आरटीआई से उजागर हुआ उत्तराखंड में पशु वैक्सीनेशन घोटाला, लाखों की अनियमितता की जांच शुरू
लक्सर (हरिद्वार)। उत्तराखंड के हरिद्वार जिले के लक्सर क्षेत्र में पशु वैक्सीनेशन के नाम पर लाखों रुपये के घोटाले का मामला सामने आया है। यह खुलासा सूचना का अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी से हुआ है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पशुपालन विभाग के अपर निदेशक ने स्वयं मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है।

भूरना गांव निवासी एडवोकेट विनीत चौधरी ने पशुपालन विभाग से आरटीआई के माध्यम से पशुओं के वैक्सीनेशन से संबंधित जानकारी मांगी थी। आरोप है कि विभाग ने लंबे समय तक सूचना देने में टालमटोल की। इसके बाद शिकायतकर्ता ने सीधे पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा से मामले की शिकायत की, जिसके बाद विभाग हरकत में आया और संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए गए।

दस्तावेजों की जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। आरटीआई से मिले रिकॉर्ड में सैकड़ों ऐसे लोगों के नाम दर्ज पाए गए, जो संबंधित गांव के निवासी ही नहीं हैं। कई मामलों में एक ही मोबाइल नंबर पर कई व्यक्तियों के नाम से वैक्सीनेशन दिखाया गया है, जबकि कुछ नाम ऐसे भी हैं जिनके यहां पशुपालन तक नहीं होता।

शिकायतकर्ता विनीत चौधरी का आरोप है कि अकेले भूरना गांव में ही पशु वैक्सीनेशन के नाम पर लाखों रुपये का घोटाला किया गया है। उन्होंने सभी संबंधित दस्तावेज जांच अधिकारी को सौंप दिए हैं।

मामले की जांच के लिए लक्सर पहुंचे अपर निदेशक पशुपालन विभाग गढ़वाल परिक्षेत्र भूपेंद्र सिंह जंगपांगी ने बताया कि वैक्सीनेशन में अनियमितताओं की शिकायत मिली थी, जिसकी गहन जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति को वैक्सीनेशन का कार्य सौंपा गया था, उसे 4,000 से अधिक वैक्सीन दी गई थीं, जिनका विवरण ऑनलाइन अपलोड किया गया है। अब गांव में जाकर स्थल सत्यापन किया जाएगा।

उन्होंने स्पष्ट किया कि देखरेख और निगरानी की जिम्मेदारी विभागीय अधिकारियों की है और यदि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही या गड़बड़ी पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

आरटीआई के माध्यम से सामने आए इस मामले ने पशुपालन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति भी उजागर हुई है। अब सभी की नजरें जांच रिपोर्ट और संभावित कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
डोईवाला: एमबीबीएस छात्रा की संदिग्ध मौत, फंदे से लटका मिला शव, पुलिस जांच में जुटी
डोईवाला। उत्तराखंड के जौलीग्रांट स्थित एक निजी यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में एमबीबीएस प्रथम वर्ष की 19 वर्षीय छात्रा का शव फंदे से लटका मिलने से सनसनी फैल गई। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर निवासी छात्रा की संदिग्ध मौत ने यूनिवर्सिटी प्रशासन में हड़कंप मचा दिया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की गहन जांच शुरू कर दी है।

जौलीग्रांट चौकी प्रभारी ईश्वर सिंह सैनी ने बताया कि छात्रा मंगलवार को कमरे से बाहर नहीं निकली। सहपाठियों ने अनहोनी की आशंका जताई, तो कमरे में जाकर देखा। वह पंखे से लटकी हुई थी। सूचना मिलते ही पुलिस पहुंची और शव को कब्जे में ले लिया। सीओ सदर विवेक कुटियाल के अनुसार, शुरुआती जांच में सहपाठियों से पूछताछ के आधार पर किसी छात्र से विवाद के कारण आत्महत्या का संदेह है। घटनास्थल से कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली।

पुलिस ने छात्रा के मोबाइल फोन और सोशल मीडिया अकाउंट्स की जांच शुरू कर दी है। परिजनों को मुजफ्फरनगर से सूचित कर देहरादून बुला लिया गया है। परिजनों की मौजूदगी में ही पोस्टमार्टम होगा और आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मृतक परिवार में मातम का माहौल है।
रुड़की में शर्मनाक मामला: प्राइवेट स्कूल के शिक्षक पर नाबालिग छात्र के साथ अश्लील हरकत का आरोप, पॉक्सो एक्ट में मुकदमा दर्ज
रुड़की (हरिद्वार)। हरिद्वार जिले के रुड़की क्षेत्र के झबरेड़ा थाना क्षेत्र से एक बेहद शर्मनाक और निंदनीय मामला सामने आया है। एक प्राइवेट पब्लिक स्कूल के शिक्षक पर कक्षा एक में पढ़ने वाले नाबालिग छात्र के साथ अश्लील हरकत करने का गंभीर आरोप लगा है। पीड़ित छात्र के परिवार ने पुलिस को तहरीर देकर आरोपी शिक्षक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की, जिसके आधार पर पुलिस ने तुरंत पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है।

जानकारी के अनुसार, झबरेड़ा थाना क्षेत्र के एक गांव का रहने वाला यह नाबालिग छात्र क्षेत्र के ही एक प्राइवेट स्कूल में कक्षा एक में पढ़ता है। 6 फरवरी (शुक्रवार) को वह नियमित रूप से पढ़ाई के लिए स्कूल गया था। आरोप है कि स्कूल में ही शिक्षक ने छात्र के साथ अश्लील हरकत की और गलत तरीके से छुआ। घटना के बाद जब बच्चा घर लौटा तो उसने पूरे मामले की जानकारी अपने परिवारजनों को दी।

इस बात का पता चलते ही परिवार वाले सदमे में आ गए और गुस्से से भड़क उठे। उन्होंने तुरंत बच्चे को लेकर झबरेड़ा थाने पहुंचकर आरोपी शिक्षक के खिलाफ तहरीर दी। पुलिस ने शिकायत मिलने पर पीड़ित छात्र का मेडिकल परीक्षण कराया और आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया।

झबरेड़ा थाना प्रभारी निरीक्षक अजय शाह ने बताया कि पीड़ित परिवार की तहरीर के आधार पर शिक्षक के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस जांच में स्कूल के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। साथ ही अन्य शिक्षकों और स्टाफ से पूछताछ की जा रही है तथा आरोपी शिक्षक के बारे में विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है।
यह घटना स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर रही है। पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू कर दी है और जल्द ही आगे की कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।
हरिद्वार में यूपी के सीएम योगी बोले—विकास और विरासत का संतुलन ही राष्ट्र निर्माण की राह


हरिद्वार। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को हरिद्वार दौरे पर रहे। इस दौरान उन्होंने सत्यमित्रानंद गिरि महाराज के समाधि स्थल पर विग्रह मूर्ति स्थापना कार्यक्रम में भाग लिया और जनसभा को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि है और यहां के चारधाम भारत की आध्यात्मिक चेतना के मजबूत आधार हैं।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तराखंड आज विकास और विरासत, दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बीते 11 वर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में व्यापक परिवर्तन हुए हैं और ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के निर्माण के लिए सामूहिक प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अयोध्या, काशी, मथुरा, प्रयागराज से लेकर केदारपुरी, बदरीनाथ धाम और हरिद्वार तक विकास की नई गाथा विरासत को संरक्षित करते हुए आगे बढ़ रही है। भारत केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि ऋषि परंपरा की तपस्या और जीवन दर्शन का प्रतीक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत किसी एक तिथि या सत्ता की देन नहीं है, बल्कि सनातन चेतना का स्वाभाविक प्रवाह है। धर्म कभी कमजोर नहीं होता, उसे जानबूझकर कमजोर किया जाता है। इतिहास गवाह है कि जो राष्ट्र अपनी सभ्यता और संस्कृति की उपेक्षा करता है, वह न वर्तमान को सुदृढ़ कर पाता है और न ही भविष्य को सुरक्षित।

योगी आदित्यनाथ ने वैदिक भारत को आत्मनिर्भर सभ्यता का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह राष्ट्र ऋषियों की तपस्या, किसानों के श्रम और कारीगरों की सृजनशीलता से खड़ा हुआ। उन्होंने कहा कि एक समय विश्व अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी 44 प्रतिशत तक थी, जो बाद में 25 प्रतिशत रही। यह सब किसानों, कारीगरों और श्रमिकों की शक्ति का परिणाम था।

उन्होंने ग्राम स्वराज की अवधारणा पर जोर देते हुए कहा कि गांव राष्ट्र की नींव हैं और किसानों को मजबूत किए बिना देश मजबूत नहीं हो सकता। विरासत को समझने और सम्मान देने के कारण ही आज भारत वैश्विक पहचान बना रहा है और दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है।उत्तर प्रदेश को भारत की आत्मा का केंद्र बताते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि एक समय प्रदेश में विरासत को कोसा जाता था और अराजकता का माहौल था। आज विरासत का सम्मान होने से प्रदेश की तस्वीर बदली है और उत्तर प्रदेश देश की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। उन्होंने कहा कि 500 वर्षों बाद अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण राष्ट्र चेतना का प्रतीक है। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि बदरीनाथ, केदारनाथ, काशी और अयोध्या केवल तीर्थ नहीं, बल्कि राष्ट्र चेतना के केंद्र हैं। इन आस्था के केंद्रों को सम्मान के साथ विरासत के रूप में आगे बढ़ाना हम सभी की जिम्मेदारी है।
भद्राज ट्रेकिंग रूट पर भटके 10 युवक, पुलिस ने जंगल से किया रेस्क्यू, बाल-बाल बची जान
विकासनगर उत्तराखंड। प्रसिद्ध भद्राज मंदिर ट्रेकिंग रूट पर पहाड़ियों और घने जंगल के बीच रास्ता भटक गए 10 युवकों को पुलिस ने समय रहते रेस्क्यू कर सुरक्षित बाहर निकाल लिया। अंधेरा होने के कारण युवक निर्धारित ट्रेकिंग रूट से भटक गए थे, जिससे उनकी जान पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया था।

जानकारी के अनुसार 5 फरवरी की रात सहसपुर थाना क्षेत्र में 112 के माध्यम से सूचना प्राप्त हुई कि करीब 10 युवक भद्राज ट्रेकिंग के दौरान जंगल में रास्ता भटक गए हैं। युवकों को आसपास के रास्तों की कोई जानकारी नहीं मिल पा रही थी और मोबाइल नेटवर्क भी कमजोर था। सूचना मिलते ही सहसपुर कोतवाली पुलिस द्वारा तत्काल एक रेस्क्यू टीम गठित की गई। राहत एवं बचाव उपकरणों के साथ पुलिस टीम भद्राज ट्रेकिंग रूट की ओर रवाना हुई। कोटी गांव पहुंचकर पुलिस ने वन विभाग के बीट अधिकारी और स्थानीय ग्रामीणों की मदद ली तथा देर रात तक सर्च ऑपरेशन चलाया गया। काफी मशक्कत के बाद पुलिस टीम ने कोटी गांव से लगभग तीन किलोमीटर ऊपर घने जंगल क्षेत्र में सभी 10 युवकों को सकुशल खोज निकाला। इसके बाद सभी को सुरक्षित नीचे लाया गया और उनके गंतव्य के लिए रवाना किया गया।इस संबंध में सहसपुर थाने के उपनिरीक्षक नीरज त्यागी ने बताया कि 112 के माध्यम से सूचना मिलते ही त्वरित कार्रवाई की गई, जिससे सभी युवकों को सुरक्षित रेस्क्यू किया जा सका।

रेस्क्यू किए गए युवक
अभिषेक चौहान (29), निवासी विकासनगर
हेमंत (26), प्रिंस (18), शिवम (18), अर्चित (18), सक्षम घई (23), मयंक राय (19), शिवाशु (18), उज्जवल (18) — सभी निवासी प्रेमनगर, देहरादून
हर्षित (16), निवासी प्रेमनगर, देहरादून

गौरतलब है कि मसूरी से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित भद्राज मंदिर भगवान कृष्ण के बड़े भाई बलभद्र (बलराम) को समर्पित है। धार्मिक आस्था के साथ-साथ यह स्थल ट्रेकिंग प्रेमियों के बीच भी खासा लोकप्रिय है, हालांकि यहां ट्रेकिंग के दौरान सतर्कता बरतना अत्यंत आवश्यक है।
इलाज में लापरवाही से महिला की मौत: निजी अस्पताल पर 10 लाख का जुर्माना, दो डॉक्टरों का रजिस्ट्रेशन निलंबित
देहरादून। इलाज के दौरान एक महिला की मौत के मामले में उत्तराखंड मेडिकल काउंसिल ने कड़ा रुख अपनाते हुए एक निजी अस्पताल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। काउंसिल ने अस्पताल की गंभीर लापरवाही मानते हुए उस पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है, साथ ही अस्पताल में तैनात दो डॉक्टरों का पंजीकरण दो माह के लिए निलंबित कर दिया गया है।

यह कार्रवाई मृतका के पति कर्नल अमित कुमार की शिकायत के बाद की गई। मामला 4 अप्रैल 2025 का है, जब मसूरी रोड स्थित एक निजी अस्पताल में बिंदेश्वरी देवी नामक महिला की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। परिजनों ने उपचार में गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए थे।

उत्तराखंड मेडिकल काउंसिल की नैतिकता, अनुशासन एवं पंजीकरण समिति के अध्यक्ष डॉ. अनूज सिंघल के अनुसार, मामले की विस्तृत जांच के लिए तीन सदस्यीय डॉक्टरों की जांच समिति गठित की गई थी, जिसकी अध्यक्षता डॉ. महेश कुड़ियाल ने की। जांच समिति ने इलाज में लापरवाही की पुष्टि की।

जांच रिपोर्ट के आधार पर मेडिकल काउंसिल ने अस्पताल को मृतका के परिजनों को 10 लाख रुपये की प्रतिपूर्ति देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही संबंधित दो डॉक्टरों का रजिस्ट्रेशन दो महीने के लिए निरस्त कर दिया गया है। इस अवधि में दोनों चिकित्सक किसी भी अस्पताल या नर्सिंग होम में चिकित्सा सेवाएं नहीं दे सकेंगे।

वहीं, निजी अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि उन्हें अब तक उत्तराखंड मेडिकल काउंसिल की ओर से इस कार्रवाई से संबंधित कोई आधिकारिक पत्र प्राप्त नहीं हुआ है।
एपीआई उत्पादन से ही फार्मा क्षेत्र में सच्ची आत्मनिर्भरता संभव : मुदित अग्रवाल
कुमाऊं, उत्तराखंड। कुमाऊँ–गढ़वाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष, उत्तराखंड फार्मा चैप्टर प्रमुख एवं एग्रोन रेमेडीज प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक मुदित अग्रवाल ने केंद्रीय बजट–2026 को प्रगतिशील, संतुलित और उद्योगोन्मुखी बताते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एवं भारत सरकार का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह बजट न केवल आर्थिक विकास को गति देगा, बल्कि स्वास्थ्य, एमएसएमई और बायो-फार्मास्युटिकल जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के प्रति सरकार की गंभीर प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।

श्री अग्रवाल ने कैंसर रोधी दवाओं पर करों में की गई कटौती को अत्यंत सराहनीय और स्वागतयोग्य कदम बताया। उन्होंने कहा कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज में दवाओं की ऊँची कीमत एक बड़ी चुनौती होती है। कर राहत से जीवनरक्षक दवाओं की लागत में कमी आएगी, जिससे आम मरीजों को सीधा लाभ मिलेगा। यह निर्णय सरकार की मानवीय सोच और जनस्वास्थ्य को प्राथमिकता देने वाले दृष्टिकोण को दर्शाता है।

उन्होंने एमएसएमई क्षेत्र के लिए 2,000 करोड़ रुपये के विशेष आवंटन, विशेषकर बायो-फार्मा एवं लाइफ साइंसेज उद्योग पर केंद्रित समर्थन को दूरदर्शी पहल बताया। उनके अनुसार इससे छोटे एवं मध्यम फार्मा उद्यमों को तकनीकी उन्नयन, आधुनिक मशीनरी, गुणवत्ता मानकों के अनुपालन, अनुसंधान एवं विकास तथा नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, इससे रोजगार सृजन को भी बल मिलेगा। औद्योगिक रूप से उभरते राज्य उत्तराखंड के लिए यह प्रावधान विशेष रूप से उत्साहवर्धक है।

श्री अग्रवाल ने बजट में ईमानदार एवं नियमों का पालन करने वाले करदाताओं को दी गई राहत का भी स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी, ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस को मजबूती मिलेगी और स्वैच्छिक कर अनुपालन को प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे उद्योग जगत का सरकार पर विश्वास और सुदृढ़ होगा।

हालाँकि, उन्होंने यह भी कहा कि फार्मास्युटिकल उद्योग को कुछ अतिरिक्त सेक्टर-विशिष्ट कर राहतों की अपेक्षा थी। यदि उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (PLI) या अतिरिक्त कर रियायतें दी जातीं, तो आवश्यक दवाओं की उपलब्धता और अधिक किफायती हो सकती थी।

भविष्य की रणनीति पर बात करते हुए श्री अग्रवाल ने सक्रिय दवा सामग्री (एपीआई) के मामले में चीन पर भारत की अत्यधिक निर्भरता को गंभीर चिंता का विषय बताया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में लगभग 70 प्रतिशत एपीआई आयात चीन से किया जाता है। देश में सच्ची आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए सरकार को कर रियायतों, सब्सिडी, भूमि और बुनियादी ढांचे के सहयोग से घरेलू एपीआई उत्पादन को प्रोत्साहित करना चाहिए।

अंत में उन्होंने कहा कि केंद्रीय बजट–2026 एमएसएमई सशक्तिकरण, बायो-फार्मा क्षेत्र के विस्तार, जनस्वास्थ्य संरक्षण और ईमानदार करदाताओं के सम्मान की दिशा में एक संतुलित और विकासोन्मुखी बजट है। कुमाऊँ–गढ़वाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री का फार्मा चैप्टर इन पहलों का पूर्ण समर्थन करता है और भविष्य में उद्योग की व्यावहारिक एवं नीतिगत आवश्यकताओं के अनुरूप और सकारात्मक कदमों की अपेक्षा करता है।
उत्तराखंड में 30 जून तक मदरसा बोर्ड  हो जाएगा समाप्त
* अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता अनिवार्य

देहरादून। उत्तराखंड में शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। धामी सरकार द्वारा लाए गए अल्पसंख्यक शिक्षा विधेयक 2025 के तहत प्रदेश का मदरसा बोर्ड इस साल जून के अंत तक पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। 1 जुलाई 2026 से सभी मदरसों को उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता और उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा बोर्ड से संबद्धता लेनी अनिवार्य होगी।
सरकार ने विधेयक को धरातल पर उतारने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन कर दिया है। प्राधिकरण के अध्यक्ष के रूप में बीएसएम पीजी कॉलेज रुड़की के सेवानिवृत्त प्राचार्य प्रो. सुरजीत सिंह गांधी को नियुक्त किया गया है।
दरअसल, धामी सरकार ने प्रदेश में संचालित सभी मदरसों और अन्य अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मुख्यधारा की शिक्षा प्रणाली से जोड़ने के उद्देश्य से यह विधेयक लाया था। अगस्त 2025 में विधानसभा से पारित होने के बाद 6 अक्टूबर 2025 को राज्यपाल की मंजूरी भी मिल गई थी। अब प्राधिकरण के गठन के साथ ही इसकी सभी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं।
सरकारी निर्णय के अनुसार, 30 जून 2026 को उत्तराखंड मदरसा बोर्ड समाप्त हो जाएगा, जिसके बाद राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यक्रम ढांचा लागू होगा। इसके साथ ही उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन जाएगा, जहां मदरसा बोर्ड को पूरी तरह खत्म किया जा रहा है।
प्राधिकरण की संरचना - अध्यक्ष: प्रो. सुरजीत सिंह गांधी, सदस्य - डॉ. राकेश कुमार जैन (हरिद्वार), डॉ. सैय्यद अली हमीद (अल्मोड़ा), प्रो. पेमा तेनजिन (चमोली), प्रो. गुरमीत सिंह (मुरादाबाद), डॉ. एल्बा मन्ड्रेले (बागेश्वर), प्रो. रोबिना अमन (अल्मोड़ा), चंद्रशेखर भट्ट (पूर्व सचिव), राजेंद्र सिंह बिष्ट (पिथौरागढ़), पदेन सदस्य - महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा एवं निदेशक, एससीईआरटी
पदेन सदस्य सचिव - निदेशक, अल्पसंख्यक कल्याण, उत्तराखंड
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि इस विधेयक का उद्देश्य अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चों को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जोड़ना है, ताकि वे भी राष्ट्र निर्माण में योगदान दे सकें। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “सबको शिक्षा का अधिकार” के संकल्प के अनुरूप उत्तराखंड सरकार शिक्षा सुधार की दिशा में आगे बढ़ रही है।
उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग की उपाध्यक्ष फरजाना बेगम ने सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे अल्पसंख्यक बच्चों को मुख्यधारा में आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि अब ये बच्चे डॉक्टर, डीएम, एसएसपी जैसे बड़े पदों तक पहुंच सकेंगे। यह निर्णय अल्पसंख्यक बच्चों के भविष्य के लिए एक मिसाल है।
कुल मिलाकर, धामी सरकार का यह कदम उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में प्रदेश के शैक्षणिक परिदृश्य को नई दिशा देगा।
लापरवाही पर देहरादून डीएम की सख्त कार्रवाई, पिटकुल की रोड कटिंग अनुमति रद्द, ठेकेदार और इंजीनियर पर मुकदमा
देहरादून, उत्तराखंड। शहर में रोड कटिंग कार्य में नियमों और शर्तों के उल्लंघन को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी सविन बंसल ने बड़ी कार्रवाई की है। जिला प्रशासन ने पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (पिटकुल) की रोड कटिंग की अनुमति निरस्त करते हुए कार्य पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। साथ ही संबंधित ठेकेदार और एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है।
जानकारी के अनुसार, पिटकुल द्वारा 135 केवी आराघर सब-स्टेशन से निर्माणाधीन 132 केवी माजरा–लालतप्पड़ एलआईएलओ लाइन को अंडरग्राउंड करने के लिए रोड कटिंग की अनुमति मांगी गई थी। यह अनुमति 19 दिसंबर 2025 को परियोजना समन्वय समिति की बैठक में विचार के बाद, 1 जनवरी 2026 को निर्धारित शर्तों के साथ दी गई थी। इसके तहत 16 जनवरी से 15 फरवरी तक केवल रात 10 बजे से सुबह 5 बजे तक रोड कटिंग कार्य की सशर्त अनुमति थी।
जिलाधिकारी के निर्देश पर उप जिलाधिकारी (न्याय) कुमकुम जोशी के नेतृत्व में जिला प्रशासन की क्विक रिस्पांस टीम (क्यूआरटी) ने आईएसबीटी क्रॉसिंग और सहारनपुर रोड के माजरा क्षेत्र में निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि संबंधित एजेंसी अनुमति की शर्तों का उल्लंघन करते हुए कार्य कर रही है, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी, यातायात बाधा और सुरक्षा संबंधी जोखिम उत्पन्न हो रहे थे।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने अग्रिम आदेशों तक रोड कटिंग कार्य पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया और अनुमति को निरस्त कर दिया। साथ ही पिटकुल के अधीक्षण अभियंता (परियोजना क्रियान्वयन) को निर्देश दिए गए हैं कि सभी प्रभावित स्थलों पर तत्काल सड़क भरान कर यथास्थिति बहाल की जाए।
एलआईसी बिल्डिंग के पास विद्युत केबल को अंडरग्राउंड करने के दौरान लगातार लोगों के चोटिल होने की घटनाओं को भी जिलाधिकारी ने गंभीरता से लिया। इसके चलते संबंधित एग्जीक्यूटिव इंजीनियर और ठेकेदार के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है और कार्य में लगी सभी मशीनरी जब्त कर ली गई है।
जिलाधिकारी सविन बंसल ने स्पष्ट कहा कि शहर की सड़कों, यातायात व्यवस्था और नागरिकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
उत्तराखंड ने साहसिक पर्यटन को दी नई उड़ान
* 83 प्रमुख हिमालयी चोटियां पर्वतारोहण के लिए खुलीं, भारतीय पर्वतारोहियों को फीस से पूरी छूट, विदेशियों को भी बड़ी राहत
देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने साहसिक पर्यटन और पर्वतारोहण को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद (UTDB) और वन विभाग के संयुक्त प्रयास से गढ़वाल और कुमाऊं हिमालय क्षेत्र की 83 प्रमुख हिमालयी चोटियों को पर्वतारोहण अभियानों के लिए खोल दिया गया है। यह कदम न केवल राज्य के पर्यटन इतिहास में मील का पत्थर है, बल्कि युवाओं के लिए नए अवसर और सीमावर्ती क्षेत्रों में रोजगार का सशक्त माध्यम भी बनेगा।

इन अधिसूचित चोटियों की ऊंचाई 5,700 मीटर से 7,756 मीटर तक है। इनमें कामेट (7,756 मीटर), नंदा देवी ईस्ट, चौखंबा समूह, त्रिशूल समूह, शिवलिंग, सतोपंथ, चांगाबांग, पंचाचूली और नीलकंठ जैसी विश्वविख्यात चोटियां शामिल हैं। ये चोटियां चमोली, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़, बागेश्वर, रुद्रप्रयाग और टिहरी गढ़वाल जिलों में स्थित हैं।

राज्य सरकार ने भारतीय पर्वतारोहियों को बड़ी राहत देते हुए इन सभी चोटियों पर लगने वाले पीक फीस, कैंपिंग शुल्क, ट्रेल मैनेजमेंट फीस और पर्यावरण शुल्क को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। इससे देश के युवा पर्वतारोहियों को हजारों रुपये की बचत होगी और पर्वतारोहण गतिविधियों को नया प्रोत्साहन मिलेगा।

विदेशी पर्वतारोहियों के लिए भी नियमों को सरल किया गया है। अब उनसे वन विभाग द्वारा लिया जाने वाला अभियान शुल्क समाप्त कर दिया गया है। विदेशी पर्वतारोहियों को केवल भारतीय पर्वतारोहण फाउंडेशन (IMF) द्वारा निर्धारित शुल्क ही देना होगा।

पर्वतारोहण अभियानों के लिए सभी आवश्यक अनुमतियां अब उत्तराखंड माउंटेनियरिंग परमिशन सिस्टम (UKMPS) के माध्यम से ऑनलाइन ली जा सकेंगी। इससे अनुमति प्रक्रिया पारदर्शी, त्वरित और सुविधाजनक होगी तथा कागजी औपचारिकताओं में कमी आएगी।

सरकार का मानना है कि इस पहल से उत्तराखंड को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक प्रमुख पर्वतारोहण और एडवेंचर टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में पहचान मिलेगी। दूरस्थ और सीमावर्ती क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियां बढ़ेंगी, जिससे स्थानीय लोगों को गाइड, पोर्टर, होमस्टे और अन्य सेवाओं के माध्यम से रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे।

उत्तराखंड सरकार ने देश-विदेश के सभी पर्वतारोहियों से अपील की है कि वे अभियानों के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन करें, पर्यावरण संरक्षण के नियमों का सम्मान करें और हिमालय की संवेदनशील पारिस्थितिकी की रक्षा में सहयोग दें। यह निर्णय राज्य को साहसिक पर्यटन के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाला साबित होगा।