भाजपा महात्मा गांधी के विचारों से घबराकर उनके नाम को इतिहास से मिटाने का कर रही प्रयास : प्रदेश अध्यक्ष
औरंगाबाद। शहर के होटल डायमंड में शनिवार को जिला कांग्रेस कमेटी ने मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत प्रेस वार्ता आयोजित की गई। प्रेस वार्ता में बिहार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार शामिल हुए। प्रेस में प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि नरेंद्र मोदी की सरकार मनरेगा को कमजोर करने और गरीब मजदूरों के अधिकारों से खिलवाड़ कर रही है। कहा कि लोकसभा के पिछले सत्र की समाप्ति के बाद जिस तरह से बिना व्यापक चर्चा के एक विधेयक लाकर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का नाम बदलकर भीबी-जी-आरएम जी कर दिया गया, वह मजदूर विरोधी और गरीब विरोधी कदम है। कहा कि मनरेगा का नाम बदलने के पीछे भाजपा ने एक तीर से तीन शिकार करने की कोशिश की है। पहला महात्मा गांधी के नाम और उनकी विचारधारा को योजनाबद्ध तरीके से हटाने का प्रयास किया गया है। बताया कि गांधी जी सत्य और अहिसा के मार्ग पर चलकर देश को आज़ादी दिलाने वाले महापुरुष थे और आज भी पूरा देश उनके विचारों से प्रेरणा लेता है। भाजपा गांधी के विचारों से घबराकर उनके नाम को इतिहास से मिटाना चाहती है। दूसरा, उन्होंने आरोप लगाया कि इसके पीछे आरएसएस और गोडसेवादी विचारधारा को बढ़ावा देने की मंशा है। तीसरा और सबसे गंभीर पहलू यह है कि इस नए कानून के तहत सरकार ने खुद को यह अधिकार दे दिया है कि वह जब चाहे इस योजना को बंद कर सकती है। कहा कि मनरेगा योजना पूर्व प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिह के कार्यकाल में और सोनिया गांधी के नेतृत्व में लाई गई थी, जिसका उद्देश्य उन गरीब ग्रामीण परिवारों को न्यूनतम आर्थिक सुरक्षा देना था, जिनके पास न रहने का ठिकाना था और न ही नियमित आय का कोई साधन। यह योजना केवल रोजगार नहीं, बल्कि गरीबों की गरिमा और सम्मान से जुड़ी हुई थी। कहा कि भाजपा यह तर्क दे रही है कि नई योजना में 1०० दिन के बजाय 125 दिन की रोजगार गारंटी दी जा रही है लेकिन असल सच्चाई यह है कि नए अधिनियम में राज्य सरकारों के अधिकार लगभग समाप्त कर दिए गए हैं। योजना को मिशन का रूप देकर यह स्पष्ट संकेत दिया गया है कि यह स्थायी अधिकार नहीं, बल्कि अस्थायी अभियान की तरह चलाई जाएगी, जिसे सरकार अपनी सुविधा के अनुसार कभी भी समाप्त कर सकती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पहले मनरेगा के तहत जल संरक्षण, ग्रामीण सड़क, तालाब और अन्य ग्रामीण विकास से जुड़े कार्य होते थे, लेकिन अब नई व्यवस्था में पक्का निर्माण और शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने की तैयारी है। इससे यह साफ हो जाता है कि यह योजना अब शुद्ध रूप से ग्रामीण रोजगार के लिए नहीं रह गई है। बताया कि मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत बिहार में चरणबद्ध आंदोलन चलाया जाएगा। इसकी शुरुआत पहले ही आठ जनवरी को बेगूसराय और मधुबनी से हो चुकी है। 1० जनवरी से 25 फरवरी तक पूरे राज्य में आंदोलन जारी रहेगा।
11 जनवरी को भूख हड़ताल और प्रतीकात्मक विरोध होगा। औरंगाबाद में अनुग्रह स्मारक के समीप कांग्रेसी नेता और कार्यकताã जिला भूख हड़ताल में शामिल होंगे। 12 से 29 जनवरी तक पंचायत स्तर पर जनसंपर्क अभियान चलेगा। 3० जनवरी को वार्ड स्तरीय शांति मार्च, 31 जनवरी से 6 फरवरी तक जिला स्तरीय धरना, 7 से 15 फरवरी तक विधानसभा घेराव और 16 से 25 फरवरी तक एआईसीसी स्तर की रैलियां आयोजित की जाएंगी। वहीं औरंगाबाद के पूर्व विधायक आनंद शंकर सिह ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि योजना में बदलाव करना अलग बात है परंतु महात्मा गांधी के नाम पर चलने वाली योजना का नाम बदलना उनके अपमान के समान है। कांग्रेस कार्यकताã इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे और हर स्तर पर आंदोलन करेंगे।
प्रदेश अध्यक्ष ने जिले में धान अधिप्राप्ति की स्थिति पर भी चिता जताई और कहा कि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ नहीं मिल पा रहा है। सरकार केवल किसानों के हित में काम करने का ढिढोरा पीट रही है। इस मौके पर कार्यकारी जिलाध्यक्ष महेंद्र यादव, पूर्व जिलाध्यक्ष मृत्युंजय सिह, जिला प्रभारी सत्येंद्र शर्मा, शैलेंद्र दुबे, जिला परिषद सदस्य सुरेंद्र यादव, लुटूर सिह, धर्मेंद्र पासवान, भीम सिह चौहान, सूरज राय, अजय राम गायत्री देवी सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस के नेता व कार्यकताã मौजूद रहे।






Jan 10 2026, 19:00
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