योगी सरकार ने नौ लाख 12 हजार 696 करोड़ से अधिक का बजट पेश किया

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार के वित्तमंत्री सुरेश खन्ना ने बुधवार को विधानसभा में 09 लाख 12 हजार करोड़ 696 करोड़ 35 लाख रुपये का बजट पेश किया। वित्तीय वर्ष 2025-26 की तुलना में लगभग 12.9 प्रतिशत अधिक है। इस बजट में पूंजीगत परिचय 19.5 प्रतिशत है। शिक्षा तथा चिकित्सा के लिए आवंटन कुल बजट का क्रमशः 12.4 प्रतिशत एवं 6 प्रतिशत है। कृषि और सम्बद्ध सेवाओं के लिए आवंटन कुल बजट का नौ फीसदी है। बजट में 43 हजार 565 करोड़ 33 लाख रुपये की नई योजनाएं सम्मिलित की गईं हैं।

वित्त मंत्री ने सरकार की बड़ाई में पढ़ी शायरी

सितारा बनकर आसमां में वही चमकते हैं.... वित्त मंत्री ने सरकार की बड़ाई में शायरी पढ़ी। इस पर सदस्यों ने ताली बजातर स्वागत किया।वित्त मंत्री ने कहा कि योगी सरकार में हर वर्ग का विकास हुआ।  हमारी सरकार द्वारा हरित और स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों के विकास पर कार्य किया जा रहा है। प्रदेश में अब तक कुल 2815 मेगावॉट की सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित की जा चुकी हैं।वर्ष 2016-2017 की 5,878 मेगावॉट ताप विद्युत उत्पादन क्षमता के सापेक्ष वर्तमान वित्तीय वर्ष 2025-2026 (माह दिसम्बर, 2025 तक) में 55.16 प्रतिशत बढ़ोतरी करते हुए 9120 मेगावॉट ताप विद्युत उत्पादन क्षमता प्राप्त की गई।फसल सघनता जो 2016-2017 में 162.7 प्रतिशत थी, वर्ष 2024-2025 में 193.7 प्रतिशत हो चुकी है।वर्ष 2016-2017 में सिंचित क्षेत्र 2.16 करोड़ हेक्टेयर के मुकाबले प्रदेश में वर्ष 2024-2025 में 60 लाख हेक्टेयर अधिक अर्थात 2.76 लाख हेक्टेयर हो चुका है।देश, कृषि उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य है।

गेहूं, धान, गन्ना, आलू, केला, आम, अमरूद, आंवला और मेंथा उत्पादन में राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का योगदान सर्वाधिक है।सरकार की अवस्थापना-प्रधान विकास के प्रति प्रतिबद्धता का यह प्रमाण है कि राज्य ने नीति आयोग द्वारा माह जनवरी, 2026 में जारी एक्सपोर्ट प्रिपेयर्डनेस इंडेक्स,2024 में देश में लैंड-लॉक्ड प्रदेशों में प्रथम स्थान प्राप्त किया है।वर्ष 2025-2026 में प्रति व्यक्ति आय 1,20,000 रुपये होने का अनुमान है। प्रदेश में हम लगभग 06 करोड़ लोगों को बहुआयामी गरीबी से ऊपर उठाने में सफल हुए हैं। बेरोजगारी की दर 2.24 प्रतिशत रह गई है।वर्ष 2024-2025 (त्वरित अनुमान) में प्रदेश की जीएसडीपी 30.25 लाख करोड़ रुपये आंकलित हुई है, जो गत वर्ष की तुलना में 13.4 प्रतिशत की वृद्धि परिलक्षित करता है। प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय 1,09,844 रूपये आकलित हुई है, जो वर्ष 2016-2017 में प्रति व्यक्ति आय 54,564 रुपये के दोगुने से अधिक है।

हमारी सरकार के पिछले और वर्तमान कार्यकाल में प्रदेश का सर्वांगीण विकास हुआ है, चाहे कानून व्यवस्था का सुदृढ़ीकरण हो, अवस्थापना सुमिशन शक्ति के तहत वाहनों की खरीद के लिए 25 करोड़, चिकित्सा शिक्षा के लिए 14297 करोड़ प्रस्तावित हैं। 14 नए मेडिकल कालेजों के निर्माण के लिए 1023 करोड़ प्रस्तावित हैं। विधाओं का विस्तार हो, औद्योगिक निवेश हो, रोजगार सृजन हो, महिलाओं का सशक्तीकरण हो, युवाओं का कौशल संवर्धन हो, किसानों की खुशहाली हो, गरीबी उन्मूलन हो।कानून व्यवस्था की स्थिति सुदृढ़ हुई है। पुलिस अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई कर रही है। महिला अपराधों पर काफी कमी आई है। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने जानकारी दी कि कृषि उत्पादन में उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर है। युवाओं को रोजगार के लिए प्रशिक्षण पर हमारा लक्ष्य है। यूपी में एग्री एक्सपोर्ट हब बनाए जाएंगे। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत लगभग लाखों किसानों को फायदा पहुंचा गया। हमारी सरकार ने रिकॉर्ड गन्ना भुगतान किया है।
प्रदेश के इतिहास का सबसे बड़ा बजट होगा पेश: डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने बजट 2026 को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश के इतिहास का आंकड़ों के लिहाज से सबसे बड़ा बजट पेश होने जा रहा है। यह बजट राज्य के समग्र विकास को नई गति देगा और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर विशेष फोकस करेगा।
ब्रजेश पाठक ने कहा कि पानी, बिजली, सड़क, स्कूल और अस्पताल जैसे बुनियादी ढांचे को सशक्त बनाने के लिए बजट में ठोस प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि सरकार का यह बजट आम जनता की मूलभूत जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि यह बजट महिलाओं, युवाओं, किसानों और गरीबों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि बजट में किए गए प्रावधान प्रदेश को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे।
ब्रजेश पाठक ने आगे कहा कि यह बजट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के संकल्प को आगे बढ़ाने वाला होगा और उत्तर प्रदेश को देश की अग्रणी अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में निर्णायक कदम साबित होगा।
पुलिस थानों के सीसीटीवी बार-बार खराब होने पर हाईकोर्ट सख्त, मुख्य सचिव को व्यक्तिगत जांच के निर्देश
प्रयागराज/ लखनऊ। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश के पुलिस स्टेशनों में लगे सीसीटीवी कैमरों में लगातार सामने आ रही खराबियों को गंभीरता से लेते हुए राज्य के मुख्य सचिव को इसकी व्यक्तिगत रूप से जांच करने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस तरह की लापरवाही को “बार-बार का संयोग” मानकर टाला नहीं जा सकता।
न्यायमूर्ति अब्दुल मोईन और न्यायमूर्ति बबीता रानी की खंडपीठ ने सीसीटीवी कैमरों की विफलता पर यूपी पुलिस की आलोचना करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में शीर्ष पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। अदालत ने टिप्पणी की कि अब समय आ गया है कि जवाबदेही भी “गुरुत्वाकर्षण के नियम” का पालन करे, अर्थात यह ऊपर से नीचे की ओर प्रवाहित हो, न कि इसके विपरीत, जहां केवल कांस्टेबल, हेड कांस्टेबल, सब-इंस्पेक्टर या इंस्पेक्टर को बलि का बकरा बनाया जाता है।
उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी निर्देश दिया कि मुख्य सचिव द्वारा की जाने वाली जांच के दौरान जिले में तैनात उच्चतम पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने के लिए आवश्यक दिशानिर्देशों पर भी विचार किया जाए। अदालत ने संकेत दिया कि जवाबदेही तय किए बिना ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना संभव नहीं होगा।
बजट पेश करने से पहले वित्त मंत्री ने की पूजा-अर्चना, आज सदन में रखा जाएगा अहम प्रस्ताव,बुंदेलखंड को मिल सकता है बड़ा पैकेज
लखनऊ। वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश करने से पहले वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने अपने आराध्य का विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया। उन्होंने प्रदेश की उन्नति, आर्थिक प्रगति और नागरिकों के सुख-समृद्धि की कामना की। उत्तर प्रदेश सरकार आज विधानसभा में अपना वार्षिक बजट प्रस्तुत करने जा रही है। वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यह सरकार का अंतिम पूर्ण बजट होगा, इसलिए इसे नीतिगत दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।सूत्रों के अनुसार बजट में क्षेत्रीय संतुलित विकास को प्रमुखता दी जा सकती है। खासतौर पर पूर्वांचल और बुंदेलखंड के लिए विशेष प्रावधान संभावित हैं। इन दोनों क्षेत्रों के विकास के लिए लगभग 1900 करोड़ रुपये की अतिरिक्त निधि प्रस्तावित बताई जा रही है, जिससे 37 पिछड़े जिलों में आधारभूत ढांचे और विकास कार्यों को गति मिलेगी। सरकार का कहना है कि बजट में कृषि, रोजगार, बुनियादी ढांचा और सामाजिक कल्याण योजनाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले और विकास की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके।
आज  पेश होगा योगी सरकार का दसवां बजट, विकास और निवेश पर रहेगा फोकस
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार 11 फरवरी को अपना दसवां बजट विधानसभा में पेश करेगी। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए तैयार किए गए इस बजट को लेकर वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने मंगलवार को विधानसभा स्थित अपने कार्यालय में दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए।

वित्त मंत्री ने बताया कि बजट तैयार करते समय प्रदेश की विकास आवश्यकताओं, आम जनता की उम्मीदों और सुशासन की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखा गया है। उनके अनुसार यह बजट राज्य की आर्थिक मजबूती और दीर्घकालिक विकास की दिशा में रोडमैप प्रस्तुत करेगा।

सरकार का दावा है कि बीते वर्षों में कानून-व्यवस्था, औद्योगिक निवेश और आधारभूत ढांचे में जो सुधार हुए हैं, यह बजट उन्हें आगे बढ़ाने का काम करेगा। पूंजीगत व्यय को बढ़ावा देने के साथ कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को प्राथमिकता दी गई है।

बजट में युवाओं और महिलाओं के सशक्तिकरण, श्रमिकों और वंचित वर्गों के कल्याण तथा औद्योगिक विकास को बढ़ाने के उपाय शामिल किए गए हैं। साथ ही पूर्वांचल, बुंदेलखंड और अन्य पिछड़े क्षेत्रों के संतुलित विकास के लिए विशेष प्रावधान किए जाने की बात कही गई है।

वित्त मंत्री ने कहा कि वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए तैयार किया गया यह बजट प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
9.5 लाख करोड़ के बजट पर आज कैबिनेट की मुहर संभव, क्षेत्रीय विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर पर रहेगा जोर
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में बुधवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में प्रदेश सरकार के आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट प्रारूप को मंजूरी मिल सकती है। सूत्रों के अनुसार बैठक में करीब 10 प्रस्तावों पर विचार होगा, जिनमें स्थापना और प्रशासनिक निर्णयों से जुड़े मुद्दे भी शामिल हैं।

करीब 9.5 लाख करोड़ रुपये के अनुमानित आकार वाला यह बजट 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सरकार का अंतिम पूर्ण बजट माना जा रहा है। ऐसे में सरकार विकास योजनाओं और जनकल्याण कार्यक्रमों के माध्यम से व्यापक संदेश देने की तैयारी में है।

क्षेत्रीय संतुलन पर विशेष फोकस

सरकार पूर्वांचल और बुंदेलखंड जैसे पिछड़े क्षेत्रों के लिए विशेष प्रावधान कर सकती है। इन क्षेत्रों के विकास के लिए लगभग 1900 करोड़ रुपये की अतिरिक्त निधि प्रस्तावित बताई जा रही है, जिससे 37 जिलों में आधारभूत सुविधाओं को गति मिलेगी।

बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) के लिए भी बजट में विशेष पैकेज संभव है। प्राधिकरण के अंतर्गत अधिग्रहित की जाने वाली शेष जमीन और औद्योगिक ढांचे के विकास के लिए अलग से धनराशि रखी जा सकती है।

एक्सप्रेसवे और कनेक्टिविटी परियोजनाएं

प्रदेश में चल रही और प्रस्तावित एक्सप्रेसवे परियोजनाओं के लिए 1000 करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान संभावित है। लखनऊ-आगरा और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे को जोड़ने की योजना, जेवर एयरपोर्ट को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाला लिंक मार्ग तथा चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे को प्राथमिकता मिल सकती है।

जनकल्याण योजनाओं में बढ़ोतरी

सरकार वृद्धावस्था और निराश्रित महिला पेंशन में 500 रुपये की बढ़ोतरी कर सकती है। शिक्षा मित्रों के मानदेय में वृद्धि और महिला स्वयं सहायता समूहों को प्रोत्साहन देने की योजनाएं भी बजट का हिस्सा बन सकती हैं। मेधावी छात्राओं को स्कूटी वितरण योजना को आगे बढ़ाने के संकेत भी हैं।

विभागवार संभावित आवंटन

सड़क सुधार के लिए 45 हजार करोड़ रुपये से अधिक, गृह विभाग (साइबर अपराध नियंत्रण सहित) के लिए करीब 48 हजार करोड़ रुपये तथा परिवहन सुरक्षा के लिए लगभग 4700 करोड़ रुपये का प्रावधान हो सकता है। हवाई अड्डों और जलमार्ग विकास के लिए 2500 करोड़ रुपये और मेट्रो परियोजनाओं के लिए 700 करोड़ रुपये तक की राशि प्रस्तावित बताई जा रही है।

वित्त मंत्री का बयान

वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बजट पर हस्ताक्षर करने के बाद कहा कि यह बजट प्रदेश की विकास जरूरतों और जनता की अपेक्षाओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। उन्होंने दावा किया कि इसमें पूंजीगत व्यय को प्राथमिकता देते हुए कृषि, युवाओं, महिलाओं और वंचित वर्गों के सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान दिया गया है।

सरकार का कहना है कि यह बजट प्रदेश की अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक मजबूती देने और संतुलित क्षेत्रीय विकास की दिशा में अहम कदम साबित होगा।
ट्रेनों की बढ़ती संख्या के बीच जीआरपी को मिलेगी अतिरिक्त फोर्स, 2740 पुलिसकर्मी एक साल की विशेष ड्यूटी पर
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में ट्रेनों और यात्रियों की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए रेलवे सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने का निर्णय लिया गया है। बीते 28 वर्षों से जीआरपी (Government Railway Police) की स्वीकृत जनशक्ति में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। ऐसे में अब कमिश्नरेट और जिलों में तैनात 2740 पुलिसकर्मियों को एक वर्ष की विशेष ड्यूटी पर जीआरपी में तैनात किया जाएगा।

डीजीपी राजीव कृष्ण ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। खास बात यह है कि चयनित पुलिसकर्मियों को उनके गृह जनपद के जीआरपी थानों में ही तैनाती दी जाएगी। इनमें महिला पुलिसकर्मी भी शामिल होंगी।

वर्तमान में जीआरपी में वर्ष 1998 से डीजी से लेकर सिपाही तक कुल 6000 पद स्वीकृत हैं। इस दौरान प्रदेश में ट्रेनों की संख्या बढ़कर 3050 और प्रतिदिन यात्रियों की संख्या लगभग 30 लाख तक पहुंच गई है, लेकिन जनशक्ति में वृद्धि नहीं हो सकी।

जानकारी के अनुसार, जीआरपी कर्मियों के वेतन का आधा हिस्सा रेल मंत्रालय वहन करता है। अतिरिक्त पदों की स्वीकृति को लेकर कई बार प्रस्ताव भेजे गए, लेकिन उन्हें मंजूरी नहीं मिल सकी।

अब नई व्यवस्था के तहत इंस्पेक्टर से लेकर सिपाही रैंक तक के 2740 पुलिसकर्मी एक वर्ष के लिए जीआरपी में तैनात रहेंगे। उनका वेतन संबंधित कमिश्नरेट या जिले से ही जारी होगा। आवश्यकता पड़ने पर कार्यकाल बढ़ाया भी जा सकता है।

एडीजी रेलवे प्रकाश डी. ने बताया कि डीजीपी की स्वीकृति के बाद सभी जिलों और कमिश्नरेट से पुलिसकर्मी मांगे गए हैं। श्रावस्ती जनपद को इसमें शामिल नहीं किया गया है क्योंकि वहां रेलवे लाइन नहीं है। अतिरिक्त फोर्स मिलने से ट्रेनों और यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जा सकेगा।
शिक्षक दिवस से पहले 15 शिक्षकों को मिलेगा राज्य स्तरीय सम्मान
लखनऊ। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने वर्ष 2025 के लिए राज्य अध्यापक पुरस्कार पाने वाले शिक्षकों की सूची जारी कर दी है। इस बार प्रदेश के राजकीय और सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों के 15 शिक्षकों को चयनित किया गया है।

विभाग के विशेष सचिव उमेश चंद्र ने बताया कि राज्य चयन समिति ने मंडलीय समितियों से प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर शिक्षकों का साक्षात्कार और प्रस्तुतीकरण कराया। निर्धारित मानकों के अनुसार मूल्यांकन के बाद अंतिम सूची को मंजूरी दी गई।

पुरस्कार के लिए चयनित शिक्षकों में गाजियाबाद की रेनू तोमर, वाराणसी के डॉ. रमेश प्रताप सिंह और प्रकाश नारायण सिंह, रायबरेली के गिरिजेश कुमार मल्ल, मुरादाबाद के डॉ. अनुज कुमार अग्रवाल, गोरखपुर के महेश्वर प्रसाद त्रिपाठी, संत कबीर नगर के अरुण कुमार ओझा और डॉ. अभिषेक कुमार सिंह, रामपुर के डॉ. गौरव वार्ष्णेय, हापुड़ के अमित कुमार शर्मा, भदोही के डॉ. हरिश्चंद्र यादव, फिरोजाबाद के अश्वनी कुमार जैन, बरेली के राजपाल व डॉ. संजय कुमार सिंह तथा आगरा के गुणधर लाल जैन शामिल हैं।

चयनित शिक्षकों को सेवा विस्तार के साथ उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों में निःशुल्क यात्रा की सुविधा भी दी जाएगी। परंपरा के अनुसार शिक्षक दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री द्वारा सम्मान समारोह आयोजित किया जाता है। हालांकि इस वर्ष अब तक मुख्यमंत्री पुरस्कार की अलग से घोषणा नहीं की गई है।
मृत व्यक्ति को दे दी ई-रिक्शा ट्रेनिंग! बुलंदशहर में ड्राइविंग स्कूल का बड़ा खेल उजागर
लखनऊ /बुलंदशहर। उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में ड्राइविंग ट्रेनिंग के नाम पर चौंकाने वाला मामला सामने आया है। स्याना क्षेत्र के कर उप परिवहन आयुक्त, मेरठ मंडल से मान्यता प्राप्त राजा मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल ने एक ऐसे व्यक्ति के नाम ई-रिक्शा चलाने का प्रशिक्षण प्रमाणपत्र जारी कर दिया, जिसकी महीनों पहले सड़क हादसे में मौत हो चुकी थी।

जानकारी के अनुसार, शेखुपुर रौरा निवासी सुखवीर के नाम 10 अगस्त 2025 को ई-रिक्शा की 10 दिवसीय ट्रेनिंग का प्रमाणपत्र जारी किया गया। सर्टिफिकेट में उल्लेख है कि उन्होंने 01 अगस्त से 10 अगस्त 2025 तक प्रशिक्षण प्राप्त किया। जारीकर्ता इमरान ने प्रमाणपत्र में यह भी लिखा कि वह प्रशिक्षार्थी की ड्राइविंग क्षमता और शारीरिक फिटनेस से संतुष्ट हैं।

हालांकि रिकॉर्ड के मुताबिक सुखवीर की 01 मार्च 2025 को सड़क दुर्घटना में मौत हो चुकी थी। इसके बाद 21 अप्रैल 2025 को जिला अस्पताल द्वारा उनका मृत्यु प्रमाणपत्र भी जारी किया जा चुका है।

उठ रहे हैं गंभीर सवाल

अब सवाल यह है कि जो व्यक्ति पांच महीने पहले ही मृत हो चुका था, उसे प्रशिक्षण कैसे दिया गया? प्रमाणपत्र किस आधार पर जारी हुआ? और आरटीओ (ट्रेनिंग) मेरठ द्वारा काउंटर साइन किन दस्तावेजों के आधार पर किए गए?

कार्रवाई की तैयारी

मामला सामने आने के बाद परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। एआरटीओ बुलंदशहर ने संबंधित ड्राइविंग स्कूल प्रबंधक को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। अधिकारियों का कहना है कि जवाब मिलने के बाद नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
आल्हा-उदल की धरती महोबा बनेगा नया टूरिज्म हब
* स्वदेश दर्शन 2.0 से बुंदेलखंड की बदलेगी तस्वीर, 24.98 करोड़ की परियोजना से पर्यटन को मिलेगी नई पहचान

लखनऊ/महोबा। चंदेलकालीन विरासत और आल्हा-उदल की वीरगाथाओं से जुड़ा महोबा अब उत्तर प्रदेश के प्रमुख कल्चरल और एजुकेशनल टूरिज्म हब के रूप में उभरने जा रहा है। भारत सरकार की स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के तहत महोबा में 24.98 करोड़ रुपये की लागत से इंटीग्रेटेड टूरिज्म डेवलपमेंट प्रोजेक्ट पर तेजी से काम किया जा रहा है, जिससे बुंदेलखंड क्षेत्र की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को नई मजबूती मिलेगी।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बुंदेलखंड के ऐतिहासिक स्थलों को विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में महोबा में करीब 28 लाख पर्यटक पहुंचे, जो जिले की बढ़ती लोकप्रियता का प्रमाण है। स्वदेश दर्शन 2.0 के अंतर्गत चल रही यह परियोजना पर्यटकों की सुविधाओं को और बेहतर बनाएगी।

इस परियोजना का प्रमुख आकर्षण सन इंटरप्रिटेशन सेंटर होगा, जिसे 4,210 वर्ग मीटर क्षेत्र में विकसित किया जा रहा है। यह केंद्र भारतीय परंपरा में सूर्य के वैज्ञानिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रस्तुत करेगा। केंद्र की छत को दिन के आठ प्रहरों के प्रतीक रूप में डिज़ाइन किया गया है, जबकि परिसर में विशेष सनडायल (सूर्यघड़ी) भी स्थापित की जाएगी।

सेंटर में इंटरैक्टिव गैलरियों के माध्यम से हेलिओस से लेकर कोणार्क और मार्तंड सूर्य मंदिर तक की यात्रा को चित्रों, मूर्तियों, आर्किटेक्चरल मॉडल, 3D प्रोजेक्शन और साउंड इफेक्ट्स के जरिए जीवंत रूप में दिखाया जाएगा। साथ ही सोलर पैनल, रेन वॉटर हार्वेस्टिंग और वेस्ट मैनेजमेंट जैसी सुविधाओं के माध्यम से ग्रीन और सस्टेनेबल टूरिज्म को बढ़ावा दिया जाएगा।

परियोजना के अंतर्गत शिवतांडव रोड पर एक भव्य त्रिकोणीय गार्डन भी विकसित किया जा रहा है, जहां सात घोड़ों के रथ पर सवार सूर्य देव की विशाल प्रतिमा स्थापित होगी। इसके साथ ही महोबा में तीन भव्य प्रवेश द्वार बनाए जा रहे हैं, जो जिले की नई हेरिटेज पहचान बनेंगे।

अपर मुख्य सचिव पर्यटन अमृत अभिजात ने कहा कि यह परियोजना केवल पर्यटन विकास नहीं, बल्कि छात्रों और युवाओं के लिए इतिहास, विज्ञान और संस्कृति को जोड़ने वाला एक एजुकेशनल टूरिज्म मॉडल है। स्वदेश दर्शन 2.0 के माध्यम से महोबा को पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाने की दिशा में यह एक ऐतिहासिक पहल है।