अलीगढ़ से हांगकांग तक फैला ठगी का नेटवर्क, 600 व्हाट्सएप ग्रुप… 5,000 करोड़ की साइबर लूट
ठगी करते वक्त धराए 12,600 व्हाट्सएप ग्रुप, डेढ़ लाख लोग जाल में
सेवानिवृत्त डीजीएम बने पुलिस के ‘मोस्ट सीक्रेट हथियार’
छह राज्यों में छापे, लगातार भाग रहे थे ठग
लखनऊ । अलीगढ़ में साइबर अपराध की दुनिया में भूचाल मचाने वाला खुलासा हुआ है। यूपी पुलिस की साइबर टीम ने ऐसा अंतरराष्ट्रीय ठगी रैकेट पकड़ा है, जिसकी पटकथा किसी थ्रिलर फिल्म से कम नहीं है। हांगकांग से ऑपरेट हो रहे इस गिरोह ने देशभर में शेयर बाजार में निवेश और 200 गुना मुनाफे का सपना दिखाकर 5,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी कर डाली।सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि ठग जब अगली बड़ी ठगी की तैयारी में थे, उसी वक्त पुलिस ने उन्हें रंगे हाथों दबोच लिया।
जांच में सामने आया कि ठगों ने देशभर में 600 व्हाट्सएप ग्रुप बना रखे थे, जिनमें करीब डेढ़ लाख लोग जुड़े थे। 6 फरवरी को ही 1,200 करोड़ रुपये की ठगी की पूरी स्क्रिप्ट तैयार थी। गृह मंत्रालय और दूरसंचार मंत्रालय की मदद से पुलिस ने एक झटके में सभी 600 ग्रुप बंद करवा दिए और ठगी के लिए बनाई गई दो फर्जी निवेश एप को देशभर में बैन करा दिया।इस पूरे खुलासे की शुरुआत स्वर्ण जयंती नगर निवासी दिनेश शर्मा से हुई, जो बैंक से डीजीएम पद से रिटायर हैं। ठगों ने उनसे 45 दिनों में ही 1.10 करोड़ रुपये ऐंठ लिए थे और अब 6 फरवरी को दो करोड़ रुपये और मांग रहे थे।दिनेश शर्मा सीधे साइबर पुलिस के पास पहुंचे।
पुलिस की रणनीति पर वे ठगों के संपर्क में बने रहे और जैसे ही ठग रकम निकालने की तैयारी में थे, साइबर टीम ने जाल कस दिया। जांच में सामने आया कि ठगी की रकम सात बड़े बैंक खातों में ट्रांसफर कराई जा रही थी, जो यूपी समेत छह राज्यों में ऑपरेट हो रहे थे। इसके बाद सात स्पेशल टीमें बनाई गईं। ओडिशा, उत्तराखंड, हरियाणा, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और यूपी में एक साथ दबिश दी गई।ठग लगातार शहर बदल रहे थे, लेकिन साइबर सर्विलांस ने हर कदम पर उन्हें ट्रैक किया और आखिरकार 12 आरोपियों को धर दबोचा।पूरी साजिश हांगकांग की इंटरनेट आईपी से ऑपरेट हो रही थी। ठगों ने शेयर बाजार जैसे दिखने वाले फर्जी प्लेटफॉर्म तैयार किए थे। ‘फायर एलाइट प्रो’ नाम की एप सिर्फ 52 दिन पहले बनाई गई थी। व्हाट्सएप और टेलीग्राम के जरिए युवाओं को ट्रेनिंग दी जाती थी और फिर उनसे देशभर में शिकार तलाशने का काम कराया जाता था।ठगी की रकम को तुरंत अलग-अलग खातों में घुमाकर यूएसडीटी (डिजिटल करेंसी) में बदल दिया जाता था, जिससे पैसा विदेश पहुंच जाता था।
यह गिरोह पिग बुचरिंग नाम की खतरनाक तकनीक से काम कर रहा था। पहले बड़े अधिकारी, कारोबारी और मोटे खातों वाले लोगों की सोशल मीडिया और वित्तीय गतिविधियों पर नजर रखी जाती थी। फिर उन्हें 200 गुना मुनाफे के लालच में फंसाकर धीरे-धीरे पूरी पूंजी साफ कर दी जाती थी।पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 30 पासबुक-चेकबुक, 28 एटीएम/डेबिट कार्ड, 2 क्रेडिट कार्ड, 23 मोबाइल फोन, 13 सिम कार्ड, 9 फर्जी फर्मों की मुहर, 2 जियो राउटर, 1 लैपटॉप, 1 कैमरा और ठगी की रकम से जुड़े 5.64 लाख रुपये बरामद किए हैं।एसपी देहात अमृत जैन के मुताबिक अभी करीब दो दर्जन आरोपी और फरार हैं। पूरा नेटवर्क हांगकांग से संचालित होने के चलते इंटरपोल के जरिए अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई की तैयारी है। सीबीआई को भी पत्राचार कर आगे की जांच की सिफारिश की गई है।एसएसपी नीरज जादौन ने इस सनसनीखेज खुलासे पर पूरी साइबर टीम को 25 हजार रुपये का इनाम देने की घोषणा की है।
1 hour and 59 min ago
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