100 से 125 दिन रोजगार की गारंटी, फर्जीवाड़े पर लगेगा लगाम: औरंगाबाद में भाजपा एमएलसी

ग्रामीण रोजगार को स्थायी आजीविका से जोड़ने की पहल

,औरंगाबाद। केंद्र सरकार ने ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह विकसित भारत–रोजगार एवं आजीविका मिशन की गारंटी (ग्रामीण) यानी VB-G RAM G अधिनियम, 2025 लागू किया है। इस बदलाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी की ओर से औरंगाबाद के दानी बिगहा स्थित सर्किट हाउस में प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया।

प्रेस वार्ता में भाजपा के विधान परिषद सदस्य दिलीप कुमार सिंह, विधायक त्रिविक्रम नारायण सिंह सहित एनडीए के घटक दलों के जिला अध्यक्ष उपस्थित रहे। एमएलसी दिलीप कुमार सिंह ने कहा कि यह नया कानून केवल नाम परिवर्तन नहीं है, बल्कि ग्रामीण रोजगार को अल्पकालिक राहत से निकालकर स्थायी विकास और आजीविका सृजन से जोड़ने की एक व्यापक पहल है।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण भारत में लंबे समय से मौसमी बेरोजगारी, कृषि पर अत्यधिक निर्भरता और आय की अनिश्चितता बड़ी चुनौती रही है। वर्ष 2006 में लागू मनरेगा ने मजदूरी रोजगार की कानूनी गारंटी देकर लाखों परिवारों को सहारा दिया, लेकिन समय के साथ इसमें भ्रष्टाचार, कमजोर परिसंपत्ति निर्माण, भुगतान में देरी और निगरानी की कमी जैसी गंभीर समस्याएं सामने आईं। इन्हीं कमियों को दूर करने के उद्देश्य से सरकार ने VB-G RAM G अधिनियम को विकसित भारत 2047 के रोडमैप से जोड़ा है

विधायक त्रिविक्रम नारायण सिंह ने बताया कि नए अधिनियम के तहत ग्रामीण परिवारों को मिलने वाली रोजगार गारंटी को 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। साथ ही किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए राज्यों को बुआई और कटाई के मौसम में 60 दिनों तक कार्य विराम घोषित करने का अधिकार दिया गया है, ताकि कृषि श्रम बाजार पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े।

उन्होंने दावा किया कि तकनीक को पहली बार कानून का अनिवार्य हिस्सा बनाया गया है। बायोमेट्रिक सत्यापन, जियो-टैगिंग, सैटेलाइट इमेजरी, मोबाइल ऐप और एआई आधारित निगरानी से फर्जी जॉब कार्ड, फर्जी हाजिरी और भुगतान घोटालों पर प्रभावी रोक लगेगी, जिससे वास्तविक लाभार्थियों को पारदर्शी तरीके से लाभ मिल सकेगा। इस प्रेसवार्ता में जदयु जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह ,बीजेपी जिलाध्यक्ष बिजेंद्र चंद्रवंशी लोजपा जिला अध्यक्ष चंद्रभूषण सिंह उर्फ सोनू सिंह बीजेपी के पूर्व जिला अध्यक्ष पुरुषोत्तम सिंह भाजपा मीडिया प्रभारी दीपक कुमार सहित अन्य नेता उपस्थित है

औरंगाबाद से धीरेन्द्र पाण्डेय

भाजपा महात्मा गांधी के विचारों से घबराकर उनके नाम को इतिहास से मिटाने का कर रही प्रयास : प्रदेश अध्यक्ष

औरंगाबाद। शहर के होटल डायमंड में शनिवार को जिला कांग्रेस कमेटी ने मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत प्रेस वार्ता आयोजित की गई। प्रेस वार्ता में बिहार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार शामिल हुए। प्रेस में प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि नरेंद्र मोदी की सरकार मनरेगा को कमजोर करने और गरीब मजदूरों के अधिकारों से खिलवाड़ कर रही है। कहा कि लोकसभा के पिछले सत्र की समाप्ति के बाद जिस तरह से बिना व्यापक चर्चा के एक विधेयक लाकर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का नाम बदलकर भीबी-जी-आरएम जी कर दिया गया, वह मजदूर विरोधी और गरीब विरोधी कदम है। कहा कि मनरेगा का नाम बदलने के पीछे भाजपा ने एक तीर से तीन शिकार करने की कोशिश की है। पहला महात्मा गांधी के नाम और उनकी विचारधारा को योजनाबद्ध तरीके से हटाने का प्रयास किया गया है। बताया कि गांधी जी सत्य और अहिसा के मार्ग पर चलकर देश को आज़ादी दिलाने वाले महापुरुष थे और आज भी पूरा देश उनके विचारों से प्रेरणा लेता है। भाजपा गांधी के विचारों से घबराकर उनके नाम को इतिहास से मिटाना चाहती है। दूसरा, उन्होंने आरोप लगाया कि इसके पीछे आरएसएस और गोडसेवादी विचारधारा को बढ़ावा देने की मंशा है। तीसरा और सबसे गंभीर पहलू यह है कि इस नए कानून के तहत सरकार ने खुद को यह अधिकार दे दिया है कि वह जब चाहे इस योजना को बंद कर सकती है। कहा कि मनरेगा योजना पूर्व प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिह के कार्यकाल में और सोनिया गांधी के नेतृत्व में लाई गई थी, जिसका उद्देश्य उन गरीब ग्रामीण परिवारों को न्यूनतम आर्थिक सुरक्षा देना था, जिनके पास न रहने का ठिकाना था और न ही नियमित आय का कोई साधन। यह योजना केवल रोजगार नहीं, बल्कि गरीबों की गरिमा और सम्मान से जुड़ी हुई थी। कहा कि भाजपा यह तर्क दे रही है कि नई योजना में 1०० दिन के बजाय 125 दिन की रोजगार गारंटी दी जा रही है लेकिन असल सच्चाई यह है कि नए अधिनियम में राज्य सरकारों के अधिकार लगभग समाप्त कर दिए गए हैं। योजना को मिशन का रूप देकर यह स्पष्ट संकेत दिया गया है कि यह स्थायी अधिकार नहीं, बल्कि अस्थायी अभियान की तरह चलाई जाएगी, जिसे सरकार अपनी सुविधा के अनुसार कभी भी समाप्त कर सकती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पहले मनरेगा के तहत जल संरक्षण, ग्रामीण सड़क, तालाब और अन्य ग्रामीण विकास से जुड़े कार्य होते थे, लेकिन अब नई व्यवस्था में पक्का निर्माण और शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने की तैयारी है। इससे यह साफ हो जाता है कि यह योजना अब शुद्ध रूप से ग्रामीण रोजगार के लिए नहीं रह गई है। बताया कि मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत बिहार में चरणबद्ध आंदोलन चलाया जाएगा। इसकी शुरुआत पहले ही आठ जनवरी को बेगूसराय और मधुबनी से हो चुकी है। 1० जनवरी से 25 फरवरी तक पूरे राज्य में आंदोलन जारी रहेगा।

11 जनवरी को भूख हड़ताल और प्रतीकात्मक विरोध होगा। औरंगाबाद में अनुग्रह स्मारक के समीप कांग्रेसी नेता और कार्यकताã जिला भूख हड़ताल में शामिल होंगे। 12 से 29 जनवरी तक पंचायत स्तर पर जनसंपर्क अभियान चलेगा। 3० जनवरी को वार्ड स्तरीय शांति मार्च, 31 जनवरी से 6 फरवरी तक जिला स्तरीय धरना, 7 से 15 फरवरी तक विधानसभा घेराव और 16 से 25 फरवरी तक एआईसीसी स्तर की रैलियां आयोजित की जाएंगी। वहीं औरंगाबाद के पूर्व विधायक आनंद शंकर सिह ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि योजना में बदलाव करना अलग बात है परंतु महात्मा गांधी के नाम पर चलने वाली योजना का नाम बदलना उनके अपमान के समान है। कांग्रेस कार्यकताã इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे और हर स्तर पर आंदोलन करेंगे।

प्रदेश अध्यक्ष ने जिले में धान अधिप्राप्ति की स्थिति पर भी चिता जताई और कहा कि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ नहीं मिल पा रहा है। सरकार केवल किसानों के हित में काम करने का ढिढोरा पीट रही है। इस मौके पर कार्यकारी जिलाध्यक्ष महेंद्र यादव, पूर्व जिलाध्यक्ष मृत्युंजय सिह, जिला प्रभारी सत्येंद्र शर्मा, शैलेंद्र दुबे, जिला परिषद सदस्य सुरेंद्र यादव, लुटूर सिह, धर्मेंद्र पासवान, भीम सिह चौहान, सूरज राय, अजय राम गायत्री देवी सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस के नेता व कार्यकताã मौजूद रहे।

नीतीश कुमार के विजन को मिलेगी रफ्तार: औरंगाबाद में आशुतोष कुमार को मिली जद(यू) प्रकोष्ठ की बड़ी जिम्मेदारी।

संवाददाता: धीरेन्द्र पाण्डेय स्थान: औरंगाबाद, बिहार

औरंगाबाद: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की दूरदर्शी सोच और 'टीम बिहार' के संकल्प को धरातल पर उतारने के उद्देश्य से जनता दल (यूनाइटेड) औरंगाबाद ने अपने संगठन में महत्वपूर्ण विस्तार किया है। इसी कड़ी में रामराज्य नगर निवासी आशुतोष कुमार को जद(यू) कला, संस्कृति एवं खेल प्रकोष्ठ का जिला उपाध्यक्ष मनोनीत किया गया है।

संगठनात्मक निष्ठा बनी आधार आशुतोष कुमार की यह नियुक्ति प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष संजीव कुमार शर्मा और ओबरा प्रखंड अध्यक्ष संजय शर्मा की आपसी सहमति से की गई है। पार्टी की ओर से जारी पत्र में बताया गया है कि आशुतोष कुमार की संगठन के प्रति अटूट निष्ठा और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की विकासपरक नीतियों में उनके विश्वास को देखते हुए उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।

कला और खेल से युवाओं को जोड़ने का लक्ष्य जिला अध्यक्ष संजीव कुमार शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री का मानना है कि कला और खेल समाज में अनुशासन और भाईचारा पैदा करने के सबसे सशक्त माध्यम हैं। जद(यू) का यह प्रकोष्ठ स्थानीय कलाकारों और खिलाड़ियों को एक राजनीतिक मंच प्रदान कर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य कर रहा है।

वहीं, ओबरा प्रखंड अध्यक्ष संजय शर्मा ने उम्मीद जताई कि आशुतोष कुमार के नेतृत्व में जिले के युवा रचनात्मक गतिविधियों की ओर आकर्षित होंगे और सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुँचाने में मदद करेंगे।

कार्यकर्ताओं में उत्साह आशुतोष कुमार के मनोनयन के बाद जिले के जद(यू) कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर है। समर्थकों का मानना है कि उनके सामाजिक जुड़ाव और अनुभव से संगठन को नई ऊर्जा मिलेगी। अपनी नियुक्ति पर आभार व्यक्त करते हुए नवनियुक्त जिला उपाध्यक्ष ने कहा कि वे मुख्यमंत्री के विजन को आगे बढ़ाने और संगठन की मजबूती के लिए समर्पित भाव से कार्य करेंगे।

24 साल बाद जिंदा लौटे ‘मृत’ माने गए बुजुर्ग, औरंगाबाद से लापता रामप्रवेश महतो जालंधर के वृद्धाश्रम में मिले

,औरंगाबाद (बिहार)। नियति कब क्या मोड़ ले ले, यह कोई नहीं जानता। औरंगाबाद जिले के भोपतपुर गांव से वर्ष 2001 में लापता हुए रामप्रवेश महतो जिंदा हैं और पंजाब के जालंधर स्थित एक वृद्धाश्रम में सुरक्षित मिले हैं। 24 वर्षों से अपने परिवार से बिछड़े रामप्रवेश महतो अब अपने गांव लौट रहे हैं। रविवार को उनके घर पहुंचने की संभावना है, जहां स्वागत की तैयारियां जोरों पर हैं।

पूर्व मुखिया संतोष कुशवाहा के पिता रामप्रवेश महतो वर्ष 2001 में प्रयागराज कुंभ मेला में स्नान करने के लिए घर से निकले थे। इसके बाद वे वापस नहीं लौटे। परिजनों ने रिश्तेदारियों और संभावित स्थानों पर वर्षों तक खोजबीन की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। धीरे-धीरे उम्मीदें टूटती चली गईं और परिवार ने उन्हें मृत मान लिया।

वर्ष 2009 में रामप्रवेश महतो की पत्नी जसवा देवी का निधन हो गया। सामाजिक परंपराओं के अनुसार, परिजनों ने उन्हें भी मृत मानते हुए पत्नी के साथ रामप्रवेश महतो का पुतला बनाकर दाह संस्कार कर दिया। उस समय किसी को यह अंदाजा भी नहीं था कि वे सैकड़ों किलोमीटर दूर जालंधर में जीवित हैं और एक वृद्धाश्रम में जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

यह चमत्कार कुछ दिन पूर्व तब सामने आया जब औरंगाबाद जिले का एक ट्रक चालक पंजाब के जालंधर स्थित इससेबल गांव पहुंचा। वहां वृद्धाश्रम के संचालक महंत जिंदर मानसिंह ने एक बुजुर्ग के बारे में बताया, जो मगही भाषा में अपने गांव, परिजनों और आसपास के क्षेत्रों का नाम लेते रहते थे। ट्रक चालक ने जब बातचीत की तो बुजुर्ग ने भोपतपुर और आसपास के कई गांवों के नाम सटीक बताए। इसके बाद वृद्धाश्रम संचालक ने गूगल की मदद से इलाके के जनप्रतिनिधियों का नंबर निकाला। एक सरपंच के माध्यम से 23 दिसंबर को पूर्व मुखिया संतोष कुशवाहा से संपर्क हुआ। पिता के जीवित होने की खबर सुनते ही संतोष कुशवाहा भावुक हो गए और साथियों के साथ तुरंत जालंधर रवाना हो गए।

शुक्रवार को वृद्धाश्रम में 24 साल बाद पिता-पुत्र का मिलन हुआ। दोनों की आंखें भर आईं। संतोष कुशवाहा ने कहा कि वर्ष 2016 में जब वे मुखिया बने, तब पिता उनके साथ नहीं थे, जिसका उन्हें हमेशा मलाल रहा। आज उनसे मिलना जीवन की सबसे बड़ी खुशी है। इस असंभव से लगने वाले पुनर्मिलन में ट्रक चालक की भूमिका अहम रही, जिनकी संवेदनशीलता ने एक परिवार को फिर से जोड़ दिया।

ससुराल से लौटते वक्त बुझ गया घर का चिराग औरंगाबाद में दर्दनाक सड़क हादसा: बाइक सवार युवक की मौत,


औरंगाबाद।

जिले के बारुण थाना क्षेत्र में शनिवार को एक हृदयविदारक सड़क हादसे ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। तेज रफ्तार अज्ञात वाहन की चपेट में आने से बाइक सवार युवक की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। मृतक की पहचान बहुआरा गांव निवासी कपिल देव सिंह के 32 वर्षीय पुत्र प्रमोद कुमार के रूप में हुई है। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए।

जानकारी के अनुसार प्रमोद एक दिन पहले शुक्रवार को अपनी पत्नी पूनम को ससुराल छोड़ने गया था। रात में वहीं रुकने के बाद शनिवार को वह अपने घर लौट रहा था। जैसे ही वह श्री सीमेंट फैक्ट्री के पास पहुंचा, पीछे से आ रहे तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने उसे कुचल दिया। टक्कर इतनी भीषण थी कि प्रमोद की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद वाहन चालक गाड़ी लेकर फरार हो गया।

घटना की सूचना मिलते ही परिजन और ग्रामीण घटनास्थल पर पहुंचे। शव को देखकर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। पत्नी, माता-पिता और परिजन शव से लिपटकर चीत्कार करने लगे। इस दर्दनाक मंजर को देखकर मौके पर मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने सड़क पर शव रखकर करीब एक घंटे तक जाम लगाकर विरोध प्रदर्शन किया।

सूचना पर नगर थाना की पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू की, लेकिन आक्रोशित लोगों ने शव उठाने से मना कर दिया। काफी समझाने-बुझाने के बाद स्थिति को नियंत्रित किया गया।

परिजनों ने बताया कि प्रमोद दो भाइयों में बड़ा था। करीब तीन साल पहले उसकी शादी हुई थी और उसका एक साल का बेटा है। वह मुंबई में रहकर एक फैक्ट्री में मजदूरी करता था और करीब एक महीने पहले ही घर आया था। परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी उसी के कंधों पर थी। उसकी मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि श्री सीमेंट फैक्ट्री के आसपास सड़क के दोनों ओर भारी वाहनों की अवैध पार्किंग रहती है। फैक्ट्री से उड़ने वाली धूल के कारण सड़क पर हमेशा धुंध छाई रहती है, जिससे बाइक और छोटे वाहन चालकों को काफी परेशानी होती है। इसी वजह से यहां आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं।

ग्रामीणों ने फैक्ट्री प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। साथ ही सड़क के दोनों ओर अवैध पार्किंग पर रोक लगाने और फैक्ट्री क्षेत्र में नियमित रूप से पानी का छिड़काव कराने की मांग की गई है, ताकि भविष्य में ऐसे दर्दनाक हादसों को रोका जा सके।

नियमों की उड़ती धज्जियां, फ्लाईऐश के धुएं में घुटता

नबीनगर–बारुण रोड

एनटीपीसी बारुण मुख्य मार्ग इन दिनों कानून की बेबसी और प्रशासनिक लापरवाही की तस्वीर बना हुआ है। इस व्यस्त सड़क पर खुले और ओवरलोड वाहनों से धड़ल्ले से फ्लाईऐश का परिवहन किया जा रहा है, जबकि नियम स्पष्ट हैं कि फ्लाईऐश केवल ढंके हुए वाहनों में ही ले जाई जा सकती है। इसके बावजूद न तो परिवहन नियमों का पालन हो रहा है और न ही संबंधित विभागों की ओर से कोई सख्त कार्रवाई दिखाई दे रही है।

दिन-रात दौड़ते फ्लाईऐश लदे वाहनों से उड़ती राख ने सड़क किनारे बसे इलाकों के लोगों का जीवन दूभर कर दिया है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि हवा में घुली फ्लाईऐश के कारण सांस लेना मुश्किल हो गया है। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं में खांसी, दमा, आंखों में जलन और एलर्जी जैसी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। कई लोग सिरदर्द और गले में जलन की शिकायत कर रहे हैं, लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं है। सड़क पर जमी फ्लाईऐश की मोटी परत ने खतरे को और बढ़ा दिया है। फिसलन के कारण दोपहिया वाहन चालक आए दिन हादसों का शिकार हो सकते हैं। पैदल चलने वालों के लिए भी यह मार्ग जान जोखिम में डालने जैसा बन गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि थोड़ी सी लापरवाही किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

नरारी थाना क्षेत्र में पुलिस द्वारा पानी का छिड़काव कर धूल कम करने का प्रयास जरूर किया जाता है, लेकिन बड़ेम थाना क्षेत्र में हालात पूरी तरह बेकाबू हैं। आरोप है कि बड़ेम थाना प्रशासन इस गंभीर समस्या पर आंख मूंदे बैठा है। बीआरबीसीएल से निकलने वाला फ्लाईऐश एनटीपीसी थाना होते हुए बड़ेम थाना क्षेत्र के मुख्य मार्ग से खुले और ओवरलोड वाहनों में भेजा जा रहा है। यह अवैध परिवहन थाना के सामने से होकर गुजरता है, फिर भी न तो ओवरलोडिंग पर कार्रवाई होती है और न ही नियमों को सख्ती से लागू कराया जाता है।

इस स्थिति से स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश है। लोग इसे प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत मान रहे हैं। जनता ने जिला प्रशासन और वरीय अधिकारियों से मांग की है कि फ्लाईऐश परिवहन पर तत्काल रोक लगे, नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाए और लापरवाह अधिकारियों व थाना प्रभारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।

लोगों का साफ कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन नहीं जागा तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होंगे। स्वास्थ्य और सुरक्षा से हो रहे इस खिलवाड़ की जिम्मेदारी पूरी तरह प्रशासन की होगी।

कंपकंपाती ठंड में लिपटा औरंगाबाद, घने कोहरे से थमी रफ्तार

,औरंगाबाद। जिले में मौसम ने अचानक करवट ले ली है। बुधवार की सुबह औरंगाबाद घने कोहरे की चादर में लिपटा नजर आया। हालात यह रहे कि कई इलाकों में दृश्यता 50 मीटर से भी कम दर्ज की गई। कोहरे के चलते सड़क और रेल यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ। हाईवे से लेकर शहर की मुख्य सड़कों और ग्रामीण इलाकों तक वाहन रेंगते नजर आए। कई जगहों पर चालकों ने एहतियातन अपने वाहन रोक दिए, जिससे यातायात व्यवस्था चरमरा गई।

सुबह के समय दफ्तर, स्कूल और अन्य जरूरी कार्यों के लिए निकलने वाले लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। घने कोहरे के कारण वाहन चालकों को सामने का रास्ता साफ दिखाई नहीं दे रहा था, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रही। कोहरे के साथ चल रही ठंडी हवाओं ने ठिठुरन को और बढ़ा दिया।

मौसम विभाग के अनुसार जिले का न्यूनतम तापमान 10 से 11 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया, जबकि अधिकतम तापमान 20 से 21 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहा। हालांकि तापमान सामान्य सर्दी के दायरे में है, लेकिन घना कोहरा और सर्द हवाएं ठंड का असर कहीं अधिक महसूस करा रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मौसम में अब तक का सबसे घना कोहरा आज देखने को मिला।

बढ़ती ठंड और कोहरे का असर आम जनजीवन पर साफ दिखाई दिया। सुबह-सुबह काम पर निकलने वाले मजदूर, छात्र और कर्मचारी ठंड से बचाव करते नजर आए। चौक-चौराहों, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन के आसपास लोग अलाव जलाकर हाथ सेंकते दिखे। हालांकि अब तक प्रशासन की ओर से सार्वजनिक स्थानों पर अलाव की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है, जिससे जरूरतमंद लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

कृषि विज्ञान केंद्र सीरिस के मौसम वैज्ञानिक अनूप चौबे ने बताया कि आने वाले कुछ दिनों तक कुहासा छाए रहने की संभावना है। सुबह और देर रात को कोहरे की तीव्रता अधिक रह सकती है। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि अनावश्यक रूप से सुबह-शाम बाहर निकलने से बचें और गर्म कपड़ों का प्रयोग करें।

मौसम वैज्ञानिक ने पशुपालकों को भी सतर्क रहने को कहा है। उन्होंने बताया कि पशुओं को खुले में न बांधें और ठंड से बचाने के लिए सुरक्षित स्थान पर रखें। घने कोहरे और बढ़ती ठंड को देखते हुए लोगों ने प्रशासन से अलाव, रैन बसेरों और अन्य ठंड से बचाव के इंतजाम जल्द करने की मांग की है।

औरंगाबाद से धीरेन्द्र पाण्डेय

नबीनगर बारुण रोड जर्जर सड़क पर मौत का सफर, प्रशासन बना मूकदर्शक

नवीनगर (औरंगाबाद)। सरकार भले ही विकास और बेहतर सड़कों के दावे करती रहे, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। नवीनगर–बारुण रोड पर बड़ेम थाना क्षेत्र के ससना गांव से एनटीपीसी को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग इन दिनों बदहाली का शिकार होकर “मौत का रास्ता” बन चुका है।

सड़क की हालत इतनी जर्जर है कि इस पर चलना लोगों के लिए रोज जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है, लेकिन पथ निर्माण विभाग और जिला प्रशासन पूरी तरह मूकदर्शक बने हुए हैं यह सड़क एनटीपीसी जैसे बड़े औद्योगिक परियोजना क्षेत्र को जोड़ती है। दिन-रात ओवरलोड फ्लाई ऐश लदे भारी वाहन इसी रास्ते से गुजरते हैं। इन वाहनों के दबाव से सड़क कई जगह धंस चुकी है। जगह-जगह बने बड़े-बड़े गड्ढों में महीनों बाद भी पानी भरा हुआ है।

हालत यह है कि राहगीरों को यह तक समझ में नहीं आता कि आगे सड़क है या गड्ढा। नतीजा यह कि आए दिन बाइक सवार, साइकिल सवार और पैदल यात्री गिरकर घायल हो रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने कई बार पथ निर्माण विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों को इस गंभीर समस्या से अवगत कराया, लेकिन हर बार सिर्फ कागजी आश्वासन ही मिला। मरम्मत के नाम पर आज तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारी किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहे हैं, ताकि उसके बाद खानापूर्ति की जा सके। इस बदहाल सड़क का सबसे ज्यादा खामियाजा स्कूली बच्चों, मरीजों, बुजुर्गों और महिलाओं को भुगतना पड़ रहा है। मरीजों को अस्पताल ले जाना मुश्किल हो गया है। एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन वाहन भी इस रास्ते से गुजरने में कतराते हैं। रात के समय हालात और भी भयावह हो जाते हैं, जब अंधेरे में गड्ढों का अंदाजा लगाना लगभग नामुमकिन हो जाता है।

ग्रामीणों ने सरकार पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री और मंत्री मंचों से बिहार में सड़कों और बिजली व्यवस्था में सुधार के बड़े-बड़े दावे करते हैं, लेकिन ससना गांव के पास नवीनगर–बारुण रोड की हालत कई महीनों से बद से बदतर बनी हुई है। यह सरकार और प्रशासन की संवेदनहीनता का स्पष्ट प्रमाण है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सड़क की मरम्मत नहीं कराई गई तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। अब सवाल यह है कि पथ निर्माण विभाग और जिला प्रशासन कब नींद से जागेगा, या फिर किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही कार्रवाई होगी।

औरंगाबाद से धीरेन्द्र पाण्डेय

जनता दरबार में 18 मामलों पर हुई सुनवाई, डीएम ने त्वरित कार्रवाई के दिए निर्देश

,औरंगाबाद, समाहरणालय, औरंगाबाद में आज जिला पदाधिकारी श्रीमती अभिलाषा शर्मा (भा.प्र.से.) की अध्यक्षता में जनता दरबार आयोजित किया गया। इस अवसर पर जिले के विभिन्न प्रखंडों से आए नागरिकों ने अपनी समस्याओं को सीधे जिला प्रशासन के समक्ष रखा। जनता दरबार का उद्देश्य नागरिकों की समस्याओं का त्वरित निवारण सुनिश्चित करना और प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाना है।

आज के जनता दरबार में कुल 18 परिवादियों ने अपने आवेदन प्रस्तुत किए। इन आवेदनों में मुख्य रूप से बिजली बिल सुधार, भूमि विवाद, आपदा सहायता राशि का भुगतान, विद्यालयों में लगे निष्क्रिय ट्रांसफार्मर हटवाना, भूमि मुआवजा, परिमार्जन, अतिक्रमण तथा अन्य जनसुविधाओं से संबंधित विषय शामिल थे। जनता दरबार में सुभाष रंजन सिन्हा एवं अन्य ने मदनपुर बाईपास के लिए अवार्ड पारित होने के बावजूद मुआवजे की राशि न मिलने की समस्या प्रस्तुत की। वहीं, श्री विजय कुमार सिंह ने भूमि अधिग्रहण की गई जमीन पर अतिक्रमण और रात्रि में पेड़ काटे जाने की शिकायत की।

श्री अमरेश कुमार सिंह एवं अन्य ने देव सूर्यकुण्ड तालाब को अतिक्रमण मुक्त कराने हेतु आवेदन दिया। विद्युत सेवाओं से जुड़ी समस्याओं पर श्री अनिल कुमार ने अपनी शिकायत दर्ज करवाई कि ग्राम बेला में उनका विद्युत कनेक्शन रद्द कर दिया गया है। इसके अलावा, श्री अरविन्द कुमार सिंह ने परिमार्जन कर खेसरा चढ़ाने संबंधी आवेदन प्रस्तुत किया। श्रीमती उषा देवी ने आपदा सहायता राशि का भुगतान न होने की समस्या उठाई।

जनता दरबार में श्री महेश चौहान ने अंचल अधिकारी एवं राजस्व कर्मचारियों द्वारा अवैध रूप से डिमांड खोले जाने की शिकायत की। वहीं, श्रीमती कृष्णामनी देवी ने दाखिल–खारिज अस्वीकृत होने संबंधी आवेदन प्रस्तुत किया। इसके अतिरिक्त श्री सुधीर कुमार ने आवासीय दर पर मुआवजा भुगतान संबंधी समस्या उठाई। अन्य परिवादी भी विभिन्न जनसुविधाओं से जुड़ी शिकायतें लेकर पहुंचे।

डीएम श्रीमती अभिलाषा शर्मा ने सभी आवेदनों को गंभीरतापूर्वक सुना और संबंधित विभागों को त्वरित, निष्पक्ष और समयबद्ध कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी कहा कि जनता दरबार में प्रस्तुत सभी प्रकरणों की नियमित रूप से प्रगति की समीक्षा की जाएगी और निर्धारित समय सीमा के भीतर समस्याओं का समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।

जनता दरबार का यह आयोजन प्रशासन और नागरिकों के बीच सीधे संवाद का माध्यम साबित हुआ। उपस्थित नागरिकों ने जिला प्रशासन की इस पहल की सराहना की और कहा कि इससे समस्याओं के शीघ्र निवारण में मदद मिलेगी। जिला प्रशासन ने भी इस कार्यक्रम को निरंतर जारी रखने का आश्वासन दिया।

इस प्रकार, आज का जनता दरबार नागरिकों की समस्याओं को सुनने और उनका समाधान करने में प्रशासन की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है।

जीएल ग्लोबल स्कूल में वार्षिकोत्स्व सम्पन्न, छात्रों ने दी रंगारंग प्रस्तुति

 ,औरंगाबाद- जिले के बारुण प्रखंड के नरारी कला एनटीपीसी स्थित जीएल ग्लोबल स्कूल का पहला स्थापना दिवस मनाया गया। इस अवसर पर छात्रों ने विभिन्न विधाओं में प्रस्तुति दी।

कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि ने दीप प्रज्वलित और फीता काटकर किया गया।

मुख्य अतिथि के रूप में प्रखण्ड आपूर्ति पदाधिकारी बारुण अमरजीत कुमार सिंह, प्रखण्ड आपूर्ति पदाधिकारी मानपुर गयाजी स्मिता सिन्हा, खैरा सेंट्रल स्कूल के डायरेक्टर जितेंद्र कुमार, मेह पंचायत मुखिया अनु यादव , मेह पंचायत के पैक्स अध्यक्ष रामनारायण सिंह, नरारी कला खुर्द थानाध्यक्ष दिनेश कुमार, महुआंव पंचायत के मुखिया जनेश्वर सिंह, मेह पंचायत समिति सदस्य सुनील गुप्ता मौजूद रहे।

साथ ही कार्यक्रम के प्रस्तुति के बाद छात्रों को मेडल देकर सम्मानित किया गया। मेडल देकर यह सम्मान मानपुर प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी स्मिता सिन्हा द्वारा की गई। इस दौरान स्मिता सिन्हा ने छात्रों को पुरस्कृत करते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की। उन्होंने छात्रों को बताया कि आप लगन और मेहनत से पढ़ेंगे तो आपके आपको जीवन में कुछ भी नामुमकिन नहीं रहेगा। 

कार्यक्रम में छात्रों ने नाटक प्रस्तुति के अलावे नृत्य संगीत और कविता पाठ की भव्य प्रस्तुति दी।

विद्यालय के डायरेक्टर धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि कार्यक्रम का सफलतापूर्वक संपन्न कराने में शिक्षकों का बहुत बड़ा योगदान है। जिसमें प्रमुख रूप से चेयरमैन ललन सिंह, प्रिंसिपल गायत्री कुमारी, शिक्षक दीपक पटेल, राहुल पांडे, प्रियंका कुमारी, प्रिया कुमारी, अमृता कुमारी, रूचि कुमारी का योगदान सराहनीय रहा।

इस दौरान मौके पर समाजसेवी पंकज कुमार, अनिल कुमार सिंह, राम आशीष यादव, शंकर पासवान, रामप्रवेश सिंह, मुन्ना कुमार, सिक्कू कुमार, अवधेश सिंह, अरविंद कुमार, वीरेंद्र कुमार, सुनील कुमार सुमन आदि मौजूद रहे।

कार्यक्रम का समापन रामनारायण सिंह और रामप्रवेश सिंह ने किया।

औरंगाबाद से धीरेन्द्र पाण्डेय