एस जयशंकर ने उठाया यूएस वीजा का मुद्दा, रुबियो ने कहा- नियम भारत को निशाना बनाकर नहीं बनाए गए

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दिल्ली के हैदराबाद हाउस में विदेश मंत्री एस जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच बैठक हुई। एस. जयशंकर ने रविवार को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के सामने यूएस वीजा का मुद्दा उठाया और होने वाली परेशानियों से अवगत कराया। जिस पर मार्को रुबियो ने कहा कि ये नियम भारत को निशाना बनाकर नहीं बनाए गए हैं।

एस जयशंकर ने कहा कि हमारे संबंधों का आधार जन-संबंध हैं। मैंने विदेश मंत्री रुबियो को वैध यात्रियों को वीजा जारी करने में आने वाली चुनौतियों से अवगत कराया। हालांकि, हम अवैध और अनियमित आवागमन से निपटने के लिए सहयोग कर रहे हैं, लेकिन हमारी अपेक्षा है कि इससे वैध आवागमन पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए। आखिरकार यह हमारे व्यापार, प्रौद्योगिकी और अनुसंधान सहयोग के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

भारत को सबसे खास रणनीतिक साझेदार बताया

द्विपक्षीय बातचीत के दौरान जयशंकर ने जैसे ही वीजा का मुद्दा उठाया, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि 'यह पाबंदियां या कड़े नियम भारत को टारगेट करके नहीं बनाए गए हैं। यह एक ऐसी प्रणाली है जिसे वैश्विक स्तर पर लागू किया जा रहा है। लेकिन हम संक्रमण काल से गुजर रहे हैं और किसी भी संक्रमण काल की तरह, इस राह में कुछ बाधाएं तो आएंगी ही। इसके साथ ही रुबियो ने भारत को अमेरिका का सबसे खास और रणनीतिक साझेदार बताया। उन्होंने दोनों देशों के रिश्तों को लेकर चल रही अटकलों पर भी विराम लगा दिया।

भारत-अमेरिका संबंधों को बहाल करने की जरूरत नहीं- रुबियो

रुबियो ने कई क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने की संभावना भी जताई है। रुबियो ने कहा कि भारत और अमेरिका दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र हैं और यही साझा लोकतांत्रिक आधार दोनों देशों के मजबूत सहयोग की नींव है। उनके मुताबिक दोनों देशों के कई साझा हित हैं, जिन पर मिलकर काम करना स्वाभाविक और आवश्यक है। अमेरिकी विदेश मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत-अमेरिका संबंधों को बहाल करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह साझेदारी पहले से ही बेहद मजबूत और ठोस है। उन्होंने कहा कि अब लक्ष्य इस रिश्ते को और आगे ले जाने तथा नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का है.

व्यापार समझौते पर हुई बातचीत

इस बैठक में सिर्फ वीजा ही नहीं, बल्कि कई और बड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। भारत और अमेरिका के बीच जल्द से जल्द बड़े व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने पर बातचीत आगे बढ़ी। विदेश मंत्री जयशंकर ने बैठक के बाद कहा कि 'हमने पश्चिम एशिया, भारतीय उपमहाद्वीप और पूर्वी एशिया की स्थिति पर चर्चा की। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में भारत और अमेरिका के बीच हालिया सहयोग का स्वागत किया गया।

एस जयशंकर ने ईरान, यूएई और कतर से की बात, पश्चिम एशिया के हालात पर हुई चर्चा

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अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध के चलते पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने रविवार शाम को कतर और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के अपने समकक्षों के साथ टेलीफोन पर बातचीत की और क्षेत्र के बिगड़ते सुरक्षा हालातों पर चर्चा की। कतर और यूएई के नेताओं से बात करने के तुरंत बाद, भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर को ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची का फोन आया। 

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान बिन जसीम अल थानी से पश्चिम एशिया संघर्ष और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर उसके असर को लेकर रविवार को चर्चा की। विदेश मंत्री ने संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान से भी फोन पर बातचीत की।

युद्ध और तनाव पर पर चर्चा

विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस बातचीत की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री के साथ क्षेत्र में चल रहे युद्ध और तनाव पर विचार साझा किए गए। इसके बाद जयशंकर ने यूएई के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान से संपर्क किया। उन्होंने पश्चिम एशिया की उभरती स्थिति पर विस्तार से चर्चा की।

ईरान के विदेश मंत्री का आया फोन

इसी कड़ी में ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरघची ने भी डॉ. जयशंकर को फोन किया। भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोशल मीडिया पर यह बताया है कि उनके पास ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का फोन आया। दोनों नेताओं ने वेस्ट एशिया में चल रही टेंशन को लेकर लंबी बातचीत की।

ट्रंप की चेतावनी के बीच बढ़ी हलचल

ईरान के विदेश मंत्री, कतर के प्रधानमंत्री और संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्री से जयशंकर की फोन पर बातचीत ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को दी गई हालिया चेतावनी के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि होर्मुज स्ट्रेट को नौवहन के लिए फिर से नहीं खोला गया तो ईरान के बिजली संयंत्रों और पुलों को नष्ट कर दिया जाएगा।

ईरान के नेताओं से संपर्क करना काफी मुश्किल', भारतीयों की सुरक्षा को लेकर सरकार गंभीर, मिडिल ईस्ट तनाव पर बोले जयशंकर

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ईरान पर इजरायल और अमेरिका का हमला होने के बाद मिडिल ईस्ट में हालात गंभीर बने हुए हैं। इस क्षेत्र में हजारों की संख्या में भारतीय भी हैं। ऐसे में संसद के बजट सत्र में दूसरे फेज के पहले दिन पश्चिम एशिया का मुद्दा उठा। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में सदन के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने इस मुद्दे को उठाया। इस पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जवाब दिया।

प्रधानमंत्री मोदी घटनाक्रम पर रख रहे नजर

विदेश मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार नए घटनाक्रमों पर करीब से नजर रख रहे हैं। संबंधित मंत्रालय आपस में तालमेल बिठाकर काम कर रहे हैं ताकि सही कदम उठाए जा सकें। उन्होंने बताया कि यह विवाद भारत के लिए बड़ी चिंता की बात है। खाड़ी देशों में करीब एक करोड़ भारतीय रहते हैं। ईरान में भी हजारों भारतीय छात्र और कर्मचारी मौजूद हैं। यह इलाका भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी है क्योंकि यहां तेल और गैस के मुख्य सप्लायर हैं। सप्लाई चेन में रुकावट आना एक गंभीर मुद्दा है।

अब तक करीब 67,000 भारतीय नागरिक देश लौट

सदन को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि फंसे हुए भारतीयों की मदद के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने भारतीय नागरिकों की वापसी को सुगम बनाने के लिए उड़ानों को मंजूरी दे दी है और उन्हें संचालित भी किया है, जिसके तहत लगभग 67,000 भारतीय नागरिक देश लौट चुके हैं।आर्मेनिया के रास्ते भारतीयों को निकाला जा रहा। इस क्षेत्र में भारतीय एंबेसी लगातार लोगों तक जरूरी मदद पहुंचा रही है।

संवाद और कूटनीति ही एकमात्र रास्ता*

जयशंकर ने कहा, हमारी सरकार ने 20 फरवरी को एक बयान जारी कर गहरी चिंता व्यक्त की थी और सभी पक्षों से संयम बरतने का आग्रह किया था। हम अब भी मानते हैं कि तनाव को कम करने के लिए संवाद और कूटनीति का सहारा लेना चाहिए।

कूटनीति में आया क्रिकेट! जयशंकर ने जापानी विदेश मंत्री को क्यों गिफ्ट किया बैट?

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देश की राजधानी दिल्ली में भारत-जापान विदेश मंत्रियों की अहम मुलाकात हुई। भारत और जापान के बीच 18वीं भारत-जापान रणनीतिक बातचीत के दौरान कूटनीति के साथ क्रिकेट का “तड़का” लग गया। जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी भारत की यात्रा पर आए हुए हैं। जापानी विदेश मंत्री ने शुक्रवार को अपने भारतीय समकक्ष डॉ. एस जयशंकर से मुलाकात की। विदेश मंत्री एस जयशंकर और जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी ने साझा रणनीतिक मुद्दों पर चर्चा की, तो वहीं क्रिकेट के प्रति समान रुचि ने माहौल को और सहज बना दिया।

जयशंकर ने इस मुलाकात को लेकर जानकारी दी। जयशंकर ने इस मौके पर अपने जापानी समकक्ष को भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों का हस्ताक्षर किया हुआ बैट गिफ्ट किया। वहीं, जापानी विदेश मंत्री ने रिटर्न गिफ्ट के रूप में जयशंकर को जापान के नेशनल क्रिकेट टीम की जर्सी भेंट की।

क्रिकेट प्रेमी हैं जापानी विदेश मंत्री

जयशंकर ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर इस मुलाकात से जुड़ी तस्वीरें पोस्ट की। इसके साथ ही उन्होंने लिखा कि जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी का भारत में स्वागत करके बहुत खुशी हुई। उन्होंने आगे लिखा कि आज जब हम भारत और जापान रणनीतिक बातचीत कर रहे हैं, तो विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी में एक और क्रिकेट प्रेमी को पाकर और भी अधिक खुशी हुई।

दोनों विदेश मंत्रियों ने एक दूसरे को दिए खास गिफ्ट

जयशंकर ने लिखा कि खेल के प्रति हमारे साझा जुनून की भावना में, जापान की नेशनल क्रिकेट टीम की जर्सी पाकर सम्मानित महसूस कर रहा हूं। उन्होंने कहा कि मैंने उन्हें भारतीय क्रिकेट टीम की तरफ से साइन किया गया एक बैट भी गिफ्ट किया।

अनिश्चित वैश्विक हालात में साझा रणनीतिक लक्ष्यों पर फोकस

इस मुलाकात में क्रिकेट सिर्फ मजाक नहीं था, बल्कि दोस्ताना रिश्तों का प्रतीक बनकर उभरा। इसके साथ ही बातचीत का एजेंडा बेहद गंभीर और रणनीतिक रहा। जयशंकर ने साफ कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात में भारत और जापान के लिए मिलकर अपने सामरिक उद्देश्यों को पूरा करना और भी जरूरी हो गया है। उन्होंने यह भी दोहराया कि भारत, जापान के साथ अपने रिश्तों को प्राथमिकता देता है। यह बयान ऐसे समय में आया है, जब दुनिया यूक्रेन-रूस युद्ध, चीन की बढ़ती आक्रामकता और वैश्विक सप्लाई चेन संकट जैसी चुनौतियों से जूझ रही है।

रणनीतिक मंचों पर सहयोग बढ़ा

जयशंकर ने कहा कि बीते दो दशकों में भारत-जापान संबंध केवल आर्थिक साझेदारी से आगे बढ़कर व्यापक और रणनीतिक रिश्ते में बदल चुके हैं। उन्होंने बताया कि दोनों देश क्वाड, संयुक्त राष्ट्र, जी-4 समूह और जी-20 जैसे मंचों पर लगातार सहयोग कर रहे हैं। यह साझेदारी सुरक्षा, कूटनीति और वैश्विक शासन के क्षेत्रों में मजबूत होती जा रही है।

एस जयशंकर ने मार्को रुबियो से फोन पर की बात, क्या भारत-अमेरिका ट्रेड डील फाइनल?

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नेताओं के बीच ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर भी बात हुई है, जिसके बाद अनुमान लगाया जा रहा है कि ट्रेड डील को लेकर दोनों देशों के बीच जल्द ही कोई सहमति बन सकती है। ट्रेड के अलावा दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय घटनाक्रमों और स्वतंत्र और सबके लिए खुले इंडो-पैसिफिक को लेकर भी बात की है।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक्स पर पोस्ट कर बताया कि दोनों नेताओं के बीच परमाणु सहयोग, रक्षा, ऊर्जा, व्यापार पर चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि इसके अलावे भी कई मुद्दों पर संपर्क में रहने पर सहमति बनी। दोनों नेताओं की बातचीत ऐसे समय में हुई है जब भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।

यह फोन कॉल इसलिए भी अहम है क्योंकि बीते कुछ महीनों से ट्रेड डील को लेकर बातचीत अटकी हुई थी। हाई इंपोर्ट ड्यूटी, मार्केट एक्सेस और सप्लाई चेन जैसे मुद्दों पर मतभेद थे। लेकिन जयशंकर-रुबियो की इस बातचीत ने साफ कर दिया कि दोनों देश अब रुकने के मूड में नहीं हैं।

दोनों देशों ने पिछले साल फरवरी में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पदभार संभालने के कुछ ही दिनों बाद व्यापार वार्ता फिर से शुरू की थी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और ट्रंप ने द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने का लक्ष्य रखा था, लेकिन जुलाई में अमेरिका की ओर से भारतीय सामानों पर एकतरफा 25 फीसदी टैरिफ लगाने के बाद वार्ता रुक गई। इसके बाद रूसी तेल खरीदने को लेकर अगस्त 2025 अमेरिका ने भारत पर 25 फीसदी टैरिफ दंड के तौर पर लगाया। इसके साथ ही भारत पर कुल 50 फीसदी टैरिफ कर दी गई है, जो एशिया में सबसे अधिक है।

बलोच नेता ने भारत को लिखा खुला पत्र, चीन-पाकिस्तान के बढ़ते गठजोड़ पर जताई चिंता

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बलूचिस्तान को आजाद देश बनाने की लड़ाई लड़ रहे बलूच नेता मीर यार बलूच ने भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर को खुला पत्र लिखा है। मीर यार बलोच ने सोशल मीडिया एक्स पर इस लेटर को जारी करते हुए पाकिस्तान से बलूचिस्तान को आजाद कराने में भारत की मदद और ऑपरेशन सिंदूर की तारीफ करते पाक से आतंकियों के खात्मे की बात कही है। साथ ही चीन-पाकिस्तान गठजोड़ को लेकर गंभीर चिंता जाहिर की है।

मीर यार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर किया है। मीर यार बलोच ने पत्र में कहा कि वह रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान के 6 करोड़ देशभक्त नागरिकों की ओर से भारत के 140 करोड़ लोगों, संसद के दोनों सदनों, मीडिया, सिविल सोसाइटी और सभी सम्मानित नागरिकों को नववर्ष 2026 की हार्दिक बधाई देते हैं।

भारत-बलूचिस्तान संबंधों का जिक्र

पत्र में भारत और बलूचिस्तान के बीच सदियों पुराने ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, व्यापारिक, कूटनीतिक और रक्षा संबंधों का उल्लेख किया गया। मीर यार ने खुद को रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान का प्रतिनिधि बताया है। नए साल की बधाई देते हुए मीर यार ने लिखा, यह शुभ अवसर हमें उन गहरे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, वाणिज्यिक, आर्थिक, राजनयिक, रक्षा और बहुआयामी संबंधों पर जश्न मनाने का मौका देता है।भारत और बलूचिस्तान के स्थायी संबंधों का उदाहरण हिंगलाज माता मंदिर जैसे पवित्र स्थल हैं, जो हमारी साझा विरासत और आध्यात्मिक संबंधों के शाश्वत प्रतीक हैं।

ऑपरेशन सिंदूर की तारीफ

बलोच नेता ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर की तारीफ की और मोदी सरकार की साहसिक और दृढ़ कार्रवाई की सराहना की। उन्होंने लिखा, बलूचिस्तान के लोग बीते 69 वर्षों से पाकिस्तान का दमन झेल रहे हैं। अब समय आ गया है कि इस गंभीर समस्या को जड़ से उखाड़ फेंका जाए और हमारे देश की संप्रभुता सुनिश्चित की जाए।

चीन-पाकिस्तान के बढ़ते गठजोड़ पर चिंता

चिट्ठी में चीन और पाकिस्तान के बढ़ते गठजोड़ पर चिंता जताई गई है और कहा गया है कि अगर बलूचिस्तान की स्वतंत्र सेनाओं को जल्द ही मजबूत नहीं किया गया तो हो सकता है कि चीन यहां अपने सैनिक तैनात कर दे। बलूचिस्तान में चीनी सैनिकों की उपस्थिति भविष्य में भारत और बलूचिस्तान दोनों के लिए खतरा और चुनौती होगी। उन्होंने चेतावनी दी कि बीजिंग ने इस्लामाबाद के सहयोग से चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे को अपने अंतिम चरणों में पहुंचा दिया है।

खालिदा जिया के जनाजे में शामिल होने ढाका पहुंचे जयशंकर, बेटे तारिक रहमान से की मुलाकात

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बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया के जनाजे में भारत की तरफ से विदेश मंत्री एस. जयशंकर शामिल होंगे। जयशंकर आज भारत सरकार के प्रतिनिधिमंडल के साथ बांग्लादेश पहुंचे हैं। खालिदा जिया का अंतिम संस्कार बुधवार को जोहर की नमाज के बाद मानिक मियां एवेन्यू में होगा।

खालिदा जिया को संसद परिसर स्थित जिया उद्यान में उनके पति और बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान की कब्र के पास दफनाया जाएगा। इसमें देश के कई बड़े राजनीतिक नेता, पार्टी कार्यकर्ता और आम लोग शामिल होंगे। भारत की ओर से विदेश मंत्री एस. जयशंकर उनके जनाजे में शामिल होने के लिए ढाका पहुंच चुके हैं।

विदेश मंत्रालय ने इसे लेकर एक आधिकारिक बयान जारी किया है। इसमें कहा गया है कि विदेश मंत्री एस.जयशंकर भारत सरकार और भारतीय जनता की ओर से बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की अध्यक्ष खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में शामिल होंगे। इसके लिए वे 31 दिसंबर यानी आज ढाका का दौरा करेंगे।

बांग्लादेश में तीन दिन का राष्ट्रीय शोक

खालिदा जिया का निधन मंगलवार सुबह 80 साल की उम्र में हुआ था। वह पिछले करीब 20 दिनों से वेंटिलेटर पर थीं और अस्पताल में इलाज चल रहा था। उनके निधन पर बांग्लादेश सरकार ने तीन दिन के राष्ट्रीय शोक का ऐलान किया है। इस दौरान पूरे देश में सरकारी इमारतों पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा और सभी सरकारी कार्यक्रम स्थगित रहेंगे।

कौन थीं खालिदा जिया

खालिदा जिया बांग्लादेश की एक प्रभावशाली और लंबे समय तक राजनीति को दिशा देने वाली नेता थीं। वह बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की प्रमुख रहीं और देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनने का इतिहास रचा। उन्होंने तीन बार प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया- पहली बार 1991 से 1996 तक, दूसरा कार्यकाल फरवरी 1996 के बाद कुछ सप्ताह तक चला और फिर 2001 से 2006 तक। वह पूर्व राष्ट्रपति जनरल जियाउर रहमान की पत्नी थीं और उनके निधन के बाद सक्रिय राजनीति में आईं। उनके राजनीतिक जीवन में सत्ता संघर्ष, विरोध प्रदर्शनों और कई विवादों ने अहम भूमिका निभाई। बाद के वर्षों में उन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे और उन्हें सजा भी हुई। जीवन के अंतिम दौर में वह कई गंभीर बीमारियों से जूझती रहीं। कुल मिलाकर, वह बांग्लादेश की राजनीति की सबसे प्रभावशाली, मजबूत और साथ ही विवादों में घिरी रहने वाली नेताओं में से एक थीं।

भारत दौरे पर आए अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर, विदेश मंत्री जयशंकर ने की मुलाकात

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अमेरिका और भारत के रिश्तें में इन दिनों तनाव है। इस बीच अमेरिका के नए राजदूत-नामित सर्जियो गोर दिल्ली पहुंचे। विदेश मंत्री एस। जयशंकर ने उनसे मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच गर्मजोशी नजर आई। अमेरिकी दूतावास के अनुसार, राजदूत गोर का औपचारिक परिचय पत्र प्रस्तुत किया जाएगा और भारत आने की तारीख बाद में तय की जाएगी। बता दें कि कुछ दिन पहले ही अमेरिकी संसद ने भारत में राजदूत के रूप में उनकी नियुक्ति की पुष्टि की थी।

विदेश मंत्री जयशंकर ने दी बधाई

नई दिल्ली में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर से मुलाकात के बाद एक्स पर ट्वीट किया। एस जयशंकर ने लिखा, आज नई दिल्ली में अमेरिका के राजदूत-डेसिग्नेट सर्जियो गोर से मिलकर प्रसन्नता हुई। भारत-अमेरिका संबंधों और इसके वैश्विक महत्व पर चर्चा हुई। उन्हें उनकी नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं।

क्यों अहम है गोर की ये यात्रा

भारत में अगले अमेरिकी राजदूत के रूप में नियुक्ति के बाद सर्जियो गोर की यह पहली भारत यात्रा है। वो भारत में सबसे कम उम्र के अमेरिकी राजदूत हैं। अमेरिकी दूतावास ने एक बयान में कहा कि अमेरिका अपनी रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने और एक सुरक्षित, मजबूत और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए भारत के साथ काम करना जारी रखेगा। ये मुलाकात इसलिए अहम मानी जा रही क्योंकि यूएस राष्ट्रपति ट्रंप ने कुछ समय पहले ही भारत पर 50 फीसदी का टैरिफ लगाया था। जिसके बाद दोनों देशों के संबंधों में तनाव आ गया।

यूएनजीए में हुई थी जयशंकर से मुलाकात

गोर का आगमन 24 सितंबर को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र के दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात के तुरंत बाद हुआ है, जहां दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को गहरा करने पर चर्चा की थी। बैठक के बाद, अमेरिकी विदेश विभाग ने एक्स पर साझा किया, दक्षिण और मध्य एशिया के लिए अमेरिका के विशेष दूत और भारत में राजदूत नामित सर्जियो गोर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर भारत के विदेश मंत्री जयशंकर से मुलाकात की। वे अमेरिका-भारत संबंधों की सफलता को और बढ़ावा देने के लिए तत्पर हैं।

क्या सुधरने लगे हैं भारत-अमेरिका के रिश्ते? पीएम मोदी के बाद आया जयशंकर का बयान

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दोस्ती वाले बयान को लेकर पीएम मोदी के बाद अब विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बड़ा बयान दिया है। पीएम मोदी के बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी भारत-अमेरिका संबंधों पर बात की है। जयशंकर ने कहा है कि भारत और अमेरिका रिश्ते अब भी बने हुए हैं। दोनों देश लगातार बातचीत कर रहे हैं। उन्होंने कहा है, पीएम मोदी अमेरिका के साथ दोस्ती को बहुत महत्व देते हैं। पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच हमेशा अच्छे संबंध रहे हैं। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से प्रशंसा किए जाने पर आभार व्यक्त किया है।

पीएम मोदी और ट्रंप के बीच व्यक्तिगत संबंध हमेशा बेहतर-जयशंकर

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से भारत-अमेरिका संबंधों पर सकारात्मक बात कहने को लेकर प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिक्रिया पर विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा, पीएम मोदी अमेरिका के साथ हमारी साझेदारी को बहुत महत्व देते हैं। जहां तक राष्ट्रपति ट्रंप का सवाल है, पीएम मोदी के राष्ट्रपति ट्रंप के साथ हमेशा से बहुत अच्छे व्यक्तिगत संबंध रहे हैं। हालांकि, यहां मुद्दा यह है कि हम अमेरिका के साथ जुड़े हुए हैं। हमारे संबंध बने हुए हैं। हम बातचीत कर रहे हैं। इस समय मैं इससे ज्यादा कुछ नहीं कह सकता।'

भारत-अमेरिका रिश्तों की अहमियत

विदेश मंत्री के इस बयान से यह स्पष्ट होता है कि भारत अमेरिका के साथ संबंधों को सिर्फ राजनीतिक दृष्टि से नहीं बल्कि रणनीतिक और आर्थिक सहयोग की दृष्टि से भी देखता है. रक्षा, व्यापार, ऊर्जा, टेक्नोलॉजी और शिक्षा जैसे कई क्षेत्रों में भारत-अमेरिका साझेदारी पिछले कुछ वर्षों में मजबूत हुई है. विशेषकर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में दोनों देशों का सहयोग चीन की बढ़ती सक्रियता को संतुलित करने के लिए भी अहम माना जाता है.

ट्रंप ने की पीएम मोदी की तारीफ

दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप ने पीएम नरेंद्र मोदी को 'महान प्रधानमंत्री' कहा है। शुक्रवार को ओवल ऑफिस में मीडिया से बात करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप से सवाल किया गया कि क्या वे भारत के साथ संबंधों को फिर से सुधारने के लिए तैयार हैं? इसके जवाब में ट्रंप ने कहा कि मैं हमेशा मोदी का दोस्त रहूंगा, वह एक महान प्रधानमंत्री हैं, लेकिन मुझे इस समय उनके काम पसंद नहीं आ रहे हैं। हालांकि, भारत और अमेरिका के बीच एक खास रिश्ता है। चिंता की कोई बात नहीं है। हमारे बीच ऐसे पल आते जाते हैं।

ट्रंप के बयान पर क्या बोले पीएम मोदी?

ट्रंप के बयान के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट किया। इसमें ट्रंप के बयान वाले एएनआई के पोस्ट को साझा कर पीएम मोदी ने लिखा, 'राष्ट्रपति ट्रंप की भावनाओं और हमारे संबंधों के सकारात्मक मूल्यांकन की हम तहे दिल से सराहना करते हैं। हम उनका पूर्ण समर्थन करते हैं। भारत और अमेरिका के बीच बहुत ही सकारात्मक, दूरदर्शी, व्यापक, वैश्विक और रणनीतिक साझेदारी है।'

भारत को निशाना बनाना गलत...’ यूक्रेन युद्ध को लेकर बोले जयशंकर

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विदेश मंत्री एस जयशंकर ने फिनलैंड के विदेश मंत्री से फोन पर बातचीत में कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर भारत को गलत तरीके से निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। भारत हमेशा शांति और बातचीत की वकालत करता रहा है। विदेश मंत्री की इस टिप्पणी को संयुक्त राज्य अमेरिका के उन आरोपों के संदर्भ में देखा जा रहा है, जिसमें कहा गया कि भारत रियायती मूल्य पर रूस से कच्चा तेल खरीदकर यूक्रेन युद्ध में मॉस्को की युद्ध मशीन की सहायता कर रहा है।

एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस संबंध में एक पोस्ट किया। उन्होंने एक्स पर लिखा, फिनलैंड के विदेश मंत्री से फोन पर बात हुई। हमने यूक्रेन जंग और इसके असर पर बात की। इस मामले में भारत को गलत तरीके से निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। हम बातचीत और डिप्लोमेसी के पक्ष में हैं।

यूरोप में भारत की बढ़ती अहमियत

फिनलैंड की विदेश मंत्री वाल्तोनेन के साथ यह बातचीत ऐसे समय हुई है जब यूरोप भारत की भूमिका को लेकर काफी उत्सुक है। यूरोपीय संघ के कई देशों ने साफ कहा है कि उन्हें भारत से ऊर्जा, व्यापार और सुरक्षा के मामलों में संतुलित सहयोग चाहिए। जयशंकर ने अप्रत्यक्ष रूप से कहा कि भारत को किसी के राजनीतिक नैरेटिव का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए और हमारी प्राथमिकता हमेशा शांति स्थापना ही रहेगी।

अमेरिका का भारत पर गंभीर आरोप

दरअसल अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प भारत पर रूसी तेल खरीद की वजह से 25% एक्स्ट्रा टैरिफ लगाया। इसके कुछ ही दिनों के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर अतिरिक्त 25 परसेंट टैरिफ लगाने की घोषणा की। जिसके बाद अमेरिका की ओर से भारत पर लगने वाला अतिरिक्त टैरिफ बढ़कर 50 परसेंट हो गया। ट्रंप का कहना है कि भारत रूस से तेल खरीद रहा है, जिस वजह से पुतिन को यूक्रेन जंग जारी रखने में मदद मिल रही है

ट्रंप के सलाहकार का बेतुका बयान

वहीं, अमेरिका के व्हाइट हाउस के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने इस सप्ताह कहा था कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भारतीय वस्तुओं पर लगाया गया 50 परसेंट टैरिफ सिर्फ भारत के अनुचित व्यापार के बारे में नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य मॉस्को की युद्ध मशीन को नई दिल्ली की ओर से दी गई वित्तीय जीवन रेखा को काटना भी है। हालांकि, भारत पहले ही अमेरिका की ओर से लगाए जा रहे इन आरोपों को खारिज कर चुका है। संयुक्त राज्य अमेरिका ने आश्चर्यजनक रूप से चीन की आलोचना नहीं की है, जो रूस से तेल क सबसे बड़ा आयातक है।

एस जयशंकर ने उठाया यूएस वीजा का मुद्दा, रुबियो ने कहा- नियम भारत को निशाना बनाकर नहीं बनाए गए

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दिल्ली के हैदराबाद हाउस में विदेश मंत्री एस जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच बैठक हुई। एस. जयशंकर ने रविवार को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के सामने यूएस वीजा का मुद्दा उठाया और होने वाली परेशानियों से अवगत कराया। जिस पर मार्को रुबियो ने कहा कि ये नियम भारत को निशाना बनाकर नहीं बनाए गए हैं।

एस जयशंकर ने कहा कि हमारे संबंधों का आधार जन-संबंध हैं। मैंने विदेश मंत्री रुबियो को वैध यात्रियों को वीजा जारी करने में आने वाली चुनौतियों से अवगत कराया। हालांकि, हम अवैध और अनियमित आवागमन से निपटने के लिए सहयोग कर रहे हैं, लेकिन हमारी अपेक्षा है कि इससे वैध आवागमन पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए। आखिरकार यह हमारे व्यापार, प्रौद्योगिकी और अनुसंधान सहयोग के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

भारत को सबसे खास रणनीतिक साझेदार बताया

द्विपक्षीय बातचीत के दौरान जयशंकर ने जैसे ही वीजा का मुद्दा उठाया, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि 'यह पाबंदियां या कड़े नियम भारत को टारगेट करके नहीं बनाए गए हैं। यह एक ऐसी प्रणाली है जिसे वैश्विक स्तर पर लागू किया जा रहा है। लेकिन हम संक्रमण काल से गुजर रहे हैं और किसी भी संक्रमण काल की तरह, इस राह में कुछ बाधाएं तो आएंगी ही। इसके साथ ही रुबियो ने भारत को अमेरिका का सबसे खास और रणनीतिक साझेदार बताया। उन्होंने दोनों देशों के रिश्तों को लेकर चल रही अटकलों पर भी विराम लगा दिया।

भारत-अमेरिका संबंधों को बहाल करने की जरूरत नहीं- रुबियो

रुबियो ने कई क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने की संभावना भी जताई है। रुबियो ने कहा कि भारत और अमेरिका दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र हैं और यही साझा लोकतांत्रिक आधार दोनों देशों के मजबूत सहयोग की नींव है। उनके मुताबिक दोनों देशों के कई साझा हित हैं, जिन पर मिलकर काम करना स्वाभाविक और आवश्यक है। अमेरिकी विदेश मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत-अमेरिका संबंधों को बहाल करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह साझेदारी पहले से ही बेहद मजबूत और ठोस है। उन्होंने कहा कि अब लक्ष्य इस रिश्ते को और आगे ले जाने तथा नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का है.

व्यापार समझौते पर हुई बातचीत

इस बैठक में सिर्फ वीजा ही नहीं, बल्कि कई और बड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। भारत और अमेरिका के बीच जल्द से जल्द बड़े व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने पर बातचीत आगे बढ़ी। विदेश मंत्री जयशंकर ने बैठक के बाद कहा कि 'हमने पश्चिम एशिया, भारतीय उपमहाद्वीप और पूर्वी एशिया की स्थिति पर चर्चा की। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में भारत और अमेरिका के बीच हालिया सहयोग का स्वागत किया गया।

एस जयशंकर ने ईरान, यूएई और कतर से की बात, पश्चिम एशिया के हालात पर हुई चर्चा

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अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध के चलते पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने रविवार शाम को कतर और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के अपने समकक्षों के साथ टेलीफोन पर बातचीत की और क्षेत्र के बिगड़ते सुरक्षा हालातों पर चर्चा की। कतर और यूएई के नेताओं से बात करने के तुरंत बाद, भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर को ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची का फोन आया। 

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान बिन जसीम अल थानी से पश्चिम एशिया संघर्ष और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर उसके असर को लेकर रविवार को चर्चा की। विदेश मंत्री ने संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान से भी फोन पर बातचीत की।

युद्ध और तनाव पर पर चर्चा

विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस बातचीत की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री के साथ क्षेत्र में चल रहे युद्ध और तनाव पर विचार साझा किए गए। इसके बाद जयशंकर ने यूएई के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान से संपर्क किया। उन्होंने पश्चिम एशिया की उभरती स्थिति पर विस्तार से चर्चा की।

ईरान के विदेश मंत्री का आया फोन

इसी कड़ी में ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरघची ने भी डॉ. जयशंकर को फोन किया। भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोशल मीडिया पर यह बताया है कि उनके पास ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का फोन आया। दोनों नेताओं ने वेस्ट एशिया में चल रही टेंशन को लेकर लंबी बातचीत की।

ट्रंप की चेतावनी के बीच बढ़ी हलचल

ईरान के विदेश मंत्री, कतर के प्रधानमंत्री और संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्री से जयशंकर की फोन पर बातचीत ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को दी गई हालिया चेतावनी के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि होर्मुज स्ट्रेट को नौवहन के लिए फिर से नहीं खोला गया तो ईरान के बिजली संयंत्रों और पुलों को नष्ट कर दिया जाएगा।

ईरान के नेताओं से संपर्क करना काफी मुश्किल', भारतीयों की सुरक्षा को लेकर सरकार गंभीर, मिडिल ईस्ट तनाव पर बोले जयशंकर

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ईरान पर इजरायल और अमेरिका का हमला होने के बाद मिडिल ईस्ट में हालात गंभीर बने हुए हैं। इस क्षेत्र में हजारों की संख्या में भारतीय भी हैं। ऐसे में संसद के बजट सत्र में दूसरे फेज के पहले दिन पश्चिम एशिया का मुद्दा उठा। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में सदन के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने इस मुद्दे को उठाया। इस पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जवाब दिया।

प्रधानमंत्री मोदी घटनाक्रम पर रख रहे नजर

विदेश मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार नए घटनाक्रमों पर करीब से नजर रख रहे हैं। संबंधित मंत्रालय आपस में तालमेल बिठाकर काम कर रहे हैं ताकि सही कदम उठाए जा सकें। उन्होंने बताया कि यह विवाद भारत के लिए बड़ी चिंता की बात है। खाड़ी देशों में करीब एक करोड़ भारतीय रहते हैं। ईरान में भी हजारों भारतीय छात्र और कर्मचारी मौजूद हैं। यह इलाका भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी है क्योंकि यहां तेल और गैस के मुख्य सप्लायर हैं। सप्लाई चेन में रुकावट आना एक गंभीर मुद्दा है।

अब तक करीब 67,000 भारतीय नागरिक देश लौट

सदन को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि फंसे हुए भारतीयों की मदद के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने भारतीय नागरिकों की वापसी को सुगम बनाने के लिए उड़ानों को मंजूरी दे दी है और उन्हें संचालित भी किया है, जिसके तहत लगभग 67,000 भारतीय नागरिक देश लौट चुके हैं।आर्मेनिया के रास्ते भारतीयों को निकाला जा रहा। इस क्षेत्र में भारतीय एंबेसी लगातार लोगों तक जरूरी मदद पहुंचा रही है।

संवाद और कूटनीति ही एकमात्र रास्ता*

जयशंकर ने कहा, हमारी सरकार ने 20 फरवरी को एक बयान जारी कर गहरी चिंता व्यक्त की थी और सभी पक्षों से संयम बरतने का आग्रह किया था। हम अब भी मानते हैं कि तनाव को कम करने के लिए संवाद और कूटनीति का सहारा लेना चाहिए।

कूटनीति में आया क्रिकेट! जयशंकर ने जापानी विदेश मंत्री को क्यों गिफ्ट किया बैट?

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देश की राजधानी दिल्ली में भारत-जापान विदेश मंत्रियों की अहम मुलाकात हुई। भारत और जापान के बीच 18वीं भारत-जापान रणनीतिक बातचीत के दौरान कूटनीति के साथ क्रिकेट का “तड़का” लग गया। जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी भारत की यात्रा पर आए हुए हैं। जापानी विदेश मंत्री ने शुक्रवार को अपने भारतीय समकक्ष डॉ. एस जयशंकर से मुलाकात की। विदेश मंत्री एस जयशंकर और जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी ने साझा रणनीतिक मुद्दों पर चर्चा की, तो वहीं क्रिकेट के प्रति समान रुचि ने माहौल को और सहज बना दिया।

जयशंकर ने इस मुलाकात को लेकर जानकारी दी। जयशंकर ने इस मौके पर अपने जापानी समकक्ष को भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों का हस्ताक्षर किया हुआ बैट गिफ्ट किया। वहीं, जापानी विदेश मंत्री ने रिटर्न गिफ्ट के रूप में जयशंकर को जापान के नेशनल क्रिकेट टीम की जर्सी भेंट की।

क्रिकेट प्रेमी हैं जापानी विदेश मंत्री

जयशंकर ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर इस मुलाकात से जुड़ी तस्वीरें पोस्ट की। इसके साथ ही उन्होंने लिखा कि जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी का भारत में स्वागत करके बहुत खुशी हुई। उन्होंने आगे लिखा कि आज जब हम भारत और जापान रणनीतिक बातचीत कर रहे हैं, तो विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी में एक और क्रिकेट प्रेमी को पाकर और भी अधिक खुशी हुई।

दोनों विदेश मंत्रियों ने एक दूसरे को दिए खास गिफ्ट

जयशंकर ने लिखा कि खेल के प्रति हमारे साझा जुनून की भावना में, जापान की नेशनल क्रिकेट टीम की जर्सी पाकर सम्मानित महसूस कर रहा हूं। उन्होंने कहा कि मैंने उन्हें भारतीय क्रिकेट टीम की तरफ से साइन किया गया एक बैट भी गिफ्ट किया।

अनिश्चित वैश्विक हालात में साझा रणनीतिक लक्ष्यों पर फोकस

इस मुलाकात में क्रिकेट सिर्फ मजाक नहीं था, बल्कि दोस्ताना रिश्तों का प्रतीक बनकर उभरा। इसके साथ ही बातचीत का एजेंडा बेहद गंभीर और रणनीतिक रहा। जयशंकर ने साफ कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात में भारत और जापान के लिए मिलकर अपने सामरिक उद्देश्यों को पूरा करना और भी जरूरी हो गया है। उन्होंने यह भी दोहराया कि भारत, जापान के साथ अपने रिश्तों को प्राथमिकता देता है। यह बयान ऐसे समय में आया है, जब दुनिया यूक्रेन-रूस युद्ध, चीन की बढ़ती आक्रामकता और वैश्विक सप्लाई चेन संकट जैसी चुनौतियों से जूझ रही है।

रणनीतिक मंचों पर सहयोग बढ़ा

जयशंकर ने कहा कि बीते दो दशकों में भारत-जापान संबंध केवल आर्थिक साझेदारी से आगे बढ़कर व्यापक और रणनीतिक रिश्ते में बदल चुके हैं। उन्होंने बताया कि दोनों देश क्वाड, संयुक्त राष्ट्र, जी-4 समूह और जी-20 जैसे मंचों पर लगातार सहयोग कर रहे हैं। यह साझेदारी सुरक्षा, कूटनीति और वैश्विक शासन के क्षेत्रों में मजबूत होती जा रही है।

एस जयशंकर ने मार्को रुबियो से फोन पर की बात, क्या भारत-अमेरिका ट्रेड डील फाइनल?

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नेताओं के बीच ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर भी बात हुई है, जिसके बाद अनुमान लगाया जा रहा है कि ट्रेड डील को लेकर दोनों देशों के बीच जल्द ही कोई सहमति बन सकती है। ट्रेड के अलावा दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय घटनाक्रमों और स्वतंत्र और सबके लिए खुले इंडो-पैसिफिक को लेकर भी बात की है।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक्स पर पोस्ट कर बताया कि दोनों नेताओं के बीच परमाणु सहयोग, रक्षा, ऊर्जा, व्यापार पर चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि इसके अलावे भी कई मुद्दों पर संपर्क में रहने पर सहमति बनी। दोनों नेताओं की बातचीत ऐसे समय में हुई है जब भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।

यह फोन कॉल इसलिए भी अहम है क्योंकि बीते कुछ महीनों से ट्रेड डील को लेकर बातचीत अटकी हुई थी। हाई इंपोर्ट ड्यूटी, मार्केट एक्सेस और सप्लाई चेन जैसे मुद्दों पर मतभेद थे। लेकिन जयशंकर-रुबियो की इस बातचीत ने साफ कर दिया कि दोनों देश अब रुकने के मूड में नहीं हैं।

दोनों देशों ने पिछले साल फरवरी में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पदभार संभालने के कुछ ही दिनों बाद व्यापार वार्ता फिर से शुरू की थी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और ट्रंप ने द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने का लक्ष्य रखा था, लेकिन जुलाई में अमेरिका की ओर से भारतीय सामानों पर एकतरफा 25 फीसदी टैरिफ लगाने के बाद वार्ता रुक गई। इसके बाद रूसी तेल खरीदने को लेकर अगस्त 2025 अमेरिका ने भारत पर 25 फीसदी टैरिफ दंड के तौर पर लगाया। इसके साथ ही भारत पर कुल 50 फीसदी टैरिफ कर दी गई है, जो एशिया में सबसे अधिक है।

बलोच नेता ने भारत को लिखा खुला पत्र, चीन-पाकिस्तान के बढ़ते गठजोड़ पर जताई चिंता

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बलूचिस्तान को आजाद देश बनाने की लड़ाई लड़ रहे बलूच नेता मीर यार बलूच ने भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर को खुला पत्र लिखा है। मीर यार बलोच ने सोशल मीडिया एक्स पर इस लेटर को जारी करते हुए पाकिस्तान से बलूचिस्तान को आजाद कराने में भारत की मदद और ऑपरेशन सिंदूर की तारीफ करते पाक से आतंकियों के खात्मे की बात कही है। साथ ही चीन-पाकिस्तान गठजोड़ को लेकर गंभीर चिंता जाहिर की है।

मीर यार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर किया है। मीर यार बलोच ने पत्र में कहा कि वह रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान के 6 करोड़ देशभक्त नागरिकों की ओर से भारत के 140 करोड़ लोगों, संसद के दोनों सदनों, मीडिया, सिविल सोसाइटी और सभी सम्मानित नागरिकों को नववर्ष 2026 की हार्दिक बधाई देते हैं।

भारत-बलूचिस्तान संबंधों का जिक्र

पत्र में भारत और बलूचिस्तान के बीच सदियों पुराने ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, व्यापारिक, कूटनीतिक और रक्षा संबंधों का उल्लेख किया गया। मीर यार ने खुद को रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान का प्रतिनिधि बताया है। नए साल की बधाई देते हुए मीर यार ने लिखा, यह शुभ अवसर हमें उन गहरे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, वाणिज्यिक, आर्थिक, राजनयिक, रक्षा और बहुआयामी संबंधों पर जश्न मनाने का मौका देता है।भारत और बलूचिस्तान के स्थायी संबंधों का उदाहरण हिंगलाज माता मंदिर जैसे पवित्र स्थल हैं, जो हमारी साझा विरासत और आध्यात्मिक संबंधों के शाश्वत प्रतीक हैं।

ऑपरेशन सिंदूर की तारीफ

बलोच नेता ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर की तारीफ की और मोदी सरकार की साहसिक और दृढ़ कार्रवाई की सराहना की। उन्होंने लिखा, बलूचिस्तान के लोग बीते 69 वर्षों से पाकिस्तान का दमन झेल रहे हैं। अब समय आ गया है कि इस गंभीर समस्या को जड़ से उखाड़ फेंका जाए और हमारे देश की संप्रभुता सुनिश्चित की जाए।

चीन-पाकिस्तान के बढ़ते गठजोड़ पर चिंता

चिट्ठी में चीन और पाकिस्तान के बढ़ते गठजोड़ पर चिंता जताई गई है और कहा गया है कि अगर बलूचिस्तान की स्वतंत्र सेनाओं को जल्द ही मजबूत नहीं किया गया तो हो सकता है कि चीन यहां अपने सैनिक तैनात कर दे। बलूचिस्तान में चीनी सैनिकों की उपस्थिति भविष्य में भारत और बलूचिस्तान दोनों के लिए खतरा और चुनौती होगी। उन्होंने चेतावनी दी कि बीजिंग ने इस्लामाबाद के सहयोग से चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे को अपने अंतिम चरणों में पहुंचा दिया है।

खालिदा जिया के जनाजे में शामिल होने ढाका पहुंचे जयशंकर, बेटे तारिक रहमान से की मुलाकात

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बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया के जनाजे में भारत की तरफ से विदेश मंत्री एस. जयशंकर शामिल होंगे। जयशंकर आज भारत सरकार के प्रतिनिधिमंडल के साथ बांग्लादेश पहुंचे हैं। खालिदा जिया का अंतिम संस्कार बुधवार को जोहर की नमाज के बाद मानिक मियां एवेन्यू में होगा।

खालिदा जिया को संसद परिसर स्थित जिया उद्यान में उनके पति और बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान की कब्र के पास दफनाया जाएगा। इसमें देश के कई बड़े राजनीतिक नेता, पार्टी कार्यकर्ता और आम लोग शामिल होंगे। भारत की ओर से विदेश मंत्री एस. जयशंकर उनके जनाजे में शामिल होने के लिए ढाका पहुंच चुके हैं।

विदेश मंत्रालय ने इसे लेकर एक आधिकारिक बयान जारी किया है। इसमें कहा गया है कि विदेश मंत्री एस.जयशंकर भारत सरकार और भारतीय जनता की ओर से बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की अध्यक्ष खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में शामिल होंगे। इसके लिए वे 31 दिसंबर यानी आज ढाका का दौरा करेंगे।

बांग्लादेश में तीन दिन का राष्ट्रीय शोक

खालिदा जिया का निधन मंगलवार सुबह 80 साल की उम्र में हुआ था। वह पिछले करीब 20 दिनों से वेंटिलेटर पर थीं और अस्पताल में इलाज चल रहा था। उनके निधन पर बांग्लादेश सरकार ने तीन दिन के राष्ट्रीय शोक का ऐलान किया है। इस दौरान पूरे देश में सरकारी इमारतों पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा और सभी सरकारी कार्यक्रम स्थगित रहेंगे।

कौन थीं खालिदा जिया

खालिदा जिया बांग्लादेश की एक प्रभावशाली और लंबे समय तक राजनीति को दिशा देने वाली नेता थीं। वह बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की प्रमुख रहीं और देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनने का इतिहास रचा। उन्होंने तीन बार प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया- पहली बार 1991 से 1996 तक, दूसरा कार्यकाल फरवरी 1996 के बाद कुछ सप्ताह तक चला और फिर 2001 से 2006 तक। वह पूर्व राष्ट्रपति जनरल जियाउर रहमान की पत्नी थीं और उनके निधन के बाद सक्रिय राजनीति में आईं। उनके राजनीतिक जीवन में सत्ता संघर्ष, विरोध प्रदर्शनों और कई विवादों ने अहम भूमिका निभाई। बाद के वर्षों में उन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे और उन्हें सजा भी हुई। जीवन के अंतिम दौर में वह कई गंभीर बीमारियों से जूझती रहीं। कुल मिलाकर, वह बांग्लादेश की राजनीति की सबसे प्रभावशाली, मजबूत और साथ ही विवादों में घिरी रहने वाली नेताओं में से एक थीं।

भारत दौरे पर आए अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर, विदेश मंत्री जयशंकर ने की मुलाकात

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अमेरिका और भारत के रिश्तें में इन दिनों तनाव है। इस बीच अमेरिका के नए राजदूत-नामित सर्जियो गोर दिल्ली पहुंचे। विदेश मंत्री एस। जयशंकर ने उनसे मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच गर्मजोशी नजर आई। अमेरिकी दूतावास के अनुसार, राजदूत गोर का औपचारिक परिचय पत्र प्रस्तुत किया जाएगा और भारत आने की तारीख बाद में तय की जाएगी। बता दें कि कुछ दिन पहले ही अमेरिकी संसद ने भारत में राजदूत के रूप में उनकी नियुक्ति की पुष्टि की थी।

विदेश मंत्री जयशंकर ने दी बधाई

नई दिल्ली में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर से मुलाकात के बाद एक्स पर ट्वीट किया। एस जयशंकर ने लिखा, आज नई दिल्ली में अमेरिका के राजदूत-डेसिग्नेट सर्जियो गोर से मिलकर प्रसन्नता हुई। भारत-अमेरिका संबंधों और इसके वैश्विक महत्व पर चर्चा हुई। उन्हें उनकी नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं।

क्यों अहम है गोर की ये यात्रा

भारत में अगले अमेरिकी राजदूत के रूप में नियुक्ति के बाद सर्जियो गोर की यह पहली भारत यात्रा है। वो भारत में सबसे कम उम्र के अमेरिकी राजदूत हैं। अमेरिकी दूतावास ने एक बयान में कहा कि अमेरिका अपनी रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने और एक सुरक्षित, मजबूत और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए भारत के साथ काम करना जारी रखेगा। ये मुलाकात इसलिए अहम मानी जा रही क्योंकि यूएस राष्ट्रपति ट्रंप ने कुछ समय पहले ही भारत पर 50 फीसदी का टैरिफ लगाया था। जिसके बाद दोनों देशों के संबंधों में तनाव आ गया।

यूएनजीए में हुई थी जयशंकर से मुलाकात

गोर का आगमन 24 सितंबर को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र के दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात के तुरंत बाद हुआ है, जहां दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को गहरा करने पर चर्चा की थी। बैठक के बाद, अमेरिकी विदेश विभाग ने एक्स पर साझा किया, दक्षिण और मध्य एशिया के लिए अमेरिका के विशेष दूत और भारत में राजदूत नामित सर्जियो गोर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर भारत के विदेश मंत्री जयशंकर से मुलाकात की। वे अमेरिका-भारत संबंधों की सफलता को और बढ़ावा देने के लिए तत्पर हैं।

क्या सुधरने लगे हैं भारत-अमेरिका के रिश्ते? पीएम मोदी के बाद आया जयशंकर का बयान

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दोस्ती वाले बयान को लेकर पीएम मोदी के बाद अब विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बड़ा बयान दिया है। पीएम मोदी के बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी भारत-अमेरिका संबंधों पर बात की है। जयशंकर ने कहा है कि भारत और अमेरिका रिश्ते अब भी बने हुए हैं। दोनों देश लगातार बातचीत कर रहे हैं। उन्होंने कहा है, पीएम मोदी अमेरिका के साथ दोस्ती को बहुत महत्व देते हैं। पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच हमेशा अच्छे संबंध रहे हैं। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से प्रशंसा किए जाने पर आभार व्यक्त किया है।

पीएम मोदी और ट्रंप के बीच व्यक्तिगत संबंध हमेशा बेहतर-जयशंकर

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से भारत-अमेरिका संबंधों पर सकारात्मक बात कहने को लेकर प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिक्रिया पर विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा, पीएम मोदी अमेरिका के साथ हमारी साझेदारी को बहुत महत्व देते हैं। जहां तक राष्ट्रपति ट्रंप का सवाल है, पीएम मोदी के राष्ट्रपति ट्रंप के साथ हमेशा से बहुत अच्छे व्यक्तिगत संबंध रहे हैं। हालांकि, यहां मुद्दा यह है कि हम अमेरिका के साथ जुड़े हुए हैं। हमारे संबंध बने हुए हैं। हम बातचीत कर रहे हैं। इस समय मैं इससे ज्यादा कुछ नहीं कह सकता।'

भारत-अमेरिका रिश्तों की अहमियत

विदेश मंत्री के इस बयान से यह स्पष्ट होता है कि भारत अमेरिका के साथ संबंधों को सिर्फ राजनीतिक दृष्टि से नहीं बल्कि रणनीतिक और आर्थिक सहयोग की दृष्टि से भी देखता है. रक्षा, व्यापार, ऊर्जा, टेक्नोलॉजी और शिक्षा जैसे कई क्षेत्रों में भारत-अमेरिका साझेदारी पिछले कुछ वर्षों में मजबूत हुई है. विशेषकर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में दोनों देशों का सहयोग चीन की बढ़ती सक्रियता को संतुलित करने के लिए भी अहम माना जाता है.

ट्रंप ने की पीएम मोदी की तारीफ

दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप ने पीएम नरेंद्र मोदी को 'महान प्रधानमंत्री' कहा है। शुक्रवार को ओवल ऑफिस में मीडिया से बात करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप से सवाल किया गया कि क्या वे भारत के साथ संबंधों को फिर से सुधारने के लिए तैयार हैं? इसके जवाब में ट्रंप ने कहा कि मैं हमेशा मोदी का दोस्त रहूंगा, वह एक महान प्रधानमंत्री हैं, लेकिन मुझे इस समय उनके काम पसंद नहीं आ रहे हैं। हालांकि, भारत और अमेरिका के बीच एक खास रिश्ता है। चिंता की कोई बात नहीं है। हमारे बीच ऐसे पल आते जाते हैं।

ट्रंप के बयान पर क्या बोले पीएम मोदी?

ट्रंप के बयान के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट किया। इसमें ट्रंप के बयान वाले एएनआई के पोस्ट को साझा कर पीएम मोदी ने लिखा, 'राष्ट्रपति ट्रंप की भावनाओं और हमारे संबंधों के सकारात्मक मूल्यांकन की हम तहे दिल से सराहना करते हैं। हम उनका पूर्ण समर्थन करते हैं। भारत और अमेरिका के बीच बहुत ही सकारात्मक, दूरदर्शी, व्यापक, वैश्विक और रणनीतिक साझेदारी है।'

भारत को निशाना बनाना गलत...’ यूक्रेन युद्ध को लेकर बोले जयशंकर

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विदेश मंत्री एस जयशंकर ने फिनलैंड के विदेश मंत्री से फोन पर बातचीत में कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर भारत को गलत तरीके से निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। भारत हमेशा शांति और बातचीत की वकालत करता रहा है। विदेश मंत्री की इस टिप्पणी को संयुक्त राज्य अमेरिका के उन आरोपों के संदर्भ में देखा जा रहा है, जिसमें कहा गया कि भारत रियायती मूल्य पर रूस से कच्चा तेल खरीदकर यूक्रेन युद्ध में मॉस्को की युद्ध मशीन की सहायता कर रहा है।

एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस संबंध में एक पोस्ट किया। उन्होंने एक्स पर लिखा, फिनलैंड के विदेश मंत्री से फोन पर बात हुई। हमने यूक्रेन जंग और इसके असर पर बात की। इस मामले में भारत को गलत तरीके से निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। हम बातचीत और डिप्लोमेसी के पक्ष में हैं।

यूरोप में भारत की बढ़ती अहमियत

फिनलैंड की विदेश मंत्री वाल्तोनेन के साथ यह बातचीत ऐसे समय हुई है जब यूरोप भारत की भूमिका को लेकर काफी उत्सुक है। यूरोपीय संघ के कई देशों ने साफ कहा है कि उन्हें भारत से ऊर्जा, व्यापार और सुरक्षा के मामलों में संतुलित सहयोग चाहिए। जयशंकर ने अप्रत्यक्ष रूप से कहा कि भारत को किसी के राजनीतिक नैरेटिव का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए और हमारी प्राथमिकता हमेशा शांति स्थापना ही रहेगी।

अमेरिका का भारत पर गंभीर आरोप

दरअसल अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प भारत पर रूसी तेल खरीद की वजह से 25% एक्स्ट्रा टैरिफ लगाया। इसके कुछ ही दिनों के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर अतिरिक्त 25 परसेंट टैरिफ लगाने की घोषणा की। जिसके बाद अमेरिका की ओर से भारत पर लगने वाला अतिरिक्त टैरिफ बढ़कर 50 परसेंट हो गया। ट्रंप का कहना है कि भारत रूस से तेल खरीद रहा है, जिस वजह से पुतिन को यूक्रेन जंग जारी रखने में मदद मिल रही है

ट्रंप के सलाहकार का बेतुका बयान

वहीं, अमेरिका के व्हाइट हाउस के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने इस सप्ताह कहा था कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भारतीय वस्तुओं पर लगाया गया 50 परसेंट टैरिफ सिर्फ भारत के अनुचित व्यापार के बारे में नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य मॉस्को की युद्ध मशीन को नई दिल्ली की ओर से दी गई वित्तीय जीवन रेखा को काटना भी है। हालांकि, भारत पहले ही अमेरिका की ओर से लगाए जा रहे इन आरोपों को खारिज कर चुका है। संयुक्त राज्य अमेरिका ने आश्चर्यजनक रूप से चीन की आलोचना नहीं की है, जो रूस से तेल क सबसे बड़ा आयातक है।