लोकसभा स्पीकर के बाद अब सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी, एकजुट हुआ विपक्ष
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लोक सभा अध्यक्ष के बाद विपक्षी दल देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एकजुट होते दिख रहे हैं। संभावना है कि तृणमूल कांग्रेस की अगुवाई में एकजुट विपक्ष गुरुवार को सीईसी के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस देगा। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सांसदों ने हस्ताक्षर भी कर दिया है। उनकी तैयारी संसद के दोनों हाउस के सचिवालयों में नोटिस जमा करने की है।
हस्ताक्षर की प्रक्रिया पूरी
भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्ताव लाने वाले नोटिस को गुरुवार यानी आज संसद से दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में सौंपा जा सकता है। प्रस्ताव लाने के लिए नोटिस पर जरूरी हस्ताक्षर की प्रक्रिया बुधवार को पूरी कर ली गई। बुधवार रात तक लोकसभा के लिए करीब 120 और राज्यसभा के लिए लगभग 60 सांसदों के साइन हो चुके थे। नियम के अनुसार लोकसभा में मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के नोटिस के लिए कम से कम 100 सांसदों के साइन जरूरी हैं।
सीईसी के खिलाफ टीएमसी को मिला कांग्रेस-सपा का साथ
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की इस मुहिम पर बुधवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के चैंबर में हुई बैठक में सहमति बनी। बैठक में राहुल गांधी और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने तृणमूल के प्रस्ताव का समर्थन किया। इसके बाद नोटिस देने के लिए जरूरी सांसदों के हस्ताक्षर कराए गए। इंडिया गठबंधन की सभी पार्टियों के साथ-साथ गठबंधन से बाहर आम आदमी पार्टी के सांसदों ने भी हस्ताक्षर किये हैं।
क्या है मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया?
कानून के मुताबिक, सीईसी को हटाने के लिए वही प्रक्रिया अपनाई जाती है, जो सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने के लिए है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त की अनुशंसा के बिना अन्य निर्वाचन आयुक्तों को पद से नहीं हटाया जा सकता। न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के अनुसार, किसी भी सदन में, जज को पद से हटाने का प्रस्ताव स्वीकृत हो जाने के बाद, (लोकसभा) अध्यक्ष या (राज्यसभा) सभापति, जैसा भी मामला हो, तीन सदस्यीय समिति का गठन करेंगे। जो उन आधारों की जांच करेगी, जिन पर पद से उन्हें हटाने की मांग की गई है। समिति में मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) या शीर्ष न्यायालय के जज, 25 उच्च न्यायालयों में से किसी एक के मुख्य न्यायाधीश और एक प्रतिष्ठित न्यायविद होते हैं। नियम के अनुसार, समिति द्वारा रिपोर्ट प्रस्तुत करने के बाद, इसे सदन में पेश किया जाएगा और पद से हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा शुरू हो जाएगी। हालांकि, सीईसी को अपना बचाव करने का अधिकार होता है।





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1 hour and 31 min ago
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