क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को गति देने वाला उत्प्रेरक बन सकती है।

* मंदिर से पहले सीमित दायरे में थी अर्थव्यवस्था
रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर निर्माण से पूर्व अयोध्या की पहचान मुख्यतः एक पवित्र तीर्थस्थान तक सीमित थी। आगंतुकों की वार्षिक संख्या लगभग 1.7 लाख के आसपास थी। अधिकांश दुकानदारों की औसत दैनिक आय ₹400–₹500 तक सीमित थी। राष्ट्रीय स्तर की होटल श्रृंखलाओं की उपस्थिति नगण्य थी, कनेक्टिविटी सीमित थी और युवाओं का पलायन सामान्य प्रवृत्ति बन चुका था।

* प्राण प्रतिष्ठा के बाद अभूतपूर्व आर्थिक विस्तार
जनवरी 2024 में प्राण प्रतिष्ठा के बाद पहले छह महीनों में 11 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं का आगमन दर्ज किया गया। अब वार्षिक स्तर पर 5–6 करोड़ आगंतुकों की संभावना जताई गई है।अयोध्या में लगभग ₹85,000 करोड़ की पुनर्विकास परियोजनाएं विभिन्न चरणों में प्रगति पर हैं। अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, आधुनिक रेलवे स्टेशन, विस्तारित सड़क नेटवर्क और नगर सौंदर्यीकरण जैसे कार्यों ने आधारभूत संरचना को नई दिशा दी है। सतत विकास के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों और सौर ऊर्जा को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।

* कर राजस्व और व्यापार में बड़ी बढ़ोतरी
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 तक उत्तर प्रदेश में पर्यटन व्यय ₹4 लाख करोड़ से अधिक होने का अनुमान है, जिसमें अयोध्या की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। पर्यटन आधारित गतिविधियों से कर राजस्व ₹20,000–25,000 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के अनुसार, मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से देशभर में ₹1 लाख करोड़ से अधिक का व्यापारिक कारोबार हुआ, जिसमें अयोध्या की हिस्सेदारी महत्वपूर्ण रही।

* आतिथ्य और निवेश में नया दौर
प्रतिदिन दो लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आगमन से आतिथ्य क्षेत्र में तेजी आई है। 150 से अधिक नए होटल और होमस्टे स्थापित हुए हैं। प्रतिष्ठित होटल श्रृंखलाएं ताज होटल्स, Marriott International और Wyndham Hotels & Resorts ने अयोध्या में विस्तार योजनाएं घोषित की हैं। ऑनलाइन ट्रैवल प्लेटफॉर्म पर बुकिंग में चार गुना तक वृद्धि दर्ज की गई है।स्थानीय हस्तशिल्प, धार्मिक स्मृति-चिह्न और मूर्तियों की मांग में भी तेज उछाल आया है, जिससे कारीगरों और स्थानीय उत्पादकों को प्रत्यक्ष लाभ मिला है।

* रोजगार और उद्यमिता को मिली गति
आईआईएम रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 6,000 एमएसएमई स्थापित हुए हैं। अनुमान है कि अगले 4–5 वर्षों में पर्यटन, परिवहन और आतिथ्य क्षेत्रों में लगभग 1.2 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे। छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी व्यवसायियों की दैनिक आय ₹2,500 तक पहुंच गई है। रियल एस्टेट क्षेत्र में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जहां मंदिर के आसपास संपत्ति मूल्यों में पांच से दस गुना तक उछाल देखा गया है।

* आस्था से अर्थव्यवस्था तक विकास का मॉडल
रिपोर्ट निष्कर्ष देती है कि अयोध्या अब केवल धार्मिक महत्व का केंद्र नहीं रहा, बल्कि एक उभरता हुआ क्षेत्रीय आर्थिक हब बन चुका है। धार्मिक विरासत आधारित विकास मॉडल, यदि सुव्यवस्थित निवेश और दीर्घकालिक दृष्टि से लागू किया जाए, तो वह स्थानीय अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक परिवर्तन ला सकता है। अयोध्या का अनुभव दर्शाता है कि सांस्कृतिक और धार्मिक परियोजनाएं योजनाबद्ध क्रियान्वयन के माध्यम से पर्यटन, रोजगार और निजी निवेश को गति देकर बहुस्तरीय आर्थिक वृद्धि का आधार बन सकती हैं।
किसानों के AI साथी “भारत विस्तार” 2026 का शुभारंभ

* शिवराज सिंह चौहान ने जयपुर से किया लोकार्पण, सूर्य प्रताप शाही वर्चुअल रूप से हुए शामिल
लखनऊ। मंगलवार को केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री, भारत सरकार शिवराज सिंह चौहान ने जयपुर (राजस्थान) से किसानों के समर्पित AI साथी “भारत विस्तार” 2026 का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने विधानसभा स्थित अपने कार्यालय कक्ष से वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम में प्रतिभाग किया।
यह अभिनव प्लेटफॉर्म आधुनिक तकनीक के समन्वय से खेती-किसानी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री शाही ने कहा कि “भारत विस्तार” देश की खेती को समृद्ध, सशक्त और सरल बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल है। इसके माध्यम से किसानों को उनकी समस्याओं का समाधान अब केवल एक क्लिक पर उपलब्ध होगा।
उन्होंने बताया कि किसान अपने मोबाइल फोन से 155261 नंबर डायल कर खेती से जुड़े सभी प्रश्नों के उत्तर प्राप्त कर सकेंगे। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक के उपयोग से किसानों को स्मार्ट, त्वरित और सटीक जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे कृषि क्षेत्र अधिक आधुनिक और लाभकारी बनेगा।
कार्यक्रम में यह भी जानकारी दी गई कि यह प्लेटफॉर्म किसानों को मौसम, बीज, खाद तथा सरकारी योजनाओं से संबंधित तात्कालिक और प्रामाणिक जानकारी उपलब्ध कराएगा। इससे न केवल कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
प्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार की इस पहल को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने और अधिकतम किसानों तक इसका लाभ पहुंचाने की प्रतिबद्धता दोहराई।