उत्तराखंड के नैनीताल, रामनगर और उत्तरकाशी कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट
* ई-मेल के जरिए मिली धमकी के बाद कोर्ट परिसर खाली, बीडीएस और डॉग स्क्वॉड ने की सघन जांच

नैनीताल/रामनगर/हल्द्वानी/उत्तरकाशी। उत्तराखंड के नैनीताल और उत्तरकाशी जिलों में स्थित जिला एवं सत्र न्यायालयों को बम से उड़ाने की धमकी मिलने से हड़कंप मच गया। ई-मेल के माध्यम से भेजी गई इस धमकी के बाद पुलिस-प्रशासन तुरंत सक्रिय हो गया और सभी न्यायालय परिसरों को एहतियातन खाली कराकर सघन जांच अभियान शुरू किया गया।
जानकारी के अनुसार, अखिल भारतीय न्यायाधीश संघ के नाम से एक ई-मेल भेजा गया, जिसमें नैनीताल जिला न्यायालय को निशाना बनाते हुए बम से उड़ाने की चेतावनी दी गई। मेल में जजों के चैंबर में 12 आरडीएक्स बम और आईईडी लगाए जाने का दावा किया गया था। साथ ही तमिलनाडु में ईडब्ल्यूएस आरक्षण को रोकने की मांग का भी उल्लेख किया गया।
धमकी मिलते ही नैनीताल, रामनगर और हल्द्वानी की अदालतों में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया। बम निरोधक दस्ता (बीडीएस) और डॉग स्क्वॉड ने कोर्ट रूम, जजों के चैंबर और पूरे परिसर की गहन तलाशी ली। हालांकि अब तक किसी प्रकार की संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं हुई है।
नैनीताल के एसपी डॉ. जगदीश चंद्र ने बताया कि ई-मेल के माध्यम से बम होने की सूचना मिली थी, जिसके बाद एसओपी के तहत कार्रवाई की गई। जिला न्यायालय परिसर के अधिकांश हिस्सों की जांच की जा चुकी है और फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है।
जिला बार एसोसिएशन, नैनीताल के अध्यक्ष भगवत प्रसाद ने कहा कि सूचना मिलते ही प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों को अवगत करा दिया गया था। सुरक्षा के मद्देनजर न्यायालय परिसर को खाली कराकर जांच की गई।
नैनीताल जिले के रामनगर न्यायालय और हल्द्वानी कोर्ट को भी धमकी भरा ई-मेल प्राप्त हुआ। इसके बाद कोर्ट परिसर में चल रही सभी गतिविधियां रोक दी गईं और आम लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया गया। पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर सघन तलाशी अभियान चलाया गया।
इसी क्रम में उत्तरकाशी जिला न्यायालय को भी बम से उड़ाने की धमकी मिली। जिला जज की सूचना पर पुलिस ने तत्काल कोर्ट परिसर खाली कराया और सुरक्षा बढ़ा दी। नगर कोतवाल भावना कैंथोला ने बताया कि मेल में आरडीएक्स होने का दावा किया गया था, जिसके बाद एहतियातन जांच शुरू की गई।
फिलहाल पुलिस और साइबर टीमें धमकी भरे ई-मेल के स्रोत का पता लगाने में जुटी हैं। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। सुरक्षा एजेंसियां पूरी सतर्कता के साथ मामले की जांच कर रही हैं।
देहरादून में लोक भवन कूच के दौरान 500 से अधिक कांग्रेसी हिरासत में, हरीश रावत बोले– बीजेपी सत्ता से होगी बेदखल
* हाथीबड़कला में बैरिकेडिंग पर टकराव, पुलिस लाइन भेजे गए नेता बाद में रिहा

देहरादून। देहरादून में विभिन्न मुद्दों को लेकर लोक भवन (राजभवन) का घेराव करने जा रहे कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हाथीबड़कला क्षेत्र में रोक दिया। इस दौरान पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने करीब 500 से अधिक नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर पुलिस लाइन भेज दिया। बाद में सभी को रिहा कर दिया गया।
कांग्रेस कार्यकर्ता पहले परेड ग्राउंड में एकत्र हुए, जहां से रैली निकालकर लोक भवन की ओर कूच किया गया। हजारों की संख्या में शामिल कार्यकर्ताओं को हाथीबड़कला के पास बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया गया। कुछ कार्यकर्ता बैरिकेड पर चढ़ गए और आगे बढ़ने का प्रयास किया। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य अपने समर्थकों के साथ पहला बैरिकेड पार कर मुख्य बैरिकेड तक पहुंच गए, लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने नहीं दिया।
प्रदर्शन में कांग्रेस प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा भी शामिल रहीं। पुलिस ने प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत, चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष करण महारा और महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया। हिरासत में लिए गए प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार जनभावनाओं को दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा को सत्ता से हटाने का आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।
वहीं पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा, “आज परिवर्तन का जनसैलाब सड़कों पर उतरा है। गांव-गांव से हजारों कांग्रेस कार्यकर्ता देहरादून पहुंचे हैं। सभी एक स्वर में कह रहे हैं कि इस बार बीजेपी सत्ता से बेदखल होगी।” प्रदर्शन के दौरान कुछ समय के लिए क्षेत्र में यातायात प्रभावित रहा। पुलिस प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में बताते हुए कानून-व्यवस्था बनाए रखने की बात कही है।
रुद्रपुर कलेक्ट्रेट पर आंगनबाड़ी वर्करों का घेराव, राज्य कर्मचारी दर्जा और वेतनमान की मांग तेज
* मुख्य गेट बंद होने पर बाहर ही धरना, प्रशासन को सौंपा ज्ञापन, मांगें पूरी न होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी

रुद्रपुर, उत्तराखंड। रुद्रपुर में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने राज्य कर्मचारी का दर्जा और नियमित वेतनमान लागू करने की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट का घेराव किया। पुलिस प्रशासन द्वारा मुख्य गेट बंद किए जाने से नाराज महिलाओं ने गेट के बाहर ही धरना शुरू कर जोरदार नारेबाजी की।
जिले के विभिन्न ब्लॉकों से सैकड़ों की संख्या में पहुंचीं आंगनबाड़ी वर्करों ने कलेक्ट्रेट परिसर में प्रवेश का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें मुख्य द्वार पर ही रोक दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारी महिलाएं गेट के सामने ही धरने पर बैठ गईं और प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन जारी रखा।
प्रदर्शनकारी महिलाओं का कहना है कि वे लंबे समय से राज्य कर्मचारी का दर्जा, नियमित वेतनमान और सेवा शर्तों में सुधार की मांग कर रही हैं, लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पुष्विंदर कौर ने कहा कि वे सरकार की विभिन्न योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू करने में अहम भूमिका निभाती हैं। पोषण अभियान, टीकाकरण, सर्वेक्षण और जनगणना जैसे कार्यक्रमों में उनकी सक्रिय भागीदारी रहती है। इसके बावजूद उन्हें बेहद कम मानदेय मिलता है, जो महंगाई के इस दौर में पर्याप्त नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कार्य का दायरा लगातार बढ़ रहा है, लेकिन मानदेय और सुविधाओं में कोई समुचित वृद्धि नहीं की गई है। कई बार निर्धारित समय से अधिक काम करना पड़ता है और अवकाश के दिनों में भी ड्यूटी देनी पड़ती है, जिसका कोई अतिरिक्त भुगतान नहीं मिलता।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस बल मौके पर तैनात रहा और स्थिति को नियंत्रित रखा। बाद में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में राज्य कर्मचारी का दर्जा देने, नियमित वेतनमान लागू करने और सेवा शर्तों में सुधार की प्रमुख मांगें शामिल हैं।
प्रशासन की ओर से ज्ञापन प्राप्त कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया गया। हालांकि प्रदर्शनकारी महिलाओं ने स्पष्ट कहा कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि लिखित और ठोस निर्णय चाहिए। मांगें पूरी न होने पर आंदोलन को और व्यापक रूप देने की चेतावनी भी दी गई है।
रुद्रपुर में फोम से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली में भीषण आग, फायर ब्रिगेड ने कड़ी मशक्कत के बाद पाया काबू
* बीच सड़क धू-धू कर जली ट्रॉली, बिजली तार से टकराने की आशंका; जनहानि टली

रुद्रपुर, उत्तराखंड। रुद्रपुर में सोमवार को तीन पानी डैम के पास फोम से भरी एक ट्रैक्टर-ट्रॉली में अचानक भीषण आग लग गई। बीच सड़क पर आग लगने से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।
घटना ट्रांजिट कैंप थाना क्षेत्र की है। जानकारी के अनुसार दोपहर के समय तीन पानी डैम के पास अचानक ट्रैक्टर-ट्रॉली में आग भड़क उठी। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। स्थानीय लोगों ने तत्काल 112 पर कॉल कर पुलिस को सूचना दी।
सूचना मिलते ही फायर अधिकारी महेश चंद्र के नेतृत्व में दमकल टीम मौके के लिए रवाना हुई। घटनास्थल पर पहुंचने पर पाया गया कि ट्रॉली में हेलमेट निर्माण में प्रयुक्त ज्वलनशील फोम भरी हुई थी, जिसके कारण आग तेजी से फैल रही थी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए दमकल कर्मियों ने वाहन से पंपिंग कर मॉनिटर ब्रांच और हौज पाइप की मदद से आग बुझाने का अभियान शुरू किया।
काफी प्रयासों के बाद आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया। प्राथमिक जांच में आशंका जताई गई है कि ट्रैक्टर-ट्रॉली ऊपर से गुजर रहे बिजली के तारों से टकरा गई थी, जिससे शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगी। हालांकि, सटीक कारणों की जांच की जा रही है।
गनीमत रही कि इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई। मौके पर मौजूद ट्रांजिट कैंप थाना पुलिस ने यातायात व्यवस्था संभाली और सुरक्षा बनाए रखी। आग बुझाने के बाद फायर अधिकारी ने स्थल का निरीक्षण किया और आवश्यक कार्रवाई के उपरांत फायर यूनिट स्टेशन लौट गई।
देहरादून में कानून व्यवस्था को लेकर कांग्रेस का प्रदर्शन, PHQ घेराव के बाद 16 फरवरी को राजभवन कूच की चेतावनी
देहरादून: उत्तराखंड में बिगड़ती कानून व्यवस्था के विरोध में शनिवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राजधानी देहरादून में पुलिस मुख्यालय (PHQ) का घेराव किया। सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे और राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो 16 फरवरी को राजभवन का घेराव किया जाएगा।

प्रदर्शन की शुरुआत राजपुर रोड स्थित प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय से हुई। प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने पैदल मार्च निकाला। पुलिस ने सुभाष रोड पर बैरिकेडिंग लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोक दिया, जिससे कुछ देर के लिए धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। कुछ कार्यकर्ता बैरिकेड पार कर आगे बढ़े, लेकिन पुलिस ने उन्हें दूसरी बैरिकेडिंग पर रोक दिया।

प्रदर्शन में पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत, चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह और बदरीनाथ विधायक लखपत बुटोला समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल रहे। नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य में अपराध की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं और सरकार कानून व्यवस्था संभालने में विफल रही है।

प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि राज्य की कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन जनता की सुरक्षा के बजाय सरकार के दबाव में काम कर रहा है। वहीं हरक सिंह रावत ने कहा कि देवभूमि की छवि लगातार हो रही आपराधिक घटनाओं से प्रभावित हो रही है और अपराधियों के हौसले बुलंद हैं।

कांग्रेस ने कहा कि यह प्रदर्शन केवल चेतावनी है। यदि सरकार ने जल्द प्रभावी कदम नहीं उठाए तो 16 फरवरी को बड़ी संख्या में कार्यकर्ता राजभवन कूच करेंगे और आंदोलन को तेज किया जाएगा।
आदमखोर गुलदार ढेर, शूटर जॉय हुकिल के ऑपरेशन से देहरादून ने ली राहत की सांस
पौड़ी: उत्तराखंड के पौड़ी जिले के बाड़ा गांव में छापेमारी का पर्याय बना आदमखोर गुलदार आखिरकार ढेर कर दिया गया। 15 जनवरी को नेपाली मूल के एक व्यक्ति को अपना शिकार बनाने के बाद से पूरे इलाके में भय का माहौल था। ग्रामीण इलाकों से बाहर निकलने में भी डर महसूस कर रहे थे। लंबा इंतजार और लगातार निगरानी के बाद शुक्रवार रात वन विभाग की टीम और प्रसिद्ध शूटर जॉय हुकिल ने संयुक्त अभियान में गुलदार को मार गिराया।

मारे गए गुलदार को बचाने के लिए नागदेव रेंज लाया गया है, जहां पशु व्यापारियों की टीम उसकी जांच करेगी। इससे यह पुष्टि की जाएगी कि मारा गया गुलदार वही हमलावर था या नहीं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार मादा गुलदार की उम्र लगभग 6 से 7 साल बताई जा रही है।

घटना के बाद वन विभाग लगातार क्षेत्र में गश्त कर रहा था। पहले चरण में गुलदार को ट्रेंकुलाइज कर ठिकानों में कैद करने की कोशिश की गई। गांव के आसपास ट्रैप कैमरे और सीसीटीवी कैमरे लगाए गए ताकि उसकी गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। हालांकि गुलदार बेहद चालाक साबित हुआ और कई बार बदमाशों के पास आने के बावजूद सुरक्षित निकल जाता था। अंततः स्थिति की देनदार को देखते हुए उसे मारने की अनुमति दी गई।

डीएफओ महातिम यादव के अनुसार, विभाग की टीम 15 जनवरी की घटना के बाद से लगातार मुस्तैद थी। बेहोश कर पकड़ने के प्रयास में असफल रहने पर अंतिम विकल्प के रूप में शूट करने का फैसला लिया गया। दो अनुभवी शूटरों की मदद से ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया।

गुलदार के मारे जाने के बाद गांव में लोगों ने राहत की सांस ली है। हालांकि एथलीटों का कहना है कि आसपास के जंगलों में अन्य गुलदार भी देखे जा रहे हैं, जिससे खतरा पूरी तरह से टला नहीं है। इसके बावजूद आदमखोर के खात्मे से क्षेत्र में सामान्य जनजीवन बहाल होने की उम्मीद जगी है।
देहरादून में हाईटेक नकल गिरोह का पर्दाफाश, अंडरग्राउंड चेंबर से रिमोट एक्सेस के जरिए पेपर सॉल्व; दो गिरफ्तार
देहरादून: उत्तराखंड एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) ने 13 फरवरी को आयोजित केंद्रीय प्रतियोगी परीक्षा में हाईटेक तरीके से नकल कराने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। मामले में दो एजेंसियां—नीतीश कुमार और भास्कर नैथानी—को गिरफ्तार किया गया है। कार्रवाई का खुलासा एसटीएफ के आईजी नीलेश भरणे ने किया। संबंधित परीक्षा केंद्र को सील कर दिया गया है।

यह परीक्षा कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) द्वारा आयोजित मल्टी टास्किंग (नॉन-टेक्निकल) स्टाफ एवं हवलदार भर्ती परीक्षा-2025 थी, जो केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) और केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (सीबीएन) के लिए आयोजित की जा रही थी। परीक्षा देशभर के विभिन्न केंद्रों पर आयोजित हुई थी।

एसटीएफ को इनपुट मिला था कि कुछ लोग इमेजिंग को परीक्षा में पास कराने का झांसा देकर मोटी रकम वसूलने की फिराक में हैं। यूपी और उत्तराखंड एसटीएफ की संयुक्त टीम ने देहरादून स्थित महादेव डिजिटल जोन, एमकेपी इंटर कॉलेज परीक्षा केंद्र पर छापा मारा।

दबिश के दौरान परीक्षा लैब के पास यूपीएस कमरे के कोने में 24x24 इंच का अंडरग्राउंड चेंबर (गन्ना) मिला। वहां दो लैपटॉप और राउटर ऑटोमैटिक अवस्था में पाए गए, जिन्हें रिमोटली संचालित किया जा रहा था। जांच में सामने आया कि इन लैपटॉप के जरिए परीक्षा के प्रश्नपत्र हल कर<extra_id_1> को सहायता पहुंचाई जा रही थी।

IGN एसटीएफ ब्लूश भरणे के अनुसार, गिरोह<extra_id_1> से परीक्षा में पास कराने के नाम पर प्रति व्यक्ति 10 लाख रुपये की मांग करता था। अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग कर कंप्यूटर सिस्टम को रिमोट एक्सेस के जरिए नियंत्रित किया जाता था और प्रश्नपत्र हल किए जाते थे।

एसटीएफ टीम ने तकनीकी और फोरेंसिक उपकरणों की मदद से सिस्टम को कब्जे में लेकर सील कर दिया। गिरफ्तार एजेंसियों में नीतिश कुमार निवासी नागलोई, दिल्ली और भास्कर नैथानी निवासी देहरादून शामिल हैं। अन्य संभावित एजेंसियों की तलाश के लिए पुलिस टीम गठित कर दी गई है।

एसटीएफ ने साफ किया है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर के होटल मैनेजर पर तीन लाख नकदी व सोना चोरी का आरोप, मुकदमा दर्ज

हरिद्वार। ज्वालापुर विधानसभा से पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर के निजी होटल में कार्यरत मैनेजर पर तीन लाख रुपये नकद और सोने की अंगूठी लेकर फरार होने का आरोप लगा है। सिडकुल थाने में तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
पूर्व विधायक के दामाद सोमिल चौधरी ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि सिडकुल क्षेत्र स्थित होटल में देवेश शर्मा को मैनेजर के पद पर नियुक्त किया गया था। प्रारंभिक दौर में उसकी कार्यशैली संतोषजनक रही, जिससे उस पर विश्वास जताते हुए होटल के बैंक खाते, चेकबुक और डेबिट कार्ड जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी सौंप दी गईं।
आरोप है कि कुछ समय बाद देवेश शर्मा ने कर्मचारियों का वेतन देना बंद कर दिया। पिछले तीन महीनों से होटल स्टाफ को भुगतान नहीं किया गया। इसी बीच वह कथित रूप से करीब तीन लाख रुपये नकद और एक सोने की अंगूठी लेकर बिना सूचना होटल छोड़कर चला गया।
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि आरोपी हाल के दिनों में हरिपुर कलां क्षेत्र में रह रहा था। फोन पर संपर्क करने की कोशिश करने पर उसने अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए जान से मारने की धमकी दी।
सिडकुल थाना प्रभारी नितेश शर्मा ने बताया कि तहरीर के आधार पर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले की जांच जारी है और आरोपी की तलाश के लिए आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
एसडीएम की तैनाती न होने पर कांग्रेस विधायक सुमित हृदयेश का धरना, न्यायिक व्यवस्था ठप होने का आरोप

हल्द्वानी, उत्तराखंड। नैनीताल जिले के मुख्यालय हल्द्वानी में लंबे समय से एसडीएम की तैनाती न होने को लेकर कांग्रेस विधायक सुमित हृदयेश ने सोमवार को पार्टी कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों के साथ एसडीएम कोर्ट परिसर में धरना-प्रदर्शन किया। उन्होंने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि न्यायिक व्यवस्था को जानबूझकर ठप किया जा रहा है, जिससे आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

धरना-प्रदर्शन के दौरान विधायक सुमित हृदयेश और पार्षद रवि जोशी कोर्ट परिसर में जमीन पर बैठकर नारेबाजी करते नजर आए। दोनों नेताओं ने प्रशासन के खिलाफ आक्रोश व्यक्त करते हुए शीघ्र एसडीएम की स्थायी तैनाती की मांग की।

बताया गया कि एसडीएम हल्द्वानी राहुल शाह के स्थानांतरण के बाद से कोर्ट का नियमित संचालन बाधित है। न्यायिक अधिकारी की अनुपस्थिति के कारण कई दिनों से मामलों की सुनवाई प्रभावित हो रही है। इसका सीधा असर अधिवक्ताओं और आम जनता पर पड़ रहा है। छोटे मामलों में भी लोगों को बार-बार तारीख मिल रही है, जिससे न्याय प्रक्रिया अनावश्यक रूप से लंबी हो गई है।

धरने के दौरान विधायक सुमित हृदयेश ने कहा कि एसडीएम कोर्ट हल्द्वानी क्षेत्र की एक अहम न्यायिक इकाई है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याओं के समाधान के लिए पहुंचते हैं। कोर्ट का नियमित संचालन न होना प्रशासन की उदासीनता को दर्शाता है और यह न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

उन्होंने बताया कि इस संबंध में उन्होंने कुमाऊं आयुक्त और जिलाधिकारी से फोन पर वार्ता कर स्थिति से अवगत कराया है तथा हल्द्वानी में जल्द से जल्द नए एसडीएम की तैनाती की मांग की है।

वहीं पार्षद रवि जोशी ने भी प्रशासन पर नाराजगी जताते हुए कहा कि न्यायिक कार्य ठप होने से क्षेत्र की जनता में भारी रोष है। लोग अपने जरूरी काम छोड़कर कोर्ट आते हैं, लेकिन सुनवाई न होने से उन्हें निराश होकर लौटना पड़ता है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल ठोस कदम उठाने की मांग की।

"टिकट तो राहुल गांधी का भी फाइनल नहीं” — हरक सिंह रावत के बयान से कांग्रेस में सियासी हलचल

देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत एक बार फिर अपने बेबाक अंदाज़ को लेकर चर्चा में हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में उनका यह बयान— “टिकट तो राहुल गांधी का भी फाइनल नहीं हुआ है”—प्रदेश की राजनीति में चर्चाओं का विषय बन गया है।

दरअसल, हरक सिंह रावत पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने टिकट वितरण को लेकर पार्टी की स्पष्ट नीति सामने रखी। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष होने के नाते बड़ी संख्या में नेता उनके पास टिकट की उम्मीद लेकर आते हैं, लेकिन कांग्रेस केवल उसी नेता को टिकट देगी, जो जीतने की स्थिति में होगा—चाहे वह किसी भी बड़े नेता का करीबी क्यों न हो।

हरक सिंह रावत ने साफ शब्दों में कहा कि अगर कोई नेता सीट निकालने की स्थिति में नहीं है, तो उसे टिकट नहीं मिलेगा, चाहे वह उनके, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल या पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह के कितने ही नजदीक क्यों न हों। उन्होंने बताया कि यही बात उन्होंने उत्तराखंड कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के साथ हुई बैठक में राहुल गांधी के सामने भी रखी थी।

उन्होंने कहा कि बैठक के दौरान उन्होंने राहुल गांधी को अवगत कराया कि कुछ नेता राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी का नाम लेकर यह दावा कर रहे हैं कि उनका टिकट तय हो चुका है। इसी संदर्भ में उन्होंने राहुल गांधी से कहा— “टिकट तो आपका भी फाइनल नहीं है।” इस पर राहुल गांधी चौंक गए, लेकिन बाद में उन्होंने इस विचार से सहमति जताई।

हरक सिंह रावत ने बताया कि उन्होंने राहुल गांधी को समझाया कि यदि पार्टी के वरिष्ठ नेता यह तय करें कि किसी सीट से चुनाव लड़ना उचित नहीं है, तो उस निर्णय को स्वीकार करना चाहिए। राहुल गांधी ने भी इस सोच का समर्थन किया।

अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर हरक सिंह रावत ने कहा कि वह पार्टी के सच्चे सिपाही हैं। पार्टी जिस सीट से चाहे उन्हें चुनाव लड़ने को कहे, वह तैयार हैं। यहां तक कि अगर पार्टी दरी बिछाने को भी कहेगी, तो वह पीछे नहीं हटेंगे। उन्हें न तो किसी पद की लालसा है और न ही टिकट की।

कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि इन बातों को साझा करने का उद्देश्य सभी कार्यकर्ताओं को सच्चाई से अवगत कराना और उन्हें एकजुट होकर आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी के लिए प्रेरित करना है।

हरक सिंह रावत ने अपने बयान की पुष्टि करते हुए कहा कि पार्टी का हर कार्यकर्ता नेतृत्व की नजर में है। टिकट का फैसला माहौल, परिस्थितियों और जनता के रुझान को देखते हुए किया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल उन्हें खुद नहीं पता कि वह कहां से चुनाव लड़ेंगे या उन्हें टिकट मिलेगा भी या नहीं।