राँची: आम नागरिकों के लिए अब 15 फरवरी तक खुला रहेगा 'लोक भवन' उद्यान; राज्यपाल ने बढ़ाई समय-सीमा

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राँची, 08 फरवरी 2026: राजधानीवासियों के भारी उत्साह और उद्यान देखने की बढ़ती मांग को देखते हुए माननीय राज्यपाल श्री संतोष कुमार गंगवार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। लोक भवन (राजभवन), राँची के उद्यान को आम जनता के भ्रमण के लिए अब 15 फरवरी 2026 तक खुला रखने का निदेश दिया गया है।

भारी उत्साह के कारण बढ़ी तिथि

पूर्व में यह उद्यान 2 फरवरी से 8 फरवरी तक ही खुला रहना था। लेकिन फूलों की विभिन्न प्रजातियों और उद्यान की सुंदरता को देखने के लिए उमड़ रही भीड़ और नागरिकों की सहभागिता को देखते हुए राज्यपाल ने इसे एक सप्ताह के लिए और विस्तार देने का आदेश दिया है।

भ्रमण के लिए महत्वपूर्ण जानकारी:

विस्तारित तिथि: अब 15 फरवरी 2026 तक।

भ्रमण का समय: प्रतिदिन पूर्वाह्न 10:00 बजे से अपराह्न 3:00 बजे तक।

प्रवेश की अंतिम सीमा: इच्छुक नागरिक अपराह्न 1:00 बजे तक ही प्रवेश कर सकेंगे।

प्रवेश द्वार: लोक भवन का गेट संख्या 2।

प्रक्रिया: सुरक्षा जांच के उपरांत ही प्रवेश की अनुमति दी जाएगी।

प्रकृति प्रेमियों के लिए खास आकर्षण

लोक भवन का उद्यान अपनी औषधीय वाटिका, विभिन्न प्रकार के गुलाबों और दुर्लभ फूलों के लिए जाना जाता है। हर साल हजारों की संख्या में छात्र, प्रकृति प्रेमी और आम नागरिक इस मनोरम दृश्य का आनंद लेने पहुँचते हैं।

फाइलेरिया मुक्त राँची: 10 फरवरी को 619 बूथों पर दवा खिलाने का महाअभियान; उपायुक्त की जिलेवासियों से खास अपील

राँची, 08 फरवरी 2026: राँची जिला प्रशासन द्वारा 10 फरवरी 2026 को जिले के चार प्रमुख प्रखंडों में Mass Drug Administration (MDA) कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने इस अभियान को सफल बनाने के लिए 'फाइलेरिया मुक्त राँची' का नारा दिया है।

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अभियान का पूरा शेड्यूल और लक्ष्य

मुख्य तिथि: 10 फरवरी 2026 (बूथ स्तर पर दवा सेवन)।

मॉप-अप राउंड: 11 से 25 फरवरी 2026 तक (स्वास्थ्य कर्मी घर-घर जाकर दवा खिलाएंगे)।

लक्षित क्षेत्र: राहे, सोनाहातु, तमाड़ और कांके प्रखंड।

लक्षित आबादी: लगभग 4,91,014 व्यक्ति।

किसे दवा लेनी है और किसे नहीं?

श्रेणी स्थिति

पात्र नागरिक 2 वर्ष से अधिक आयु के सभी स्वस्थ व्यक्ति।

किसे नहीं लेनी है गर्भवती महिलाएं, 2 वर्ष से कम के बच्चे और अत्यंत गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति।

दवा का प्रकार DEC + Albendazole (पूरी तरह सुरक्षित और निःशुल्क)।

जीविका दीदियों और स्वयं सहायता समूहों की भूमिका

उपायुक्त ने JSLPS (जीविका) से जुड़ी दीदियों को इस अभियान की 'रीढ़' बताया है। उन्होंने घोषणा की है कि उत्कृष्ट कार्य करने वाले और शत-प्रतिशत दवा सेवन सुनिश्चित कराने वाले महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को जिला प्रशासन द्वारा प्रशस्ति प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा।

चिकित्सकीय सलाह: बचाव ही उपाय है

जिला प्रशासन ने डॉक्टर के परामर्श के आधार पर कुछ महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं:

दवा सेवन: वर्ष में एक बार दवा लेना अनिवार्य है।

स्वच्छता: प्रभावित अंगों को साबुन और साफ पानी से धोएं।

जांच: फाइलेरिया की जांच के लिए रात में रक्त परीक्षण (Night Blood Survey) सबसे सटीक होता है।

बचाव: मच्छरदानी का प्रयोग करें और मच्छरों से बचें।

उपायुक्त का संदेश

"यदि एक भी व्यक्ति दवा से वंचित रह गया, तो यह बीमारी दोबारा समुदाय में फैल सकती है। आइए, हम सब मिलकर 2026 को राँची के लिए फाइलेरिया-मुक्त वर्ष बनाएँ।" — मंजूनाथ भजन्त्री, उपायुक्त, राँची।

झारखंड मंईयां योजना का 'मास्टरस्ट्रोक': अब ₹20,000 का स्वरोजगार ऋण; 8 मार्च को हो सकती है बड़ी घोषणा

झारखंड सरकार की मंईयां सम्मान योजना के तहत अब राज्य की लगभग 50 लाख महिलाओं को ₹20,000 तक का आसान लोन (ऋण) देने की तैयारी है। इसका मुख्य उद्देश्य महिलाओं को छोटे व्यवसाय (जैसे सिलाई, मनिहारी, मशरूम उत्पादन आदि) शुरू करने के लिए आर्थिक संबल प्रदान करना है।

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योजना की मुख्य विशेषताएं और कार्यप्रणाली:

पहलू विवरण

ऋण की राशि ₹20,000 (शुरुआती स्वरोजगार हेतु)

प्रस्तावित नाम मुख्यमंत्री मंईयां उद्यम योजना (अपेक्षित)

लॉन्च तिथि 8 मार्च 2026 (अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर)

repayment (किस्त) सम्मान राशि (₹2,500) से ही सीधे बैंक द्वारा काटी जाएगी।

अवधि 12 से 24 महीने के बीच आसान किस्तें।

दस्तावेज न्यूनतम कागजी कार्रवाई (आधार कार्ड और बैंक विवरण)।

यह योजना कैसे काम करेगी? (मॉडल)

बिना गारंटी लोन: चूंकि महिलाएं पहले से ही मंईयां सम्मान योजना की लाभार्थी हैं, इसलिए बैंक उन्हें बिना किसी अतिरिक्त गारंटी या कठिन दस्तावेजों के ऋण दे सकेंगे।

स्वचालित अदायगी (Auto-Repayment): लाभार्थियों को किस्त जमा करने के लिए बैंक के चक्कर नहीं काटने होंगे। उनके खाते में आने वाली मासिक सम्मान राशि (₹2,500) में से ही किस्त की राशि काट ली जाएगी।

बैंकरों की सहमति: राज्यस्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) और वित्त विभाग के बीच हुई बैठक में इस मॉडल पर सहमति बन गई है। वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने इसे आगामी बजट में शामिल करने के संकेत दिए हैं।

क्यों माना जा रहा है इसे 'मास्टरस्ट्रोक'?

आर्थिक स्वावलंबन: ₹2,500 की मासिक मदद घर चलाने में काम आती है, लेकिन ₹20,000 की एकमुश्त राशि से महिलाएं अपना छोटा व्यापार शुरू कर सकती हैं।

बैंकों के लिए कम जोखिम: चूंकि सरकार हर महीने महिलाओं के खाते में पैसा भेज रही है, इसलिए बैंकों के लिए ऋण की वसूली (Recovery) सुनिश्चित है।

सशक्तिकरण: इससे महिलाएं केवल 'लाभार्थी' नहीं, बल्कि 'रोजगार प्रदाता' बन सकेंगी।

सीआईपी कांके के 156 सुरक्षा कर्मियों की सेवा बचाने का होगा प्रयास ....आदित्य साहू

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवम सांसद आदित्य साहू ने आज प्रातः अपने पैतृक आवास, कुच्चू में सीआईपी कांके में कार्यरत 156 सुरक्षा कर्मियों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं, पीड़ा और चिंताओं को गंभीरता से सुना।

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कहा कि वर्षों तक निष्ठा और समर्पण के साथ संस्थान की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले इन कर्मियों को अचानक सेवा से हटाया जाना अत्यंत चिंताजनक है। इससे न केवल उनके जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा है, बल्कि उनके परिवारों के सामने आजीविका का गंभीर संकट भी उत्पन्न हो गया है।

कहा कि सभी प्रभावित सुरक्षा कर्मियों के हितों की रक्षा हेतु ठोस एवं न्यायसंगत समाधान सुनिश्चित कराने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा।

रवि चौधरी का चुनावी शंखनाद: ‘क्यूब’ के साथ उतरेंगे मैदान में, धनबाद में म्युनिसिपल यूनिवर्सिटी बनाने का किया वादा"

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धनबाद: नगर निगम चुनाव की सरगर्मियों के बीच महापौर पद के प्रत्याशी और जाने-माने शिक्षाविद रवि चौधरी ने अपनी चुनावी दावेदारी को नई धार दी है। शनिवार को जिला प्रशासन द्वारा उन्हें आधिकारिक रूप से ‘क्यूब’ (Cube) चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया। चिन्ह मिलते ही रवि चौधरी ने प्रेस वार्ता कर धनबाद की सूरत बदलने के लिए अपना 'रोडमैप' साझा किया।

चार दशकों का अनुभव और सेवा का संकल्प

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए रवि चौधरी ने कहा कि पिछले 40 वर्षों से वे शिक्षा और सामाजिक कार्यों के माध्यम से जनता के बीच हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका मेयर पद के लिए चुनाव लड़ना सत्ता का मोह नहीं, बल्कि धनबाद को एक आधुनिक और व्यवस्थित शहर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

रवि चौधरी के चुनावी वादे: 3 प्रमुख प्राथमिकताएं

म्युनिसिपल यूनिवर्सिटी की स्थापना: शिक्षाविद होने के नाते उन्होंने विजन साझा किया कि धनबाद के गरीब और मेधावी बच्चों के लिए एक 'म्युनिसिपल यूनिवर्सिटी' बनाई जाएगी, ताकि स्थानीय स्तर पर ही उच्च शिक्षा और रोजगार सुनिश्चित हो सके।

पेयजल संकट का स्थायी समाधान: शहर के हर वार्ड और हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुँचाना उनकी पहली प्रशासनिक प्राथमिकता होगी।

डिजिटल होल्डिंग टैक्स: भ्रष्टाचार और कागजी पेचीदगियों को खत्म करने के लिए होल्डिंग टैक्स की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल करने का वादा किया, जिससे आम जनता को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।

"राजनीति नहीं, विकास को चुनें"

अंत में उन्होंने धनबाद की जनता से भावुक अपील करते हुए कहा कि इस बार का मतदान जाति या दलीय राजनीति के आधार पर नहीं, बल्कि विकास के मुद्दों पर होना चाहिए। उन्होंने शहरवासियों से ‘क्यूब’ चिन्ह पर समर्थन मांगते हुए धनबाद को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का भरोसा दिलाया।

झारखंड में अचानक गायब हो गए 10 आदिवासी बच्चे, श्राद्ध कार्यक्रम में शामिल होने गए थे मासूम, अब तक बना हुआ है रहस्य

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झारखंड के कोडरमा जिले से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आ रही है. यहां बिरहोर समुदाय के 10 आदिवासी बच्चे पिछले एक सप्ताह से लापता हैं. ये सभी बच्चे विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) से ताल्लुक रखते हैं. 31 जनवरी से गायब इन बच्चों का अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मचा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है.

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, यह मामला जयनगर थाना क्षेत्र के खारियोडीह पंचायत स्थित गदियाई बिरहोर टोला का है. बताया जा रहा है कि 31 जनवरी को गांव के करीब 60 से 70 लोग लगभग 15 किलोमीटर दूर परसाबाद में एक श्राद्ध कार्यक्रम में शामिल होने गए थे. इन्हीं लोगों के साथ ये 10 बच्चे भी गए थे. कार्यक्रम खत्म होने के बाद गांव के बाकी लोग तो लौट आए, लेकिन ये बच्चे घर वापस नहीं पहुंचे.

CCTV फुटेज और सर्विलांस का सहारा ले रही पुलिस

मामले की गंभीरता को देखते हुए जयनगर पुलिस और जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर है. डीएसपी (ट्रेनी) दिवाकर कुमार ने बताया कि पुलिस की कई टीमें गठित की गई हैं. उन्होंने कहा, “हम परसाबाद और उसके आसपास के इलाकों के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रहे हैं. पुलिस की टीमें आसपास के जिलों और थानों से भी संपर्क में हैं. रेलवे स्टेशनों, बस स्टैंडों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या बच्चों को किसी वाहन के जरिए जिले से बाहर ले जाया गया है.

परिजनों की बढ़ती बेचैनी

बिरहोर टोला के निवासियों में डर का माहौल है. परिजनों का कहना है कि उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि एक पारिवारिक कार्यक्रम में गए बच्चे इस तरह गायब हो जाएंगे. जयनगर थाना प्रभारी उमा नाथ सिंह ने आश्वासन दिया है कि पुलिस बच्चों को सुरक्षित वापस लाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है.

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने सपरिवार माँ छिन्नमस्तिका के दरबार में टेका मत्था; राज्य की खुशहाली के लिए मांगी दुआ

रजरप्पा (रामगढ़), 07 फरवरी 2026: झारखंड के मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन आज अपनी धर्मपत्नी और गांडेय विधायक श्रीमती कल्पना सोरेन के साथ प्रसिद्ध सिद्धपीठ माँ छिन्नमस्तिका मंदिर पहुंचे। मुख्यमंत्री ने यहाँ श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना की और माता रानी से समस्त झारखंडवासियों की सुख, समृद्धि और उन्नति के लिए आशीर्वाद मांगा।

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विधि-विधान से संपन्न हुई पूजा

मुख्यमंत्री ने मंदिर के गर्भगृह में विधिवत् अनुष्ठान किया। धार्मिक पुरोहितों ने परंपरा के अनुसार पूरे विधि-विधान के साथ पूजा संपन्न कराई। इस दौरान मुख्यमंत्री ने:

माँ छिन्नमस्तिका के चरणों में शीश झुकाकर आशीर्वाद लिया।

परंपरा के अनुरूप नारियल बलि देकर रक्षा सूत्र बंधवाया।

राज्य में अमन-चैन और खुशहाली के लिए विशेष प्रार्थना की।

मंदिर न्यास समिति ने किया सम्मान

पूजा-अर्चना के उपरांत रजरप्पा मंदिर न्यास समिति के सदस्यों ने मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन और विधायक श्रीमती कल्पना सोरेन का स्वागत किया। समिति की ओर से उन्हें सप्रेम प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर स्थानीय प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री की यात्रा को देखते हुए मंदिर परिसर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे।

झामुमो का भाजपा पर तीखा हमला: "रोजगार की बात भाजपा को धमकी क्यों लगती है?" — विनोद पांडेय

राँची, 07 फरवरी 2026: झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय महासचिव श्री विनोद कुमार पांडेय ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष श्री आदित्य साहू के आरोपों पर कड़ा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि भाजपा की मानसिकता हमेशा से युवा विरोधी रही है और यही कारण है कि जब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन झारखंडियों को हक और रोजगार देने की बात करते हैं, तो भाजपा को यह 'धमकी' प्रतीत होने लगती है।

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75% आरक्षण और स्थानीय अधिकार पर घमासान

विनोद पांडेय ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के ऐतिहासिक निर्णयों का बचाव करते हुए कहा कि निजी क्षेत्र में 75 प्रतिशत स्थानीय युवाओं की नियुक्ति का फैसला झारखंडियों के व्यापक हित में लिया गया है। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा:

"भाजपा को झारखंड के संसाधनों पर झारखंडियों का अधिकार रास नहीं आ रहा है। जब भी सामाजिक न्याय और स्थानीय रोजगार की बात होती है, भाजपा भ्रम फैलाकर मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश करती है।"

भाजपा के "जुमलों" पर वार

झामुमो महासचिव ने भाजपा को केंद्र सरकार के पुराने वादों की याद दिलाते हुए कहा कि हर साल करोड़ों नौकरियां देने का वादा महज एक 'जुमला' साबित हुआ। उन्होंने कहा कि भाजपा के लिए रोजगार कभी प्राथमिकता नहीं रहा, उनका असली एजेंडा समाज को बांटना और नफरत फैलाना है। पांडेय ने आरोप लगाया कि भाजपा ने अपने शासनकाल में नियुक्तियों के नाम पर सिर्फ घोटाले किए और युवाओं का भविष्य अंधकार में धकेला।

"आदिवासी मुख्यमंत्री को बर्दाश्त नहीं कर पा रही भाजपा"

विनोद पांडेय ने भाजपा की बौखलाहट का मूल कारण बताते हुए कहा कि भाजपा एक आदिवासी मुख्यमंत्री को पद पर देखना पसंद नहीं करती। उन्होंने मांग की कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को राज्य के युवाओं से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में सरकारी नौकरियों की 'बरसात' हो रही है और सभी विभागों में पारदर्शी तरीके से बहालियां की जा रही हैं।

राँची: UPSC अभियंत्रण सेवा परीक्षा को लेकर निषेधाज्ञा लागू; परीक्षा केंद्रों के 200 मीटर के दायरे में प्रतिबंध

राँची, 06 फरवरी 2026: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), नई दिल्ली द्वारा आयोजित अभियंत्रण सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा-2026 के शांतिपूर्ण और कदाचारमुक्त संचालन के लिए राँची जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। आगामी 08 फरवरी 2026 को होने वाली इस परीक्षा के लिए शहर के 03 परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।

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धारा-163 (BNSS) के तहत निषेधाज्ञा

विधि-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी प्रकार की भीड़भाड़ को रोकने के लिए अनुमंडल दंडाधिकारी, सदर, राँची ने परीक्षा केंद्रों की 200 मीटर की परिधि में निषेधाज्ञा जारी की है। यह आदेश 08 फरवरी 2026 के प्रातः 06:30 बजे से अपराह्न 07:00 बजे तक प्रभावी रहेगा।

निषेधाज्ञा के दौरान मुख्य प्रतिबंध:

भीड़ पर रोक: पाँच या उससे अधिक व्यक्तियों के एक जगह जमा होने पर प्रतिबंध रहेगा (सरकारी कार्य और शवयात्रा को छोड़कर)।

हथियारों पर पाबंदी: किसी भी प्रकार के अस्त्र-शस्त्र (बंदूक, राइफल, बम, आदि) या हरवे-हथियार (लाठी, डंडा, भाला, आदि) लेकर चलने की मनाही है।

ध्वनि विस्तारक यंत्र: परीक्षा केंद्रों के पास लाउडस्पीकर या किसी भी प्रकार के ध्वनि विस्तारक यंत्र का प्रयोग वर्जित है।

सभा आयोजित करना: किसी भी प्रकार की बैठक या आमसभा का आयोजन करना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।

प्रशासनिक सतर्कता

परीक्षा के सफल आयोजन हेतु उपायुक्त और वरीय पुलिस अधीक्षक के संयुक्तादेश पर दंडाधिकारियों और पुलिस बल की प्रतिनियुक्ति कर दी गई है। प्रशासन ने असामाजिक तत्वों द्वारा विधि-व्यवस्था भंग किए जाने की आशंका को देखते हुए यह कदम उठाया है।

राँची नगर निगम: 'आधी आबादी' का पूरा दम; 33% से 50% आरक्षण और फर्श से अर्श तक का सफर

राँची नगर निगम के गठन के बाद से अब तक हुए तीन चुनावों (2008, 2013, और 2018) के आंकड़े गवाही देते हैं कि राजधानी की शहरी राजनीति में महिलाओं का कद लगातार बढ़ा है। महिलाओं ने न केवल आरक्षित सीटों पर जीत दर्ज की, बल्कि अनारक्षित सीटों पर भी पुरुष प्रत्याशियों को 'धूल चटाकर' अपनी जगह बनाई।

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चुनावी दर चुनावी: बढ़ता महिलाओं का कुनबा

नगर निगम के चुनावों में महिला पार्षदों की संख्या में हुई वृद्धि को नीचे दिए गए टेबल से समझा जा सकता है:

चुनाव वर्ष विजयी महिला पार्षदों की संख्या आरक्षण का प्रतिशत मुख्य उपलब्धि

2008 15 33% राज्य का पहला निगम चुनाव, पहली महिला मेयर (रमा खलखो)

2013 27 33% पार्षदों की संख्या लगभग दोगुनी हुई

2018 32 50% अब तक की सर्वाधिक भागीदारी, आशा लकड़ा दूसरी बार मेयर

मेयर पद: 15 वर्षों से महिलाओं का 'अभेद्य किला'

राँची नगर निगम में मेयर का पद शुरुआत से ही महिला शक्ति का केंद्र रहा है।

2008: रमा खलखो राँची की पहली महिला मेयर बनकर इतिहास के पन्नों में दर्ज हुईं।

2013 और 2018: आशा लकड़ा ने लगातार दो बार जीत हासिल की। विशेषकर 2018 में, जब उन्होंने कड़े मुकाबले में कई दिग्गज पुरुष उम्मीदवारों को शिकस्त दी, जो यह साबित करता है कि मतदाता अब जेंडर से ऊपर उठकर 'काम और विकास' के नाम पर महिला नेतृत्व को चुन रहे हैं।

आरक्षण का बदलता स्वरूप: 33% से 50% की छलांग

शहरी लोकतंत्र को सशक्त करने के लिए झारखंड सरकार ने 2018 के चुनावों में ऐतिहासिक बदलाव किया।

शुरुआती दौर: 2008 और 2013 में संविधान के 74वें संशोधन के तहत एक-तिहाई (33%) सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित थीं।

ऐतिहासिक मोड़: 2018 में आरक्षण को बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया।

अनारक्षित सीटों पर कब्जा: महिलाओं की बढ़ती ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने न केवल अपनी आरक्षित 50% सीटों को जीता, बल्कि अनारक्षित (General) सीटों पर भी पुरुषों को हराकर अपनी पैठ बनाई।

विशेषज्ञों की राय: चुनौती और संकेत

विशेषज्ञ मानते हैं कि संख्या बढ़ना लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत है, लेकिन असली चुनौती 'निर्णय प्रक्रिया' (Decision Making) में है।

"संख्यात्मक बढ़त के बाद अब गुणात्मक सुधार की जरूरत है। महिलाओं को बोर्ड की बैठकों और नीति निर्धारण में अपनी स्वतंत्र भूमिका और मुखर करनी होगी।"

निष्कर्ष

राँची नगर निगम के ये आंकड़े बताते हैं कि यहाँ का शहरी मतदाता अब अधिक जागरूक है। महिलाओं की यह बढ़ती मौजूदगी स्थानीय मुद्दों जैसे— पानी, सफाई, और स्ट्रीट लाइट— पर उनकी पकड़ को मजबूत कर रही है।