राज्य संग्रहालय में ‘कला अभिरुचि पाठ्यक्रम’ का भव्य शुभारम्भ

* नई पीढ़ी को कला और विरासत से जोड़ने की अनूठी पहल, 28 फरवरी तक चलेगा ज्ञान संवाद

लखनऊ। उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग की ओर से राज्य संग्रहालय लखनऊ में 18 से 28 फरवरी 2026 तक आयोजित ‘कला अभिरुचि पाठ्यक्रम’ का शुभारम्भ आज भव्य समारोह के साथ हुआ। कार्यक्रम में देशभर के विद्वान भारतीय कला के विविध आयामों पर दस दिनों तक व्याख्यान देंगे।
कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि प्रो. माण्डवी सिंह, कुलपति भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय ने किया। मुख्य वक्ता प्रो. के.के. थप्पल्याल (पूर्व विभागाध्यक्ष, प्राचीन भारतीय इतिहास एवं पुरातत्व विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय), विशिष्ट अतिथि संजय कुमार बिसवाल एवं डॉ. सृष्टि धवन उपस्थित रहे।
प्रो. माण्डवी सिंह ने कहा कि कला अभिरुचि जैसे आयोजनों से समाज में कला और संस्कृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित होती है। यह कार्यशाला जनसामान्य को कला से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनेगी।
मुख्य वक्ता प्रो. के.के. थप्पल्याल ने अपने व्याख्यान में कला के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कला मनुष्य के जीवन का अनिवार्य अंग है। उन्होंने प्रागैतिहासिक काल से मानव द्वारा कला सृजन की परंपरा का उल्लेख करते हुए भीमबेटका शैलाश्रय का उदाहरण दिया, जो प्रागैतिहासिक चित्रों का विश्वप्रसिद्ध स्थल है। उन्होंने कहा कि कला का रसास्वादन करने के लिए दर्शक में भी संवेदनशीलता और समझ आवश्यक है।
प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि यह पाठ्यक्रम विद्यार्थियों, शोधार्थियों और कला-प्रेमियों के लिए अत्यंत उपयोगी होगा। सरल भाषा में भारतीय कला, इतिहास और संग्रहालय विज्ञान की जानकारी प्रदान कर नई पीढ़ी को अपनी विरासत से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

* दस दिनों तक होंगे विशिष्ट व्याख्यान

19 फरवरी को “प्राचीन कला का उद्भव एवं विकास” विषय पर डॉ. राकेश तिवारी (पूर्व महानिदेशक, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, नई दिल्ली) व्याख्यान देंगे। 20 फरवरी को “गुप्त कालीन कला में सांस्कृतिक चेतना” विषय पर प्रो. एस.एन. कपूर (लखनऊ विश्वविद्यालय) बोलेंगे।
21 फरवरी को “मिनिएचर मार्बल्स: शाही संरक्षण, परंपरा, तकनीक और कलात्मक उत्कृष्टता” विषय पर डॉ. विजय माथुर (सलाहकार, संघ लोक सेवा आयोग) व्याख्यान देंगे। 22 फरवरी को “क्यों किसी को संग्रहालय जाना चाहिए” विषय पर प्रो. ऊषा रानी तिवारी, काशी हिंदू विश्वविद्यालय व्याख्यान देंगी।
24 फरवरी को “भारत की प्राचीन मौद्रिक यात्रा” विषय पर डॉ. अमित कुमार उपाध्याय (काशी हिंदू विश्वविद्यालय) अपने विचार रखेंगे। 25 फरवरी को “प्रागैतिहासिक भारत की संस्कृतियां” विषय पर प्रो. अनिल कुमार (विभागाध्यक्ष, पुरातत्व विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय) व्याख्यान देंगे।
26 फरवरी को “गुप्त कालीन भारतीय वास्तुकला” विषय पर डॉ. राजीव द्विवेदी, निदेशक वृन्दावन शोध संस्थान अपने विचार साझा करेंगे। 27 फरवरी को “संग्रहालय की वस्तुओं का निवारक संरक्षण” विषय पर धर्मेन्द्र मिश्रा, निदेशक इंटैक लखनऊ व्याख्यान देंगे।
28 फरवरी को प्रमाण-पत्र वितरण के साथ इस दस दिवसीय ‘कला अभिरुचि पाठ्यक्रम’ का समापन होगा। आयोजकों के अनुसार यह पहल कला और विरासत के प्रति नई पीढ़ी में रुचि और जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
उत्तर प्रदेश में ईको टूरिज्म को नई रफ्तार, 10 स्थलों के संचालन हेतु प्रस्ताव आमंत्रित

*27 फरवरी 2026 तक कर सकते हैं आवेदन, 15 वर्षों के लिए सौंपा जाएगा संचालन*

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के हरित पर्यटन को नई दिशा देने की पहल करते हुए उत्तर प्रदेश ईको टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड (UPETDB) ने राज्य के 10 प्रमुख ईको टूरिज्म स्थलों के संचालन और देखरेख के लिए इच्छुक संस्थाओं, कंपनियों एवं अनुभवी एजेंसियों से प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं। यह पहल प्राकृतिक पर्यटन स्थलों के पेशेवर प्रबंधन, दीर्घकालिक निवेश और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि चयनित एजेंसियों को परियोजनाओं का संचालन प्रारंभिक रूप से 15 वर्षों के लिए सौंपा जाएगा। संतोषजनक प्रदर्शन की स्थिति में यह अवधि आगे भी बढ़ाई जा सकेगी। उन्होंने कहा कि यह निर्णय जिम्मेदार और पर्यावरण-संवेदनशील पर्यटन विकास के लिए संस्थागत ढांचा तैयार करेगा, जिससे स्थानीय समुदायों को रोजगार मिलेगा और प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित संरक्षण सुनिश्चित होगा।

* 10 प्रमुख स्थलों पर विकसित होंगी परियोजनाएं

बोर्ड द्वारा जिन स्थलों के लिए प्रस्ताव आमंत्रित किए गए हैं, उनमें प्रमुख रूप से अयोध्या की उधेला झील, ललितपुर के बदरौन स्थित करकरावल जलप्रपात, बाराबंकी की बघर झील, बलिया का मैरीटार गांव, सीतापुर की अज्जेपुर झील, महराजगंज का देवदह स्थल, कुशीनगर की रामपुर सोहरौना झील, चित्रकूट का रामनगर, जालौन का पचनदा तथा बांदा जनपद की तहसील नरैनी में कालिंजर किले के समीप पर्यटन सुविधा केंद्र शामिल हैं।
सभी परियोजनाएं पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP मोड) पर विकसित की जाएंगी, जिससे निजी सहभागिता के माध्यम से गुणवत्ता, पारदर्शिता और बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सके।

* 27 फरवरी तक करें आवेदन

इच्छुक आवेदकों को निर्धारित पात्रता मानदंडों एवं दिशा-निर्देशों के अनुरूप अपने प्रस्ताव 27 फरवरी 2026 तक प्रस्तुत करने होंगे। विस्तृत जानकारी एवं आवेदन प्रक्रिया बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है।
मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश प्राकृतिक संपदा, जैव-विविधता और सांस्कृतिक धरोहर के क्षेत्र में समृद्ध है। ईको टूरिज्म के क्षेत्र में अपार संभावनाओं को पेशेवर प्रबंधन के माध्यम से वैश्विक स्तर तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह पहल प्रदेश को ईको टूरिज्म हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
केशव प्रसाद मौर्य ने स्वामी रामकृष्ण परमहंस की जयंती पर अर्पित किए श्रद्धासुमन
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने बुधवार को लखनऊ स्थित अपने कैम्प कार्यालय, सात-कालिदास मार्ग पर महान समाज सुधारक एवं आध्यात्मिक गुरु स्वामी रामकृष्ण परमहंस की जयंती के अवसर पर उनके चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किए।
इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वामी रामकृष्ण परमहंस का जीवन ईश्वरभक्ति, करुणा और मानवता की सेवा का अद्वितीय उदाहरण है। उन्होंने अपने विचारों एवं आध्यात्मिक साधना के माध्यम से समाज को प्रेम, सहिष्णुता और आत्मबोध का संदेश दिया।
श्री मौर्य ने कहा कि स्वामी जी की शिक्षाएं और जीवन दर्शन आज भी प्रासंगिक हैं तथा समाज को एकता, सद्भाव और नैतिक मूल्यों की ओर प्रेरित करते हैं। उन्होंने कहा कि स्वामी रामकृष्ण परमहंस के आदर्शों से प्रेरणा लेकर हमें समाज के उत्थान और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देना चाहिए।
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की बोर्ड परीक्षाएं शुरू, मंत्री गुलाब देवी ने किया स्वागत
लखनऊ। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षाएं बुधवार से पूरे प्रदेश में शुरू हो गईं। पहले दिन माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गुलाब देवी ने राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, जियामऊ स्थित परीक्षा केंद्र पहुंचकर छात्र-छात्राओं का पुष्प भेंट कर स्वागत किया और उनका उत्साहवर्धन किया।

वर्तमान सरकार में नकल की कल्पना भी नहीं की जा सकती

मंत्री ने कहा कि पहले नकल माफिया सक्रिय रहते थे, लेकिन वर्तमान सरकार में नकल की कल्पना भी नहीं की जा सकती। यदि कहीं अनियमितता पाई गई तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने परीक्षार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे देश का भविष्य हैं और बिना किसी तनाव के परीक्षा दें।इस दौरान परीक्षा केंद्र का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया। छात्राओं को टीका लगाकर और पेड़ा खिलाकर उनका हौसला बढ़ाया गया।

परीक्षाएं 18 फरवरी से 12 मार्च तक आयोजित होंगी

माध्यमिक शिक्षा निदेशक महेंद्र देव के अनुसार, वर्ष 2026 की परीक्षाएं 18 फरवरी से 12 मार्च तक आयोजित होंगी। प्रथम पाली में हाईस्कूल की हिंदी एवं प्रारंभिक हिंदी की परीक्षा सुबह 8:30 से 11:45 बजे तक आयोजित की जा रही है, जबकि द्वितीय पाली में इंटरमीडिएट की हिंदी एवं सामान्य हिंदी की परीक्षा दोपहर 2:00 से 5:15 बजे तक होगी।

प्रदेश भर में 8,033 परीक्षा केंद्र बनाए गए

प्रदेश भर में 8,033 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जिनमें 596 राजकीय, 3,453 सहायता प्राप्त और 3,984 निजी विद्यालय शामिल हैं। कुल 53,37,778 परीक्षार्थी इस वर्ष बोर्ड परीक्षा में शामिल हो रहे हैं।राज्य कंट्रोल रूम प्रभारी संयुक्त शिक्षा निदेशक विवेक नौटियाल के अनुसार, लखनऊ स्थित हाईटेक कंट्रोल रूम से 75 जिलों के सभी परीक्षा केंद्रों की लाइव ऑनलाइन मॉनिटरिंग और वेबकास्टिंग की व्यवस्था की गई है, ताकि परीक्षा निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से संपन्न हो सके।
अयोध्या : राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या की अर्थव्यवस्था में ऐतिहासिक उछाल
* भारतीय प्रबंधन संस्थान लखनऊ की केस स्टडी में पर्यटन, निवेश और रोजगार वृद्धि की पुष्टि

लखनऊ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘टेंपल इकॉनमी मॉडल’ पर भारतीय प्रबंधन संस्थान लखनऊ (आईआईएम लखनऊ) की ताजा अध्ययन रिपोर्ट “इकॉनमिक रेनेसांस ऑफ अयोध्या” ने मुहर लगाई है। रिपोर्ट के अनुसार जनवरी 2024 में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या में व्यापक आर्थिक सक्रियता, निवेश प्रवाह और रोजगार सृजन देखने को मिला है।
अध्ययन में मंदिर निर्माण से पहले और बाद की आर्थिक परिस्थितियों का तुलनात्मक विश्लेषण करते हुए बताया गया है कि धार्मिक अवसंरचना, यदि सुविचारित नीति और प्रशासनिक प्रतिबद्धता से जुड़ जाए, तो वह क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को गति देने वाला उत्प्रेरक बन सकती है।

* मंदिर से पहले सीमित दायरे में थी अर्थव्यवस्था
रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर निर्माण से पूर्व अयोध्या की पहचान मुख्यतः एक पवित्र तीर्थस्थान तक सीमित थी। आगंतुकों की वार्षिक संख्या लगभग 1.7 लाख के आसपास थी। अधिकांश दुकानदारों की औसत दैनिक आय ₹400–₹500 तक सीमित थी। राष्ट्रीय स्तर की होटल श्रृंखलाओं की उपस्थिति नगण्य थी, कनेक्टिविटी सीमित थी और युवाओं का पलायन सामान्य प्रवृत्ति बन चुका था।

* प्राण प्रतिष्ठा के बाद अभूतपूर्व आर्थिक विस्तार
जनवरी 2024 में प्राण प्रतिष्ठा के बाद पहले छह महीनों में 11 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं का आगमन दर्ज किया गया। अब वार्षिक स्तर पर 5–6 करोड़ आगंतुकों की संभावना जताई गई है।अयोध्या में लगभग ₹85,000 करोड़ की पुनर्विकास परियोजनाएं विभिन्न चरणों में प्रगति पर हैं। अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, आधुनिक रेलवे स्टेशन, विस्तारित सड़क नेटवर्क और नगर सौंदर्यीकरण जैसे कार्यों ने आधारभूत संरचना को नई दिशा दी है। सतत विकास के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों और सौर ऊर्जा को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।

* कर राजस्व और व्यापार में बड़ी बढ़ोतरी
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 तक उत्तर प्रदेश में पर्यटन व्यय ₹4 लाख करोड़ से अधिक होने का अनुमान है, जिसमें अयोध्या की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। पर्यटन आधारित गतिविधियों से कर राजस्व ₹20,000–25,000 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के अनुसार, मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से देशभर में ₹1 लाख करोड़ से अधिक का व्यापारिक कारोबार हुआ, जिसमें अयोध्या की हिस्सेदारी महत्वपूर्ण रही।

* आतिथ्य और निवेश में नया दौर
प्रतिदिन दो लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आगमन से आतिथ्य क्षेत्र में तेजी आई है। 150 से अधिक नए होटल और होमस्टे स्थापित हुए हैं। प्रतिष्ठित होटल श्रृंखलाएं ताज होटल्स, Marriott International और Wyndham Hotels & Resorts ने अयोध्या में विस्तार योजनाएं घोषित की हैं। ऑनलाइन ट्रैवल प्लेटफॉर्म पर बुकिंग में चार गुना तक वृद्धि दर्ज की गई है।स्थानीय हस्तशिल्प, धार्मिक स्मृति-चिह्न और मूर्तियों की मांग में भी तेज उछाल आया है, जिससे कारीगरों और स्थानीय उत्पादकों को प्रत्यक्ष लाभ मिला है।

* रोजगार और उद्यमिता को मिली गति
आईआईएम रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 6,000 एमएसएमई स्थापित हुए हैं। अनुमान है कि अगले 4–5 वर्षों में पर्यटन, परिवहन और आतिथ्य क्षेत्रों में लगभग 1.2 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे। छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी व्यवसायियों की दैनिक आय ₹2,500 तक पहुंच गई है। रियल एस्टेट क्षेत्र में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जहां मंदिर के आसपास संपत्ति मूल्यों में पांच से दस गुना तक उछाल देखा गया है।

* आस्था से अर्थव्यवस्था तक विकास का मॉडल
रिपोर्ट निष्कर्ष देती है कि अयोध्या अब केवल धार्मिक महत्व का केंद्र नहीं रहा, बल्कि एक उभरता हुआ क्षेत्रीय आर्थिक हब बन चुका है। धार्मिक विरासत आधारित विकास मॉडल, यदि सुव्यवस्थित निवेश और दीर्घकालिक दृष्टि से लागू किया जाए, तो वह स्थानीय अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक परिवर्तन ला सकता है। अयोध्या का अनुभव दर्शाता है कि सांस्कृतिक और धार्मिक परियोजनाएं योजनाबद्ध क्रियान्वयन के माध्यम से पर्यटन, रोजगार और निजी निवेश को गति देकर बहुस्तरीय आर्थिक वृद्धि का आधार बन सकती हैं।
किसानों के AI साथी “भारत विस्तार” 2026 का शुभारंभ

* शिवराज सिंह चौहान ने जयपुर से किया लोकार्पण, सूर्य प्रताप शाही वर्चुअल रूप से हुए शामिल
लखनऊ। मंगलवार को केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री, भारत सरकार शिवराज सिंह चौहान ने जयपुर (राजस्थान) से किसानों के समर्पित AI साथी “भारत विस्तार” 2026 का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने विधानसभा स्थित अपने कार्यालय कक्ष से वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम में प्रतिभाग किया।
यह अभिनव प्लेटफॉर्म आधुनिक तकनीक के समन्वय से खेती-किसानी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री शाही ने कहा कि “भारत विस्तार” देश की खेती को समृद्ध, सशक्त और सरल बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल है। इसके माध्यम से किसानों को उनकी समस्याओं का समाधान अब केवल एक क्लिक पर उपलब्ध होगा।
उन्होंने बताया कि किसान अपने मोबाइल फोन से 155261 नंबर डायल कर खेती से जुड़े सभी प्रश्नों के उत्तर प्राप्त कर सकेंगे। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक के उपयोग से किसानों को स्मार्ट, त्वरित और सटीक जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे कृषि क्षेत्र अधिक आधुनिक और लाभकारी बनेगा।
कार्यक्रम में यह भी जानकारी दी गई कि यह प्लेटफॉर्म किसानों को मौसम, बीज, खाद तथा सरकारी योजनाओं से संबंधित तात्कालिक और प्रामाणिक जानकारी उपलब्ध कराएगा। इससे न केवल कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
प्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार की इस पहल को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने और अधिकतम किसानों तक इसका लाभ पहुंचाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की बोर्ड परीक्षाएं 18 फरवरी से
* 53.37 लाख परीक्षार्थी होंगे शामिल, 8033 केंद्रों पर कड़ी निगरानी; नकल रोकने को सख्त इंतजाम

लखनऊ/प्रयागराज।उत्तर प्रदेश में हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षाएं 18 फरवरी से 12 मार्च 2026 तक आयोजित की जाएंगी। इस वर्ष कुल 53,37,778 परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल होंगे। नकलविहीन और पारदर्शी परीक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रदेशभर में 8033 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं।

माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गुलाब देवी ने 17 फरवरी को लखनऊ में राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम का उद्घाटन किया। यह कंट्रोल रूम ऑनलाइन मॉनिटरिंग के माध्यम से परीक्षा प्रक्रिया की निगरानी करेगा। राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम, लखनऊ के टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 18001806607 और 18001806608 जारी किए गए हैं। वहीं, यूपी माध्यमिक शिक्षा परिषद, प्रयागराज के टोल-फ्री नंबर 18001805310 और 18001805312 भी सक्रिय रहेंगे।

* संवेदनशील जिलों व केंद्रों पर विशेष नजर
प्रदेश के 8033 परीक्षा केंद्रों में 596 राजकीय, 3453 अशासकीय सहायता प्राप्त और 3984 स्ववित्त पोषित माध्यमिक विद्यालय शामिल हैं। 18 जिलों को संवेदनशील घोषित किया गया है। इसके अतिरिक्त 222 केंद्रों को अति संवेदनशील और 683 केंद्रों को संवेदनशील के रूप में चिह्नित किया गया है।

* हर कक्ष में सीसीटीवी और वेबकास्टिंग
प्रत्येक परीक्षा केंद्र के प्रत्येक कक्ष में वॉयस रिकॉर्डर युक्त दो सीसीटीवी कैमरे, राउटर, डीवीआर तथा हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्शन लगाए गए हैं। वेबकास्टिंग के माध्यम से परीक्षा की लाइव मॉनिटरिंग की जाएगी।

* व्यापक प्रशासनिक तैनाती
परीक्षा संचालन के लिए 8033 केंद्र व्यवस्थापक, 8033 बाह्य केंद्र व्यवस्थापक, 8033 स्टैटिक मजिस्ट्रेट, 1210 सेक्टर मजिस्ट्रेट, 427 जोनल मजिस्ट्रेट तथा 69 मंडलीय और 440 जनपदीय सचल दल नियुक्त किए गए हैं।

* प्रश्नपत्रों की सुरक्षित व्यवस्था
प्रश्नपत्रों के अतिरिक्त रिजर्व सेट्स सुरक्षित डबल लॉक अलमारी में सीलबंद रखे जाएंगे। उत्तर पुस्तिकाओं पर परिषद का लोगो और सूक्ष्म आकार में UPMSP अंकन किया गया है, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।

* संस्कृत शिक्षा परिषद की परीक्षा की भी ऑनलाइन निगरानी
इस बार राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम द्वारा यूपी संस्कृत शिक्षा परिषद परीक्षा 2026 की भी पहली बार ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जाएगी।

* कदाचार पर सख्त कानून लागू
सार्वजनिक परीक्षाओं में कदाचार रोकने और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए ‘उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम, 2024’ लागू किया गया है। इसके तहत अनुचित साधनों का प्रयोग करने पर कठोर कार्रवाई का प्रावधान है। मंत्री गुलाब देवी ने सभी परीक्षार्थियों को तनावमुक्त होकर आत्मविश्वास के साथ परीक्षा देने और श्रेष्ठ परिणाम प्राप्त करने की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने अधिकारियों और शिक्षकों से भी छात्रों को मार्गदर्शन देने तथा शांतिपूर्ण वातावरण में परीक्षा संपन्न कराने की अपील की।
सबका साथ, सबका विकास के मंत्र के साथ प्रदेश में सशक्त हो रहा स्वास्थ्य ढांचा : केशव प्रसाद मौर्य
* विधान परिषद बजट सत्र 2026-27 में स्वास्थ्य सेवाओं पर उप मुख्यमंत्री ने रखे विचार


लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं विधान परिषद में नेता सदन केशव प्रसाद मौर्य ने सोमवार को विधान परिषद के बजट सत्र 2026-27 के दौरान प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं में हुए सुधार और सरकार की नीतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। जिन जिला अस्पतालों का मेडिकल कॉलेजों में विलय किया गया है, वहां सुविधाओं का विस्तार हुआ है। इसके साथ ही पीएचसी, सीएचसी और अन्य जिला अस्पतालों में भी पूर्व की अपेक्षा बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। जहां एमआरआई या सीटी स्कैन के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है, वहां निजी क्षेत्र की सहभागिता से सेवाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।
उप मुख्यमंत्री ने चिकित्सा सहायता न देने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि लाभार्थियों की सूची सार्वजनिक है और सहायता पात्रता के आधार पर पारदर्शिता के साथ दी जाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गैर-पैनल निजी अस्पतालों के मामलों में सरकारी सहायता संभव नहीं होती।
आयुष्मान भारत योजना और मुख्यमंत्री आरोग्य योजना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार गरीबों को स्वास्थ्य सुरक्षा देने के लिए प्रतिबद्ध है। इन योजनाओं के माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों को निःशुल्क या सस्ती चिकित्सा सुविधा मिल रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि अब सड़क दुर्घटना के पीड़ितों को नियमानुसार 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज उपलब्ध कराया जाएगा। इस योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पर भी उन्होंने जोर दिया।
वर्ष 2017 के बाद चिकित्सा शिक्षा और संस्थानों की क्षमता में वृद्धि का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश के सभी नागरिकों को चरणबद्ध तरीके से स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हों—पहले पीएचसी/सीएचसी स्तर पर उपचार, फिर जिला अस्पताल और गंभीर मामलों में मेडिकल कॉलेजों में समुचित इलाज। स्थानांतरण नीति में पारदर्शिता का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि प्रशासनिक आवश्यकता के तहत स्थानांतरण किए जाते हैं, ताकि दूरदराज के क्षेत्रों में भी डॉक्टर, नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। किसी भी शिकायत की निष्पक्ष जांच का आश्वासन भी दिया गया।
उन्होंने “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास” के मंत्र को दोहराते हुए कहा कि सरकार की कल्याणकारी योजनाएं बिना किसी भेदभाव के सभी नागरिकों के लिए लागू हैं। चाहे कोरोनाकाल में टीकाकरण हो या अन्य स्वास्थ्य सेवाएं, सभी को समान रूप से सुविधा प्रदान की गई है। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार “सबका साथ, सबका विकास और सबका अच्छा स्वास्थ्य” की भावना से समाज सेवा के लिए प्रतिबद्ध है।
विधानसभा में दो राजकीय विश्वविद्यालय स्थापना हेतु संशोधन विधेयक पारित: योगेन्द्र उपाध्याय
* भदोही और शाहजहांपुर में नए विश्वविद्यालयों का मार्ग प्रशस्त, ग्रामीण युवाओं को मिलेंगे स्थानीय अवसर


लखनऊ। विधानसभा के बजट सत्र 2026-27 में योगी सरकार ने उच्च शिक्षा के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026 तथा उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2026 को बहुमत से पारित करा लिया। सदन में प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय द्वारा प्रस्तुत दोनों विधेयक पारित हुए।
सदन में प्रस्ताव रखते हुए मंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य उच्च शिक्षा को समाज के अंतिम पायदान तक पहुंचाना है। उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय और एकात्म मानववाद के दर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम है। सरकार ग्रामीण, पिछड़े और वंचित क्षेत्रों तक विश्वविद्यालय पहुंचाने के लिए ठोस निर्णय ले रही है, ताकि युवाओं को अपने ही क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो सके।
संशोधन विधेयक के तहत ज्ञानपुर, जनपद भदोही स्थित काशी नरेश स्नातकोत्तर महाविद्यालय को उन्नत कर विश्वविद्यालय के रूप में विकसित किया जाएगा। इससे आसपास के 23 महाविद्यालयों का संबद्धीकरण संभव होगा और क्षेत्र के हजारों विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा, शोध और नवाचार के बेहतर अवसर मिलेंगे। यह निर्णय पूर्वांचल क्षेत्र में उच्च शिक्षा के नए केंद्र के रूप में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
द्वितीय संशोधन विधेयक के माध्यम से शाहजहांपुर स्थित मुमुक्षु आश्रम ट्रस्ट की शैक्षिक इकाइयों को उच्चीकृत कर स्वामी सुखदेवानंद विश्वविद्यालय की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया गया है। मंत्री ने बताया कि ट्रस्ट द्वारा एमओयू के माध्यम से अपनी चल-अचल संपत्ति एवं भूमि सरकार को हस्तांतरित कर विश्वविद्यालय स्थापना में सहयोग दिया गया है। इससे 60 क्षेत्रीय महाविद्यालयों का संबद्धीकरण होगा और युवाओं को स्थानीय स्तर पर शिक्षा व रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे।
मंत्री ने सदन को अवगत कराया कि वर्ष 2017 के बाद प्रदेश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक सुधार किए गए हैं। जहां पहले कई मंडलों में सरकारी विश्वविद्यालयों का अभाव था, वहीं अब निरंतर नए विश्वविद्यालय स्थापित किए जा रहे हैं। सरकार की उच्च शिक्षा प्रोत्साहन नीति के तहत हर जिले तक विश्वविद्यालय पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिससे शिक्षा का संतुलित और विकेंद्रीकृत विकास सुनिश्चित हो सके।
उन्होंने कहा कि सरकार केवल संस्थानों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि गुणवत्ता सुधार, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, शोध और कौशल आधारित शिक्षा पर भी विशेष ध्यान दे रही है। प्रदेश में विदेशी विद्यार्थियों की बढ़ती संख्या और नए शैक्षणिक अवसर इस परिवर्तन का प्रमाण हैं। सरकार उच्च शिक्षा को रोजगार, नवाचार और आत्मनिर्भरता से जोड़ते हुए उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय और वैश्विक शिक्षा मानचित्र पर सशक्त स्थान दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।
अब बट गए हैं कटना बाकी है  : सूरज प्रसाद चौबे राष्ट्रीय अध्यक्ष
लखनऊ । सवर्ण आर्मी भारत के केंद्रीय कार्यालय गोमतीनगर लखनउ पर आए सवर्ण समाज के लोगों के बीच बोलते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज प्रसाद चौबे ने कहा कि आज देश में जो माहौल सवर्ण के खिलाफ बनाया जा रहा है वो बड़ा चिंता का विषय है तिलक,तराजू,और तलवार इनको मारो जूते चार , ब्राह्मण,क्षत्रिय,बनिया  को देश निकालने की बात हो रही है और हमारी सरकार,उच्च पदस्थ नेता, संवैधानिक संस्थाएं चुप हैं। देश की एकता के लिए सवर्ण सर्वोच्च बलिदान दिया सरकार आज उन्हीं के खिलाफ यूजीसी कानून ला रही है दिल्ली यूनिवर्सिटी का हालिया निवाद जाती पूछ कर महिला पत्रकार को लिंच करने की कोशिश दिल्ली  यूनिवर्सिटी में हुआ अब सवर्ण समाज चुप नहीं बैठेगा अब अन्याय के खिलाफ निर्णायक संघर्ष का समय आ गया है बेटियों पर हमला किसी कीमत पर स्वीकार नहीं होगा यह केवल एक परिवार का दर्द नहीं पूरे समाज की अस्मिता और सम्मान का प्रश्न है । कानून का दुरुपयोग हो या तथाकथित काले कानून का मौन  समर्थन समाज अब जाग चुका है दोहरा मापदंड स्वीकार नहीं किया जाएगा न्याय समानता और सुरक्षा यही हमारा संकल्प है अब तो बट गया है कटना बाकी है 8 मार्च को जनर मंतर पहुंच कर मजबूती दे यूजीसी काला कानून वापस लेने हेतु धरना प्रदर्शन किया जाएगा दुर्भाग्य है कि इस घटना कवरेज करने पहुंच न्यूज रिपोर्टर रुचिका तिवारी के साथ मार पीट की गई सच दिखाने की कोशिश करने  वाले मीडिया कर्मियों पर हमला लोकतंत और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार है हमला करने वाले जाती पूछ कर कहे कि ब्राह्मण है मारो जान से मारने को कोशिश की गई यही नहीं उससे कहा गया कि कपड़े निकाल कर नागा परेड कराया जाएगा।