देश का रोल मॉडल बना यूपी का सोलर मॉडल, बिहार–असम सहित कई राज्य ले रहे प्रशिक्षण


लखनऊ। उत्तर प्रदेश ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए देशभर के लिए एक अनुकरणीय मॉडल प्रस्तुत किया है। प्रधानमंत्री पीएम सूर्य घर योजना के अंतर्गत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश ने रूफटॉप सोलर को जनआंदोलन का रूप दे दिया है। यूपी का सोलर मॉडल अब देश के अन्य राज्यों के लिए रोल मॉडल बन चुका है।

बिहार और असम की मांग पर उत्तर प्रदेश के सोलर विशेषज्ञ वहां जाकर यूपी के सोलर मॉडल की कार्यप्रणाली की जानकारी दे रहे हैं। इसके साथ ही कई अन्य राज्यों ने भी इस मॉडल का अध्ययन करने की इच्छा जताई है। उत्तर प्रदेश नवीन एवं अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (यूपीनेडा) के एमडी एवं निदेशक इंद्रजीत सिंह के अनुसार, यूपी का मॉडल अब पूरे देश में एक सफल केस-स्टडी के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।

*ऊर्जा स्वावलंबन की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि*


प्रदेश में अब तक रूफटॉप सोलर संयंत्र के लिए 10.43 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 3.34 लाख से ज्यादा घरों पर सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। इससे 1,148.56 मेगावॉट सोलर क्षमता विकसित हुई है। केंद्र सरकार ने 2,285.46 करोड़ रुपये और राज्य सरकार ने लगभग 600 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सब्सिडी डीबीटी के माध्यम से लाभार्थियों को दी है।

*एक दिन में 1,868 इंस्टॉलेशन, विश्व रिकॉर्ड*


दिसंबर 2025 में यूपी ने एक ही दिन में 1,868 रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन कर विश्व रिकॉर्ड बनाया। पूरे महीने में 31,165 इंस्टॉलेशन के साथ प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर रहा। घने कोहरे, कड़ाके की ठंड और सीमित कार्य समय जैसी चुनौतियों के बावजूद यह उपलब्धि दर्ज की गई।

*188 करोड़ यूनिट स्वच्छ बिजली, 1,225 करोड़ की बचत*


स्थापित सोलर क्षमता से हर वर्ष 188 करोड़ यूनिट से अधिक स्वच्छ बिजली का उत्पादन हो रहा है। इससे 30–35 लाख शहरी परिवारों की बिजली जरूरतें पूरी हो रही हैं। उपभोक्ताओं को सालाना करीब 1,225 करोड़ रुपये की सामूहिक बचत हो रही है।

*रोजगार और हरित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा*


रूफटॉप सोलर परियोजनाओं से 1.25 लाख से अधिक प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित हुए हैं। साथ ही सोलर से जुड़े उद्योगों को भी नई गति मिली है। विशेषज्ञों के अनुसार, सोलर सब्सिडी पर खर्च किया गया प्रत्येक एक रुपया ढाई से तीन रुपये तक की आर्थिक गतिविधि पैदा कर रहा है।

*पर्यावरण संरक्षण में बड़ी भूमिका*


सोलर ऊर्जा से हर साल लगभग 16.5 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आ रही है, जो करोड़ों पेड़ लगाने के बराबर है। इससे उत्तर प्रदेश के नेट-जीरो लक्ष्य और जलवायु प्रतिबद्धताओं को मजबूती मिली है। उत्तर प्रदेश का सोलर मॉडल आज न केवल ऊर्जा उत्पादन का माध्यम है, बल्कि आत्मनिर्भरता, रोजगार, आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण का सशक्त उदाहरण बनकर पूरे देश को दिशा दे रहा है।
इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 पर बवाल, नया ड्राफ्ट सार्वजनिक करने की मांग

जल्दबाजी में बिल पारित हुआ तो देशव्यापी हड़ताल, 27 लाख बिजली कर्मियों के आंदोलन की चेतावनी

लखनऊ। इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 को लेकर पावर सेक्टर में विरोध तेज हो गया है। ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने संसद की ऊर्जा मामलों की स्टैंडिंग कमेटी द्वारा प्रस्तावित नए ड्राफ्ट को सार्वजनिक करने की मांग की है। फेडरेशन ने चेतावनी दी है कि यदि बिजली क्षेत्र के निजीकरण के उद्देश्य से इस संशोधन बिल को जल्दबाजी में संसद से पारित कराने की कोशिश की गई तो देशभर के 27 लाख बिजली कर्मचारी और इंजीनियर राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर जाने को मजबूर होंगे।

31 मार्च 2026 तक का समय देने की भी मांग की

ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने केंद्रीय विद्युत सचिव पंकज अग्रवाल को पत्र भेजकर मांग की है कि इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 पर स्टेकहोल्डर्स से चर्चा से पहले संसद की ऊर्जा मामलों की स्टैंडिंग कमेटी द्वारा सुझाए गए नए ड्राफ्ट की प्रति सभी संबंधित पक्षों को उपलब्ध कराई जाए। साथ ही उन्होंने स्टैंडिंग कमेटी के माननीय सदस्यों की सूची सार्वजनिक करने और नए ड्राफ्ट पर कमेंट देने के लिए कम से कम 31 मार्च 2026 तक का समय देने की भी मांग की है।
बिजली मंत्रियों के साथ बैठक करने जा रहे केंद्रीय विद्युत मंत्री
फेडरेशन के अनुसार, संसद की ऊर्जा मामलों की स्टैंडिंग कमेटी ने 9 अक्टूबर 2025 को विद्युत मंत्रालय द्वारा जारी इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 पर अपनी टिप्पणी देते हुए एक नया ड्राफ्ट प्रस्तावित किया है। इसी प्रस्तावित ड्राफ्ट के आधार पर केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर आगामी 22 और 23 जनवरी को देशभर के राज्यों के बिजली मंत्रियों के साथ बैठक करने जा रहे हैं।शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि इस बैठक का मुख्य एजेंडा स्टैंडिंग कमेटी द्वारा सुझाए गए ड्राफ्ट के अनुरूप इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 पर आम सहमति बनाना है। साथ ही बिजली के निजीकरण, फ्रेंचाइजी मॉडल और निजीकरण के लिए सशर्त वित्तीय पैकेज जैसे मुद्दों पर भी सहमति बनाने की कोशिश की जा रही है, ताकि बजट सत्र में इस बिल को संसद से पारित कराया जा सके।
किसी भी स्थिति में पावर सेक्टर का निजीकरण स्वीकार नहीं
फेडरेशन ने स्पष्ट किया है कि बिजली इंजीनियरों और कर्मचारियों को किसी भी स्थिति में पावर सेक्टर का निजीकरण स्वीकार नहीं है। संगठन का कहना है कि यह बेहद चिंताजनक है कि एक ओर विद्युत मंत्रालय स्टेकहोल्डर्स से पुराने मसौदे पर चर्चा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर राज्यों के बिजली मंत्रियों से स्टैंडिंग कमेटी द्वारा सुझाए गए नए ड्राफ्ट पर बातचीत की जा रही है, जबकि यह नया ड्राफ्ट सार्वजनिक ही नहीं किया गया है।उन्होंने सवाल उठाया कि जब नया ड्राफ्ट ही सार्वजनिक नहीं किया गया है, तो उस पर आम सहमति कैसे बनाई जा सकती है। फेडरेशन ने इसे पारदर्शिता के खिलाफ बताते हुए कड़ा विरोध जताया है।
निजीकरण के विरोध में चल रहा आंदोलन लगातार 410वें दिन भी जारी
शैलेन्द्र दुबे ने यह भी कहा कि 12 जनवरी को केंद्रीय विद्युत सचिव के साथ होने वाली वार्ता के बाद नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स की कोर कमेटी निजीकरण और इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 के विरोध में संघर्ष की आगे की रणनीति का ऐलान करेगी।उधर, उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में चल रहा आंदोलन लगातार 410वें दिन में प्रवेश कर चुका है। इस अवसर पर अवकाश के दिन भी बिजली कर्मचारियों ने उपभोक्ताओं, किसानों और बिजली कर्मियों के बीच व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाकर निजीकरण के खिलाफ जन आंदोलन को और तेज करने का प्रयास किया।
कन्नौज जेल से दो बंदियों के फरार होने पर बड़ी कार्रवाई, जेल अधीक्षक मुख्यालय से संबद्ध
लखनऊ/ कन्नौज। कन्नौज जिला जेल से दो बंदियों के फरार होने के मामले में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। प्राथमिक जांच में जेल अधीक्षक भीमसेन मुकुंद को नियमों की अनदेखी और गंभीर लापरवाही का दोषी पाया गया है। जांच के बाद उन्हें कन्नौज जेल से हटाकर जेल मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है।

बताया गया कि 5 जनवरी की सुबह बंदी अंकित और शिवा ने कंबल की रस्सी बनाकर जेल की दीवार फांद ली और फरार हो गए। घटना सामने आते ही जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया और उच्च स्तर पर जांच शुरू की गई।

इस प्रकरण में जेलर विनय प्रताप सिंह, डिप्टी जेलर बद्री प्रसाद, बैरक प्रभारी शिवेंद्र यादव, हेड जेल वार्डर शिवचरन तथा वार्डर अतुल मिश्रा को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। जेल अधीक्षक की भूमिका की जांच डीआईजी जेल प्रदीप गुप्ता द्वारा की गई, जिसमें सामने आया कि अधीक्षक को जेल की सुरक्षा संबंधी खामियों की पूर्व जानकारी थी। इसके बावजूद न तो सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त कराया गया और न ही उच्चाधिकारियों को इसकी सूचना दी गई।

नियमों की अनदेखी उजागर
सूत्रों के अनुसार नए साल के अवसर पर जेल परिसर में देर रात तक पार्टी चली, जिसमें नियम-कानूनों की अनदेखी की गई। इसके अलावा जेल का सिक्योरिटी ऑडिट भी नहीं कराया गया था। घटना के समय ड्यूटी पर तैनात जिम्मेदार अधिकारी अनुपस्थित पाए गए और उनकी निगरानी के लिए भी कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं थी।

डीजी जेल पीसी मीना ने बताया कि जेल अधीक्षक को तत्काल प्रभाव से मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। मामले की विस्तृत जांच डीआईजी कानपुर परिक्षेत्र को सौंपी गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
निर्माण श्रमिकों के लिए मोबाइल हेल्थ यूनिट से निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण अभियान जारी

* लखनऊ में अब तक 892 श्रमिकों का स्वास्थ्य परीक्षण, 26 जनवरी तक चलेगा अभियान

लखनऊ। उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के अंतर्गत पंजीकृत एवं अद्यतन नवीनीकृत निर्माण श्रमिकों के कल्याण के लिए मोबाइल हेल्थ यूनिट के माध्यम से निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का शुभारंभ 23 दिसंबर 2025 को श्रम एवं सेवायोजन तथा समन्वय विभाग के मंत्री के करकमलों से किया गया था।

कार्यक्रम के अंतर्गत जनपद लखनऊ के विभिन्न निर्माण स्थलों—शालीमार वन वर्ल्ड, ओमैक्स ग्रांड, शालीमार गैलेन्ट, अमौसी एयरपोर्ट, एल्डिको आई.आई.एम. रोड सहित अन्य स्थलों पर कार्यरत निर्माण श्रमिकों का पंजीकरण, बोर्ड द्वारा संचालित कल्याणकारी योजनाओं का प्रचार-प्रसार तथा निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है। स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान कुल 45 मापदंडों पर श्रमिकों की जांच की जा रही है।

अब तक जनपद लखनऊ में कुल 892 निर्माण श्रमिकों का निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण किया जा चुका है। श्रमिकों के स्वास्थ्य संरक्षण और जागरूकता को ध्यान में रखते हुए यह कार्यक्रम 26 जनवरी 2026 तक संचालित रहेगा।

इसी क्रम में शनिवार, 10 जनवरी 2026 को गोमती नगर विस्तार स्थित शालीमार वन वर्ल्ड में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में अपर श्रमायुक्त, लखनऊ क्षेत्र श्रीमती कल्पना श्रीवास्तव, शालीमार वन वर्ल्ड के पदाधिकारी तथा श्रम प्रवर्तन अधिकारी संतोष कुमार उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान श्रमिकों को स्वास्थ्य परीक्षण के साथ-साथ उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की विस्तृत जानकारी भी दी गई, ताकि अधिक से अधिक श्रमिक इन योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकें।
ग्रामीण भारत के सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम: जौनपुर में मंत्री ए.के. शर्मा की प्रेस वार्ता

* रोजगार की गारंटी 125 दिन, बेरोजगारी भत्ता बना कानूनी अधिकार, ग्राम सभा तय करेगी विकास कार्य

लखनऊ/जौनपुर। नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री तथा जनपद जौनपुर के प्रभारी मंत्री ए.के. शर्मा ने कलेक्ट्रेट सभागार, जौनपुर में विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) — विकसित भारत जी-राम-जी अधिनियम के संबंध में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित किया। उन्होंने इस अधिनियम को ग्रामीण भारत के सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक और दूरगामी कदम बताया।

मंत्री श्री शर्मा ने कहा कि इस नए अधिनियम के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की गारंटी को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। यह निर्णय ग्रामीण मेहनतकश वर्ग, किसानों और श्रमिक परिवारों की आय बढ़ाने, पलायन रोकने तथा स्थायी आजीविका सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने इसे ग्रामीण समाज के प्रति सरकार की संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता का प्रमाण बताया।

प्रेस वार्ता में उन्होंने बताया कि विकसित भारत जी-राम-जी अधिनियम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि बेरोजगारी भत्ता अब एक वास्तविक और प्रभावी कानूनी अधिकार बन गया है। पूर्व में महात्मा गांधी नरेगा अधिनियम के तहत अनेक शर्तों के कारण बेरोजगारी भत्ता मिल पाना कठिन था, जबकि नए अधिनियम में अनावश्यक प्रतिबंध समाप्त कर दिए गए हैं। अब श्रमिक द्वारा कार्य की मांग किए जाने पर समय से रोजगार न मिलने की स्थिति में बेरोजगारी भत्ता स्वतः देय होगा।

मंत्री श्री शर्मा ने कहा कि मजदूरी भुगतान व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी और समयबद्ध बनाया गया है। यदि मजदूरी भुगतान में किसी भी कारण से देरी होती है, तो प्रत्येक विलंबित दिन का मुआवजा श्रमिक को मजदूरी के साथ दिया जाएगा। इससे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा और श्रमिकों को उनके परिश्रम का पूरा लाभ समय पर मिल सकेगा।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अब विकास कार्यों की योजना ग्राम स्तर पर ही तय की जाएगी। ग्राम सभा के माध्यम से ग्राम पंचायत विकसित ग्राम पंचायत योजना तैयार करेगी, जिसमें ग्रामीणों की सक्रिय सहभागिता अनिवार्य होगी। कोई भी योजना ऊपर से थोपे जाने के बजाय स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार बनाई जाएगी, जिससे गांवों का समग्र और संतुलित विकास सुनिश्चित हो सकेगा।

मंत्री ए.के. शर्मा ने कहा कि विकसित भारत जी-राम-जी अधिनियम ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाने, रोजगार के अवसर बढ़ाने और सामाजिक-आर्थिक मजबूती प्रदान करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

इस अवसर पर राज्यसभा सदस्य श्रीमती सीमा द्विवेदी, खेल राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गिरीश चंद्र यादव, विधायक शाहगंज रमेश सिंह, विधान परिषद सदस्य बृजेश सिंह प्रिंसू, जिलाध्यक्ष अजीत प्रजापति, मुख्य विकास अधिकारी सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारीगण उपस्थित रहे।
हज 2026 की तैयारियों का जायजा लेने सऊदी अरब रवाना हुए यूपी के राज्यमंत्री दानिश आजाद अंसारी
लखनऊ। हज 2026 के लिए हज यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से भारत सरकार के अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल का गठन किया है। यह प्रतिनिधिमंडल सऊदी अरब जाकर हज यात्रा से जुड़ी विभिन्न व्यवस्थाओं का निरीक्षण करेगा और आवश्यक निर्णय लेगा।

भारत सरकार द्वारा गठित इस प्रतिनिधिमंडल के चेयरपर्सन उत्तर प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री (अल्पसंख्यक कल्याण, मुस्लिम वक्फ एवं हज) दानिश आज़ाद अंसारी को बनाया गया है। श्री अंसारी 10 जनवरी 2026 को इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, नई दिल्ली से सऊदी अरब के लिए प्रस्थान करेंगे।

प्रतिनिधिमंडल में दिल्ली राज्य हज समिति के कार्यपालक अधिकारी, बिहार राज्य हज समिति के कार्यपालक अधिकारी तथा हज कमेटी ऑफ इंडिया के उप कार्यपालक अधिकारी भी शामिल हैं। यह दल एक सप्ताह तक सऊदी अरब में रहकर हज 2026 के दौरान हज यात्रियों के ठहरने, परिवहन, खानपान और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी व्यवस्थाओं का गहन निरीक्षण करेगा।

प्रतिनिधिमंडल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हज 2026 के दौरान भारतीय हज यात्रियों को अधिकतम सहूलियत मिले और वे पूरी यात्रा को सहज, सुरक्षित और सुविधाजनक रूप से संपन्न कर सकें।
बुद्ध थीम पार्क से कौशांबी की ऐतिहासिक पहचान को मिलेगा वैश्विक विस्तार : जयवीर सिंह

* 22.93 करोड़ रुपए की लागत से 11 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित हो रहा थीम पार्क

लखनऊ। कौशांबी की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक पहचान को नई ऊंचाई देने के लिए उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग महत्वाकांक्षी परियोजना को मूर्त रूप दे रहा है। कोसम इनाम गांव में निर्माणाधीन बुद्ध थीम पार्क को तेजी से विकसित किया जा रहा है, जहां भगवान बुद्ध के जीवन दर्शन और करुणा संदेश को कलात्मक मूर्तियों के माध्यम से दर्शाया जाएगा। यह थीम पार्क करीब 11 हेक्टेयर क्षेत्र में 22.93 करोड़ रुपए की लागत से आकार ले रहा है, जिसे मौजूदा वर्ष के अंत तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित है। यह जानकारी उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने दी। मंत्री ने बताया कि सरकार की परिकल्पना के अनुसार यह पार्क देश-विदेश से आने वाले बौद्ध अनुयायियों और पर्यटकों के लिए एक विशिष्ट आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। यह परियोजना न केवल कौशांबी को वैश्विक बौद्ध पर्यटन सर्किट में सशक्त स्थान दिलाएगी, बल्कि क्षेत्रीय पर्यटन, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी। कौशांबी में निर्माणाधीन बुद्ध थीम पार्क को तेलंगाना के नागार्जुन सागर स्थित बुद्धवनम की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है। इस थीम पार्क में ध्यान एवं सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़ी अनेक सुविधाएं प्रस्तावित हैं। पार्क में विभिन्न मुद्राओं जैसे- धर्मचक्र मुद्रा, अभय मुद्रा, भूमिस्पर्श मुद्रा आदि पर आधारित एक ध्यान केंद्र स्थापित किया जाएगा। परियोजना का प्रमुख आकर्षण बुद्धचरित वनम होगा, जिसमें भगवान बुद्ध की जीवन यात्रा (जन्म से महापरिनिर्वाण तक) को मूर्तियों के माध्यम से दर्शाया जाएगा। इसके अलावा, विकसित की जा रही जातक म्यूरल गैलरी, ध्यान वनम और स्तूप गैलरी जैसे विशिष्ट जोन आगंतुकों को भगवान बुद्ध के जीवन-दर्शन से आत्मिक रूप से जोड़ेंगे। विशेष रूप से स्तूप गैलरी में श्रीलंका, थाईलैंड, दक्षिण कोरिया, म्यांमार, नेपाल, तिब्बत, अफगानिस्तान और पाकिस्तान सहित विभिन्न देशों के 13 प्रतिष्ठित स्तूपों की प्रतिकृतियों के साथ-साथ महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के प्रमुख बौद्ध स्थलों को समावेश किया जाएगा, जिससे यह परिसर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक समग्र सांस्कृतिक - आध्यात्मिक केंद्र के रूप में अपनी पहचान स्थापित करेगा। प्रमुख सचिव पर्यटन एवं संस्कृति अमृत अभिजात ने बताया कि कौशांबी का बुद्ध थीम पार्क विरासत संरक्षण और उच्च गुणवत्ता वाले पर्यटन अधोसंरचना के समन्वय का एक सशक्त माध्यम है। भगवान बुद्ध से कौशांबी का गहरा संबंध रहा है, जो इसे अंतरराष्ट्रीय महत्व का स्थल बनाता है। हमारा प्रयास है कि दुनियाभर के आगंतुकों को आधुनिक सुविधाओं के साथ बेहतर पर्यटन अनुभव प्राप्त हो।
लखनऊ से ग्रीन क्रांति की शुरुआत! सीएम योगी और रक्षा मंत्री ने खोला अशोक लीलैंड का ई-व्हीकल प्लांट, यूपी बना निवेशकों की पहली पसंद
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में औद्योगिक विकास को नई गति देते हुए अशोक लीलैंड के इलेक्ट्रिक वाहन मैन्युफैक्चरिंग प्लांट का भव्य शुभारंभ किया गया। इस अत्याधुनिक प्लांट का उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय रक्षा मंत्री ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम में केंद्रीय भारी उद्योग एवं सार्वजनिक उपक्रम मंत्री एचडी कुमारस्वामी भी विशेष रूप से मौजूद रहे।

सरोजनी नगर क्षेत्र में लगभग 70 एकड़ क्षेत्रफल में स्थापित किया गया

उद्घाटन के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्लांट का निरीक्षण किया और ई-बस में यात्रा कर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के अनुभव को करीब से देखा। यह प्लांट लखनऊ के सरोजनी नगर क्षेत्र में लगभग 70 एकड़ क्षेत्रफल में स्थापित किया गया है, जहां भविष्य में ई-बस, ई-ट्रैवलर और ई-लोडिंग व्हीकल का निर्माण किया जाएगा।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह अवसर उत्तर प्रदेश के औद्योगिक इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने इस निवेश के लिए हिंदुजा समूह को बधाई देते हुए कहा कि बीते आठ वर्षों में प्रदेश में जो सकारात्मक बदलाव हुए हैं, यह परियोजना उसी का प्रमाण है।

संभावनाओं को धरातल पर उतारने वाला राज्य बन चुका यूपी

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब उत्तर प्रदेश केवल संभावनाओं का प्रदेश नहीं रहा, बल्कि संभावनाओं को धरातल पर उतारने वाला राज्य बन चुका है। प्रदेश के हर जिले में निवेश पहुंच रहा है और यही कारण है कि आज यूपी देश ही नहीं बल्कि वैश्विक निवेशकों की पहली पसंद बन रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य को अब तक करीब 45 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं।इन्फ्रास्ट्रक्चर पर जोर देते हुए सीएम योगी ने कहा कि बीते वर्षों में सड़क, एक्सप्रेसवे और रेल नेटवर्क में ऐतिहासिक कार्य हुआ है। आज देश के 55 प्रतिशत एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश में हैं, रैपिड रेल परियोजनाओं पर काम चल रहा है और प्रदेश में 18 हजार से अधिक स्टार्टअप सक्रिय हैं।

इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की दिशा में बड़ा कदम

वहीं, केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने कहा कि यह प्लांट केवल उत्तर प्रदेश के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए आत्मनिर्भर भारत और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से कार्बन उत्सर्जन कम करने और पर्यावरण संरक्षण के राष्ट्रीय लक्ष्य को मजबूती मिलेगी।इस प्लांट के शुरू होने से न सिर्फ रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि उत्तर प्रदेश ग्रीन इंडस्ट्रियल हब के रूप में भी तेजी से अपनी पहचान मजबूत करेगा।

प्रदेश के औद्योगीकरण की दिशा में मील का पत्थर : रक्षामंत्री

इस मौके पर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रशंसा करते हुए कहा कि योगी जी जिस तरह से यूपी को चला रहे हैं। उससे सहज ही प्रदेश की रेटिंग एक्सीलेंट कही जा सकती है। अशोक लीलैंड कंपनी की इस ईवी फैक्टरी का उद्धाटन प्रदेश के औद्योगीकरण की दिशा में मील का पत्थर है। उन्होंने कहा कि मैं लखनऊ से सांसद हूं पर अगर मैं लखनऊ का न भी होता तो भी यह शहर मुझे उतना ही प्रिय होता जितना कि आज है । पहले जिस यूपी को खराब कानून व्यवस्था और दंगों से जोड़कर देखा जाता था वो अब निवेश के क्षेत्र में अपनी जगह बना रहा है। यह बहुत बड़ी बात है। प्रदेश में निवेश होने से यहां के युवाओं को प्रदेश में ही रोजगार मिल सकेगा।
ग्राम चौपालों में ‘विकसित भारत–'जी राम जी’ अधिनियम का व्यापक प्रचार हो: केशव प्रसाद मौर्य

* ग्रामीण विकास कार्यों में तेजी, गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के निर्देश
गांवों के सर्वांगीण विकास को मिलेगी नई रफ्तार


लखनऊ। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने ग्रामीण क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास को सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए ग्राम्य विकास विभाग के अधिकारियों को विकास कार्यों को समयबद्ध, गुणवत्ता पूर्ण एवं पारदर्शी ढंग से पूर्ण कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या शिथिलता क्षम्य नहीं होगी।

गुरुवार को अपने कैंप कार्यालय, 7 कालिदास मार्ग पर आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में उप मुख्यमंत्री ने ग्राम्य विकास विभाग के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि प्रत्येक शुक्रवार को प्रत्येक विकास खण्ड की दो ग्राम पंचायतों में आयोजित होने वाली ग्राम चौपालों को वृहद एवं व्यवस्थित रूप से आयोजित किया जाए तथा ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान गांव में ही सुनिश्चित किया जाए। साथ ही ग्राम चौपालों में “विकसित भारत–जी राम जी” अधिनियम के बारे में लोगों को विस्तार से जानकारी दी जाए और इसके पंपलेट वितरित किए जाएं। समूहों की सक्रिय सहभागिता भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पारित ‘विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एण्ड आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम–2025’ ग्रामीण विकास की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होगा। इस अधिनियम के अंतर्गत रोजगार की गारंटी 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन की गई है तथा श्रमिकों के पारिश्रमिक भुगतान को सरल और पारदर्शी बनाया गया है। उन्होंने बताया कि बुआई एवं कटाई के समय राज्यों को 60 दिन तक कार्य विराम का अधिकार भी दिया गया है।

उप मुख्यमंत्री ने दीनदयाल उपाध्याय राज्य ग्राम्य विकास संस्थान के प्रशिक्षण कार्यों की समीक्षा करते हुए प्रशिक्षण क्षमता बढ़ाने, सभी चयनित प्रशिक्षणार्थियों को पूर्ण क्षमता के साथ प्रशिक्षण देने तथा बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य करने के निर्देश दिए। महिला सशक्तिकरण को प्राथमिकता बताते हुए उन्होंने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने हेतु आवश्यक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने पर बल दिया।

उन्होंने निर्माण कार्यों एवं पीएमजीएसवाई सड़कों में अनावश्यक विलंब करने वाले ठेकेदारों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई तथा अच्छा कार्य करने वालों के अभिनंदन के निर्देश दिए। साथ ही निष्क्रिय समूहों को सक्रिय करने, नए समूह बनाने और समूह सखियों को समय पर देय धनराशि उपलब्ध कराने पर जोर दिया।

बैठक में राज्य मंत्री ग्राम्य विकास श्रीमती विजयलक्ष्मी गौतम सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
माघ मेला 2026 में पर्यटकों की सुविधा के लिए चार पर्यटन सूचना केंद्र स्थापित

* पर्यटन सुविधाओं से माघ मेले को सुव्यवस्थित, सुरक्षित और यादगार बना रही है योगी सरकार: जयवीर सिंह


लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दूरदर्शी विजन और मार्गदर्शन में संगम नगरी प्रयागराज में माघ मेला 2026 का शुभारंभ 3 जनवरी से भव्य और दिव्य स्वरूप में हो चुका है। आस्था, सुविधा और सुव्यवस्था के संगम के रूप में विकसित हो रहा यह मेला धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन दृष्टि से नई पहचान बना रहा है। देश-विदेश से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए योगी सरकार द्वारा व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं।

इसी क्रम में उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा प्रयागराज के प्रमुख स्थलों पर चार अस्थायी पर्यटन सूचना केंद्र स्थापित किए गए हैं। इन सूचना केंद्रों के माध्यम से 3 जनवरी से अब तक लगभग 20 लाख से अधिक श्रद्धालु एवं पर्यटक लाभान्वित हो चुके हैं। इस वर्ष माघ मेले में 12 से 15 करोड़ श्रद्धालुओं के आगमन का अनुमान है। मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार श्रद्धालुओं को सही, सरल और सटीक जानकारी उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि इन सूचना केंद्रों पर हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में प्रयागराज के प्रमुख पर्यटन स्थलों से संबंधित पुस्तिकाएं, गाइड बुक, प्रशिक्षित टूरिस्ट गाइड की सूची तथा शहर भ्रमण से जुड़ी आवश्यक जानकारियां उपलब्ध कराई जा रही हैं। साथ ही पंजीकृत पेइंग गेस्ट हाउस, धर्मशाला एवं अन्य ठहरने के विकल्पों की जानकारी भी दी जा रही है।

उन्होंने बताया कि सूचना केंद्रों पर एलईडी स्क्रीन के माध्यम से मेला क्षेत्र, सुरक्षा व्यवस्था, स्वच्छता अभियान और प्रमुख पर्यटन स्थलों से जुड़े वीडियो प्रदर्शित किए जा रहे हैं। सेक्टर मैप के माध्यम से श्रद्धालुओं को विभिन्न सुविधाओं की जानकारी और पहुंच का मार्ग भी बताया जा रहा है।

ये चार अस्थायी पर्यटन सूचना केंद्र परेड ग्राउंड, नागवासुकी मंदिर, प्रयागराज छिवकी जंक्शन रेलवे स्टेशन और अरैल घाट के पास स्थापित किए गए हैं। यहां प्रयागराज के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों की पर्यटन पुस्तिकाएं भी उपलब्ध हैं।

प्रमुख सचिव पर्यटन एवं संस्कृति अमृति अभिजात ने कहा कि माघ मेला केवल आस्था का पर्व नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन क्षमता को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करने का सशक्त माध्यम है। योगी सरकार की प्राथमिकता है कि हर श्रद्धालु को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सुगम अनुभव प्राप्त हो।

गौरतलब है कि वर्ष 2025 में आयोजित दिव्य, भव्य और स्वच्छ कुंभ को यूनेस्को द्वारा ‘मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत’ के रूप में मान्यता मिली थी। उसी क्रम में माघ मेला 2026 भी योगी सरकार की कुशल व्यवस्थाओं और सुव्यवस्था का सशक्त उदाहरण बनता नजर आ रहा है।