गौशाला से गो-तस्करी कराने के मामले में हुई गिरफ्तारी के बाद जिला प्रशासन सतर्क हो गया

लालगंज(मीरजापुर): क्षेत्र के सोनबरसा ग्राम प्रधान की अपने गांव के ही गौशाला से गो-तस्करी कराने के मामले में हुई गिरफ्तारी के बाद जिला प्रशासन सतर्क हो गया है। शनिवार को डिप्टी सीवीओ की टीम  ने गौशाला का निरीक्षण किया, इस दौरान गौशाला में कई अव्यवस्थाएं, वित्तीय अनियमितता और लापरवाही सामने आई।
सोनबरसा गौशाला के निरीक्षण में भूंसा कम मात्रा में मिला कई गोवंश को इअर टैग किया गया। गोशाला में छांव के नाम पर वैसे तो टीनशैड लगे हैं लेकिन पशुओं के संख्या के सापेक्ष कम पड़ रहा है। अधिकांश गोवंश खुले आसमान के नीचे ही सिकुड़ी बटुरी रहती है। दिलचस्प बात यह है की समतलीकरण के नाम पर छः लाख से ज्यादा खर्च दिखाया गया है लेकिन मौके तस्वीर उमड़ खाभर और पथरीली पहाड़ी है। चौंकाने वाली बात यह रही की वृक्षारोपण के नाम पर वर्ष 2024-2025 में एक लाख रुपए से अधिक व्यय किया गया है। लेकिन मौके पर स्थिति उलट ही दिखाई दी। पशुओं की गिनती कराई गई और उनको इअर टैग लगाए गए। जहां कागज में छः सौ से अधिक गोवंश रजिस्टर में दर्ज हैं। लेकिन मौके पर काफी कम मिलने की बात कही गई।‌
लालगंज तहसील क्षेत्र में कुल 10 गौ आश्रय स्थल है। जिनमें सबसे ज्यादा महुलार गौ आश्रय स्थल में 782 गोवंश संरक्षित है।‌ महुलार गौ आश्रय स्थल भी संदिग्ध गतिविधियों के कारण कई बार चर्चा में रह चुका है। उसरी खमरिया गौ आश्रय स्थल में 298 गोवंश। बामी में गौ आश्रय स्थल में 357 गोवंश। जबकि क्षमता से काफी अधिक है जिसके कारण गोवंश ज्यादा मृत होते हैं प्रतिदिन। हलिया गौ आश्रय स्थल में 403, गलरा गौ आश्रय स्थल में 351, महोगढ़ी गौ आश्रय स्थल में मात्र 40 गोवंश, गुर्गी आश्रय स्थल में 347, गौरवा आश्रय स्थल में 430 और उमरिया गौ आश्रय स्थल में 705 गोवंश रजिस्टर में दर्ज हैं। जिलाधिकारी के निर्देश पर सभी गौशालाओं पर संरक्षित गोवंश की गिनती कराई गई है। लेकिन रजिस्टर में दर्ज आंकड़े से कहीं मेल नहीं खाते मिले।इस संबंध ज्वाइंट मजिस्ट्रेट महेंद्र सिंह ने कहा की जिलाधिकारी के निर्देश पर गिनती कराई गई है जिसका मिलान कराने के बाद गड़बड़ी मिलने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
श्रम विभाग से फर्जी लाभ लेने का मुकदमा दर्ज

चुनार, मिर्जापुर। शनिवार को श्रम प्रवर्तन अधिकारी चुनार ज्ञानेंद्र सिंह ने मातृत्व शिशु एवं बालिका मदद योजना में गलत तरीके से 31000 रुपए का लाभ लिए जाने के आरोप में संजीव कुमार कुशवाहा पर प्राथमिकी दर्ज कराई है। इसके पूर्व  धन वापसी को लेकर श्रम विभाग मिर्जापुर द्वारा नोटिस जारी कर डीडी के माध्यम से हित लाभ के पैसे को जमा करने का निर्देश दिया गया था, जो अब तक नही कराया गया।
सूत्रों की माने तो तत्कालिन सहायक श्रमायुक्त  मिर्जापुर सुविज्ञ सिंह ने रेंडम आधार पर दिनांक 8.4.25 को संजीव कुशवाहा के हितलाभ की स्थलीय जांच की थी जिसमें पाया गया कि लाभार्थी निर्माण श्रमिक नहीं है और वह पिछले 5 वर्ष से वर्मा फोटो स्टेट पर काम करता है जिसकी लिखित बयान दर्ज करते हुए नोटिस जारी के साथ साथ श्रम प्रवर्तन अधिकारी चुनार  को प्राथमिकी हेतु दो बार 09.04.2025 व 05.05.2025 को  पत्र जारी किया गया था। तीसरी बार  वर्तमान सहायक श्रम आयुक्त मिर्जापुर  सतीश सिंह द्वारा  17 जनवरी को पत्र जारी कर हितलाभ की वापसी डीडी के माध्यम से बोर्ड के खाते में जमा कराने के साथ साथ प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश दिया गया था जिसके  क्रम में  चुनार थाने में  प्राथमिकी दर्ज कराई गई । जिसकी जानकारी होते ही सिंडिकेट सक्रीय है और प्राथमिक की पर कार्रवाई न हो इसके लिए बकायदा जोर दिया जाएगा। प्रकरण में एक नया मोड़ आएगा जिसको लेकर सवाल तो उठेंगे ही। इसे कई प्रकार से देखा जा सकता है चर्चा है कि तत्कालीन एएलसी सुविज्ञ सिंह ने यह प्राथमिकी चुनार के लेबर अफसर को कुछ सीखने-सिखाने के उद्देश्य से  दर्ज करने पर जोर दिया था जिसके भविष्य में अनेक मतलब निकलेंगे। वही इस बात की भी चर्चा है कि जिस संजीव पर आज प्राथमिकी  दर्ज होने की बात की जा रही है वह पूर्व में भी एक लाभ ले चुका है, शायद उसकी भी वसूली हो सकती है या फिर यह किसी द्वेष को लेकर किया गया है। वही सबसे बड़ी बात यह है कि जिस सुविज्ञ सिंह ने अपने रेंडम जांच में एक गड़बड़ी पर कम से कम दो बार धन वापसी के साथ प्राथमिकी दर्ज कराने पर जोर दिया वह तो कुछ भी नही जबकि इसके पूर्व की जांच में विंध्याचल के गोपालपुर प्रकरण में डीएलसी की जांच में 12 के बारह मामले फर्जी पाए गए थे, जिसमें 11 लोगों से लगभग 5 लाख 14 हजार रुपए के आस पास की वसूली हुई है। सबसे आश्चर्य की बात यह है कि पिछले 6 माह से चर्चित 105 में 90 फर्जी मामले में वर्तमान एएलसी सतीश कुमार सिंह इतने भोले बनते है कि जैसे वे कुछ जानते ही नहीं और मीडिया और जिला प्रशासन को गुमराह करते हुए बताते हैं कि गलत हितलाभ लेने वालों से  वसूली का प्रावधान है ना की प्राथमिकी दर्ज कराने का, इसके लिए प्रमुख सचिव का आदेश होना चाहिए। इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि भ्रष्टाचार कैसे पनपता है और इसे कौन  लोग प्रश्रय देते हैं।
कंपोजिट विद्यालय शाहपुर चौसा में छात्रों ने ली सड़क सुरक्षा की शपथ

मीरजापुर। सिटी ब्लॉक के कंपोजिट विद्यालय शाहपुर चौसा में शनिवार को राष्ट्रीय  सड़क सुरक्षा माह के अंतर्गत एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें छात्रों ने सड़क सुरक्षा की शपथ ली, साथ ही निबंध और पोस्टर प्रतियोगिताएं भी हुई।  छात्रों ने सड़क सुरक्षा की शपथ लेते हुए सभी से दो पहिया वाहन चलाते समय हेलमेट और चार पहिया वाहन चलाते समय सीट बेल्ट पहनने का आग्रह किया। उन्होंने तेज गति से वाहन न चलाने की भी अपील की।


इस दौरान राज्य शिक्षक पुरस्कार प्राप्त शिक्षिका श्रीमती शीला सिंह ने बच्चों को सड़क सुरक्षा की शपथ दिलाई और सभी से यातायात के नियमों के पालन करने की अपील की।


इस अवसर पर प्रधानाध्यापिका उषा देवी, राज्य शिक्षक पुरस्कार प्राप्त शिक्षिका श्रीमती शीला सिंह, रवि सिंह, आलोक गुप्ता, रीना सिंह, किरण सिंह, रचना  व समस्त विद्यालय परिवार बच्चे आदि उपस्थित रहे।
सचिव के खिलाफ जिला अधिकारी से कार्रवाई की मांग


मिर्जापुर। जिले के रामपुर खोमर मैना केबी पैक्स साधन सहकारी समिति के अध्यक्ष ओमप्रकाश पटेल ने जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर सचिव रणजीत कुमार सिंह के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। आरोप लगाया है कि जिस गांव के सचिव हैं उसी गांव के साधन सहकारी समिति में काम कर रहे हैं. आने वाले किसानों को ओवरराइटिंग में खाद की बिक्री करते हैं और धान की भी खरीदारी ब्लैक करते हैं. किसान जब इसको लेकर विरोध करते हैं तो धमकाते हैं बोलते हैं कि हम इसी गांव के हैं बाहर के नहीं है लेना हो तो लीजिए नहीं तो जाइए. किसानों के शिकायत पर उप जिलाधिकारी लालगंज ने भी ट्रांसफर करने के लिए सहायक आयुक्त सहायक निबंधक सहकारिता को आदेशित किया है इसके बावजूद भी ट्रांसफर नहीं की जा रही है, जिस समिति से आए हैं वहां पर भी इनके खिलाफ भ्रष्टाचार का आरोप था सचिव के खिलाफ जिला अधिकारी से कार्रवाई की मांग की है.
97 आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को कारण बताओ नोटिस
लापरवाही पर कड़ी विभागीय कार्यवाही मानदेय रोकने की चेतावनी

हलिया मिर्जापुर।स्थानीय विकास खंड की 97 आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों द्वारा लाभार्थियों को पोष्टा हार वितरित किए जाने के बाद भी उसकी अनिवार्य प्रविष्टि पोषक ट्रैकर एप पर टीएचआर  फीड नहीं की गई थी मामले को गंभीरता से लेते हुए सीडीपीओ हलिया दिलीप कुमार वर्मा ने सभी 97 आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।इस संबंध में सीडीपीओ दिलीप कुमार वर्मा ने बताया कि शासन की मंशा के अनुसार आंगनबाड़ी केंद्रों पर गर्भवती महिलाओं,धात्री माताओं एवं 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों को वितरित किए जाने वाले पोषाहार का पूरा रिकॉर्ड पोषक ट्रैकर एप पर अपलोड किया जाना अनिवार्य है।इसके बावजूद कई बार निर्देश दिए जाने के बाद भी संबंधितकार्यकत्रियों द्वारा टीएचआर की फीडिंग नहीं की गई।आगे बताया कि पोषक ट्रैकर पर फीडिंग न होने से न सिर्फ शासन स्तर पर आंकड़ों की समीक्षा प्रभावित होती है, बल्कि लाभार्थियों को मिलने वाली योजनाओं की निगरानी भी बाधित होती है।सीडीपीओ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सभी 97 आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों से कारण बताओ नोटिस के माध्यम से स्पष्टीकरण मांगा गया है।यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया या हिला हवाली की गई तो संबंधित कार्यकत्रियों के विरुद्ध कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी।उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि जनवरी में तथा भविष्य में भी यदि पोषक ट्रैकर पर टीएचआर की नियमित फीडिंग नहीं की गई तो संबंधित आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का मानदेय रोके जाने के साथ साथ अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई भी प्रस्तावित की जाएगी।विभाग द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों की निगरानी और सख्त किए जाने की भी तैयारी की जा रही है।
श्रमिक की हत्या का खुलासा किए जाने की मांग को लेकर ग्रामीणों ने थाने का किया घेराव
दो घंटे तक धरने पर बैठे ग्रामीणों ने मामले का जल्द खुलासा करने की किया मांग

ड्रमंडगंज क्षेत्र के देवहट गांव निवासी श्रमिक की हत्या का खुलासा नही होने पर आक्रोशित ग्रामीणों ने पुलिस की कार्य प्रणाली पर सवालिया निशान लगाते हुए गुरुवार का थाने का घेराव किया। आक्रोशित ग्रामीण दो घंटे तक धरने पर बैठे रहे और मामले का खुलासा किए जाने की मांग करने लगे। ग्रामीणों का कहना था कि शव मिले दो दिन हो गया लेकिन अभी तक पुलिस मामले का खुलासा नही कर सकी। ग्रामीणों ने सुरक्षा को लेकर पुलिस पर सवाल खड़े किए।मृत श्रमिक छोटकऊ के पुत्र पिंटू उर्फ रविन्द्र कुमार की तहरीर पर पुलिस अज्ञात के विरुद्ध हत्या मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच में जुट गई है।थानाध्यक्ष के समझाने बुझाने के बाद ग्रामीणों ने दो घंटे बाद धरना समाप्त किया।थानाध्यक्ष ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि किसी भी सूरत में दोषियों को बख्शा नही जाएगा जल्द ही मामले का खुलासा कर दिया जाएगा।देवहट गांव निवासी 56 वर्षीय लापता श्रमिक छोटकऊ कोल का बीते 27 जनवरी को पांच दिन बाद सजहवा बाउली जंगल में शव दफनाया मिला था।छोटकऊ कोल बीते 22 जनवरी की रात घर से खेत पर फसलों की रखवाली करने गए थे उसके बाद घर वापस नही लौटे और पांच दिन बाद उनका शव घर से तीन किलोमीटर दूर सजहवा बाउली जंगल के गढ्ढे में दफन मिला। मौके पर पहुंची पुलिस व फोरेंसिक टीम ने घटना की जांच कर शव को गढ्ढे से निकलवाकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था। बुधवार रात श्रमिक का शव घर पहुंचा जहां ड्रमंडगंज पुलिस के अलावा हलिया और लालगंज पुलिस की मौजूदगी में देर रात दाह संस्कार किया गया।थानाध्यक्ष भारत सुमन ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में श्रमिक के शरीर पर चोट के निशान पाए गए हैं। मृतक के पुत्र की तहरीर पर अज्ञात के विरुद्ध हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
Mirzapur : गंगा घाटों से शिल्ट हटाने के नाम पर नपा का लंबा खेल, पहली बार  27.40 लाख का भुगतान
*नगर पालिका में लूट का आरोप, राष्ट्रवादी मंच ने जिलाधिकारी को सौंपा पत्रक, जांच की मांग

मिर्जापुर। नगर पालिका परिषद मिर्जापुर में विकास एवं जनहित कार्यों के नाम पर बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। मामले को लेकर राष्ट्रवादी मंच के अध्यक्ष मनोज श्रीवास्तव ने कमिश्नर और जिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंपा। मुलाकात कर निष्पक्ष एवं तकनीकी जांच कराने की मांग की गई है। कहा गया है कि कल तक जिस घाट की सफाई मुफ्त होती थी, उस पर पहली बार करीब 27.40 लाख रुपए खर्च दिखाकर गोलमाल किया गया है। सौंपे गए पत्र में कहा गया है कि नगर पालिका के सिविल निर्माण कार्यों एवं जलकल विभाग में पेयजल आपूर्ति मद के अंतर्गत नियमों की अनदेखी कर करोड़ों रुपये का दुरुपयोग किया जा रहा है। विभागीय लोगों की मिलीभगत से बिना टेंडर ओवर-इस्टीमेटिंग, फर्जी बिलिंग एवं मनमाने टेंडर कराए जा रहे हैं। कोटा पूर्ति के लिए बाद में टेंडर कराया जा रहा है। बताया कि गंगा घाटों की सिल्ट सफाई को लेकर श्रमदान का प्रचार किया गया, जबकि इसकी आड़ में नगर पालिका के अभियंताओं द्वारा सफाई कार्यों के नाम पर भारी-भरकम बजट तैयार कर लाखों से करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया। जबकि स्थानीय स्वयंसेवी संस्थाएं एवं सामाजिक संगठन पूर्व से ही श्रमदान के माध्यम से घाटों की सफाई करते आ रहे हैं। इसी तरह
तमाम कार्यों को टेंडर जारी होने से पहले ही पूर्ण करा लिया गया। कार्य पूर्ण होने के बाद औपचारिकता निभाने के लिए निविदा प्रकाशित की गई, जिससे नियमों की खुलेआम अवहेलना हुई है। जलकल विभाग में भी चल रहे खेल का आंकलन इसी से किया जा सकता है कि कुछ ही महीनों के भीतर उन्हें मरम्मत योग्य दर्शाकर दोबारा भुगतान करा लिया गया। साथ ही मरम्मत एवं सामग्री आपूर्ति के नाम पर चहेती फर्मों से फर्जी बिलिंग कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया। मामले को लेकर कमिश्नर और जिलाधिकारी से मांग की गई है कि पूरे प्रकरण की स्वतंत्र तकनीकी एवं वित्तीय जांच कराई जाए, संदिग्ध टेंडरों को निरस्त किया जाए तथा दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करते हुए उनपर निलंबन की जाए, ताकि जांच न प्रभावित होने पाए। बिना निविदा कराए गए कार्यों को जनहित में श्रमदान घोषित करने की मांग की गई हैं। पत्रक सौंपने वालों में रवि पुरवार, आनंद अग्रवाल, पारस मिश्र, मधुकर पांडेय, विनोद पांडेय एवं अनिल गुप्ता आदि शामिल रहे।
हाईवा की चपेट में आने से बाइक सवार की मौत गुस्साए ग्रामीणों ने ट्रक में लगाई आग, पुलिस ने खदेड़ा
मीरजापुर के देहात कोतवाली क्षेत्र में बुधवार रात एक हादसा हुआ। भोरसर गांव के पास हाईवा की चपेट में आने से बाइक सवार मिथिलेश विश्वकर्मा की मौके पर ही मौत हो गई। घटना से गुस्साए ग्रामीणों ने हाईवा ट्रक में आग लगा दी। बिकना गांव निवासी मिथिलेश विश्वकर्मा एनएच 135 से चुनार वीरपुर की ओर से आ रहे थे। बिकना अंडरपास के पास पहले से एक हाईवा खड़ी थी। हाईवा चालक भोरसर गांव के पास बने कट के सहारे एनएच 135 पर चढ़कर लालगंज की ओर जाने का प्रयास कर रहा था। इसी दौरान बाइक सवार मिथिलेश लगभग 500 मीटर पहले हाईवा ट्रक की चपेट में आ गए। ग्रामीणों ने बताया कि मिथिलेश अपने तीन भाइयों में सबसे बड़े थे और पूरे घर का खर्च उन्हीं के ऊपर था। उनके परिवार में एक बेटी और एक बेटा है। हादसे के बाद मौके पर भारी संख्या में ग्रामीण जमा हो गए। उन्होंने मृतक के परिवार को मुआवजा दिलाने और घटनास्थल पर ब्रेकर बनाने की मांग करते हुए हंगामा शुरू कर दिया। ग्रामीणों ने अपना गुस्सा दिखाते हुए हाईवा ट्रक में आग लगा दी। सूचना मिलने पर सीओ सदर मुनेंद्र पाल, देहात कोतवाल अमित मिश्रा, विंध्याचल थानेदार अविनाश राय सहित कई थानों की पुलिस फोर्स मौके पर पहुंची। पुलिस ने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे अपनी मांगों पर अड़े रहे। बार-बार समझाने के बावजूद जब ग्रामीण नहीं माने, तो पुलिस ने लाठी भांजकर उन्हें वहां से खदेड़ दिया।
योगी सरकार के प्रयास से मीरजापुर में वज्रपात मौतों में आई 50 प्रतिशत की कमी
*- सीएम योगी ने प्राकृतिक आपदाओं से जनहानि को न्यूनतम करने की दिशा में उठाया बड़ा कदम*

*- भौगोलिक संरचना, पथरीली जमीन और खनन कार्यों के चलते आकाशीय बिजली की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील जिला है मीरजापुर*

*-आई०एम०डी लखनऊ के प्रोजेक्ट इवैल्यूएशन और आई०आई०टी रुड़की से पढ़े हुए लोगों के शोध के फलस्वरूप जनहानियों को किया गया कम*
                                                                                                                                             *- लाइटनिंग हॉटस्पॉट मैप के आधार पर 80 स्थानों पर लगे ई०एस०ई लाइटनिंग अरेस्टर लगाए गए*

*लखनऊ, 28 जनवरी:* योगी सरकार प्रदेश में प्राकृतिक आपदाओं से जनहानि को न्यूनतम करने की दिशा में लगातार ठोस और वैज्ञानिक कदम उठा रही है। इसी के तहत मीरजापुर में “लाइटनिंग रेज़िलिएंसी” यानी आकाशीय बिजली से सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया। योगी सरकार के इस कदम से मीरजापुर में आकाशीय बिजली से होने वाली मौतों में 50 प्रतिशत की कमी दर्ज की गयी, वहीं इसे न्यूनतम और शून्य करने की दिशा में काम किया जा रहा है। योगी सरकार का लाइटनिंग रेज़िलिएंसी माॅडल देश के लिए एक मॉडल के रूप में उभर कर सामने आया है। बता दें कि मीरजापुर देश के सबसे अधिक बिजली प्रभावित क्षेत्रों में शामिल है।

*यू०पी०एस०डी०एम०ए एवं राहत आयुक्त कार्यालय द्वारा जनपद मीरजापुर को आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और जागरूकता अभियान से किया गया मजबूत*
जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण मीरजापुर (डीoडीoएमoए) के अध्यक्ष/जिलाधिकारी मीरजापुर पवन कुमार गंगवार ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सत्ता संभालने के बाद प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली मौतों को हर हाल में रोकने और न्यूनतम करने के निर्देश दिये थे। ऐसे में सीएम योगी की मंशा के अनुरूप उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूपीएसडीएमए) को आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और जागरूकता अभियानों के साथ मजबूत किया गया। मीरजापुर में लाइटनिंग मिटिगेशन प्रोजेक्ट इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। इसी का परिणाम है कि वर्ष 2024-25 और वर्ष 2025-26 में अब तक आकाशीय बिजली गिरने से मौतों की संख्या घटकर 14 रह गई, जबकि वर्ष 2019 में 30, वर्ष 2020 में 28, वर्ष 2021 में 23 और वर्ष 2022 में 30 लोगों की मौत बिजली गिरने से हुई थी।

*वैज्ञानिक अध्ययन के बाद चिन्हित हुए ‘लाइटनिंग हॉटस्पॉट’*
मीरजापुर भौगोलिक संरचना, पथरीली जमीन और खनन कार्यों के चलते आकाशीय बिजली की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील जिला रहा है। ऐसे में बीते कुछ वर्षों में आकाशीय बिजली गिरने से कई लोगों की जान चली गयी। योगी सरकार ने मामले का संज्ञान लेकर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिये। इस पर डीoडीoएमoए मीरजापुर द्वारा पिछले चार से पांच वर्षों के आंकड़ों का गहन विश्लेषण किया गया। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के परियोजना आंकलन, आईआईटीएम पुणे के वज्रपात गिरने के स्थलीय डाटा, आईoआईoटी रुड़की के पढ़े लोगों द्वारा किए गए शोध और सीoआरoओoपीoसी के द्वारा वज्रपात के परिप्रेक्ष में जनपद का किया गया संवेदनशीलता के परिप्रेक्ष्य में आंकलन के अनुसार  पता लगाया गया कि अधिकांश मौतें खुले मैदान, पेड़ के नीचे, जल स्रोतों के पास और कच्चे मकानों में होती हैं। अध्ययन के बाद मीरजापुर में लाइटनिंग हॉटस्पॉट मैप तैयार किया गया, जिसके आधार पर सुरक्षा उपाय तय किए गए।

*लाइटनिंग हॉटस्पॉट मैप के आधार पर 80 स्थानों पर लगाए गए अर्ली स्ट्रीमर एमिशन के लाइटनिंग अरेस्टर*
लाइटनिंग हॉटस्पॉट मैप के आधार पर पहले चरण में मीरजापुर के चिन्हित संवेदनशील क्षेत्रों में 80 स्थानों पर अर्ली स्ट्रीमर एमिशन (ईoएसoई) आधारित लाइटनिंग अरेस्टर लगाए गए। बता दें कि ये उपकरण बिजली को सुरक्षित रूप से धरती में प्रवाहित कर देते हैं, जिससे आसपास के क्षेत्र में जान-माल की हानि नहीं होती। कई अरेस्टर में लगे इंडिकेटर यह दर्शाते हैं कि उन्होंने कई बार बिजली को सफलतापूर्वक अवशोषित किया है।

*पूरे जिले में चलाया गया वज्रपात सुरक्षा कार्यक्रम*
योगी सरकार की रणनीति केवल तकनीक तक सीमित नहीं रही बल्कि ब्लॉक, जिला और ग्राम पंचायत स्तर पर व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। ‘वज्रपात सुरक्षा कार्यक्रम’ के तहत अधिकारियों, ग्राम प्रधानों, लेखपालों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, युवाओं और आम नागरिकों को बिजली गिरने के दौरान क्या करें और क्या न करें, इसकी भी जानकारी दी गई। इसके साथ ही ‘दामिनी’ मोबाइल ऐप के माध्यम से समय से चेतावनी प्राप्त करने का प्रशिक्षण भी दिया गया। इतना ही नहीं मीरजापुर की सभी 809 ग्राम पंचायतों में माइकिंग, जागरूकता रथ, पोस्टर, वीडियो और पंचायत स्तरीय कार्यशालाओं के जरिए संदेश पहुंचाया गया। सिनेमा हॉलों में भी बिजली से बचाव पर आधारित वीडियो दिखाए गए। सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से आईएमडी द्वारा जारी चेतावनियों को तेजी से आमजन तक पहुंचाया गया। योगी सरकार के इन प्रयासों का ही नतीजा है कि मीरजापुर में वर्तमान में आकाशीय बिजली गिरने से होने वाली मौतों की संख्या में 50 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गयी, वहीं इसे शून्य करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने से सांसारिक बंधनों से मिलती है मुक्ति -प्रेम मूर्ति महराज


ड्रमंडगंज, मिर्जापुर।क्षेत्र के बबुरा कलां गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पहले दिन मंगलवार को वृन्दावन से पधारे कथावाचक पंडित प्रेम मूर्ति महराज ने श्रीमद्भागवत कथा के महात्म्य पर प्रकाश डाला। कथावाचक ने कहा कि शुकदेव जी महराज ने राजा परीक्षित को भागवत कथा सुनाई जिससे उन्हें अभय की प्राप्ति हुई। श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण से अज्ञानता का नाश हो जाता है और भगवान की कृपा प्राप्त होती है।कथावाचक ने कहा कि भगवान की प्राप्ति के लिए गुरू का होना आवश्यक है क्योंकि वही वही भगवत्प्राप्ति का उपाय और मार्ग बताते हैं। भागवत कथा के श्रवण से मनुष्य पाप और संताप से मुक्त हो जाता है।

कथा व्यास ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने से सांसारिक बंधनों से मुक्ति मिल जाती है।कथा के बाद आरती और भक्तों में प्रसाद का वितरण किया गया।इस दौरान कथा यजमान इन्द्रकली मिश्रा, ओमप्रकाश मिश्र, शांती देवी, हरिशंकर मिश्र,आनंद नाथ मिश्र, सूर्य प्रकाश मिश्र, शंकर सिंह,कृष्णा प्रसाद दुबे सहित सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे।