ईओडब्ल्यू की बड़ी उपलब्धि 7 दिन में 28 फरार आरोपी गिरफ्तार
लखनऊ। मुख्यमंत्री की भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस नीति को धरातल पर उतारते हुए आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (ईओडब्ल्यू) ने प्रदेशभर में बड़ी कार्रवाई की है। लंबित विवेचनाओं को गति देने और वर्षों से फरार चल रहे आर्थिक अपराधियों की गिरफ्तारी के उद्देश्य से ईओडब्ल्यू द्वारा 5 जनवरी 2026 से 11 जनवरी 2026 तक विशेष अभियान “ऑपरेशन शिकंजा” चलाया गया। इस अभियान के तहत उत्तर प्रदेश और दिल्ली के विभिन्न जनपदों से कुल 28 वांछित अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया, जिसे ईओडब्ल्यू की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इस विशेष अभियान को सफल बनाने के लिए ईओडब्ल्यू मुख्यालय और सेक्टर स्तर पर कुल 8 विशेष टीमें गठित की गई थीं। इनके साथ ही सेंट्रल क्रैक टीम को भी सक्रिय रूप से लगाया गया। टीमों ने अलग-अलग जनपदों में सुनियोजित ढंग से छापेमारी और धरपकड़ की, जिसके परिणामस्वरूप लंबे समय से फरार चल रहे आर्थिक अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। अभियान के दौरान गाजियाबाद के बहुचर्चित श्री बालाजी हाइटेक कंस्ट्रक्शन्स प्राइवेट लिमिटेड घोटाले में अहम गिरफ्तारी की गई। करीब 100 करोड़ रुपये के इस घोटाले में कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर, डायरेक्टर और कुछ बैंक अधिकारियों पर भोली-भाली जनता से धोखाधड़ी का आरोप है। आरोप है कि फ्लैट आवंटन के नाम पर लोगों को गुमराह कर बैंक से मिलीभगत कर लोन दिलवाया गया और फिर उसी फ्लैट को दूसरे या तीसरे व्यक्ति को आवंटित कर धन का गबन किया गया। इस मामले में गाजियाबाद जनपद में कुल 38 मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें से 19 मामलों की विवेचना ईओडब्ल्यू द्वारा की जा रही है। इसी क्रम में नीरज कुमार मिश्रा, मैनेजर (एडमिन एंड फाइनेंस), निवासी नोएडा को 9 जनवरी 2026 को गिरफ्तार किया गया। नीरज मिश्रा वर्ष 2009 से 2014 तक कंपनी में कार्यरत था और लोन अप्रूवल, भुगतान मांग, अलॉटमेंट लेटर तैयार करने तथा कस्टमर रिलेशनशिप मैनेजमेंट जैसे महत्वपूर्ण कार्य देखता था। वर्ष 2018 में उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा वीडीओ, समाज कल्याण पर्यवेक्षक और ग्राम पंचायत अधिकारी के 1953 पदों पर भर्ती परीक्षा आयोजित की गई थी। परीक्षा में व्यापक धांधली की शिकायत मिलने पर जांच ईओडब्ल्यू को सौंपी गई। जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद मामला दर्ज किया गया। ऑपरेशन शिकंजा के तहत इस घोटाले में कुल 7 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें 6 अभ्यर्थी और 1 निजी कंपनी का कर्मचारी शामिल है। पुष्टि हुई है कि गिरफ्तार आरोपी परीक्षा प्रक्रिया में धांधली में संलिप्त थे। गिरफ्तार अभियुक्तों में अरुण कुमार, कर्मवीर, अंकुश यादव, अमर सिंह, उमेशचंद्र, अमन कुमार और एसआरएन डाटा क्रिएट सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड का कर्मचारी उमेश पाल शामिल हैं। भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार की संयुक्त आईएसएसडीएपफ आवास योजना में गबन के मामले में भी ईओडब्ल्यू ने बड़ी कार्रवाई की। नगर पंचायत मुशाफिरखाना, जनपद अमेठी में 534 आवासों के निर्माण हेतु 7.15 करोड़ रुपये के गबन के आरोप में राधेश्याम श्रीवास्तव, रेजीडेंट इंजीनियर को 11 जनवरी 2026 को गिरफ्तार किया गया। गौरतलब है कि आईएसएसडीपी योजना का उद्देश्य शहरी गरीबों को सुरक्षित पक्का आवास उपलब्ध कराना और मलिन बस्तियों में सड़क, पानी, बिजली, नाली और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं का विकास करना है। इस योजना में गबन को गंभीर अपराध मानते हुए ईओडब्ल्यू ने सख्त कार्रवाई की है। ईओडब्ल्यू की टीमों ने महज 7 दिनों के भीतर 28 वांछित अभियुक्तों की गिरफ्तारी कर यह स्पष्ट संदेश दिया है कि आर्थिक अपराधियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। “ऑपरेशन शिकंजा” को भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रदेश सरकार की सख्त नीति का मजबूत उदाहरण माना जा रहा है।ईओडब्ल्यू ने संकेत दिए हैं कि आगे भी ऐसे विशेष अभियान जारी रहेंगे और आर्थिक अपराधों में संलिप्त फरार आरोपियों पर शिकंजा और कसा जाएगा।
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लखनऊ। मुख्यमंत्री की भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस नीति को धरातल पर उतारते हुए आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (ईओडब्ल्यू) ने प्रदेशभर में बड़ी कार्रवाई की है। लंबित विवेचनाओं को गति देने और वर्षों से फरार चल रहे आर्थिक अपराधियों की गिरफ्तारी के उद्देश्य से ईओडब्ल्यू द्वारा 5 जनवरी 2026 से 11 जनवरी 2026 तक विशेष अभियान “ऑपरेशन शिकंजा” चलाया गया। इस अभियान के तहत उत्तर प्रदेश और दिल्ली के विभिन्न जनपदों से कुल 28 वांछित अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया, जिसे ईओडब्ल्यू की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इस विशेष अभियान को सफल बनाने के लिए ईओडब्ल्यू मुख्यालय और सेक्टर स्तर पर कुल 8 विशेष टीमें गठित की गई थीं। इनके साथ ही सेंट्रल क्रैक टीम को भी सक्रिय रूप से लगाया गया। टीमों ने अलग-अलग जनपदों में सुनियोजित ढंग से छापेमारी और धरपकड़ की, जिसके परिणामस्वरूप लंबे समय से फरार चल रहे आर्थिक अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। अभियान के दौरान गाजियाबाद के बहुचर्चित श्री बालाजी हाइटेक कंस्ट्रक्शन्स प्राइवेट लिमिटेड घोटाले में अहम गिरफ्तारी की गई। करीब 100 करोड़ रुपये के इस घोटाले में कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर, डायरेक्टर और कुछ बैंक अधिकारियों पर भोली-भाली जनता से धोखाधड़ी का आरोप है। आरोप है कि फ्लैट आवंटन के नाम पर लोगों को गुमराह कर बैंक से मिलीभगत कर लोन दिलवाया गया और फिर उसी फ्लैट को दूसरे या तीसरे व्यक्ति को आवंटित कर धन का गबन किया गया। इस मामले में गाजियाबाद जनपद में कुल 38 मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें से 19 मामलों की विवेचना ईओडब्ल्यू द्वारा की जा रही है। इसी क्रम में नीरज कुमार मिश्रा, मैनेजर (एडमिन एंड फाइनेंस), निवासी नोएडा को 9 जनवरी 2026 को गिरफ्तार किया गया। नीरज मिश्रा वर्ष 2009 से 2014 तक कंपनी में कार्यरत था और लोन अप्रूवल, भुगतान मांग, अलॉटमेंट लेटर तैयार करने तथा कस्टमर रिलेशनशिप मैनेजमेंट जैसे महत्वपूर्ण कार्य देखता था। वर्ष 2018 में उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा वीडीओ, समाज कल्याण पर्यवेक्षक और ग्राम पंचायत अधिकारी के 1953 पदों पर भर्ती परीक्षा आयोजित की गई थी। परीक्षा में व्यापक धांधली की शिकायत मिलने पर जांच ईओडब्ल्यू को सौंपी गई। जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद मामला दर्ज किया गया। ऑपरेशन शिकंजा के तहत इस घोटाले में कुल 7 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें 6 अभ्यर्थी और 1 निजी कंपनी का कर्मचारी शामिल है। पुष्टि हुई है कि गिरफ्तार आरोपी परीक्षा प्रक्रिया में धांधली में संलिप्त थे। गिरफ्तार अभियुक्तों में अरुण कुमार, कर्मवीर, अंकुश यादव, अमर सिंह, उमेशचंद्र, अमन कुमार और एसआरएन डाटा क्रिएट सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड का कर्मचारी उमेश पाल शामिल हैं। भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार की संयुक्त आईएसएसडीएपफ आवास योजना में गबन के मामले में भी ईओडब्ल्यू ने बड़ी कार्रवाई की। नगर पंचायत मुशाफिरखाना, जनपद अमेठी में 534 आवासों के निर्माण हेतु 7.15 करोड़ रुपये के गबन के आरोप में राधेश्याम श्रीवास्तव, रेजीडेंट इंजीनियर को 11 जनवरी 2026 को गिरफ्तार किया गया। गौरतलब है कि आईएसएसडीपी योजना का उद्देश्य शहरी गरीबों को सुरक्षित पक्का आवास उपलब्ध कराना और मलिन बस्तियों में सड़क, पानी, बिजली, नाली और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं का विकास करना है। इस योजना में गबन को गंभीर अपराध मानते हुए ईओडब्ल्यू ने सख्त कार्रवाई की है। ईओडब्ल्यू की टीमों ने महज 7 दिनों के भीतर 28 वांछित अभियुक्तों की गिरफ्तारी कर यह स्पष्ट संदेश दिया है कि आर्थिक अपराधियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। “ऑपरेशन शिकंजा” को भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रदेश सरकार की सख्त नीति का मजबूत उदाहरण माना जा रहा है।ईओडब्ल्यू ने संकेत दिए हैं कि आगे भी ऐसे विशेष अभियान जारी रहेंगे और आर्थिक अपराधों में संलिप्त फरार आरोपियों पर शिकंजा और कसा जाएगा।

लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में हुए हंगामे के मामले में अब तक FIR दर्ज न होने से डॉक्टरों में भारी नाराज़गी है। इसी को लेकर KGMU के डॉक्टरों की एक आपात बैठक आयोजित की गई, जिसमें बड़ा निर्णय लिया गया।
3 hours ago
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