रोज अदरक पानी पीना सही है या नहीं? वजन घटाने से पहले जान लें इसके फायदे
आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में लोग तेजी से वजन घटाने और फिट रहने के आसान तरीकों की तलाश में रहते हैं। ऐसे में अदरक पानी एक ऐसा देसी नुस्खा बनकर उभरा है, जिसे लोग बिना ज्यादा सोचे-समझे रोज़ाना पीने लगे हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या रोज अदरक पानी पीना वाकई फायदेमंद है या इसका जरूरत से ज्यादा सेवन नुकसान भी पहुंचा सकता है? अदरक पानी क्यों माना जाता है असरदार?अदरक में मौजूद जिंजरॉल और शोगाओल जैसे तत्व शरीर के मेटाबॉलिज़्म को तेज करते हैं। इससे पाचन बेहतर होता है और शरीर में जमा अतिरिक्त चर्बी धीरे-धीरे कम होने लगती है। अदरक पानी शरीर को अंदर से गर्म रखता है, जिससे सर्दियों में इम्युनिटी भी मजबूत होती है। अदरक पानी पीने का सही समयअदरक पानी पीने का सबसे अच्छा समय सुबह खाली पेट माना जाता है। इससे शरीर का डाइजेस्टिव सिस्टम एक्टिव होता है और दिनभर कैलोरी बर्न करने की क्षमता बढ़ती है। कुछ लोग इसे रात में भी पीते हैं, लेकिन रात में अदरक पानी पीने से कुछ लोगों को एसिडिटी या बेचैनी हो सकती है। अदरक पानी के प्रमुख फायदेअदरक पानी पाचन तंत्र को मजबूत करता है और गैस, अपच, कब्ज जैसी समस्याओं में राहत देता है। यह शरीर को डिटॉक्स करता है और टॉक्सिन्स बाहर निकालने में मदद करता है।
वजन घटाने के साथ-साथ अदरक पानी जोड़ों के दर्द और सूजन में भी राहत देता है। सर्दी-खांसी, गले में खराश और वायरल इंफेक्शन से बचाव में भी यह कारगर है। नियमित सेवन से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और शरीर में आलस्य कम महसूस होता है। कितने दिन तक पीना चाहिए अदरक पानी?अदरक पानी को लगातार लंबे समय तक पीना सही नहीं माना जाता। अगर आप सामान्य स्वास्थ्य के लिए इसका सेवन कर रहे हैं, तो 15 से 20 दिन पर्याप्त हैं।
वजन घटाने के उद्देश्य से इसे 3 से 4 हफ्ते तक पिया जा सकता है। इसके बाद कम से कम एक हफ्ते का ब्रेक लेना जरूरी है, ताकि शरीर में अत्यधिक गर्मी न बढ़े।अदरक पानी के नुकसान भी जानना जरूरीअदरक की तासीर गर्म होती है। जरूरत से ज्यादा सेवन करने पर पेट में जलन, एसिडिटी, मुंह में छाले या नींद की समस्या हो सकती है। जिन लोगों को पेट से जुड़ी गंभीर समस्या, हाई ब्लड प्रेशर या गर्भावस्था है, उन्हें अदरक पानी पीने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।अदरक पानी सेहत के लिए फायदेमंद जरूर है, लेकिन इसे चमत्कारी उपाय मानकर जरूरत से ज्यादा पीना सही नहीं है। सही मात्रा, सही समय और सीमित अवधि तक सेवन करने से ही इसका पूरा लाभ मिलता है।
चेहरे पर जमे मैल को साफ करने का सबसे असरदार उपाय

सर्दियों के मौसम में त्वचा को सबसे ज्यादा नुकसान रूखापन और डेड स्किन से होता है। ठंडी हवा और कम नमी के कारण स्किन ड्राई हो जाती है, जिससे चेहरे पर धीरे-धीरे मृत त्वचा की एक परत जमने लगती है। जब इस पर धूल-मिट्टी और प्रदूषण चिपक जाता है, तो चेहरा मैला और बेजान नजर आने लगता है। ऐसे में अगर आप केमिकल वाले प्रोडक्ट्स से बचते हुए कोई आसान घरेलू उपाय अपनाना चाहते हैं, तो बेसन आपके लिए सबसे असरदार विकल्प हो सकता है।
चेहरे पर जमा मैल क्यों दिखने लगता है?
त्वचा की ऊपरी परत समय के साथ खुद को रिन्यू करती रहती है, लेकिन जब डेड स्किन समय पर साफ नहीं होती, तो वह चेहरे पर जमने लगती है। सर्दियों में पसीना कम निकलने के कारण यह परत आसानी से हट नहीं पाती। नतीजा यह होता है कि स्किन डल, रूखी और गंदी नजर आने लगती है।
चेहरे का मैल साफ करने का सबसे असरदार घरेलू उपाय
चेहरे की गहराई से सफाई के लिए हफ्ते में एक बार स्क्रबिंग बेहद जरूरी है। इसके लिए बेसन से बेहतर और सुरक्षित कोई उपाय नहीं माना जाता।
तरीका 1: बेसन और दूध का स्क्रब
2 चम्मच बेसन लें
जरूरत अनुसार कच्चा दूध मिलाकर गाढ़ा पेस्ट बनाएं
इसे चेहरे पर लगाकर 10 मिनट तक छोड़ दें
अब हल्के हाथों से गोल-गोल घुमाते हुए स्क्रब करें
अगर पेस्ट सूख जाए तो थोड़ा पानी लगाकर रगड़ें
नॉर्मल पानी से चेहरा धो लें
यह तरीका डेड स्किन, गंदगी और चेहरे पर जमे मैल को पूरी तरह साफ कर देता है और त्वचा में तुरंत निखार लाता है।
तरीका 2: ऑयली स्किन के लिए बेसन और दही
अगर आपकी स्किन ज्यादा तैलीय है, तो बेसन में दूध की जगह दही मिलाएं।
चेहरे पर लेप लगाएं
5 मिनट हल्के हाथों से स्क्रब करें
फिर पानी से धो लें
इसके बाद हल्का मॉइश्चराइजर जरूर लगाएं।
कितनी बार करें यह स्क्रब?
हफ्ते में 1 बार पर्याप्त है
महीने में 4 बार से ज्यादा न करें
ज्यादा रगड़ने से स्किन में जलन हो सकती है
चेहरे पर बेसन लगाने के फायदे
डेड स्किन और गहराई से जमी गंदगी साफ करता है
स्किन की रंगत निखारता है
अतिरिक्त तेल सोखकर मुंहासों को कम करता है
दाग-धब्बे हल्के करने में मदद करता है
धूप से हुई टैनिंग हटाता है
रोमछिद्रों को साफ कर स्किन को स्मूद बनाता है
त्वचा को मुलायम और चमकदार बनाता है
जरूरी सावधानी
अगर आपकी त्वचा बहुत संवेदनशील है, तो पहले पैच टेस्ट जरूर करें। ज्यादा जोर से स्क्रब न करें और स्क्रब के बाद सनस्क्रीन या मॉइश्चराइजर जरूर लगाएं।
बरसाना की विश्वप्रसिद्ध लठमार होली का ऐलान, तीन दिन रंग और भक्ति में डूबेगा ब्रज

बरसाना और नंदगांव में इस बार की होली का आयोजन 24 से 26 फरवरी तक किया जाएगा। उत्सव की शुरुआत श्रीजी मंदिर में लड्डू होली से होगी। भक्तों का उत्साह इस पर्व में और भी बढ़ जाएगा क्योंकि फाग गीतों और प्रसाद के साथ पूरा धाम रंग में रंग जाएगा। 25 फरवरी को बरसाना में लठमार होली होगी। गलियों में हुरियारिन घूंघट ओढ़कर लाठियों के साथ उतरेंगी, और नंदगांव के हुरियारे ढाल सजाकर राधा के आंगन में प्रवेश करेंगे। जय राधे के उद्घोष के साथ यह लीला मनमोहक रूप लेगी। 26 फरवरी को नंदगांव में इसी प्रेम रस की लीला होगी। बरसाने की गोपियां फाग गीतों और ढोल-नगाड़ों की ताल पर थिरकेंगी। प्रशासन और मंदिर सेवायत ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए हर संभव इंतजाम किए हैं। बरसाना की होली केवल तीन दिन का उत्सव नहीं है, बल्कि चालीस दिवसीय भक्ति परंपरा का हिस्सा है। वसंत पंचमी से समाज गायन शुरू होता है और महाशिवरात्रि को लठमार होली की प्रथम चौपाई के साथ मुख्य उत्सव प्रारंभ होता है। यह परंपरा विक्रम संवत 1569 से जारी है और आज भी उसी उल्लास और मर्यादा के साथ निभाई जाती है।
Indian Army Day: पीएम मोदी ने जवानों को किया नमन बोले- भारतीय सेना निस्वार्थ सेवा और राष्ट्र रक्षा की मिसाल
भारतीय सेना दिवस के अवसर पर देशभर में वीर जवानों के शौर्य, बलिदान और अनुशासन को याद किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मौके पर भारतीय सेना को नमन करते हुए कहा कि सेना निस्वार्थ सेवा और राष्ट्र रक्षा की सजीव प्रतीक है। उन्होंने कहा कि हमारे सैनिक कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी अटूट संकल्प के साथ देश की सुरक्षा करते हैं और उनके साहस से हर भारतीय को भरोसा मिलता है।प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट साझा करते हुए कहा कि भारतीय सेना के जवान कर्तव्य के प्रति समर्पण और त्याग की मिसाल हैं। उन्होंने शहीद सैनिकों को भी श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि देश उन वीरों को हमेशा सम्मान और कृतज्ञता के साथ याद रखेगा, जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा में अपने प्राण न्योछावर कर दिए।राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी सेना दिवस पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारतीय सेना ने हमेशा देश की एकता, संप्रभुता और अखंडता की रक्षा की है। उन्होंने कहा कि सीमाओं की सुरक्षा के साथ-साथ सेना आपदा प्रबंधन, मानवीय सहायता और संकट के समय भी अहम भूमिका निभाती है। सैनिकों का “राष्ट्र प्रथम” का भाव पूरे देश को प्रेरित करता है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय सेना ने अपने अनुशासन, पेशेवर दक्षता और मानवीय दृष्टिकोण के कारण वैश्विक स्तर पर सम्मान अर्जित किया है। उन्होंने कहा कि सरकार एक आधुनिक, आत्मनिर्भर और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार सेना के निर्माण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और गृह मंत्री अमित शाह ने भी सेना दिवस पर जवानों और उनके परिवारों को शुभकामनाएं दीं। अमित शाह ने कहा कि सेना के शौर्य की गूंज इतिहास के पन्नों में दर्ज है, जो हर पीढ़ी को देशभक्ति की प्रेरणा देती है।कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी सेना के योगदान को नमन करते हुए कहा कि राष्ट्र हमेशा सैनिकों के साहस और बलिदान का ऋणी रहेगा। सेना दिवस हर साल 15 जनवरी को मनाया जाता है। यह दिन 1949 में फील्ड मार्शल के.एम. करियाप्पा के भारतीय सेना के पहले भारतीय कमांडर-इन-चीफ बनने की स्मृति में मनाया जाता है।
डिजिटल शिक्षा से आत्मनिर्भर बनेंगी छात्राएं

समाज कल्याण विभाग और मदद फाउंडेशन के बीच हुआ एमओयू, दो बालिका विद्यालयों को दिए टैबलेट

पायलट प्रॉजेक्ट के रूप में गोरखपुर और महाराजगंज के सर्वाेदय बालिका विद्यालयों से पहल की शुरुआत

लखनऊ। छात्राओं के समावेशी विकास, डिजिटल साक्षरता और तकनीकी सशक्तिकरण को नई दिशा देने के उद्देश्य से समाज कल्याण विभाग द्वारा एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। इसी क्रम में मंगलवार को गोमती नगर स्थित भागीदारी भवन में मदद फाउंडेशन के सहयोग से समन्वय बैठक और टैबलेट वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान समाज कल्याण विभाग और मदद फाउंडेशन के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री असीम अरुण और मदद फाउंडेशन के फाउंडर श्री राजेश मणि उपस्थित रहे। 

हर बालिका विद्यालयों को 20-20 टैबलेट
कार्यक्रम के दौरान जय प्रकाश नारायण सर्वाेदय बालिका विद्यालय, गोरखपुर और महराजगंज जनपदों के प्रधानाचार्यों को कुल 40 टैबलेट प्रदान किए गए, जो संबंधित विद्यालयों की छात्राओं के शैक्षणिक उपयोग हेतु उपलब्ध कराए जाएंगे। हर विद्यालय को 20-20 टैबलेट दिए गए हैं। यह पहल पायलट प्रॉजेक्ट के रूप में शुरू की गई है, जिसकी सफलता के आधार पर भविष्य में अन्य विद्यालयों को भी टैबलेट उपलब्ध करवाए जाने की योजना है।

‘डिजिटल शिक्षा समय की अनिवार्य आवश्यकता’
कार्यक्रम में राज्य मंत्री श्री असीम अरुण ने टैबलेट वितरित करते हुए कहा कि डिजिटल शिक्षा आज के समय की अनिवार्य आवश्यकता है। तकनीकी संसाधनों के माध्यम से छात्राओं को न केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी, बल्कि वे आत्मनिर्भर भी बन सकेंगी। उन्होंने इस पहल को बालिकाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक सराहनीय और दूरदर्शी कदम बताया।

‘शिक्षा के क्षेत्र में एक सार्थक प्रयास’
कार्यक्रम में उपस्थित मदद फाउंडेशन के फाउंडर श्री राजेश मणि ने समाज कल्याण विभाग के साथ इस सहयोग को सामाजिक उत्थान और शिक्षा के क्षेत्र में एक सार्थक प्रयास बताया। कार्यक्रम में समाज कल्याण विभाग निदेशक श्री संजीव सिंह, उपनिदेशक श्री आनंद कुमार सिंह, श्री जे राम सहित विभागीय अधिकारी और मदद फाउंडेशन की टीम मौजूद रही।